Category: राजस्थान

  • मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का फोकस, सैटेलाइट अस्पतालों को मजबूत करने के निर्देश

    मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का फोकस, सैटेलाइट अस्पतालों को मजबूत करने के निर्देश

    जयपुर
     मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को जोधपुर के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के सभागार में जिले की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक ली।

    श्रीनिवास ने सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव सेवाओं एवं स्वस्थ शैशव के लिए संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए हाई रिस्क प्रेगनेंसी की प्रभावी मॉनिटरिंग, गुणवत्तापूर्ण एंटीनेटल केयर तथा नवजात शिशुओं के लिए कंगारू केयर जैसी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने प्रसव सखी सहित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उपयोगी कार्यप्रणालियों को अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध परामर्श, आवश्यक जांच एवं समुचित फॉलोअप उपलब्ध कराने तथा हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान से लेकर उपचार तक निरंतर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।

     उम्मेद चिकित्सालय में मानक प्रोटोकॉल एवं उपचार प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश
    मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के मद्देनजर उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों एवं उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने ऑपरेशन थिएटरों में निर्धारित मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल की प्रभावी पालना, उपचार प्रक्रियाओं की नियमित मॉनिटरिंग तथा मरीजों की सुरक्षा के दृष्टिगत व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

    श्रीनिवास ने एनेस्थिसियोलॉजी, ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय के साथ कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम समयबद्ध रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने गंभीर एवं जटिल मामलों में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करने तथा उपचार प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित एवं परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए।

    सैटेलाइट अस्पतालों में सीजेरियन सेवाओं के विस्तार की दिशा में कार्यवाही के निर्देश
    मुख्य सचिव ने जिले के सैटेलाइट अस्पतालों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए बिलाड़ा, भोपालगढ़, धवा, पीपाड़ शहर, ओसियां एवं बालेसर स्थित चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक मानव संसाधन एवं सहायक चिकित्सकीय सेवाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा तथा उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों पर पड़ने वाले भार को भी कम किया जा सकेगा।

    उन्होंने इन चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ सीजेरियन सेक्शन सेवाओं को चरणबद्ध रूप से ऑपरेशनलाइज करने की दिशा में कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस संबंध में आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की उपलब्धता के लिए राज्य स्तर पर समुचित सहयोग एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    एंटीनेटल केयर एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में प्रक्रिया-प्रवाह को और बेहतर बनाने के निर्देश
    मुख्य सचिव ने जिले में एंटीनेटल केयर की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए गर्भवती महिलाओं को निर्धारित अंतराल पर आवश्यक परामर्श एवं जांच सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाई रिस्क प्रेगनेंसी की शीघ्र पहचान, नियमित फॉलोअप एवं आवश्यकता के अनुरूप उपचार की समेकित व्यवस्था विकसित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय में अपनाई जा रही प्रभावी कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को उपयोगी बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में चिन्हित कर अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

    राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, एचडीयू एवं आईसीयू सेवाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश
    मुख्य सचिव ने उम्मेद चिकित्सालय में अत्यधिक मरीज भार के बावजूद चिकित्सा सेवाओं के सुचारू संचालन की समीक्षा की। उन्होंने राउंड-द-क्लॉक ऑपरेशन थिएटर, हाई डिपेंडेंसी यूनिट एवं इंटेंसिव केयर यूनिट में गंभीर मरीजों एवं नवजात शिशुओं को उपलब्ध कराई जा रही जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाओं की सतत मॉनिटरिंग एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने उम्मेद चिकित्सालय को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं एवं संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने तथा गंभीर मामलों में समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सा सेवाओं में किए जा रहे सुधार एवं प्रक्रिया-प्रवाह को निरंतर आगे बढ़ाने तथा प्रभावी व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता बताई।

    बैठक में डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जिले की चिकित्सा व्यवस्थाओं, उपचार पद्धति, चिकित्सकीय संसाधनों, स्वास्थ्य अवसंरचना तथा विभिन्न चिकित्सा सेवाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।

     

  • राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी, मानसरोवर बांध पर चली चादर; कई जिलों में अलर्ट

    राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी, मानसरोवर बांध पर चली चादर; कई जिलों में अलर्ट

    सवाई माधोपुर
     राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। सवाई माधोपुर सहित कई जिलों में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने भी 2 दिन कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर वेल मार्क लो प्रेशर एरिया (WML) बना हुआ है। मानसून ट्रफ लाइन भी श्रीगंगानगर और WML से होकर गुजर रही है। इसके प्रभाव से 5 और 6 सितंबर को पूर्वी व पूर्वी-उत्तरी राजस्थान के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में बारां, दौसा, धौलपुर, झालावाड़, करौली और सवाई माधोपुर जिलों में कहीं-कहीं मध्यम से भारी और अतिभारी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान सवाई माधोपुर के तलवाड़ा में सर्वाधिक 131 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई।

    सवाई माधोपुर जिले में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश का दौर जारी है। जिले सहित अधिकतर ग्रामीणों इलाकों में सुबह से ही बारिश हो रही है। खंडार क्षेत्र में स्थित मानसरोवर बांध भारी बारिश के कारण ओवरफ्लो हो चुका है। इस सीजन में यह पहली बार है, जब मानसरोवर बांध पर चादर चली है। वहीं, भारी बारिश के चलते स्कूलों में शनिवार को छुट्टी घोषित की गई। बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बता दें कि सवाईमाधोपुर जिले में कृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को मानसून ने जोरदार दस्तक दी। सुबह से शुरू हुआ बारिश का दौर शनिवार को भी जारी है। कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश से शहर की सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों पर पानी भर गया। लगातार बारिश से मौसम में ठंडक घुल गई और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली। वहीं खरीफ फसलों के लिए भी बारिश को लाभदायक माना जा रहा है।

    लगातार दूसरे साल मानसरोवर बांध ओवरफ्लो
    जिले के खंडार क्षेत्र में स्थित मानसरोवर बांध लगातार दूसरे साल ओवरफ्लो हुआ है। इससे पहले पिछले साल 30 जुलाई और 23 अगस्त को भारी बारिश के कारण बांध ओवरफ्लो हुआ था। दो बार बांध के ओवरफ्लो होने से सवाई माधोपुर और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली बोधल पुलिया भी दो बार टूटी थी। हालांकि, इस बार बांध के ओवरफ्लो होने से किसानों के चेहरे पर खुशी छलक पड़ी। क्योंकि 16 गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।

    स्कूलों में छुट्टी घोषित
    सवाई माधोपुर जिले में लगातार बारिश एवं मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिला कलक्टर काना राम के निर्देशानुसार 5 सितम्बर को कक्षा 1 से 12 तक के सभी विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया गया है। यह आदेश जिले के समस्त राजकीय एवं गैर-राजकीय विद्यालयों पर लागू रहेगा। यह अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए रहेगा। विद्यालयों का समस्त शिक्षक एवं अन्य स्टाफ नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करेगा। इसी क्रम में जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए भी 5 सितम्बर को अवकाश रहेगा।

    आंगनबाड़ी केंद्रों के मानदेयकर्मी विभागीय निर्देशानुसार नियमित रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवी लाल मीणा को मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के सहयोग से आदेशों की पालना सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित राजकीय अथवा गैर-राजकीय विद्यालय के विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को नदी-नालों, रपटों, झरनों तथा तेज जल बहाव एवं जलभराव वाले स्थानों पर जाने से रोकें और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

    खण्डार में 24 घंटे में 181 मिमी बारिश
    पिछले 24 घंटे की बात करें तो जिले में कुल 474.30 मिमी बारिश दर्ज की गई। जिले के खण्डार क्षेत्र में सबसे ज्यादा 181 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मानसरोवर में 55, देवपुरा में 40, पांचोलास में 50, मोरा सागर में 16, भाड़ौती में 35, सवाईमाधोपुर मानटाउन में 55, सवाईमाधोपुर तहसील में 54, चौथ का बरवाड़ा में 30, बामनवास में 35, मलारना डूंगर में 33, बौली में 23, मित्रपुरा में 25, गंगापुर सिटी में 19, वजीरपुर में 7, तलावड़ा में 45, बरनाला में 42 और भांवरा में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    जानिए आगे कैसा रहेगा मौसम
    मौसम विभाग के अनुसार 5 सितंबर को भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं, एक-दो स्थानों पर अतिभारी बारिश की भी संभावना है। अजमेर, उदयपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। 6 सितंबर को भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं कोटा, अजमेर और बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से भारी बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। हालांकि भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।

  • AI डीपफेक से चुनावी फ्रॉड का नया जाल, राजस्थान पुलिस ने बताया कैसे रहें सुरक्षित

    AI डीपफेक से चुनावी फ्रॉड का नया जाल, राजस्थान पुलिस ने बताया कैसे रहें सुरक्षित

    जयपुर
    चुनावी माहौल में राजस्थान पुलिस ने आमजन को सतर्क रहने की महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। राजस्थान पुलिस ने आधिकारिक हैंडल के जरिए आमजन को ने चेतावनी दी है कि ‘डिजिटल वोटिंग’, ‘वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने’ या ‘पार्टी सदस्यता’ के नाम पर फर्जी लिंक, डीपफेक वीडियो और भ्रामक संदेशों का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं।

    साइबर फ्रॉड, जिसमें AI की अहम भूमिका
    यह साफ तौर पर साइबर फ्रॉड है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, खासकर डीपफेक तकनीक के जरिए।

    डिजिटल वोटिंग और फर्जी लिंक का खतरा
    चुनाव के दौरान अपराधी WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज भेजते हैं जिनमें कहा जाता है कि “अपना नाम वोटर लिस्ट में चेक करें”, “डिजिटल वोटिंग के लिए यहां क्लिक करें” या “पार्टी सदस्यता के लिए लिंक पर जाएं”। ये लिंक फर्जी होते हैं। जैसे ही व्यक्ति उस पर क्लिक करता है, उसका फोन मालवेयर से संक्रमित हो सकता है या फिशिंग पेज खुल जाता है जहां OTP, बैंक डिटेल्स या आधार नंबर मांगे जाते हैं। कई बार ये लिंक असली सरकारी वेबसाइट जैसे लगते हैं, लेकिन असल में डेटा चोरी का जाल होते हैं। राजस्थान पुलिस ने साफ कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

    डीपफेक वीडियो और AI की भूमिका
    यहां AI का रोल सबसे खतरनाक है। साइबर अपराधी डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर नेताओं, अधिकारियों या मशहूर हस्तियों के नकली वीडियो बना रहे हैं। इनमें कोई नेता या अधिकारी बोलते नजर आते हैं कि “वोटर लिस्ट अपडेट करवाएं” या “इस लिंक से वोट डालें”। ये वीडियो इतने रियल लगते हैं कि आम आदमी आसानी से विश्वास कर लेता है। डीपफेक AI टूल्स से बनाए जाते हैं, जिनमें फेस स्वैप, वॉइस क्लोनिंग और लिप-सिंक तकनीक इस्तेमाल होती है। राजस्थान पुलिस की चेतावनी में साफ तौर पर डीपफेक वीडियो का जिक्र है, जो बताता है कि यह सिर्फ सामान्य साइबर फ्रॉड नहीं, बल्कि AI-सक्षम आधुनिक ठगी है। पहले भी पुलिस ने अमिताभ बच्चन जैसे सेलिब्रिटीज के फर्जी वीडियो से इन्वेस्टमेंट स्कैम के मामले में अलर्ट जारी किया था।

    पुलिस ने तीन मुख्य सावधानियां बताई हैं
        किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
        अपना OTP, बैंक PIN या कोई भी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
        सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज की सत्यता जांचे बिना उसे शेयर न करें।

    ठगी होने पर यहां संपर्क करें
    अगर फिर भी कोई ठगी हो जाए तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 9256001930, 9257510100 या 1930 पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और ऐप ही विश्वसनीय स्रोत हैं। किसी भी जानकारी के लिए उन्हीं पर निर्भर रहें। राजस्थान पुलिस का यह अलर्ट समय की मांग है।

    AI ने अपराधियों को और ताकतवर बना दिया है
    चुनावी मौसम में फेक न्यूज और साइबर ठगी दोनों बढ़ जाती हैं। AI तकनीक ने अपराधियों को और ताकतवर बना दिया है, लेकिन जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। नागरिकों से अपील है कि सतर्क रहें, परिवार और दोस्तों को भी बताएं। याद रखें – कोई भी सरकारी एजेंसी OTP या बैंक डिटेल्स नहीं मांगती। थोड़ी सी सावधानी से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

  • ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के मिशन पर BJP, BL संतोष ने बनाई रणनीति; Gen-Z वोटरों और सोशल मीडिया पर फोकस

    ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के मिशन पर BJP, BL संतोष ने बनाई रणनीति; Gen-Z वोटरों और सोशल मीडिया पर फोकस

    जयपुर
    राजस्थान में होने जा रहे नगरीय निकाय चुनाव 2026 के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष का जयपुर दौरा केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रदेश की भावी राजनीति का नया रुख तय कर दिया है। जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को दिनभर चली मैराथन बैठकों में बीएल संतोष ने साफ संदेश दिया कि स्थानीय निकाय चुनाव को कोई भी कार्यकर्ता या बड़ा नेता हल्के में न ले। उन्होंने नेताओं को आगाह करते हुए कहा कि निकाय चुनाव भले ही देखने में छोटा लगे, लेकिन इसका सीधा असर राष्ट्रीय स्तर के चुनावों और राजनीतिक नैरेटिव पर पड़ता है। इस दौरान उन्होंने पार्टी में टिकट वितरण के बाद पनपे असंतोष और भीतरघात करने वाले नेताओं के खिलाफ गोपनीय सूची तैयार कर तुरंत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    दिनभर चली इन बैठकों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल, चुनाव प्रभारी हरीश द्विवेदी और संगठन महामंत्री अजय कुमार सहित पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी मौजूद रहे।

    भीतरघातियों की बनाओ अलग लिस्ट: बीएल संतोष
    निकाय चुनाव के दौरान अक्सर पार्टी के भीतर ही खड़े होने वाले बागियों और भीतरघातियों को लेकर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

    बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट कहा-
    गोपनीय सूची तैयार होगी: जो भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी के घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ काम कर रहे हैं या चुपचाप विरोधियों की मदद कर रहे हैं, उनकी जिलेवार सूची बनाई जाए।

    जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ चुनाव के बाद नहीं, बल्कि चुनाव के दौरान ही सख्त एक्शन लिया जाएगा।

    पार्टी अनुशासन सर्वोपरि: उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि व्यक्तिगत मतभेदों को किनारे रखकर सभी को केवल कमल के निशान के लिए मैदान में उतरना होगा।

    'प्रत्याशी कमजोर हो तो संगठन बने ताकत'
    भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने कहा कि जिसे जो जिम्मेदारी दी गई है, वह उसे पूरी मजबूती से निभाए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव को हल्के में न लें और हर निकाय में जीत के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से चुनाव लड़ा जाए।

    एयरपोर्ट जाते समय बीएल संतोष जयपुर शहर कार्यालय पहुंचे और जयपुर नगर निगम की कोर कमेटी की बैठक ली। जयपुर नगर निगम में बोर्ड कैसे बनेगा, इसका प्लान समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी प्रत्याशी कमजोर होने के बावजूद संगठन को उसके साथ मजबूती से खड़ा रहकर हर हाल में जीत का प्रयास करना होगा।

    स्थानीय नेतृत्व का बनेगा रिपोर्ट कार्ड
    विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय नेताओं ने निकाय चुनाव में संगठन के लिए कितना काम किया, किन क्षेत्रों में नेतृत्व प्रभावी रहा और कहां कमी रही, इसका फीडबैक भी केंद्रीय संगठन तक पहुंचेगा।

    युवाओं को गढ़ने का समय
    उन्होंने चुनावी रणनीति में युवाओं (जेन-जी) को केंद्र में रखने की जरूरत जताई। कहा कि युवाओं की बदलती सोच और उनकी अपेक्षाओं को समझना होगा। अब युवाओं को गढ़ने और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने का भी समय है। संतोष ने कहा कि केवल डबल इंजन नहीं, अब ट्रिपल इंजन सरकार बनानी है। इसके लिए प्रदेश के हर निकाय में भाजपा की जीत जरूरी है।

    बैठक के दूसरे अहम सत्र में बीएल संतोष ने मीडिया और सोशल मीडिया टीम के साथ अलग से बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र नए दौर के युवाओं यानी 'Gen-Z' (18 से 25 वर्ष के मतदाताओं) को पार्टी से जोड़ना रहा।

    डिजिटल नैरेटिव पर जोर: उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को युवाओं की भाषा में रील्स, इंफोग्राफिक्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए पेश किया जाए।

    लोकल इश्यूज पर घेराबंदी: विरोधी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव का तुरंत और तथ्यों के आधार पर जवाब देने के लिए सोशल मीडिया टीमों को 24 घंटे एक्टिव रहने को कहा गया है।

    CM भजनलाल शर्मा से मैराथन चर्चा
    शुक्रवार शाम को बीएल संतोष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ अलग से एक बंद कमरे में लंबी बैठक की। इस बैठक में राज्य सरकार की योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन, नगरीय क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों और जनता के बीच सरकार की छवि को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बीएल संतोष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार के 32 महीनों के कामकाज का सीधा लाभ निकाय चुनाव में पार्टी को मिलना चाहिए।

    स्पीकर देवनानी के खिलाफ कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग
    एक तरफ जहां जयपुर में भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को धार दे रही थी, वहीं दूसरी तरफ अजमेर में इस चुनाव को लेकर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) को विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन की लिखित शिकायत सौंपी है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने आरोप लगाया है कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए वासुदेव देवनानी लगातार भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। प्रचार के दौरान वे सरकारी गाड़ियों और संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं तथा भाजपा का दुपट्टा पहनकर बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेकर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की है।

  • CM भजनलाल बनाम लोकल कनेक्ट: राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की स्टार पावर और कांग्रेस की रणनीति आमने-सामने

    CM भजनलाल बनाम लोकल कनेक्ट: राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की स्टार पावर और कांग्रेस की रणनीति आमने-सामने

    जयपुर
    राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। इन्हीं हलचलों के बीच अब बड़ी खबर ये है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सबसे बड़े चेहरे के तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चुनावी फ्रंटलाइन पर उतार रही है। 'पार्षद चुनाव' में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट अपील के लिए मुख्यमंत्री के उतरने से प्रचार अभियान का पूरी तरह से हाई-वोल्टेज मोड पर आना तय है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस बार स्टेट या सेंट्रल लेवल के बड़े नेताओं के बजाय पूरी तरह से स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर दांव लगाने की साइलेंट स्ट्रेटजी अपनाई है।

    BJP जहां मुख्यमंत्री के 10 मेगा रोड शो और केंद्रीय मंत्रियों के सघन डोर-टू-डोर कैम्पेन के जरिए हर एक बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, मोहल्ला-लेवल कनेक्ट और वार्ड प्रत्याशियों की व्यक्तिगत साख के दम पर चुनाव जीतने का दावा कर रही है। राजस्थान के इस सियासी परिदृश्य में यह मुकाबला इस बात का बड़ा टेस्ट है कि क्या भाजपा की मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय नेतृत्व की हाई-प्रोफ़ाइल ब्रैंडिंग, कांग्रेस की ग्राउंड-लेवल पर स्थानीय  नेटवर्क पर भारी पड़ पाएगी या नहीं?
    BJP ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कैम्पेन को इस तरह डिजाइन किया है कि राज्य के सबसे महत्वपूर्ण शहरों को कवर किया जा सके। फाइनल फेज के प्रचार में CM भजनलाल शर्मा सीधे voters से कनेक्ट करेंगे और पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगेंगे।

    शनिवार (उदयपुर एवं भीलवाड़ा): कैम्पेन की शुरुआत मेवाड़ अंचल से हो रही है। CM भजनलाल शर्मा उदयपुर और भीलवाड़ा में भव्य रोड शो करेंगे, जहां मेवाड़ के शहरी वोटों को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

    6 सितंबर (बीकानेर, अजमेर एवं जोधपुर): एक ही दिन में तीन बड़े जिलों को कवर करने का टारगेट रखा गया है। मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान के इन प्रमुख शहरों में रोड शो के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जाएगा।

    7 सितंबर (भरतपुर एवं अलवर): पूर्वी राजस्थान और मत्स्य क्षेत्र के सबसे अहम केंद्रों भरतपुर और अलवर में CM के रोड शो प्रस्तावित हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र काफी संवेदनशील माना जाता है।

    8 सितंबर (पाली एवं कोटा): हाड़ौती क्षेत्र के कोचिंग हब कोटा और औद्योगिक शहर पाली में कैम्पेन को बनाए रखने के लिए रोड शो आयोजित किए जाएंगे।

    9 सितंबर (जयपुर): Election campaign के आखिरी दिन राजधानी जयपुर में मेगा रोड शो होगा। जयपुर नगर निगम के अलग-अलग वार्डों में CM का यह शो पूरे प्रचार अभियान का भव्य समापन होगा।

    रोड शोके साथ सांगठनिक बैठकें
    BJP की इस आक्रामक रणनीति में सिर्फ रोड शो और जनसभाएं ही शामिल नहीं हैं, बल्कि संगठन को पूरी तरह एक्टिव करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। रोड शो के साथ-साथ मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रदेश नेता हर जिले में अहम सांगठनिक बैठकें भी लेंगे।

    इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बूथ कार्यकर्ताओं के साथ डायरेक्ट संवाद कायम करना और स्थानीय स्तर पर यदि कोई अंदरूनी गुटबाजी या कमजोरी है, तो उसे मौके पर ही दूर करना है। पार्टी के Central Election In-charge, Co-incharge और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी इन क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों और स्थानीय मुद्दों के हिसाब से विशिष्ट वार्डों और नगर निगमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    कांग्रेस का 'लोकल फॉर्मूला': बड़ा चेहरा नहीं, लोकल कैंडिडेट ही हीरो
    जहां BJP स्टार प्रचारकों की फौज के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने इस बार अपना पूरा फोकस स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय नेताओं पर शिफ्ट कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार, नगरीय निकाय चुनाव सफाई, स्ट्रीट लाइट्स, स्थानीय सड़कों और वार्ड विकास जैसे local issues पर लड़े जाते हैं, इसलिए इसमें स्थानीय नेतृत्व का ही एक्टिव होना सबसे ज्यादा जरूरी है।

    कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे मुख्य बिंदु:
    रीजनल ओनरशिप: स्थानीय विधायकों, पूर्व विधायकों और वार्ड स्तर के नेताओं को पूरी छूट दी गई है कि वे अपने हिसाब से campaign डिजाइन करें।

    डोर-टू-डोर माइक्रो कनेक्ट: बड़े तामझाम के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी वार्डों में घर-घर जाकर स्थानीय समस्याओं को उठा रहे हैं।

    नो सेंट्रल इंटरवेंशन: जब तक स्थानीय unit विशेष मांग न करे, तब तक जयपुर या दिल्ली से किसी बड़े नेता को प्रचार में नहीं उतारा जाएगा।

    स्टार पावर vs वार्ड-लेवल कनेक्ट
    राजस्थान का शहरी वोटर हमेशा से राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाकर मतदान करता आया है। निकाय चुनाव 2026 में दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं आमने-सामने हैं:

    BJP की ताकत: Chief Minister का सीधा जुड़ाव, केंद्रीय मंत्रियों का प्रभाव और मजबूत संगठन जो हर बूथ तक वोटर को रीच करती है।

    कांग्रेस की ताकत: वार्ड स्तर की नाराजगी को भुनाना, local issues को हाइलाइट करना और प्रत्याशी की चौबीसों घंटे उपलब्धता पर जोर देना।

    सितंबर 2026 में होने वाले इन चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि राजस्थान के शहरी मतदाताओं पर CM भजनलाल शर्मा के रोड शो का कितना असर हुआ है और क्या कांग्रेस का 'शांत एवं स्थानीय' फॉर्मूला राजस्थान के नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब होता है या नहीं।

     

  • श्रीगंगानगर-अलवर में आदेश जारी, विशेष शिक्षा शिक्षक अब बच्चों की पढ़ाई पर देंगे पूरा ध्यान

    श्रीगंगानगर-अलवर में आदेश जारी, विशेष शिक्षा शिक्षक अब बच्चों की पढ़ाई पर देंगे पूरा ध्यान

    जयपुर
     विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए श्रीगंगानगर और अलवर से राहत की खबर सामने आई है। दोनों जिलों के शिक्षा विभागों ने निर्देश जारी कर विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां नहीं देने को कहा है। यानी अब इन शिक्षकों को कार्यक्रमों और परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे ऐसे कामों में नहीं लगाया जाएगा, जो उनकी मुख्य जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं हैं।

    75 हजार से ज्यादा बच्चों की जिम्मेदारी
    यह निर्देश ऐसे समय आया है जब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 75 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में विशेष शिक्षा शिक्षकों की महत्लपूर्ण भूमिका है। ऐसे में विभाग का मानना है कि शिक्षकों का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय उन्हें CWSN बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना चाहिए।

    शिक्षकों को किन कामों पर देना होगा ध्यान?
    आदेश में बताया गया है कि सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए जिला स्तर पर विशेष शिक्षा शिक्षक और रिसोर्स पर्सन नियुक्त किए हैं। इन शिक्षकों को CWSN बच्चों को पढ़ाने और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से विशेष दक्षताएं देने की ट्रेनिंग मिली हुई है।

    इन शिक्षकों का काम सिर्फ अपने स्कूल के CWSN बच्चों को पढ़ाना नहीं है। उन्हें अपने स्कूल के अलावा आसपास के प्राथमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों और शहरी क्लस्टर प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के क्षेत्र में आने वाले CWSN बच्चों को भी पढ़ाई में मदद देनी होती है।

    इसके साथ ही इन शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़ी कई गतिविधियां भी संभालनी होती हैं। इनमें CWSN बच्चों के लिए परिवहन, एस्कॉर्ट, रीडर और छात्रवृत्ति भत्ते से जुड़ी सुविधाओं का काम शामिल है। इसके अलावा ऐसे बच्चों की पहचान करना भी इन शिक्षकों की जिम्मेदारी है, जिन्हें विशेष शिक्षा और सहायता की जरूरत है।

    संस्थान प्रधानों को दिए निर्देश
    विभाग ने सभी संस्थान प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार न दिया जाए। उनसे गैर-शैक्षणिक काम कराने के बजाय उन्हें विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई, मदद और ऐसे बच्चों की पहचान से जुड़े कामों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।

    राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने भी कहा कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इन शिक्षकों का काम सिर्फ बच्चों को पढ़ाना ही नहीं है। वे स्कूल में विशेष जरूरत वाले बच्चों के व्यवहार को संभालने और उन्हें सहज महसूस कराने में भी मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद ब्लॉक स्तर पर तैनात विशेष शिक्षक ऐसे दूसरे बच्चों की पहचान करने और उन्हें सही स्कूलिंग से जोड़ने का काम भी करते हैं। इसलिए इन शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

    पहले भी हो चुकी है भर्ती और पदोन्नति
    पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार ने 242 विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के लिए वित्तीय मंजूरी दी थी। इसके बाद कक्षा 11वीं और 12वीं के विशेष जरूरत वाले बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष शिक्षक मिलने का रास्ता साफ हुआ।

    राज्य में पहली बार विशेष शिक्षा शिक्षकों को व्याख्याता के पद पर भर्ती और पदोन्नत किया गया। इससे पहले साल 2007 में ग्रेड-III शिक्षक के पद पर विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती हुई थी। इसके बाद 2015 में कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती की गई थी।

     

     

  • डॉलर-दिरहम से लेकर दिनार तक, सांवरिया सेठ को भक्तों ने चढ़ाई 60 देशों की करेंसी

    डॉलर-दिरहम से लेकर दिनार तक, सांवरिया सेठ को भक्तों ने चढ़ाई 60 देशों की करेंसी

    भीलवाड़ा
     श्रीसांवरिया सेठ मंदिर में देश के साथ विदेशों से भी विदेशी मुद्रा पहुंच रही है। आठ महीनों में मंदिर के भंडार में 60 देशों की मुद्राएं मिली हैं। इनमें अमरीका, यूएई, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित एशिया, यूरोप और अफ्रीका के देशों की करेंसी शामिल है। विदेशी मुद्रा में इस वर्ष अब तक सबसे ज्यादा 45,351 अमरीकी डॉलर मिले हैं। इसके बाद 21,485 यूएई दिरहम, 1,310.25 कुवैती दिनार, 1,367 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और 1,630 कनाडाई डॉलर प्राप्त हुए हैं। मंदिर के भंडार में प्राप्त विभिन्न देशों की मुद्राओं को अमरीकी डॉलर में परिवर्तित करने पर इनका कुल मूल्य 62,800 अमरीकी डॉलर आंका गया है। प्रचलित विनिमय दर के आधार पर यह राशि भारतीय मुद्रा में करीब 59 लाख रुपए है।

    प्रमुख विदेशी मुद्रा
    देश                    मुद्रा
    अमरीका       45,351 डॉलर
    यूएई            21,485 दिरहम
    कुवैत           1,310.25 दिनार
    ऑस्ट्रेलिया    1,367 डॉलर
    कनाडा          1,630 डॉलर

    अप्रेल में डॉलर, अगस्त में दिरहम
    16 अप्रेल की गणना में एक बार में 21,127 अमरीकी डॉलर मिले। वहीं 11 अगस्त की गणना में 8,955 यूएई दिरहम प्राप्त हुए। फरवरी-मार्च में ईरान के 4,63,500 रियाल, वियतनाम के 2,29,000 डोंग भी मिले।

    मुस्लिम बहुल देशों से भी चढ़ावा
    सेठ के भंडार में मुस्लिम बहुल देशों की मुद्राएं भी पहुंच रही हैं। पिछले आठ महीने के आंकड़ों में यूएई से 21,485 दिरहम मिले हैं। इसके अलावा ईरान से 4,68,500 रियाल और इंडोनेशिया से 1,63,000 रुपया प्राप्त हुए। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और खाड़ी देशों कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन व कतर की मुद्राएं भी भंडार में मिली हैं।

    अधिकृत बैंकों से रुपए में बदली जाती है मुद्रा
    मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिनेश चंद्र धाकड़ ने बताया कि मंदिर मंडल विदेशी नोटों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अधिकृत बैंकों के जरिए भारतीय रुपए में परिवर्तित करवाता है। प्राप्त राशि का उपयोग मंदिर के भंडारे और सामाजिक-धार्मिक सेवा कार्यों में किया जाता है।

    व्यापारी सांवरिया सेठ को मानते हैं बिजनेस पार्टनर
    चित्तौड़गढ़ के मंडफिया गांव में स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर अपनी अलग मान्यताओं और भक्तों की गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। यहां खास तौर पर व्यापारी भगवान सांवरिया सेठ को अपने बिजनेस पार्टनर के रूप में मानते हैं। मान्यता के अनुसार, लोग अपने व्यापार के मुनाफे का कुछ हिस्सा भगवान के नाम पर निकालकर मंदिर में चढ़ाते हैं। इसी वजह से मंदिर में हर महीने बड़ी मात्रा में चढ़ावा आने की जानाकारी सामने आती है।

  • राजस्थान में मानसून का बदला मिजाज, 21% कम बारिश के बीच इन इलाकों में बरसेंगे बादल

    राजस्थान में मानसून का बदला मिजाज, 21% कम बारिश के बीच इन इलाकों में बरसेंगे बादल

    जयपुर
     राजस्थान में मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 3 सितंबर तक प्रदेश में 295.30 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 374.55 मिमी रहती है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य के मुकाबले 21.16 % कम बारिश हुई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के 21 जिलों में बारिश कम दर्ज की गई है, जबकि 18 जिलों में बारिश सामान्य रही। वहीं सिर्फ दो जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। प्रदेश में कोई भी जिला असामान्य या बहुत कम बारिश वाली श्रेणी में नहीं है

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    आंकड़ों के मुताबिक अगर सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो, डीग में सबसे ज्यादा अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है। यहां सामान्य से 31.04 फीसदी अधिक बारिश हुई। इसके बाद फलोदी में 21.57 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई। वहीं सलूंबर सामान्य बारिश वाली श्रेणी में रहा। यानी प्रदेश में कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन कई जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से पीछे रही। बता दें राजस्थान में इस बार मानसून सम से पहले आ गया था, उसके बाद भी ऐसे हालात हैं।

    गहलोत ने दी यह सलाह
    पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार से संभावित सूखे जैसे हालात के लिए अभी से आकस्मिक योजना तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार को हालात बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। सूखे से निपटने के पिछले अनुभवों को देखते हुए सरकार को पहले से ही तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए।

    पूर्वी राजस्थान में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट
    मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। 4 और 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में कुछ जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। वहीं पश्चिमी राजस्थान में मानसून फिलहाल कमजोर रहने के आसार हैं। जोधपुर संभाग के अधिकांश हिस्सों में गतिविधियां कमजोर रहेंगी, जबकि 4 से 6 सितंबर के बीच बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और नागौर में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

     

  • राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: ट्रेनिंग के बाद 1-2 साल सेवा जरूरी, सरोगेसी पर महिला कर्मचारियों को राहत

    राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: ट्रेनिंग के बाद 1-2 साल सेवा जरूरी, सरोगेसी पर महिला कर्मचारियों को राहत

    बीकानेर
    सरकारी नौकरी में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए है। वहीं महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामले में राहत दी गई है। नए नियम के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद स्वतंत्र प्रभार संभालने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारी को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बॉन्ड देना होगा। प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देने अथवा दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर सरकार प्रशिक्षण पर किए गए खर्च और अन्य प्रशिक्षण संबंधी खर्च की वसूली कर सकेगी। हालांकि, वसूली में कर्मचारी को दिया गया वेतन तथा नियमानुसार मिले यात्रा एवं दैनिक भत्ते शामिल नहीं होंगे।

    यदि कर्मचारी को केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राजस्थान सरकार के पूर्ण अथवा आंशिक स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम, क्वासी-गवर्नमेंट संगठन, आरबीआई या ग्रामीण बैंक में नौकरी मिलती है और इसके लिए राजस्थान सरकार की सेवा छोड़नी पड़ती है, तो बॉन्ड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी। ऐसे कर्मचारी से नए नियोक्ता के यहां निर्धारित अवधि तक सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा। अवधि और शर्ते संबंधित प्रशासनिक विभाग तय करेगा।

    6 माह तक की ट्रेनिंग पर 1 साल की सेवा जरूरी
    तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए और नियम 7 (8) (बी) के तहत ड्यूटी पर माने गए कर्मचारियों पर भी बॉन्ड की शर्त लागू होगी। 3 महीने से अधिक और 6 महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम एक वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। 6 महीने से अधिक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम दो वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। निर्धारित अवधि पूरी किए बिना सेवा छोड़ने या दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली का प्रावधान रहेगा।

    पहले से आवेदन किया है, तो भी मिल सकेगी अनुमति
    यदि किसी ने राजस्थान सरकार की सेवा में आने से पहले ही केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार, सरकारी उपक्रम या संबंधित संस्थाओं में आवेदन कर रखा था और उस समय आवेदन उचित माध्यम से भेजना संभव नहीं था, तो उसे भी इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है। इसके लिए कर्मचारी को राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने के एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब सामान्य स्थिति में यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन से अधिक स्पेल में नहीं दिया जाएगा।

    पहली बार अलग मातृत्व अवकाश
    यदि सरोगेट मां और कमीशनिंग मां में से कोई एक या दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो सरोगेट मां को 180 दिन तक मातृत्व अवकाश, कमीशनिंग मां को 90 दिन तक मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। सरोगेट मां के लिए विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना, उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना और इम्प्लांटेशन के समय उसका स्वयं का बच्चा होना जैसी शर्तें रखी गई हैं। वहीं कमीशनिंग मां की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

  • Rajasthan Civic Polls: टिकट कटने पर बागियों ने खोला मोर्चा, BJP-कांग्रेस के हजारों प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में

    Rajasthan Civic Polls: टिकट कटने पर बागियों ने खोला मोर्चा, BJP-कांग्रेस के हजारों प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में

    जयपुर.

    राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के सामने मुकाबला सिर्फ एक-दूशरे से नहीं है. दोनों पार्टियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके अपने खुद के ही लोग बन गए हैं. टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों ने बड़ी संख्या में निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया है और अब मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं. कुल मिलाकर देखें तो ये दोनों पार्टियों के बीच ऐसे लोग हैं जो ये समझने में मुश्किल हालात बना रहे कि कौन जीत दर्ज कर सकता है.

    आंकड़ों और पार्टी पदाधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में मोटे तौर पर बीजेपी के करीब 9 हजार और कांग्रेस के 8 हजार से ज्यादा बागी चुनाव मैदान में हैं. दोनों पार्टियों के पास अभी सभी निकायों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन आंकड़ों को मोटा अनुमान माना जा रहा है. लेकिन संख्या से ज्यादा चिंता इस बात की है कि इन बागियों में केवल सामान्य दावेदार ही नहीं हैं. कई पुराने पार्टी पदाधिकारी, पूर्व जनप्रतिनिधि, पूर्व पार्षद और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ रखने वाले नेता भी अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. यही वजह है कि टिकट वितरण के बाद अब दोनों दलों की पूरी रणनीति बदलती दिखाई दे रही है. पहले टिकट देने की लड़ाई थी, अब टिकट बचाने के बाद वोट बचाने की लड़ाई शुरू हो गई है

    किन इलाकों में सबसे ज्यादा बागी
    पार्टी    बागियों की अनुमानित संख्या    सबसे ज्यादा चर्चा वाले इलाके
    बीजेपी    करीब 9 हजार    श्रीगंगानगर, बालोतरा, निम्बाहेड़ा, कोटपूतली, जैसलमेर
    कांग्रेस    8 हजार से ज्यादा    बालोतरा, जैसलमेर, बाड़मेर, टपूतली, सीसवाली, कुचेरा, झालरापाटन

    यहां सबसे अहम बात यह है कि यह पूरे प्रदेश का मोटा अनुमान है. दोनों पार्टियों के पास अभी हर निकाय का पूरा आंकड़ा नहीं है. इसलिए इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता

    बीजेपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द श्रीगंगानगर
    बीजेपी की बगावत में श्रीगंगानगर सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है. यहां नगर परिषद में 70 बागी मैदान में हैं. यह संख्या अपने आप में बताती है कि टिकट वितरण के बाद पार्टी के अंदर असंतोष किस स्तर तक पहुंचा है. इसके बाद बालोतरा में 57, निम्बाहेड़ा में 37, कोटपूतली में 35, जैसलमेर में 30 और पदमपुर में 25 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा बाड़मेर में 23, बारां में 22, सीसवाली में 24 और भीलवाड़ा में 21 बागियों ने बीजेपी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. बीकानेर नगर निगम में 15, सादुलशहर में 17 और श्रीविजयनगर में 12 बागी मैदान में हैं.

    बीजेपी के प्रमुख बागी आंकड़े
    निकाय    बीजेपी के बागी
    श्रीगंगानगर    70
    बालोतरा    57
    निम्बाहेड़ा    37
    कोटपूतली    35
    जैसलमेर    30
    पदमपुर    25
    सीसवाली    24
    बाड़मेर    23
    बारां    22
    भीलवाड़ा    21

    सादुलशहर    17
    बीकानेर    15
    श्रीविजयनगर    12

    बीजेपी में सिर्फ दावेदार नहीं, बड़े नाम भी मैदान में
    बीजेपी की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि कई जगह बगावत करने वालों की स्थानीय पहचान मजबूत है. डीग में बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश कौशिक निर्दलीय मैदान में हैं. बूंदी में नेता प्रतिपक्ष मुकेश माधवानी ने भी मोर्चा खोल दिया है. सादड़ी में पूर्व पालिकाध्यक्ष दिलीप सोनी, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष घीसाराम जाट और बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष नारायण राइका निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. राजसमंद में पूर्व पार्षद गोवर्धन लड्ढा, सुरेश माली और हिम्मत मेहता भी अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव मैदान में हैं. यह सामान्य टिकट नाराजगी से थोड़ा अलग मामला है. ऐसे नेताओं के अपने समर्थक और स्थानीय संपर्क होते हैं. अगर ये लोग चुनाव तक मैदान में टिके रहते हैं तो बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार को सीधे नुकसान पहुंच सकता है.

    कांग्रेस की कहानी भी बहुत अलग नहीं
    कांग्रेस में भी बगावत का आंकड़ा बड़ा है. श्रीगंगानगर में कांग्रेस के 45 बागी मैदान में हैं. बालोतरा में 34, जैसलमेर में 24 और बाड़मेर में 21 बागी कांग्रेस प्रत्याशियों की राह मुश्किल कर रहे हैं. सीसवाली और कुचेरा में 21-21 बागी चुनाव लड़ रहे हैं. झालरापाटन में 19 और पिड़ावा में 18 बागी मैदान में हैं. कोटपूतली और पदमपुर में कांग्रेस के 25-25 बागी बताए जा रहे हैं, जबकि बीकानेर में 13 बागियों ने पार्टी का गणित बिगाड़ा है.

    कांग्रेस के प्रमुख बागी आंकड़े
    निकाय    कांग्रेस के बागी
    श्रीगंगानगर    45
    बालोतरा    34
    कोटपूतली    25
    जैसलमेर    24
    बाड़मेर    21
    सीसवाली    21
    कुचेरा    21
    झालरापाटन    19
    पिड़ावा    18
    पदमपुर    25
    बीकानेर    13

    मान लीजिए किसी वार्ड में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों पार्टियों का अपना मजबूत वोट बैंक है. इसी बीच बीजेपी का कोई मजबूत स्थानीय दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ता है. ऐसे में वह वोट सीधे कांग्रेस को नहीं देता, लेकिन बीजेपी के उम्मीदवार के वोट जरूर काट सकता है. इसलिए बागी उम्मीदवार कई सीटों पर जीतने के लिए नहीं, बल्कि अधिकृत प्रत्याशी की जीत रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है. निकाय चुनाव में कई वार्डों में जीत और हार का अंतर बहुत कम रहता है. ऐसे में कुछ सौ वोट भी पूरा चुनाव पलट सकते हैं. अगर किसी मजबूत बागी को एक-दो हजार वोट मिल जाते हैं तो वह अपनी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार की जीत का रास्ता रोक सकता है.

    अब दोनों पार्टियों का फोकस एक ही है , बागी बैठाओ
    नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की कोशिश अब यही है कि प्रभावशाली बागियों को किसी तरह चुनाव मैदान से हटाया जाए. पार्टी के नेता ऐसे दावेदारों से संपर्क कर रहे हैं. उन्हें समझाया जा रहा है कि चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाने से संगठन को नुकसान होगा. लेकिन मुश्किल यह है कि कई बागी सिर्फ टिकट के लिए नाराज नहीं हैं. वे लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि चुनाव जीतने की स्थिति में होने के बावजूद उनका टिकट काट दिया गया. ऐसे लोगों के लिए सिर्फ यह कहना कि पार्टी का फैसला मानिए, काफी नहीं होगा. यहीं से मान-मनुहार की राजनीति शुरू होती है.

    वापसी की आखिरी कोशिश क्यों जरूरी है?
    पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि बागी अगर नाम वापसी तक मैदान छोड़ देते हैं तो नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है. लेकिन अगर नाम वापसी के बाद भी वे चुनाव मैदान में बने रहते हैं तो पार्टी के पास उन्हें रोकने का रास्ता काफी सीमित हो जाएगा. इसीलिए आने वाले समय में दोनों पार्टियों के बड़े नेता और स्थानीय संगठन अपने-अपने प्रभावशाली बागियों से संपर्क बढ़ाएंगे. किसी को संगठन में जिम्मेदारी का भरोसा दिया जा सकता है, किसी को आगे राजनीतिक मौका मिलने की बात कही जा सकती है और कहीं स्थानीय नेताओं के जरिए समझाइश की जा सकती है.

    बीजेपी के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

        करीब 9 हजार बागियों के अनुमान से बड़ी संख्या में सीटों पर वोट बंटने का खतरा
        श्रीगंगानगर, बालोतरा और निम्बाहेड़ा जैसे इलाकों में ज्यादा बगावत
        पुराने पदाधिकारी और पूर्व जनप्रतिनिधि भी मैदान में
        निर्दलीय बागी पार्टी के पारंपरिक वोट को प्रभावित कर सकते हैं
        मजबूत बागियों को समय रहते बैठाना सबसे बड़ी प्राथमिकता

    कांग्रेस के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

        8 हजार से ज्यादा बागियों का अनुमान
        बालोतरा, जैसलमेर और बाड़मेर में ज्यादा असंतोष
        कई जगह पुराने नेताओं और पदाधिकारियों का मैदान में उतरना
        पिड़ावा जैसे इलाकों में संगठन से बाहर जाने वाले नेताओं का असर
        अधिकृत प्रत्याशियों के वोट बंटने का सीधा खतरा