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  • वोट बैंक के लिए समाज बांटने वालों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती माफिया के सामने: सीएम योगी

    वोट बैंक के लिए समाज बांटने वालों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती माफिया के सामने: सीएम योगी

    वाराणसी

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक के लिए समाज को जातीय आधार पर बांटने और विभाजन की राजनीति करने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब दुर्दान्त माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई की बात आती है तो इनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। वे मौन हो जाते हैं। भले ही उनके अपने परिवार का नुकसान हुआ हो, वे माफिया के सामने गिड़गिड़ाते हुए ही दिखाई दिए। लेकिन, डबल इंजन की सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा। खासकर बेटियों व महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। बेटी की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं। जब महिला बिना डर घर से निकलेगी, तभी वह स्कूल, कॉलेज, नौकरी, कारोबार और सामाजिक जीवन में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी के पिंडरा विधानसभा में कामकाजी महिला सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आधी आबादी के सम्मान और उसकी सामर्थ्य का अहसास कराने वाला है। महिलाओं की भागीदारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    2017 से पहले सुरक्षा की चिंता, अब सपनों की उड़ान

    सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले बेटी को स्कूल भेजना हो तो परिवार को उसकी सुरक्षा की चिंता होती थी। घर में शौचालय न हो तो बेटी, बहन और मां के सम्मान की चिंता रहती थी। रसोई में धुआं हो तो स्वास्थ्य की चिंता, इलाज कराना हो तो पैसे की चिंता और घर चलाना हो तो आमदनी की चिंता  होती थी। महिला घर से बाहर निकलकर कुछ करना चाहती थी तो उसके सामने रास्ते, कनेक्टिविटी, अवसर और उस अवसर तक पहुंचने की कीमत का सवाल खड़ा होता था। जब परिवार को सुरक्षा का भरोसा नहीं होता है तो सबसे पहले बेटी के सपनों पर रोक लगती है। भाजपा सरकार ने तय किया कि बेटी को पढ़ाना है, बढ़ाना है और सुरक्षा की चिंता भी समाप्त करनी है। हमने पहले डर हटाया, फिर बेटी को पढ़ाया,  हुनर दिया और उसे रोजगार से जोड़ा। पहले सवाल था कि बेटी घर से बाहर कैसे निकलेगी, आज सवाल यह है कि उसे जाना कहां तक है। अब कोई बेटी केवल इसलिए अपने सपनों को नहीं छोड़ेगी कि वह गरीब परिवार में पैदा हुई है। कोई महिला केवल पूंजी के अभाव में पीछे नहीं रहेगी और कोई परिवार अवसर के अभाव में विकास से दूर नहीं रहेगा। बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा कोई तीसरा रास्ता नहीं है। हमारी सरकार माफिया के सामने नहीं झुकती। महिलाओं की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

    महिला पुलिसकर्मियों की संख्या होगी 50 हजार के पार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ाई गई है। 2017 में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं। आज यह संख्या 44 हजार हो गई है और नई भर्ती के बाद यह 50 हजार से अधिक हो जाएगी। मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती और इंटीग्रेटेड महिला बीट सिस्टम लागू किया गया है। 1090 और 181 जैसी व्यवस्थाओं को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ा गया है। पीएसी में तीन महिला बटालियन भी स्थापित हो रही हैं। इन्हें वीरांगना अवंती बाई लोधी, वीरांगना ऊदा देवी पासी और वीरांगना झलकारी बाई के नाम से जाना जाएगा।

    महिला के लिए सड़क सपनों तक पहुंचने का माध्यम

    सीएम योगी ने कहा कि बेटी-बहन के लिए रास्ते का अर्थ केवल सड़क नहीं है। स्कूल, अस्पताल, बाजार या कार्यस्थल तक पहुंचने के रास्ते उनके सपनों की मंजिल तक जाने के मार्ग हैं। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में हाईवे से एयरपोर्ट और रेलवे से मेट्रो तक कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार हुआ है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक जैसी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं ने आवागमन को आसान बनाया है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्कूल-कॉलेज, बाजार, रोजगार और कार्यस्थल की दूरी कम होती है। इसका सबसे बड़ा लाभ महिलाओं व बेटियों को मिलता है। सड़क और परिवहन व्यवस्था केवल विकास का ढांचा नहीं, बल्कि महिलाओं के अवसरों तक पहुंचने का माध्यम भी है।

    जन्म से लेकर विवाह तक बेटियों के साथ सरकार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार ने बेटी के जीवन के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना इसी दिशा में प्रयास हैं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपये का पैकेज दिया जा रहा है। बेटी के विवाह योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से उसका विवाह कराया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के लोग इस योजना का मजाक उड़ाते थे और इसे बेटी का अपमान बताते थे। आज इसी योजना के तहत पांच लाख से अधिक बेटियों का विवाह संपन्न हो चुका है।

    50 हजार मेधावी बेटियों को जल्द स्कूटी

    सीएम ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है। पहले ये विद्यालय कक्षा छह से आठ तक संचालित होते थे, अब इन्हें 12वीं तक चलाने की दिशा में काम हो रहा है। अटल आवासीय विद्यालयों में बेटियों के लिए आधी सीटें रखी गई हैं। सैनिक स्कूलों में भी बेटियों के लिए अवसर बढ़ाए गए हैं। बेटियों व युवाओं को टैबलेट और स्मार्टफोन देने की योजना भी आगे बढ़ाई गई है। जल्द ही स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना से जोड़ने की तैयारी है।

    प्रोजेक्ट गंगा में चार हजार महिला डिजिटल उद्यमी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल शिक्षा व सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना भी उतना ही जरूरी है। सरकार स्किल डेवलपमेंट मिशन, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से बेटियों को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ रही है। ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत करीब आठ हजार न्याय पंचायतों में डिजिटल एंटरप्रेन्योर तैयार किए जाएंगे, जिनमें चार हजार महिला उद्यमी होंगी। ये महिलाएं गांवों में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।

    ग्रामीण महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के विजन के अनुरूप स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बीसी सखी जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर, काशी मिल्क प्रोड्यूसर, बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर जैसी पहलों से चार लाख से अधिक महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन का उदाहरण पेश कर रही हैं। ओडीओपी ने प्रदेश के परंपरागत उद्योगों को नई पहचान दी है। प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है। टेक्सटाइल व हथकरघा क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं काम कर रही हैं।

