Category: राजस्थान

  • राजस्थान में स्कूलों के 9,334 नए कक्ष बनेंगे, निर्माण गुणवत्ता पर सरकार की पैनी नजर

    राजस्थान में स्कूलों के 9,334 नए कक्ष बनेंगे, निर्माण गुणवत्ता पर सरकार की पैनी नजर

    जयपुर
     स्कूली शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जांच के दौरान निर्माण कार्य में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यादव सोमवार को शासन सचिवालय में स्कूली शिक्षा विभाग के विभिन्न निर्माण कार्यों को लेकर वीसी के माध्यम से समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने भवनों की मरम्मत, नए भवनों के निर्माण, अनुपयोगी और जर्जर हो चुके भवनों को नष्ट (डिसमेंटल) करने तथा भूमि आवंटन की प्रक्रियाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। यादव ने कहा कि 'स्कूल नॉर्म्स' के अनुसार सभी विद्यालयों में पर्याप्त और सुलभ शौचालयों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए तथा जहां आवश्यकता हो, वहां निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किए जाएं।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,021.25 करोड़ रुपए के प्रस्तावित कार्यों के विरुद्ध विभिन्न योजनाओं एवं अभिसरण के माध्यम से लगभग 3,037.21 करोड़ रुपए के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 1,293 नवीन विद्यालय भवन, 5,348 वृहद मरम्मत कार्य तथा 9,334 नवीन/अतिरिक्त कक्षा-कक्ष शामिल हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 290 नवीन विद्यालय भवन, 599 वृहद मरम्मत कार्य तथा 2,099 कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। उन्होंने इन सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने तथा निर्माण की प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    यादव ने कहा कि सभी निर्माण कार्य स्वीकृत निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही करवाए जाएं। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोनी, जिला नागौर में प्रगतिरत निर्माण कार्य में तकनीकी पर्यवेक्षण में प्रथमदृष्टया गंभीर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

    एसीएस यादव ने कहा कि जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वयं जाकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का सघन निरीक्षण करें। वे वहां चल रहे मरम्मत और नए भवन निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करें और उस संबंध में राज्य स्तर पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों से संबंधित किसी भी आवश्यक कार्य—चाहे वह निर्माण कार्य हो या मरम्मत के लिए केवल पत्र लिखने से काम नहीं चलेगा। संबंधित अधिकारी कार्यों को समय पर पूरा करवाएंगे। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने टीम के साथ एकजुट होकर काम करने और किसी भी समस्या को तुरंत राज्य स्तर पर अवगत कराने के निर्देश दिए। कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए। साथ ही एसीएस ने निर्देश दिए कि वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है, बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।

    विभिन्न विभागीय योजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा
    बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागीय योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। इनमें पीएम-जनमन (PM-JANMAN), पीएम श्री (PM Shri) योजना के विभिन्न चरण, समग्र शिक्षा अभियान (SMSA), स्टार्स (STARS) प्रोजेक्ट के तहत वोकेशनल रूम्स व हॉस्टल निर्माण, राज्य बजट घोषणाओं के तहत स्वीकृत कार्य, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) और डाइट (DIET) को 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के एक्शन प्लान के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

    जिला स्तरीय निर्माण प्रकोष्ठों की समस्याओं पर मंथन
    समीक्षा बैठक में जिला स्तर के निर्माण प्रकोष्ठों (ADPC) के समक्ष आ रही व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से मंथन हुआ। कार्यालयों में एमआईएस (MIS) सपोर्ट की आवश्यकता, साइट निरीक्षण, भूमि विवाद व नामान्तरण (Land-Related Issues), टेंडर प्रक्रिया एवं संवेदकों के बिल भुगतान में होने वाले विलंब जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कार्यों में तेजी लाने के लिए टेंडर प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण लैब्स स्थापित करने के सुझावों पर भी विचार किया गया।

  • बारिश पर लगा ब्रेक! राजस्थान में अगले 5 दिन मौसम रहेगा सूखा, 12 सितंबर से नए दौर की उम्मीद

    बारिश पर लगा ब्रेक! राजस्थान में अगले 5 दिन मौसम रहेगा सूखा, 12 सितंबर से नए दौर की उम्मीद

    जयपुर
    राजस्थान में एक बार फिर मौसम के मिजाज में बदलाव आ गया है। मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार पूर्वी राजस्थान के अधिकांश भागों में आगामी 4-5 दिन कमजोर मानसून परिस्थितियां रहने तथा अधिकांश भागों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि, आज भरतपुर, कोटा संभाग में छुटपुट स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर संभाग के अधिकांश भागों में आगामी एक सप्ताह कमजोर मानसून परिस्थितियां दर्ज होने तथा अधिकांश स्थानों पर मौसम मुख्यतः शुष्क रहने की संभावना है।

    इस दौरान बीकानेर संभाग के जिलों में दिन के समय अपेक्षाकृत तेज सतही हवाएं 20-25 KMPH चलने की संभावना है।

    मौसम विभाग के नए अपडेट के अनुसार पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में 12 सितंबर से एक और नया बारिश का दौर शुरू होने तथा पुनः बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    वेल मार्क लो प्रेशर एरिया कमजोर
    प्रदेश में मानसून की गतिविधियां अब कमजोर पड़ने लगी हैं। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के अनुसार वेल मार्क लो प्रेशर एरिया कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है और वर्तमान में दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना हुआ है। इसके असर से बीते 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में मध्यम से भारी बारिश हुई। वहीं सोमवार व मंगलवार से बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी।

    प्रदेश में 1 जून से 6 सितंबर तक 313 MM बारिश दर्ज
    तीन दिन बारिश के दौर के बाद प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 81 फीसदी कोटा पूरा हो चुका है। 1 जून से 6 सितंबर तक 385.04 MM की तुलना में 313 MM बारिश हो चुकी है। अब कोटा पूरा होने में अभी भी 111 MM बारिश शेष है। इधर रविवार को अलवर, बारां, भरतपुर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, डीग, धौलपुर, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर और टोंक में मध्यम स्तर की बारिश हुई। इससे कई इलाकों में मौसम सुहाना हुआ।

    जयपुर का आज अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना
    राजस्थान के पश्चिमी जिलों में मानसून के कमजोर रहने और लगातार मौसम ड्राई रहने से गर्मी बरकरार है। रविवार को फलोदी में अधिकतम तापमान 38.6 ​डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। जयपुर का दोपहर 3 बजे तापमान 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं आज जयपुर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रहने की संभावना है।

     

  • चुनावी आचार संहिता के बीच अवैध शराब पर सख्ती, राजस्थान में आबकारी टीमों की बड़ी कार्रवाई

    चुनावी आचार संहिता के बीच अवैध शराब पर सख्ती, राजस्थान में आबकारी टीमों की बड़ी कार्रवाई

    जयपुर
    आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशानुसार प्रदेश में निकाय चुनाव आदर्श आचार संहिता के तहत अवैध मदिरा निर्माण, भण्डारण, परिवहन एवं विक्रय पर रोकथाम के लिए जारी निरोधात्मक गतिविधियों के तहत नाकाबंदी, गश्त, दबिश की प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।

    आबकारी आयुक्त नमित मेहता के निर्देशन में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए अन्य राज्य की शराब की तस्करी, अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन व विक्रय पर आबकारी निरोधक टीमों द्वारा प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। जयपुर में आचार संहिता की पालना के तहत नाकाबंदी में जीप कम्पास की तलाशी लेने पर एक कार्टन में 12 बोतल ब्लेक लेबल, 3 बोतल ऐब्सोल्यूट वोदका फोर सेल इन हरियाणा बरामद करते हुए अभियुक्त धीरज चैधरी एवं अनिल जैन को गिरफ्तार किया। चित्तौड़गढ़ में ईपीएफ टीम ने एक हजार लीटर वाॅश सहित 2 कच्ची भट्टियां नष्ट करते हुए 30 बोतल अवैध हथकड़ मदिरा जब्त की। हनुमानगढ़ के गंगागढ़, गंगाघाट, देबूघाट, मक्कासर आदि हथकड़ संवेदनशील क्षेत्रों में दबिश की कार्रवाई में 5 हजार लीटर वाॅश, 8 कच्ची भट्टियां नष्ट की गई। मौके से 65 लीटर हथकड़ मदिरा एवं देशी मदिरा के 39 पव्वे जब्त करते हुए अभियोग दर्ज किए। कोटा में आबकारी निरोधक दल ने दबिष देते हुए 1300 लीटर वाॅश सहित 2 कच्ची भट्टियां नष्ट करते हुए मौके से 59 लीटर अवैध हथकड़ शराब भी जब्त की। अलवर जिले में रविवार को आबकारी दल एवं आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में अलवर जंक्षन पर 662 पव्वे आईएमएफएल के फोर सेल इन चंडीगढ़ बरामद किए। जब्त मदिरा की अनुमानित कीमत एक लाख 8 हजार 550 रूपए आंकी गई है।

    इसी प्रकार प्रदेश में समस्त अतिरिक्त आबकारी आयुक्त जोन, आबकारी उपायुक्त, जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक एवं आबकारी निरोधक दल द्वारा अवैध मदिरा के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्यवाही की जा रही है।

  • राजस्थान में निवेश पर सरकार का फोकस, लंबित प्रकरणों के जल्द निस्तारण के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    राजस्थान में निवेश पर सरकार का फोकस, लंबित प्रकरणों के जल्द निस्तारण के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    जयपुर
    मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के माध्यम से प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को मुख्यमंत्री की मंशानुरूप आगामी 10 दिसंबर को प्रवासी राजस्थानी दिवस तक अधिकाधिक एमओयू ग्राउंड ब्रेकिंग के लक्ष्य की दिशा में प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए एमओयू की प्रगति एवं उनके क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए इनके त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं से संबंधित आवश्यक प्रस्ताव एवं फाइलें शीघ्र प्रस्तुत की जाएं। साथ ही, संबंधित जिला कलक्टरों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा एवं राजस्व विभाग से अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    मुख्य सचिव ने भूमि संबंधी प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि की पहचान एवं आवंटन से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो और परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

    बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग शिखर अग्रवाल ने विभागवार प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि राइजिंग राजस्थान के अंतर्गत 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है

    उन्होंने कहा कि आगामी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जिन प्रकरणों में स्वीकृति दी जानी है, उनमें अनावश्यक विलंब न हो और उन्हें शीघ्र अनुमोदित किया जाए। वहीं, जिन प्रकरणों में स्वीकृति संभव नहीं है, उनमें भी तत्काल निर्णय लेकर उन्हें लंबित न रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करते हुए अनावश्यक रूप से कोई प्रकरण लंबित नहीं रखा जाए। बैठक में विभागवार निर्धारित लक्ष्यों एवं उनके विरुद्ध अर्जित प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निवेश प्रस्तावों से जुड़े प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाई जाए।

     

     

  • राजस्थान में बारिश पर लगेगा ब्रेक, जानें 7 से 17 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम का हाल

    राजस्थान में बारिश पर लगेगा ब्रेक, जानें 7 से 17 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम का हाल

    जयपुर
    राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 8 से 10 सितंबर तक ज्यादातर इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है। राहत के इस दौर के बाद 12-13 सितंबर से फिर बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    7 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है।

    7 सितंबर को इन इलाकों में बारिश के आसार
    मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार 7 सितंबर को अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों के अलावा टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है।

    भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। उदयपुर संभाग में भी कुछ जगह बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, बीकानेर और नागौर में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है।
    प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है।

    उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बना सिस्टम कमजोर
    राजस्थान में पिछले दिनों हुई बारिश के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) प्रमुख मौसम सिस्टम था। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ी थीं। IMD ने 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई थी।
    अब यह सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके कमजोर होने के साथ राजस्थान में मानसून की सक्रियता भी कम होने की संभावना है। इसलिए 7 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों घट सकती हैं।

    8 से 10 सितंबर तक बारिश से राहत
    मौसम विभाग के अनुसार 8 से 10 सितंबर के बीच राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की संभावना है। इस दौरान व्यापक बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
    यानी अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश से कुछ राहत मिल सकती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है।

    12-13 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून
    बारिश में यह कमी लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 और 13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं।
    12 से 15 सितंबर के बीच पूरबाई हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ सकती है। इससे पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में कई स्थानों पर खंड-खंड बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा रह सकती हैं।

    हालांकि इस दौरान किसी एक सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है। इसलिए इस दौर को फिलहाल नमी बढ़ने और पूरबाई हवाओं के असर से संभावित बारिश के चरण के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

    16-17 सितंबर से फिर कम हो सकती है बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 सितंबर के आसपास प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में एक बार फिर कमी आ सकती है। हालांकि 10 से 15 दिन के विस्तारित पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले किसी नए मौसम सिस्टम, मानसून ट्रफ की स्थिति और हवाओं के रुख का राजस्थान की बारिश पर असर पड़ सकता है। इसलिए अगले चरण की बारिश को लेकर स्थिति साफ होने के साथ पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।

     

  • गणपति बप्पा के जन्मोत्सव की भव्य तैयारी! 348 किलो पंचामृत, 3000 किलो घी और हजारों मोदक होंगे खास आकर्षण

    गणपति बप्पा के जन्मोत्सव की भव्य तैयारी! 348 किलो पंचामृत, 3000 किलो घी और हजारों मोदक होंगे खास आकर्षण

     जयपुर

    जयपुर में प्रथम पूज्य भगवान गणेश के सबसे बड़े उत्सवों में से एक मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का गणेश चतुर्थी महोत्सव आज से भक्ति और उल्लास के साथ शुरू हो गया. महिलाओं की कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय उत्सव का आगाज हुआ. अब 7 से 15 सितंबर तक मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में हर दिन गजानन का दरबार अलग रंग और अलग स्वरूप में नजर आएगा. 14 सितंबर को भगवान गणेश का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा, जबकि 15 सितंबर को गणेशजी नगर भ्रमण पर निकलेंगे। 

    महोत्सव के शुभारंभ पर सोमवार सुबह महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और जलाभिषेक के साथ उत्सव की शुरुआत हुई. मंदिर में आने वाले दिनों में भगवान गणेश के लिए अलग-अलग झांकियां सजाई जाएंगी. फल, सब्जी और फूलों की झांकियों के साथ भक्ति संगीत, ध्रुपद, सुगम संगीत और कथक के कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे। 

    पुष्य नक्षत्र पर 348 किलो पंचामृत से अभिषेक
    8 सितंबर को पुष्य नक्षत्र के विशेष संयोग पर भगवान गणेश का 348 किलो पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा. इसमें 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी शामिल होगा. इसी दिन केले और छप्पन भोग की झांकी सजेगी. शाम 6 बजे ध्रुपद गायन का आयोजन होगा। 

    9 सितंबर को मोदकों से सजेगा गजानन का दरबार
    गणेशोत्सव के तीसरे दिन मोदक झांकी खास आकर्षण होगी. इसके लिए करीब 3 हजार किलो घी, 3 हजार किलो बेसन, 9 हजार किलो शक्कर और 1000 किलो सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाएगा. 251-251 किलो के दो विशाल मोदक, 51-51 किलो के पांच, 21-21 किलो के 21 और 1.25 किलो के 1100 मोदक तैयार किए जाएंगे. सुबह 5 बजे से दर्शन होंगे और शाम 7 बजे श्रद्धालुओं को निशुल्क प्रसाद वितरित किया जाएगा. इस दिन बाहर से लाया गया प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था नहीं रहेगी। 

    13 सितंबर को 3500 किलो मेहंदी से होगा सिंजारा
    13 सितंबर को सिंजारा उत्सव का रंग मोतीडूंगरी में नजर आएगा. इस दिन सोजत की करीब 3500 किलो मेहंदी से भगवान गणेश का सिंजारा किया जाएगा. रात 7:30 बजे पांच स्थानों से मेहंदी वितरित की जाएगी और महिलाओं व कन्याओं के लिए अलग काउंटर रहेगा. इसी दिन गणेशजी को ननिहाल से आई नवीन पोशाक पहनाई जाएगी. तीन महीने में तैयार हुआ मोती, सोना, पन्ना और माणक जड़ित नौलखा हार और स्वर्ण मुकुट भी धारण कराया जाएगा।  

    14 सितंबर को 19 घंटे दर्शन, दोपहर में आधे घंटे पट मंगल
    14 सितंबर को गणेश जन्मोत्सव का सबसे बड़ा आयोजन होगा. मंगला आरती से लेकर रात 11:40 बजे शयन आरती तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे. इस दौरान विशेष पूजन सुबह 11:20 बजे, श्रृंगार आरती 11:30 बजे, भोग आरती दोपहर 2:15 बजे और संध्या आरती शाम 7 बजे होगी. दोपहर 1:30 से 2 बजे तक आधे घंटे के लिए पट मंगल रहेंगे. यानी जन्मोत्सव के दिन करीब 19 घंटे दर्शन की व्यवस्था रहेगी। 

    पहली बार महिलाओं की अलग लाइन, 6 एंट्री और 8 एग्जिट गेट
    जन्मोत्सव पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए इस बार दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. पिछले साल की व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद पहली बार महिलाओं के लिए अलग दर्शन लाइन बनाई जा रही है. श्रद्धालुओं के लिए 6 एंट्री और 8 एग्जिट पॉइंट रहेंगे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया भी बढ़ाया जाएगा। 
    बुजुर्गों के लिए 100 ई-रिक्शा, 500 स्वयंसेवक संभालेंगे मोर्चा
    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निशक्तजनों और बुजुर्गों के लिए 100 ई-रिक्शा और 4 इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसें चलाई जाएंगी. व्यवस्थाओं को संभालने के लिए करीब 500 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे. श्रद्धालुओं से कैमरा और भारी सामान साथ नहीं लाने की अपील की गई है। 

    15 सितंबर को गजानन निकलेंगे नगर भ्रमण पर
    नौ दिवसीय उत्सव का समापन 15 सितंबर को गणेशजी की शोभायात्रा के साथ होगा. इस दौरान एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड पर यातायात व्यवस्था में बदलाव रहेगा. श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्रा को देखते हुए प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा। 

    इन रास्तों से होगा प्रवेश
    श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए एमडी रोड, जेएलएन मार्ग और तख्तेशाही रोड का इस्तेमाल किया जाएगा. जेडीए सर्किल, भैरव पथ और आरबीआई की ओर बैरिकेडिंग रहेगी. प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का फोकस इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराने पर है। 

  • जोधपुर में जुटेंगी 8 देशों की वायुसेनाएं, 30 से ज्यादा देश बनेंगे ‘तरंग शक्ति-2026’ के गवाह

    जोधपुर में जुटेंगी 8 देशों की वायुसेनाएं, 30 से ज्यादा देश बनेंगे ‘तरंग शक्ति-2026’ के गवाह

    जोधपुर

    भारत और पाकिस्तान के बीच बनी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सठे राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में भारतीय वायुसेना अपने सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति-2026' की मेजबानी करने जा रही है। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित होने वाले इस मेगा एक्सरसाइज को लेकर वायुसेना ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक कुल 17 दिनों के लिए एक 'नोटम' (NOTAM – Notice to Airmen) जारी कर दिया है। इसके तहत जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर के विशाल हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सीमा पार महज 20 किलोमीटर की दूरी तक भारतीय लड़ाकू विमानों की दहाड़ सुनाई देगी, जिससे पाकिस्तानी सेना और वहां के रणनीतिकारों में जबर्दस्त खलबली मच गई है।

    इस मेगा एयर एक्सरसाइज में दुनिया के 8 शक्तिशाली देश अपने उन्नत एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट्स के साथ सीधे तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा करीब 30 से अधिक देशों के रक्षा प्रतिनिधि और सैन्य अधिकारी ऑब्जर्वर के तौर पर इस ऐतिहासिक अभ्यास के साक्षी बनेंगे। राजस्थान के 4 प्रमुख सीमावर्ती जिलों के ऊपर 40 हजार फीट तक के आसमान को सैन्य उड़ानों के लिए पूरी तरह रिजर्व किया गया है।

    भारतीय वायुसेना का यह कदम न केवल अपनी सामरिक ताकत और त्वरित कार्रवाई की रणनीति को परखने का जरिया है, बल्कि यह पाकिस्तान को उसकी दहलीज पर भारत की अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारी का सीधा संदेश भी है।

    पाकिस्तान सीमा में हलचल, पाक सेना में इमरजेंसी बैठकें!
    भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किए गए नोटम का दायरा इतना व्यापक है कि बीकानेर के नाल एयरबेस के पास इसका एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतने कम फासले पर आधुनिक युद्धक विमानों के अभ्यास की खबर मिलते ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद के सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है।

    मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी थलसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने आपातकालीन बैठकें बुलाकर सीमा पर अपनी चौकसी और रडार सर्विलांस बढ़ा दिया है। भारत के इस युद्धाभ्यास में मित्र देशों के अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट भी शामिल हो रहे हैं, इसी वजह से पाकिस्तान ने सीमा पार अपनी जासूसी और निगरानी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है।

    40 हजार फीट की ऊंचाई तक सील होगाएयरस्पेस, जानिए नोटम का पूरा शेड्यूल
    'तरंगशक्ति-2026' अभ्यास के दौरान आम नागरिक उड़ानों की सुरक्षा और वायुसेना के लड़ाकू जहाजों के निर्बाध संचालन के लिए एयरस्पेस को 40 हजार फीट की ऊंचाई तक आरक्षित किया गया है। यह नोटम 17 दिनों के दौरान लगातार लागू नहीं रहेगा, बल्कि इसे अलग-अलग चरणों में सुबह 9:00 बजे से लेकर मध्यरात्रि 12:00 बजे तक प्रभावी बनाया गया है।

    पहला चरण: 21 सितंबर से 24 सितंबर 2026 तक

    दूसरा चरण: 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक

    तीसरा चरण: 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक

    अंतिम चरण: 7 अक्टूबर 2026 को

    इन निर्धारित तिथियों पर जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर और जैसलमेर सेक्टर में वायुसेना के विमान अपनी युद्धक क्षमताओं, हवा से हवा में ईंधन भरने, और सटीक बॉम्बिंग का अभ्यास करेंगे।

    जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। यहां दुनिया की 8 प्रमुख वायुसेनाओं के स्क्वाड्रन अपने-अपने लड़ाकू जहाजों के साथ पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 MKI, तेजस और जगुआर जैसे अग्रिम पंक्ति के विमान विदेशी फाइटर जेट्स के साथ मिलकर मॉक-ड्रिल और कॉम्बैट ऑपरेशन्स को अंजाम देंगे।

    30 देशों के सैन्य पर्यवेक्षकों की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख और रणनीतिक महत्व कितना बढ़ चुका है। इस अभ्यास के जरिए मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा रणनीति और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान को नई मजबूती मिलेगी।

    सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है यह अभ्यास
    राजस्थान से सटी पश्चिमी सीमा हमेशा से ही रक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील रही है। पोकरण और थार के रेगिस्तान में वायुसेना का यह बहुराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन भारत की ऑपरेशनल रेडिनेस (युद्धक तैयारी) का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'तरंगशक्ति-2026' से भारतीय वायुसेना न केवल अपने नए हथियारों और रणनीति का परीक्षण करेगी, बल्कि सीमा पार से होने वाली किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी और धार देगी। अगले 17 दिनों तक राजस्थान का आसमान वायुसेना के पराक्रम का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • छत्तीसगढ़ से राजस्थान पहुंचे जस्टिस अग्रवाल, संभाली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कमान

    छत्तीसगढ़ से राजस्थान पहुंचे जस्टिस अग्रवाल, संभाली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कमान

    जयपुर
    राजस्थान उच्च न्यायालय को नया प्रशासनिक और न्यायिक प्रमुख मिल गया है। जयपुर स्थित लोकभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने उन्हें अंग्रेजी भाषा में शपथ दिलाई। समारोह की शुरुआत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी नियुक्ति का आधिकारिक वारंट पढ़कर सुनाया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिमंडल के कई सदस्य, राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान व पूर्व न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी और नए चीफ जस्टिस के परिजन विशेष रूप से मौजूद रहे।

    शपथ ग्रहण समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद नए मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद वे बिना किसी देरी के जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ के लिए रवाना हो गए। उनके साथ जस्टिस विनीत माथुर भी मौजूद रहे। राजस्थान में न्याय व्यवस्था को सुचारू बनाने और लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिहाज से उनकी यह नियुक्ति बेहद अहम मानी जा रही है।

    1. राजस्थान के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में संभाला पदभार
    जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने राज्य के 44वें नियमित मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कमान संभाली है। इस पद पर आसीन होते ही वे राजस्थान की पूरी अधीनस्थ अदालतों और हाईकोर्ट के प्रशासनिक प्रमुख बन गए हैं।

    2. छत्तीसगढ़ से जन्म और न्यायिक करियर का गहरा नाता
    जस्टिस संजय के. अग्रवाल का जन्म 15 जुलाई 1965 को हुआ था। राजस्थान हाईकोर्ट की जिम्मेदारी मिलने से ठीक पहले तक वे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में वरिष्ठतम न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

    3. 1989 में वकालत से शुरू हुआ न्यायिक सफर
    उन्होंने साल 1989 में बिलासपुर में एक वकील के रूप में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। लगभग दो दशकों तक वकालत में अपनी कानूनी समझ का लोहा मनवाने के बाद उन्होंने न्यायपालिका के उच्च पदों की ओर कदम बढ़ाया।

    4. मार्च 2016 में बने थे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्थायी जज
    वे सितंबर 2013 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एडिशनल जज (अतिरिक्त न्यायाधीश) नियुक्त किए गए थे। अदालत में उनके बेहतरीन प्रदर्शन और निष्पक्ष कार्यशैली को देखते हुए मार्च 2016 में उन्हें स्थायी जज बना दिया गया था।

    5. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की विशेष सिफारिश पर हुई नियुक्ति
    भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की आधिकारिक सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी।

    6. विवादों के बीच एक निष्पक्ष चेहरे के तौर पर हुई एंट्री
    राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले 11 महीनों से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक फैसलों और केस लिस्टिंग को लेकर वकीलों के बीच कुछ असंतोष देखा जा रहा था। ऐसे माहौल में न्यायपालिका की साख और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ से जस्टिस अग्रवाल को इस शीर्ष पद पर तैनात किया गया है।

    7. 'सड़क मार्ग' से सफर तय करने वाली सादगी
    मुख्य न्यायाधीश के रूप में चयन के बाद उनकी सादगी भी चर्चा का विषय बनी रही। वे 6 सितंबर 2026 को बिलासपुर से फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे और फिर वहां से बिना किसी विशेष तामझाम के साधारण तरीके से कार द्वारा सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचे, जहां हाईकोर्ट गेस्ट हाउस में उनका स्वागत किया गया था।

    8. प्रशासनिक सुधारों और कोर्ट मैनेजमेंट का लंबा अनुभव
    जस्टिस अग्रवाल को न केवल जटिल मुकदमों की सुनवाई करने, बल्कि अदालती इंफ्रास्ट्रक्चर, जजों की कार्यप्रणाली और केस रोस्टर मैनेजमेंट जैसे प्रशासनिक मामलों को कुशलता से संभालने का व्यापक अनुभव प्राप्त है।

    9. त्वरित और तार्किक फैसलों के लिए जाने जाते हैं नए सीजे
    छत्तीसगढ़ में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस संजय के. अग्रवाल को बड़े कानूनी मामलों में त्वरित, तार्किक और निष्पक्ष फैसले सुनाने के लिए जाना जाता था। वे अदालती कार्यवाहियों के दौरान अधिवक्ताओं की दलीलों को बेहद धैर्यपूर्वक सुनने के लिए भी लोकप्रिय हैं।

    10. लगभग 11 महीने का रहेगा राजस्थान में कार्यकाल
    15 जुलाई 1965 को जन्मे जस्टिस अग्रवाल 62 वर्ष की आयु पूरी होने पर जून 2027 में सेवानिवृत्त होंगे। इस लिहाज से राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्हें करीब 10 से 11 महीने का समय मिलेगा, जिसमें वे राज्य में पेंडिंग मामलों के निपटारे पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • राजस्थान में बनेगा नया 4-लेन एक्सप्रेस-वे, 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    राजस्थान में बनेगा नया 4-लेन एक्सप्रेस-वे, 210 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

    जयपुर
     प्रदेश में पूर्व से पश्चिमी राजस्थान के बीच तेज और सुगम आवागमन के लिए भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 277 किलोमीटर लंबा 4 लेन एक्सप्रेस-वे जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 210 गांवों के 10,890 खसरों की करीब 2,600 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जाएगी। जयपुर जिले के दूदू के ग्राम झाग से शुरू होकर एक्सप्रेस-वे एनएच-21 पर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा।

    फागी से राजस्थान-उत्तर प्रदेश सीमा के बीच यात्रा समय भी 7 घंटे से घटकर करीब 2.5 से 3 घंटे रहने का अनुमान है। भरतपुर-ब्यावर एक्सप्रेस-वे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा और वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। निर्माण पर 8,656 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इसमें 5,231 करोड़ रुपए सिविल कार्य और 2,640 करोड़ रुपए भूमि अवाप्ति पर खर्च होंगे। प्रति किलोमीटर लागत करीब 31.55 करोड़ रुपए होगी।

    30 पुल, 4 आरओबी, 10 इंटरचेंज और 179 अंडरपास
    परियोजना में 30 छोटे-बड़े पुल, रेललाइन पर चार आरओबी, सात फ्लाईओवर, 10 इंटरचेंज तथा वाहनों के लिए 179 छोटे-बड़े अंडरपास बनाए जाएंगे। एक्सप्रेस-वे ब्यावर-किशनगढ़ क्षेत्र को भरतपुर से जोड़ते हुए अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे, एनएच-448 और एनएच-21 के बीच आर्थिक गलियारा मजबूत करेगा। बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच एनएच-48 और एनएच-21 पर यातायात का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।

    करौली में 58.8 किमी लंबाई, 7,122 पेड़ कटेंगे
    करौली जिले में एक्सप्रेस-वे की लंबाई 58.8 किलोमीटर होगी। करौली, नादौती, हिंडौन, श्रीमहावीरजी और सूरौठ तहसीलों के 49 गांवों में 2,256 खसरों की 637.64 हेक्टेयर निजी और 35.42 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। इससे 26,539 परिवारों के 1,06,156 लोग प्रभावित होंगे। करीब 7,122 पेड़ों की कटाई भी प्रस्तावित है। परियोजना को लेकर अंतिम सामाजिक समाघात निर्धारण रिपोर्ट जारी हो चुकी है।

    90 मीटर चौड़ा होगा कॉरिडोर
    एक्सप्रेस-वे करीब 90 मीटर चौड़ा होगा और इसकी ऊंचाई 2.5 से 7 मीटर तक रहेगी। परियोजना से राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच माल एवं यात्री परिवहन को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।

    नया एक्सप्रेस-वे बनने से सफर होगा आसान
    भरतपुर-ब्यावर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर जैसे जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च कम होने की उम्मीद है। एक्सप्रेस-वे से मौजूदा सड़कों और हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। किसानों को कृषि उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स, उद्योग, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने से नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा होंगे। पूर्वी राजस्थान के शहरों और गांवों का आर्थिक विकास भी तेज हो सकता है।

  • प्रसादी को लेकर पंचायत का फरमान! परिवार पर 1.51 लाख जुर्माने और बहिष्कार का आरोप, FIR दर्ज

    प्रसादी को लेकर पंचायत का फरमान! परिवार पर 1.51 लाख जुर्माने और बहिष्कार का आरोप, FIR दर्ज

    उदयपुर
    उदयपुर के गोगुंदा क्षेत्र के भुताला गांव में मंदिर में प्रसादी करने पर एक परिवार का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार करने के मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 5 पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि समाज के लोगों ने परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और राशि नहीं देने पर परिवार को समाज से अलग कर दिया।

    पीड़ित गणेश सिंह ने बताया कि 24 मई 2026 को गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के बाद आरोपी किशोर सिंह, तेज सिंह, नवल सिंह, मोहन सिंह, भैरू सिंह, चंदन सिंह, राम सिंह, काल सिंह, लहर सिंह, कान सिंह और धर्मेंद्र सहित अन्य लोगों ने आपत्ति जताई। पीड़ित के अनुसार, अगले दिन पंचायत बुलाकर 1 लाख 51 हजार रुपए जुर्माना भरने को कहा गया। राशि देने में असमर्थता जताने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।

    विरोध करने पर मारपीट का आरोप
    पीड़ित ने आरोप लगाया कि परिवार को समाज के अन्य लोगों से मेल-जोल और संपर्क नहीं रखने की हिदायत दी गई। मंदिर सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आने-जाने से भी रोका गया। रिश्तेदार की मौत होने पर श्मशान में भी जाने नहीं दिया गया। आदेश का विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में एएसआइ विनेश कुमार ने बताया कि शनिवार को पंचायत के पांच प्रमुख पंचों सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    वाकली पुलिया से नदी में गिरी श्रद्धालुओं की जीप
    एक अन्य खबर के अनुसार धरियावद-उदयपुर-बांसी मार्ग पर वाकली पुलिया के समीप शनिवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। श्री सांवलिया सेठ के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी जीप शनिवार तड़के अनियंत्रित होकर पुलिया से सीधे नीचे सुखली नदी में जा गिरी। गनीमत रही कि हादसे में सभी 10 यात्री समय रहते वाहन से बाहर निकल गए।

    पुलिस के अनुसार मूंगाणा के समीप कुंडी गांव निवासी श्रद्धालु श्री सांवलिया जी के दर्शन कर जीप से अपने गांव लौट रहे थे। इस दौरान शनिवार तड़के करीब 4 बजे वाकली पुलिया के पास घुमावदार मोड़ पर चालक नियंत्रण खो बैठा और जीप नदी में जा गिरी। हादसा होते ही जीप में सवार यात्रियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत एक दूसरे का हाथ पकड़कर तत्काल बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। जिस जगह ये हादसा हुआ वो जंगल का क्षेत्र होने एवं मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण हादसे की सूचना काफी देर से पुलिस को मिली।