Category: देश

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में मौत के बाद बढ़ा विवाद, अभिजीत दीपके पर मर्डर केस को लेकर उठे सवाल

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में मौत के बाद बढ़ा विवाद, अभिजीत दीपके पर मर्डर केस को लेकर उठे सवाल

    मुंबई

    कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर हत्या का मुकदमा चल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभिजीत दीपके की रैली में एक बुजुर्ग की मौत के बाद लोग CJP फाउंडर पर बुरी तरह भड़के हुए हैं और हत्या का मुकदमा दर्ज करने की भी मांग कर दी है। दरअसल 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में दीपके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में 75 वर्षीय बुजुर्ग एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह प्रदर्शन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बुलाया गया था।

    मृतक बुजुर्ग व्यक्ति की पहचान ठाणे के गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई के रूप में हुई है। शिवाजी पार्क थाने के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें अचानक सीने में दर्द होने लगी। उन्होंने बताया, "पिल्लई शाम करीब साढ़े चार बजे CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शिवाजी पार्क पहुंचे थे। शाम पांच बजे उन्होंने सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके दोस्तों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें एक नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।" चिकित्सकों ने बताया कि उपचार के दौरान पिल्लई की मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक CJP का विरोध प्रदर्शन करीब चार बजे शुरू हुआ था और उस समय तेज धूप थी। पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुटे और इस प्रतिष्ठित मैदान के आसपास का इलाका हजारों लोगों से भर गया। इस दौरान अराजकता फैल गई और बाद में बाद में बुजुर्ग की मौत हो गई।

    मर्डर केस दर्ज करने की मांग
    बुजुर्ग की मौत के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीजन्स फोरम' ने अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। फोरम ने अधिकारियों से अपील की है कि इस दुखद घटना के लिए सीधे तौर पर अभिजीत दीपके को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए। वहीं स्थानीय वकील और शिवाजी पार्क की निवासी सिद्धि देवलेकर की शिकायत पर पुलिस ने कानूनी शिकंजा भी कसा है। सिद्धि देवलेकर ने CJP नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के खिलाफ पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

    देवलेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बॉम्बे हाईकोर्ट और महाराष्ट्र सरकार के स्पष्ट आदेशों के तहत शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति खारिज कर दी गई थी। इसके बावजूद CJP नेताओं ने कानून को दरकिनार कर भारी भीड़ जुटाई। उन्होंने एक बयान में कहा, “यह कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था। यह राजनीतिक विरोध के नाम पर कानून और अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाने की कोशिश थी।” शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में CJP के आयोजकों और 400-500 अज्ञात समर्थकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 189 और 223 और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(3) व 135 के तहत FIR दर्ज की है।

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का आंदोलन
    गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कई आपत्तियों को दरकिनार कर फैसले लिए थे। इसके बाद देश के प्रमुख विपक्षी दलों सहित CJP ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP ने मुंबई के बाद दिल्ली में प्रदर्शन का भी ऐलान किया है।

  • ‘SIR में नाम काटने से नहीं रोक सकते…’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग ठुकराई

    ‘SIR में नाम काटने से नहीं रोक सकते…’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग ठुकराई

     मुंबई

    महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं मिली है. अदालत ने वोटर लिस्ट से नाम काटने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। 

    वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) यूथ प्रेसिडेंट सागर रमेश गवाई की तरफ से SIR के खिलाफ ये याचिका दायर की गई थी. याचिका में घर-घर जाकर वेरिफिकेशन (डोर-टू-डोर एन्युमरेशन) के दौरान नियमों की अनदेखी करने और मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए गए हैं। 

    अदालत में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से पेश सीनियर वकील आशुतोष कुंभकोणी ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने अंतरिम निर्देशों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की व्यापक सुनवाई कर रहा है और 8 अक्टूबर को इस पर आगे की सुनवाई होनी है। 

    दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ नेता और वकील प्रकाश अंबेडकर ने इसका विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि पुराना आदेश सिर्फ बिहार चुनाव से जुड़ा था, जबकि उनकी ये याचिका अलग है. प्रकाश अंबेडकर ने कोर्ट से अपील की कि कम से कम महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए ऐसा आदेश दिया जाए कि उनके नाम न काटे जाएं. उन्होंने अदालत से इस पर रोक लगाने की मांग की। 

    सुप्रीम कोर्ट में मामला होने के कारण HC का रुख
    बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने समानांतर कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहले से ही इस मामले पर विचार कर रही है, तो हाईकोर्ट के लिए इस पर समानांतर सुनवाई करना और कोई आदेश देना सही नहीं होगा. बेंच ने टिप्पणी की कि जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, तो ऐसा कदम उठाना कैसा लगेगा?

    कोर्ट ने ये भी कहा कि 8 अक्टूबर की तारीख आने ही वाली है, इसलिए फिलहाल इस मामले में कोई जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, चुनाव आयोग की अपील पर कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को 3 हफ्ते के लिए टाल दिया है और अब इस मामले की सुनवाई 12 अक्टूबर के आसपास होगी। 

    इस बीच, याचिकाकर्ताओं की चिंता ये है कि अगर नामों के कटने का सिलसिला नहीं रुका, तो आगामी चुनावों में कई वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। 

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग, ECI को देना होगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग, ECI को देना होगा जवाब

    नई दिल्ली

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. वह अब भी अपने पद पर बने रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सस्पेंड करने का आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. जी हां, चुनाव आयोग और एसआईआर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज ज्ञानेश कुमार मामले पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। 

    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
    दरअसल, चुनाव आयोग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने दलील दी कि अगर अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया तो देश जल उठेगा. याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है। 
    इस पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट सही भी हो सकती है और गलत भी. हम इस मामले को देख रहे हैं. सीजेआई सूर्यकांत की अध्‍यक्षता वाली तीन जजों में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। 

    क्या है पूरा विवाद?
    मामला मुख्य रूप से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)से जुड़े फैसलों को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में निर्वाचन आयोग के कुछ फैसले ऐसे तरीके से लिए गए, जिनमें आयोग के अन्य दो सदस्यों, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति या जानकारी नहीं थी। याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले करीब 10 महीनों में SIR से जुड़े कई फैसलों और आदेशों को लेकर दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या कम से कम 14 बताई गई है। हालांकि, यह आरोप अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं हुए हैं और निर्वाचन आयोग का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग नामक संवैधानिक संस्था में निहित है। उनका कहना है कि CEC आयोग के अध्यक्ष होते हैं, लेकिन वे स्वयं पूरे आयोग के स्थान पर निर्णय लेने की शक्ति नहीं रखते।

    याचिकाकर्ताओं ने क्या मांग की?
    पटना निवासी राकेश कुमार सिंह और दिल्ली के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें CEC के कामकाज पर सवाल उठाते हुए विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं की न्यायिक जांच की मांग की गई है। एक याचिका में ज्ञानेश कुमार को CEC पद से निलंबित करने को अंतरिम राहत के तौर पर मांगा गया था। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने SIR तथा उससे जुड़े फैसलों को चुनौती दी है। दूसरी याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल पैदा हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल निलंबन क्यों नहीं किया?
    सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि केवल मीडिया रिपोर्टों या आरोपों के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ तत्काल अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने पहले निर्वाचन आयोग से जवाब और संबंधित रिकॉर्ड मांगने का रास्ता चुना है। पीठ ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से कानून के मुताबिक काम करने की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि विवादित फैसले सर्वसम्मति से, बहुमत से या केवल CEC द्वारा लिए गए थे। इससे आगे की सुनवाई में निर्णय प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर महत्वपूर्ण बहस हो सकती है।

    कोर्ट ने दिया अहम संकेत
    सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह संकेत भी दिया गया कि यदि यह पाया जाता है कि निर्वाचन आयोग के किसी फैसले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो अदालत उस फैसले पर आगे कार्रवाई कर सकती है। यानी सोमवार का आदेश CEC को क्लीन चिट नहीं है। अदालत ने केवल तत्काल निलंबन जैसी अंतरिम राहत देने से फिलहाल इनकार किया है और मामले में जवाब मांगा है। यह अंतर समझना महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही नहीं माना है, लेकिन उन्हें गलत भी नहीं ठहराया है। मामले की अगली प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के जवाब और अदालत के सामने पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।

    SIR भी विवाद के केंद्र में
    इस पूरे विवाद की एक बड़ी कड़ी मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR से जुड़ी है। याचिकाकर्ताओं ने SIR की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि यदि यह प्रक्रिया निर्धारित कानूनी अधिकार और प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी, तो उससे जुड़े फैसलों और कदमों को निरस्त किया जाए। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ निर्णय और चुनावी सॉफ्टवेयर या दिशानिर्देशों में किए गए बदलाव आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना किए गए। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने पहले कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय होना असामान्य नहीं है और उसके आदेश निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं।

    अब आगे क्या होगा?
    सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश के बाद अब निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। खासतौर पर यह स्पष्ट करना होगा कि जिन फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वे किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और उनमें CEC तथा अन्य निर्वाचन आयुक्तों की क्या भूमिका थी। अदालत यह भी देख सकती है कि संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित कानून के तहत आयोग के सामूहिक निर्णय की क्या सीमा है और CEC की अध्यक्षीय भूमिका तथा आयोग की सामूहिक शक्ति के बीच कानूनी अंतर किस तरह लागू होता है।

    ECI से मांगा जवाब
    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि CEC ज्ञानेश कुमार पद पर बने रहेंगे और सुप्रीम कोर्ट ने उनके तत्काल निलंबन का अंतरिम आदेश नहीं दिया है। साथ ही, मामले की न्यायिक जांच जारी रहेगी और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा गया है। इसलिए सोमवार का आदेश मामले का अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि आगे की सुनवाई की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम है। यानी, ‘CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी’ कहना भी सही नहीं होगा और ‘कोर्ट ने उन्हें निलंबित कर दिया’ कहना भी गलत होगा। सही स्थिति यह है कि अदालत ने तत्काल अंतरिम निलंबन से इनकार करते हुए निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है और आरोपों की जांच का रास्ता खुला रखा है।

    मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम बातें
        मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' के किसी भी बदले हुए वर्शन को मंजूरी नहीं दी है।

        पीठ ने पूछा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित कर दिया जाता है तो निर्वाचन आयोग का कामकाज कौन संभालेगा और “चुनाव कौन कराएगा?” पीठ ने कहा कि किसी भी आदेश से पहले संबंधित पक्षों का जवाब लेना आवश्यक है।

        सीजेआई ने कहा कि कानून अनिवार्य है और कोर्ट उम्मीद करता है कि उसका पालन किया जाएगा। यदि कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो कोर्ट संबंधित फैसलों को निरस्त कर सकता है।

        जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी सवाल किया कि क्या प्रतिवादियों को सुने बिना ऐसा आदेश पारित किया जा सकता है।
        उन्होंने कहा कि यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि कोई निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था तो कोर्ट उस निर्णय पर रोक लगा सकता है और उसे अधिकारातीत (ultra vires) घोषित कर सकता है। लेकिन केवल इस आधार पर कि सभी फैसले एकतरफा लिए गए थे, प्रतिवादियों को सुने बिना निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

    क्या है मामला?
    कोर्ट वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में यह तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग, जो कई सदस्यों वाली एक संवैधानिक संस्था है, उसे मिली शक्तियों का इस्तेमाल कानून के तहत जरूरी सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का पालन किए बिना किया जा रहा है।

    यह विवाद एक अंग्रेजी अख की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार मतदाता सूची, वोटर रजिस्ट्रेशन और आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

    SC की अहम टिप्पणी
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि संबंधित फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था, तो कोर्ट उन आदेशों को रद्द कर देगा. कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए केंद्र और ECI से जवाब मांगा है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। 

  • भारत-वेस्टइंडीज मैच का खुमार, टिकट के लिए रातभर इंतजार को तैयार दिखे क्रिकेट फैंस

    भारत-वेस्टइंडीज मैच का खुमार, टिकट के लिए रातभर इंतजार को तैयार दिखे क्रिकेट फैंस

    रांची
     राजधानी रांची के धुर्वा स्थित जेएससीए (JSCA) इंटरनेशनल स्टेडियम में 9 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला जाना है। इस मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। मैच देखने और खिलाड़ियों को लाइव खेलते देखने के लिए आज सोमवार, 5 अक्टूबर से ऑफलाइन टिकटों की बिक्री शुरू हो गई है।

    टिकट हासिल करने के लिए बिहार व झारखंड के अलग-अलग जिलों से पहुंचे फैंस बीते रविवार की रात से ही स्टेडियम परिसर के आसपास रुक गए थे। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात में कतार लगाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद सोमवार सुबह 7 बजे से दर्शकों को कतार में खड़ा कराया गया और सुबह 9 बजे से टिकटों की बिक्री शुरू हुई।

    ऑफलाइन बिक्री के नियम और व्यवस्था:
    काउंटरों की संख्या: स्टेडियम परिसर में कुल 5 काउंटर बनाए गए हैं।

    समय: टिकट काउंटर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुले रहेंगे।

    बिक्री की तारीख: ऑफलाइन टिकटों की बिक्री केवल 5 अक्टूबर और 6 अक्टूबर को ही होगी. इसके बाद ऑफलाइन टिकट की बिक्री बंद हो जाएगी।

    टिकट सीमा: एक व्यक्ति को अधिकतम दो (2) टिकट ही दिए जा रहे हैं।

    विशेष काउंटर: महिलाओं और दिव्यांग दर्शकों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था की गई है। सुबह 5 से 6 बजे के बीच महिला फैंस कतारों में लग चुकी थीं।

    महिलाएं भी लगी लाइन मेंः
    टिकट लेने का खुमार कुछ इस कदर है कि महिलाएं भी अपना सारा काम खत्म कर के लाइनों में लगी हुई, ताकि उन्हें टिकट मिल जाएं।

    युवाओं में दिखा खास क्रेज:
    मैच को लेकर युवाओं में भारी रोमांच देखा जा रहा है। टिकट की लाइन में खड़े कई युवाओं ने बताया कि वे उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी को मैदान पर लाइव देखने के लिए घंटों से कतार में लगे हुए हैं।

    भीड़ को नियंत्रित करने और कतारबद्ध तरीके से टिकट वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन और जेएससीए प्रबंधन की ओर से सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, ताकि व्यवस्था बनी रहे।

    रविवार के शाम से लगी लंबी कतार
    टिकट लेने के लिए रविवार शाम करीब सात बजे धुर्वा स्थित जेएससीए स्टेडियम के बाहर बनाए गए बेरिकेडिंग में करीब 700 दर्शक पहुंचकर कतार में खड़े हो गए। दर्शकों को उम्मीद थी कि रातभर यहीं रहकर सुबह टिकट काउंटर खुलते ही टिकट ले लेंगे।

    करीब डेढ़ घंटे तक दर्शक बेरिकेडिंग में खड़े रहे। इसकी जानकारी मिलने पर धुर्वा थाना की पुलिस और डीएसपी मौके पर पहुंचे और सभी को बेरिकेडिंग से बाहर कराया। इनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में थीं। कई महिलाएं चटाई और चादर लेकर पहुंची थीं, ताकि रातभर इंतजार कर सुबह टिकट ले सकें।

  • Flydubai केस ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, ओमान की चेतावनी के बाद भी UAE और इजरायल में नहीं रोका गया

    Flydubai केस ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, ओमान की चेतावनी के बाद भी UAE और इजरायल में नहीं रोका गया

     नई दिल्ली
    फ्लाईदुबई फ्लाइट 1073 में जो कुछ हुआ, उसकी शुरुआत कॉकपिट के अंदर नहीं हुई थी. हमाम अल-हम्मामी के कप्तान के पीछे खड़े होकर इमरजेंसी कुल्हाड़ी उठाने तक तीन देशों के स्तर पर उसे रोकने के कई मौके आ चुके थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमान, UAE और इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में अलग-अलग स्तर पर हुई चूक की वजह से वह उस फ्लाइट के कॉकपिट तक पहुंच सका। 

    सबसे पहले ओमान में हम्मामी को लेकर चिंता सामने आई थी. वॉल स्ट्रीट जर्नल यानी WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान एयर ने उसकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की थी. अधिकारियों ने पाया कि वह कट्टरपंथी विचारधारा में जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा था. इसके बाद उसे ओमान एयर की फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया. उसे डि-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम से गुजारा गया और बाद में डेस्क जॉब दे दी गई। 

    ओमान ने खतरा पहचाना, लेकिन जानकारी आगे नहीं पहुंची
    यहां पहली बड़ी चूक हुई. रिपोर्ट मुताबिक, मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ओमान ने हम्मामी को उड़ान से हटा दिया, लेकिन उसके बारे में उठी चिंताओं को दूसरे देशों या एयरलाइंस के साथ व्यापक तौर पर साझा नहीं किया गया. इसके कुछ समय बाद फरवरी 2026 में फ्लाईदुबई ने हम्मामी को नौकरी पर रख लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, एयरलाइन ने उसकी पिछली नौकरी के बारे में ओमान एयर से संपर्क नहीं किया और न ही वहां सामने आई चिंताओं की जानकारी ली. फ्लाईदुबई की हायरिंग प्रक्रिया से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, एयरलाइन ने उसका क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक जरूर किया था। 

    नौकरी मिलने के बाद हम्मामी को दुबई-तेल अवीव रूट पर तैनात किया गया. WSJ के मुताबिक, वह इस रूट पर कई बार उड़ान भी भर चुका था. अब इसी हायरिंग प्रक्रिया को लेकर UAE के अधिकारी फ्लाईदुबई के कर्मचारियों की जांच कर रहे हैं. जांच पूरी होने तक फ्लाईदुबई ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। 

    इजरायल के पास भी था हम्मामी को रोकने का मौका
    WSJ के मुताबिक, हम्मामी को रोकने का आखिरी बड़ा मौका इजरायल में था. ओमान जैसे देशों के पायलट, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां उड़ान नहीं भर सकते. ऐसे में हम्मामी की राष्ट्रीयता ही उसे रोकने के लिए काफी होनी चाहिए थी. विदेशी एयरलाइंस को इजरायल पहुंचने से पहले यात्रियों और क्रू की सूची जमा करनी होती है. फ्लाईदुबई ने फ्लाइट 1073 का मैनिफेस्ट भी इजरायल को दिया था. इजरायल की टैक्स अथॉरिटी के मुताबिक, यह जानकारी देश के पैसेंजर डेटा सिस्टम में मौजूद थी। 

    लेकिन यहां भी एक अहम सवाल सामने आया. इजरायल के ट्रांसपोर्टेशन मंत्रालय ने कहा कि उसके पास विदेशी एयरलाइंस के क्रू की जांच करने का अधिकार या विशेषज्ञता नहीं थी. मंत्रालय के मुताबिक, 2023 में यह डेटाबेस बनने के बाद उसने कभी यात्रियों या क्रू की सूची मांगी ही नहीं थी. इतना ही नहीं, मंत्रालय को यह भी पता नहीं था कि वह इस डेटाबेस को एक्सेस कर सकता है. मंत्रालय ने बताया कि इसके बजाय फ्लाईदुबई ने लिखित तौर पर अपने पायलटों की बैकग्राउंड और राष्ट्रीयता की जांच करने पर सहमति दी थी। 

    2024 में भी दी गई थी सुरक्षा कमियों की चेतावनी
    इस मामले में एक और अहम कड़ी सामने आई है. WSJ के मुताबिक, 2024 की एक क्लासिफाइड रिपोर्ट में इजरायल आने वाली विदेशी एयरलाइंस की उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी. इसके बावजूद फ्लाइट 1073 के मामले में उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल उसे रोकने के लिए नहीं हो सका। 

    एक के बाद एक छूटते गए मौके
    WSJ की रिपोर्ट का केंद्रीय सवाल यही है कि हम्मामी को रोकने के इतने मौके होने के बावजूद वह कॉकपिट तक कैसे पहुंच गया. ओमान ने उसके कट्टरपंथी विचारों को लेकर उसे उड़ान से हटा दिया, लेकिन यह जानकारी आगे नहीं पहुंची. UAE में फ्लाईदुबई ने कथित तौर पर उसकी पिछली हिस्ट्री की जांच नहीं की और उसे दुबई-तेल अवीव जैसे संवेदनशील रूट पर भेज दिया. वहीं इजरायल के पास उसकी राष्ट्रीयता और फ्लाइट क्रू की जानकारी मौजूद थी, फिर भी उसे उड़ान ऑपरेट करने से नहीं रोका गया। 

  • नौसेना में जासूसी का मामला: विशाखापत्तनम की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में नाविक गिरफ्तार

    नौसेना में जासूसी का मामला: विशाखापत्तनम की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में नाविक गिरफ्तार

    कोयंबटूर
     भारतीय नौसेना के 31 साल के एक नाविक  को गिरफ्तार किया गया है। उस पर पाकिस्तान की एक महिला इंटेलिजेंस ऑपरेटिव को रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने का आरोप है।

    आंध्र प्रदेश पुलिस के काउंटर इंटेलिजेंस (CI) सेल ने पश्चिम बंगाल के प्रदीप मुखर्जी को तब गिरफ्तार किया, जब वह कोयंबटूर के रेड फील्ड्स में स्थित नौसेना के प्रमुख लीडरशिप ट्रेनिंग सेंटर आईएनएस अग्रानी में मैनेजमेंट डेवलपमेंट कोर्स कर रहे थे। प्रदीप 2014 में भारतीय नौसेना में नाविक के तौर पर शामिल हुए थे और विशाखापत्तनम स्थित ईस्टर्न नेवल कमांड में तैनात थे।

    हनीट्रैप का शिकार हुआ सेलर
    वह मैनेजमेंट डेवलपमेंट कोर्स के लिए कुछ दिन पहले ही आईएनएस अग्रानी पहुंचे थे। एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक, प्रदीप पाकिस्तान की एक महिला ऑपरेटिव द्वारा बिछाए गए ऑनलाइन हनीट्रैप का शिकार हो गए थे। महिला ने कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर उनसे संपर्क किया था।

    उस महिला ने धीरे-धीरे नाविक से दोस्ती बढ़ाई और फिर विशाखापत्तनम नौसेना बेस से जुड़े रणनीतिक नौसैनिक एसेट्स, बेड़े की आवाजाही और ऑपरेशनल सेटअप के बारे में संवेदनशील जानकारी हासिल कर ली।

    काउंटर इंटेलिजेंस ने शुरू की प्रदीप की निगरानी
    आंध्र प्रदेश पुलिस का काउंटर इंटेलिजेंस (CI) सेल टेरर मॉड्यूल, सीमा-पार जासूसी और हाई-सिक्योरिटी खतरों को नाकाम करने पर केंद्रित एक खास विंग है। उसने संदिग्ध डिजिटल फुटप्रिंट्स का पता चलने के बाद प्रदीप मुखर्जी की निगरानी शुरू कर दी थी।

    जब गोपनीय जानकारी लीक करने में उनकी भूमिका की पुष्टि हो गई तो जांचकर्ताओं ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए नौसेना अधिकारियों से मंजूरी ले ली। शनिवार सुबह सीआई की एक स्पेशल टीम कोयंबटूर के आईएनएस अग्रानी पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया।

    इसके बाद जांच करने वालों ने उस नाविक को स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया ताकि ट्रांजिट वारंट मिल सके। इसके बाद शाम को उसे विजयवाड़ा में काउंटर इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर ले जाया गया, जहां उससे हिरासत में आगे पूछताछ की जानी थी।

    इस बात की जांच की जा रही है कि डिफेंस की कौन-कौन सी फाइलें और कितनी जानकारी लीक हुई है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या हवाला या डिजिटल पेमेंट के जरिए प्रदीप को कोई पैसे भेजे गए थे।

  • 8वां वेतन आयोग: 10 अक्टूबर है अहम तारीख, संगठनों को अनुरोध जमा करने की डेडलाइन

    8वां वेतन आयोग: 10 अक्टूबर है अहम तारीख, संगठनों को अनुरोध जमा करने की डेडलाइन

    नई दिल्ली

     केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अक्टूबर का महीना काफी हलचल वाला रहेगा। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आठवें वेतन आयोग से जुड़ी कुछ अहम डेडलाइन अक्टूबर के महीने में ही है। इसमें से एक डेडलाइन अगले हफ्ते आने वाली है। आइए डिटेल में इसके बारे में जान लेते हैं।

    मुंबई में होने वाली है अहम बैठक
    दरअसल, अक्टूबर में वेतन आयोग मुंबई में अहम बैठक करने जा रहा है। आयोग की यह बैठक 22 और 23 अक्टूबर 2026 को होने वाली है। इस दौरान केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े संगठन, संस्थान, एसोसिएशन और यूनियन आयोग के सामने अपनी मांगें और सुझाव रख सकेंगे। जो भी केंद्रीय कर्मचारी संगठन, एसोसिएशन या यूनियन, वेतन आयोग से मुंबई में मुलाकात करना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपॉइंटमेंट के लिए आवेदन करना होगा।

    मुंबई में वेतन आयोग के साथ बातचीत के इच्छुक संगठनों को 10 अक्टूबर 2026 तक अपना अनुरोध जमा करना होगा। मतलब ये कि अगर आप वेतन आयोग की बैठक में हिस्सा लेना चाहते हैं तो 10 अक्टूबर तक आवेदन कर देना होगा। आवेदन के साथ Unique Memo ID देना भी जरूरी होगा। यह यूनिक मेमो आईडी उस समय जनरेट होती है, जब संबंधित संगठन आयोग के सामने अपना मेमोरेंडम जमा करता है।

    बैठक का कहां होगा स्थान?
    आठवें वेतन आयोग ने वैसे तो मुंबई में बैठक का ऐलान किया था लेकिन बातचीत का स्थान और विस्तृत कार्यक्रम के बारे में जानकारी नहीं दी गई। इसका मतलब है कि अभी से सभी संगठनों को बैठक का सटीक समय और वेन्यू नहीं बताया गया है। आसान भाषा में समझें तो मुंबई बैठक में शामिल होने के इच्छुक केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के लिए 10 अक्टूबर की तारीख बेहद अहम है।

    7-8 अक्टूबर 2026: वेतन आयोग 7-8 अक्टूबर (बुधवार-गुरुवार) को बेंगलुरु का दौरा करेगा। अपॉइंटमेंट चाहने वालों के पास आधिकारिक पोर्टल के जरिए आवेदन करने के लिए 18 सितंबर तक का समय था। अब देखना अहम होगा कि अगले हफ्ते होने वाली इस बैठक में किन मुद्दों पर बात होती है। अब तक के पैटर्न को देखें तो वेतन आयोग की ऐसी बैठकों में कर्मचारी संगठन वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े अपने सुझाव और मांगें आयोग के सामने रखते रहे हैं। फिटमेंट फैक्टर, बेसिक पे में बदलाव, भत्तों की समीक्षा और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी कर्मचारियों के लिए अहम बने हुए हैं।

    बता दें कि अक्टूबर में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर भी फैसला होना है। ऐसा माना जा रहा है कि कर्मचारियों का भत्ता 4 पर्सेंट तक बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कुल भत्ता 64 पर्सेंट हो जाएगा।

  • ‘मिडिल पावर’ से अमेरिका-चीन तक: जयशंकर ने बताया बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका

    ‘मिडिल पावर’ से अमेरिका-चीन तक: जयशंकर ने बताया बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका

    नई दिल्ली
    62वें म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दुनिया को कई अहम मुद्दों पर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इस कमरे में मौजूद कोई भी इस बात से असहमत नहीं होगा कि आज की स्थिति मुख्य रूप से अमेरिका की बदली हुई स्थिति से तय हो रही है। यह बदलाव उसने खुद चुना है और एक तरह से, वह जान-बूझकर ज्यादा अकेला पड़ गया है। मौजूदा हालात की दूसरी अहम बात चीन का उभार है। चीन खुद को एक अनोखा देश मानता है।

    कई मायनों में यह उसकी अपनी सोच भी है और हकीकत भी और हम बहुत कड़ा मुकाबला देख रहे हैं। आज यह मुकाबला सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी देश के पास जो भी ताकत या बढ़त है, उसका इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है और यह मुकाबला आपसी निर्भरता की जटिलताओं के साथ-साथ चल रहा है।

    जयशंकर ने समझाया 'मिडिल पावर' का मतलब
    एस जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि यह बताना ज्यादा आसान है कि 'मिडल पावर' (मध्यम शक्ति) क्या नहीं है, बजाय इसके कि आज यह बताया जाए कि 'मिडल पावर' क्या है। हमें इस शब्द को बहुत शाब्दिक अर्थ में नहीं लेना चाहिए क्योंकि ऐसे देश होंगे। चलिए G20 जैसी परिभाषा को ही लेते हैं। ऐसे देश हो सकते हैं जो G20 में शामिल न हों, लेकिन फिर भी यह अर्थव्यवस्था के आकार पर आधारित सीधी परिभाषा नहीं है। वे किसी खास क्षेत्र में बहुत अहम भूमिका निभाते हों।

    US की धरती से जयशंकर ने ट्रंप और पाकिस्तान को आंतकवाद पर बुरा धो डाला
    मेरे दिमाग में एक उदाहरण नीदरलैंड का आता है, जो सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में है या फिर UAE जैसे देश को देखें, जो अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा असरदार भूमिका निभाता है। मैं यही कहूंगा कि उभरती हुई शक्तियों और मध्यम शक्तियों, दोनों ही मामलों में, हमें इस बात को लेकर बहुत लचीला और व्यापक नजरिया अपनाना चाहिए कि हम असल में किस बारे में बात कर रहे हैं।

    अमेरिका और चीन को लेकर भी दिया संदेश
    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि जब हम संभावनाओं की बात करते हैं, तो हम अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर भी नजर डालते हैं। जैसा कि मैंने कहा, यह तय करना जरूरी है कि 'मिडल पावर' (मध्यम शक्ति) क्या नहीं है। यहां सबसे पहले अमेरिका का नाम आता है, जो कई दशकों से वैश्विक व्यवस्था का मुख्य आधार रहा है और जो किसी भी पैमाने पर, दूसरी किसी भी शक्ति से काफी आगे है। कुछ हद तक चीन भी। चीन, अपनी आर्थिक ताकत की वजह से, वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का एक-तिहाई हिस्सा संभालता है, और आज उसकी आर्थिक क्षमताएं राजनीतिक प्रभाव में बदल रही हैं। असल में, एक तरह से यही हमारी चर्चा का मुख्य विषय है।

     

  • Weather Update: 5 अक्टूबर को इन राज्यों में बरसेंगे बादल, तेज हवाओं का भी अलर्ट

    Weather Update: 5 अक्टूबर को इन राज्यों में बरसेंगे बादल, तेज हवाओं का भी अलर्ट

    नई दिल्ली
    देश में मानसून के अंतिम पड़ाव में एक बार फिर से मौसम विभाग ने मुश्किल बढ़ाने वाला अलर्ट जारी कर दिया है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज यानी 5 अक्टूबर को दिल्ली, यूपी, बिहार समेत 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी है। हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना में तूफानी हवा लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। वहीं, पहाड़ी राज्यों में लैंडस्लाइड की चेतावनी जारी की गई है। तेज आंधी और बारिश के चलते उत्तर भारत के राज्यों में फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। पूर्वी भारत के राज्यों में बिजली और वज्रपात की भी चेतावनी है। वहीं, मछुआरों को समुद्री किनारे से दूर जाने की सलाह दी गई है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा रांची, सुपौल, रायपुर होकर गुजर रही है।

    इस बीच बंगाल की खाड़ी में तूफानी हवा चलने से पूर्वी भारत में लोगों की टेंशन बढ़ सकती है। वहीं, 2 से अधिक राज्यों में तूफानी हवा के साथ ओले भी गिर सकते हैं। उत्तर-पूर्वी बिहार से उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। मन्नार की खाड़ी और उससे सटे दक्षिणी तटीय तमिलनाडु के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। तो चलिए आज हम आपलोगों को बताते हैं कि आज यानी 5 अक्टूबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। इसके अलावा हम जिलावार भी मौसम का हाल बताने जा रहे हैं…

    देश के 20 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आज यानी 5 अक्टूबर को 20 राज्यों दिल्ली, यूपी, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, नागालैंड और मणिपुर में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज आंधी चलने की चेतावनी है।

    दिल्ली में आज मौसम कैसा रहेगा
        दिल्ली(5 अक्टूबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली में आज यानी 5 अक्टूबर से लेकर 6 अक्टूबर के बीच भारी बारिश-आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से आंधी चलने की संभावना है। वहीं, दिल्ली में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    यूपी में आज मौसम कैसा रहेगा
        यूपी(5 अक्टूबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): मेरठ, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, कानपुर, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, संतकबीर नगर, बलिया, सीतापुर, मैनपुरी, पीलीभीत, मिर्जापुर, सोनभद्र, गोरखपुर और कन्नौज में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने का अलर्ट है। वहीं, लखनऊ में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    बिहार में आज मौसम कैसा रहेगा
        बिहार(5 अक्टूबर- भारी बारिश और आंधी का अलर्ट): गया, पटना, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, अलवर, मुंगेर, बांका, जमुई, भागलपुर, कैमूर, नवादा, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, लखीसराय और किशनगंज में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, पटना में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा।

    झारखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
        झारखंड(5 अक्टूबर-तेज बारिश-आंधी की चेतावनी): रांची, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला, रामगढ़, हजारीबाग, दुमका, लातेहार, गुमला, पलामू और लोहरदगा में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। वहीं, रांची में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    उत्तराखंड में आज मौसम कैसा रहेगा
        उत्तराखंड (5-6 अक्टूबर- बारिश-आंधी का अलर्ट): नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर, ऋषिकेश, हरिद्वार, पिथौरागढ़ और चंपावत में बारिश-तेज हवा की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, देहरादून में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    हिमाचल में आज मौसम कैसा रहेगा
        हिमाचल (5 अक्टूबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): शिमला, सोलन, बिलासपुर, सिरमौर, मंडी, चंबा और किन्नौर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, मनाली में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    जम्मू-कश्मीर में आज मौसम कैसा रहेगा
        जम्मू-कश्मीर (5 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): जम्मू, बडगाम, किश्तवाड़, अनंतनाग, कठुआ, पुंछ, राजौरी और उधमपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलने की संभावना है। वहीं, श्रीनगर में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस जाएगा तो न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

    पश्चिम बंगाल में आज का मौसम कैसा रहेगा
        पश्चिम बंगाल(5 अक्टूबर-तेज बारिश-आंधी की संभावना): कोलकाता, दार्जिलिंग, बांकुड़ा, हावड़ा, दुर्गापुर, मालदा, कालिम्पोंग और पुरबा बर्धमान भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी। वहीं, कोलकाता में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा।

    पंजाब में आज मौसम कैसा रहेगा
        पंजाब (5 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): फिरोजपुर, होशियारपुर, संगरूर, पठानकोट, बरनाला, जालंधर, फाजिल्का, अमृतसर और रूपनगर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी।

    राजस्थान में आज मौसम कैसा रहेगा
        राजस्थान (5 अक्टूबर-बारिश-आंधी की चेतावनी): जयपुर, अलवर, अजमेर, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, चुरू और फलौदी में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। वहीं, जयपुर में आज यानी 5 अक्टूबर का अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा।

    मध्य प्रदेश में आज मौसम कैसा रहेगा
        मध्य प्रदेश (5 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): डिंडोरी, जबलपुर, पन्ना, दमोह, नीमच, शहडोल, रायसेन, मांडला, खरगोन, होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, छतरपुर, दमोह, विदिशा, सिवनी, खांडवा, देवास और बालाघाट में मध्यम से भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, भोपाल में आज यानी 5 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा।

  • रूस में तालिबान की सैन्य मौजूदगी से बदलेगा समीकरण? भारत-चीन समेत कई देशों से संपर्क

    रूस में तालिबान की सैन्य मौजूदगी से बदलेगा समीकरण? भारत-चीन समेत कई देशों से संपर्क

    नई दिल्ली
    भारत का दोस्त रूस ऐसा कुछ कर रहा है, जिससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है। यूं कहे तो दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को हिलाकर रख दिया है। अफगान तालिबान का एक उच्च-स्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल आधिकारिक तौर पर रूस के बड़े रणनीतिक युद्ध अभ्यास 'सेंटर-2026' में शामिल हुआ। यह भागीदारी सिर्फ औपचारिक दौरा नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि मास्को अब तालिबान को आधुनिक सैन्य कौशल, उन्नत उपकरण और क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों तक पहुंच दे रहा है। इस घटनाक्रम से इस्लामाबाद में गहरी चिंता पैदा हो गई है। कई विश्लेषक इसे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए संभावित 'गेम चेंजर' बता रहे हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल्ला बिन मसूद कोर के कमांडर मौलवी नसीबुल्लाह 'मदानी' के नेतृत्व में तालिबान प्रतिनिधिमंडल ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया। दल ने कठिन युद्ध अभ्यासों को करीब से देखा और कई देशों के वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत की। इन देशों में चीन, भारत, उत्तर कोरिया, वियतनाम, कोलंबिया, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल हैं। एक ही मंच पर इतने अलग-अलग देशों के अधिकारियों से मुलाकात को काबुल की बढ़ती कूटनीतिक और सैन्य पहुंच का संकेत माना जा रहा है

    आधुनिक हथियारों और तकनीक का जायजा
    'सेंटर-2026' के दौरान तालिबान अधिकारियों ने रूसी सेना की उन्नत तकनीक की बड़ी प्रदर्शनी देखी। प्रतिनिधिमंडल ने कई प्रणालियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इनमें बिना पायलट वाले हवाई सिस्टम शामिल थे, यानी निगरानी और हमले वाले नए ड्रोन।

    अधिकारियों ने लंबी दूरी की मिसाइल व्यवस्था, सटीक तोपखाना और भारी हथियार मंच भी देखे। इसके अलावा अगली पीढ़ी की रोबोटिक युद्ध तकनीक और स्वचालित रसद प्रणालियों का भी जायजा लिया गया।

    जानकारों का मानना है कि इस तरह का संपर्क सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता। इससे तालिबान को आधुनिक युद्ध के तरीकों, उपकरणों के इस्तेमाल और प्रशिक्षण की जरूरत की बेहतर समझ मिलती है।

    प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर
    बताया जा रहा है कि इस दौरे का एजेंडा हथियार देखने से कहीं आगे था। तालिबान अधिकारियों ने सैन्य शिक्षा बढ़ाने, युद्ध प्रशिक्षण और पड़ोसी देशों के साथ सीमा पार सुरक्षा सहयोग पर औपचारिक बैठकें कीं। बातचीत में यह भी शामिल था कि काबुल अपने लड़ाकों को आधुनिक कौशल कैसे दे और क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों में अपनी भूमिका कैसे मजबूत करे।

    बता दें कि यह यात्रा काबुल और मास्को के बीच मई 2026 में बड़े सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ महीने बाद हुई है। उस समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच संपर्क तेज हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि 'सेंटर-2026' में तालिबान की मौजूदगी उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि बदलने की कोशिश का हिस्सा है। वे खुद को एक अलग-थलग सशस्त्र समूह की बजाय यूरेशियाई रक्षा नेटवर्क के मान्यता प्राप्त सरकारी हिस्सेदार के रूप में पेश करना चाहते हैं।

    पाकिस्तान के लिए क्या मायने?
    तालिबान, रूस, चीन और भारत जैसे बड़े क्षेत्रीय खिलाड़ियों के बीच बढ़ता तालमेल ऐसे समय में हो रहा है जब काबुल और इस्लामाबाद के रिश्ते पहले से ही बहुत तनावपूर्ण हैं। सीमा पर झड़पें, आतंकी हमलों के आरोप और कूटनीतिक ठहराव ने दोनों पड़ोसियों के बीच अविश्वास बढ़ा दिया है।

    रूस तालिबान को क्षेत्रीय सुरक्षा अभ्यासों में तेजी से शामिल कर रहा है। ऐसे में पाकिस्तान अफगानिस्तान को लेकर अपनी रणनीति में खुद को अलग-थलग पा रहा है। इस्लामाबाद लंबे समय से काबुल पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेने का दबाव बनाता रहा है। लेकिन अब तालिबान को मास्को जैसे बड़े खिलाड़ी से प्रशिक्षण, नेटवर्किंग और आधुनिक सैन्य उपकरणों तक पहुंच मिल रही है।

    वहीं, जानकारों का आकलन है कि इससे तालिबान की पारंपरिक युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। ड्रोन, लंबी दूरी के हथियार, बेहतर प्रशिक्षण और क्षेत्रीय संपर्कों का असर डूरंड रेखा पर शक्ति संतुलन को बदल सकता है। पाकिस्तान के लिए यह संदेश साफ है कि अफगानिस्तान अब सिर्फ उसके प्रभाव क्षेत्र का मुद्दा नहीं रहा। काबुल नई सैन्य और कूटनीतिक साझेदारियां बना रहा है, और इसका सीधा असर सीमा सुरक्षा व क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है।