Category: उत्तर प्रदेश

  • शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बोले- शिक्षक जरूरी, तकनीक बनेगी बदलाव का माध्यम

    शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान, बोले- शिक्षक जरूरी, तकनीक बनेगी बदलाव का माध्यम

    एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं, शिक्षा को नई दिशा देने का माध्यम : ब्रजेश पाठक

    इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स के शिक्षण संवाद कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने रखे विचार 

    कहा- शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा उत्तर प्रदेश

    लखनऊ
    इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की ओर से लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर रोजगार समाप्त होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन तकनीक के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। एआई को चुनौती के बजाय अवसर के रूप में स्वीकार करने की जरूरत है।
    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय हमारी गौरवशाली शैक्षिक विरासत के प्रतीक हैं। आज बदलते तकनीकी दौर में शिक्षा व्यवस्था को भी समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना जरूरी है। एआई और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

    शिक्षक भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक
    उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक हैं। बदलते शिक्षा परिवेश में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा से जुड़े अभियानों के माध्यम से प्रदेश में बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों से जुड़ रहे हैं।

    83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से कर रहे काम
    डिप्टी सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में करीब 40 मेडिकल कॉलेज थे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कौशल विकास के क्षेत्र में भी लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।

    ओडीओपी से पूरी दुनिया में मिली पहचान
    उन्होंने ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पहचान मिल रही है। स्थानीय हुनर और उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    शिक्षकों के सवालों का दिया जवाब
    कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों के साथ शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी बदलाव, एआई, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर विस्तार से संवाद किया। शिक्षकों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल और सुझाव रखे, जिनका उपमुख्यमंत्री ने जवाब दिया। कार्यक्रम में इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की प्रेरणा त्रिपाठी सहित लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के सम्मानित एवं प्रतिष्ठित शिक्षण समुदाय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।

  • New Hathras City: आगरा-अलीगढ़ के बीच 10 हजार एकड़ में नया शहर बसाने की तैयारी, जेवर एयरपोर्ट से नजदीकी बनेगी प्लस पॉइंट

    New Hathras City: आगरा-अलीगढ़ के बीच 10 हजार एकड़ में नया शहर बसाने की तैयारी, जेवर एयरपोर्ट से नजदीकी बनेगी प्लस पॉइंट

    हाथरस

    यूपी में हाथरस जिले में 10 हजार एकड़ में नया शहर बसाने की तैयारी है.यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) मास्टर प्लान 2041 (फेज 2) के तहत ये नया शहर बसा जा रहा है. करीब 4000 हेक्टेयर में ये इंडस्ट्रियल और आवासीय शहर हाथरस अर्बन सेंटर या न्यू हाथरस नाम से बसाया जा रहा है. यीडा ने इसके लिए तीन-चार जगहें चिन्हित की हैं और कंसल्टेंट कंपनी ने यमुना अथॉरिटी को रिपोर्ट सौंप दी है. अगले 15 सालों के भीतर ये नया शहर एनसीआर के पास सबसे बड़ी आवासीय परियोजना हो सकती है। 

        10,000 एकड़ का एरिया न्यू हाथरस का
        हाथरस, सासनी तहसील के 50 गांव
        यमुना अथॉरिटी के 358 गांव अधिसूचित

    हाथरस के ये गांव फायदे में रहेंगे
    हाथरस जिले के 358 गांव यमुना अथॉरिटी
    के अधिसूचित क्षेत्र में शामिल हैं. ये इलाका यमुना एक्सप्रेसवे से करीब 45 किलोमीटर में फैला है.इसका प्रारंभिक सर्वे कराया गया है.अथॉरिटी से जगह फाइनल होने के बाद एजेंसी व्यापक रिपोर्ट तैयार करेगी. न्यू हाथरस का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा. यमुना एक्सप्रेसवे से बिल्कुल सटे हाथरस की सादाबाद तहसील के 127 गांव इसमें आते हैं.  हाथरस (सदर) तहसील के 180 से 215 गांव इसके दायरे में होंगे, जो हाथरस शहर के करीब अलीगढ़-आगरा हाईवे (NH-93) के समीप हैं। 

    सासनी-सादाबाद तहसील के पास
    सासनी तहसील में 42 से 79 गांव में ब्लॉक और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर इसमें होंगे. सासनी एवं सादाबाद क्षेत्र में सासनी देहात, टुकसान, केवलगढ़ी, बीछिया, ताजपुर, धातरा खुर्द, धातरा कलां, खेड़ा बरामई, गढ़ी जैनी, रोहई, रामगढ़, जटोई, बंका, फरसौटी गांव इसमें आ सकते हैं. सदर एवं चंदपा में चंदपा, कोटा, अहवरनपुर, चंद्रगढ़ी, फुसकरा, नगला शीशम, खरगू, कोरना चमरुआ, बुधु नगला हेमराज गांव आ सकते हैं। 

    हाथरस अर्बन सेंटर (न्यू हाथरस) से शहरों की दूरी
    मथुरा : 40–45 किमी: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर, विश्राम घाट 
    वृंदावन: 45–50 किमी: बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर
    आगरा: 50–60 किमी: ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी 
    अलीगढ़:30–35 किमी: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और देश का प्रमुख ताला-हार्डवेयर हब
    राया हेरिटेज सिटी (यीडा): 25–30 किमी: यमुना एक्सप्रेसवे किनारे धार्मिक पर्यटन टाउनशिप 
    गोवर्धन और बरसाना: 65–70 किमी: गोवर्धन परिक्रमा, राधा रानी मंदिर बरसाना
    ग्रेटर नोएडा : 100–125 किमी: यमुना एक्सप्रेसवे से 1- 1.5 घंटे का सफर

    हाथरस अर्बन सेंटर 4 हिस्सों में 
    हाथरस अर्बन सेंटर को चार हिस्सों में बांटा गया है. इसमें इंडस्ट्रियल जोन में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, एमएसएमई और एक्सपोर्ट इकाइयां लगाई जाएंगी. आवासीय परियोजना में औद्योगिक कर्मचारियों और आम जनता के लिए हाउसिंग सेक्टर, ऊंची इमारतें और किफायती आवास बनेंगे.लॉजिस्टिक्स हब में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटल, मॉल-रेस्तरां और वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स पार्क बनाया जाएगा. ग्रीन एरिया के लिए पर्यावरण संतुलन के लिए कुल क्षेत्रफल का 15% से अधिक हिस्सा पार्क, ग्रीनरी और ओपन स्पेस के लिए रखा गया है। 

    हाथरस के हींग उद्योग को फायदा
    हाथरस के ODOP उत्पाद हींग और गुलाल उद्योग को पैकेजिंग, लैब टेस्टिंग और सीधी एक्सपोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी. फूड प्रोसेसिंग और डेयरी उद्योग को भी दिल्ली एनसीआर के बाहर भी बड़ा बाजार मिलेगा. यहां कांच के मोती और पीतल के आभूषण, मशीन टूल और इलेक्ट्रिक वाहन कलपुर्जे के उद्योगों को फायदा मिलेगा.मेडिकल और पावर ग्रिड मशीनरी यूनिट का यहां की इकाइयां भी फायदा उठाएंगी। 

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नजदीक
    हाथरस अर्बन सेंटर जेवर एयरपोर्ट से लिंक है. यह जेवर एयरपोर्ट के डायरेक्ट कैचमेंट एरिया में आता है.यीडा अलग से एक्सप्रेस रोड नेटवर्क बना रहा है. यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे, NH-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा हाईवे और हाथरस रेलवे जंक्शन से सीधे जुड़ा है. ये आगरा का सैटेलाइट टाउन बन सकता है. आगरा पर बढ़ रहे औद्योगिक कारखानों और आबादी के दबाव घटाने में यह मददगार होगा। 

    यमुना एक्सप्रेसवे किनारे तीन शहरी केंद्र बनेंगे
    यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी का मास्टर प्लान-2041 तैयार हो चुका है. यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी फेज-2 के तहत तीन शहरी केंद्रों का प्लान है.यीडा मास्टर प्लान 2041 के फेज-2 में ये तीन अर्बन नोड्स बनने हैं। 

     टप्पल-बाजना अर्बन सेंटर
    अलीगढ़ में 11,104 हेक्टेयर में ये नया शहर बसाया जाएगा. यहां लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब के साथ टाउनशिप बनेगी. जेवर एयरपोर्ट के बेहद नजदीक यहां मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, ट्रांसपोर्ट हब और मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनाया जा रहा है। 

    राया अर्बन सेंटर 
    मथुरा में राया अर्बन सेंटर नाम से हेरिटेज सिटी बन रही है. धार्मिक पर्यटन एवं हेरिटेज टाउनशिप 11653 हेक्टेयर में है. मथुरा-वृंदावन के धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को संजोते हुए 753 एकड़ में ये शानदार हेरिटेज सिटी, यमुना रिवरफ्रंट, थीम पार्क और वेलनेस सेंटर बनाए जा रहे हैं। 

    आगरा अर्बन सेंटर या न्यू आगरा
    ताजनगरी में आगरा अर्बन सेंटर या न्यू आगरा बसाया जा रहा है. 14 हजार हेक्टेयर के इस शहर में आईटी, पर्यटन एवं प्रदूषण मुक्त उद्योगों के साथ आगरा में यह सबसे बड़ा नोड होगा. इसमें आईटी पार्क, हॉस्पिटैलिटी, एक्सपो सेंटर और ग्रीन इंडस्ट्री भी होगा। 

  • अल्पसंख्यक आयोग के नव-नियुक्त अध्यक्ष  मोहसिन रज़ा ने मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ से की शिष्टाचार भेंट।

    अल्पसंख्यक आयोग के नव-नियुक्त अध्यक्ष मोहसिन रज़ा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की शिष्टाचार भेंट।

    लखनऊ

    उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (चेयरमैन) का पदभार ग्रहण करने के उपरांत  मोहसिन रज़ा जी ने आज मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी महाराज से उनके शासकीय आवास 5, कालिदास मार्ग, लखनऊ पर शिष्टाचार भेंट की।

    इस अवसर पर  मोहसिन रज़ा जी ने आयोग के अध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी सौंपने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।
    भेंट के दौरान प्रदेश में अल्पसंख्यक समाज के कल्याण, सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहनता से चर्चा हुई। 

     मोहसिन रज़ा जी ने मुख्यमंत्री जी को आश्वस्त किया कि आयोग पूरी निष्ठा के साथ समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करेगा

  • अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  मोहसिन रज़ा ने प्रदेश संगठन महामंत्री  धर्मपाल सिंह जी से की भेंट

    अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष मोहसिन रज़ा ने प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह जी से की भेंट

    लखनऊ 

    उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष (चेयरमैन) का पदभार ग्रहण करने के पश्चात  मोहसिन रज़ा जी ने आज भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन महामंत्री माननीय  धर्मपाल सिंह जी से शिष्टाचार भेंट की।

    इस अवसर पर  मोहसिन रज़ा जी ने यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे जाने पर प्रदेश संगठन महामंत्री जी का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया और उनका मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।

    भेंट के दौरान प्रदेश में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा अल्पसंख्यक समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए आयोग की भूमिका और आगामी कार्ययोजनाओं पर भी सार्थक चर्चा हुई।

  • हर कक्षा में नशा मुक्ति की शपथ, सप्ताह में एक दिन जागरूकता व्याख्यान, रचनात्मक गतिविधियों से अभियान से जुड़ेंगे विद्यार्थी

    हर कक्षा में नशा मुक्ति की शपथ, सप्ताह में एक दिन जागरूकता व्याख्यान, रचनात्मक गतिविधियों से अभियान से जुड़ेंगे विद्यार्थी

