Category: राज्य

  • यूपी की 136 ग्राम पंचायतों पर शिकंजा, सचिव और प्रधानों से वसूले जाएंगे ₹13 करोड़

    यूपी की 136 ग्राम पंचायतों पर शिकंजा, सचिव और प्रधानों से वसूले जाएंगे ₹13 करोड़

    अंबेडकरनगर
    यूपी के अंबेडकरनगर में गांवों में विकास कार्य के लिए शासन स्तर से दी गई धनराशि में ऑडिट के दौरान वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई है। कहीं बिना कार्य कराए धन निकाल लिया गया है तो कहीं आधा अधूरा कार्य पर ही धनराशि में हेराफेरी की गई है। सत्यापन के बाद ऐसी 136 ग्राम पंचायतों से कुल 13 करोड़ रुपए की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई है। ग्राम पंचायत सचिव और प्रधानों पर ऐक्शन शुरू हो गया हे। जिला पंचायत राज अधिकारी ने आरोपित सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी किया गया है। जबकि ग्राम प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों के खिलाफ ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    ग्राम पंचायतों में विकास के बजट से कराए गए कार्यों की ऑडिट टीम के जांच दौरान अभिलेख न प्रस्तुत करने व कार्य के स्थलीय सत्यापन में अनियमितता पाई जाने पर आरोपित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव से कुल 13 करोड़ 37 लाख 53 हजार 854 ररुपए की वसूली की जाएगी। इसमें जिलाधिकारी स्तर से आरसी का अनुमोदन होने के उपरान्त पंचायती राज विभाग ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। विभागीय स्तर से तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी किया गया है। प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों से वसूली के लिए ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है।

    कई रिटायर तो कई की मृत्यु भी हो चुकी
    यह अनियमितता वित्तीय वर्ष 211-12 से 2018-19 में ऑडिट के दौरान पायी गई थी। प्रकरण पुराना होने व विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी करने में विलम्ब होने के चलते कई सचिवों और ग्राम प्रधान की मृत्यु भी हो चुकी है। जबकि कई सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।अकबरपुर के सुबारपुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2012-13 में ऑडिट के दौरान तीन प्रकरणों में 1881760 रुपए की अनियमितता पायी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 940880 रुपए व तत्कालीन सचिव से 940880 रुपए की वसूली की जाएगी। 

    अकबरपुर नैली में वर्ष 2012-13 में ऑडिट के दौरान कुल 1163529 रुपए की अनियमिता पकड़ी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 581764 रुपए तथा तत्कालीन सचिव से 581764 रुपए की वसूली की जाएगी। वहीं रोशनगढ़ ग्राम पंचायत में वर्ष 2013-14 में दो प्रकरणों में 1648294 रुपए की अनियमिता पायी गई है, जिसमें पूर्व प्रधान से 824147 व तत्कालीन सचिव से 824147 रुपए की वसूली की जाएगी। इसी तरह ऑडिट के दौरान विभिन्न वित्तीय वर्षों में जनपद की कुल 136 ग्राम पंचायतों में कुल 13 करोड़ 37 लाख 53 हजार 854 रुपए के गबन का मामला पकड़ा गया है।

    सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी
    इस बारे में डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि आरोपित सचिवों व ग्राम प्रधानों से धन के रिकवरी की कार्रवाई की जा रही है। सचिवों के वेतन से कटौती का आदेश जारी हो गया है। ग्राम प्रधान और सेवानिवृत्त सचिवों से वसूली के लिए ऑनलाइन आरसी जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। गबन में जिन अरोपितों की मृत्यु हो चुकी है उनकी वसूली संभव नहीं होगी।

  • नवजोत सिद्धू से हरभजन सिंह तक, पंजाब के खेल सितारों ने क्यों चुनी राजनीति की राह?

    नवजोत सिद्धू से हरभजन सिंह तक, पंजाब के खेल सितारों ने क्यों चुनी राजनीति की राह?

    जालंधर 
    पंजाब में खेल
    और राजनीति का रिश्ता आजादी के बाद से ही गहरा रहा है। राज्य ने ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने खेल के बाद सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी पहचान बनाई। पिछले एक दशक में खिलाड़ियों की राजनीतिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह बदलाव पंजाब की सियासत को एक नया आयाम दे रहा है।

    खिलाड़ियों का राजनीति से जुड़ाव हमेशा सीधे चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं रहा है। अनेक खिलाड़ी पहले पुलिस, प्रशासन या खेल विभाग में जिम्मेदारियां संभालते थे। यह पृष्ठभूमि बाद में उनके चुनावी राजनीति में प्रवेश का आधार बनी। आजादी के बाद के शुरुआती चुनावों में भी खेल पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधि सामने आए। हॉकी, फुटबॉल और कबड्डी जैसे खेलों से जुड़े लोग सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे।

    यह सिलसिला अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के सीधे चुनावी राजनीति में आने तक पहुंचा। परगट सिंह, सुरिंदर सिंह सोढ़ी, सज्जन सिंह चीमा, राजबीर कौर, नवजोत सिंह सिद्धू, हरभजन सिंह, करतार सिंह, गुरलाल सिंह घनौर और जस्सा पट्टी इसके प्रमुख उदाहरण हैं। ये खिलाड़ी अब विधानसभा, संसद और राजनीतिक संगठनों तक पहुंच रहे हैं। उनकी मौजूदगी अब केवल प्रतीकात्मक नहीं रह गई है। पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति से निकले चेहरे भी विधानसभा तक पहुंच रहे हैं। 

    हॉकी और बास्केटबॉल के दिग्गज
    भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और पद्मश्री परगट सिंह ने लंबी राजनीतिक पारी खेली है। वह जालंधर छावनी से लगातार विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री भी रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में जालंधर छावनी में परगट सिंह और सुरिंदर सिंह सोढ़ी के बीच टक्कर हुई।

    सुरिंदर सिंह सोढ़ी 1980 मॉस्को ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य थे। वह आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार थे और पंजाब पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी भी रहे। बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा ने भी आम आदमी पार्टी से सुल्तानपुर लोधी से चुनाव लड़ा। राजबीर कौर, भारतीय महिला हॉकी की पूर्व कप्तान और ‘गोल्डन गर्ल’, भी आम आदमी पार्टी से जुड़ीं।

    क्रिकेट और कुश्ती के सितारे
    क्रिकेट में नवजोत सिंह सिद्धू का नाम सबसे चर्चित रहा है। वह अमृतसर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह को 2022 में आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा। पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित पहलवान करतार सिंह ने भी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया और विधानसभा चुनाव लड़ा। अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुरलाल सिंह घनौर 2022 में घनौर से विधायक बने। वह पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति से विधानसभा तक पहुंचे हैं।

    खिलाड़ियों के राजनीति में आने के कारण
    पहलवान जसकंवर सिंह उर्फ जस्सा पट्टी को जुलाई 2026 में आम आदमी पार्टी ने पट्टी विधानसभा हलके का प्रभारी नियुक्त किया। यह खिलाड़ियों के राजनीति में आने की नई कड़ी है। पंजाब में खेलों की सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत मजबूत है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ियों की सार्वजनिक पहचान पहले से बनी होती है। खेलों से जुड़े अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की पृष्ठभूमि उन्हें सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान देती है। खिलाड़ियों की लोकप्रियता राजनीतिक दलों के लिए युवा पीढ़ी से जुड़ने का माध्यम बन सकती है। हालांकि खेल की लोकप्रियता चुनावी सफलता की गारंटी नहीं होती, कई खिलाड़ी चुनाव हार भी चुके हैं। 

  • UP चुनाव से पहले BJP-RSS की रणनीति पर मंथन, तावड़े संगठन की चुनौतियों और नाराजगी का लेंगे फीडबैक

    UP चुनाव से पहले BJP-RSS की रणनीति पर मंथन, तावड़े संगठन की चुनौतियों और नाराजगी का लेंगे फीडबैक

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की फतह की स्क्रिप्ट लिखने में आरएसएस और बीजेपी जुट गई हैं. बीजेपी राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के यूपी प्रवास और दौरों के बीच आरएसएस के साथ तीन स्थानों पर बैठकों की रूपरेखा बनाई गई है. संघ-भाजपा के बीच समन्वय बनाने का दायित्व निभाने वाले राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार इन बैठकों में मौजूद रहेंगे. इस तरह यूपी में जो इलाके कमजोर हैं, उन्हें बीजेपी-आरएसएस मिलकर दुरुस्त करने का प्लान बनाएंगे। 

    मिशन-2027 को लेकर बीएल संतोष और विनोद तावड़े लखनऊ के दौरे पर पहुंचे हैं. इस बार वे राजधानी के दायरे से बाहर निकलकर यूपी के अलग-अलग इलाकों में जाकर सियासी नब्ज टटोलेंगे, जिसके लिए लखनऊ-उन्नाव रोड पर बीजेपी और संघ की समन्वय बैठक चल रही है. इस बैठक में बीजेपी की सत्ता की हैट्रिक का खाका खींचा जा रहा है। 

    विनोद तावड़े लखनऊ में हैं और अगले कुछ दिनों तक यूपी में डेरा डाले रखेंगे. इस दौरान वे सबसे पहले गोरक्ष क्षेत्र के गोरखपुर और काशी क्षेत्र के प्रयागराज में बैठक करेंगे. इसके बाद अवध क्षेत्र के अयोध्या में बैठक करने के बाद दूसरे राउंड में कानपुर, ब्रज और पश्चिम क्षेत्र की सियासी नब्ज समझने के लिए महामंथन करेंगे। 

    संघ-बीजेपी मिलकर लिख रहे 2027 की स्क्रिप्ट
    2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और आरएसएस दोनों ही एक्टिव हो गए हैं. लखनऊ-उन्नाव रोड पर संघ-बीजेपी और सरकार की समन्वय बैठक चल रही है, जिसमें बीएल संतोष और विनोद तावड़े सहित संघ के राष्ट्रीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार मौजूद हैं. इसके अलावा बीजेपी के सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार के दो मंत्री भी मौजूद हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह भी पहुंचे हैं। 

    संघ-बीजेपी की यह ब्रेनस्टॉर्मिंग मीटिंग 2027 चुनाव की जमीनी तैयारी को लेकर है. संघ, सरकार और संगठन जमीनी स्तर पर किस तरीके से समन्वय के साथ काम करें, जमीनी मुद्दे और खासकर जो नाराजगी इस वक्त उपजी हुई है, उससे निपटने की रणनीति को लेकर यह बैठक है। 

    यूपी में बीजेपी के सामने फिलहाल, जहां जनप्रतिनिधियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और संगठन के बीच आंतरिक विरोध खत्म करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक कार्यक्रमों, जनसंख्या असंतुलन, घुसपैठ, हिंदुत्व, पीडीए और ध्रुवीकरण समेत कई विषयों पर पार्टी नए सिरे से एजेंडा तय करने की तैयारी में है. बैठकों में संघ से विभाग, प्रांत व क्षेत्र प्रचारक भी रहेंगे। 

    अवध से पूर्वांचल तक समझेंगे सियासी नब्ज
    बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश के प्रभारी की कमान सौंपी गई थी. उसके बाद से उनका यह प्रदेश का तीसरा दौरा है. पहली बार उन्होंने लखनऊ में पदाधिकारियों संग बैठक कर फीडबैक लिया था. दूसरी बार राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष संग लखनऊ आए थे और कानपुर का भी दौरा किया था. इस बार वह अवध और पूर्वांचल में सियासी माहौल परखने का काम करेंगे। 

    विनोद तावड़े अब यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा करेंगे. इस दौरान वे क्षेत्र से लेकर जिला स्तर तक के कार्यकर्ताओं संग बैठकें करेंगे. साथ ही वे पार्टी की चुनावी तैयारियों का जायजा लेंगे और नाराजगी दूर करने की कवायद करेंगे. तावड़े यूपी में प्रयागराज से लेकर गोरखपुर और अयोध्या तक मंथन करेंगे. इस फीडबैक के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। 

    गोरखपुर से अयोध्या तक तावड़े करेंगे मंथन
    विनोद तावड़े यूपी में अपने अभियान का आगाज गोरखपुर क्षेत्र से कर रहे हैं. 17 और 18 सितंबर तक तावड़े गोरखपुर में रहेंगे, जहां वे गोरखपुर क्षेत्र की बैठक करेंगे. उसके बाद अवध क्षेत्र की बैठक के लिए 19 और 20 सितंबर को अयोध्या जाएंगे. इसके बाद वे काशी क्षेत्र की बैठक प्रयागराज में 21 और 22 सितंबर के बीच करेंगे। 

    विनोद तावड़े के इस दौरे का मुख्य मकसद है कि प्रदेश के सियासी माहौल को समझकर आगे की दिशा तय की जाए. इसमें अपनी पार्टी के साथ ही विपक्षियों के कमजोर और मजबूत पक्ष को भी समझने की कोशिश होगी. संगठन, सरकार के कामकाज, प्रत्याशियों की स्थिति और संभावित प्रत्याशियों को लेकर लोगों की राय लेंगे. इस राय के आधार पर वह आगे की चुनावी रणनीति तैयार करेंगे. इससे चुनाव के लिए बेहतर रोडमैप तैयार किया जा सकेगा। 

    संघ, सरकार और संगठन का तालमेल

    यूपी में इन तीनों ही जगहों पर अब संघ और भाजपा के बीच समन्वय बैठकें भी साथ चलेंगी. रणनीतिकारों का कहना है कि चुनाव से पहले संघ और भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी साथ बैठकर अनुकूल वातावरण बनाने का प्रयास करेंगे. विनोद तावड़े और संघ की तरफ से अरुण कुमार क्षेत्रीय पदाधिकारियों के अलावा जिलाध्यक्षों और प्रभारियों के साथ भी बैठकें करेंगे। 

    क्षेत्रीय बैठकों में निचले स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर उनका जोर होगा. क्षेत्र की विभिन्न विधानसभा सीटों पर पार्टी के मजबूत और कमजोर पक्ष पर फीडबैक लेंगे. मौजूदा विधायकों के कामकाज के साथ ही संभावित प्रत्याशियों पर भी चर्चा करेंगे. कई विधायकों, मंत्रियों व सांसदों को लेकर संघ के पास नकारात्मक फीडबैक है, जिसे समन्वय बैठकों में उठाया जाएगा। 

    पश्चिम और काशी क्षेत्र में 71-71, ब्रज में 65, अवध में 82, कानपुर में 52 और गोरखपुर क्षेत्र में 62 विधानसभा सीटें हैं, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में 2022 की तुलना में बीजेपी की सीटें घटी हैं. अयोध्या और काशी के बाद अब पार्टी मथुरा-वृंदावन और संभल से हिंदुत्व के एजेंडे को रणनीति पर धार दे रही है. वहीं जातिवाद, क्षेत्रवाद, मतांतरण व ध्रुवीकरण के साइड इफेक्ट से बचने के लिए संघ द्वारा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने का। खाका खींचा जा रहा है.

     

     

  • विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से कामगारों को नई उड़ान, स्वरोजगार के लिए मिली आर्थिक मदद

    विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से कामगारों को नई उड़ान, स्वरोजगार के लिए मिली आर्थिक मदद

    लखनऊ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला 2026 तथा टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए चेक और विभिन्न जिलों के कामगारों को टूलकिट वितरित किए। मुख्यमंत्री के हाथों आर्थिक सहायता और कामकाज के उपकरण पाकर लाभार्थियों के चेहरे खिल उठे। कामगारों ने योगी सरकार की योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इनसे उन्हें अपना काम आगे बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है।

    लखनऊ के आलमबाग निवासी मोहम्मद मुश्ताक को सैलून के काम के लिए दो लाख रुपये का चेक मिला। वह पिछले 25 वर्षों से सैलून का काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। मुश्ताक ने कहा कि पिछली सरकारों में उन्हें कभी इस तरह की टूलकिट नहीं मिली थी। आज मुख्यमंत्री के हाथों सहायता पाकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है।
    कानपुर निवासी अवधेश को सुनार की टूलकिट मिली। करीब 20 वर्षों से सोने के आभूषण बनाने का काम कर रहे अवधेश ने मुख्यमंत्री से टूलकिट पाकर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि वह खुद को धन्य मानते हैं।

    महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का सहारा

    बाराबंकी की वंदना और रमा जायसवाल को सिलाई मशीन मिली। सिलाई का कोर्स कर चुकीं वंदना ने बताया कि वह सिलाई के जरिए अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें बहुत प्रसन्नता हुई। वहीं रमा जायसवाल ने बताया कि उन्होंने टूलकिट के लिए आवेदन किया था। सिलाई का काम करने के साथ वह घर की जिम्मेदारियां भी संभालती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि योगी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है। पिछली सरकार और वर्तमान सरकार में काफी अंतर है। 

    युवाओं को रोजगार से जोड़ रहीं योजनाएं

    कारपेंटर का काम करने वाले राहुल शर्मा को एक लाख रुपये का चेक मिला। वह पिछले आठ वर्षों से इस पेशे में काम कर रहे हैं। राहुल ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद से उन्हें कई बार आर्थिक सहायता, टूलकिट और प्रशिक्षण का लाभ मिल चुका है। एक लाख रुपये से उन्हें अपने काम के लिए जरूरी औजार खरीदने में मदद मिलेगी। उन्होंने ऐसी योजनाएं आगे भी जारी रखने की अपील की, ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।

    उन्नाव निवासी आनंद कुमार को भी बढ़ई के काम के लिए एक लाख रुपये का चेक मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। पिछली सरकारों में निम्न आय वर्ग के लोगों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता था, जबकि अब उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

    कुम्हारों को भी मिला संबल

    कार्यक्रम में अयोध्या निवासी राम को कुम्हार के काम के लिए टूलकिट प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय उन्हें किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला था, लेकिन अब उन्हें योजनाओं का लाभ मिल रहा है। राम ने योगी सरकार की सराहना करते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वजह से भाजपा से जुड़े हैं और आगे भी जुड़े रहेंगे।

  • डिप्टी CM केशव मौर्य का सख्त संदेश, लापरवाह और अनुशासनहीन अफसरों पर जारी रहेगा एक्शन

    डिप्टी CM केशव मौर्य का सख्त संदेश, लापरवाह और अनुशासनहीन अफसरों पर जारी रहेगा एक्शन

    लखनऊ
     यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लापरवाह अफसरों पर ऐक्शन शुरू कर दिया है। डिप्टी सीएम ने गुरुवार को सुल्तानपुर के परियोजना निदेशक अशोक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। यह कार्रवाई शासकीय पद की गरिमा के विपरीत आचरण, अधीनस्थ कार्मिकों के साथ आपत्तिजनक व्यवहार के चलते की गई है।

    डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अशोक कुमार सिंह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली, 1999 के नियम-7 के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जनहित एवं जनसेवा है। शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन तथा जनता को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध जारी रहेगी कार्रवाई
    उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डबल इंजन सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जनसेवा से विमुखता, शासकीय कार्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। सुलतानपुर के परियोजना निदेशक का निलंबन इसी नीति के तहत की गई कार्रवाई का एक उदाहरण है। डिप्टी सीएम ने कहा, शासकीय कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता तथा पदीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।

    अपनी हंसी न उड़वाएं अखिलेश यादव
    वहीं दूसरी ओर आजमगढ़ पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, सपा अध्यक्ष कानून व्यवस्था पर बात न करें। वह कानून व्यवस्था पर सवाल उठाएंगे तो प्रदेश की जनता उन पर हंसेगी। उनकी सरकार में नकल, भू माफिया और अपराधियों को संरक्षण दिया जाता था। भाजपा के गोरखपुर के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के बरदह थाना क्षेत्र के जिवली स्थित आवास पर बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदेश की जनता को यह बताने की जरूरत नहीं है कि अखिलेश यादव और उनके परिवार के लोग क्या करते थे। ऐसे में सपा अध्यक्ष को अपनी हंसी उड़ाने का काम नहीं करना चाहिए। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है। जो भी अपराध करेगा, कानून अपना काम करेगा।

     

  • माध्यमिक आचार्य परीक्षा की Response Sheet नहीं खुली, हाईकोर्ट ने JSSC से मांगी तकनीकी जांच

    माध्यमिक आचार्य परीक्षा की Response Sheet नहीं खुली, हाईकोर्ट ने JSSC से मांगी तकनीकी जांच

    रांची
    माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से JSSC पोर्टल पर "User Does Not Exist" संदेश आने और Response Sheet डाउनलोड नहीं होने की शिकायत पर अदालत ने आयोग के IT और कंप्यूटर विशेषज्ञों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि तकनीकी स्थिति की मौके पर ही जांच कर वास्तविक कारण स्पष्ट किया जा सके.

    याचिकाकर्ताओं ने उठाई तकनीकी समस्या
    यह मामला विकास पांडेय एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत में पक्ष रखा. याचिका में कहा गया कि माध्यमिक आचार्य परीक्षा देने के बाद जब अभ्यर्थियों ने JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के जरिए लॉग-इन कर Response Sheet और Answer Key डाउनलोड करने की कोशिश की, तब पोर्टल पर "User Does Not Exist" का संदेश दिखाई दिया. इसके कारण वे अपनी Response Sheet प्राप्त नहीं कर सके.

    JSSC ने शपथ पत्र में क्या कहा
    मामले में JSSC ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखा है. आयोग ने अपने जवाब में संभावना जताई कि यह समस्या अभ्यर्थियों द्वारा ई-मेल आईडी या पासवर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं करने के कारण सामने आई होगी. हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सही विवरण दर्ज किया था, इसके बावजूद पोर्टल पर यही संदेश आता रहा और Response Sheet डाउनलोड नहीं हो सकी.

    कोर्ट ने तकनीकी जांच का दिया आदेश
    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केवल दस्तावेजों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तकनीकी स्तर पर जांच कराने का फैसला किया. अदालत ने निर्देश दिया कि JSSC के कंप्यूटर और IT विशेषज्ञ अगली सुनवाई में अदालत में मौजूद रहें. साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है.

    कोर्ट के सामने होगा लाइव लॉग-इन
    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई के दौरान JSSC के तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में संबंधित अभ्यर्थियों के अकाउंट में लॉग-इन कर यह देखा जाएगा कि उनकी Response Sheet और Answer Key वास्तव में उपलब्ध है या नहीं. यदि उपलब्ध है तो उसे डाउनलोड किया जा सकता है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी. इससे यह साफ हो सकेगा कि समस्या अभ्यर्थियों द्वारा गलत विवरण दर्ज करने की थी या फिर JSSC पोर्टल में कोई तकनीकी खामी थी.

    13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की है. अधिवक्ता चंचल जैन ने बताया कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यही है कि Response Sheet और Answer Key से जुड़ी तकनीकी समस्या की निष्पक्ष जांच विशेषज्ञों की मौजूदगी में कराई जाए. हाईकोर्ट के इस निर्देश को उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने परीक्षा के बाद अपनी Response Sheet डाउनलोड नहीं कर पाने की शिकायत उठाई है.

  • श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए 160 विशेष बसें और 50 पार्किंग स्थल तैयार

    श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए 160 विशेष बसें और 50 पार्किंग स्थल तैयार

    मथुरा/बरसाना

     ब्रज के प्रमुख पर्वों में से एक श्री राधा अष्टमी पर्व को लेकर योगी सरकार ने बरसाना में व्यापक तैयारियां की हैं। आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को बरसाना स्थित प्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर में राधा रानी का जन्मोत्सव पूरी भव्यता और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री जी का विशेष अभिषेक और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पर्व में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है।

    7 जोन और 20 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र
    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से पूरे बरसाना मेला क्षेत्र को 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे- चप्पे पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 8 अपर पुलिस अधीक्षक, 38 पुलिस उपाधीक्षक, 75 निरीक्षक, 320 उप निरीक्षक, 68 महिला उप निरीक्षक, पीएसी की 2 कंपनी और पीएसी फ्लड की 2 प्लाटून शामिल हैं। इसके अलावा 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की सघन निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की मदद के लिए 2 खोया- पाया केंद्र और 6 वॉच टावर भी स्थापित किए गए हैं।

    यातायात और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध
    श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया गया है। उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा 160 विशेष बसें चलाई जाएंगी, जबकि 40 बसों को रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक बस पर दो- दो चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसाना में एक अस्थायी बस स्टैंड भी बनाया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 38 होल्डिंग एरिया, 50 पार्किंग स्थल, 88 बैरियर, 14 बैरिकेडिंग और 7 स्थानों पर जूता-घर की व्यवस्था की गई है।

    स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त मेले पर जोर
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में 12 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए बाइक एंबुलेंस, नियमित दूरी पर एंबुलेंस और एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेला क्षेत्र में उत्कृष्ट साफ- सफाई और पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने की व्यवस्था की गई है। भंडारा संचालकों को भी नियमित कूड़ा उठान और कूड़ादान रखने की हिदायत दी गई है।

    रोशनी से जगमग हुआ बरसाना 
    सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और पोल की प्लास्टिक रैपिंग करने का कार्य किया गया है। मथुरा- वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा फसाड लाइटिंग, वॉल पेंटिंग और कपड़ों की सजावट से पूरे बरसाना को एक नव्य-भव्य रूप दिया गया है। वहीं खाद्य सुरक्षा मथुरा/बरसाना

     ब्रज के प्रमुख पर्वों में से एक श्री राधा अष्टमी पर्व को लेकर योगी सरकार ने बरसाना में व्यापक तैयारियां की हैं। आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को बरसाना स्थित प्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर में राधा रानी का जन्मोत्सव पूरी भव्यता और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री जी का विशेष अभिषेक और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पर्व में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है।

    7 जोन और 20 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से पूरे बरसाना मेला क्षेत्र को 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे- चप्पे पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 8 अपर पुलिस अधीक्षक, 38 पुलिस उपाधीक्षक, 75 निरीक्षक, 320 उप निरीक्षक, 68 महिला उप निरीक्षक, पीएसी की 2 कंपनी और पीएसी फ्लड की 2 प्लाटून शामिल हैं। इसके अलावा 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की सघन निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की मदद के लिए 2 खोया- पाया केंद्र और 6 वॉच टावर भी स्थापित किए गए हैं।

    यातायात और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध

    श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया गया है। उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा 160 विशेष बसें चलाई जाएंगी, जबकि 40 बसों को रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक बस पर दो- दो चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसाना में एक अस्थायी बस स्टैंड भी बनाया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 38 होल्डिंग एरिया, 50 पार्किंग स्थल, 88 बैरियर, 14 बैरिकेडिंग और 7 स्थानों पर जूता-घर की व्यवस्था की गई है।

    स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त मेले पर जोर

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में 12 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए बाइक एंबुलेंस, नियमित दूरी पर एंबुलेंस और एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेला क्षेत्र में उत्कृष्ट साफ- सफाई और पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने की व्यवस्था की गई है। भंडारा संचालकों को भी नियमित कूड़ा उठान और कूड़ादान रखने की हिदायत दी गई है।

    रोशनी से जगमग हुआ बरसाना 
    सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और पोल की प्लास्टिक रैपिंग करने का कार्य किया गया है। मथुरा- वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा फसाड लाइटिंग, वॉल पेंटिंग और कपड़ों की सजावट से पूरे बरसाना को एक नव्य-भव्य रूप दिया गया है। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग भी मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।  

    स्थानीय निवासियों को भी मिलेंगे दर्शन के पास: जिलाधिकारी
    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि 19 सितंबर को श्री राधा अष्टमी पर्व को बरसाना में अत्यंत दिव्य, भव्य और धूमधाम से मनाया जाएगा। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि बरसाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधाएं मिलें और वे बिना किसी परेशानी के सुगमता के साथ श्रीजी के दर्शन कर सकें। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बाहरी श्रद्धालुओं के साथ- साथ इस बार बरसाना के स्थानीय निवासियों की सहूलियत का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्थानीय लोग भी इस पावन अवसर पर अपने आराध्य श्रीजी (श्री राधारानी जी) के दर्शन कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से विशेष पास जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें भीड़भाड़ में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

      

    स्थानीय निवासियों को भी मिलेंगे दर्शन के पास: जिलाधिकारी
    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि 19 सितंबर को श्री राधा अष्टमी पर्व को बरसाना में अत्यंत दिव्य, भव्य और धूमधाम से मनाया जाएगा। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि बरसाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधाएं मिलें और वे बिना किसी परेशानी के सुगमता के साथ श्रीजी के दर्शन कर सकें। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बाहरी श्रद्धालुओं के साथ- साथ इस बार बरसाना के स्थानीय निवासियों की सहूलियत का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्थानीय लोग भी इस पावन अवसर पर अपने आराध्य श्रीजी (श्री राधारानी जी) के दर्शन कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से विशेष पास जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें भीड़भाड़ में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

  • बिहार कलाकार पेंशन योजना में अब तक 411 कलाकार लाभान्वित, जानें कौन कर सकता है आवेदन

    बिहार कलाकार पेंशन योजना में अब तक 411 कलाकार लाभान्वित, जानें कौन कर सकता है आवेदन

    पटना
     Bihar Artist Pension Scheme:कला के मंच पर वर्षों तक अपनी प्रतिभा दिखाने वाले वरिष्ठ कलाकारों के लिए बिहार सरकार की मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना आर्थिक सहारा बन रही है।

    50 वर्ष से अधिक उम्र और कम आय वाले ऐसे कलाकार, जिन्होंने कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों तक योगदान दिया है, इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

    चयनित कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन दी जाती है। जनवरी 2026 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक विभिन्न जिलों के करीब 411 कलाकारों को डीबीटी के माध्यम से पेंशन दी जा रही है।

    50 साल की उम्र और 10 साल का अनुभव जरूरी
    योजना का लाभ लेने के लिए कलाकार की उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए और कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है।

    इसके साथ ही उसकी वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा हो।

    कलाकार का बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण भी अनिवार्य है। विभागीय विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा के बाद पात्र कलाकारों को पेंशन की स्वीकृति दी जाती है।

    अब तक 411 कलाकारों को मिली पेंशन
    सरकारी स्वीकृतियों के अनुसार जून 2026 के लिए अलग-अलग आदेशों में 258 और 153 अनुशंसित कलाकारों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन देने की मंजूरी दी गई।

    इस तरह करीब 411 कलाकारों को योजना के तहत पेंशन उपलब्ध कराई गई है। राशि सीधे कलाकारों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है।

    आवेदन से चयन तक कैसे पहुंचता है नाम?
    कलाकारों को सबसे पहले बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल बनानी होती है। इसके लिए artistregistration.bihar.gov.in पर जाकर नाम और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी के बाद आवेदन फार्म खुलेगा।

    आवेदन में व्यक्तिगत जानकारी के साथ कलाकार को अपने कला क्षेत्र, अनुभव और अब तक दी गई प्रस्तुतियों का विवरण देना होगा। बैंक खाते की जानकारी के साथ अपनी तस्वीर, प्रस्तुतियों की तस्वीरें और वीडियो भी अपलोड किए जा सकते हैं।

    तीन स्तरों पर होती है जांच
    आवेदन मिलने के बाद पात्रता की प्राथमिक जांच की जाती है। इसके बाद आवेदन संबंधित जिले के कला एवं संस्कृति कार्यालय तक पहुंचता है। यहां कलाकार के आयु, निवास, आय और कला क्षेत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है।

    जिला स्तर की जांच के बाद आवेदन विभागीय चयन समिति के पास भेजे जाते हैं। समिति पात्र कलाकारों के अनुभव, आर्थिक स्थिति और कला क्षेत्र में योगदान से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा करती है।
    अनुशंसित कलाकारों के नाम पर अंतिम स्वीकृति के बाद पेंशन की राशि डीबीटी से बैंक खाते में भेजी जाती है।

    किन कलाकारों के लिए है योजना?
        उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो।
        बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी।
        कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव हो।
        वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम हो।
        किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं ले रहे हों।
        बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
        विभागीय जांच और चयन समिति की अनुशंसा के बाद पेंशन स्वीकृत होगी।

    ऐसे करें पंजीयन
    1. artistregistration.bihar.gov.in पर जाएं।
    2. नाम और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें।
    3. ओटीपी के बाद बेसिक डिटेल भरें।
    4. कला क्षेत्र, अनुभव और प्रस्तुतियों की जानकारी दें।
    5. बैंक खाते का विवरण भरें।
    6. फोटो, प्रस्तुति की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करें।
    7. आवेदन जमा करने के बाद विभागीय जांच और चयन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करें।

     

  • राघोपुर में कटाव पर अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं थमा गंगा का कहर

    राघोपुर में कटाव पर अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं थमा गंगा का कहर

    भागलपुर
     राघोपुर 1994 से गंगा के कटाव का दंश झेल रहा है। गंगा की धारा के दबाव में वर्षों से गांव और खेती की जमीन कटती रही है। हर साल बाढ़ और कटाव के दौरान करोड़ों रुपये की योजनाएं और फ्लड फाइटिंग कार्य किए गए, लेकिन राघोपुर को अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका।

    500 मीटर तटबंध ध्वस्त होने से मचा था हाहाकार
    राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर इस बार कटाव ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। करीब 500 मीटर तटबंध ध्वस्त होने के बाद इलाके में हाहाकार मच गया था। ग्रामीणों की चिंता और हालात की गंभीरता मुख्यमंत्री तक पहुंची।

    इसके बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से गंगा की धारा को रोकने और राघोपुर को बचाने के लिए बड़े स्तर पर बचाव कार्य शुरू हुआ। बचाव कार्य से फिलहाल कटाव पर नियंत्रण मिला है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। तटबंध के आगे बची जमीन और उसके बाद मौजूद रेलवे लाइन की सुरक्षा अब सबसे बड़ी चिंता है।

    अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी कटाव बरकरार
    उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर वर्ष 2005-06 में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी कटाव निरोधी कार्य शुरू हुआ था। इसके बाद 2008 में करीब 18.77 करोड़, 2014 में करीब 67.99 करोड़ और 2015 में करीब 65 करोड़ रुपये की योजनाओं का उल्लेख मिलता है।

    2016 में इस्माइलपुर-बिंदटोली और राघोपुर क्षेत्र के लिए करीब 115 करोड़ रुपये की योजना भी सामने आई थी।

    एक पुराने आकलन के अनुसार, 2006 से 2019 के बीच पूरे नवगछिया अनुमंडल में स्थायी कटाव निरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्यों पर करीब 686 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध हर साल गंगा के दबाव से जूझता रहा।

    2026 में फिर करीब पांच करोड़ की योजना
    राघोपुर को कटाव से बचाने के लिए वर्ष 2026 में भी करीब पांच करोड़ रुपये की प्राक्कलित लागत से कटाव निरोधी योजना तैयार की गई थी। लेकिन जुलाई में गंगा के तेज कटाव ने बचाव की तैयारियों की परीक्षा ले ली।

    तटबंध का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और जल संसाधन विभाग का अस्थायी कैंप कार्यालय भी गंगा में समा गया। जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख ई. वरुण कुमार ने रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए अतिरिक्त संसाधन और बड़े संवेदकों को बचाव कार्य में लगाने की बात कही है।

    विभाग के अनुसार नदी की मुख्य धारा तटबंध की ओर शिफ्ट होने और विक्रमशिला सेतु के अपस्ट्रीम में तेज बहाव के कारण मार्जिनल बांध पर लगातार दबाव बना हुआ था।

    सवाल सिर्फ कटाव का नहीं, खर्च का भी
    राघोपुर की मौजूदा स्थिति अब सिर्फ बाढ़ और कटाव का मामला नहीं रह गई है। वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तटबंध बार-बार कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में स्थायी समाधान को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    रेलवे लाइन तक पहुंचा संकट
    राघोपुर में कटाव जिस तेजी से बढ़ा है, उसने रेलवे लाइन की सुरक्षा को भी चिंता के केंद्र में ला दिया है। यदि गंगा की धारा इसी दिशा में दबाव बनाए रखती है तो बची जमीन के साथ रेलवे परिसंपत्तियों पर भी खतरा बढ़ सकता है।

    इसी बीच स्थायी समाधान की दिशा में पहल को लेकर प्रधानमंत्री के निर्देश पर बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भागलपुर एवं राघोपुर आगमन को लेकर ग्रामीणों में उम्मीद जगी है।

    वर्षों से कटाव का दंश झेल रहे लोगों को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ तत्काल बचाव तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राघोपुर के लिए स्थायी कटाव निरोधी समाधान की दिशा में ठोस निर्णय होगा।

    सुलगते सवाल
        क्या स्थायी कटाव निरोधी योजनाओं की तकनीकी डिजाइन बदलती नदी की धारा के अनुरूप रही?
        क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर्याप्त रही?
        क्या हर साल फ्लड फाइटिंग पर होने वाले खर्च के बावजूद स्थायी सुरक्षा की प्रभावी रणनीति तैयार नहीं हो सकी?

     

  • विश्वकर्मा जयंती पर बोले CM योगी, यूपी में 3 करोड़ से अधिक लोग शिल्प-कौशल से रोजगार से जुड़े

    विश्वकर्मा जयंती पर बोले CM योगी, यूपी में 3 करोड़ से अधिक लोग शिल्प-कौशल से रोजगार से जुड़े

    लखनऊ
    भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती पर शिल्पकारों-कारीगरों सहित समस्त प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो देश शिल्पकारों व कारीगरों को सम्मान देता है, वही आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इसी भावना को अपनाकर पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का प्लेटफार्म दिया है। उन्होंने शिल्प व कारीगरी को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़कर शिल्पकारों-कारीगरों को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाया है। सीएम योगी गुरुवार सुबह जटाशंकर स्थित श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आयोजित श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    विश्वकर्मा मंदिर में सीएम योगी ने पूजा की
    मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की विधि विधान से आराधना करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राजमिस्त्री, बढ़ई, हलवाई, सोनार का काम करने वालों सहित कारीगरी के तमाम पेशे से जुड़े लोगों के लिए उनकी शिल्प कला ही स्वावलंबन का आधार थी। पर, यह हुनर, शिल्प-कारीगरी आजादी के बाद दशकों तक उपेक्षा का शिकार रही। पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में पहली बार डबल इंजन सरकार ने शिल्पकारों-कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और रोजगार के विभिन्न आयामों के साथ जोड़कर उन्हें आगे बढ़ाया है। डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन से यूपी में आज तीन करोड़ से अधिक लोग कारीगरी, शिल्प से जुड़कर रोजगार और स्वावलंबन की राह पर सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं।

    भगवान विश्वकर्मा सृष्टि और PM मोदी नए भारत के शिल्पी- योगी
    सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती है तो साथ ही आज नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन भी है। आज हर कारीगर, शिल्पी जिसके पास कोई विशिष्ट शिल्प है, वह पूजन के जरिये सृष्टि के शिल्पी प्रभु विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के सुदीर्घ स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा, ‘गुरु गोरखनाथ की पावन धरा से भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में सृष्टि के शिल्पी के श्रीचरणों में नमन करते हुए मैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों की तरफ से हृदय से बधाई देता हूं। यह प्रार्थना है कि लंबे समय तक उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहे और उनकी विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो।’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मंदिर समिति के अध्यक्ष ने सीएम का स्वागत किया
    मुख्यमंत्री का स्वागत श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति के अध्यक्ष दयानंद शर्मा ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, स्थानीय पार्षद छट्ठीलाल गुप्ता, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति से जुड़े जयप्रकाश शर्मा, अनूप शर्मा, अजय विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही।