Category: राज्य

  • सीबीजी, वेस्ट टू एनर्जी और बायोफ्यूल से कचरे का होगा बेहतर उपयोग, शहरों की सुधरेगी क्वालिटी आफ लाइफ

    सीबीजी, वेस्ट टू एनर्जी और बायोफ्यूल से कचरे का होगा बेहतर उपयोग, शहरों की सुधरेगी क्वालिटी आफ लाइफ

    ग्रेटर नोएडा
    वेस्ट मैनेजमेंट आज एक बड़ी बिजनेस अपॉर्चुनिटी भी बन सकता है। सीबीजी, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोफ्यूल और रिसाइक्लिंग एवं री-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में अपशिष्ट का उपयोग कर नए उद्योगों और रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश के चौथे इंटरनेशनल ट्रेड शो में नगर विकास विभाग की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर आयोजित सेमिनार में ये बातें कहीं। उन्होंने नगरों को और अधिक स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाने के लिए नवीनतम तकनीक के माध्यम से ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने देश में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है।

    नगर विकास मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल स्वच्छता से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे शहरों के स्वास्थ्य, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से हम शहरों को स्वच्छ रखने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। अब हमारा प्रयास है कि इस जनआंदोलन को और अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और स्थायी बनाया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन व्यवस्था और जनभागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

    शर्मा ने लखनऊ के शिवरी स्थित सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और प्रेरणास्थल की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस अपशिष्ट निकलता है। यदि इसका वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाए तो यही अपशिष्ट एक बड़े अवसर में परिवर्तित हो सकता है।

  • योगी सरकार की सख्ती का असर, 2.30 करोड़ की अवैध हेरोइन-स्मैक के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

    योगी सरकार की सख्ती का असर, 2.30 करोड़ की अवैध हेरोइन-स्मैक के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

    लखनऊ/हाथरस
     योगी सरकार में उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की आगरा ऑपरेशनल यूनिट ने हाथरस में कार्रवाई करते हुए चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने उनके कब्जे से एक किलोग्राम से अधिक हेरोइन और स्मैक बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये है।

    एएनटीएफ आगरा की टीम ने हाथरस के थाना सिकंदराराऊ क्षेत्र में बिजलीघर नगला जलेल पुल के पास कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों के पास से हेरोइन और स्मैक के अलावा एक बलेनो कार, चार मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई। बरामदगी के संबंध में थाना सिकंदराराऊ, हाथरस में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत विधिक कार्रवाई की गई है।

    चार सक्रिय तस्कर गिरफ्तार
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा के वृंदावन निवासी सुदामा और मोनू कुशवाहा, मथुरा में रह रहे लखीमपुर खीरी निवासी अमित कुमार शुक्ला और मथुरा निवासी प्रीतम सिंह के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने मादक पदार्थों की खरीद और फुटकर बिक्री से जुड़े होने की बात स्वीकार की।

    वृंदावन और आस-पास होती थी सप्लाई
    पूछताछ के अनुसार आरोपी कासगंज निवासी एक व्यक्ति से हेरोइन और स्मैक खरीदकर लाते थे। इसके बाद मादक पदार्थों की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर वृंदावन और आस-पास के क्षेत्रों में महंगे दामों पर बेचते थे। बिक्री से होने वाले मुनाफे को आपस में बांटते थे।

  • मोदी-योगी सरकार ने  बदली काशी की तस्वीर, 13 वर्षों में 52.71 करोड़ पर्यटकों ने किया भ्रमण

    मोदी-योगी सरकार ने बदली काशी की तस्वीर, 13 वर्षों में 52.71 करोड़ पर्यटकों ने किया भ्रमण

    वाराणसी
    गंगा के अर्धचन्द्राकार घाट, मंदिरों की घंटियां, संकरी गलियों की अपनी-अलग पहचान और सदियों पुरानी परंपराएं काशी को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं। यही वजह है कि देश-दुनिया के लोगों के लिए काशी हमेशा से आस्था और आकर्षण का केंद्र रही है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने समय के साथ यहां सुविधाओं का विस्तार किया। प्राचीन विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने काशी को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य बनाया है। यही वजह है कि यहां पर्यटकों की संख्या साल-दर साल बढ़ती जा रही है।
    पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक  52 करोड़, 71 लाख 41 हजार 814 भारतीय और विदेशी पर्यटकों ने काशी का भ्रमण किया। इनमें 52 करोड़ 40 लाख 46 हजार 803  भारतीय और 30 लाख 95 हजार 11 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जितने पर्यटक काशी आए, वर्ष 2016 के जुलाई माह तक ही उससे 4 करोड़ 10 लाख 70 हजार 422  अधिक लोग आ चुके हैं।

    पर्यटकों की बढ़ती संख्या से काशी की अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार  
    पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या काशी की बदलती तस्वीर को दर्शाती है, जिसका सीधा असर काशी की स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, नाव संचालन, फूल-माला, पूजा सामग्री , टैक्सी-ऑटो, टूर एवं ट्रैवल सेवाओं के साथ-साथ स्थानीय बाजारों और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है। इससे पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, नाविकों, गाइडों, कारीगरों और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर बने हैं।  इस तरह पर्यटन अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि काशी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हो रहा है।   

    सुव्यवस्थित विकास के साथ बढ़ा काशी का आकर्षण
    वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद काशी में विकास और पर्यटन को नई गति मिली। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं, स्वच्छता, घाटों के विकास और प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण से काशी का पर्यटन अनुभव लगातार समृद्ध हुआ है। पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्यटन अवसंरचना तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया, वहीं नए पर्यटन अनुभवों का भी विस्तार हुआ । काशी विश्वनाथ धाम के विकास से मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ीं, घाटों के सौंदर्यीकरण, बेहतर साफ-सफाई, सारनाथ के विकास और गंगा में रिवर क्रूज जैसी गतिविधियों ने पर्यटन के दायरे को और व्यापक किया। आज काशी में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं का संगम दिखाई देता है। सदियों पुरानी परंपराएं नए कलेवर में पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर काशी की यह बदलती तस्वीर बताती है कि विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।  

    वर्जन
     "हमारा प्रयास है कि काशी की सदियों पुरानी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को आधुनिक पर्यटन से जोड़ा जाए, ताकि दुनिया भर के पर्यटक यहां आकर केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, विरासत और जीवन शैली का भी अनुभव लेकर लौटें।"

     जयवीर सिंह
    पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ,उत्तर प्रदेश
     वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक वाराणसी में पर्यटकों की संख्या

    -वर्ष-भारतीय पर्यटक-विदेशी पर्यटक-कुल पर्यटक

    -2014 –52,02,236 –2,87,761–54,89,997

    -2015 –54,13,927–3,02,370– 57,16,297

    -2016 –56,00,146 –3,12,519– 59,12,665

    -2017– 59,47,355–34,860–62,82,215

    -2018 –60,95,890 –3,49,270 –64,45,160

    -2019 – 64,47,775– 3,50,000– 67,97,775

    -2020 – 8,76,303–1,06,189 –9,82,492

    -2021–30,75,913 –2,566 – 30,78,479

    -2022 –7,11,47,310– 83,741–7,12,31,051

    -2023–8,52,71,729 – 2,01,904 – 8,54,73,633

    -2024–10,97,87,811– 3,09,932 –11,00,97,743

    -2025 –17,27,52,530 – 3,21,358 –17,30,73,888

    – 2026 जुलाई तक  – 4,64,27,878–1,32,541– 4,65,60,419

  • राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अखिलेश की PDA रथयात्रा, सपा-कांग्रेस रिश्तों पर बढ़ी हलचल

    राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अखिलेश की PDA रथयात्रा, सपा-कांग्रेस रिश्तों पर बढ़ी हलचल

    लखनऊ
    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथयात्रा की शुरुआत की है। अखिलेश यादव ने रायबरेली का चुनाव राहुल गांधी को सीधे चुनौती देने के लिए किया है। अखिलेश ने इस यात्रा की शुरुआत अमेठी से इसलिए नहीं की क्योंकि उससे वह राहुल गांधी को सीधा संदेश नहीं दे पाते। वर्तमान में राहुल गांधी रायबरेली से लोकसभा के सांसद हैं। कांग्रेस पार्टी की स्थिति अमेठी और रायबरेली में भी अच्छी नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट की 10 विधानसभा सीटों में से सात पर ज़मानत जब्त हो गई थी। राहुल गांधी 2024 में सिर्फ सपा के समर्थन के कारण ही रायबरेली से चुनाव लड़ने की हिम्मत कर सके थे।
     
    2022 के विधानसभा चुनाव आंकड़ों के अनुसार, अमेठी लोकसभा सीट के तहत आने वाली 5 विधानसभा सीटों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। तिलोई में भाजपा/अपना दल को 99,472 वोट (48.54%), सपा को 71,643 वोट (35%), कांग्रेस को 21,978 वोट (10.7%) और बसपा को 6,120 वोट (2.99%) मिले। सलोन में भाजपा/अपना दल को 87,715 वोट (43.79%), सपा को 85,604 वोट (42.7%), कांग्रेस को 11,439 वोट (5.71%) और बसपा को 9,335 वोट (4.66%) मिले। जगदीशपुर में भाजपा/अपना दल को 89,315 वोट (43.94%), सपा को 27,971 वोट (13.8%), कांग्रेस को 66,491 वोट (32.7%) और बसपा को 10,198 वोट (5.02%) प्राप्त हुए। गौरीगंज में भाजपा/अपना दल को 72,077 वोट (35.53%), सपा को 79,040 वोट (39%), कांग्रेस को 28,964 वोट (14.3%) और बसपा को 9,872 वोट (4.87%) मिले। अमेठी विधानसभा में भाजपा/अपना दल को 70,121 वोट (36.93%), सपा को 88,217 वोट (46.5%), कांग्रेस को 14,080 वोट (7.42%) और बसपा को 10,202 वोट (5.37%) हासिल हुए। इस प्रकार अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा/अपना दल को 4,18,700 वोट (41.82%), सपा को 3,52,475 वोट (35.2%), कांग्रेस को 1,42,956 वोट (14.3%) और बसपा को 45,727 वोट (4.57%) मिले।

    रायबरेली लोकसभा सीट के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। बछरावां में भाजपा/अपना दल को 62,935 वोट (30.04%), सपा को 65,747 वोट (31.4%), कांग्रेस को 56,835 वोट (27.1%) और बसपा को 13,730 वोट (6.55%) मिले। हरचंदपुर में भाजपा/अपना दल को 78,009 वोट (38.69%), सपा को 92,498 वोट (45.9%), कांग्रेस को 16,230 वोट (8.05%) और बसपा को 7,335 वोट (3.64%) मिले। रायबरेली विधानसभा सीट पर भाजपा/अपना दल को 1,02,429 वोट (44.51%), सपा को 95,254 वोट (41.4%), कांग्रेस को 14,954 वोट (6.5%) और बसपा को 9,331 वोट (4.06%) प्राप्त हुए। सरेनी में भाजपा/अपना दल को 62,359 वोट (28.78%), सपा को 66,166 वोट (30.5%), कांग्रेस को 42,702 वोट (19.7%) और बसपा को 38,155 वोट (17.6%) हासिल हुए। ऊंचाहार में भाजपा/अपना दल को 75,893 वोट (35.79%), सपा को 82,514 वोट (38.9%), कांग्रेस को 9,985 वोट (4.71%) और बसपा को 34,692 वोट (16.4%) मिले। रायबरेली लोकसभा सीट का कुल योग देखें तो भाजपा/अपना दल को 3,81,625 वोट (35.67%), सपा को 4,02,179 वोट (37.6%), कांग्रेस को 1,40,706 वोट (13.2%) और बसपा को 1,03,243 वोट (9.65%) मिले।

    अखिलेश यादव के इस कदम के जवाब में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बयान दिया है कि यदि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं, तो कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी के गढ़ जैसे कन्नौज, इटावा और सैफई का रुख कर सकती है। अजय राय के इस बयान के जवाब में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जसवंतनगर और इटावा में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलेगा। अजय राय और शिवपाल यादव की जुबानी जंग से पूर्व कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन के बीच भी बयानबाजी हो रही है।

    कन्नौज और इटावा जिलों की छह में से चार विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने 2022 में चुनाव लड़ा था, जहां उसका प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। छिबरामऊ से कांग्रेस प्रत्याशी विजय कुमार को 1,194 वोट (0.42%) मिले और वह 7वें स्थान पर रहे। कन्नौज से विनीता देवी को 1,786 वोट (0.66%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं। इटावा से मोहम्मद राशिद को 1,476 वोट (0.6%) मिले तथा वह 5वें स्थान पर रहे। भरथना से स्नेह लता दोहरे को 1,854 वोट (0.75%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं।

    अखिलेश यादव का यह कदम कांग्रेस पार्टी के साथ सीटों के तालमेल से पूर्व ही अपनी ताकत का अहसास करवाने का प्रयास है। कांग्रेस और सपा गठबंधन के बीच भविष्य के सीट-बंटवारे की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी के गढ़ से इस यात्रा को शुरू करने को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा राज्य में खुद को मजबूत स्थिति में दिखाना चाहती है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति उत्तर प्रदेश में काफी कमजोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल दो सीट जीत सकी थी। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही। कांग्रेस पार्टी ने राज्य में 399 सीटों पर चुनाव लड़कर 387 सीटों पर ज़मानत जब्त करवाई थी।

    कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी और छह सीटें जीतने में सफल हुई थी, जिसमें अमेठी और रायबरेली की लोकसभा सीटें भी शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा की स्मृति ईरानी से चुनाव हार गई थी। 2019 में चुनाव हारने के डर से राहुल गांधी ने पहले ही केरल के वायनाड से नामांकन दाखिल कर दिया था। सपा को डर है कि अगर कांग्रेस पार्टी मजबूत हो गई तो उसका मुस्लिम जनाधार खिसक जाएगा और पार्टी कमजोर हो जाएगी, इसलिए सपा कांग्रेस को उसकी औकात में रखना चाहती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि वह सपा को कमजोर करे जिससे कि कांग्रेस पार्टी मजबूत हो सके। दोनों पार्टियों में मुस्लिम वोट बैंक के लिए आपस में प्रतिद्वंदिता है, जिसके तहत सहयोग के साथ ही अंदर ही अंदर आपसी प्रतिस्पर्धा भी देखी जाती है।

    कांग्रेस पार्टी का एक प्रयास यह भी है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तरह ही उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को कमजोर किया जाए। ममता बनर्जी को कमजोर करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने उनके साथ कोई गठबंधन नहीं किया था और कम से कम छह सीटों पर ममता बनर्जी को हराने का काम किया था। कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के पूर्व सभी क्षेत्रीय क्षत्रपों को हराकर नेस्तनाबूत किया जाए, जिससे कि भाजपा और मोदी के खिलाफ राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का सीधा मुकाबला हो सके।

  • World Tourism Day: झारखंड के जंगलों की औषधीय विरासत बनेगी पर्यटन और रोजगार का आधार

    World Tourism Day: झारखंड के जंगलों की औषधीय विरासत बनेगी पर्यटन और रोजगार का आधार

    रांची
     झारखंड के आदिवासी समाज के पास हजारों साल से संरक्षित अपनी चिकित्सा पद्धति है। राज्य में पर्यटन के विकास की योजनाओं के साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को जोड़ने पर राज्य सरकार लंबे समय से काम कर रही है।

    राज्य के वनों में वेलनेस प्रोडक्ट के लिए उपयोगी वनस्पति की पूरी श्रृंखला उपस्थित है। संताल परगना में मलूटी, देवघर और गिरिडीह के धार्मिक पर्यटन के साथ होड़ोपैथी (आदिवासी चिकित्सा) को जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में अर्थव्यवस्था का नया आधार तैयार हो सकता है।

    संताली और मुंडारी भाषा के शब्द होड़ोपैथी को विश्वभर में एथनो मेडिसन के तौर पर मान्यता दी जाती है। पेडों की छाल, जड़ और दूसरे वनस्पतियों के उपयोग से हड्डियों की मजबूती, नस और चर्मरोग का आसान उपचार किया जाता है।

    छोटानागपुर के कई हिस्सों में जलप्रपात देखने के लिए देशभर से लोग आते हैं। यहीं के जंगलों में औषधीय पौधे भी मिलते हैं। ऐसे में केरल के आयुर्वेदिक उपचार की तरह ही झारखंड के आदिवासी पारंपरिक चिकित्सा का समन्वय राज्य के पर्यटन को नई पहचान दे सकता है। रांची से सटे पुरुलिया के जंगलों में रहने वाले कई परिवार ऐसे प्रयोग से जुड़े हैं।

    आयुष में शामिल हो सकता है होड़ोपैथी
    पर्यटन के साथ स्वास्थ्यप्रद सेवाओं को जोड़ने के लिए झारखंड सरकार होड़ोपैथी को आयुष के तहत संबद्ध कराने का प्रयास कर रही है। संताली भाषा में ओलचिकी लिपि में होड़ोपैथी के दस्तावेज मौजूद हैं।

    राज्य सरकार इनके संरक्षण के साथ इन्हें उपयोगी बनाने में लगी है। आदिवासी युवाओं को इसकी जानकारी देकर पर्यटन स्थलों के पास सेंटर खोलने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

        झारखंड के आदिवासियों के पास पारंपरिक तौर पर अपनी चिकित्सा पद्धति है। प्रत्येक आदिवासी घर में वनों से मिलने वाली वनस्पति को औषधि बनाने की तकनीक मौजूद है। इसे पर्यटन से जोड़कर देशभर में प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। यह ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर लेकर आएगा। -डॉ. वेंकटेश कात्यायन पांडेय, आयुर्वेदाचार्य

     

  • CJI सूर्यकांत का संदेश- नशे से जूझ रहे बच्चों को संरक्षण, देखभाल और सम्मान जरूरी

    CJI सूर्यकांत का संदेश- नशे से जूझ रहे बच्चों को संरक्षण, देखभाल और सम्मान जरूरी

     पटना
    सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत पटना एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। यहां उन्होंने कहा कि बच्चों में नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य या अपराध का विषय नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। नशे की चपेट में आए बच्चों को इलाज, देखभाल, शिक्षा और सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिलना चाहिए। आपको बता दें कि बिहार में कई वर्षों से शराबबंदी कानून लागू है।

    मुख्य न्यायाधीश शनिवार को ‘ड्रग्स से परे बचपन : संरक्षण, देखभाल और पुनर्समावेशन’ विषय पर अपनी बात रख रहे थे। पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह के तहत लोकभवन में व्याख्यानमाला आयोजित किया गया था।

    समाज-सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी
    मुख्य न्यायाधीश ने बिहार को ज्ञान, शिक्षा और विरासत की भूमि बताते हुए कहा कि बच्चों को नशे से बचाना समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि बच्चों में मादक पदार्थों का सेवन होने से शिक्षा प्रभावित होती है, पारिवारिक रिश्तों में तनाव आता है और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशे की चपेट में आए बच्चे शोषण, हिंसा, तस्करी और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

    आत्मसम्मान की भी रक्षा करनी चाहिए
    सीजेआई ने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था को बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के साथ उसकी गरिमा और आत्मसम्मान की भी रक्षा करनी चाहिए। असली सफलता तब है जब बच्चा फिर से स्कूल, परिवार और सामान्य सामाजिक जीवन से जुड़ सके। उपचार खत्म होने के बाद भी सहायता जारी रहनी चाहिए, ताकि बच्चा दोबारा उसी जोखिम भरे माहौल में न लौटे।

  • बारिश ने बिगाड़ा किसानों का हिसाब, अलीगढ़ में धान-बाजरा की फसल को भारी नुकसान

    बारिश ने बिगाड़ा किसानों का हिसाब, अलीगढ़ में धान-बाजरा की फसल को भारी नुकसान

    अलीगढ़
    यूपी के अलीगढ़ में शुक्रवार की रात को आसमान से गिरी हल्की बौछार आधी रात के बाद रिमझिम बारिश में बदल गई। इस दौरान तेज ठंडी हवाओं ने जहां एक तरफ गर्मी से राहत दी तो वहीं ये हवाएं किसानों पर आफत बनकर टूटी। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों की पकी फसल जमींदोज हो गई। धान, बाजरा और ज्वार की फसल में नुकसान बताया गया है।

    रिमझिम बारिश गर्मी से राहत प्रदान करने वाली तो रहीं लेकिन इस बारिश ने किसान का हिसाब बिगाड़ दिया। इस समय अधिकतर खेतों में धान की फसल खड़ी है। कुछ की फसल पक चुकी है तो कुछ पर बालियां आ रही हैं। ऐसे में तेज हवा ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। इस प्राकृतिक आपदा में किसान कुछ न कर सके। सिर पर हाथ रखे किसान अपने नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। जिले में धान का रकबा 1 लाख 64 हजार हेक्टेयर है। लगभग सभी जगहों से नुकसान की सूचनाएं आ रही हैं। कृषि विभाग की टीम भी बारिश के दौरान विभिन्न ब्लॉक में भ्रमणशील रही। इस दौरान अकराबाद, गोंडा, गभाना, हरदुआगंज, गंगीरी में फसल नुकसान की बात कही जा रही है।

    वहीं धनीपुर में भी खेतों में धान जमीन पर आ गया है। धान पानी में डूबने से गुणवत्ता प्रभावित होती है। बाबूपुर के किसान चौ. नवाब सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ में लगी धन की फसल जमीन पर बिछ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार रविवार को भी इसी तरह बारिश की स्थिति रह सकती है। ऐसे में किसानों को आशंका सता रही है कि बचा हुआ धान भी न गिर जाए। धान के अलावा किसानों की बाजरा और ज्वार की फसल में भी नुकसान बताया गया है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि टीम जगह-जगह जाकर खेतों की स्थिति देख रही है। खेतों की स्थिति को सूचीबद्ध किया जा रहा है।

    तेज हवा व बारिश से फसल को नुकसान
    गभाना में शनिवार को सुबह से तेज हवा के साथ पड़ी बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक रही। धान के साथ ही बाज़रा की फसल खेतों में गिर गई। तहसील क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जमीन पर लेट गई है। किसानों को इस बात की आशंका सता रही है कि, कही फिर इसी तरह तेज बारिश हो गई तो खेत में पानी लग जायेगा और गिरी फसलों की बालियां अंकुरित होने लगेंगी। किसान लालपुर निवासी ललित, पनिहावर निवासी वीरपाल, भरतरी निवासी हीरेश कुमार मलिकपुरा निवासी शेरपाल सिंह का कहना है कि यह बारिश नुकसानदायक है। किसानों ने प्रशासन से जांच कर कर मुआवजे की मांग की है।

    किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
    चंडौस में शनिवार सुबह से रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने से जहां धान की फसल जलमग्न हो गई है, वहीं तेज बारिश के चलते कई खेतों में खड़ी फसल गिर गई। इससे किसानों को नुकसान की आशंका है। ताजपुर के किसान रुकनपाल् सिंह तोमर पुत्र जोगिंदर सिंह तोमर की करीब 10 बीघा धान की फसल बारिश के कारण खेत में गिर गई। किसान के अनुसार फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    मंडी में धान की बंपर आवक बारिश से भाव धड़ाम
    खैर में कृषि उत्पादन मंडी समिति में धान की बंपर आवक के बीच शनिवार को हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बारिश से मंडी में खुले में पड़ा धान भीग गया। वहीं धान के भाव में भी अचानक गिरावट आ गई। शुक्रवार तक करीब चार हजार रुपये क्विंटल तक बिक रहा धान शनिवार को घटकर 3000 से 3500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया। भाव गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। वहीं मंडी में धान की खरीद भी प्रभावित हुई।

  • हाईकोर्ट से रोक हटते ही बीसलपुर बांध में मत्स्य ठेके की नई निविदा जारी

    हाईकोर्ट से रोक हटते ही बीसलपुर बांध में मत्स्य ठेके की नई निविदा जारी

     राजमहल
     बीसलपुर बांध में मछली ठेके को लेकर करीब छह माह से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म होने की राह पर है। उच्च न्यायालय की ओर से रोक हटाए जाने के बाद मत्स्य विभाग ने बांध में मत्स्य ठेके के लिए नए सिरे से निविदा जारी कर दी है। निविदा में सालाना पांच करोड़ रुपए से अधिक की न्यूनतम राशि निर्धारित की गई है। इससे बांध के जलभराव क्षेत्र में मछली पकड़ने और इससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के फिर से व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

    गौरतलब है कि बीसलपुर बांध में मत्स्य आखेट को लेकर गत मार्च में पूर्व संवेदक की ओर से राशि जमा नहीं करवाने तथा जनहित याचिका के चलते राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब छह माह तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। न्यायालय की रोक हटने के बाद विभाग ने अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। बीसलपुर बांध में मत्स्य ठेके से सरकार को हर साल करीब पांच से छह करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। ठेका प्रक्रिया अटके रहने से अब तक करीब ढाई से तीन करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।

    रोक हटी, फिर भी लैंडिंग सेंटर पर सामान का जमावड़ा
    राजस्थान हाईकोर्ट की रोक हटे करीब एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन बीसलपुर बांध के मत्स्य लैंडिंग सेंटर पर अभी भी पूर्व संवेदक का सामान जमा है। सेंटर पर दर्जनों नावें, मोटर बोट सहित अन्य सामान पड़े हुए हैं। लंबे समय से सामान नहीं हटाए जाने से लैंडिंग सेंटर के उपयोग और व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    नोटिस देकर सामान हटवाने की तैयारी
    मत्स्य विभाग टोंक के बीसलपुर बांध विकास अधिकारी मदन सिंह ने बताया कि न्यायालय की रोक हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लैंडिंग सेंटर पर पूर्व संवेदक का सामान पड़ा होने के संबंध में जल्द नोटिस जारी कर सामान हटवाने की तैयारी की जा रही है।

    बीसलपुर बांध की इन मछलियों की मांग अधिक
    बीसलपुर बांध से मत्स्य विभाग को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलता है। बांध में मछली पकड़ने का ठेका 5 वर्षों के लिए होता है, जिसमें हर साल 12 फीसदी राशि बढ़ा दी जाती है। मछली पालन का ठेका 2 साल से नहीं हो पाया। मामला हाईकोर्ट मे विचाराधीन होने से सरकार को करीब 10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

    बीसलपुर बांध में एक मछली एक बार में हजारों अंडे देती हैं। अंडे देने के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य आखेट पर रोक लगाई जाती है। विदेशी व फार्मी मछली के तौर पर टाइगर, कोमलकार, सिल्वर, सिलोन, गिलासकार आदि प्रजाति की मछलियां पाई जाती है। जिनका बीज विभाग व ठेकेदार की ओर से डाला जाता है। मंडियों में इनके दाम देशी की अपेक्षा कम लगते हैं। सिंघाड़ा, लैची, बाम, समल आदि होती है, जिसमें कांटे कम होने से अधिक दामों पर बिकती है।

  • बाजरे की कीमत पर सरकार की गारंटी, बाजार भाव कम हुआ तो मिलेगा भावांतर का लाभ

    बाजरे की कीमत पर सरकार की गारंटी, बाजार भाव कम हुआ तो मिलेगा भावांतर का लाभ

    चंडीगढ़
    हरियाणा सरकार इस बार भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजरा उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ देना सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को बाजरा और धान खरीद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए।

    सरकार बाजरे की खरीद 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करेगी। वहीं, खुले बाजार में इससे अधिक भाव मिलने पर किसान अपनी उपज बाजार में बेच सकेंगे और एमएसपी 2900 रुपये तक पहुंचाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार भावांतर की भरपाई सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित किया जाएगा।

    उदाहरण के तौर पर यदि किसी किसान को खुले बाजार में बाजरे का भाव 2500 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है तो 2900 रुपये के एमएसपी और बिक्री मूल्य के बीच 400 रुपये प्रति क्विंटल के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी।

    वहीं, यदि खुले बाजार में भाव 2300 रुपये से कम रहता है तो सरकार 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बाजरा खरीदेगी और बाकी छह सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से भाव के अंतर की भरपाई करेगी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष बाजरे की खरीद के लिए सरकार ने पहले 2150 और बाद में 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की थी। ।

     

  • बुजुर्गों की पेंशन में बड़ा बदलाव, ₹1000 से बढ़कर हुई ₹1500; जानें नई किस्त व्यवस्था

    बुजुर्गों की पेंशन में बड़ा बदलाव, ₹1000 से बढ़कर हुई ₹1500; जानें नई किस्त व्यवस्था

     लखनऊ
    उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों के लिए योगी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है. वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर ₹1,500 प्रतिमाह कर दी गई है. पहले पात्र बुजुर्गों को ₹1,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन मिलती थी. यानी अब सालाना पेंशन राशि बढ़कर ₹18,000 हो गई है.

    तीन महीने की ₹3,000 पेंशन अब दो किस्तों में
    पेंशन भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. सितंबर 2026 से सामने आई नई व्यवस्था के अनुसार तीन महीने की कुल ₹3,000 पेंशन अब एक साथ मिलने के बजाय ₹1,500-₹1,500 की दो किस्तों में बैंक खाते में भेजी जा रही है. भुगतान DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के खाते में किया जा रहा है.

    सरकार ने बजट में भी बढ़ाया इंतजाम
    बुजुर्गों की पेंशन के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में भी बड़ा प्रावधान किया है. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए ₹1,500 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है. समाज कल्याण विभाग के लिए कुल ₹1,655 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है.

    किसे मिलेगा पेंशन का लाभ?
    वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के तहत बुजुर्गों की उम्र, आर्थिक स्थिति और अन्य निर्धारित शर्तें देखी जाती हैं. पेंशन का लाभ लेने के लिए रिकॉर्ड में आधार, बैंक खाता और अन्य जरूरी विवरण सही होना महत्वपूर्ण है.

    पेंशन नहीं आई तो ये काम जरूर करें
    अगर नई किस्त खाते में नहीं पहुंची है तो सबसे पहले e-KYC, आधार-बैंक लिंकिंग, NPCI मैपिंग और बैंक खाते की जानकारी जांचनी चाहिए. इनसे जुड़ी गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक सकता है. पेंशन का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है और समस्या होने पर समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है.

    बुजुर्गों के लिए क्या बदला?
        पेंशन: ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह
        सालाना सहायता: ₹18,000
        तीन महीने की राशि: ₹3,000
        नई भुगतान व्यवस्था: ₹1,500 + ₹1,500 की दो किस्तें
        वृद्धावस्था पेंशन के लिए अनुपूरक बजट में ₹1,500 करोड़
        भुगतान: DBT के जरिए बैंक खाते में

    इस तरह 2026 में यूपी के पात्र बुजुर्गों के लिए सबसे अहम बदलाव पेंशन राशि बढ़ने और भुगतान व्यवस्था में बदलाव का है.