    महिला वर्कफोर्स 12 से बढ़कर 36 प्रतिशत

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी पहले करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि आधी आबादी को उसकी जनसंख्या के अनुपात में जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिनिधित्व मिले। उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप हैं और इनमें लगभग आधे स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। महिलाएं अब केवल रोजगार पाने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली भी बन रही हैं।

    हर क्षेत्र में प्रतिभा साबित कर रही महिलाएं

    सीएम योगी ने कहा कि महिलाएं स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, खेल और सेना सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उत्तर प्रदेश की सब-इंस्पेक्टर अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीता। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया अध्याय खुल जाएगा। इससे लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। महिला अब केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में बराबर की भागीदार है।

    मोदी जी ने काशी को दी वैश्विक पहचान

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने बाबा विश्वनाथ की पावन धरती काशी को वैश्विक पहचान दी है। 12 वर्षों में काशी में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं या तो चालू स्थिति में हैं या पूरी होने वाली हैं। काशी की माताओं, नौजवानों और कारीगरों ने इस दौरान नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और घरौनी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सम्मान व अधिकार मिला है। देश में करीब 3 करोड़ घरौनियां वितरित हुई हैं, इनमें 1 करोड़ से अधिक उत्तर प्रदेश में हैं। इन घरौनियों में महिलाओं को मालिकाना अधिकार दिया गया है। वैश्विक स्तर पर जब किसी राजनेता की चर्चा होती है तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है।

    लोकमाता के नाम पर निःशुल्क यात्रा की सुविधा

    सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में 1.10 करोड़ से अधिक वृद्धजनों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, इसे और बढ़ाने की तैयारी है। रक्षाबंधन पर 27, 28 व 29 अगस्त को बहनों-बेटियों व माताओं को परिवहन निगम व सिटी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक उम्र की माताओं को परिवहन निगम की बसों में लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    अवसर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता तक

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज ने सदियों से बेटी को परिवार की सबसे बड़ी पूंजी माना है। बड़ी जमीन, बड़ा कारोबार या बड़ी पूंजी न हो, लेकिन बेटी शिक्षित हो जाए तो पूरा परिवार स्वावलंबी बन सकता है। उन्होंने समारोह में पुष्पवर्षा के जरिए महिलाओं के सम्मान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल भाव है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता। जन्म से लेकर शिक्षा और फिर सुरक्षित, सक्षम व आत्मनिर्भर भविष्य तक महिलाओं को आगे बढ़ाना परिवार और समाज की प्राथमिकता रही है। सरकार भी इसी प्राथमिकता को अपनी नीतियों न योजनाओं के केंद्र में रखकर बढ़ रही है।

    कार्यक्रम का आयोजन विधायक डॉ. अवधेश सिंह ने किया। इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, महापौर अशोक तिवारी, सदस्य विधान परिषद राय धर्मेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, डॉ सुनील पटेल, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

  • 500 निःसंवर्गीय पदों पर होगी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, नियमित भर्ती तक अनुभवी डॉक्टर संभालेंगे मोर्चा

    500 निःसंवर्गीय पदों पर होगी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, नियमित भर्ती तक अनुभवी डॉक्टर संभालेंगे मोर्चा

    लखनऊ। प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने और आमजन को बेहतर एवं समयबद्ध चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने बड़ा जनहितकारी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और बढ़ती जनसंख्या तथा अस्पतालों में मरीजों के बढ़ते दबाव के बीच चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।

    उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। अस्पतालों के बाह्य एवं अन्तः रोगी विभागों में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    500 निःसंवर्गीय पदों पर होगा पुनर्नियोजन
    अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 500 निःसंवर्गीय पदों के सापेक्ष पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों का पुनर्नियोजन किया जाएगा। नियुक्ति वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर होगी। पुनर्नियोजन नियमित चिकित्साधिकारियों से पद भरे जाने अथवा एक वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक किया जाएगा। इसके बाद कार्य एवं आचरण, गुण-दोष तथा स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष-दर-वर्ष अवधि बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 70 वर्ष की आयु तक होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति होने के बाद संबंधित निःसंवर्गीय पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। किसी भी स्थिति में पुनर्नियोजन के कुल पदों की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी।

    कन्सलटेन्ट के रूप में देंगे सेवाएं
    पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों को कोई प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा और न ही उन्हें संवर्गीय पदनाम मिलेगा। वे ‘कन्सलटेन्ट’ अथवा ‘परामर्शी’ के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार उन्हें आपातकालीन एवं आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी योगदान देना होगा। साथ ही, सैन्य सेवा से अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों को भी पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त चिकित्सकों की भांति पुनर्नियोजित किए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं, एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 65 वर्ष तक पुनर्नियोजन की वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।

    प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध
    पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। अस्पताल में सरकारी नियमों के अंतर्गत उपलब्ध दवाओं की ही मरीजों के लिए संस्तुति की जा सकेगी। प्राइवेट प्रैक्टिस अथवा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में पुनर्नियोजन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार अनुभवी सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग नियमित नियुक्तियों के साथ किए जाने से प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को तत्काल मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह निर्णय बढ़ती आबादी और मरीजों के दबाव के बीच सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • भारत में पहली विनिर्माण इकाई का हुआ भूमिपूजन, 200 को प्रत्यक्ष और 1,500 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर

    भारत में पहली विनिर्माण इकाई का हुआ भूमिपूजन, 200 को प्रत्यक्ष और 1,500 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख औद्योगिक एवं विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। प्रदेश की आकर्षक एफडीआई नीति-2023 के तहत वैश्विक पैकेजिंग कंपनी क्राउन होल्डिंग्स की भारतीय इकाई क्राउन पैकेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने उन्नाव स्थित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) में अपने पहले ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम बेवरेज कैन विनिर्माण संयंत्र का भूमिपूजन किया। करीब ₹2,078.44 करोड़ के निवेश से स्थापित होने वाला यह संयंत्र भारत में क्राउन होल्डिंग्स की पहली विनिर्माण इकाई होगी। लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में बनने वाला अत्याधुनिक प्लांट देश के तेजी से बढ़ते पेय पदार्थ उद्योग की पैकेजिंग जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    200 को प्रत्यक्ष और 1,500 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर
    परियोजना से 200 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और 1,500 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, परिवहन, रखरखाव और स्थानीय वेंडर नेटवर्क में भी रोजगार एवं कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। भूमिपूजन समारोह में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि प्रदेश में अब केवल औद्योगिक परियोजनाओं का पंजीकरण नहीं हो रहा, बल्कि उन्हें तेजी से धरातल पर उतारकर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। उन्नाव में क्राउन की परियोजना इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह निवेश उत्तर प्रदेश के मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    116 करोड़ कैन सालाना होगी शुरुआती क्षमता
    करीब 40 एकड़ में प्रस्तावित संयंत्र की प्रारंभिक स्थापित क्षमता 116.2 करोड़ कैन प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे बढ़ाकर 178.6 करोड़ कैन प्रतिवर्ष तक किया जा सकेगा। पहले वर्ष में करीब 67 करोड़ कैन के उत्पादन का अनुमान है, जो नौवें-दसवें वर्ष तक बढ़कर लगभग 170 करोड़ कैन प्रतिवर्ष हो सकता है। क्राउन पैकेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का गठन मार्च 2026 में हुआ है। यह क्राउन होल्डिंग्स की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और इसका पंजीकृत कार्यालय लखनऊ में है। परियोजना का मूल्यांकन उत्तर प्रदेश की एफडीआई, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 एवं फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनियों के लिए निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत किया गया है।

    योगी सरकार की नीतियों से यूपी बना निवेश का पसंदीदा ठिकाना
    योगी सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत आधारभूत ढांचे और निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं से उत्तर प्रदेश में देश-विदेश की कंपनियों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उन्नाव में क्राउन का निवेश इसी बदलते औद्योगिक परिदृश्य की बड़ी मिसाल है। इस तरह के बड़े निवेश से केवल एक नई औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं हो रही, बल्कि उसके साथ एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, वेयरहाउसिंग और सेवा क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ प्रदेश के औद्योगिक आधार को मजबूती मिलेगी।

  • पूर्ववर्ती सरकारों में गलती कोई और करता, गाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिलती थी: मुख्यमंत्री

    पूर्ववर्ती सरकारों में गलती कोई और करता, गाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिलती थी: मुख्यमंत्री

    वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में बच्चों के पोषाहार की सप्लाई तक में शराब माफिया का दखल था। तीन-तीन महीने तक आंगनवाड़ी केंद्रों पर राशन नहीं पहुंचता था और बच्चे अपना टाट लेकर केंद्रों पर आते थे। न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न गर्म भोजन की सुविधा। पूर्ववर्ती सरकारों में गलती कोई और करता था, लेकिन उसकी गाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को मिलती थी। 2017 के बाद सरकार ने पोषाहार वितरण व्यवस्था में बदलाव कर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की। आज आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का मजबूत आधार बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों, किशोरियों तथा उनके परिवारों के पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल को समर्पित 9वें राष्ट्रीय पोषण माह (9 सितंबर से 8 अक्टूबर, 2026) का वाराणसी में शुभारंभ किया। सीएम ने कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने नन्हें बच्चों को गोद में लेकर दुलारा और उनका अन्नप्राशन कराया। सीएम योगी ने इस मौके पर यूपी समेत देश विभिन्न राज्यों से आई आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों से संवाद किया और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आधारित लघु फिल्म भी देखी।

    नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना’ की अवधारणा पर आगे बढ़ रहा यूपी
    मुख्यमंत्री ने शासन की आदर्श व्यवस्था की शाश्वत अवधारणा को रामराज्य से जोड़ते हुए गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों ‘नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना। नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसका आशय ऐसी व्यवस्था से है, जहां कोई गरीब, दुखी, दीन-हीन या कमजोर न हो और हर व्यक्ति स्वस्थ एवं समर्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सके। इसी सोच के साथ केंद्र और प्रदेश सरकार मातृ एवं शिशु पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है।

    कुशल युवा ही भारत को नेतृत्व देगा
    सीएम ने कहा कि सक्षम विद्यार्थी आगे चलकर कुशल युवा बनेगा और यही कुशल युवा आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला रखेगा। वही भारत को नेतृत्व देगा और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएगा। इसलिए बच्चों के शुरुआती वर्षों में पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा पर निवेश देश के भविष्य में निवेश है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2001 से जिन योजनाओं और विजन को जमीन पर उतारा, वही मॉडल आज देश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों का बदला स्वरूप
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद खराब थी। बड़ी संख्या में केंद्र जर्जर अवस्था में थे। बच्चों के लिए पेयजल, शौचालय और हॉट मील जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। पोषाहार की आपूर्ति भी नियमित नहीं थी। सरकार बनने के बाद जब आंगनवाड़ी केंद्रों की समीक्षा की गई तो पोषाहार आपूर्ति व्यवस्था में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। उस समय पोषाहार की आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्था में एक शराब माफिया से जुड़े व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी। इसे देखते तत्काल इसकी गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए गए और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया। नए मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के अनुकूल आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एक केंद्र के निर्माण एवं रिनोवेशन पर करीब 30 लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। बाउंड्रीवॉल, बच्चों के लिए शौचालय, शुद्ध पेयजल, पोषण वाटिका और एलईडी स्क्रीन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

    ‘मेरी आंगनवाड़ी-मेरी जिम्मेदारी’ बने पोषण माह का आधार
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ रखी गई है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि आंगनवाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, ग्राम पंचायत और गांव के नागरिकों को अपनी आंगनवाड़ी की जिम्मेदारी लेनी होगी। पोषण माह में पांच प्रमुख विषयों- आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं हॉट-कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, बाल शिक्षा यानी प्रारंभिक शिक्षा और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं विविध आहार जरूरी है। भोजन में अत्यधिक नमक या मिठास से बचना चाहिए। केवल मूंग की दाल की खिचड़ी देने के बजाय उसमें गाजर व दूसरी सब्जियां शामिल करने से भोजन का स्वाद, रंग और पोषण तीनों बेहतर होते हैं। पोषण अभियान तभी सफल होगा, जब बच्चे खुशी से भोजन करें।

    1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों से 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं
    सीएम ने कहा कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और 897 बाल विकास परियोजनाओं के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हर माह करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं। करीब 35.46 लाख बच्चों को हॉट-कुक्ड मील उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि करीब 46 लाख बच्चों के वजन, स्टंटिंग और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जा रही है। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। 

    टेक-होम राशन में तकनीक और पारदर्शिता
    मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार की नवीन पोषण गाइडलाइन के अनुरूप प्रदेश में रेसिपी आधारित अनुपूरक पोषाहार लागू किया गया है। टेक-होम राशन यानी टीएचआर व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है। प्रदेश में 204 टीएचआर प्लांट स्थापित हो चुके हैं और इनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस व्यवस्था से 20 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। टीएचआर के परिवहन से लेकर आंगनवाड़ी केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में जीपीएस ट्रैकिंग और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड लगाया गया है, जिससे उसकी डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित हो सके। पोषाहार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी भारत सरकार की महत्वपूर्ण संस्था को दी गई है।

    आंगनवाड़ी प्रारंभिक शिक्षा की पहली पाठशाला
    योगी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, सीखने की क्षमता और सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया जा रहा है। बाल वाटिकाओं में बच्चों को खेल-खेल में अक्षर और अंकों का ज्ञान दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की उम्र व रुचि के अनुसार गतिविधियों के माध्यम से उन्हें पढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कानपुर के आंगनवाड़ी केंद्र का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वहां 20-22 बच्चे मौजूद थे और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उन्हें खेल एवं गीत के माध्यम से पढ़ा रही थीं। एक कार्यकर्ता बच्चों को एक, एक, एक – मेरी नाक एक और दो, दो, दो – मेरी आंख दो, गाकर संख्या ज्ञान दे रही थी। एकाएक मुझे देखकर वे लोग हैरान रह गए। मैंने कार्यकर्ताओं से कहा कि आप लोग घबराएं नहीं और जिस तरह बच्चों को पढ़ा रही थीं, उसी तरह पढ़ाती रहें। करीब तीन वर्ष की एक बच्ची से जब मैंने पूछा कि वह क्या सीख रही थी तो बच्ची ने तत्काल जवाब दिया- एक, एक, एक – मेरी नाक एक। देखिए, बच्ची ने कितनी आसानी से संख्या के साथ शरीर के अंग की पहचान भी सीख ली थी।

    दो-दो यूनिफॉर्म से बच्चों में बढ़ेगा आत्मविश्वास
    मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में बच्चों को दी जा रहीं सुविधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल स्कूल तक बच्चों की पहुंच सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। सीएम ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक बार मैंने एक बच्ची को नंगे पैर स्कूल जाते देखा। उसके पास पर्याप्त गर्म कपड़े भी नहीं थे। बातचीत में पता चला कि उसके छोटे भाई के पास जूते थे। इस अनुभव से मुझे परिवार और समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव का अहसास हुआ। तब मैंने तत्काल बेटियों के लिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और स्वेटर की व्यवस्था के निर्देश दिए गए और बाद में इसे सभी बच्चों तक सुनिश्चित किया। आज प्रदेश में 1.60 करोड़ बच्चों को हर वर्ष दो-दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराया जा रहा है। अब बाल वाटिकाओं में आने वाले बच्चों के लिए भी दो-दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था अनिवार्य की जा रही है।

    ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत से बदली स्कूलों की तस्वीर
    मुख्यमंत्री ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से 1.36 लाख विद्यालयों को बेहतर भवन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पेयजल, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। पहले कक्षा तीन से सात तक बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। अध्ययन में पता चला कि भोजन, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खासतौर पर बेटियां पढ़ाई छोड़ रही थीं। इन सुविधाओं को मजबूत करने से ड्रॉपआउट की स्थिति में सुधार हुआ है। आंगनवाड़ी में अक्षर और अंकों का ज्ञान हासिल करने के बाद बच्चों की शैक्षिक नींव को निपुण भारत अभियान के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करने का यह प्रयास अब दूसरी कक्षा तक सीमित न रहकर पांचवीं कक्षा तक विस्तारित किया गया है। पहले बच्चों में जो लाचारी दिखाई देती थी, वह उनकी नहीं बल्कि तत्कालीन व्यवस्था की अकर्मण्यता थी।

    प्रोजेक्ट अलंकार से 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार
    मुख्यमंत्री ने माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के तहत किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 40 वर्ष पुराने सरकारी और अशासकीय सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों को धनराशि उपलब्ध कराकर करीब 2100 इंटर कॉलेजों का पुनरुद्धार किया गया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और बेहतर फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अटल टिंकरिंग लैब और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी नई व्यवस्थाओं से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। आंगनवाड़ी से शुरू होने वाली शिक्षा की यात्रा निपुण भारत, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट तक जाती है। इस पूरी श्रृंखला को रोजगार और कौशल से जोड़कर प्रदेश में मजबूत शैक्षिक एवं रोजगारपरक इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।

    मातृ वंदना योजना से माताओं को आर्थिक संबल
    योगी ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को पोषण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि गर्भवती और धात्री माताओं की देखभाल के साथ उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है। देश में अब तक करीब पांच करोड़ माताओं को 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। मां के स्वास्थ्य और पोषण में किया गया निवेश बच्चे के पूरे जीवन की नींव को मजबूत करता है। स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चे का जन्म होता है, स्वस्थ बच्चा आगे चलकर स्वस्थ विद्यार्थी बनता है और स्वस्थ विद्यार्थी ही कुशल युवा के रूप में देश की अर्थव्यवस्था और विकास को नई दिशा देता है।

    आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ा, बीमा कवर भी
    मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के स्वस्थ और सशक्त बचपन के निर्माण में उनकी जिम्मेदारी सबसे अहम है। वर्ष 2017 से पहले आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां मानदेय व सुविधाओं को लेकर धरना-प्रदर्शन करती थीं। तब उन्हें महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया है, जो पहले से 4 गुना है। सहायिकाओं का मानदेय भी बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और उनके परिवार को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया गया है। करीब 1.56 लाख आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जा चुके हैं और शेष को भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। स्मार्टफोन के माध्यम से केंद्र की गतिविधियों का रियल टाइम डेटा अपलोड किया जा रहा है। इससे निगरानी मजबूत होने के साथ प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन का लाभ भी मिल सकता है।

    गांव-गलियों से बनेगा विकसित भारत
    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की वास्तविक शक्ति उसके बच्चे और युवा हैं। बच्चों का स्वस्थ बचपन ही मजबूत भारत की नींव तैयार करेगा। इसलिए आंगनवाड़ी केंद्रों, बाल वाटिकाओं और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों को केवल सरकारी संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रारंभिक केंद्र के रूप में देखने की आवश्यकता है। पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ आगे बढ़ाकर ही सक्षम विद्यार्थी, कुशल युवा और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार किए जा सकते हैं।

    प्रधानमंत्री जी के विजन से मजबूत हो रही देश की बुनियाद
    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश की बुनियाद को मजबूत करने के लिए जिस विजन के साथ काम शुरू किया, उसका असर आज जमीन पर दिखाई दे रहा है। गरीबों, कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए योजनाएं अब शासन के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री जी ने आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। यह लक्ष्य केवल दिल्ली में बैठकर पूरा नहीं होगा। इसकी वास्तविक आधारशिला देश के गांवों, गलियों और समाज के सबसे शुरुआती स्तर पर रखी जाएगी। आंगनवाड़ी केंद्र और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय इसी आधारशिला के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

    काशी को मिली नई आभा और नई काया
    मुख्यमंत्री ने वाराणसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कर्मभूमि बताते हुए कहा कि काशी बाबा विश्वनाथ की पावन धरती होने के साथ सनातन की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी है। मोदी जी ने काशी की पुरातन पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे नए कलेवर और नई पहचान से जोड़ा है। आज काशी नई आभा और नई काया के साथ पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। काशी में परंपरा और आधुनिकता का जिस तरह समन्वय दिखाई देता है, उसी प्रकार देश के विकास मॉडल में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक सुविधाओं को अपनाने की आवश्यकता है। पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव भी इसी सोच का हिस्सा हैं।

    इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य, मंत्री अनिल राजभर, मंत्री रविंद्र जायसवाल, मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु', राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, सचिव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अनिल मलिक, अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी आदि मौजूद रहीं।

  • पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपलब्ध कराए जाएंगे सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग

    पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपलब्ध कराए जाएंगे सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग

    लखनऊ। दिव्यांगजनों को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी सरकार लगातार कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के लिए चरणबद्ध तरीके से वितरण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

    पहले चरण में प्रदेश के सभी 75 जनपदों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। 17 सितंबर को 41 जनपदों में तथा 2 अक्टूबर को 34 जनपदों में वितरण शिविर आयोजित होंगे। इसके बाद द्वितीय चरण 20 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तथा तृतीय चरण 3 दिसंबर से 15 दिसंबर 2026 तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों में शिविर लगाए जाएंगे। 

    17 सितंबर को आगरा, अलीगढ़, एटा, अयोध्या, सुलतानपुर, आजमगढ़, बरेली, बदायूं, बांदा, देवरिया, कुशीनगर, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, उन्नाव, मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, जौनपुर, गोरखपुर, कन्नौज, प्रयागराज, शामली, वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संतकबीर नगर, बिजनौर, इटावा, हापुड़, ललितपुर, मथुरा, रामपुर, सीतापुर, कौशाम्बी, हरदोई और बुलन्दशहर वितरण शिविर अयोजित किये जाएंगे।

    इसी तरह 2 अक्टूबर को लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, चन्दौली, बलरामपुर, चित्रकूट, अम्बेडकर नगर, अमरोहा, फिरोजाबाद, जालौन, कानपुर देहात, खीरी, महाराजगंज, मऊ, पीलीभीत, रायबरेली, सम्भल, शाहजहांपुर, सोनभद्र, अमेठी, औरैया, बागपत, बाराबंकी, भदोही, फर्रुखाबाद, गाजियाबाद, हमीरपुर, हाथरस, कासगंज, महोबा, मुजफ्फरनगर, बहराइच, बलिया, बस्ती एवं मैनपुरी में वितरण शिविर आयोजित होंगे।

    विभाग ने सभी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारियों को निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार शिविरों के सफल आयोजन के लिए कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण, सशक्तीकरण, आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित किए जाते रहैं। सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग वितरण योजना इसी श्रृंखला की एक कड़ी है। योजना का उद्देश्य पात्र दिव्यांगजनों तक शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध ढंग से पहुंचाना है।

    वितरण शिविरों के माध्यम से लाभार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण एवं कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर उन्हें अधिक सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाना है। प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों की दैनिक गतिविधियों को सुगम बनाना तथा उनकी गतिशीलता, कार्यक्षमता एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

  • योगी सरकार की पहल से साकार हुआ आत्मनिर्भर बनने का सपना, अमेठी की अर्चना त्रिपाठी बनीं सफल उद्यमी

    योगी सरकार की पहल से साकार हुआ आत्मनिर्भर बनने का सपना, अमेठी की अर्चना त्रिपाठी बनीं सफल उद्यमी

    लखनऊ/अमेठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित कर रही हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान ऐसी ही एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो युवाओं और महिलाओं को अपना उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। अमेठी जनपद के मुसाफिरखाना नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या-08, पूरे भवानी बक्स की निवासी अर्चना त्रिपाठी इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। कभी गृहिणी रहीं अर्चना ने योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से ‘अर्चना ब्यूटी पार्लर’ की स्थापना की और आज सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।

    बैंक से मिली योजना की जानकारी
    अर्चना बताती हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की जानकारी बैंक के माध्यम से मिली। उस समय वह गृहिणी थीं और अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। परिवार की सीमित आय के कारण व्यवसाय के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने योजना के बारे में जानकारी प्राप्त की और आवेदन करने का निर्णय लिया।

    2.12 लाख रुपये के ऋण से शुरू हुआ व्यवसाय
    अर्चना को जनवरी 2025 में बैंक के माध्यम से 2.12 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने ‘अर्चना ब्यूटी पार्लर’ की शुरुआत की। वह बताती हैं कि योजना से मिली सहायता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया। पहले जो सपना केवल एक इच्छा था, वह आज एक सफल व्यवसाय के रूप में सामने है।

    आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
    आज अर्चना का ब्यूटी पार्लर क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। इस व्यवसाय से उन्हें 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह आय प्राप्त हो रही है। अर्चना बताती हैं कि उनके परिवार में 6 सदस्य हैं और व्यवसाय शुरू होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। अब वह परिवार की जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

    भविष्य में और आगे बढ़ने का लक्ष्य
    अर्चना का कहना है कि वह भविष्य में अपने व्यवसाय का और विस्तार करना चाहती हैं, ताकि अधिक लोगों तक बेहतर सेवाएं पहुंचा सकें। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता मिले तो वे भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। अर्चना त्रिपाठी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हुए आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है। आज अर्चना की सफलता क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

  • स्कूलों में बेटियों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील माहौल, आत्मसम्मान से नेतृत्व तक योगी सरकार का खास प्लान

    स्कूलों में बेटियों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील माहौल, आत्मसम्मान से नेतृत्व तक योगी सरकार का खास प्लान

    बेटियों के आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता के लिए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बना रही योगी सरकार

     रूप-रंग और शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाने की प्रवृत्ति को समझेंगे शिक्षक

    सोशल मीडिया के प्रभाव और बॉडी इमेज पर बच्चों से संवाद की होगी तैयारी

    – लैंगिक रूढ़ियों की पहचान और कक्षा में संवेदनशील व्यवहार का होगा अभ्यास

    पॉक्सो अधिनियम और मासिक धर्म स्वास्थ्य से बाल सुरक्षा व गरिमापूर्ण वातावरण पर जोर

    लखनऊ,
    योगी सरकार बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में बच्चों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले संवेदनशील मुद्दों पर शिक्षकों की समझ विकसित की जा रही है। रूप-रंग अथवा शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाना, स्वयं और दूसरों को केवल शरीर या रूप-रंग के आधार पर देखना, अपने शरीर और उसकी क्षमताओं को पहचानना, सोशल मीडिया का प्रभाव तथा लैंगिक रूढ़ियां प्रशिक्षण के प्रमुख विषय हैं। 

    विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंच कार्यक्रम एवं सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए आज से दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हो गया है। व्यापक प्रशिक्षण रूपरेखा में कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार करने का लक्ष्य है। 

    इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के संवेदनशील अनुभवों को समझने और उनके साथ प्रभावी संवाद के लिए तैयार करना है, ताकि विद्यालयों में सुरक्षित, सहभागी और सम्मानजनक वातावरण मजबूत हो तथा हर बालिका आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य की ओर आगे बढ़ सके।

    आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों पर समझ
    प्रशिक्षण में नव-विकसित चार कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के रूप में शामिल किया गया है। इनके माध्यम से रूप-रंग और शारीरिक बनावट के आधार पर चिढ़ाने एवं परेशान करने, शरीर को लेकर बच्चों की धारणाओं, अपने शरीर से जुड़ाव एवं उसकी क्षमताओं तथा सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को समझाया जा रहा है। इन संसाधनों के उपयोग से बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के तरीकों का भी प्रदर्शन होगा। 

    लैंगिक रूढ़ियों पर संवेदनशील संवाद
    प्रशिक्षण में मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया पर काम हो रहा है। एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में बच्चों की बात सुनने, बिना पूर्वधारणा के संवाद करने, सभी आवाजों को महत्व देने और अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। लैंगिक रूढ़ियों की पहचान तथा कॉमिक्स और कक्षा गतिविधियों के माध्यम से इन विषयों पर संवाद का भी अभ्यास हो रहा है। 

    पॉक्सो अधिनियम से बाल सुरक्षा पर जोर
    प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) पर चर्चा के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रमुख संदेशों को स्पष्ट किया गया। मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत करने का प्रयास हुआ। बच्चों और शिक्षकों की कहानियों को एकत्रित, दस्तावेजीकृत और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम होगा। 

    किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा
    दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की समझ विकसित की जाएगी। समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से इसके सत्रों को पाठ्यक्रम तथा किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा। ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों की जानकारी भी दी जाएगी। 

    मासिक धर्म स्वास्थ्य और गरिमा पर चर्चा
    उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य (2026) निर्णय के प्रमुख निहितार्थों पर भी चर्चा होगी। मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालय की जिम्मेदारियों के अंतर्गत सुरक्षित शौचालय, पानी, आवश्यक उत्पाद, निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालयी स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा। 

    कोट:
    योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। रूप-रंग, शारीरिक बनावट, सोशल मीडिया और लैंगिक रूढ़ियों जैसे संवेदनशील विषयों को समझना शिक्षकों के लिए बेहद आवश्यक है। मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को तैयार करने से विद्यालयों में बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और प्रभावी संवाद को मजबूती मिलेगी।
    संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

    कोट:
    बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण में बॉडी इमेज, सोशल मीडिया के प्रभाव, लैंगिक रूढ़ियों, बाल सुरक्षा और मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर समझाया जा रहा है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह समझ विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाएगी।
    मोनिका रानी, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा

  • जलाशय से खेत तक पहुंचेगा पानी, बूंद-बूंद के बेहतर इस्तेमाल का मॉडल तैयार, 31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

    जलाशय से खेत तक पहुंचेगा पानी, बूंद-बूंद के बेहतर इस्तेमाल का मॉडल तैयार, 31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

    इंडिया-इजराइल परियोजना: बुंदेलखंड में जल संकट का समाधान निकाल रहा योगी सरकार का आधुनिक जल प्रबंधन मॉडल

    19.1 करोड़ की इंडिया-इजराइल परियोजना में तेजी, गंगावली में सोलर पंप, इंटेक पाइप व नेचुरल एसटीपी का काम पूरा

    जलाशय से खेत तक पहुंचेगा पानी, बूंद-बूंद के बेहतर इस्तेमाल का मॉडल तैयार, 31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

    8.5 हेक्टेयर में दिखेगी कम पानी में बेहतर खेती की तकनीक, गंगावली मॉडल का 24 गांवों तक विस्तार करने की तैयारी

    72 प्रशिक्षण सत्रों से किसानों को मिलेंगे आधुनिक सिंचाई और खेती के गुर, हर सत्र में हिस्सा लेंगे 100 किसान

    लखनऊ
     बुंदेलखंड में जल संकट और सीमित जल संसाधनों के बीच योगी सरकार जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए इंडिया-इजराइल बुंदेलखंड वाटर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है। झांसी के विकासखंड बड़ागांव स्थित ग्राम गंगावली में करीब 19.1 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट में कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हो चुके हैं। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग, सोलर पंप की स्थापना, नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और इंटेक वेल, पीयूएफ पैनल आधारित भवनों समेत कई प्रमुख काम पूरे किए जा चुके हैं। अब अगले चरण में माइक्रो इरिगेशन, ग्रीनहाउस, सिंचाई ऑटोमेशन और किसान प्रशिक्षण जैसे कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

    जल संरक्षण से आधुनिक खेती तक एक ही मॉडल
    नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं निदेशक, भूगर्भ जल विभाग डॉ राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य बुंदेलखंड की स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों के अनुसार ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें उपलब्ध पानी का अधिकतम और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जा सके। परियोजना में जल संरक्षण, जल भंडारण, सौर ऊर्जा, माइक्रो इरिगेशन, आधुनिक कृषि तकनीक और किसान प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा गया है। इसके तहत जलाशय, नहर से पानी लाने की व्यवस्था, पाइपलाइन, सोलर पंप, ड्रिप-स्प्रिंकलर, प्राकृतिक एसटीपी, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका मकसद किसानों को सीमित पानी में बेहतर सिंचाई और खेती का व्यावहारिक मॉडल उपलब्ध कराना है।

    नेचुरल एसटीपी का भी निर्माण
    गंगावली में परियोजना की प्रगति अब जमीन पर दिखाई देने लगी है। जलाशय क्षेत्र की डिमार्केशन और फेंसिंग का कार्य पूरा हो चुका है। जलाशय का अर्थवर्क और जियोमेम्ब्रेन लाइनिंग भी पूरी हो गई है। पीयूएफ पैनल आधारित भवनों का निर्माण पूरा होने के साथ वहां सीसीटीवी की व्यवस्था भी की जा चुकी है। इसके अलावा सोलर पंप स्थापित किया गया है। नहर से जलाशय तक इंटेक पाइप और जलाशय में इंटेक वेल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। गांव से आने वाले अपशिष्ट जल को जलाशय में पहुंचने से रोकने और उसके उपचार के लिए नेचुरल एसटीपी का निर्माण किया गया है। जलाशय के आसपास सड़क का काम अभी प्रगति पर है।

    8.5 हेक्टेयर में होगा आधुनिक खेती का प्रदर्शन
    मिनी पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 8.5 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक कृषि गतिविधियों का प्रदर्शन प्रस्तावित है। अगले चरण में ड्रिप और स्प्रिंकलर आधारित माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को स्थापित और क्रियाशील किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रीनहाउस, टनल, पाइपलाइन और सिंचाई ऑटोमेशन-एससीएडीए व्यवस्था को भी क्रियाशील किया जाएगा।

    इससे किसानों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि फसल की जरूरत के अनुसार कितनी मात्रा में पानी दिया जाए और कम पानी में बेहतर उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है। परियोजना में पानी की खपत, सिंचाई दक्षता, फसल उत्पादन, लागत और जल उत्पादकता जैसे मानकों पर तकनीकों के परिणामों का मूल्यांकन भी किया जाएगा।

    किसानों को खेत पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
    परियोजना में केवल आधारभूत ढांचा तैयार करने के बजाय कि
    सानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 72 प्रैक्टिकल ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक सत्र में करीब 100 किसानों की भागीदारी का प्रावधान है। प्रशिक्षण में किसानों को वाटर बजटिंग, फर्टिगेशन, क्रॉप प्लानिंग, सिंचाई संचालन और कृषि मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। इससे किसान उपलब्ध पानी के आधार पर फसल क्षेत्र तय करने और सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम होंगे।

    24 गांवों तक पहुंचेगा गंगावली का मॉडल
    डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि गंगावली में तैयार हो रहे मिनी पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों को आगे बड़े क्षेत्र में लागू करने की भी तैयारी है। अगले चरण में बड़ागांव विकासखंड में पाहुज नहर के डाउनस्ट्रीम स्थित 24 अन्य गांवों में विस्तृत प्रदर्शनात्मक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इससे गंगावली में सफल रहने वाली उपयोगी तकनीकों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार होगा।

    31 दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
    भूगर्भ जल विभाग के अधिशासी अभियांता व वैयक्तिक सहायक निदेशक अनुपम ने कहा कि परियोजना के वर्तमान निर्माण एवं क्रियान्वयन चरण को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के साथ परियोजना को जून 2029 तक संचालित करने का प्रस्ताव है। वहीं विस्तारित डेमोंस्ट्रेशन और किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम अक्टूबर 2026 से मई 2029 तक प्रस्तावित है।

  • खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के प्रतिभावान विद्यार्थियों का होगा सम्मान

    खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के प्रतिभावान विद्यार्थियों का होगा सम्मान

    मेहनत और प्रतिभा को सम्मान देगी योगी सरकार, विद्यालयों के वार्षिकोत्सव में मिलेगा पुरस्कार

    चमकेगी बच्चों की प्रतिभा, 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में होगा उपलब्धियों का सम्मान

     खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के प्रतिभावान विद्यार्थियों का होगा सम्मान

    मेधावी बच्चों के साथ उनके अभिभावकों और सहयोगी एसएमसी सदस्यों को भी किया जाएगा सम्मानित

     

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा को पहचान, प्रोत्साहन और सम्मान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। योगी सरकार का जोर है कि पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला बच्चा हो, नियमित विद्यालय आने वाला हो, खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाने वाला हो या सांस्कृतिक एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में आगे रहने वाला; हर उपलब्धि को मंच मिले और हर प्रतिभा को प्रोत्साहन मिले। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट के अंतर्गत प्रदेश के 1,31,918 परिषदीय विद्यालयों में वार्षिकोत्सव के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किए जाएंगे।  

    वार्षिकोत्सव के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह 15 फरवरी 2027 से 15 मार्च 2027 के मध्य आयोजित किए जाएंगे। समारोह में ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य, अभिभावक और अन्य संबंधित लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए अध्यापकों द्वारा व्यक्तिगत रूप से तथा बच्चों द्वारा निर्मित निमंत्रण कार्ड के माध्यम से आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

    योगी सरकार की इस पहल से बच्चों की मेधा, मेहनत, नियमितता और बहुआयामी प्रतिभा को पहचान मिलने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। पढ़ाई, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित करने से परिषदीय विद्यालयों में उपलब्धि आधारित सकारात्मक वातावरण को और मजबूती मिलेगी।

    मेहनत और प्रतिभा के आधार पर बच्चों का सम्मान
    विद्यालय स्तर पर प्रत्येक कक्षा से विगत परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एक छात्र और एक छात्रा को पुरस्कृत किया जाएगा। प्रत्येक कक्षा से सर्वाधिक उपस्थिति वाले एक छात्र और एक छात्रा को भी सम्मानित किया जाएगा। विभिन्न खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले एक छात्र-छात्रा को भी पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अलावा ऐसे अभिभावकों को सम्मानित किया जाएगा, जिनके बच्चे ने विगत परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए हों अथवा विद्यालय में सर्वाधिक दिन उपस्थित रहे हों। विद्यालय की गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में सहयोग करने वाले विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को भी सम्मानित किया जाएगा। समारोह में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं के उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन के लिए यथासंभव टॉफी, चॉकलेट एवं रचनात्मक सामग्री का वितरण भी किया जा सकता है। 

    पुरस्कार में बच्चों के उपयोग की सामग्री
    पुरस्कार वितरण के लिए लंच बॉक्स, पानी की बोतल, ड्राइंग नोटबुक, कंपास एवं वाटर कलर, स्टेशनरी-ज्योमैट्रिक बॉक्स, पेंसिल, रबर, कटर एवं स्केल सहित पेन आदि सामग्री क्रय की जा सकती है। कहानी की किताब तथा महापुरुषों के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तकों को भी पुरस्कार के रूप में दिया जा सकता है। अभिभावकों के लिए शॉल, मोमेंटो तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरित पौधे भी सम्मान सामग्री के रूप में दिए जा सकते हैं। 

    स्कूल स्तर से राज्य स्तर तक होगा अनुश्रवण
    पुरस्कार वितरण कार्यक्रम के प्रभावी आयोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर अनुश्रवण की व्यवस्था की गई है। डायट, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा कम से कम दो ब्लॉक के कुल चार विद्यालयों में कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) द्वारा कम से कम दो जनपदों के कुल चार विद्यालयों में कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा कम से कम दो ब्लॉक के कुल चार विद्यालयों में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। प्रत्येक एसआरजी एवं एआरजी द्वारा कम से कम तीन विद्यालयों में कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा विकासखंड के कम से कम पांच विद्यालयों में तथा प्रत्येक एआरपी द्वारा कम से कम तीन ब्लॉक के कुल छह विद्यालयों में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। 

    कोट:
    योगी सरकार बच्चों की प्रतिभा को पहचान देने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य क्षेत्रों में बेहतर करने वाले बच्चों को सम्मानित करने से उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा मजबूत होगी। यह पहल परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा को उचित मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
    संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

    कोट:
    बच्चों की उपलब्धियों को सम्मान देना उनके भीतर सीखने और बेहतर करने की प्रेरणा को मजबूत करता है। पुरस्कार वितरण समारोह के माध्यम से शैक्षिक उपलब्धि, नियमित उपस्थिति, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को पहचान मिले और उसे आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध हो।
    मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

  • आंगनबाड़ी बहनों की बड़ी जिम्मेदारी, बच्चों के पोषण से मजबूत होगा भविष्य; बेबी रानी मौर्य ने दिया संदेश

    आंगनबाड़ी बहनों की बड़ी जिम्मेदारी, बच्चों के पोषण से मजबूत होगा भविष्य; बेबी रानी मौर्य ने दिया संदेश

    आंगनबाड़ी बहनें बच्चों के पोषण का ध्यान रख विकसित भारत की नींव रखें : बेबी रानी मौर्य
     
    केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी बोलीं, योगी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को बनाया विकास की आधारशिला
     
    देश के 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प को बढ़ा रहे आगे
     
     वाराणसी

    नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ है। आंगनबाड़ी बहनों पर बच्चों के पोषण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक विकास का ध्यान रखकर विकसित भारत की मजबूत नींव रखने का कार्य कर रही हैं।
     
    बेबी रानी मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक्ड मील, सामुदायिक स्वामित्व एवं जवाबदेही, पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य की चिंता जैसे आयामों को धरातल पर उतारा जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए किताबें और खिलौने भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
     
    केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि पोषण माह अभियान कुपोषण से मुक्ति के साथ स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की थी। आज पोषण का यह संकल्प जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। सरकार की नीतियां जब जनता के जीवन से जुड़ती हैं तो वे संस्कृति का हिस्सा बन जाती हैं।
     
    उन्होंने कहा कि देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को विकास की आधारशिला बनाया है। एक समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय थी, लेकिन 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया।
     
    केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश के धार से सांसद सावित्री ठाकुर ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को नमन करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में पोषण अभियान के अंतर्गत देशभर में 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। वहीं, सुकन्या समृद्धि योजना बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य कर रही है।
     
    विभिन्न प्रदेशों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव
    कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए। गांधीनगर, गुजरात से आईं भावना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अब काफी बेहतर हुई है। लोगों का भरोसा बढ़ा है और वे अपने बच्चों को केंद्रों पर भेज रहे हैं। गर्भवती महिलाएं पोषाहार को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सलाह लेती हैं। बच्चों के जन्म के बाद भी अभिभावक उनके खानपान को लेकर मार्गदर्शन लेते हैं। कई बच्चे घर पर खाना खाने में आनाकानी करते थे, लेकिन केंद्र पर उनकी जरूरत को समझकर भोजन दिया गया तो वे चाव से खाने लगे।
     
    तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से आईं आर. शंकरी ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बच्चों का बेहतर विकास देखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खुशी होती है कि उनके प्रयास से देश का भविष्य बेहतर हो रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और बाल विकास के क्षेत्र का ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बताया।
     
    गोरखपुर के बसियाखोर आंगनबाड़ी केंद्र की संध्या सिंह ने बताया कि बच्चों का समय-समय पर वजन और लंबाई मापी जाती है। इससे उनके पोषण की स्थिति का पता चलता है। कुपोषण की ओर बढ़ रहे बच्चों की विशेष निगरानी की जाती है और उनके अभिभावकों से मिलकर खानपान एवं देखभाल के बारे में जानकारी दी जाती है।