Category: राज्य

  • ‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

    ‘पहले लड़कियों के साथ लव जिहाद, अब लड़कों का हो रहा माइंडवॉश’, संगीत सोम बोले- यूसीसी ही उतारेगा ये ‘बुखार’

    लखनऊ
    पूर्व भाजपा विधायक संगीत सोम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। शामली के आयुष मलिक प्रकरण को सामने रखते हुए सोम ने कहा कि पहले लव जिहाद लड़कियों के साथ चलता था, अब लड़कों के साथ हो रहा है। इसीलिए UCC जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अच्छे परिवारों के लड़कों का बड़े स्तर पर ‘माइंडवॉश’ किया जा रहा है और इसके पीछे फंडिंग से लेकर एक खास नैरेटिव तैयार करने तक का काम हो रहा है।

    सोम ने कहा कि शामली का मामला इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में विदेशी और ‘सो-कॉल्ड सेक्युलर’ लोग भी शामिल हैं। उनके मुताबिक यह केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में बड़े स्तर पर फंडिंग करके युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, सोम ने इन आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट सार्वजनिक साक्ष्य नहीं दिया।

    यूसीसी ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा
    संगीत सोम ने यूसीसी को इसका समाधान बताते हुए कहा कि समान नागरिक कानून ही इस बुखार को उतारने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में समान नागरिक कानून लागू होना चाहिए और जिस मजबूती के साथ इसे लागू करने की जरूरत है, उसी तरह इसे लागू किया जाना चाहिए। एक दिन पहले भी सोम ने यूसीसी का विरोध करने को लेकर अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोला था।

    ‘मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी’
    सोम ने अपने बयान में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि मुस्लिमों की तीन बर्बादी- अखिलेश, ओवैसी और राहुल गांधी। सोम ने तीनों नेताओं पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और दावा किया कि शामली का प्रकरण इसका एक उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश, राहुल और ओवैसी देश में शांति नहीं चाहते और हमेशा देश को बांटने की राजनीति करते हैं। सोम ने कहा कि सनातनी इसे समझ चुके हैं और 2027 में इनकी औकात पता चलेगी।

    दंगा करेंगे तो सात पुश्तें याद रखेंगी
    प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव का जिक्र करते हुए संगीत सोम ने कहा कि यूपी में धार्मिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद इन लोगों को पता है कि दंगा करेंगे तो ऐसा इलाज होगा कि सात पुश्तें याद रखेंगी। सोम ने एक वर्ग की बढ़ती आबादी को भी चिंता का विषय बताते हुए यूसीसी को पूरी दमदारी से लागू करने की मांग की।

  • रांची में बनेगा हाईटेक कमांड सेंटर, टोल-फ्री नंबर से मरीजों तक 4 घंटे में पहुंचेगा सुरक्षित रक्त

    रांची में बनेगा हाईटेक कमांड सेंटर, टोल-फ्री नंबर से मरीजों तक 4 घंटे में पहुंचेगा सुरक्षित रक्त

    रांची
    झारखंड में जरूरतमंद मरीजों को समय पर और सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार एक नई और आधुनिक व्यवस्था शुरू करने जा रही है. अब मरीजों या उनके परिजनों को खून के लिए ब्लड बैंकों और अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. नई व्यवस्था के तहत महज एक कॉल पर 4 घंटे के भीतर मरीज तक ब्लड पहुंचा दिया जाएगा. इस पूरी व्यवस्था को अगले 90 दिनों (3 महीने) के भीतर राज्यभर में प्रभावी करने का लक्ष्य रखा गया है. बुधवार को स्वास्थ्य विभाग और एमएस साइंस (MS Science) कंपनी के बीच इस ऐतिहासिक पहल को लेकर एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह और एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा विशेष रूप से उपस्थित रहे.

    रांची में बनेगा सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर, जारी होगा टोल-फ्री नंबर
    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि राज्य में पहली बार ऐसी डिजिटल और त्वरित व्यवस्था लागू की जा रही है. पूरे राज्य में ब्लड की आपूर्ति को मॉनिटर और संचालित करने के लिए राजधानी रांची में एक हाई-टेक 'कमांड सेंटर' स्थापित किया जाएगा. साथ ही मरीजों की सुविधा के लिए जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर कॉल करके ब्लड की डिमांड दर्ज कराई जा सकेगी. ब्लड कलेक्शन, मानक जांच (Testing), स्टोरेज, रखरखाव और संबंधित अस्पताल तक सुरक्षित डिलीवरी की पूरी जवाबदेही कंपनी (एमएस साइंस) की होगी. मंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना मानक जांच के किसी भी मरीज को रक्त जारी नहीं किया जाएगा.

    प्रति यूनिट के आधार पर भुगतान, NCC और पुलिस की ली जाएगी मदद
    एनएचएम (NHM) के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि कंपनी खुद रक्तदान शिविर आयोजित करेगी और मैनपावर की व्यवस्था करेगी. सरकार कंपनी को प्रति यूनिट रक्त के आधार पर भुगतान करेगी. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड कलेक्शन बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. इसमें NCC, NSS, पुलिस बल और निजी सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा. ब्लड डोनेशन कैंप में रक्तदाताओं के लिए रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी एजेंसी ही करेगी.

  • 2022 में थमा था पोलियो ड्रॉप का उत्पादन, अब बिबकॉल को बंद करने पर कैबिनेट की मुहर

    2022 में थमा था पोलियो ड्रॉप का उत्पादन, अब बिबकॉल को बंद करने पर कैबिनेट की मुहर

    बुलंदशहर
    37 साल पहले बुलंदशहर में स्थापित हुई बिबकॉल कंपनी अब बंद हो जाएगी। ये कंपनी पोलियो ड्राप बनाती थी। 2022 में इसका प्रोडक्शन पूरी तरह से बंद हो चुका है। कभी भारत के पोलियो उन्मूलन अभियान की अहम ताकत रही सरकारी वैक्सीन कंपनी भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बिबकॉल) अब अपने अस्तित्व के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। दो साल से इस कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं मिली है। अफसरों के मुताबिक दिल्ली में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बिबकॉल को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

    बिबकॉल की स्थापना 10 मार्च 1989 को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) का उत्पादन करना और वैक्सीन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना था। कंपनी का प्लांट उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के चोला में स्थापित किया गया था। 1990 के दशक में बिबकॉल ने ओपीवी उत्पादन की दिशा में काम शुरू किया और बाद में इसे डब्लयूएचओ-जीपीएम प्रमाणन भी मिला। 2000 के दशक की शुरुआत में कंपनी को भारत सरकार और यूनिसेफ की ओर से बड़े वैक्सीन सप्लाई ऑर्डर मिले। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, बिबकॉल ने भारत के पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम में बड़ी मात्रा में ओपीवी की आपूर्ति की।

    पोलियो उन्मूलन अभियान में रही अहम भूमिका
    भारत में पोलियो उन्मूलन अभियान के दौरान बिबकॉल देश की उन सरकारी संस्थाओं में शामिल थी जिन्होंने बड़े पैमाने पर ओरल पोलियो वैक्सीन उपलब्ध कराने में योगदान दिया। वर्ष 2015 में सरकार ने भी कहा था कि बिबकॉल ने भारत के इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम के लिए अरबों डोज की ओपीवी सप्लाई की और देश को पोलियो मुक्त बनाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में बिबकॉल के पीएसयू पर सरकार ने अहम फैसला किया है जिसके तहत अब सरकार वैक्सीन और बायोलॉजिकल बनाने वाली इस कंपनी के पीएसयू को पूरी तरह से बंद करने वाली है।

    क्यों लिया गया ये फैसला
    बिबकॉल कंपनी को लगातार नुकसान हुआ, जिसकी वजह से आर्थिक तंगी के कारण कंपनी ने पिछले करीब दो साल से कर्मचारियों को लंबे समय तक वेतन नहीं दिया। जिसके कारण इस कंपनी को बंद करने का फैसला किया गया।

