Category: राज्य

  • अखिलेश के बयान पर जयंत का पलटवार, ‘चवन्नी नहीं, विकास के मुद्दे पर होनी चाहिए राजनीति’

    अखिलेश के बयान पर जयंत का पलटवार, ‘चवन्नी नहीं, विकास के मुद्दे पर होनी चाहिए राजनीति’

    दिल्ली

    जयंत चौधरी और अखिलेश यादव में वार-पलटवार जारी है।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच वार-पलटवार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में अखिलेश के बयान से जुड़े सवाल पर जयंत चौधरी भयानक रूप से भड़क गए। जयंत ने कहा कि अगर मैंने मुंह खोल दिया तो अखिलेश यादव को यहां भी खड़े नहीं हो पाएंगे। दरअसल, समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश ने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख पर तंज कसते हुए कहा था, हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी वे हमें छोड़कर चले गए।

    जयंत चौधरी ने कहा

    जयंत चौधरी ने कहा कि यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं। यूपी में चुनाव है। जयंत ने ऐलान करते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी चुनाव होंगे और हम वहां भी चुनाव लड़ेंगे। सभी सीटें पर एनडीए की संयुक्त लड़ाई है। हम सब एक हैं। जयंत चौधरी ने कहा कि एकजुट लड़ाई और एकमात्र कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि विकास के रास्ते न रुके। जयंत चौधरी ने कहा कि किस पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल होगा, इस बारे में बात करें तो राजनीतिक पार्टियां समय के साथ अपने चुनाव चिह्न बदलती रहती हैं। मैं अधिकार के साथ एनडीए की बातें करता हूं।

    मैं गंभीरता के कारण कुछ बातें नहीं कहना चाहता हूं

    अखिलेश यादव के बयान पर मीडिया के पूछे गए सवाल पर जयंत चौधरी भड़क गए। जयंत ने कहा कि जब हमारा उनके यानी समाजवादी पार्टी के साथ साझा था, तब बंद दरवाजों के पीछे हुई हर बात सार्वजनिक नहीं की गई थी। मैं गंभीरता के कारण कुछ बातें नहीं कहना चाहता हूं। अगर मैं खुलकर उन मामलों को बता दूं, तो यहां भी खड़े होने की भी जगह नहीं बचेगी। अखिलेश यादव आज जिस तरह के हल्केपन बातें कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। चौधरी चरण सिंह के सम्मान को विधानसभा सीटों की संख्या से नहीं मापा या तय किया जा सकता है। उनके प्रति सम्मान हर किसी के दिल में बसा है और हमेशा रहेगा, चाहे कोई कुछ भी दावा करे। भले ही राष्ट्रीय लोक दल को एक भी सीट न मिले, फिर भी चौधरी चरण सिंह का सम्मान और प्रतिष्ठा कभी कम नहीं होगी।
     

    चवन्‍नी कोई मुद्दा नहीं, विकास का मुद्दा होना चाहिए

    अखिलेश यादव वाले बयान पर जयंत ने यह भी कहा कि राजनीति मुद्दों पर की जाती है। अखिलेश को नसीहत देते हुए जयंत ने कहा कि चवन्‍नी कोई मुद्दा नहीं है। विकास का मुद्दा होना चाहिए। आज सहारनपुर से दिल्‍ली जाने में केवल डेढ़ घंटे लगते हैं। पहले छह घंटे लगा करते थे।

  • चंडीगढ़ में फिल्म शूटिंग होगी आसान, प्रशासन ने शुरू की सिंगल विंडो ऑनलाइन अनुमति; मेकर्स को आकर्षित करने की तैयारी

    चंडीगढ़ में फिल्म शूटिंग होगी आसान, प्रशासन ने शुरू की सिंगल विंडो ऑनलाइन अनुमति; मेकर्स को आकर्षित करने की तैयारी

    चंडीगढ़
     ‘सिटी ब्यूटीफुल’ अब सिर्फ फिल्मों के पर्दे पर नजर आने वाला शहर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माताओं के लिए शूटिंग का पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में प्रशासन कदम बढ़ा रहा है। यहां कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

    अब देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को चंडीगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए प्रशासन ने फिल्म शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने की प्रक्रिया को एक जगह लाया गया और बाद में इसे पूरी तरह ऑनलाइन भी कर दिया गया।

    प्रशासन की कोशिश अब केवल फिल्मों में चंडीगढ़ को दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चंडीगढ़ को खुद एक ‘फिल्मिंग डेस्टिनेशन’ और सिनेमाई पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की है।

    इसी प्रयास के तहत चंडीगढ़ टूरिज्म ने पहली बार पिछले सप्ताह श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अाफ जम्मू एंड कश्मीर -2026 में हिस्सा लिया और देश-दुनिया के फिल्म निर्माताओं के सामने शहर की फिल्म शूटिंग क्षमता और खूबसूरती को पेश किया।

    चंडीगढ़ में इन फिल्मों की हो चुकी शूटिंग
    क्रम     फिल्म का नाम
    1     धुरंधर
    2     इंडियन-2
    3     जट्ट एन जूलियट
    4     कैरी ऑन जट्टा
    5     द डिप्लोमैट
    6     सैम बहादुर
    7     शेरशाह
    8     फ्लाइंग जट्ट
    9     बेशरम
    10     निक्का जैलदार
    11     जर्सी
    12     लाल सिंह चड्ढा
    13     पिल
    14     दोस्ताना
    15     जीरो डार्क थर्टी

    2004 से फिल्म निर्माताओं के लिए आसान रास्ता
    प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का भी विशेष फोकस है चंडीगढ़ ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में दिखाई दे। चंडीगढ़ में फिल्म और टेलीविजन शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग का फिल्म फैसिलिटेशन सेल वर्ष 2004 से काम कर रहा है।

    पहले फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के लिए अलग-अलग विभागों से एनओसी लेनी पड़ती थी। इसे आसान बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने सिंगल विंडो व्यवस्था शुरू की, जिसके माध्यम से जरूरी अनुमतियां एक ही व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाने लगीं।

    इसके बाद शहर में हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों के साथ टीवी धारावाहिकों की शूटिंग में भी बढ़ोतरी हुई।1 अप्रैल 2022 से शूटिंग की अनुमति की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई।

    फिल्म निर्माता ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अनुमति प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ टूरिज्म की यह व्यवस्था शहर में ‘ईज ऑफ फिल्मिंग’ को मजबूत करने के साथ सिनेमाई पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश का अहम हिस्सा है।

    फिल्मों में चंडीगढ़ की अलग पहचान
    चंडीगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि एक ही शहर में आधुनिक वास्तुकला, सुनियोजित सेक्टर, चौड़ी सड़कें, हरियाली, विरासत स्थल, बाग और प्राकृतिक खूबसूरती के अलग-अलग दृश्य मिल जाते हैं।

    ली कार्बुजिए की वास्तुकला से लेकर सुखना झील, राॅक गार्डन, रोज गार्डन और कैपिटल कॉम्प्लेक्स तक शहर का हर हिस्सा कैमरे के लिए अलग पृष्ठभूमि उपलब्ध कराता है।

    चंडीगढ़ टूरिज्म ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जारी किए गए सिनेमैटिक टूरिज्म ब्रोशर में भी इन्हीं खूबियों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया। इसमें शहर की वास्तुकला, सुनियोजित शहरी ढांचे, सांस्कृतिक विरासत, बागों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को फिल्म शूटिंग के लिए संभावित लोकेशन के रूप में पेश किया गया है।

    पर्दे से पर्यटन तक का सफर
    प्रशासन अब फिल्मों में दिखाई देने वाली लोकेशनों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। जिस जगह को दर्शक फिल्म में देखते हैं, उसे वास्तविक जीवन में देखने के लिए पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इस तरह फिल्म शूटिंग से शहर को प्रचार मिलने के साथ होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार चंडीगढ़ की दस्तक
    7 से 10 सितंबर तक श्रीनगर, जम्मू और गुलमर्ग में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चंडीगढ़ की पहली भागीदारी इसी रणनीति का हिस्सा है। महोत्सव में 41 देशों की 135 फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

    चंडीगढ़ टूरिज्म ने यहां फिल्म निर्माताओं, प्रोडक्शन हाउस और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शहर में शूटिंग के लिए आमंत्रित किया। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव सैयद आबिद रशीद शाह का कहना है कि चंडीगढ़ की अलग पहचान और खूबसूरती को वैश्विक फिल्म समुदाय तक ले जाना उद्देश्य है।

    प्रशासन चाहता है कि फिल्म निर्माता चंडीगढ़ को केवल कहानी की पृष्ठभूमि के तौर पर नहीं, बल्कि फिल्म निर्माण और सिनेमाई पर्यटन के एक प्रमुख गंतव्य के रूप में देखें।यानी अब चंडीगढ़ की कहानी सिर्फ फिल्मों में नहीं होगी—प्रशासन चाहता है कि फिल्मों की अगली कहानी भी चंडीगढ़ में लिखी जाए।

  • स्कूलों में पढ़ाई से लेकर साफ-सफाई और इंटरनेट तक की जांच, बेहतर प्रदर्शन पर मिलेगा पुरस्कार

    स्कूलों में पढ़ाई से लेकर साफ-सफाई और इंटरनेट तक की जांच, बेहतर प्रदर्शन पर मिलेगा पुरस्कार

    रांची
    स्कूल प्रमाणीकरण कार्यक्रम के तहत इस बार 1,400 स्कूलों का मूल्यांकन किया गया है। इस क्रम में इन स्कूलों के 2.25 लाख बच्चों के शिक्षण स्तर का भी मूल्यांकन हुआ है। कार्यक्रम के तहत स्कूलों के नामांकन, प्रशिक्षण तथा मूल्यांकन का कार्य संपन्न हो चुका है। अब मूल्यांकन के बाद सामने आए तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

    इस आधार पर स्कूलों का प्रमाणीकरण होगा। प्रदर्शन के आधार पर स्कूलों को गोल्ड, सिल्वर तथा कांस्य श्रेणी में प्रमाणपत्र दिया जाएगा।झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, राज्य के सभी 24 ज़िलों के नामांकित 1,400 सरकारी स्कूलों का मूल्यांकन किया गया है।

    मूल्यांकन चरण पूरा होने के बाद कार्यक्रम अब अपने अगले चरण में जाएगा, जहां फ़ाइनल स्कोरिंग के लिए बच्चों के मूल्यांकन, स्कूल के माहौल, वहां उपलब्ध सुविधाएं और बच्चों तथा शिक्षकों की उपस्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के शिक्षण स्तर को बेहतर बनाना तथा नवाचार व बेहतर सुविधाओं के लिए विद्यालयों के बीच प्रतियोगिता को बढ़ाना है।

    अगले माह तक विद्यालयों के प्रमाणीकरण पूरा होने की संभावना है। बताते चलें कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष विद्यालयों का प्रमाणीकरण किया जाता है। बेहतर प्रदर्शन करनेवाले विद्यालयों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है, जिससे विद्यालयों की सुविधाएं और भी बेहतर की जाती हैं।

    गोल्ड श्रेणी प्राप्त करनेवाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाता है। स्कूलों के मूल्यांकन में वहां उपलब्ध सुविधाओं के अलावा साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल की स्थिति, बिजली, इंटरनेट, कंप्यूटर आदि की उपलब्धता, सामुदायिक सहभागिता तथा बच्चों के परिणाम को भी देखा जाता है।

  • नन्ही कल्पनाओं में सजेगा विकास का दशक, योगी सरकार में बच्चों को मिलेगा ‘मेरे सपनों का भारत’ का मंच

    नन्ही कल्पनाओं में सजेगा विकास का दशक, योगी सरकार में बच्चों को मिलेगा ‘मेरे सपनों का भारत’ का मंच

    लखनऊ

    योगी सरकार विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को देश की विकास यात्रा से जोड़ते हुए उन्हें अपने ‘सपनों के भारत’ को चित्र, पोस्टर और भाषण के माध्यम से अभिव्यक्त करने का मंच देने जा रही है। 11 सितंबर को बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्रियों की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने संबंधित अधिकारियों को ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के प्रभावी आयोजन के निर्देश दिए हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय स्तर से जिला स्तर तक प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनी आयोजित होंगी। 

    इस पहल के माध्यम से बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देने के साथ उन्हें देश की विकास यात्रा, उपलब्धियों और भविष्य की अपनी कल्पनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योगी सरकार की यह पहल विद्यालयों को प्रतिभा, कल्पना और राष्ट्र के भविष्य पर संवाद के जीवंत मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    चित्रों में दिखेगा विकास का दशक

    बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए 17 से 26 सितंबर 2026 तक ‘मेरे सपनों का भारत चित्र सेवा’ प्रतियोगिता आयोजित होगी। विद्यार्थी पिछले 10 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों को अपनी कल्पना और रचनात्मकता के रंगों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। विद्यालय स्तर पर अभिभावकों को भी आयोजन में आमंत्रित किया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय से श्रेष्ठ पांच विद्यार्थियों के चित्र एवं पोस्टर चयनित कर जिला स्तर की प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समन्वय करते हुए नोडल अधिकारी नामित करेंगे।

    जिला स्तर पर दिखेगी प्रतिभा

    जिला स्तर पर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसमें विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र, ट्रॉफी/मेडल और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए भी 17 से 26 सितंबर तक ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता होगी। जिन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 भी संचालित हैं, वहां चित्रकला एवं पोस्टर प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। सरकारी एवं निजी विद्यालयों में अधिकाधिक विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विद्यालय से जिला स्तर तक आयोजन

    जिला स्तरीय कार्यक्रम में कक्षा 6 से 8 के श्रेष्ठ पांच चित्रकार विद्यार्थियों तथा कक्षा 9 से 12 के चयनित विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां शामिल होंगी। माध्यमिक स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे और आयोजन के लिए समन्वय बैठकें कराई जाएंगी। प्रतियोगिताओं के लिए ड्राइंग शीट, रंग एवं अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था अनुमन्य समग्र शिक्षा मदों से की जाएगी।

  • सपा सरकार बनी तो किसानों को मिलेंगे बड़े फायदे, 24 घंटे में गन्ने का भुगतान और मुफ्त इलाज

    सपा सरकार बनी तो किसानों को मिलेंगे बड़े फायदे, 24 घंटे में गन्ने का भुगतान और मुफ्त इलाज

    लखनऊ

    अखिलेश यादव ने कहा कि सपा सरकार बनने पर किसानों को इलाज मुफ्त होगा। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर किसानों को गन्ना मूल्य 24 घंटे में भुगतान होगा।

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वादे पर वादे कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने अब किसानों से वादे किए हैं। सोमवार को अखिलेश यादव ने कहा कि कहा है कि सपा किसानों की अपनी पार्टी है। 2027 का विधानसभा चुनाव किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह चुनाव किसानों के भविष्य का चुनाव है।उन्होंने वादा किया कि सरकार बनने पर किसानों को गन्ना मूल्य 24 घंटे में भुगतान होगा। भरपूर बिजली दी जाएगी। खाद, बीज, पानी, सिंचाई की समुचित व्यवस्था होगी। किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसानों की फसलों का लाभकारी मूल्य दिया जाएगा। किसानों का इलाज मुफ्त होगा। उन्होंने कहा कि इथेनॉल का लाभ किसानों को मिलना चाहिए।

    समाजवादी पार्टी किसानों के साथ है

    अखिलेश से सोमवार को पार्टी मुख्यालय में पश्चिमी यूपी के किसानों और कई खापों के चौधरियों ने भेंट की। इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी मौजूद रहे। अखिलेश ने किसानों से बात करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी किसानों के साथ है। उन्होंने कहा कि किसान जब खाद मांगता है तो भाजपा सरकार लाठियां लेकर दौड़ाती है। भाजपा सरकार में किसानों की दुर्दशा हो गई। बिचौलिये हावी है। किसानों को फसलों का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। भाजपा सरकार ने दस वर्षों में किसानों को धोखा दिया है। किसानों को कभी समय पर खाद-बीज नहीं मिल पाया।

    किसानों के हित में फैसले लिए जाएंगे

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में प्राथमिकता से गांवों का विकास होगा। किसानों के हित में फैसले लिए जाएंगे। समाजवादी पार्टी के लिए किसान सर्वोपरि है। समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों में किसानों के हित में बड़े-बड़े फैसले लिए थे। किसानों ने कहा कि उन्हें अखिलेश यादव पर भरोसा है। अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में उन्होंने खेती का बजट बढ़ाया था। सभी खाप के प्रतिनिधि किसानों के संकल्प लिया कि वे 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बहुमत दिलाकर अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एकजुट प्रयास करेंगे। इस अवसर पर बुढ़ाना मुजफ्फरनगर के चौधरी विरेंद्र प्रधान ने अखिलेश को हल भेंट किया। बागपत के किसानों ने अपने हुक्का के साथ भेंट की।

    इससे पहले बीते दिनों अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा था कि सपा सरकार बनने पर आउसोर्सिंग व्यवस्था खत्म होगी और पक्की नौकरी मिलेगी। लोकसभा चुनाव में भले ही सपा सभी 80 सीटें जीत लें, फिर ईवीएम का विरोध करेंगे। यह पहला विधानसभा चुनाव होगा जिसकी घोषणा होते ही भाजपा हार मान लेगी। चुनाव की तारीख आते ही जनता अपना फैसला बता देगी। सरकार चाहे जितना पैसा खर्च करे, चाहे जितना अपना पॉलिटिकल मेकअप करा ले जनता इन्हें हटा देगी।

  • जनता दर्शन में योगी ने सुनीं फरियादें, बच्चों से मिले और भू-माफिया पर सख्ती के आदेश

    जनता दर्शन में योगी ने सुनीं फरियादें, बच्चों से मिले और भू-माफिया पर सख्ती के आदेश

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पीड़ितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि सरकार हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता और शीघ्रता से किया जाए। उन्होंने हर पात्र व्यक्ति को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने और जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    हर पीड़ित के पास चलकर पहुंचे सीएम
    मुख्यमंत्री ‘जनता दर्शन’ में कुर्सियों पर बैठे हर पीड़ित के पास खुद चलकर गए। उनकी समस्याओं व शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि हर पीड़ित की उचित समस्या का समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा।

    पुलिस से जुड़ीं शिकायतों पर सख्त हुए सीएम
    सीएम योगी आदित्यनाथ के समक्ष कुछ पीड़ितों ने पुलिस से जुड़ी अलग-अलग शिकायतें बताईं। इस पर सीएम सख्त हो गए। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त, एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसएसपी स्तर के अधिकारी ध्यान दें, किसी भी मामले में थाना, चौकी, बीट स्तर पर हीलाहवाली की शिकायत बर्दाश्त नहीं होगी। हर मामले में दोषियों पर नियमसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करें। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।

    बच्चों का हाल जाना और चॉकलेट दीं
    मुख्यमंत्री ने ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ आए नन्हे-मुन्नों का हालचाल जाना। उनकी पढ़ाई और उनकी रुचि के बारे में भी पूछा। सीएम ने बच्चों से कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ो और अन्य गतिविधियों (खेल, संगीत, कला आदि) में भी हिस्सा लो। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट देते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।

  • MLC चुनाव से पहले बिहार में गरमाई सियासत, RJD-NDA की तैयारी के बीच प्रशांत किशोर की एंट्री

    MLC चुनाव से पहले बिहार में गरमाई सियासत, RJD-NDA की तैयारी के बीच प्रशांत किशोर की एंट्री

    पटना
     Bihar MLC Election 2026: बिहार विधान परिषद की चार स्‍नातक और चार श‍िक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

    चुनाव भले आठ सीटों के लिए हो रहा है, लेक‍िन 30 ज‍िलों के मतदाता वि‍धान पर‍िषद सदस्‍य चुनने के लिए मतदान करेंगे। इन जिलों में करीब 150 विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

    वर्तमान विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में अगले चार सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने की संभावना है।
    प्रशांत क‍िशोर की एंट्री से रोचक मुकाबले के आसार

    इस चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बांकीपुर विधायक और जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर की सक्रियता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

    वहीं, राजद ने छह सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। राजद के इस कदम से महागठबंधन में सहयोगी कांग्रेस की नाराजगी की चर्चा भी तेज हो गई है।

    उधर, एनडीए के भीतर भी सब कुछ सहज नहीं दिख रहा है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन का एलान कर दिया है।
    किन आठ सीटों पर होना है चुनाव?

    शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
        पटना- प्रो. नवल किशोर यादव, भाजपा
        दरभंगा- डॉ. मदन मोहन झा, कांग्रेस
        सारण- आफाक अहमद, निर्दलीय
        तिरहुत- संजय कुमार सिंह, भाकपा

    स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
        पटना- नीरज कुमार, जदयू
        दरभंगा- सर्वेश कुमार, निर्दलीय
        कोसी- एनके यादव, भाजपा
        तिरहुत- बंशीधर व्रजवासी, निर्दलीय

    पटना से नीरज कुमार लगा चुके हैं हैट्रिक
    पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के नीरज कुमार का मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प रहने की उम्मीद है। नीरज कुमार लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं।

    वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने राजद के आजाद गांधी को हराया था। अब उनके सामने अपनी सीट बचाने के साथ जीत का सिलसिला कायम रखने की चुनौती होगी।

    पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना के अलावा नालंदा और नवादा जिले आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 25 विधानसभा क्षेत्र हैं।

    देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी तिरहुत सीट
    तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी काफी महत्वपूर्ण होगा। यह सीट देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी।

    वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव में निर्दलीय बंशीधर व्रजवासी ने जीत दर्ज की थी। अब उनके सामने दोबारा चुनाव जीतकर अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी।

    तिरहुत स्नातक क्षेत्र में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिले आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 28 विधानसभा क्षेत्र हैं।

    14 जिलों में फैला है कोसी निर्वाचन क्षेत्र
    कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का दायरा सबसे बड़ा है। इसमें सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, शेखपुरा, भागलपुर और बांका समेत 14 जिले शामिल हैं। यहां कुल 64 विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

    इस सीट से भाजपा के एनके यादव विधान पार्षद हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने राजद के नितेश कुमार को पराजित किया था। भाजपा के लिए इस सीट को बरकरार रखना चुनौती होगी, जबकि विपक्षी दल यहां सेंध लगाने की कोशिश करेंगे।

    दरभंगा में निर्दलीय सर्वेश कुमार के सामने चुनौती
    दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय सर्वेश कुमार वर्तमान विधान पार्षद हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में जदयू के दिलीप कुमार चौधरी को हराया था।

    इस क्षेत्र में दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले आते हैं। कुल 37 विधानसभा क्षेत्र इसके दायरे में हैं।

    यहां भी दलों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज कर चुके सर्वेश कुमार के सामने इस बार राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की चुनौती होगी

    शिक्षक सीटों पर भी दिलचस्प होगा मुकाबला  
    शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना की सीट पर प्रो. नवल किशोर यादव लंबे समय से भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। करीब तीन दशक से इस सीट पर भाजपा का प्रभाव रहा है

    दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा विधान पार्षद हैं। वहीं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय आफाक अहमद और तिरहुत से भाकपा के संजय कुमार सिंह वर्तमान सदस्य हैं।

    2020 में 25 सितंबर को घोषित हुआ था चुनाव कार्यक्रम
    वर्ष 2020 में इन विधान परिषद सीटों के चुनाव की घोषणा 25 सितंबर को की गई थी। 28 सितंबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और 5 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए गए थे।

    6 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच हुई थी, जबकि 8 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम तिथि थी। 22 अक्टूबर को मतदान हुआ और 12 नवंबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए गए थे।

  • वाराणसी में जलभराव पर योगी सरकार की सख्ती, लापरवाही पर अधिशासी अभियंता निलंबित

    वाराणसी में जलभराव पर योगी सरकार की सख्ती, लापरवाही पर अधिशासी अभियंता निलंबित

    लखनऊ
     योगी सरकार ने जनसमस्याओं के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाया है। वाराणसी में जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के निर्माण खंड (वि./यां.) में तैनात अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक जांच भी बैठाई गई है।

    नगर निकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), लखनऊ को इस प्रकरण में पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार ने इस कार्रवाई के जरिये स्पष्ट किया है कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को रोकने के लिए आवश्यक गेट/बैरियर लगाने संबंधी आकलन और कार्ययोजना तैयार नहीं की गई। इसके अलावा उच्चाधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि 3 और 4 सितंबर को चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन तथा गोईठहां एसटीपी पर स्थित पम्प बंद रखे गए।

    भारी बारिश के दौरान समय से पम्पों का संचालन नहीं होने से सीवर लाइनों पर अत्यधिक लोड पड़ा और शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और विभाग की छवि भी प्रभावित हुई। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने 12 और 13 सितंबर को वाराणसी दौरे के दौरान जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया था। उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी की व्यवस्था युद्धस्तर पर सुनिश्चित करने और आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने देने के निर्देश दिए थे।

    निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलभराव की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए लापरवाही करने वाले अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। फिलहाल शासन ने अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबन अवधि में मुख्य अभियंता (कानपुर क्षेत्र), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), कानपुर कार्यालय से संबद्ध किया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

  • फ्यूचर रेडी बार ही रखेगी फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव : सीएम योगी

    फ्यूचर रेडी बार ही रखेगी फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव : सीएम योगी

    लखनऊ

    इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नई पीढ़ी के अधिवक्ता संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी बनें और न्याय को जमीनी धरातल तक पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। फ्यूचर रेडी बार ही फ्यूचर रेडी जस्टिस सिस्टम की मजबूत नींव रख सकती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में सक्रिय सभी अधिवक्ताओं को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस सुविधा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के चैंबर में फर्नीचर व उपकरण के लिए शासन सहयोग करेगा और 400 राज्य विधि अधिकारियों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य विधि अधिकारियों की फीस में भी 50 फीसदी से अधिक वृद्धि की गई है।
    उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी पुलिस में 45 से 50 प्रतिशत पद खाली थे। व्यवस्था में पारदर्शिता-जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी चुनौती थे। वहीं अब पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 3,000 से बढ़ाकर 60,000 कार्मिक प्रतिवर्ष की गई है। पहले 10 जनपदों में जिला अदालतें अस्थायी व किराए के भवनों में चलती थीं और अधिवक्ताओं के चैंबर जर्जर थे। अब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चैंबर बनाए जा चुके हैं। उन्होंने अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि 1.5 लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये और अधिवक्ता के निधन पर परिजनों को आर्थिक सहायता की पात्रता आयु 60 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की घोषणा की है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंदी दिवस के साथ हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का भी अवसर है। उन्होंने आस्था की इस भूमि से प्रदेशवासियों को हिंदी दिवस, हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की हृदय से बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    स्वाधीनता आंदोलन से राष्ट्र निर्माण तक अधिवक्ता समाज की अहम भूमिका

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अधिवक्ता समाज देश के प्रबुद्ध समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह समाज की राय बनाने के साथ उसके विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। स्वाधीनता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण, स्वतंत्र भारत में शासन-प्रशासन के संचालन, लोकतंत्र के सभी स्तंभों को मजबूती देने और राष्ट्र निर्माण के वर्तमान अभियान तक अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत का स्वतंत्रता आंदोलन लंबे समय तक बिखरा रहा। दक्षिण अफ्रीका से अपनी वकालत छोड़कर महात्मा गांधी के आंदोलन की कमान संभालने के बाद इसे नई दिशा और गति मिली। प्रयागराज की धरती भी ऐसे अनेक अधिवक्ताओं की गवाह रही है, जिन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित मोतीलाल नेहरू और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे अधिवक्ताओं ने लंबे समय तक देश और स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी तथा क्रांतिकारियों के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी देश की आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयागराज से जुड़े जीवन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम तट पर स्थित प्रेसिडेंशियल सूट भारत की संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के प्रथम राष्ट्रपति की याद दिलाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रत्येक कुंभ के दौरान प्रयागराज आते थे और माघ मेले में कल्पवास करते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वयं सोमनाथ पहुंचे थे। राष्ट्र के प्रति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान और संविधान निर्माण से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित करने का निर्णय लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के तीनों प्रमुख स्तंभ अपनी-अपनी व्यवस्था के तहत काम करते हैं, लेकिन उनके बीच बेहतर समन्वय और संवाद लोकतंत्र को अधिक परिपक्व और मजबूत बनाता है। न्यायपालिका भी विधि के शासन और सुशासन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि न्याय के रथ के बार और बेंच दो महत्वपूर्ण पहिए हैं। दोनों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय हमेशा बना रहना चाहिए। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की बैठकों में केवल न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं की समस्याओं को भी समान महत्व दिया जाता है। मुख्य न्यायाधीश, न्यायपालिका के संरक्षक के रूप में, अधिवक्ताओं से जुड़े मुद्दों को भी शासन के सामने प्रभावी तरीके से रखते हैं और उनके समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास होता है।

    बार-बेंच के बीच सम्मान, संवाद और समन्वय जरूरी

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि न्याय प्रशासन के लिए बार और बेंच के बीच आपसी सम्मान, शिष्टाचार, संवाद, समन्वय और सहयोग निरंतर बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी 2017 से पहले की स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। उस समय चुनौती केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि व्यवस्था के दृष्टिकोण, प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही, कानून-व्यवस्था तथा न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भी थी। न्याय व्यवस्था की पहली कड़ी पुलिस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 56 जनपदों में सबसे ऊंची इमारतों में पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर, पुलिस बैरक या प्रशिक्षण संस्थान शामिल हैं। उन्होंने लखनऊ में 2017 में किए गए पुलिस बैरक के अचानक निरीक्षण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि वहां दो पुलिसकर्मी रह रहे थे और छत टूटी होने के साथ जाले लगे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों से दिन-रात, सर्दी-गर्मी और बरसात में रक्षक की भूमिका निभाने की अपेक्षा है, उन्हें बुनियादी सुविधाएं देना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों की स्थिति भी बेहद खराब थी। कई अदालतें अस्थायी और किराए के भवनों में संचालित होती थीं। सरकार ने प्रभावी विटनेस प्रोटेक्शन की व्यवस्था मजबूत की है। पहले गवाहों के डर के कारण मुकर जाने से गंभीर आपराधिक मामलों में सजा दिलाना चुनौती बन जाता था। अपराधियों को जेल से अदालत लाने के लिए पुराने और असुरक्षित वाहनों की जगह व्यवस्था को सुरक्षित बनाया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बेहतर समन्वय से व्यवस्था में रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्मेशन के परिणाम सामने आ रहे हैं। सुदृढ़ न्यायपालिका सुशासन की आधारशिला को मजबूत करती है और सुशासन चुनी हुई सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रॉसिक्यूशन कोऑर्डिनेशन से कन्विक्शन रेट में सुधार हुआ है। अभियोजन प्रणाली को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़कर समय पर चार्जशीट दाखिल करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखने की व्यवस्था की गई है। जिला अदालतों और जेलों को हाईस्पीड इंटरनेट व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जोड़ा गया है। न्याय श्रुति प्रणाली के माध्यम से अदालतों में गवाही वर्चुअल दर्ज कराने की शुरुआत हुई है। अदालती दस्तावेजों की स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन में भी तेजी लाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 जनपदों में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इसके लिए मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के प्रयासों की सराहना की। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे सभी न्यायिक कार्यों के साथ न्यायिक अधिकारियों के आवास, अधिवक्ताओं के चेंबर, स्पोर्ट्स और इंडोर स्टेडियम तथा अधिवक्ताओं के लिए सस्ती कैंटीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
    उन्होंने बताया कि त्वरित न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को बढ़ाया गया है और प्रथम चरण में 900 जनपदीय स्तर के न्यायालयों के गठन की मंजूरी दी गई है।

    700 करोड़ से बने अधिवक्ता चेंबर 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 से अधिक अधिवक्ताओं के लिए एडवोकेट चेंबर बनाए जा चुके हैं। इसके साथ मल्टीलेवल पार्किंग, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। जनपदीय स्तर पर भी एडवोकेट चेंबर के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। कौशांबी, लखनऊ, कासगंज, श्रावस्ती समेत करीब एक दर्जन जनपदों में अधिवक्ताओं के चेंबर बनाए जा चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।

    न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में तीन नए कानून लागू हुए हैं।  इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिवक्ताओं को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की चुनौती थी, लेकिन बार ने जिस तेजी से नए कानूनों को अपनाया, वह सराहनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत आम आदमी का विश्वास है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका तभी लोकतंत्र की कसौटी पर खरी उतरती हैं, जब नागरिकों का विश्वास कायम रहे। इसके लिए समय पर न्याय सबसे महत्वपूर्ण है। नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई, भेदभाव रहित व्यवहार और कानून की नजर में समानता का भरोसा होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि संवेदनशील और सशक्त न्याय व्यवस्था के लिए पारदर्शिता, निर्णयों में सत्यनिष्ठा, संस्थाओं में जवाबदेही और नागरिकों का विश्वास जरूरी है। बदलते दौर में कानून के सामने साइबर क्राइम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा प्राइवेसी, डिजिटल कॉमर्स, फिनटेक, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और क्लाइमेट लिटिगेशन जैसी नई चुनौतियां और संभावनाएं सामने हैं। अधिवक्ताओं को टेक्नोलॉजी, बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हो रहे परिवर्तनों की गहरी समझ विकसित करनी होगी। 

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं की है। युवा अधिवक्ता केवल सफल लीगल प्रोफेशनल बनने तक सीमित न रहें, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के प्रहरी और समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता की जिम्मेदारी केवल मुकदमे के परिणाम तक सीमित नहीं है। उसके प्रयास किसी व्यक्ति के विश्वास और जीवन की दिशा बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    चैंबर में सुविधाओं के लिए सरकार देगी पूरा सहयोग

    सीएम योगी ने इस दौरान अधिवक्ता भवन की चाबी भी सौंपी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट परिसर में 10 हजार से अधिक अधिवक्ताओं के लिए मल्टीलेवल पार्किंग और चैंबर बनाए गए हैं। चैंबर में फर्नीचर और आवश्यक उपकरणों जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए न्यायपालिका या बार एसोसिएशन के माध्यम से मुख्य न्यायमूर्ति की ओर से जो प्रस्ताव आएगा, राज्य सरकार उसमें हर प्रकार का सहयोग करेगी।

    निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं : केशव मौर्य

    उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रयागराज संगम के साथ न्याय की भी भूमि है और यहां के अधिवक्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है। अधिवक्ताओं और सरकार के बीच संबंध लोगों को न्याय दिलाने की साझा जिम्मेदारी से जुड़े हैं। आज ईज ऑफ जस्टिस को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पुराने औपनिवेशिक कानून बदले गए हैं। आज अपराधी कानून से डरता है और आम आदमी का कानून पर भरोसा बढ़ा है। सरकार की नीति साफ है कि निर्दोष को छेड़ेंगे नहीं और अपराधी को छोड़ेंगे नहीं।
     
    समारोह में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, वरिष्ठ न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महाधिवक्ता अजय मिश्रा, इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे, महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।

  • सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश किए गए सुपुर्द

    सीएम सहभागिता योजना के तहत 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश किए गए सुपुर्द

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण के साथ ही उनके बेहतर पालन-पोषण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में सीएम सहभागिता योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को इच्छुक एवं पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द कर उनका संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित किया जा रहा है।
    अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं बेहतर आश्रय उपलब्ध हुआ है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को गोवंश के पालन-पोषण से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की समस्या को कम करने के साथ-साथ गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को जनसहभागिता से प्रभावी बनाया जा रहा है। सीएम सहभागिता योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा सुपुर्द किए गए गोवंश की देखभाल, चारा-पानी एवं संरक्षण की जिम्मेदारी ली जाती है। इससे गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिलता है और पशुपालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करने में मदद मिलती है।
    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक एवं गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के 62 जनपदों में कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता गोचर भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसका उपयोग गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुनिश्चित करना है। इससे निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था को और मजबूती मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा।