Category: बिहार

  • रांची के कौशिक ने रचा इतिहास, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उपलब्धि को दी आधिकारिक मान्यता

    रांची के कौशिक ने रचा इतिहास, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उपलब्धि को दी आधिकारिक मान्यता

     रांची
     सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड (सीयूजे) के शिक्षा विभाग के इंटीग्रेटेड बीए बीएड के छात्र कौशिक कुमार होता ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से सीयूजे का नाम रोशन किया है

    कौशिक को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से एक राष्ट्रीय स्तर की विशेष उपलब्धि के लिए आधिकारिक मान्यता मिली है। उनकी इस सफलता से यूनिवर्सिटी परिवार में खुशी का माहौल है।

    कौशिक ने माय भारत पोर्टल के माध्यम से युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, केंद्र सरकार द्वारा आयोजित ऑनलाइन क्विज में भाग लिया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के युवाओं को जोड़ना और उन्हें ज्ञानवर्धक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना था।

    इस ऑनलाइन क्विज में देशभर से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में 390812 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह उपलब्धि एक सप्ताह में ऑनलाइन क्विज में भाग लेने वाले सर्वाधिक उपयोगकर्ता के रूप में दर्ज की गई।

    बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स
    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उपलब्धि की जांच और सत्यापन के बाद इसे आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया। कौशिक के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले भी उनका नाम कई प्रतिष्ठित रिकॉर्ड पुस्तकों में दर्ज हो चुका है।

    इनमें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, अमेरिका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स शामिल हैं।

    कौशिक को पढ़ाई के साथ-साथ किताबें लिखने और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि है। वह लगातार कुछ नया करने और अपनी प्रतिभा को अलग-अलग क्षेत्रों में साबित करने का प्रयास करते रहे हैं। उनकी उपलब्धियों की कई प्रतिष्ठित लोगों ने भी सराहना की है।

    राज्यपाल ने की सराहना
    ओडिशा के पूर्व राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने कौशिक की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए उन्हें आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी हैं। वहीं, झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी राजभवन में मुलाकात के दौरान उनकी उपलब्धियों की सराहना की।

    इसके अलावा केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी कौशिक की उपलब्धियों और रिकॉर्ड बनाने के प्रयासों की प्रशंसा की है। इस उपलब्धि पर सीयूजे के कुलपति प्रो. सारंग मेढ़ेकर ने कौशिक कुमार होता को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    उन्होंने कहा कि कौशिक की यह उपलब्धि पूरे सीयूजे परिवार के लिए गर्व का विषय है। कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों की ऐसी उपलब्धियां यूनिवर्सिटी की पहचान को और मजबूत करती हैं तथा अन्य विद्यार्थियों को भी अपने लक्ष्य के लिए मेहनत और निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती हैं।

    टीचर हैं मां
    कौशिक के परिवार का भी उनकी सफलता में महत्वपूर्ण योगदान है। उनके पिता हरीश चंद्र होता सेवानिवृत्त सहायक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हैं, जबकि उनकी माता अनुपमा नंदा एक शिक्षिका हैं।

    माता-पिता ने हमेशा कौशिक को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और उनकी मेहनत में पूरा सहयोग दिया।कौशिक की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और पूरे सीयूजे परिवार ने उन्हें बधाई दी है।

    सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उम्मीद जताई कि वह आगे भी इसी तरह मेहनत और लगन से नई उपलब्धियां हासिल करते रहेंगे। कौशिक की सफलता यूनिवर्सिटी के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है।

    यह उपलब्धि बताती है कि पढ़ाई के साथ अपनी रुचि के क्षेत्र में मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास करने से विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

  • पटना में खान सर को लेकर सनसनीखेज शिकायत, युवती ने जताई जान को खतरे की आशंका

    पटना में खान सर को लेकर सनसनीखेज शिकायत, युवती ने जताई जान को खतरे की आशंका

    पटना
    फैजल खान उर्फ खान सर के नाम से मशहूर खान ग्लोबल कोचिंग सेंटर के मालिक खान सर पर अब एक युवती ने संगीन आरोप लगाए हैं। युवती ने पटना के पीरबहोर थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है, जिसके बाद अब पुलिस इस मामले की तफ्तीश में जुट गई है। पुलिस ने बताया है कि पीरबहोर थाने को एक लड़की के नाम से आवेदन मिला था। इस आवेदन में उन्होंने कहा कि उनको आशंका है कि उनके साथ कुछ घटना हो सकती है। वो लड़की उस समय थाने में नहीं आई थीं। बाद में एक महिला अधिकारी ने उस लड़की से संपर्क किया और उनका बयान दर्ज किया। लड़की का कहना है कि साल 2017 में जब वो इस क्षेत्र में रहती थीं तब खान कोचिंग सेंटर में खान सर का कोई टारगेट क्लास चलता था। उस समय ये जहां पर रहती थीं, उस समय दो-तीन लड़कियों के साथ इनकी दोस्ती थी और उनका इनके घर पर भी आना-जाना था।

    युवती का कहना है कि साल 2018 के बाद से इनकी भेंट उन लोगों से नहीं हुई हैं। लेकिन हाल के दिनों में जो घटनाएं हुई हैं उनको लेकर उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि उस समय खान सर को जो आना-जाना था तो हो सकता है कि वो हमारे साथ कोई घटना करें। हालांकि, उन्होंने (लड़की ने) ऐसा कोई खुलासा नहीं किया है कि आखिर इनके पास ऐसी क्या जानकारी है जिसके कारण इनके साथ कोई घटना कर सकता है। लेकिन इन्होंने आशंका व्यक्त की है कि हो सकता है कि इनके साथ कोई घटना घटे। इस संबंध में जांच की जा रही है और जांच के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया है कि लड़की ने फैजल खान का नाम दिया है और आशंका जताई है कि उनके साथ कुछ हो सकता है।

    बता दें कि इससे पहले यह खबर आई थी कि पटना के ही एक कोचिंग संचालक से जान की सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश की एक लड़की थाने पहुंची थी। हालांकि, उस वक्त कोचिंग संचालक के बारे में जानकारी सामने नहीं आई थी। अब पुलिस ने खुद इस पूरे मामले में खान सर का नाम लिया है। युवत ने पीरबहोर थाने में लिखित शिकायत दी थी। इसमें पटना के एक कोचिंग संचालक पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। युवती ने लिखा है कि वह कोचिंग संचालक के कई राज जानती है। इस कारण उसे जान से मारने की धमकी मिल रही है। अब उसने सुरक्षा की गुहार पुलिस से लगाई है।

    बताया जा रहा है कि पुलिस इस लड़की की तलाश कर रही थी लेकिन इसी बीच युवती रविवार की देर रात थाने पहुंच गई थी और वहां उसने पुलिस को आपबीती बताई थी। पीरबहोर थानाध्यक्ष राज कुमार सिंह ने बताया था कि युवती का बयान लिया जा रहा है। धमकी मिलने की बात दो वर्ष पुरानी बताई जा रही है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण: झारखंड में घर-घर पहुंचेगा BLO, लगाए जाएंगे ‘फैमिली टूगेदर’ स्टीकर

    मतदाता सूची पुनरीक्षण: झारखंड में घर-घर पहुंचेगा BLO, लगाए जाएंगे ‘फैमिली टूगेदर’ स्टीकर

     रांची
    राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के तहत मंगलवार से ‘होम टू रोल वेरीफिकेशन’ कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। चार सितंबर तक संचालित होनेवाले इस कार्यक्रम में बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही परिवार एवं एक ही घर में निवास करने वाले मतदाताओं के नाम यथासंभव एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में दर्ज हों तथा कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि पांच अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची के बाद अब घर-घर सत्यापन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम प्रारूप मतदाता सूची में दर्ज है अथवा जिनका नाम दर्ज नहीं है, उनके द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म-6 एवं घोषणापत्र जमा किया गया है और उसका डिजिटाइजेशन किया जा चुका है।

    उन्होंने बताया कि सत्यापन के दौरान बीएलओ यह भी देखेंगे कि एक परिवार के सदस्य अलग-अलग मतदान केंद्रों की मतदाता सूची में तो दर्ज नहीं हैं।

    यदि किसी मतदाता का नाम उसके सामान्य निवास से संबंधित मतदान क्षेत्र के निर्धारित मतदान केंद्र के स्थान पर किसी अन्य मतदान केंद्र में दर्ज है, तो उसे संबंधित मतदान केंद्र पर स्थानांतरित करने के लिए फार्म-8 भरने हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य ‘एक परिवार–एक मतदान केंद्र’ की व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।

    उन्होंने कहा कि झारखंड में सामान्य रूप से निवास करने वाले ऐसे मतदाता, जिनका नाम वर्तमान में बिहार, पश्चिम बंगाल अथवा किसी अन्य राज्य की मतदाता सूची में दर्ज है और जो अपना नाम झारखंड के वर्तमान सामान्य निवास वाले मतदान केंद्र की मतदाता सूची में स्थानांतरित कराना चाहते हैं, वे फार्म-8 के साथ निर्धारित घोषणापत्र जमा कर सकते हैं। बीएलओ ऐसे पात्र मतदाताओं को भी आवश्यक प्रक्रिया की जानकारी एवं सहयोग उपलब्ध कराएंगे।

    बीएलओ लगाएंगे फैमिली टूगेदर स्टीकर
    बीएलओ द्वारा सत्यापन के दौरान ‘फैमिली टूगेदर स्टीकर’ लगाने की भी पहल की जाएगी। इस स्टीकर के माध्यम से परिवार से यह सुनिश्चित करने की अपील की जाएगी कि परिवार के सभी वयस्क एवं पात्र सदस्यों के नाम एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में दर्ज हैं।

    स्टीकर पर संबंधित घर/नजरी गृह संख्या अंकित करने की व्यवस्था के साथ मतदाताओं की सहायता के लिए बीएलओ से संपर्क का प्रविधान भी रहेगा।

  • बिहार के स्टेट हाईवे-पुलों पर टोल की तैयारी, सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से होगी वसूली

    बिहार के स्टेट हाईवे-पुलों पर टोल की तैयारी, सिर्फ व्यावसायिक वाहनों से होगी वसूली

    पटना
    बिहार के स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर टोल टैक्स लेने के लिए सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब इसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि इसी माह संबंधित एजेंसी यह रिपोर्ट पथ निर्माण विभाग को सौंप देगी। पथ निर्माण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के 50 स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन बने 45 पुलों का सर्वे किया गया है। इस दौरान इन सड़कों और पुलों से गुजरने वाले वाहनों को कैमरे के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया। विभाग के पदाधिकारियों के अनुसार, सात दिनों तक गुजरने वाले वाहनों का रिकॉर्ड लिया गया है।

    इसके आधार पर प्रतिदिन औसतन गुजरने वाले वाहनों की संख्या का आकलन किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि किन सड़कों और पुलों पर टोल टैक्स की वसूली की जाएगी। अधिक वाहनों के आवागमन वाले सड़कों और पुलों को इसके लिए चुना जाएगा। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद ही यह फैसला लिया जाएगा कि सर्वे किए गए 50 स्टेट हाईवे और 45 पुलों में से कितने पर टोल टैक्स वसूला जाएगा।

    निजी वाहनों से टोल नहीं लिया जाएगा
    राज्य के स्टेट हाईवे और पुलों पर निजी वाहनों से टोल टैक्स नहीं लेने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभाग जल्द ही इस प्रस्ताव पर राज्य कैबिनेट की सहमति लेगा। मालूम हो कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सात जुलाई, 2026 को ही घोषणा की थी कि राज्य के स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर निजी वाहनों से किसी प्रकार का टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। केवल व्यावसायिक वाहनों से ही टैक्स लिया जाएगा।

    किस पर कितना टोल लगेगा
    राज्य सरकार की टोल नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि दो लेन से अधिक तथा चार लेन से कम के स्टेट हाईवे पर तय राशि का 60 प्रतिशत टोल टैक्स लगेगा। वहीं, चार लेन तथा इससे अधिक चौड़ी सड़कों पर तय राशि का सौ प्रतिशत टोल टैक्स लगेगा। इसी प्रकार मध्यवर्ती लेन (5.5 मीटर चौड़ी) सड़क पर 50 प्रतिशत टैक्स लगेगा। पुल पर टोल टैक्स का निर्धारण उसकी लंबाई में दस गुना कर किया जाएगा। अर्थात कोई 50 किमी की सड़क है, उसमें पांच किलोमीटर लंबा पुल और 45 किलोमीटर सड़क का हिस्सा है तो उस पर कुल टोल 45 जोड़ 50 अर्थात 95 किलोमीटर पर तय होगा।

    इस तरह लगेंगे शुल्क
    ● छोटे व्यावसायिक वाहन (मिनी बस-माल वाहक) : 2 रुपये प्रति किमी

    ● बस और ट्रक, दो धुरी वाले: 4.25 रुपये प्रति किमी

    ● तीन धुरी वाले वाणिज्यिक वाहन: 4.60 रुपये प्रति किमी

    ● भारी निर्माण मशीनरी या अर्थ मूविंग उपस्कर, छह धुरी वाले: 6.65 रु. प्रति किमी।

    ● विशाल आकार के वाहन (सात या अधिक धुरी वाले): 8.10 रुपये प्रति किमी।

  • रांची के होटल-दुकानों से लिए सैंपल की जांच में खुलासा, 9 खाद्य उत्पाद मानक से नीचे

    रांची के होटल-दुकानों से लिए सैंपल की जांच में खुलासा, 9 खाद्य उत्पाद मानक से नीचे

    रांची
     राजधानी में लोगों की थाली और गिलास तक पहुंच रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले पांच माह में जिले के विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में 54 में से नौ नमूने खाद्य सुरक्षा के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

    जांच में मुख्य रूप से डेयरी उत्पाद पनीर, खोवा, मिठाई और घी समेत अन्य खाद्य पदार्थ मानक में सही नहीं पाए गए हैं। होटलों से लिए गए पेयजल के नमूनों की गुणवत्ता को लेकर भी विभाग की ओर से जांच की जा रही है। इन सैंपलों में अधिकतर सैंपल खुले रूप से बिना ब्रांडेड पैकेट के बिकने वाले खाद्य सामग्री थे।

    खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी डा. पवन कुमार के अनुसार, पिछले पांच माह के दौरान जिले के अलग-अलग इलाकों में खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए थे। इन्हें जांच के लिए राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजा गया।

    अब तक प्राप्त 14 जांच रिपोर्ट में नौ खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि जिन खाद्य कारोबारियों के उत्पाद मानक के अनुरूप नहीं मिले हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    जिन स्थानों से सैंपल लिए गए उनमें राजधानी के धुर्वा, डोरंडा, रातू रोड, ओरमांझी, बूटी मोड़ जगह प्रमुख है, इसके अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बुंडू तमाड़ आदि जगह शामिल है। इन जगहों के छोटे-बड़े होटलों से खाद्य पदार्थ व पानी के सैंपल जांच कि लिए लिए गए थे।

    डेयरी उत्पादों पर सबसे बड़ा सवाल
    जांच रिपोर्ट में मुख्य रूप से डेयरी उत्पादों के मानकों पर खरा नहीं उतरने की बात सामने आई है। पनीर, खोवा और घी जैसे खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की थाली तक पहुंचते हैं।

    ऐसे में इनकी गुणवत्ता में कमी मिलना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर मामला है। हालांकि, सब-स्टैंडर्ड पाए जाने का अर्थ स्वत यह नहीं है कि संबंधित खाद्य पदार्थ जहरीला है लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए नुकसान सिद्ध हुआ है।

    इसका मतलब है कि उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। किसी खाद्य पदार्थ को असुरक्षित घोषित करने के लिए जांच में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले तत्वों या अन्य निर्धारित मानकों के उल्लंघन का प्रमाण आवश्यक होता है।

    क्या है सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ, क्या है दंड
    खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले खाद्य पदार्थ को सब-स्टैंडर्ड माना जाता है। अधिनियम की धारा 51 के तहत ऐसे खाद्य पदार्थ का निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण करने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मामले में कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होती है।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से रिपोर्ट मिलने के बाद सक्षम अधिकारी तय करता है कि मामला केवल आर्थिक दंड वाला है या उसमें अभियोजन की जरूरत है।

    आर्थिक दंड वाले मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष कार्रवाई की जाती है। संबंधित कारोबारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाता है।

    कार्रवाई केवल जुर्माने तक सीमित नहीं
    खाद्य पदार्थ की प्रकृति और उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई का स्वरूप अलग हो सकता है। गलत लेबलिंग के मामले में अधिनियम की धारा 52 के तहत तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

    खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि वहीं खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या प्रकृति उपभोक्ता की मांग के अनुरूप नहीं होने पर धारा 50 के तहत पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    यदि जांच में खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाया जाता है और मामला गंभीर प्रकृति का है, तो अधिनियम के तहत इससे कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई और सजा का प्रावधान है। इसलिए सब-स्टैंडर्ड और अनसेफ को एक ही श्रेणी मानना सही नहीं है।

    14 में नौ रिपोर्ट खराब, अब आगे की कार्रवाई अहम
    विभाग के अनुसार पांच माह में प्राप्त 14 रिपोर्ट में नौ नमूनों का मानक से नीचे मिलना खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत को सामने लाता है। खासकर डेयरी उत्पादों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों, होटल-रेस्टोरेंट और खाद्य दुकानों में नियमित नमूना संग्रह और जांच जरूरी है।

    खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि जिन कारोबारियों के खाद्य उत्पाद सब-स्टैंडर्ड पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मामलों में कितने कारोबारियों पर जुर्माना लगाया जाता है और कितने मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई होती है।

    उपभोक्ताओं के लिए भी सवाल
    खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की यह कार्रवाई केवल विभागीय आंकड़ा नहीं है। रांची में बड़ी संख्या में लोग होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों से पनीर, मिठाई, खोवा, घी तथा अन्य तैयार खाद्य पदार्थ खरीदते हैं। ऐसे में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और जांच रिपोर्ट के आधार पर त्वरित कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    क्या है चुनौती
    खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के नियमों में खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस, नमूना जांच, खाद्य मानक, प्रयोगशाला परीक्षण और कार्रवाई के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं

    अब विभाग के सामने चुनौती केवल नमूने लेने तक सीमित नहीं, बल्कि जांच में मानक से नीचे पाए गए उत्पादों के कारोबारियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी है।

    स्ट्रीट फूड वेंडर्स को दिया जाता रहा है खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण
    शहर के स्ट्रीट फूड वेंडर्स को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दो दिवसीय खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है। प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, भोजन तैयार करने और परोसने की सुरक्षित प्रक्रिया, खाद्य सामग्री का सही भंडारण, साफ पानी का उपयोग तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में बताया जाता है।

    वेंडर्स को एप्रन, ग्लव्स और हेयर गियर के अनिवार्य इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि असुरक्षित खाद्य पदार्थों से कई संक्रामक बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए खाद्य कारोबारियों को निर्धारित मानकों का पालन करते हुए उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

  • बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा ऐलान, TRE-4 में अब 33 हजार से ज्यादा पद; जल्द मिलेगी नियुक्ति

    बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा ऐलान, TRE-4 में अब 33 हजार से ज्यादा पद; जल्द मिलेगी नियुक्ति

    पटना
     बिहार में टीआरई-4 में अब 33274 शिक्षकों की नियुक्ति होगी। टीआरई-4 के लिए 886 नए पदों की अधियाचना समान्य प्रशासन विभाग द्वारा बीपीएससी को भेज दी गयी है। इसके पहले शिक्षा विभाग ने टीआरई-4 के लिए 886 नये पदों की अधियाचना सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी थी। यह जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि यह इस साल की अंतिम रिक्ति है।

    वे सोमवार को अपने सरकारी कक्ष में पत्रकारों से बात कर रहे थे। मंत्री ने बताया कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। विभाग के सचिव, विशेष सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष और पटना डीएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कहा कि छात्रों के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। वे किसी प्रकार की समस्या लेकर हमारे पास आ सकते हैं। वे खुद उनकी समस्याओं को सुनते हैं।

    मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग की परीक्षा प्रणाली से कोई संबंध नहीं है। विभाग की भूमिका सिर्फ अधियाचना तक है। परीक्षा लेने की जिम्मेवारी बिहार लोक सेवा आयोग की है। आयोग पहले ही निर्णय ले चुका है कि ऐसी परीक्षा दो चरणों में होगी। ऐसे में इसके लिए विभाग को दोष देना उचित नहीं। हमारे पास बीपीएससी परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों की सूची आएगी और हम उन्हें तत्काल नियुक्ति पत्र देंगे। उन्होंने परीक्षार्थियों को भड़काने वालों को चेतावनी दी। कहा कि उन्हें इसका फल भुगतना पड़ेगा।
    886 नये पदों की अधियाचना गई

    बांगला: 90, ललित कला: 21, नृत्य: 164, मैथिली: 193, अरबी: 20, फारसी: 36, विशेष विद्यालय अध्यापक: 88, पाली: 38, प्राकृत: 63, भोजपुरी: 69, मगही: 28, कृषि: 76 ।

    विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष पद के लिए भेजा अनुरोध पत्र
    इधर राज्य सरकार ने परीक्षा तंत्र में व्यापक सुधार के लिए गठित होने वाली विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष पद के लिए पटना हाईकोर्ट को अनुरोध पत्र भेज दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों ने सोमवार को बताया कि जल्द समिति गठन को लेकर अध्यक्ष पद के लिए पटना हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नामित किए जाने का अनुरोध किया गया है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा अध्यक्ष नामित किए जाने के बाद
    विशेषज्ञ समिति के अन्य चार सदस्यों को नामित किया जाएगा।

    राज्य सरकार ने एक दिन पूर्व बिहार में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति के गठन को लेकर अधिसूचना जारी किया है। इस अधिसूचना में विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता के लिए उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश से अनुरोध किए जाने का प्रावधान किया गया है। मालूम हो कि, विशेषज्ञ समिति द्वारा गठन के बाद तीन माह के अंदर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपनी है।

  • बर्ड हिट रोकने की कवायद बेअसर? पटना एयरपोर्ट के आसपास गंदगी और खुले में मांस-मछली बिक्री बनी चुनौती

    बर्ड हिट रोकने की कवायद बेअसर? पटना एयरपोर्ट के आसपास गंदगी और खुले में मांस-मछली बिक्री बनी चुनौती

     पटना
    पटना एयरपोर्ट पर पिछले वर्ष बर्ड हिट के नौ मामले समाने आए थे। ताजा घटना के बाद एक बार फ‍िर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।

    इसी वर्ष अप्रैल जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर विमान परिचालन को और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से एयरफील्ड एनवायरमेंट मैनेजमेंट कमेटी (एईएमसी) की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।

    इसमें एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने और नियमित निगरानी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

    समिति की बैठक में कहा गया कि एयरफील्ड के आसपास गंदगी, खुले कचरे, जलजमाव जैसी स्थितियां के साथ मांस-मछली की दुकानें भी पक्षियों को आकर्षित करती हैं।

    पटना एयरपोर्ट पर बर्ड हिट की घटनाएं वर्षवार
    2021 : 2
    2022 : 1
    2023 : 1
    2025 : 9

    इससे बर्ड स्ट्राइक (पक्षियों से टकराव) की घटनाएं बढ़ती हैं। यह विमान सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
    भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने रनवे और आपरेशनल एरिया के पास विशेष कर्मियों (बर्ड चेजर्स) को तैनात किया है।

    फायर क्रैकर्स और स्केयर गन्स से पक्षियों को डराकर रनवे से दूर रखने के लिए पटाखे, स्केयर गन्स और शाट लाउंचर्स का नियमित इस्तेमाल किया जाता है।

    प्रत‍िबंध का नहीं दि‍ख रहा असर
    विमानों के टेकआफ और लैंडिंग के समय इनकी संख्या दोगुनी कर दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में रनवे के किनारे उगने वाली जंगली घास की लगातार कटाई की जाती है ताकि कीड़े-मकौड़े बाहर नहीं आएं, क्योंकि इन्हें खाने के लिए पक्षी आकर्षित होते हैं।

    एयरपोर्ट के आसपास मांस-मछली की दुकानों पर रोक का निर्णय हर बैठक में लिया जाता है। लेकिन, फुलवारीशरीफ और आसपास के अन्य इलाकों में खुले में मांस-मछली बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध का असर नहीं दिख रहा है।

    इनके अवशेषों को खाने चील और अन्य बड़े पक्षी झुंड में आते हैं। गर्दनीबाग स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन को स्थानांतरित करने की कवायद भी सिफर है। एयरफील्ड के आसपास जलजमाव की स्थिति का भी पूरी तरह समाधान नहीं हो सका है।

     

  • भोजपुरी से मैथिली तक फिल्मों को सरकार का सहयोग, CM बोले- कलाकार बनें बिहार की संस्कृति के ब्रांड एंबेसडर

    भोजपुरी से मैथिली तक फिल्मों को सरकार का सहयोग, CM बोले- कलाकार बनें बिहार की संस्कृति के ब्रांड एंबेसडर

    पटना
    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार में फिल्म सिटी का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने भोजपुरी फिल्म जगत के कलाकारों से आग्रह किया कि वे मिलकर उपयुक्त स्थान चिह्नित करें। बिहार के बच्चों में अभिनेता, निर्देशक, लेखक, संगीतकार और फिल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रतिभा और क्षमता है, सरकार उन्हें बेहतर अवसर और आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने सोमवार को ज्ञान भवन में आयोजित ‘भोजपुरी बवाल’ के ग्रैंड फिनाले का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बिहार बदल चुका है। फिल्म जगत से जुड़े लोगों का बिहार में स्वागत है। सरकार फिल्म निर्माण से जुड़े कलाकारों एवं निर्माताओं को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार वह धरती है, जिसने लगभग 2000 वर्ष पूर्व भारत को स्वर्णिम काल दिया। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों से पूरी दुनिया में ज्ञान की रोशनी पहुंची।

    भोजपुरी, अंगिका, मगही, बज्जिका, मैथिली भाषाओं में फिल्म बनेंगी
    सीएम ने कहा कि बिहार की समृद्ध सभ्यता, संस्कृति और विरासत को सकारात्मक रूप में दुनिया के सामने लाने की आवश्यकता है। बिहार में 54 फिल्मों की शूटिंग के लिए सरकार ने सहमति दी है। अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी बिहार में अक्टूबर से फिल्म की शूटिंग करने की इच्छा व्यक्त की है। भोजपुरी के साथ-साथ अंगिका, मगही, बज्जिका और मैथिली भाषाओं में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करें, सरकार आप सबको पूरा सहयोग करेगी।
    भोजपुरी बवाल में पहुंचे कलाकार

    बिहारी कल्चर को दुनिया भर में स्थापित करें
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की सभ्यता और संस्कृति को दुनिया के फलक पर स्थापित करना सरकार के साथ-साथ हम सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य में सड़क, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी आधुनिक परिवहन सुविधाओं के विकास पर भी काम हो रहा है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण पटना से गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों की यात्रा पहले की तुलना में काफी सुगम हुई है। इन सुविधाओं का लाभ लेते हुए राज्य में फिल्म निर्माण के माध्यम से हमारी कला और संस्कृति को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाना है।

    बिहार की संस्कृति का ब्रांड एम्बेसडर बनें
    सम्राट चौधरी ने कहा कि आप सभी कलाकार बिहार की सकारात्मक छवि को प्रस्तुत करें, बिहार की संस्कृति को आगे बढ़ायें और बिहार का ब्रांड एंबेसडर बनें। इस अवसर पर विधायक आलोक कुमार सिंह, अभिनेता पवन सिंह, विधायक महेश पासवान, विधान पार्षद संतोष कुमार सिंह, अभिनेता दिनेश लाल यादव, समेत सीता लक्ष्मी वी अय्यर, आम्रपाली, काजल राघवानी, पाखी हेगड़े, शुभांकर मिश्रा आदि उपस्थित थे।

  • बिहार बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी की हाईलेवल बैठक, अधिकारियों को अलर्ट रहने और मरम्मत के निर्देश

    बिहार बाढ़ पर CM सम्राट चौधरी की हाईलेवल बैठक, अधिकारियों को अलर्ट रहने और मरम्मत के निर्देश

    पटना
     मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आग्रह पर पश्चिम बंगाल की सरकार ने फरक्का बराज के सभी गेट खोल दिये हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पश्चिम बंगाल से सीएम शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बात कर सभी गेट खोलने का आग्रह किया था। इधर मुख्यमंत्री ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। अधिकारियों को अविलंब मरम्मती कार्य कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी का निर्देश दिया।

    मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नवगछिया राघोपुर दियारा, कोसी-गंगा संगम क्षेत्र, बेगूसराय एवं बख्तियारपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गंगा नदी एवं इसकी सहायक नदियों के जलस्तर, दियारा एवं निचले इलाकों में उत्पन्न स्थिति तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहे। प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

    एयरपोर्ट पर उच्चस्तरीय बैठक
    हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने भागलपुर एयरपोर्ट पर उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान बाढ़ की स्थिति, जलस्तर, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि तेजी से पानी का दवाब कम हो रहा है। बहुत जल्द स्थिति में सुधार होगा।

    बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा प्राथमिकता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी रखी जाएं तथा राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति में होने वाले किसी भी बदलाव की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया।

    लगातार निगरानी करें अधिकारी
    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अविलंब मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया। कहा कि जल संसाधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद रहे। लगातार निगरानी करते रहे। बाढ़ प्रभावितों को पूरी सहायता उपलब्ध कराते रहें। राहत और बचाव कार्य पूरी मुस्तैदी से करें। हवाई सर्वेक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी थे। वहीं, बैठक में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक, अभियान कुंदन कृष्णन, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह आदि उपस्थित थे।

  • रांची में प्रदर्शन और रैली पर प्रशासन सख्त, अनुमति के बिना आयोजन पर रोक

    रांची में प्रदर्शन और रैली पर प्रशासन सख्त, अनुमति के बिना आयोजन पर रोक

    रांची
     रांची जिले में धरना-प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली एवं आमसभा के आयोजन के लिए आयोजकों को सक्षम प्राधिकारी अनुमंडल पदाधिकारी, रांची सदर/बुंडू से निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।

    जिला प्रशासन ने आयोजकों से कार्यक्रम से पहले आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा और सुचारु यातायात व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रबंध किए जा सकें।

    बिना पूर्व सूचना के आयोजन से प्रभावित होती है व्यवस्था
    जिला प्रशासन के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर धरना-प्रदर्शन, घेराव, जुलूस, रैली एवं आमसभा का आयोजन किया जाता है। कई बार ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यक जानकारी प्रशासन को पूर्व में उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे विधि-व्यवस्था और जन-सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसके कारण आम नागरिकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक अधिकार, लेकिन नियमों का पालन जरूरी
    न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि शांतिपूर्ण धरना एवं विरोध-प्रदर्शन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हिस्सा है। हालांकि, इस अधिकार का प्रयोग सार्वजनिक व्यवस्था, जन-सुरक्षा, यातायात तथा अन्य नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए लागू कानूनों एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध निर्देशों के अधीन किया जाना आवश्यक है।

    सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली एवं आमसभा के लिए सक्षम प्राधिकारी अनुमंडल पदाधिकारी, रांची सदर/बुंडू द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। आयोजकों को कार्यक्रम से पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त करनी होगी।

    जुलूस-रैली के लिए मार्ग और समय बताना होगा
    आयोजकों को प्रस्तावित कार्यक्रम की आवश्यक जानकारी समय पर प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी। विशेष रूप से जुलूस एवं रैली के लिए प्रस्तावित मार्ग या रूट, आयोजन की तिथि, प्रारंभ एवं समाप्ति का समय तथा संभावित प्रतिभागियों की संख्या की जानकारी देना आवश्यक होगा।

    कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख व्यक्तियों की जानकारी भी, जहां आवश्यक हो, प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी, ताकि सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की जा सके।

    सार्वजनिक मार्ग बाधित नहीं करने की अपील
    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन लागू कानूनों, नियमों तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध आदेशों एवं निर्देशों के अनुरूप किया जाए। सार्वजनिक मार्ग या स्थान पर ऐसा कोई कार्य नहीं किया जाए, जिससे अनधिकृत रूप से आवागमन बाधित हो, जन-सुरक्षा प्रभावित हो अथवा अन्य नागरिकों के अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप हो।

    छात्रों और आम नागरिकों से भी अपील
    जिला प्रशासन ने छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से पहले आयोजकों से कार्यक्रम की वैधानिक स्थिति और प्रशासन द्वारा निर्धारित शर्तों की जानकारी प्राप्त करें। किसी अफवाह या भ्रामक सूचना के आधार पर ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे विधि-व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था अथवा आम नागरिकों को असुविधा हो।

    कार्यक्रम रोकना नहीं, व्यवस्था सुनिश्चित करना उद्देश्य
    जिला प्रशासन ने कहा है कि पूर्व सूचना और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति की व्यवस्था का उद्देश्य किसी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक कार्यक्रम को रोकना नहीं है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों की सुरक्षा, विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और आम नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    जिला प्रशासन ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, विभिन्न संस्थाओं, संगठनों तथा आम नागरिकों से सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में लागू विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की अपील की है। साथ ही आवश्यक जानकारी समय पर प्रशासन को उपलब्ध कराने और विधि-व्यवस्था, जन-सुरक्षा एवं सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने को कहा है।