    वर्ष 2022 में बंद हो गया था प्रोडक्शन
    बिबकॉल सरकारी कंपनी है, जो वैक्सीन और बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स बनाती है। इसकी मुख्य मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ने दिसंबर 2022 के आखिर में अपने मुख्य प्रोडक्ट, ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) का उत्पादन बंद कर दिया था। इसके बाद से ही कंपनी को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। यह कंपनी बच्चों के लिए पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), जिंक टैबलेट, डायरिया मैनेजमेट किट और अन्य दवाएं बनाने का काम करती है। भारत को पोलियो मुक्त बनाने में इस कंपनी ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।

    करीब 90 कर्मचारी अभी सेवारत
    कंपनी की स्थापना के समय और बीच में प्रोडक्शन बढ़ाने पर स्थाई और स्थाई मिलाकर लगभग 300 अधिकारी कर्मचारी इसमें सेवारत थे। इसके बाद जब प्रोडक्शन कम हुआ तो कर्मचारियों अधिकारियों की संख्या घटती गई और इनमें से कुछ सेवानिवृत हो गए और कुछ की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई। बिबकॉल के सीनियर प्लांट सुपरिंटेंडेंट सुनील शर्मा ने बताया कि वर्तमान में लगभग 90 अधिकारी कर्मचारी सेवारत हैं। बिबकॉल बंद होने का बेहद दुख है। हम वर्ष 2022 से अपने वेतन और कंपनी को चलाने की मांग को लेकर जगह-जगह संपर्क कर रहे थे मगर विफलता ही हाथ लगी। पूर्व वाइस प्रेसीडेंट बिबकॉल सुनील शर्मा ने बताया, पोलियो वैक्सीन बनाने वाली बिबकॉल कंपनी को आज नई दिल्ली में हुई कैबिनेट की बैठक में बंद करने का निर्णय लिया गया है।

  • RSS के ‘अभ्युदय संघ समागम’ की तैयारी तेज, मोहन भागवत करेंगे 50 हजार स्वयंसेवकों को संबोधित

    RSS के ‘अभ्युदय संघ समागम’ की तैयारी तेज, मोहन भागवत करेंगे 50 हजार स्वयंसेवकों को संबोधित

    मुजफ्फरपुर
     Mohan Bhagwat Muzaffarpur Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत 13 दिसंबर को मुजफ्फरपुर आ रहे हैं। वे यहां उत्तर बिहार प्रांत द्वारा आयोजित 'अभ्युदय संघ समागम' में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे।

    संघ प्रमुख के इस कार्यक्रम को लेकर मुजफ्फरपुर में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
    50 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे

    इस समागम में उत्तर बिहार के सभी जिलों से करीब 50 हजार पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवक जुटेंगे। संघ प्रमुख इन कार्यकर्ताओं को सीधे संबोधित कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। आयोजन को लेकर आरएसएस के स्वयंसेवक भव्य तैयारियों में जुट गए हैं।

    ऑनलाइन निबंधन शुरू
    समागम को सफल बनाने के लिए संघ कार्यालय मधुकर निकेतन में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन निबंधन (रजिस्ट्रेशन) कार्य का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है।

    भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया जाएगा।
    पताही हवाई अड्डा चिह्नित

    आयोजन स्थल के रूप में फिलहाल शहर के पताही हवाई अड्डा मैदान को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा कार्यकर्ता अन्य उपयुक्त मैदानों और बड़े स्थानों की भी टोह ले रहे हैं।
    पूरे उत्तर बिहार प्रांत में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह का माहौल है।

    अंतिम रूप में व्यवस्थाएं
    विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना चन्नी के अनुसार कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समागम में उत्तर बिहार की ऐतिहासिक भागीदारी होगी।

    निबंधन प्रशिक्षण के इस मुख्य सत्र में प्रांत प्रचारक रविशंकर सिंह विशेन, विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना, महानगर संघचालक अविनाश कुमार, महानगर कुटुंब प्रबोधन संयोजक रजनीश मिश्रा और जिला प्रचारक सुनील रुद्र आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहकर अभी बताइए आनलाइन कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए।

     

  • टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में जुटी सरकार

    टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में जुटी सरकार

    लखनऊ

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर प्रदेशभर में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत गुरुवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ में 500 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि टीबी के उपचार के साथ मरीजों के पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल भी सरकार की प्राथमिकता है। हम सब टीबी को मिलकर हराएंगे। 

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सेवा में लगातार 25 वर्षों से अनवरत कार्य कर रहे हैं। उनके ‘सेवा ही संकल्प’ के भाव को आत्मसात करते हुए प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ देश और दुनिया में लगातार प्रयास हो रहे हैं और भारत ने टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और प्रभावी उपचार के माध्यम से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।

    स्वच्छता की भूमिका महत्वपूर्ण

    उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि टीबी से बचाव और उपचार में स्वच्छता की महत्वपूर्ण भूमिका है। मरीजों और उनके परिवारों को अपने घर एवं आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। एकजुट प्रयासों से ही भारत और उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

    आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। टीबी मरीजों के उपचार के साथ उन्हें पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि वे जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकें।

    संविधान स्थल का भी हुआ शुभारंभ

    केजीएमयू में डिप्टी सीएम द्वारा संविधान स्थल का शुभारंभ भी किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमारे राष्ट्र की आत्मशक्ति है। संविधान स्थल विद्यार्थियों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति कर्तव्य एवं संविधान के प्रति निष्ठा के भाव को और सशक्त करने का कार्य करेगा।

    पोषण पोटली का किया वितरण

    कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई तथा प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

    इनकी रही उपस्थिति 

    इस अवसर पर केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद, प्रति कुलपति प्रो. अंजू अग्रवाल, कुलसचिव अर्चना गहरवार, डीन पैरामेडिकल प्रो. के.के. सिंह, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रश्मि कुशवाहा, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं उपाध्यक्ष, नेशनल टीबी टास्क फोर्स प्रो. सूर्यकांत सहित केनरा बैंक, इंडियन बैंक एवं रोटरी क्लब ऑफ लखनऊ के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

  • जयपुर में पटाखों की अस्थाई बिक्री का लाइसेंस मिलेगा 12 अक्टूबर से, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

    जयपुर में पटाखों की अस्थाई बिक्री का लाइसेंस मिलेगा 12 अक्टूबर से, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

    जयपुर
    दीपावली पर आतिशबाजी का कारोबार करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए जिला प्रशासन ने अस्थाई अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार पटाखों की अस्थाई बिक्री के लिए लाइसेंस लेने के इच्छुक आवेदकों को 25 सितम्बर 2026 तक आवेदन करना होगा। तय तारीख के बाद पहुंचने वाले आवेदनों पर प्रशासन की ओर से कोई विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में आतिशबाजी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आवेदन की समय-सीमा महत्वपूर्ण है।

    जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक के अनुसार, विस्फोटक नियम, 2008 के तहत दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी के अस्थाई अनुज्ञापत्र 12 अक्टूबर से 11 नवम्बर 2026 तक जारी किए जाएंगे। इसके लिए आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन अपने थाना क्षेत्र से संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट कार्यालय में जमा करना होगा।

    पांच प्रतियों में देना होगा प्रस्तावित स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र
    आवेदन के साथ केवल सामान्य दस्तावेज ही नहीं, बल्कि प्रस्तावित आतिशबाजी बिक्री स्थल से संबंधित विस्तृत कागजात भी देने होंगे। प्रशासन के अनुसार प्रस्तावित स्थल का ब्ल्यू प्रिंट मानचित्र पांच प्रतियों में देना होगा। इस मानचित्र में आसपास मौजूद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्पष्ट रूप से दर्शाना जरूरी होगा। इसके अलावा शपथ पत्र, स्थल के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज अथवा किरायानामा की प्रमाणित फोटो कॉपी और आवेदक की दो पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी होंगी।

    इस बार अस्थाई अनुज्ञापत्र के लिए जयपुर जिले के कई थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें शाहपुरा, मनोहरपुर, अमरसर, जमवारामगढ़, आंधी, चन्दवाजी, रायसर, नरैना, मांजी रेनवाल, माधोराजपुरा, सांभर, फुलेरा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, गोविन्दगढ़, सामोद, कालाडेरा, दूदू, मौजमाबाद और फागी शामिल हैं।

    प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर ही संबंधित कार्यालय में पहुंचना चाहिए। इसके बाद मिलने वाले आवेदन स्वीकार कर विचाराधीन नहीं किए जाएंगे।

     

  • राजस्थान में खनिज संपदा के बेहतर दोहन पर जोर, बंद खानों में फिर शुरू होगा खनन

    राजस्थान में खनिज संपदा के बेहतर दोहन पर जोर, बंद खानों में फिर शुरू होगा खनन

    जयपुर
    अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने कहा है कि क्रिटिकल मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन और क्वार्टज फेल्सपार के सेंपलिंग व विश्लेषण कार्य में गति लाने के लिए माइंस विभाग आरएसएमईटी और जीएसआई परस्पर सहयोग व समन्वय से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्दी ही जीएसआई व आरएसएमईटी के बीच करार किया जाएगा। इसी तरह से महत्वपूर्ण खनिजों के दोहन के बाद बचे खनिज मलबे की भी आरएण्डडी करवाने की आवश्यकता प्रतिपादित की ताकि मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण या मलबे में भी उपलब्ध खनिजों का पता लगाया जा सके।

    एसीएस माइंस अपर्णा अरोरा गुरूवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में राज्य में खान विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी के लिए भारतीय खान ब्यूरो, जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया व माइंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मंथन कर रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का फोकस प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा का बेहतर दोहन, खनिज खोज कार्य को और अधिक गति देने, अकार्यशील खानों में खनन कार्य शुरु कराने और रोजगार व राजस्व अवसर विकसित करना है। क्वार्टज फेल्सपार को माइनर मिनरल से मेजर मिनरल घोषित करने के बाद की स्थिति पर चर्चा पर उन्होंने क्वार्टज फेल्सपार की सभी शेष लीजों का आईबीएम से समन्वय बनाते हुए 15 दिवस में पंजीकृत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने आईबीएम से क्वार्टज फेल्सपार के सेंपलिंग और विश्लेषण कार्य में तेजी लाने और भारत सरकार के निर्देशानुसार क्वार्टज फेल्सपार ब्लॉकों के प्राथमिकता से जी 3 एक्सप्लोरेशन के निर्देश दिए।   

    भारतीय खान ब्यूरो उदयपुर के नियंत्रक अभय अग्रवाल ने पीपीटी के माध्यम से विस्तार से प्रस्तुति देते हुए बताया कि राजस्थान में माइनिंग सेक्टर में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। खान ब्यूरो स्तर पर मेजर मिनरल लीज धारकों के माइनिंग प्लान का अनुमोदन प्राथमिकता से किया जा रहा है और केन्द्र सरकार द्वारा भी अब माइनिंग प्लान अनुमोदन की समयसीमा तय करते हुए 30 दिवस का समय निर्धारित कर दिया है।

    अग्रवाल ने विस्तार से राजस्थान में मिनरलों के खनन और डिपोजिट्स की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार के माइनिंग मंत्रालय में बेहतर तालमेल के साथ ही केन्द्र सरकार की राजस्थान में कार्यरत संस्थाओं और खान निदेशालय के बीच बेहतर समन्वय से राजस्थान में अच्छा कार्य हो रहा है।

    बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि, निदेशक माइंस महावीर प्रसाद मीणा व अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

     

  • सपा पर हमला, बोले- जिन्हें सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी से फुर्सत नहीं थी, वे कारीगरों और आत्मनिर्भरता के बारे में क्या सोचते

    सपा पर हमला, बोले- जिन्हें सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी से फुर्सत नहीं थी, वे कारीगरों और आत्मनिर्भरता के बारे में क्या सोचते

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती पर कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान समारोह में पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, उर्वरा भूमि, भरपूर जल संसाधन और युवा जनशक्ति थी। मुख्यमंत्री ने कहा, बीमारू यूपी नहीं था, बीमारू तो यूपी को संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता थी, जो हमारे हस्तशिल्प और कारीगरों का अपमान करते थे।
     
    विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले परंपरागत कारीगर हताशा और निराशा के साये में जीने को मजबूर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन व्यवस्था के अधिकारी और गुर्गे कारीगरों से वसूली करते और उनका शोषण करते थे।
     
    सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी पर हमला
    मुख्यमंत्री योगी ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, जिन्हें सैफई में महोत्सव कराकर वहां मुंबई से लोगों को लाकर डांस कराने से फुर्सत न हो और बर्मिंघम की बग्घी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत हो, वे कारीगरों के बारे में कब सोचते। वे स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में कब सोचते। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कारीगरों के लिए योजना लागू की तो वे लोग हंसते थे।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना लागू की गई। इसके बाद 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। इसका उद्देश्य परंपरागत कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और बैंक ऋण से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना था।
     
    कारीगर श्रमिक नहीं, उद्यमी बने
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा, हमारा कारीगर और हमारा हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि कारीगर रोज काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। इसलिए प्रशिक्षण के दौरान उसकी आय प्रभावित न हो, इसकी भी व्यवस्था की गई है।
     
    योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पांच हजार रुपये मानदेय और इसके बाद 15 हजार रुपये तक की आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। कारीगरों को बैंक से जोड़कर अपना उद्यम स्थापित करने में भी सहयोग दिया जा रहा है।
     
    कारीगरों को 10 लाख तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम युवा उद्यमी योजना में पांच लाख रुपये तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा है। कारीगरों के लिए इसकी सीमा 10 लाख रुपये तक की गई है। इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की भी व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा, गारंटी हमारा कारीगर नहीं देगा, ब्याज भी वह नहीं देगा, ब्याज हम देंगे, बस उसको आप लोन दीजिए।
     
    उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पूंजी की कमी किसी कारीगर के उद्यमी बनने की राह में बाधा न बने।
     
    अब 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड लिए गए थे। इनमें बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे पारंपरिक ट्रेड शामिल थे। अब मूर्तिकार, दुधिया, माला बनाने वाले माली, भड़भूजा और मछुआरा जैसे नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े गए हैं।
     
    युवाओं की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत, प्लंबरिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे आधुनिक ट्रेड को भी योजना में जगह दी गई है। अब कुल 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।
     
    बॉटम फाइव से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में यूपी
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश देश के बॉटम फाइव राज्यों में आता था। आज देश की दो या तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उसमें उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को सम्मान और सहयोग देने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयां स्थापित कराई गई हैं और इनमें 3.25 करोड़ लोग काम कर रहे हैं। प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में आगे बढ़ रहा है।
     
    ट्रेड शो में 12 से 15 हजार करोड़ के ऑर्डर की उम्मीद
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में यूपी ट्रेड शो आयोजित होगा। इसमें प्रदेश में बने उत्पादों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक प्रदर्शक और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल होंगे।
     
    उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से 12 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार और ऑर्डर मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका पैसा सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों की जेब में जाएगा।
     
    छह लाख से अधिक कारीगरों को मिला लाभ
    एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी के माध्यम से छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को लाभ मिला है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में नए ट्रेड जोड़कर युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
     
    उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के तहत 14 जिलों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि प्लेज पार्कों के लिए स्वीकृत की गई है। महिला उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज उपादान सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

    टूलकिट बांटी, मार्जिन मनी ऋण पोर्टल शुरू
    मुख्यमंत्री योगी ने कार्यक्रम में विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण कर उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने उन्हें भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा भेंट की। मुख्यमंत्री ने बटन दबाकर मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
     
    मुख्यमंत्री ने अयोध्या के श्रवण कुमार को हलवाई और रामतीर्थ को कुम्हार की टूलकिट दी। बाराबंकी की रमा जायसवाल व वंदना को दर्जी, उन्नाव के रणजीत को नाई, हरदोई के बाबूराम को मोची, कानपुर के शिवसेवक को लोहार, अवधेश को सुनार, रायबरेली के शाहिद को बढ़ई, इटावा के विजयपाल को राजमिस्त्री और लखनऊ के मनीष को धोबी के कार्य के लिए वाशिंग मशीन दी।
     
    प्रकाश साहू को हलवाई के लिए आठ लाख रुपये, राहुल कुमार को बढ़ई के लिए एक लाख, मुश्ताक को सैलून के लिए दो लाख और उन्नाव के रामबाबू व आनंद कुमार को बढ़ई के कार्य के लिए एक-एक लाख रुपये के ऋण के चेक दिए गए।
     
    कौशल विकास के लिए एमओयू का आदान-प्रदान
    कार्यक्रम में कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल के डॉ. मोहित सोनी, इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के माधवेंद्र सिंह, एनएसडीसी के सीईओ डॉ. कृष्ण कुमार, हैंडीक्राफ्ट एंड कार्पेट स्किल काउंसिल के विकास भारद्वाज, टाटा पावर के उदय प्रताप सिंह और उत्तर प्रदेश के आयुक्त एवं निदेशक उद्योग विजयेंद्र पांडयन के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।

  • AI-171 क्रैश जांच में नया विवाद, FAS का तकनीकी खामियों की अनदेखी का आरोप; AAIB ने दिया जवाब

    AI-171 क्रैश जांच में नया विवाद, FAS का तकनीकी खामियों की अनदेखी का आरोप; AAIB ने दिया जवाब

    नई दिल्ली
    एअर इंडिया की उड़ान AI-171 हादसे की जांच को लेकर विमानन सुरक्षा संगठन फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

    एफएएस के कार्यकारी निदेशक एड पियर्सन ने AAIB के महानिदेशक जीवीजी. युगंधर को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि हादसे से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और तकनीकी खराबी से संबंधित आंकड़ों को जांच में सामने नहीं लाया गया।

    जांच की पारदर्शिता पर एफएएस के सवाल
    पत्र में कहा गया है कि हादसे के बाद एफएएस ने यूके AAIB एक्सपर्ट के माध्यम से भारतीय जांच एजेंसी को सैकड़ों आधिकारिक गैर-सार्वजनिक दस्तावेज सौंपे थे। संगठन के अनुसार, इन दस्तावेजों में दुर्घटनाग्रस्त बोइंग 787 विमान के सिस्टम में चल रही कई तरह की खराबियों से संबंधित जानकारी थी।

    एफएएस का कहना है कि विमान के एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशंस एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम और एयरक्राफ्ट हेल्थ मैनेजमेंट डेटा स्ट्रीम से भी ऐसी जानकारियां मिलीं, जो हादसे से ठीक पहले हुई तकनीकी विफलताओं और उनके सटीक समय की ओर इशारा करती हैं।

    तकनीकी दस्तावेजों को दबाने का आरोप
    पियर्सन ने पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आइसीएओ) के नियमों के तहत जांच एजेंसी का दायित्व है कि हादसे से जुड़े सभी प्रासंगिक तथ्यों को एकत्र करे, दर्ज करे और उनका पारदर्शी विश्लेषण करे।

    एफएएस का आरोप है कि AAIB ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इन दस्तावेजों का जिक्र तक नहीं किया। संगठन के अनुसार, जांच एजेंसी का रुख पायलटों पर दोष मढ़ने जैसा दिख रहा है, जबकि तकनीकी खामियों को दरकिनार किया जा रहा है।

    जांच एजेंसी ने आरोपों का किया खंडन
    AAIB ने एफएएस के आरोपों का खंडन करते हुए जांच में निष्पक्षता का दावा किया है। ब्यूरो के जवाब के अनुसार, एफएएस की ओर से दिए गए सभी तकनीकी इनपुट और दस्तावेज 10 जून 2026 को प्राप्त हो चुके थे और जांच टीम उनका गहराई से अध्ययन कर रही है।

    AAIB ने कहा कि पूरी जांच 'एयरक्राफ्ट (इ इन्वेस्टिगेशन आफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025' और आइसीएओ प्रविधानों के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है।

    एफएएस ने दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
    AAIB के स्पष्टीकरण के बावजूद एफएएस ने जांच से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक रिकाॅर्ड में शामिल करने की मांग की है। संगठन ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि समय रहते सुरक्षा चेतावनियां जारी क्यों नहीं की गईं।

    एफएएस का कहना है कि विमानन सुरक्षा में गोपनीयता के बजाय समय पर दी गई पारदर्शी जानकारी भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने में मदद कर सकती है।

    क्या है AI-171 हादसा
    जून 2025 में एअर इंडिया की उड़ान AI-171 (बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर) अहमदाबाद से लंदन जाते समय टेकआफ के ठीक 32 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी।

  • राजस्थान में ई-बस सेवा का विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    राजस्थान में ई-बस सेवा का विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा करने के मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

    जयपुर
     राजस्थान के शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में पीएम ई-बस सेवा योजना के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। योजना के तहत राजस्थान को दो चरणों में कुल 1150 इलेक्ट्रिक बसें मिलनी हैं। इनमें से 229 ई-बसें राज्य को प्राप्त हो चुकी हैं। वहीं, बसों के संचालन के लिए आठ जिलों में 65 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा करने पर फोकस कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ई-बसों का संचालन शुरू किया जा सके।

    योजना की प्रगति को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। ई-बस सेवा संचालित करने वाले जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा और अलवर जिलों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़े।

    बैठक में शासन सचिव रवि जैन ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना की अब तक की प्रगति और क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य सचिव ने अधिकारियों से ई-बसों के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए।

    चार्जिंग स्टेशन बनाना सबसे अहम कड़ी
    ई-बसों के संचालन में चार्जिंग नेटवर्क को महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और स्थापना तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बसों के संचालन से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रहनी चाहिए, ताकि यात्रियों को नियमित और निर्बाध सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके।

    उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और योजना से जुड़े सभी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। इससे आने वाले समय में प्राप्त होने वाली नई ई-बसों को भी बिना किसी बड़ी बाधा के संचालन में लाया जा सकेगा।

    एसी बसों में डिजिटल टिकटिंग की सुविधा
    पीएम ई-बस सेवा के तहत राजस्थान में संचालित होने वाली बसें वातानुकूलित इलेक्ट्रिक सिटी बसें हैं। इनमें पारंपरिक ईंधन वाली बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए इन बसों में डिजिटल टिकटिंग और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

    सरकार की योजना के तहत 1150 ई-बसों का पूरा बेड़ा तैयार होने के बाद राज्य के प्रमुख शहरों में शहरी परिवहन नेटवर्क को इससे बड़ा विस्तार मिलने की संभावना है। फिलहाल आठ शहरों में बसों और चार्जिंग स्टेशनों की व्यवस्था तैयार की जा रही है। आगामी चरण में जैसे-जैसे नई बसें उपलब्ध होंगी, उनके संचालन के लिए चार्जिंग और अन्य बुनियादी ढांचे को समय पर तैयार करना सरकार के सामने प्रमुख चुनौती रहेगी।

    जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित
    योजना के तहत जयपुर को सर्वाधिक 450 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इसके अलावा जोधपुर और बीकानेर को 125-125 बसें मिलेंगी। अजमेर, अलवर और कोटा में 100-100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा, जबकि उदयपुर, सीकर और भीलवाड़ा को 50-50 बसें आवंटित की गई हैं। इन बसों के संचालन से शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।