Category: राज्य

  • बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने वालों सावधान! UP में जल्द लागू होंगे सख्त दिशा-निर्देश, सरकार ने किया ऐलान

    बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने वालों सावधान! UP में जल्द लागू होंगे सख्त दिशा-निर्देश, सरकार ने किया ऐलान

    लखनऊ
     प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और अनियंत्रित इस्तेमाल से बढ़ रहे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को रोकने के लिए यूप सरकार नई पहल करने जा रही है। अब प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग को लेकर एक नई गाइडलाइन तैयार की जाएगी, ताकि मरीजों को जरूरत के अनुसार ही सही एंटीबायोटिक दी जा सके और दवाओं के प्रति बैक्टीरिया में बढ़ते प्रतिरोध को रोका जा सके।

    केजीएमयू में वर्ल्ड सेप्सिस डे पर शनिवार को आयोजित दो दिवसीय कान्फ्रेंस के दौरान अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते प्रयोग के कारण दवा प्रतिरोध एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आ रहा है।

    इसे नियंत्रित करने के लिए प्रदेश स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नई गाइडलाइन बनाने की प्रक्रिया आखिरी दौर में है। इस माह के आखिरी सप्ताह या अक्टूबर पहले सप्ताह तक शासनादेश जारी हो जाएगा।

    एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर दैनिक जागरण की ओर से बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा चुका है, जिसके बाद सरकार अब महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है।
    जरूरत के मुताबिक ही होगी एंटीबायोटिक की सलाह

    अमित घोष का कहना है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य डाक्टरों को एंटीबायोटिक के उचित चयन और उपयोग के लिए एक स्पष्ट रोडमैप उपलब्ध कराना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सामान्य संक्रमणों में बिना जरूरत एंटीबायोटिक न दी जाए और गंभीर संक्रमण की स्थिति में मरीज की बीमारी तथा संक्रमण की प्रकृति के अनुसार प्रभावी दवा का चयन किया जाए।

    एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल कई स्तर पर हो रहा है। वायरल संक्रमण में भी कई बार एंटीबायोटिक का प्रयोग कर लिया जाता है, जबकि वायरस पर एंटीबायोटिक का प्रभाव नहीं होता।

    इसके अलावा मरीजों द्वारा बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेना, निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दवा बंद कर देना और जरूरत से अधिक शक्तिशाली एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी रेजिस्टेंस बढ़ने की प्रमुख वजह है।

    दवा बेअसर होने का बढ़ रहा खतरा
    केजीएमयू में पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग करे अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में पहले प्रभावी रहने वाली दवाएं संक्रमण पर असर करना बंद कर देती हैं।

    इसके बाद मरीज के इलाज के लिए दूसरी और अधिक शक्तिशाली दवाओं का सहारा लेना पड़ता है। इससे इलाज जटिल होने के साथ ही खर्च और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी बढ़ सकती है। प्रदेश में भी दवा प्रतिरोध को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

    हाल के अध्ययनों में कई बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ने की बात सामने आ चुकी है। अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को गंभीर चुनौती माना गया है। अब इसको लेकर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

    डॉक्टरों के लिए भी बनेगा स्पष्ट रोडमैप
    प्रो. वेद प्रकाश के मुताबिक, प्रस्तावित गाइडलाइन के जरिए चिकित्सकों को विभिन्न प्रकार के संक्रमणों में एंटीबायोटिक के चयन और उसके उचित इस्तेमाल के संबंध में दिशा-निर्देश दिए जारी होंगे। इसका मकसद मरीजों को एक जैसी और वैज्ञानिक आधार पर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना होगा।

    एंटीबायोटिक शुरू करने से पहले संक्रमण की गंभीरता का आकलन, जरूरत पड़ने पर जांच और कल्चर रिपोर्ट का उपयोग तथा दवा की सही अवधि तय करना रेजिस्टेंस रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    गाइडलाइन बनने के बाद सरकारी चिकित्सा संस्थानों के साथ ही अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी एंटीबायोटिक के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    उन्होंने कहा, सर्दी-जुकाम, सामान्य बुखार और कई वायरल संक्रमणों में मरीज स्वयं एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक हो सकती है। एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में उपयोगी होती हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

    ऐसे में आम लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है कि वे डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें और न ही पुरानी बची हुई दवाओं का इस्तेमाल करें।

  • त्योहारी सीजन में मोगा प्रशासन अलर्ट, पनीर-खोया के 10 सैंपल किए संग्रहित

    त्योहारी सीजन में मोगा प्रशासन अलर्ट, पनीर-खोया के 10 सैंपल किए संग्रहित

    मोगा.

