Category: खेल

  • हरमनप्रीत-अभिषेक ने दिलाई जीत, जापान को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

    हरमनप्रीत-अभिषेक ने दिलाई जीत, जापान को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचा भारत

     नई दिल्ली
    भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में जापान को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। टीम इंडिया एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने की प्रबल दावेदार है। शनिवार को खेले गए मुकाबले में हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारत ने जापान को 2-0 से तो हराया, लेकिन प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा।

    अभिषेक और हरमनप्रीत सिंह के गोलों की बदौलत भारत ने जीत तो हासिल कर ली, लेकिन सच कहें तो उनका प्रदर्शन देखने लायक नहीं था। उन्होंने कई मौके गंवा दिए। कुछ पेनल्टी कॉर्नर के मौकों पर तो वे बुनियादी चीजें भी ठीक से नहीं कर पाए। यकीन करना मुश्किल है। खैर, अब यह तथ्य है कि इस जीत के साथ भारत एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में पहुंच गया है, हालांकि, उसे आगे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

    विश्व कप के बाद भारत की दमदार वापसी
    बता दें कि भारत के लिए इस साल की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही थी। एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम 8वें स्थान पर रही थी। इस अभियान के बाद टीम इंडिया ने सही समय पर अपनी लय वापस पा ली है। एशियन गेम्स में उन्होंने अब तक चार मैचों में चार जीत दर्ज की हैं और वर्तमान में 12 अंकों के साथ पूल ए तालिका में जापान से आगे शीर्ष पर हैं। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत इंडोनेशिया (13-1), श्रीलंका (16-1) और दक्षिण कोरिया (8-2) पर शानदार जीत के साथ की। यह प्रदर्शन एशियन गेम्स में भारतीय टीम के दबदबे को दिखाता है।

    आज के मैच का ऐसा रहा हाल
    पूल ए में आज खेले गए मुकाबले की बात करें तो भारत के लिए पहले क्वार्टर में के आखिरी मिनटों में अभिषेक ने गोल करके एक शून्य से टीम इंडिया को बढ़त दिला दी। हालांकि, दूसरे क्वार्टर में किसी भी टीम ने कोई गोल नहीं किया। हाफ टाइम तक भारत 1-0 से आगे रहा। लेकिन इसके बाद तीसरे क्वार्टर में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने मैच के 40वें मिनट में गोल कर दिया। भारत 2-0 से आगे हो गया। हालांकि, इसके बाद चौथे क्वार्टर में कोई गोल नहीं हो सका। भारत के पास गोल करने के बहुत से मौके आए, लेकिन टीम इंडिया के खिलाड़ी चूक गए। भारत के लिए यह प्रदर्शन जीत में जरूर तब्दील हुआ लेकिन आगे आने वाले बड़े मुकाबलों में जिनमें फाइनल और सेमीफाइनल हैं, यह प्रदर्शन आईडियल बिल्कुल नहीं है।

    भारत बनाम जापान फुल टाइम स्कोर
    भारत -2

    जापान- 0

    भारत ने जापान को 2-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया।

  • सुनील कुमार की कप्तानी में भारत चैंपियन, फाइनल में ईरान को दी मात

    सुनील कुमार की कप्तानी में भारत चैंपियन, फाइनल में ईरान को दी मात

    नई दिल्ली
     भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीत लिया है। ईरान के खिलाफ हुए फाइनल में भारत को 40-34 से जीत मिली। उम्मीद के मुताबिक दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। पहले हाफ में ईरान के पास 18-17 की बढ़त थी। इसके बाद दूसरे हाफ ने टीम इंडिया ने दमदार वापसी की और गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

    सुनील कुमार टीम के कप्तान
    एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम की कप्तानी सुनील कुमार कर रहे हैं। 29 साल के सुनील हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले हैं। वह 2022 एशियन गेम्स में भी टीम का हिस्सा थे। वह मुख्य रूप से डिफेंडर के रूप में खेलते हैं। सुनील नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के प्रिंसिपल चीफ कमर्शियल मैनेजर के ऑफिस में जूनियर क्लर्क के तौर पर काम करते हैं।

    पीकेएल में सुनील का दमदार रिकॉर्ड
    प्रो कबड्डी लीग में सुनील यू मुंबा के लिए खेलते हैं और टीम के कप्तान भी हैं। सुनील प्रो कबड्डी लीग के इतिहास के तीसरे सबसे सफल डिफेंडर हैं। 179 मैचों में उनके 442 टैकल पॉइंट्स हैं। उन्होंने 35 सुपर टैकल किए हैं तो 27 मैचों में हाई 5 भी किया है। 2015 और 2016 में जूनियर नेशनल जीतने के बाद सुनील को पीकेएल सीजन 4 के लिए पटना पाइरेट्स ने चुना। इसके बाद में वे जयपुर पिंक पैंथर्स में चले गए। 2022 उनकी कप्तानी में जयपुर की फ्रेंचाइजी चैंपियन बनी।

    सुनील कुमार के कबड्डी का सफर उनके गांव से ही शुरू हुआ था। उनके चाचा के लड़के कबड्डी के खिलाड़ी थे। उन्हें देखकर ही सुनील ने इस खेल में कदम रखा था।

  • Asian Games: कबड्डी में भारत का स्वर्णिम सफर जारी, फाइनल में ईरान को हराकर रचा बड़ा इतिहास

    Asian Games: कबड्डी में भारत का स्वर्णिम सफर जारी, फाइनल में ईरान को हराकर रचा बड़ा इतिहास

    नागोया

    भारत की पुरुष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया. भारतीय टीम ने फाइनल में ईरान को हराकर 9वीं बार एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया. कांटे के मुकाबले में भारत ने ईरान को फाइनल में 40-34 से हराया. इससे पहले भारत की महिला टीम ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया. भारत के लिए एशियन गेम्स में आज दिन शानदार रहा. मेंस और विमेंस कबड्डी में भारत ने दो गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास कायम किया. भारत के इस एशियाई खेलों में 4 गोल्ड सहित कुल 28 पदक हो गए हैं और मेडल टैली में भारत 12वें से 10वें नंबर पर पहुंच गया है। 

    भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे हाफ में जोरदार वापसी की. ईरान के खिलाफ पहले हाफ में पिछड़ने के बाद भारत ने आक्रामक खेल दिखाया. और ईरान की टीम को ऑलआउट कर बढ़त बनाई. मैच खत्म होने में जब 10 मिनट बचा था तब भारत ने ईरान पर पांच अंकों की बढ़त बना रखी थी.  ईरानी खेमा भारत की वापसी से दबाव में आ गया. भारत ने इसके बाद बढ़त को मजबूत किया. शानदार लय को बरकरार रखते हुए भारत  लगातार ईरान पर दबाव बढ़ाते रखा। 

    खिताबी मुकाबले के पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच जबरदस्त भिड़ंत देखने को मिली. मैच की शुरुआत में ईरान ने आक्रामक खेल दिखाते हुए दबाव बनाया, लेकिन भारतीय टीम ने शानदार वापसी की. भारत ने मुश्किल समय में बेहतरीन सुपर टैकल के दम पर अंक जुटाए और ईरान पर बढ़त बनाई. हालांकि, ईरानी खिलाड़ियों ने पलटवार करते हुए भारत को ऑलआउट कर दिया और 14-13 की बढ़त हासिल कर ली. इसके बाद भारत ने वापसी के प्रयास जारी रखे, लेकिन पहला हाफ खत्म होने तक ईरान 18-17 से मामूली बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। 

    मैच के आखिरी मिनटों में ईरान ने स्कोर को बराबर करने के प्रयास में कई गलतियां की, जिसका भरपूर फायदा भारतीय टीम को मिला। भारत ने अंत में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताबी मुकाबले में ईरान को 40-34 से हराते हुए लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
    पिछले एशियन गेम्स में भी भारतीय पुरुष टीम ईरान को ही हराकर चैंपियन बनी थी। इससे पहले, महिला कबड्डी टीम ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। फाइनल में देश की बेटियों ने ईरान को कड़े मुकाबले में 37-34 से शिकस्त दी।

    भारतीय टीम ने की धमाकेदार वापसी और जीत लिया गोल्ड मेडल
    यहां से फिर भारतीय खिलाड़ियों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बचे समय में ईरान पर दबदबा बनाए रखा और आखिर में भारत ने ईरान को 40-34 के अंतर से हराकर एशियन गेम्स में अपना 9वां गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की, भारतीय खिलाड़ी जीत के साथ जश्न मनाने लगे. एक बार फिर भारतीय पुरूष कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल का इतिहास जीतकर ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया. दर्शक झूम रहे थे. भारत को अबतक एशियन गेम्स में यह चौथा गोल्ड मेडल मिला है। 

    एशियन गेम्स में भारत की कबड्डी टीम का दबदबा
    एशियाई गेम्स में भारत कबड्डी का पावरहाउस रहा है. 1990 में जब से कबड्डी को मेडल वाला खेल बनाया गया है, तब से भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने इस खेल में अपना दबदबा बनाए रखा है और कुल मिलाकर 12 गोल्ड मेडल, 1 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं. पुरुष कबड्डी टीम ने अबतक 9 में से 8 गोल्ड मेडल जीतने में सफलता हासिल की है. ऐसा कर उन्होंने खुद को एशिया की सबसे मजबूत कबड्डी टीम के तौर पर स्थापित किया. हालांकि 2018 में टीम गोल्ड मेडल नहीं जीत पाई, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए हांगझोऊ एशियाई गेम्स में फिर से खिताब अपने नाम किया था। 

    भारत ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को हराकर फाइनल का टिकट कटाया था 
    भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 66-28 के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी थी. मैच की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने अपना दबदबा बनाना शुरू कर दिया था. शुरुआती पांच मिनट के भीतर ही भारत ने 7-1 की बढ़त बना ली थी. हालांकि, इसके बाद थाईलैंड के स्टार खिलाड़ी धीरादत चाईसित ने कुछ समय के लिए भारतीय टीम को चुनौती दी. धीरादत ने एक शानदार रेड में तीन अंक हासिल कर भारत को ऑल-आउट कर दिया और अंतर को 14-23 तक ला दिया. धीरादत की इस जुझारू कोशिश के बावजूद भारतीय टीम ने अपनी लय नहीं खोई. हाफ-टाइम तक भारत ने 37-18 से बढ़त बनाए रखी. मैच का दूसरा हाफ पूरी तरह से भारत के नाम रहा. मुकाबले में 11 मिनट शेष रहते ही भारत ने 50 अंकों का आंकड़ा पार कर लिया. थाईलैंड को वापसी का कोई मौका न देते हुए भारत ने मुकाबला 66-28 से अपने नाम कर लिया। 

  • 28 सितंबर को भारत-अफगानिस्तान भिड़ंत, एशियन गेम्स क्रिकेट में शुरू होगा नॉकआउट दौर

    28 सितंबर को भारत-अफगानिस्तान भिड़ंत, एशियन गेम्स क्रिकेट में शुरू होगा नॉकआउट दौर

    आइची नागोया
    आइची नागोया एशियन गेम्स 2026 में मेन्स क्रिकेट टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल की तस्वीर साफ हो गई है. 26 सितंबर (शनिवार) को ग्रुप-ए का मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ने के बाद नेपाल और अफगानिस्तान ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जबकि मेजबान जापान का सफर समाप्त हो गया. वहीं ग्रुप बी से मलेशिया और हॉन्ग कॉन्ग ने अगले दौर में प्रवेश किया.

    ग्रुप-ए के आखिरी मुकाबले में नेपाल और जापान आमने-सामने थे. निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में आयोजित इस मैच में नेपाल ने टॉस हारकर पहले पहले बल्लेबाजी करते हुए 15 ओवर में 149/4 का मजबूत स्कोर खड़ा किया. संदीप जोरा और लोकेश बम ने अर्धशतक लगाकर टीम को अच्छी स्थिति में पहुंचाया, लेकिन इसके बाद बारिश शुरू हो गई. लगातार बारिश के कारण जापान की पारी शुरू नहीं हो सकी और मुकाबला बिना किसी नतीजे के समाप्त हुआ.

    इस नतीजे का सीधा फायदा नेपाल और अफगानिस्तान को मिला. नेपाल ने इससे पहले अफगानिस्तान को हराकर ग्रुप-ए में बड़ा उलटफेर किया था. वहीं जापान के लिए यह मुकाबला टूर्नामेंट में बने रहने का आखिरी मौका था, लेकिन बारिश ने उसकी उम्मीदें खत्म कर दीं.

    ग्रुप-बी में भी बारिश के कारण मलेशिया और ओमान के बीच मुकाबला एक भी गेंद फेंके बिना रद्द हो गया. इस नतीजे के बाद मलेशिया और हॉन्ग कॉन्ग ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जबकि ओमान का अभियान समाप्त हो गया.

    प्रारंभिक दौर के मुकाबले खत्म होने के साथ ही क्वार्टर फाइनल का पूरा शेड्यूल सामने आ गया है. भारत का सामना 28 सितंबर (सोमवार) को सुबह 10 बजे से अफगानिस्तान के खिलाफ होगा. इसी दिन भारतीय समयानुसार सुबह 5.30 बजे से पाकिस्तान और हॉन्ग कॉन्ग की टक्कर होगी. वहीं तीसरे क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका की भिड़ंत नेपाल से होगी, जबकि चौथे क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश के सामने मलेशिया की चुनौती होगी. ये दोनों मुकाबले 29 सितंबर (मंगलवार) को खेले जाएंगे.

    क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के शेड्यूल
    28 सितंबर- पाकिस्तान बनाम हॉन्ग कॉन्ग, सुबह 5.30 बजे
    28 सितंबर- भारत बनाम अफगानिस्तान, सुबह 10.00 बजे
    29 सितंबर- श्रीलंका बनाम नेपाल, सुबह 5.30 बजे
    29 सितंबर- बांग्लादेश बनाम मलेशिया, सुबह 10.00 बजे

    इस तरह ग्रुप मुकाबलों के बाद अब टूर्नामेंट में सीधे नॉकआउट मुकाबलों का दौर शुरू होगा, जहां एक हार टीम को गोल्ड मेडल की दौड़ से बाहर कर देगी. सेमीफाइनल मुकाबले 1 अक्टूबर को खेले जाएंगे. फिर 3 अक्टूबर को गोल्ड मेडल और ब्रॉन्ज मेडल मैच होंगे. सभी मुकाबले कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में ही खेले जाएंगे.

  • रिजवान पर फिक्सिंग जांच का शिकंजा, कोर्ट बोला- जांच एजेंसी को आगे बढ़ने दें

    रिजवान पर फिक्सिंग जांच का शिकंजा, कोर्ट बोला- जांच एजेंसी को आगे बढ़ने दें

    नई दिल्ली
    पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान फिक्सिंग के आरोपों में फंस गए हैं। उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जा रही है। कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। उनका फोन जब्त कर लिया गया है और इसका सटीक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। न तो कोई लिखित नोटिस दिया गया है। 30 अगस्त को लॉर्ड्स टेस्ट खत्म होने के बाद रिजवान को आधी रात लगभग 1 बजे लंदन के उनके होटल के कमरे में जगाया गया। पीसीबी के भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारी कर्नल अख्तर ने उन्हें नीचे आने के लिए कहा और साथ ही उन्हें अपना हैंडसेट लाने का विशेष निर्देश दिया।

    आधी रात को पाकिस्तान की जांच एजेंसी एफआईए का एक सदस्य भी वहां मौजूद था। जब रिजवान नीचे आए तो टीम के एक अधिकारी ने उन्हें एफआईए के अधिकारी से मिलवाया और सहयोग करने की सलाह दी। रिजवान से सट्टेबाजी और ऑनलाइन जुए से संबंधित कई सवाल पूछे गए और उनके लगातार विरोध के बावजूद उनका फोन जब्त कर लिया गया। उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन पर क्या आरोप हैं, किस घटना की जांच की जा रही है, उन पर क्या करने का संदेह है, या किस अधिकार के तहत उनका फोन जब्त किया जा रहा है।

    रिजवान ने कोर्ट को क्या बताया
    रिजवान ने अदालत में अपनी अपील में लिखा, 'इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच 27 अगस्त से 30 अगस्त तक हुए लॉर्ड्स टेस्ट मैच के तुरंत बाद रिजवान को रात 1 बजे उस होटल की लॉबी में बुलाया गया, जहां पूरी टीम ठहरी हुई थी। वहां, कथित तौर पर किसी सरकारी एजेंसी का एक अधिकारी मौजूद था। इस बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया गया था, लेकिन उनसे अधिकारी ने पूछताछ की और बिना कराण बताए उनका फोन जब्त कर लिया। रिजवान ने इस आश्वासन पर अपना फोन सौंपा था कि डिवाइस की पूरी तरह से जांच की जाएगी और अगले 3 घंटों के भीतर उसे वापस कर दिया जाएगा। आश्वासन के बावजूद, फोन आज तक वापस नहीं किया गया है। फोन अब एनसीसीआईए के कब्जे में है, जो उसके मामले की जांच कर रही है।

    अधिकारियों ने रिजवान को धमकाया
    लाहौर उच्च न्यायालय में दायर याचिका में रिजवान ने धमकी, ब्लैकमेल और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा, "कानूनी अधिकार के बिना फोन जब्त करना और उसे अनिश्चित काल तक अपने पास रखना, अपराध या उल्लंघन किए गए प्रावधान का उल्लेख किए बिना अस्पष्ट नोटिस जारी करना, अप्रासंगिक प्रश्नावली देना, शिकायत या सामग्री का खुलासा करने से इनकार करना यह दर्शाता है कि विवादित नोटिस और विवादित जांच वैधानिक शक्ति का वास्तविक प्रयोग नहीं है, बल्कि याचिकाकर्ता को परेशान करने, डराने और ब्लैकमेल करने का एक दिखावटी और दुर्भावनापूर्ण प्रयास है।"

    रिजवान को मीडिया से बात करने से रोका
    पीसीबी ने रिजवान को दो बार मीडिया से बात करने से रोक दिया है। एक सूत्र के अनुसार, रिजवान का कहना है कि वह किसी व्यक्ति, पीसीबी, एफआईए, एनसीसीआईए या पाकिस्तान के खिलाफ कोई शिकायत नहीं कर रहे हैं। उनका यह भी दावा है कि उनके मामले में भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं है। पीसीबी के हालिया बयान में कहा, 'पीसीबी ऐसे मामलों को अपनी मानक प्रक्रियाओं के अनुसार संभालता है। यह प्रक्रिया पीसीबी के नियमों के तहत संचालित की जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सभी संबंधित व्यक्तियों को उचित ध्यान दिया जाए। इस स्तर पर, कुछ प्लेटफार्मों पर प्रसारित हो रही अटकलबाजी वाली रिपोर्टों और अपुष्ट दावों, विशेष रूप से शत्रुतापूर्ण बाहरी स्रोतों से आने वाले दावों को विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।'

    कोर्ट ने क्या कहा?
    फोन जब्त होने के बाद, रिजवान और उनके साथी खिलाड़ी इमाम-उल-हक को अगली उपलब्ध उड़ान से पाकिस्तान लौटने के लिए कहा गया। पाकिस्तान पहुंचने पर उन्हें एनसीसीआई में तलब किया गया। उनसे उनकी संपत्ति, बैंक खातों और अन्य वित्तीय मामलों से संबंधित जानकारी देने को कहा गया, लेकिन उनका मोबाइल लौटाने की कोई बात नहीं हुई है, जिसकी अब फोरेंसिक जांच चल रही है। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि इस स्तर पर न्यायालय सावधानी बरतते हुए सक्षम एजेंसी को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति देना उचित समझता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि समन नोटिस किसी गलत कार्य का आरोप नहीं है। बल्कि यह जानकारी जुटाने की एक प्रक्रियात्मक प्रक्रिया है। रिजवान की याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने एनसीसीआईए को चेतावनी दी कि वह रिजवान को किसी भी प्रकार की परेशानी या अनावश्यक असुविधा न पहुंचाए और एजेंसी को निर्देश दिया कि वह जांच पूरी तरह से कानून के अनुसार करे।

    क्या खत्म होगा करियर?
    रिजवान ने 47 टेस्ट, 103 वनडे और 106 टी20 मैचों सहित 256 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया है। वह खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और आरोपों से छुटकारा चाहते हैं। इमाम उल हक की स्थिति भी ऐसी ही है। रिजवान को प्रेसिडेंट ट्रॉफी ग्रेड 1 फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति नहीं दी गई है, जिसमें ब्रिटेन दौरे से लौटे अधिकांश खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। उन्हें सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड का उप-कप्तान बनाया गया था। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्हें अपनी आजीविका कमाने से नहीं रोका जा सकता, लेकिन फिलहाल पाकिस्तान में बहुत कम लोग उनका समर्थन करते नजर आ रहे हैं। 34 साल के रिजवान के लिए यहां से वापसी करना मुश्किल होगा। क्योंकि, आईसीसी में अपील कर उन्होंने क्रिकेट बोर्ड से रिश्ते खराब कर लिए हैं। हालांकि, 30 साल के इमाम के पास वापसी करने का मौका रहेगा। उन्होंने पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है और जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

  • धोनी जैसी शांत दिखीं अनाहत, 0-2 से पिछड़कर जापानी खिलाड़ी को 3-2 से हराया

    धोनी जैसी शांत दिखीं अनाहत, 0-2 से पिछड़कर जापानी खिलाड़ी को 3-2 से हराया

    नागोया
     एशियन गेम्स 2026 में भारत की अनाहत सिंह ने स्कॉश के फाइनल में जगह बना ली है। इसके साथ ही 18 साल की इस खिलाड़ी ने कम से कम सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है। हालांकि, उनकी फॉर्म को देखते हुए उनसे गोल्ड मेडल की उम्मीद की जा रही है। सेमीफाइनल मैच में हार की कगार पर पहुंचने के बाद भी वह पूरी तरह शांत थीं और दबाव का उन पर कोई असर नहीं दिखा। इसके बाद उनकी तुलना पूर्व भारतीय क्रिकेटर धोनी से हो रही है, जो हमेशा दबाव भरे हालातों से टीम इंडिया को मैच जिताते थे।

    अनाहत भी सेमीफाइनल मैच में शुरुआती 2 गेम हार गई थीं। तीसरा गेम हारते ही वह बाहर हो जातीं और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ता। हालांकि, भारत की इस युवा खिलाड़ी को हार मंजूर नहीं थी। उन्होंने तीसरा गेम करीबी अंतर से जीता। इसके बाद अगले दो गेम आसानी से जीतकर फाइनल में जगह बना ली।

    जापानी खिलाड़ी का होम ग्राउंड सपोर्ट नहीं आया काम
    जापानी खिलाड़ी ने इस मैच में शुरुआती दो सेट अपने नाम कर जीत लगभग तय कर ली थी। घरेलू मैदान में उनके पास फैंस का भी पूरा समर्थन था। ऐसे में उनके लिए तीन में से एक गेम जीतना आसान था। वहीं, अनाहत के ऊपर बेशुमार दबाव था। हालांकि, वह दबाव में ही निखरती चली गईं और जीत हासिल की।

    मैच में क्या हुआ?
    जापान की वतानबे सतोमी ने बेहतरीन शुरुआत करते हुए पहला गेम 11-9 के अंतर से जीता। दूसरे गेम में भी उन्होंने 13-11 के अंतर से जीत हासिल की। तीसरे गेम में अनाहत ने बाजी पलट दी। उन्होंने 12-10 के अंतर से जीत दर्ज की। चौथे गेम में उन्होंने जापानी खिलाड़ी को चारो खाने चित करते हुए 11-6 के अंतर से जीत दर्ज की और पांचवें गेम में जीत का अंतर 11-3 हो गया। अंत में अनाहत ने 3-2 के अंतर से मैच अपने नाम किया।

  • ईरान को हराकर भारत बना चैंपियन, महिला कबड्डी में गोल्ड मेडल

    ईरान को हराकर भारत बना चैंपियन, महिला कबड्डी में गोल्ड मेडल

    टोक्यो 

     भारतीय महिला कबड्डी टीम ने कबड्डी फाइनल में शानदार खेल दिखाया और ईरान को हराकर एशियाई खेल 2026 में भारत के लिए तीसरा गोल्ड मेडल जीता। बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर यह कड़ा मुकबला अपने नाम किया। महिला कबड्डी में लगातार गोल्ड मेडल जीतकर भारत ने इतिहास रच दिया।

    मुकाबले के दौरान कई बार ऐसा लगा कि ईरान जीत जाएगा और भारत को हरा देगा। हालांकि, टीम ने दबाव में भी शानदार खेल दिखाया और एशियाई खेलों में देश के लिए तीसरा गोल्ड मेडल जीता। दिलचस्प बात यह है कि मुकाबले के आखिरी पलों में ईरान ने कई गलतियां कीं। एक समय तो उनकी टीम के दो रेडर्स ने 'डबल एंट्री' भी कर दी। छोटी-मोटी गलतियों के बावजूद, भारतीय टीम की मानसिक मजबूती ने उन्हें मैच जीतने और आखिर में पहला स्थान हासिल करने में मदद की।

    भारत ने महिला कबड्डी में चौथी बार जीता मेडल
    2010 में एशियाई खेलों में महिला कबड्डी स्पर्धा की शुरुआत के बाद से भारत ने अब तक खेले गए पांचों फाइनल में जगह बनाई है और सभी में मेडल जीतने में सफल रहा है। (टीम ने चार बार स्वर्ण पदक और एक बार रजत पदक जीता है।) भारत महिला कबड्डी टीम ने 2010 में गुआंगझोऊ में थाइलैंड को 28-14 से हराकर खिताब जीता था। 2014 में इंचियोन (दक्षिण कोरिया) में टीम ने ईरान को 31-21 से हराकर गोल्ड मेडल जीता था। जकार्ता 2018 में ईरान ने बाजी मारी थी और भारत को 27-24 से हार मिली थी। भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा था। 2022 में तय हांगझोऊ एशियन गेम्स का आयोजन 2023 में हुआ था। जिसमें भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे को 26-25 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। एशियन गेम्स 2026 में भारत ने ईरान को 37-34 से हराकर गोल्ड मेडल जीता।

    भारत का रहा दबदबा
    शुक्रवार को टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गये मुकाबले में भारत ने नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। 2010 में एशियाई खेलों में महिला कबड्डी स्पर्धा की शुरुआत के बाद से भारत सभी पांचों बार फाइनल में पहुंचा है। जकार्ता 2018 में स्वर्ण पदक मैच को छोड़कर, जिसमें ईरान जीता था, भारत ने बाकी सभी फाइनल जीते हैं।

    मौजूदा चैंपियन भारत ने इस तरह से प्रतियोगिता में अपना अजय अभियान जारी रखा है। भारत ने पहले हाफ में 31-17 की बड़ी बढ़त बना ली, जिसमें चार ऑल-आउट और चार बोनस अंक शामिल थे। नेपाल भारत को पर्याप्त चुनौती नहीं दे सका और दूसरे हाफ में केवल सात अंक ही जुटा सका। इससे पहले महिला टीम ने ग्रुप चरण में ईरान, बांग्लादेश और जापान को हराया था। महिला कबड्डी को 2010 में पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था और तब से भारत ने इसमें अपना दबदबा बनाए रखा है।

    भारतीय टीम ने पहले हाफ में बना ली थी 22-16 की बढ़त
    भारतीय महिला कबड्डी टीम एशियन गेम्स 2026 का आगाज होने से पहले ही गोल्ड जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी, जिसमें उनका प्रदर्शन भी शानदार देखने को मिला जो गोल्ड मेडल मुकाबले तक जारी रहा। ग्रुप स्टेज में जहां भारतीय महिला कबड्डी टीम का एकतरफा प्रदर्शन देखने को मिला तो वहीं सेमीफाइनल मैच को भी उन्होंने एकतरफा अंदाज में अपने नाम किया था। गोल्ड मेडल मैच में भारतीय टीम को ईरान से कड़ी टक्कर भी मिली जिसमें पहले हाफ में एक समय स्कोर 7-7 की बराबरी पर था, जिसके बाद भारतीय टीम अपने खेल को और अधिक आक्रामक करने के साथ पहला हाफ खत्म होने पर ईरान को एकबार ऑल आउट करने के साथ 22-16 के अंतर से बढ़त बना ली थी।

    दूसरे हाफ में ईरान ने की वापसी लेकिन भारतीय टीम ने बनाए रखी बढ़त
    गोल्ड मेडल मैच का दूसरा हाफ काफी रोमांचक रहा जिसमें ईरान की टीम ने जबरदस्त तरीके से वापसी करने के साथ भारतीय टीम को ऑल आउट भी कर दिया था, जिससे बढ़त काफी कम हो गई। इसके बाद भारतीय टीम ने वापसी करने के साथ ईरान को ऑल आउट किया और मुकाबला खत्म होने के साथ अपनी बढ़त को बनाए रखा जिसमें मैच के अंत में स्कोर लाइन 37-34 रहा और टीम इंडिया गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रही।

    पुरुषों के वर्ग में भी भारत मौजूदा चैंपियन है। फाइनल में उसका सामना ईरान से होगा। पुरुषों की कबड्डी 1990 से एशियाई खेलों का हिस्सा रही है और भारत ने अब तक आठ स्वर्ण पदक जीते हैं।

    महिला कबड्डी टीम

    मुख्य कोच: भारत तेजस्विनी बाई

        पुष्पा राणा (कप्तान)
        भावना ठाकुर
        ज्योति ठाकुर
        मनीषा कुमारी
        निकिता कुमारी
        पिंकी रॉय
        पूजा हथवाला
        राज रानी
        रितु नेगी
        रितु श्योराण
        संजू देवी
        सोनाली शिंगटे

  • जोशना चिनप्पा का छठा एशियन गेम्स मेडल, मिक्स्ड डबल्स में कांस्य

    जोशना चिनप्पा का छठा एशियन गेम्स मेडल, मिक्स्ड डबल्स में कांस्य

    नई दिल्ली
    जापान के नागोया किंजो फुटो एरिना में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 के स्क्वैश इवेंट में भारत ने मेडल अपने नाम किया है। भारत की अनुभवी खिलाड़ी जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार की जोड़ी को मिक्स्ड डबल्स के बेहद रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में हांगकांग की तांग मिंग हांग और ली का यी की जोड़ी से हार झेलनी पड़ी। इस हार के बाद भारतीय जोड़ी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि उन्होंन यहां तक का जो सफर तय किया वह काफी गर्व का विषय है।

    10-11 पर थमा सांस रोक देने वाला मुकाबला
    तीन गेम तक चले इस हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में हांगकांग की जोड़ी ने 2-1 (11-10, 2-11, 11-10) से जीत दर्ज की। पहले गेम को हांगकांग की जोड़ी ने बेहद करीबी मुकाबले में 11-10 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में जोशना और सेंथिलकुमार ने धमाकेदार वापसी करते हुए विरोधी जोड़ी को 11-2 से करारी शिकस्त दी और मैच 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। तीसरे और आखिरी गेम में दोनों जोड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। 10-10 की बराबरी के बाद अंतिम लम्हों में जोशना से हुई एक छोटी सी चूक का फायदा उठाकर हांगकांग ने 11-10 से बाजी मार ली और फाइनल का टिकट कटा लिया।

    जोशना चिनप्पा के नाम दर्ज हुआ छठा एशियन गेम्स मेडल
    40 वर्षीय स्टार स्क्वैश खिलाड़ी जोशना चिनप्पा का एशियन गेम्स के इतिहास में यह छठा पदक है। इससे पहले वे एशियाई खेलों में दो सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर चुकी थीं। इस ब्रॉन्ज मेडल के साथ उन्होंने एशियाई मंच पर अपनी महानता को एक बार फिर साबित कर दिया है। भारतीय जोड़ी ने शुक्रवार को फिलीपींस के डेविड पेलिनो और जेमिका अरिबाडो को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी और देश के लिए मेडल पक्का किया था।

  • West Indies Cricket: ₹ करोड़ों के घाटे के बीच खर्च में कटौती, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव

    West Indies Cricket: ₹ करोड़ों के घाटे के बीच खर्च में कटौती, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली
    वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम समय तीन ओडीआई और 5 टी20I मुकाबले के लिए भारत दौरे पर है. भारत दौरे के बीच ही टीम के खिलाड़ियों को बड़ा झटका लगा है. क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने खिलाड़ियों की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट रिटेनर फीस में 25 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है. यह बदलाव अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक लागू रहेगा.

    इसके साथ घरेलू खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट की अवधि भी घटा दी गई है. नई व्यवस्था में घरेलू पुरुष खिलाड़ियों को 12 महीने की जगह अक्टूबर 2026 से अप्रैल 2027 तक सात महीने का रिटेनर कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा. बोर्ड ने यह फैसला अपनी खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए किया है. क्रिकेट वेस्टइंडीज इस समय आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज को सितंबर 2025 में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में 28 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नेट घाटा हुआ. बोर्ड ने सितंबर 2026 तक के वित्तीय चक्र में भी करीब 26 मिलियन डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया है. खराब आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुलाई में क्रिकेट वेस्टइंडीज को ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल( से 12.82 मिलियन डॉलर का आपातकालीन ऋण लेना पड़ा था. बोर्ड के CEO क्रिस डेहरिंग ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पुनर्गठन को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और वेस्टइंडीज प्लेयर्स एसोसिएशन के सहयोग से यह कदम उठाया गया है, साथ ही वित्तीय स्थिरता हासिल करने के लिए फिलहाल यह जरूरी है.

    ये दो टूर्नामेंट हुए स्थगित
    खर्च कम करने के लिए क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इस साल मेन्स सुपर 50 और विमेंस T20 Blaze को भी स्थगित कर दिया है. सुपर 50 का आयोजन नवंबर में होना था. बोर्ड के मुताबिक घरेलू क्रिकेट का मौजूदा मॉडल काफी महंगा है. खिलाड़ियों और स्टाफ की सैलरी, मैच फीस, हवाई यात्रा, होटल और आयोजन संबंधी खर्च का बड़ा हिस्सा क्रिकेट वेस्टइंडीज को ही उठाना पड़ता है. डेहरिंग ने कहा कि मौजूदा ढांचे में घरेलू प्रतियोगिताओं का पूरा खर्च उठाना लंबे समय तक जारी रखना संभव नहीं है.

    सुपर 50 का ना होना वेस्टइंडीज की वनडे तैयारियों के लिहाज से भी अहम है. टीम 2023 वनडे वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी थी और अब 2027 वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए फरवरी-मार्च 2027 में क्वालिफायर खेलेगी. क्रिकेट वेस्टइंडीज ने इसके लिए नवंबर में इंग्लैंड-ए के खिलाफ व्हाइट बॉल मुकाबले कराने की योजना बनाई है. इसके बाद वनडे टीम का कैम्प भी आयोजित किया जाएगा.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 की तैयारियों के लिए एक अलग मॉडल तैयार किया है. पुरुष और महिला टीमों के लिए क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन प्रतियोगिताओं का खर्च क्रिकेट वेस्टइंडीज नहीं बल्कि संबंधित देशों के क्रिकेट बोर्ड और ओलंपिक संस्थाएं उठाएंगी. वेस्टइंडीज क्रिकेट की संरचना बाकी देशों से अलग है.

    क्रिकेट वेस्टइंडीज के तहत आने वाले अलग-अलग कैरेबियाई देश भविष्य में पैन अमेरिकन गेम्स और ओलंपिक जैसे आयोजनों में अपनी अलग टीमों के साथ उतर सकते हैं. बोर्ड के मुताबिक ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए पात्र 10 देशों को आमंत्रण देकर वैकल्पिक टूर्नामेंट आयोजित किए जाएंगे. इनका खर्च संबंधित राष्ट्रीय क्रिकेट संघों, ओलंपिक समितियों, सरकारों और निजी क्षेत्र से जुटाया जाएगा.

  • मां को नहीं बताया जापान जा रही हूं, सीमा ने Asian Games में रचा इतिहास; 28 सितंबर को 5000m में उतरेंगी

    मां को नहीं बताया जापान जा रही हूं, सीमा ने Asian Games में रचा इतिहास; 28 सितंबर को 5000m में उतरेंगी

    नई दिल्ली
    हिमाचल प्रदेश के चंबा के छोटे से गांव से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंची सीमा की कहानी जितनी संघर्ष भरी है, उतनी ही भावुक भी. 10,000 मीटर में कांस्य जीतकर इतिहास रचने वाली 25 साल की इस धाविका ने नागोया जाने की बात अपनी 78 साल की मां तक को नहीं बताई थी. वजह थी मां की चिंता.

    सीमा जानती थीं कि अगर मां को पता चल गया कि बेटी जापान में एशियन गेम्स खेलने जा रही है, तो वह पूरी रात सो नहीं पाएंगी. इसलिए सीमा ने एक छोटा सा 'राज' रखा और मां को यही समझने दिया कि वह हमेशा की तरह बेंगलुरु के ट्रेनिंग कैंप में हैं.

    'मां को बताया तो एक दिन सो नहीं पाएंगी'
    सीमा ने पदक जीतने के बाद अपनी मां के बारे में बताया, 'मेरे पिता नहीं हैं. मेरी मां काफी बुजुर्ग हैं, उनकी उम्र करीब 78 साल है. मेरा जन्म तब हुआ था, जब वह 45 साल की थीं. जब भी मैं बाहर जाती हूं, वह बहुत तनाव में आ जाती हैं. इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया कि मैं एशियन गेम्स के लिए जापान जा रही हूं.'

    उन्होंने बताया कि मां को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी है. ऐसे में ट्रेनिंग कैंप या प्रतियोगिता के लिए बाहर जाते समय सीमा उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं देतीं. परिवार में सिर्फ बड़ी बहन को सब पता रहता है.

    सीमा नागोया रवाना होने से पहले अपनी बड़ी बहन को पूरी जानकारी देकर गई थीं. अब ऐतिहासिक कांस्य जीतने के बाद उम्मीद है कि यह खबर मां तक भी पहुंच गई होगी.

    सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, 'हो सकता है मेरी बहन ने उन्हें बता दिया हो. शायद वे टीवी पर मुझे देख रही हों. वरना मां यही सोच रही होंगी कि मैं अभी बेंगलुरु में हूं.'

    12 साल की उम्र में पिता को खोया, नंगे पैर दौड़ीं
    सीमा का सफर किसी आसान रास्ते की कहानी नहीं है. चंबा जिले के रेटा गांव की रहने वाली सीमा ने महज 12 साल की उम्र में पिता को खो दिया था. बचपन में वह नंगे पैर दौड़ती थीं और मवेशी चराती थीं. गांव में जब उन्होंने एथलेटिक्स को करियर बनाने की कोशिश की तो लोगों ने भी सवाल उठाए, लेकिन मां ने बेटी का साथ नहीं छोड़ा.

    आज उसी बेटी ने एशियन गेम्स में भारत के लिए 10,000 मीटर का कांस्य जीतकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा दिया.

    सीमा ने  कांस्य पदक (32:50.05) जीता. वह एशियन गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाली सिर्फ तीसरी भारतीय हैं. उनसे पहले 2010 के एशियन गेम्स में प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण और कविता राउत ने रजत पदक जीता था.

    सीमा के लिए यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा है.

    उन्होंने कहा, 'यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. मुझे गर्व है कि मैंने कांस्य पदक जीता और अपना सपना पूरा किया.'

    सोना जीतने निकली थीं, कांसे से नहीं मानीं
    10,000 मीटर की रेस को सीमा ने बेहद रणनीतिक बताया. उनके मुताबिक खिलाड़ियों की नजर समय पर नहीं, बल्कि पदक पर थी.

    उन्होंने कहा, 'रेस काफी रणनीतिक थी. हर कोई पदक के लिए दौड़ रहा था. मैंने भी सोचा कि मुझे पदक के लिए लड़ना है, क्योंकि यह मेरा पहला एशियन गेम्स है. हर खिलाड़ी अपने देश के लिए गोल्ड जीतना चाहता है.'

    सीमा भी सोना जीतने के इरादे से उतरी थीं, लेकिन कांस्य से उन्हें संतोष करना पड़ा. हालांकि उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है.

    28 सितंबर को फिर ट्रैक पर उतरेंगी सीमा
    सीमा अब 28 सितंबर को महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में उतरेंगी. 10,000 मीटर का कांस्य जीतने के बाद उनका लक्ष्य साफ है- पदक का रंग बदलना.

    उन्होंने कहा, 'मैंने गोल्ड जीतने के लिए लड़ाई की, लेकिन कांस्य जीता. मैं खुश हूं. अब मेरा अगला इवेंट 28 सितंबर को 5000 मीटर है. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगी और पदक का रंग बदलना चाहूंगी.'

    पिछले साल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में रजत जीत चुकीं सीमा ने अपनी तैयारी का श्रेय कोच स्कॉट साइमन को भी दिया. उनके मुताबिक ओलंपिक चैम्पियनों के साथ ट्रेनिंग ने सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी बढ़ाई है.

    और शायद यही सीमा की कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा है- जिस बेटी को मां की चिंता से बचाने के लिए अपना ठिकाना छिपाना पड़ा, वही बेटी अब देश के लिए मेडल जीतकर मां तक अपनी खबर पहुंचा रही है.