Category: दिल्ली

  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा प्रस्ताव: नमो भारत नेटवर्क पहुंचेगा तीर्थनगरी तक

    उत्तराखंड सरकार का बड़ा प्रस्ताव: नमो भारत नेटवर्क पहुंचेगा तीर्थनगरी तक

    नई दिल्ली

     दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले लोगों के लिए खुशखबरी है। दिल्ली से मेरठ तक चलने वाली नमो भारत ट्रेन जल्दी ही हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ती नजर आएगी। उत्तराखंड सरकार ने नमो भारत (RRTS) नेटवर्क को मेरठ से आगे हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर केंद्र सरकार विचार कर रही है।

    वर्तमान में नमो भारत ट्रेन दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर चल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्ताव है कि मेरठ के मोदीपुरम से इस रैपिड रेल को राष्ट्रीय राजमार्ग-58 के साथ आगे बढ़ाया जाए, जो हरिद्वार और ऋषिकेश तक पहुंचे। अगर इस ट्रेन का विस्तार होता है तो दिल्ली-एनसीआर से ऋषिकेश तक का सफर ढाई से 3 घंटे में पूरा हो जाएगा। अभी ऋषिकेश पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे का समय लगता है।

    किन-किन शहरों से गुजरेगी ट्रेन?
    इस विस्तार में कई प्रमुख स्टेशनों पर विचार किया जा रहा है। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। प्रस्तावित रूट पर ये नए स्टेशन शामिल होंगे:

        पश्चिमी उत्तर प्रदेश: दौराला, सकौती, खतौली और पुरकाजी।
        उत्तराखंड: रुड़की, हरिद्वार (ज्वालापुर) और ऋषिकेश।

    पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
    इस प्रस्ताव को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि इससे पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

        यह कॉरिडोर हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम का एक विश्वसनीय विकल्प बनेगा। खासकर पीक टूरिस्ट सीजन और कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान।
        बेहतर कनेक्टिविटी से पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में पर्यटन, रियल एस्टेट और स्थानीय व्यवसायों को जबरदस्त गति मिलेगी।
        दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए वीकेंड ट्रिप और तीर्थयात्रा पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।

    अभी क्या है रूट?
    नमो भारत ट्रेन अभी दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक चलती है। बीच में न्यू अशोक नगर, आनंद विहार, गाजियाबाद, मुराद नगर, मेरठ साउथ, बेगमपुल आदि प्रमुख स्टेशन आते हैं। सराय काले खां से मोदीपुरम तक की दूरी करीब 82 किमी है। इसे पूरा करने में नमो भारत ट्रेन को करीब 60 मिनट लगते हैं

  • LPG पर निर्भरता घटाने की कोशिश, IGL का PNG नेटवर्क तेजी से बढ़ा

    LPG पर निर्भरता घटाने की कोशिश, IGL का PNG नेटवर्क तेजी से बढ़ा

    नई दिल्ली  

    इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर में पाइप के जरिये खाना पकाने की गैस (PNG) का कनेक्शन देने का काम तेज कर दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी कमल किशोर चटिवाल का कहना है कि आईजीएल का उद्देश्य रसोई गैस पर दबाव कम करना और ज्यादा से ज्यादा कस्टमर को सुविधा उपलब्ध कराना है।

    मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने के बाद सरकार पीएनजी को काफी बढ़ावा दे रही है और इसे एलपीजी के एक सुविधाजनक विकल्प के रूप में पेश कर रही है। चटिवाल ने बताया कि पहले आईजीएल रोजाना 600-700 पीएनजी कनेक्शन देती थी, जिसे अब बढ़कर 2,100-2,200 प्रतिदिन कर दिया गया है। कंपनी का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 5,000 प्रतिदिन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि फास्ट-फूड श्रृंखला और पुलिस स्टेशनों को भी पीएनजी कनेक्शन देने पर ध्यान दे रही है। हाल ही में एलपीजी आपूर्ति में बाधा के कारण कई तत्काल खाने का सामान उपलब्ध कराने वाले फास्ट-फूड आउटलेट प्रभावित हुए हैं।

    कहां-कहां पहुंच गया कनेक्शन
    देश की सबसे बड़ी शहर गैस वितरक कंपनी आईजीएल अब तक दो प्रमुख फास्ट-फूड श्रृंखला की 100 से अधिक दुकानों को पीएनजी से जोड़ चुकी है और इतने ही कनेक्शन प्रक्रिया में हैं। कुल मिलाकर आईजीएल की योजना लगभग 400 आउटलेट को पीएनजी से जोड़ने की है। इसके साथ ही, दिल्ली के सभी पुलिस थानों को पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे कैंटीन में एलपीजी सिलेंडर के रिफिल की समस्या से राहत मिलेगी।

