Category: खेल

  • रिजवान पर फिक्सिंग जांच का शिकंजा, कोर्ट बोला- जांच एजेंसी को आगे बढ़ने दें

    रिजवान पर फिक्सिंग जांच का शिकंजा, कोर्ट बोला- जांच एजेंसी को आगे बढ़ने दें

    नई दिल्ली
    पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान फिक्सिंग के आरोपों में फंस गए हैं। उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जा रही है। कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। उनका फोन जब्त कर लिया गया है और इसका सटीक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया है। 30 अगस्त को लॉर्ड्स टेस्ट खत्म होने के बाद रिजवान को आधी रात लगभग 1 बजे लंदन के उनके होटल के कमरे में जगाया गया। पीसीबी के भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी कर्नल अख्तर ने उन्हें नीचे आने के लिए कहा और साथ ही उन्हें अपना हैंडसेट लाने का विशेष निर्देश दिया।

    आधी रात को पाकिस्तान की जांच एजेंसी एफआईए का एक सदस्य भी वहां मौजूद था। जब रिजवान नीचे आए तो टीम के एक अधिकारी ने उन्हें एफआईए के अधिकारी से मिलवाया और सहयोग करने की सलाह दी। रिजवान से सट्टेबाजी और ऑनलाइन जुए से संबंधित कई सवाल पूछे गए और उनके लगातार विरोध के बावजूद उनका फोन जब्त कर लिया गया। उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन पर क्या आरोप हैं, किस घटना की जांच की जा रही है, उन पर क्या करने का संदेह है, या किस अधिकार के तहत उनका फोन जब्त किया जा रहा है।

    रिजवान ने कोर्ट को क्या बताया
    रिजवान ने अदालत में अपनी अपील में लिखा, 'इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच 27 अगस्त से 30 अगस्त तक हुए लॉर्ड्स टेस्ट मैच के तुरंत बाद रिजवान को रात 1 बजे उस होटल की लॉबी में बुलाया गया, जहां पूरी टीम ठहरी हुई थी। वहां, कथित तौर पर किसी सरकारी एजेंसी का एक अधिकारी मौजूद था। इस बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया गया था, लेकिन उनसे अधिकारी ने पूछताछ की और बिना कराण बताए उनका फोन जब्त कर लिया। रिजवान ने इस आश्वासन पर अपना फोन सौंपा था कि डिवाइस की पूरी तरह से जांच की जाएगी और अगले 3 घंटों के भीतर उसे वापस कर दिया जाएगा। आश्वासन के बावजूद, फोन आज तक वापस नहीं किया गया है। फोन अब एनसीसीआईए के कब्जे में है, जो उसके मामले की जांच कर रही है।

    अधिकारियों ने रिजवान को धमकाया
    लाहौर उच्च न्यायालय में दायर याचिका में रिजवान ने धमकी, ब्लैकमेल और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा, "कानूनी अधिकार के बिना फोन जब्त करना और उसे अनिश्चित काल तक अपने पास रखना, अपराध या उल्लंघन किए गए प्रावधान का उल्लेख किए बिना अस्पष्ट नोटिस जारी करना, अप्रासंगिक प्रश्नावली देना, शिकायत या सामग्री का खुलासा करने से इनकार करना यह दर्शाता है कि विवादित नोटिस और विवादित जांच वैधानिक शक्ति का वास्तविक प्रयोग नहीं है, बल्कि याचिकाकर्ता को परेशान करने, डराने और ब्लैकमेल करने का एक दिखावटी और दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।"

    रिजवान को मीडिया से बात करने से रोका
    पीसीबी ने रिजवान को दो बार मीडिया से बात करने से रोक दिया है। एक सूत्र के अनुसार, रिजवान का कहना है कि वह किसी व्यक्ति, पीसीबी, एफआईए, एनसीसीआईए या पाकिस्तान के खिलाफ कोई शिकायत नहीं कर रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि उनके मामले में भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं है। पीसीबी के हालिया बयान में कहा, 'पीसीबी ऐसे मामलों को अपनी मानक प्रक्रियाओं के अनुसार संभालता है। यह प्रक्रिया पीसीबी के नियमों के तहत संचालित की जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी संबंधित व्यक्तियों को उचित ध्यान दिया जाए। इस स्तर पर, कुछ प्लेटफार्मों पर प्रसारित हो रही अटकलबाजी वाली रिपोर्टों और अपुष्ट दावों, विशेष रूप से शत्रुतापूर्ण बाहरी स्रोतों से आने वाले दावों को विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।'

    कोर्ट ने क्या कहा?
    फोन जब्त होने के बाद, रिजवान और उनके साथी खिलाड़ी इमाम-उल-हक को अगली उपलब्ध उड़ान से पाकिस्तान लौटने के लिए कहा गया। पाकिस्तान पहुंचने पर उन्हें एनसीसीआई में तलब किया गया। उनसे उनकी संपत्ति, बैंक खातों और अन्य वित्तीय मामलों से संबंधित जानकारी देने को कहा गया, लेकिन उनका मोबाइल लौटाने की कोई बात नहीं हुई है, जिसकी अब फोरेंसिक जांच चल रही है। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि इस स्तर पर न्यायालय सावधानी बरतते हुए सक्षम एजेंसी को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति देना उचित समझता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि समन नोटिस किसी गलत कार्य का आरोप नहीं है। बल्कि यह जानकारी जुटाने की एक प्रक्रियात्मक प्रक्रिया है। रिजवान की याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने एनसीसीआईए को चेतावनी दी कि वह रिजवान को किसी भी प्रकार की परेशानी या अनावश्यक असुविधा न पहुंचाए और एजेंसी को निर्देश दिया कि वह जांच पूरी तरह से कानून के अनुसार करे।

    क्या खत्म होगा करियर?
    रिजवान ने 47 टेस्ट, 103 वनडे और 106 टी20 मैचों सहित 256 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया है। वह खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और आरोपों से छुटकारा चाहते हैं। इमाम उल हक की स्थिति भी ऐसी ही है। रिजवान को प्रेसिडेंट ट्रॉफी ग्रेड 1 फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति नहीं दी गई है, जिसमें ब्रिटेन दौरे से लौटे अधिकांश खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। उन्हें सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड का उप-कप्तान बनाया गया था। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें अपनी आजीविका कमाने से नहीं रोका जा सकता, लेकिन फिलहाल पाकिस्तान में बहुत कम लोग उनका समर्थन करते नजर आ रहे हैं। 34 साल के रिजवान के लिए यहां से वापसी करना मुश्किल होगा। क्योंकि, आईसीसी में अपील कर उन्होंने क्रिकेट बोर्ड से रिश्ते खराब कर लिए हैं। हालांकि, 30 साल के इमाम के पास वापसी करने का मौका रहेगा। उन्होंने पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

  • धोनी जैसी शांत दिखीं अनाहत, 0-2 से पिछड़कर जापानी खिलाड़ी को 3-2 से हराया

    धोनी जैसी शांत दिखीं अनाहत, 0-2 से पिछड़कर जापानी खिलाड़ी को 3-2 से हराया

    नागोया
     एशियन गेम्स 2026 में भारत की अनाहत सिंह ने स्कॉश के फाइनल में जगह बना ली है। इसके साथ ही 18 साल की इस खिलाड़ी ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है। हालांकि, उनकी फॉर्म को देखते हुए उनसे गोल्ड मेडल की उम्मीद की जा रही है। सेमीफाइनल मैच में हार की कगार पर पहुंचने के बाद भी वह पूरी तरह शांत थीं और दबाव का उन पर कोई असर नहीं दिखा। इसके बाद उनकी तुलना पूर्व भारतीय क्रिकेटर धोनी से हो रही है, जो हमेशा दबाव भरे हालातों से टीम इंडिया को मैच जिताते थे।

    अनाहत भी सेमीफाइनल मैच में शुरुआती 2 गेम हार गई थीं। तीसरा गेम हारते ही वह बाहर हो जातीं और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ता। हालांकि, भारत की इस युवा खिलाड़ी को हार मंजूर नहीं थी। उन्होंने तीसरा गेम करीबी अंतर से जीता। इसके बाद अगले दो गेम आसानी से जीतकर फाइनल में जगह बना ली।

    जापानी खिलाड़ी का होम ग्राउंड सपोर्ट नहीं आया काम
    जापानी खिलाड़ी ने इस मैच में शुरुआती दो सेट अपने नाम कर जीत लगभग तय कर ली थी। घरेलू मैदान में उनके पास फैंस का भी पूरा समर्थन था। ऐसे में उनके लिए तीन में से एक गेम जीतना आसान था। वहीं, अनाहत के ऊपर बेशुमार दबाव था। हालांकि, वह दबाव में ही निखरती चली गईं और जीत हासिल की।

    मैच में क्या हुआ?
    जापान की वतानबे सतोमी ने बेहतरीन शुरुआत करते हुए पहला गेम 11-9 के अंतर से जीता। दूसरे गेम में भी उन्होंने 13-11 के अंतर से जीत हासिल की। तीसरे गेम में अनाहत ने बाजी पलट दी। उन्होंने 12-10 के अंतर से जीत दर्ज की। चौथे गेम में उन्होंने जापानी खिलाड़ी को चारो खाने चित करते हुए 11-6 के अंतर से जीत दर्ज की और पांचवें गेम में जीत का अंतर 11-3 हो गया। अंत में अनाहत ने 3-2 के अंतर से मैच अपने नाम किया।

  • ईरान को हराकर भारत बना चैंपियन, महिला कबड्डी में गोल्ड मेडल

    ईरान को हराकर भारत बना चैंपियन, महिला कबड्डी में गोल्ड मेडल

    टोक्यो 

     भारतीय महिला कबड्डी टीम ने कबड्डी फाइनल में शानदार खेल दिखाया और ईरान को हराकर एशियाई खेल 2026 में भारत के लिए तीसरा गोल्ड मेडल जीता। बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर यह कड़ा मुकबला अपने नाम किया। महिला कबड्डी में लगातार गोल्ड मेडल जीतकर भारत ने इतिहास रच दिया।

    मुकाबले के दौरान कई बार ऐसा लगा कि ईरान जीत जाएगा और भारत को हरा देगा। हालांकि, टीम ने दबाव में भी शानदार खेल दिखाया और एशियाई खेलों में देश के लिए तीसरा गोल्ड मेडल जीता। दिलचस्प बात यह है कि मुकाबले के आखिरी पलों में ईरान ने कई गलतियां कीं। एक समय तो उनकी टीम के दो रेडर्स ने 'डबल एंट्री' भी कर दी। छोटी-मोटी गलतियों के बावजूद, भारतीय टीम की मानसिक मजबूती ने उन्हें मैच जीतने और आखिर में पहला स्थान हासिल करने में मदद की।

    भारत ने महिला कबड्डी में चौथी बार जीता मेडल
    2010 में एशियाई खेलों में महिला कबड्डी स्पर्धा की शुरुआत के बाद से भारत ने अब तक खेले गए पांचों फाइनल में जगह बनाई है और सभी में मेडल जीतने में सफल रहा है। (टीम ने चार बार स्वर्ण पदक और एक बार रजत पदक जीता है।) भारत महिला कबड्डी टीम ने 2010 में गुआंगझोऊ में थाइलैंड को 28-14 से हराकर खिताब जीता था। 2014 में इंचियोन (दक्षिण कोरिया) में टीम ने ईरान को 31-21 से हराकर गोल्ड मेडल जीता था। जकार्ता 2018 में ईरान ने बाजी मारी थी और भारत को 27-24 से हार मिली थी। भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। 2022 में तय हांगझोऊ एशियन गेम्स का आयोजन 2023 में हुआ था। जिसमें भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे को 26-25 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। एशियन गेम्स 2026 में भारत ने ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल जीता।

    भारत का रहा दबदबा
    शुक्रवार को टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गये मुकाबले में भारत ने नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। 2010 में एशियाई खेलों में महिला कबड्डी स्पर्धा की शुरुआत के बाद से भारत सभी पांचों बार फाइनल में पहुंचा है। जकार्ता 2018 में स्वर्ण पदक मैच को छोड़कर, जिसमें ईरान जीता था, भारत ने बाकी सभी फाइनल जीते हैं।

    मौजूदा चैंपियन भारत ने इस तरह से प्रतियोगिता में अपना अजय अभियान जारी रखा है। भारत ने पहले हाफ में 31-17 की बड़ी बढ़त बना ली, जिसमें चार ऑल-आउट और चार बोनस अंक शामिल थे। नेपाल भारत को पर्याप्त चुनौती नहीं दे सका और दूसरे हाफ में केवल सात अंक ही जुटा सका। इससे पहले महिला टीम ने ग्रुप चरण में ईरान, बांग्लादेश और जापान को हराया था। महिला कबड्डी को 2010 में पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था और तब से भारत ने इसमें अपना दबदबा बनाए रखा है।

    भारतीय टीम ने पहले हाफ में बना ली थी 22-16 की बढ़त
    भारतीय महिला कबड्डी टीम एशियन गेम्स 2026 का आगाज होने से पहले ही गोल्ड जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी, जिसमें उनका प्रदर्शन भी शानदार देखने को मिला जो गोल्ड मेडल मुकाबले तक जारी रहा। ग्रुप स्टेज में जहां भारतीय महिला कबड्डी टीम का एकतरफा प्रदर्शन देखने को मिला तो वहीं सेमीफाइनल मैच को भी उन्होंने एकतरफा अंदाज में अपने नाम किया था। गोल्ड मेडल मैच में भारतीय टीम को ईरान से कड़ी टक्कर भी मिली जिसमें पहले हाफ में एक समय स्कोर 7-7 की बराबरी पर था, जिसके बाद भारतीय टीम अपने खेल को और अधिक आक्रामक करने के साथ पहला हाफ खत्म होने पर ईरान को एकबार ऑल आउट करने के साथ 22-16 के अंतर से बढ़त बना ली थी।

    दूसरे हाफ में ईरान ने की वापसी लेकिन भारतीय टीम ने बनाए रखी बढ़त
    गोल्ड मेडल मैच का दूसरा हाफ काफी रोमांचक रहा जिसमें ईरान की टीम ने जबरदस्त तरीके से वापसी करने के साथ भारतीय टीम को ऑल आउट भी कर दिया था, जिससे बढ़त काफी कम हो गई। इसके बाद भारतीय टीम ने वापसी करने के साथ ईरान को ऑल आउट किया और मुकाबला खत्म होने के साथ अपनी बढ़त को बनाए रखा जिसमें मैच के अंत में स्कोर लाइन 37-34 रहा और टीम इंडिया गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रही।

    पुरुषों के वर्ग में भी भारत मौजूदा चैंपियन है। फाइनल में उसका सामना ईरान से होगा। पुरुषों की कबड्डी 1990 से एशियाई खेलों का हिस्सा रही है और भारत ने अब तक आठ स्वर्ण पदक जीते हैं।

    महिला कबड्डी टीम

    मुख्य कोच: भारत तेजस्विनी बाई

        पुष्पा राणा (कप्तान)
        भावना ठाकुर
        ज्योति ठाकुर
        मनीषा कुमारी
        निकिता कुमारी
        पिंकी रॉय
        पूजा हथवाला
        राज रानी
        रितु नेगी
        रितु श्योराण
        संजू देवी
        सोनाली शिंगटे

  • जोशना चिनप्पा का छठा एशियन गेम्स मेडल, मिक्स्ड डबल्स में कांस्य

    जोशना चिनप्पा का छठा एशियन गेम्स मेडल, मिक्स्ड डबल्स में कांस्य

    नई दिल्ली
    जापान के नागोया किंजो फुटो एरिना में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 के स्क्वैश इवेंट में भारत ने मेडल अपने नाम किया है। भारत की अनुभवी खिलाड़ी जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार की जोड़ी को मिक्स्ड डबल्स के बेहद रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में हांगकांग की तांग मिंग हांग और ली का यी की जोड़ी से हार झेलनी पड़ी। इस हार के बाद भारतीय जोड़ी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि उन्होंन यहां तक का जो सफर तय किया वह काफी गर्व का विषय है।

    10-11 पर थमा सांस रोक देने वाला मुकाबला
    तीन गेम तक चले इस हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में हांगकांग की जोड़ी ने 2-1 (11-10, 2-11, 11-10) से जीत दर्ज की। पहले गेम को हांगकांग की जोड़ी ने बेहद करीबी मुकाबले में 11-10 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में जोशना और सेंथिलकुमार ने धमाकेदार वापसी करते हुए विरोधी जोड़ी को 11-2 से करारी शिकस्त दी और मैच 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। तीसरे और आखिरी गेम में दोनों जोड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। 10-10 की बराबरी के बाद अंतिम लम्हों में जोशना से हुई एक छोटी सी चूक का फायदा उठाकर हांगकांग ने 11-10 से बाजी मार ली और फाइनल का टिकट कटा लिया।

    जोशना चिनप्पा के नाम दर्ज हुआ छठा एशियन गेम्स मेडल
    40 वर्षीय स्टार स्क्वैश खिलाड़ी जोशना चिनप्पा का एशियन गेम्स के इतिहास में यह छठा पदक है। इससे पहले वे एशियाई खेलों में दो सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुकी थीं। इस ब्रॉन्ज मेडल के साथ उन्होंने एशियाई मंच पर अपनी महानता को एक बार फिर साबित कर दिया है। भारतीय जोड़ी ने शुक्रवार को फिलीपींस के डेविड पेलिनो और जेमिका अरिबाडो को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी और देश के लिए मेडल पक्का किया था।

  • West Indies Cricket: ₹ करोड़ों के घाटे के बीच खर्च में कटौती, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव

    West Indies Cricket: ₹ करोड़ों के घाटे के बीच खर्च में कटौती, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली
    वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम समय तीन ओडीआई और 5 टी20I मुकाबले के लिए भारत दौरे पर है. भारत दौरे के बीच ही टीम के खिलाड़ियों को बड़ा झटका लगा है. क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने खिलाड़ियों की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट रिटेनर फीस में 25 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है. यह बदलाव अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक लागू रहेगा.

    इसके साथ घरेलू खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट की अवधि भी घटा दी गई है. नई व्यवस्था में घरेलू पुरुष खिलाड़ियों को 12 महीने की जगह अक्टूबर 2026 से अप्रैल 2027 तक सात महीने का रिटेनर कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा. बोर्ड ने यह फैसला अपनी खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए किया है. क्रिकेट वेस्टइंडीज इस समय आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज को सितंबर 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में 28 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नेट घाटा हुआ. बोर्ड ने सितंबर 2026 तक के वित्तीय चक्र में भी करीब 26 मिलियन डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया है. खराब आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई में क्रिकेट वेस्टइंडीज को ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल( से 12.82 मिलियन डॉलर का आपातकालीन ऋण लेना पड़ा था. बोर्ड के CEO क्रिस डेहरिंग ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पुनर्गठन को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और वेस्टइंडीज प्लेयर्स एसोसिएशन के सहयोग से यह कदम उठाया गया है, साथ ही वित्तीय स्थिरता हासिल करने के लिए फिलहाल यह जरूरी है.

    ये दो टूर्नामेंट हुए स्थगित
    खर्च कम करने के लिए क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इस साल मेन्स सुपर 50 और विमेंस T20 Blaze को भी स्थगित कर दिया है. सुपर 50 का आयोजन नवंबर में होना था. बोर्ड के मुताबिक घरेलू क्रिकेट का मौजूदा मॉडल काफी महंगा है. खिलाड़ियों और स्टाफ की सैलरी, मैच फीस, हवाई यात्रा, होटल और आयोजन संबंधी खर्च का बड़ा हिस्सा क्रिकेट वेस्टइंडीज को ही उठाना पड़ता है. डेहरिंग ने कहा कि मौजूदा ढांचे में घरेलू प्रतियोगिताओं का पूरा खर्च उठाना लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है.

    सुपर 50 का ना होना वेस्टइंडीज की वनडे तैयारियों के लिहाज से भी अहम है. टीम 2023 वनडे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थी और अब 2027 वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए फरवरी-मार्च 2027 में क्वालिफायर खेलेगी. क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इसके लिए नवंबर में इंग्लैंड-ए के खिलाफ व्हाइट बॉल मुकाबले कराने की योजना बनाई है. इसके बाद वनडे टीम का कैम्प भी आयोजित किया जाएगा.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों के लिए एक अलग मॉडल तैयार किया है. पुरुष और महिला टीमों के लिए क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन प्रतियोगिताओं का खर्च क्रिकेट वेस्टइंडीज नहीं बल्कि संबंधित देशों के क्रिकेट बोर्ड और ओलंपिक संस्थाएं उठाएंगी. वेस्टइंडीज क्रिकेट की संरचना बाकी देशों से अलग है.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज के तहत आने वाले अलग-अलग कैरेबियाई देश भविष्य में पैन अमेरिकन गेम्स और ओलंपिक जैसे आयोजनों में अपनी अलग टीमों के साथ उतर सकते हैं. बोर्ड के मुताबिक ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए पात्र 10 देशों को आमंत्रण देकर वैकल्पिक टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे. इनका खर्च संबंधित राष्ट्रीय क्रिकेट संघों, ओलंपिक समितियों, सरकारों और निजी क्षेत्र से जुटाया जाएगा.

  • मां को नहीं बताया जापान जा रही हूं, सीमा ने Asian Games में रचा इतिहास; 28 सितंबर को 5000m में उतरेंगी

    मां को नहीं बताया जापान जा रही हूं, सीमा ने Asian Games में रचा इतिहास; 28 सितंबर को 5000m में उतरेंगी

    नई दिल्ली
    हिमाचल प्रदेश के चंबा के छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंची सीमा की कहानी जितनी संघर्ष भरी है, उतनी ही भावुक भी. 10,000 मीटर में कांस्य जीतकर इतिहास रचने वाली 25 साल की इस धाविका ने नागोया जाने की बात अपनी 78 साल की मां तक को नहीं बताई थी. वजह थी मां की चिंता.

    सीमा जानती थीं कि अगर मां को पता चल गया कि बेटी जापान में एशियन गेम्स खेलने जा रही है, तो वह पूरी रात सो नहीं पाएंगी. इसलिए सीमा ने एक छोटा सा 'राज' रखा और मां को यही समझने दिया कि वह हमेशा की तरह बेंगलुरु के ट्रेनिंग कैंप में हैं.

    'मां को बताया तो एक दिन सो नहीं पाएंगी'
    सीमा ने पदक जीतने के बाद अपनी मां के बारे में बताया, 'मेरे पिता नहीं हैं. मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, उनकी उम्र करीब 78 साल है. मेरा जन्म तब हुआ था, जब वह 45 साल की थीं. जब भी मैं बाहर जाती हूं, वह बहुत तनाव में आ जाती हैं. इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियन गेम्स के लिए जापान जा रही हूं.'

    उन्होंने बताया कि मां को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है. ऐसे में ट्रेनिंग कैंप या प्रतियोगिता के लिए बाहर जाते समय सीमा उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं देतीं. परिवार में सिर्फ बड़ी बहन को सब पता रहता है.

    सीमा नागोया रवाना होने से पहले अपनी बड़ी बहन को पूरी जानकारी देकर गई थीं. अब ऐतिहासिक कांस्य जीतने के बाद उम्मीद है कि यह खबर मां तक भी पहुंच गई होगी.

    सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, 'हो सकता है मेरी बहन ने उन्हें बता दिया हो. शायद वे टीवी पर मुझे देख रही हों. वरना मां यही सोच रही होंगी कि मैं अभी बेंगलुरु में हूं.'

    12 साल की उम्र में पिता को खोया, नंगे पैर दौड़ीं
    सीमा का सफर किसी आसान रास्ते की कहानी नहीं है. चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली सीमा ने महज 12 साल की उम्र में पिता को खो दिया था. बचपन में वह नंगे पैर दौड़ती थीं और मवेशी चराती थीं. गांव में जब उन्होंने एथलेटिक्स को करियर बनाने की कोशिश की तो लोगों ने भी सवाल उठाए, लेकिन मां ने बेटी का साथ नहीं छोड़ा.

    आज उसी बेटी ने एशियन गेम्स में भारत के लिए 10,000 मीटर का कांस्य जीतकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा दिया.

    सीमा ने  कांस्य पदक (32:50.05) जीता. वह एशियन गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय हैं. उनसे पहले 2010 के एशियन गेम्स में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक जीता था.

    सीमा के लिए यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा है.

    उन्होंने कहा, 'यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और अपना सपना पूरा किया.'

    सोना जीतने निकली थीं, कांसे से नहीं मानीं
    10,000 मीटर की रेस को सीमा ने बेहद रणनीतिक बताया. उनके मुताबिक खिलाड़ियों की नजर समय पर नहीं, बल्कि पदक पर थी.

    उन्होंने कहा, 'रेस काफी रणनीतिक थी. हर कोई पदक के लिए दौड़ रहा था. मैंने भी सोचा कि मुझे पदक के लिए लड़ना है, क्योंकि यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. हर खिलाड़ी अपने देश के लिए गोल्ड जीतना चाहता है.'

    सीमा भी सोना जीतने के इरादे से उतरी थीं, लेकिन कांस्य से उन्हें संतोष करना पड़ा. हालांकि उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है.

    28 सितंबर को फिर ट्रैक पर उतरेंगी सीमा
    सीमा अब 28 सितंबर को महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में उतरेंगी. 10,000 मीटर का कांस्य जीतने के बाद उनका लक्ष्य साफ है- पदक का रंग बदलना.

    उन्होंने कहा, 'मैंने गोल्ड जीतने के लिए लड़ाई की, लेकिन कांस्य जीता. मैं खुश हूं. अब मेरा अगला इवेंट 28 सितंबर को 5000 मीटर है. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगी और पदक का रंग बदलना चाहूंगी.'

    पिछले साल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत जीत चुकीं सीमा ने अपनी तैयारी का श्रेय कोच स्कॉट साइमन को भी दिया. उनके मुताबिक ओलंपिक चैम्पियनों के साथ ट्रेनिंग ने सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी बढ़ाई है.

    और शायद यही सीमा की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है- जिस बेटी को मां की चिंता से बचाने के लिए अपना ठिकाना छिपाना पड़ा, वही बेटी अब देश के लिए मेडल जीतकर मां तक अपनी खबर पहुंचा रही है.

  • Asian Games 2026: भारत ने 4 मैच में दागे 59 गोल, जापान को हराकर सेमीफाइनल पक्का

    Asian Games 2026: भारत ने 4 मैच में दागे 59 गोल, जापान को हराकर सेमीफाइनल पक्का

    नागोया
     भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान को 3-1 से हराकर एशियन गेम्स 2026 में लगातार चौथी जीत दर्ज की है। इसके साथ ही भारतीय टीम पूल बी में टॉप पर बनी हुई है और सेमीफाइनल में अपनी जगह भी पक्की कर ली है। भारत ने इससे पहले अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को बड़े अंतर से हराया था और गोल की झड़ी लगा दी थी। भारत के लिए इस मैच में लालरेम्सियामी, इशिका और नवनीत ने गोल किए। वहीं, जापान के लिए शिहो कोबायाकावा ने एकमात्र गोल किया। सेमीफाइनल से पहले भारत का मुकाबला सिंगापुर से होगा। टीम इंडिया इस मैच को भी आसानी से जीत सकती है।

    भारत ने इस मैच में शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी। पहले हॉफ में 2-0 की बढ़त लेने के बाद टीम इंडिया ने मैच में अपनी बढ़त मजबूत कर ली थी। हालांकि, बाद में जापान ने एक गोल दागकर वापसी करने की कोशिश भी की, लेकिन भारत ने भी दूसरे हॉफ में एक गोल दागकर 2 गोल की बढ़त के साथ मैच अपने नाम किया। भारतीय टीम की लय को देखते हुए इस बार गोल्ड की उम्मीद की जा रही है।

    4 मैच में 59 गोल दागे
    भारतीय महिला टीम इस प्रतियोगिता में लाजवाब खेल दिखा रही है। 4 मैच में भारतीय टीम 59 गोल कर चुकी है। जापान को छोड़कर भारत ने हर टीम के खिलाफ कम से कम 17 गोल किए थे। भारत ने अपने पहले मैच में उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19-0 से जीत दर्ज की थी। इसके बाद भारतीय टीम ने दूसरे मैच में इंडोनेशिया को 17-1 से हराया था। तीसरे मैच में भारत ने थाईलैंड के खिलाफ 20-1 के अंतर से जीत दर्ज की।

    गोल्ड मेडल का दावेदार है भारत
    भारतीय टीम इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने की प्रबल दावेदार है। भारत को 1982 से इस इवेंट में गोल्ड का इंतजार है। भारत की महिला हॉकी टीम ने आखिरी बार 1982 में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं, हांगझोऊ में हुए पिछले एशियन गेम्स में टीम इंडिया को ब्रांज मेडल से संतोष करना पड़ा था।

  • Asian Games 2026: 5 भारतीय शूटरों का कमाल, भारत पदक तालिका में 12वें स्थान पर

    Asian Games 2026: 5 भारतीय शूटरों का कमाल, भारत पदक तालिका में 12वें स्थान पर

    नागोया
     एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शुक्रवार को 2 मिनट के अंदर 2 पदक जीते। इनमें एक गोल्ड और एक सिल्वर मेडल शामिल है। पहले भारत की पुरुष टीम ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके तुरंत बाद मिश्रित टीम ने गोल्ड जीता। इन दो पदकों के दम पर भारत ने पदक तालिका में लंबी छलांग लगाई और 12वें स्थान पर पहुंच गया। भारत को एशियन गेम्स 2026 में सबसे ज्यादा 10 पदक शूटिंग में ही मिले हैं। इनमें एक स्वर्ण, 5 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं।

    5 शूटरों ने किया कमाल
    पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, रुद्राक्ष पाटिल और नीरज कुमार की भारतीय टीम ने सटीक निशानेबाजी का मुआयना पेश करते हुए भारत के खाते में सिल्वर मेडल जोड़ दिया। क्वालिफिकेशन और टीम इवेंट में निरंतरता दिखाते हुए भारतीय शूटर्स ने दूसरा स्थान हासिल कर पोडियम पर तिरंगा लहराया। इसके तुरंत बाद मिक्स इवेंट में कमलजीत और सुरुचि की जोड़ी ने गोल्ड मेडल जीता।

    पांचों शूटर के बारे में जानिए…
    हरियाणा के रेवाड़ी के सुलखा के रहने वाले कमलजीत एक इंडियन पिस्टल शूटर हैं, जो 10 मीटर एयर पिस्टल और 50 मीटर पिस्टल में एक्सपर्ट हैं। उन्होंने 2019 में शूटिंग शुरू की, जब एक चोट की वजह से उन्हें अपना ट्रैक-एंड-फील्ड एथलेटिक्स करियर छोड़ना पड़ा। एक मिडिल-क्लास परिवार से आने वाले कमलजीत को अपने शूटिंग करियर के शुरुआती दौर में पैसे की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कोचिंग, कोर्स की फीस और कॉम्पिटिशन के लिए अपने खर्चे खुद मैनेज किए और कई बार उन्होंने यह खेल छोड़ने के बारे में भी सोचा। इन दिक्कतों के बावजूद, उनके माता-पिता ने लगातार उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए जो कुछ भी जरूरी था, वह दिया। अगले दो से तीन सालों में उनकी लगन ने उन्हें पैसे और खेल की दिक्कतों से उबरने और खुद को एक कॉम्पिटिटिव शूटर के तौर पर स्थापित करने में मदद की। कमलजीत ने जूनियर इंटरनेशनल सर्किट में अपनी मजबूत पहचान बनाई, कोरिया के चांगवोन में 2023 ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में 50 मीटर पिस्टल जूनियर मेन इवेंट में गोल्ड जीता।

    सुरुचि इंदर सिंह हरियाणा के झज्जर की रहने वाली एक भारतीय 10 मीटर एयर पिस्टल शूटर हैं, जिनका जन्म 28 अप्रैल 2006 को हुआ था। अपने परिवार के मजबूत स्पोर्टिंग बैकग्राउंड की वजह से, शुरू में उन्हें रेसलिंग में हाथ आजमाने के लिए बढ़ावा मिला, जिसके बाद उन्होंने 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की। उन्होंने भिवानी में गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग एकेडमी में कोच सुरेश सिंह के अंडर ट्रेनिंग शुरू की। सुरुचि ने 2025 में सीनियर इंटरनेशनल सर्किट पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की, ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख में लगातार तीन इंडिविजुअल ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल जीते। उन्होंने लीमा वर्ल्ड कप में मिक्स्ड टीम इवेंट में भी गोल्ड जीता। उनके शानदार 2025 सीज़न का अंत दोहा में ISSF वर्ल्ड कप फाइनल में गोल्ड मेडल जीतने के साथ हुआ, जहाँ उन्होंने 10m एयर पिस्टल फाइनल में 245.1 का जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 2026 में, उन्होंने म्यूनिख में ISSF वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर अपना शानदार फॉर्म जारी रखा, जिससे वह भारत की टॉप इंटरनेशनल 10 मीटर एयर पिस्टल शूटर्स में से एक बन गईं। उन्होंने 2026 एशियन चैंपियनशिप में 10 एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में सिल्वर भी जीता।

    21 जनवरी 2000 को जन्मे नीरज कुमार 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन इवेंट में स्पेशलिस्ट हैं। वह इंटरनेशनल लेवल पर लगातार अच्छे परफॉर्मेंस से भारत के लीडिंग राइफल शूटर्स में से एक बन गए हैं। नीरज ने कई ISSF वर्ल्ड कप, ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन चैंपियनशिप में भारत को रिप्रेजेंट किया है, जिससे उनकी वर्ल्ड रैंकिंग लगातार बेहतर हुई है और उन्होंने इस इवेंट में दुनिया के टॉप कॉम्पिटिटर्स में अपनी जगह बनाई है। वह अभी पुरुषों के 50मीटर राइफल 3 पोजीशन इवेंट में दुनिया के टॉप 15 शूटर्स में शामिल हैं। नीरज ने काहिरा में 2022 ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप में टीम ब्रॉन्ज मेडल के साथ अपना पहला सीनियर ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीता। उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीतकर अपनी तरक्की जारी रखी, जिसमें नई दिल्ली में 2026 एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में इंडिविजुअल सिल्वर मेडल भी शामिल है, जहां उन्होंने भारत के टीम गोल्ड में भी योगदान दिया।

    रुद्रान्क्ष बालासाहेब पाटिल का जन्म 16 दिसंबर 2003 को महाराष्ट्र ठाणे में हुआ था। वह 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में स्पेशलिस्ट हैं और भारत के सबसे अच्छे राइफल शूटरों में से एक हैं। वह काहिरा में 2022 ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीतने के बाद इंटरनेशनल लेवल पर मशहूर हुए और इस इवेंट में इंडिविजुअल वर्ल्ड टाइटल जीतने वाले अभिनव बिंद्रा के बाद दूसरे भारतीय बने। इस जीत ने भारत को पेरिस 2024 गेम्स के लिए ओलंपिक कोटा भी दिलाया। रुद्रान्क्ष ने ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप, ISSF वर्ल्ड कप, एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और पेरिस 2024 ओलंपिक गेम्स में भारत को रिप्रेजेंट किया है। कई बार ISSF मेडलिस्ट रहे रुद्रांक ने दो वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड मेडल, एक जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल, एक ISSF प्रेसिडेंट्स कप टाइटल, तीन ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते हैं। 2022 में उनके शानदार परफॉर्मेंस के बाद उन्हें पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में वर्ल्ड नंबर 1 रैंक मिली और वे दुनिया के टॉप राइफल शूटर्स में से एक बने हुए हैं। प्रेशर में अपनी कंसिस्टेंसी और शांत रहने के लिए जाने जाने वाले रुद्रांक भारतीय शूटिंग टीम के एक अहम सदस्य बने हुए हैं और बड़े इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में देश के सबसे मजबूत मेडल प्रॉस्पेक्ट्स में से एक हैं।

    ऐश्वर्य का जन्म 3 फरवरी 2001 को हुआ था। वह भारत के जाने-माने राइफल शूटर्स में से एक हैं, जो 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन इवेंट में स्पेशलिस्ट हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के रतनपुर गांव के रहने वाले तोमर ने अपने चचेरे भाई और ओलंपियन नवदीप सिंह राठौर को देखकर शूटिंग शुरू की। उन्होंने 2015 में भोपाल की मध्य प्रदेश शूटिंग एकेडमी में फॉर्मल ट्रेनिंग शुरू की। तोमर 2019 में सुहल में ISSF जूनियर वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतने के बाद मशहूर हुए, जहां उन्होंने 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन इवेंट में जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। उसी साल, उन्होंने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में इंडिविजुअल और टीम दोनों इवेंट्स में ब्रॉन्ज मेडल जीते, जिससे भारत को ओलंपिक कोटा मिला। उन्होंने नई दिल्ली में 2021 ISSF वर्ल्ड कप में गोल्ड जीतकर और पेरू के लीमा में 2021 ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ एक और गोल्ड जीतकर अपनी शानदार तरक्की जारी रखी। ऐश्वर्य ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक गेम्स में पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन इवेंट में भारत को रिप्रेजेंट किया है। इतने सालों में, उन्होंने खुद को भारत के सबसे काबिल राइफल शूटर्स में से एक के तौर पर स्थापित किया है, ISSF वर्ल्ड कप, ISSF वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और दूसरे बड़े इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में कई मेडल जीते हैं, जिससे वह इंडियन शूटिंग टीम के एक अहम सदस्य बन गए हैं।

     

  • 700 ग्राम वजन से पलटा मैच, सुचिका ने विवादित फैसले पर उठाए सवाल

    700 ग्राम वजन से पलटा मैच, सुचिका ने विवादित फैसले पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली
    एशियन गेम्स 2026 में भारत को मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में पहला पदक दिलाने वाली सुचिका तारियाल ने अपना दर्द साझा किया है। सुचिका को सेमीफाइनल मुकाबले में विवादित फैसले के कारण हार का सामना करना पड़ा था। वह महिलाओं की ट्रेडिशनल 60 किलोग्राम कैटेगरी में विवादित फैसले के कारण बाहर हो गई थीं। इस फैसले का पूरी टीम और खुद सुचिका ने विरोध किया था, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ और उन्हें कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा।

    भारत वापस लौटने पर उनका जबरदस्त स्वागत हुआ और वह फैंस से मिले प्यार से काफी खुश नजर आईं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

    एक राउंड और खिला देते- सुचिका
    गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में सुचिका ने कहा, 'लोग यहां मेरे स्वागत के लिए आए हैं, जिसे देखकर बहुत खुशी हो रही है। भले ही मैं मेडल का रंग बदल नहीं सकी, लेकिन आप लोगों के दिलों में जगह बना ली है। मेरे लिए इतना ही काफी है। वह मुझे एक राउंड और खिला देते, तो बेहतर रहता। मैं बेशक हार जाती, लेकिन उसे स्वीकार कर लेती, लेकिन जो हुआ, उसे स्वीकार नहीं सकती। यही वजह रही कि मैंने उनके फैसले का विरोध किया। हालांकि, कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं, लेकिन मुझे ही पता है कि मैंने वहां तक पहुंचने के लिए कितनी कड़ी मेहनत की थी। मैं ऐसे नहीं हार सकती।'

    क्या था विवाद?
    सुचिका को सिंगापुर की हुई हून टेओ के खिलाफ हार मिली थी, जिसके बाद भारतीय टीम ने इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विरोध के बाद मुकाबला आर्बिट्रेशन में गया, जहां जजों ने मुकाबले की समीक्षा की और दोबारा स्कोरिंग की। आखिरकार नतीजे का फैसला 'कम वजन वाले खिलाड़ी' के नियम से हुआ। दुर्भाग्य से, सुचिका का वजन अपनी प्रतिद्वंदी से 700 ग्राम ज्यादा था, जिसके चलते उन्होंने मुकाबला गंवा दिया।

    बैट लक के कारण हारीं सुचिका
    सुचिका ने कहा, "मैच को ड्रॉ घोषित किया गया, जबकि हम दोनों बराबरी पर ही थे। इसके बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया, वहां मैं भी हो सकती थी, लेकिन पता नहीं, उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? मैं इसे चीटिंग नहीं कह सकती, लेकिन अगर आप मुकाबला ड्रॉ कर रहे हो, मुझे भी जिता सकते हो। मुझमें ऐसी क्या कमी थी जो उन्हें जिता दिया गया। हां, इसे 'बैड लक' कहा जा सकता है।"

    फेडरेशन पर लगाए आरोप
    सुचिका ने मैच के बारे में बात करते हुए कहा, मुझे इस खेल का ज्ञान है। मैं दोनों ही रांउड जीत रही थी। फिर भी लोग कह रहे हैं कि मेरी तरफ से विरोध दर्ज करना गलत था। मैं एक मिनट के राउंड में भी उन पर हावी रही। वो पीछे-पीछे भाग रही थीं। मुझे लगता है कि फेडरेशन सिंगापुर का है, तो क्या पता उनको ही जिताना था। हालांकि, मैं ब्रॉन्ज मेडल से खुश हूं, क्योंकि ये मेरी जान से भी बढ़कर है, मैंने इसके लिए बहुत मेहनत की है। मुझे बहुत खुशी है। भले ही मैं गोल्ड से चूक गई, लेकिन आप मेरे स्वागत के लिए यहां आए, इसकी बहुत खुशी है। मैं अब वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी करूंगी। आगे भी मेरी फाइट्स हैं। मैंने ब्रेव के लिए साइन किया है।'

  • शूटिंग में भारत का डबल धमाका, 2 मिनट में जीते गोल्ड और सिल्वर मेडल

    शूटिंग में भारत का डबल धमाका, 2 मिनट में जीते गोल्ड और सिल्वर मेडल

    नई दिल्ली
     जश्न मनाइए, खुशियों में डूब जाइए। एशियन गेम्स 2026 में दिन का आगाज इससे बेहतर नहीं हो सकता था। सिर्फ 2 मिनट के अंदर भारत को दो मेडल मिले, जिसमें एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल रहा। ये दोनों ही शूटिंग से आए। इसके साथ ही एशियन गेम्स की मेडल टैली में भारतीय दल ने जबरदस्त छलांग लगाई है। पहले वह एक गोल्ड के साथ 15वें नंबर पर था, जबकि अब 12वें नंबर पर पहुंच गया है।

    इन इवेंट में आए मेडल
    जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 से भारत के लिए बहुत बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। निशानेबाजी में भारत ने दो मेडल जीते है। कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने देश को निशानेबाजी में पहला गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया है। वहीं पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में भारतीय तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है। 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल मुकाबले में कमलजीत और सुरुचि सिंह की भारतीय जोड़ी ने दक्षिण कोरिया की मजबूत जोड़ी को एकतरफा अंदाज में पछाड़ते हुए पोडियम के शीर्ष पर तिरंगा फहराया। यह एशियन गेम्स में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है।

    5 शूटरों ने किया कमाल
    पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, रुद्राक्ष पाटिल और नीरज कुमार की भारतीय टीम ने सटीक निशानेबाजी का मुआयना पेश करते हुए भारत के खाते में सिल्वर मेडल जोड़ दिया। क्वालिफिकेशन और टीम इवेंट में निरंतरता दिखाते हुए भारतीय शूटर्स ने दूसरा स्थान हासिल कर पोडियम पर तिरंगा लहराया। वहीं उनके जीतने के तुरंत बाद 2 मिनट के अंदर भारत ने शूटिंग में एक और मेडल जीता, लेकिन इस बार मेडल का रंग गोल्ड था।

    कमलजीत और सुरुचि सिंह का फाइनल स्कोर:
        इंडिया – 484.6 (गोल्ड)
        साउथ कोरिया – 478.0 (सिल्वर)
        ईरान – 415.8 (ब्रॉन्ज)

    एशियाई रिकॉर्ड तोड़कर फाइनल में बनाई थी कमलजीत और सुरुचि सिंह ने जगह
    भारतीय निशानेबाजों का दबदबा सुबह क्वालिफिकेशन राउंड से ही देखने को मिल रहा था। कमलजीत और सुरुचि सिंह ने क्वालिफिकेशन में 587 अंकों का नया एशियाई रिकॉर्ड बनाते हुए पहले स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था। क्वालिफिकेशन में ही उन्होंने दूसरे स्थान पर मौजूद मंगोलिया की टीम पर 70 अंकों की विशाल बढ़त बनाकर अपने मजबूत इरादे जाहिर कर दिए थे।