Category: देश

  • गन्ना रिकवरी से भुगतान तक के विवाद सुलझाएगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

    गन्ना रिकवरी से भुगतान तक के विवाद सुलझाएगी कमेटी, शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

    गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम: 1 हफ्ते में उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान

    मोदी सरकार की प्राथमिकता में अन्नदाता: गन्ना रिकवरी में हेराफेरी और समस्याओं पर कड़ा रुख, शिवराज सिंह चौहान ने दिए ठोस व्यवस्था के निर्देश

    नई दिल्ली
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के सर्वांगीण कल्याण, उनकी उपज के पारदर्शी मूल्यांकन और आय सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील उच्चस्तरीय बैठक की।

    इस बैठक में कर्नाटक सरकार के संबंधित मंत्रीगण तथा केंद्र व राज्य सरकारों के सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में गन्ना किसानों की जमीनी समस्याओं, शुगर मिलों द्वारा रिकवरी के आंकड़ों में अंतर, वजन, वेस्टेज, प्रयोगशाला जांच और फसल बीमा से जुड़े विभिन्न विषयों पर बिंदुवार व विस्तार से सार्थक चर्चा हुई।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ किसानों की बात को बेहद गंभीरता और आत्मीयता से सुनते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा के समान है। अन्नदाता का शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों द्वारा रखे गए रिकवरी डिफरेंस, वजन में कटौती और मिलों द्वारा वास्तविक रिकवरी छिपाने जैसी विसंगतियों को उन्होंने बेहद संवेदनशील विषय बताया। चौहान ने कहा कि इन विसंगतियों का कोई भी तात्कालिक या आधा-अधूरा समाधान निकालने के बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के हक पर डाका न डाल सके।

    किसानों को तत्काल और प्रभावी राहत देने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्री चौहान ने प्रह्लाद जोशी के साथ बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि एक सप्ताह के भीतर एक विशेष उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों (कर्नाटक व महाराष्ट्र), किसान संगठनों के अधिकृत प्रतिनिधि, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों को शामिल किया जाएगा। यह कमेटी गन्ने की कटाई के समय, रिकवरी के साइंटिफिक मापदंड, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और वजन की शुद्धता से जुड़े हर तकनीकी पहलू की बारीकी से जांच करेगी और एक निश्चित समय-सीमा में अपनी व्यावहारिक सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में राज्य सरकार से भी सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि किसानों की भलाई के लिए और तेजी से कार्यवाही की जा सकें।

    शिवराज सिंह द्वारा प्रह्लाद जोशी के साथ आयोजित इस बैठक में यह भी तय किया गया कि समस्याओं के समाधान को दो चरणों- अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) में विभाजित कर नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। तात्कालिक प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के साथ ही नीतिगत व तकनीकी व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्थायी रूप से सुदृढ़ किया जाएगा।

    किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पूरी बैठक में स्वयं उपस्थित रहकर संवाद को निष्कर्ष तक पहुंचाया। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सुझावों पर अमल करेगी और मोदी सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हरसंभव सहयोग, सहायता और ठोस व्यवस्था निरंतर जारी रखेगी।

    केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी बैठक में गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) निर्धारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया और लागत आकलन के तौर-तरीकों की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार राज्यों और किसानों के समन्वय से हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।

     

  • सितंबर में महंगाई ने बढ़ाई चिंता, अनुमान से ज्यादा 5.54% पर पहुंची खुदरा महंगाई; त्योहारों के बजट पर असर

    सितंबर में महंगाई ने बढ़ाई चिंता, अनुमान से ज्यादा 5.54% पर पहुंची खुदरा महंगाई; त्योहारों के बजट पर असर

