Category: राजस्थान

  • कमल-हाथ की टक्कर के बीच बागी और निर्दलीय बने चुनौती, जयपुर में बड़े नेताओं की अग्निपरीक्षा

    कमल-हाथ की टक्कर के बीच बागी और निर्दलीय बने चुनौती, जयपुर में बड़े नेताओं की अग्निपरीक्षा

    जयपुर
     जयपुर के 150 वार्डों में फिलहाल मुकाबला पार्षद बनने का है, लेकिन दांव इससे कहीं बड़ा है। दस विधानसभा क्षेत्रों में फैली इस सियासी बिसात पर कहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की साख का सवाल है, कहीं उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की पकड़ की परीक्षा और कहीं कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की सियासी ताकत का इम्तिहान।

    हर वार्ड में समीकरण अलग हैं। कहीं 'कमल' और 'हाथ' आमने-सामने हैं तो कहीं अपनों की नाराजगी ने मुकाबले में नया कोण जोड़ दिया है। इसलिए नगर निगम का यह चुनाव सिर्फ पार्षदों की संख्या का हिसाब नहीं, राजधानी में सियासी असर की पैमाइश भी है। इस सबसे ऊपर बिना पार्षद बने किसी बाहरी को भी महापौर बनाने की 'रस्म-ए-रियायत' भी तमाम सियासी जोड़-बाकी के गणित को बिगाड़ने के लिए काफी है।

    भाजपा ने प्रचार के आखिरी दिन मुख्यमंत्री को जयपुर में उतारकर अपनी प्राथमिकता साफ कर दी। इससे पहले संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की बैठक भी पार्टी की गंभीरता का संकेत दे चुकी है। अब अपनों को साधना और वोटों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती है।

    मालवीय नगर और झोटवाड़ा में टिकट को लेकर उपजी नाराजगी ने कई वार्डों में मुकाबले के कोण बढ़ा दिए हैं। सांगानेर में सीएम की साख के साथ निर्दलीयों ने समीकरणों में तड़का लगाया है, जबकि विद्याधर नगर में कहीं दो, कहीं तीन तो कहीं चार कोण तक मुकाबले हैं। कांग्रेस भी पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं।

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी बुधवार को अलवर में मतदान कर राजधानी पहुंचे और उन्होंने यहां कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क किया। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी अपने-अपने इलाकों में सक्रिय हैं। उसके लिए यह चुनाव सत्ता की लड़ाई से ज्यादा राजधानी में अपनी राजनीतिक जमीन नापने का मौका है।

    आदर्श नगर में पार्टी के भीतर की खींचतान, सिविल लाइंस में नए चेहरों की आजमाइश और हवामहल में पुराने चेहरों व व्यक्तिगत पकड़ का असर दिख रहा है। यहां भी बागी और निर्दलीय अधिकृत प्रत्याशियों के सामने नई चुनौती बनकर खड़े हैं। इसी बीच, एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी की गुलाबीनगर परिक्रमा ने भी छोटे चुनाव पर बड़ा सियासी तड़का लगा दिया है।

    दस विधानसभा क्षेत्रों का अपना अलग मिजाज है। कहीं संगठन की पकड़ भारी है, कहीं व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक विरासत, तो कहीं बागी उम्मीदवार पूरे गणित को नए सिरे से लिखने की कोशिश में हैं। बगरू में व्यक्तिगत पकड़ और पार्टी की साख आमने-सामने है, किशनपोल में पुराने शहर के स्थानीय और सामाजिक समीकरण अपना रंग दिखा रहे हैं, जबकि आमेर में सीधे मुकाबलों के बीच निर्दलीय तीसरा कोण बना रहे हैं।

    लेकिन वार्ड की चौखट पर बड़े नेताओं के नाम से ज्यादा सड़क, सीवर, सफाई, जलभराव, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक और अतिक्रमण जैसे सवाल असर डालेंगे। पिछली बार 250 वार्डों वाला जयपुर ग्रेटर और हैरिटेज के दो निगमों में बंटा था। अब शहर फिर एक निगम और 150 वार्डों में लौट आया है। नक्शा बदला है, मगर सियासत की गलियां वही हैं।

  • बाबा रामदेव के दर्शन के लिए आसान होगा सफर, जोधपुर-रामदेवरा के बीच नियमित और मेला स्पेशल ट्रेनें

    बाबा रामदेव के दर्शन के लिए आसान होगा सफर, जोधपुर-रामदेवरा के बीच नियमित और मेला स्पेशल ट्रेनें

     जैसलमेर
    किसी के हाथ में बाबा की ध्वजा है, किसी के सिर पर चुनरी, आंखों में दर्शन की चमक और जयकारों से मेले की आस्था परवान चढ़ रही है। भोर की पहली किरण के साथ कोई बाबा के दरबार के लिए निकल रहा है तो कोई शाम ढलते ही ट्रेन पकड़कर धोरों की उस धरती की ओर बढ़ रहा है, जहां हर रास्ता आस्था से जुड़ जाता है। जोधपुर से रामदेवरा के बीच चल रही नियमित ट्रेनों ने श्रद्धालुओं के इस आस्था-सफर को आसान बना दिया है। इस वर्ष रामदेवरा मेला 13 सितंबर 2026 से शुरू होकर 21 सितंबर 2026 (भादवा सुदी दशमी) तक चलेगा।

    उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि मेले में बढ़ते यात्री भार को देखते हुए नियमित ट्रेनों के साथ मेला स्पेशल ट्रेन का भी संचालन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन के लिए रेलवे की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

    रामदेवरा जाने वाली ट्रेनें
    जोधपुर से रामदेवरा के लिए सुबह से रात तक नियमित ट्रेनों के विकल्प हैं। ट्रेन संख्या 12249 शकूरबस्ती-जैसलमेर स्वर्णनगरी एक्सप्रेस सुबह 4 बजे जोधपुर से रवाना होकर 7.01 बजे रामदेवरा पहुंचती है वहीं ट्रेन संख्या 20492 साबरमती-जैसलमेर सुपरफास्ट सुबह 6.10 बजे चलकर 9.07 बजे रामदेवरा पहुंचती है।

    इसी तरह दोपहर में ट्रेन संख्या 74844 भगत की कोठी-जैसलमेर डेमू दोपहर 2 बजे जोधपुर से रवाना होकर 5.25 बजे रामदेवरा पहुंचती है। दोपहर में ही ट्रेन 20486 साबरमती-जैसलमेर सुपरफास्ट जोधपुर से दोपहर 2.50 बजे रवाना होकर शाम 6.25 बजे रामदेवरा, जबकि शाम को ट्रेन संख्या 15014 काठगोदाम-जैसलमेर रानीखेत एक्सप्रेस और 25014 काठगोदाम-जैसलमेर कॉर्बेट पार्क लिंक एक्सप्रेस शाम 5 बजे रवाना होकर करीब 8 बजे रामदेवरा पहुंचती हैं।

    ट्रेन संख्या 14087 दिल्ली-जैसलमेर रुणिचा एक्सप्रेस शाम 7.40 बजे जोधपुर से रवाना होती है जो रात 11.20 बजे रामदेवरा पहुंचा देती है। साप्ताहिक ट्रेन के रूप में ट्रेन संख्या 22931 बांद्रा टर्मिनस-जैसलमेर सुपरफास्ट प्रत्येक शनिवार को सुबह 3.50 बजे जोधपुर से रवाना होकर 6.40 बजे रामदेवरा पहुंचती है।

    दर्शन के बाद वापसी की भी राह आसान
    बाबा के दर्शनों के बाद जोधपुर लौटने वालों के लिए भी सुबह से रात तक ट्रेनें हैं। ट्रेन संख्या 15013 जैसलमेर-काठगोदाम रानीखेत एक्सप्रेस सुबह 4.55 बजे रामदेवरा से रवाना होकर 8.20 बजे जोधपुर पहुंचती है। जबकि ट्रेन संख्या 20485 जैसलमेर-साबरमती सुपरफास्ट सुबह 7.53 बजे चलकर 11.30 बजे जोधपुर पहुंचती है। वहीं 74843 जैसलमेर-भगत की कोठी डेमू सुबह 9.10 बजे रामदेवरा से रवाना होकर 1.10 बजे जोधपुर, 20491 जैसलमेर-साबरमती सुपरफास्ट शाम 5.35 बजे चलकर रात 9 बजे और 12250 जैसलमेर-शकूरबस्ती स्वर्णनगरी एक्सप्रेस शाम 6.21 बजे चलकर रात 9.50 बजे जोधपुर आती है। इसी प्रकार रात में ट्रेन संख्या 14088 जैसलमेर-दिल्ली रुणिचा एक्सप्रेस 8.24 बजे रामदेवरा से रवाना होकर 11.40 बजे जोधपुर पहुंच रही है। वहीं ट्रेन संख्या 22932 जैसलमेर-बांद्रा टर्मिनस साप्ताहिक सुपरफास्ट प्रत्येक शनिवार रात 8.10 बजे रामदेवरा से चलकर 11.30 बजे जोधपुर आने का समय निर्धारित है।

  • कमीशन विवाद ने पकड़ा तूल, कान्हा-एलएमबी समेत 60 मिठाई दुकानों ने बंद किया जोमैटो

    कमीशन विवाद ने पकड़ा तूल, कान्हा-एलएमबी समेत 60 मिठाई दुकानों ने बंद किया जोमैटो

    जयपुर
    जोमैटो के कमीशन व्यावसायिक शर्तों को लेकर जयपुर के मिठाई विक्रेताओं का विवाद अब बहिष्कार तक पहुंच गया है। श्री हलवाई समिति के आह्वान पर शहर की करीब 60 मिठाई दुकानों और आउटलेट्स ने 7 सितंबर से जोमैटो पर अपने स्टोर अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं। समिति का कहना है कि पिछले करीब एक माह से जोमैटो से कई बार पत्राचार के बावजूद कंपनी की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया गया। समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र रावत के अनुसार, जोमैटो ने वर्ष 2016 में जयपुर में लॉजिस्टिक्स पार्टनर के रूप में 0 फीसदी कमीशन पर सेवाएं शुरू की थीं। अब मिठाई विक्रेताओं से 22 प्रतिशत तक कमीशन लिया जा रहा है। समिति का तर्क है कि मिठाई कारोबार में कीमतों पर प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण इतना कमीशन दुकानदारों के लिए आर्थिक रूप से अव्यावहारिक है।

    न बैठक न जवाब
    7 अगस्त को जोमैटो ने बड़े दुकानदारों के साथ बैठक कर समाधान का आश्वासन दिया था। इसके बाद समिति ने ईमेल के जरिए कमीशन कम करने की मांग रखी और 31 अगस्त तक जवाब व बैठक का अनुरोध किया, लेकिन कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद समिति ने सामूहिक बहिष्कार का फैसला किया।

    इन बड़े आउटलेटस ने किया किनारा…
    कान्हा, आनंद जी स्वीट्स, एस.एस. सोढ़ानी, रिद्धि सिद्धि, एलएमबी, बीएमबी, भगत मिष्ठान भंडार सहित कई प्रमुख प्रतिष्ठान बहिष्कार में शामिल हैं। समिति अब भी बातचीत से समाधान के लिए तैयार है।

    नया नहीं है विवाद
    फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट कारोबारियों के बीच कमीशन, डिस्काउंट, विज्ञापन शुल्क और भुगतान कटौती को लेकर विवाद नया नहीं है। 2022 में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जोमैटो और स्विगी की कमीशन व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उस समय आरोप लगाया था कि प्लेटफॉर्म की कमीशन दरें कई मामलों में 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच रही थीं। मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) तक भी पहुंचा।

    जोमैटो के बारे में जानिए
    जोमैटो एक प्रमुख भारतीय ऑनलाइन फूड डिलीवरी और रेस्तरां डिस्कवरी प्लेटफॉर्म है। इसकी स्थापना 2008 में दीपिंदर गोयल और पंकज चड्डा ने फूडीबे नाम से की थी, जिसे बाद में जोमैटो कर दिया गया। मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में है। यह यूजर्स को घर बैठे रेस्तरां से खाना ऑर्डर करने, मेनू देखने, रिव्यू पढ़ने और टेबुल बुक करने की सुविधा देता है। मूल कंपनी अब इटरनल लिमिटेड के नाम से जानी जाती है, जिसके तहत ब्लिंकिट जैसी क्विक कॉमर्स सेवा भी चलती है। जोमैटो मुख्य रूप से भारत में सक्रिय है और देश के सबसे बड़े फूड-टेक ब्रांड्स में से एक है।

  • बारिश थमी तो चढ़ा पारा, राजस्थान में 12 सितंबर से फिर बरसेंगे बादल

    बारिश थमी तो चढ़ा पारा, राजस्थान में 12 सितंबर से फिर बरसेंगे बादल

    जयपुर
    राजस्थान में मानसून ने फिलहाल ब्रेक ले लिया है। प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के साथ मौसम का मिजाज एक बार फिर गर्म होने लगा है। हालांकि, यह राहत ज्यादा लंबी नहीं रहने वाली। मौसम विभाग के अनुसार अगले 4-5 दिन मानसून कमजोर रहेगा, लेकिन 12 सितंबर से प्रदेश में एक बार फिर बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। आज भरतपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है।

    सोमवार को भी प्रदेश में बारिश का दायरा काफी सीमित रहा। अलवर, कोटपूतली, सीकर और राजसमंद में ही कुछ स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। राजसमंद के नाथद्वारा में सबसे ज्यादा करीब 28 मिलीमीटर यानी एक इंच से ज्यादा पानी बरसा। देर शाम श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के कुछ इलाकों में बादल छाए और हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं।

    उत्तर भारत की तरफ खिसका मानसून ट्रफ
    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक सोमवार को मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से खिसककर उत्तर भारत की तरफ चली गई। इसका सीधा असर राजस्थान में बारिश की गतिविधियों पर पड़ा है। ट्रफ की स्थिति बदलने के कारण अब प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता कमजोर रहने का अनुमान है।

    इस दौरान आसमान में बादल जरूर नजर आ सकते हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर तेज या भारी बारिश की उम्मीद कम है। स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 सितंबर से मानसून फिर सक्रिय होगा, जिसके बाद बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    राजस्थान में 24 फीसदी बारिश कम
    इस मानसून सीजन में राजस्थान को अब तक सामान्य बारिश का इंतजार ही है। 1 जून से 6 सितंबर तक प्रदेश में सामान्य से करीब 24 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश में सिर्फ चार जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    इनमें सबसे आगे भरतपुर है। यहां 1 जून से 6 सितंबर तक सामान्य बारिश 481.7 एमएम मानी जाती है, जबकि इस सीजन में अब तक 638.8 एमएम बारिश हो चुकी है। यानी भरतपुर में सामान्य से करीब 33 फीसदी ज्यादा पानी बरसा है।

    भरतपुर के अलावा दौसा, धौलपुर और झुंझुनूं में भी सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। इन जिलों में बारिश सामान्य से करीब 7 से 13 फीसदी अधिक रही है। दूसरी ओर अलवर में सामान्य से करीब 1 फीसदी कम और करौली में 5 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    नाथद्वारा में सबसे ज्यादा बारिश
    पिछले 24 घंटे के दौरान राजसमंद का नाथद्वारा बारिश के लिहाज से प्रदेश में सबसे आगे रहा। यहां करीब 28 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा कोटपूतली, अलवर शहर और सीकर के कुछ इलाकों में भी बारिश हुई।

    देर शाम पश्चिमी राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू में मौसम ने थोड़ी करवट ली। बादल छाने के साथ कुछ जगहों पर हल्की बारिश हुई और तेज हवाएं चलीं। हालांकि, यह बारिश इतनी व्यापक नहीं रही कि प्रदेश में कमजोर पड़े मानसून को फिर से सक्रिय माना जाए।

    बारिश रुकी तो चढ़ने लगा पारा
    बारिश थमने और धूप निकलने का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार को करौली, कोटा, प्रतापगढ़, फतेहपुर, अलवर, पिलानी, टोंक और भीलवाड़ा समेत कई शहरों में दिन के तापमान में करीब 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हुई।

    प्रदेश में सोमवार को सबसे गर्म फलोदी रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने के साथ आने वाले दिनों में दिन के तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 12 सितंबर के बाद बारिश का नया दौर शुरू होने पर एक बार फिर तापमान में राहत मिलने की उम्मीद है।

    आज का मौसम कैसा रहेगा?
    आज भरतपुर और कोटा संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में अगले 4-5 दिन मानसून कमजोर रहने का अनुमान है। ऐसे में प्रदेश में फिलहाल तेज बारिश का इंतजार करना होगा। मौसम विभाग की नजर अब 12 सितंबर से बनने वाले नए बारिश के दौर पर है। अगर सिस्टम अनुकूल रहा तो मानसून की सुस्ती टूट सकती है और प्रदेश के कई हिस्सों में दोबारा बारिश का सिलसिला तेज हो सकता है।

  • वोटिंग से पहले जरूरी खबर: वोटर ID के बिना भी कर सकेंगे मतदान, ये 11 डॉक्यूमेंट होंगे मान्य

    वोटिंग से पहले जरूरी खबर: वोटर ID के बिना भी कर सकेंगे मतदान, ये 11 डॉक्यूमेंट होंगे मान्य

    जयपुर
    राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार (9 सितंबर) को मतदान होगा. पहले चरण में 162 नगरीय निकायों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएंगे. मतदान को लेकर निर्वाचन विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों पर पहुंच रही हैं. मतदान के लिए मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है. इसके साथ पहचान के लिए फोटोयुक्त दस्तावेज दिखाना होगा. अगर किसी मतदाता के पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है, तो भी वह मतदान कर सकता है. इसके लिए चुनाव आयोग ने 11 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज मान्य किए हैं.

    जयपुर में 565 मतदान केंद्र पर वोटिंग
    पहले चरण में 17 नगर पालिकाओं के 25 वार्ड, 4 नगर परिषदों के 6 वार्ड और एक नगर निगम का एक वार्ड निर्विरोध चुना जा चुका है. इन वार्डों को छोड़कर बाकी सीटों पर मतदान होगा. जयपुर जिले में 18 नगरीय निकायों के लिए 565 मतदान केंद्रों पर वोटिंग होगी.

    पहले चरण में मतदान वाले प्रमुख नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में चौमूं, शाहपुरा, बाड़मेर, जैसलमेर, तिजारा, खैरथल, भिवाड़ी, करौली, कुचामन सिटी, डीडवाना, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, झालावाड़, बूंदी, बारां, जालोर, झुंझुनूं, फतेहपुर, सवाई माधोपुर, धौलपुर, सुजानगढ़, चूरू, कोटपूतली, ब्यावर और नागौर शामिल हैं.

    वोटर आई के अलावा 11 वैकल्पिक दस्तावेज

    1.     आधार कार्ड
    2.     विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी मनरेगा कार्ड
    3.     बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक
    4.     श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड
    5.     ड्राइविंग लाइसेंस
    6.     पैन कार्ड
    7.     भारतीय पासपोर्ट
    8.     फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज
    9.     केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम या सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी की ओर से जारी फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र
    10.     सांसद या विधानसभा सदस्य को जारी सरकारी पहचान पत्र
    11.     सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जारी यूडीआईडी

    कार्ड में से कोई एक दस्तावेज
    मतदान केंद्र पर जाने से पहले मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में जरूर जांच लें. साथ ही मतदान केंद्र की जानकारी पहले से कर लें. मतदान के बाद 11 सितंबर को दूसरे चरण का मतदान होगा. निकाय चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होगी.

  • डेढ़ किमी रोड शो में दिखा भाजपा का दम, भजनलाल शर्मा ने मांगा निकाय चुनाव में आशीर्वाद

    डेढ़ किमी रोड शो में दिखा भाजपा का दम, भजनलाल शर्मा ने मांगा निकाय चुनाव में आशीर्वाद

    पाली
     राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 को लेकर भाजपा ने चुनावी अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को पाली में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो किया। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सिंधी कॉलोनी पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो सूरजपोल से शुरू हुआ। इसके बाद काफिला सर्राफा बाजार, फतेहपुरिया बाजार और पानी दरवाजा होते हुए सिंधी कॉलोनी पहुंचा। रोड शो में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, मंत्री जोराराम कुमावत, सांसद पीपी चौधरी, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, जिला अध्यक्ष सुनील भंडारी समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
    रोड शो के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यकर्ता ढोल बजाते हुए आगे चल रहे थे। वहीं, एक बुजुर्ग महिला हाथ में भाजपा का झंडा लेकर डांस करती नजर आईं। रोड शो के दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की फैक्ट्रियां दोबारा शुरू कराने और स्थानीय स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दे भी उठाए।

    'पाली लंबे समय से कांग्रेस मुक्त'- भजनलाल शर्मा
    सिंधी कॉलोनी में लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पाली में उत्साह और उमंग दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि यहां की जनता का भाजपा के प्रति प्यार और विश्वास साफ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री ने पाली को भाजपा का गढ़ बताते हुए कहा कि यह शहर लंबे समय से कांग्रेस मुक्त है और यहां का एक-एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम कर रहा है।

    JJM और पेपर लीक को लेकर कांग्रेस पर निशाना
    मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन (JJM) को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा जो कहती है, वह करके दिखाती है। पिछले ढाई साल में सरकार ने जो काम किए हैं, वे सभी के सामने हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि गहलोत जी पेपर लीक और जल जीवन मिशन के मुद्दे पर क्यों नहीं बोलते। उन्होंने 'दो साल बनाम पांच साल' के कामकाज पर भी कांग्रेस से सवाल किया।

    सीएम ने कहा कि राजस्थान की जनता प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत बनाना चाहती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आगामी निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिताने और नगर निकायों में कमल खिलाने की अपील की।

    आधुनिक शहर बनाने का दावा
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार का लक्ष्य नगर निकायों को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक और आत्मनिर्भर शहर बनाना है। उन्होंने सुदृढ़ आधारभूत ढांचे, आधुनिक सीवरेज व्यवस्था, एलईडी लाइट, स्वच्छ पेयजल और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।

    मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी पाली की जनता के उत्साह का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार शहरी क्षेत्रों में विकास की अंतिम कड़ी तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के आशीर्वाद से आगामी निकाय चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश मिलेगा।

  • LPG पर केंद्र का बड़ा फैसला, गांवों में भी 25 दिन बाद करा सकेंगे रिफिल बुकिंग

    LPG पर केंद्र का बड़ा फैसला, गांवों में भी 25 दिन बाद करा सकेंगे रिफिल बुकिंग

    जयपुर
     केंद्र सरकार ने राजस्थान समेत देश भर के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा फैसला लिया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता भी शहरवासियों की तरह 25 दिनों के अंतराल पर अपना गैस सिलेंडर बुक करा सकेंगे। पहले ग्रामीण इलाकों के लिए यह सीमा 45 दिनों की तय की गई थी।

    राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने दी जानकारी
    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया, सरकार ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

    दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी जंग और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में सरकार ने घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी व कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए रिफिल बुकिंग के बीच अंतर बढ़ा दिया था। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन बाद अगली LPG बुकिंग की अनुमति थी।

    सरकार ने कई सख्त कदम उठाए
    एलपीजी गैस की कमी से निपटने और आपूर्ति नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने मार्च में 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के तहत कई सख्त कदम उठाए थे। इसी अस्थायी मांग प्रबंधन रणनीति के तहत शहरी क्षेत्रों में एलपीजी रिफिल का अंतराल 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तय कर दिया गया था।

    इसके अतिरिक्त सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया था कि प्रोपेन (C3) और ब्यूटेन (C4) जैसी गैसों का उपयोग प्राथमिकता से घरेलू LPG के उत्पादन में किया जाए, ताकि आम जनता को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े।

    मंत्रालय ने की समीक्षा
    सोमवार यानी 7 सितंबर को पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा ओएमसी के अध्यक्षों और प्रबंध निदेशकों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया कि अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सुरेश गोपी ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से मंत्रालय द्वारा जारी पत्र की प्रति साझा करते हुए लिखा, वर्तमान में एलपीजी आपूर्ति की बेहतर होती स्थिति और रिफिल बैकलॉग (बकाया ऑर्डर) में आई भारी कमी को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मौजूदा रिफिल बुकिंग अंतराल की समीक्षा की है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों का एक समान रिफिल बुकिंग अंतराल लागू करने का निर्णय लिया गया है।

    व्यावसायिक एलपीजी पर पहले ही हट चुकी हैं पाबंदियां
    घरेलू LPG की बुकिंग के नियमों में ढील देने से पहले जून में सरकार ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां भी हटा दी थीं। तेल कंपनियों को युद्ध से पहले जितनी मात्रा में गैर-घरेलू LPG की सप्लाई होती थी, उसे फिर से सामान्य स्तर पर शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही, उद्योगों का काम प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें संकट से पहले होने वाली खपत की 50% तक LPG सप्लाई की अनुमति दे दी गई थी।

    वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते भारत में एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई थी। मार्च में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद जून में 29 रुपए की और वृद्धि हुई। आपूर्ति की स्थिति सुधरने और बुकिंग अंतराल घटने से देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब अगला सिलेंडर बुक करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

  • देशनोक में पुलिस की सख्त नाकेबंदी, लग्जरी कार से भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त

    देशनोक में पुलिस की सख्त नाकेबंदी, लग्जरी कार से भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त

    जयपुर
    राजस्थान में जारी नगर पालिका और निकाय चुनावों की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच बीकानेर जिले के देशनोक क्षेत्र में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा की जा रही सख्त नाकेबंदी के दौरान देशनोक में एक लग्जरी कार से भारी मात्रा में अवैध देशी और अंग्रेजी शराब बरामद की गई है। पुलिस की इस मुस्तैद कार्रवाई से पूरे बीकानेर जिले के राजनीतिक और चुनावी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

    पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके से शराब के साथ-साथ संदिग्ध ब्लैक लग्जरी कार को भी जब्त कर लिया है। तलाशी के दौरान गाड़ी के अंदर से एक प्रमुख राजनीतिक दल का दुपट्टा और कुछ अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा भी किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन अब इस पूरे मामले की जांच इस एंगल से कर रहा है कि कहीं इस अवैध शराब का इस्तेमाल निकाय चुनाव में मतदाताओं को लुभाने या बांटने के लिए तो नहीं किया जाना था।

    देशी-अंग्रेजी पव्वे और बोतलें बरामद
    देशनोक थानाधिकारी सुमन शेखावत के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इलाके में विशेष चेकिंग अभियान चला रखा था। इसी दौरान एक संदिग्ध ब्लैक रंग की कार को रोककर जब उसकी बारीकी से तलाशी ली गई, तो पुलिस कर्मी भी हैरान रह गए। कार के अंदर अवैध शराब का जखीरा छिपाकर रखा गया था।

    पुलिस द्वारा की गई आधिकारिक जब्ती के अनुसार, गाड़ी से कुल 141 देशी शराब के पव्वे, 96 अंग्रेजी शराब के पव्वे और 12 बड़ी बोतलें बरामद की गई हैं। पुलिस ने मौके पर ही शराब की पूरी खेप को अपने कब्जे में लेकर वाहन को सीज कर दिया।

    चुनावी माहौल में शराब खपाने की आशंका
    थानाधिकारी सुमन शेखावत ने बताया कि देशनोक पालिका चुनाव के मद्देनजर क्षेत्र में किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले इस शराब की सप्लाई की जानी थी ताकि मतदान को प्रभावित किया जा सके।

    पुलिस ने इस पूरे मामले में आबकारी अधिनियम (Excise Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। घटना के हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब कहां से लाई गई थी और इसे कहां डिलीवर किया जाना था।

