Category: राज्य

  • 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता और 2,372 सहायक अध्यापकों की हुई नियुक्ति

    319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता और 2,372 सहायक अध्यापकों की हुई नियुक्ति

    लखनऊ
     प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को मंगलवार को 3,567 नए शिक्षक और संस्था प्रधान मिले। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए। इनमें से 12 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने मंच पर नियुक्ति पत्र सौंपे।
     
    नियुक्ति पाने वालों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता पीजीटी और 2,372 सहायक अध्यापक टीजीटी हैं। इन सभी का चयन आयोग की ओर से पूर्व में विज्ञापित रिक्त पदों के लिए किया गया है।
     
    नौ वर्षों में 48 हजार से अधिक को नियुक्ति
    माध्यमिक शिक्षा विभाग के मुताबिक वर्ष 2017 से 22 सितंबर 2026 तक अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान और शिक्षक के विभिन्न पदों पर 48,018 अभ्यर्थियों का चयन और नियुक्ति हुई है। कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों और माध्यमिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।
     
    इन 12 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री से मंच पर नियुक्ति पत्र पाने वालों में डीएवी इंटर कॉलेज कानपुर नगर के प्रधानाचार्य राम सिंह और इंटर कॉलेज बीरा पट्टी वाराणसी के प्रधानाध्यापक राघवेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे।
     
    प्रवक्ता पद पर चयनित अग्रसेन कन्या कॉलेज वाराणसी की आंचल शुक्ला, केडीईएम इंटर कॉलेज बरेली के अनुराग श्रीवास्तव, जिला पंचायत इंटर कॉलेज उग्रसेन प्रयागराज की प्रज्ञा सिंह, वैष्णव हरिहर दास इंटर कॉलेज आजमगढ़ के गोपाल प्रजापति और दीप चंद ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर के मोहम्मद शादाब को भी मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र दिए।
     
    सहायक अध्यापक के पद पर चयनित पंडित दीनदयाल इंटर कॉलेज गोरखपुर की उषा सिंह, जनता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज संभल के आकाश कुमार, लाला राम स्वरूप शिक्षण संस्थान लखनऊ की रीना यादव, नगर पालिका कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झांसी की सोनम त्रिपाठी और नेहरू इंटर कॉलेज कुशीनगर के अमन कुमार ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति पत्र प्राप्त किए।

  • GMDA घोटाले में ED का शिकंजा, जालंधर से दिल्ली तक कई ठिकानों पर रेड

    GMDA घोटाले में ED का शिकंजा, जालंधर से दिल्ली तक कई ठिकानों पर रेड

    चंडीगढ़/नई दिल्ली

    पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण ( GMDA ) के कार्यालय में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, जालंधर, चंडीगढ़ और दिल्ली से पहुंची ईडी की टीमें तीन वाहनों में कार्यालय पहुंचीं और जांच शुरू की। अधिकारियों ने मामले से संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की पड़ताल की। बताया जा रहा है कि छापे मुख्य रूप से जीएमएडीए कार्यालय और पंजाब आवास विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस विकास गर्ग के कार्यालय में मारे गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीमों ने दफ्तरों में दस्तावेज खंगाला और कंप्यूटर रिकॉर्ड को भी देखा। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के फोन भी जांच के लिए लिए लिए गए हैं।

    ईडी की ओर से फिलहाल छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई जीएमएडीए में लगभग 150 करोड़ रुपये के भू-उपयोग परिवर्तन (CLU) घोटाले और शुल्क में कथित अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के तहत की जा रही है। जांच में सनटेक सिटी (न्यू चंडीगढ़) सहित कई परियोजनाएं शामिल हैं। इससे पहले ईडी इस मामले में दो भवन निर्माताओं के ठिकानों पर भी छापेमारी कर चुकी है।

    मामले में आईएएस अधिकारी कंवलप्रीत बराड़ से 18 और 27 अगस्त को पूछताछ की गई थी। 18 अगस्त को उनसे करीब आठ से नौ घंटे तक पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बराड़ नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की पूर्व निदेशक रह चुकी हैं। पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा 9 सितंबर को ईडी के जालंधर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश हुए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। उस समय वह आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख थे।

