Category: राज्य

  • बुनकरों के हुनर को मिलेगा सरकारी बाजार, अस्पतालों में गूंजेगी हथकरघे की पहचान

    बुनकरों के हुनर को मिलेगा सरकारी बाजार, अस्पतालों में गूंजेगी हथकरघे की पहचान

    लखनऊ
     प्रदेश की योगी सरकार हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और बुनकरों को उनके उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। अब सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले हथकरघा निर्मित उत्पादों की खरीद के जरिए प्रदेश के बुनकरों को बड़ा और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे सरकारी संस्थानों की जरूरतें पूरी होने के साथ बुनकर परिवारों को नियमित रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलने का रास्ता तैयार होगा।

    मंगलवार को खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, तिलक मार्ग, डालीबाग स्थित सभाकक्ष में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग में प्रयुक्त होने वाले हथकरघा उत्पादों की खरीद एवं आपूर्ति व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में सरकारी चिकित्सा संस्थानों में हथकरघा निर्मित बेडशीट और गॉज बैंडेज की खरीद एवं आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    सरकारी खरीद से बुनकरों को मिलेगा बड़ा बाजार
    मंत्री राकेश सचान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपूर्ति व्यवस्था को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। सरकार का उद्देश्य सरकारी खरीद को केवल सामान की खरीद तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से बुनकर परिवारों को निरंतर रोजगार, स्थायी बाजार और आर्थिक मजबूती देना है। सरकारी संस्थानों में स्थानीय बुनकरों द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीद बढ़ने से बुनकरी क्षेत्र को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम लिमिटेड के माध्यम से सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में आवश्यकतानुसार बेडशीट, तकिया कवर और गॉज बैंडेज क्लॉथ की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश के बुनकरों और बुनकर सहकारी समितियों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कराया जाएगा।

    गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति पर जोर
    मंत्री ने निर्देश दिए कि चिकित्सा संस्थानों को उपलब्ध कराए जाने वाले उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले होने चाहिए। इसके साथ ही प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप देने और आवश्यक दिशा-निर्देश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल सागर, विशेष सचिव शेषमणि पांडेय, संयुक्त आयुक्त पीसी ठाकुर सहित चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • UCC पर घमासान के बीच RJD का नीतीश को ऑफर, JDU ने किया साफ इनकार

    UCC पर घमासान के बीच RJD का नीतीश को ऑफर, JDU ने किया साफ इनकार

    पटना
    नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से गठबंधन सरकार बनाने का न्योता मिला है। राजद के वरीय नेता एवं विधायक भाई वीरेंद्र ने जदयू से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर नीतीश पहले ही स्टैंड ले चुके हैं। जदयू और राजद समाजवादी दल हैं, इनकी राजनीति एक ही है। इसलिए भाजपा का साथ छोड़कर जदयू को राजद के साथ आना चाहिए और बिहार में नई सरकार बनानी चाहिए।

    भाई वीरेंद्र ने मंगलवार को जारी बयान में आरोप लगाया कि एनडीए सरकार 'नागपुर' से चल रही है। उन्होंने कहा, "यह बिहार है। यहां नागपुर का नहीं चलेगा। बिहार में यूसीसी लागू नहीं करने देंगे। नीतीश कुमार भी स्टैंड ले चुके हैं। उनसे कहेंगे कि वैसे लोगों (भाजपा) को छोड़िए, इधर आइए और हम मिलकर सरकार बनाएं। भाजपा को लात मारकर आएं।

    बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देंगे- वीरेंद्र
    यूसीसी का विरोध करते हुए राजद विधायक ने कहा कि यूसीसी को बिल्कुल भी लागू नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है। सभी धर्मों को मानने का अधिकार मिला हुआ है। संविधान में भी इसका उल्लेख है।

    समाजवाद का हवाला
    भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ कुछ ऐसे लोग लगे हैं, जिन्होंने उन्हें बर्बाद कर दी दिया और आगे और बर्बाद कर देंगे। उन्होंने नीतीश से कहा, “हम सामाजिक न्याय के लोग हैं, जिस राजनीति में आप हैं, उसमें हम भी हैं। आप हमारे साथ आइए और भाजपा को लात मारिए।”

    जदयू ने ठुकराया राजद का ऑफर
    दूसरी ओर, जदयू ने राजद का ऑफर ठुकरा दिया है। बिहार के डिप्टी सीएम और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने राजद विधायक भाई वीरेंद्र के प्रस्ताव पर पलटवार भी किया है। उन्होंने कहा कि हम लोग राजद के सुझावों पर नहीं चलते हैं। राजद क्या चाहती है, उससे हमें कोई मतलब नहीं है। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि जदयू को सिर्फ हमारी सोच और हमारे गठबंधन के दलों की सोच से मतलब है।

    दो बार राजद के साथ बिहार में सरकार बना चुकी है जदयू
    जदयू और राजद के बीच पहले भी दो बार गठबंधन हो चुका है। पहली बार 2015 से 2017 के बीच राजद, जदयू और कांग्रेस के महागठबंधन वाली सरकार रही थी। इसके बाद, फिर से अगस्त 2022 से जनवरी 2024 के बीच दोनों दलों के गठबंधन की सरकार बिहार में रही। महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम रहे थे। इसके बाद जदयू ने महागठबंधन का साथ छोड़ एनडीए में वापसी कर ली थी।

    यूसीसी पर जदयू का सस्पेंस
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी कानून लागू करने के ऐलान के बाद एनडीए में घमासान तेज है। नीतीश की पार्टी ने फिलहाल इस पर खुलकर समर्थन नहीं दिया है और ना ही विरोध किया है। जदयू ने सस्पेंस बनाते हुए ड्राफ्ट आने के बाद

    जदयू के पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने एक दिन पहले बिहार में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कह दी थी। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। इसके बाद डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि यूसीसी का ड्राफ्ट में प्रावधानों को देखने के बाद ही जदयू इस पर विचार-विमर्श करेगी।

    बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति-
    एनडीए के पास कुल 201 विधायक
        भाजपा- 88
        जदयू- 85
        लोजपा आर- 19
        हम- 5
        रालोमो- 4

    महागठबंधन में कुल 35 विधायक
        राजद- 25
        कांग्रेस- 6
        सीपीआई माले- 2
        सीपीआई- 1
        आईआईपी- 1

    अन्य 7 विधायक
        AIMIM- 5
        बसपा- 1
        जन सुराज-1

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रामजल सेतु लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के जरिए जल सुरक्षा की दिशा में पहल

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में रामजल सेतु लिंक परियोजना जैसी योजनाओं के जरिए जल सुरक्षा की दिशा में पहल

    जयपुर
     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी भारत की वर्षों से लंबित जल परियोजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होने जा रही हैं। इस दिशा में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए 6 राज्यों के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। किशाऊ परियोजना से प्राप्त जल शेखावाटी के जल की दृष्टि से अभावग्रस्त रहे क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी आर पाटिल की मौजदगी में हुए इस एमओयू पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किये।

    किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। करीब 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा तथा इससे राजस्थान सहित उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे।

    परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा सहायता के रूप में वहन की जाएगी और शेष 10 प्रतिशत भागीदार राज्यों द्वारा दिया जाएगा।

    किशाऊ बांध परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजनाओं की सूची में शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत होगी।

    शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
    किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के अंतर्गत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनंू और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल तथा अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    यह परियोजना शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य मानकों में सुधार की आधारभूमि भी तैयार करेगी। पर्याप्त और नियमित जल उपलब्धता से क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी तथा लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    यमुना जल समझौते से किशाऊ तक, एक व्यापक जल दृष्टि
    प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र के लिए इस उपलब्धि के तहत दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यमुना जल समझौते के तहत सीकर, चूरू, झुंझुनूं और अन्य क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी राजस्थान लाने हेतु संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी है।

    अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस पूरी जल व्यवस्था को और मजबूत आधार मिलेगा। परियोजना से उपलब्ध जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य हितकारी उपयोगों के लिए किया जा सकेगा।

    राजस्थान के हितों का विशेष ध्यान
    संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से संबंधित लागत वहन किए जाने के बदले किशाऊ परियोजना के उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा, जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए रखेगा। इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75ः25 के अनुपात में होगी।

    शेखावाटी में विकास का नया अध्याय
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से शेखावाटी अब जल उपलब्धता के साथ ही कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण और हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
    क्षेत्र में यमुना जल समझौता, ऐतिहासिक हवेलियों एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयास, एक्सप्रेस-वे और हाईवे परियोजनाएं, तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाएं शेखावाटी को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    इन परियोजनाओं का समन्वित प्रभाव शेखावाटी की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। बेहतर जल उपलब्धता के साथ बेहतर सड़क और हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण से रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे शेखावाटी के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

    32 वर्षों से लंबित जल हिस्से की दिशा में निर्णायक पहल
    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल अभावग्रस्त राजस्थान में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेयजल व सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।

    वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच संपन्न यमुना जल समझौते के तहत ताजेवाला हेड से मानसून अवधि में राजस्थान के लिए 1917 क्यूसेक (577 एमसीएम) जल आवंटित किया गया था। जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान को पिछले 32 वर्षों से अपने हिस्से का पानी प्राप्त नहीं हो पा रहा था।

  • यूपी की स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को बड़ा प्लेटफॉर्म, ONDC, Amazon-Flipkart समेत कई बाजारों से जुड़ेंगे उत्पाद

    यूपी की स्वयं सहायता समूहों की दीदियों को बड़ा प्लेटफॉर्म, ONDC, Amazon-Flipkart समेत कई बाजारों से जुड़ेंगे उत्पाद

    अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी यूपी की दीदियां

    अब गांव से दुनिया के बाजार तक पहुंचेंगे तीन हजार से अधिक उत्पाद

    ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट के जरिए मंगा सकेंगे स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद

    योगी सरकार में दीदियों को अब मिलेगी ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत

    543 प्रेरणा सरस स्टोर और स्थानीय उत्पादों के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म तैयार

    लखनऊ
     प्रदेश की महिलाएं अब ग्लोबल मार्केट में दिग्गज कंपनियों को टक्कर देंगी। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर स्थापित किए गए हैं। वहीं 3,000 से अधिक उत्पादों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को ब्रांडिंग, बिक्री और डिजिटल बाजार की ताकत देने का रास्ता खुला है।

    अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद ओएनडीसी, ई-सरस, प्रेरणा मार्ट, मीशो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजार तक पहुंच सकेंगे। जनपद और ब्लॉक स्तर पर स्थापित प्रेरणा सरस स्टोर जहां स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित बिक्री मंच दे रहे हैं, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म उनकी पहुंच गांव और जिले से बाहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं।

    छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा : अरुण कुमार

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए उत्पादन के बाद बाजार तक पहुंच उनकी उद्यमिता की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। योगी सरकार ने इस कड़ी को मजबूत करने के लिए स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बिक्री का नेटवर्क तैयार किया है। इससे समूहों को केवल उत्पाद तैयार करने के बजाय बाजार की मांग समझकर अपने छोटे उद्यमों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव बढ़ने से ग्रामीण महिलाओं के छोटे उद्यमों को विस्तार का अवसर मिल रहा है।

    स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा

    डिजिटल बाजार की दिशा में बिजनौर राज्य एग्रीगेशन सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन विपणन कार्य शुरू किया जा चुका है। अलग-अलग समूहों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उनकी बिक्री और बाजार तक पहुंच को व्यवस्थित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को दूर बैठे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। खासकर किसी जिले या क्षेत्र विशेष की पहचान वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में यह व्यवस्था मददगार होगी।

    बाजार से जुड़ाव से बनेगी ब्रांड वैल्यू

    स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बाजार तक पहुंच सिर्फ बिक्री बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि उत्पाद की पहचान और ब्रांड वैल्यू बनाने का अवसर भी है। प्रेरणा सरस स्टोर और ऑनलाइन-ऑफलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादन से आगे बढ़कर ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, बाजार से जुड़ाव महिलाओं को अपने उत्पादों की मांग समझने और उसी के अनुरूप उत्पादन व विपणन की दिशा तय करने का अवसर देता है। इससे समूहों की गतिविधियां केवल आजीविका तक सीमित न रहकर छोटे उद्यमों का रूप ले सकती हैं।

    लोकल हुनर की ग्लोबल उड़ान

    3,000 से अधिक उत्पादों के लिए 543 प्रेरणा सरस स्टोर, मार्केटिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन विपणन ग्रामीण महिला उद्यमिता के बदलते स्वरूप की तस्वीर पेश करते हैं। गांव में तैयार उत्पाद अब गांव में ही बिकने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्टोर से डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की ग्रामीण ‘दीदियों’ के स्थानीय हुनर को बाजार, पहचान और ब्रांड वैल्यू देने के साथ उन्हें लोकल से ग्लोबल कारोबार की दिशा में आगे बढ़ाने का नया रास्ता तैयार कर रही है।

  • एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ और सेटलमेंट के लंबित मामलों पर भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

    एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ और सेटलमेंट के लंबित मामलों पर भारी उद्योग मंत्रालय ने प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट

     रांची
    झारखंड के युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र रहे एचईसी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एचटीआई) को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। एचईसी प्रबंधन ने संस्थान को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

    इसके तहत एचटीआई के भवन और संस्थान को निजी एजेंसी को देने पर विचार किया जा रहा है, ताकि यहां दोबारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण शुरू कराया जा सके। प्रस्ताव को एचईसी बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के समक्ष अगली बैठक में रखा जाएगा।

    बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद एचईसी प्रबंधन नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल ट्रेनिंग (एनसीवीटी) से एचटीआई की संबद्धता फिर से बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। संबद्धता मिलने के बाद संस्थान को नए स्वरूप में संचालित करने के लिए एजेंसी का चयन किया जायेगा। इससे लंबे समय से बंद पड़े एचटीआई में फिर से तकनीकी प्रशिक्षण की राह खुल सकती है।

    युवाओं को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में
    एचटीआई के दोबारा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ झारखंड के युवाओं को मिलेगा। फिलहाल औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए राज्य के कई युवाओं को दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करना पड़ता है। एचटीआई में प्रशिक्षण शुरू होने पर उन्हें अपने ही राज्य में रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी।

    प्रबंधन का मानना है कि संस्थान को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित कर कुशल तकनीशियन तैयार किए जा सकते हैं। इससे युवाओं के लिए एचईसी समेत राज्य और देश की औद्योगिक कंपनियों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को निजी उद्योगों, मैन्यूफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवा क्षेत्रों में भी काम मिल सकता है।

    पांच ट्रेड में हर साल 200 युवाओं को मिलता था प्रशिक्षण
    एचटीआई में पहले आईटीआई के तहत इलेक्ट्रिशियन, फीटर, मशीनिस्ट, कोपा और वेल्डर ट्रेड संचालित होते थे। इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट दो वर्षीय, जबकि कोपा और वेल्डर एक वर्षीय ट्रेड थे। दो शिफ्ट में संचालित प्रशिक्षण में पांचों ट्रेडों में हर वर्ष करीब 200 युवाओं का नामांकन होता था।

    यहां प्रशिक्षण लेने वाले कई युवा एचईसी के अलावा देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में काम कर रहे हैं। कुछ प्रशिक्षुओं के विदेशों में काम करने की भी जानकारी है। ऐसे में संस्थान के पुन: शुरू होने से राज्य में तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    2022-23 से बंद है नया नामांकन
    एचईसी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में एचटीआई का संचालन प्रभावित हुआ। वर्ष 2022-23 से यहां नए विद्यार्थियों का नामांकन बंद हो गया। इसके बाद एनसीवीटी ने पहले कोपा और वेल्डर ट्रेड की संबद्धता समाप्त की।

    बाद में इलेक्ट्रिशियन, फीटर और मशीनिस्ट ट्रेड भी डिफिलिएट हो गए। इस तरह सभी पांच ट्रेड बंद हो गए। वर्तमान में संस्थान में केवल दो कर्मचारी कार्यालय और अभिलेखों की देखरेख के लिए तैनात हैं।

    150 से अधिक मशीनें, चोरी से बढ़ी चिंता
    लंबे समय से बंद संस्थान में उपकरणों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। कर्मचारियों के अनुसार परिसर से कई उपकरण चोरी हो चुके हैं। संस्थान का ट्रांसफार्मर तक गायब हो गया है। मशीनों के मोटर और अन्य उपकरणों के साथ लेथ मशीनों के पुर्जे भी चोरी होने की बात सामने आई है।

    एचटीआई में 150 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें हैं। ऐसे में प्रबंधन के सामने संस्थान को दोबारा शुरू करने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना भी जरूरी होगा। प्रस्तावित निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन शुरू होने पर संस्थान की मशीनों और आधारभूत संरचना का उपयोग फिर से प्रशिक्षण के लिए किया जा सकेगा।
    एचईसी कर्मचारियों के वीपीएफ भुगतान व सेटलमेंट का मामला मंत्रालय पहुंचा

    एचईसी कर्मचारियों के वालंटरी प्रोविडेंट फंड (वीपीएफ) अंशदान की वापसी और उससे जुड़े सेटलमेंट का मामला अब भारी उद्योग मंत्रालय तक पहुंच गया है। मंत्रालय के सीपीएसई-एचईसी से संबंधित अनुभाग ने इस मामले में एचईसी के सीएमडी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

    मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में एचईसी कर्मचारी व श्रमिक नेता लालदेव सिंह की ओर से भेजे गए छह सितंबर के ई-मेल का उल्लेख किया गया है। ई-मेल में वीपीएफ अंशदान की वापसी तथा कर्मचारियों से संबंधित सेटलमेंट के मुद्दे उठाए गए हैं।

    मंत्रालय ने संबंधित ई-मेल को एचईसी प्रबंधन को अग्रसारित करते हुए मामले में अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पत्र की प्रति एचईसी के उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) को भी भेजी गई है। इससे कर्मचारियों के वीपीएफ से जुड़े लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न वित्तीय देनदारियों और सुविधाओं को लेकर समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में मंत्रालय की ओर से पत्र भेजे जाने को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब एचईसी प्रबंधन द्वारा मामले की जांच कर वीपीएफ अंशदान की वापसी और संबंधित सेटलमेंट पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर कर्मचारियों की नजर है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की कमी को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रबंधन की लापरवाही पर जताया आक्रोश

    ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की कमी को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रबंधन की लापरवाही पर जताया आक्रोश

    लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बिजली बिलों के बकाएदार हैं। मध्यांचल विद्युत निगम के अंतर्गत आने वाले जिलों में तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। निगम की सितम्बर 2026 में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि करीब 15.65 लाख उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन लेने के बाद से आज तक एक बार भी बिल जमा नहीं किया है। इन बकायेदारों में छह माह से लेकर 10 साल तक पुराने उपभोक्ता शामिल हैं, जिन पर 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का भारी-भरकम बकाया है। अब इनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। कुर्की तक की कार्रवाई की जाएगी।

    विभाग की नौ सितम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक जानकीपुरम 661, गोमतीनगर 145, अमौसी 8342, लखनऊ सेंट्रल जोन 40, सीतापुर जोन 3,35,962, रायबरेली जोन 1,12,073, अयोध्या जोन 3,66,298, देवीपाटन जोन 3,78,204, बरेली-एक जोन 1,14,749 और बरेली-दो जोन 2,48,726 है। यानि 15,65,200 बकायेदार है। विभाग द्वारा कई बकायेदारों को कुर्की के नोटिस जारी किये जा चुके हैं, फिर भी न तो उनसे वसूली हो सकी है और न ही उनके बिजली कनेक्शन काटे गए हैं।

    विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण निगम को अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एमडी ने सभी संबंधित एक्सईएन और एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे डिफाल्टरों के खिलाफ तत्काल अभियान चलाकर वसूली की जाए। यदि बकाया राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके कनेक्शन काटने के साथ-साथ कुर्की की विधिक कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।

    बिजली संकट को लेकर उपभोक्ता परिषद आक्रोशित
    वहीं, कोयले की कमी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पहले से तैयारियों में बरती गई लापरवाही बताया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हर साल सितंबर में बारिश और जलभराव जैसी स्थिति होती है। हालांकि, दिक्कत इस बार केवल इसलिए हुई क्योंकि पावर कॉरपोरेशन ने अपनी तैयारियां पूरी नहीं रखी थीं।

    उन्होंने कहा कि यूपी में 2000 से 3000 मेगावॉट बिजली की कमी पहले ही बनी हुई थी, लेकिन सोमवार को यूपीएसएलडीसी के आंकड़ों के मुताबिक लंबे समय के लिए बंद हुईं और मशीनों की वजह से यह कमी 5340 मेगावॉट हो गई है। ओबरा-सी की यूनिट-1 व यूनिट-2, मेजा यूनिट-1 और हरदुआगंज की यूनिट-9 से उत्पादन नहीं हो रहा है।

    इसके अलावा रोजा यूनिट-2, अनपरा यूनिट-7, घाटमपुर यूनिट-1, हरदुआगंज एक्सटेंशन-2 की यूनिट-1 और जवाहरपुर यूनिट-2 भी बंद है। यह कोयले की उपलब्धता में कमी के बजाय प्रबंधन में की गई चूक का नतीजा है। सितंबर 2025 में प्रदेश ने 30,255 मेगावॉट अधिकतम बिजली आपूर्ति की गई थी, जबकि इस साल सितंबर में आपूर्ति करीब 25,000-26,000 मेगावॉट के आसपास बनी है, जबकि जरूरत 27,000-29,000 मेगावॉट है।

  • जलभराव को लेकर योगी सरकार सख्त, नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

    जलभराव को लेकर योगी सरकार सख्त, नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश

    लखनऊ
     उत्तर प्रदेश में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से आमजन को राहत दिलाने के लिए योगी सरकार ने नगरीय निकायों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी और संवेदनशील इलाकों में पहले से आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मंत्री ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि वाराणसी सहित प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में जल निकासी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र को चिन्हित कर वहां नालों, सीवर लाइनों और पम्पिंग स्टेशनों की स्थिति की पहले से समीक्षा की जाए। जहां कहीं भी जल निकासी की व्यवस्था में कमी दिखाई दे, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। अधिकारी संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में पहले से आवश्यक तैयारियां पूरी रखें।

    नगर विकास मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की ओर से अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन और दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में कार्यों के क्रियान्वयन में लापरवाही या उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी स्वीकार नहीं होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर, सुगम और सुरक्षित नगरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    एके शर्मा ने कहा कि वाराणसी जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर में जल निकासी, सीवर और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। जलभराव के तत्काल समाधान के साथ इसके स्थायी निराकरण के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। योगी सरकार की प्राथमिकता आमजन को राहत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। वाराणसी में हुई कार्रवाई इसी जवाबदेही का संदेश है कि जनहित के कार्यों में जिम्मेदारी से समझौता करने वालों के खिलाफ शासन सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

  • रांची में नामकुम स्टेशन के पास बनने वाले हवा महल पंडाल और चार दिवसीय भंडारे की तैयारियां शुरू

    रांची में नामकुम स्टेशन के पास बनने वाले हवा महल पंडाल और चार दिवसीय भंडारे की तैयारियां शुरू

    रांची
     दुर्गापूजा को लेकर राजधानी में तैयारियां शुरू हो गई हैं। नामकुम स्टेशन के समीप जय माता दी क्लब की ओर से इस वर्ष आकर्षक और भव्य पूजा पंडाल का निर्माण कराया जाएगा।

    खास बात यह होगी कि इस बार पंडाल जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। पंडाल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।

    क्लब के अध्यक्ष विनोद सिंह ने बताया कि इस वर्ष दुर्गापूजा के लिए पंडाल को भव्य रूप देने की तैयारी है। जयपुर के हवा महल की तर्ज पर बनने वाले पंडाल की चौड़ाई करीब 70 फीट और ऊंचाई 55 फीट होगी।

    पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है।

    बिना चंदा होगी पूजा, नहीं लिया जाएगा एक रुपया
    क्लब की ओर से इस वर्ष पूजा आयोजन के लिए किसी भी व्यक्ति से चंदा नहीं लिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह पूजा रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में अपने तरह की विशेष पूजा होगी, जहां चंदा नहीं लिया जाता है।

    इसके लिए पूजा समिति की ओर से पंडाल परिसर में एक दान पेटी रखी जाएगी। श्रद्धालु अपनी इच्छा के अनुसार इसमें सहयोग राशि डाल सकेंगे। वहीं दान पेटी में जमा होने वाली पूरी राशि का उपयोग किसी जरूरतमंद और गरीब परिवार की बेटी की शादी में सहयोग के लिए किया जाएगा।

    क्लब का उद्देश्य पूजा के साथ सामाजिक सेवा को भी बढ़ावा देना है। पूजा के दौरान लगातार चार दिनों तक भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा।

    18 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान
    जय माता दी क्लब की ओर से दुर्गापूजा आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। पंडाल, विद्युत सज्जा, पूजा और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर इस बार करीब 18 से 20 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

    आयोजकों के अनुसार पूजा को भव्य बनाने के साथ सामाजिक सरोकार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं पूजा समिति की ओर से सुरक्षा को लेकर सीसीटीवी कैमरा व सुरक्षा दल का गठन किया गया है। यह सुरक्षा दल 24 घंटे मां भवानी के भक्तों की सेवा में तत्पर रहेंगे।

        प्रत्येक साल नामकुम स्टेशन का पूजा पंडाल सबसे चर्चित पूजा पंडालों में एक होता है। हर बार श्रद्धालुओं के लिए खास होता है। इस बार 4 दिनों तक भंडारा का आयोजन किया जाएगा। भंडारे के माध्यम से जरूरतमंदों तक मां का प्रसाद पहुंचाने का प्रयास होगा। मां से मांगी गई मुराद हर साल पुरी होती है, इसे लिए यह पंडाल मां भवानी को समार्पित होगा। – विनोद सिंह, अध्यक्ष, जय माता दी क्लब, नामकुम स्टेशन

     

  • राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य निर्धारित कानूनी समय-सीमा के तहत आगामी 15 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी

    राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य निर्धारित कानूनी समय-सीमा के तहत आगामी 15 नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी

    जयपुर
    निर्वाचन आयोग को इस कार्यक्रम में बदलाव करने के संबंध में सुझाव दिया था, जिसपर आयोग आने बदलाव करने का फैसला लिया है।

    पंचायती राज विभाग की ओर से राज्य निर्वाचन आयोग को अवगत कराया गया था कि शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी निकाली जाए।

    गौरतलब है कि ग्रामीण राजस्थान के सियासी गलियारों में पंचायती राज चुनावों को लेकर काफी लंबे समय से सरगर्मी बनी हुई है। तय शेड्यूल के मुताबिक 17 सितंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए और 18 सितंबर को ग्राम पंचायतों के सरपंच व वार्ड पंचों के लिए जिला मुख्यालयों पर पारदर्शी लॉटरी प्रणाली से आरक्षण तय किया जाना था।

    आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद ही चुनाव लड़ने के इच्छुक ग्रामीण नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी दावेदारी पक्की करने वाले थे। लेकिन अब इस पूरी प्रक्रिया के टलने से चुनाव लड़ने का इंतजार कर रहे प्रत्याशियों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। जल्द ही नई तिथियों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।

    समझिए मुख्य वजह
    पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी की तारीखें आगे बढ़ाने के पीछे सबसे मुख्य कारण शहरी निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चल रही चुनाव प्रक्रिया है:

    17 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 17 सितंबर 2026 को शहरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष (मेयर/सभापति/अध्यक्ष) पद के नामांकन पत्रों की संवीक्षा का महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य होना तय है।

    18 सितंबर का निकाय शेड्यूल: 18 सितंबर 2026 को प्रत्याशियों द्वारा नाम वापसी और अंतिम उम्मीदवारों को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाना है।

    प्रशासनिक अमले की व्यस्तता: जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDO), तहसीलदार और पुलिस महकमा पूरी तरह से निकाय चुनाव की व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेगा। एक ही समय पर निकाय चुनाव और पंचायती राज लॉटरी दोनों का संचालन करना प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण था।

    अब तक का प्रस्तावित कार्यक्रम
    पंचायती राज विभाग द्वारा पहले से तैयार किए गए खाके के अनुसार, राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव को हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक पूरा कराया जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

    पुरानी समय-सीमा: 17 सितंबर को जिला परिषद-पंचायत समिति और 18 सितंबर को सरपंचों के लिए लॉटरी निकलने के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी करने वाला था।

    संशोधित प्रक्रिया: अब माना जा रहा है कि निकाय चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव (21-22 सितंबर) संपन्न होने के तुरंत बाद ही पंचायती राज के लिए नई लॉटरी तिथियों का ऐलान किया जाएगा।

    15 नवंबर की डेडलाइन: तिथियों में मामूली बदलाव के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग का लक्ष्य 15 नवंबर 2026 तक सभी चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी कराकर नए जनप्रतिनिधियों का गठन करने का रहेगा।

    ग्रामीण क्षेत्रों और दावेदारों पर क्या पड़ेगा असर?
    राजस्थान के ग्रामीण अंचल में सरपंच और पंचायत समिति सदस्य बनने का सपना देख रहे स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ नेताओं की नजरें पूरी तरह से इस आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि कौन सी सीट महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित होगी, तब तक प्रत्याशी अपने स्तर पर प्रचार अभियान पूरी तरह शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

    लॉटरी टलने से दावेदारों में थोड़ा असमंजस जरूर बढ़ा है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह केवल कुछ ही दिनों की देरी है। निकाय चुनाव संपन्न होते ही सितंबर के अंतिम सप्ताह में ही नई आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी, जिससे उम्मीदवारों को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा

  • केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए पृथक श्रेणीकरण का सुझाव देकर पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने पर जोर

    केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए पृथक श्रेणीकरण का सुझाव देकर पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध लाभ पहुंचाने पर जोर

    जयपुर
    अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रशिक्षण एवं एचसीएम रीपा की महानिदेशक श्रेया गुहा ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181 एवं संपर्क पोर्टल की कार्यप्रणाली का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राज्य स्तरीय डैशबोर्ड का बारीकी से अवलोकन करते हुए आमजन की समस्याओं के पारदर्शी, त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    एआई आधारित वॉइस चैटबॉट की कार्यप्रणाली परखी
    निरीक्षण के दौरान महानिदेशक ने संपर्क पोर्टल पर संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वॉइस चैटबॉट की कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने कहा कि चैटबॉट के माध्यम से मिल रहे ग्रीवेंस रिस्पॉन्स सराहनीय हैं। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि वॉइस चैटबॉट के जरिए ग्रीवांस रिड्रेसल व्यवस्था में और अधिक सकारात्मक एवं गुणात्मक सुधार लाया जाए, ताकि परिवादियों को सहजता से अपनी बात रखने और त्वरित समाधान का लाभ मिल सके।

    केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए पृथक श्रेणीकरण का सुझाव
    गुहा ने समीक्षा के दौरान सुझाव दिया कि भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एवं केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लाभ से संबंधित प्राप्त होने वाली परिवेदनाओं को अलग से श्रेणीबद्ध किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं से जुड़े प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी और पात्र लाभार्थियों तक उनका हक समयबद्ध रूप से पहुंच सकेगा।

    ई-जनसुनवाई में सीधे सुनीं आमजन की समस्याएं
    महानिदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित ई-जनसुनवाई व्यवस्था का भी प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने जनसुनवाई के माध्यम से जुड़े परिवादियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
    निरीक्षण के दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आईटी विंग के तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।