Category: देश

  • UPI MDR पर बढ़ी हलचल, 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक; जनवरी 2027 तक टालने की मांग

    UPI MDR पर बढ़ी हलचल, 15 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक; जनवरी 2027 तक टालने की मांग

    नई दिल्ली
    यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) लगाने की योजना 15 अक्टूबर से लागू होनी है। लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे 1 जनवरी तक टालने पर विचार किया जा रहा है। यानी फेस्टिव सीजन में इससे रिटेलर्स को राहत मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में इस पर फैसला ले सकती है।

    इस रिपोर्ट से पेमेंट एग्रीगेटर्स पेटीएम के शेयर 10% गिर गए और कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से नीचे चला गया। इसी तरह मोबिक्विक और पाइन लैब्स में 8% तक की गिरावट आई। पेटीएम के शेयर कुछ देर के लिए 1,558.80 रुपये के लोअर सर्किट पर पहुंच गए। मार्केट खुलने के कुछ ही मिनटों में कंपनी का मार्केट कैप करीब 10,972 करोड़ रुपये कम हो गया।

    पेटीएम शेयर
    पेटीएम का 52 हफ्ते का टॉप 1,856.50 रुपये है। मोबिक्विक के शेयर 8% से ज्यादा गिरकर 234.52 रुपये पर आ गए, जबकि पाइन लैब्स के शेयर 4% से ज्यादा फिसलकर 170.21 रुपये पर आ गए। मोबिक्विक का 52 हफ्ते का टॉप 290.35 रुपये है। इसी तरह पाइन लैब्स का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 283.70 रुपये है।

    ट्रेडर्स और इंडस्ट्री एसोसिएशन के इस बात पर चिंता जताई थी कि त्योहारों की सेल के दौरान MDR शुरू करने से बिजनेस के लिए ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) की अगुवाई वाली UPI और सर्विस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य बुधवार को MDR टाइमिंग और दूसरी बातों पर चर्चा करने के लिए मिले।

    वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह 
     एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए। 

    वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए। 

    UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव? 
    NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है. 

    इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। 

    ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है। 

    2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं?
    2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा। 

    रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा। 

    अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं
    सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। 

    इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा। 

    नो यूपीआई डे
    इस महीने की शुरुआत में, होलसेल ट्रेडर्स और रिटेलर्स ने 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR के प्रस्तावित लागू होने के विरोध में 'नो UPI डे' मनाया था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कमेटी 40 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले बिजनेस को MDR फीस से छूट देने पर भी विचार कर रही है। मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत 1 लाख रुपये तक के मंथली टर्नओवर वाले बिजनेस को रोलआउट के तहत छूट दी जानी थी।

     

  • भारत की एयर पावर को मिलेगा बूस्ट, अमेरिकी कंपनी ने सौंपे 4 F404 इंजन; तेजस की डिलीवरी होगी तेज

    भारत की एयर पावर को मिलेगा बूस्ट, अमेरिकी कंपनी ने सौंपे 4 F404 इंजन; तेजस की डिलीवरी होगी तेज

    बेंगलुरु 

     भारत के तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम को नई रफ्तार मिली है. अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी ने देसी राफेल फाइटर जेट के नाम से मशहूर तेजस लड़ाकू विमान के लिए 4 F404 इंजन भेजा है. बता दें कि इंजन की आपूर्ति में देरी की वजह से तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम पर प्रतिकूल असर पड़ा और यह प्रोग्राम तय समय से काफी पीछे चल रहा है. अब इसके रफ्तार पकड़ने की संभावना बढ़ गई है. अमेरिकी कंपनी ने तेजस फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए इंजन की आपूर्ति शुरू कर दी है. सितंबर महीने में 4 F404 भेजे गए. बताया जा रहा है कि ऐसे 20 जेट इंजनों की सप्‍लाई का प्‍लान ट्रैक पर है। 

    जानकारी के अनुसार, अमेरिकी कंपनी GE Aerospace ने भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस कार्यक्रम के लिए सितंबर 2026 में 4 F404-IN20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भेजे हैं. कंपनी के प्रवक्ता ने न्‍यूज एजेंसी ANI को यह जानकारी दी है. इसके साथ ही जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 इंजनों की आपूर्ति के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में कंपनी की प्रगति जारी है. GE Aerospace के प्रवक्ता ने आगे बताया कि कंपनी भारत के तेजस लड़ाकू विमानों को शक्ति देने के लिए आवश्यक इंजनों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किए हुए है. कंपनी ने HAL और भारतीय वायुसेना के साथ अपनी साझेदारी पर भी जोर दिया. सितंबर की खेप से पहले अगस्त में तीन इंजन HAL को भेजे गए थे। 

    2021 में 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर
    पूर्व HAL चेयरमैन डीके सुनील ने अप्रैल में ANI को बताया था कि GE ने जून से दिसंबर 2026 के बीच 20 F404 इंजन की आपूर्ति का आश्वासन दिया है. HAL ने तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए 2021 में GE से 99 F404-IN20 इंजन का ऑर्डर दिया था. इस ऑर्डर के तहत पहला इंजन 25 मार्च 2025 को भारत पहुंचा था. GE के मुताबिक, अतिरिक्त ऑर्डर मिलने के समय F404-IN20 इंजन की उत्पादन लाइन करीब 5 वर्षों से बंद थी. कंपनी को उत्पादन दोबारा शुरू करने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन को भी फिर से सक्रिय करना पड़ा. GE के कॉम्बैट एंड ट्रेनर इंजन कारोबार के महाप्रबंधक शॉन वॉरेन ने बताया था कि कोविड-19 महामारी के कारण यह प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण हो गई थी। 

  • नमो भारत में सफर के साथ मिलेगा संस्कृति का अनुभव, स्टेशनों पर दिखेगी भारतीय कला और विरासत

    नमो भारत में सफर के साथ मिलेगा संस्कृति का अनुभव, स्टेशनों पर दिखेगी भारतीय कला और विरासत

     नई दिल्ली
     नमो भारत ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही यात्रा के दौरान भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति का अनूठा अनुभव मिलेगा।नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) ने नमो भारत स्टेशनों के माध्यम से लोगों को देश की समृद्ध विरासत से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

    इस पहल के तहत नमो भारत स्टेशन प्रदर्शनियों, साहित्यिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सांस्कृतिक आयोजनों के प्रमुख केंद्र बनेंगे।

    ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ने का प्रयास
    दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण दो शहरों को आपस में जोड़ता है। एक तरफ जहां राजधानी दिल्ली देश की राजनीतिक और सांस्कृतिक यात्रा का प्रमुख केंद्र रही है।

    वहीं, मेरठ मेंमहाभारतकालीन धरोहर के साथ-साथ 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की जननी रहा है। इस समृद्ध पृष्ठभूमि में एनसीआरटीसी और आईजीएनसीए के बीच हुआ यह समझौता यात्रियों को उनकी रोजमर्रा की यात्रा के दौरान देश की विविधता और सांस्कृतिक पहलुओं से रूबरू कराएगा।

    स्टेशन परिसरों में आयोजित होंगी कला प्रदर्शनियां और वर्कशॉप
    इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान नमो भारत स्टेशन परिसरों में सार्वजनिक जुड़ाव से जुड़ी कई गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। इसमें विशेष कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, विरासत से जुड़ी झलकियां, साहित्यिक कार्यक्रम, व्याख्यान, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की कलात्मक और सांस्कृतिक परंपराओं को दैनिक आवाजाही के सार्वजनिक स्थानों तक लाकर आम जनमानस से सीधे जोड़ना है।

    रोजाना 1.1 लाख से अधिक यात्री कर रहे हैं सफर
    वर्तमान में नमो भारत कॉरिडोर पर दैनिक रूप से लगभग 1.1 लाख यात्री सफर कर रहे हैं, जबकि यह सेवा अब तक 4.5 करोड़ से अधिक 'कम्यूटर ट्रिप्स' का आंकड़ा पार कर चुकी है। यात्रियों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि नमो भारत स्टेशन अब केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक और सामाजिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

    कलाकारों और छात्रों को मिलेगा नया मंच
    यह पहल छात्रों, युवा कलाकारों, सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और शिक्षण संस्थानों के लिए भी बड़े अवसर प्रदान करेगी। एनसीआरटीसी स्टेशनों को एक जीवंत 'सोशल हब' के रूप में विकसित कर रहा है।

    वहीं, आईजीएनसीए अपनी विशेषज्ञता के जरिए देश की कला और परंपराओं को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाएगा। इस प्रयास से नमो भारत के स्टेशन भारतीय संस्कृति, परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों के संवर्धन का एक प्रमुख जरिया बनेंगे।

  • एनएमडीसी में सतर्कता मामलों पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम

    एनएमडीसी में सतर्कता मामलों पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम

    हैदराबाद

    एनएमडीसी लिमिटेड के सतर्कता विभाग ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह (VAW) 2026 के तहत केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा पहचाने गए प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 7 और 8 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में पब्लिक प्रोक्‍यूरमेंट में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं, जीईएम – नई विशेषताएं और कार्यक्षमताओं, प्रभावी खरीद के लिए अनुबंध डिजाइन, और साइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता पर चार विषयगत सत्र शामिल थे, जिसका मुख्‍य उद्देश्य था – व्‍यावसायिक क्षमता को मजबूत करना, नैतिक निर्णय लेने को बढ़ावा देना और संगठनात्मक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाना ।

    उद्घाटन सत्र  कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), एनएमडीसी और  सी. नीलकंठ रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ), एनएमडीसी की गरिमामयी उपस्थित में संपन्‍न हुआ । कार्यक्रम के समापन समारोह में  विवेक निशांत नाथ,निदेशक (वाणिज्‍य), एनएमडीसी और  सी नीलकंठ रेड्डी, सीवीओ की भव्‍य उपस्थित थी, जिन्होंने निरंतर क्षमता निर्माण, नैतिक आचरण, पारदर्शी प्रणालियों और निवारक सतर्कता उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के महत्व को रेखांकित किया।

    पहले दिन  संजय अग्रवाल, आईआरएसएस, पीसीएमएम, आरसीएफ-कपूरथला द्वारा "सार्वजनिक खरीद में लोकाचार" पर सत्र में व्‍याख्‍यान व प्रस्‍तुतीकरण दिए गएं, जिनमें सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, नैतिक निर्णय लेने और स्थापित खरीद सिद्धांतों के अनुपालन पर जोर दिया गया। इसके अलावा,  अनुज कुमार, निदेशक (जीईएम) ने "जीईएम – नए विशेषताएं और कार्यविधियां" पर एक सत्र का संचालन किया, जिसमें हाल के घटनाक्रमों, डिजिटल खरीद तंत्र और सरकारी ई-मार्केटप्लेस के प्रभावी उपयोग के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रकाश डाला गया।

    दूसरे दिन,  अंकुर वास्तव, कंट्रोलर, एनआरएससी ने प्रभावी खरीद अनुबंध विकसित करने पर व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और प्रासंगिक केस स्टडी साझा करते हुए "प्रभावी खरीद के लिए अनुबंध डिजाइन" पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया । मती के.इन्‍द्रावेणी, वैज्ञानिक-एफ, और एसोसिएट डायरेक्टर, सी-डेक ने साइबर खतरों, जिम्मेदार डिजिटल प्रथाओं और कार्यस्थल में सुरक्षा-सचेत व्यवहार बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए "साइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता" के संबंध में प्रतिभागियों को विस्‍तार से अवगत कराया ।

    इन सत्रों में एथिकल प्रोक्‍यूरमेंट, अनुबंध प्रबंधन, डिजिटल खरीद प्लेटफॉर्म और साइबर सुरक्षा के संबंध में  प्रतिभागियों की समझ को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ दृष्टिकोणों को व्यावहारिक अंतर्दृष्टि के साथ जोड़ा गया। संवादात्मक चर्चाओं के माध्‍यम से व्यावसायिक अनुभवों के आदान-प्रदान को सुगम बनाया और इस संबंध में अपने प्रतिभागियों को कार्यालय के कामकाज में आनेवाली कठिनाइयों को कम करने और अनियमितताओं को रोकने में मजबूत प्रणालियों, ठोस निर्णय लेने और प्रक्रियात्मक अनुपालन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया ।  

    एनएमडीसी के मुख्‍यालय और विभिन्न परियोजनाओं से नामित अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम ज्ञान साझाकरण, व्यावसायिक विकास और निवारक सतर्कता के माध्यम से संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एनएमडीसी के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

    इस महत्‍वपूर्ण दो दिवसीय कार्यक्रम ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 और सुशासन के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप ईमानदारी, पारदर्शिता, जवाबदेही और उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

  • एंटीलिया केस में सचिन वाजे की कारों पर हाईकोर्ट की नजर, BMW-Volvo और 2 Mercedes समेत 5 गाड़ियां

    एंटीलिया केस में सचिन वाजे की कारों पर हाईकोर्ट की नजर, BMW-Volvo और 2 Mercedes समेत 5 गाड़ियां

     मुंबई

    एंटीलिया बम केस में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की जमानत रद्द करने की NIA की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत में जब सचिन वाजे द्वारा इस्तेमाल की जा रही महंगी और लग्जरी गाड़ियों का ब्योरा सामने आया, तो जजों की बेंच भी हैरान रह गई। मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच कर रही थी. एनआईए की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह कोर्ट के सामने जांच के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयान पढ़ रहे थे। 

    इन बयानों में साल 2021 की एक घटना का भी जिक्र था. गवाह ने बताया कि जब वाजे को लगा कि मामला बिगड़ सकता है और एनआईए जांच में आ सकती है, तब उसने अपने साथियों के साथ अपने मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान को नष्ट करने और उन्हें मीठी नदी में फेंकने की बात कही थी। 

    'काली मर्सिडीज में बैठा था वाजे'
    अनिल सिंह ने एक गवाह का बयान पढ़ते हुए बताया कि वाजे ने अपने साथियों को अपने साथ आने के लिए कहा. इसके बाद सभी लोग नीचे आए और एक काली मर्सिडीज में बैठे. गवाह के मुताबिक, कार में बैठने के बाद वाजे ने फिर सभी से अपने मोबाइल फोन बंद करने को कहा। 

    यह सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूछा कि यह मर्सिडीज किसकी थी? क्या यह वाजे की अपनी कार थी? अनिल सिंह ने जवाब दिया कि हां, यह कार वाजे की थी। 

    इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी वाजे के नाम पर था? बेंच ने कहा कि आमतौर पर असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को मर्सिडीज चलाते हुए देखने को नहीं मिलता। 

    अनिल सिंह ने कहा कि ऐसे कई अधिकारी हैं. इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या किसी इंस्पेक्टर जनरल के पास मर्सिडीज है? उन्होंने जवाब दिया कि हो सकता है IG के पास भी न हो, यहां तक कि कमिश्नर के पास भी न हो, लेकिन असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर के पास मर्सिडीज हो सकती है. ऐसा कोई नियम नहीं है कि कमिश्नर के पास मर्सिडीज होनी ही चाहिए। 

    कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी बात है जिस पर पुलिस कमिश्नर को भी ध्यान देना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पहले यह देखना जरूरी है कि कार वास्तव में वाजे की ही थी या नहीं। 

    बेंच ने कहा कि जब वर्दी में रहे किसी व्यक्ति पर किसी अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया जाता है तो पूरे मामले को समझने के लिए उसकी पूरी स्थिति देखना जरूरी है. उसकी नौकरी के प्रति ईमानदारी, उसका काम, उसकी पोस्टिंग, उसने किस तरह काम किया और वर्दी में रहते हुए उसका व्यवहार कैसा रहा, इन सभी बातों को भी ध्यान में रखना होगा। 

    कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान सामने आई ऐसी चीजों को समझना जरूरी है, क्योंकि रिकॉर्ड में बार-बार वाजे के इन महंगी गाड़ियों में घूमने की बात सामने आ रही है. बेंच ने पूछा कि आखिर ये गाड़ियां किसकी थीं और वाजे इनका इस्तेमाल क्यों कर रहा था। 

    CM के घर भी महंगी कार से जाता था वाजे
    कोर्ट के सामने रखे गए कई बयानों में बताया गया कि वाजे अपनी महंगी मर्सिडीज से पुलिस कमिश्नर के ऑफिस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास 'वर्षा' भी जाता था. सुनवाई के दौरान अनिल सिंह ने यह भी बताया कि वाजे दक्षिण मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में करीब 100 दिनों तक रहा था। 

    इस पर कोर्ट ने पूछा कि वह वहां इतने लंबे समय तक कैसे रह रहा था. बेंच ने यह भी पूछा कि उस समय वाजे की महीने की सैलरी कितनी थी. अनिल सिंह ने बताया कि फिलहाल उसकी सैलरी करीब 90 हजार रुपये महीना है। 

    BMW से लेकर लैंड क्रूजर तक, पांच महंगी गाड़ियां
    सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने वाजे के पास इस्तेमाल की गई पांच गाड़ियों की लिस्ट भी रखी गई. इसमें सफेद BMW, काली Volvo, सफेद Mercedes, सफेद Toyota Land Cruiser Prado और  काली Mercedes शामिल हैं. लिस्ट देखने के बाद कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा, 'इसके पास 5 कारें हैं!

    अनिल सिंह ने बताया कि जांच के दौरान उन कार डीलरों के बयान भी दर्ज किए गए थे, जिन्होंने वाजे को ये गाड़ियां बेची थीं. इन गाड़ियों और उनके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी जांच में सामने आई थी। 

    वाजे पर वसूली का भी मामला
    सचिन वाजे पर महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के साथ कथित वसूली के मामले में भी सीबीआई ने केस दर्ज किया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब जांच एजेंसी पूरे मामले को वसूली से जोड़ रही है तो वाजे की महंगी गाड़ियों, होटल में रहने और दूसरे खर्चों से जुड़ी जानकारी भी मामले को समझने के लिए अहम हो सकती है. सीबीआई के मामले में विशेष अदालत ने बाद में वाजे को सरकारी गवाह बनने के लिए माफी दे दी थी. हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वह अब भी आरोपी है। 

  • आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की बड़ी छलांग! अगले दशक में $8 ट्रिलियन पार होने का अनुमान

    आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की बड़ी छलांग! अगले दशक में $8 ट्रिलियन पार होने का अनुमान

    नई दिल्ली
    दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं इस समय कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही हैं. कहीं महंगाई दबाव बना रही है, तो कहीं कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक रफ्तार के लिए चुनौती बने हुए हैं. इन सबके बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी रफ्तार बनाए रखने में सफल रही है. ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म 'कोहलबर्ग क्राविस रॉबर्ट्स एंड कंपनी' (Kohlberg Kravis Roberts & Co. – KKR) का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था के आगे अभी लंबी ग्रोथ की गुंजाइश है और अगले 10 साल में यह 8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के स्तर तक पहुंच सकती है। 

    केकेआर ने अक्टूबर 2026 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत 4 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लेवल पार कर चुका है. अब यहां से अर्थव्यवस्था के फिर दोगुना होने की राह बनती दिख रही है. फर्म के मुताबिक, पिछले एक दशक में किए गए कई ढांचागत सुधारों, डिजिटलाइजेशन और लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने भारत की विकास क्षमता को मजबूत किया है। 

    सुधारों का असर अब दिख रहा

    केकेआर के मुताबिक, 2014 के बाद भारत में कई ऐसे बड़े बदलाव हुए, जिनका असर धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर पड़ा है. इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST), इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और लेबर मार्केट का ज्यादा औपचारिक होना शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाया है. केकेआर का मानना है कि ऐसे ढांचागत सुधारों का असर किसी एक तिमाही में नहीं, बल्कि कई वर्षों में दिखाई देता है. फर्म के मुताबिक, ये बदलाव भारत के लिए 10-11% की नॉमिनल GDP ग्रोथ के रास्ते को सहारा दे सकते हैं। 