    गणेश चतुर्थी और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। मोगा में खाद्य सुरक्षा टीम ने हलवाइयों और डेयरी दुकानों पर विशेष जांच करते हुए पनीर और खोया के कुल 10 नमूने लिए। सभी नमूनों को जांच के लिए सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया गया है।

    रिपोर्ट आने के बाद गुणवत्ता में कमी या मिलावट पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी कमिश्नर मोगा सागर सेतिया के दिशा-निर्देशों और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संदीप सिंह की अगुवाई में खाद्य सुरक्षा टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया। टीम ने टुडीके, चूड़चक्क, मुख्य बाजार मोगा, कोटकपूरा मार्ग, गांधी मार्ग और फिरोजपुर मार्ग सहित कई क्षेत्रों में स्थित हलवाइयों और डेयरी दुकानों की जांच की।

    दुकानों पर साफ सफाई की भी हुई बात
    जांच के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ दुकानों में साफ-सफाई, खाद्य सामग्री तैयार करने और उसके भंडारण की व्यवस्था भी देखी गई। अधिकारियों ने कारोबारियों को खाद्य पदार्थ तैयार करने में अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे माल का इस्तेमाल करने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संदीप सिंह ने बताया कि त्योहारों के दौरान दूध, पनीर, खोया और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावट की आशंका को देखते हुए विभाग की ओर से लगातार निगरानी और नमूने लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सभी नमूने सरकारी प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    मिलावट मिली तो होगी कानूनी कार्रवाई –
    यदि किसी नमूने में मिलावट, घटिया गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित खाद्य कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    कारोबारियों को स्वच्छता रखने की हिदायत
    खाद्य सुरक्षा टीम ने हलवाइयों और डेयरी संचालकों को दूध व दुग्ध उत्पाद तैयार करते समय साफ-सफाई रखने, स्वीकृत खाद्य रंग का ही निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल करने और गैर-स्वीकृत रंग या रसायन का प्रयोग नहीं करने की हिदायत दी। कच्चे और तैयार खाद्य पदार्थ अलग रखने तथा उचित तापमान पर सामग्री का भंडारण करने को कहा गया। विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों को अपना लाइसेंस या पंजीकरण वैध रखने और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश भी दिए। डा. संदीप सिंह ने कहा कि त्योहारी सीजन में जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना है।

    खाने से पहले देख लें ये पॉइंट्स –

    • पनीर में साबुन या रसायन जैसी गंध
    • असामान्य स्वाद या बहुत ज्यादा चिकनापन
    • बहुत ज्यादा सफेद, असामान्य रूप से मुलायम या रबर जैसा
    • पैकेट वाला पनीर खरीदते समय लेबल, सामग्री और निर्माता की जानकारी जरूर देखें

    आयोडीन से खुद पनीर की करें जांच –
    आयोडीन से घर पर पनीर में स्टार्च की मिलावट की जांच की जा सकती है। पनीर को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद आयोडीन डालने पर नीला रंग आने पर स्टार्च होने की आशंका होती है। हालांकि यह जांच डिटर्जेंट की नहीं है। पर, इससे डिटर्जेंट की भी शंका का समाधान किया जा सकता है। डिटर्जेंट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।

  • लखनऊ मेट्रो फेज-1B का रूट फाइनल, 6.87 KM भूमिगत और 4.28 KM एलिवेटेड; जानें कहां-कहां होंगे स्टेशन

    लखनऊ मेट्रो फेज-1B का रूट फाइनल, 6.87 KM भूमिगत और 4.28 KM एलिवेटेड; जानें कहां-कहां होंगे स्टेशन

    लखनऊ
    लखनऊ मेट्रो (Lucknow Metro) का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। पुराने लखनऊ की तंग गलियों, घने बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों के बीच अब मेट्रो दौड़ने की राह साफ हो गई है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के फेज-1बी का भूमिगत रूट फाइनल कर लिया गया है। करीब 11.165 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 6.879 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत और 4.286 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड रहेगा। भूमिगत हिस्से में सात स्टेशन बनाए जाएंगे, जबकि एलिवेटेड सेक्शन में पांच स्टेशन होंगे।

    चारबाग से बसंतकुंज तक इस नए कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसका पुराने लखनऊ से होकर गुजरना है। यहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं और बड़ी संख्या में बाजार, आबादी और प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल आसपास हैं। ऐसे में सड़क के ऊपर मेट्रो का ढांचा खड़ा करने के बजाय बड़े हिस्से को जमीन के नीचे ले जाने की योजना बनाई गई है। इससे निर्माण के दौरान सतही यातायात और बाजारों पर असर को सीमित रखने में मदद मिलेगी। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की शुरुआत चारबाग से होगी।

    चारबाग को इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे मौजूदा उत्तर-दक्षिण मेट्रो कॉरिडोर से आने-जाने वाले यात्रियों को नए ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में सीधे ट्रांजिट की सुविधा मिलेगी। यानी चारबाग आने वाला यात्री मेट्रो बदले बिना नहीं, बल्कि इंटरचेंज से शहर के दूसरे हिस्सों में बढ़ सकेगा। चारबाग पहले से ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और मेट्रो नेटवर्क का प्रमुख परिवहन केंद्र है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर जुड़ने के बाद इसकी भूमिका और बढ़ेगी।

    4.28 किमी हिस्सा एलिवेटेड
    भूमिगत हिस्से के बाद कॉरिडोर का 4.28 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा। इस पर पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। एलिवेटेड सेक्शन वसंतकुंज को आगे बढ़ेगा और इसमें बसंतकुंज, ठाकुरगंज, बालागंज, सरफराजगंज, और मूसाबाग स्टेशन रहेंगे। कॉरिडोर का मकसद पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को मेट्रो से जोड़ना है। पुराने लखनऊ में सड़क नेटवर्क सीधा और चौड़ा नहीं है। बाजारों और आबादी के बीच से गुजरते हुए मेट्रो के भूमिगत ट्रैक को कई जगह मोड़ लेना पड़ेगा। यही वजह है कि नए कॉरिडोर का भूमिगत हिस्सा काफी घुमावदार रहेगा। कई जगह ऊपर पार्क और चौराहे नजर आएंगे, नीचे भूमिगत स्टेशन और ट्रैक होंगे।

    मेट्रों और रोड परियोजनाओं को तय समय में पूरा करें: मुख्य सचिव
    इससे पहले मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने प्रदेश में संचालित मेट्रो एवं सड़क परियोजनाओं को बेहतर समन्वय के साथ तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिया। गुरुवार को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसपी गोयल ने कहा कि सभी संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित कर लंबित कार्यों का शीघ्र निस्तारित किए जाएं ताकि विकास परियोजनाओं का लाभ आमजन को जल्द मिल सके।

  • रक्तदान में हरियाणा की बड़ी उपलब्धि, लगातार तीसरे साल देश में अव्वल; 8,189 शिविरों में 5.89 लाख यूनिट रक्त जुटा

    रक्तदान में हरियाणा की बड़ी उपलब्धि, लगातार तीसरे साल देश में अव्वल; 8,189 शिविरों में 5.89 लाख यूनिट रक्त जुटा

    चंडीगढ़
    रक्तदान में हरियाणवी सबसे आगे हैं। प्रति दस लाख आबादी पर रक्तदान के मामले में हरियाणा लगातार तीसरे साल देश में प्रथम स्थान पर आया है। केंद्र सरकार की ओर से हरियाणा को आगामी एक अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल काालेज में आयोजित राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

    ई-रक्तकोष पोर्टल पर दर्ज सत्यापित वार्षिक रक्तदान आंकड़ों के आधार पर मिली उपलब्धि प्रदेश की बड़े पैमाने पर जनभागीदारी के साथ-साथ मजबूत रक्त आधान बुनियादी ढांचे, डिजिटल एकीकरण, बेहतर चिकित्सकीय सुरक्षा और मरीजों को मुफ्त जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

    वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 5.89 लाख यूनिट रक्त एकत्र किया गया और 8,189 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। इससे पहले प्रदेश को वर्ष 2024 और 2025 में भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ था।

    ब्लड सेंटरों की संख्या 146 से बढ़कर 163
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि चरखी दादरी जिला नागरिक अस्पताल में ब्लड सेंटर को लाइसेंस मिलने के साथ अब प्रदेश के 22 जिलों में कम से कम एक कार्यशील लाइसेंस प्राप्त सरकारी ब्लड सेंटर उपलब्ध हो गया है।

    ब्लड सेंटरों की संख्या 146 से बढ़कर 163 हो गई है। वर्तमान में यहां 34 सरकारी और 129 निजी ब्लड सेंटर हैं, जबकि 150 ब्लड सेंटर (92 प्रतिशत) ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा से लैस हैं। इससे मरीजों के लिए विशेष रक्त अवयवों की उपलब्धता मजबूत हुई है।

    राज्य में स्वैच्छिक रक्तदान की दर 79 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है। यह उपलब्धि ब्लड सेंटरों के साथ सीधे आनलाइन समीक्षा और संचालन संबंधी समस्याओं के समन्वित समाधान के बाद हासिल हुई है। इस प्रगति से हरियाणा 95 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक के और करीब पहुंच गया है।

    यह जीवनरक्षक अभियान में बढ़ती जनभागीदारी और यह सुनिश्चित करने के राज्य के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है कि स्वैच्छिक, बिना पारिश्रमिक वाले रक्तदान पर अधिक निर्भरता हो।

    89 ब्लड सेंटर आभा सिस्टम से एकीकृत
    हरियाणा ने अपनी रक्त आधान सेवाओं को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। नए आभा-आधारित डोनर रजिस्ट्रेशन फीचर की शुरुआत के बाद दो महीने के भीतर 89 ब्लड सेंटर आभा सिस्टम से एकीकृत हो गए हैं।

    यह सुविधा राष्ट्रीय ई-रक्तकोष पोर्टल पर शुरू की गई है। इस समय 134 ब्लड सेंटर ई-रक्तकोष प्लेटफार्म पर लाइव जानकारी सक्रिय रूप से अपडेट कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता मजबूत हो रही है, रियल-टाइम निगरानी में सुधार हो रहा है और रक्त की उपलब्धता तथा सेवाओं के प्रदर्शन की बेहतर जानकारी मिल रही है।

    रक्त की कम बर्बादी
    हरियाणा ने महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सुरक्षा संकेतकों पर भी बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया है। कुल 1305 हाई-रिस्क रिएक्टिव डोनर्स में से 1255 यानी 96.17 प्रतिशत को सफलतापूर्वक ट्रैक किया गया और उपयुक्त स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया, जो 85 प्रतिशत के मानक से अधिक है। रक्त की बर्बादी भी नियंत्रण में रही है। डिस्कार्ड दर 2.69 प्रतिशत दर्ज की गई, जो चार प्रतिशत के मानक से कम है।

    सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त और रक्त अवयव मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकारी संस्थानों में पात्र बीपीएल और डेंगू मरीजों को फ्री सिंगल डोनर प्लेटलेट्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं। थैलेसीमिया, हीमोफीलिया और सिकल सेल एनीमिया जैसे विकारों से पीड़ित उन मरीजों को भी सहायता प्रदान करता है, जिन्हें बार-बार और आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है।

    वर्तमान में जिला नागरिक अस्पतालों में 1443 थैलेसीमिया मरीज और 1018 हीमोफीलिया मरीज पंजीकृत हैं। इन्हें मुफ्त आयरन केलेशन दवाएं और एंटी-हीमोफीलिया फैक्टर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    एक दिन में 10 हजार 183 लोगों ने किया रक्तदान
    बड़े पैमाने पर जनसक्रियता ने हरियाणा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले साल पांच मई को प्रदेशभर में आयोजित रक्तदान अभियान के दौरान एक ही दिन में 10 हजार 183 नागरिकों ने रक्तदान किया। आसपरेशन सिंदूर के दौरान युवाओं ने 51 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 2374 यूनिट रक्त एकत्र किया।

     

  • अनिगमित क्षेत्र में गिरिडीह का दबदबा, धनबाद-बोकारो भी टॉप पर; पाकुड़ में सबसे ज्यादा महिला भागीदारी

    अनिगमित क्षेत्र में गिरिडीह का दबदबा, धनबाद-बोकारो भी टॉप पर; पाकुड़ में सबसे ज्यादा महिला भागीदारी

    रांची
     अनिगमित (अनइनकॉरपोरेटेड) गैर कृषि क्षेत्र राज्य भर में रोजगार, आजीविका तथा आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

    झारखंड में गिरिडीह जिला ऐसा है, जहां राज्य में सबसे अधिक अनिगमित गैर कृषि क्षेत्र के प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। यहां के इन प्रतिष्ठानों से 3.20 लाख कामगार जुड़े हैं।

    राज्य के कुल अनिगमित प्रतिष्ठानों में 10.70 प्रतिशत प्रतिष्ठान इस जिला में हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा पहली बार अनिगमित गैर कृषि क्षेत्र पर किए गए जिला स्तरीय आकलन में यह तथ्य सामने आया है।

    गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि राज्य के टॉप सात जिले ऐसे हैं, जहां राज्य के 50 प्रतिशत से अधिक ऐसे छोटे प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। वहीं, 10 टॉप जिलों में 65 प्रतिशत से अधिक प्रतिष्ठान कार्य कर रहे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में पाकुड़ जिला ऐसा है, जहां सबसे अधिक प्रतिष्ठान महिलाओं के नेतृत्व में संचालित हैं। इतना ही नहीं, यहां सबसे अधिक महिला कामगार भी कार्यरत हैं।

    पिछड़ा जिला होने के बाद भी अधिक प्रतिष्ठानों में यह राज्य में सातवें स्थान पर है। दूसरी तरफ, रामगढ़ जिले के प्रतिष्ठानों में सबसे अधिक वैसे कामगार कार्यरत हैं, जो किसी न किसी एजेंसी से हायर किए गए हैं।

    रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि आधे से अधिक प्रतिष्ठान सात जिलों में केंद्रित हैं। रिपोर्ट में महिला उद्यमिता और कार्यबल में उनकी भागीदारी में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भिन्नताओं पर प्रकाश डाला गया है।

    कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी जिलों के अनुसार काफी भिन्न-भिन्न है। महिला श्रमिकों की सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले शीर्ष तीन जिले पाकुड़, साहिबगंज और पश्चिमी सिंहभूम में स्थित हैं।

    झारखंड के टॉप टेन जिले जहां अधिक अनिगमित प्रतिष्ठान हैं-
        गिरिडीह : 2,26,339
        धनबाद : 2,18,121
        बोकारो : 1,52,123
        पलामू : 1,35,295
        रांची : 1,29,972
        पूर्वी सिंहभूम : 1,14,650
        पाकुड़ : 1,10,144
        हजारीबाग : 1,06,857
        देवघर : 97,763
        गढ़वा : 91,553

    महिला नेतृत्व वाले सबसे अधिक प्रतिष्ठान वाले टाप तीन जिले (आंकड़े प्रतिशत में)
        पाकुड़ : 56.26
        साहिबगंज : 41.70
        गढ़वा : 37.20

    अधिक महिला कामगार वाले प्रतिष्ठान में टाप तीन जिले (आंकड़े प्रतिशत में)
        पाकुड़ : 55.30
        साहिबगंज : 43.35
        पश्चिमी सिंहभूम : 38.35

     

  • RTPS में मधुबनी सबसे आगे: 3.22 लाख से ज्यादा आवेदन निपटाए, पोर्टल पर मिल रही 64 सेवाएं

    RTPS में मधुबनी सबसे आगे: 3.22 लाख से ज्यादा आवेदन निपटाए, पोर्टल पर मिल रही 64 सेवाएं

    पटना
     बिहार में आरटीपीएस यानी लोक सेवाओं का अधिकार पोर्टल सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के साथ जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी जरूरी सेवाओं के लिए लोगों को अब कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है।

    पंचायती राज विभाग के अनुसार, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच सिर्फ पंचायत स्तर पर आरटीपीएस पोर्टल के जरिए 39 लाख 78 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 39 लाख 32 हजार से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है।

    39 लाख से ज्यादा आवेदनों का निपटारा, डिजिटल व्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार
    आंकड़ों के मुताबिक बड़ी संख्या में आवेदनों का समय पर निपटारा किया गया है। इससे पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता और डिजिटल व्यवस्था की पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    आरटीपीएस पोर्टल के जरिए नागरिक महत्वपूर्ण प्रमाणपत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद उसकी स्थिति भी ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और उपलब्ध होने पर प्रमाणपत्र डाउनलोड किया जा सकता है।

    निपटारे में मधुबनी सबसे आगे, 3.22 लाख से ज्यादा आवेदन हुए निष्पादित
    आवेदनों के निष्पादन के मामले में मधुबनी की पंचायतें पूरे बिहार में अव्वल रही हैं। जिले की 386 पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 3 लाख 24 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए

    इनमें से 3 लाख 22 हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। इस प्रदर्शन के साथ मधुबनी पंचायत स्तर पर आरटीपीएस आवेदनों के निष्पादन में राज्य में सबसे आगे है।

    सिवान दूसरे नंबर पर, करीब 3 लाख आवेदनों का हुआ निपटारा
    टॉप-5 जिलों की सूची में सिवान दूसरे स्थान पर है। यहां की पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 2 लाख 97 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2 लाख 95 हजार से अधिक का निष्पादन किया जा चुका है।

    वहीं सीतामढ़ी तीसरे स्थान पर है। जिले में 1 लाख 99 हजार से अधिक आवेदन आए, जिनमें से 1 लाख 97 हजार से ज्यादा आवेदन निपटाए जा चुके हैं।

    सारण और पश्चिम चंपारण भी टॉप-5 में, जानिए कितना हुआ काम
    आरटीपीएस आवेदनों के निपटारे के मामले में सारण चौथे स्थान पर है। यहां करीब 1 लाख 87 हजार आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1 लाख 84 हजार का निपटारा किया जा चुका है।

    वहीं पश्चिम चंपारण पांचवें स्थान पर है। जिले में करीब 1 लाख 53 हजार आवेदन आए और इनमें से 1 लाख 52 हजार आवेदनों का निष्पादन हो चुका है।

    RTPS पोर्टल पर 64 सेवाएं, घर बैठे ट्रैक कर सकते हैं आवेदन
    आरटीपीएस पोर्टल पर नागरिकों के लिए कुल 64 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं।

    ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक अपने लॉग-इन के माध्यम से आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। प्रमाणपत्र तैयार होने के बाद उसे ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ी, दफ्तरों के चक्कर से राहत
    आरटीपीएस की ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से नागरिकों तक पहुंचाना है। पंचायत स्तर पर लाखों आवेदनों का ऑनलाइन निष्पादन इस डिजिटल व्यवस्था की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।

     

  • अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर! यूपी में जमीन और EWS से जुड़ी सेवाएं हुईं डिजिटल

    अब नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर! यूपी में जमीन और EWS से जुड़ी सेवाएं हुईं डिजिटल

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जमीन, नामांतरण (म्यूटेशन या दाखिल-खारिज ), पैमाइश, बंटवारे और अन्य राजस्व मामलों का निस्तारण तय समय पर होगा। राजस्व परिषद डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन से लेकर निस्तारण तक की प्रक्रिया को ट्रैक करने की व्यवस्था की है। योगी सरकार ने शुक्रवार को धारा 116 पोर्टल, ईडब्ल्यूएस पोर्टल और सरलीकृत खतौनी का शुभारंभ किया है। इस अवसर पर ट्रेनी पीसीएस अधिकारी भी मौजूद रहे।

    राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि तीन नए पोर्टल से लोगों को राजस्व से जुड़ी सेवाओं के लिए अनावश्यक भागदौड़ और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने पर जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है। अब सह-खातेदार भूमि बंटवारे के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे लोगों को विभाजन का वाद दाखिल करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

    आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल होगी। लेखपाल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। पोर्टल में जीआईएस टेक्नोलॉजी की सुविधा जोड़ी गई है। इससे भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति देख सकेंगे। धारा 116 के तहत सह-खातेदार द्वारा होल्डिंग के विभाजन का वाद किया जा सकता है। ऐसे मामलों में खतौनी, संबंधित अभिलेख और भूमि के नक्शे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद
    नया डिजिटल सिस्टम इन सभी प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। इससे भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाण पत्र के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। लेखपाल और तहसीलदार रिपोर्ट ऑनलाइन भेजेंगे। आवेदन किस स्तर पर है और उसकी प्रगति क्या है, इसकी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज और मॉनिटर की जा सकेगी।

    लोगों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी
    सरलीकृत खतौनी में भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे जमीन के क्षेत्रफल की जानकारी अधिक सटीक तरीके से उपलब्ध होगी। विशेष रूप से छोटे भूखंडों और भूमि से जुड़े मामलों में इससे लोगों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा खतौनी में अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों को जमीन के पुराने स्वामित्व रिकॉर्ड और उससे जुड़े आदेशों को समझने में सुविधा होगी।

     

  • चीन-जर्मनी से मशीनों के आयात पर लगेगी लगाम, कानपुर में तैयार होंगी टेक्सटाइल मशीनें

    चीन-जर्मनी से मशीनों के आयात पर लगेगी लगाम, कानपुर में तैयार होंगी टेक्सटाइल मशीनें

     लखनऊ
     खादी एवं वस्त्र उद्योग विभाग ने कानपुर के घाटमपुर में एक हजार एकड़ भूमि पर टेक्सटाइल मशीनरी पार्क की स्थापना की तैयारी शुरू कर दी है। इस संदर्भ में विभाग की तरफ से जल्द ही सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। घाटमपुर में गन्ना विभाग की एक हजार एकड़ भूमि बेकार पड़ी है। वस्त्र उद्योग विभाग की कोशिश है कि इस भूमि पर टेक्सटाइल उद्योग के लिए मशीनों का निर्माण करने वाली इकाईयों की ही स्थापना की जाए।

    राज्य में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में एक हजार एकड़ भूमि पर पीएम मित्र वस्त्र पार्क सहित संत कबीर के नाम पर विभिन्न जिलों में 10 वस्त्र पार्कों की स्थापना की जा रही है। इन पार्कों की स्थापना के बाद राज्य के टेक्सटाइल एवं परिधान उद्योग की तस्वीर बदल जाएगी।

    टेक्निकल टेक्सटाइल की मशीनों को किया जाएगा आयात
    राज्य में टेक्सटाइल उद्योग सैकड़ों वर्ष पुराना है, लेकिन आज भी कई इकाइयों में पारंपरिक मशीनों से ही टेक्सटाइल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि बड़ी इकाइयों में टेक्सटाइल उत्पादों को तैयार करने के लिए चीन, ताइवान, जर्मनी, वियतनाम व दक्षिण कोरिया से सर्कुलर निटिंग मशीन, फ्लैट निटिंग मशीन सहित टेक्निकल टेक्सटाइल की मशीनों का आयात किया जाता है।

    कानपुर में टेक्सटाइल मशीनरी उद्योग की स्थापना के बाद उद्योगपतियों को करीब 30 से 40 प्रतिशत तक की कम कीमत पर मशीनें उपलब्ध होंगी।

    इस पार्क का उद्देश्य टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इससे आयातित मशीनों का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में वस्त्र, परिधान व हस्तशिल्प का कुल निर्यात लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का था।

    उत्तर प्रदेश देश में टेक्सटाइल उत्पादों का चौथा बड़ा निर्यातक राज्य है। गौतम बुद्ध नगर वस्त्र निर्यात में देश में दूसरे स्थान पर है। वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान का कहना है कि सरकार राज्य में टेक्सटाइल को हर प्रकार से बढ़ावा दे रही है।इसी सिलसिले में कानपुर में इस पार्क की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं।

     

  • 9700 करोड़ की सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी, हरियाणा में बनेंगे नए रिंग रोड और बाईपास

    9700 करोड़ की सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी, हरियाणा में बनेंगे नए रिंग रोड और बाईपास

    चंडीगढ़
     हरियाणा में एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों एवं कस्बों के बाहर रिंग रोड और नेशनल हाईवे बनाए जाएंगे। हिसार बाईपास, कुरुक्षेत्र बाईपास, नारनौल सिटी बाईपास, जींद बाईपास तथा सोहना-पलवल बाईपास के निर्माण कार्य को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीकृति दे दी है।

    राष्ट्रीय राजमार्ग से शहरी क्षेत्र में भीड़भाड कम करने के लिए शनिवार को मास्टर प्लान के तहत एडाप्शन आफ फाइनेंशियल माडल फार स्टेट कंट्रीब्यूशन को लेकर आयोजित बैठक में यह निर्णय लिए गए। लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा के साथ अधिकारियों की बैठक ले रहे मुख्यमंत्री ने बताया कि हिसार बाईपास हिसार-राजगढ रोड एनएच 52 से हिसार देहली रोड तथा हिसार कैथल रोड से जोड़ने का कार्य करेगा।

    केंद्र सरकार के अनुसार तैयार होगी पॉलिसी
    इसी प्रकार कुरुक्षेत्र लाडवा बाईपास की भी डीपीआर तैयार कर ली गई है। जल्द ही इस परियोजना पर भी कार्य आरंभ किया जाएगा। मास्टर प्लान के तहत बाह्य रिंग रोड़ एवं नेशनल हाईवे बनाने के लिए केंद्र सरकार के अनुसार पालिसी तैयार की जाएगी, ताकि शहरों एवं कस्बों में ट्रैफिक के दबाव कम करने के लिए बनाई जाने वाली सड़कों को अमलीजामा पहनाया जा सके।

    बैठक में केंद्र सरकार के लागत शेयर के लिए वित्त विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा शहरी स्थानीय निकाय के अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया। नारनौल सिटी बाईपास बनाया जाएगा। लगभग 11 किलोमीटर लंबे इस बाईपास को स्टेट हाईवे एनएच 148बी से जोड़ा जाएगा।

    9700 करोड़ रुपये की लागत आएगी
    जींद के दूसरी तरफ बाह्य रिंग रोड एवं बाईपास एनएच 352 चार मार्गीय सड़क का निर्माण किया जाएगा। एनएच 919 से पलवल सोहना बाइपास को भी री-डिजाइन कर निर्माण किया जाएगा। यह चार मार्गीय सड़क मार्ग लगभग 24 किलोमीटर लंबा होगा। इन परियोजनाओं पर लगभग 9700 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

    डीएनडी-फरीदाबाद-बल्लभगढ बाईपास केएमपी लिंक से देहली मुंबई एक्सप्रेस वे ग्रीनफिल्ड कनेक्टिविटी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए भी तैयार किया जाएगा। इसके अलावा करनाल रिंग रोड के लिए भी भूमि शेयर जमा करवा दिया गया है। अंबाला शहर एवं अंबाला कैंट को जोड़ने के लिए रिंग रोड का कार्य निर्माणाधीन है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

    अतिरिक्त कार्य को भी मंजूरी
    बैठक में रेवाड़ी भटिंडा रेलवे लाइन पर सिरसा में सिविल स्टेशन रोड पर रेलवे अंडर ब्रिज के निर्माण तथा कनीना-महेंद्रगढ़ रोड से अनावास, ढाणी राजावास स्कूल से बलाना, खातोद से बुडीन, निम्भेड़ा और बलैचा के लिए लिंक रोड, महेंद्रगढ़ बुचौली रोड, नांगवास से अटेली सड़क के अतिरिक्त कार्य को भी मंजूरी प्रदान की गई।

     

  • Bhajanlal सरकार की पहल से किडनी मरीजों को राहत, राजस्थान में 1.17 लाख से ज्यादा मुफ्त डायलिसिस सेशन

    Bhajanlal सरकार की पहल से किडनी मरीजों को राहत, राजस्थान में 1.17 लाख से ज्यादा मुफ्त डायलिसिस सेशन

    जयपुर
     मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में किडनी रोगियों को आसानी से और निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 16,003 मरीजों को कुल 1,17,258 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन सेवाओं के तहत मरीजों को उपलब्ध कराई गई उपचार सुविधा का कुल अनुमानित मूल्य करीब 21.11 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 35 जिला चिकित्सालयों में 149 डायलिसिस मशीनें संचालित हैं।

    प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त 2026 तक प्रदेश में 4,265 मरीजों को 31,675 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा दी जा चुकी है। इनमें प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 35 केंद्रों पर 3,489 मरीजों के 25,860 सेशन तथा बजट घोषणा के तहत चिन्हित चिकित्सा संस्थानों में 776 मरीजों के 5,815 सेशन शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11,738 मरीजों को 85,583 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के 35 केंद्रों पर 8,507 मरीजों के 65,148 सेशन तथा बजट घोषणा के तहत चिन्हित चिकित्सा संस्थानों में 3,198 मरीजों के 19,187 सेशन शामिल हैं।

    राठौड़ ने कहा कि राज्य बजट घोषणा वर्ष 2022-23 की अनुपालना में प्रदेश के 182 चिकित्सा संस्थानों में हीमोडायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इनमें से 102 चिकित्सा संस्थानों में सुविधा उपलब्ध है। शेष संस्थानों में चिकित्सकों एवं कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा 30 सितम्बर 2026 तक सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि सरकारी व्यवस्था के साथ सीएसआर के माध्यम से भी निःशुल्क डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिला चिकित्सालय नदबई (भरतपुर) एवं उपजिला चिकित्सालय सिवाना (बालोतरा) में हंस फाउंडेशन, गुरुग्राम के सहयोग से यह सुविधा संचालित है। सिवाना में 3 मशीनों के माध्यम से 12 मरीजों के 575 सेशन तथा नदबई में 3 मशीनों के माध्यम से 21 मरीजों के 673 सेशन आयोजित किए गए हैं।

    राठौड़ ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़े। इसी उद्देश्य से जिला चिकित्सालयों के साथ अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी डायलिसिस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। भविष्य में सीएचसी स्तर तक डायलिसिस सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
    उन्होंने कहा कि डायलिसिस किडनी रोगियों के लिए नियमित और जीवनरक्षक उपचार है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर, उनके नजदीक ही पूरी तरह निःशुल्क डायलिसिस सुविधा मिले। सरकारी व्यवस्था के साथ निजी जनसहभागिता और सीएसआर के सहयोग से इन सेवाओं को लगातार और मजबूत किया जा रहा है।