Category: राज्य

  • भागलपुर में बाढ़ के बीच CO हर्षा कोमल का अनोखा अंदाज, ट्रैक्टर से गांव पहुंचकर बांटी राहत सामग्री

    भागलपुर में बाढ़ के बीच CO हर्षा कोमल का अनोखा अंदाज, ट्रैक्टर से गांव पहुंचकर बांटी राहत सामग्री

    पटना
    बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. जिले की 86 से अधिक पंचायतें प्रभावित हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन की टीमें जुटी हैं. इसी बीच शाहकुंड प्रखंड की सर्किल ऑफिसर (CO) हर्षा कोमल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह ट्रैक्टर पर सवार होकर बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने जाती दिखाई दे रही हैं.

    शाहकुंड प्रखंड के कई इलाकों में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण सामान्य वाहनों का आवागमन प्रभावित है. ऐसे में CO हर्षा कोमल अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ ट्रैक्टर के जरिए प्रभावित गांवों तक पहुंचीं. ट्रैक्टर पर राहत सामग्री लेकर प्रशासन की टीम बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंची और जरूरतमंद लोगों को राहत सामग्री बांटी.

    शाहकुंड प्रखंड के खुलनी, पैरडो मोमिन्या माल, बेलथू, खैरा, मकंदपुर और दरियापुर पंचायत बाढ़ से अधिक प्रभावित हैं. इन इलाकों में गंगा नदी के पानी का असर देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर जलभराव के कारण आवागमन ठप हो गया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं.

    इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए शाहकुंड की CO हर्षा कोमल ट्रैक्टर के जरिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं. वायरल वीडियो में वह ट्रैक्टर पर बैठकर राहत सामग्री के साथ गांवों की ओर जाती दिखाई देती हैं. उनके साथ प्रशासन के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी हैं.

    प्रशासन के सामने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौती है. जिन गांवों तक कार नहीं पहुंच पा रही है, वहां ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया जा रहा है. CO हर्षा कोमल खुद प्रभावित गांवों का दौरा कर राहत वितरण की व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं.

    भागलपुर में गंगा नदी के उफान के कारण कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है. बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके लिए भोजन और अन्य चीजों की व्यवस्था की जा रही है. प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

  • चंडीगढ़ में किरायेदार-मकान मालिकों के लिए नया नियम, 2 महीने में देनी होगी किराये के एग्रीमेंट की जानकारी

    चंडीगढ़ में किरायेदार-मकान मालिकों के लिए नया नियम, 2 महीने में देनी होगी किराये के एग्रीमेंट की जानकारी

    चंडीगढ़.

    चंडीगढ़ में मकान मालिक और किरायेदारों के बीच होने वाले विवादों के निपटारे को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की तैयारी पूरी हो गई है। चंडीगढ़ प्रशासन के संपदा विभाग ने यूटी चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियम 10 सितंबर से पूरे चंडीगढ़ में प्रभावी हो गए हैं।

    नए नियमों में किरायेदारी एग्रीमेंट की ऑनलाइन जानकारी देना जरूरी किया गया है। एग्रीमेंट होने के दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को जानकारी देनी होगी। नई व्यवस्था में किरायेदारी समझौते से लेकर किराये में बदलाव, सुरक्षा राशि, परिसर खाली कराने और विवादों के निपटारे तक की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसके लिए किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। उपायुक्त-सह-संपदा अधिकारी निशांत कुमार यादव, आईएएस ने कहा कि नए नियम मकान मालिकों और किरायेदारों के संबंधों में सुगमता, पारदर्शिता और निश्चितता लाएंगे तथा विवादों के समाधान के लिए सुव्यवस्थित तंत्र सुनिश्चित करेंगे।

    एग्रीमेंट के 2 महीने में देनी होगी जानकारी: नए नियमों के अनुसार मकान मालिक और किरायेदार को किरायेदारी समझौता होने के दो माह के भीतर संयुक्त रूप से या अलग-अलग ऑनलाइन माध्यम से किराया प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी होगी। सूचना मिलने के सात दिन के भीतर प्राधिकरण पक्षकारों को ई-रसीद के रूप में विशिष्ट पहचान संख्या जारी करेगा। यह पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल पर भेजी जाएगी। मकान मालिक किराये से मना करे तो भी रास्ता : यदि मकान मालिक किराया या अन्य देय राशि लेने से इनकार करता है अथवा रसीद जारी नहीं करता, तो किरायेदार लगातार दो माह तक आरटीजीएस, एनईएफटी, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान का प्रयास कर सकेगा। इसके बाद भी भुगतान स्वीकार नहीं होने पर किरायेदार राशि किराया प्राधिकरण के पास जमा करा सकेगा।

    किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस विवाद भी अथॉरिटी में: किराया, बिजली, पानी या मेंटेनेंस चार्ज के विवाद पर रेंट अथॉरिटी में आवेदन कर सकेंगे। फैसला लेते समय आसपास के क्षेत्र में चल रहे प्रचलित किराये को भी ध्यान में रखा जाएगा।  तीन महीने में बनेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म: किराया प्राधिकरण के गठन के तीन माह के भीतर स्थानीय भाषा और प्रशासन द्वारा निर्धारित अन्य भाषाओं में डिजिटल मंच तैयार किया जाएगा। इस पर किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन होगा। किरायेदारी संबंधी रिकॉर्ड गोपनीय रखे जाएंगे और इन्हें केवल संबंधित पक्षकारों तथा अधिकृत अधिकारियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा।

    अपील पर 60 दिन में फैसला :
    पक्षकार किराया, बिजली, पानी, रखरखाव और सुरक्षा शुल्क के निर्धारण या संशोधन के लिए किराया प्राधिकरण में आवेदन कर सकेंगे। निर्णय से असंतुष्ट होने पर मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता से परिसर का मूल्यांकन कराया जा सकता है, जिसका खर्च आवेदक को उठाना होगा। दूसरे पक्ष को किराया प्राधिकरण में आवेदन पर 15 दिन में जवाब देना होगा, जिसे कारण दर्ज कर अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के 60 दिन के भीतर अपील का फैसला करना होगा और सामान्यतः केवल एक स्थगन की अनुमति होगी। किराया न्यायालय के आदेश का निष्पादन नोटिस की तामील के 30 दिन में पूरा करना होगा।

  • 40 डिग्री तक पहुंचा पारा, अब राजस्थान में फिर एक्टिव होगा मानसून

    40 डिग्री तक पहुंचा पारा, अब राजस्थान में फिर एक्टिव होगा मानसून

    जयपुर
    मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर सिस्टम धीरे-धीरे प्रभाव दिखा रहा है। इसके चलते पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को 9 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में कहीं-कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    राजस्थान में मानसून की बारिश का एक और दौर शुरू होने वाला है। गुरुवार को तेज धूप और बढ़ते तापमान से जहां प्रदेश में गर्मी फिर परेशान करने लगी, वहीं अब बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम ने मौसम का मिजाज बदलने के संकेत दे दिए हैं। इसके असर से शुक्रवार से राज्य में मानसून फिर एक्टिव होने की संभावना है। मौसम विभाग ने आज 9 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।

    9 जिलों में आज बारिश का अलर्ट
    मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर सिस्टम धीरे-धीरे प्रभाव दिखा रहा है। इसके चलते पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। शुक्रवार को 9 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में कहीं-कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    15 सितंबर तक बना रह सकता है बारिश का असर
    मौसम का यह बदलाव सिर्फ एक-दो दिन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में बारिश का दौर 15 सितंबर तक एक्टिव रह सकता है। खासतौर पर पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में मानसून की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। यानी अभी आसमान पूरी तरह साफ रहने वाला नहीं है और अगले कुछ दिनों में मौसम बार-बार करवट ले सकता है।

    गुरुवार को बारिश गायब, धूप ने बढ़ाई गर्मी
    दिलचस्प बात यह है कि बारिश के अलर्ट से ठीक पहले गुरुवार को राजस्थान में मौसम काफी अलग नजर आया। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में दिनभर तेज धूप रही। बारिश का दौर थमने के साथ ही तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। 10 से ज्यादा शहरों में अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया।

    40 डिग्री तक पहुंचा पारा
    गुरुवार को पिलानी में सबसे ज्यादा गर्मी रिकॉर्ड की गई। यहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसके बाद श्रीगंगानगर में भी गर्मी ने जोर दिखाया और अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में प्रदेश में एक तरफ 40 डिग्री तक पहुंचती गर्मी है, तो दूसरी तरफ अगले कुछ घंटों में बारिश की वापसी का अलर्ट है।

    24 सितंबर तक गर्मी से पूरी तरह राहत नहीं
    बारिश की संभावना के बावजूद मौसम विभाग ने अगले दो सप्ताह को लेकर एक और अहम संकेत दिया है। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के अनुसार 24 सितंबर तक प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। यानी बारिश के कुछ दौर भले ही तापमान को नीचे खींचें, लेकिन पूरे प्रदेश में लगातार ठंडक का दौर शुरू होने की उम्मीद अभी नहीं है।

    बारिश आएगी, लेकिन गर्मी भी बनी रहेगी
    मौसम का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि सितंबर में मानसून और गर्मी दोनों साथ-साथ अपना असर दिखा सकते हैं। दिन में तेज धूप के कारण तापमान बढ़ रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी से बने सिस्टम के चलते बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ने वाली हैं। ऐसे में कुछ इलाकों में बारिश के बाद तापमान में गिरावट आ सकती है, जबकि दूसरे हिस्सों में गर्मी का असर बरकरार रह सकता है।

    अब नजर अगले चार-पांच दिनों पर
    फिलहाल मौसम विभाग की नजर बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर सिस्टम और उसके राजस्थान पर पड़ने वाले असर पर है। शुक्रवार से बारिश की गतिविधियां बढ़ने के बाद अगले कुछ दिनों में इसका दायरा और बढ़ सकता है। 15 सितंबर तक मानसून एक्टिव रहने की संभावना ने सितंबर के मौसम को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल राजस्थान में सवाल यही है कि 40 डिग्री तक पहुंचा पारा पहले नीचे आएगा या मानसून की बारिश कुछ इलाकों में गर्मी को और पीछे धकेलेगी।

  • रांची में अवैध बैंक्वेट हॉल पर शिकंजा, लाइसेंस मिलने तक संचालन बंद रखने का आदेश

    रांची में अवैध बैंक्वेट हॉल पर शिकंजा, लाइसेंस मिलने तक संचालन बंद रखने का आदेश

    रांची
    राजधानी में बिना लाइसेंस चल रहे बैंक्वेट हाल और विवाह भवनों पर रांची नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में पुंदाग के ढीपाटोली स्थित न्यू व्यू बैंक्वेट को निगम ने नोटिस जारी किया है। जांच में बैंक्वेट हाल का संचालन बिना जरूरी लाइसेंस के किए जाने की बात सामने आई।

    निगम की टीम ने प्रतिष्ठान परिसर में नोटिस चस्पा कर संचालक को तीन दिन के भीतर लाइसेंस के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है।

    जांच के दौरान पाया गया कि न्यू व्यू बैंक्वेट में विवाह और अन्य समारोहों के लिए बैंक्वेट हाल का संचालन किया जा रहा है। लेकिन इसके लिए नगर निगम से आवश्यक लाइसेंस नहीं ली गई थी। इतना ही नहीं, संचालक ने लाइसेंस लेने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अब तक आवेदन भी नहीं किया था।

    लाइसेंस मिलने तक संचालन बंद रखने का निर्देश
    नगर निगम ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि नोटिस की तारीख से तीन दिनों के भीतर जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए निगम के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही लाइसेंस मिलने तक बैंक्वेट हाल का संचालन तत्काल बंद रखने को कहा गया है।

    अन्य बैंक्वेट हाल भी निगम के रडार पर
    नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई सिर्फ न्यू व्यू बैंक्वेट तक सीमित नहीं है। शहर में संचालित बैंक्वेट हाल, विवाह भवन, लाज, हास्टल और ऐसे अन्य प्रतिष्ठानों की जांच कराई जा रही है। निगम ने संचालकों से अपील की है कि वे संचालन से पहले जरूरी लाइसेंस लें और निर्धारित मानकों का पालन करें।

     

  • बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में अब सुचारू होगा कामकाज, संविदा शिक्षकों को मिलेगी प्रशासनिक जिम्मेदारी

    बिहार के नए डिग्री कॉलेजों में अब सुचारू होगा कामकाज, संविदा शिक्षकों को मिलेगी प्रशासनिक जिम्मेदारी

    पटना
    राज्य के 211 नए राजकीय डिग्री कालेजों में पढ़ाई शुरू होने के तकरीबन दो माह बाद प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की कवायद तेज हो गई।

    इसके लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने संबंधित कुलपतियों को निर्देश दिया है। इसके मुताबिक नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले जिन राजकीय डिग्री कालेजों के आसपास संबद्ध महाविद्यालय हैं, वहां के प्राचार्य को संबंधित नवसृजित डिग्री कालेज के प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा।

    राज्यपाल ने सभी कुलपतियों को दिया निर्देश
    इससे डिग्री कालेजों के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों के संचालन में सुविधा होगी। डिग्री कालेजों में कार्यरत संविदा सहायक प्राध्यापकों में से किसी एक को दैनिक प्रशासनिक कार्यों के निर्वहन के लिए नामित किया जाएगा।

    इससे काॅलेज में नियमित प्रशासनिक गतिविधियों को संचालित करने में मदद मिलेगी। वहीं संविदा सहायक प्राध्यापकों में से किसी एक को नवसृजित डिग्री कालेज में बर्सर के कार्यों के लिए नामित किया जाएगा।

    बर्सर संबंधित कालेज के वित्तीय संबंधी प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र भेजकर नए डिग्री कालेजों के संचालन के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

    वित्तीय व्यवस्था के लिए संविदा सहायक प्राध्यापकों को दी जाएगी प्रशासनिक जिम्मेदारी
    निर्देश के मुताबिक जिन संविदा सहायक प्राध्यापक को बर्सर की जिम्मेदारी दी जाएगी उस बर्सर के अतिरिक्त प्रभार वाले प्राचार्य के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाते का संचालन करना होगा।

    दीपक कुमार सिंह ने बताया कि सभी नए डिग्री काॅलेजों में प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था की निगरानी विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त राज्यपाल सचिवालय के स्तर से भी होगी। संविदा शिक्षकों काे क्षमता विकास हेतु प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

  • बहादुरगढ़ अस्पताल में बवाल, SMO से मारपीट; रेडियोग्राफर पर पहले भी उठ चुके थे सवाल

    बहादुरगढ़ अस्पताल में बवाल, SMO से मारपीट; रेडियोग्राफर पर पहले भी उठ चुके थे सवाल

    बहादुरगढ़.

    सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में एसएमओ एवं कार्यवाहक पीएमओ के साथ मारपीट के मामले में आरोपित रेडियोग्राफर संदीप के खिलाफ पहले भी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से विवाद की शिकायतें सामने आती रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, वह कई बार चिकित्सकों से उलझ चुका है।

    अधिकारियों के पास लगातार शिकायतें पहुंचने के बाद उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। इसी बीच हुई मारपीट की घटना ने अस्पताल के डॉक्टरों में रोष और बढ़ा दिया है। घटना के बाद डॉक्टरों ने वर्क सस्पेंड किया और नर्सिंग आफिसर एकत्रित हुए तो इससे सेवाएं प्रभावित हुई। स्टाफ के साथ मरीजों में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। काफी मरीज बिना इलाज लौटे। अस्पताल की एसएमओ डॉ. ममता ने बताया कि रेडियोग्राफर को लेकर अधिकारियों के पास पहले भी शिकायतें पहुंची थीं। वहीं एसएमओ डॉ. विनय ने खुद बताया कि दो दिन पहले भी वह उनके कमरे में पहुंचा था और उस समय भी उसका व्यवहार तैश में था। तब उसे बाद में मिलने के लिए कहा गया था। वहीं स्टाफ ने बताया कि कुछ दिन पहले ट्रामा सेंटर के गेट के सामने गाड़ी खड़ी करने को लेकर भी विवाद हुआ था। एंबुलेंस का रास्ता रुकने की स्थिति में कई बार कहने के बावजूद गाड़ी नहीं हटाने पर पुलिस बुलाने की नौबत आ गई थी।

    हादसे के दौरान ड्यूटी पर नहीं पहुंचने का आरोप
    डॉक्टरों के अनुसार दो दिन पहले केएमपी पर हुए भीषण हादसे के दौरान भी रेडियोग्राफर की रात्रि ड्यूटी थी। हादसे में तीन लोगों की मौत हुई थी और 23 लोग घायल हुए थे। आरोप है कि आपात स्थिति में उसे बुलाए जाने के बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचा। यह मामला भी अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया था। इसके बाद उससे जवाब-तलब करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बताया जा रहा है कि जिस समय एसएमओ ट्रामा सेंटर के निरीक्षण पर पहुंचे, उस समय रेडियोग्राफर की नियमित ड्यूटी नहीं थी।

    पुलिस की पूछताछ में सामने आई ये बात
    हालांकि, पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि संबंधित स्टाफ की मांग पर उसे बुलाया गया था। इसकी अभी विभाग ने पुष्टि नहीं की है। इसके बाद हुई घटना ने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद डॉक्टरों के साथ नर्सिंग स्टाफ भी काफी देर तक एकत्रित रहा। चिकित्सकों ने आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक और अन्य अधिकारियों को भी रिपोर्ट भेजी है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो कार्य बहिष्कार किया जा सकता है। इधर, पुलिस जांच अधिकारी ने बताया कि एसएमओ की ओर से शाम को शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर मारपीट के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। अस्पताल कर्मचारियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

  • पंजाब में गैंगस्टर कनेक्शन पर सियासी घमासान, रंधावा ने बॉर्डर रेंज के अधिकारियों की कॉल डिटेल खंगालने को कहा

    पंजाब में गैंगस्टर कनेक्शन पर सियासी घमासान, रंधावा ने बॉर्डर रेंज के अधिकारियों की कॉल डिटेल खंगालने को कहा

    चंडीगढ़.

    पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बॉर्डर रेंज के पुलिस अधिकारियों पर गैंगस्टरों से सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाए हैं।

    उन्होंने कहा कि डेरा बाबा नानक और बटाला से स्थानांतरित किए गए डीएसपी समेत संबंधित पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल की गहन जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे पता चल सकेगा कि उनके किन लोगों से संपर्क रहे हैं। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में रंधावा ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ ये आरोप लगा रहे हैं। यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो पंजाब के डीजीपी उनके खिलाफ भी मामला दर्ज करवा सकते हैं।

    ये राजनीतिक बयानबाजी नहीं
    उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पंजाब की कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। आरोप सही पाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए। रंधावा ने डीजीपी गौरव यादव पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुलिस गैंगस्टरों के परिवारों को सुरक्षा दे रही है, जबकि धमकियां और फिरौती की कॉल झेल रहे लोगों को सुरक्षा नहीं मिल रही।

    पंजाब को स्थायी डीजीपी की जरूरत
    उन्होंने कहा कि पंजाब को स्थायी डीजीपी की जरूरत है। गुरदासपुर नगर कौंसिल चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि गैंगस्टरों ने फोन के जरिये मतदाताओं को धमकाया, लेकिन प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका। संगरूर के गुलजार सिंह मामले में रंधावा ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह ने मृत्यु से पहले सरपंच और चीमा का नाम लिया था। इसलिए दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए और चीमा को मंत्री पद से हटाया जाए।

  • शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    बारिश से खराब सड़कों को तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात के बाद नवीनीकरण भी हो: मुख्यमंत्री

    आगामी पर्व-त्योहारों से पहले प्रमुख मार्गों को प्राथमिकता से गड्ढामुक्त करें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

    आगामी पर्वों के लिए 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित, प्राथमिकता के आधार पर होंगे गड्ढामुक्त

    शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और प्रमुख बाजारों की सड़कों को प्राथमिकता पर लेकर तत्काल शुरू कराएं मरम्मत कार्य: मुख्यमंत्री

    09 विभागों के करीब 4.36 लाख किमी मार्गों की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, 50 हजार किमी के गड्ढामुक्ति लक्ष्य पर चल रहा काम

    लखनऊ, 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाने और बरसात के बाद जरूरत के अनुसार उनका नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि बारिश अभी जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों में बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर आवागमन में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पर्वों से पहले आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण के काम पूरे करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति का काम केवल पैचवर्क तक सीमित न रहे। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां उसे अभी मोटरेबल बनाया जाए और बरसात समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के साथ ही एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग, रेलवे आदि की निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन मार्गों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर क्षतिग्रस्त सड़कों को चिन्हित कर गड्ढामुक्ति के विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। साथ ही मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभाग के प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि गड्ढामुक्ति अभियान में 09 विभागों के मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। वर्तमान लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाना है, जिसमें अब तक करीब 5,751 किलोमीटर पर काम पूरा किया जा चुका है। क्षतिग्रस्त मार्गों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब 5 हजार किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण में करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी है। शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और ऐसे अन्य स्थानों, जहां आमजन का आवागमन अधिक रहता है, वहां की सड़कों को प्राथमिकता पर लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मार्गों पर तत्काल काम शुरू कराया जाए और जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी किए सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि काम में तेजी के साथ गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास विभाग जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद तथा राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम उपस्थित रहे।

  • बारिश का इंतजार कर रहे बहादुरगढ़ के धान किसान, पानी की कमी से लागत बढ़ी और मुनाफे पर संकट

    बारिश का इंतजार कर रहे बहादुरगढ़ के धान किसान, पानी की कमी से लागत बढ़ी और मुनाफे पर संकट

    बहादुरगढ़
     धान उत्पादक किसान इस बार आशा और निराशा के बीच झूल रहे हैं। मानसून की बेरुखी ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।

    समय पर रोपाई या बिजाई की गई धान की फसल फिलहाल संभली हुई है, लेकिन उसे बचाए रखने के लिए किसान दिन-रात ट्यूबवेल चला रहे हैं।

    दूसरी ओर, पिछैती रोपाई वाले खेतों में सूखे का असर पहले ही दिखाई दे चुका है। कहीं फसल की जुताई की जा चुकी है तो कहीं किसान उसे पशु चारे के लिए काटने को मजबूर हैं।

    बहादुरगढ़ क्षेत्र में इस बार करीब 20 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। मानसून कमजोर रहने और लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने खेतों में नमी बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

    समय पर रोपी गई फसल की स्थिति ठीक
    समय पर रोपी गई फसल की स्थिति अभी अपेक्षाकृत ठीक है, मगर इसके लिए लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि धान को पानी की जरूरत के समय नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में ट्यूबवेल ही एकमात्र सहारा है।

    इससे डीजल और बिजली के साथ सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है। किसान आनंद के अनुसार, पिछले सप्ताह तीन-चार दिन बूंदाबांदी हुई, जिससे कुछ राहत मिली, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई।

    तापमान बढ़ने के साथ पानी की जरूरत और बढ़ गई है। यदि ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं की जाए तो फसल पर असर पड़ने का डर है।

    क्या इस बार बचेगा मुनाफा?
    लगातार सिंचाई के बावजूद इस बात की चिंता है कि अंत में उत्पादन कितना होगा और बढ़ी हुई लागत के बाद हाथ में मुनाफा कितना बचेगा।

    पिछैती रोपाई वाली फसल पर संकट सूखे की सबसे ज्यादा मार पिछैती रोपाई वाली फसल पर पड़ी है। मौसम में अगले एक-दो दिन में बदलाव और बारिश की संभावना से किसानों को उम्मीद बंधी है।

    अब देखना यह है कि आसमान से कितनी राहत मिलती है और खेतों में खड़ी धान की फसल किसानों की उम्मीद को उत्पादन और मुनाफे में कितना बदल पाती है। इधर, कृ़षि विभाग के एसडीओ डा. सुनील कौशिक ने बताया कि अभी फसल की स्थिति ठीक है।

     

  • भ्रामक दावों और गलत लेबलिंग पर सख्ती, 115 खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने और स्टॉक वापस लेने का आदेश

    भ्रामक दावों और गलत लेबलिंग पर सख्ती, 115 खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने और स्टॉक वापस लेने का आदेश

    रांची
    पतंजलि दूध बिस्कुट, किंडर जॉय, सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल, रेड बुल, स्टिंग एनर्जी, मॉन्स्टर एनर्जी, गेटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक और अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीम समेत 115 खाद्य उत्पादों को बाजार से हटाने का निर्देश दिया गया है।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की ओर से भ्रामक दावों, मिस-लेबलिंग और खाद्य मानकों से जुड़े उल्लंघनों के मामले में इन उत्पादों को चिन्हित किया गया है।

    एफएसएसएआई, नई दिल्ली और झारखंड के अपर मुख्य सचिव-सह-खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर राज्यभर में इन उत्पादों की बिक्री और उपलब्ध स्टॉक की जांच शुरू कर दी गई है। रांची में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने सघन जांच और कार्रवाई तेज कर दी है।

    कारोबारियों को स्टॉक तत्काल वापस लेने का आदेश
    रांची के अभिहित अधिकारी-सह-अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा) की ओर से सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है। इसमें खाद्य कारोबार संचालकों, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को एफएसएसएआई की ओर से चिन्हित 115 उत्पादों का मौजूदा स्टॉक तत्काल बाजार से वापस लेने (रिकॉल) और उनकी बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया है।

    कई लोकप्रिय ब्रांड जांच के दायरे में
    एफएसएसएआई की सूची में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई चर्चित उत्पाद हैं। इनमें पतंजलि दूध बिस्कुट, किंडर जॉय और सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल प्रमुख हैं। पतंजलि दूध बिस्कुट पर 100 प्रतिशत आटा होने के दावे, किंडर जॉय में मिल्क सॉलिड्स से संबंधित दावे और सफोला टोटल हार्ट प्रो में हार्ट-हेल्थ से जुड़े दावों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है।

    रेड बुल, स्टिंग और गेटोरेड भी सूची में
    कैफीनयुक्त पेय पदार्थों में स्टिंग एनर्जी, रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, एड्रेनालिन रश, कैम्पा एनर्जी और गेटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक शामिल हैं। इन उत्पादों में निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक प्रावधानों के बिना ‘एनर्जी ड्रिंक’ अथवा ‘स्पोर्ट्स ड्रिंक’ जैसे नामों के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई गई है।

    आइसक्रीम, नूडल्स और बेबी फूड तक शामिल
    सूची में अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीम, बिसलेरी के एडेड मिनरल्स संबंधी दावे वाले उत्पाद, रॉ प्रेसरी मैंगो ड्रिंक, मास्टरचाउ रेमन नूडल्स, लोटे चोको पाई और डाबर हार्ट केयर समेत ब्राउन ब्रेड, टोफू और बेबी फूड के उत्पाद भी शामिल हैं। रॉ प्रेसरी मैंगो ड्रिंक में ‘बिना एडेड शुगर’ जैसे दावे को लेकर आपत्ति जताई गई है।

    नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाजार से उत्पाद वापस लेने के निर्देश का पालन नहीं करने, भ्रामक विज्ञापन करने या गलत ब्रांडिंग करने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 और 53 समेत अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को क्षेत्र में लगातार जांच कर संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

    उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपील
    विभाग ने उपभोक्ताओं से भी खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेजिंग पर लिखे दावों और पोषण संबंधी जानकारी को ध्यान से देखने की अपील की है। खाद्य सुरक्षा विभाग का उद्देश्य ऐसे उत्पादों की बिक्री रोकना है, जिनकी लेबलिंग, ब्रांडिंग अथवा उत्पाद संबंधी दावे निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं।