Category: राज्य

  • दिल्ली के 14,947 पोलिंग बूथों पर आज विशेष कैंप, SIR में नाम जुड़वाने का मौका

    दिल्ली के 14,947 पोलिंग बूथों पर आज विशेष कैंप, SIR में नाम जुड़वाने का मौका

    नई दिल्ली
     दिल्ली में चल रही एसआईआर के लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी ड्राफ्ट पर आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा एक माह के लिए बढ़ा दी गई है

    मतदाता एसआईआर पर अपने दावे और आपत्तियां 30 अक्टूबर तक दर्ज करा सकते हैं। जबकि 30 नंवबर तक ड्राफ्ट एसआईआर में आए नोटिस का निस्तारण किया जाएगा। जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 दिसंबर को जारी करने की तारीख तय की गई है। जबकि पहले यह तारीख चार नवंबर थी।

    नागरिक उपरोक्त समयावधि में ड्राफ्ट सूची में नाम न होने पर फार्म 6 भर सकते हैं। साथ ही पता या आवास बदलने पर फार्म आठ भर सकते हैं।

    पोलिंग बूथों पर लगेंगे विशेष शिविर
    वहीं, सीईओ कार्यालय रविवार यानि 27 सितंबर को को एसआईआर के तहत दिल्ली भर के 14,947 पोलिंग बूथों पर विशेष शिविर लगाएगा। इन शिविरों का उद्देश्य उन पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है, जिनका नाम अभी तक सूची में दर्ज नहीं हो पाया है।

    आयोग के अनुसार, दिल्ली में अब तक फार्म- 6 के करीब सवा तीन लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। फार्म- 6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

    नाम दर्ज कराने की अपील
    आयोग ने पात्र नागरिकों से विशेष शिविरों का लाभ उठाकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अपील की है। शिविरों में मतदाता नाम जुड़वाने के साथ ही एसआईआर से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं और दस्तावेजों को लेकर भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

    आयोग के मुताबिक, जिन पात्र नागरिकों के नाम सूची में छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म- 6 जमा कर सकते हैं। अधिकारियों ने बताया कि एसआईआर के दौरान प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जाएंगे।

    सीईओ ने 29 और 30 सितंबर को दिल्ली भर के कालेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में 18-25 वर्ष की आयु के युवा मतदाताओं के लिए विशेष शिविरों की भी घोषणा की है।

    SIR में गलती है तो ऐसे कराएं सुधार
    एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम की स्पेलिंग, उम्र, जन्मतिथि या पता गलत है या मतदाता को शिफ्टेड दिखाया गया है, तो दावा अवधि में सुधार कराया जा सकता है।

    दिल्ली के सीईओ कार्यालय के अनुसार, मौजूदा मतदाता के विवरण में सुधार और पता बदलने के लिए फार्म-8 तथा ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने पर नाम जुड़वाने के लिए फार्म- 6 भरना होगा।

    ऑफलाइन तरीका
    संबंधित बीएलओ, ईआरओ, एईआरओ से फार्म-6 या फार्म-8 लें। सही जानकारी भरकर दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रति लगाएं और बीएलओ या चुनाव कार्यालय में जमा करें। जमा करने की रसीद जरूर लें।

    ऑनलाइन तरीका
    voters.eci.gov.in पर जाएं – लॉगिन कर रजिस्ट्रेशन करें। संबंधित फार्म चुनें, विवरण भरें, दस्तावेज अपलोड करें, आवेदन जमा करें। आवेदन का रेफरेंस नंबर सुरक्षित रखें, इसी से स्थिति जांची जा सकती है।

    ऑनलाइन नोटिस कैसे जांचें
    सबसे पहले वोटर सर्विस पोर्टल पर जाएं। विकल्प चुनें, होमपेज या मेनू सेक्शन में ''Submit Document Against Notice Issued'' या ''List of persons to whom notices have been issued'' वाले विकल्प पर क्लिक करें। इसमें जिले का नाम डालें। अपने इलाके का नाम चुनें। पोलिंग स्टेशन चुनें। इसके बाद आपके पोलिंग स्टेशन की लिस्ट खुल जाएगी।

     

  • हरियाणा NMMS छात्रवृत्ति परीक्षा के आवेदन शुरू, 4 साल तक मिलेंगे ₹1000 हर माह

    हरियाणा NMMS छात्रवृत्ति परीक्षा के आवेदन शुरू, 4 साल तक मिलेंगे ₹1000 हर माह

    करनाल
    सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बड़ी खबर है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही राष्ट्रीय साधन-सह-पात्रता छात्रवृत्ति योजना के तहत हरियाणा में इस बार 2337 छात्रों का चयन किया जाएगा।

    चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक चार साल तक प्रति माह 1000 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। जो सीधा चयनित विद्यार्थी के खाते में जाएगी। एससीईआरटी गुरुग्राम की ओर से जारी पत्र अनुसार इस परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन 25 सितंबर 2026 से शुरू होंगे और अंतिम तिथि 25 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। परीक्षा का आयोजन 29 नवंबर 2026 को किया जाएगा।

    कौन कर सकता आवेदन?
    इस परीक्षा में बैठने के लिए विद्यार्थी का हरियाणा के किसी सरकारी या अनुदान प्राप्त विद्यालय में कक्षा आठवीं में पढ़ना अनिवार्य है। साथ ही उसने सातवीं कक्षा भी सरकारी या अनुदान प्राप्त स्कूल से ही पास की हो। परीक्षार्थी के माता-पिता की सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय 3 लाख 50 हजार रुपये से कम होनी चाहिए। विद्यार्थी का नाम और जन्मतिथि आधार कार्ड के अनुसार तथा आरक्षित श्रेणी का प्रमाण पत्र स्कूल रिकार्ड के अनुसार होना जरूरी है।

    आरक्षण और जिला-वार कोटा
    इस परीक्षा में जिला स्तर पर मेरिट के अनुसार कोटे के हिसाब से चयन होगा। इसमें बीसी-ए वर्ग को 16 प्रतिशत, बीसी-बी को 11 प्रतिशत, एससी को 20 प्रतिशत और दिव्यांग वर्ग को 3 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।

    शेष सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं। जिला-वार कोटे में यमुनानगर सबसे आगे है, जहां 271 छात्रों का चयन होगा। इसमें 136 सामान्य, 43 बीसी-ए, 30 बीसी-बी, 20 एससी के साथ अन्य वर्ग शामिल हैं।

    इसके बाद हिसार में 170, गुरुग्राम में 134, कैथल व कुरुक्षेत्र में 132-132 और करनाल में 127 का कोटा है। वहीं, सबसे कम कोटा फरीदाबाद में 32, पंचकूला में 54 और चरखी दादरी में 58 है।

    अंबाला में 104, भिवानी में 100, फतेहाबाद में 106, रोहतक में 100, सोनीपत में 105 और सिरसा में 107 छात्रों का चयन किया जाएगा। कुल 2337 में से 1167 सामान्य, 373 बीसी-ए, 260 बीसी-बी, 360 एससी, 467 पीएच और 70 दिव्यांग कोटे में चयनित होंगे।

    इच्छुक विद्यार्थी आनलाइन करें आवेदन
    डीएमएस सुमित मान ने बताया कि इच्छुक छात्र हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट बीएसईएच.ओआरजी.इन तथा एससीईआरटी की वेबसाइट एससीईआरटीएचएआरवाईएएनए.जीओवी.आइएन पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    आरक्षित वर्ग के छात्रों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र की छायाप्रति भी अपलोड करनी होगी। विस्तृत जानकारी विवरण पुस्तिका में उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 0124-4066243 पर संपर्क किया जा सकता है।

  • वीबी जीरामजी योजना में 5 किमी के दायरे में मिलेगा काम, दूर जाने पर 10% ज्यादा मानदेय

    वीबी जीरामजी योजना में 5 किमी के दायरे में मिलेगा काम, दूर जाने पर 10% ज्यादा मानदेय

     रांची
     विकसित भारत जीरामजी योजना से रोजगार की गारंटी के साथ ही काम नहीं मिलने पर मुआवजे का भी प्रविधान किया गया है। आवेदन देने के बाद ऐसे श्रमिकों को पांच किमी के दायरे में ही काम देना होगा और इससे अधिक दूरी पर काम मिलने की स्थित में दस प्रतिशत अधिक मानदेय मिलेगा। केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत श्रमिकों को मुआवजा देने का भी प्रविधान है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि कार्यों के वक्त लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा ताकि कृषि क्षेत्र में श्रमिकों की कमी नहीं हो। फसल बुआई के दौरान अन्य योजनाओं के लिए श्रमिकों को रोजगार देने पर पाबंदी प्रभावी होगी। साल में कुल 60 दिनों की पाबंदी प्रभावी होगी।

    झारखंड में वीबी जीरामजी योजना की अधिसूचना के साथ ही यह योजना प्रभावी हो गई है। योजना के तहत अभी काम मिलना मुश्किल है। इसके पीछे का कारण यह है कि अभी धान बुआई का समय चल रहा है और केंद्र प्रायोजित इस योजना में कृषि मौसम के दौरान श्रमि योजनाओं पर पाबंदी रहेगी। हां, जिन इलाकों में कृषि कार्य नहीं हो रहे होंगे वहां श्रमिकों को रोजगार मिल सकता है।

    राज्य सरकार तय करेगी कब-कब बंद रहेगा काम
    इस योजना के तहत राज्यों को यह छूट दी गई है कि वह कृषि कार्यों के लिए कृषि मौसम में काम बंद करा सके। राज्य सरकार चाहे तो एक बार में 60 दिनों के लिए काम रोक सकती है अथवा 15-15 दिनों के लिए चार बार काम बंद करना होगा। इस प्रकार 60 दिन के लिए इस योजना के तहत काम बंद ही रहेगा। इसका निर्धारण होने के बाद अधिसूचना जारी होगी।

    विशेष श्रमिकों के लिए अलग रंग का होगा कार्ड
    वीबी जीरामजी योजना एकल महिला, दिव्यांग, 60 वर्ष से अधिक के व्यक्ति एवं बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए लोगों को विशेष रंग का ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड दिया जाएगा। इसका रंग और योजना का लोगो अभी फाइनल नहीं हुआ है। इसके फाइनल होने में अभी कम से कम 15 दिन और लगेंगे।

    श्रमिकों के लिए बनेगा स्मार्ट कार्ड
    वीबी जीरामजी योजना के तहत श्रमिकों के लिए स्मार्ट कार्ड बनाया जाएगा ताकि मजदूरों के काम करने को लेकर वास्तविक जानकारी मिल सके। स्मार्ट कार्ड में लगे चिप से इस योजना के तहत गड़बड़ियों पर नियंत्रण पाने में सफलता मिलेगी।

    योजना की मुख्य विशेषताएं

    • परिवार के प्रत्येक वयस्क सदस्य को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार मिलेगा।
    • मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा और कार्य पूरा होने की तिथि से अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
    • यदि 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा।
    • मजदूरी में देरी होने पर 16वें दिन से 0.05% प्रतिदिन की दर से मुआवजा दिया जाएगा।
    • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण करेंगे।

     

  • अमरोहा के मसालों की महक, अयोध्या की हर्बल चाय और कन्नौज के इत्र की खुशबू खींच रही लोगों का ध्यान

    अमरोहा के मसालों की महक, अयोध्या की हर्बल चाय और कन्नौज के इत्र की खुशबू खींच रही लोगों का ध्यान

    लखनऊ
     आगरा की जरी-जरदोजी, अमरोहा के मसाले, अयोध्या की हर्बल चाय, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी और बनारस के कालीन…। उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में महिलाओं के हाथों तैयार हो रहे उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार की सीमा से निकलकर बड़े बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदेश के 75 जिलों से पहुंची स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों ने अपने हुनर से उत्तर प्रदेश की ऐसी ही तस्वीर सामने रखी है।

    यहां सिर्फ उत्पाद नहीं बिक रहे, बल्कि हर स्टॉल के साथ किसी गांव, किसी परंपरागत कला और उसे रोजगार में बदलने वाली महिला की कहानी भी जुड़ी है। आगरा की रहनुमा जरी-जरदोजी लेकर पहुंची हैं तो अमरोहा की कौशल्या गौतम के पिसे मसाले अपनी महक बिखेर रहे हैं। अयोध्या की रेणु सिंह की हर्बल चाय और लेमन ग्रास के उत्पाद हैं तो आजमगढ़ की रीता प्रजापति ब्लैक पॉटरी को बड़े बाजार के सामने लेकर आई हैं। कन्नौज की तारावती के पास इत्र है, जबकि वाराणसी की सीता देवी कालीन, फुटमैट और रनर के जरिए बनारस के हुनर की नुमाइंदगी कर रही हैं।

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए यह भागीदारी महज प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यहां उन्हें अपने उत्पाद बेचने के साथ ग्राहक की पसंद समझने, पैकेजिंग और प्रस्तुति देखने तथा बड़े बाजार में अपने उत्पाद की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है।

    हर जिले के साथ एक अलग हुनर
    प्रदेश के एक छोर से दूसरे छोर तक बदलते ही उत्पाद भी बदल रहे हैं। कहीं परंपरागत शिल्प बाजार में जगह बना रहा है तो कहीं गांव की महिलाओं ने रोजमर्रा की जरूरत के उत्पादों को अपने उद्यम का आधार बनाया है।

    गोरखपुर की सरोज पाल टेराकोटा ज्वेलरी लेकर आई हैं तो सहारनपुर की सुधा सैनी लकड़ी के हस्तशिल्प और खिलौनों के साथ ट्रेड शो में पहुंची हैं। प्रयागराज की तब्बसुम मकसूद मूंज से टोकरी, डलिया और सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। प्रतापगढ़ की प्रज्ञा जायसवाल आंवला-मुरब्बा और आम का अचार लेकर आई हैं। महोबा की रानी के स्टॉल पर पीतल की मूर्तियां और दूसरे शिल्प उत्पाद हैं।

    सिद्धार्थनगर की सरोज देवी ने केले के रेशे को उद्यम में बदलकर बनाना फाइबर उत्पाद तैयार किए हैं। सोनभद्र की मधुबाला हर्बल साबुन, शहद, फिनाइल और जूट बैग के साथ पहुंची हैं, जबकि खीरी की शफीका जूते, चप्पल और बेल्ट जैसे उत्पाद लेकर आई हैं।

    चित्रकूट की प्रिया सिंह के लकड़ी के खिलौने, बुलंदशहर की शाहजहां की खुर्जा पॉटरी, कन्नौज की तारावती का इत्र, मथुरा की रेखा के टेराकोटा और मिट्टी के उत्पाद तथा ललितपुर की लीला देवी के गोमय उत्पाद इस विविधता को और विस्तार देते हैं।

    जूट से जरी, मूंज से बनाना फाइबर तक
    राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ट्रेड शो में महिला समूहों की उद्यमशीलता का दायरा केवल पारंपरिक हस्तशिल्प तक सीमित नहीं है। यहां जूट बैग और जरी साड़ी से लेकर चिकनकारी, हैंडलूम, कालीन, लकड़ी के खिलौने, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, शहद, मसाले, अचार-मुरब्बा, हर्बल उत्पाद और घरेलू उपयोग के सामान तक मौजूद हैं।

    चंदौली की अंजू जरी-जरदोजी सिल्क, बनारसी साड़ी, सूट और दुपट्टे लेकर आई हैं। बाराबंकी की शशि माला चिकनकारी और आर्टिफिशियल आभूषण, रायबरेली की रूबी बानो हैंड ब्लॉक प्रिंट के सूट, साड़ी और दुपट्टे तथा मऊ की माधुरी देवी सिल्क साड़ी प्रदर्शित कर रही हैं।

    दूसरी तरफ बलिया की रंजना देवी फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर, डिशवॉश और हैंडवॉश लेकर आई हैं। जौनपुर की सुषमा सिंह भी क्लीनिंग उत्पादों के साथ मौजूद हैं। मुजफ्फरनगर की दीपिका साबुन, सर्फ और हर्बल तेल तथा कौशाम्बी की शिमला देवी कुशवाहा अचार और देसी घी के साथ क्लीनर व हैंडवॉश जैसे उत्पाद लेकर पहुंची हैं। इस विविधता में गांव की परंपरा भी है और बदलते बाजार के साथ कदम मिलाता ग्रामीण उद्यम भी।

    बिक्री से आगे, बाजार समझने का मौका : अरुण कुमार
    स्वयं सहायता समूहों के लिए किसी उत्पाद को तैयार करना कारोबार की पहली सीढ़ी है। उसके बाद सबसे बड़ी चुनौती ग्राहक और बाजार तक पहुंचने की होती है। इंटरनेशनल ट्रेड शो इस दूरी को कम करने का माध्यम बन रहा है।

    राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए उत्पाद तैयार करना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है, उन्हें बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में अलग-अलग जिलों के उत्पादों को एक मंच पर रखने से महिला उद्यमियों की खरीदारों और ग्राहकों तक पहुंच बढ़ रही है।

    बड़े आयोजन में सीधे ग्राहकों के बीच पहुंचने से महिला उद्यमियों को यह देखने-समझने का अवसर भी मिल रहा है कि बाजार किस तरह के उत्पाद पसंद कर रहा है, पैकेजिंग और प्रस्तुति में क्या बदलाव किए जा सकते हैं और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार के अनुरूप किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है।
    यही वह कड़ी है जो गांव में तैयार उत्पाद को स्थानीय बाजार से प्रदेश, देश और आगे बड़े बाजार की ओर ले जा सकती है।

    प्रदेश के 75 जिलों से महिला उद्यमियों की मौजूदगी इस आयोजन को महज 75 स्टॉल की कतार से आगे ले जाती है। इनके जरिए गांवों में तैयार हो रहा हुनर, स्थानीय शिल्प, खानपान और महिलाओं की उद्यमशीलता एक ही मंच पर बड़े बाजार के सामने आई है।

    बॉक्स :
    यूपी के चार कोनों का हुनर
    पश्चिमी यूपी : बागपत की दरी और हैंडलूम चादर, बुलंदशहर की खुर्जा पॉटरी, सहारनपुर का लकड़ी हस्तशिल्प, मेरठ का नेचुरल फूड।

    अवध : अयोध्या की हर्बल चाय और लेमन ग्रास उत्पाद, लखनऊ का हैंडलूम, बाराबंकी की चिकनकारी और आर्टिफिशियल आभूषण।

    पूर्वांचल : आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी, वाराणसी का कालीन और मऊ की सिल्क साड़ी।

    बुंदेलखंड : चित्रकूट के लकड़ी के खिलौने, महोबा की पीतल मूर्तियां और झांसी का हस्तनिर्मित सजावटी सामान।

  • बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य, 2-3 स्कूलों पर होगा एक इंस्ट्रक्टर

    बिहार के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य, 2-3 स्कूलों पर होगा एक इंस्ट्रक्टर

    पटना
    बिहार के सभी सरकारी विद्यालयों में अगले वर्ष से कम्प्यूटर की शिक्षा अनिवार्य होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को दानापुर स्थित एक स्कूल में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को पढ़ाई की अत्याधुनिक सुविधाएं देकर हम उन्हें निजी विद्यालयों के समकक्ष बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने दानापुर के बाटागंज स्थित राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

    शिक्षा विभाग को अगले वर्ष से सभी सरकारी विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में आवश्यक योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए दो-तीन स्कूलों पर एक इंस्ट्रक्टर की व्यवस्था होगी, ताकि विद्यार्थियों को कम्प्यूटर की शिक्षा नियमित रूप से मिल सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सरकारी विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।

    सुविधाओं पर मांगा सुझाव
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों अभिभावकों से स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था या सुविधाओं में सुधार के संबंध में सुझाव मांगा। सीएम ने कहा कि उनके सुझावों से न केवल संबंधित विद्यालय बल्कि पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। मौके पर अच्छे अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को पेरेंट्स ऑफ द मंथ के लिए सम्मानित किया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘मेरे सपनों का भारत-सेवा चित्र अभियान’ के अंतर्गत आयोजित सेवा चित्र प्रतियोगिता का अवलोकन किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा बनाए गए विकसित भारत-2047, सोलर एनर्जी, मेट्रो ट्रेन, रोबोट एवं सपनों का भारत आदि विषयों पर आधारित चित्रों के संबंध में जानकारी ली तथा उनकी कल्पनाशीलता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने मन लगाकर पढ़ाई करने, नियमित रूप से स्कूल आने और 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने की सलाह भी दी।

    पढ़ाई पर नजर रखें : मंत्री
    शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अभिभावकों से कहा कि सिर्फ बच्चों को स्कूल भेज देने से आपकी ड्यूटी खत्म नहीं हो जाती। बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में अभिभावकों की नियमित भागीदारी जरूरी है। अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पर नजर रखें, उनसे संवाद करें और उनकी समस्याओं को समझें।

  • यौन उत्पीड़न की खबरों पर LPU की सफाई, ‘यूनिवर्सिटी को बदनाम करने की कोशिश’

    यौन उत्पीड़न की खबरों पर LPU की सफाई, ‘यूनिवर्सिटी को बदनाम करने की कोशिश’

    जालंधर.

    पंजाब के फगवाडा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के गर्ल्स हॉस्टल जीएच3 के पास एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप सामने आने के बाद से छात्रों का गुस्सा सातंवे आसमान पर है।

    रात को परिसर में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया औलवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी र सुबह फिर से चंडीगढ़-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया है। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। इसी बीच (LPU) ने इन सभी बातों का खंडन किया है।

    दुष्कर्म की सूचना पर भड़के छात्रों ने की तोड़फोड़-आगजनीम
    जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के कैंपस में शनिवार देर रात छात्रों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी के मुताबिक गर्ल्स हॉस्टल में दुष्कर्म का एक मैसेज वायरल हुआ था इसके बाद बवाल मचा। छात्रों में भारी गुस्सा देखा गया। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। इन पोस्ट के अनुसार, यह गुस्सा गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े एक गंभीर मामले को लेकर बढ़ रहा था। विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने तोड़फोड़ और आगजनी भी की। छात्रों के हंगामे के कारण अमृतसर दिल्ली हाईवे जाम हो गया। माैके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को शांत करवाया।

    अज्ञात पर दुष्कर्म का केस
    इसके बाद छात्रों की शिकायत पर जी 3 हाॅस्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के आरोप में अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया गया है। वहीं मामले में सात सदस्यीय एसआईटी का भी गठन किया गया है। इसमें विद्यार्थी और यूनिवर्सिटी प्रशासन के लोग होंगे। जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने कहा कि छात्रों की कुछ मांगें हैं। अभी यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक चल रही है। हॉस्टल और आम मुद्दों को लेकर मांगें हैं, उन पर चर्चा हो रही है। हमने एफआईआर दर्ज कर ली है और एसआईटी बना दी है। हम उनके प्रतिनिधियों के साथ मिलकर जांच करेंगे, जिसमें साइंटिफिक जांच भी शामिल होगी, और अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो हम उसे जरूर पकड़ेंगे। हमारी टीम सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है, और अगर कोई सुराग मिलता है, तो हम जरूर कार्रवाई करेंगे।

    लवली यूनिवर्सिटी घटनाक्रम पर मैनेजमेंट आई सामने
    पूरे मामले पर मैनेजमेंट का कहना है कि दुष्कर्म जैसी कोई घटना नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर यूनिवर्सिटी को बदनाम करने के लिए गलत जानकारी फैलाई गई है। वह सभी तरह का सहयोग करने को तैयार है। पुलिस को या छात्रों को, किसी को भी सीसीटीवी फुटेज या अन्य डॉक्यूमेंट चाहिए, हम प्रोवाइड करवाने को तैयार हैं। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अब छात्र क्या निर्णय लेते हैं, यह तो छात्रों पर ही निर्भर करता है। वह तो चाहेंगे कि सब कुछ सामान्य हो जाए। यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि मामले की पूरी जांच की जाएगी।

  • साचीज के पवेलियन में आयुष्मान कार्ड से लेकर डिजिटल हेल्थ और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धियां काे किया गया प्रदर्शित

    साचीज के पवेलियन में आयुष्मान कार्ड से लेकर डिजिटल हेल्थ और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धियां काे किया गया प्रदर्शित

    लखनऊ/ग्रेटर नोएडा
     उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 के हाल नं. 8 में साचीज के "नई दिशा, नया संकल्प-आयुष्मान पीएमजेएवाई : बिल्डिंग हेल्थकेयर एक्सिलेंस इन उत्तर प्रदेश" थीम पर आधारित पवेलियन में प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के बढ़ते दायरे को प्रदर्शित किया गया, जहां लोग आयुष्मान कार्ड बनवाने के साथ योजना से संबंधित जानकारी ले रहे थे। इसके साथ ही साचीज की ओर से एक विशेष सेशन में योजना की अब तक की उपलब्धियों को साझा किया गया।

    पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी समेत आठ गंभीर बीमारियों का किया जा रहा इलाज
    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने सेशन में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्हाेंने बताया कि जर्नी ऑफ क्वालिटी के माध्यम से जुड़े अस्पतालों को एनएबीएच मानकों और बेहतर गुणवत्ता व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सहयोग और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इससे अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, मानकीकृत प्रक्रियाओं और बेहतर उपचार परिणामों में सुधार हुआ है। योजना में आठ गंभीर बीमारियों के इलाज को जोड़ा गया है। इसमें अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण, न्यूरो सर्जरी, ऑन्कोलॉजी, प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, बर्न मैनेजमेंट, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी और यूरोलॉजी शामिल हैं। उन्होंने प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे और सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने निजी अस्पतालों और बड़े कॉरपोरेट अस्पताल समूहों से प्रदेश के उन जिलों में अपनी सेवाओं का विस्तार करने का आग्रह किया, जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अभी सीमित है।

    नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज को पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया जाएगा शुरू
    साचीज के पवेलियन में नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (एनएचसीएक्स) को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें बताया गया कि इसे योजना से जुड़े दो सरकारी और दो निजी अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जा रहा है। फिलहाल अस्पतालों के चयन को लेकर विचार विर्मश किया जा रहा है। इसका लक्ष्य स्वास्थ्य संबंधी क्लेम की जानकारी के आदान-प्रदान को अधिक व्यवस्थित और इंटरऑपरेबल बनाने तथा क्लेम के निस्तारण की प्रक्रिया को आसान करने का है। इसके साथ ही ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (टीएमएस) के माध्यम से एआई आधारित क्लेम जांच की व्यवस्था भी प्रदर्शित की गई। पवेलियन में प्रदेश के डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को भी प्रदर्शित किया गया है। इसमें लाभार्थी डेटाबेस मैनेजमेंट पोर्टल, आयुष्मान सारथी ऐप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फीडबैक और शिकायत निवारण व्यवस्था तथा डिजिटल क्लेम इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इन तकनीकों के जरिए लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच देने और सेवा वितरण को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    9 सितंबर तक बनाए गए 6 करोड़ आयुष्मान कार्ड
    साचीज की सीईओ ने बताया कि 9 सितंबर तक प्रदेश में छह करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं 2.13 करोड़ से अधिक परिवारों को आयुष्मान भारत और प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। 2 अगस्त तक प्रदेश में कुल 6,562 अस्पताल योजना से जुड़े। इनमें 2910 सरकारी और 3652 निजी अस्पताल शामिल हैं। 31 अगस्त तक योजना के तहत एक करोड़ से अधिक उपचार उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं साचीज द्वारा पवेलियन में जीएस युनिवर्सिटी, एरा युनिवर्सिटी, लखनऊ कैंसर इंस्टीट्यूट और यशोदा मेडिसिटी आदि संस्थानों के जरिये स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया। इनमें सुपर स्पेशियलिटी इलाज, एआई आधारित मॉनिटरिंग, कनेक्टेड हेल्थकेयर, कैंसर स्क्रीनिंग, एडवांस्ड ऑन्कोलॉजी, रोबोटिक सर्जरी, डिजिटल हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन से जुड़ी तकनीकों को शामिल किया गया।

  • राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की साजिश कर रही कांग्रेसः मुख्यमंत्री

    राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की साजिश कर रही कांग्रेसः मुख्यमंत्री

    लखनऊ
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को खूब खरी-खरी सुनाई। अपने सरकारी आवास पर रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह लोग भारत की संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने, राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने की हर साजिश का हिस्सा रहे हैं। सीएम ने कहा कि देश का मुख्य विपक्षी दल व यूपीए गठबंधन से जुड़े अन्य दलों की हरकतें-बयानबाजी गैरजिम्मेदाराना हैं व लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने जैसी हैं। इन्होंने एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाया है। एसआईआर पहली बार नहीं हुआ है। देश में इससे पहले वर्ष 1952, 1957, 1961, 1965-66, 2003 समेत अनेक बार एसआईआर हुआ है।

    कांग्रेस व विपक्षी दलों की हायतौबा दुर्भाग्यपूर्ण
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार की एसआईआर की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस, सपा, राजद समेत अन्य दलों ने जो हायतौबा मचाई है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश में सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रही है। उन्होंने तंज किया कि सपा, कांग्रेस, राजद आदि विपक्षी दल यदि चुनाव जीतें तो इनका पुरुषार्थ है परंतु भ्रष्टाचार, आर्थिक कदाचार, कुनीति, अराजकतापूर्ण कार्यों के कारण यदि जनता इन्हें खारिज करे तो इसके लिए चुनाव आयोग और ईवीएम दोषी है। इन दलों को अपने बचकाने बयानों को लेकर चिंतन व आत्मावलोकन करना चाहिए।

    राहुल गांधी ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर कैंब्रिज में उठाया था सवाल
    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों द्वारा हर संवैधानिक संस्था को लगातार कटघरे में खड़ा किया जाता है। यह लोग चुनाव आयोग पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कैंब्रिज में भारत की न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़ा किया था। 2019 में कैग ने राफेल के मुद्दे पर अपना आब्जर्वेशन दिया था, इस पर भी कांग्रेस ने सवाल खड़े किए थे। ईवीएम से हुए चुनाव में केंद्र व कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी, उस ईवीएम को ब्लैक बॉक्स कहकर भारत की चुनाव प्रणाली व दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    कांग्रेस का संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास नहीं
    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इनका संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास नहीं है। 25 जून 1975 को कांग्रेस ने जब देश के संविधान का गला घोंटने का पाप किया था, तब उनके नेतृत्व की सरकारों ने विपक्षी दलों की चुनी गई तमाम सरकारों को अनैतिक तरीके से गिराने का पाप किया था। अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली, आर्थिक कदाचार के कारण देश की आंतरिक-वाह्य सुरक्षा के साथ लगातार खिलवाड़ किया। बालाकोट की एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के बहादुर जवानों के शौर्य-पराक्रम पर इनके द्वारा सवाल खड़ा करना देशभक्ति नहीं है। वर्तमान में ऐसी ही गैरजिम्मेदाराना हरकतें कांग्रेस व उनके सहयोगी दल कर रहे हैं।

    गैरजिम्मेदाराना हरकतों को कंट्रोल करे कांग्रेस
    मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर के बारे में पहले से ही निर्देश दिए गए थे कि छूटे हुए मतदाताओं को फॉर्म भरने की पूरी छूट है। फॉर्म-6 को लेकर उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग की कार्रवाई को उचित ठहराया, फिर भी चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त व हर संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करके भारत की बदनामी कराना और सबसे बड़े लोकतंत्र को कमजोर करने की चेष्टा करने वाली कांग्रेस व उनके सहयोगी दलों का यह कृत्य अत्यंत हैरान करने वाला है। कांग्रेस अपनी गैरजिम्मेदाराना हरकतों को कंट्रोल करे। लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ व दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है।

    कांग्रेस व उसके सहयोगी दल जनता से मांगें माफी
    सीएम ने कहाकि तीनों चुनाव आयुक्त ने मीडिया के सामने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, छूटे मतदाताओं व फॉर्म-6 को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। अब कोई प्रश्न खड़े नहीं होते, लेकिन कांग्रेस, सपा व सहयोगी दलों द्वारा बाल की खाल उधेड़ने जैसी स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतांत्रिक मूल्यों व संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश हो रही है। भारत ने हर वयस्क मतदाता को पहले दिन से जाति, क्षेत्र, भाषा, लिंग समेत बिना भेदभाव मतदान करने की स्वतंत्रता और चुनाव के एक दिन पहले तक मतदाता सूची में नाम बढ़ाने का अधिकार दिया है। पूरी पारदर्शी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है। कांग्रेस व सहयोगी दलों को अपने कृत्य के लिए आमजन व देश की संवैधानिक संस्थाओं से माफी मांगनी चाहिए।

  • अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस, सपा, राजद समेत विपक्षी दलों पर साधा निशाना

    अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस, सपा, राजद समेत विपक्षी दलों पर साधा निशाना

    लखनऊ
     एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला। अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कांग्रेस-सपा समेत विपक्षी दल चुनाव जीतते हैं तो इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन हारने पर चुनाव आयोग और ईवीएम को दोष देने लगते हैं। उन्होंने एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों को संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश बताते हुए विपक्ष को आत्मावलोकन की नसीहत दी।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस, सपा, राजद और अन्य विपक्षी दलों को निशाने पर रखते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा कर हाय-तौबा मचाई जा रही है। चुनाव आयोग की ओर से पूरी स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने की यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को कमजोर करती है।
     
    पहले भी कई बार हो चुकी है एसआईआर
    एसआईआर को पहली बार की जा रही कवायद बताने पर मुख्यमंत्री योगी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में 1952, 1957, 1961, 1965-66 और 2003 में भी एसआईआर की कार्रवाई हो चुकी है। इनमें ज्यादातर समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी। इसके बावजूद इस बार कांग्रेस, सपा, राजद और अन्य विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश में सबसे अधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस आज चुनाव आयोग को ही कटघरे में खड़ा कर रही है। कांग्रेस, सपा और राजद चुनाव जीत जाएं तो इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, लेकिन अपनी नीतियों, भ्रष्टाचार, आर्थिक कदाचार और अराजकता के कारण जनता उन्हें खारिज कर दे तो चुनाव आयोग और ईवीएम को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को इस पर चिंतन और आत्मावलोकन करने की नसीहत दी।
     
    न्यायपालिका से कैग तक का किया जिक्र
    मुख्यमंत्री योगी ने चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों को विपक्ष की पुरानी कार्यप्रणाली से जोड़ा। राहुल गांधी के कैंब्रिज में दिए बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2019 में राफेल के मुद्दे पर कैग के ऑब्जर्वेशन पर भी सवाल उठाए गए। जिस ईवीएम से कांग्रेस की केंद्र और राज्यों में सरकारें बनीं, उसी को ब्लैक बॉक्स बताकर देश की चुनाव प्रणाली को कठघरे में खड़ा किया गया।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े करने से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है और दुनिया में भारत की छवि पर भी असर पड़ता है।
     
    आपातकाल, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर पर घेरा
    कांग्रेस पर हमला तेज करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने 25 जून 1975 के आपातकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर कितना विश्वास रहा है, इसे देश जानता है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों पर विपक्षी दलों की चुनी हुई सरकारों को अनैतिक और अवैध तरीके से गिराने का भी आरोप लगाया।
     
    बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष पर भारतीय जवानों के शौर्य और पराक्रम को कटघरे में खड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि जवानों के पराक्रम पर सवाल उठाना कहां की देशभक्ति है।
     
    चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की, फिर सवाल क्यों
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्त मीडिया के सामने आकर चुनाव आयोग की पूरी कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। छूटे हुए मतदाताओं और फॉर्म-6 को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। इसके बाद भी चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
     
    मुख्यमंत्री योगी के मुताबिक एसआईआर में जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें फॉर्म भरने का पूरा अवसर दिया गया है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग की कार्रवाई को उचित ठहराया है। इसके बाद कोई सवाल नहीं बचता, फिर भी कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दल बाल की खाल उधेड़ने में लगे हैं।
     
    हिंसा और तोड़फोड़ की लोकतंत्र में जगह नहीं
    विरोध के तौर-तरीकों पर भी मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा, तोड़फोड़ और दुष्प्रचार के लिए कोई जगह नहीं है। प्रदर्शन और तोड़फोड़ के जरिए चुनाव आयोग से जुड़े मुख्यालयों और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना गैर जिम्मेदाराना है।
     
    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत ने पहले दिन से हर वयस्क मतदाता को जाति, क्षेत्र, भाषा और लिंग के भेदभाव के बिना मतदान की स्वतंत्रता दी है। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की व्यवस्था भी मौजूद है। ऐसी पारदर्शी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करना लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है।
     
    कांग्रेस और सहयोगी दल माफी मांगें
    मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से अपनी गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों को नियंत्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने, दुनिया में भारत की बदनामी कराने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर दुष्प्रचार करने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को देश की संवैधानिक संस्थाओं और देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष के इस आचरण की निंदा भी की।

  • बिहार में बाढ़ का कहर, कई गांवों में घुसा पानी; NDRF-SDRF अलर्ट, 17 जिलों में निगरानी

    बिहार में बाढ़ का कहर, कई गांवों में घुसा पानी; NDRF-SDRF अलर्ट, 17 जिलों में निगरानी

     पटना
    बिहार में बाढ़ से एक बार फिर हाहाकार है। दरअसल नेपाल में हो रही लगातार बारिश से कोसी और गंडक के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। शुक्रवार की रात आठ बजे वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्राव 2,81,795 क्यूसेक था। शनिवार सुबह पांच बजे 3,13,595 क्यूसेक तक आ पहुंचा। हालांकि, शाम में यह घटकर तीन लाख 400 क्यूसेक पर आया। इस साल का यह अधिकतम जलस्तर है। गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बराज से शुक्रवार की रात डेढ़ लाख क्यूसेक पानी पार कर रहा था। शनिवार की सुबह आठ बजे यहां से दो लाख 73 हजार क्यूसेक पानी गुजरा। शाम चार बजे दो लाख 98 हजार क्यूसेक से अधिक हो गया। नदियों में अचानक से पानी बढ़ने के कारण 17 जिले को अलर्ट कर दिया गया है। पश्चिम चंपारण के कई गांवों में नदी का पानी घुस आया है। सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। मधुबनी और दरभंगा जिले में दियारा क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप बढ़ गया है।

    22 गांवों का सड़क संपर्क टूटा
    वाल्मीकिनगर में गंडक के पास स्थित रोहुआ टोला, चकदहवा, झंडू टोला समेत कई गांवों में पानी घुस गया है। रामनगर के दोन क्षेत्र की नौरंगिया दोन व बनकटवा करमहिया पंचायत के 22 गांवों का फिर से सड़क संपर्क टूट गया है। मधुबन प्रखंड की चिऊरही समेत निचले गांवों को खाली करने की अपील की गई है। पूर्वी चंपारण में गंडक व बूढ़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। लालबेगिया में सिकरहना के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। अहिरौलिया में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में भी वृद्धि शुरू है। सीतामढ़ी में बागमती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है।

    मुख्य सचिव ने की समीक्षा, सभी तैयारी रखने का निर्देश
    नदियों के जलस्तर में हो रही वृद्धि के मद्देनजर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक आयोजित की गई। इससे आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह के साथ अन्य अधिकारी जुड़े। मुख्य सचिव ने 17 जिलों सीतामढ़ी, प. चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सारण, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और बेगूसराय में विशेष सतर्कता बरतने और निगरानी के निर्देश दिए। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को अलर्ट रहने को कहा। आपात स्थिति के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने टोल-फ्री नंबर 1070 जारी किया है।

    सीमांचल को बाढ़ से बचाने की योजना अधर में
    सीमांचल को बाढ़ से बचाने की योजना महानंदा नदी बाढ़ प्रबंधन योजना फेज-दो फिलहाल अधर में लटक गई है। बीते आठ वर्षों में एक फीसदी भी तटबंध का निर्माण नहीं होने के कारण जल संसाधन विभाग ने निर्माण एजेंसी से एकरारनामा समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब इस योजना का निर्माण नए सिरे से करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत सबसे पहले जमीन अधिग्रहण होगा तभी निविदा जारी होगी। अगर योजना समय पूरी होती तो कटिहार, किशनगंज, अररिया व पूर्णिया को सीधा लाभ होता।

    अधिकारियों के अनुसार महानंदा बाढ़ प्रबंधन योजना फेज-दो के तहत 198.37 किलोमीटर तटबंध का निर्माण करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए वर्ष 2018 में निविदा जारी हुई। हैदराबाद की चयनित एजेंसी बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को काम मिलने पर विभाग ने एकरारनामा किया। तटबंध का निर्माण 31 मार्च 2021 तक पूरा कर लेना था। लेकिन एकरारनामा के आठ साल बीत जाने पर भी अब तक इस योजना के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं हो सका। तटबंध बनाने को 1940.45 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी।

    आठ साल में इसमें से मात्र 62.37 एकड़ जमीन ही अधिग्रहित हो सका। इस कारण 198.37 किमी तटबंध की लंबाई के विरुद्ध मात्र 1.04 किमी तटबंध ही बन सका। जमीन अधिग्रहण नहीं होने के कारण एजेंसी विभाग से लगातार पत्राचार करती रही। भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने को विभागीय अधिकारी समय-समय पर परियोजना स्थल का जायजा लेते रहे। स्थल निरीक्षण में पाया गया कि वहां दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। सरकार तटबंध बनाना चाह रही है तो कुछ विपक्षी दल के नेता या स्थानीय जनप्रतिनिधि तटबंध निर्माण का विरोध कर रहे हैं।

    अब इस पर हो रहा है मंथन
    जल संसाधन विभाग में इस पर मंथन चल रहा है कि इस परियोजना का काम नए सिरे से शुरू किया जाए। इसके लिए सबसे पहले जमीन अधिग्रहण का काम पूरा किया जाएगा। 80 फीसदी जमीन अधिग्रहण के बाद ही निविदा जारी होगी ताकि चयनित एजेंसी तटबंध का निर्माण कर सके। हालांकि आठ वर्षों में जमीन अधिग्रहित नहीं कर सका जल संसाधन विभाग की यह योजना कितनी कारगर होगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।