    ईडी ने 10 सितंबर को मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी समन जारी कर मामले से संबंधित अभिलेख और जांच की जानकारी मांगी थी। मंगलवार को जीएमडीए कार्यालय में हुई कार्रवाई को इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है

  • प्रयागराज में धरने पर बैठे युवाओं के लिए एनसीटीई को पत्र भेजने को कहा, एक बार राहत देने की बात की

    प्रयागराज में धरने पर बैठे युवाओं के लिए एनसीटीई को पत्र भेजने को कहा, एक बार राहत देने की बात की

     लखनऊ
     प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को मंगलवार को 3,567 नए शिक्षक और संस्था प्रधान मिले। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए। इनमें से 12 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने मंच पर नियुक्ति पत्र सौंपे।
     
    नियुक्ति पाने वालों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता पीजीटी और 2,372 सहायक अध्यापक टीजीटी हैं। इन सभी का चयन आयोग की ओर से पूर्व में विज्ञापित रिक्त पदों के लिए किया गया है।
     
    नौ वर्षों में 48 हजार से अधिक को नियुक्ति
    माध्यमिक शिक्षा विभाग के मुताबिक वर्ष 2017 से 22 सितंबर 2026 तक अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में संस्था प्रधान और शिक्षक के विभिन्न पदों पर 48,018 अभ्यर्थियों का चयन और नियुक्ति हुई है। कार्यक्रम में चयनित अभ्यर्थियों और माध्यमिक शिक्षा विभाग की उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।
     
    इन 12 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र
    मुख्यमंत्री से मंच पर नियुक्ति पत्र पाने वालों में डीएवी इंटर कॉलेज कानपुर नगर के प्रधानाचार्य राम सिंह और इंटर कॉलेज बीरा पट्टी वाराणसी के प्रधानाध्यापक राघवेंद्र प्रताप सिंह शामिल रहे।
     
    प्रवक्ता पद पर चयनित अग्रसेन कन्या कॉलेज वाराणसी की आंचल शुक्ला, केडीईएम इंटर कॉलेज बरेली के अनुराग श्रीवास्तव, जिला पंचायत इंटर कॉलेज उग्रसेन प्रयागराज की प्रज्ञा सिंह, वैष्णव हरिहर दास इंटर कॉलेज आजमगढ़ के गोपाल प्रजापति और दीप चंद ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर के मोहम्मद शादाब को भी मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र दिए।
     
    सहायक अध्यापक के पद पर चयनित पंडित दीनदयाल इंटर कॉलेज गोरखपुर की उषा सिंह, जनता राष्ट्रीय इंटर कॉलेज संभल के आकाश कुमार, लाला राम स्वरूप शिक्षण संस्थान लखनऊ की रीना यादव, नगर पालिका कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झांसी की सोनम त्रिपाठी और नेहरू इंटर कॉलेज कुशीनगर के अमन कुमार ने मुख्यमंत्री से नियुक्ति पत्र प्राप्त किए।

  • पटना में तेजी से बढ़े टाइफाइड के मरीज, PMCH-IGIMS समेत अस्पतालों में बढ़ी भीड़

    पटना में तेजी से बढ़े टाइफाइड के मरीज, PMCH-IGIMS समेत अस्पतालों में बढ़ी भीड़

    पटना
     बारिश और बदलते मौसम के बीच राजधानी में बुखार और संक्रमण के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वाइन फ्लू के साथ टायफाइड और वायरल संक्रमण का प्रकोप भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना 50 से अधिक मरीज टायफाइड जैसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।

    मरीजों में तेज बुखार, खांसी, कमजोरी और चक्कर के साथ गले में दर्द, सूखी खांसी और जोड़ों में दर्द की शिकायत प्रमुख रूप से सामने आ रही है।

    पिछले एक सप्ताह में 300 से अधिक मरीज
    पीएमसीएच, आईजीआईएमएस , एनएमसीएच, एम्स पटना और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल की ओपीडी में पिछले एक सप्ताह में 300 से अधिक मरीजों में टाइफाइड की पुष्टि हुई है। इनमें पीएमसीएच में 98, आईजीआईएमएस में 92, एनएमसीएच में 45, एम्स में 58 और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल में सात मरीज शामिल हैं।

    अस्पतालों के अनुसार, कुछ समय पहले तक यह संख्या 100 से भी कम थी। कंकड़बाग, बुद्धा कालोनी, राजीव नगर, बोरिंग रोड, गर्दनीबाग, दानापुर, महेंद्रू और नेपाली नगर समेत कई इलाकों में जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की शिकायत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर नियमित फॉगिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं हो रहा है। टूटी नालियां, जमा पानी, तालाबों के आसपास उगी घास और गंदगी मच्छरों के पनपने का कारण बन रही है।

    वायरल व डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू की भी जांच
    पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह और आईजीआईएमएस के प्रवक्ता प्रो. डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि टायफाइड और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों के लक्षणों के आधार पर आवश्यक जांच कराई जा रही है। मौसम में बदलाव को देखते हुए स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण वाले मरीजों के सैंपल लेने का निर्देश दिया गया है। वायरल बुखार और डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू की भी जांच कराई जा रही है।

    सैंपल पटना सिटी के अगमकुआं स्थित आरएमआरआई सेंटर भेजे जा रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को प्री-जांच और आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, बारिश और जलजमाव के कारण बैक्टीरिया तथा मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में लगातार बुखार, खांसी या शरीर में दर्द रहने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है

    टाइफाइड से बचाव के लिए रखें सावधानी

    • साफ और उबला हुआ या सुरक्षित पानी ही पिएं।
    • खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
    • खाना खाने और शौचालय के इस्तेमाल के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं।
    • फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
    • बुखार रहने पर खुद से एंटीबायोटिक दवा न लें।
    • चिकित्सक की सलाह पर जांच और उपचार कराएं।
    • घर और आसपास पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन नहीं हो सके।

     

  • लखनऊ में सिर्फ 6% भवनों के पास वैध नक्शा, 30 हजार अवैध निर्माण पर कार्रवाई का इंतजार

    लखनऊ में सिर्फ 6% भवनों के पास वैध नक्शा, 30 हजार अवैध निर्माण पर कार्रवाई का इंतजार

    लखनऊ
    सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सोमवार को लोकेश कुमार की याचिका की सुनवाई करते हुए मेरठ में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण पर चिंता जताने साथ ही अथॉरिटी को फटकार भी लगाई है।

    यह खबर राजधानी में लखनऊ विकास प्राधिकरण व आवास विकास परिषद की आंखें खोलने वाली है। साथ ही ताबड़तोड़ अवैध निर्माण करने वालों को डराने वाली भी है, क्योंकि भविष्य में यदि ऐसा आदेश लखनऊ के लिए हुआ तो क्या होगा? जवाब है 30 हजार से अधिक इमारतें और 241 आवासीय कॉलोनियां अवैध बनी हैं।

    अवैध आवासीय व व्यावसायिक निर्माण रोकने के लिए मेरठ का प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जबकि लखनऊ में ही ऐसा ही कदम उठाया जा चुका है। दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के तत्कालीन मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति रजनीश कुमार की खंडपीठ ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक कुमार की याचिका समेत चार अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए बहुमंजिला इमारतों के अवैध निर्माण के मामले में एलडीए से जवाब तलब किया था।

    हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पूरे शहर की बदतर स्थिति विस्तार से बताई गई थी। राजधानी की तमाम बहुमंजिला इमारतें अवैध तरीके से बनाई गई हैं। इनमें से कुछ में स्वीकृति से ज्यादा मंजिलें बना दी गईं तो कई में अवैध निर्माण किया गया।

    एलडीए ने कुछ की पहचान तो की है, लेकिन बड़े भवनों को ध्वस्त नहीं किया गया। अवैध निर्माण में अधिकारियों की मिलीभगत है, लेकिन इनके खिलाफ अभी तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। उस समय शहर में करीब 12500 अवैध निर्माण होने का दावा किया गया था, इनमें अपार्टमेंट, कांप्लेक्स, रो हाउसेस, प्लाटिंग सोसाइटी शामिल हैं।

    241 अवैध आवासीय कॉलोनियां चिन्हित
    शासन-प्रशासन ने इन पर अंकुश लगाने के लिए आदेश दिए, मगर हुआ कुछ नहीं। होटल लेवाना सुइट्स अग्निकांड के बाद इनकी रफ्तार और बढ़ गई। इसके लिए प्रवर्तन के इंजीनियर व अफसर जिम्मेदार हैं। आवासीय भूखंडों पर सबसे ज्यादा होटल गोमती नगर, शहीद पथ के किनारे व गोमतीनगर विस्तार में बने हैं। एलडीए की सीलिंग के बावजूद ये इमारतें गुपचुप तरीके से बनकर तन गईं। इन पर कभी एलडीए का बुलडोजर नहीं चल सका। इस पर प्रभावी आदेश नहीं हो सका।

    इधर चार साल में अवैध भवन बनने की रफ्तार बढ़ गई यही वजह है कि अवैध भवनों का ग्राफ करीब 30 हजार तक पहुंच चुका है। लगभग ढाई हजार से अधिक नोटिस अवैध निर्माण करने वालों को दिए गए हैं। ऐसे ही 241 अवैध आवासीय कॉलोनियां चिन्हित हैं।

    राजधानी में अवैध निर्माण का ताजा प्रकरण अलीगंज के अवैध व्यावसायिक कांप्लेक्स में आग लगने के बाद सामने आई है। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गूगल स्ट्रीट व्यू तकनीक का उपयोग करके सिर्फ अलीगंज क्षेत्र में 51 अवैध निर्माण खोजा था।

    उसी समय एलडीए ने शहर में 101 अवैध भवनों को गिराने की कार्यवाही जल्द शुरू करने का दावा किया लेकिन, अब तक यह शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार स्वीकार कर चुके हैं कि राजधानी में सिर्फ छह प्रतिशत के पास ही वैध नक्शे हैं।

  • फसल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो MSP पर खरीद में दिक्कत, हरियाणा में 27 सितंबर तक मौका

    फसल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो MSP पर खरीद में दिक्कत, हरियाणा में 27 सितंबर तक मौका

    चंडीगढ़
     मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर खरीफ की फसल का पंजीकरण कराने के लिए किसानों को एक बार फिर से मौका दिया गया। सोमवार को पोर्टल खोला गया जो 27 सितंबर तक खुला रहेगा। पहले दिन सोनीपत से 11, फरीदाबाद से 23 नूंह से 13 तथा महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी तथा गुरुग्राम से तीन-तीन किसानों सहित कुल 56 किसानों ने एसडीएम कार्यालय में पंजीकरण के लिए आवेदन दिया है।

    पंजीकरण नहीं कराने वाले किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदने तथा अन्य सुविधा नहीं देने का निर्णय लिया गया है। किसान की ओर से आवेदन एसडीएम संबंधित तहसीलदार, नायब तहसीलदार तीन दिन के अंदर सत्यापित कर अनुमानित विवरण तैयार कर ई-खरीद किसान पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

    प्रदेश सरकार ने उन किसानों को एक बार फिर से मौका दिया जो 31 जुलाई तक पोर्टल पर फसल का विवरण नहीं दर्ज कर पाए थे। पिछले खरीफ सीजन में पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या के मुकाबले इस सीजन में पंजीकरण कराने वाले किसानों की संख्या 1.52 लाख कम है।

  • राहत राशि के भुगतान में न हो देरी, प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं पुनर्वास से भी जोड़ा जाए

    राहत राशि के भुगतान में न हो देरी, प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा एवं पुनर्वास से भी जोड़ा जाए

    देहरदून
    मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे। यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिले। इसके लिए मामलों की नियमित समीक्षा के साथ पूरी व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक अधिनियम के अंतर्गत दर्ज जिन मामलों में विवेचना लंबित है, उनके लंबित रहने के कारणों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लंबे समय से लंबित एवं गंभीर प्रकृति के मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की भी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यकता के अनुसार विशेष लोक अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सहायता केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आवश्यकता के अनुसार उन्हें चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाए। गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो तथा पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाए। प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा तथा सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में अधिनियम से संबंधित मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की विवेचना और पीड़ितों के साथ व्यवहार के संबंध में नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। समाज कल्याण, पुलिस एवं अभियोजन विभाग आपसी समन्वय से समय-समय पर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करें। मुख्यमंत्री ने मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मामलों के निस्तारण, विवेचना अथवा राहत वितरण में अपेक्षित प्रगति नहीं है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। अच्छा कार्य करने वाले जिलों की प्रभावी व्यवस्थाओं को अन्य जिलों के साथ साझा किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के संबंध में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा। यदि किसी जिले या विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन, प्रशिक्षण अथवा बजट की आवश्यकता है तो उसका प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कार्यवृत्त तक सीमित न रहें। प्रत्येक निर्णय के लिए जिम्मेदारी और समय-सीमा निर्धारित करते हुए उनकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ित को न्याय और सहायता के लिए भटकना न पड़े तथा शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा दिखाई दे, यह सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

    बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189 और वर्ष 2025 में 157 अभियोग पंजीकृत हुए। वर्ष 2026 में 15 सितम्बर तक 116 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 25 प्रकरण विवेचनाधीन हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, वर्ष 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितम्बर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। मुख्य सचिव और जनपद स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बैठकों का नियमित आयोजन किया गया।

    बैठक में समाज कल्याण मंत्री  खजान दास, विधायक मती ममता राकेश, सचिव गृह  शैलेश बगौली, सचिव समाज कल्याण  धर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद मती रंजना राजगुरू, अपर पुलिस महानिदेशक  ए.पी.अशुमन, आईजी  बरिंदरजीत सिंह, निदेशक समाज कल्याण  संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण  संजय टोलिया एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

  • ₹2000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क, सीतारमण बोलीं- ग्राहक नहीं देंगे पैसा

    ₹2000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क, सीतारमण बोलीं- ग्राहक नहीं देंगे पैसा

    चंडीगढ़ 
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि दो हजार रुपये से अधिक के व्यापारी आधारित यूपीआई लेनदेन पर लगने वाला व्यापारी छूट दर शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि यह शुल्क भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच होगा और इसका भार ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने संसद के सत्र के दौरान भी इस विषय पर स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने विपक्षी दलों पर इस मुद्दे को लेकर गलतफहमी फैलाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

    सीतारमण के अनुसार, व्यापारी छूट दर कोई कर या उपकर नहीं है और इससे प्राप्त राशि भारत की संचित निधि में जमा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने और सेवाओं में सुधार के लिए सेवा प्रदाताओं के बीच लगाया जाने वाला शुल्क है।

    राष्ट्रीय भुगतान निगम ने 15 सितंबर को व्यापारी छूट दर से जुड़ी नई व्यवस्था लागू की। इसके तहत दो हजार रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। हालांकि, ग्राहकों के लिए यूपीआई से भुगतान पहले की तरह निःशुल्क रहेगा। प्रत्येक लेनदेन पर इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है। सरकार के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले लेनदेन पर इस व्यवस्था का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। शुल्क का वितरण बैंक और भुगतान अनुप्रयोग उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं समेत भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच किया जाएगा।

    राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर भी साधा निशाना
    वित्त मंत्री ने इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान हुई कथित नकल के मामले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसे लोगों का समर्थन या उन्हें प्रोत्साहित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है, लेकिन किसी का इस तरह मजाक उड़ाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, विपक्ष के नेता को ऐसे व्यवहार को बढ़ावा नहीं देना चाहिए था। 

    पंजाब को धन आवंटन पर आरोपों को किया खारिज
    पंजाब सरकार की ओर से केंद्र से मिलने वाले धन में भेदभाव के आरोपों पर सीतारमण ने कहा कि किसी भी राज्य के साथ उसके अधिकार के धन को लेकर भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि राज्यों को मिलने वाली राशि में कोई अनावश्यक कटौती नहीं की जाती और भुगतान समय पर किया जाता है। वित्त मंत्री ने आम आदमी पार्टी पर अपनी सरकार के कामकाज पर उठ रहे सवालों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे आरोप लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव नजदीक होने के कारण इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं और इन्हें राज्य सरकार की कथित विफलताओं को छिपाने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • जमुई कांड में पुलिस की कार्रवाई, मुख्य आरोपी नंदन यादव घायल; दूसरे का पैर टूटा

    जमुई कांड में पुलिस की कार्रवाई, मुख्य आरोपी नंदन यादव घायल; दूसरे का पैर टूटा

    जमुई
     छात्रा के साथ छेड़खानी और शर्मनाक हरकत के आरोपी का पुलिस ने एनकाउंटर किया है। ये एनकाउंटर जमुई जिले में ही हुआ, जहां छेड़खानी के मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने गोली मार दी है। आरोपी नंदन के पैर में गोली लगी है।

    जमुई में छात्रा से शर्मनाक हरकत करने वाले का एनकाउंटर
    बताया जा रहा है कि छात्रा से छेड़खानी करने वालों में सबसे आगे नंदन यादव ही था। उसी ने छात्रा के साथ बेहद ही शर्मनाक हरकत की थी। इसके बाद से ही पुलिस उस पर FIR दर्ज कर उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इनमें से 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसी के बाद पुलिस नंदन यादव की तलाश में थी। इसी बीच पुलिस को उसके जमुई में ही छिपे होने की खबर मिली।

    मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने मारी गोली
    नंदन यादव ही इस केस में मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस जानकारी जुटाते हुए उसके ठिकाने मड़वा पहाड़ी पर पहुंच गई। वहां पुलिस ने नंदन को चारों तरफ से घेर लिया और उसे सरेंडर करने की चेतावनी दी। पुलिस का कहना है कि नंदन ने इस दौरान भागने पर कोशिश की तो पुलिस ने उसे रोकने के लिए गोली चलाई। ये गोली नंदन यादव के पैर में लगी। इसके बाद वो वहीं गिर गया। फिर पुलिस ने उसे दबोच लिया और इलाज के लिए अस्पताल ले आई। वहीं दूसरा आरोपी हरेराम फरार बताया जा रहा है।

    इसी मड़वा पहाड़ी के पास हुई थी छेड़खानी
    आपको बता दें कि 19 सितंबर की शाम इसी मड़वा पहाड़ी के पास, जहां नंदन यादव को पुलिस ने पैर में गोली मारी, जमुई की छात्रा के साथ छेड़खानी हुई थी। मुंह पर गमछा बांधे और छात्रा को उठाकर जंगल की तरफ ले जाने की कोशिश करने वाला आरोपी ही नंदन यादव बताया जा रहा है। जमुई जिले की पुलिस ने उसे उसी इलाके में गोली मारी, जहां उसने छात्रा के साथ छेड़खानी और शर्मनाक हरकत की थी।

    वीडियो हुआ था वायरल
    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले को लेकर हड़कंप मच गया था. वीडियो में कुछ युवक स्कूली छात्र और छात्रा के साथ अभद्रता और छात्रा के साथ बैड टच करते नजर आ रहे थे. वीडियो देशभर में वायरल होने के बाद प्रशासन भी एक्टिव मोड में आ गया था. मामले में सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई थी और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. महिला आयोग ने भी मामले पर संज्ञान लिया था। 

    सोशल मीडिया पर वायरल करने वाला अरेस्ट
    इससे पहले घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।आरोपी की पहचान रामाशीष चौधरी के रूप में हुई है। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर यह कार्रवाई की है।

    19 सितंबर को हुई थी बदसलूकी
    घटना 19 सितंबर की शाम करीब 7 बजे की है। दोनों पीड़ित बच्चे 10वीं क्लास में पढ़ते हैं। शनिवार को ट्यूशन के बाद दोनों जमुई स्थित मड़वा पहाड़ी घूमने गए थे। लौटते समय कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया और इसके बाद ये घटना हुई।

    बिहार के जमुई में छात्रा के साथ बीच सड़क पर छेड़खानी और अश्लील हरकतें की गई। उसके दोस्त के साथ आरोपियों ने गाली-गलौज और मारपीट की। इतना ही नहीं, छात्रा के साथ हुई आपत्तिजनक हरकत का वीडियो बनाया, और इसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया।

    प्राइवेट पार्ट को किया था टच
    मड़वा पहाड़ी घूमने गए दोनों स्टूटेंड्स के साथ करीब 1 घंटे तक अभद्रता की गई। इस दौरान दोनों ने भागने के लिए कई बार संघर्ष किया। इस दौरान नंदन यादव छात्रा का पीछा करता है और उसे पीछे से पकड़ लेता है।

    वीडियो में आरोपी छात्रा के साथ जबरदस्ती करता दिखाई देता है। पहले आरोपी ने छात्रा को पीछे से पकड़ा, इसके बाद वो उसके प्राइवेट पार्ट पर हाथ रखते हुए गोद में उठा लेता है।

    ये हरकत देखकर छात्र तुरंत अपनी दोस्त को बचाने के लिए वहां पहुंचता है और उसे आरोपी के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश करता है। दोनों के बीच खींचतान होती है। छात्र किसी तरह अपनी दोस्त को छुड़ा लेता है।

    इसके बाद भी आरोपी दोनों को परेशान करने और रोकने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। दोनों बच्चे लगातार वहां से निकलने की कोशिश करते रहते हैं।

  • यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित, 16 अक्टूबर को होगा मतदान

    यूपी में राज्यसभा चुनाव की तारीख घोषित, 16 अक्टूबर को होगा मतदान

    नई दिल्ली

    चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा कर दी है। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों सहित 12 राज्यसभा सीटों पर आगामी 16 अक्टूबर को मतदान होंगे। वहीं वोटों की गिनती भी 16 अक्टूबर को ही शुरू हो जाएगी और देर शाम तक नतीजे घोषित होने की संभावना है। सबसे अहम बात यह है कि 12 में से 10 सीटें उत्तर प्रदेश की हैं। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव पर निगाहें टिकी हुई हैं।

    वहीं एक सीट उत्तराखंड की है। यहां से भाजपा के श्री नरेश बंसल रिटायर हो रहे हैं। इसके अलावा टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद बंगाल की एक सीट पर भी उपचुनाव होगा।

    गौरतलब है कि आगामी 25 नवंबर को राज्यसभा के कुल 11 सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें भाजपा के कुल 8 सांसद हैं। वहीं एक बहुजन समाज पार्टी और एक समाजवादी पार्टी के एक सांसद शामिल हैं। भाजपा के नरेश बंसल, बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं, सपा से राम गोपाल यादव और बसपा के एकमात्र सांसद रामजी भी रिटायर हो रहे हैं।

    चुनाव का पूरा शेड्यूल
    चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक राज्यसभा चुनावों के लिए आगामी 29 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख होगी। उम्मीदवार 9 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। चुनाव 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक संपन्न कराया जाएगा। 16 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी।

    विधान परिषद चुनाव का भी ऐलान
    इसके अलावा आयोग ने चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर भी चुनाव की घोषणा की है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11 सीटें, बिहार की 8 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं। सभी 28 सीटों पर 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। वहीं 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी है।

    UP में NDA खेमे के पास करीब 292 विधायक
    यूपी में एनडीए खेमे के पास करीब 292 विधायक हैं. इस लिहाज से बीजेपी गठबंधन आसानी से 7 से 8 सीटें जीत सकता है. वहीं, सपा के पास विधानसभा में 100 से अधिक विधायक हैं. इस संख्या बल के साथ सपा 2 सीटें बेहद आसानी से अपने पाले में कर लेगी. वहीं, उत्तराखंड से खाली हो रही सीट पर सत्ताधारी दल का मजबूत दबदबा है. मौजूदा समीकरणों को देखते हुए यह सीट भी भाजपा के पाले में जाएगी। 

    बंगाल की 1 सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा?
    पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि हाल ही में टीएमसी सांसद रुक्मिणी मलिक ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. इसी साल अप्रैल में वह राज्य सभा के लिए चुनी गईं थीं. अब यहां उपचुनाव हो रहा है। 

    चुनाव का टाइम टेबल
    राज्यसभा चुनाव के लिए नोटिफिकेशन 29 सितंबर को जारी किया जाएगा और नॉमिनेशन 6 अक्टूबर को बंद होंगे। नॉमिनेशन की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है। वोटिंग 16 अक्टूबर को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक होगी और उसी दिन शाम 5:00 बजे वोटों की गिनती शुरू होगी।

    कौन-कौन हो रहा रिटायर?
    उत्तर प्रदेश से रिटायर होने वाले राज्यसभा सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, राम गोपाल यादव, नीरजा शेखर, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रामजी, सीमा और डॉ दिनेश शर्मा शामिल हैं। नरेश बंसल उत्तराखंड से एकमात्र सेवानिवृत्त सदस्य हैं।

    आयोग ने निर्देश दिया है कि मतपत्रों पर प्राथमिकताएं अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए पहले से तय विनिर्देशों वाले एकीकृत बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग किया जाए।