Category: बिहार

  • बच्चों में बढ़ा इन्फ्लूएंजा-ए का खतरा, रिम्स ने संक्रमण रोकने के लिए की अलग व्यवस्था

    बच्चों में बढ़ा इन्फ्लूएंजा-ए का खतरा, रिम्स ने संक्रमण रोकने के लिए की अलग व्यवस्था

    रांची
    राजधानी में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने संक्रमित मरीजों के इलाज और संक्रमण से बचाव के लिए अलग व्यवस्था की है। स्वाइन फ्लू के मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखने के लिए रिम्स के कॉटेज के ग्राउंड फ्लोर को आरक्षित किया गया है।

    यहां फिलहाल 10 बेड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में भी स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए बेड रिजर्व रखे गए हैं। रिम्स के अपर अधीक्षक डॉ. शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई मरीज भर्ती नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर संक्रमित मरीजों को निर्धारित स्थान पर भर्ती कर उपचार दिया जाएगा।

    मरीजों की जांच से लेकर दवा और अन्य आवश्यक उपचार की सुविधाएं रिम्स में उपलब्ध हैं। स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए काटेज के केवल ग्राउंड फ्लोर को आरक्षित किया गया है। पहले तले को पूर्व की तरह पेइंग वार्ड के रूप में संचालित किया जाएगा। इससे सामान्य मरीजों की सुविधा भी प्रभावित नहीं होगी।

    संक्रमण को फैलने से रोकने पर जोर
    स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों के लिए अलग स्थान निर्धारित करने का मुख्य उद्देश्य उपचार के साथ संक्रमण को अन्य मरीजों, स्वजन और अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों तक फैलने की आशंका को कम करना है। मरीजों की स्थिति के अनुसार उन्हें निगरानी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

    मालूम हो कि राजधानी में पिछले कुछ दिनों में बच्चों में इन्फ्लूएंजा-ए यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े हैं। रिम्स और सदर अस्पताल के शिशु रोग ओपीडी में भी स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले बच्चे पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए रिम्स प्रबंधन ने पहले से ही उपचार व्यवस्था को तैयार रखने का निर्णय लिया है।

  • मोबाइल ऐप से होगा पंचायत परिसीमन, बिहार में 2011 के आधार पर सीमाएं तय करने की तैयारी तेज

    मोबाइल ऐप से होगा पंचायत परिसीमन, बिहार में 2011 के आधार पर सीमाएं तय करने की तैयारी तेज

    छपरा.

    बिहार में त्रिस्तरीय पंचायतों के पुनर्गठन और नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार के निर्णय के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने इस दिशा में प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी है।

    परिसीमन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए प्रगणक ब्लॉक की सीमाओं और संबंधित आंकड़ों को मोबाइल ऐप के माध्यम से दर्ज किया जाएगा।

    2011 की जनगणना के आधार पर तय होंगी सीमाएं
    आयोग के निर्देश के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार प्रगणक ब्लॉकवार जनसंख्या, नक्शे और सीमाओं का मिलान करते हुए उनकी सीमा संबंधी जानकारी विशेष मोबाइल ऐप पर दर्ज की जाएगी। इससे पंचायतों के परिसीमन में आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। परिसीमन से जुड़ी ऑनलाइन प्रविष्टियों के दौरान कई जिलों में ऐसे बेचिरागी राजस्व ग्राम भी सामने आए हैं, जो गैर-आबाद होने के बावजूद राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं और भौतिक रूप से मौजूद हैं। पूर्व के पोर्टल पर इनके लिए अलग विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण इनका विवरण दर्ज नहीं हो सका था। अब ऐसे सभी गांवों की जानकारी भी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी।

    आयोग ने जारी किए दिशानिर्देश
    आयोग ने इस संबंध में जिला निर्वाचन पदाधिकारियों-सह-जिला पदाधिकारियों, जिला पंचायत राज पदाधिकारियों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। तकनीकी तैयारियां पूरी होने के बाद परिसीमन की जमीनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिला पंचायती राज पदाधिकारी शशि कुमार ने बताया कि तकनीकी तैयारियां पूरी हो गई हैं। जल्दी ही परिसीमन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

  • डॉक्टरों की मनमानी पर लगेगी लगाम, फेस बायोमेट्रिक और साप्ताहिक समीक्षा से तय होगी जवाबदेही

    डॉक्टरों की मनमानी पर लगेगी लगाम, फेस बायोमेट्रिक और साप्ताहिक समीक्षा से तय होगी जवाबदेही

    रांची
     राज्य के रिम्स सहित सभी छह मेडिकल कालेजों में डाक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के इलाज की व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सख्ती करने की तैयारी में है। खासकर सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के ड्यूटी आवर में अनुपस्थित रहने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

    इसके तहत एसआर की फेस बायोमेट्रिक उपस्थिति दिन में दो बार दर्ज कराने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उनकी साप्ताहिक उपस्थिति की समीक्षा विभाग स्तर पर होगी और उसी के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया को जोड़ा जाएगा।

    स्वास्थ्य शिक्षा एवं शोध निदेशक डा. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि मेडिकल कालेजों में इस समय सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर आने और ड्यूटी अवधि पूरी होने से पहले चले जाने की शिकायत है।

    इनमें एसआर को लेकर सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। विभाग का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सक अपने निर्धारित समय में अस्पताल में मौजूद रहें और मरीजों को समय पर उपचार मिले।

    छह मेडिकल कालेजों में लागू होगी व्यवस्था
    नई व्यवस्था राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों में लागू की जाएगी। इनमें राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रांची, शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल धनबाद, फूलो झानो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल दुमका, शेख भिखारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल हजारीबाग, एमजीएम जमशेदपुर और मेदिनीराय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल पलामू शामिल हैं।

    विभाग के अनुसार, एसआर सहित चिकित्सकों की उपस्थिति का डिजिटल रिकार्ड तैयार होने से यह पता लगाना आसान होगा कि कौन चिकित्सक कितने समय अस्पताल में रहा और किसने ड्यूटी पूरी की।

    ड्रेस कोड की भी होगी सख्ती
    डाॅ. भट्टाचार्य ने बताया कि चिकित्सकों के लिए ड्रेस कोड पहले से निर्धारित है, लेकिन कई स्थानों पर इसका पालन नहीं हो रहा है। अब इसे कड़ाई से लागू कराया जाएगा। चिकित्सकों को एप्रन और पहचान पत्र के साथ ड्यूटी पर रहना अनिवार्य होगा।

    सीनियर और जूनियर चिकित्सकों को अस्पताल परिसर में अनुशासन का पालन करना होगा। इसके साथ ही मरीजों और उनके स्वजनों के साथ चिकित्सकों के व्यवहार को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। चिकित्सकों को मरीजों एवं उनके स्वजनों से शालीन और संवेदनशील व्यवहार करने का निर्देश दिया जाएगा।

    उपस्थिति से जुड़ेगा वेतन
    नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एसआर की साप्ताहिक उपस्थिति का परीक्षण है। फेस बायोमेट्रिक से दर्ज उपस्थिति का विभाग स्तर पर प्रत्येक सप्ताह अवलोकन किया जाएगा। उपस्थिति और ड्यूटी से संबंधित रिकार्ड के आधार पर ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    इससे अस्पताल में केवल कागज पर उपस्थिति दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मालूम हो कि रिम्स में भी सीनियर रेजिडेंटों की नियुक्ति के लिए लगातार प्रक्रिया चल रही है और विभिन्न विभागों में एसआर की नियुक्तियां की जा रही हैं। जिससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में एसआर ही मेडिकल कालेजों का बैकबाेन है।

    मरीजों को क्या मिलेगा लाभ
    – चिकित्सकों की ड्यूटी के दौरान उपलब्धता सुनिश्चित होगी
    – ओपीडी और वार्ड में मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श मिलने की संभावना बढ़ेगी
    – गंभीर मरीजों की निगरानी में सुधार होगा।
    – एसआर के ड्यूटी से समय से पहले चले जाने की शिकायतों पर नियंत्रण होगा
    – डिजिटल उपस्थिति से जवाबदेही तय करना आसान होगा
    – ड्रेस कोड और पहचान पत्र से मरीजों को चिकित्सक की पहचान करने में सुविधा होगी
    – मरीजों और स्वजनों के साथ व्यवहार में सुधार लाने पर जोर होगा

    विभाग की असली चुनौती इलाज की उपलब्धता
    स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का सीधा संबंध केवल उपस्थिति से नहीं, बल्कि अस्पताल में डाक्टरों की उपलब्धता और मरीज के इलाज से है। मेडिकल कालेज अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। ऐसे में यदि डाक्टर निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं तो इसका सीधा असर ओपीडी, वार्ड, आपातकालीन सेवा और गंभीर मरीजों की निगरानी पर पड़ता है।

    नई व्यवस्था में फेस बायोमेट्रिक और साप्ताहिक समीक्षा से उपस्थिति का डिजिटल प्रमाण उपलब्ध रहेगा। इससे विभाग के पास कार्रवाई या सुधार के लिए ठोस आंकड़े भी होंगे। डा. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, प्रस्तावित गाइडलाइन जल्द जारी की जाएगी।

    इसके बाद मेडिकल कालेजों में चिकित्सकों की उपस्थिति, ड्रेस कोड, अनुशासन और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर व्यवस्था को और कड़ाई से लागू किया जाएगा।

     

  • समस्तीपुर के किसानों के लिए खुशखबरी, चना और मटर के बीज पर मिलेगा भारी अनुदान

    समस्तीपुर के किसानों के लिए खुशखबरी, चना और मटर के बीज पर मिलेगा भारी अनुदान

    समस्तीपुर.

    जिले में हरा चना, मटर एवं हरा मटर के उत्पादन को बढ़ावा देना है, ताकि बाजार की मांग के अनुसार उपलब्ध हो सके। इससे किसानों को अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होने के साथ ही आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    रबी मौसम में हरा चना, हरा मटर और साधारण मटर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 2026-27 के तहत किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ बाजार में हरी दलहनी फसलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। 

    बीज का वितरण 15 नवंबर तक
    योजना के तहत अनुदानित बीज का वितरण 15 नवंबर तक ही किया जाएगा। जिले में 150 एकड़ में हरा चना का प्रत्यक्षण कराया जाएगा। इसके लिए प्रति एकड़ चार हजार रुपये की दर से छह लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, 895 क्विंटल चना बीज वितरण का लक्ष्य है। इससे करीब 2,797 एकड़ में बुआई हो सकेगी। बीज वितरण के लिए 35.80 लाख रुपये का अनुदान निर्धारित किया गया है। हरा मटर के 164 क्विंटल बीज के लिए 9.84 लाख रुपये और साधारण मटर के 149 क्विंटल बीज के लिए 8.94 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी डा. सुमित सौरभ ने बताया कि योजना के तहत रबी में हरा चना, मटर एवं हरा मटर प्रोत्साहन कार्यक्रम को स्वीकृति मिली है।

    लागत का 50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
    चना बीज पर चार हजार रुपये प्रति क्विंटल अथवा लागत का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो, सहायता दी जाएगी। एक एकड़ में 32 किलोग्राम चना बीज की अनुशंसित मात्रा है। मटर और हरा मटर बीज के लिए छह हजार रुपये प्रति क्विंटल अथवा लागत का 50 प्रतिशत, जो भी कम हो, सहायता निर्धारित है। मटर की बीज मात्रा 40 किलोग्राम और हरा मटर की 32 किलोग्राम प्रति एकड़ रहेगी।

    पंजीकृत दुकानों से होगा बीज वितरण
    बीज व अन्य उपादानों का वितरण बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से पंजीकृत विक्रेताओं द्वारा किया जाएगा। विक्रेताओं को दुकानों पर बीज के प्रभेद, वास्तविक मूल्य और अनुदानित दर की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी, ताकि किसानों को कीमत और अनुदान की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

    कृषि मैपर एप से होगी निगरानी
    योजना के तहत प्रत्यक्षण वाले भूखंडों की जियो-टैग्ड तस्वीरें कृषि मैपर एप पर अपलोड की जाएंगी। इससे प्रत्यक्षण कार्य की निगरानी और योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का मानना है कि हरा चना, मटर और हरा मटर का उत्पादन बढ़ने से बाजार की मांग पूरी होगी और किसानों को बेहतर आमदनी का अवसर मिलेगा।

  • मुजफ्फरपुर समेत बिहार के सभी जिलों में बदलेंगे खनन कार्यालयों के पते

    मुजफ्फरपुर समेत बिहार के सभी जिलों में बदलेंगे खनन कार्यालयों के पते

    मुजफ्फरपुर.

    राज्य के सभी जिलों में खनन कार्यालय भवन का नवनिर्माण किया जाएगा। खान एवं भूतत्व विभाग के द्वारा निर्माण कार्य कराने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए विभाग ने नक्शा तैयार कर सभी समाहर्ताओं को उपलब करा दिया है।

    नवनिर्माण को लेकर 115 फीट लंबी और 110 फीट चौड़ी भूमि की आवश्यकता होगी। बताया गया कि कुछ जिलों में खनन कार्यालय का संचालन दूसरे भवनों से किया जा रहा है। जबकि जहां सरकारी भवन से संचालन हो रहा है, उस भवन की स्थिति बहुत जर्जर हो चुकी है। इसे देखते हुए विभाग ने नवनिर्माण कराने का निर्णय लिया है। इसे लेकर सभी समाहर्ताओं से समाहरणालय के आसपास या पांच से सात किलोमीटर की दूरी के बीच जमीन चिह्नित कर उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि खनन कार्यालयों का सुचारू रूप से संचालन करना संभव हो सके।

    खान एवं भूतत्व विभाग के अपर सचिव ने इसके आलोक में पत्र जारी किया है। मुजफ्फरपुर में भी जिस भवन से खनन कार्यालय का संचालन हो रहा है, वह छह दशक से अधिक पुराना है और पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इसका भी नवनिर्माण किया जाएगा। जिस भवन से इसका संचालन हो रहा है वह जिला प्रशासन का है। इसमें एक ओर डीआरडीए भवन का संचालन होता है। जबकि डीटीओ जाने वाले रास्ते में खनन कार्यालय का भवन है। इसमें पहले लोक शिकायत निवारण केंद्र चलता था। बाद में इसे खनन विभाग को दिया गया।

    कार्यालय में काम करने और न रखरखाव की व्यवस्था
    खनन विभाग के पदाधिकारी ने बताया कि भवन इतना पुराना हो चुका है कि बरसात में छत से पानी टपकता है। बैठने तक की जगह नहीं है। अंदर से पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। इस कारण खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षण अब संयुक्त भवन में बैठकर कामकाज का संचालन करते हैं। जबकि कार्यालय से संबंधित काम अभी उसी जर्जर भवन से हो रहा है। रखरखाव की भी व्यवस्था ठीक नहीं है। कागजात के नष्ट होने की संभावना रहती है। कर्मियों को सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं।

    • राज्य के सभी जिलों में खनन कार्यालय भवन का होगा निर्माण
    • वर्तमान में जर्जर हालत में है भवन, छत से टपकता पानी और गिरता है प्लास्टर
    • खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षक अब संयुक्त भवन में बैठकर करते काम
  • झारखंड में खरीफ खेती ने पकड़ी रफ्तार, धान की रोपाई 83.43% और कोल्हान सबसे आगे

    झारखंड में खरीफ खेती ने पकड़ी रफ्तार, धान की रोपाई 83.43% और कोल्हान सबसे आगे

    रांची
    अलनीनो की वजह से कम वर्षा होने के अनुमान के विपरीत हाल के दिनों में अच्छी वर्षा हुई है। इसकी वजह से धान की खेती में तेजी आई है।

    अब तक 83.43 प्रतिशत धान का आच्छादन हुआ है। जबकि पूरे खरीफ की फसल आच्छादन 76.11 प्रतिशत हुआ है। जिसमें धान के अलावा मक्का, दलहन और तिलहन की खेती भी शामिल है।

    इस सप्ताह हुए वर्षा का लाभ उठाते हुए किसानों धान की रोपाई तेजी की है, जो एक सप्ताह में आठ प्रतिशत बढ़ गया है। हालांकि, अभी राज्य के आधे जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है।

    लेकिन मौसम विभाग की ओर से अलर्ट की वजह से यह उम्मीद जताई जा रही है कि 31 अगस्त तक पूरे राज्य में सामान्य औसत तक वर्षा हो पाएगी, जिसका फायदा खरीफ सीजन की फसलों को मिलेगा।

    पूर्व में मौसम विभाग की ओर से अलनीनो की वजह से राज्य में औसतन 35 प्रतिशत कम वर्षा होने का अनुमान लगाया था। लेकिन मौसम विभाग की माने तो पूरे राज्य में औसतन दस प्रतिशत वर्षा की कमी है। इसे सामान्य वर्षा कहा जा सकता है। क्योंकि मौसम विभाग के अनुसार 19 प्रतिशत से लेकर माइन 19 प्रतिशत तक की वर्षा को सामान्य माना जाता है।

    11 जिलों में सामान्य वर्षा, चार जिलों में कम हुई बारिश
    जुलाई के बाद अगस्त माह में राज्य में वर्षा में तेजी आयी है। जिसकी वजह से राज्य के 11 जिलों में सामान्य वर्षा हुआ है। लेकिन अभी पाकुड़ जिले में 53 प्रतिशत, देवघर में 48 प्रतिशत, चतरा और पश्चिमी सिंहभूम में 44 प्रतिशत
    कम वर्षा दर्ज की गई है।

    इस बार सबसे ज्यादा कोल्हान प्रमंडल में धान का आच्छादन हुआ है। यहां पर 90.17 प्रतिशत धान की रोपनी हो चुकी है। अभी सबसे कम पलामू प्रमंडल में 68.59 प्रतिशत धान की रोपाई हुई है।

    श्रीअन्न पर किसानों को मिली प्रोत्साहन राशि
    इस बार कम वर्षा के अलर्ट की वजह से कृषि विभाग की ओर से आकस्मिक योजना बनाई गई थी। जिसकी वजह से
    किसानों को श्रीअन्न की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था, ताकि संभावित सुखाड़ में भी किसानों को
    आर्थिक रूप से मदद मिल पाए।

    इस बार किसानों को तीन हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी गई है। इसके लिए करीब 30 हजार किसानों ने पंजीयन भी कराया है।

    प्रमंडल वार धान का आच्छादन
        दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल – 85.46 प्रतिशत
        पलामू प्रमंडल- 68.59 प्रतिशत
        कोल्हान प्रमंडल- 90.17 प्रतिशत
        उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल- 77.62 प्रतिशत
        संताल परगना प्रमंडल- 84.27 प्रतिशत

     

  • नेपाल के सैलाब के बाद बिहार में बाढ़ की आशंका, CM ने अधिकारियों को राहत-बचाव के लिए दिए सख्त निर्देश

    नेपाल के सैलाब के बाद बिहार में बाढ़ की आशंका, CM ने अधिकारियों को राहत-बचाव के लिए दिए सख्त निर्देश

    पटना 
    नेपाल की बाढ़ ने सबको हिला कर रख दिया है। अब नेपाल से सटे बिहार में बाढ़ की आशंका को लेकर सम्राट चौधऱी बेहद ही सतर्क हो गई है। खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ को देखते हुए मॉनिटरिंग कर रहे हैं। गुरुवार की सुबह गंडक बराज का जलस्तर बढ़ा है। इसके बाद अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय चौधऱी तथा राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लिया है।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल में आए सैलाब को देखते हुए बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया और मोतिहारी में बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया। इस दौरान संभावित प्रभावों, आवश्यक एहतियाती उपायों, सुरक्षा एवं राहत-बचाव कार्यों को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को पूरी तत्परता के साथ आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा एवं हर संभव सहायता उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    बताया जा रहा है कि सीएम सम्राट चौधरी नेपाल की बाढ़ से मुख्य तौर से प्रभावित होने वाली गंडक औऱ कोसी नदी का जायजा लिया है। इसके अलावा उन्होंने बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील स्थलों का भी हवाई निरीक्षण किया है। बता दें कि बुधवार की रात 11 बजे गंडक नदी का जलस्तर 1,50,200 क्यूसेक के पीक स्तर पर रहा। इसके बाद जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की गई। हालांकि, देवघाट क्षेत्र में देर से हुई वर्षा के कारण गंडक नदी के जलस्तर में पुनः वृद्धि दर्ज की जा रही है।

    वर्तमान स्थिति में तटबंधों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव परिलक्षित नहीं हुआ है। जल संसाधन विभाग द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, गंगा नदी का जलस्तर घटते रुझान (Decreasing Trend) में है। हालांकि, कुछ स्थानों पर जलस्तर में 1–2 सेंटीमीटर तक मामूली वृद्धि हो सकती है।

    स्वास्थ्य मंत्रालय अलर्ट
    बिहार में बाढ़ की आशंका के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। निशांत कुमार ने ऐक्स पर लिखा, 'नेपाल में आई फ्लैश फ्लड कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बिहार के आठ जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में घबराने की नहीं, सतर्क रहने और तैयार रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। संबंधित अधिकारियों से लगातार बातचीत हो रही है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    मेरी सभी स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मियों से अपील है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी तरह सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभावित लोगों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए तैयार रहें। अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी दवाओं और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित रखें, ताकि किसी भी परिस्थिति में लोगों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।'

  • हरियाणा में सिमट रही गन्ने की खेती, बढ़ती लागत और श्रमिकों की कमी ने बढ़ाई चिंता

    हरियाणा में सिमट रही गन्ने की खेती, बढ़ती लागत और श्रमिकों की कमी ने बढ़ाई चिंता

    पानीपत.

    चीनी के अप्रत्याशित बढ़ते दाम का एक कारण प्रदेश में गन्ने का कम होता रकबा भी है। प्रदेश में गन्ने का बिजाई क्षेत्र बढ़ती लागत, कम रेट, मजदूरों की कमी व दूसरी फसलों से किसानों का गन्ने से मोह भंग होता जा रहा है।

    मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 29,188 किसानों ने 1,42,193 एकड़ में गन्ने की फसल की थी। 2025 में 29,062 किसानों ने 1,63,287 एकड़ में गन्ने की काश्त की थी। इस वर्ष 28,663 किसानों ने 1,62,534 एकड़ में गन्ना उगाया है।

    चीनी मिलों का ब्योरा
    प्रदेश में कुरुक्षेत्र के शाहाबाद, पानीपत के डाहर, अंबाला के नारायणगढ़, यमुनानगर, सोनीपत और गोहाना, रोहतक के भाली और महम, पलवल, करनाल, असंध, भादसों, जींद और कैथल में चीनी मिल स्थापित हैं।

    सरकार का रकबा और पैदावार दोनों बढ़ाने पर जोर
    गन्ने का रकबा और पैदावार दोनों बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को उन्नत किस्में उपलब्ध करवाए जाने की योजना है। इसके अलावा किसानों को गन्ने की नई बिजाई पर प्रति एकड़ पांच हजार रुपये अनुदान और कीटनाशकों पर 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। टाप बोरर की रोकथाम के लिए ट्रैप और ल्योर मुफ्त उपलब्ध कराए गए हैं। गन्ना कटाई के लिए मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    गन्ना घटने के पांच बड़े कारण –

    • चीनी मिलों की ओर से निश्चित समयावधि में गन्ना नहीं लेना।
    • मक्का, धान और सब्जियों की फसलों की अपेक्षा कम आय होना।
    • मजदूरों की कमी से कटाई-छिलाई में बड़ी परेशानी।
    • कई तरह की बीमारी और कीट से दवाओं का बढ़ता खर्च।
    • नकदी फसलों की तरह समय पर भुगतान नहीं होना।
  • रांची की 3,95,692 महिलाओं को मिला मंईयां सम्मान योजना का लाभ, DBT से भेजे गए ₹2500

    रांची की 3,95,692 महिलाओं को मिला मंईयां सम्मान योजना का लाभ, DBT से भेजे गए ₹2500

    रांची
    रक्षाबंधन से पहले झारखंड सरकार ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत रांची जिले की महिलाओं को सम्मान राशि का भुगतान किया है। अगस्त 2026 की राशि जिले की 3 लाख 95 हजार 692 लाभुकों के बैंक खातों में आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेज दी गई है।

    योजना के तहत प्रत्येक लाभुक को 2500 रुपये की सम्मान राशि दी गई है। रांची जिले के लाभुकों के खातों में कुल 98 करोड़ 92 लाख 30 हजार रुपये हस्तांतरित किए गए हैं।

    रांची जिले में प्रखंड और शहरी क्षेत्रवार लाभुकों को योजना का लाभ दिया गया है। इनमें कांके में 31,620, टाउन अर्बन क्षेत्र में 26,042, मांडर में 23,008, सिल्ली में 21,335, बेड़ो में 20,620 और रातू में 20,427 लाभुक शामिल हैं।

    जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। रांची जिले में पात्र लाभुकों तक योजना का लाभ पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे। लाभुकों के भुगतान की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जा रही है और संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। यह योजना आर्थिक सहायता के साथ-साथ महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। 

  • बिहटा के लोगों को मिलेगी सिलेंडर से राहत, PNG के साथ CNG नेटवर्क विस्तार की भी योजना

    बिहटा के लोगों को मिलेगी सिलेंडर से राहत, PNG के साथ CNG नेटवर्क विस्तार की भी योजना

    पटना
     बिहटा इलाके के लोगों को जल्द ही पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सुविधा मिलने वाली है। दिसंबर से बिहटा क्षेत्र में घर-घर पीएनजी कनेक्शन देने की तैयारी है। पीएनजी पाइपलाइन विस्तार के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से एनओसी मिलने के बाद काम तेजी से चल रहा है। अब बिहटा चौक तक पीएनजी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है। अब यहां से आगे पाइपलाइन का विस्तार किया जाएगा। 

    गेल के महाप्रबंधक एके सिन्हा ने बताया कि बिहटा चौक से आगे सिकंदरपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र तक पाइपलाइन पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है। सिकंदरपुर में गेल की ओर से गैस डिस्पैच सेंटर बनाया जाएगा। इसके बाद आसपास के आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों में पीएनजी की आपूर्ति शुरू की जाएगी। 

    उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र को पीएनजी के साथ-साथ सीएनजी से भी जोड़ने की तैयारी है। पाइपलाइन विस्तार और आवश्यक आधारभूत संरचना तैयार करने में करीब पांच से छह महीने का समय लग सकता है। इसके बाद घरों के साथ औद्योगिक इकाइयों को भी पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

    सुरक्षित और सुविधाजनक होगा ईंधन
    बिहटा क्षेत्र में पीएनजी की सुविधा मिलने से घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर की बुकिंग और आपूर्ति की परेशानी से राहत मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक सीधे गैस की आपूर्ति होगी। 

    वहीं औद्योगिक इकाइयों को भी लगातार गैस आपूर्ति का विकल्प मिलेगा। गेल की योजना बिहटा के बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पीएनजी और सीएनजी नेटवर्क को विस्तार देने की है।

    फतुहा औद्योगिक क्षेत्र में अगले महीने से मिलेंगे कनेक्शन
    फतुहा औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों को अगले महीने से पीएनजी कनेक्शन मिलने की शुरुआत होगी। पाइपलाइन नेटवर्क तैयार होने के बाद औद्योगिक इकाइयों को चरणबद्ध तरीके से कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे क्षेत्र की फैक्ट्रियों और अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों को पाइप्ड गैस की सुविधा मिल सकेगी।

    पाइपलाइन पहुंची तो एलपीजी कनेक्शन करना होगा सरेंडर
    केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर पीएनजी कनेक्शन लेना होगा। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। निर्देश का पालन नहीं करने पर संबंधित एलपीजी कनेक्शन को निलंबित किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद अपना एलपीजी कनेक्शन निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरेंडर करना होगा।