Category: राज्य

  • योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    योगी सरकार की ग्रीन मोबिलिटी को मिली रफ्तार, नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो की 100 ई-बसों का शानदार प्रदर्शन

    लखनऊ,
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के विजन का असर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के संचालन प्रतिफल (राजस्व) में लगातार दिखाई दे रहा है। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में डिपो की 100 ई-बसों ने कुल 2.96 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.99 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की और 61.75 लाख से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इस अवधि में प्रति बस प्रतिदिन परिचालन, यात्री संख्या और आय के आधार पर अगस्त की तुलना में बेहतर औसत दैनिक प्रदर्शन दर्ज किया गया।

    नियमित संचालन प्रारंभ होने के बाद 20 जून से 13 सितंबर 2026 तक तीनों प्राधिकरणों की ई-बसों ने कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन किया। इस दौरान 7.18 लाख से ज्यादा यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ उठाया, जिससे कुल 2.24 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया।

    जून से सितंबर तक बढ़ता गया ई-बसों का कारोबार
    नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो के अधिकारियों के मुताबिक 20 से 30 जून के 11 दिनों में 100 ई-बसों ने 1.47 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 28,053 यात्रियों को सेवा दी और 9.07 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया। जुलाई में परिचालन बढ़कर 4.79 लाख किलोमीटर, यात्री संख्या 1.50 लाख और राजस्व 47.93 लाख तक पहुंच गया। अगस्त में बसों ने 5.89 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और 3.40 लाख यात्रियों को सेवा दी। इस महीने 1.05 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। सितंबर के प्रथम 13 दिनों में ही 2.96 लाख किलोमीटर परिचालन, 1.99 लाख यात्रियों और 61.75 लाख का राजस्व प्राप्त किया। अगस्त के 190.21 किलोमीटर प्रति बस प्रतिदिन के मुकाबले सितंबर में यह बढ़कर 227.78 किलोमीटर हो गया। इसी प्रकार यात्री प्रति बस प्रतिदिन की संख्या 109.79 से बढ़कर 153.68 और आय प्रति बस प्रतिदिन 3,414.86 से बढ़कर 4,750.20 रुपये हो गई। आय प्रति किलोमीटर भी 17.95 से बढ़कर 20.85 रुपये हो गई है। चारों अवधियों को मिलाकर 20 जून से 13 सितंबर तक कुल 15.12 लाख किलोमीटर से अधिक का परिचालन हुआ, जबकि 7.18 लाख यात्रियों ने ई-बस सेवा का लाभ लिया। इस दौरान कुल 2.24 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया।

    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर में बनाया बेहतर दैनिक प्रदर्शन
    नोएडा प्राधिकरण की 50 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 1.50 लाख किलोमीटर का परिचालन कर 1.04 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दी। इस दौरान 31.45 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 231.17 किलोमीटर, यात्री संख्या 160.14 और आय 4,839.17 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर भी 20.93 पहुंच गई। अगस्त की तुलना में दैनिक परिचालन और यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    ग्रेटर नोएडा में यात्री संख्या और आय ने पकड़ी तेज रफ्तार
    ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 77,110 किलोमीटर की दूरी तय की और 53,194 यात्रियों को सफर कराया। इससे 16.17 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 237.26 किलोमीटर और यात्री संख्या 163.67 रही। आय प्रति किलोमीटर 20.98 रुपये व आय प्रति बस प्रतिदिन 4,978.15 रुपये दर्ज की गई। तीनों प्राधिकरणों में ग्रेटर नोएडा प्रति बस प्रतिदिन परिचालित किलोमीटर, यात्री संख्या, आय प्रति किलोमीटर व आय प्रति बस प्रतिदिन के आधार पर शीर्ष पर रहा।

    यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी बढ़ा ई-बसों का उपयोग
    यमुना प्राधिकरण की 25 बसों ने सितंबर के प्रथम 13 दिनों में 68,749 किलोमीटर का परिचालन किया और 42,497 यात्रियों को सेवा दी। इस अवधि में 14.11 लाख रुपये का राजस्व अर्जित हुआ। प्रति बस प्रतिदिन परिचालन 211.54 किलोमीटर, यात्री संख्या 130.76 और आय प्रति बस प्रतिदिन 4,344.32 रुपये रही। आय प्रति किलोमीटर 20.54 रुपये दर्ज हुई, जिससे इस क्षेत्र में भी ई-बस सेवा के मजबूत होते उपयोग का परिणाम दिख रहा है।

    सीएम योगी के विजन से मिली ग्रीन मोबिलिटी को मजबूती
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जून 2026 में नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का उद्घाटन और ई-बसों को हरी झंडी दिखाते हुए एनसीआर में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया था। उनका विजन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र को ग्रीन मोबिलिटी से जोड़ते हुए जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत करना है।

    बॉक्स
    नोएडा में बनेगा कमांड सेंटर, होगी लाइव निगरानी
    यूपीएसआरटीसी मुख्यालय लखनऊ के मुताबिक नोएडा में तीनों प्राधिकरणों से जुड़ी इलेक्ट्रिक बसों के लिए कमांड सेंटर बनाने की तैयारी भी चल रही है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। प्रस्तावित 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम से ई-बसों की लाइव निगरानी की जाएगी। इससे बसों के संचालन, रूट और सेवाओं पर लगातार नजर रखने के साथ यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

  • छात्रों को मिलेगी बड़ी सुविधा, दिल्ली सरकार बनाएगी 10 हजार बेड की हॉस्टल सुविधा

    छात्रों को मिलेगी बड़ी सुविधा, दिल्ली सरकार बनाएगी 10 हजार बेड की हॉस्टल सुविधा

    नई दिल्ली
    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छात्रों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि दिल्ली सरकार 10,000 छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने की योजना पर काम कर रही है। इन हॉस्टलों में छात्र और छात्राएं दोनों रह सकेंगे। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराना है।

    संबंधित विभागों के साथ बैठकें की गई
    सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इन हॉस्टल सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस योजना को लागू करने के लिए संबंधित विभागों के साथ बैठकें की गई हैं। सरकार ने हॉस्टल निर्माण के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान भी शुरू कर दी है और इसके लिए ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    चिंता मुक्त रहेंगे अभिभावक, छात्रों को मिलेगा सुरक्षित और बेहतर माहौल
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने हॉस्टलों में छात्रों की जरूरतों और उन्हें उपलब्ध कराई जाने वाली जरूरी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की है। उनका लक्ष्य ऐसे हॉस्टल तैयार करना है, जहां देशभर से दिल्ली पढ़ने आने वाले छात्रों को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सके। रेखा गुप्ता ने भरोसा दिलाया कि इन हॉस्टलों के निर्माण के बाद अभिभावक अपने बच्चों को दिल्ली में बिना किसी चिंता के छोड़ सकेंगे। वहीं, छात्रों को रहने और खाने की परेशानियों से राहत मिलेगी और वे पूरी तरह अपनी पढ़ाई तथा अपने भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने छात्रों की ज़रूरतों और इन हॉस्टलों में ज़रूरी सुविधाओं पर अच्छी तरह से विचार किया है। मैं आपको भरोसा दिलाती हूँ कि हम ऐसे हॉस्टल बनाएँगे जहाँ देश भर के माता-पिता पूरी निश्चिंतता के साथ अपने बच्चों को भेज सकें, और जहाँ छात्र—खाने-पीने या रहने की चिंता से मुक्त होकर—पूरी तरह से अपने सपनों को पूरा करने पर ध्यान दे सकें। सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार इमारतों की जांच बढ़ाएगी, सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू करेगी और पूरी राजधानी में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों से जुड़े नियमों की समीक्षा करेगी।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में इमारत की सुरक्षा, छात्रों के रहने की व्यवस्था और PG नियमों पर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई एक संयुक्त समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि बैठक में सख्त सुरक्षा जांच, ज़िम्मेदारी तय करने और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर ज़ोर दिया गया। मुख्यमंत्री गुप्ता ने घोषणा की कि शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता वाली एक समिति मौजूदा PG नियमों की समीक्षा करेगी। यह समिति विश्वविद्यालयों, दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के माध्यम से छात्रों के लिए आवास की सुविधा बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार करेगी। 

    सत्य निकेतन में सात लोगों की मौत
    गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री का यह ऐलान दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे के बाद आया है। बता दें कि यहां एक पांच मंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से सात लोगों की मौत हो गई है। इस इमारत में लड़कों का पीजी चलता था। इस घटना के बाद MCD के कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया और जर्जर पीजी, मकानों, हॉसटल और घरों का सर्वे कर उन्हें सील करने के निर्देश भी लगातार दिए जा रहे हैं।

  • यूपी के कारोबारियों को मिला सरकारी खरीद का बड़ा प्लेटफॉर्म, GeM पर एक साल में 1 लाख से ज्यादा नए विक्रेता जुड़े

    यूपी के कारोबारियों को मिला सरकारी खरीद का बड़ा प्लेटफॉर्म, GeM पर एक साल में 1 लाख से ज्यादा नए विक्रेता जुड़े

    योगी सरकार की नीतियों से जेम पर बढ़ी यूपी के कारोबारियों की धमक, एक साल में 1 लाख से अधिक नए विक्रेता जुड़े

    सरकारी खरीद में स्थानीय उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों के पंजीकरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि

    31 मार्च 2026 तक कुल पंजीकृत फर्मों की संख्या 7.86 लाख पहुंची, एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी और महिला फर्मों का 21 फीसदी बढ़ा

    उद्यमिता, एमएसएमई विकास और कारोबारी सुगमता पर जोर के चलते प्रदेश की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारियों की भूमिका हो रही और अधिक मजबूत

    लखनऊ
     योगी सरकार की कारोबारी सुगमता, एमएसएमई प्रोत्साहन और स्थानीय उद्यमियों को सरकारी खरीद से जोड़ने की नीतियों का असर अब सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के कारोबारियों की सरकारी खरीद व्यवस्था में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में जेम पर पंजीकृत कुल फर्मों की संख्या बढ़कर 7,86,687 पहुंच गई। यह 31 मार्च 2025 को दर्ज 6,85,488 फर्मों के मुकाबले 15 फीसदी अधिक है। यानी एक साल में 1,01,199 नई फर्में जेम से जुड़ीं। सरकारी खरीद के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कारोबारियों की बढ़ती मौजूदगी प्रदेश में छोटे उद्यमों, महिला उद्यमियों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के कारोबार को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। आंकड़े बताते हैं कि कुल पंजीकरण के साथ-साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की भागीदारी में भी तेजी आई है।

    एमएसई फर्मों का पंजीकरण 16 फीसदी बढ़ा

    जेम पर उत्तर प्रदेश की सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) फर्मों का पंजीकरण 31 मार्च 2025 के 1,06,855 से बढ़कर 31 मार्च 2026 को 1,23,075 हो गया। इस श्रेणी में 16,220 फर्मों की वृद्धि दर्ज की गई, जो 16 फीसदी है। इससे संकेत मिलता है कि प्रदेश के छोटे उद्यम सरकारी खरीद के लिए उपलब्ध डिजिटल बाजार का अधिक लाभ उठा रहे हैं। योगी सरकार की एमएसएमई केंद्रित नीतियों के तहत छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देने, कारोबार के अवसर बढ़ाने और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जेम पर पंजीकरण में यह बढ़ोतरी इसी दिशा में आगे बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

    महिला उद्यमियों की भागीदारी में 21 फीसदी उछाल

    सरकारी खरीद व्यवस्था में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। 31 मार्च 2025 को GeM पर कुल 19,418 महिला फर्म पंजीकृत थीं, जिनकी संख्या 31 मार्च 2026 को बढ़कर 23,407 हो गई। एक वर्ष में 3,989 महिला फर्मों का इजाफा हुआ। इस तरह महिला फर्म पंजीकरण में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकारी खरीद में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर देती है।

    एससी-एसटी फर्मों का पंजीकरण 18 फीसदी बढ़ा

    जेम पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की फर्मों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2025 को 4,890 एससी/एसटी फर्म पंजीकृत थीं। 31 मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 5,783 हो गई। इस श्रेणी में 893 फर्मों की बढ़ोतरी हुई, जो 18 फीसदी है। सरकारी खरीद के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन वर्गों की बढ़ती भागीदारी समावेशी कारोबारी अवसरों की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे छोटे उद्यमों को सरकारी संस्थानों के लिए उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिलता है।

    स्टार्टअप फर्मों की संख्या 21 फीसदी बढ़ी

    प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की बढ़ती सक्रियता भी GeM के आंकड़ों में दिखाई दे रही है। 31 मार्च 2025 को कुल 4,404 स्टार्टअप फर्में पंजीकृत थीं, जो 31 मार्च 2026 को बढ़कर 5,350 हो गईं। एक वर्ष में 946 स्टार्टअप फर्मों का इजाफा हुआ। इस श्रेणी में 21 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। स्टार्टअप फर्मों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि नए उद्यम सरकारी संस्थानों के लिए अपने नवाचार, तकनीकी समाधान और सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में निवेश, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के बीच यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है।

    सरकारी खरीद में स्थानीय कारोबारियों के लिए बढ़ते अवसर

    उत्तर प्रदेश में जेम के स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की क्रय नीति छोटे और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उत्तर प्रदेश जेम क्रय नीति-2024 छोटे उद्यमियों के लिए वरदान साबित हुई है। इस नीति के माध्यम से सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ छोटे उद्यमियों को भी सरकारी खरीद में भागीदारी का बेहतर अवसर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश द्वारा अपनाई गई इस व्यवस्था की उपयोगिता अब व्यापक स्तर पर दिखाई दे रही है और देश के अन्य हिस्सों में भी इसे अपनाया जा रहा है। यह नीति स्पष्ट रूप से योगी सरकार की उस मंशा को दर्शाती है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ छोटे और स्थानीय उद्यमियों को आगे बढ़ाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर समान रूप से जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में कुल फर्मों के साथ एमएसई, महिला, एससी-एसटी और स्टार्टअप फर्मों की संख्या में वृद्धि यह संकेत देती है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में विविध कारोबारी समूहों की भागीदारी बढ़ रही है। 

    एक नजर में जेम पर यूपी की बढ़ती भागीदारी

    श्रेणी| कुल विक्रेता-31 मार्च 2025| कुल विक्रेता-31 मार्च 2026| वृद्धि

    कुल पंजीकृत फर्म| 6,85,488| 7,86,687| 15%
    कुल एमएसई फर्म| 1,06,855| 1,23,075| 16%
    कुल महिला फर्म| 19,418| 23,407| 21%
    कुल एससी/एसटी फर्म| 4,890| 5,783| 18%
    कुल स्टार्टअप फर्म| 4,404| 5,350| 21%

  • जलस्रोतों की गाद प्रबंधन नीति, संशोधित उड़ान योजना और बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए करोड़ रुपये स्वीकृत हुए।

    जलस्रोतों की गाद प्रबंधन नीति, संशोधित उड़ान योजना और बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए करोड़ रुपये स्वीकृत हुए।

     पटना 
    बिहार में विकास और रोजगार से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मंगलवार को कैबिनेट की मुहर लगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 17 एजेंडों को मंजूरी दी गई. इसमें मखाना विकास, बागवानी, मेडिकल कॉलेज, गया के विष्णुपद मंदिर, हवाई संपर्क और बाढ़ सुरक्षा से जुड़े अहम फैसले शामिल हैं.

    मखाना विकास पर खर्च होंगे करीब 89.80 करोड़
    कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में केंद्रीय मखाना विकास योजना के लिए करीब 89.80 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसका मकसद मखाना की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है.
    इसके तहत उत्पादन, बीज, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार की व्यवस्था पर काम होगा. निर्यात और सर्टिफिकेशन को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे किसानों, व्यापारियों और FPO की आय बढ़ाने पर जोर रहेगा.

    पांच मेडिकल कॉलेजों में 366 असिस्टेंट प्रोफेसर
    राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक के 366 रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी. इनमें बेतिया, पूर्णिया, मधेपुरा, छपरा और समस्तीपुर के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं.
    नियमित नियुक्ति होने तक इन पदों पर संविदा नियुक्ति होगी. इससे मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी.

    विष्णुपद मंदिर का होगा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसा विकास
    गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए 2,520 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. इसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की योजना है.
    मंदिर परिसर, घाट, मल्टीलेवल पार्किंग, एलीवेटेड पथ, डोरमेट्री, कैंटीन और पैदल पुल समेत कई सुविधाएं विकसित होंगी.
    इसके साथ ही 996 करोड़ रुपये की सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना को भी मंजूरी दी गई है. दोनों परियोजनाओं पर कुल करीब 3,516 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

    ईंट-भट्ठा कारोबारियों को बड़ी राहत
    ईंट-भट्ठों के बकाया भुगतान के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को मंजूरी दी गई है. यह योजना तीन महीने तक लागू रहेगी.
    इसमें ईंट सत्र 2024-25 तक के बकाये में ब्याज की राशि छोड़कर मूल बकाया जमा करने का विकल्प मिलेगा. इससे कारोबारियों को राहत मिलेगी और सरकार को भी बकाया राजस्व तेजी से मिल सकेगा.

    जलस्रोतों की गाद से निपटने की तैयारी

    कैबिनेट ने बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति, 2026 को मंजूरी दी है. नदियों, बराज और जलाशयों में जमा गाद हटाने पर जोर होगा. निकाली गई गाद का इस्तेमाल सड़क, रेलवे और दूसरी निर्माण परियोजनाओं में मिट्टी भराई के लिए भी किया जा सकेगा.

    बिहार में बढ़ेगा हवाई संपर्क
    Modified UDAN Scheme के तहत केंद्र, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच MoU को मंजूरी मिली है. इससे छोटे शहरों में हवाई संपर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी.
    आकांक्षी जिलों में हेलीपोर्ट विकसित करने की योजना भी है. इससे पर्यटन, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
    बाढ़ और सिंचाई के लिए 1000 करोड़
    बिहार आकस्मिकता निधि से जल संसाधन विभाग को 1,000 करोड़ रुपये मिले हैं. इस राशि का इस्तेमाल बाढ़ सुरक्षा, सिंचाई और प्रगति यात्रा से जुड़े कार्यों में किया जाएगा.

    इसके अलावा बागवानी विकास मिशन के लिए भी करीब 78.34 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है. वहीं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में पैरावेट स्कूल के लिए छह स्थायी पद सृजित करने को भी स्वीकृति दी गई है. 

  • यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    'मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा', यूसीसी पर अमित शाह के बयान का भूपेंद्र चौधरी ने किया स्वागत

    महिलाओं के अधिकारों की ढाल बनेगा यूसीसी, भूपेंद्र चौधरी ने किया बड़ा दावा

    यूसीसी से मजबूत होंगे महिलाओं के अधिकार, भूपेंद्र चौधरी का बड़ा दावा

    लखनऊ
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता को प्रमुखता से शामिल किया था और इसे लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का संकल्प पत्र 14 अप्रैल 2024 को जारी किया गया था। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट रूप से समान नागरिक संहिता को शामिल किया था और संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप इसे राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत लागू करने की बात कही थी।

    महिलाओं की समानता की दिशा में मजबूत कदम 'यूसीसी'

    उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि जब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं होती, तब तक महिलाओं को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र सरकार देश में एक आधुनिक, प्रभावी और सभी नागरिकों को समान सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान इसी दिशा में सरकार की मंशा और संकल्प को दर्शाता है।

    पीएम मोदी की गांरटी पर देश को विश्वास

    भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह के इस वक्तव्य का स्वागत करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो गारंटी है, उस पर देश को विश्वास है और केंद्र सरकार अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो वादे देश की जनता से किए हैं, उन्हें पूरा करने का काम लगातार किया जा रहा है और समान नागरिक संहिता भी उसी संकल्प का हिस्सा है।

    गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा और एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। उनके इस बयान के बाद यूसीसी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी पार्टी के रुख को दोहराते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों और समान न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है।

  • रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ, मानदेय के साथ परिवार की सेहत पर जोर

    रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ, मानदेय के साथ परिवार की सेहत पर जोर

    जो प्रदेश की सेवा में जुटे, योगी सरकार ने उनके परिवारों को दिया स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने समाज के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों, विद्यालयों की रसोइयों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं के कल्याण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन सेवा वर्गों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनके और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इससे बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ने से रोकने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि सरकार ने कर्मचारी के साथ उसके आश्रित परिवार को भी स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में रखा है।

    31 हजार से अधिक पीआरडी जवानों को परिवार सहित पांच लाख तक का इलाज

    प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, आपदा और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करने वाले 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का लाभ मिलेगा। इससे पीआरडी स्वयंसेवकों के परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़ी रकम जुटाने की चिंता से राहत मिलेगी।

    रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा

    परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों के लिए भी सरकार ने आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को एक साथ जोड़ा है। उनके मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि के साथ परिवार सहित पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह सुविधा बीमारी के समय बड़ा आर्थिक सहारा साबित हो सकती है।

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं को भी मिला दोहरा लाभ

    बाल विकास, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए भी सरकार ने मानदेय बढ़ाया है। कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये किया गया है। साथ ही दोनों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की सालाना कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया गया है।

    मानदेय से साथ परिवार की सेहत और आर्थिक सुरक्षा पर जोर

    इन फैसलों में योगी सरकार की नीति का एक स्पष्ट पक्ष दिखाई देता है, सेवा करने वाले व्यक्ति के साथ उसके परिवार की भी चिंता। बीमारी में इलाज के लिए बड़ी रकम की व्यवस्था करना निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा सीधे परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ती है। पीआरडी जवानों से लेकर रसोइयों और आंगनवाड़ी कर्मियों तक, सरकार ने मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा जोड़कर इन सेवा वर्गों के लिए आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का दोहरा कवच तैयार किया है।

  • आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाली पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की लगाई जा रही हैं अटकलें

    आईआईटी और आईआईएम से पढ़ाई करने वाली पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की लगाई जा रही हैं अटकलें

    लखनऊ
    यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल आज से प्रशासनिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त हो गई हैं। उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या का इस्तीफा केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने स्वीकार्य करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। उनका इस्तीफा आज 15 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। दिव्या ने 30 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए स्वेच्छा से प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। अब उनके अगले कदम पर अटकलें लगाई जा रही हैं।

    राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास पहुंचा था। दिव्या के पति गगनदीप सिंह ढिल्लों ने भी चार साल पहले 2022 में सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। गगनदीप सिंह 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (आईटीएस) अधिकारी थे।

    यूपी कॉडर की वर्ष 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दिए जाने की जानकारी अपने फेसबुक और एक्स एकाउंट के माध्यम से दी थी। दिव्या को मई 2026 में देवरिया के डीएम के पद से हटाकर राजस्व विभाग में अपेक्षाकृत कम महत्व के विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया था। वे तभी से असहज बताई जा रही थीं।

    मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती
    आईएएस बनने के बाद मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर पहली तैनाती मिली थी। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक के पद पर तैनात रहीं। बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष भी रहीं। संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। बीच में उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी में मुख्य कार्यपालक अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाली।

    आईआईटी और आईआईएम की पढ़ाई, लाखों की नौकरी छोड़ी
    दिव्या मित्तल का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी में 23 नवंबर 1983 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई के बाद आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। गगनदीप के साथ शादी के बाद दोनों लंदन चले गए। जहां एक कंपनी की जॉब की। बाद में लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ देश सेवा के लिए दोनों भारत आ गए और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2021 में पति गगनदीप और 2013 में दिव्या मित्तल ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की।

    मिर्जापुर से लड़ेंगी चुनाव?
    दिव्या को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक चर्चा उनके मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की भी है। इस्तीफा देते समय भी उन्होंने मिर्जापुर को ही याद किया था। यहां की एक बुजुर्ग मां को याद किया था। उन्होंने अपनी पोस्ट लिखा था कि आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोलीं, बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।?

  • अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेंटल कैलकुलेशन का शानदार प्रदर्शन कर आईआईटी पटना के छात्र ने जीता कांस्य पदक

    अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेंटल कैलकुलेशन का शानदार प्रदर्शन कर आईआईटी पटना के छात्र ने जीता कांस्य पदक

     पटना
    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना के भौतिकी विभाग के बीटेक छात्र दीपक नागर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

    जर्मनी में आयोजित जूनियर मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड चैंपियनशिप (Jr. MCWC) में उन्होंने सीनियर प्लस श्रेणी में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है।

    प्रतियोगिता में 24 से अधिक देशों के करीब 100 शीर्ष मेंटल कैलकुलेटर्स ने हिस्सा लिया था। इस वैश्विक प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दीपक ने अपनी असाधारण मानसिक गणना क्षमता का प्रदर्शन किया।

    कठिन से कठिन गणनाओं को बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की मदद के तेजी और सटीकता से हल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें प्रतियोगिता में अलग पहचान दिलाई। शानदार प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने सीनियर प्लस श्रेणी में कांस्य पदक अपने नाम किया

    प्रतियोगी ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर भी बने दीपक
    दीपक की उपलब्धि सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं रही। उनकी पिछली उपलब्धियों और मानसिक गणना के क्षेत्र में प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें चैंपियनशिप के लिए आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय ट्रेनर के रूप में भी चुना गया था।

    इस भूमिका में उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों से आए युवा प्रतिभागियों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। इस दौरान दीपक ने मानसिक गणना से जुड़ी तकनीकों और तरीकों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया।

    खास बात यह रही कि उन्होंने विश्व स्तर के रिकॉर्डधारकों और विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करते हुए प्रशिक्षण दिया। इनमें 'किंग ऑफ प्राइम्स' के नाम से प्रसिद्ध विलेम बोमन, जॉर्ज लेन और डैनियल टिम्स जैसे विशेषज्ञ शामिल थे।

    24 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के बीच दिखाई प्रतिभा
    जर्मनी में आयोजित इस चैंपियनशिप में दुनिया के अलग-अलग देशों से करीब 100 प्रतिभाशाली मेंटल कैलकुलेटर्स पहुंचे थे।

    ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी मंच पर भारत की ओर से हिस्सा लेते हुए पदक जीतना दीपक के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी सफलता से आईआईटी पटना के साथ-साथ बिहार और देश को भी गौरव मिला है।

    विभाग ने उपलब्धि पर जताया गर्व
    दीपक की सफलता पर आईआईटी पटना के भौतिकी विभाग ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विभाग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीपक ने एक प्रतियोगी के साथ-साथ शिक्षक के रूप में भी अपनी बहुआयामी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

    चैंपियनशिप में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संस्थान की ओर से वित्तीय सहायता सहित आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया गया।

    आईआईटी पटना ने दीपक नागर को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

    संस्थान को उम्मीद है कि दीपक भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाते रहेंगे।

     

  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर रूट, 4-5 घंटे में पूरा होगा सफर

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बक्सर-भागलपुर रूट, 4-5 घंटे में पूरा होगा सफर

    पटना 

     बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ा प्रोजेक्ट सामने आया है. राज्य सरकार ने 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार के 13 जिलों को नई कनेक्टिविटी देगा. साथ ही उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे.बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे बक्सर से शुरू होकर भागलपुर तक जाएगा. इसके रास्ते में दक्षिण बिहार के 13 जिले आएंगे.इनमें बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर शामिल हैं.एक्सप्रेस-वे बनने के बाद बक्सर से भागलपुर का सफर काफी कम समय में पूरा हो सकेगा. अभी जहां इस यात्रा में करीब 10 से 12 घंटे लगते हैं, वहीं इसके घटकर 4 से 5 घंटे होने की उम्मीद है.

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा रूट

    इस प्रोजेक्ट की अहमियत सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं होगी. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा. इससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से बिहार होते हुए बंगाल की तरफ जाने वाला कनेक्शन आसान होगा. इससे माल ढुलाई और लंबी दूरी के परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

    सिर्फ सड़क नहीं, बनेगा 'यूटिलिटी कॉरिडोर'

    इस एक्सप्रेस-वे की खासियत इसकी कनेक्टिविटी के साथ-साथ इसका यूटिलिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित होना है. प्रोजेक्ट के तहत एक्सप्रेस-वे के समानांतर GAIL की नेचुरल गैस पाइपलाइन और पावर ग्रिड की हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों का नेटवर्क विकसित होने की योजना है.

    किसी भी बड़े उद्योग के लिए परिवहन, बिजली और ऊर्जा की अहम भूमिका होती है. ऐसे में इस कॉरिडोर से उद्योगों को इन सुविधाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी.

    उद्योगों को क्या होगा फायदा?

    गैस और बिजली ग्रिड के नजदीक होने से निवेशकों को अलग से भारी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जरूरत कम होगी. इससे उद्योग स्थापित करने की लागत घट सकती है.

    बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण यानी BIADA भी इस नेटवर्क का फायदा उठाने की तैयारी में है. एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर बड़े लैंड बैंक विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है.

    एग्रो प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

    यूटिलिटी नेटवर्क की आसान उपलब्धता से एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकेंगे.यहां एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड पार्क और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित करने की संभावना है. इससे दक्षिण बिहार में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं.लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग को भी फायदा

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद यह पूरा रूट बड़े लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है.
    एक्सप्रेस-वे के आसपास वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन से जुड़े प्रोजेक्ट विकसित होने की संभावना है. इससे बिहार के कारोबारियों के लिए दूसरे राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान होगा.

    दक्षिण बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के मौके

    सड़क के साथ औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
    मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग जैसे सेक्टर में स्थानीय स्तर पर नौकरियां बढ़ने की उम्मीद है. इससे दक्षिण बिहार के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के विकल्प मिल सकते हैं.

    3700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
    336 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे की अनुमानित लागत करीब 3,700 करोड़ रुपये बताई गई है. इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर विकसित किया जाएगा.
    यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा. यानी निर्धारित स्थानों से ही वाहनों को प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी.

    एक्सप्रेस-वे पर देना होगा टोल

    बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे को DBFOT-Toll मॉडल पर विकसित किया जाएगा. ऐसे में इसके चालू होने के बाद एक्सप्रेस-वे का इस्तेमाल करने वाले वाहनों से टोल शुल्क लिया जाएगा.

    कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के साथ उद्योग, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा के नेटवर्क को एक साथ जोड़ने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. 

  • यूपी में इस बार सामान्य से तीन फीसदी कम रही मानसूनी बारिश, पश्चिमी हिस्से में हुई छह फीसदी अधिक वर्षा

    यूपी में इस बार सामान्य से तीन फीसदी कम रही मानसूनी बारिश, पश्चिमी हिस्से में हुई छह फीसदी अधिक वर्षा

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में इस सीजन मानसून की झमाझम बारिश के बाद अब इसकी विदाई की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। लखनऊ के अमौसी स्थित यूपी-उत्तराखंड के मौसम मुख्यालय के अनुसार 19 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाने की संभावना है। इससे पहले पश्चिमी यूपी में 17 सितंबर को एक बार फिर झमाझमा बारिशकी हो सकती है। अब पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।

    48 घंटे आंशिक तेजी के बाद थमेगी बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में कोई बहुत बड़ा सक्रिय मौसम तंत्र मौजूद नहीं है। हालांकि अरब सागर से आ रही नमी के असर से आगामी 48 घंटों के दौरान राज्य में बारिश की गतिविधियों में हल्की आंशिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके बाद मानसूनी बारिश में उत्तरोत्तर कमी आएगी और 19 सितंबर से पश्चिमी यूपी का मौसम शुष्क होने लगेगा।

    मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र पिछले 72 घंटों में मध्य भारत से गुजरते हुए वर्तमान में दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे गुजरात के ऊपर केंद्रित है। मानसून की ट्रफलाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसकी हुई है लेकिन इसका पूर्वी छोर सामान्य स्थिति के निकट है। कोई बड़ा सिस्टम न होने के बावजूद केवल नमी के प्रभाव से सीमित और छिटपुट बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं।

    सामान्य से तीन फीसदी का अंतर रहा इस बार
    मौसम विभाग के अनुसार इस सीजन के दौरान यूपी में अब तक 666 मिलीमीटर वर्षा हुई है। यह सामान्य (685.7 मिमी) से केवल 3 प्रतिशत कम है। वेस्ट यूपी में छह फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। वेस्ट यूपी में इस सीजन मानसून ने खूब भिगोया है। यहां सामान्य 628 मिमी की तुलना में 663.9 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी सामान्य से 6 फीसदी अधिक वर्षा हुई। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 667.5 मिलीमीटर वर्षा हुई जो सामान्य (726.9 मिमी) के मुकाबले 8 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।

    विदाई से पहले वेस्ट यूपी को भिगो सकता है मानसून
    मेरठ सहित वेस्ट यूपी में विदाई से पहले मानसून एक बार फिर से भिगो सकता है। 17 सितंबर तक पूरे क्षेत्र में अच्छी बारिश के आसार बन रहे हैं। आज देर रात से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसे पहले भी वेस्ट यूपी में कुछ हिस्सों में बौछारें और हल्की बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। 19 सितंबर के बाद राजस्थान से मानसून वापसी की प्रक्रिया भी शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग ने सोमवार को इसकी घोषणा कर दी।

    मौसम विभाग के अनुसार सोमवार केा मेरठ में दिन-रात का तापमान क्रमश: 34.1 एवं 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। रविवार के सापेक्ष दिन में 0.9 और रात में 0.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। बावजूद इसके दिन-रात के तापमान सामान्य से 0.2 एवं 1.1 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड हुए। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक सामान्य के आसपास ही तापमान बने रहने के आसार हैं। सोमवार को मेरठ का एक्यूआई 61 दर्ज हुआ जो संतोषजनक श्रेणी में है।