Category: हरियाणा

  • चंडीगढ़ के अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न’ अवॉर्ड से नवाजा गया

    चंडीगढ़ के अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न’ अवॉर्ड से नवाजा गया

    चंडीगढ़.

    सेक्टर-31 स्थित राजकीय बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास संस्थान (जीआरआईआईडी) के प्रिंसिपल अनिल कुमार को विशेष शिक्षा और बौद्धिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

    यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, सुप्रीम कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच की ओर से आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, गणमान्य व्यक्तियों और सहभागी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। समारोह में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के कुल 51 शिक्षकों को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ और ‘शिक्षक गौरव पुरस्कार’ प्रदान किए गए।

    जीआरआईआईडी में बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जाता है। ऐसे में संस्थान के प्रधानाचार्य को मिला यह सम्मान चंडीगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

  • पांडू पिंडारा में क्यों करते हैं पिंडदान? जानें पांडवों और पिंडतारक तीर्थ से जुड़ी मान्यता

    पांडू पिंडारा में क्यों करते हैं पिंडदान? जानें पांडवों और पिंडतारक तीर्थ से जुड़ी मान्यता

    जींद
    पांडू पिंडारा(पिंडतारक तीर्थ) का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर कौरवों और सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान किया था।

    यहां सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करते हुए 12 वर्ष बिताए थे और पूर्ण विधान से पिंडदान किया था। पांडवों द्वारा यहां पिंडदान (तर्पण) किए जाने के कारण इस जगह का नाम पांडू पिंडारा और यहां के मुख्य कुंड का नाम पिंडतारक तीर्थ पड़ गया।

    माना जाता है, महाभारत काल से पिंडदान और श्राद्ध कर्म की परंपरा शुरू हुई। आज भी रिश्तों में चाहे कितने ही मतभेद क्यों न रहे हों, लोग मृत्यु के बाद अपने पितृों को ईश्वर से भी ऊपर का स्थान देते हैं। उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और उनका श्राद्ध करते हैं।

    पांडवों ने किया था कौरवों का पिंडदान
    किंवदंती है, महाभारत युद्ध में जीत भले ही पांडवों की हुई, लेकिन उन्हें अपने ही परिवार के लोगों को खोने का गहरा दुख भी मिला। कौरव उनके शत्रु जरूर थे, लेकिन वे उनके भाई थे

    इसलिए धर्म का पालन करते हुए पांडवों ने सभी दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पिंडारा में मौजूद इस कुंड का संबंध पितृ कर्म और मोक्ष से जोड़ा जाता है।

    यहां श्रद्धा और विधि-विधान से पिंडदान करने पर पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है। यही कारण है, सालभर, विशेष रूप से पितृ पक्ष के दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपने पितरों का तर्पण करते हैं।

    ग्रंथों में भी पांडू पिंडारा तीर्थ का जिक्र
    कई हिंदू ग्रंथों जैसे महाभारत, वामन पुराण, पद्म पुरण में इस बात का विवरण मिलता है कि जींद जिले में मौजूद पांडू पिंडारा, जिसे पिंडतारक और सोम तीर्थ भी कहा गया है, वहां कौरवों द्वारा कौरवों का पिंडदान किया गया था।

    यहां कुंड में लोग सोमवती अमावस्या के दिन अपने पितृों का पिंडदान करने आते हैं। मान्यता है, इस स्थल पर पिंडदान करने से पितृों को मोक्ष प्राप्त होता है। सोमवती अमावस्या के दिन यहां बहुत बड़ा मेला भी लगता है।

  • पढ़ने-लिखने की ललक, 75 के जयराम और 71 की चंद्रो ने दी परीक्षा

    पढ़ने-लिखने की ललक, 75 के जयराम और 71 की चंद्रो ने दी परीक्षा

    हांसी.

    उम्र के जिस पड़ाव पर लोग पढ़ाई से दूरी बना लेते हैं, वहां बीड़ के 75 वर्षीय जयराम और 71 वर्षीय चंद्रो ने रविवार को परीक्षा केंद्र पहुंचकर नई मिसाल पेश की। उल्लास कार्यक्रम के पांचवें चरण की पढ़ने-लिखने और आसान गणना की परीक्षा में महिलाओं तथा बुजुर्गों ने उत्साह से भाग लिया।

    जिले में 425 निरक्षर लोगों की पहचान कर उनका पोर्टल पर पंजीकरण किया गया था। परीक्षार्थियों को घर के नजदीक सुविधा देने के लिए 277 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। हांसी शहर में तीन केंद्रों पर परीक्षा रखी गई थी। दैनिक जागरण की टीम दोपहर एक बजे गवर्नमेंट हाई स्कूल और लाल सड़क स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पहुंची तो दोनों पर ताला लगा मिला। आसपास के लोगों ने बताया कि सुबह कुछ लोग परीक्षा देने आए थे, लेकिन बाद में स्कूल बंद कर दिया गया।

    नोडल अधिकारी राममेहर के अनुसार दोनों केंद्रों पर 15 लोगों को परीक्षा देनी थी। इनमें 11 ने परीक्षा दी, जबकि चार अनुपस्थित रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने बढ़-चढ़कर परीक्षा में भाग लिया। स्वयंसेवी शिक्षकों को पंजीकृत लोगों से संपर्क कर उन्हें केंद्र तक लाने और परीक्षा की प्रक्रिया समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

  • एशियन गेम्स में हरियाणा का दम, सुमित कुंडू जीते और हिमांशु ने सिल्वर दिलाया

    एशियन गेम्स में हरियाणा का दम, सुमित कुंडू जीते और हिमांशु ने सिल्वर दिलाया

    जींद.

    आइची-नागोया एशियन गेम्स में भारतीय बाक्सिंग अभियान की शुरुआत जींद जिले के गांव ढाकल के बाक्सर सुमित कुंडू ने शानदार जीत के साथ की। पुरुषों के 70 किलोग्राम भार वर्ग में सुमित कुंडू ने अपने शुरुआती मुकाबले में थाईलैंड के बुंजोंग सिंसिरी को 5-0 से हराकर अगले दौर यानी राउंड आफ-16 (प्री-क्वार्टर फाइनल) में जगह बनाई।

    एशियन गेम्स के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार सुमित का मुकाबला 21 सितंबर को निस्शियो जिम्नेजियम में हुआ। सुमित कुंडू की इस जीत से ढाकल गांव ही नहीं, बल्कि पूरे जींद और हरियाणा में खुशी का माहौल है।

    संघर्षों से भरा रहा है सुमित कुंडू का जीवन
    गांव ढाकल से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी तक पहुंचने का सुमित कुंडू का सफर संघर्षों से भरा रहा है। सुमित ने 2018 नेशनल स्कूल गेम्स और 2019 खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने पदार्पण पर सीनियर नेशनल चैंपियनशिप का खिताब हासिल किया। 2022 में थाईलैंड ओपन में स्वर्ण पदक जीतने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। लगातार दूसरी बार सुमित कुंडू ने कामनवेल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि वे मेडल नहीं जीत सके। एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल की उम्मीद है।

    हिमांशु ने फाइनल के लिए किया क्वालिफाई
    10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत की टीम ने रजत पदक अपने नाम किया। चीन ने स्वर्ण पदक और भारतीय टीम ने रजत पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम में रुद्राक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों व राकेश पार्थ शामिल रहे।

  • सभापति चुनाव से पहले तिजारा में विवाद, कांग्रेस पार्षद को रोकने पर हंगामा

    सभापति चुनाव से पहले तिजारा में विवाद, कांग्रेस पार्षद को रोकने पर हंगामा

    भिवानी.

    तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव से एक दिन पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश में बाड़ेबंदी के बाद तिजारा लौट रहे कांग्रेस पार्षदों को रविवार रात करीब नौ बजे पंचकूला टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक लिया।

    कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुलिस पार्षदों को अमरावती पुलिस चौकी ले गई और उनके वाहनों को भी थाने में खड़ा करा दिया। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता इमरान खान के नेतृत्व में नेता और पार्षद पिंजौर पुलिस थाने के बाहर एकत्र हो गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इमरान खान ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में ठहरे कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षद रविवार को तिजारा के लिए रवाना हुए थे। पंचकूला जिले में टोल प्लाजा के पास पुलिस ने उनकी गाड़ियों को रोक लिया।

    कांग्रेस का आरोप है कि हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों और बाउंसरों ने पार्षदों को अपने साथ अमरावती पुलिस चौकी पहुंचाया। कांग्रेस ने इसे सोमवार को होने वाले सभापति चुनाव में पार्षदों को मतदान से रोकने की कोशिश बताया है। सोमवार को तिजारा नगर परिषद सभापति पद के लिए मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्षदों को रोके जाने की घटना ने तिजारा की सियासत गरमा दी है। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तत्काल पार्षदों को छोड़े जाने की मांग की है।

  • बाइक चोरों के निशाने पर पंचकूला, 2026 में 133 वाहन चोरी और 57 ही बरामद

    बाइक चोरों के निशाने पर पंचकूला, 2026 में 133 वाहन चोरी और 57 ही बरामद

    पंचकूला
     जिले में वाहन चोरी की घटनाएं पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही पंचकूला में 133 वाहन चोरी हो चुके हैं, जबकि पुलिस इनमें से केवल 57 वाहन ही बरामद कर सकी है।

    यानी चोरी हुए वाहनों के मुकाबले बरामदगी का आंकड़ा आधे से भी कम है। पिछले वर्षों के आंकड़े देखें तो वाहन चोरी की समस्या लगातार बनी हुई है। वर्ष 2025 में पंचकूला में 339 वाहन चोरी हुए थे, जबकि पुलिस 144 वाहन ही बरामद कर सकी।

    वर्ष 2024 में 342 वाहन चोरी हुए और 73 बरामद हुए। इसी तरह 2023 में 357 वाहन चोरी के मामलों में 94 वाहन बरामद किए गए। वर्ष 2022 में सबसे अधिक 409 वाहन चोरी हुए थे, जिनमें से 115 वाहन बरामद किए गए।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 से 2026 के पहले छह महीनों तक जिले में कुल 1,580 वाहन चोरी हुए हैं। इनमें से 483 वाहनों की ही बरामदगी हो सकी।

    आंकड़े बताते हैं कि वाहन चोरी के मामलों में पुलिस के सामने चोरी हुए वाहनों को ट्रेस कर बरामद करना बड़ी चुनौती है। विशेषकर वर्ष 2024 में 342 वाहनों की चोरी के मुकाबले महज 73 वाहन बरामद हुए, जिससे बरामदगी का आंकड़ा काफी कम रहा।

    दोपहिया सबसे ज्यादा निशाने पर
    पुलिस के अनुसार चोरी के ज्यादातर मामलों में दोपहिया वाहन शामिल हैं। 97 सीसी की मोटरसाइकिलें चोरों के निशाने पर रहती हैं। पुलिस के मुताबिक इनके आसान इग्निशन सिस्टम और पर्याप्त एंटी-थेफ्ट फीचर नहीं होने से इन्हें चुराना आसान होता है।

    वर्ष          चोरी हुए वाहन     बरामद वाहन
    (जनवरी-जून)  
    2026               133                57
    2025               339               144
    2024                 342              73
    2023                 357              94
    2022                  409            115
    कुल                     1,580           483

    चोरी की बाइक बरामद, मालिक के लिए फिर भी कागजी दौड़
    चोरी हुई बाइक बरामद होने के बाद उसे वापस लेने के लिए मालिक को लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। मनीमाजरा निवासी की बाइक चंडीमंदिर थाना पुलिस ने बरामद की, उसे जानकारी अखबार में खबर पढ़कर मिली। थाने पहुंचने पर बाइक की दोनों नंबर प्लेट गायब मिलीं और वाहन क्षतिग्रस्त था। पुलिस ने चेसिस नंबर से पहचान की।

    बाइक लेने के लिए अदालत में सुपुर्दारी अर्जी, वकील और जमानतदार की व्यवस्था करनी पड़ी। कोर्ट से रिलीज आर्डर के बाद मालिक व जमानतदार की अलग फाइल बनी।

    जमानतदार को संपत्ति के दस्तावेज देने, नोटरी से सत्यापन और पुलिस चौकी में प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाइक मिली। करीब एक माह में 3 हजार रुपए कागजी कार्रवाई और पांच हजार रुपए मरम्मत पर खर्च हुए। मुकदमा लंबित रहने तक कोर्ट की अनुमति के बिना बाइक बेचने पर भी रोक है।

    वकील बोले- एक सप्ताह में मिलना चाहिए वाहन
    पंचकूला जिला अदालत के एडवोकेट अवनीत ढाकला ने कहा कि पंजीकृत मालिक का वाहन बरामद होने के बाद प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए। वाहन को एक सप्ताह के भीतर उसके मालिक को सुपुर्द किया जा सकता है। सामान्य मामलों में भी करीब 20 दिन प्रक्रिया में लग जाते हैं। चोरी के पीड़ित को वाहन चोरी होने के बाद दोबारा कागजी प्रक्रिया में परेशान नहीं होना चाहिए।

     

  • कैथल में सोलर पैनल लगाने पर 1.10 लाख तक सब्सिडी, हजारों परिवारों को बिजली बिल से राहत

    कैथल में सोलर पैनल लगाने पर 1.10 लाख तक सब्सिडी, हजारों परिवारों को बिजली बिल से राहत

    कैथल
     प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आमजन के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन रही है। जिले में योजना को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

    अब तक 8 हजार 896 उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित कर इस योजना का लाभ उठाया है। इनमें 1765 अंत्योदय परिवार शामिल हैं। इस योजना से लोगों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

    योजना के तहत यदि कोई उपभोक्ता सोलर सिस्टम लगाने के लिए शुरुआत में पैसे नहीं है तो सरकार बैंकों के माध्यम से बिना किसी गारंटी या प्रापर्टी के न्यूनतम ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा उपलब्ध करवा रही है।

    निगम के अनुसार दो किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल प्रतिदिन लगभग 8 से 10 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। इस प्रकार एक माह में करीब 300 यूनिट तक बिजली उत्पादन संभव है, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार की सामान्य मासिक बिजली खपत के लिए काफी हद तक पर्याप्त हो सकता है। इससे परिवारों के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आती है।

    काफी फायदा हुआ है
    गांव बालू निवासी सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर पर सौर ऊर्जा पैनल लगवाया है। उन्हें केंद्र सरकार के साथ-साथ हरियाणा सरकार की ओर से भी सब्सिडी मिली।

    सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में काफी कमी आई है और अब उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है।

    किसे कितनी मिलती है सब्सिडी
    बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने पात्रता और आय वर्ग के अनुसार सब्सिडी दी जाती है। अंत्योदय परिवार यानी जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है और वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट तक है, उन्हें दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर केंद्र सरकार की ओर से 60 हजार रुपये तथा हरियाणा सरकार की ओर से 50 हजार रुपये, यानी कुल 1.10 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है।

    जिन परिवारों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक है और बिजली खपत 2,400 यूनिट तक है, उन्हें दो किलोवाट तक के सोलर पैनल पर केंद्र सरकार से 60 हजार रुपये तथा हरियाणा सरकार से 20 हजार रुपये, यानी कुल 80 हजार रुपये का अनुदान मिल सकता है।

    तीन लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से एक किलोवाट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये तथा तीन किलोवाट तक 78 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है।

    पर्यावरण और जेब दोनों के लिए हितकारी
    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा संरक्षण और आम जनमानस को बिजली बिलों के भारी-भरकम बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए बहुत ही बेहतरीन योजना है।

    इससे न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि सब्सिडी की प्रक्रिया पारदर्शी हो और पात्र लोगों को समय पर लाभ मिले।

     

  • जिला अस्पताल में सस्ते दाम पर कैंसर और हार्ट की दवाएं उपलब्ध होंगी

    जिला अस्पताल में सस्ते दाम पर कैंसर और हार्ट की दवाएं उपलब्ध होंगी

    यमुना नगर.

    मरीजों को सस्ती व सुलभ दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में खोली जा रही अमृत (अफोर्डेबल मेडिसिन एंड रिलाइबल इंप्लांटस फार ट्रीटमेंट) फार्मेसी का स्टोर तैयार हो गया है। इसके साथ ही वीटा का बूथ भी खुलेगा। दोनों एक जगह होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

    अस्पताल में दाखिल तीमारदारों को वीटा बूथ से दूध व चाय की सुविधा मिलेगी। वहीं दवाइयों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, अगले सप्ताह यह दोनों शुरू हो जाएंगे। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल परिसर जन औषधि केंद्र भी चल रहा है, यहां पर दवाइयों से लेकर स्टाफ तक की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के फार्मेसिस्ट देखते हैं। यदि अस्पताल में कोई दवाई उपलब्ध नहीं है तो मरीज यहां जन औषधि केंद्र से जेनरिक दवाइयां सस्ती कीमत पर ले सकता है। कई बार जन औषधि केंद्र पर भी दवाई नहीं मिल पाती ऐसे में मरीज को बाहर स्टोर से ही दवाई लेनी पड़ती है।

    सस्ते दामों में मिलेंगी महंगी दवाइयां
    अमृत फार्मेसी केंद्र में मरीजों के लिए दवाइयां और इम्प्लांट्स बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत पर मिलेगी। इस केंद्र पर कैंसर से लेकर हृदय रोग सहित गंभीर बीमारियों की दवाइयां भी उपलब्ध रहेगी। अच्छी बात ये है कि बाहर के मरीज भी यहां आकर दवाई ले सकेंगे।

  • पार्कों के विकास पर खर्च होंगे ₹1.58 करोड़, झज्जर में बढ़ेगी हरियाली और सुविधाएं

    पार्कों के विकास पर खर्च होंगे ₹1.58 करोड़, झज्जर में बढ़ेगी हरियाली और सुविधाएं

    झज्जर.

    शहर के सेक्टर-9 के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से पार्कों के विकास और सौंदर्यीकरण की उठ रही मांग अब धरातल पर उतरने जा रही है।

    हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से सेक्टर-9 पार्ट-ए और पार्ट-बी में स्थित छह पार्कों के कायाकल्प के लिए रफ कास्ट एस्टीमेट और डीएनआईटी तैयार कर लिया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1.58 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे पार्कों में बागवानी, बाउंड्री वाल, ग्रिल फेंसिंग, गार्डन बेंच और बच्चों के लिए खेल उपकरण लगाए जाएंगे।

    पार्ट-ए और पार्ट-बी के लिए बजट का ब्योरा 
    एचएसवीपी के एसडीओ देवेंद्र ने बताया कि सेक्टर-9 पार्ट-ए के पार्कों के विकास के लिए 82.57 लाख रुपये का अनुमानित बजट रखा गया है। इसमें टो वॉल व ग्रिल फेंसिंग के लिए 49.92 लाख, हार्टिकल्चर (बागवानी) कार्यों के लिए 9.94 लाख तथा गार्डन बेंच व बच्चों के खेल उपकरणों के लिए 5.71 लाख रुपये का प्रावधान है।

  • पशुधन बीमा योजना से किसानों को सहारा, हरियाणा में 19.19 लाख पशु बीमित

    पशुधन बीमा योजना से किसानों को सहारा, हरियाणा में 19.19 लाख पशु बीमित

    चंडीगढ़.

    हरियाणा सरकार अब पशुपालन को केवल ग्रामीण परिवारों की पारंपरिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि नियमित और लाभकारी स्वरोजगार के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। सरकार का जोर पशुधन की उत्पादकता, स्वास्थ्य और नस्ल सुधार के साथ पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने पर है।

    इसी कड़ी में पशुधन बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं और बेहतर नस्ल के लिए तकनीक का विस्तार किया जा रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत 31 अगस्त 2026 तक 19.91 लाख पशुओं का बीमा किया गया है। वर्ष 2018-19 से 31 अगस्त 2026 तक 32,679 बीमा दावों का निपटारा कर पशुपालकों को 123.68 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को प्रीमियम में 85 प्रतिशत और अनुसूचित जाति परिवारों को 100 प्रतिशत सहायता देने का प्रविधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, हरियाणा सरकार ने पशुपालन को कारोबार के रूप में बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाया है। मई 2026 तक 2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए और 3,478 करोड़ रुपये वितरित किए गए। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़, बकरी, सूकर पालन और चारा इकाइयों के लिए 10 से 50 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रविधान है। अब तक 10 लाभार्थियों को 2.62 करोड़ रुपये की सहायता मिली है।