Category: बिहार

  • बिहार में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, जिलों में रात्रि विश्राम करेंगे पुलिस मुख्यालय के अधिकारी

    बिहार में अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, जिलों में रात्रि विश्राम करेंगे पुलिस मुख्यालय के अधिकारी

    पटना
    बिहार के जमुई, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में कानून को चुनौती देने वाली वारदातों के बाद सिस्टम को टाइट किया जा रहा है। सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को प्रभावी बनाने की कवायद शुरू हो गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी एसपी से कहा है कि अपराधियों में कानून का डर पैदा करें। शिथिल कार्यशैली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसपी पुलिस बल के वास्तविक लीडर के रूप में कार्य करें और अपने जिले की कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी लें। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि प्रत्येक जिले के डीएम और एसपी के कामकाज का मूल्यांकन उनकी त्वरित प्रतिक्रिया, जनता से मिलने वाले फीडबैक और धरातल पर दिखने वाली सुरक्षा के आधार पर किया जाएगा।

    मुख्य सचिव ने गुरुवार को वीसी के माध्यम से कानून-व्यवस्था को लेकर बैठक की और अपराध मुक्त समाज बनाने को लेकर कई सख्त निर्देश दिये। बैठक में राज्य के सभी डीएम व एसपी मौजूद थे। उन्होंने सभी से कहा कि प्रशासन के ‘इकबाल’ से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कानून हाल में कायम रहना चाहिए और बदलाव दिखने चाहिए। मुख्य सचिव ने सघन गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। कहा कि अनुमंडल स्तर तक कड़ी निगरानी रखें। खराब प्रदर्शन करने वाले या गैर-गंभीर पुलिस अधिकारियों को उनके पदों से तुरंत हटायें व सख्त कार्रवाई करें। तेज तर्रार पुलिस पदाधिकारियों को प्रोत्साहित करें ताकि वे और मनोयोग से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें।

    पुलिस मुख्यालय के अधिकारी जिलों में करेंगे रात्रि विश्राम
    मुख्य सचिव ने पुलिस को हमेशा गतिशील और अलर्ट रहने को कहा है। निर्देश दिया कि अपराधियों पर नकेल कसने के लिए रणनीतिक स्थानों पर तुरंत चेकपोस्ट लगाएं। मुख्य सचिव ने कहा कि रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए मुख्यालय के पुलिस अधिकारियों को जिलों के साथ टैग किया जाएगा। मुख्यालय के अधिकारी जिलों में जाकर विजिट करें व वहीं पर रात्रि विश्राम करेंगे। इससे जिलों के कानून व्यवस्था की सच्ची और असली तस्वीर अधिकारियों के सामनेन आएगी।

    पर्व-त्योहार में खास निगरानी
    मुख्य सचिव ने कहा है कि त्योहारों के सीजन में सभी डीएम और एसपी अतिरिक्त सतर्कता बरतें। सामाजिक सद्भाव या शांति भंग करने के उद्देश्य से फैलाई जाने वाली भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ‘रैपिड एक्शन पॉलिसी’ के तहत कार्य करे। फेक न्यूज को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ तुरंत और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने हालिया घटनाओं में पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना की। जमुई कांड में दो सौ से अधिक सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसपी ने कहा है कि भ्रामक सूचना प्रसारित करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के बीच CID जांच तेज, रद्द नियुक्तियों पर 14 अक्टूबर को अगली सुनवाई

    JPSC-JSSC परीक्षा विवाद के बीच CID जांच तेज, रद्द नियुक्तियों पर 14 अक्टूबर को अगली सुनवाई

    रांची
     हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में राज्य सरकार की ओर से रद की गई झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय देने का आग्रह किया। अदालत ने समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की। यह मामला एपीपी नियुक्ति, फाॅरेस्ट आफिसर सहित अन्य नियुक्ति परीक्षाओं को रद किए जाने से संबंधित है।

    सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिकाओं में संबंधित परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद करने के सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार ने 18 अगस्त को नियुक्ति का विज्ञापन रद किया था।

    JSSc-CGL केस के दो आरोपित कुंदन व समीर दो दिनों की रिमांड पर
    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित लेन-देन, पेपर लीक व अनियमितता से जुड़े मामले की जांच के क्रम में पूर्व में गिरफ्तार दो आरोपित कुंदन कुमार व समीर कुमार को सीआइडी ने गुरुवार को दो दिनों की रिमांड पर लिया है।

    जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह खंगालने में जुटी है कि अभ्यर्थियों की सेटिंग किस स्तर तक और किन-किन माध्यमों से की गई थी तथा इस पूरे खेल में परीक्षा संचालन व दलालों के तंत्र से कौन-कौन लोग शामिल थे। सीआइडी जांच में मिले तथ्यों का सत्यापन भी कर रही है।

    कुंदन कुमार ने न केवल खुद मोटी रकम देकर परीक्षा पास की थी, बल्कि उसने गिरोह के साथ मिलकर अन्य अभ्यर्थियों की भी सेटिंग कराई और बिचौलिए की भूमिका निभाई। वहीं, समीर कुमार का नाम भी पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिले सुराग के बाद इस पूरे प्रकरण में सामने आया था।

  • बांका में युवती से बदसलूकी और जबरन पैसे ट्रांसफर कराने का आरोप, 3 आरोपी हिरासत में

    बांका में युवती से बदसलूकी और जबरन पैसे ट्रांसफर कराने का आरोप, 3 आरोपी हिरासत में

     बांका
    बिहार के बांका जिले में मंदार पर्वत पर लड़की से सरेआम छेड़खानी के मामले में पुलिस ने 3 युवकों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि पीड़िता अपने दो दोस्तों के साथ मंदार पर्वत घूमने गई थी। उसी दौरान मनचलों ने उनके साथ बदसलूकी की। आरोपियों ने पीड़िता से फोनपे पर 1500 रुपये जबरन ऑनलाइन ट्रांसफर भी करवाए। रुपये लेने के बाद ही लड़की और उसके दोस्तों को वहां से जाने दिया गया। मंदार पर्वत पर छेड़छाड़ का वीडियो 3 दिन पहले वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया था। घटना ढाई महीने पहले की बताई जा रही है।

    बांका के एसपी अमितेश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि यह वीडियो 22 सितंबर को बौंसी थाना पुलिस की नजर में आया था। वायरल वीडियो में दृश्य मंदार पर्वत का लग रहा था। इसके बाद बौंसी थानाध्यक्ष ने इसकी जांच शुरू की। पुलिस टीम मंदार पर्वत पहुंची और जांच के दौरान वीडियो वाली जगह पहाड़ की ही मिली। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    बाराहाट के रहने वाले हैं आरोपी
    एसपी ने कहा कि पुलिस ने वायरल वीडियो में नजर आ रहे लोगों की पहचान में जुट गई। इसी दौरान गुरुवार रात को फुटेज में दिख रहे तीन युवकों के बारे में जानकारी मिल गई। ये तीनों बाराहाट थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस ने तीनों युवकों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

    एसपी ने पीड़िता का बयान दर्ज करवाया
    एसपी ने बताया कि घटना के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने खुद पीड़िता से बात की। उसका बयान दर्ज कराया गया है। पीड़िता ने भी पुलिस पर पूरा भरोसा जताया है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस घटना में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

    3 जुलाई की घटना, आरोपियों के नाम
    बांका पुलिस का कहना है कि यह घटना 3 जुलाई 2026 की है। पीड़िता अपने दो दोस्तों के साथ मंदार पर्वत घूमने गई थी। वायरल वीडियो में अब्दुल्ला, नीतीश कुमार राय और विकास कुमार नाम के लड़के उनके साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आए। आरोपियों ने पीड़िता का हाथ पकड़ा और गाली-गलौज भी की।

    इन धाराओं में मुकदमा
    मंदार पर्वत पर लड़की से छेड़छाड़ के आरोप में बौंसी थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 75, 76, 3 (5) और आईटी एक्ट की धारा 66ई, 67ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।

    बता दें कि मंदार पर्वत ऐतिहासिक और प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। यह हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के अनुयायियों के लिए पवित्र स्थल माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन को पहुंचते हैं। मंदार पर्वत पर जैन और हिंदू मंदिर भी बने हुए हैं। ऐसे में इस जगह पर लड़की से छेड़खानी की घटना ने शर्मसार कर दिया है।

  • इटखोरी की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा, राजगढ़ से एक पैर पर मिट्टी लाकर होती है कलश स्थापना

    इटखोरी की ऐतिहासिक दुर्गा पूजा, राजगढ़ से एक पैर पर मिट्टी लाकर होती है कलश स्थापना

    इटखोरी (चतरा)
     इटखोरी के टाल पर की राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक परंपरा आज भी जीवंत है। लगभग ढाई सौ साल पहले इस ऐतिहासिक पूजा की शुरुआत इटखोरी टाल के राजा हरि नारायण सिंह ने की थी। तब से यह सुचारू रूप से यहाx होती आ रही है।

    वर्तमान में इटखोरी के ग्रामीण इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। लगभग ढाई सौ साल पहले टाल पर दुर्गा पूजा का आयोजन शुरू होने के बाद धीरे-धीरे पितीज, गुल्ली, करनी, परसौनी, परोका और इटखोरी बाजार में भी दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा।

    1920 के बाद से मंदिर में वैष्णवी पूजा आरंभ
    हालांकि अन्य जगहों पर पूजा शुरू होने के बावजूद टाल की दुर्गा पूजा से प्रखंड के लोगों की श्रद्धा और आस्था आज भी गहराई से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि नवरात्र के पावन अवसर पर प्रखंड के अधिकांश गांवों के लोग टाल पर विराजमान मां दुर्गा का दर्शन करने आवश्यक रूप से आते हैं।

    पूर्व में यहां राजा की ओर से बलि प्रथा के साथ पूजा की जाती थी, लेकिन वर्ष 1920 के बाद से मंदिर में वैष्णवी पूजा आरंभ हो गई। पुरानी परंपरा को कायम रखने के लिए नवमी के दिन भैंसे के स्थान पर गन्ने और भुआ कोहड़े की बलि दी जाने लगी।

    कलश स्थापना के लिए पुजारी राजगढ़ से एक पैर पर लाते हैं मिट्टी
    इस ऐतिहासिक पूजा की एक खास बात नवरात्र के पहले दिन की कलश स्थापना विधि है। कलश स्थापना से पूर्व आज भी राजा हरि नारायण सिंह के राजगढ़ से पारंपरिक रूप से मिट्टी लाई जाती है। पुजारी यहां से एक पैर पर मिट्टी ले जाते हैं। जिसके बाद ही कलश स्थापना की विधि संपन्न होती है।

    इटखोरी टाल के राजा ने इस दुर्गा मंडप को गांव के समीप एक ऊंचे टीले पर स्थापित किया था। ऊंचे स्थान पर होने के कारण वहां का वातावरण काफी खुशनुमा रहता है। यहां कलश स्थापना के दिन से ही सुबह नवरात्र कथा और रात में महाआरती शुरू हो जाती है। आरती में सैकड़ों लोग जमा होकर भाग लेते हैं और महिलाएं देर रात तक देवी माँ के गीत गाती हैं। इटखोरी टाल को ऐतिहासिक पूजा स्थल होने का गौरव प्राप्त है।

  • नामकुम से बुढ़मू तक अंचलों में भ्रष्टाचार के मामले, ACB की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    नामकुम से बुढ़मू तक अंचलों में भ्रष्टाचार के मामले, ACB की कार्रवाई से मचा हड़कंप

    रांची
    झारखंड में अंचलों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध झारखंड की सशक्त एजेंसी लोकायुक्त व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के पास अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की भरमार है।

    रिश्वत मांगने, बिना रिश्वत के म्यूटेशन नहीं करने, बेवजह लोगों को परेशान करने के मामले पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि छोटे-मोटे मामलों में भी अंचल में काम नहीं होने पर वरीय पदाधिकारियों के पास उनकी शिकायतें पहुंच रहीं हैं।

    अभी दो दिन पहले ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ही झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित तथा तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इतना ही नहीं, तत्कालीन अंचलाधिकारी डाॅ. श्वेता वर्मा व अन्य आरोपितों के विरुद्ध जांच तेज है।

    गत वर्ष रांची के चुटिया थाने में तीन अंचलाधिकारी रवींद्र कुमार, अरविंद कुमार ओझा व सुमन कुमार सौरभ के अलावा अंचल निरीक्षक कमलकांत वर्मा, अनिल कुमार गुप्ता व राजस्व कर्मचारी सुनील मिंज व मनोरथ भगत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पूरा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा था।

    लोकायुक्त के यहां सर्वाधिक शिकायतें अंचलों से संबंधित
    इसी वर्ष अप्रैल महीने में लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया है। उनके पदभार ग्रहण के बाद से भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में पहुंच रहीं हैं। प्रत्येक माह करीब 15 से 20 शिकायतें ऐसी हैं, जो सिर्फ जमीन से संबंधित हैं और अंचलों में भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं।

    कुछ तो ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें आवेदक का कहना है कि वह जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहा है, उसके म्यूटेशन आवेदन को अंचल ने यह लिखकर खारिज कर दिया कि आवेदक का जमीन पर दखल कब्जा नहीं है।

    मतलब रिश्वत नहीं देने पर राजस्व कर्मचारी ने बिना भौतिक सत्यापन के फर्जी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अंचलाधिकारी ने म्यूटेशन को अस्वीकृत कर दिया। लोकायुक्त व एसीबी में ऐसी शिकायतों की भरमार है।

    अंचलों में भ्रष्टाचार के कुछ प्रमुख मामले

    • बुढ़मू अंचल : एसीबी ने रांची के बुढ़मू अंचलाधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा व राजस्व उप निरीक्षक सह राजस्व कर्मचारी राजेश किशोर रवि व राजेश किशोर रवि के भाई गौतम किशोर को इसी वर्ष जुलाई महीने में गिरफ्तार किया था। तीनों पर दाखिल खारिज के बदले रिश्वत मांगने व वसूलने का आरोप है। जांच के पुष्टि के बाद एसीबी ने उनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल की थी।
    • सदर अंचल चतरा
    •  चतरा सदर अंचल में 15 सितंबर को एसीबी ने दाखिल खारिज के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत लेते वहां के राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उसने दाखिल खारिज के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
    • सदर अंचल रांची
    • एसीबी ने रांची के सदर अंचल के अंचलाधिकारी मुंशी राम को दो जनवरी 2025 को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनपर जमीन संबंधित एक काम के निष्पादन के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था। एसीबी उनके विरुद्ध चार्जशीट कर चुकी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वे 37 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे और उनके घर से 11.42 लाख रुपये नकदी की बरामदगी हुई थी।
    • सिल्ली अंचल : एसीबी रांची की टीम ने रांची के सिल्ली अंचल कार्यालय के अमीन गणेश महतो को आठ हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में वरीय पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
    • नामकुम अंचल : एसीबी ने नामकुम अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी मनोज कुमार, तत्कालीन प्रभारी अंचल निरीक्षक अशोक कुमार सिंह व हल्का कर्मचारी रतिया टोप्पो के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी, जिसकी जांच चल रही है।
    • हेहल अंचल : एसीबी ने हेहल अंचल के पूर्व सीआइ रहे अनिल कुमार सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी मुख्यमंत्री के आदेश पर की गई थी। उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उनके विरुद्ध आय की तुलना में 19 लाख 30 हजार रुपये अधिक की संपत्ति मिली थी।
    • रातू अंचल : एसीबी ने वर्ष 20्र23 में म्यूटेशन के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में रातू अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) प्रदीप कुमार, राजस्व उप निरीक्षक सुनील कुमार सिंह व दलाल जाफर अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
    • बड़गाईं अंचल : रांची के बड़गाईं अंचल के पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद को सबसे पहले ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। उनके घर से 11 ट्रंक में जमीन के सरकारी दस्तावेज मिले थे। राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद पर जमीन के मूल दस्तावेज में हेराफेरी सहित कई आरोपों की पुष्टि हो चुकी है।
    • कांके अंचल : पूर्व में लोकायुक्त के आदेश पर जांच में कांके के अंचल के मेसरा मौजा का एक मामला उजागर हुआ था, जिसमें एक दिन में ही कांके अंचल ने 50 डिसमिल जमीन का दाखिल खारिज कर दिया था। इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी अनिल कुमार व अंचल निरीक्षक दोषी मिले थे।
    • कांके अंचल : कांके अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) जयकुमार राम सहित छह के विरुद्ध ईडी ने चार्जशीट दाखिल की थी। उनपर कांके अंचल क्षेत्र में आदिवासी, भुईहरी व सरकारी प्रकृति की जमीन को फर्जी दस्तावेज पर जेनरल बनाकर बेचने का आरोप लगा था। बाद में सीओ जयकुमार राम का निधन हो गया था।
  • PTM में अभिभावकों की सक्रियता से लेकर छात्रों की हाजिरी तक, ऐसे मिलेगा सम्मान

    PTM में अभिभावकों की सक्रियता से लेकर छात्रों की हाजिरी तक, ऐसे मिलेगा सम्मान

     पटना
     काॅरपोरेट की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में पैरेंट्स ऑफ द मंथ, टीचर्स ऑफ द मंथ और स्टुडेंट ऑफ मंथ की व्यवस्था शुरू होने जा रही है।

    कॉरपोरेट संस्थानों में इंप्लाई ऑफ द मंथ की व्यवस्था चलती है। सरकारी विद्यालयों में भी निजी विद्यालयों की तर्ज पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग (पीटीएम) का आरंभ हुआ है।

    इस व्यवस्था के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि पीटीएम के दिन अभिभावक अपने बच्चों के परफार्मेंस को जानने हर हाल में विद्यालय में आएं।

    रचनात्मक सुझाव दिए और सक्रियता दिखाई तो बनेंगे पैरेंट्स ऑफ द मंथ
    बच्चे के शिक्षकों से बात करें। इस क्रम में यह व्यवस्था की जा रही कि अभिभावक यह बताएं कि विद्यालय की व्यवस्था को और अधिक उत्कृष्ट करने को ले और क्या-क्या किया जा सकता है।

    अभिभावकों के रचनात्मक सुझाव को संबंधित शिक्षकों द्वारा नोट किया जाएगा। सभी सुझावों का अध्ययन संबंधित विद्यालय के शिक्षकों के समूह द्वारा किया जाएगा

    सर्वश्रेष्ठ सुझाव देने वाले को पैरेंट्स ऑफ द मंथ का खिताब मिलेगा। विद्यालय में उन्हें सम्मानित किए जाने की व्यवस्था भी बन रही।

    इस तरह तय होंगे टीचर्स ऑफ द मंथ
    शिक्षा विभाग ने अभी सभी माडल स्कूलाें के लिए टीचर्स ऑफ द मंथ की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विद्यालय को एक फार्म दिया जाएगा।

    फार्म को सभी शिक्षक भर कर देंगे। उस क्रम में यह देखा जाएगा कि संबंधित शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में कोई नवाचार कि‍या या नहीं।

    पढ़ाई सिलेबस के लिहाज से जहां पहुंचनी थी वहां पहुंची या नहीं। इस क्रम में विद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों की भी राय लेगा।

    स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ के ल‍िए हाजिरी भी महत्वपूर्ण
    स्टुडेंट्स ऑफ द मंथ को तय किए जाने को ले कई तरह के मानक तय किए गए हैं। इसमें एक मानक यह भी है कि विद्यार्थी की स्कूल में हाजिरी कितनी रही।

    इसके अलावा गृह कार्य, क्लास में एकाग्रता, स्कूल की अन्य तरह की गतिविधियों में उसकी सक्रियता आदि का आकलन किया जाएगा। इसके लिए भी विद्यालय में एक फार्म उपलब्ध रहेगा जिसे शिक्षकों को भरना।

    विद्यालय में अभिभावक रूचि लें, शिक्षकों के बीच कुछ नया करने का भाव जगे तथा विद्यार्थियों की सक्रियता नजर आए इसे केंद्र में रखकर इन सभी को सम्मानित करने की योजना शुरू की जा रही। इसका सकारात्मक असर दिखेगा।
        मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री

     

  • रिनपास में बढ़ेंगी मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों-किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट

    रिनपास में बढ़ेंगी मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों-किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट

    रांची
     रांची के कांके स्थित रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइकेट्री एंड अलायड साइंसेज (रिनपास) में मानसिक रूप से बीमार बच्चों एवं किशोरों के इलाज के लिए 20 बेड की यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसमें मानसिक रूप से बीमार करनेवाली आदतों जैसे मोबाइल के अधिक प्रयोग आदि को छुड़ाने के लिए बच्चों की काउंसिलिंग की भी व्यवस्था होगी

    स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने गुरुवार को इस यूनिट को शुरू करने को लेकर संस्थान के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने रिनपास में वर्तमान 100 बेडेड साइकेट्रिक रेजिडेंशियल शेल्टर होम की स्थिति और उपलब्ध क्षमता की जानकारी ली। उन्होंने संस्थान में उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा व्यवस्था का आकलन करते हुए आवश्यक सुधार एवं विस्तार की दिशा में कार्य करने के निर्देश पदाधिकारियों को दिए।

    अपर मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को देखते हुए रिनपास में डीपीएन (डिप्लोमा इन साइकेट्रिक नर्सिंग) कोर्स को दोबारा शुरू करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा।

    उन्होंने साथ ही एमडी साइकेट्रिक का कोर्स दोबारा शुरू करने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कहा कि इससे मरीजों को बेहतर उपचार और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    बैठक में संस्थान में स्वीकृत एवं कार्यरत पदों की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी पदों का एक बार पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यकता के अनुसार पदों का पुनर्गठन किया जाए। जिस क्षेत्र में जिस प्रकार के पदों की आवश्यकता है, उसका आकलन कर प्रस्ताव तैयार किया जाए।

    अपर मुख्य सचिव ने कहा कि रिनपास की पुरानी प्रतिष्ठा और बेहतर कार्यप्रणाली को फिर से स्थापित करने की दिशा में भी काम करने की आवश्यकता है। बैठक में विभाग के अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिनपास की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई, सहायक निदेशक मिथिलेश चौधरी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

    बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी की हो पढ़ाई
    अपर मुख्य सचिव ने बैठक में बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई शुरू करने पर भी जोर दिया। कहा कि संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा और उपचार की सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

     

  • बिहार में कोसी का महाअलर्ट, सुपौल-सहरसा-खगड़िया-भागलपुर में प्रशासन मुस्तैद

    बिहार में कोसी का महाअलर्ट, सुपौल-सहरसा-खगड़िया-भागलपुर में प्रशासन मुस्तैद

    भागलपुर
    उत्तर बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर अपने भयावह और विनाशकारी रौद्र रूप में आने को आतुर दिख रही है।

    बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवातीय दबाव (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते कोसी नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित और अनियंत्रित वृद्धि की आशंका गहरा गई है।

    जल संसाधन विभाग ने कोसी बेसिन के लिए 'हाई अलर्ट' जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर वीरपुर कोसी बराज से 6 लाख क्यूसेक से अधिक पानी का भारी-भरकम डिस्चार्ज हो सकता है।

    छह लाख क्यूसेक के संभावित जलप्रलय को देखते हुए सुपौल, सहरसा, खगड़िया और नवगछिया (भागलपुर) सहित समूचे कोसी क्षेत्र में प्रशासनिक तंत्र को युद्धस्तर पर अलर्ट मोड में तैनात कर दिया गया है।

    दबाव घटाने के लिए बराज के 25 फाटक खुले
    कोसी बराज पर जलस्राव की स्थिति बेहद तेजी से बदल रही है। गुरुवार दोपहर से ही नदी के मिजाज में तल्खी देखी जा रही थी।

    गुरुवार शाम जहां डिस्चार्ज 1.77 लाख क्यूसेक था, वहीं शुक्रवार सुबह 9 बजे तक यह उछलकर 1.90 लाख क्यूसेक को पार कर गया।

    बीचोंबीच से बहाया जा रहा पानी
    बराज के ढांचे पर बढ़ते पानी के भारी दबाव को नियंत्रित करने और डाउनस्ट्रीम में पानी को सुरक्षित पास आउट कराने के लिए कोसी बराज के कुल 56 में से 25 फाटकों को उठा दिया गया है।

    बाढ़ नियंत्रण वीरपुर (सुपौल) के मुख्य अभियंता ई. संजीव शैलेश ने बताया कि बराज की संरचना को किसी भी क्षति से बचाने के लिए बढ़ते पानी को बराज के बीचोंबीच वाले फाटकों से व्यवस्थित रूप से डाउनस्ट्रीम में बहाया जा रहा है।

    पूर्वी तटबंध के क्रिटिकल स्पॉट्स पर 24 घंटे कैंप
    यदि बराज से छह लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, तो तटबंधों पर पानी का ऐसा दबाव बनेगा जो पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया है। इसे देखते हुए पूर्वी कोसी तटबंध की अभेद्य सुरक्षा के लिए इंजीनियरों की पूरी फौज तैनात कर दी गई है।

    चन्द्रायण डिविजन (सहरसा) के कार्यपालक अभियंता आलोक कुमार ने बताया कि तटबंध के चिह्नित अतिसंवेदनशील बिंदुओं, विशेषकर 96.60 किमी, 101.23 किमी और 103.30 किमी पर अभियंताओं की टीम को दिन-रात (24 घंटे) कैंप करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।

    बालू की बोरियों का स्टॉक
    कटाव की आशंका से निपटने के लिए लाखों बालू भरे बोरों (सैंड बैग्स) और बोल्डर क्रेट्स का भंडारण पहले ही पूरा कर लिया गया है।

    वहीं, सुपौल के मरौना में बीडीओ रचना भारतीय और सहायक अभियंता अरुण कुमार ने सर्वाधिक संवेदनशील 17.20 किमी स्पर सहित संपूर्ण तटबंध का सघन मुआयना किया।

    तटबंध के भीतर मुनादी, घर और मवेशी छोड़ ऊंचे स्थानों पर भाग रहे ग्रामीण
    जलप्रलय की इस भयावह आहट ने तटबंध के अंदर बसे सैकड़ों गांवों में भारी दहशत पैदा कर दी है। सहरसा, सुपौल, खगड़िया और नवगछिया के दियारा इलाकों में प्रशासनिक टीमों द्वारा लगातार लाउडस्पीकर से मुनादी (माइकिंग) कराई जा रही है।

    अधिकारियों ने निचले इलाकों में रह रहे सभी ग्रामीणों से बिना समय गंवाए अपने मवेशियों, अनाज और जरूरी सामानों के साथ सुरक्षित तटबंधों व ऊंचे सरकारी भवनों में शरण लेने की मार्मिक अपील की है।

    कोसी बराज व डिस्चार्ज: मुख्य आंकड़े
        वर्तमान डिस्चार्ज स्थिति: 1.90 लाख क्यूसेक (शुक्रवार सुबह 9 बजे तक)।

        अनुमानित डिस्चार्ज (48 घंटे): 6,00,000 (छह लाख) क्यूसेक से अधिक।

        खुले फाटकों की संख्या: 56 में से 20 फाटक खोले गए।

        अत्यधिक संवेदनशील बिंदु: तटबंध के 17.20 किमी (मरौना), 96.60 किमी, 101.23 किमी व 103.30 किमी (चन्द्रायण डिविजन)।

        प्रभावित/अलर्ट जिले: सुपौल, सहरसा, खगड़िया और भागलपुर (नवगछिया पुलिस जिला)।

        आपदा प्रबंध: बालू भरे बोरे, जियो बैग्स, पर्याप्त नावें, प्लास्टिक शीट्स और अभियंताओं का 24 घंटे का पहरा।

    सहरसा के महिषी अंचल के सीओ संजय कुमार और नवहट्टा की सीओ मौनी बहन ने राजस्व व हल्का कर्मचारियों को फील्ड में मुस्तैद रहने का निर्देश दिया है।

    किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकारी व निजी नावों को अधिग्रहित किया जा रहा है और प्लास्टिक शीट बांटी जा रही हैं।

    उधर, सीमा पार नेपाल एपीएफ पुलिस भी बराज के आसपास लगातार माइकिंग कर आम नागरिकों को नदी के करीब जाने से रोक रही है।

    200 परिवार पहले से बेघर, अब चक्रवात की मार ने उड़ाई नींद
    उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से जलस्राव सवा से डेढ़ लाख क्यूसेक के बीच था, जिससे ग्रामीणों को लगा था कि इस साल का संकट टल चुका है।

    लेकिन इससे पहले हुए कटाव में ही सुपौल के सत्तौर पंचायत अंतर्गत नारायणपुर और बिरजाईन में करीब दो सौ परिवार अपने घर-द्वार गंवाकर बेघर हो चुके हैं।

    अब चक्रवाती दबाव के कारण छह लाख क्यूसेक पानी के इस नए महाअलर्ट ने कोसीवासियों की रातों की नींद छीन ली है। तटबंधों के भीतर जीवन गुजार रहे लोग प्रकृति के इस संभावित तांडव के सामने एक बार फिर लाचार नजर आ रहे हैं।

    खगड़‍िया में प्रशासन अलर्ट
    खगड़िया जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। कोसींचल के ऊपरी इलाकों में मची अफरा-तफरी का असर खगड़िया में भी दिख रहा है, जहां अधिकारी कोसी और बागमती के तटबंधों की सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

    36 घंटे में पहुंचता है कोसी बराज का पानी, 24 घंटे हो रही निगरानी
    बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2, खगड़िया के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि कोसी बराज से छोड़े जाने वाले पानी को खगड़िया तक पहुंचने में लगभग 36 घंटे का समय लगता है।

    इसे देखते हुए जिले में बाढ़ नियंत्रण विभाग अलर्ट मोड में है। कोसी और बागमती नदियों पर बने सभी प्रमुख बांधों और तटबंधों की 24 घंटे सघन निगरानी की जा रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सात अस्थाई सुरक्षा कैंपों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।

    मौके पर 120 अनुभवी बांध श्रमिक तैनात हैं, जिनके साथ विभागीय कनीय और सहायक अभियंता भी चौकसी बरत रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके।

    6 लाख डिस्चार्ज पर 1.5 मीटर तक बढ़ सकता है जलस्तर
    कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार के अनुसार, यदि वीरपुर बराज से छह लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता है, तो खगड़िया में कोसी नदी के जलस्तर में एक से डेढ़ मीटर तक की वृद्धि होने की संभावना है।

    घबराने की बात नहीं
    हालांकि, उन्होंने जिलावासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वर्तमान में घबराने की कोई बात नहीं है। विभाग की पूरी टीम और संसाधन तटबंधों की सुरक्षा के लिए अलर्ट पर हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी की गई है

    प्रशासनिक स्तर पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।

  • बीआईटी मोड़ से JNV तक बिछेगी नई पाइपलाइन, रांची में जलापूर्ति नेटवर्क होगा मजबूत

    बीआईटी मोड़ से JNV तक बिछेगी नई पाइपलाइन, रांची में जलापूर्ति नेटवर्क होगा मजबूत

     रांची
    राजधानी में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करने और पुरानी पाइपलाइन में लीकेज की समस्या के कारण होने वाले जलापूर्ति संकट को कम करने की दिशा में विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।

    पेयजल एवं स्वच्छता स्वर्णरेखा शीर्षकार्य प्रमंडल, रांची की ओर से तीन महत्वपूर्ण कार्यों का प्राक्कलन तैयार किया गया है। इन तीनों कार्यों की अनुमानित लागत करीब 1.51 करोड़ रुपये है।

    विभाग की ओर से प्राक्कलन की तकनीकी स्वीकृति के संबंध में पत्र जारी कर आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, पहले चरण के तहत बीआइटी मोड़ से जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), रांची तक डीआई (डक्टाइल आयरन) डिस्ट्रीब्यूशन पाइपलाइन बिछाई जाएगी।

    यह काम वित्तीय वर्ष 2026-27 में किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने 68 लाख 76 हजार 584 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया है। नई पाइपलाइन बिछने से संबंधित क्षेत्र में पेयजल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।साथ ही भविष्य में पाइपलाइन से जुड़ी समस्या को कम करने के उद्देश्य से यह काम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रुक्का चेकपोस्ट से विकास रोटरी रिंग रोड तक वैकल्पिक व्यवस्था
    दूसरे कार्य में पुराने डब्ल्यूटीपी को बार-बार पूरी तरह बंद करने की समस्या को दूर करने के लिए क्लियर वाटर राइजिंग मेन लाइन में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाएगी।

    इसका उद्देश्य लीकेज की मरम्मत और राइजिंग लाइन के रखरखाव के दौरान जलापूर्ति पूरी तरह बंद होने से बचाना है। इसके तहत रुक्का सेक्शन कार्यालय में 36 इंच व्यास का एक स्लूइस वाल्व, रुक्का ओल्ड डब्ल्यूटीपी में 30 इंच का एक वाल्व, भास जोर में 8 इंच के चार वाल्व तथा रुक्का में चरणबद्ध तरीके से वाल्व लगाने और पुराने क्षतिग्रस्त चैंबर के जीर्णोद्धार का काम किया जाएगा।

    यह कार्य रुक्का चेकपोस्ट से विकास रोटरी रिंग रोड के बीच किया जाएगा। इसके लिए 34 लाख 62 हजार 655 रुपये की राशि तय की गई है।

    नर्सिंग होम से जुमार ब्रिज तक भी होगा काम
    तीसरे चरण के तहत भी क्लियर वाटर राइजिंग मेन लाइन में वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। जुमार बस स्टैंड के पास दोनों तरफ 36 इंच व्यास के स्लूइस वाल्व लगाने और पुराने क्षतिग्रस्त चैंबर के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव है।

    यह काम विकास नर्सिंग होम, नेवरी रिंग रोड से बीएसएनएल कार्यालय, जुमार ब्रिज तक किया जाएगा। इसके लिए 48 लाख 37 हजार 830 रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया है। तीनों योजनाओं की कुल अनुमानित लागत 1 करोड़ 51 लाख 77 हजार 69 रुपये है।

    पाइपलाइन मरम्मत के दौरान वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था उपलब्ध कराने और शहर की पेयजल आपूर्ति को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। शहर में शहरी जलापूर्ति पर शहर की लगभग 8 लाख से अधिक की आबादी निर्भर है। लोगों को पानी पहुंचाना विभाग का कर्तव्य है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्य जारी है।

    –

    सुमित कुमार, कार्यपालक अभियंता, स्वर्णरेखा शीर्ष प्रमंडल बूटी रांची।

  • हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-करियर पर फोकस

    हर जिले में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-करियर पर फोकस

     पटना
    बिहार के सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देंगे। सम्राट सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया है कि हर जिले में बच्चों को अब अत्याधुनिक और उन्नत शैक्षणिक परिवेश उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी 38 जिले में कम से कम एक स्कूल को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ऐसे स्कूलों में छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है, जिसमें पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्लासरूम, उन्नत प्रयोगशालाओं और खेल-कूद की बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

    विभाग की और से तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार राज्य के चुनिंदा उच्च और उच्च माध्यमिक स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। इसमें पुराने, प्रतिष्ठित और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन विद्यालयों में कॅरियर ओरिएंटेड सारे विकल्प मौजूद होंगे। यहां छात्रों को कॅरियर की सभी संभावनाओं के लिए तैयार किया जाएगा। विज्ञान व तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस होगा, जिसके तहत रोबोटिक्स, कोडिंग, एआई की जानकारी दी जाएगी। बच्चों के खेल कॅरियर पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा कला और संस्कृति को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। इसी तरह बच्चों का व्यावसायिक कौशल विकसित करने की ‌विशेष योजना है। उन्हें डिजिटल स्किल, कम्युनिकेशन और लीडरशिप ट्रेनिंग मिलेगी।

    सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ये होगा खास
    ● बुनियादी ढांचा: स्कूल भवन, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान को बेहतर बनाया जाएगा

    ● डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: आईसीटी लैब, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की जाएगी

    ● शिक्षण सामग्री: डिजिटल शिक्षण सामग्री के जरिए पढ़ाई को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा

    ● क्विज और प्रतियोगिताएं: इन स्कूलों में छात्रों के बीच क्विज, स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं नियमित आयोजित कराई जाएंगी

    पुराने स्कूल को एक्सीलेंस चुनने पर अनेक चुनौतियां
    यह योजना काफी महत्वाकांक्षी है। हालांकि पुराने स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने में चुनौतियां कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या बुनियादी ढांचे की कमी है। कई पुराने विद्यालयों में पर्याप्त जगह नहीं है। इससे नई लैब या स्मार्ट क्लासरूम बनाना मुश्किल होगा। बिहार के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी भी कमजोर है। सिर्फ 24 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर और 85 फीसदी विद्यालयों में इंटरनेट है।

    इसी प्रकार तकनीकी और मानव संसाधन को लेकर भी बड़ी परेशानी है। प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी बाधा है। खासकर आईसीटी और रोबोटिक्स जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों को भारी कमी है। उधर, पुराने शिक्षकों को नई तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो बेहद कठिन कार्य है। इसके अलावा पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था भी एक समस्या है। सेंटर ऑफ एक्सलेंस के लिए सामाजिक और भौगोलिक चुनौतियां तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाना भी बड़ी चुनौती होगी। छात्रावास की व्यवस्था भी एक प्रमुख समस्या हो सकती है।

    डिजिटल, तकनीकी सुविधाएं
    ● स्मार्ट क्लासरूम: इंटरएक्टिव पैनल और स्मार्ट बोर्ड से लैस कक्षाएं

    ● आईसीटी लैब: इस स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना का अलग से प्रावधान किया गया है

    ● कंप्यूटर लैब: आधुनिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर से सुसज्जित कंप्यूटर
    प्रयोगशाला

    ● इनोवेशन लैब: अटल टिंकरिंग लैब या इनोवेशन लैब की स्थापना की योजना

    ● रोबोटिक्स लैब: इन स्कूलों को रोबोटिक्स लैब और एस्ट्रोनॉमी किट से लैस करने की योजना है

    ● हाई-स्पीड इंटरनेट: वाई-फाई कनेक्टिविटी और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था होगी

    शैक्षणिक सुविधाएं
    उन्नत प्रयोगशालाएं: भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान की सुसज्जित लैब

    पुस्तकालय: विस्तृत संग्रह वाली लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधन और शांत अध्ययन कक्ष

    ऑडियो-विजुअल सुविधाएं: प्रोजेक्टर, स्कैनर और मल्टीमीडिया सिस्टम।

    अन्य सुविधाएं
    लड़कियों के लिए विशेष सुविधाएं: उचित शौचालय, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था।

    पोषण कार्यक्रम: कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शेफ-क्यूरेटेड न्यूट्रिशन प्रोग्राम होंगे।

    हाइजेनिक कैंपस: स्वच्छ और आधुनिक परिसर

    खेल मैदान: फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और टेनिस की सुविधा।

    इंडोर स्पोर्ट्स हॉल: टेबल टेनिस और अन्य इनडोर गेम्स।

    स्विमिंग पूल: कुछ प्रमुख केंद्रों में तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल।

    योग और फिटनेस सेंटर: जिम और योग रूम