Category: हरियाणा

  • कबाड़ से सरकार ने जुटाए 4967 करोड़, अब विशेष अभियान 6.0 में फाइलों और ई-कचरे की होगी सफाई

    कबाड़ से सरकार ने जुटाए 4967 करोड़, अब विशेष अभियान 6.0 में फाइलों और ई-कचरे की होगी सफाई

    अंबाला
     सरकारी कार्यालयों में सफाई अभियान अब सिर्फ झाड़ू-पोंछे और चमकते कमरों तक सीमित नहीं रहेगा। धूल में दबी फाइलें, वर्षों से लंबित मामले, बेकार रिकॉर्ड, अनुपयोगी सामान, कबाड़ और ई-कचरा सबकी छंटाई होगी। कबाड़ को निस्तारित कर सरकार 4967.78 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुकी है।

    अब इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार विभागों में विशेष अभियान 6.0 शुरू करेगी। 15 से 30 सितंबर तक तैयारी चरण के बाद 2 से 31 अक्टूबर तक मुख्य चरण चलेगा।

    प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की गाइडलाइन के अनुसार अभियान का फोकस सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को स्थायी व्यवस्था बनाने के साथ लंबित मामलों के निपटारे, पुराने रिकार्ड की छंटाई, ई-कचरा के विज्ञानी निस्तारण और खाली हुई जगह के बेहतर प्रयोग पर रहेगा।

    हर मंत्रालय और विभाग में कम से कम संयुक्त सचिव स्तर के नोडल अधिकारी को कमान सौंपी जाएगी। रुकी फाइलों का भी हिसाब होगा।

    प्रतिदिन होगी निगरानी
    विशेष अभियान 6.0 में लंबित मामलों को अलग से चिह्नित कर उनके निस्तारण की रोजाना निगरानी होगी। इनमें सांसदों के संदर्भ, राज्य सरकारों के मामले, प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े संदर्भ, अंतर-मंत्रालयीय मामले, तीन महीने से अधिक पुराने संसदीय आश्वासन तथा जन शिकायतें और अपीलें शामिल होंगी। शेष अभियानों के दौरान पुराने कबाड़ के निस्तारण से सरकार को बड़ा राजस्व मिला है।

    2021 से जून 2026 तक कबाड़ की बिक्री से 4967.78 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। इसी अवधि में 178.63 लाख अनुपयोगी फाइलों की छंटाई/ई-फाइलों को बंद किया गया, जबकि देश-विदेश स्थित भारतीय मिशनों समेत 24.16 लाख स्थानों को स्वच्छता अभियान के दायरे में लाया गया।

    कबाड़ हटाने के साथ उसकी बिक्री से मिली राशि का ब्योरा दर्ज करना होगा। सफाई के बाद कितनी जगह खाली हुई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसका रिकॉर्ड भी पोर्टल पर दर्ज होगा।

    15 दिन तैयारी, 30 दिन कार्रवाई
    15 से 30 सितंबर तक तैयारी चरण में मंत्रालयों, विभागों और अधीनस्थ कार्यालयों को अपने-अपने लक्ष्य तय करने होंगे। इसमें सफाई स्थलों, लंबित मामलों, पुरानी फाइलों, कबाड़ और ई-कचरा की पहचान की जाएगी।

    इसके बाद 2 से 31 अक्टूबर तक मुख्य कार्रवाई चरण चलेगा। नोडल अधिकारी और विभागीय स्तर के अधिकारी रोजाना प्रगति की समीक्षा करेंगे। अभियान की प्रगति केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और समेकित रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी। अभियान समाप्त होने के बाद 10 नवंबर तक स्व-मूल्यांकन भी किया जाना है।

    भवनों का भी बदलेगा स्वरूप
    सरकारी भवनों के बाहरी हिस्सों और साझा क्षेत्रों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी को उनके रखरखाव वाले भवनों के बाहरी हिस्सों में सफाई और सुधार कार्य कराने के निर्देश हैं। बाहरी दीवारों, कॉमन एरिया और भवनों के स्वरूप को बेहतर बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    अभियान के बाद स्वतंत्र जांच
    विशेष अभियान 6.0 खत्म होने के बाद इसके जमीनी असर का आकलन भी किया जाएगा। 16 से 30 नवंबर के बीच स्वतंत्र थर्ड पार्टी टीम द्वारा अभियान के परिणामों का मूल्यांकन किए जाने का प्रविधान है। साथ ही नियमित समीक्षा होगी।

     

  • हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों पर जलेंगे 30-30 हजार दीप, ब्रह्म सरोवर से होगा शुभारंभ

    हरियाणा में 90 विधानसभा सीटों पर जलेंगे 30-30 हजार दीप, ब्रह्म सरोवर से होगा शुभारंभ

    चंडीगढ़
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हरियाणा में बृहस्पतिवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के अनुसार, कार्यक्रम के तहत प्रदेशभर में सवा करोड़ दीप जलाने का लक्ष्य रखा गया है। दीप प्रज्वलन शाम छह से सात बजे के बीच होगा।

    प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों में 30-30 हजार दीप जलाए जाएंगे। इसके अलावा करीब 300 ऐतिहासिक, धार्मिक और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक ब्रह्म सरोवर से प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

    बूथ स्तर तक होने वाले आयोजनों में जनप्रतिनिधियों, भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं तथा आम नागरिकों की भागीदारी रहेगी।
    डॉ. गुप्ता ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से सेवा, सुशासन और विकास के संदेश को लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम को बूथ स्तर तक व्यापक जनभागीदारी के साथ आयोजित करने का आह्वान किया।

    80 लाख दीप गरीब परिवारों को बांटे
    डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से गरीब परिवारों को 80 लाख दीप उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार की प्रमुख विकास परियोजनाओं को भी रोशनी से सजाया जाएगा।

    इनमें द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का हरियाणा खंड, एम्स रेवाड़ी, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट झज्जर, हिसार एयरपोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा और नेशनल हाईवे-44 सहित करीब 15 प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

  • 1 अक्टूबर से बदल जाएगा नियम! हरियाणा में पुरानी गाड़ियों को ईंधन नहीं, पेट्रोल पंपों पर होगी कैमरों से निगरानी

    1 अक्टूबर से बदल जाएगा नियम! हरियाणा में पुरानी गाड़ियों को ईंधन नहीं, पेट्रोल पंपों पर होगी कैमरों से निगरानी

    चंडीगढ़
     हरियाणा में पुरानी गाड़ियों पर अब सख्ती होने जा रही है. 1 अक्टूबर 2026 से राज्य के NCR वाले इलाकों में ऐसी गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा, जो तय उम्र पूरी कर चुकी हैं. इन गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर खास कैमरे लगाए जाएंगे. यह व्यवस्था सबसे पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगी। 

    बताते चलें कि 1 अक्टूबर 2026 से 15 साल से पुरानी पेट्रोल और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर तेल नहीं मिलेगा. यह नियम गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगा. पुरानी गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे। 

    हरियाणा सरकार पहले चरण में इन चार जिलों के पेट्रोल पंपों पर 775 ANPR कैमरे लगाएगी. इन कैमरों से गाड़ी की नंबर प्लेट अपने आप पढ़ी जाएगी. इसके बाद सिस्टम से पता चलेगा कि गाड़ी पुरानी गाड़ियों की तय श्रेणी में आती है या नहीं. इन कैमरों को लगाने पर करीब 41.74 करोड़ रुपये खर्च होंगे. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना को मंजूरी दी है. हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि कैमरे लगाने का काम 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

    किस जिले में कितने कैमरे लगेंगे?
    पहले चरण में गुरुग्राम में सबसे ज्यादा 249 कैमरे लगाए जाएंगे. इसके बाद सोनीपत में 215, झज्जर में 195 और फरीदाबाद में 116 कैमरे लगाए जाएंगे. सरकार के मुताबिक पूरे हरियाणा में आगे चलकर करीब 2,780 ANPR कैमरों की जरूरत होगी। 

    पेट्रोल पंप पर ऐसे होगी गाड़ी की पहचान
    जब कोई गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचेगी तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट पढ़ेगा. सिस्टम के जरिए गाड़ी की जानकारी चेक की जाएगी. अगर गाड़ी तय उम्र पूरी कर चुकी है और वह ‘End-of-Life Vehicle’ की श्रेणी में आती है, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा. यह कदम NCR में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है. हरियाणा सरकार यह काम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत कर रही है। 

    सरकार का कहना है कि कैमरों की मदद से पुरानी गाड़ियों की पहचान आसान होगी और प्रदूषण से जुड़े नियमों को लागू करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट के जरिए गाड़ियों की जांच वाली व्यवस्था को और बढ़ाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक की मदद से प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाई जा सके। 

  • कुरुक्षेत्र में गोबर से बदलेगी गोशालाओं की तस्वीर, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल

    कुरुक्षेत्र में गोबर से बदलेगी गोशालाओं की तस्वीर, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल

     कुरुक्षेत्र
    धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में गोबर अब केवल कचरा नहीं, बल्कि रोजगार और जैविक खेती का आधार बनने की दिशा में बढ़ रहा है। ज्योतिसर में गोबर से विभिन्न उत्पाद तैयार करने की पहल के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    यहां 20 से 25 महिलाओं को दो प्रशिक्षण सत्रों में गोबर से दीपक, धूप, अगरबत्ती, राखियां और ब्रेसलेट सहित अन्य उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्लांट में प्रतिदिन करीब तीन से पांच हजार गोबर के दीपक तैयार किए जा रहे हैं। दीपावली को देखते हुए इसकी तैयारी तेज कर दी गई है।

    फाउंडर मेंबर मयंक बजाज ने बताया कि पहल का उद्देश्य केवल गोबर से उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि बेसहारा छोड़ी जाने वाली गायों के लिए भोजन की व्यवस्था और महिलाओं को रोजगार से जोड़ना भी है। अक्सर दूध देना बंद करने के बाद लोग गाय को सड़क पर छोड़ देते हैं।

    ऐसी गायें पोलिथिन और गंदगी खाने को मजबूर होती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य के साथ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। गाय के दूध ही नहीं बल्कि गोबर से भी आमदनी शुरू करने का एक दीपक जलाने का प्रयास किया है। दूसरी ओर गोशालाओं में गोबर के निस्तारण की समस्या रहती है।

    गर्मी और बरसात में गोबर से आसपास का वातावरण भी प्रभावित होता है। नालियों या सीवर में बहाने से निकासी की समस्या होती है। इन सब बातों को देखते हुए गाय के गोबर को उपयोगी बनाने की पहल गोसंपदा फाउंडेशन की ओर से की गई है और इसमें जिला नगर आयुक्त अमन कुमार, कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार का विशेष सहयोग मिल रहा है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने एक कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन की इस सोच को और बड़ा प्रयास करने का विचार दिया था।

    दान पर निर्भरता नहीं, उत्पादों से आमदनी का प्रयास
    मयंक बजाज के अनुसार यदि गाय के गोबर को उपयोगी उत्पादों में बदलकर रोजगार और आय का माध्यम बनाया जा सकता है तो इससे बेहतर विकल्प क्या हो सकता है। प्रयास है कि गायों के भोजन की व्यवस्था केवल दान पर निर्भर न रहे, बल्कि गोबर से तैयार उत्पादों की बिक्री से भी आय हो। इसके लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इन उत्पादों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

    उन्होंने बताया कि सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं से भी बातचीत चल रही है। आगे प्रत्येक गोशाला में उत्पादों की बिक्री के लिए काउंटर उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि श्रद्धालु गोबर से बने दीपक, धूप-अगरबत्ती सहित अन्य उत्पाद खरीद सकें। रक्षाबंधन पर भी सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं ने गोबर से राखियां तैयार की थीं।

    15 साल पहले शुरू हुई थी जैविक खेती की पहल
    मयंक बजाज ने बताया कि गोबर के उपयोग को लेकर उनकी रुचि करीब 15 साल से रही है। उस समय खेती में यूरिया और रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल बढ़ रहा था और जैविक खेती का चलन कम था। उन्होंने किसानों के बीच जाकर गोबर को बड़ा धन बताते हुए इससे खाद और जैविक उत्पाद तैयार करने पर काम शुरू किया था। अब इसी सोच को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    उनके अनुसार गोबर से ऐसी जैविक खाद तैयार करने पर भी काम हो रहा है, जो यूरिया और डीएपी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल हो सके। अलग-अलग जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से खाद को कम समय में तैयार करने का प्रयास है। इससे खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    जैविक खाद से किसानों का खर्च घटाने का लक्ष्य
    मयंक बजाज के अनुसार वर्तमान में किसानों को खाद और रासायनिक इनपुट पर काफी खर्च करना पड़ता है। जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ कीटनाशकों के छिड़काव और फसलों में बीमारियों को कम करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस माडल को किसानों और गोशालाओं से जोड़कर बड़े स्तर पर विकसित किया जाएगा।

     

  • गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत 4 जिलों में 775 ANPR कैमरे लगेंगे, पुराने वाहनों पर कसेगा शिकंजा

    गुरुग्राम-फरीदाबाद समेत 4 जिलों में 775 ANPR कैमरे लगेंगे, पुराने वाहनों पर कसेगा शिकंजा

    चंडीगढ़
    हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल सभी शहरों में पेट्रोल पंपों पर परिवहन विभाग आटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने जा रहा है। यह कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर बता देंगे कि वह कितना पुराना है।

    इसके बाद मौके पर ही 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों और दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को जब्त कर लिया जाएगा। पहली अक्टूबर से ऐसे वाहनों को डीजल-पेट्रोल नहीं दिया जाएगा।

    परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। प्रथम चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कुल 775 एएनपीआर कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 41 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च होंगे।

    30 सितंबर तक गुरुग्राम में 249, सोनीपत में 215, झज्जर में 195 तथा फरीदाबाद में 116 एएनपीआर कैमरे लगाने का लक्ष्य है। जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की पहचान तथा पर्यावरणीय मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।

    विज ने बताया कि यह कार्य वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 2780 एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। एक अक्टूबर से हरियाणा में पंजीकृत जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों को ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाएगी।

    सरकार का उद्देश्य केवल एएनपीआर कैमरे स्थापित करना नहीं है, बल्कि इस तकनीक के माध्यम से पुराने एवं जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की प्रभावी पहचान करना तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित निर्धारित प्रावधानों को लागू करना है।

    एएनपीआर तकनीक के माध्यम से वाहनों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा तथा एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

     

  • जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हो रहा इंतकाल, पोर्टल की खामियों से रिकॉर्ड में गड़बड़ी

    जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी नहीं हो रहा इंतकाल, पोर्टल की खामियों से रिकॉर्ड में गड़बड़ी

    कैथल
    प्रदेश के रेवेन्यू पोर्टल में आ रही तकनीकी कमी के कारण पूरे जमीन के 2,38,688 इंतकाल (म्यूटेशन) लंबित हैं। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद 11वें दिन अपने आप इंतकाल दर्ज होने वाली ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

    इस व्यवस्था में सुधार लाने और साफ्टवेयर की कमियों को दूर करने के लिए प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो भी विरोध जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल सिस्टम में उलझे है।

    प्रदेश में 2,07,560 इंतकाल पटवारियों की ओर से लंबित है। इनके अलावा 10,537 कानूनगो की तरफ से लंबित है। पटवारियों का तर्क है कि मंजूर करने के बाद भी लंबित दिखाई दे रहे हैं।

    इंतकाल नहीं हो रहा दर्ज: महेंद्र
    पट्टी अफगान के महेंद्र ने बताया कि दो माह पहले उसकी रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन अब इंतकाल नहीं हो रहा है। रकबा गलत उठा रहा है। इसकी कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। सोमवार को पूरा दिन पोर्टल नहीं चला, मंगलवार को पोर्टल तो चला, लेकिन गलत रकबा उठाने के कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है।

    इंतकाल पौने एकड़ का दिखाया: वीरभान चौधरी
    पट्टी के वीरभान ने बताया कि उसके मां के नाम जमीन ली थी। उन्होंने एक एकड़ जमीन की खरीद की थी, लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ दिखा रहा है।

    पटवारी का कहना है कि पोर्टल की खामियों के कारण ऐसा हो रहा है। वह एक माह से पटवारखाने के चक्कर लगा रहा है। राजस्व विभाग को इसके लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने बताया कि साफ्टवेयर अब भी कुछ खामिया बची है, इसमें सुधार किया जा रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं, रकबा गलत दिखा रहा है।

    जानिये, जिलों की स्थिति
    सोनीपत में 17,486 इंतकाल लंबित हैं। इसी तरह अंबाला में 14,486,भिवानी में 10,879, चरखी-दादरी में 5215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5837, हिसार में 8484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255, करनाल में 9397, कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6826, नूंह में 9196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7825 और सिरसा में 9574 इंतकाल लंबित हैं।

    असली मालिकों के नाम गायब
    कई इंतकालों में प्रिंट निकालने पर वे खाली आ रहा हैं या रजिस्ट्री में दर्ज जमीन की मात्रा कम दिखाई दे रही है। साफ्टवेयर के झोल के कारण कुछ जमीनों के रिकार्ड से असली मालिकों के नाम ही गायब हो गए हैं।

    पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं। पटवारी मंजूर करता है तो, एक खेवट में एक इंतकाल है। लोगों ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन साइट नहीं चली। इस कारण इंतकाल में हिस्से गलत हो रहे हैं। नए साफ्टवेयर में दस पेज की कमांड देते है तो दो पेज का रिकार्ड मिलता है, रिकार्ड अधूरा मिल रहा है।

     

  • पंजाब चुनाव से पहले पगड़ी पर सियासत तेज, मान और सैनी के बीच बयानबाजी हुई तेज

    पंजाब चुनाव से पहले पगड़ी पर सियासत तेज, मान और सैनी के बीच बयानबाजी हुई तेज

    चंडीगढ़
     पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए अहम राजनीतिक चेहरा बनते जा रहे हैं। पंजाब में उनका लगातार दौरा, सिर पर सजी दस्तार और पंजाबी भाषा में मतदाताओं से संवाद अब मात्र सियासी सक्रियता नहीं रह गया, बल्कि राजनीति में पहचान और प्रतीक की बहस का हिस्सा बन गया है।

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नायब सिंह सैनी की पगड़ी को ‘नकली’ बताकर एक अलग ही मुद्दे को हवा दे दी है, जिस पर अब दोनों दल आमने-सामने हो गए। नायब ने भी अपनी दस्तार को गुरुओं के सम्मान से जोड़ते हुए भगवंत मान पर पलटवार किए हैं।

    नायब सैनी जब पंजाब पहुंचते हैं तो उनका अंदाज स्थानीय रंग में नजर आता है। सिर पर पगड़ी और जुबान पर पंजाबी के जरिए वे पंजाबियों के बीच राजनीतिक संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं। भाजपा के लिए यह पड़ोसी राज्य में नायब सैनी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

    भगवंत मान ने इसी रणनीति पर निशाना साधा है। इस पूरे विवाद ने फिलहाल पंजाब की चुनावी सियासत में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पंजाब की राजनीति में पगड़ी सिर्फ पहचान का प्रतीक रहेगी या आने वाले चुनाव में यह राजनीतिक दावे और जवाबी दावों का हथियार भी बनेगी।

    भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि नायब सैनी अपनी गाड़ी में पगड़ी रखते हैं और चंडीगढ़ व पंचकूला से उसे सिर पर रखकर पंजाब पहुंचते हैं। उन्होंने तंज कसा कि शायद सैनी को लगता है कि ‘नकली पगड़ी’ पहनकर वे पंजाबियों का दिल जीत लेंगे या कोई राजनीतिक फायदा हासिल कर लेंगे। मान का यह हमला दरअसल सैनी के पंजाब दौरे और स्थानीय पहचान के साथ उनके जुड़ाव की कोशिश पर सीधा राजनीतिक सवाल है।

    भगवंत मान के बयान पर नायब सैनी ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पगड़ी को राजनीतिक पहनावा मानने की बजाय इसे सिख गुरुओं की परंपरा, सम्मान और लोगों के स्वाभिमान से जोड़ दिया। सैनी ने कहा कि पगड़ी गुरु रूप है।

    भगवंत मान ने दस्तार को नकली पगड़ी कहकर जनता का अपमान किया है। नायब सैनी ने दो कदम आगे बढ़ते हुए भगवंत मान से माफी मांगने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि अगर मान ने दस्तार को ‘नकली पगड़ी’ कहा है तो उन्हें उस पवित्र स्थान पर जाकर माफी मांगनी चाहिए, जहां गुरुओं ने इस दस्तार को सजाया था। मान को पंजाब के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए। सैनी ने गुरुओं के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियों की वजह से ही समाज और देश आज इस मुकाम पर है।

    पगड़ी की राजनीति पर इस तरह बदला माहौल
    यह पलटवार सैनी के लिए सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है। उन्होंने विवाद को धार्मिक और भावनात्मक प्रतीक से जोड़कर इसकी राजनीतिक जमीन ही बदल दी है। जहां मान का निशाना सैनी के ‘पंजाबी अंदाज’ पर था, वहीं सैनी ने जवाब में दस्तार के सम्मान को केंद्र में ला दिया है।

    मान का हमला भाजपा के दावे को चुनौती देने की कोशिश
    पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हरियाणा भाजपा के प्रभारी डॉ. सतीश पुनिया को पंजाब भाजपा का नया प्रभारी बना दिया गया है। वे भी पगड़ी पहनकर पंजाब में निकल पड़े हैं। ऐसे में नायब सिंह सैनी का लगातार पंजाब दौरा पार्टी की रणनीति में खास महत्व रखता है। भाजपा इस कनेक्ट को राजनीतिक पूंजी में बदलना चाहती है।

    यही वजह है कि सैनी की पगड़ी अब उनके व्यक्तिगत पहनावे से आगे निकलकर राजनीतिक संदेश बन चुकी है। दूसरी ओर, भगवंत मान के लिए चुनौती यह है कि भाजपा पंजाब में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ऐसे चेहरों और मुद्दों को सामने ला रही है, जो प्रदेश की भाषा और संस्कृति से जुड़ाव का दावा करते हैं। मान का हमला भाजपा के इसी राजनीतिक दावे को चुनौती देने की कोशिश है।

  • हरियाणा में गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की फाइल आगे बढ़ी, हाईकोर्ट आदेशों की होगी समीक्षा

    हरियाणा में गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की फाइल आगे बढ़ी, हाईकोर्ट आदेशों की होगी समीक्षा

     चंडीगढ़
    हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की मांग पर प्रदेश सरकार के स्तर पर अब प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 31 अगस्त को हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को आगे परीक्षण के लिए भेज दिया है। इससे लंबे समय से नियमितीकरण की राह देख रहे अतिथि अध्यापकों को उम्मीद बंधी है कि सरकार इस मुद्दे का व्यावहारिक समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव को गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले को मार्क किया है। इसमें हाई कोर्ट के आदेश और नियमितीकरण की प्रक्रिया से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार करने तथा मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पत्र पर 15 सितंबर की तारीख अंकित है। ऐसे में अब अधिकारियों के स्तर पर मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।

    दरअसल, 31 अगस्त को विधानसभा सत्र के बाद विधानसभा सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। इसमें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग का मुद्दा प्रमुखता से रखा था।
    यह वीडियो भी देखें

    मुख्यमंत्री ने मामले में अंतिम स्तर की बैठक बुलाकर ठोस समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की ओर से फाइल आगे बढ़ाया जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    गेस्ट टीचर इससे पहले शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक के साथ भी अपनी मांग उठा चुके हैं। विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सरकार के मंत्रियों और विपक्षी विधायकों को भी ज्ञापन सौंपे थे। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था।

    करीब 20-21 वर्षों की सेवा का हवाला देते हुए गेस्ट टीचर नियमितीकरण को केवल नौकरी का विषय नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के सम्मान और परिवार के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।

    अब मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला अधिकारियों को भेजे जाने के बाद उनकी नजर अगली बैठक और रिपोर्ट पर है। हालांकि, अभी नियमितीकरण का अंतिम निर्णय होना बाकी है, लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से मामले का दोबारा सक्रियता से परीक्षण शुरू होना गेस्ट टीचरों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

     

  • स्वाइन फ्लू से हिसार में तीसरी महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग कर रहा रिपोर्ट का ऑडिट

    स्वाइन फ्लू से हिसार में तीसरी महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग कर रहा रिपोर्ट का ऑडिट

    हिसार
     स्वाइन फ्लू के कारण एक और महिला मरीज की मौत हो गई। जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या तीन पर पहुंच गई है। मरने वाली तीनों महिलाएं हैं। मंगलवार को चार और स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए।

    इससे जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की संख्या 70 पर पहुंच गई है। हालांकि अभी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मृतक महिला की रिपोर्ट का आडिट किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि इस साल अभी तक 70 मरीज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिले हैं। अभी तक तीन महिला मरीजों की मौत हो चुकी है। दो महिला मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, एक महिला मरीज की फाइल अभी आडिट हो रही है।

    स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीज और उनके स्वजन को टैमीफ्लू दवा दी जा रही है। खांसी, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और नागरिक अस्पताल में सैंपल जांच के लिए देना चाहिए। अस्पताल परिसर में स्वाइन फ्लू की निशुल्क जांच की जाती है। लक्षण दिखाई देने पर मुंह पर मास्क लगाकर रखना चाहिए और भीड़भाड़ वाले एरिया में नहीं जाना चाहिए। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं।

  • रोहतक से लुधियाना, जालंधर और डेरा ब्यास तक के लिए तय किया गया अलग-अलग किराया

    रोहतक से लुधियाना, जालंधर और डेरा ब्यास तक के लिए तय किया गया अलग-अलग किराया

     रोहतक
     हरियाणा रोडवेज से पंजाब का सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। रोहतक से डेरा ब्यास के लिए सीधी बस सर्विस का नया टाइम टेबल सामने आया है।

    सोनीपत डिपो के गोहाना उपकेंद्र की बस रोहतक से सुबह आठ बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। यह बस गोहाना, पानीपत सहित सात शहरों से होकर गुजरेगी।

    कहां-कहां से होकर जाएगी बसें
    हरियाणा रोडवेज के अनुसार, बस रोहतक से सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना, पानीपत, करनाल, अंबाला, राजपुरा, लुधियाना बाईपास, जालंधर और करतारपुर से होते हुए शाम करीब साढ़े पांच बजे डेरा ब्यास तक पहुंचेगी।

    किस शहर से कितने बजे मिलेगी बस
    रोहतक से बस 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना से सुबह 9 बजे प्रस्थान करेगी। पानीपत से सुबह 10 बजे और करनाल से सुबह 11 बजे यह बस रवाना होगी।

    अंबाला से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। जालंधर में शाम चार बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे बस डेरा ब्यास पहुंचेगी।

    कितना होगा किराया?
        रोहतक से लुधियाना का किराया 410 रुपये।
        रोहतक से जालंधर का किराया 510 रुपये
        रोहतक से डेरा ब्यास का किराया 565 रुपये।
        गोहाना से डेरा ब्यास का किराया 535 रुपये ।
        पानीपत से डेरा ब्यास का किरााय 480 रुपये।

    वापसी का समय
    बस डेरा ब्यास से रात दो बजे रवाना होगी। इसके बाद जालंधर से तीन बजे बस रवाना होगी और अंबाला से सुबह छह बजे बस रोहतक के लिए रवाना होगी