    कहां तक पहुंची पाइपलाइन
    नयी दिल्ली के कारोबारी केंद्र कनॉट प्लेस में भी अब पीएनजी नेटवर्क पर काम शुरू हो गया है। पहले अनुमति न मिलने के कारण इस क्षेत्र में पीएनजी की पहुंच नहीं थी। हालांकि, अब सरकार द्वारा नियमों में ढील दिए जाने के बाद इसपर काम शुरू हो गया है। अधिकारी ने बताया कि अब पाइपलाइन कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल में पहुंच चुकी है।

    90 दिनों में 4.85 लाख कनेक्शन
    चटिवाल ने बताया कि कंपनी अगले 90 दिन में अपने परिचालन वाले क्षेत्र में 4.85 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, जिसे पाइप के जरिये घरों में रसोई में पहुंचाया जाता है। इसके अलावा इसकी आपूर्ति उद्योगों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों मसलन होटल और रेस्तरां को की जाती है।

    भारत में कितना होता है उत्पादन
    भारत में प्रतिदिन 9.2 करोड़ मानक घनमीटर प्राकृतिक गैस का उत्पादन होता है। शहर गैस (पीएनजी और सीएनजी मिलाकर) में इसके एक-तिहाई हिस्से की खपत की जाती है। आईजीएल के पास 28,000 किलोमीटर से अधिक लंबा पाइपलाइन नेटवर्क है। इसका शहर गैस वितरण नेटवर्क ढांचा दिल्ली के अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, रेवाड़ी, गुरुग्राम, करनाल, कैथल, फतेहपुर, अजमेर, पाली, शामली, बांदा, मुजफ्फरनगर, कानपुर और मेरठ तक फैसला हुआ है। साथ ही यह 950 से अधिक सीएनजी स्टेशन के जरिये 21 लाख से अधिक वाहनों को ईंधन उपलब्ध करा रही है।

  • नोएडा में वेतन विवाद पर बवाल, प्रशासन ने कराया समझौता

    नोएडा में वेतन विवाद पर बवाल, प्रशासन ने कराया समझौता

     नोएडा

    गुरुग्राम में मानेसर के बाद अब नोएडा के फेज-2 क्षेत्र के होजरी कॉम्प्लेक्स में शुक्रवार को 10 से अधिक फैक्टरियों के श्रमिकों ने वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर छह घंटे तक हंगामा किया। डीएमसी मार्ग पर उनकी पुलिस से नोकझोंक भी हुई। इस बीच कुछ श्रमिकों ने पथराव भी किया। पुलिस ने उनको शांत कराया और फूल मंडी में बैठक कराई।

    बैठक में उद्यमी संगठनों ने श्रमिकों को जल्द ही सभी मांगों का समाधान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद श्रमिक शांत हुए। हालांकि, कुछ श्रमिक शनिवार को भी प्रदर्शन करने की चेतावनी दे रहे हैं। होजरी कॉम्प्लेक्स में गारमेंट एक्सपोर्ट की काफी इकाइयां हैं। यहां काफी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह में वेतन वृद्धि कम होने से श्रमिकों में रोष बढ़ गया। श्रमिकों का आरोप है कि महंगाई के समय में 350 रुपये के इंक्रीमेंट का कोई मतबल नहीं।

    श्रमिकों ने गारमेंट इकाइयों के प्रबंधन से वार्ता की। हरियाणा में बढ़ाए गए वेतन का जिक्र भी किया, परंतु कोई समाधान नहीं निकला। श्रमिकों ने गुरुवार को विरोध दर्ज कराया। इसके बाद कोई उचित निर्णय न होने पर शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे से श्रमिक एकत्रित होने शुरू हो गए। श्रमिकों ने दोपहर करीब 12 बजे होजरी कॉम्प्लेक्स की सड़कों पर हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद डीएससी मार्ग पर पेट्रोल पंप के पास यूटर्न पर श्रमिक विरोध दर्ज कराने बैठ गए। इस बीच कुछ श्रमिकों ने पथराव किया। पुलिस बल ने उनको रोक दिया।

    पुलिस धीरे-धीरे श्रमिकों को फूल मंडी ले गई। यहां उद्यमी संगठनों से उनकी वार्ता हुई और समाधान का आश्वासन मिला। इसके बाद श्रमिक शांत हो गए। पुलिस ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। जिले के सात थानों के प्रभारी अपनी-अपनी टीमों के साथ मौके पर पहुंचे।

    अपर पुलिस आयुक्त (सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने कहा कि प्रशासन के अफसरों की कंपनियों के प्रबंधन से वार्ता चल रही है। जल्द ही समाधान होने की उम्मीद है। होजरी कॉम्प्लेक्स में पुलिस बल तैनात किया गया था। कर्मचारियों को समझा-बुझाकर भेज दिया गया।

    श्रमिकों की मुख्य मांगें
    ● आठ घंटे के लिए न्यूनतम 18 से 20 हजार रुपये वेतन मिले। सालाना वेतन वृद्धि 20 से 30 प्रतिशत तक की जाए।

    ● ओवर टाइम का डबल भुगतान किया जाए। कार्य करने के लिए लक्ष्य नहीं दिया जाए।

    ● इकाई के वरिष्ठ अधिकारियों का बर्ताव बेहतर हो। महिलाकर्मियों से रात को कार्य नहीं कराया जाए।

    मानेसर में बवाल के बाद 55 कर्मचारी गिरफ्तार
    आईएमटी मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में वेतन वृद्धि के लिए गुरुवार को हुए बवाल के बाद पुलिस ने 55 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 20 महिलाएं और 35 पुरुष शामिल हैं। अदालत ने शुक्रवार को सभी को जेल भेज दिया। आईएमटी मानेसर के सेक्टर-चार में सैकड़ों कर्मचारियों ने उत्पात मचाया था। इस दौरान पथराव भी किया था।

  • महंगी गैस और सिलिंडर की कमी ने तोड़ी गरीबों की कमर, दिल्ली में अब लोग चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी और कोयले के भरोसे

    महंगी गैस और सिलिंडर की कमी ने तोड़ी गरीबों की कमर, दिल्ली में अब लोग चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी और कोयले के भरोसे

    नई दिल्ली

    राजधानी में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आम लोग परेशान हैं। दिल्ली सरकार के निर्देशों के बावजूद 5 किलो वाले छोटे गैस सिलिंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। अब बड़े सिलिंडरों के साथ साथ छोटे सिलिंडरों की कमी भी लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। कम खपत वाले परिवारों और छोटे कारोबारियों को खासतौर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    कई एजेंसियों पर छोटे सिलिंडर या तो उपलब्ध नहीं हैं या बेहद सीमित संख्या में मिल रहे हैं, जो जल्दी खत्म हो जाते हैं। ठेला चालकों, छोटे दुकानदारों और किराए पर रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि वह बड़े सिलिंडर का खर्च नहीं उठा सकते। मजबूरी में उन्हें महंगे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं।

    छोटे सिलिंडर न मिलने से लोग परेशान : जंगपुरा, भाई वीर सिंह मार्ग, पंचकुइयां रोड, गोल मार्केट, और मुनिरका स्थित एजेंसियों और पंपों पर छोटे सिलिंडर उपलब्ध नहीं है। कई उपभोक्ताओं के अनुसार, वह पिछले कई दिनों से गैस एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें सिलिंडर नहीं मिल रहा है।

    गोल मार्केट निवासी हिमानी ने बताया कि एजेंसी कर्मचारी स्टॉक खत्म होने की बात कहकर उन्हें वापस भेज देते हैं, जबकि कुछ जगहों पर सीमित संख्या में सिलिंडर आते हैं, जो कुछ ही समय में खत्म हो जाते हैं। जंगपुरा निवासी अशोक ने बताया कि वह पिछले 4 से 5 दिनों से एजेंसी जा रहे हैं, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि स्टॉक नहीं आया। इससे घर में खाना बनाने में काफी दिक्कत हो रही है।

    एजेंसियों के दावों और हकीकत में अंतर : जंगपुरा, आरके पुरम और गोल मार्केट स्थित गैस एजेंसियों के अनुसार, सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जो लोग सिलिंडर लेने आ रहे हैं उन्हें दिया जा रहा है। अधिकतर गैस एजेंसियों के संचालकों का कहना है कि राजधानी में सिलिंडर की किसी तरह की कोई कमी नहीं है।

    ज्यादातर उपभोक्ताओं को समय पर सिलिंडर दिया जा रहा है। कुछ मामलों में ट्रांसपोर्ट या तकनीकी कारणों से देरी हो सकती है, लेकिन इसे बड़ी समस्या नहीं माना जाना चाहिए। एजेंसी संचालकों ने कहा कि सप्लाई सामान्य है और अनावश्यक रूप से इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। राजधानी नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रीतम धारीवाल ने बताया कि अभी तक गैस एजेंसियों पर छोटे सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। छोटी सिलिंडरों की कमी से आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ी मार
    गैस की कमी के साथ साथ बढ़ती कीमतों ने भी गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मजदूरों का कहना है कि पहले जितने पैसे में कई दिनों तक गैस चल जाती थी, अब उतने में मुश्किल से कुछ दिन ही काम चलता है। आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों ने गैस का उपयोग कम कर दिया है। कुछ घरों में दिन में केवल एक बार ही खाना बन रहा है, जबकि कई लोग अब लकड़ी और कोयले का सहारा लेने लगे हैं।

    ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित झुग्गियों में रहने वाले लोगों ने बताया कि उनकी समस्याएं अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं। उनके लिए गैस की यह कमी सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का गंभीर संकट बन चुकी है, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

     

  • सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की दलीलों पर उठाए सवाल, अदालत में वकील को हटाने की अपील

    सॉलिसिटर जनरल ने केजरीवाल की दलीलों पर उठाए सवाल, अदालत में वकील को हटाने की अपील

    नई दिल्ली

    अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में हाजिर हुए और न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ CBI की याचिका पर होने वाली सुनवाई से वह खुद को अलग कर लें। दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति शर्मा ने सुनवाई से खुद को अलग करने के अनुरोध वाली केजरीवाल की याचिका को रिकॉर्ड में लिया। अदालत ने इस मामले में सीबीआई से जवाब भी मांगा और सुनवाई 13 अप्रैल को सूचीबद्ध की।

    केजरीवाल की याचिका पर सोमवार को सुनवाई में जोरदार दलीलें रखी गईं। मामले में अरविंद केजरीवाल ने खुद दलीलें रखनी शुरू की। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने रिक्यूजल याचिका दाखिल की है। इसे रिकॉर्ड में लिया जाए। याचिका में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से आग्रह किया गया है कि वह मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लें।

    अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं- एसजी
    इस पर सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और अपमानजनक हैं। केजरीवाल के आरोप बेबुनियाद और कोर्ट की अवमानना ​​करने वाले हैं। अदालत कोई नौटंकी का मंच नहीं है। यदि अरविंद केजरीवाल खुद पेश होकर बहस करना चाहते हैं तो उनको अपने वकील को हटा देना चाहिए।

    7 अन्य आरोपियों ने भी जज को हटाने की लगाई गुहार
    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को यह भी बताया कि बरी किए गए 7 अन्य आरोपियों ने भी जज को सुनवाई से हटाने की याचिका दी है। वहीं जस्टिस शर्मा ने कहा कि यदि कोई और भी ऐसी अर्जी देना चाहता है तो दे सकता है ताकि मैं सभी अर्जियों पर एक ही बार में कोई फैसला ले सकूं।

    क्या है पूरा मामला?
    बता दें कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को बरी कर दिया था। अदालत ने CBI को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसका केस न्यायिक जांच में बिल्कुल भी टिकने लायक नहीं है। केस पूरी तरह से खारिज हो चुका है। फैसले के खिलाफ मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो 9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने CBI की याचिका पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया। सीबीआई ने आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने भेजा था नोटिस
    न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने नोटिस जारी करने के साथ ही कहा था कि आरोप तय करने के चरण में ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष पहली नजर में गलत मालूम पड़ रहे हैं। इसके साथ ही न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की ट्रायल कोर्ट की सिफारिश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद केजरीवाल की ओर से एक याचिका में मामला किसी दूसरे जज के हवाले करने की मांग की गई।

    मुख्य न्यायाधीश भी ठुकरा चुके हैं गुजारिश
    बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जस्टिस शर्मा से किसी दूसरे जज को सौंपने की केजरीवाल की गुजारिश को ठुकरा दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि खुद को सुनवाई से हटाने का फैसला संबंधित जज को ही लेना होता है। फिर अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को खुद को अलग करने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया। मामले में केजरीवाल ने खुद पेश होकर अपनी ओर से दलीलें रखीं।

  • दिल्ली विधानसभा में अज्ञात कार का प्रवेश, स्पीकर के कमरे के बाहर गुलदस्ता छोड़कर हुआ फरार

    दिल्ली विधानसभा में अज्ञात कार का प्रवेश, स्पीकर के कमरे के बाहर गुलदस्ता छोड़कर हुआ फरार

     नई दिल्ली

    दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक सामने आई है, जब एक अज्ञात कार गेट तोड़कर अंदर घुस गई. घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. कार कैसे अंदर पहुंची, इसकी जांच की जा रही है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और वाहन चालक की पहचान करने की कोशिश जारी है. दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर यूपी नंबर की सफेद Tata Sierra कार मॉल रोड स्थित बंद रहने वाले गेट को तोड़कर VIP एंट्री से अंदर घुसी.  कार सवार स्पीकर रूम के बाहर गुलदस्ता रखकर मौके से फरार हो गया. घटना के बाद हड़कंप मच गया. जांच के लिए विधानसभा परिसर में दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी मौजूद हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश जारी है। 

    मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि गेट नंबर 2 के पास मेट्रो के पास खड़े दो लोगों ने पूरी घटना अपनी आंखों से देखी. पीली टी-शर्ट पहने एक युवक, जिसका नाम रवित बताया जा रहा है, उसने कहा कि कार तेज़ी से गेट तोड़कर अंदर आई, कुछ देर परिसर में घूमी और फिर बाहर निकल गई. चश्मदीदों के मुताबिक, घटना के दौरान वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों में शोर मच गया। 

  • एलपीजी की किल्लत और अफवाहों पर लगाम,दिल्ली सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम, गुप्त रखी जाएगी शिकायतकर्ता की पहचान

    एलपीजी की किल्लत और अफवाहों पर लगाम,दिल्ली सरकार ने बनाया कंट्रोल रूम, गुप्त रखी जाएगी शिकायतकर्ता की पहचान

    नई दिल्ली
    मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब धीरे-धीरे दुनिया के कई देशों में दिखने लगा है. ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में भी रेखा गुप्ता की सरकार सतर्क हो गई है.

    दिल्ली में LPG गैस सिलेंडर की कालाबाजारी को रोकने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट ने एक कंट्रोल रूम तैयार किया है, जहां लोग सीधे शिकायत कर सकते हैं.

    अगर किसी को गैस सिलेंडर की कालाबाजारी की जानकारी मिलती है, तो वह 8383824659 नंबर पर शिकायत कर सकता है. खास बात यह है कि शिकायत करने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी.

    सरकार ने हाल ही में बवाना और अलीपुर इलाके में ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 100 गैस सिलेंडर जब्त किए गए. इससे साफ है कि कालाबाजारी पर अब सख्ती बढ़ा दी गई है.

    केंद्र सरकार ने भी कमर्शियल कंज्यूमर्स के लिए 70 फीसदी सिलेंडर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. दिल्ली में रोजाना करीब 6300 कमर्शियल सिलेंडर दिए जा रहे हैं, ताकि सप्लाई बनी रहे और लोगों को दिक्कत न हो.

    अब सरकार का फोकस साफ है कि सप्लाई को स्थिर रखना और कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाना. ऐसे समय में लोगों से भी अपील की गई है कि अगर कहीं गड़बड़ी दिखे तो तुरंत जानकारी दें.

    बता दें कि अमेरिका
    इजरायल ने साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. इस हमले के बाद दुनिया के कई मुल्कों पर ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा. इससे भारत भी अछूता नहीं रहा. देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिसमें लोग गैस सिलेंडर के लिए लाइन में लगते हुए दिखे. वहीं, सरकार ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी.

  • विधानसभा चुनावों से पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सक्रियता, यूपी और गुजरात में सियासी लाभ की तैयारी

    विधानसभा चुनावों से पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सक्रियता, यूपी और गुजरात में सियासी लाभ की तैयारी

     नई दिल्ली
     पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने अचानक नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) के तहत संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन से संबंधित तैयारी शुरू की. उसने इसके लिए विपक्ष से सहयोग मांगा है. बताया यह जा रहा है कि विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाने के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन विधेयक पारित किया जायेगा. इसमें कई सारे कदम उठाये जाने की बात कही गयी है. जैसे-संविधान संशोधन से लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाने वाली हैं, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जायेंगी.

    इसके अलावा, सरकार ने परिसीमन को 2026-27 के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर कराने का फैसला किया है. इसके पीछे तर्क यह है कि नयी जनगणना होने और उसका आंकड़ा आने में इतना समय लग जायेगा कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक परिसीमन नहीं हो पायेगा. एक और प्रस्ताव यह है कि संशोधन से राज्यों में सीटों की वृद्धि का अनुपात नहीं बदलेगा. जबकि पहले ऐसा माना जा रहा था कि कम जनसंख्या होने के कारण दक्षिण भारत के राज्यों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

    इस कारण दक्षिण के नेता क्षुब्ध थे. लेकिन नये प्रस्ताव के मुताबिक, परिसीमन से उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 80 से बढ़कर अगर 120 हो जायेंगी, तो तमिलनाडु में भी लोकसभा सीटों में वृद्धि इसी अनुपात में होगी. परिसीमन के मुद्दे पर लंबे समय से उत्तर बनाम दक्षिण का न सिर्फ द्वंद्व छिड़ा हुआ था, बल्कि दक्षिण के राज्यों को लगता था कि जनसंख्या को नियंत्रित रखने का उन्हें दंड दिया जा रहा है, जबकि ज्यादा आबादी वाले उत्तर भारत के राज्यों को परिसीमन के जरिये बड़ा राजनीतिक लाभ मिलेगा. लेकिन नये प्रस्ताव में यह आशंका दूर हो गयी है.

    2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराकर दक्षिण की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश
    दरअसल, परिसीमन मुद्दे पर एनडीए में भाजपा के सहयोगी चंद्रबाबू नायडू तक का रवैया नाराजगी भरा था, और वैसे में, दक्षिण भारत में भाजपा के लिए अपना विस्तार कर पाना कठिन होता, इसलिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराकर दक्षिण की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश है. दरअसल, 19 सितंबर, 2023 को जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) संसद से पारित हुआ था, तब इसे जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन और 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की घोषणा की गयी थी. लेकिन अब सरकार ये दोनों कार्य संविधान संशोधन के जरिये करना चाहती है. संविधान संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए, जो सरकार के पास नहीं है. इसके अलावा, आधे राज्यों को इसे पारित कराना होगा. बेशक मौजूदा राजनीतिक माहौल में इसे पारित कराना आसान नहीं है. लेकिन विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध भी नहीं कर पायेंगे.
    अगर संसद के विशेष सत्र में इस पर मुहर लग जाती है, तो फिर परिसीमन आयोग बैठेगा, और उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले वर्ष तक महिला आरक्षण लागू हो जायेगा. हालांकि यह सवाल उठाया जा रहा है कि महिला आरक्षण को अगर 2011 की जनगणना और परिसीमन के आंकड़ों पर ही लागू करना था, तो इसे पहले भी लाया जा सकता था. लेकिन सरकार अब अचानक यह कदम उठाने जा रही है, तो कुछ सोच-समझकर ही उठा रही होगी. दरअसल, अगले साल तीन राज्यों-उत्तर प्रदेश, गुजरात और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ये चुनाव, जाहिर है कि भाजपा और एनडीए के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं.

    अगर अगले साल तक महिला आरक्षण लागू हो जाता है, तो इन तीनों राज्यों में भाजपा को चुनावी लाभ मिलना तय है. फिर 2029 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को इसका लाभ मिलेगा. हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव है, और काफी जटिल भी है. कई प्रश्नों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं. जैसे परिसीमन के बाद लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित हो जायेंगी. लेकिन ये सीटें किस तरह आरक्षित होंगी, इस बारे में अभी कुछ तय नहीं है. सवाल यह भी है कि परिसीमन जब 2011 की जनगणना के आधार पर ही होना है, तो फिर 2026-27 की जनगणना के आधार पर नये सिरे से परिसीमन कराने का क्या औचित्य होगा. फिलहाल लगता है कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने यह दांव चला है.

    दरअसल युद्ध का लंबा असर रहने वाला है, और हमारी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव भी लंबे समय तक रहेगा. इस कारण आय से लेकर रोजगार तक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में, महिला आरक्षण लागू कर सरकार महिलाओं का एकमुश्त वोट अपने साथ होने की उम्मीद कर सकती है. इस मामले में दो बातों पर ध्यान देना चाहिए. एक यह कि चुनावों में महिला वोटरों की भूमिका अब पुरुष वोटरों के बराबर या उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण होने लगी है. इसके अलावा, महिलाओं का बड़ा वर्ग पहले से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ है. ऐसे में, अगर मान लें कि युद्ध के असर से युवा वर्ग सरकार से नाराज हो जाये, तो उसका चुनावी नतीजे पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है. इसके अलावा, परिसीमन चूंकि 2011 के आंकड़े पर ही होना है, ऐसे में, दक्षिण भारत के नेता खुश हैं, और वहां भाजपा को नाराजगी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा.

    लेकिन इस कदम को सिर्फ चुनावी राजनीति के चश्मे से देखना सही नहीं होगा. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण लागू हो जाता है, तो यह भारतीय राजनीति की एक बड़ी उपलब्धि होगा. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि महिला आरक्षण के कारण जिन पुरुष राजनेताओं को अपनी सीटें गंवानी पड़ेंगी, वे आरक्षित सीटों पर अपनी महिला रिश्तेदारों को बिठा सकते हैं. और बहुत संभव है कि इसे राजनीतिक बुराई के तौर पर ही देखा जाये.

    महिला आरक्षण के कारण बड़ी संख्या में स्त्रियों में जागृति और आत्मविश्वास की भावना आयी है
    लेकिन पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिला आरक्षण लागू होने के बाद हमने देखा है कि भले ही अनेक जगहों पर वास्तविक ताकत अब भी महिला प्रमुखों के पतियों के पास ही हो, लेकिन महिला आरक्षण के कारण बड़ी संख्या में स्त्रियों में जागृति और आत्मविश्वास की भावना आयी है. और अब वे राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में अपनी जगह लेने के लिए तैयार हैं. इस लिहाज से महिला आरक्षण भारतीय राजनीति को बदलने के साथ-साथ उसमें नयी ऊर्जा भर सकता है. संसद और विधानमंडलों में महिलाओं की संख्या बढ़ने पर वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका जैसे मुद्दों पर नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी, जिसका समाज पर निश्चित रूप से सकारात्मक असर पड़ेगा.

  • ‘ऐसा हर बार होता है…’: मतदाता सूची में नाम जोड़ने पर ममता सरकार की आपत्तियों पर SC की दोटूक

    ‘ऐसा हर बार होता है…’: मतदाता सूची में नाम जोड़ने पर ममता सरकार की आपत्तियों पर SC की दोटूक

    नई दिल्ली
    टीएमसी का पक्ष रख रहे वकील कल्याण बनर्जी ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म 6 जमा किए हैं। फॉर्म 6 का प्रयोग वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या फिर संसदीय क्षेत्र बदलने की स्थिति में किया जाता है। बेंच ने कहा कि यह प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही। हमेशा ऐसा होता है।

    ऐसा हर बार होता है; वोटर लिस्ट वाली TMC की आपत्तियों पर SC की दोटूक, नसीहत भी दी
    तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐतराज जताया गया था कि भाजपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में फॉर्म 6 जमा करा रहे हैं। इसके जरिए मतदाताओं के नाम लिस्ट में जुड़वाए जा रहे हैं। उसकी इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसमें कुछ गलत नहीं है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इस तरह ममता बनर्जी की पार्टी को करारा झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य में SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। चीफ जस्टिस ने कहा, 'ऐसा हर बार होता है। पहली बार नहीं हो रहा है। आप आपत्तियां दायर कर सकते हैं।' बेंच का कहना था कि यदि आपको किसी का नाम जोड़े जाने से आपत्ति है तो उस पर चुनाव आयोग में रिपोर्ट कर सकते हैं।

    टीएमसी का पक्ष रख रहे वकील कल्याण बनर्जी ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म 6 जमा किए हैं। फॉर्म 6 का प्रयोग वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या फिर संसदीय क्षेत्र बदलने की स्थिति में किया जाता है। अधिवक्ता ने कहा कि पूरक सूचियां आ चुकी हैं। इसके बाद भी चुनाव आयोग के नए नोटिफिकेशन में फॉर्म 6 स्वीकार करने की बात कही गई है। लेकिन जब वोटर लिस्ट की पूरक सूची आ गई है और प्रक्रिया बढ़ चुकी है तो फिर फॉर्म 6 क्यों मंगाए जा रहे हैं। उनके बंडल तैयार होकर आ रहे हैं। मैं किसी राजनीतिक दल पर इसके लिए आरोप नहीं लगा रहा।

    हालांकि चीफ जस्टिस ने टीएमसी की इन आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बात करना जल्दबाजी होगा। पहले पूरी प्रक्रिया को समझने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि हम इस मामले को बंद नहीं कर रहे हैं, लेकिन समय आने पर देखेंगे। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष रखने वाले वकील डीएस नायडू ने कहा कि नियम यह कहता है कि मतदाताओं के नाम उम्मीदवारों के नामांकन के आखिरी दिन तक शामिल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई आज ही 18 साल का हुआ है और वह मतदाता के तौर पर नाम जुड़वाना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है।

    इस पर बनर्जी ने कहा कि नए नाम जिनके शामिल किए जा रहे हैं। उनके बारे में हर बूथ पर सार्वजनिक सूचना जारी होना चाहिए। ऐसा होने पर ही आपत्तियां दायर हो सकेंगी। इस पर जस्टिस बागची ने दखल दिया। उन्होंने कहा कि एक चीज मतदाता सूची में संशोधन है। दूसरी चीज वह वोटर लिस्ट है, जिसके आधार पर चुनाव होना है। चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो आयोग की ओर से तय तारीख तक अपडेट हो जाती है। इसलिए यदि कोई उसके बाद शामिल भी हुआ तो वह इलेक्शन में मतदान का अधिकार नहीं रखता। इससे पहले शीर्ष अदालत ने कहा था कि बंगाल में SIR की प्रक्रिया को पूर्ण कराने के लिए न्यायिक अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। आज चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी आपत्तियों पर 7 अप्रैल तक फैसला लिया जाएगा।

  • दिल्ली-NCR में धूल भरी आंधी और बारिश का असर: अभी और सताएगा बदलता मौसम

    दिल्ली-NCR में धूल भरी आंधी और बारिश का असर: अभी और सताएगा बदलता मौसम

     दिल्ली

    दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न इलाकों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हुई। तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ पड़ी इन बौछारों ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दिलाई, जिससे पूरे क्षेत्र का मौसम काफी सुहावना और खुशनुमा हो गया। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए गरज चमक और तेज हवा के साथ बारिश या बौछारें पड़ने का येलो अलर्ट जारी किया है।

    फरीदाबाद में आंधी बारिश

    फरीदाबाद में मौसम ने अचानक करवट ली। सुबह से तेज धूप और गर्मी के बीच दोपहर करीब तीन बजे मौसम का मिजाज बदल गया। देखते ही देखते काले बादलों ने पूरे शहर को घेर लिया और तेज धूल भरी आंधी चलने लगी। आंधी चलने के कुछ देर बाद बूंदाबांदी भी शुरू हो गई। इससे तेज गर्मी से राहत मिली। आंधी और बूंदबांदी शुरू होने के साथ कई इलाकों में बिजली गुल हो गई।

    तेज हवा के साथ बारिश का येलो अलर्ट

    मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान दिल्ली के साथ ही एनसीआर के कई हिस्सों में बादल छाने और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज हवाएं चलेंगी। हवा की स्पीड 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। आंधी के दौरान हवा की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।

    पहली और 2 अप्रैल को नहीं होगी बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मौसम विभाग ने पहली और दो अप्रैल को बारिश नहीं होने का अनुमान व्यक्त किया है लेकिन इसके बाद एकबार फिर मौसम करवट लेगा। हालांकि मौसम बदलने से पहले पहली और दो अप्रैल को तापमान में बढ़ोतरी देखी जाएगी।

    3-4 अप्रैल को फिर मौसम लेगा करवट, आंधी-बारिश

    दिल्ली में पहली अप्रैल को दिल्ली में अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री, दो अप्रैल को 35-37 डिग्री और 3 अप्रैल को इसके 34 से 36 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। हालांकि तीन और 4 अप्रैल को दिल्ली एनसीआर में आंधी बारिश वाला मौसम एकबार फिर देखने को मिलेगा। दोनों ही दिन बादल छाए रहेंगे। दोपहर या शाम के समय दिल्ली एनसीआर में गरज चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश देखी जा सकती है।

    कम होगा तापमान

    मौसम विभाग के अनुसार, दोनों ही दिन दिल्ली एनसीआर में मौसम खराब रहने के दौरान हवा की स्पीड 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक देखी जा सकती है। कभी-कभी हवा की स्पीड 40 किमी प्रति घंंटा तक पहुंच सकती है। बारिश से 4 और 5 अप्रैल को अधिकतम तापमान कम होकर 31 से 33 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 6 अप्रैल को इसके 30 से 32 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।