    पुलिस टीम ने की मुस्तैद कार्रवाई
    देशनोक में हुई इस बड़ी जब्ती को अंजाम देने में स्थानीय पुलिस टीम की सतर्कता की काफी तारीफ हो रही है। इस कार्रवाई को हेड कांस्टेबल अशोक, कांस्टेबल दिनेश और कांस्टेबल कैलाश की विशेष टीम ने अंजाम दिया।

    पुलिस की इस तत्परता से चुनाव में अवैध संसाधनों के इस्तेमाल की कोशिश कर रहे असामाजिक तत्वों में खौफ का माहौल है। देशनोक पुलिस का कहना है कि मतदान की प्रक्रिया पूरी होने तक क्षेत्र में 24 घंटे सघन चेकिंग और निगरानी जारी रहेगी।

  • मतदान से पहले BJP-कांग्रेस का वोट मैनेजमेंट तेज, कमजोर बूथों और निर्दलीयों पर नजर

    मतदान से पहले BJP-कांग्रेस का वोट मैनेजमेंट तेज, कमजोर बूथों और निर्दलीयों पर नजर

    जयपुर
    राजस्थान के 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इन 168 नगरीय निकाय क्षेत्रों में सोमवार शाम रैलियों, सभाओं, रोड शो और जुलूस का चुनावी शोर थम गया, अब घर-घर जाकर प्रचार हो सकेगा। प्रशिक्षण के बाद मंगलवार को मतदान दल रवाना होंगे, जो शाम तक संबंधित मतदान केंद्र पहुंचकर अगले दिन होने वाले मतदान की तैयारियां शुरू कर देंगे।

    लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समान मतदाताओं तक पर्ची नहीं पहुंचने व बुजुर्ग मतदाताओं को होम वोटिंग सुविधा न मिलने से मतदान प्रतिशत में कमी का अंदेशा है। वहीं, 35 वर्ष आयु तक के 40% से अधिक मतदाताओं का जोश मतदान बढ़ाने में मदद करेगा। उधर, पहले चरण में 40 वर्ष तक के युवा प्रत्याशी 49% से अधिक जिनका जोश भी चुनाव मैदान में दिखाई देगा।

    पहले चरण में 39 जिलों के 5 हजार 393 वार्डों में मतदाता अपने पार्षद चुनेंगे, जबकि प्रदेशभर के कुल वार्डों की संख्या 10 हजार 245 है। पहले चरण में प्रदेश के चार नगर निगमों सहित 168 नगरीय निकायों में मतदान होगा, जिनमें से पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम शामिल हैं। 10 में से जयपुर नगर निगम सहित 6 नगर निगमों में 11 सितंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी।

    पहला चरण: 20 हजार 623 प्रत्याशी और 7 हजार 683 मतदान केंद्र
    मतदाताओं को निर्धारित पहचान दस्तावेज लाना होगा। पहले चरण के चुनाव में 57 लाख 52 हजार 278 मतदाता, 20 हजार 623 प्रत्याशियों के लिए 7 हजार 683 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

    मतदाताओं का गणित
        1 करोड़ 44 लाख 3 हजार 853 कुल मतदाता
        कुल निकाय 309
        पुरुष मतदाता 73 लाख 98 हजार 415
        महिला मतदाता 70 लाख 04 हजार 927
        511 थर्ड जेंडर
        27.24% मतदाता बढ़े वर्ष 2019 की तुलना में

    वोट मैनेजमेंट पर जोर: भाजपा बूथ पर, कांग्रेस निर्दलीयों के साथ जोड़ रही समीकरण
    पहले चरण का प्रचार थमते ही भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी रणनीति का फोकस वोट मैनेजमेंट पर कर दिया है। भाजपा ने कमजोर बूथों की पहचान कर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय किया है। उधर, कांग्रेस 50 से 100 वोट काटने की क्षमता रखने वाले निर्दलीयों से संपर्क साध रही है।

    कंट्रोल रूम एक्टिव, बागियों और निर्दलीयों पर नजर
    प्रचार अभियान थमने के साथ ही भाजपा ने रणनीति का फोकस 'वोटिंग और प्रत्याशी मैनेजमेंट' पर कर दिया है। अब समर्थक मतदाताओं को घर से बूथ तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। कमजोर बूथों की पहचान से लेकर मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता तक की मॉनिटरिंग की जा रही है। निर्दलीय और बागियों की सूची भी तैयार की है, जिन्हें संगठन 'आगे' मान रहा है। जिला संगठनों ने यह सूची प्रदेश संगठन को भेज दी है। सोमवार से इनके साथ संपर्क का दौर भी तेज किया गया है। पार्टी इसे निकायों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने की संभावित रणनीति के तौर पर देख रही है।

