Category: राज्य

  • झारखंड में हजारों नियुक्तियों का भविष्य दांव पर, JPSC-JSSC मामले में आज हाईकोर्ट का रुख अहम

    झारखंड में हजारों नियुक्तियों का भविष्य दांव पर, JPSC-JSSC मामले में आज हाईकोर्ट का रुख अहम

    रांची
     झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) नियुक्ति परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा से हुई नियुक्तियों को रद करने के मामले में सुनवाई होगी।

    पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने इन नियुक्तियों के जरिए काम करने वाले पदाधिकारियों को हटाए जाने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी और सीआइडी की जांच रिपोर्ट तलब की थी। अब मंगलवार को इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों को वेतन नहीं मिलने के मामले में भी सुनवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

    पूर्व में हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इन परीक्षाओं को रद करने के राज्य सरकार द्वारा 18 अगस्त को जारी आदेश पर रोक लगा दी है। सरकार के आदेश से इन नवनियुक्त पदाधिकारियों की नियुक्ति रद हो गई थी।

    कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल ये सभी अपने पद पर बने हुए हैं। पूर्व में हुई सुनवाई में अदालत ने कहा था कि इस मामले में प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि सरकार ने नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं किया है। इसलिए उक्त पदों पर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक नौकरी से नहीं हटाया जाए। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

    अदालत ने सरकार को कहा था कि वह बताए कि सीआईडी की अबतक की जांच में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया था, जिसके आधार पर सरकार ने इतना कड़ा निर्णय लिया है।

    सरकार द्वारा नियुक्ति रद किए जाने के बाद हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल करते हुए सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिनमें जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्त, सीडीपीओ और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद करने का निर्णय लिया गया था।

    बता दें कि सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद करने का फैसला लिया है, जिसमें टीडीपीएल की भूमिका रही है। इन चारों परीक्षाओं में चूंकि नियुक्ति हो चुकी थी, जिस कारण ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

  • जयपुर मेयर की रेस में 5 नाम सबसे आगे, BJP में तेज हुई लॉबिंग

    जयपुर मेयर की रेस में 5 नाम सबसे आगे, BJP में तेज हुई लॉबिंग

    जयपुर
    जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अब गुलाबी नगरी की सियासत का केंद्र मेयर की कुर्सी बन गया है। 150 वार्डों वाली जयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 78 सीटों पर शानदार जीत हासिल करते हुए स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। बहुमत का आंकड़ा 76 का था, जिसे पार करते ही भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है। वहीं कांग्रेस को इस चुनाव में 53 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है और 15 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है। बहुमत हासिल करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के अंदर नए मेयर के नाम को लेकर बैठकों और राजनीतिक लामबंदी का दौर बेहद तेज हो गया है।

    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 21 सितंबर 2026 को मेयर पद के लिए अप्रत्यक्ष मतदान होगा, लेकिन उससे पहले शहर के सियासी गलियारों में 5 प्रमुख नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

    जयपुर नगर निगम की मेयर सीट इस बार अनारक्षित श्रेणी में है, जिसका मतलब है कि किसी विशेष वर्ग या जाति का कानूनी बंधन नहीं है। यही वजह है कि संगठन में मजबूत पैठ रखने वाले अनुभवी नेताओं से लेकर संघ पृष्ठभूमि के दिग्गजों तक का दावा काफी मजबूत माना जा रहा है।

    सुनील कोठारी
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सीधे जुड़े सुनील कोठारी को इस समय पार्टी का सबसे प्रबल और फ्रंटरनर दावेदार माना जा रहा है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, बेदाग छवि और निर्विवाद व्यक्तित्व के कारण पार्टी आलाकमान किसी भी प्रकार की आंतरिक गुटबाजी को रोकने के लिए उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा सकता है।

    पुनीत कर्णावत
    मेयर पद की इस दौड़ में दूसरा सबसे बड़ा और स्वाभाविक नाम निवर्तमान डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत का है। कर्णावत ने वार्ड 76 से एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की है। उनके पास नगर निगम के प्रशासनिक तंत्र और शहर के विकास कार्यों को संचालित करने का पुराना और व्यावहारिक अनुभव मौजूद है।

    यदि प्रदेश नेतृत्व अनुभव और शहर के पुराने सियासी समीकरणों को प्राथमिकता देता है तो पुनीत कर्णावत का पलड़ा काफी भारी हो सकता है।

    विमल अग्रवाल
    तीसरे नंबर पर वरिष्ठ भाजपा नेता विमल अग्रवाल हैं, जिन्होंने वार्ड 135 से 7,115 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन से जीत हासिल की है। जयपुर के व्यापारिक और वैश्य समुदाय में उनकी गहरी पकड़ है, जिसके चलते उनका दावा भी काफी मजबूत बनकर उभरा है।

    शैलेंद्र भार्गव
    चौथे दावेदार के रूप में पूर्व शहर अध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव का नाम चर्चा में है, जिन्होंने वार्ड 43 से कड़े मुकाबले में जीत हासिल की है। संगठन में लंबे समय तक काम करने का उनका अनुभव और पार्टी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल उनके पक्ष में जाता है।

    सरप्राइज चेहरा
    पांचवें विकल्प के रूप में पार्टी किसी सरप्राइज महिला चेहरे को भी आगे कर सकती है। हालांकि जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल चुनाव हारकर इस रेस से बाहर हो चुकी हैं, लेकिन यदि पार्टी आलाकमान किसी युवा या वरिष्ठ महिला पार्षद को मौका देकर चौंकाना चाहे तो किसी वरिष्ठ महिला पार्षद के नाम पर विचार किया जा सकता है।

    किसे और क्यों मिल सकती है तरजीह?
    जयपुर का मेयर कौन बनेगा, इसका अंतिम फैसला भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व पार्षदों के रुख को ध्यान में रखकर करेगा। जयपुर में भाजपा की राजनीति में हमेशा से संगठन और संघ लॉबी का बड़ा प्रभाव रहा है। सुनील कोठारी को संघ का समर्थन प्राप्त होने के कारण उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।

    वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक रूप से सक्षम और अनुभवी चेहरे के रूप में पुनीत कर्णावत पर भी दांव लगा सकती है।

    दूसरी ओर वैश्य और व्यापारी वोट बैंक जयपुर में भाजपा की रीढ़ माना जाता है। इस वर्ग को साधे रखने के लिए रिकॉर्ड वोटों से जीतने वाले विमल अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से विचारधीन है।

    फिलहाल सभी 78 निर्वाचित भाजपा पार्षदों को एकजुट रखने और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जयपुर की कमान अगले पांच सालों के लिए किस दिग्गज के हाथों में सौंपी जाती है।

    जयपुर में कैसे होगा मेयर का चुनाव?
    राजस्थान में आम जनता सीधे तौर पर मेयर का चुनाव नहीं करती है। यहां नगर निगम के निर्वाचित पार्षद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करके मेयर का चुनाव करते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार यह पूरी अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया इस प्रकार संचालित होगी:

    अधिसूचना और नामांकन (15-16 सितंबर): निर्वाचन आयोग द्वारा 15 सितंबर को चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। मेयर पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने वाले प्रत्याशी 16 सितंबर तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं।

    नामांकन पत्रों की जांच और वापसी (18 सितंबर): 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा होगी और 18 सितंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके तुरंत बाद चुनाव मैदान में डटे अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी।

    पार्षदों की वोटिंग (21 सितंबर): मेयर पद के लिए मुख्य मतदान 21 सितंबर 2026 को आयोजित होगा। इस दिन नगर निगम मुख्यालय पर रिटर्निंग ऑफिसर की देखरेख में सभी 150 निर्वाचित पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई जाएगी।

    वोटिंग का समय और मतगणना: मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैलेट पेपर के जरिए गुप्त रूप से कराया जाएगा। दोपहर 2 बजे वोटिंग खत्म होते ही वोटों की गिनती शुरू होगी और 21 सितंबर की शाम तक जयपुर के नए मेयर के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

    क्या किसी 'बाहरी' व्यक्ति को भी मेयर बना सकती है BJP?
    जयपुर के राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा चल रही है कि क्या भाजपा किसी ऐसे नेता को मेयर बना सकती है जो इस बार पार्षद का चुनाव नहीं जीता है। कानूनी और तकनीकी दृष्टिकोण से इसका जवाब 'हाँ' है। राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो वार्ड पार्षद नहीं है या जिसने चुनाव नहीं लड़ा है, वह भी मेयर पद का चुनाव लड़ सकता है। इसके लिए केवल यह शर्त है कि वह व्यक्ति जयपुर नगर निगम क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता हो और पार्षद पद की सभी कानूनी योग्यताएं पूरी करता हो।

    हालांकि नियम के तहत यदि कोई गैर-पार्षद व्यक्ति मेयर चुना जाता है, तो उसे पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर जयपुर नगर निगम के किसी भी वार्ड से उपचुनाव जीतकर आना अनिवार्य होता है। लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी। जब पार्टी के पास पहले से ही 78 जीतकर आए पार्षदों का स्पष्ट बहुमत मौजूद है, तो ऐसे में किसी बाहरी चेहरे को लाकर पार्टी अपने ही पार्षदों में बगावत या असंतोष का खतरा मोल नहीं लेना चाहेगी।

     

  • कैबिनेट के अहम फैसले: यूपी में सुरक्षा आधुनिकीकरण के साथ ही जवानों और स्कूली शिक्षा पर फोकस

    कैबिनेट के अहम फैसले: यूपी में सुरक्षा आधुनिकीकरण के साथ ही जवानों और स्कूली शिक्षा पर फोकस

    लखनऊ
     यूपी में सांसदों और विधायकों की सुरक्षा में तैनात गनर जल्द नई सब-मशीनगन से लैस होंगे। शासन ने माननीयों के सुरक्षाकर्मियों को नए असलहे उपलब्ध कराने के लिए 5.59 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। गृह विभाग ने इसका आदेश जारी किया है।

    जनप्रतिनिधियों के सुरक्षाकर्मियों के लिए नाइन एमएम की 800 सब-मशीनगन और 2.56 लाख कारतूस खरीदे जाएंगे। एक सब-मशीनगन की कीमत 60 हजार रुपये होगी। पुलिस मुख्यालय से शासन को भेजी गई एक रिपोर्ट के बाद अयोध्या के श्रीराम मंदिर सहित हाईकोर्ट, लोकभवन और मेट्रो स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्नाइपरों की तैनाती की जाएगी। शासन ने तीन स्नाइपर राइफल खरीदने की भी वित्तीय स्वीकृति दी है। एक रायफल की कीमत 10.76 लाख रुपये होगी।

    महिला वाहिनियों के लिए पिस्टल और असाल्ट राइफल
    इसके अलावा पीएसी की नवगठित महिला वाहिनियों को स्वचलित असलहे दिए जाएंगे। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत पीएसी की तीन महिला वाहिनियों के लिए 373 पिस्टल और 90 असाल्ट राइफल खरीदी जाएंगी।

    पीआरडी जवानों का बढ़ेगा ड्यूटी भत्ता
    उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। इसमें प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों का ड्यूटी भत्ता रोजाना 500 से 600 करना शामिल है। इसके अलावा कैशलेस इलाज की सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है। जिसकी संख्या 27 हजार से अधिक बताई जा रही है।

    चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है सरकार
    योगी सरकार पीआरडी जवानों का चौथी बार मानदेय बढ़ाने जा रही है। 8 मार्च 2019 को 250 से बढ़ाकर 375 रुपये रोजाना किया गया था। इसके बाद 6 जनवरी 2022 को इसे बढ़ाकर 395 रुपये कर दिया गया। 15 अप्रैल 2025 को इसे 500 रुपये कर दिया गया। अब इसमें 100 रुपये और बढ़ाने का प्रस्ताव है।

    स्वास्थ्य सेवाओं पर भी फोकस
    इसके अलावा वाहनों की फिटनेस के लिए नई नीति, उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति और चित्रकूट एक्सप्रेस का संशोधित प्रस्ताव सहित अन्य शामिल है। कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर करने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है। अंशदायी स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पालीक्लीनिकों के निर्माण के लिए ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरणों की भूमि स्थानीय सैन्य प्राधिकरण सेंट्रल कमांड भारत सरकार को मुफ्त दिए जाने का प्रस्ताव है।

    स्कूल को दिए जाएंगे दो-दो लाख रुपये
    बेसिक शिक्षा विभाग के 14 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास के लिए आईसीटी लैब के लिए 300 करोड़ रुपये धनराशि देने संबंधी प्रस्ताव भी है। प्रत्येक स्कूल को दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।

  • ‘विधायक की गाड़ी पीछे से आ रही थी, पता नहीं चला’, ट्रक ड्राइवर ने AAP विधायक पर लगाए पिटाई के आरोप

    ‘विधायक की गाड़ी पीछे से आ रही थी, पता नहीं चला’, ट्रक ड्राइवर ने AAP विधायक पर लगाए पिटाई के आरोप

    लुधियाना
    लुधियाना में आम आदमी पार्टी की हलका दक्षिणी से विधायक रजिंदरपाल कौर छीना ने ट्रक ड्राइवर को थप्पड़ मार दिया। ट्रक ड्राइवर का दोष इतना था कि उसने एमएलए की गाड़ी को साइड नहीं दी। एमएलए इसी बात से गुस्से में आई और उन्होंने ट्रक रूकवाकर ड्राइवर को थप्पड़ जड़ा। 

    ड्राइवर को थप्पड़ मारने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा रहा है कि एमएलए आई और उन्होंने ट्रक का दरवाजा खोला और ड्राइवर को नीचे बुलाया।

    ड्राइवर जैसे ही नीचे उतरा तो एमएलए ने उसे थप्पड़ मार दिया। ड्राइवर व उसके साथियों ने देर शाम विधायक के खिलाफ धरना लगाया। ड्राइवर का कहना है कि उसे पता ही नहीं चला कि पीछे से विधायक आ रही हैं। विधायक ने आते ही उसे धमकाना शुरू कर दिया है। ड्राइवर ने इस मामले की शिकायत थाना डाबा में दे दी है।

    घटना सोमवार दोपहर बाद की है जब एक ट्रक डाबा रोड से निकल रहा था और उसके पीछे से एमएलए की कार आ रही थी। ट्रक सड़क पर खड़ा हो गया। विधायक का ड्राइवर पीछे से हूटर मारता रहा लेकिन ट्रक आगे नहीं निकला। इसी बीच विधायक कार के साथ उतरी और गनमैन के साथ आगे आ गई।

    हूटर बजाने पर भी नहीं मिली जगह तो खुद उतरीं विधायक
    यह पूरा मामला सोमवार दोपहर बाद डाबा रोड इलाके का है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संकरे रास्ते से एक ट्रक गुजर रहा था और उसके ठीक पीछे महिला विधायक की गाड़ी चल रही थी। ट्रैफिक और संकरी सड़क के चलते ट्रक बीच रास्ते में रुक गया। विधायक की गाड़ी का चालक लगातार हूटर और हॉर्न बजाकर साइड मांगता रहा, लेकिन ट्रक आगे नहीं बढ़ सका। इससे नाराज होकर विधायक रजिंदरपाल कौर छीना अपनी गाड़ी से नीचे उतर आईं और गनमैन के साथ सीधे ट्रक की ओर बढ़ गईं।

    गेट खोलकर ड्राइवर को नीचे उतारा और मार दिया जोरदार तमाचा
    वायरल हो रही सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि महिला विधायक भारी गुस्से में ट्रक के पास पहुंचती हैं। उन्होंने खुद ट्रक का दरवाजा खोला। ड्राइवर अपनी सीट पर बैठकर ही स्थिति समझाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विधायक ने उसे नीचे उतरने का फरमान सुना दिया। पीड़ित चालक जैसे ही केबिन से नीचे उतरा, विधायक ने बिना कुछ सोचे-समझे उसके मुंह पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। उस दौरान विधायक का सुरक्षाकर्मी भी पीछे खड़ा नजर आ रहा था। पीड़ित ड्राइवर का कहना है कि थप्पड़ पड़ते ही वह बुरी तरह सहम गया और हाथ जोड़कर अपनी गलती पूछता रहा।

    ड्राइवर ने डाबा थाने में दी शिकायत, देर शाम साथियों संग दिया धरना
    पीड़ित ट्रक चालक ने बताया कि संकरे रास्ते और शोर के कारण उसे यह अहसास ही नहीं हुआ कि पीछे वीआईपी गाड़ी आ रही है और उसमें विधायक मौजूद हैं। उसने आरोप लगाया कि विधायक ने गाड़ी से उतरते ही बदसलूकी और धमकियां देनी शुरू कर दी थीं। इस घटना के विरोध में देर शाम ड्राइवर और उसके साथी चालकों ने एकजुट होकर विधायक के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पीड़ित ने थाना डाबा में लिखित शिकायत देकर इंसाफ और विधायक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।

    सीसीटीवी में गुससे में दिखी एमएलए
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सीसीटीवी फुटेज है। महिला विधायक कार से उतरकर गुस्से में अपने गनमैन के साथ आई और गुस्से में ट्रक का दरवाजा खोला। ड्राइवर अपनी सीट पर बैठकर ही बात कर रहा था तो विधायक ने उसे नीचे उतार दिया। जैसे वह नीचे उतरा विधायक ने उसे जोर से एक थप्पड़ मार दिया। उस समय उसके पीछे गनमैन भी खड़ा था। ड्राइवर का कहना है कि जैसे ही विधायक ने उसे थप्पड़ मारा वो सहम गया और अपनी गलती पूछने लगा।

     

  • अमित शाह की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर CM मान का निशाना, मुंद्रा पोर्ट को लेकर उठाए सवाल

    अमित शाह की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ पर CM मान का निशाना, मुंद्रा पोर्ट को लेकर उठाए सवाल

    चंडीगढ़
     भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नशे के मुद्दे पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को बदनाम करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह को अपने गृह राज्य गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर ध्यान देना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पंजाब में पाकिस्तान सीमा से हेरोइन की एक-दो, पांच या 10 किलो की खेप पकड़ी जाती है, जबकि गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से तीन-तीन हजार किलो की खेप पकड़ी जा रही है।

    मुख्यमंत्री मान ने कहा कि एक ओर पंजाब को नशे के लिए बदनाम किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर अन्य राज्यों से बड़ी खेपें आ रही हैं। भगवंत सिंह मान ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान भाजपा पर आरोप लगाया कि वह पंजाब में नशे फैला रही है और दूसरी तरफ नशे के खिलाफ यात्रा निकाल रही है, यह दोहरा चरित्र है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पंजाब को बदनाम करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। मान ने बताया कि कि देश में एनडीपीएस मामलों में होने वाली हेरोइन की बरामदगी में पंजाब का योगदान करीब 60% है, लेकिन नशे की सप्लाई के स्रोतों पर भी कार्रवाई जरूरी है।

    उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी रोकना केंद्र की जिम्मेदारी है, फिर भी पंजाब ने नशीले पदार्थों को रोकने के लिए अपने फंड से एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं।

    विपक्ष की सियासत पर सीएम मान ने गिद्धों वाला तंज क्यों कसा?

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विपक्ष के आचरण पर बेहद कड़े शब्दों में आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, ‘जब आपके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं होता, तो आप हर दुखद घटना पर राजनीति करने लग जाते हैं.’ यह जनता की सेवा की राजनीति नहीं है. यह पूरी तरह से गिद्धों वाली राजनीति है. पंजाब की जनता इस घटिया राजनीति से कहीं बेहतर की हकदार है।

    मान ने कहा कि सरकार की सख्त कार्रवाई की तारीफ करने के बजाय विरोधी दल डर का माहौल बना रहे हैं. वे केवल सियासी फायदे के लिए पंजाब को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं. पंजाब कोई साधारण सीमावर्ती राज्य नहीं है. यह देश का मुख्य प्रवेश द्वार और भारत का अनमोल गहना है।

    कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं को आधार बनाकर पूरे सूबे की गलत छवि पेश की जा रही है. मान ने कहा कि यह पंजाब और यहां के मेहनती लोगों को बदनाम करने की सोची-समझी चाल है. सूबे की जनता ऐसे नकारात्मक अभियानों को कभी स्वीकार नहीं करेगी. सरकार अपराधियों के आगे कभी नहीं झुकेगी।

    पाकिस्तान का नशा कैसे रुका और अब नया सप्लाई रूट कौन सा बन गया?

        मुख्यमंत्री ने सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी की जमीनी हकीकत जनता के सामने रखी. 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा से पंजाब में नशा भेजने की लगातार कोशिशें होती रही हैं. पंजाब सरकार की सख्त निगरानी की वजह से पाकिस्तान से आने वाला 80 फीसदी नशा अब खत्म हो चुका है. सीमा पार से आने वाली छोटी खेपों को भी लगातार पकड़ा जा रहा है।

        पाकिस्तान का रूट टूटने के बाद अब नशा तस्करों ने नए रास्ते चुन लिए हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि अब 80 प्रतिशत नशा गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान से पंजाब आ रहा है. नशा तस्करी के इन नए रास्तों को भी पूरी तरह से ध्वस्त किया जाएगा।

        अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी रोकना प्राथमिक तौर पर केंद्र सरकार की सीधी जिम्मेदारी है. इसके बावजूद पंजाब सरकार ने अपने सरकारी फंड से कई एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं. इन आधुनिक तकनीकों से सीमा पार से आने वाले ड्रोनों को गिराया जा रहा है. पंजाब अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हटेगा।

        मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नशा तस्करी के मुद्दे पर भाजपा को सीधे कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में टनों के हिसाब से नशीले पदार्थों की खेपें मौजूद हैं. केंद्रीय गृह मंत्री को इस बात का स्पष्ट जवाब पूरे देश को देना चाहिए।
        गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर लगभग 3000 किलो नशा पकड़ा गया था. इस मामले में जिम्मेदार बड़े लोगों के खिलाफ कोई ठोस और सार्थक कार्रवाई नहीं की गई. पंजाब पुलिस ने खुद मुंद्रा पोर्ट से जुड़े बड़े नशा नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने वहां से आने वाली नशीले पदार्थों की भारी खेप बरामद की थी।

        केंद्रीय गृह मंत्री अपने गृह राज्य गुजरात में नशे की आमद रोकने में पूरी तरह असमर्थ रहे हैं. इसके विपरीत भाजपा के नेता पंजाब में आकर नशा विरोधी यात्रा निकालने का ढोंग कर रहे हैं. गुजरात में लाखों टन नशा पकड़ा जा रहा है, लेकिन वहां सख्त कदम नहीं उठाए जाते. दूसरी तरफ पंजाब ने देश की सबसे बड़ी नशा विरोधी मुहिम चला रखी है।

    एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने साल 2022 से अब तक क्या बड़ा एक्शन लिया?

    मुख्यमंत्री ने राज्य में गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियानों के आधिकारिक आंकड़े साझा किए. पंजाब सरकार ने संगठित अपराध के खात्मे के लिए एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) का गठन किया था. साल 2022 से लेकर अब तक इस टास्क फोर्स ने 1.24 लाख गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की है।

    पंजाब पुलिस ने इस अवधि के दौरान अपराधियों से 1170 आधुनिक हथियार बरामद किए हैं. इसके अलावा 15 खतरनाक हथगोले भी जब्त किए गए हैं. ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस ने 858.26 किलो हेरोइन और 480.26 किलो अफीम पकड़ी है।

    टास्क फोर्स ने छापेमारी के दौरान 3056.85 ग्राम सोना और 1.28 करोड़ रुपये नकद भी बरामद किए हैं. विदेशों में छिपकर बैठे अपराधियों पर भी शिकंजा कसा गया है. पंजाब पुलिस ने दूसरे देशों की मदद से अब तक 18 बड़े गैंगस्टरों को डिपोर्ट करवाकर पंजाब वापस लाया है. इनमें से 10 गैंगस्टरों को इसी साल जनवरी से अब तक वापस लाया गया है।

    ‘विपक्ष बंद करे गिद्धों वाली गंदी राजनीति’, मान बोले- विदेशों से 10 गैंगस्टर वापस लाए.

    गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और गुजरात जेल को लेकर क्या सनसनीखेज दावा किया?

    मुख्यमंत्री ने गैंगस्टरवाद को केवल एक राज्य की समस्या मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि गैंगस्टरवाद एक गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है. यह देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए सीधा खतरा है. केंद्र सरकार इस राष्ट्रीय संकट को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

    मान ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का जिक्र करते हुए भाजपा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पंजाब के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को गुजरात की जेल में भाजपा सरकार ने सुरक्षित पनाह दे रखी है. उस कुख्यात गैंगस्टर को पंजाब पुलिस की कस्टडी में लाने की इजाजत तक नहीं दी जा रही है।

    अगर केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर सख्त रवैया अपनाए, तो ऐसे सिंडिकेट कभी नहीं पनप सकते. मान ने दोहराया कि पंजाब सरकार किसी भी अपराधी को बख्शने के मूड में नहीं है. राज्य की पुलिस हर गिरोह की जड़ों पर वार कर रही है. किसी भी अपराधी को पंजाब की शांति भंग करने की छूट नहीं दी जाएगी।

    अकाली दल और कांग्रेस के पुराने सियासी रिकॉर्ड पर मान ने क्या आईना दिखाया?

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल को उनके पुराने शासनकाल की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने दौर में गैंगस्टर कल्चर और नशा नेटवर्क को खूब फलने-फूलने दिया. जो लोग खुद अपराधियों को पालते रहे हैं, उन्हें कानून-व्यवस्था पर उपदेश देने का कोई नैतिक हक नहीं है।

    विपक्षी नेताओं को पंजाब की मौजूदा सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. पंजाब की जनता उन काले दिनों को कभी नहीं भूल सकती. उस दौर में बड़े गैंगस्टरों को खुला सियासी संरक्षण हासिल था. अपराधी बेखौफ होकर समाज में घूमा करते थे।

    मान ने कहा, ‘हर दुखद घटना पर राजनीति करके इतना नीचे मत गिरिए.’ पंजाब ऐसी घटिया सियासत के कारण पहले ही बहुत गहरा संताप भोग चुका है. जनता अब खोखले भाषणों के बजाय ठोस समाधान चाहती है. विपक्षी दल पंजाब के भले के लिए अपनी गंदी राजनीति बंद करें।

    पंजाब की अस्मिता और केंद्र के साथ अधिकारों की जंग का क्या है सच?

    मुख्यमंत्री ने पंजाब के साथ जुड़े कई ऐतिहासिक और बुनियादी मुद्दों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि दरियाई पानी का विवाद हो या राजधानी चंडीगढ़ का मसला, पंजाब कभी अपने हक से पीछे नहीं हटेगा. पंजाब यूनिवर्सिटी के सिलेबस में दखलंदाजी और काले कृषि कानूनों जैसी ज्यादतियों को कभी सहन नहीं किया जाएगा।

    भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब के अधिकारों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब देश के लिए हमेशा कुर्बानियां देता आया है. इसलिए यह राज्य हर लिहाज से एक विशेष आर्थिक पैकेज का हकदार है।

    पंजाब ने देश की रक्षा और अन्न सुरक्षा में हमेशा सबसे बड़ा योगदान दिया है. देश को जब भी साहस, बलिदान और सेवा की जरूरत पड़ी, पंजाबी सबसे आगे खड़े रहे. यह योद्धाओं, किसानों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों की महान धरती है. किसी को भी अपने तुच्छ सियासी फायदे के लिए इस पवित्र धरती को बदनाम नहीं करने दिया जाएगा।

    पंजाब के नौजवानों को बचाने का रोडमैप क्या है?

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नशा और अपराध मुक्त पंजाब के लिए अपनी सरकार का विजन स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि सरकार की लड़ाई सिर्फ कुछ छोटे तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है. सरकार पूरे आपराधिक नेटवर्क की पहचान कर रही है।

    नशे की सप्लाई चेन को पूरी तरह से तोड़ा जा रहा है. तस्करों और गैंगस्टरों के अवैध वित्तीय साधनों को जब्त किया जा रहा है. पुलिस अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर सीधे प्रहार कर रही है. किसी भी अपराधी को सूबे का माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    मान ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे अवसरवादिता की राजनीति छोड़कर पंजाब के विकास में सहयोग करें. लोकतंत्र में सियासी मतभेद होना स्वाभाविक बात है. जब बात पंजाब की शान, नौजवानों और भविष्य की हो, तब सभी को संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठना चाहिए. सरकार पंजाब को अधिक सुरक्षित, नशा मुक्त और खुशहाल बनाने के अपने संकल्प पर पूरी मजबूती से अडिग रहेगी।

  • बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज डीबीटी के जरिए करेंगे 579 करोड़ से अधिक का वितरण

    बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज डीबीटी के जरिए करेंगे 579 करोड़ से अधिक का वितरण

    पटना
    सम्राट चौधऱी सरकार ने बिहार के बाढ़ पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का अहम फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मंगलवार यानी आज बाढ़ पीड़ित हरेक परिवार को सात-सात हजार रुपए उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांरित करेंगे। जाहिर है आज का दिन इन बाढ़ पीड़ितों के लिए काफी अहम है। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार की देर शाम तक जिलों से आठ लाख 27 हजार 472 परिवारों की पूरी विवरणी मंगा ली है। इन परिवारों को 579.23 करोड़ अनुग्रह सहायता के तौर दिए जाएंगे।

    88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित
    इस वर्ष गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन आदि नदियों में आई बाढ़ से 15 जिलों की 88 प्रखंडों में 575 ग्राम पंचायतों की लगभग 49.36 लाख आबादी बाढ़ से किसी न किसी रूप में प्रभावित है। इन जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा एवं अरवल शामिल है। प्रभावित परिवारों को इस वर्ष की बाढ़ में पहली बार सात-सात हजार की नकदी सहायता दी जा रही है।

    गंगा का जलस्तर घट रहा
    इस बीच, केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर भागलपुर के सुल्तानगंज में घट रहा है, लेकिन बलतारा एवं कुरसेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक के अलावा पटना के दीघा घाट, गांधीघाट, हाथीदह तथा भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में गंगा, श्रीपालपुर में पुनपुन, बेनीबाद में बागमती और दरौली में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

    1260 सामुदायिक रसोई का संचालन
    आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए विभिन्न प्रभावित जिलों में 1260 सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक अब तक लगभग 1.19 करोड़ लोगों को सुबह-शाम का भोजन कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 13 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिवरों में भी बाढ़ पीड़ितों को पूरी सहायता उपलब्ध करायी जा रही है।

    क्षति का आकलन करने कल आएगी केंद्रीय टीम
    राज्य में बाढ़ से हुई क्षति का आकलन करने और इससे उत्पन्न स्थिति का अध्ययन करने के लिए केंद्रीय टीम बुधवार को बिहार आएगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में यह टीम आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को अभिलेख भवन में आयोजित हिन्दी दिवस समारोह में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन में व्यस्त रहने के बावजूद प्रधानमंत्री बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर संवेदनशील रहे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी फोन कर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली है। केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया है कि बाढ़ से संबंधित हर एक चीज का अध्ययन करने केंद्रीय टीम बिहार जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बिहार में बाढ़ से होने वाली जन-धन की क्षति को कम करने के साथ-साथ इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। बिहार की नदियां राज्य के जीवन और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए नदियों को जोड़ना भी है और उन्हें बचाना भी है।

  • ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण राजस्थान निकाय चुनाव में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित

    ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण राजस्थान निकाय चुनाव में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव स्थगित

    जयपुर
    सोमवार को हुई मतगणना के दौरान कुछ बूथों की EVM में तकनीकी खराबी सामने आई। इसके चलते इन बूथों के वोटों का रिजल्ट घोषित नहीं हो सका। परिणाम अधूरे रहने की वजह से संबंधित निकायों में पार्षदों की अंतिम स्थिति भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

    राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर भी ब्रेक लग गया है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम समेत चार नगरीय निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि इन निकायों में 21 सितंबर को प्रस्तावित प्रमुख पदों के चुनाव अब नहीं होंगे। आयोग इन चुनावों के लिए नए सिरे से कार्यक्रम जारी करेगा।

    EVM ने अटका दिया पूरा चुनावी गणित
    दरअसल, सोमवार को हुई मतगणना के दौरान कुछ बूथों की EVM में तकनीकी खराबी सामने आई। इसके चलते इन बूथों के वोटों का रिजल्ट घोषित नहीं हो सका। परिणाम अधूरे रहने की वजह से संबंधित निकायों में पार्षदों की अंतिम स्थिति भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

    राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक जब तक सभी वार्डों के परिणाम घोषित नहीं हो जाते, तब तक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव कराना संभव नहीं है। यही वजह है कि आयोग ने जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के साथ सुकेत नगरपालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव आगामी आदेश तक स्थगित कर दिए हैं।

    21 सितंबर को नहीं होगी मेयर-डिप्टी मेयर की वोटिंग
    निकाय चुनाव के बाद सभी की नजरें अब मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर थीं। खासकर जयपुर में बहुमत के आंकड़े तक पहुंची बीजेपी के मेयर बनने की राह लगभग साफ मानी जा रही थी। लेकिन EVM में आई तकनीकी खराबी ने पूरा कार्यक्रम ही बदल दिया।

    अब 21 सितंबर को इन निकायों में मेयर, डिप्टी मेयर, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव नहीं होंगे। पहले अटके हुए वार्डों के परिणाम घोषित होंगे और उसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग नए सिरे से चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा।

    10 बूथों पर 16 सितंबर को फिर से मतदान
    EVM की तकनीकी खराबी के कारण जिन बूथों पर परिणाम अटके हैं, वहां अब दोबारा मतदान कराया जाएगा। आयोग ने चारों निकायों के कुल 10 बूथों पर 16 सितंबर को रिपोलिंग कराने के आदेश दिए हैं।

    इन बूथों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इसके बाद 17 सितंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। रिपोलिंग के बाद ही इन वार्डों का अंतिम परिणाम सामने आएगा और निकायों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

    जयपुर के 5 बूथों पर दोबारा वोटिंग
    जयपुर नगर निगम में सबसे ज्यादा पांच बूथों पर रिपोलिंग होगी। इनमें वार्ड-9 का बूथ संख्या 111, वार्ड-18 का बूथ संख्या 235, वार्ड-25 का बूथ संख्या 343, वार्ड-34 के बूथ संख्या 477 और 484 शामिल हैं।

    इन बूथों पर दोबारा मतदान होने के बाद संबंधित वार्डों के परिणाम जारी किए जाएंगे। इसके बाद ही जयपुर नगर निगम की पूरी तस्वीर आधिकारिक रूप से स्पष्ट होगी।

    जोधपुर और कोटा में भी EVM का पेच
    जोधपुर नगर निगम के वार्ड-50 के बूथ संख्या 338 पर भी रिपोलिंग होगी। वहीं कोटा नगर निगम में तीन बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाएगा। इनमें वार्ड-87 का बूथ 99, वार्ड-44 का बूथ 448 और वार्ड-11 का बूथ 576 शामिल हैं।

    इसके अलावा सुकेत नगरपालिका के वार्ड-4 के बूथ संख्या 5 पर भी 16 सितंबर को फिर से मतदान होगा।

    17 सितंबर को साफ होगी तस्वीर, फिर तय होगा मेयर का चुनाव
    अब इन 10 बूथों के मतदाताओं को एक बार फिर मतदान करना होगा। 16 सितंबर को वोटिंग और 17 सितंबर को काउंटिंग के बाद अटके हुए परिणाम सामने आएंगे। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग सभी संबंधित निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नया कार्यक्रम घोषित करेगा।

    यानी निकाय चुनाव का रिजल्ट आने के बाद जिस मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव की तैयारी शुरू हो गई थी, उस पर फिलहाल EVM की खराबी ने ब्रेक लगा दिया है। अब पहले 10 बूथों का फैसला होगा, फिर मेयर की कुर्सी का खेल शुरू होगा।

  • जयपुर के प्रसिद्ध नहर वाले गणेश मंदिर में आस्था का सैलाब, दाहिनी सूंड वाले बप्पा की है खास मान्यता

    जयपुर के प्रसिद्ध नहर वाले गणेश मंदिर में आस्था का सैलाब, दाहिनी सूंड वाले बप्पा की है खास मान्यता

    देशभर में वैसे तो भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन जयपुर के नहर वाले गणेश मंदिर की खास मान्यता है. यह मंदिर ब्रह्मपुरी क्षेत्र में नाहरगढ़ की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है. मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है. यह देश के उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है जहां गणपति जी की दाहिनी ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा विराजमान है. गणेश चतुर्थी के अवसर पर इस मंदिर के दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं.

    सिंजारा उत्सव में सजते हैं बप्पा
    जयपुर में नहर वाले गणपति के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सिंजारा उत्सव मनाया जाता है. इस अवसर पर भगवान गणेश को विशेष पोशाक और साफा अर्पित करने की परंपरा है. इस दौरान मंदिर में असंख्य मोदकों की झांकी सजाई जाती है. मोदकों से सजी यह झांकी भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहती है. सिंजारा उत्सव दौरान भगवान गणेश को मेहंदी और सिंदूर भी अर्पित किया जाता है. इसके बाद ये मेहंदी और सिंदूर श्रद्धालुओं में भी बांटा जाता है.

    नहर वाले गणेश मंदिर के महंत पंडित जय शर्मा ने बताया कि मंदिर में सिंदूर और मेहंदी लेने दूर-दूर से भक्तगण यहां आते हैं. मान्यता है कि यहां का सिंदूर और मेहंदी मांगलिक कार्यों में आने वाली समस्याओं को दूर करता है. भगवान गणेश की कृपा से विवाह या प्रेम संबंधों में आ रही अड़चनें यह सिंदूर और मेहंदी रचाने के बाद दूर हो जाती हैं.

    मंदिर के महंत ने बताया कि राजस्थान में वैसे तो कई ऐसे मंदिर है, जहां मेहंदी और सिंदूर बांटने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. लेकिन जयपुर के तीन मंदिर इसके लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं. इनमें नहर वाले गणपति के अलावा, मोती डूंगरी गणेश मंदिर और श्री गढ़ गणेश मंदिर शामिल हैं. इन मंदिरों में भी अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए लोग सिंदूर-मेहंदी लेने आते हैं.

    दाहिनी ओर सूंड वाले गणपति का रहस्य
    पंडित जय शर्मा के अनुसार, गणेश पुराण में कुल तीन तरह के गणपति का वर्णन मिलता है. बाई ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को वाममुखी गणपति कहा जाता है. जबकि दाहिनी ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को दक्षिणाभिमुखी गणपति कहा जाता है जो कि सिद्धिविनायक का स्वरूप माने जाते हैं. यानी भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने वाले वाले गणपति. सांसारिक सुखों की प्राप्ति के लिए दक्षिणाभिमुखी गणपति की पूजा सबसे ज्यादा लाभकारी मानी जाती है. धन, वैभव, यश, सफलता की कामना के लिए इन्हीं गणपति की फलदायी होती है. जबकि तंत्र-मंत्र साधना और संत समाज के लिए सीधी सूंड वाले गणपति की पूजा लाभकारी होती है

  • किसाऊ परियोजना को मिलेगी रफ्तार, छह राज्यों के बीच आज होगा जल वितरण समझौता

    किसाऊ परियोजना को मिलेगी रफ्तार, छह राज्यों के बीच आज होगा जल वितरण समझौता

    चंडीगढ़
    करीब छह दशक से लंबित अंतरराज्यीय जल विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठने जा रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच जल वितरण समझौते को 15 सितंबर को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है।

    15 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री जल वितरण के प्रस्ताव पर सहमत हो चुके हैं। अब नई दिल्ली स्थित जल शक्ति भवन में होने वाली बैठक में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के शीर्ष अधिकारी समझौते पर हस्ताक्षर के साथ करीब छह दशक से अटकी इस परियोजना के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रह सकते हैं।

    परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है।

    जल बंटवारे के विवाद से सहयोग की ओर बढ़ेंगे राज्य
    अंतरराज्यीय नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। किसाऊ परियोजना पर प्रस्तावित समझौता ऐसे विवादों के समाधान के लिए सहमति आधारित माडल का उदाहरण बन सकता है।

    हरियाणा को मिलने वाला पानी उसकी जल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जबकि दिल्ली को अतिरिक्त जल उपलब्धता से राष्ट्रीय राजधानी की जरूरतों को राहत मिल सकती है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान को मिलने वाला निर्धारित पानी भी इन राज्यों की जल उपलब्धता को मजबूत करेगा।

    छह दशक की देरी के बाद परियोजना को गति मिलने की उम्मीद
    लंबे समय तक परियोजना के अटके रहने से इसकी लागत में भी बड़ा इजाफा हुआ है। अब इसकी अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह रकम आधी थी।

    ऐसे में छह राज्यों के बीच समझौता होने से परियोजना को संस्थागत आधार मिलने के साथ इसके निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। टोंस नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ राज्यों के बीच सहयोग की नई राह भी खोल सकती है।

  • जालंधर सराफा बाजार में GST की कार्रवाई, दुकानों में खरीद-बिक्री और बैंक खातों का रिकॉर्ड जांचा

    जालंधर सराफा बाजार में GST की कार्रवाई, दुकानों में खरीद-बिक्री और बैंक खातों का रिकॉर्ड जांचा

    जालंधर 

    जालंधर में सराफा बाजार स्थित हनुमान चौक पर जीएसटी विभाग ने आभूषण की दुकान पर छापेमारी की। टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दुकान की बिक्री, खरीद, कंप्यूटर डेटा और बैंक खातों से जुड़े अहम दस्तावेजों की बारीकी से जांच शुरू कर दी है।

    वी.के. ज्वैलर्स पर सोमवार को की गई इस कार्रवाई में क्या खामियां मिली हैं या कितनी टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। रेड करीब दो घंटे तक चली। जांच अधिकारी दस्तावेजों और खाते के आंकड़ों का मिलान कर रहे हैं, जिसके बाद ही पूरी स्थिति साफ हो पाएगी।

    ग्राहकों और व्यापारियों के लिए जरूरी नियम टैक्स चोरी पर लगाम लगाने और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जीएसटी विभाग ने आम ग्राहकों से विशेष अपील की है। विभाग के अनुसार, ग्राहक जब भी सोने-चांदी या हीरे के आभूषणों की खरीदारी करें तो दुकानदार से हमेशा पक्का जीएसटी इनवॉइस अनिवार्य रूप से लें।

    पक्का बिल टैक्स चोरी रोकने में मदद करता है पक्का बिल न केवल टैक्स चोरी रोकने में मदद करता है, बल्कि आभूषणों की शुद्धता और भविष्य में री-सेल या एक्सचेंज के समय ग्राहक के कानूनी अधिकारों की रक्षा भी करता है। व्यापारियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने सभी लेन-देन का सही रिकॉर्ड रखें और नियमानुसार बिल जारी करें।