Category: बिहार

  • डेंगू को लेकर पटना में अलर्ट, PMCH-IGIMS में मरीज भर्ती; इन इलाकों में ज्यादा केस

    डेंगू को लेकर पटना में अलर्ट, PMCH-IGIMS में मरीज भर्ती; इन इलाकों में ज्यादा केस

    पटना
    बिहार की राजधानी पटना में डेंगू तेजी से बढ़ने लगा है। सितंबर के 23 दिनों में डेंगू के 140 नए मरीज मिल चुके हैं। डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफे से हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार को नौ नए मरीज सामने आए। हर दिन नौ से 12 मरीज डेंगू से संक्रमित पाए जा रहे हैं। इस साल अब तक पटना में डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या 307 हो गई है। इस बार डेंगू में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कुछ मरीजों में बीमारी गंभीर होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।

    पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि इस सीजन में अब तक 55 डेंगू मरीजों को भर्ती किया गया है। डेंगू मरीजों के लिए 20 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है। वहीं, आईजीआईएमएस में डेंगू के 79 मरीजों को भर्ती कराने की जरूरत पड़ी है। आईजीआईएमएस में डेंगू मरीजों के लिए पांच समर्पित बेड रखे गए हैं।

    पटना के सिविल सर्जन डॉ.योगेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा कि यदि लगातार तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी या उल्टी जैसे लक्षण हों तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर डेंगू की जांच कराएं। घर और आसपास हीं भी पानी जमा नहीं होने दें।

    यहां बढ़ रहे डेंगू के मरीज
    कंकड़बाग, हनुमान नगर, भागवत नगर, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर, भूतनाथ रोड, बाजार समिति, मुसल्लहपुर हाट, सुलतानगंज, संदलपुर, कदमकुआं, महेंद्रू, भिखनापहाड़ी, पाटलिपुत्र, बोरिंग रोड, राजाबाजार, इंद्रपुरी, आशियाना, दीघा, एजी कॉलोनी, एसकेपुरी, तारामंडल, सिपारा, मीठापुर, अगमकुआं, बजरंगपुरी, गुलजारबाग, आलमगंज, खाजेकलां, मालसलामी, गर्दनीबाग, राजीवनगर, शास्त्रीनगर, फुलवारीशरीफ, मैनपुरा, महेंद्रू और ट्रांसपोर्ट नगर

  • बिहार की बौद्ध धरोहर से थाईलैंड को जोड़ने की तैयारी, नए ट्रैवल पैकेज और कनेक्टिविटी पर जोर

    बिहार की बौद्ध धरोहर से थाईलैंड को जोड़ने की तैयारी, नए ट्रैवल पैकेज और कनेक्टिविटी पर जोर

    पटना
     बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत अब थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के पर्यटकों तक नए अंदाज में पहुंचाने की तैयारी है। बिहार पर्यटन विभाग के तत्वावधान में ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल-ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत थाईलैंड से आए 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का भ्रमण किया।

    बिहार यात्रा के अंतिम चरण में पटना पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय पर्यटन हित धारकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

    बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार
    पर्यटन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश रौशन ने कहा कि बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है। बिहार सरकार सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देना, बेहतरीन ट्रैवल पैकेज बनाना, सीधी कनेक्टिविटी बेहतर करना और बिहार को थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कार्यरत है।

    थाई प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से कहा कि बिहार पर्यटन द्वारा किया गया यह प्रयास भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। थाईलैंड-बिहार टूरिज्म के इस पहल का हिस्सा बनना खुशी की बात है।

    बैठक में कारोबार और पर्यटन पर चर्चा
    बैठक में बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने थाई प्रतिनिधिमंडल ने अन्य व्यवसायी संस्था से वार्ता की। इस दौरान पर्यटन उत्पादों, ट्रैवल पैकेज, व्यावसायिक अवसर और डेस्टिनेशन प्रमोशन को लेकर दोनों पक्षों ने विचार साझा किए।

    हित धारकों ने कहा कि इस पहल से बिहार-थाईलैंड के बीच पर्यटन सहयोग, कारोबारी साझेदारी और प्रचार-प्रसार के नए रास्ते खुलेंगे। थाई प्रतिनिधिमंडल ने बिहार पर्यटन की पहल को भारत और विशेषकर बिहार की वैश्विक पर्यटन पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यात्रा पूरी करने के बाद 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार से रवाना हो गया।

  • बिहार में चौर विकास योजना के तहत मिलेंगे लाखों रुपये, मत्स्य पालन से आय बढ़ाने का मौका

    बिहार में चौर विकास योजना के तहत मिलेंगे लाखों रुपये, मत्स्य पालन से आय बढ़ाने का मौका

     पटना
     सरकार बेकार पड़ी चौर भूमि को उपयोगी बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने की पहल कर रही है। इसी क्रम में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    योजना के माध्यम से राज्य में बड़े पैमाने पर उपलब्ध निजी चौर भूमि को मत्स्य आधारित समेकित जलकृषि के लिए विकसित किया जाएगा। चौर संसाधनों में मछली पालन के साथ-साथ कृषि, बागवानी एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा।

    इसका उद्देश्य चौर भूमि में उपलब्ध जल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।

    योजना के तहत एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाबों के निर्माण के लिए प्रति हेक्टेयर 8.88 लाख रुपये, चार तालाबों के निर्माण के लिए 7.32 लाख रुपये तथा एक तालाब के निर्माण एवं भूमि विकास के लिए 9.69 लाख रुपये की इकाई लागत निर्धारित की गई है।

    50 प्रतिशत मिलेगा अनुदान
    सभी वर्ग के लाभुकों को इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। वहीं, उद्यमी आधारित चौर विकास के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रविधान किया गया है।

    व्यक्तिगत या समूह लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित दो पासपोर्ट आकार के फोटो, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र तथा समूह में कार्य करने की सहमति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

    वहीं, उद्यमी लाभुकों को स्व-अभिप्रमाणित निबंधन प्रमाण-पत्र, पिछले तीन वर्षों का अंकेक्षण एवं आयकर रिटर्न, पैन कार्ड, जीएसटी, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र और लीज एकरारनामा प्रस्तुत करना होगा।

    कहां करे आवेदन?
    मत्स्य प्रशिक्षण प्राप्त लाभुकों तथा मत्स्य आधारित उद्यम का अनुभव रखने वाले आवेदकों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन मत्स्य निदेशालय की वेबसाइट fisheries.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

     

  • बिहार में महिला सुरक्षा पर फिर सवाल, समस्तीपुर घटना का वीडियो वायरल; दो युवकों की पहचान

    बिहार में महिला सुरक्षा पर फिर सवाल, समस्तीपुर घटना का वीडियो वायरल; दो युवकों की पहचान

    सम्सतीपुर
    जमुई के बाद अब बिहार के सम्सतीपुर में लड़की के साथ दिनदहाड़े बेशर्मी और हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दी गई हैं। इस शर्मनाक कांड का वीडियो भी काफी सन्न कर देने वाला है। जमुई कांड को लेकर पहले से ही पूरा देश उबल रहा था और अब समस्तीपुर से सामने आए वीडियो ने महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं। इस वीडियो में हैवान एक तरफ लड़की पर जुल्म की इंतहा पार कर रहे हैं तो वहीं वो राक्षसी हंसी हंसकर महिला सुरक्षा के दावों की खिल्ली भी उड़ा रहे हैं। लेकिन यह लड़की इस वीडियो में हैवानों का सामना करती भी नजर आ रही है। गुस्से में लड़की इन हैवानों से बचने के लिए यहां तक कहती है कि 'भाई को बुलाती हूं..'

    हालांकि, लड़की की इस बात का इन हवसियों पर कोई असर नहीं होता है और वो लड़की से कहते हैं कि वो अपने भाई को बुलाए। दरिंदगी के इस वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि यह लड़की अकेले ही हवसी भीड़ से भिड़ गई है। जमुई जैसे कांड की तरह ही यह हवसी यहां लड़की को गलत तरीके से छू रहे हैं और बदसलूकी कर रहे हैं लेकिन लड़की भी लगातार उनका विरोध कर रही है। लड़के इस लड़की के पीछे-पीछे चल रहे हैं और लड़की लगातार उनका विरोध कर रही है। वीडियो में नजर आ रहा है कि भीड़ में कई सारे लोग हैं। कुछ मोबाइल तो कुछ हंस रहे हैं। अकेली लड़की इन सब से के बीच घिरी हुई है।

    वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
    बता दें कि समस्तीपुर में कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव स्थित बांध बाईपास रोड पर बुधवार को बेखौफ शोहदों ने जमुई जैसी घटना को अंजाम दिया। सड़क पर फोटो लेने के लिए रुकी लड़की को तीन युवकों ने घेरकर अभद्रता की। उसके साथ गाली-गलौज की। बीच सड़क पर खींचते हुए उसके साथ बैड टच किया। इस दौरान शोहदे उसका नाम-पता पूछते रहे। देर शाम घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी ने मामले की तत्काल जांच और कार्रवाई का आदेश दिया। पुलिस ने वीडियो के आधार पर दो युवकों की पहचान की है।

    घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। हालांकि, लाइव हिन्दुस्तान वायरल वीडियो की पु्ष्टि नहीं करता है। बताया जाता है कि लड़की एक लड़के के साथ बांध बाईपास रोड से गुजर रही थी। दोनों सड़क किनारे रुककर फोटो ले रहे थे। इसी दौरान तीन युवकों ने लड़की को घेर लिया। आरोप है कि युवकों ने उसके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। वीडियो में दिख रहा है कि लड़के लड़की को बीच सड़क पर खींच रहे हैं। उसका नाम-पता पूछ रहे हैं और बैड टच कर रहे हैं। इसी दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने घटना का वीडियो बना लिया। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

  • झारखंड में ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों की सीनियरिटी होगी तय, नई उप कंडिका जोड़ी गई

    झारखंड में ट्रांसफर होकर आए कर्मचारियों की सीनियरिटी होगी तय, नई उप कंडिका जोड़ी गई

     रांची
    झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक आधार पर स्थानांतरित कर्मियों की वरीयता निर्धारण को लेकर एक महत्वपूर्ण संशोधन जारी किया है।

    सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में बताया गया है कि यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देगा। दरअसल, विभागीय परिपत्र संख्या-6160 दिनांक 23.09.2024 के द्वारा पूर्व में जारी कुछ निर्णयों को संकलित किया गया था।

    इसमें कार्मिक विभाग के पत्र संख्या-5626 को विलोपित करते हुए और गृह (विशेष) विभाग, बिहार के पत्रों का हवाला देते हुए कार्मिक विभाग, झारखंड के पत्रांक-4450 दिनांक 19.07.2008 के द्वारा परिचारित राज्य सरकार के पूर्व के निर्णय को 19.07.2008 के भूतलक्षी प्रभाव से वापस प्रभावी किया गया था।

    इसके अनुसार, अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर झारखंड आने वाले कर्मियों को मूल वरीयता का लाभ नहीं मिलता है और वे अपने कोटि में अपने बैच के कर्मियों की तुलना में सबसे कनीय माने जाते हैं।

    अब सरकार ने विभागीय परिपत्र संख्या-6160 की कंडिका-7 में 7(ii) के पश्चात एक नई उप कंडिका-7(iii) जोड़ने का निर्णय लिया है। इस नई उप कंडिका के अनुसार“उपयुक्त कंडिका-7(ii) में उल्लेखित परिपत्र की शर्तें केवल उन्हीं कर्मियों पर लागू होंगी।

    जिनके पारस्परिक स्थानान्तरण आदेश में ‘वरीयता का दावा मान्य नहीं होगा’ अथवा ‘कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड के पत्र के आलोक में वरीयता निर्धारित होगा’, का उल्लेख रहेगा।

    इस आदेश की प्रतिलिपि नोडल पदाधिकारी पीएमयू कोषांग को वेबसाइट पर अपलोड करने हेतु, विभागीय वरीय प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी को भेजा गया है। यह निर्णय झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मियों की वरीयता को लेकर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा देने वाला माना जा रहा है।

     

  • जमुई कांड के बाद खुली मदन रोड की हकीकत, महिलाओं ने बताई छेड़छाड़ और अवैध कारोबार की कहानी

    जमुई कांड के बाद खुली मदन रोड की हकीकत, महिलाओं ने बताई छेड़छाड़ और अवैध कारोबार की कहानी

    पटना
    बिहार के जमुई जिले में जिस जगह पर लड़की से हैवानियत हुई थी वो जगह महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि जमुई-लखीसराय मार्ग से सटे मदन रोड पर आए दिन महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ की घटना होती थी। एक सप्ताह पहले भी एक महिला का कुछ मनचलों ने रास्ता रोका था और अश्लील फब्तियां कसी थी। गनीमत थी कि उस होकर गुजर रहे कुछ राहगीरों के कारण महिला की आबरू बच गई थी। इस इलाके की रहने वाली एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व उनकी बहू उसी रास्ते से होकर जा रही थी। तभी कई युवकों ने उनकी बहू का रास्ता रोक लिया और अश्लील टिप्पणियां की। वे उसे आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे। इस दौरान कुछ लोग उस होकर गुजर रहे थे, जिस कारण उनकी बहू की इज्जत बच गई।

    बुजुर्ग महिला ने यह भी कहा कि इस रास्ते से होकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के साथ हर दिन छेड़छाड़ होती है। बदमाश उनकी साइकिल के आगे बाइक खड़ी कर गंदी-गंदी बातें करते हैं। इस कारण से कई लड़कियों ने उस रास्ते से होकर स्कूल जाना तक छोड़ दिया है। इतना सब होने के बावजूद पुलिस को इन सब बातों की भनक नहीं लगी। और फिर बड़ी घटना घटने के बाद जमुई ही नहीं पूरा बिहार शर्मसार हो गया।

    मदन रोड होकर बालू और देसी शराब की तस्करी की चर्चा
    स्थानीय लोगों में इस बात की चर्चा है कि मदन रोड मनचले युवकों का अड्डा बन गया था। हर दिन छेड़खानी की घटनाएं आम होती थी। स्थानीय लोग बताते हैं कि लखीसराय के चानन से वह इलाका सटा हुआ है। लोगों में इस बात की चर्चा है कि जंगली इलाके में देसी शराब बनाई जाती है और कुंदर बराज होकर इसी रोड से जमुई के कई गांव में सप्लाई होती है। इतना ही नहीं बगैर घाट नीलामी के सुबह से लेकर शाम तक बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन भी उसी रास्ते से होता है। जब पुलिस कप्तान विश्वजीत दयाल ने स्वयं रेकी की तो पता चला कि इस इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चल रहा है। एक सप्ताह पहले सिविल ड्रेस में बाइक पर सवार होकर एसपी उस इलाके में पहुंचे थे और अवैध बालू लदे नौ ट्रैक्टर को जब्त करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार भी किया था।

    घटनास्थल पर खड़ी कार में बैठे युवक ने बचाई थी छात्रा की आबरू
    मदन रोड पर बदमाशों ने जिस समय छात्रा के साथ दरिंदगी हो रही थी, उस समय मौके पर मौजूद एक कार सवार ने छात्रा को वहां से निकलने में काफी मदद की। पुलिस सूत्रों के अनुसार वह जमुई का रहने वाला है। घटना के दौरान वह उस होकर कहीं जा रहा था। बीच सड़क पर छात्रा के साथ हैवानियत होता देख उसने अपनी कार वहां रोक दी और आरोपियों के साथ उलझ गया। इस दौरान उसके साथ भी मारपीट की गई। हालांकि उसने तबतक आरोपियों का विरोध किया जबतक छात्र और छात्रा वहां से निकल नहीं गए। उक्त युवक सामने नहीं आना चाहता लेकिन छात्रा की आबरू बचाने में उसने अहम भूमिका निभाई।

  • पुलिस लोगो वाली कार, फर्जी ID और मंत्रालय के पास; रांची में नकली अंडर सेक्रेटरी गिरफ्तार

    पुलिस लोगो वाली कार, फर्जी ID और मंत्रालय के पास; रांची में नकली अंडर सेक्रेटरी गिरफ्तार

    रांची
     एक ठग को खुद को झारखंड सरकार के गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बताकर पुलिस अधिकारियों पर धौंस जमाने के मामले में पिठौरिया थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान अरुण कुमार अग्रवाल (52), पिता वशीधर अग्रवाल, निवासी अमरावती अपार्टमेंट, बीआईटी एक्सटेंशन के सामने, लालपुर के रूप में हुई है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपित पिछले कई वर्षों से अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम के नाम से अपनी पहचान देता था। उसके पास से दो मोबाइल फोन, एक ब्रेजा कार, गृह विभाग और झारखंड पुलिस के नाम से बने फर्जी पहचान पत्र, राजभवन व मंत्रालय के कार पास तथा कई सरकारी दस्तावेजों की छायाप्रतियां बरामद की गई हैं।

    पिठौरिया थाना प्रभारी सतीश कुमार के बयान पर इस संबंध में पिठौरिया थाना कांड संख्या 97/2026, मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204, 205, 338, 336(3), 340(2), 319(2), 318(4) तथा ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 3, 5 और 6 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    एक साल से थाना प्रभारी को कर रहा था फोन
    थाना प्रभारी सतीश कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि करीब एक वर्ष से एक व्यक्ति एक नंबर से उन्हें फोन कर अपना परिचय अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम के रूप में देता था। वह कहता था कि उसने वरीय पुलिस अधिकारियों से बात कर उनकी पोस्टिंग कराई है। आरोपित कई छोटे-मोटे मामलों में गैरकानूनी काम करने के लिए दबाव बनाता था।

    वह
    पिठौरिया क्षेत्र में अपना घर होने की बात कहते हुए वहां उपहार भेजने के लिए भी कहता था। 21 सितंबर को आरोपित ने थाना प्रभारी को चंदवे स्थित अपने घर आने के लिए फोन किया। उसने बताया कि कुछ लोग घर के बाहर हंगामा कर रहे हैं।

    सूचना पर थाना प्रभारी पुलिस दल के साथ वहां पहुंचे। पुलिस के अनुसार, मौके पर आरोपित ने थाना प्रभारी से कहा कि क्या उन्हें नौकरी नहीं करनी है, उसकी बात विभाग के वरीय अधिकारियों से होती रहती है और उसकी बातों को हल्के में न लें।
    कार पर लगा था पुलिस का लोगो

    मौके पर पुलिस ने आरोपित की कार की जांच की। कार के डैशबोर्ड पर लाल-नीले रंग का पुलिस लोगो वाला बोर्ड लगा था। सह चालक सीट के सामने शीशे पर हरे रंग की पट्टी लगी थी, जिस पर झारखंड सरकार मंत्रालय कार पास, गृह विभाग, वर्ष 2024 से संबंधित विवरण अंकित था। इसके नीचे झारखंड सरकार की मुहर वाला स्टीकर और पंचम झारखंड विधानसभा कार पास भी लगा हुआ था।

    इन तथ्यों पर संदेह होने के बाद थाना प्रभारी ने वरीय अधिकारियों से विचार-विमर्श किया और आरोपित को पिठौरिया थाना आने का निर्देश दिया। मंगलवार को करीब 1:20 बजे वह थाना पहुंचा। पूछताछ के दौरान पुलिस ने गृह विभाग या किसी अन्य सरकारी विभाग का परिचय पत्र मांगा, लेकिन वह कोई सरकारी पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका।

    गृह विभाग में नहीं मिला अजय कुमार नाम का अधिकारी
    पुलिस ने गृह विभाग में पदस्थापित कर्मियों से सत्यापन कराया। इसमें पता चला कि अजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति गृह विभाग में अंडर सेक्रेटरी के पद पर पदस्थापित नहीं है। इसके बाद सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपित ने अपना वास्तविक नाम अरुण कुमार अग्रवाल बताया। पुलिस के अनुसार उसने कई वर्षों से अजय कुमार के नाम से पहचान देने की बात स्वीकार की है।

    जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपित ने वरीय पुलिस उपाधीक्षक अमर कुमार पांडेय के मोबाइल नंबर पर भी अंडर सेक्रेटरी बनकर व्हाट्सऐप और फोन के माध्यम से संपर्क किया था। पुलिस का आरोप है कि वह अपने कथित सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर अवांछित लाभ लेने का प्रयास करता था।

    पार्किंग शुल्क से बचने और मंत्रालय में प्रवेश के लिए लगाता था लोगो
    पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपित ने बताया कि कार पर पुलिस का लोगो लगाने से ट्रैफिक पुलिस उसे नहीं रोकती थी और पार्किंग शुल्क भी नहीं लिया जाता था। मंत्रालय का लोगो और कार पास रहने से मंत्रालय में प्रवेश के दौरान रोक-टोक नहीं होती थी।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सूचनाएं जुटाने तथा विभागीय अधिकारियों को सूचना भेजकर पोस्टिंग कराने और लंबित कार्रवाई के नाम पर ठगी करने की बात भी बताई है।

    कार से बरामद हुए फर्जी डीएसपी और सचिव के पहचान पत्र
    पुलिस ने आरोपित के दो मोबाइल फोन और वाहन को विधिवत जब्त किया है। इनमें एप्पल आईफोन 16 प्रो और सैमसंग गैलेक्सी एस-25 शामिल हैं। कार की तलाशी के दौरान अजय कुमार, अवर सचिव गृह विभाग, झारखंड सरकार के नाम से फोटोयुक्त हस्ताक्षरित दो पहचान पत्र बरामद किए गए। इसके अलावा अजय कुमार, डीएसपी (एसबी), झारखंड पुलिस के नाम से झारखंड पुलिस और झारखंड सरकार के लोगो वाले दो फोटोयुक्त पहचान पत्र भी मिले हैं।

    राजभवन में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले पांच हरे रंग के कार पास, गृह विभाग के मंत्रालय कार पास के पांच स्टीकर तथा कार पास तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले स्टीकरयुक्त ए-4 साइज के छह कागजात भी जब्त किए गए हैं।

    नक्सली पुरस्कार राशि और पुलिस पदोन्नति से जुड़े दस्तावेज मिले
    तलाशी में पुलिस को विभिन्न व्यक्तियों और संस्थानों के लेटर पैड भी मिले। इनमें मानव संसाधन विकास विभाग के सचिव, एक विधायक, पीजीआईएमईआर, एसजीपीजीआई और सेंट जेवियर कॉलेज रांची से संबंधित लेटर पैड शामिल हैं। इसके अलावा आरोपित के आधार कार्ड की छायाप्रति भी बरामद हुई है।

    पुलिस के अनुसार विशेष शाखा, झारखंड सरकार से संबंधित वर्ष 2022 के नक्सली संगठन के पुरस्कार राशि के नवीनीकरण और घोषणा से जुड़े गोपनीय पत्रों की छायाप्रतियां, पुलिस निरीक्षक से डीएसपी कोटि में पदोन्नति से संबंधित पुलिस महानिदेशक पर्षद की बैठक की कार्यवाही और आईपीएस में पदोन्नति से संबंधित गृह विभाग के दस्तावेज भी मिले हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई दस्तावेज प्रथम दृष्टया जाली और कूटरचित पाए गए हैं। जब्त मोबाइल फोन, दस्तावेज और वाहन की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपित ने किन-किन पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया था और उसके पास सरकारी विभागों से संबंधित गोपनीय दस्तावेज कैसे पहुंचे। मामले में आगे की जांच जारी है।

  • झारखंड हादसे में 4 की मौत, कैबिनेट मंत्री दीपिका पांडे की बेटी भी शामिल,CM ने जताया शोक

    झारखंड हादसे में 4 की मौत, कैबिनेट मंत्री दीपिका पांडे की बेटी भी शामिल,CM ने जताया शोक

    जमशेदपुर
    झारखंड के जमशेदपुर में भीषण सड़क हादसा देखने को मिला है। जिले के सोनारी थाना क्षेत्र स्थित मरीन ड्राइव पर गुरुवार तड़के हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में कार सवार चार लोगों की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार सड़क पर खड़े एक ब्रेकडाउन ट्रक के पीछे जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में बुरी तरह फंस गई और उसके परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों में झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडे सिंह की बेटी तृषा सिंह भी शामिल हैं।

    काफी मशक्कत से बाहर निकले शव
    जमशेदपुर में मरीन ड्राइव पर हुई इस दर्दनाक घटना के बारे में सूचना मिलते ही डीएसपी सीसीआर मनोज ठाकुर, सोनारी थाना प्रभारी संजय सुमन तथा अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। दुर्घटना के बाद कार में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बचाव दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला। हादसा इतना भयावह था कि मृतकों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके साथ ही गाड़ी के भी परखच्चे उड़ गए हैं।

    ट्रक से टक्कर के बाद कार के उड़ गए परखच्चे
    बताया जाता है कि जमशेदपुर के सोनारी थानाक्षेत्र अंतर्गत दोमुहानी मरीन ड्राइव पर कार और ट्रक की टक्कर में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत कुल 4 लोगों की मौत हुई। मृतकों में 2 युवक और 2 युवतियां शामिल हैं।

    मरने वालों के नाम हैं- सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता, वंशिका खंडेलवाल और तृषा सिंह। बताया जाता है कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार, दोमुहानी मरीन ड्राइव सड़क पर पहले से खड़े ट्रक से जा टकराई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए।

    कार को कटर से काटकर निकाले शव
    जानकारी के मुताबिक, ट्रक बुधवार रात करीब 10 बजे ब्रेकडाउन होने के बाद मरीन ड्राइव की सड़क पर खड़ा था. गुरुवार तड़के तेज गति से आ रही कार अनियंत्रित होकर सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार के परखच्चे उड़ गए. कार में सवार लोगों को बाहर निकालना भी बेहद मुश्किल हो गया.  सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंची और गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों को बाहर निकाला गया। 

    XLRI की छात्रा थी तृषा
    कार इतनी बुरी हालत में थी कि इसको गैस कटर से काटकर मृतकों का शव निकालना पड़ा। शवों को MGM अस्पताल भेज दिया गया है। मंत्री की बेटी XLRI की छात्रा थी। घटना की सूचना मिलते ही मंत्री दीपिका पांडेय सिंह रांची से जमशेदपुर के लिए निकल गईं।

    मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दुख जताया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। 

    गैस कटर से काटकर निकाले गए शव 
    ट्रक से टक्कर के बाद कार की हालत खराब हो गई। उसके अंदर मंत्री की बेटी समेत चारों फंस गए। कार की हालत इतनी खराब थी कि गैस कटर के काट कर शवों को बाहर निकाला गया। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए MGM अस्पताल भेजा गया।

    मृतकों की हुई पहचान
    पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता, वंशिका खंडेलवाल और तृषा सिंह के रूप में हुई है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अर्णव मिश्रा ने बताया कि संबंधित ट्रक बुधवार रात करीब 10 बजे से खराब होकर सड़क पर खड़ा था। गुरुवार सुबह लगभग 3 बजे तेज रफ्तार कार पीछे से ट्रेलर में जा घुसी, जिससे कार सवार चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    हादसे से झारखंड में शोक की लहर
    हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान तृषा सिंह, सार्थक अग्रवाल, नमन गुप्ता और वंशिका खंडेलवाल के रूप में हुई है.  सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल भेजे जाने की जानकारी है.  इस दर्दनाक हादसे की खबर सामने आने के बाद पूरे झारखंड में शोक की लहर है.  मुख्यमंत्री सोरेन और स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफानन अंसारी ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की है।  

    हादसे का कारण क्या था?
    जमशेदपुर में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और अंधेरे के कारण ट्रक का समय पर दिखाई नहीं देना हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। वहीं, प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि सड़क पर खड़े ट्रक के पीछे आवश्यक सुरक्षा संकेतक और चेतावनी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। आपको बता दें कि इससे पहले झारखंड की राजधानी रांची में भी दर्दनाक हादसा हुआ था। यहां पानी की टंकी गिरने से मलबे में दबकर 2 मजदूरों की मौत हो गई थी।

    CM हेमंत सोरेन ने जताया दुख
    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जमशेदपुर में हुए इस हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने लिखा- "जमशेदपुर में एनएच हाईवे पर हुए सड़क हादसे में राज्य सरकार में साथी मंत्री एवं बहन श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह जी की बेटी एवं अन्य लोगों के निधन की बेहद दुखद और हृदयविदारक खबर से मन अत्यंत व्यथित है। अपनी संतान को खोने का दुःख किसी भी माता-पिता और परिवार के लिए शब्दों से परे और असहनीय होता है। इस अत्यंत कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं बहन दीपिका जी एवं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। इस अपूरणीय क्षति के लिए शब्द नहीं हैं। मरांग बुरु दिवंगत लोगों की आत्मा को शांति प्रदान कर शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।"

  • पंचायत चुनाव से पहले बड़ा अपडेट, 122 EBC जातियों की स्थिति का होगा आकलन; तय होगा आरक्षण

    पंचायत चुनाव से पहले बड़ा अपडेट, 122 EBC जातियों की स्थिति का होगा आकलन; तय होगा आरक्षण

    पटना
    बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लिए आरक्षण का मानक तय हो गया है। पंचायती राज विभाग द्वारा तय गाइडलाइन के आधार पर राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग अध्ययन करेगा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल लगभग 122 जातियों की सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन होगा। इसके लिए जल्द ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग से जुड़े गांवों और शहरों में सर्वे शुरू होगा।

    ईबीसी आयोग निर्धारित मानक पर सर्वें करा कर पंचायत चुनाव में ईबीसी प्रतिनिधियों लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने की अनुशंसा करेगी। पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (एनेक्सर-1) के लिए अधिकतम 50 फीसदी ही आरक्षण देना है। पिछले दिनों पंचायती राज विभाग और ईबीसी आयोग के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। आयोग ने विभाग से अध्ययन के लिए सहायता मांगी थी। पंचायती राज विभाग ने आयोग को भरोसा दिया है कि डीएम सहित जिलों के संबंधित विभागीय अधिकारियों को पत्र भेज कर आयोग को मदद दिलायेगा।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार के पंचायत चुनावों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण देने के पहले त्रिस्तरीय जांच (ट्रिपल टेस्ट) अनिवार्य है। इसमें पहली शर्त है कि किसी भी स्थिति में आरक्षण का दायरा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। दूसरा, अत्यंत पिछड़ा वर्ग की किन-किन जातियों को आरक्षण की वास्तव में जरूरत है। तीसरा, इसके लिए समर्पित आयोग हो, जो समयसीमा में अध्ययन कर रिपोर्ट दे। सरकार ने पहले ही ईबीसी आयोग को अध्ययन के लिए समर्पित आयोग घोषित कर दिया है।

    एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही ओबीसी को आरक्षण
    वर्तमान में उपलब्ध जनगणना पर राज्य की कुल आबादी में जितनी आबादी एससी- एसटी की होगी, इन वर्ग को उतना प्रतिशत आरक्षण देना है। एससी-एसटी से बचे हिस्से में ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया जा सकता है। बीते पंचायत चुनाव में यहां पिछड़ा वर्ग को 20% आरक्षण दिया गया था। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में भी ईबीसी को आरक्षण लगभग पिछले चुनाव की तरह ही मिलेगा।

    अत्यंत पिछड़ा वर्ग में 122 जातियां
    अत्यंत पिछड़ा वर्ग में लगभग 122 जातियां हैं। गाइडलाइन के आधार पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायतों में ओबीसी की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को देगा। सामान्य प्रशासन विभाग से रिपोर्ट पंचायती राज विभाग को मिलेगी। इसके बाद यह रिपोर्ट निर्वाचन विभाग को भेजी जायेगी। राज्य स्तर पर आरक्षण का दायरा तय नहीं होगा, बल्कि पंचायत ही मानक रखा गया है। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या बढ़ने की स्थिति में ईबीसी के लिए आरक्षित पंचायतों की संख्या में भी वृद्धि तय है।

    अत्यंत पिछड़ा वर्ग में प्रमुख जातियां
    कहार, कुम्हार, धानुक, लोहार, तेली, मल्लाह, कानू, नाई आदि

    पंचायतों के नये परिसीमन के बाद होगा चुनाव
    राज्य में वर्तमान में 8049 ग्राम पंचायत हैं। नये परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की संख्या 12500 हजार से अधिक होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन विभाग को परिसीमन करना है।
    ● आरक्षण का दायरा 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।

    ● पंचायतवार अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी का आकलन।

    ● ईबीसी के परिवारों की आर्थिक स्थिति।

    ● संसद, विधानसभा, नगर निकाय व पंचायतों में ओबीसी का वर्तमान प्रतिनिधित्व।

    ● अत्यंत पिछड़ा वर्ग का सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति।

  • बिहार में 2.36 करोड़ LPG कनेक्शन, 15% उपभोक्ताओं की e-KYC बाकी; सब्सिडी पर पड़ेगा असर?

    बिहार में 2.36 करोड़ LPG कनेक्शन, 15% उपभोक्ताओं की e-KYC बाकी; सब्सिडी पर पड़ेगा असर?

    पटना
     बिहार में घरेलू एलपीजी के करीब 15 फीसदी उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं करायी है. पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से एक अक्टूबर से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किए जाने के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाले सिलिंडर को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

    राज्य में 2.36 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता
    बिहार के 38 जिलों में तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों के 2.36 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ता हैं. इनमें से करीब 55 लाख उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाइसी नहीं करायी है. ऐसे में एक अक्टूबर की समय सीमा नजदीक आने के साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

    बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराने पर सब्सिडी को लेकर चिंता
    जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण नहीं कराया है, उन्हें सब्सिडी वाले सिलिंडर की सुविधा मिलने में परेशानी होने की आशंका है. हालांकि, पेट्रोलियम कंपनियों ने ऐसे उपभोक्ताओं के लिए सिलिंडर की कीमत बढ़ाने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है.

    मई से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
    पेट्रोलियम कंपनियों ने उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण कराने के लिए मई से ही जागरूक करना शुरू कर दिया था. इसके बावजूद लाखों उपभोक्ताओं ने अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं करायी है. कंपनियों की ओर से उपभोक्ताओं को समय रहते ई-केवाइसी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पूरा कराने के लिए कहा जा रहा है.

    एक अक्टूबर से लागू होगी अनिवार्यता
    घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक अक्टूबर से बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य किया गया है. ऐसे में जिन उपभोक्ताओं का प्रमाणीकरण अभी बाकी है, उनके लिए प्रक्रिया जल्द पूरी करना जरूरी होगा, ताकि सिलिंडर से जुड़ी सुविधाओं में किसी तरह की परेशानी न हो.