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और नशामुक्त जीवन को उनके संस्कार का हिस्सा बनाने की दिशा में उच्च शिक्षण संस्थानों को अभियान का प्रमुख केंद्र बनाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के आह्वान को जन आंदोलन का स्वरूप देने और ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नशा मुक्ति अभियान को और प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा। इसके तहत हर कक्षा में विद्यार्थियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाने से लेकर साप्ताहिक जागरूकता व्याख्यान, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, छात्रावासों की निगरानी और रचनात्मक गतिविधियों तक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मंगलवार को लखनऊ स्थित विधानसभा कार्यालय में नशा मुक्ति अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जिसके जीवन में नशा मुक्ति केवल एक अभियान नहीं, बल्कि संस्कार के रूप में विकसित हो। बैठक में प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, निदेशक उच्च शिक्षा सहित विभागीय अधिकारी तथा राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

    हर कक्षा में शपथ, हर सप्ताह नशा मुक्ति पर संवाद
    योगी सरकार की इस मुहिम को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़ने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री ने कक्षा शुरू होने से पहले नशा मुक्ति की संक्षिप्त शपथ दिलाने के निर्देश दिए। प्रतिदिन आधा से एक मिनट की शपथ के जरिए विद्यार्थियों के मन में नशे के प्रति नकारात्मक और स्वस्थ जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास होगा। इसके साथ प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक बार शिक्षकों द्वारा नशे के दुष्प्रभाव और नशामुक्त जीवन के सकारात्मक प्रभावों पर संक्षिप्त व्याख्यान दिया जाएगा। इसके लिए सप्ताह का एक दिन निर्धारित किया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि नशा मुक्ति का संदेश किसी एक कार्यक्रम या दिवस तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के नियमित शैक्षणिक जीवन का हिस्सा बने।

    विश्वविद्यालय से फैकल्टी तक बनेगा निगरानी तंत्र
    अभियान को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारने के लिए विश्वविद्यालयों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। महाविद्यालय और फैकल्टी स्तर पर भी नोडल अधिकारी नामित होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी देकर अभियान की नियमित निगरानी कराई जाएगी। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पूर्व में कराए गए निरीक्षणों और जांच की रिपोर्ट भी विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से अधिक छात्र संख्या वाले छात्रावासों में नशे की रोकथाम के लिए अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी संकलित की जाएगी।

    छात्रावासों पर विशेष नजर, होंगे आकस्मिक निरीक्षण
    युवाओं को नशे से बचाने की योगी सरकार की रणनीति में छात्रावासों की निगरानी महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। बाहर से छात्रावास में आने वाली सामग्री की गेट स्तर पर आवश्यक जांच करने के साथ वार्डन और संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों में नशीली सामग्री के इस्तेमाल की किसी भी संभावना को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है। हालांकि विद्यार्थियों के प्रति दृष्टिकोण केवल दंडात्मक नहीं होगा। उन्हें समझाकर और जागरूक कर नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने पर जोर रहेगा।

    पोस्टर से पदयात्रा तक, विद्यार्थी बनेंगे अभियान के भागीदार
    योगी सरकार नशा मुक्ति अभियान को केवल प्रशासनिक निगरानी तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों की भागीदारी से जनजागरूकता अभियान का स्वरूप देगी। नशे के दुष्प्रभाव और नशामुक्त जीवन के लाभ पर निबंध, कहानी, चित्रकला, पोस्टर एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों और विशेषज्ञों के व्याख्यान कराए जाएंगे। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय परिसरों में छोटी नशा मुक्ति पदयात्राएं भी निकाली जाएंगी। फैकल्टी और विभाग स्तर पर भी सीमित अवधि की पदयात्राएं आयोजित की जा सकेंगी। परिसरों के अंदर और आवश्यकता के अनुसार बाहर होर्डिंग, पोस्टर और दीवार लेखन के जरिए भी नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाया जाएगा।

    ‘नशामुक्त युवा ही विकसित उत्तर प्रदेश की ताकत’
    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि नशा मुक्ति का संदेश तभी स्थायी परिणाम देगा, जब वह विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बने। लगातार शपथ, व्याख्यान, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से इसे संस्कार में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी है। योगी सरकार संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्वस्थ, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। नशामुक्त और संस्कारवान युवा ही ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने की मजबूत नींव बनेंगे।

  • योगी सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, कई वर्गों को परिवार सहित कैशलेस इलाज मुहैया कराया

    योगी सरकार का बड़ा स्वास्थ्य कवच, कई वर्गों को परिवार सहित कैशलेस इलाज मुहैया कराया

    लखनऊ

     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में विभिन्न वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़कर स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शिक्षकों से लेकर पीआरडी जवानों, रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं तक के लिए परिवार सहित इलाज की सुविधा का विस्तार किया गया है। इन फैसलों से गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च की चिंता कम होने के साथ जरूरतमंद परिवारों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। 

    शिक्षकों और परिवारों को पांच लाख तक का स्वास्थ्य कवर

    उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से जोड़ा गया है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलेगा। सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती, उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का खर्च योजना के तहत वहन किया जाएगा। योजना में 1900 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं, जिनमें कैंसर, हृदय और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार भी शामिल है।  

    पीआरडी जवानों और परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा

    मुख्यमंत्री योगी ने हाल में प्रांतीय रक्षक दल के 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को भी प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा दी है। सरकारी और सरकार से सूचीबद्ध अस्पतालों में इस सुविधा का लाभ मिलेगा। औसत परिवार के हिसाब से 1.55 लाख से अधिक लोग इससे लाभान्वित होंगे। 

    रसोइया बहनों को भी परिवार सहित कैशलेस इलाज

    परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया गया है। मुख्यमंत्री ने उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की बढ़ोतरी के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की घोषणा की। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज के लिए कर्ज लेने की चिंता कम होगी। विभिन्न जिलों की रसोइयों ने इसे परिवार की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ी राहत बताया है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी बड़ा स्वास्थ्य कवच

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये करने की घोषणा के साथ कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का एलान किया। कार्यकर्ताओं ने इसे उनके श्रम और जिम्मेदारियों के सम्मान के साथ परिवार के लिए बड़ी राहत बताया है।

  • विशेष शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता साफ, 3 नवंबर को होगी परीक्षा

    विशेष शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का रास्ता साफ, 3 नवंबर को होगी परीक्षा

    लखनऊ

    योगी सरकार विशेष शिक्षकों समेत कार्यरत शिक्षकों के लिए निर्धारित अध्यापक पात्रता संबंधी प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए उन्हें पात्रता पूरी करने का अवसर उपलब्ध करा रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी) के आयोजन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शासन के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा स्पेशल टीईटी का विज्ञापन प्रकाशित कर दिया गया है। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों और विशेष शिक्षकों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा 3 नवंबर 2026 को होगी। ऑनलाइन पंजीकरण/ओटीआर एवं आवेदन प्रक्रिया 5 सितंबर से शुरू हो चुकी है। 

    प्राथमिक स्तर पर शिक्षक पात्र 

    पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार प्राथमिक स्तर पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालय, स्थानीय निकाय तथा राज्य सरकार/बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता या सम्बद्धता प्राप्त विद्यालय, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालय और विशेष एजुकेटर्स प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के शिक्षक पात्र होंगे। 

    उच्च प्राथमिक में भी अवसर

    उच्च प्राथमिक स्तर पर बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विद्यालयों, स्थानीय निकाय एवं मान्यता/सम्बद्धता प्राप्त विद्यालयों, राज्य सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों तथा विशेष एजुकेटर्स उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के शिक्षक स्पेशल टीईटी में शामिल हो सकेंगे। 

    4 अक्टूबर तक शुल्क, 8 अक्टूबर तक संशोधन

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार स्पेशल टीईटी के विज्ञापन प्रकाशन की तिथि 3 सितंबर 2026 है। ऑनलाइन पंजीकरण/ओटीआर एवं आवेदन 5 सितंबर से शुरू हो चुका है। ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 4 अक्टूबर 2026 तथा आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 8 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। परीक्षा 3 नवंबर 2026 को होगी।

    टीईटी-सीटीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों को राहत

    पूर्व में टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी दोबारा उत्तीर्ण करना आवश्यक/अनिवार्य नहीं है। वहीं, जिन अध्यापकों ने पूर्व में टीईटी या सीटीईटी उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें निर्धारित विज्ञापन के अंतर्गत पंजीकरण कर आवेदन करने और परीक्षा में भाग लेने की जानकारी देने के निर्देश हैं। 

    पात्र शिक्षकों तक सूचना पहुंचाने के निर्देश

    बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सभी संबंधित अध्यापकों को परीक्षा की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र शिक्षक निर्धारित समयसीमा में पंजीकरण एवं आवेदन पूरा कर सकें। इस व्यवस्था से विशेष शिक्षकों और अन्य पात्र कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया स्पष्ट हुई है।

  • पढ़ाई से पेंशन तक एआई का सहारा, योगी सरकार ने समाज कल्याण को दिया स्मार्ट टच

    पढ़ाई से पेंशन तक एआई का सहारा, योगी सरकार ने समाज कल्याण को दिया स्मार्ट टच

    लखनऊ

    योगी सरकार उत्तर प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर सुशासन को नई गति दे रही है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले अग्रणी विभागों में शामिल हो रहा है। विभाग ने शिक्षा क्षेत्र से इसकी शुरुआत की है और अब पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में भी एआई के उपयोग की तैयारी की जा रही है। उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए योजनाओं की निगरानी और लाभार्थियों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनें।

    सर्वोदय विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षा को बढ़ावा

    समाज कल्याण विभाग ने एआई आधारित तकनीकों की शुरुआत जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों से की है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल सामग्री, 3डी वीडियो और एआई आधारित लैंग्वेज लर्निंग लैब के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। एडोब एजुकेशन इंडिया पहल के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों को एडोब डिजिटल अकादमी के माध्यम से डिजिटल क्रिएटिविटी और एआई कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थी डिजिटल स्टोरीटेलिंग, रचनात्मक समस्या-समाधान और एआई-सहायित कंटेंट निर्माण जैसे भविष्य के उपयोगी कौशल सीख रहे हैं।

    पेंशन में एआई से प्रमाण पत्र सत्यापन

    वृद्धावस्था पेंशन और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में एआई आधारित प्रमाण पत्र सत्यापन के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। इससे प्रमाण पत्रों की जांच प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने में मदद मिलेगी। तकनीक आधारित सत्यापन से पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

    छात्रवृत्ति की निगरानी होगी और मजबूत

    छात्रवृत्ति योजना में आवेदन और लाभ वितरण से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के लिए भी एआई के इस्तेमाल की तैयारी है। डेटा विश्लेषण के जरिए योजना की मॉनिटरिंग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इससे योजना के क्रियान्वयन की स्थिति का बेहतर आकलन और आवश्यक सुधार संभव होगा।

    छात्रावासों में भी एआई प्रशिक्षण की तैयारी

    समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग, डेटा विश्लेषण और प्रमाण पत्रों के सत्यापन में कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। राजकीय छात्रावासों में विद्यार्थियों को एआई और पाठ्यक्रम आधारित प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जाएगा।

  • मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ

    मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ

    वाराणसी

     मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पोषण मेले में देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं और आहार विविधता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों के पोषण आहार का रंग-रूप और बनाने का तरीका भले ही अलग रहा, लेकिन सभी में पोषण के तत्वों को प्राथमिकता दी गई।

    पोषण मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए। इनमें सात राज्यों के स्टॉल के साथ आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े स्टॉल भी शामिल रहे। अनुपूरक पुष्टाहार, ईसीसीई, सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से संबंधित गतिविधियों को भी प्रदर्शित किया गया। मेले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की योजनाओं, पोषण आहार और नवाचारों की जानकारी साझा की।

    एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों को जानने का अवसर

    मिजोरम से आए जोयला  ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को उनके यहां तैयार किए जाने वाले पोषण आहार और उसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्टॉल पर जाकर भी कई नई जानकारियां मिलीं। वहीं, उनके स्टॉल पर पहुंचे लोगों ने भी मिजोरम के पोषण संबंधी प्रयोगों और व्यंजनों के बारे में जानकारी ली।
    राजस्थान से आईं एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने अपने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में संचालित पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं काफी जागरूक हैं और पोषण आहार प्लांट का संचालन भी कर रही हैं। विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभागों की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अक्षय पात्र के माध्यम से स्कूली बच्चों को गर्म और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ के साथ साझेदारी तक

    उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। सभी राज्यों के अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के बेहतर प्रयोगों को जाना और उन्हें अपने क्षेत्रों में अपनाने के लिए जानकारी हासिल की।

    उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फास्ट फूड की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। ऐसे में मिजोरम के स्टॉल पर मिलेट्स से तैयार नूडल्स का प्रयोग काफी अच्छा लगा। वहीं, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ के साथ मिलकर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी भी मिली। इससे यह जानने का अवसर मिला कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए किस तरह संपर्क और सहयोग किया जा सकता है।नीतू पुलारा ने बताया कि उत्तराखंड से आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर कई नई बातें सीखीं। इस आयोजन को लेकर उनमें काफी उत्साह देखने को मिला।

    मानदेय बढ़ने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार
     
    वाराणसी और आसपास के जिलों से कार्यक्रम में पहुंचीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने पर योगी सरकार के प्रति आभार जताया।

    गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने से उन्हें कई नई जानकारियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन जानकारियों को वे अपने कार्यक्षेत्र में अमल करने का प्रयास करेंगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता  तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वक्ताओं के संबोधन से कई नई बातें जानने को मिलीं। उन्होंने कहा कि अब इन बातों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।  

    मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद 

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडिशा,तमिलनाडु,गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका से संवाद किया। 

    तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने ‘वणक्कम’ से शुरू किया संवाद, जुड़वां बच्चों की देखभाल की सुनाई कहानी
    कार्यक्रम के दौरान तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर.रंजनी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ‘वणक्कम’ कहकर संवाद शुरू किया। उन्होंने अपने कार्य का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक परिवार में 21 दिन के जुड़वां बच्चों की मां की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में उन्होंने परिवार के लोगों को समझाया और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से संभालने के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी उनकी मदद की। 
    आर. रंजनी ने बताया कि दोनों बच्चे अब दो साल से आंगनवाड़ी केंद्र आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वस्थ और सामान्य रूप से बढ़ते हुए देखकर उन्हें काफी खुशी होती है। उनके इस अनुभव ने यह भी दिखाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका केवल पोषण आहार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वे बच्चों और परिवारों को भावनात्मक एवं व्यक्तिगत सहयोग भी देती हैं। 

    मुख्यमंत्री ने ओडिशा से आईं सहायिका से कुपोषित बच्चों के विकास में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका के बारे में जानकारी ली। गोरखपुर के बसियापुर गांव की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उनके गांव जा चुके हैं। इस पर कार्यकर्ता ने सहज अंदाज में मुख्यमंत्री से कहा कि आप मेरे घर भी आए हैं।

  • अमरकंटक में अवैध अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई

    अमरकंटक में अवैध अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई

    अनूपपुर

     कलेक्टर  रत्नाकर झा के निर्देशानुसार अमरकंटक नगरीय क्षेत्र में सुगम आवागमन एवं शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से जनहित में विशेष कार्रवाई की गई। मुख्य नगर पालिका अधिकारी  चैन सिंह परस्ते के नेतृत्व में नगरीय निकाय एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा विभिन्न प्रमुख स्थलों पर किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाया गया।

    कार्रवाई के अंतर्गत दीनदयाल चौराहा से शांति कुटीर तक सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाया गया। इसी क्रम में नर्मदा मंदिर प्राधिकरण कार्यालय के सामने शासकीय भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को भी हटाया गया। कार्रवाई के दौरान सार्वजनिक मार्गों पर यातायात एवं आम नागरिकों तथा श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमणों को हटाकर संबंधित क्षेत्रों को व्यवस्थित किया गया।

    इस संबंध में प्रशासन द्वारा बताया गया कि नगरीय क्षेत्र में शासकीय भूमि एवं सार्वजनिक मार्गों पर किए गए अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।