    कांग्रेसः बागियों को साध रहे, पोस्ट-पोल मैनेजमेंट की तैयारी
    राजस्थान में पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही कांग्रेस ने अब चुनावी प्रबंधन का अगला चरण शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों की सूची पर काम शुरू किया है, जो खुद जीत की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के वोट काटने की क्षमता रखते हैं। कांग्रेस की रणनीति अब ऐसे उम्मीदवारों को अपने पक्ष में लाने और दूसरे चरण में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान का माहौल मजबूत करने की है।

    कांग्रेस का मानना है कि निकाय चुनाव में मुकाबला कई वार्डों में बेहद करीबी है। ऐसे में 50 से 100 या इससे अधिक वोट लेने वाला निर्दलीय भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। पार्टी अब प्रभावित खासतौर पर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर रही है। जिला स्तर के नेताओं को इनसे बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। जिलाध्यक्ष, विधायक और वरिष्ठ नेताओं को इन लोगों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

     

  • 6 साल का टूटा रिकॉर्ड, उदयपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित; सांस के मरीजों के लिए अलर्ट

    6 साल का टूटा रिकॉर्ड, उदयपुर की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित; सांस के मरीजों के लिए अलर्ट

     उदयपुर
    उदयपुर शहर की आबोहवा छह साल में इस अगस्त जितनी जहरीली कभी नहीं रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 से 2025 तक शहर की हवा ज्यादातर दिन मॉडरेट यानी सामान्य श्रेणी में दर्ज हुई थी। पिछले साल अगस्त में पूरे 31 दिन सामान्य रहे, 2023 और 2024 में भी 90 फीसदी से ज्यादा दिन मॉडरेट में गुजरे। पर, बीते अगस्त ने रुझान पूरी तरह तोड़ दिया। यही नहीं सितंबर के पहले सप्ताह में भी हवा गुणवत्ता खराब बनी हुई है। आमतौर पर दिवाली के आसपास प्रदूषण का जो स्तर होता है, वह इन दिनों है।

    इस साल के अगस्त के 31 दिनों में से 23 दिन खराब और सात दिन सीधे हानिकारक श्रेणी में रहे हैं। यानी हर तीसरा दिन ऐसा रहा, जब सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इसके उलट, अच्छी श्रेणी का एक भी दिन बीते अगस्त में दर्ज नहीं हुआ, जबकि 2024 में तीन और 2022 में एक दिन इस श्रेणी में मिला था। 2021 में भी 25 दिन खराब श्रेणी में रहे थे, लेकिन उस साल एक भी दिन हानिकारक स्तर तक नहीं पहुंचा था। जबकि इस साल सात दिन इस निशान को पार कर गए।

    इसलिए मनाया जाता है इंटरनेशनल डे
    संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2019 में यह दिवस घोषित किया था, जो पहली बार 7 सितंबर 2020 को मनाया गया। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाना और साफ हवा के लिए प्रेरित करना है। ऐसी हवा, जिसमें प्रदूषण का स्तर इतना कम हो कि इंसान स्वस्थ हवा में सांस ले सके। इस बात पर जोर दिया जाता है कि साफ दिखाई देने वाला आसमान हमेशा साफ हवा की गारंटी नहीं है।

    सबसे भारी रहे ये दिन
    बीते अगस्त में 28 तारीख को सबसे ज्यादा (168 एक्यूआई) दर्ज हुआ, जो महीने का सबसे प्रदूषित दिन रहा। इसके अलावा 20 से 24 अगस्त के बीच लगातार 5 दिन शहर हानिकारक श्रेणी में झेलता रहा। पिछले पांच सालों में ऐसा कोई लगातार दौर सामने नहीं आया है।

    ऐसे समझें AQI कितना खराब और कितना अच्छा
        0-50 तक अच्छा
        51-100 तक सामान्य
        101-150 तक खराब
        151-200 हानिकारक
        201-300 तक बेहद खराब
        301 से ऊपर खतरनाक

    वर्षवार अगस्त में एक्यूआई (दिनों की संख्या)
    वर्ष        अच्छा    सामान्य    खराब    हानिकारक
    2021    00            05           25         01
    2022    01              23         07         00
    2023    00              30           01       00
    2024    03              28           01        00
    2025    00             31           00          00
    2026    00            01           23           07

    नोट: बेहतर खराब और खतरनाक श्रेणी के दिनों को शामिल नहीं किया गया है।

    इनका कहना है…
    इस साल बरसात नहीं होना सबसे बड़ा कारण है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में देर तक टिके हुए हैं। साथ ही पूर्व में हुई बरसात के बाद सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से उड़ने वाली धूल भी वजह रहती है। शहर में बड़े निर्माण कार्य भी चल रहे हैं।
    -विनय कट्टा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल