Category: राज्य

  • लुधियाना में आज नॉनवेज पर पाबंदी, मांस-मछली की दुकानें और होटल रहेंगे बंद; जानें वजह

    लुधियाना में आज नॉनवेज पर पाबंदी, मांस-मछली की दुकानें और होटल रहेंगे बंद; जानें वजह

    लुधियाना

    लुधियाना में जैन समाज की ओर से आज धार्मिक पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन को अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म के अनुसार आज किसी भी जीव की हत्या करना धार्मिक रीति-रिवाजों के विपरीत माना जाता है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले में मांस-मछली की दुकान बंद रहेगी। 

    जिला मजिस्ट्रेट लुधियाना ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, 15 सितंबर को लुधियाना जिले में मीट/मछली और अंडों की दुकानें, नॉन-वेजीटेरियन होटल-ढाबे और अहाते बंद रहेंगे। इसके साथ ही मीट-मछली की कटाई भी पूरी तरह बंद रहेगी।

    उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिला लोक संपर्क अधिकारी को भी आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करवाने के लिए कहा गया है।

    जिला मजिस्ट्रेट की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। आदेश की प्रतियां पंजाब सरकार के संबंधित अधिकारियों, पुलिस कमिश्नर लुधियाना, नगर निगम और अन्य विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।

     

  • चर्चित IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा स्वीकार, सोशल मीडिया पोस्ट में बयां की अपनी बात

    चर्चित IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा स्वीकार, सोशल मीडिया पोस्ट में बयां की अपनी बात

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित और तेजतर्रार 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने मंजूर कर लिया है. निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए उन्होंने 30 अगस्त को यह पद छोड़ने की घोषणा की थी, जो 15 सितंबर से प्रभावी हो गया है।  

    लंदन की नौकरी छोड़ बनी थीं आईएएस
    दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने के बाद लंदन में अच्छी नौकरी की थी, लेकिन सब कुछ पाने के बाद भी उन्हें कुछ अधूरा लगा. इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी की. उन्होंने पहले प्रयास में आईपीएस और दूसरे प्रयास में 2013 में आईएएस की सफलता हासिल की. उनके पति गगनदीप सिंह ने भी 2022 में अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर एक कंपनी शुरू की थी। 

    सख्त कार्यशैली और भविष्य की राह
    मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया में डीएम रहीं दिव्या मित्तल की गिनती सख्त और बेबाक अफसरों में होती थी. मिर्जापुर में उन्होंने आजादी के 75 साल बाद पानी की व्यवस्था कराई थी. इस्तीफा मंजूर होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर जयशंकर प्रसाद की पंक्ति "प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो" लिखकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। 

    मामले में सियासत भी
    आपको बता दें कि दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सियासत भी देखने को मिली थी. सपा प्रमुख ने आरोप लगाया था कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है, वहीं कांग्रेस नेता अजय राय ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी. उन्होंने इशारा भी किया था अगर दिव्या मित्तल कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहेंगी तो उसपर विचार किया जाएगा। 

  • कोयला संकट में योगी सरकार ने संभाली बिजली व्यवस्था, तय रोस्टर के अनुसार जारी रही आपूर्ति

    कोयला संकट में योगी सरकार ने संभाली बिजली व्यवस्था, तय रोस्टर के अनुसार जारी रही आपूर्ति

    कोयला संकट के बीच योगी सरकार का प्रभावी प्रबंधन, रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति जारी

    1500-2000 मेगावाट की कमी के बावजूद यूपी में आपूर्ति व्यवस्था संभली, जल्द बढ़ेगी उपलब्धता

    करीब 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद

    लखनऊ
     कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि से देशभर में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और तापीय विद्युत उत्पादन में आई कमी के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया है। विषम परिस्थितियों के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रदेश के ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत और बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार और कई स्थानों पर उससे अधिक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है।

    अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं ऊर्जा निगमों के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को विद्युत आपूर्ति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में निर्धारित शिड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए जहां से भी विद्युत उपलब्ध हो, उसे प्राप्त कर आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

    1500 से 2000 मेगावाट की कमी के बावजूद आपूर्ति

    वर्तमान में कोयले की कमी के कारण उत्तर प्रदेश को सामान्य दिनों की तुलना में करीब 1500 से 2000 मेगावाट विद्युत की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में विद्युत की मांग भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ी है। वहीं कोयले की कमी के कारण लगभग 35 गीगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। विंड एवं हाइड्रो पावर के उत्पादन में भी कमी आई है। इसके बावजूद वर्तमान परिस्थितियों में लगभग 27,000 मेगावाट तक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली देने की कोशिश की जा रही है।

    जल्द मिलेगी अतिरिक्त बिजली

    रात्रि में 2000 से 3000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध न हो पाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित कटौती की जा रही है। हालांकि आगामी दो-तीन दिनों में अनपरा डी, हरदुआगंज-ई तथा जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाइयों के उपलब्ध होने से लगभग 1500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने की संभावना है। इसके अलावा अनपरा के कोयले को लैंको की ओर डायवर्ट करने तथा बारा में कोयला आपूर्ति में सुधार के चलते रात्रि में अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने से लगभग 700 मेगावाट विद्युत उपलब्धता एवं आपूर्ति में वृद्धि हुई है।

    योगी सरकार का फोकस, जनता को अधिकतम राहत

    पावर कारपोरेशन प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2017 एवं 2021 जैसी कोयला आपूर्ति संबंधी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करते हुए दिन के समय प्रदेश के सभी क्षेत्रों में कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ग्रामीण, तहसील, नगर पंचायत एवं बुंदेलखंड क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर से अधिक घंटे विद्युत आपूर्ति देने का प्रयास लगातार जारी है। कोयला आपूर्ति में सुधार के लिए कोयला मंत्रालय के उच्च प्रबंधन से भी समुचित कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

  • मुख्यमंत्री राहत कोष का बढ़ा दायरा, 2025-26 में 74,531 लाभार्थियों को मिली मदद

    मुख्यमंत्री राहत कोष का बढ़ा दायरा, 2025-26 में 74,531 लाभार्थियों को मिली मदद

    बिना भेदभाव जरूरतमंदों तक पहुंचा मुख्यमंत्री राहत कोष का लाभ

    पांच साल में 2.44 लाख लाभार्थियों को मिली 4,324 करोड़ की सहायता, प्रदेश के सभी मंडलों और जिलों तक पहुंची राहत

    2025-26 में 74,531 लाभार्थियों तक पहुंची मदद, पिछले पांच वर्षों में लाभार्थियों की संख्या में 4.5 गुना वृद्धि

    लखनऊ, 
     आर्थिक विपन्नता, गंभीर बीमारी और विपरीत परिस्थितियों में जरूरतमंदों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है। इस सहायता का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बिना किसी भेदभाव समभाव से जरूरतमंदों तक राहत पहुंची है। उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में 2,44,263 लाभार्थियों को कुल 4,324.60 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत हुई। इस अवधि में वार्षिक लाभार्थियों की संख्या 16,640 से बढ़कर 74,531 हो गई, यानी करीब 4.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई। मंडल और जिला स्तर के आंकड़े भी सहायता के व्यापक भौगोलिक विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

    पांच साल में सहायता का दायरा बढ़ा 
    मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2021-22 में 289.71 करोड़ रुपये की सहायता से 16,640 लाभार्थी लाभान्वित हुए थे। वर्ष 2022-23 में सहायता राशि बढ़कर 572.97 करोड़ रुपये रही और लाभार्थियों की संख्या 31,745 तक पहुंच गई। वर्ष 2023-24 में 1,008.50 करोड़ रुपये की सहायता से 54,473 लाभार्थियों को राहत मिली। वर्ष 2024-25 में सहायता राशि 1,344.94 करोड़ रुपये रही, जो पांच पूर्ण वित्तीय वर्षों में सर्वाधिक है। इसी वर्ष 66,874 लाभार्थियों को सहायता मिली और प्रति लाभार्थी औसत सहायता 2.01 लाख रुपये के उच्चतम स्तर पर रही। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि 1,108.48 करोड़ रुपये रही, जबकि लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 74,531 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस वर्ष प्रति लाभार्थी औसत सहायता 1.49 लाख रुपये रही।

    लाभार्थियों की संख्या में हुआ निरंतर विस्तार
    आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति यह भी सामने आती है कि सहायता राशि में वर्षवार बदलाव के बावजूद लाभार्थियों की संख्या में व्यापक वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में सहायता राशि पिछले वर्ष की तुलना में 17.6 प्रतिशत कम रही, लेकिन लाभार्थियों की संख्या 11.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे स्पष्ट होता है कि अधिक संख्या में जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने का क्रम लगातार जारी रहा।

    बिना भेदभाव सभी मंडलों तक पहुंची राहत
    वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के उपलब्ध रिकॉर्ड के मंडलवार विश्लेषण में लखनऊ मंडल में 19,507, गोरखपुर मंडल में 13,621, प्रयागराज मंडल में 12,019, अयोध्या मंडल में 10,427, वाराणसी में 9,364 और कानपुर में 8,433 लाभार्थियों को सहायता मिली है। देवीपाटन मंडल में 7,201, आजमगढ़ में 6,760, बस्ती में 3,740 और मिर्जापुर में 3,335 लाभार्थी दर्ज हैं। झांसी मंडल में 2,263, चित्रकूट में 1,894, आगरा में 1,617, मुरादाबाद में 1,441 तथा मेरठ में 1,308 लाभार्थी हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि सहायता का वितरण प्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में हुआ है और जरूरतमंदों तक राहत का दायरा केवल बड़े मंडलों तक सीमित नहीं रहा।

    छोटे जिलों से बड़े जिलों तक पहुंची सहायता
    जिला स्तर के आंकड़ों में लखनऊ में 7,491, प्रयागराज में 6,572, गोरखपुर में 5,463 और कानपुर नगर में 4,890 लाभार्थियों को सहायता मिली है। इसके बाद गोंडा में 3,647, आजमगढ़ में 3,417, प्रतापगढ़ में 3,240, वाराणसी में 3,220, जौनपुर में 3,219 और सीतापुर में 3,192 लाभार्थी दर्ज हैं। कुशीनगर में 3,179, देवरिया में 2,914, बाराबंकी में 2,911, रायबरेली में 2,701 और अयोध्या में 2,246 लाभार्थियों को सहायता मिली है। जिला स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों में बड़े जिलों के साथ-साथ अपेक्षाकृत छोटे जिलों तक भी राहत पहुंचने का क्रम स्पष्ट दिखाई देता है। कम जनसंख्या वाले जिलों में भी जरूरतमंदों तक सहायता पहुंची है। यह वितरण इस बात को रेखांकित करता है कि मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से सहायता का दायरा प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक विस्तृत रहा है। जिला स्तर के आंकड़े भी व्यापक पहुंच और जरूरतमंदों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की दिशा में जारी प्रयासों की तस्वीर सामने रखते हैं।

    समभाव के साथ जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
    मुख्यमंत्री राहत कोष के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में सहायता पाने वाले लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2.44 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता मिलना और प्रदेश के सभी मंडलों व जिलों तक राहत पहुंचना इस व्यवस्था की व्यापक पहुंच को रेखांकित करता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे जरूरतमंदों को सहारा देने की यह व्यवस्था जनकल्याण और सामाजिक समभाव की दिशा में महत्वपूर्ण है। आंकड़ों में सहायता के बढ़ते दायरे के साथ यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यापक बनाने पर जोर दिया गया है।

  • नशे के मुद्दे पर पंजाब में चुनावी संग्राम तेज, BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से AAP-कांग्रेस पर दबाव

    नशे के मुद्दे पर पंजाब में चुनावी संग्राम तेज, BJP की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ से AAP-कांग्रेस पर दबाव

     चंडीगढ़
    पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। 17 सितंबर को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में मात्र छह माह का समय रह जाएगा और सितंबर माह का यही वह पखवाड़ा है, जब न सिर्फ दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पार्टियां, बल्कि पंजाब आधारित शिरोमणि अकाली दल भी अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और रफ्तार देने की योजनाएं घोषित कर चुके हैं।

    सत्तासीन आम आदमी पार्टी भी चुनावी मोड में शिफ्ट हो चुकी है और न सिर्फ पार्टी में संगठनात्मक नियुक्तियां की जा रही हैं, बल्कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के चेहरे मुख्यमंत्री भगवंत मान विभिन्न विधानसभा हलकों में कार्यक्रमों का आगाज कर चुके हैं।

    'नशा' रहेगा सभी चुनावी पार्टियों का मुद्दा
    चुनावी तैयारियों के दौरान ही करीब सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रचार का केंद्र बिंदु नशे का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता में आने के बाद से ही लगातार पंजाब में युद्ध नशे के विरुद्ध नाम से अभियान चला रही है और समय-समय पर इसके आंकड़े पेश करके अपने द्वारा किए जा रहे काम का क्रेडिट ले रही है।

    18 सितंबर को BJP करेगी चुनावी शंखनाद
    राष्ट्रीय फलक पर बात करें तो बीते दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि नक्सलवाद का खात्मा करने के बाद अब उनका मिशन देश में नशे की समस्या को खत्म करना है और भाजपा द्वारा पंजाब में अपने चुनावी शंखनाद के लिए 18 सितंबर से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली चार हजार किलोमीटर लंबी नशा विरोधी जागरूकता के लिए यात्राओं व रैलियों का आयोजन करने की घोषणा की जा चुकी है।

    सचिन पायलट ने भी खोला मोर्चा
    वहीं, कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी सचिन पायलट अपना पहला पंजाब दौरा 15 सितंबर को शुरू करने जा रहे हैं और दौरे के पहले ही दिन नशे के मामले में आत्महत्या करने वाले तूरबंजारा निवासी गुलजार सिंह को मुद्दा बनाकर न सिर्फ रोष मार्च व प्रदर्शन का एलान किया है, बल्कि कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा की रिहायश का घेराव करने का भी प्रोग्राम दिया गया है।

    कांग्रेस नेता सचिन पायलट अपने पहले ही दिन से सभी नेताओं को एक मंच पर दिखाकर कांग्रेस की एकजुटता का भी प्रदर्शन कराएंगे। खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी खुद व अपने सभी समर्थकों के साथ इस प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा करके एकजुटता का संकेत दे दिया है।

  • नए प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, चन्नी समेत दिग्गज नेता होंगे शामिल

    नए प्रभारी सचिन पायलट की मौजूदगी में पंजाब कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, चन्नी समेत दिग्गज नेता होंगे शामिल

    चंडीगढ़
     पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट की अगुवाई में आज मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाले प्रदर्शन को लेकर पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट किया है कि वह मंगलवार को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की है।

    कांग्रेस की ओर से आज मंगलवार सुबह 11 बजे सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस कार्यालय से आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर मार्च निकाला जाएगा।

    कांग्रेस गुलजार सिंह की मौत के मामले में चीमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री से पंजाब में बढ़ते नशे के मुद्दे पर सवाल किया था और इसके बाद उन्हें मानसिक दबाव व उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

    एक साथ दिखेंगे पंजाब कांग्रेस के नेता
    इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तस्वीर लंबे समय बाद देखने को मिल सकती है। चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आएंगे। इसके अलावा पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता प्रदर्शन में शामिल होंगे।

    पायलट ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन की जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इसमें शामिल होने की अपील की है। पंजाब की राजनीति में इस प्रदर्शन को कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।

    एकजुटता और ताकत का बड़ा इम्तिहान
    पिछले लंबे समय से पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं के बीच गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर मतभेद चर्चा में रहे हैं। ऐसे में मंगलवार का प्रदर्शन यह संदेश देने का अवसर होगा कि पार्टी अब मतभेदों को पीछे छोड़कर चुनावी मैदान में एकजुट होकर उतरने की तैयारी कर रही है। प्रदर्शन में नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से कांग्रेस की वास्तविक एकजुटता और संगठनात्मक ताकत का भी संकेत मिलने की उम्मीद है।

     

  • किताबी ज्ञान के साथ बागवानी के गुर सीखेंगे बच्चे, यूपी के 49 पीएमश्री विद्यालयों को मिलेगा ₹20 हजार

    किताबी ज्ञान के साथ बागवानी के गुर सीखेंगे बच्चे, यूपी के 49 पीएमश्री विद्यालयों को मिलेगा ₹20 हजार

     बांदा
     अब सरकारी स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पीएमश्री विद्यालयों में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। यहां पढ़ने वाले बच्चे अब पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी के गुर भी सीखेंगे।

    बच्चों को प्रकृति और पोषण से जोड़ने के लिए हर स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भी जारी कर दी है।

    इस योजना से बच्चों में पर्यावरण संरक्षण की भावना तो विकसित होगी ही, साथ ही उन्हें जैविक खेती और स्वस्थ जीवनशैली की भी जानकारी मिलेगी।

    मंडल के चारों जिलों में कुल 49 पीएमश्री विद्यालय संचालित हैं। इनमें 36 बेसिक शिक्षा के व 13 माध्यमिक शिक्षा के पीएमश्री विद्यालय शामिल हैं। जिनमें करीब 42 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अब बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ बागवानी भी सीखेंगे।

    बच्चों को प्रकृति, पोषण और पर्यावरण से जोड़ने के लिए हर पीएमश्री स्कूल में किचन, सब्जी और औषधीय उद्यान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई है। समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

    आदेश के अनुसार उद्यान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों की पहचान, पोषण, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, जैविक खाद और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देना है। विद्यालयों में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम, आंवला, हल्दी, लेमनग्रास, पुदीना, धनिया, पालक, मेथी, सहजन जैसे उपयोगी एवं स्थानीय पौधे लगाए जाएंगे। कम भूमि वाले विद्यालयों में वर्टिकल गार्डन, प्लास्टिक बोतल, टायर, ग्रो बैग, कंटेनर व रेज्ड बेड माडल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

        बहुत अच्छी योजना है। बच्चे अभी तक सिर्फ किताबों में पौधों के बारे में पढ़ते थे, अब खुद पौधे लगाना सीखेंगे। इससे उन्हें सब्जियों और औषधीय पौधों का महत्व पता चलेगा और मोबाइल से दूर प्रकृति से जुड़ाव भी बढ़ेगा। -सुनील कुमार, अभिभावक, नरैनी।

        स्कूल में बागवानी शुरू होने से हमारे बच्चों में मेहनत करने की आदत पड़ेगी। घर पर भी वे बागवानी में हमारी मदद कर सकते हैं। जो सब्जियां स्कूल में उगेंगी, उनसे मिड-डे-मील भी पौष्टिक होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। -रीना देवी, अभिभावक, अतर्रा।

        पीएमश्री विद्यालयों में बच्चों को बागवानी से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इसमें सबसे बेहतर बात यह होगी कि बच्चों को पौधों की पहचान हो सकेगी। औषधियों के होने वाले लाभों के बारे में जान सकेंगे। -राजेश कुमार, वर्मा, संयुक्त शिक्षा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, चित्रकूट धाम मंडल, बांदा।

    पीएमश्री विद्यालय की स्थिति एक नजर में

    जिला     बेसिक स्तर     माध्यमिक शिक्षा
    बांदा     07     05
    चित्रकूट     07     02
    हमीरपुर     16     04
    महोबा     06     02
    कुल     36     13

  • सोलर सिटी की राह पर चंडीगढ़, 8 हजार रूफटॉप पर लगेंगे प्लांट; सरकार देगी ₹78,000 की सब्सिडी

    सोलर सिटी की राह पर चंडीगढ़, 8 हजार रूफटॉप पर लगेंगे प्लांट; सरकार देगी ₹78,000 की सब्सिडी

    चंडीगढ़
     शहर को वर्ष 2030 तक मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में प्रशासन ने निजी घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का अभियान तेज कर दिया है।चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी, साइंस एंड टेक्नोलाजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) ने मार्च 2027 तक शहर के आठ हजार निजी घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य तय किया है।

    अभी तक प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत 1433 निजी घरों पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब दो हजार लोगों ने अपने स्तर पर संयंत्र स्थापित किए हैं।

    लक्ष्य हासिल करने के लिए क्रेस्ट की ओर से शहरभर में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें लोगों को आवेदन प्रक्रिया, सब्सिडी, बैंक ऋण और सोलर प्लांट लगाने की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।

    12 सूचीबद्ध विक्रेता लोगों को संयंत्र की क्षमता और स्थापना संबंधी जानकारी दे रहे हैं। पंजाब एंड सिंध बैंक तथा पंजाब नेशनल बैंक के प्रतिनिधि ऋण संबंधी सवालों का जवाब दे रहे हैं।

    सरकारी भवनों पर पहले ही पूरा हुआ लक्ष्य
    चंडीगढ़ देश के उन शुरुआती शहरों में शामिल है, जहां सभी पात्र सरकारी भवनों और मकानों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। शहर के 6366 सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र लगाए गए हैं।

    करीब 1400 सरकारी मकानों में बिजली खपत नेट-जीरो स्तर तक पहुंच गई है। इन संयंत्रों की कुल क्षमता 18.1 मेगावाट पीक है और इनसे सालाना करीब 2.35 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अब तक 148 लाभार्थियों के बिजली बिल शून्य हो चुके हैं। योजना में तीन किलोवाट तक के घरेलू सोलर प्लांट के लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम 78 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। पात्र लोगों को छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है।

    97 नगर निगम भवनों पर लगेगा सोलर प्लांट
    क्रेस्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड से रेंट-ए-रूफ योजना के तहत छतों पर सोलर प्लांट लगाने का आग्रह किया है। वहीं नगर निगम के 97 भवनों, जिनमें सामुदायिक केंद्र भी शामिल हैं, पर सोलर प्लांट लगाने के लिए क्रेस्ट का समझौता हो चुका है।

    चंडीगढ़ फ्लोटिंग सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। सेक्टर-39 वाटरवर्क्स में उत्तर भारत का सबसे बड़ा 2.5 मेगावाट पीक क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले ही शुरू किया जा चुका है। अब तीन मेगावाट क्षमता का एक और फ्लोटिंग प्लांट तैयार है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा।

    सूर्य घर योजना में क्या मिलेगा

        तीन किलोवाट तक के सोलर प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी।
        छह प्रतिशत तक की ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा।
        क्रेस्ट की ओर से विक्रेता चयन और तकनीकी सहायता।
        सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में।
        शिकायतों के समाधान के लिए एकल खिड़की व्यवस्था।
        आवेदन के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

     

  • हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर फैसला संभव, JPSC-JSSC समेत 4 परीक्षाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई

    हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर फैसला संभव, JPSC-JSSC समेत 4 परीक्षाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई

    रांची

    Jharkhand High Court Hearing: झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार 15 सितंबर को JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, JSSC CGL-2023, CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ दायर विभिन्न याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. यह मामला जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है. इस सुनवाई पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इन परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है.

    सरकार ने अब तक दाखिल नहीं किया जवाब

    मामले की सुनवाई से पहले सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर सकी है. अदालत ने सरकार को 7 सितंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन सोमवार तक सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. वहीं, कुछ मामलों में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल किया जा चुका है. ऐसे में अदालत के सामने आयोग और सरकार के रुख में अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

    किन परीक्षाओं का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट में एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है, जिनमें अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने की वैधता को चुनौती दी गई है. इनमें JSSC CGL-2023, JPSC संयुक्त सिविल सेवा (11वीं से 13वीं), CDPO और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं. इन सभी परीक्षाओं को राज्य सरकार ने पूर्व में रद्द करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

    अलग-अलग अभ्यर्थियों ने दायर की हैं याचिकाएं

    JSSC CGL-2023 परीक्षा रद्द करने के खिलाफ रमेश उरांव और अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की है. वहीं, CDPO नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को सुभाष मुरमू और अन्य अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है. इसी तरह दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज और अन्य अभ्यर्थियों ने JPSC 11वीं से 13वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के खिलाफ याचिका दाखिल की है. फूड सेफ्टी ऑफिसर प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के मामले में सौरभ सिंह और अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है.

    इन सभी परीक्षाओं से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य जुड़ा हुआ है. लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए सोमवार की सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार अदालत में अपना पक्ष रखती है या नहीं और हाईकोर्ट आगे इस मामले में क्या निर्देश देता है. अदालत के अगले आदेश से इन विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है.

  • पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा, यात्रा से ठहरने तक के पैकेज तैयार; ई-पिंडदान भी होगा

    पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा, यात्रा से ठहरने तक के पैकेज तैयार; ई-पिंडदान भी होगा

    पटना

    Pitru Paksha Mela 2026: गयाजी में पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू होने जा रहा है. यह मेला 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बिहार पर्यटन ने खास पिंडदान पैकेज जारी किए हैं. इनमें यात्रा, पिंडदान, पूजा सामग्री, भोजन और ठहरने की सुविधा शामिल है.

    श्रद्धालु अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से एक दिन या एक रात-दो दिन का पैकेज चुन सकते हैं. जो लोग गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी दी गई है.

    ऑनलाइन कर सकते हैं बुकिंग

    पिंडदान पैकेज की बुकिंग ऑनलाइन की जा सकती है. इसके लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट पर जाना होगा. बुकिंग या किसी अन्य जानकारी के लिए 8544418408 और 8294307690 पर संपर्क किया जा सकता है.

    पर्यटन विभाग के अनुसार, पैकेज में पंडा-पुजारी की सेवा, जरूरी पूजन सामग्री, परिवहन, आवास और भोजन जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
    पैकेज-A: पटना से पुनपुन और गयाजी
    यह एक दिन का पिंडदान पैकेज है. इसमें पटना से श्रद्धालुओं के पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पटना शहर के 10 किलोमीटर के दायरे के अलावा पटना रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से भी परिवहन की सुविधा होगी.
    श्रद्धालुओं के लिए सेडान या हैचबैक कार उपलब्ध होगी. पुनपुन घाट पर पिंडदान, पिंडदान शुल्क और पूजन सामग्री की सुविधा मिलेगी. इसके बाद गयाजी में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान कराया जाएगा.
    इसमें बजट एसी से लेकर थ्री स्टार होटल तक में ठहरने की सुविधा है. शाकाहारी दोपहर का भोजन भी मिलेगा. पैकेज की कीमत 14,550 रुपये से शुरू होकर 30,650 रुपये तक है. कीमत होटल की श्रेणी और यात्रियों की संख्या के अनुसार तय होगी

    पैकेज-B: पिंडदान के साथ नालंदा-राजगीर की यात्रा
    यह एक रात और दो दिन का पैकेज है. इसमें पटना से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी. पुनपुन घाट और गयाजी में पिंडदान से जुड़ी सेवाएं भी पैकेज में शामिल हैं.
    श्रद्धालुओं को आवास के साथ शाकाहारी नाश्ता, दोपहर और रात का खाना मिलेगा. इस दौरान राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा.
    धार्मिक अनुष्ठान और यात्रा के साथ बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों को देखने का मौका भी मिलेगा. हालांकि, स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट पैकेज में शामिल नहीं हैं.
    इस पैकेज की कीमत 18,850 रुपये से शुरू होकर 40,700 रुपये तक है.

    पैकेज-C: गयाजी में एक दिन में पूरा पिंडदान

    गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिन का पैकेज है. गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा मिलेगी.
    पैकेज में सेडान या हैचबैक कार की सुविधा होगी. फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर में पिंडदान और अक्षयवट पर पिंडदान कराया जाएगा.
    इसके अलावा पंडाजी की सेवा, पिंडदान शुल्क, पूजन सामग्री, आवास और शाकाहारी दोपहर का भोजन भी शामिल है. इसकी कीमत 11,250 रुपये से शुरू होकर 25,250 रुपये तक है.

    पैकेज-D: देर रात और सुबह पिंडदान करने वालों के लिए

    यह पैकेज उन श्रद्धालुओं के लिए तैयार किया गया है, जो देर रात, सुबह या शाम के समय पिंडदान करना चाहते हैं. इसमें गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप की सुविधा होगी.
    श्रद्धालुओं को सेडान या हैचबैक कार से यात्रा कराई जाएगी. आवास के साथ शाकाहारी दोपहर और रात का भोजन भी मिलेगा.
    फल्गु नदी पर तर्पण, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट पर पिंडदान की सुविधा इस पैकेज में शामिल है. इसकी कीमत 16,000 रुपये से शुरू होकर 39,500 रुपये तक है.

    पैकेज-E: गयाजी के साथ राजगीर-नालंदा भी घूम सकेंगे

    यह भी एक रात और दो दिन का पैकेज है. इसमें गयाजी में पिंडदान के साथ राजगीर और नालंदा घूमने की सुविधा मिलेगी.
    गयाजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित पूजा स्थल से पिकअप और ड्रॉप होगा. परिवहन, पिंडदान से जुड़ी सेवाएं, पूजन सामग्री और आवास पैकेज में शामिल हैं.
    श्रद्धालुओं को शाकाहारी नाश्ता, दोपहर का भोजन, अतिरिक्त दोपहर का भोजन और रात का खाना मिलेगा. राजगीर के विश्व शांति स्तूप और नालंदा के प्राचीन अवशेषों का भ्रमण भी कराया जाएगा.
    इस पैकेज में स्मारकों और पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट शामिल नहीं हैं. इसकी कीमत 16,550 रुपये से शुरू होकर 32,850 रुपये तक है.
    गयाजी नहीं पहुंच सकते तो ऑनलाइन कराएं ई-पिंडदान

    जो श्रद्धालु किसी वजह से गयाजी नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन ई-पिंडदान की सुविधा भी शुरू की गई है. इसकी कुल कीमत 23,000 रुपये है. इसमें GST भी शामिल है.

    ई-पिंडदान पैकेज में विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और फल्गु नदी पर पिंडदान या तर्पण की व्यवस्था होगी. पंडित और पुरोहित की सेवा भी इसमें शामिल है.

    पूजन सामग्री और दक्षिणा की व्यवस्था भी पैकेज का हिस्सा है. पूरे अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी. इसकी रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में श्रद्धालु को उपलब्ध कराई जाएगी.

    पुरोहित तीनों प्रमुख स्थलों पर विधि-विधान से पिंडदान या तर्पण कराएंगे. मंत्रोच्चार, दान-दक्षिणा और पूजन सामग्री समेत पूरे अनुष्ठान की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी.