Category: दिल्ली

  • लू के खतरे के चलते नोएडा में स्कूलों की टाइमिंग बदली, बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता

    लू के खतरे के चलते नोएडा में स्कूलों की टाइमिंग बदली, बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता

    नई दिल्ली

    नोएडा और आसपास के इलाकों में बढ़ती गर्मी ने अब स्कूलों की दिनचर्या तक बदल दी है। गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने हालात को देखते हुए सभी स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और ‘लू’ चलने का खतरा भी बढ़ गया है। छोटे बच्चों पर इसका असर जल्दी पड़ता है, इसलिए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है।

    नई टाइमिंग क्या है और कब से लागू होगी
    जारी आदेश के मुताबिक, अब जिले के सभी स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ही चलेंगे। यह नया शेड्यूल 27 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है और अगली सूचना तक जारी रहेगा। इसका मकसद साफ है कि बच्चों को दोपहर की तेज धूप और खतरनाक गर्मी से दूर रखा जा सके। सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है, जिससे बच्चों के लिए स्कूल जाना सुरक्षित रहेगा।

    किन-किन स्कूलों पर लागू होगा आदेश
    यह आदेश सिर्फ सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है। जिले में चल रहे सभी स्कूलों पर यह नियम लागू होगा, चाहे वे निजी हों या किसी भी बोर्ड से जुड़े हों। इसमें सीबीएसई, आईसीएसई, आईबी और यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त सभी संस्थान शामिल हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस आदेश का पालन करना हर स्कूल के लिए जरूरी है।

    लू और हीटवेव का बढ़ता खतरा
    उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान ‘लू’ यानी गर्म और सूखी हवाएं चलना आम बात है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग लगातार चेतावनी दे रहा है कि दोपहर के समय बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में स्कूल जैसे जगह, जहां बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ मौजूद होते हैं, खासतौर पर संवेदनशील माने जाते हैं। इसी वजह से प्रशासन ने समय बदलकर जोखिम कम करने की कोशिश की है।

    दिल्ली स्कूलों में भी सख्त कदम
    गर्मी से निपटने के लिए दिल्ली के स्कूलों में भी कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। वहां ‘वॉटर बेल’ सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें हर 45 से 60 मिनट के बीच बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाती है। इसके अलावा, खुले मैदान में होने वाली असेंबली और आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। स्कूलों को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है, जो इन नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा।

    बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां
    गर्मी के इस मौसम में सिर्फ टाइमिंग बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि बच्चों को खुद भी कुछ सावधानियां अपनानी होंगी। जैसे कि ज्यादा पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और धूप में ज्यादा देर तक न रहना। स्कूलों में भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि बच्चे डिहाइड्रेशन से बचें और किसी भी तरह की तबीयत खराब होने पर तुरंत जानकारी दें।

    आगे क्या हो सकता है फैसला
    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर गर्मी और बढ़ती है तो आगे और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं अगर मौसम में राहत मिलती है, तो स्कूलों के समय को फिर से सामान्य किया जा सकता है। फिलहाल प्राथमिकता बच्चों की सेहत और सुरक्षा को दी जा रही है।

  • केजरीवाल ने किया ‘सत्याग्रह’ का ऐलान, जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में ना होंगे खुद और ना वकील

    केजरीवाल ने किया ‘सत्याग्रह’ का ऐलान, जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में ना होंगे खुद और ना वकील

     नई दिल्ली
    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे। 

    उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है। 

    दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है। 

    अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?

     जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह

    आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है।

    दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी।

    मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी।

    मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

  • काम के पास घर की सुविधा, यूपी में श्रमिक आवास नीति का विस्तार

    काम के पास घर की सुविधा, यूपी में श्रमिक आवास नीति का विस्तार

    नोएडा

     उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या हमेशा सस्ते और सुरक्षित आवास की रही है। बढ़ते किराए, लंबी दूरी और सीमित आय के बीच जीवन यापन करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। अब इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार और प्राधिकरण स्तर पर बड़े फैसले लिए गए हैं। नोएडा में जहां श्रमिकों के लिए चार बड़े हॉस्टल बनाए जाएंगे, वहीं पूरे राज्य में किफायती किराया आवास नीति को औद्योगिक क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी है, जिससे मजदूरों को उनके कार्यस्थल के पास ही सस्ती और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था मिल सकेगी।

    नोएडा में बनेंगे 4 श्रमिक हॉस्टल
    नोएडा प्राधिकरण श्रमिकों के लिए चार आधुनिक हॉस्टल बनाने जा रहा है। इनमें से दो हॉस्टल प्राधिकरण स्वयं बनाएगा, जबकि दो का निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) में किया जाएगा।

    चारों हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर विकसित होंगे और प्रत्येक हॉस्टल में लगभग 1000 श्रमिकों के रहने की क्षमता होगी। इन हॉस्टल्स को औद्योगिक सेक्टरों के पास बनाया जाएगा, जिससे श्रमिकों को कार्यस्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त परिवहन खर्च नहीं करना पड़ेगा।

    औद्योगिक क्षेत्रों में बनेंगे श्रमिक आवास
    राज्य स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि पर श्रमिकों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। इस निर्णय में आवास, औद्योगिक विकास, नगर विकास और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल रहे, जिन्होंने श्रमिकों को कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा देने पर सहमति जताई।

    सरकारी एजेंसियों के साथ निजी डेवलपर्स भी होंगे शामिल
    इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को भी जोड़ा जाएगा। निजी बिल्डरों को अपनी परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए किराए के मकान बनाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बदले उन्हें भू-उपयोग में छूट, मानचित्र स्वीकृति में तेजी और विकास शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके।

    1000 से 1500 रुपये तक होगा किराया
    इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसका किफायती किराया है। सूत्रों के अनुसार, इन श्रमिक आवासों का मासिक किराया लगभग 1000 से 1500 रुपये के बीच रखा जा सकता है। मौजूदा समय में बड़े शहरों में एक कमरे का किराया 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुका है, ऐसे में यह योजना कम आय वाले श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

    कुशल और अकुशल दोनों श्रमिकों को मिलेगा लाभ
    यह योजना केवल फैक्ट्री मजदूरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल व अकुशल श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। आवास का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि यदि कोई श्रमिक शहर छोड़ता है तो उसी मकान को दूसरे जरूरतमंद को दे दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
    प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार
    राज्य सरकार पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (ARH) नीति को मंजूरी दे चुकी है। अब इस नीति को औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।

    क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
    हाल के वर्षों में नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों ने महंगे किराए, बच्चों की फीस और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध जताया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी श्रमिकों के सामने आवास की गंभीर समस्या सामने आई थी, जिसने इस दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।

     

  • सुरक्षा मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के बाद एयरपोर्ट बनेगा बड़ा एविएशन हब

    सुरक्षा मंजूरी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के बाद एयरपोर्ट बनेगा बड़ा एविएशन हब

    नोएडा

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले महीने उड़ानें शुरू करने की तैयारी है. एयरलाइंस कंपनियों ने शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें शुरू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की एयरपोर्ट साइट पर बोर्ड बैठक हुई.

    बैठक में एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने में आ रही रुकावटों समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की गई. मई के अंत तक एयरपोर्ट से घरेलू और कार्गो विमान सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया. तीन एयरलाइंस कंपनियों के पदाधिकारियों से वार्ता की गई, जिन्होंने शुरुआत में एयरपोर्ट से 17 फ्लाइट्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा है.

    17 शहरों के लिए मिलेगी कनेक्टिविटी
    बैठक में पूरा खाका तैयार करने और टिकट बुकिंग सेवा शुरू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के आदेश दिए गए. हालांकि, उड़ान के लिए शहरों का चयन अभी नहीं हो सका है. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से उड़ान के लिए अंतिम मंजूरी के प्रस्ताव पर भी यापल और नायल के अधिकारियों के बीच बैठक हुई.

    सुरक्षा और विदेशी CEO का मसला
    बकास से अभी एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) को मंजूरी मिलना बाकी है. इसके बाद ही उड़ान सेवा शुरू की जाएगी. इस दौरान गृह मंत्रालय की आपत्तियों को दूर करने और विदेशी सीईओ से संबंधित मसले को सुलझाने पर भी अधिकारियों के बीच मंथन हुआ. यापल के अधिकारियों ने दावा किया कि इस पर काम शुरू हो गया है और एएसपी के लिए सभी आपत्तियां इसी माह में दूर कर ली जाएंगी, ताकि मई तक उड़ानें शुरू की जा सकें.

    इंफ्रा पर बड़ा निवेश, 300 करोड़ खर्च होंगे
    यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की बोर्ड बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एयरपोर्ट पर अगले दो वर्षों में विमानों को खड़ा करने के लिए 25 नए स्टैंड बनेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. वर्तमान में 28 स्टैंड बनकर तैयार हैं, जिनमें तीन कार्गो और 25 व्यावसायिक विमानों के लिए हैं.

    इसके अलावा, एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज जोड़े गए हैं, जिससे विमान यात्री एक साथ उड़ान भर सकेंगे. एयरपोर्ट के रनवे को प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है.

  • दिल्ली आग हादसा: ट्रांसफार्मर से लगी आग ने मचाई तबाही, कोई हताहत नहीं

    दिल्ली आग हादसा: ट्रांसफार्मर से लगी आग ने मचाई तबाही, कोई हताहत नहीं

    नई दिल्ली

    दिल्ली में शुक्रवार रात को आगजनी की दो घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पहली घटना लक्ष्मी नगर में हुई, जहां ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग ने कई मकानों को चपेट में ले लिया। वहीं, शकूर बस्ती इलाके में भीषण आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक हो गईं।

    पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में शुक्रवार देर रात को बिजली के एक ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग ने कई आवासीय इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 लोगों को बचाया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, रमेश पार्क स्थित नानक मोटर के पास रात करीब साढ़े 12 बजे आग लगने की सूचना मिली। दमकल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची लेकिन आग जल्द और भड़क गई।

    आग पर काबू पाने के लिए पानी के सात टैंकर और अन्य अग्निशमन वाहनों को तैनात किया गया। अधिकारी ने बताया कि ट्रांसफार्मर से आग आसपास की तीन इमारतों में फैल गई, जिससे 14 फ्लैट प्रभावित हुए। दमकलकर्मियों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और प्रभावित फ्लैट में फंसे सभी 14 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया।

    उन्होंने बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। देर रात करीब दो बजे आग पर काबू पा लिया गया, जिसके बाद शीतलन अभियान चलाया गया। आग लगने का सटीक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है।

    उधर, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शकूर बस्ती इलाके में भीषण आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, आग लगने की सूचना शुक्रवार रात 11 बजकर 14 मिनट पर मिली। उसने बताया कि शुरुआत में दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और करीब दो एकड़ क्षेत्र में फैली आग पर काबू पाने के लिए बाद में और गाड़ियों को भेजा गया।

    डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा कि झुग्गियों में इस्तेमाल अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई। आग पर देर रात करीब 12 बजकर 40 मिनट पर काबू पा लिया गया। यह सुनिश्चित करने के लिए शीतलन अभियान जारी है कि आग फिर न भड़के। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है।

  • विधायी कार्यों में उत्कृष्ट योगदान पर अनिल गोयल को सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार मिला

    विधायी कार्यों में उत्कृष्ट योगदान पर अनिल गोयल को सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार मिला

    नई दिल्ली

    दिल्ली विधानसभा ने 18 वर्षों के बाद सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसके लिए गठित चयन समिति की बैठक विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल को सर्वश्रेष्ठ विधायक घोषित किया गया।

    उन्हें स्मृति चिन्ह और 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। शीघ्र ही समारोह आयोजित कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। डॉ. गोयल पहली बार कृष्णा नगर से विधायक चुने गए हैं।

    पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया चयन
    'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' का चयन पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया है। कुल मूल्यांकन 100 अंकों पर किया गया है, जिसमें 65 अंक विधानसभा के आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर और 35 अंक चयन समिति द्वारा गुणात्मक मूल्यांकन के आधार पर हैं।

    विधायक की सक्रियता के लिए कुल 30 अंक निर्धारित
    मूल्यांकन का सबसे बड़ा हिस्सा, 50 अंक सदन में विभिन्न मुद्दों पर होने वाली चर्चा में सदस्य के योगदान पर केंद्रित है। विभिन्न समितियों में विधायक की सक्रियता के लिए कुल 30 अंक निर्धारित हैं। 20 अंक अनुशासन, आचरण और आधुनिकीकरण (डिजिटल और कागजरहित कार्यप्रणाली) से संबंधित हैं।

    विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह पहल उन सदस्यों को सम्मानित करने के लिए है जो विधायी कार्यों में उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं और समिति कार्यों में अथक परिश्रम करते हैं।

    दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य, दिल्ली सरकार के विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग के प्रधान सचिव रितेश सिंह और दिल्ली विधानसभा के सचिव रणजीत सिंह शामिल रहे।

     

  • दिल्ली में IRS अफसर की बेटी संग नौकर का कांड, चाबी वाली गलती ने खोली पूरी कहानी

    दिल्ली में IRS अफसर की बेटी संग नौकर का कांड, चाबी वाली गलती ने खोली पूरी कहानी

    नई दिल्ली

    दिल्ली में बुधवार सुबह एक IRS अधिकारी के घर जिस खौफनाक घटना को अंजाम दिया, उसने राजधानी ही नहीं पूरे देश को चिंता में डाल दिया है। खासकर उन लोगों को जो अपने दैनिक कामकाज के लिए घरेलू सहायकों की मदद लेते हैं। कुछ समय पहले काम से निकाले गए एक नौकर ने ना सिर्फ अधिकारी के घर में लूटपाट की, बल्कि उनकी 22 साल की होनहार बेटी की जान ले ली। आशंका यह भी है कि उसने गला घोंटने से पहले पीड़िता पर यौन हमला भी किया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आईआरएस अधिकारी जिम जाते हुए चाबी को उसी जगह रख गए थे, जहां वह पहले रखते थे। पुराने नौकर को हटाने के बाद उन्होंने इसकी जगह नहीं बदली थी।

    पुलिस की शुरुआती जांच और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से पता चला कि उसने पीड़िता को काबू करने के लिए पहले उसके सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया और फिर चार्जर केबल से उसका गला घोंट दिया। द्वारका के एक होटल में करीब 12 घंटे बाद गिरफ्तार हुए आरोपी नौकर को आईआरएस अधिकारी ने डेढ़ महीने पहले काम से हटा दिया था। पैसों के लेनदेन में गड़बड़ी करने पर उसे हटाया गया था। जुए और उधार में फंस चुका आरोपी राहुल मीणा खौफनाक घटना को अंजाम देने के बाद घर से 2.5 लाख रुपये कैश और कुछ गहने लेकर फरार हो गया था। जॉइंट सीपी विजय कुमार ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रेप, हत्या और लूट जैसे आरोपों में बीएनएस की कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    जानता था सारे भेद
    जिस समय घटना को अंजाम दिया गया, आईआरएस अधिकारी अपनी पत्नी के साथ सुबह 6 बजे के आसपास ही जिम और वॉकिंग के लिए निकल गए थे। जॉइंट सीपी ने बताया, 'पीड़िता के माता-पिता जिम के लिए निकल गए थे। उन्होंने हर दिन की तरह एक अतिरिक्त चाबी फ्लैट के बाहर रख दी थी। नया नौकर आमतौर पर 6.30 बजे से 7 बजे तक आता था। राहुल को इस बात की जानकारी थी कि चाबी बाहर कहां रखी रहती है।'

    जानता था कहां रखी होती है जाबी, टाइमिंग की भी जानकारी
    आरोपी यह भी जानता था कि आईआरएस अधिकारी और उनकी पत्नी किस समय बाहर होते हैं और बेटी घर पर अकेली होती है। एक दिन पहले ही अलवर में महिला से रेप करके रात में ही दिल्ली पहुंचा नौकर सुबह-सुबह दूसरी वारदात को अंजाम देने के लिए अमर कॉलोनी पहुंच गया था। अधिकारी ने कहा, 'अफसर और उनकी पत्नी के घर से निकलने के बाद राहुल वहां पहुंचा। उसने चाबी उठाई और ताला खोलकर घर के अंदर दाखिल हो गया। अंदर पढ़ाई कर रही पीड़िता को धमकाते हुए उसने अलमारी का पासकोड पूछा। इनकार करने पर उसने मारपीट की। पासकोड लेकर अलमारी खोली और कैश-गहने लिए।' इसके बाद उसने लड़की की गला घोंटकर हत्या कर दी।

    जब बाहर निकलते समय रोका गया था नौकर
    परिजनों ने बताया कि जब वे करीब 8 बजे वापस आए तो बेटी को खून से लथपथ और अचेत पाया। वे तुरंत उसे लेकर फोर्टिस अस्पताल पहुंचे, जहां मृत घोषित किया गया। वहीं, से पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। आरोपी घर के अंदर करीब 40 मिनट तक रहा। सीसीटीवी फुटेज में वह करीब 6.39 बजे घर में दाखिल होता गदिखा। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने कपड़े भी बदले। 7 बजकर 22 मिनट पर वह घर से बाहर निकलते दिखा। घर के बाहर गाड़ी साफ करते हुए एक सहायक ने उसे रोका भी और पूछा कि वह कैसे आया है। उसने आरोपी से रुकने और कुछ खाकर जाने को कहा। लेकिन आरोपी ने कहा कि उसे किसी जरूरी काम से तुरंत जाना है और वह चला गया।

    कैसे हत्यारे तक पहुंची पुलिस
    पुलिस ने घटना की जानकारी मिलने के बाद कई टीमों का गठन किया। 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच के जरिए पुलिस द्वारका के उस होटल तक पहुंची जहां आरोपी छिपा हुआ था। गुरुवार को उसे अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लेगी और आगे की पूछताछ से उसके मकसद का पता लगाएगी। पुलिस के मुताबिक, अफसर ने एक जानकार के कहने पर करीब एक साल पहले काम पर रखा था। लेकिन जब उन्हें उसके जुए की लत का पता चला तो काम से हटा दिया था।

  • दिल्ली में लागू हुआ ‘NO PUC, NO Fuel’ रूल! अब बिना PUC के नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल या CNG

    दिल्ली में लागू हुआ ‘NO PUC, NO Fuel’ रूल! अब बिना PUC के नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल या CNG

     नई दिल्ली
     दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं तो अब यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है. क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पेट्रोल-डीजल लेने से पहले आपकी गाड़ी का ‘हेल्थ रिपोर्ट’ यानी PUC सर्टिफिकेट देखी जाएगी. नहीं है तो सीधा मना. कोई बहाना नहीं, कोई राहत नहीं. प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार अब सीधे आम लोगों की जिम्मेदारी तय कर रही है। 

    दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब बिना वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा. सरकार का कहना है कि यह कदम एयर क्वॉलिटी सुधारने के लिए बेहद जरूरी है और अब इसमें किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

    ‘No PUC, No Fuel’ नियम पर सख्ती
    बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘No PUC, No Fuel’ नियम को सख्ती से लागू किया जाए. दरअसल, यह नियम पिछले साल दिसंबर में शुरू की गई थी, लेकिन अब भी कई वाहन बिना वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट के सड़कों पर चल रहे हैं. सरकार का मानना है कि ऐसे वाहन प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहे हैं. नए आदेश के मुताबिक अब पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन्हीं वाहनों को फ्यूल दें जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट हो. सभी पंपों को इस नियम का सख्ती से पालन करने को कहा गया है ताकि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके। 

    पेट्रोल पंपों पर जाम की स्थिति
    दिल्ली के कई पेट्रोल पंपों पर इस नए नियम की सख्ती का असर साफ तौर पर देखने को मिलने लगा है. पेट्रोल पंप बिना वैलिड पीयूसी के फ्यूल देने से इंकार कर रहे हैं, ऐसे में कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की भारी भीड़ जमा होते देखी गई है. हालांकि सरकार ने इसकी तैयारी कर रखी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मामले को तत्काल निपटाया जा सके। 

    इस नियम को सख्ती से लागू कराने के लिए फूड एंड सप्लाई विभाग, ट्रांसपोर्ट विभाग, नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं होगी. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वाहन जब्त करने और अधिकतम जुर्माना लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे. सभी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि इस नियम का पूरी सख्ती से पालन हो। 

    रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है. इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की है कि वे अपने PUC सर्टिफिकेट को समय-समय पर अपडेट रखें और स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली बनाने में सहयोग करें। 

    क्या बोलीं CM
    राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमारी सरकार ने सख्त निर्णय लेते हुए यह फैसला लिया है कि दिल्ली में अब बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा. सभी पेट्रोल पंपों और एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. अब बिना वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ प्रमाणपत्र वाले किसी भी वाहन को दिल्ली के फ्यूल स्टेशंस पर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी जैसे ईंधन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे. वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाना समय की आवश्यकता है और हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। 

  • जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का खुलासा: ‘गरिमा की रक्षा के लिए हटने का सवाल नहीं था, अगर मैं हट जाती तो…’

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का खुलासा: ‘गरिमा की रक्षा के लिए हटने का सवाल नहीं था, अगर मैं हट जाती तो…’

    नई दिल्ली

    दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली आबकारी नीति मामले से उन्हें हटाने की मांग की गई थी। एक कड़े फैसले में जस्टिस शर्मा ने अपने ऊपर लगे पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अविश्वास के बीज बोने के लिए दरवाजे नहीं खोले जा सकते। जस्टिस शर्मा ने कहा कि मुझे पता है कि मुझे कितना और क्या करना है। अगर मैं बिना सुने अलग हो जाती तो मैं अपना कर्तव्य त्याग देती।
    याचिकाएं न्यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने जैसा

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि जज के निष्पक्ष होने की एक धारणा होती है। जो पक्षकार जज को हटाने की मांग करता है उसे इस निष्पक्षता की धारणा को गलत साबित करना होता है। जस्टिस शर्मा ने फैसला सुनाया कि केजरीवाल और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई याचिकाएं न्यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने जैसा था। उन्होंने कहा कि मुकदमा लड़ने वाले ने न्यायपालिका संस्था को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। मैंने विवाद को सुलझाने का रास्ता चुना है। न्यायपालिका की ताकत उसके आरोपों पर फैसला करने के पक्के इरादे में निहित है। मैंने बिना किसी चीज से प्रभावित हुए यह आदेश लिखा है।
    जजों के बच्चों को वकालत करने से नहीं रोका जा सकता

    इस दलील के संबंध में कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और उनके द्वारा इस मामले की सुनवाई करने में हितों का टकराव होगा, जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस तरह का टकराव इस विशेष मामले में स्पष्ट रूप से दिखाया जाना चाहिए। जज शर्मा ने कहा कि अगर किसी राजनेता की पत्नी राजनेता बन सकती है, अगर किसी राजनेता के बच्चे राजनेता बन सकते हैं, तो यह कैसे कहा जा सकता है कि किसी जज के बच्चे कानून के पेशे में नहीं आ सकते? इसका मतलब होगा कि जजों के परिवार के मौलिक अधिकार छीन लिए जाएं।
    झूठ को कई बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता

    उन्होंने आगे कहा कि उनके बच्चों में से कोई भी आबकारी नीति मामले से जुड़ा हुआ नहीं है। जज ने आगे कहा कि सच अपनी ताकत सिर्फ इसलिए नहीं खो देता कि झूठ को कई बार दोहराया गया हो। इस अदालत के एक अधिकारी के तौर पर मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि झूठ, चाहे अदालत में या सोशल मीडिया पर हजार बार भी दोहराया जाए, सच नहीं बन जाता। वह झूठा ही रहता है।
    संस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता

    जज ने कहा कि सिर्फ यह कह देना कि कोर्ट से राहत नहीं मिलेगी, जज को केस से हटाने की मांग करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जज खुद को केस से हटा लेते हैं तो इससे लोगों को यह लगने लगेगा कि जज किसी खास राजनीतिक पार्टी या विचारधारा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मामले से स्वयं को अलग रखने के निर्णय के संविधान पर गंभीर प्रभाव पड़ेंगे और संस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा।
    न्यायालय आरोपों और इशारों से प्रभावित नहीं हो सकता

    जज शर्मा ने कहा कि आवेदनों में दिए गए विवरण अनुमानों पर आधारित थे। अगर मैं उन्हें स्वीकार कर लेती हूं तो यह एक चिंताजनक मिसाल कायम करेगा। मैंने अपने समक्ष सभी प्रश्नों का निडरता से निर्णय लिया है। यह न्यायालय आरोपों और इशारों से प्रभावित नहीं हो सकता। यह न्यायालय तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक ऐसा करने से संस्था की विश्वसनीयता पर ही असर पड़ेगा। यह न्याय का प्रशासन नहीं बल्कि न्याय का प्रबंधन होगा। फैसले में कहा गया है कि आवेदकों की व्यक्तिगत आशंका पूर्वाग्रह की उचित आशंका की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बर्खास्तगी की याचिका सबूतों के साथ नहीं, बल्कि संकेतों के साथ दायर की गई थी।
    याचिका सबूतों के साथ नहीं आई थी

    जज ने कहा कि अंत में मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगी कि बर्खास्तगी की याचिका सबूतों के साथ नहीं आई थी। यह मेरे पास मेरी सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और तटस्थता पर लांछन, संकेतों और संदेहों के साथ आई थी। जज ने कहा कि गहरी चिंता की बात यह है कि मीडिया द्वारा निर्मित कथा को कार्यवाही से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें जवाबदेही के बिना मानहानि के उदाहरण भी शामिल हैं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बर्खास्तगी विवेक नहीं, बल्कि कर्तव्य का त्याग और आत्मसमर्पण का कार्य होगा।
    सवाल जज की निष्पक्षता के बारे में था

    अपने फैसले में जस्टिस शर्मा ने कहा कि इस मामले में बहस एक जज की निष्पक्षता और खुद संस्था के बारे में थी। जब मैंने यह फैसला लिखना शुरू किया तो कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया था। जो बचा था, वह था एक जज होने का शांत बोझ। एक ऐसा जज जिसने भारत के संविधान की शपथ ली थी। मुझे एहसास हुआ कि एक जज के तौर पर मेरी चुप्पी ही असल में कसौटी पर थी और अब सवाल जज की निष्पक्षता और खुद संस्था के बारे में था।
    मेरी निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल उठाए गए थे

    उन्होंने कहा कि केजरीवाल और अन्य लोगों की तरफ से दी गई खुद को मामले से अलग करने की अर्जियों ने उनकी निष्पक्षता और गरिमा को चुनौती दी थी। यह बात साफ थी कि मुझे खुद को इस मामले से अलग कर लेना चाहिए या नहीं। मेरी निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल उठाए गए थे। आसान रास्ता यही होता कि मैं अर्जी पर सुनवाई किए बिना ही खुद को अलग कर लेता। लेकिन मैंने अर्जी पर फैसला करने का निर्णय लिया, क्योंकि यह एक संस्था का मामला था। मैंने तय किया कि मैं इन आरोपों से प्रभावित हुए बिना ही इस पर फैसला करूंगी।
    केजरीवाल के तर्कों में विरोधाभास था

    उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि केजरीवाल द्वारा दिए गए तर्कों में विरोधाभास था। कहा कि जिस बात ने इस काम को मुश्किल बना दिया है, वह यह है कि बहस के दौरान विरोधाभासी रुख अपनाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें जज की निष्ठा पर कोई शक नहीं है, लेकिन वे केस को इसलिए नहीं ट्रांसफर करवाना चाहते हैं कि मैं पक्षपाती हूं, बल्कि इसलिए कि उन्हें पक्षपात की आशंका है।
    उस समय पक्षपात का कोई आरोप नहीं लगाया था

    इसके बाद उन्होंने उन कुछ उदाहरणों का जिक्र किया, जब उन्होंने केजरीवाल को एकतरफा राहत दी थी। हालांकि, उस समय केजरीवाल ने पक्षपात का कोई आरोप नहीं लगाया था, क्योंकि वे आदेश उनके पक्ष में थे। जस्टिस शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी से जुड़े लोगों ने यह तर्क नहीं दिया कि उनके पक्ष में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। इस अदालत के समक्ष कई अन्य मामले भी लंबित हैं, जिनमें अरविंद केजरीवाल की पार्टी के नेताओं से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इस अदालत और इस न्यायाधीश द्वारा ऐसे कई आदेशों को जारी रखा गया है। लेकिन तब कोई आरोप नहीं लगाए गए थे, क्योंकि शायद वह आदेश उनके पक्ष में था।
    …तो मैं अपना कर्तव्य त्याग देती

    उन्होंने आगे कहा कि मामले की सुनवाई किए बिना इससे अलग होना अपने कर्तव्य का त्याग करने के समान होगा। जज ने कहा कि मुझे पता है कि एक न्यायाधीश के रूप में मेरी आलोचना होगी। चाहे वो सोशल मीडिया में हो या आवेदनों में। मुझे पता है कि मुझे कितना और क्या करना है। अगर मैं बिना सुने अलग हो जाती तो मैं अपना कर्तव्य त्याग देती। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस कारण न होने पर न्यायालय इस मामले से अलग हो जाता है तो यह उन आरोपों को महत्व देगा जिनका कोई आधार नहीं है।

     

  • केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से आरोप, जज ने नियम की याद दिलाई और फैसला टाल दिया

    केजरीवाल का जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से आरोप, जज ने नियम की याद दिलाई और फैसला टाल दिया

    नई दिल्ली

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए, इसके लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को एक बार फिर हाई कोर्ट में पेश हुए और सीबीआई के लिखित जवाब को लेकर अपना रिजॉइंडर स्वीकार किए जाने की गुजारिश की। अदालत ने केजरीवाल को प्रक्रिया की याद दिलाई पर उनके जवाब को स्वीकार कर लिया है और फैसले को दो घंटे के लिए टाल दिया।

    केजरीवाल ने कहा, ‘आपने अनुमति दी थी मैम की रिजॉइंडर फाइल कर दो। रजिस्ट्री स्वीकार नहीं कर रही है। वह आदेश में नहीं आया। अगर हमारे रिजॉइंटर को रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया। ’मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा।' जज ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा, 'बार बार ये नहीं बोलना चाहिए कि 'मिसकैरिज ऑफ जस्टिस' हो जाएगा, क्योंकि अदालत ने प्रक्रिया से बाहर जाकर आपका हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया।

    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल को नियमों की याद दिलाते हुए कहा, 'रजिस्ट्री आपकी याचिका इसलिए स्वीकार नहीं करती क्योंकि खुद आप अपनी पैरवी कर रहे हैं। इसलिए आपको ही पेश होना पड़ेगा। रिजस्ट्री का एक नियम है और आपको फॉलो करना पड़ेगा। आपको पहले यहां से मंजूरी लेनी पड़ेगी। यह कोई असाधारण केस नहीं है। हमने आपको लिखित जवाब की कॉपी दी। रिजॉइंडर कभी उसका फाइल नहीं होता है। जिस दिन आप कोर्ट से गए थे अनुमति लेकर गए थे। आपने कहा कि आप मेरा सम्मान करते हैं। मैं हर वादी का सम्मान करती हूं। मैं इसे लिखित जवाब के रूप में रिकॉर्ड पर लूंगी। चूंकि फैसला 2:30 तक सुरक्षित है, मैं उसमें विचार करूंगी।'

    दो घंटे के लिए टला फैसला
    जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, 'मैं इसे लिखित दलीलों के रूप में रिकॉर्ड पर ले रही हूं। केजरीवाल द्वारा पक्षपात का आरोप लगाने के कारण उन्हें यह छूट दी जा रही है। चूंकि फैसला 2:30 बजे सुनाया जाना है, और उनके द्वारा हलफनामा दिए जाने के मद्देनजर, फैसला अब 4:30 बजे सुनाया जाएगा।'

    केजरीवाल ने रिजॉइंडर में क्या कहा है?
    अरविंद केजरीवाल ने सीबीआई की ओर से दाखिल जवाब के प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) में कहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने अटकलों, डर फैलने वाले बयानों और अपमानजनक आरोपों का सहारा लिया लेकिन जस्टिस शर्मा के बच्चों के सरकारी पैनल में होने को लेकर पक्षपात के आरोपों पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई इस मामले की सुनवाई केवल एक माननीय जज से करवाकर पूरी न्यायपालिका को बदनाम करना चाहती है।'

    केजरीवाल ने सीबीआई के उन आरोपों का विरोध किया कि वह 'दबाव बनाना चाहते हैं' और 'मामलों को लंबित रखना चाहते हैं' और 'बदनाम करने के लिए कैंपेन चला रहे हैं।'उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। केजरीवाल ने अपने रिजॉइंडर में कहा है कि सीबीआई ने खुद स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार की कानूनी व्यवस्था और जस्टिस शर्मा के परिवार के बीच सक्रिय व्यावसायिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीबीआई के मुताबिक, जस्टिस शर्मा के बच्चे पैनल में निष्क्रिय नाम नहीं है बल्कि सरकार से कानूनी काम हासिल कर रहे हैं।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने सीबीआई की उन दलीलों का भी विरोध किया कि जिसमें एजेंसी ने कहा कि केजरीवाल की दलीलों के आधार पर तो 'सभी जज अयोग्य हो जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'तथ्यों पर जवाब देने के बजाय सीबीआई ने कहा कि 'देश के सभी जज अयोग्य हो जाएंगे' यह विवाद को बढ़ाने और पूरी न्यायपालिका को घसीटने की कोशिश है।'