Category: हरियाणा

  • हरियाणा में 23.50 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ, आय सीमा बढ़ी और आवेदन पोर्टल शुरू

    हरियाणा में 23.50 लाख महिलाओं को मिलेगा लाभ, आय सीमा बढ़ी और आवेदन पोर्टल शुरू

     चंडीगढ़
     हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब 1.80 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों की पात्र महिलाओं को भी हर महीने 2100 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।

    इससे योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 23.50 लाख हो जाएगी। अभी तक एक लाख रुपये तक सालाना आय वाले परिवारों की करीब 10 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा था।

    आय सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये वार्षिक करने के बाद इस आय वर्ग में कुल 17 लाख 13 हजार 447 महिलाएं पात्र दायरे में आती हैं। इनमें करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं ऐसी हैं, जो पहले से किसी अन्य योजना का लाभ ले रही हैं।

    ऐसे में करीब 13.50 लाख नई महिलाओं को 2100 रुपये मासिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हुआ है। हर महिला को सालाना 25 हजार 200 रुपये मिलेंगे।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महेंद्रगढ़ में योजना का दायरा बढ़ाते हुए आवेदन के लिए पोर्टल की शुरुआत की है। इस पर पात्र महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। सरकार 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर नए लाभार्थियों को योजना का लाभ देना शुरू कर सकती है। तब तक आवेदन और पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी।

    बजट में 6500 करोड़, लगातार बढ़ा सरकार का वित्तीय प्रविधान
    लाडो लक्ष्मी योजना के लिए हरियाणा सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में 6500 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। योजना शुरू करते समय पहले बजट में 5000 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था। यानी एक साल में बजटीय प्रविधान में 1500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

    राज्य के 2026-27 बजट में सामाजिक कल्याण एवं पोषण क्षेत्र के लिए कुल 20,110 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें लाडो लक्ष्मी योजना अकेले 6500 करोड़ रुपये की है।

    अभी तक दस किस्तों में दिए जा चुके दो हजार करोड़
    परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के स्टेट कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार 10 अगस्त 2026 तक लाडो लक्ष्मी योजना की 10 किस्तों में करीब 9.98 लाख महिलाओं को 2,042.31 करोड़ रुपये दिए जा चुके थे। उसी समय सरकार ने आय सीमा 1.80 लाख रुपये करने और चालू वित्त वर्ष में 6500 करोड़ रुपये के प्रविधान की जानकारी दी थी, जिसे अब मुख्यमंत्री ने धरातल पर लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे हर हाल में पूरा करते हैं।

    दूसरे राज्यों में महिलाओं को कितनी आर्थिक मदद
    राज्य – योजना – सहायता
    हरियाणा – दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना – 2,100 रुपये मासिक
    पंजाब – मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना – 1,000 रुपये मासिक और एससी महिलाओं के लिए 1,500 रुपये
    हिमाचल प्रदेश – इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि – 1,500 रुपये मासिक
    कर्नाटक – गृह लक्ष्मी योजना – 2,000 रुपये मासिक
    हिमाचल प्रदेश – मुख्यमंत्री शगुन योजना – 31,000 विवाह सहायता
    हरियाणा – मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना – श्रेणी के अनुसार 31,000 से 71,000 रुपये मासिक तक

    हरियाणा में एक लाख 80 हजार रुपये वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाएं
        1 अंबाला 62612
        2 भिवानी 66014
        3 चरखी-दादरी 24159
        4 फरीदाबाद 222562
        5 फतेहाबाद 46379
        6 गुरुग्राम 92017
        7 हांसी 27809
        8 हिसार 67177
        9 झज्जर 67513
        10 जींद 73152
        11 कैथल 66518
        12 करनाल 105717
        13 कुरुक्षेत्र 47982
        14 महेंद्रगढ़ 46709
        15 नूंह 69760
        16 पलवल 101652
        17 पंचकूला 37472
        18 पानीपत 109424
        19 रेवाड़ी 52685
        20 रोहतक 60254
        21 सिरसा 69397
        22 सोनीपत 118878
        23 यमुनानगर 77605

     

  • ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ में बड़ा बदलाव, ट्रेन की सफाई पर यात्री देंगे फीडबैक; अफसरों की भी तय जिम्मेदारी

    ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ में बड़ा बदलाव, ट्रेन की सफाई पर यात्री देंगे फीडबैक; अफसरों की भी तय जिम्मेदारी

     अंबाला
     ट्रेन में कंबल-तकिया साफ मिला या नहीं, टॉयलेट की हालत कैसी थी और डिब्बे में सफाई हुई या नहीं अब रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था का फीडबैक सीधे यात्री देंगे।

    ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत रेलवे ने ट्रेनों में सफाई व्यवस्था की औचक जांच से लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया लेने तक की पूरी व्यवस्था तैयार की है। देश में रोजाना दो करोड़ से अधिक यात्रियों के रेल से सफर करने के बीच रेलवे का जोर अब सफाई को सिर्फ कर्मचारी की जिम्मेदारी रखने के बजाय यात्री को भी अभियान का हिस्सा बनाने पर है

    चलती ट्रेनों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) के पर्यवेक्षक और संबंधित ठेकेदार शौचालय, यात्री डिब्बों, लिनेन और पेंट्री कार की औचक जांच करेंगे। एसी कोच में यात्रियों को दिए जाने वाले चादर, कंबल और तकिये की सफाई पर भी नजर रहेगी। यात्रियों से सफाई व्यवस्था और उपलब्ध कराए गए लिनेन को लेकर फीडबैक लिया जाएगा

    रेलवे ने अभियान को ट्रेनों और स्टेशनों तक सीमित न रखकर स्वच्छता शपथ को जनभागीदारी का आधार बनाने की तैयारी की है। दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर शपथ दिलाई जाएगी। शपथ में हर व्यक्ति ‘न गंदगी करूंगा, न करने दूंगा’ के संकल्प के साथ स्वच्छता की शुरुआत खुद से, परिवार, मोहल्ले, गांव-शहर और कार्यस्थल से करने का वचन लेगा।

    अफसरों की भी तय होगी जिम्मेदारी
    रेलवे बोर्ड से लेकर जोन, मंडल और स्टेशन स्तर तक अधिकारियों की भूमिका तय की गई है। डीआरएम स्तर पर अभियान की निगरानी, ट्रैक-यार्ड की सफाई, स्टेशन प्रबंधन और ट्रेनों में ओबीएचएस व्यवस्था की जांच के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।

    एक अक्टूबर को बड़े स्तर पर श्रमदान और दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के कार्यक्रम होंगे। यानी इस बार रेलवे की स्वच्छता मुहिम में झाड़ू भी चलेगी, शपथ भी होगी और यात्री की जुबान से सफाई की असली रिपोर्ट भी सामने आएगी।

    हर व्यक्ति 100 लोगों को जोड़ेगा
    स्वच्छता शपथ में प्रत्येक व्यक्ति से साल में 100 घंटे यानी हर सप्ताह कम से कम दो घंटे स्वच्छता के लिए देने का संकल्प कराया जाएगा।

    शपथ लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति 100 अन्य लोगों को स्वच्छता से जोड़ने और उन्हें भी शपथ दिलाने का प्रयास करेगा। स्टेशनों पर उद्घोषणा प्रणाली से ‘मेरी सीट, मेरा डिब्बा’ थीम पर लगातार स्वच्छता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। यात्रियों को पंपलेट बांटे जाएंगे और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर भी स्वच्छता शपथ एवं जागरूकता संदेश दिखाए जाएंगे। यानी प्लेटफार्म से ट्रेन की सीट तक यात्री को यह याद दिलाया जाएगा कि सफाई केवल रेलवे की नहीं, उसकी भी जिम्मेदारी है

  • हिसार का ऐतिहासिक मंगाली गांव: 1857 में अंग्रेजों से लिया लोहा, आज पेयजल और सड़क बनी चुनौती

    हिसार का ऐतिहासिक मंगाली गांव: 1857 में अंग्रेजों से लिया लोहा, आज पेयजल और सड़क बनी चुनौती

    हिसार
    हिसार से करीब 15 किलोमीटर दूर नलवा विधानसभा क्षेत्र में बसा मंगाली केवल आबादी के लिहाज से बड़ा गांव नहीं है, बल्कि इसकी मिट्टी में इतिहास की कई परतें दफन हैं

    वर्ष 1488 में अस्तित्व में आए इस गांव का इतिहास 1857 की क्रांति से भी जुड़ा है। आज भी गांव में उस दौर की वीरगाथाएं और बलिदानियों की यादें लोगों के बीच जीवंत है।

    समय के साथ गांव का विस्तार हुआ और यह मंगाली आकलान, मंगाली झारा, मंगाली सुरतिया, मंगाली मोहब्बत और ढाणी जाटान नाम से पांच पंचायतों में बंट गया। पांचों पंचायतों की आबादी 20 हजार से अधिक है। दूसरी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान है मनके का व्यापार।

    मंगाली की बसावट को लेकर ग्रामीणों में प्रचलित मान्यता के अनुसार गांव का नाम एक परिवार के चार बेटों के नाम पर पड़ा। शुरुआत में चार पंचायतें बनीं और बाद में ढाणी जाटान को वर्ष 1986 में अलग पंचायत का दर्जा मिला।

    मंगाली की चार पुरानी पंचायतों को अस्तित्व में आए सौ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। गांव के विस्तार के साथ आबादी बढ़ती गई, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का ढांचा उस गति से विकसित नहीं हो पाया।

    तीन दशक पहले बिछी पानी की लाइन, समस्या आज भी बरकरार
    गांव में पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 30 वर्ष पहले गांव में पानी की लाइन बिछाई गई थी और जलघर भी बनाए गए, लेकिन बढ़ती आबादी के साथ पानी की जरूरत भी बढ़ती गई।

    ऐसे में मौजूदा व्यवस्था ग्रामीणों की जरूरत पूरी करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई हिस्सों में पर्याप्त और नियमित पेयजल आपूर्ति की जरूरत महसूस होती है।

    गंदे पानी की निकासी नहीं, तालाब में पसरी गंदगी
    मंगाली में दूसरी बड़ी समस्या गंदे पानी की निकासी की है। गांव से निकलने वाले गंदे पानी की उचित निकासी नहीं होने के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनती है।

    गांव के तालाब भी गंदगी से अछूते नहीं हैं। तालाबों की सफाई और पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

    मुख्य सड़क की बदहाली भी बनी परेशानी
    गांव की मुख्य सड़क की स्थिति भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है। मंगाली की पांच पंचायतों में बड़ी आबादी होने के कारण यहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद सड़क की हालत बेहतर नहीं होने से आवागमन प्रभावित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सड़क, पेयजल और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर प्राथमिकता से काम होना चाहिए।

    मंगाली की फुटबाल की अलग पहचान
    मंगाली आकलान में गांव की खास पहचान फुटबाल से भी है। यहां के करीब 35 खिलाड़ी राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। गांव में शहीदी स्मारक भी प्रमुख पहचान है।

    1857 में हिसार जेल पर बोला था धावा
    मंगाली के इतिहास में वर्ष 1857 का दौर विशेष महत्व रखता है। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय गांव के क्रांतिकारियों ने हिसार जेल पर धावा बोला था। इस संघर्ष में 12 अंग्रेज अधिकारी के मारे गए थे।

    इसके बाद अंग्रेजों ने गांव पर हमला किया। दमन से बचने के लिए 30 से अधिक देशभक्तों ने मंगाली मोहब्बत में बने एक कुएं में छलांग लगा दी थी। यह कुआं आज भी मंगाली मोहब्बत में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सामने मौजूद है।

    वहीं स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के नाम पर मंगाली आकलान में शहीद स्मारक भी बनाया गया है। स्वतंत्रता संग्राम में गांव के करीब 500 लोगों की कुर्बानी का उल्लेख भी ग्रामीण करते हैं। यही कारण है कि मंगाली की पहचान आज भी एक ऐतिहासिक गांव के रूप में बनी हुई है।

    ढाणी जाटान में सरकारी जमीन का अभाव
    वर्ष 1986 में पंचायत बनी ढाणी जाटान में करीब 300 मकान और लगभग 1700 की आबादी है। पूनम देवी सरपंच हैं। पंचायत के सामने सबसे बड़ी समस्या सरकारी भूमि की कमी है। गांव के पास उपलब्ध करीब एक किला सरकारी जमीन पर आंगनबाड़ी केंद्र समेत अन्य सरकारी भवन बन चुके हैं। ऐसे में भविष्य में अन्य सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं बेहतर
    मंगाली की पांच पंचायतों में ग्रामीणों को शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। गांव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और करीब 10 राजकीय प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य सुविधा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है। इसके अलावा दो वाटर वर्क्स, लाइब्रेरी, एक गोशाला और पुलिस चौकी भी गांव की प्रमुख सुविधाओं में शामिल है।

     

  • वंदे भारत से बुलेट ट्रेन तक का VR सफर, पानीपत स्टेशन पर यात्रियों को मिलेगा खास अनुभव

    वंदे भारत से बुलेट ट्रेन तक का VR सफर, पानीपत स्टेशन पर यात्रियों को मिलेगा खास अनुभव

    पानीपत
     ट्रेन का इंतजार अब सिर्फ प्लेटफार्म पर बैठकर घड़ी देखने तक सीमित नहीं रहेगा। रेलवे जंक्शन पर यात्रियों को रेल सफर के बदलते दौर को अपनी आंखों के सामने महसूस करने का मौका मिलेगा।

    यात्री वर्चुअल रियलिटी (वीआर) कक्ष में चश्मा लगाते ही खुद को ट्रेन के सफर के बीच पाएंगे। स्क्रीन पर केवल कोई दृश्य नहीं चलेगा, बल्कि तकनीक के जरिए उन्हें ऐसा अनुभव कराया जाएगा, मानो वे स्वयं ट्रेन में सफर कर रहे हों।

    इस आभासी सफर में देश की आधुनिक रेल व्यवस्था, वंदे भारत से लेकर बुलेट ट्रेन तक की तकनीक और ट्रेन संचालन की झलक भी देखने को मिलेगी।

    फ्री होगी सुविधा
    सीनियर टेक्नीशियन दीपक ने बताया कि जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर एसी कक्ष लगभग तैयार हो चुका है। इसे इसी माह यात्रियों के लिए शुरू करने की तैयारी है। इसके संचालन की जिम्मेदारी व्योम कंपनी को दी गई है। सुविधा पूरी तरह निशुल्क होगी। ट्रेन के विलंब से आने की स्थिति में यात्री कक्ष में बैठकर इस नई तकनीक का अनुभव ले सकेंगे।

    रेलवे अधिकारियों ने बताया कि वीआर कक्ष में यात्रियों को रेलवे के बदलते स्वरूप से रूबरू होने को मिलेगा। आभासी अनुभव के माध्यम से वे देख सकेंगे कि आधुनिक ट्रेनें किस तरह तेज रफ्तार से चलती हैं, उनका संचालन कैसे होता है, हाई स्पीड रेल तकनीक किस तरह काम करती है।

    चश्मा पहनते ही बदलेगा सफर का अनुभव
    वीआर चश्मा पहनने के बाद यात्री आभासी दुनिया में प्रवेश करेंगे। देश के अलग-अलग पर्यटन स्थलों और गंतव्यों का भ्रमण कराया जाएगा। ट्रेन के भीतर सफर का अनुभव, रास्तों के दृश्य और रेल यात्रा से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को तकनीक के माध्यम से दिखाया जाएगा।

    ट्रेन का इंतजार कर रहे बच्चों और विद्यार्थियों के लिए भी यह अनुभव खास होगा। उन्हें रेलवे और सुरक्षित यात्रा से जुड़ी जानकारी रोचक तरीके से समझ में आएगी।

     रेलवे जंक्शन पर वीआर कक्ष का संचालन करने के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। इसमें यात्री बैठकर ट्रेन के सफर की आधुनिकता को देख सकेंगे। -मुकेश, वाणिज्य निरीक्षक, रेलवे जंक्शन

     

  • हरियाणा में यूनिवर्सिटी क्लर्कों के वेतनमान संशोधन पर फैसला, वित्त विभाग ने मांगी सभी विभागों की राय

    हरियाणा में यूनिवर्सिटी क्लर्कों के वेतनमान संशोधन पर फैसला, वित्त विभाग ने मांगी सभी विभागों की राय

     चंडीगढ़
     विश्वविद्यालयों के लिपिकों का वेतनमान बढ़ाने के मुद्दे को लेकर सरकार ने गेंद विश्वविद्यालयों के पाले में डाल दी है। वेतनमान में संशोधन का फैसला विश्वविद्यालयों पर छोड़ते हुए वित्त विभाग ने संबंधित सभी छह विभागों से राय मांगी है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    ऑल हरियाणा यूनिवर्सिटीज इंप्लाइज फेडरेशन मांग कर रहा है कि वित्त विभाग द्वारा सभी विभागों के लिपिकों में वेतनमान में संशोधन को लेकर 8 फरवरी 2024 और 30 जून 2026 को जारी आदेशों को विश्वविद्यालयों के लिपिकों के लिए भी लागू किया जाए।

    पिछले महीने फेडरेशन के पदाधिकारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मिले थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर ने वित्त विभाग को मामले में सकारात्मक कदम उठाने को कहा है।

    वित्त विभाग की वेतनमान संशोधन शाखा द्वारा उच्चतर शिक्षा, कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, खेल, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय कर्मचारियों की किसी भी श्रेणी के पे-लेवल पर संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति की सिफारिशों के बिना विचार नहीं किया जा सकता।

    यदि फेडरेशन की मांग स्वीकार किए जाने से विश्वविद्यालयों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता है तो उसे संबंधित यूनिवर्सिटी को अपने संसाधनों से वहन करना होगा। सभी विभाग अपने संसाधनों से खर्च उठाने की स्थिति बताएं और स्पष्ट करें कि उनके नियंत्रण में आने वाले विश्वविद्यालय फेडरेशन की मांग स्वीकार होने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय भार अपने संसाधनों से वहन करने की स्थिति में हैं या नहीं।

    पत्र की प्रति 12 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी भेजी गई है। इनमें गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद, चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल, श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र, दीन दयाल उपाध्याय स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय करनाल और दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सोनीपत शामिल हैं।

    अब संबंधित विभागों से मिलने वाली रिपोर्ट और विश्वविद्यालयों की वित्तीय क्षमता की जानकारी के आधार पर फेडरेशन की मांग पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • कबाड़ से सरकार ने जुटाए 4967 करोड़, अब विशेष अभियान 6.0 में फाइलों और ई-कचरे की होगी सफाई

    कबाड़ से सरकार ने जुटाए 4967 करोड़, अब विशेष अभियान 6.0 में फाइलों और ई-कचरे की होगी सफाई

    अंबाला
     सरकारी कार्यालयों में सफाई अभियान अब सिर्फ झाड़ू-पोंछे और चमकते कमरों तक सीमित नहीं रहेगा। धूल में दबी फाइलें, वर्षों से लंबित मामले, बेकार रिकॉर्ड, अनुपयोगी सामान, कबाड़ और ई-कचरा सबकी छंटाई होगी। कबाड़ को निस्तारित कर सरकार 4967.78 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुकी है।

    अब इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार विभागों में विशेष अभियान 6.0 शुरू करेगी। 15 से 30 सितंबर तक तैयारी चरण के बाद 2 से 31 अक्टूबर तक मुख्य चरण चलेगा।

    प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की गाइडलाइन के अनुसार अभियान का फोकस सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को स्थायी व्यवस्था बनाने के साथ लंबित मामलों के निपटारे, पुराने रिकार्ड की छंटाई, ई-कचरा के विज्ञानी निस्तारण और खाली हुई जगह के बेहतर प्रयोग पर रहेगा।

    हर मंत्रालय और विभाग में कम से कम संयुक्त सचिव स्तर के नोडल अधिकारी को कमान सौंपी जाएगी। रुकी फाइलों का भी हिसाब होगा।

    प्रतिदिन होगी निगरानी
    विशेष अभियान 6.0 में लंबित मामलों को अलग से चिह्नित कर उनके निस्तारण की रोजाना निगरानी होगी। इनमें सांसदों के संदर्भ, राज्य सरकारों के मामले, प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े संदर्भ, अंतर-मंत्रालयीय मामले, तीन महीने से अधिक पुराने संसदीय आश्वासन तथा जन शिकायतें और अपीलें शामिल होंगी। शेष अभियानों के दौरान पुराने कबाड़ के निस्तारण से सरकार को बड़ा राजस्व मिला है।

    2021 से जून 2026 तक कबाड़ की बिक्री से 4967.78 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि में 178.63 लाख अनुपयोगी फाइलों की छंटाई/ई-फाइलों को बंद किया गया, जबकि देश-विदेश स्थित भारतीय मिशनों समेत 24.16 लाख स्थानों को स्वच्छता अभियान के दायरे में लाया गया।

    कबाड़ हटाने के साथ उसकी बिक्री से मिली राशि का ब्योरा दर्ज करना होगा। सफाई के बाद कितनी जगह खाली हुई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसका रिकॉर्ड भी पोर्टल पर दर्ज होगा।

    15 दिन तैयारी, 30 दिन कार्रवाई
    15 से 30 सितंबर तक तैयारी चरण में मंत्रालयों, विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को अपने-अपने लक्ष्य तय करने होंगे। इसमें सफाई स्थलों, लंबित मामलों, पुरानी फाइलों, कबाड़ और ई-कचरा की पहचान की जाएगी।

    इसके बाद 2 से 31 अक्टूबर तक मुख्य कार्रवाई चरण चलेगा। नोडल अधिकारी और विभागीय स्तर के अधिकारी रोजाना प्रगति की समीक्षा करेंगे। अभियान की प्रगति केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और समेकित रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी। अभियान समाप्त होने के बाद 10 नवंबर तक स्व-मूल्यांकन भी किया जाना है।

    भवनों का भी बदलेगा स्वरूप
    सरकारी भवनों के बाहरी हिस्सों और साझा क्षेत्रों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी को उनके रखरखाव वाले भवनों के बाहरी हिस्सों में सफाई और सुधार कार्य कराने के निर्देश हैं। बाहरी दीवारों, कॉमन एरिया और भवनों के स्वरूप को बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    अभियान के बाद स्वतंत्र जांच
    विशेष अभियान 6.0 खत्म होने के बाद इसके जमीनी असर का आकलन भी किया जाएगा। 16 से 30 नवंबर के बीच स्वतंत्र थर्ड पार्टी टीम द्वारा अभियान के परिणामों का मूल्यांकन किए जाने का प्रविधान है। साथ ही नियमित समीक्षा होगी।

     

  • हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों पर जलेंगे 30-30 हजार दीप, ब्रह्म सरोवर से होगा शुभारंभ

    हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों पर जलेंगे 30-30 हजार दीप, ब्रह्म सरोवर से होगा शुभारंभ

    चंडीगढ़
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हरियाणा में बृहस्पतिवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के अनुसार, कार्यक्रम के तहत प्रदेशभर में सवा करोड़ दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। दीप प्रज्वलन शाम छह से सात बजे के बीच होगा।

    प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों में 30-30 हजार दीप जलाए जाएंगे। इसके अलावा करीब 300 ऐतिहासिक, धार्मिक और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक ब्रह्म सरोवर से प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

    बूथ स्तर तक होने वाले आयोजनों में जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं तथा आम नागरिकों की भागीदारी रहेगी।
    डॉ. गुप्ता ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, सुशासन और विकास के संदेश को लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम को बूथ स्तर तक व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजित करने का आह्वान किया।

    80 लाख दीप गरीब परिवारों को बांटे
    डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से गरीब परिवारों को 80 लाख दीप उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार की प्रमुख विकास परियोजनाओं को भी रोशनी से सजाया जाएगा।

    इनमें द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का हरियाणा खंड, एम्स रेवाड़ी, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट झज्जर, हिसार एयरपोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा और नेशनल हाईवे-44 सहित करीब 15 प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

  • 1 अक्टूबर से बदल जाएगा नियम! हरियाणा में पुरानी गाड़ियों को ईंधन नहीं, पेट्रोल पंपों पर होगी कैमरों से निगरानी

    1 अक्टूबर से बदल जाएगा नियम! हरियाणा में पुरानी गाड़ियों को ईंधन नहीं, पेट्रोल पंपों पर होगी कैमरों से निगरानी

    चंडीगढ़
     हरियाणा में पुरानी गाड़ियों पर अब सख्ती होने जा रही है. 1 अक्टूबर 2026 से राज्य के NCR वाले इलाकों में ऐसी गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा, जो तय उम्र पूरी कर चुकी हैं. इन गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर खास कैमरे लगाए जाएंगे. यह व्यवस्था सबसे पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगी। 

    बताते चलें कि 1 अक्टूबर 2026 से 15 साल से पुरानी पेट्रोल और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर तेल नहीं मिलेगा. यह नियम गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगा. पुरानी गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे। 

    हरियाणा सरकार पहले चरण में इन चार जिलों के पेट्रोल पंपों पर 775 ANPR कैमरे लगाएगी. इन कैमरों से गाड़ी की नंबर प्लेट अपने आप पढ़ी जाएगी. इसके बाद सिस्टम से पता चलेगा कि गाड़ी पुरानी गाड़ियों की तय श्रेणी में आती है या नहीं. इन कैमरों को लगाने पर करीब 41.74 करोड़ रुपये खर्च होंगे. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना को मंजूरी दी है. हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि कैमरे लगाने का काम 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

    किस जिले में कितने कैमरे लगेंगे?
    पहले चरण में गुरुग्राम में सबसे ज्यादा 249 कैमरे लगाए जाएंगे. इसके बाद सोनीपत में 215, झज्जर में 195 और फरीदाबाद में 116 कैमरे लगाए जाएंगे. सरकार के मुताबिक पूरे हरियाणा में आगे चलकर करीब 2,780 ANPR कैमरों की जरूरत होगी। 

    पेट्रोल पंप पर ऐसे होगी गाड़ी की पहचान
    जब कोई गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचेगी तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट पढ़ेगा. सिस्टम के जरिए गाड़ी की जानकारी चेक की जाएगी. अगर गाड़ी तय उम्र पूरी कर चुकी है और वह ‘End-of-Life Vehicle’ की श्रेणी में आती है, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा. यह कदम NCR में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है. हरियाणा सरकार यह काम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत कर रही है। 

    सरकार का कहना है कि कैमरों की मदद से पुरानी गाड़ियों की पहचान आसान होगी और प्रदूषण से जुड़े नियमों को लागू करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट के जरिए गाड़ियों की जांच वाली व्यवस्था को और बढ़ाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक की मदद से प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाई जा सके। 

  • कुरुक्षेत्र में गोबर से बदलेगी गोशालाओं की तस्वीर, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल

    कुरुक्षेत्र में गोबर से बदलेगी गोशालाओं की तस्वीर, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल

     कुरुक्षेत्र
    धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में गोबर अब केवल कचरा नहीं, बल्कि रोजगार और जैविक खेती का आधार बनने की दिशा में बढ़ रहा है। ज्योतिसर में गोबर से विभिन्न उत्पाद तैयार करने की पहल के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    यहां 20 से 25 महिलाओं को दो प्रशिक्षण सत्रों में गोबर से दीपक, धूप, अगरबत्ती, राखियां और ब्रेसलेट सहित अन्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्लांट में प्रतिदिन करीब तीन से पांच हजार गोबर के दीपक तैयार किए जा रहे हैं। दीपावली को देखते हुए इसकी तैयारी तेज कर दी गई है।

    फाउंडर मेंबर मयंक बजाज ने बताया कि पहल का उद्देश्य केवल गोबर से उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि बेसहारा छोड़ी जाने वाली गायों के लिए भोजन की व्यवस्था और महिलाओं को रोजगार से जोड़ना भी है। अक्सर दूध देना बंद करने के बाद लोग गाय को सड़क पर छोड़ देते हैं।

    ऐसी गायें पोलिथिन और गंदगी खाने को मजबूर होती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य के साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। गाय के दूध ही नहीं बल्कि गोबर से भी आमदनी शुरू करने का एक दीपक जलाने का प्रयास किया है। दूसरी ओर गोशालाओं में गोबर के निस्तारण की समस्या रहती है।

    गर्मी और बरसात में गोबर से आसपास का वातावरण भी प्रभावित होता है। नालियों या सीवर में बहाने से निकासी की समस्या होती है। इन सब बातों को देखते हुए गाय के गोबर को उपयोगी बनाने की पहल गोसंपदा फाउंडेशन की ओर से की गई है और इसमें जिला नगर आयुक्त अमन कुमार, कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार का विशेष सहयोग मिल रहा है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने एक कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन की इस सोच को और बड़ा प्रयास करने का विचार दिया था।

    दान पर निर्भरता नहीं, उत्पादों से आमदनी का प्रयास
    मयंक बजाज के अनुसार यदि गाय के गोबर को उपयोगी उत्पादों में बदलकर रोजगार और आय का माध्यम बनाया जा सकता है तो इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है। प्रयास है कि गायों के भोजन की व्यवस्था केवल दान पर निर्भर न रहे, बल्कि गोबर से तैयार उत्पादों की बिक्री से भी आय हो। इसके लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इन उत्पादों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

    उन्होंने बताया कि सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं से भी बातचीत चल रही है। आगे प्रत्येक गोशाला में उत्पादों की बिक्री के लिए काउंटर उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि श्रद्धालु गोबर से बने दीपक, धूप-अगरबत्ती सहित अन्य उत्पाद खरीद सकें। रक्षाबंधन पर भी सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं ने गोबर से राखियां तैयार की थीं।

    15 साल पहले शुरू हुई थी जैविक खेती की पहल
    मयंक बजाज ने बताया कि गोबर के उपयोग को लेकर उनकी रुचि करीब 15 साल से रही है। उस समय खेती में यूरिया और रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ रहा था और जैविक खेती का चलन कम था। उन्होंने किसानों के बीच जाकर गोबर को बड़ा धन बताते हुए इससे खाद और जैविक उत्पाद तैयार करने पर काम शुरू किया था। अब इसी सोच को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    उनके अनुसार गोबर से ऐसी जैविक खाद तैयार करने पर भी काम हो रहा है, जो यूरिया और डीएपी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल हो सके। अलग-अलग जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से खाद को कम समय में तैयार करने का प्रयास है। इससे खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    जैविक खाद से किसानों का खर्च घटाने का लक्ष्य
    मयंक बजाज के अनुसार वर्तमान में किसानों को खाद और रासायनिक इनपुट पर काफी खर्च करना पड़ता है। जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ कीटनाशकों के छिड़काव और फसलों में बीमारियों को कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस माडल को किसानों और गोशालाओं से जोड़कर बड़े स्तर पर विकसित किया जाएगा।

     

  • गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत 4 जिलों में 775 ANPR कैमरे लगेंगे, पुराने वाहनों पर कसेगा शिकंजा

    गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत 4 जिलों में 775 ANPR कैमरे लगेंगे, पुराने वाहनों पर कसेगा शिकंजा

    चंडीगढ़
    हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल सभी शहरों में पेट्रोल पंपों पर परिवहन विभाग आटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने जा रहा है। यह कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर बता देंगे कि वह कितना पुराना है।

    इसके बाद मौके पर ही 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों और दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को जब्त कर लिया जाएगा। पहली अक्टूबर से ऐसे वाहनों को डीजल-पेट्रोल नहीं दिया जाएगा।

    परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। प्रथम चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कुल 775 एएनपीआर कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 41 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च होंगे।

    30 सितंबर तक गुरुग्राम में 249, सोनीपत में 215, झज्जर में 195 तथा फरीदाबाद में 116 एएनपीआर कैमरे लगाने का लक्ष्य है। जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की पहचान तथा पर्यावरणीय मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।

    विज ने बताया कि यह कार्य वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 2780 एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। एक अक्टूबर से हरियाणा में पंजीकृत जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों को ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाएगी।

    सरकार का उद्देश्य केवल एएनपीआर कैमरे स्थापित करना नहीं है, बल्कि इस तकनीक के माध्यम से पुराने एवं जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की प्रभावी पहचान करना तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित निर्धारित प्रावधानों को लागू करना है।

    एएनपीआर तकनीक के माध्यम से वाहनों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा तथा एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।