Category: राज्य

  • बिना इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए 3 विदेशी यात्रियों ने पकड़ी इंटरनेशनल फ्लाइट, दिल्ली एयरपोर्ट की चूक पर Air India को शो-कॉज

    बिना इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी किए 3 विदेशी यात्रियों ने पकड़ी इंटरनेशनल फ्लाइट, दिल्ली एयरपोर्ट की चूक पर Air India को शो-कॉज

     नई दिल्ली
    दिल्ली एयरपोर्ट पर इंटरनेशनल पैसेंजर्स की आवाजाही से जुड़ी एक गंभीर चूक सामने आई है, जिसने सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला तीन विदेशी यात्रियों से जुड़ा है, जो दिल्ली पहुंचने के बाद तय प्रक्रिया पूरी किए बिना ही अपनी अगली इंटरनेशनल फ्लाइट तक पहुंच गए. अब इस मामले में मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने एअर इंडिया से जवाब तलब किया है. एयरलाइन को बताना होगा कि आखिर यह चूक कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। 

    यह मामला 4 सितंबर का है. तीन इटैलियन पैसेंजर एअर इंडिया की फ्लाइट से अमृतसर से दिल्ली पहुंचे थे. इसके बाद उन्हें लुफ्थांसा की दिल्ली से म्यूनिख जाने वाली फ्लाइट पकड़नी थी. नियम के मुताबिक दिल्ली पहुंचने के बाद इन यात्रियों को अराइवल इमिग्रेशन एरिया में जाकर निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी थी. लेकिन सूत्रों के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ. यात्रियों को इंटरनेशनल ट्रांसफर एरिया की ओर ले जाया गया और वहीं से वे लुफ्थांसा की फ्लाइट में सवार हो गए। 

    एअर इंडिया को शो कॉज नोटिस

    मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एअर इंडिया के सीईओ तेवोल्डे गेब्रेमारियम (Tewolde Gebremariam) को शो कॉज नोटिस जारी किया है. एयरलाइन से 9 बिंदुओं पर लिखित जवाब मांगा गया है. मिनिस्ट्री ने एअर इंडिया को जवाब देने के लिए 7 दिन का समय दिया है. एयरलाइन को 19 सितंबर तक यह बताना होगा कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. सिविल एविएशन​ मिनिस्ट्री ने अपने नोटिस में यात्रियों को संभालने और उन्हें एस्कॉर्ट करने वाले एअर इंडिया और SATS के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। 

    सबसे अहम सवाल यह है कि तीनों यात्रियों को इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल ट्रांसफर रूट से क्यों ले जाया गया, जबकि उन्हें दिल्ली के अराइवल इमिग्रेशन एरिया से होकर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी थी. यानी जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि यात्रियों को किस प्रक्रिया के तहत और किसकी निगरानी में ट्रांसफर एरिया तक पहुंचाया गया. मिनिस्ट्री ने लुफ्थांसा की दिल्ली-म्यूनिख फ्लाइट का ऑनवर्ड बोर्डिंग पास अमृतसर में जारी किए जाने पर भी सवाल उठाया है. नोटिस के मुताबिक हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत स्पोक एयरपोर्ट पर इस तरह का बोर्डिंग पास जारी करने की अनुमति नहीं होती. मिनिस्ट्री ने एअर इंडिया के नोडल अधिकारी और पूरे सुपरवाइजरी मैकेनिज्म से भी जवाब मांगा है. एअर इंडिया ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। 

    क्या है हब-एंड-स्पोक सिस्टम?
    एअर इंडिया कुछ रूट्स पर हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत काम करती है. अमृतसर से जुड़ी कुछ उड़ानें भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं. आसान भाषा में समझें तो इस व्यवस्था में विदेश जाने वाले यात्री स्पोक एयरपोर्ट पर ही इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इसके बाद हब एयरपोर्ट पहुंचने पर उन्हें मुख्य रूप से सिक्योरिटी चेक के बाद अपनी इंटरनेशनल फ्लाइट पकड़नी होती है. लेकिन इस मामले में अमृतसर-दिल्ली और दिल्ली-म्यूनिख की उड़ानें इस व्यवस्था के तहत नहीं थीं. इसलिए यात्रियों को दिल्ली में अराइवल इमिग्रेशन की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना जरूरी था। 

    गृह मंत्रालय ने भी बुलाई बैठक
    मामले को लेकर गृह मंत्रालय ने भी मंगलवार को अधिकारियों और संबंधित पक्षों की बैठक बुलाई है. गृह मंत्रालय ने इसे सुरक्षा और इमिग्रेशन से जुड़ी गंभीर चूक बताया है. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पी बालाजी (एअर इंडिया में ग्रुप हेड- गवर्नेंस, रेगुलेटरी, कंप्लायंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स) समेत इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के कमिश्नर और दिल्ली एयरपोर्ट के सीईओ के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है. गृह मंत्रालय ने संबंधित मिनिस्ट्री से हब-एंड-स्पोक नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर एक प्रेजेंटेशन भी मांगी है। 

  • महिला राइडर को टक्कर मारकर फरार हुआ आरोपी गिरफ्तार, गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस में बड़ा एक्शन

    महिला राइडर को टक्कर मारकर फरार हुआ आरोपी गिरफ्तार, गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस में बड़ा एक्शन

    गुरुग्राम 

    गुरुग्राम के हिट एंड रन मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। महिला बाइक राइडर सिया चौहान को टक्कर मारने वाले आरोपी कल्याण बैंसला को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि, इस हादसे का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में है। वहीं गुरुग्राम पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में एफआईआर दर्ज की थी। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास की धारा एफआईआर में जोड़ दी गई है।

    सिया ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए थे सवाल
    बता दें कि इससे पहले गुरुग्राम की महिला बाइक राइडर सिया ने पुलिस के एक्शन पर सवाल उठाए थे। हादसे को लेकर पीड़िता सिया ने बताया कि, उन्हें घुटनों में चोट लगी है। हादसे के समय उन्होंने राइडिंग शूज और राइडिंग ग्लव्स पहन रखे थे, जिसकी वजह से उन्हें चोट कम लगी। उनके मुताबिक, अगर उन्होंने ये सुरक्षा उपकरण नहीं पहने होते तो उनके हाथ पर लगी चोट इतनी गंभीर हो सकती थी कि कंधे की हड्डी भी टूट सकती थी।

    वीडियो फुटेज से मिली सुराग 

    गुरुग्राम पुलिस ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए थाना सेक्टर-56 में अभियोग दर्ज किया था। शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने से संबंधित बीएनएस की धारा 281 और 125 के तहत केस दर्ज किया गया था।

    घटना से जुड़े वीडियो फुटेज के गहन विश्लेषण के बाद पुलिस के सामने कार चालक द्वारा सिया की बाइक की तरफ जानबूझकर कार मोड़ने का तथ्य आया। इसके आधार पर मामले में बीएनएस की धारा 109 यानी हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी गई।

    घटना के बाद फरार था आरोपी
    13 सितंबर को गोल्फ कोर्स रोड पर हुई घटना के बाद कल्याण बैंसला फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर तलाश शुरू की थी और तीन विशेष टीमों का भी गठन किया गया था।

    अब राजस्थान के दौसा से गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से घटना को लेकर पूछताछ करेगी और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    राइडर सिया को मारी टक्कर
    सिया अपनी Aprilia RS 457 बाइक से अन्य राइडरों के साथ जा रही थीं। घटना के बाद इसका वीडियो इंस्टाग्राम पर प्रसारित हुआ था। बाद में सिया ने भी वीडियो जारी कर कार चालक पर जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया था।

    सिया के अनुसार, कार चालक ने पहले उन्हें रुकने का इशारा किया था। जब वह नहीं रुकीं तो चालक ने कार उनकी बाइक की तरफ मोड़ दी और टक्कर मार दी।

    हत्या के प्रयास की धारा जुड़ी
    पुलिस के अनुसार, मामले में जोड़ी गई बीएनएस की धारा 109 में 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वीडियो फुटेज के विश्लेषण के आधार पर यह धारा जोड़ी गई है।

    कल्याण बैंसला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब घटना के पूरे क्रम और वीडियो फुटेज से सामने आए तथ्यों की जांच आगे बढ़ाएगी।

    वहीं सिया ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि, आरोपी न्यूज रिपोर्टर्स को बयान दे रहा है और अपनी बात रख रहा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने में इतनी देर क्यों कर रही है। सिया ने कहा कि उन्होंने अपनी पोस्ट के कैप्शन में गाड़ी का नंबर भी बताया था। इसके बावजूद पुलिस अब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

    रविवार की है घटना
    दरअसल, यह घटना गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड की है, जिसका वीडियो इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ था। महिला बाइकर सिया चौहान, अपनी बाइक चला रही थी। तभी एक कार उसका पीछा करने लगी। जब महिला नहीं रुकी तो आरोपी ने बाइकर को टक्कर मार दी। महिला का कैमरा चालू था, ऐसे में यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई थी।

  • पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी तो दर्ज हुई FIR, JPSC-JSSC आंदोलन फिर तेज होने के आसार

    पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी तो दर्ज हुई FIR, JPSC-JSSC आंदोलन फिर तेज होने के आसार

    रांची

    रांची में 21 अगस्त को पुलिस और छात्रों की झड़प के बाद JPSC-JSSC आंदोलन के नेताओं समेत 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों पर शनिवार 22 अगस्त को FIR दर्ज की गई है। इससे छात्र आंदोलन फिर से शुरू होने की आशंका है।

    झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच पुलिस ने आंदोलन के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 21 अगस्त को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने कम से कम तीन FIR दर्ज की हैं। इन मामलों में 14 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, प्रशासन के तय रूट का पालन नहीं करने और पुलिस से भिड़ने के आरोप हैं।

    JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के प्रमुख नेता नामजद
    रांची के कोतवाली थाने में दर्ज मामलों में JPSC-JSSC Reforms Manch के नेताओं कुणाल प्रताप सिंह, पीयूष कुमार और रविंद्र पासवान के नाम शामिल हैं। रांची सिटी एसपी पारस राणा के अनुसार, शुक्रवार की झड़प के संबंध में तीन FIR दर्ज की गई हैं। इनमें 14 नामजद आरोपियों के अलावा 200 से ज्यादा अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह मंच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और नियुक्तियों से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तीन में से एक FIR पुलिस की ओर से दर्ज की गई है। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने और प्रशासन की ओर से निर्धारित रूट का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। बाकी दो FIR व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर दर्ज हुई हैं। पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है ताकि हिंसा या कथित उपद्रव में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

    नेताओं के पुतले जलाने को लेकर विवाद
    21 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके कारण विवाद बढ़ा। कोतवाली थाना प्रभारी सानोज चौधरी ने भी झड़प की वजह प्रदर्शनकारियों द्वारा निर्धारित रूट का पालन नहीं करना बताया।

    वहीं, JPSC-JSSC Reforms Manch के नेता कुणाल सिंह ने पुलिस के आरोप से अलग दावा किया है। उनका आरोप है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं ने हिंसा शुरू की। इस मामले में दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है और FIR में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
    सिर्फ रांची नहीं, चार जिलों में टकराव

    छात्रों की ओर से आयोजित मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के पुतला दहन अभियान को राज्य के कई हिस्सों में विरोध का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, रांची के अलावा हजारीबाग, गिरिडीह और गढ़वा में भी प्रदर्शन के दौरान टकराव हुआ। हजारीबाग में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। यानी 21 अगस्त का विवाद केवल रांची तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के कई जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और विरोध आमने-सामने आ गए।

    JPSC-JSSC विवाद क्या है?
    झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई सप्ताह से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलनकारी 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रदर्शनकारी CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग भी उठा चुके हैं। छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे थे।

    इस आंदोलन को लेकर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के दौर भी हुए हैं। 8 अगस्त को सरकार और JPSC-JSSC Reforms Manch के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन छात्र नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था। सरकार ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द निर्णय लेने का आश्वासन दिया था।

    हाईकोर्ट के फैसलों के बाद विवाद और बढ़ा
    इस पूरे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट के हालिया आदेश भी महत्वपूर्ण हैं। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी। इससे एक दिन पहले अदालत ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाओं पर भी रोक लगाई थी। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई गई।

    यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार ने लंबे छात्र आंदोलन के बाद भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए थे, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। JPSC-JSSC Reforms Manch ने सरकार पर अदालत के सामने कमजोर पक्ष रखने और इसे “कानूनी ड्रामा” बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि यह आंदोलनकारियों का आरोप है, सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में उस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    आंदोलन पर बढ़ता पुलिस दबाव
    रांची में ताजा FIR ऐसे समय दर्ज हुई हैं जब JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर आंदोलन लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था तथा पुलिस ने बल प्रयोग किया था। 11 अगस्त को ABVP के प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस से झड़प हुई थी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
    अब 21 अगस्त की घटना में 14 नामजद और 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने से आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस कार्रवाई के बीच छात्र संगठन भर

  • जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम और फर्जी प्रोफाइल से ठगी के मामले हुए उजागर

    जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम और फर्जी प्रोफाइल से ठगी के मामले हुए उजागर

    जयपुर
    भाई, ये AI का जमाना है। इसमें बहुत होशियार रहना पड़ेगा, वरना दिल भी ठग जाएगा और जेब भी। सोचो, डेटिंग ऐप पर कोई प्यारी सी लड़की रोज बात करती है, पसंद पूछती है, धीरे-धीरे दिल की बातें करने लगती है… और तुम सोचते हो कि सामने असली इंसान है। लेकिन असल में वो ClaudeAI का चैटबॉट है।

    AI कंपनी एंथ्रोपिक की ताजा रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। चीन के ऐप स्टूडियो ने 20 से ज्यादा डेटिंग ऐप्स बनाकर 4700 नकली AI प्रोफाइल चलाए। सिर्फ दो हफ्तों में 25 हजार लोग इनसे बात कर बैठे और 23.6 लाख से ज्यादा मैसेज आए। लोग सोच रहे थे कि सामने कोई असली लड़की है, लेकिन असल में Claude अलग-अलग किरदार बनकर चैट कर रहा था। ये कोई कहानी या मजाक नहीं, एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में आई हकीकत है। अब समझ लो, AI के जमाने में प्यार भी फेक हो सकता है।

    कैसे चल रहा था पूरा सिस्टम?
    ऐप स्टूडियो ने Claude से ही ऐप्स बनाने में मदद ली और फिर उसे नकली प्रोफाइल्स के पीछे बैठा दिया। यूजर्स को मैच फीड में करीब 75 प्रतिशत AI प्रोफाइल और 25 प्रतिशत असली लोग दिखाए जाते थे। असली gig वर्कर्स सिर्फ वीडियो कॉल या सोशल मीडिया फॉलोबैक के लिए इस्तेमाल होते थे, ताकि शक न हो। Claude को साफ निर्देश था कि वह कभी न बताए कि वह AI है। फोटो या वीडियो कॉल की मांग पर बात घुमा दे। प्रोफाइल फोटो AI इमेज एडिटिंग मॉडल से बनाई जाती थीं। ऐप स्टोर की जांच से बचने के लिए इंटरफेस भी चालाकी से डिजाइन किया गया था।

    कमाई का तरीका और पकड़ा कैसे गया?
    यूजर जब मैसेज करता या बात आगे बढ़ाता तो फ्री कोटा खत्म हो जाता। फिर ऐप के कॉइन खरीदने पड़ते थे। जितनी देर AI यूजर को फंसाए रखता, उतनी कमाई। कुछ यूजर्स ने गंभीर बीमारी या खराब मानसिक हालत बताई, फिर भी Claude बात जारी रखता रहा। इन्हीं संदिग्ध बातचीत से एंथ्रोपिक को शक हुआ और सर्विलांस बढ़ा। कंपनी ने जुड़े अकाउंट्स बैन कर दिए और अन्य AI कंपनियों के साथ मिलकर नेटवर्क तोड़ा।

    डोरा, डोनी, रोमी जैसे तमाम नाम
    रिपोर्ट में डोरा, डोनी, रोमी, लूमा, जोविया, किरा, ग्रेसचैट, हेवन, नालो और लोविया जैसे ऐप नाम दिए गए हैं।

    राजस्थान में भी डेटिंग ऐप फ्रॉड के मामले
    राजस्थान में बिल्कुल ऐसा Claude वाला बड़ा नेटवर्क तो नहीं मिला, लेकिन डेटिंग और मैट्रिमोनियल ऐप्स पर फर्जी प्रोफाइल से ठगी के कई मामले सामने आए हैं। जयपुर साइबर पुलिस ने चेतावनी जारी की है कि ठग आकर्षक तस्वीरों (अब AI से भी बनाई जा रही) वाली फर्जी प्रोफाइल बनाकर भरोसा जीतते हैं, फिर पैसे ऐंठते हैं।

    रिवर्स इमेज सर्च करें, पैसे कभी न भेजें
    फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस ने बताया कि कई प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल से इमोशनल अटैचमेंट बनाकर क्रिप्टो या निवेश के नाम पर ठगी हो रही है। मई 2026 में करौली से पांच आरोपी गिरफ्तार हुए, जिन्होंने डेटिंग ऐप से वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया। जयपुर में क्लब आधारित डेटिंग स्कैम भी पकड़ा गया। साइबर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अनजान प्रोफाइल पर भरोसा न करें, रिवर्स इमेज सर्च करें और पैसे कभी न भेजें।यह मामला साफ दिखाता है कि AI अब सिर्फ मददगार नहीं, ठगी का नया हथियार भी बन गया है। यूजर्स को सतर्क रहना होगा।

  • पालीगंज में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर एसडीएम ने फसल क्षति का सर्वे करने के दिए निर्देश

    पालीगंज में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर एसडीएम ने फसल क्षति का सर्वे करने के दिए निर्देश

    पालीगंज
    पुनपुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। इससे बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली है। दहिया पंचायत के रूपापुर, बाला बिगहा, हेल्हा तथा कटका पैगम्बरपुर पंचायत के कौरी गांव से बाढ़ का पानी निकल गया है और सूख गया है। लेकिन पानी उतरने के बाद बर्बादी की जो तस्वीर सामने आई है, उसने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। करीब सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।

    बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह पुनपुन नदी के उफान पर आने से पालीगंज प्रखंड के नदी किनारे बसे करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था।

    दहिया और कटका पैगम्बरपुर पंचायत के निचले इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। तीन से चार दिनों तक खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भरा रहा। जिससे खेतों में रोपा गया धान पूरी तरह डूब गया और सड़ गया।

    खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत
    अब जब पानी सूखा है तो खेतों में सिर्फ सड़ी हुई फसल और मिट्टी की मोटी परत दिख रही है। किसान हाथ पर हाथ धरे खेत के किनारे खड़े हैं। किसानों का कहना है कि इस साल उन्होंने कर्ज लेकर महंगे दर पर धान की रोपनी कराई, पटवन किया और यूरिया, डीएपी खाद डाला। उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुकाकर कुछ बचत होगी। लेकिन बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया।

    रूपापुर के किसान सुरेश प्रसाद ने बताया कि पांच बीघा में धान लगाया था, सब खत्म हो गया। बाला बिगहा के किसान राजू कुमार ने कहा कि केसीसी से लोन लेकर खेती की थी, अब बैंक का कर्ज कैसे चुकाएंगे। दोबारा रोपनी का समय भी निकल चुका है, इसलिए इस साल खेत खाली रहने की आशंका है।

    प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात
    वहीं किसानों की समस्या को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी चन्दन कुमार ने प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ित किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। एसडीएम ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों का जल्द से जल्द सर्वे कर आंकलन रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को फसल क्षति मुआवजा और सरकारी सहायता का लाभ मिल सके।

    कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार दहिया और पैगम्बरपुर इलाके में सैकड़ों एकड़ से अधिक धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट तैयार कर जिला कृषि पदाधिकारी को भेजी जाएगी।

  • बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: बिहार सरकार ने बांटी अनुग्रह राशि, सामुदायिक रसोई और शिविरों से मिल रही मदद

    बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: बिहार सरकार ने बांटी अनुग्रह राशि, सामुदायिक रसोई और शिविरों से मिल रही मदद

     पटना
     बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए मंगलवार का दिन राहत लेकर आया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ पीड़ित 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों को 7-7 हजार रुपये दिए।

    डीबीटी के माध्यम से अनुग्रह सहायता राशि खाते में भेजी गई। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने जिलों से अंचलाध‍िकार‍ियों की रिपोर्ट के आधार पर लाभुक परिवारों की विवरणी जुटाई है।

    मौजूदा आंकड़े के अनुसार, इन परिवारों को कुल 579.23 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। मंगलवार सुबह तक लाभुकों की संख्या बढ़ सकती है। सुबह 11:30 बजे यह राश‍ि भेजी गई।

    सीएम सम्राट ने राश‍ि हस्‍तांतरण करते हुए कहा क‍ि कोई छूट गया हो तो एक सप्‍ताह के अंदर सबको जोड़ने का प्रयास कर‍िए। हर हालत में उनका नाम जोड़‍िये। कोई भी पीड़‍ित छूटना नहीं चाह‍िए।

    मौके पर दोनों उपमुख्‍यमंत्री व‍िजय कुमार चौधरी, ब‍िजेंद्र प्रसाद यादव, मुख्‍य सच‍िव प्रत्‍यय अमृत समेत तमाम वरीय अधिकारी उपस्‍थ‍ित थे।  

    15 जिलों के 49.46 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित
    इस वर्ष गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन समेत विभिन्न नदियों में आई बाढ़ से राज्य के 15 जिलों के 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई हैं।

    करीब 49.46 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आई है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं।

    1260 सामुदायिक रसोई में मिल रहा भोजन
    बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य भी जारी है। राज्य के विभिन्न जिलों में अब 1260 सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं। इनके माध्यम से अब तक करीब 1 करोड़ 19 लाख 33 हजार लोगों को सुबह-शाम भोजन कराया जा चुका है।

    वहीं, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अब 13 राहत शिविर संचालित हैं। इनमें 11,060 लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    हाल में सामुदायिक रसोई की संख्या 1257 से बढ़ाकर 1260 की गई है, जबकि राहत शिविरों की संख्या 15 से घटकर 13 हुई है। पशुओं की सुरक्षा के लिए अब तक 13,121 क्विंटल पशुचारा वितरित किया जा चुका है।

    कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
    केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर घट रहा है। हालांकि बलतारा और कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, पटना के दीघा घाट, गांधीघाट और हाथीदह, भागलपुर के कहलगांव, मुंगेर, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती तथा दरौली में घाघरा अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

     

  • 27 साल की सरकारी सेवा के साथ पर्वतारोहण में कमाल, डॉ. आशा ने एल्ब्रुस-किलिमंजारो फतह कर रचा इतिहास

    27 साल की सरकारी सेवा के साथ पर्वतारोहण में कमाल, डॉ. आशा ने एल्ब्रुस-किलिमंजारो फतह कर रचा इतिहास

    रेवाड़ी
     भारत की गौरवशाली बेटी 48 वर्षीय डॉ. आशा रेवाड़ी के पुलिस लाइन में रहती हैं l डॉ. आशा के पति अजय सिंह रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। आशा के दो बच्चे हैं एक बेटी (डॉक्टर)और एक बेटा (इंजीनियर) ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए एक उल्लेखनीय पर्वतारोहण उपलब्धि हासिल की है।

    उन्होंने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस का सफल आरोहण किया और इसके बाद अपने अभियान को लगातार जारी रखते हुए 29 अगस्त 2026 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह किया।

    दोनों चोटियों को प्रभावी अभियान अवधि के केवल छह दिनों में फतह किया गया, जबकि दोनों समिट डेट के बीच कैलेंडर के अनुसार आठ दिन का अंतर है, जिसमें यात्रा एवं ट्रांजिट समय शामिल है। यह उपलब्धि उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प, शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और अनुशासन का प्रमाण है।

    माउंट एल्ब्रुस यूरोप की सर्वोच्च चोटी पर की फतेह
    21 अगस्त 2026 को सुबह 09:07 बजे, डॉ. आशा ने 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर यूरोप की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।
    वह अपने साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर शिखर तक पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के संदेश एवं लोगो भी शिखर तक पहुंचाए।
    उनका यह आरोहण केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भावना और महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं प्रगति का संदेश दुनिया की ऊंची चोटियों तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना।

    माउंट किलिमंजारो को भी किया फतेह
    माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई के बाद डॉ. आशा ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान को जारी रखा और तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की ओर प्रस्थान किया।
    29 अगस्त 2026 को सुबह 05:31 बजे, उन्होंने 5,895 मीटर (19,341 फीट) ऊंची उहुरू पीक पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी को फतह किया।
    इस प्रकार डॉ. आशा ने यूरोप और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटियों को लगातार एक ही अभियान-यात्रा में सफलतापूर्वक फतह किया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रा और अभियान संबंधी व्यवस्थाएं शामिल थीं, जबकि प्रभावी अभियान अवधि छह दिन रही।माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो की लगातार सफल चढ़ाई उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    माउंट एवरेस्ट से यूरोप और अफ्रीका की चोटियों तक
    डॉ. आशा ने वर्ष 2017 में 39 वर्ष की आयु में अपने पहले ही प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। उन्होंने भारत और विश्व की पहली नर्सिंग ऑफिसर के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने की पहचान का दावा किया है और उनकी इस उपलब्धि से जुड़े रिकॉर्ड दावे भी किए गए हैं।
    एक सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने और उसके बाद माउंट एल्ब्रुस तथा माउंट किलिमंजारो को फतह करने तक की उनकी यात्रा जनसेवा, साहस, अनुशासन और पर्वतारोहण उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण है।

    27 वर्षों की सरकारी सेवा
    डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों के अपने जुनून को भी निरंतर आगे बढ़ाया।
    उनकी यात्रा यह शक्तिशाली संदेश देती है कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा किया जा सकता है।
    सेवन समिट्स मिशन 2026–27 की ओर

    माउंट एवरेस्ट, माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह करने के बाद डॉ. आशा अब अपने महत्वाकांक्षी “सेवन समिट्स मिशन 2026–27” की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।उनका अंतिम लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना और एक भारतीय महिला पर्वतारोही एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मी के रूप में एक प्रेरणादायक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करना है।

    एयर पिस्टल शूटिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
    पर्वतारोहण के साथ-साथ डॉ. आशा एक उत्कृष्ट एयर पिस्टल शूटर भी हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की स्पर्धाओं में भाग लेती हैं।वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी फिटनेस, एकाग्रता, सटीकता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है।

    शिखर से भी आगे — एक प्रेरणादायक संदेश
    डॉ. आशा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंची है। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है।

    भारतीय तिरंगा, महिला सशक्तिकरण तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश पर्वतों की चोटियों तक पहुंचाकर डॉ. आशा ने पर्वतारोहण को समाज में जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बनाया है।

     

     

  • गंगाजल से ऑफिस शुद्ध करने के बाद इस्तीफे पर यू-टर्न, सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज में बढ़ा विवाद

    गंगाजल से ऑफिस शुद्ध करने के बाद इस्तीफे पर यू-टर्न, सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज में बढ़ा विवाद

    नई दिल्ली

    लॉ कॉलेज की वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम अटेंडेंस से जुड़े विवाद के बाद सुर्खियों में आ गईं. मामले को लेकर कॉलेज में छात्रों का विरोध प्रदर्शन हुआ और उनके इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ने लगी. इस दौरान ABVP के कार्यकर्ताओं ने उनके ऑफिस को गंगाजल से शुद्ध किया है. लेकिन यह घटना तब और पेचीदा हो गई जब मोहम्मदी तरन्नुम ने अपने इस्तीफे को लेकर बयान दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे का फैसले को बदल दिया था. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह कॉलेज में अपनी सेवाएं जारी रखेंगी. राज्य के शिक्षा मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि उन्हें मोहम्मदी तरन्नुम का इस्तीफा नहीं मिला है। 

    कौन हैं मोहम्मदी तरन्नुम? 

    सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ. मोहम्मदी तरन्नुम इन दिनों कॉलेज में हुए विवाद को लेकर चर्चा में हैं. लेकिन उनकी शैक्षणिक योग्यता भी लोगों के बीच सुर्खियों में रहता है. उन्होंने कानून की उच्च शिक्षा हासिल की है. सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध उनके प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने LL.B., LL.M. और Ph.D. (Law) की पढ़ाई की है। 

    छात्रों का बढ़ा विवाद 

    इसके बाद कॉलेज परिसर में छात्रों प्रदर्शन तेज हो गया. उनपर आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने वाइस-प्रिंसिपल को घंटों उनके कार्यालय में ही रहने के लिए मजबूर किया. इस दौरान कॉलेज में बिजली और पानी की सेवाएं प्रभावित होने की भी बात सामने आई. आरोप यह भी है कि छात्रों ने उन पर इस्तीफे के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया, जिसके बाद उनके इस्तीफे की खबर सामने आई। 

    कमरे का शुद्धिकरण 
    घंटों चले घेराव के बाद जब वाइस-प्रिंसिपल के इस्तीफे की खबर सामने आई, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश किया. इसके बाद छात्रों ने वाइस-प्रिंसिपल के कार्यालय में गंगाजल से शुद्ध किया। 

    मैंने इस्तीफा नहीं दिया…
    हालांकि, पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब कॉलेज से निकलते वक्त वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम ने इस्तीफे को लेकर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से पद नहीं छोड़ा है बल्कि उनपर दबाव बनाया गया है. अब इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें तरन्नुम का इस्तीफा नहीं मिला है। 

  • चीमा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग, सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस का मार्च आज

    चीमा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग, सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस का मार्च आज

    चंडीगढ़
     पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट मंगलवार को पहली बार पंजाब पहुंच रहे हैं और उनके आगमन के साथ ही कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की है।

    पंजाब कांग्रेस भवन सेक्टर-15 से वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रदर्शन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है।

    पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और मार्च के संभावित मार्ग पर चार से पांच स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की है। पंजाब कांग्रेस भवन से करीब एक किलोमीटर पहले ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

    बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद
    सुरक्षा व्यवस्था में चंडीगढ़ पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां भी लगाई गई हैं। प्रशासन की ओर से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन समेत अन्य इंतजाम भी किए गए हैं।
    बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचने के कारण सेक्टर-15 और आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित होना शुरू हो गया है।

    करीब 11:30 बजे सचिन पायलट के पंजाब कांग्रेस भवन पहुंचने की उम्मीद है। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है।

    कांग्रेस गुलजार सिंह मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने, उनकी गिरफ्तारी और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर यह प्रदर्शन कर रही है। पार्टी इसे कानून-व्यवस्था और सरकार के खिलाफ अपने अभियान को तेज करने के तौर पर भी देख रही है।

    8 सितंबर को भी हुआ था प्रदर्शन
    इससे पहले आठ सितंबर को भी कांग्रेस ने चंडीगढ़ में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस दौरान राजा वड़िंग समेत 150 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।

    हालांकि, मंगलवार का प्रदर्शन राजनीतिक रूप से ज्यादा अहम माना जा रहा है, क्योंकि नए प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेताओं के एक मंच पर आने की संभावना है।

    यह प्रदर्शन आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है। इससे पार्टी के भीतर नेताओं की सक्रियता, गुटों की ताकत और चुनावी रणनीति की दिशा का संकेत मिलने की उम्मीद है।

     

  • शिक्षकों को राहत देने के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अब साल में दो बार आयोजित करेगा एचटेट परीक्षा

    शिक्षकों को राहत देने के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड अब साल में दो बार आयोजित करेगा एचटेट परीक्षा

    चंडीगढ़
    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बिना हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) पास किए पढ़ा रहे करीब 25 हजार शिक्षकों को अब एचटेट पास करना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि एक सितंबर 2025 को जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से ज्यादा समय बाकी था, उनके लिए एचटेट अनिवार्य है। उन्हें अपने पढ़ाए जाने वाले विषय अथवा स्तर (पीआरटी, पीजीटी व टीजीटी) का एचटेट पास करना होगा। पास नहीं करने पर सेवा समाप्त की जा सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। ऐसे सभी शिक्षकों को अगस्त 2028 तक एचटेट परीक्षा पास करनी होगी।

    एक सितंबर 2025 को सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बाकी होने वाले शिक्षकों को एचटेट से छूट दी गई है। ऐसे शिक्षक सामान्य रूप से सेवानिवृत्ति तक नौकरी कर सकेंगे। हालांकि, उन्हें आगे पदोन्नति नहीं मिलेगी। प्रमोशन के लिए संबंधित विषय का एचटेट पास करना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू हुआ नियम
    निदेशालय ने ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य मामले में एक सितंबर 2025 को दिए आदेश के आधार पर जारी किए हैं। इस मामले में 29 मई 2026 को दाखिल पुनर्विचार याचिका पर भी आदेश हुआ था। हरियाणा के शिक्षकों की ओर से राहत के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका मई 2026 में खारिज हो चुकी है।

    साल में दो बार होगा एचटेट
    बिना एचटेट वाले शिक्षकों को परीक्षा पास करने के पर्याप्त अवसर देने के लिए शिक्षा निदेशालय ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी को साल में दो बार एचटेट आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

    नियुक्ति और प्रमोशन पर भी सख्ती
    जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सभी संबंधित शिक्षकों को नए नियमों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय की स्थापना शाखाओं को कहा गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही की जाए।

    शिक्षक संगठन नाराज, सरकार से दखल की मांग
    हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान प्रभू सिंह ने बताया हरियाणा में एचटेट की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 को जारी हुई थी। यानी उससे पहले जो भी अध्यापक भर्ती हुए थे, उन्होंने पात्रता परीक्षा नहीं दी। ऐसे करीब 25 हजार अध्यापक होंगे। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, मगर वह खारिज हो गई थी। कई राज्यों ने अपने शिक्षकों को राहत दी है। हरियाणा सरकार से मांग है कि वे इसमें दखल देकर राहत दे।