    अभी पूरी नहीं भारत की ग्रोथ स्टोरी
    केकेआर का कहना है कि भारत की आर्थिक कहानी अभी पूरी नहीं हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, आगे की ग्रोथ सिर्फ नए सुधारों से नहीं आएगी, बल्कि पहले से लागू किए गए सुधारों का पूरा असर सामने आने से भी अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है. फर्म के अनुसार, अर्थव्यवस्था के ज्यादा औपचारिक होने से कारोबार और कैश फ्लो से जुड़े जोखिमों में कमी आई है. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लंबे समय के आउटलुक को मजबूती मिली है। 

    बढ़ती आय और खपत बड़ा सहारा
    भारत की बढ़ती आय और घरेलू खपत भी केकेआर की नजर में लंबी अवधि की बड़ी ताकत है. जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ती है, वैसे-वैसे सामान और सेवाओं पर खर्च भी बढ़ता है. इससे अर्थव्यवस्था में मांग बनी रहती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इस रफ्तार के लिए छोटी अवधि में चुनौती बन सकती है. रिपोर्ट में करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल की कीमत का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे कुछ समय के लिए ग्रोथ धीमी हो सकती है. हालांकि, केकेआर के मुताबिक सरकारी नीतियों ने इस बार घरेलू परिवारों पर उतना बोझ नहीं डाला है, जितना पिछले तेल संकटों के दौरान देखने को मिला था। 

    सर्विसेज बनीं ग्रोथ की बड़ी ताकत
    भारत के लिए सर्विसेज सेक्टर भी आर्थिक विकास का एक अहम इंजन बनकर उभरा है. केकेआर के मुताबिक, सर्विसेज एक्सपोर्ट अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC भी पारंपरिक आईटी सर्विसेज के साथ-साथ ग्रोथ का बड़ा स्रोत बनते जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सर्विसेज का योगदान भारत की रियल GDP ग्रोथ में आधे से ज्यादा है. आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस क्षेत्र के विकास का अगला बड़ा चरण बन सकता है। 

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भी अहम
    केकेआर ने भारत के लगातार बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को भी अर्थव्यवस्था की क्षमता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर बताया है. सड़क, रेलवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न केवल आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, बल्कि लंबे समय में कारोबार की लागत और समय को कम करने में भी मदद मिलती है. कुल मिलाकर, केकेआर की रिपोर्ट भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश करती है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों जैसी वैश्विक चुनौतियां बीच-बीच में रफ्तार पर असर डाल सकती हैं. इसके बावजूद केकेआर का अनुमान है कि अगले 10 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 8 ट्रिलियन डॉलर से आगे जाने की राह पर है। 

     

  • साहित्य जगत में बड़ा सम्मान, कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन ने जीता नोबेल पुरस्कार

    साहित्य जगत में बड़ा सम्मान, कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन ने जीता नोबेल पुरस्कार

    नई दिल्ली

    कनाडा की कवि और लेखिका ऐनी कार्सन को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। स्वीडिश अकादमी ने गुरुवार को यह घोषणा की। पुरस्कार उनके साहसिक और नए अंदाज के लेखन के लिए दिया गया है। उनके काम में पुरानी क्लासिकल परंपरा से हल्की-फुल्की बातचीत के जरिए आज के साहित्य के लिए नए रूप बनाए गए हैं। बता दें कि यह पुरस्कार स्वीडिश अकादमी देती है। इसकी राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है, जो करीब 1.2 मिलियन डॉलर है।

    अकादमी की स्थायी सचिव इंग्रिड कार्लबर्ग ने बताया कि कार्सन इस खबर से बहुत हैरान थीं। बातचीत के लिए ज्यादा समय नहीं मिला। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस समय आइसलैंड में हैं और हवा की दिशा सुन रही हैं। कार्सन का लेखन कविता, गद्य, संवाद और अनुवाद का ऐसा मिश्रण है, जो किसी एक शैली में नहीं बंधता। उनका जन्म टोरंटो में हुआ था। 2022 से उनके पास आइसलैंड की नागरिकता भी है।

    वे प्राचीन ग्रीक साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं। इन अनुवादों का उनके अपने लेखन पर गहरा असर पड़ा है। उनके काम में ओपेरा के गीत, साहित्यिक आलोचना और 1998 की कविता-उपन्यास 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड' शामिल हैं। अकादमी ने कहा कि उनकी लगभग सारी रचनाएं शब्दों के प्रति भाषाविद के जुनून और कवि की नए अर्थ खोजने की चाह के बीच के रिश्ते पर टिकी हैं। वे खुद शब्दों की उत्पत्ति को अपने काम की शुरुआत मानती हैं। प्राचीन ग्रीक से उनके अनुवाद अपने आप में स्वतंत्र रचनाएं माने जा सकते हैं।

    उनकी शैली का उदाहरण 2019 की 'नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय' है। यह एक मंचन रचना है, जिसमें यूरिपिडीज के नाटक 'हेलेन' की हेलेन ऑफ ट्रॉय और मर्लिन मुनरो की कहानियों को एक साथ जोड़ा गया है। 76 साल की कार्सन इस साल पुरस्कार पाने की पसंदीदा दावेदारों में थीं। सट्टेबाजी कंपनी लैडब्रोक्स के मुताबिक उनका नाम आगे चल रहा था। इस पुरस्कार को पाने वालों में अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन, एलिस मुनरो और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे नाम भी शामिल था।

    कौन हैं एन कार्सन

    एन कार्सन कनाडा की एक प्रसिद्ध निबंधकार, अनुवादक, क्लासिकल साहित्य की विद्वान और कवयित्री हैं। उन्होंने प्राचीन यूनानी साहित्य और दर्शन को आधुनिक कविता और लेखन से जोड़ा। उनका लेखन पारंपरिक कविता से काफी अलग माना जाता है। एन कार्सन को प्राचीन यूनानी भाषा और साहित्य में रुचि बचपन से ही थी।

    ऐन कार्सन का जन्म 21 जून 1950 को कनाडा के टोरंटो शहर में हुआ था। उनके पिता बैंक में काम करते थे। हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके एक लैटिन भाषा के शिक्षक ने उन्हें प्राचीन यूनान की दुनिया और वहां की भाषा से परिचित कराया। इसके बाद यूनानी भाषा और साहित्य में उनकी रुचि बढ़ती गई।

  • SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

    SIR विवाद पर 42 पूर्व जजों का बड़ा बयान, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की निंदा

     नई दिल्ली

    चुनाव आयोग के मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच देश के 272 नागरिकों और उच्च न्यायपालिका के 42 पूर्व जजों ने एक ओपन लेटर जारी किया है. इस पत्र में चुनाव आयोग का खुलकर समर्थन किया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार बेबुनियाद सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए. पूर्व जजों ने विपक्ष के विरोध को'माहौल बनाने की सियासत' करार दिया है। 

    दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने इस मुद्दे पर बेबाक राय रखते हुए कहा. 'ये सारा शोर मतदाताओं का नहीं, बल्कि वो राजनीतिक दल मचा रहे हैं जो चुनाव जीतने में नाकाम रहे हैं। 

    जस्टिस भुइयां के बयान पर रिटायर्ड जजों की आपत्ति
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में SIR प्रक्रिया की आलोचना की थी. उन्होंने इसे नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली एक मनमानी प्रक्रिया करार दिया था. जस्टिस भुइयां के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और दूसरे रिटायर्ड जजों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। 

    उनका कहना था कि जो मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी मौजूदा जज को सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए। 

    इन पूर्व जजों का तर्क है कि कानून के दायरे में रहकर योग्य और अयोग्य मतदाताओं की छंटनी करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का वैधानिक अधिकार है. इस प्रशासनिक प्रक्रिया को 'नागरिकों को दोयम दर्जे का बनाना' कहना किसी भी तरह से संतुलित नजरिया नहीं है। 

    एक तरफ पूर्व जजों का एक बड़ा समूह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसके कानूनी अधिकारों का बचाव कर रहा है. दूसरी तरफ वकीलों के संगठनों (LAFC) ने इस पूरी प्रक्रिया के प्रभाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग का भी गठन कर दिया है। 

    बिना ठोस सबूत के EC पर आरोपों को बताया गलत
    इस बीच, पूर्व जजों के खुले पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई है कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. पत्र में बिना किसी ठोस सबूत के 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाने पर सवाल उठाए गए हैं। 

    पत्र में चेतावनी दी गई है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार 'तस्कर' या 'समझौतावादी' कहकर बदनाम करने से लोकतंत्र में आम जनता का भरोसा डगमगा सकता है. 'संस्थाओं की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनका हनन करना या उन्हें नीचा दिखाना सही नहीं है। 

    SIR का बचाव करते हुए पूर्व जजों ने कहा कि ये पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका मकसद साफ-सुथरी और सही वोटर लिस्ट तैयार करना है. 'भरोसा ही लोकतंत्र की असली मुद्रा है' और चुनावों को अमान्य ठहराने की ऐसी कोशिशें देश में अशांति और अराजकता को बढ़ावा दे सकते हैं। पत्र के आखिर में राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वो अपनी शिकायतों को संवैधानिक और कानूनी मंचों पर रखें, न कि सड़कों पर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाएं। 

  • UPI फीस पर बड़ा अपडेट, 2027 तक टल सकता है फैसला; Paytm समेत पेमेंट कंपनियों के शेयर लुढ़के

    UPI फीस पर बड़ा अपडेट, 2027 तक टल सकता है फैसला; Paytm समेत पेमेंट कंपनियों के शेयर लुढ़के

    नई दिल्ली

    देश में 2,000 रुपये से ज्‍यादा के UPI ट्रांजैक्‍शन पर 15 अक्‍टूबर से लगने वाले MDR चार्ज को इस साल टाला जा सकता है. व्‍यापारियों के संगठनों ने इस संबंध में NPCI को प्रस्‍ताव भेजा है. व्‍यापारियों ने आग्रह किया है कि 15 अक्‍टूबर से लागू होने वाले UPI-MDR चार्ज को फेस्टिव सीजन या फिर इससे भी आगे 31 दिसंबर तक टाल‍ दिया जाए. आग्रह है कि अगले साल की शुरुआत से ये चार्ज लागू किया जाए। 

    हालांकि, NPCI ने सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है.सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है. अगर व्‍यापारिक संगठनों का प्रस्‍ताव मान लिया जाता है तो ये व्‍यापारियों के लिए त्‍यौहारों के मौसम में बड़ी राहत होगी. कारण कि इस दौरान बंपर सेल होती है और बड़ी संख्‍या में लोग UPI से शॉपिंग करते है। 

    वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह 
     एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए। 

    वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए। 

    कितना MDR देना होगा?
    पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से ज्यादा के कुछ लेनदेन पर 0.4 फीसदी यानी 40 बेसिस प्वाइंट MDR तय किया था. MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया के लिए मर्चेंट की तरफ से संबंधित बैंक या भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को दिया जाता है. आसान उदाहरण से समझें तो ₹2,000 के लेनदेन पर 0.4 फीसदी के हिसाब से ₹8 और ₹10,000 के लेनदेन पर ₹40 का शुल्क बनता है. हालांकि यह शुल्क किन लेनदेन पर लागू होगा और किस श्रेणी में कितनी दर होगी, यही फिलहाल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी उलझन बनी हुई है। 

    जनवरी तक टालने की मांग क्यों?
    पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि यूपीआई में कार्ड पेमेंट की तरह एक समान फी स्ट्रक्चर नहीं है. यूटिलिटी बिल, लोन की किस्त और कैपिटल मार्केट से जुड़े लेनदेन के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इन अलग-अलग श्रेणियों और उनके नियमों को लेकर कंपनियों और मर्चेंट्स के बीच भ्रम है. यही वजह है कि पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कई संगठन चाहते हैं कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले तैयारी के लिए कुछ और समय दिया जाए। 

    फेस्टिव सीजन भी बड़ी वजह
    15 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने की तारीख ऐसे समय पड़ रही है, जब देश में त्योहारी खरीदारी शुरू हो चुकी होगी. एक सूत्र के मुताबिक, पेमेंट इंडस्ट्री के कई निकायों और मर्चेंट्स ने NPCI से कहा है कि MDR लागू करने की तारीख को फेस्टिव सीजन खत्म होने तक टाल दिया जाए. इंडस्ट्री को चिंता है कि महंगाई के दबाव के बीच त्योहारी बिक्री के दौरान कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर उनकी कमाई और ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है. यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ कारोबारी MDR का बोझ किसी न किसी तरीके से ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकते हैं। 

    UPI और कार्ड पेमेंट में क्या फर्क?
    कार्ड पेमेंट में हर मर्चेंट की एक कैटेगरी होती है. कार्ड नेटवर्क इसी आधार पर लेनदेन को प्रोसेस और उसकी जांच करते हैं. कार्ड में MDR की दरें भी अपेक्षाकृत एक जैसी व्यवस्था में होती हैं. यूपीआई में स्थिति थोड़ी अलग है. यहां अलग-अलग तरह के पेमेंट के लिए अलग नियम और शुल्क की व्यवस्था बनाई गई है. इनमें से कुछ ऐसे भुगतान भी हैं, जिन्हें कार्ड के जरिए किया ही नहीं जा सकता. यूपीआई के लोकप्रिय होने से पहले लोन की किस्त या कैपिटल मार्केट से जुड़े कई भुगतान नेट बैंकिंग, IMPS, NEFT और RTGS जैसे माध्यमों से किए जाते थे. इन माध्यमों पर शुल्क की अलग व्यवस्था थी। 

    लोन रीपेमेंट को लेकर सबसे ज्यादा उलझन
    लोन की किस्त के भुगतान को लेकर भी MDR व्यवस्था में पेमेंट इंडस्ट्री के बीच सवाल हैं. कुछ मामलों में बैंक पैसे भेजने वाले और पाने वाले, दोनों पक्षों से शुल्क लेते थे. कैपिटल मार्केट से जुड़े पक्षों का तर्क है कि ब्रोकिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट की तरह है. इसलिए ब्रोकिंग कंपनियों पर MDR नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इस तरह के लेनदेन से उन्हें सीधे कमाई नहीं होती। 

    मैनुअल लोन पेमेंट पर भी सवाल
    छोटी रकम वाले कई लोन में ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है. इसकी एक वजह यह होती है कि ग्राहक के बैंक खाते में तय समय पर पर्याप्त बैलेंस नहीं होता. इसके बाद ग्राहक खुद मैनुअल तरीके से लोन की किस्त जमा करता है. यहीं से नया सवाल खड़ा होता है. मैनुअल पेमेंट को फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पेमेंट माना जाता है, तो उस पर 0.4 फीसदी MDR लग सकता है. वहीं NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे पेमेंट पर ₹5 की फ्लैट फीस का प्रावधान है. अब बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर्स के सामने यह सवाल है कि लोन रीपेमेंट और सामान्य फाइनेंशियल सर्विस ट्रांजैक्शन में अंतर कैसे किया जाए. इसी वजह से नई व्यवस्था के लागू होने से पहले नियमों को लेकर और स्पष्टता की मांग की जा रही है। 

    अब NPCI के फैसले पर नजर
    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 अक्टूबर से MDR लागू होगा या इसे जनवरी 2027 तक टाल दिया जाएगा. इंडस्ट्री की मांग NPCI तक पहुंच चुकी है और वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा जारी बताई जा रही है. अगर NPCI तारीख नहीं बदलता है, तो तय नियम के मुताबिक 15 अक्टूबर से पात्र ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू हो जाएगा. वहीं अगर मांग स्वीकार होती है, तो कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों को तैयारी के लिए कुछ और समय मिल सकता है. अब अगले दो दिनों में NPCI के फैसले पर सबकी नजर है. इसी से साफ होगा कि 15 अक्टूबर की डेडलाइन बरकरार रहती है या यूपीआई MDR पर जनवरी 2027 तक राहत मिलती है। 

    UPI-MDR चार्ज पर क्‍या है प्रस्‍ताव? 
    NPCI के मुताबिक, 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजैक्‍शन पर 0.4 % का MDR चार्ज लागू किया जाना है। 

    इस हिसाब से 75,000 रुपये के लेनदेन पर चार्ज 300 रुपये बनते हैं.हालांकि एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। 

    ऐसे में 75,000 रुपये से ऊपर के जो भी ट्रांजैक्‍शन होंगे, उनपर अधिकतम यानी 300 रुपये MDR चार्ज लिए जाने का प्रावधान है। 

    2,000 रुपये से ऊपर हर ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं?
    2,000 रुपये से ज्यादा के सिर्फ तय Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा. सामान्य दर 0.4% होगी, जबकि 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR 300 रुपये होगा। 

    रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी सेक्टरों में 2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR होगा। 

    अहम बात ये है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा. बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें। 

    96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं
    सरकार के मुताबिक, करीब 96% UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे. ₹2,000 तक के सभी UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। 

    इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI पेमेंट किसी भी रकम पर फ्री रहेगा. छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख तक मिलने वाली रकम पर भी MDR नहीं लगेगा. RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी MDR शून्य रहेगा। 

  • इंडिया मोबाइल कांग्रेस में PM मोदी का विपक्ष पर तंज, DBT की बचत से डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा तक की चर्चा

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस में PM मोदी का विपक्ष पर तंज, DBT की बचत से डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा तक की चर्चा

      नई दिल्ली

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण में डिजिटल तकनीक और सरकारी योजनाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रह गया है. यह सुशासन का बड़ा माध्यम बन चुका है. इसी दौरान उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT का भी जिक्र किया। 

    पीएम ने कहा कि DBT के जरिए 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचे हैं. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस वजह से जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हो चुकी है, वो मोदी से प्यार करेंगे क्या?

     '5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे'

    पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की डिजिटल व्यवस्था से सरकारी मदद सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि मोबाइल से जुड़े बैंक खातों के जरिए लोगों तक सरकारी सहायता पहुंची है. इससे व्यवस्था में होने वाली लीकेज को रोकने में मदद मिली है। 

    उन्होंने कहा कि DBT के जरिए 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के खातों में पहुंचे. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई. पीएम ने कहा कि यह कोई छोटी रकम नहीं है. उनके मुताबिक, यह पैसा गलत हाथों में जाने से बचा है। 

    पीएम मोदी ने इसी बात को लेकर सवालिया अंदाज में कहा कि जिन लोगों की बिना मेहनत की कमाई बंद हो गई है, वे मोदी से प्यार करेंगे क्या? उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने सही काम किया या नहीं. पीएम ने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जाना चाहिए या नहीं. उन्होंने कहा कि विरोध और आलोचना के बावजूद वह इस काम को जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि वह इसे पूरा करके रहेंगे। 

    पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 से 12 साल में मोबाइल फोन की भूमिका काफी बदल गई है. अब यह सिर्फ बातचीत करने का साधन नहीं है. मोबाइल के जरिए सरकारी सेवाएं भी लोगों तक पहुंच रही हैं. उन्होंने कहा कि आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध हैं. लोगों को कई कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का तरीका बदला है। 

     डीपफेक और साइबर सुरक्षा पर भी की बात
    प्रधानमंत्री ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने डेटा की सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी का मुद्दा उठाया. उन्होंने डीपफेक जैसी तकनीक से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा कि डिजिटल दुनिया में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत ढांचे की जरूरत है. उन्होंने डेटा और डिजिटल सुरक्षा को लेकर देशों के बीच सहयोग की जरूरत बताई। 

    पीएम मोदी ने भारत के गेमिंग इकोसिस्टम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग गेमिंग इकोसिस्टम का हिस्सा हैं. इसमें छोटे शहरों और कस्बों के युवाओं की भी बड़ी भूमिका है। 

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा देश और विदेश के कई उद्योगपति और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग शामिल हुए।