     नई दिल्ली

    भारत में फेस्टिव सीजन की शुरुआत से ठीक पहले महंगाई के मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है. सोमवार को देश में खुदरा महंगाई दर के आंकड़े आए, जो टेंशन बढ़ाने वाले हैं. दरअसल, सितंबर महीने में रिटेल महंगाई जोरदार रफ्तार से बढ़ते हुए 5.54% पर पहुंच गई, जबकि इससे पहले अगस्त महीने में ये 4.82% दर्ज की गई थी. यानी महीनेभर में महंगाई 0.72% बढ़ गई है. खासतौर पर खाने-पीने के सामानों के दाम बढ़ने का असर देखने को मिला है, जो महंगाई बढ़ाने में अहम रहे हैं।  

    खाद्य महंगाई तो 8% के करीब
    सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों को देखें, तो सितंबर महीने में भारत में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.54% हो गई, जबकि खाद्य महंगाई दर तेज रफ्तार से बढ़ते हुए 7.74% तक पहुंच गई. महंगाई के ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि खाने-पीने के सामानों की बढ़ती कीमतों ने परिवारों के बजट को बिगाड़ने में अहम रोल निभाया है। 

    खुदरा महंगाई की सालाना दर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित होती है, जबकि खाद्य महंगाई को उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) का उपयोग करके मापा जाता है. दोनों की तुलना सितंबर 2026 की तुलना पिछले वर्ष के इसी महीने से की जाती है।

    ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में क्या हाल? 
    सितंबर महीने में ग्रामीण क्षेत्रों में रिटेल महंगाई 6.08% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88% रही. यानी शहरों की तुलना में ग्रामीण भारत में कीमतों पर दबाव अधिक रहा. बात खाद्य महंगाई की करें, तो ये ग्रामीण क्षेत्रों में 8.06% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में 7.18% दर्ज की गई. इस माह के दौरान अखिल भारतीय खाद्य मुद्रास्फीति दर 7.74% रही। 

    प्याज ने निकाले आंसू, चांदी की चमक तेज
    सितंबर में लिस्टेड वस्तुओं में महंगाई की सबसे ज्यादा मार प्याज पर पड़ी. Onion Price में सालाना आधार पर 108.09% की वृद्धि दर्ज की गई. इससे पहले अगस्त में यह 48.78% थी. इसके अलावा चांदी के आभूषणों (Silver Jewelley) की महंगाई दर 87.80% रही. अदरक के दाम में 62.85% का उछाल, तो वहीं लहसुन की महंगाई दर बीते महीने के 43.60% से बढ़कर 54.62% हो गई. नींबू की कीमतों में भी वृद्धि देखी गई, इसपर महंगाई दर 36.41% तक पहुंच गई। 

    हालांकि, आलू की कीमतों में साल-दर-साल 11.50% की गिरावट आई, जबकि टमाटर की कीमतों में 8.62% की कमी दर्ज की गई. सितंबर में मोटर कार और जीप, भिंडी और नारियल की कीमतों में भी मुद्रास्फीति नकारात्मक रही. MoSPI ने बताया कि ऑनलाइन बाजारों सहित 1,407 शहरी बाजारों और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 1,465 गांवों से मूल्य आंकड़े इकठ्ठा किए गए. सितंबर माह के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में प्रतिक्रिया दर 100% रही। 

  • तमिलनाडु को मैन्युफैक्चरिंग और मेट्रो विस्तार से मिलेगी रफ्तार, PM मोदी ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा

    तमिलनाडु को मैन्युफैक्चरिंग और मेट्रो विस्तार से मिलेगी रफ्तार, PM मोदी ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा

    चेन्नई
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के दौरे के दौरान राज्य के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य में भले ही सरकारें बदलती रही हों, लेकिन तमिलनाडु की तरक्की और यहां के लोगों की सेवा करने का उनका संकल्प हमेशा एक जैसा मजबूत रहा है।

    प्रधानमंत्री ने चेन्नई में 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उनके साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

    इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद और निरंतर सहयोग जारी रखने का पूरा भरोसा दिलाया।

    देश और राज्यों के रिश्ते पर दिया जोर
    कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने देश और राज्यों के मजबूत रिश्ते पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर देश को मजबूत बनाना है, तो सबसे पहले राज्यों को आर्थिक रूप से सशक्त करना होगा। इसी दिशा में केंद्र सरकार तमिलनाडु जैसे राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लगातार बढ़ावा दे रही है।

    मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल जैसी महत्वाकांक्षी पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इन योजनाओं से तमिलनाडु को अभूतपूर्व लाभ मिला है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में हुई इस बढ़ोतरी से देश भर के लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिसमें तमिलनाडु की भूमिका बेहद सराहनीय और अग्रणी रही है।

    12 सालों में मेट्रों सेवाओं का हुआ विस्तार
    शहरी विकास और पब्लिक ट्रांसफोर्ट के महत्व पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 सालों के भीतर देश के 25 प्रमुख शहरों तक मेट्रों सेवाओं का शानदार विस्तार हुआ है। साल 2014 में देश का मेट्रो नेटवर्क महज 250 किलोमीटर था, जो बढ़कर साल 2026 में 1,100 किलोमीटर तक पहुंच गया है।

    उन्होंने भरोसा दिलाया कि हाल ही में शुरू किए गए नए प्रोजेक्ट्स से न सिर्फ आम जनता का सफर आसान होगा, बल्कि पूरे राज्य में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को एक नई रफ्तार मिलेगी।

    विजय ने पीएम के सामने रखी बड़ी मांगे
    वहीं मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दूसेर चरण का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के समग्र विकास से जुड़ी कई प्रमुख और अहम मांगे प्रधानमंत्री के सामने रखीं।

    विजय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि चेन्नई मेट्रो के तीसरे चरण को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने कोयंबटूर और मदुरै के लिए प्रस्तावित मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स पर दोबारा विचार करने और बोम्मासमुद्रम को होसुर से जोड़ने वाले अंतर-राज्यीय मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए भी केंद्र से पूरा समर्थन मांगा।

    मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के भविष्य के आर्थिक लक्ष्यों का जिक्र करते हुए बताया कि राज्य ने वर्ष 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने केंद्र से कई अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगाने की अपील की।

    इनमें गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ो परियोजना, मद्रास हाईकोर्ट की आधिकारिक भाषा के रूप में तमिल को मान्यता देना, और चेन्नई-कोयंबटूर व चेन्नई-कन्याकुमारी के बीच हाई-स्पीड कॉरिडोर का निर्माण शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने समग्र शिक्षा योजना के तहत रुके हुए फंड को बिना देरी के जारी करने पर भी विशेष जोर दिया।

    विजय की मांगों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, केंद्र तमिलनाडु के विकास को जारी रखने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगा।

  • Starlink की एंट्री पर बढ़ा विवाद, निशिकांत दुबे ने मस्क को दी अमेरिका में सस्ता इंटरनेट देने की सलाह

    Starlink की एंट्री पर बढ़ा विवाद, निशिकांत दुबे ने मस्क को दी अमेरिका में सस्ता इंटरनेट देने की सलाह

    नई दिल्ली
     भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी 'स्टारलिंक' की एंट्री को लेकर चल रहे विवाद अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ऐसे में बढ़ते विवाद के बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एलन मस्क के बयान और आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दो टूक जवाब दिया है।

    मस्क के आरोपों पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दो टूक कहा कि स्टारलिंक भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर खतरा है और भारत किसी भी दबाव में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति नहीं बदलेगा।

    निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सांसद और संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा कि पैनल ने देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आने वाली इन चुनौतियों की गहन जांच की है। उन्होंने जोर दिया कि रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और हमारी जांच एजेंसियां इस तरह के खतरों के खतरनाक खेलों से प्रभावित हो रही हैं।

    मस्क पर निशाना साधते हुए अमेरिका को दी सलाह
    अपने पोस्ट में मस्क पर निशाना साधते हुए दुबे ने कहा कि उन्हें पहले अपने देश अमेरिका में गरीबों को किफायती दरों पर इंटरनेट देना चाहिए, उसके बाद भारत पर आरोप लगाने चाहिए। दुबे ने दो टूक कहा कि भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक देश है, यह किसी के दबाव या सोशल मीडिया पोस्ट के आगे झुककर अपनी सुरक्षा नीति नहीं बदलता।

    पैसे के ऊपर देश की सुरक्षा- दुबे
    इस दौरान दुबे ने साफ किया कि अगर भारत सरकार का फैसला सिर्फ पैसों या मुनाफे पर आधारित होता, तो सुरक्षा एजेंसियों के विरोध के बावजूद वे स्टारलिंक के लिए रेड कारपेट बिछा देते। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2013-14 में मनमोहन सिंह की सरकार के समय भी TRAI को ऐसे खतरों से आगाह किया गया था।

    अब जानिए एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए?
    गौरतलब है कि इससे पहले एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी के समर्थकों जैसे प्रभावशाली व्यापारिक समूह अपनी मोनोपॉली बचाने के लिए स्टारलिंक की राह में रोड़ा अटका रहे हैं। मस्क का दावा था कि स्टारलिंक से भारतीय आम नागरिकों को फायदा होगा।

    भारत सरकार ने मस्क को दिखाया था आईना
    हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने साफ किया है कि स्टारलिंक के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है, बल्कि किसी भी कंपनी का कॉमर्शियल ऑपरेशन नियमों और सुरक्षा पर निर्भर करता है। नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी स्पष्ट किया कि भारत किसी भी सेक्टर में एकाधिकार की अनुमति नहीं देगा।

     

  • बाल विवाह के आधे से ज्यादा मामले इन 5 राज्यों में, उत्तर प्रदेश-बिहार समेत यहां सबसे बड़ी चुनौती

    बाल विवाह के आधे से ज्यादा मामले इन 5 राज्यों में, उत्तर प्रदेश-बिहार समेत यहां सबसे बड़ी चुनौती

     नई दिल्ली
    भारत में 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने का लक्ष्य नजदीक आ रहा है। इसके बावजूद दुनिया की हर तीन में से एक बालिका वधु भारतीय है और देश में हर 5 में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है। हालांकि, भारत में बाल विवाह की दर 1996 में 50 फीसदी से ज्यादा थी, जो अब घटकर लगभग 20 रह गई है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय औसत को देखकर गुमराह नहीं होना चाहिए, क्योंकि कुछ राज्यों में यह समस्या कहीं अधिक गंभीर है। यूनिसेफ और सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल बाल विवाह में से आधे से ज्यादा 5 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश) में होते हैं। बाल विवाह पर लगाम लगाने के मामले में केरल और लक्षद्वीप अच्छी प्रगति कर रहे हैं।

    यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा, 'इस साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम 'बाल विवाह खत्म करें और लड़कियों के अधिकारों में निवेश करें' है। यह किशोरावस्था के दौरान लगातार निवेश करने का आह्वान करती है, ताकि लड़कियां स्कूल न छोड़ें, स्वस्थ व सुरक्षित रहें, उनमें कौशल विकास हो, वे अवसरों का लाभ उठाएं और खुद के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों में अपना पक्ष रख सकें।' भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रयासों के जरिए लड़कियों के अधिकारों को आगे बढ़ाने और बाल विवाह में कमी लाने की दिशा में प्रगति की है। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ लड़कियों की आवाज, निर्णय लेने की क्षमता और भागीदारी को मजबूत करने से यह प्रगति और तेज होगी।

    22 करोड़ युवतियों की शादी 17 की उम्र से पहले
    सिंथिया ने कहा, 'लड़कियां सिर्फ विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि उसमें सक्रिय रूप से योगदान देने वाली भी हैं। जब लड़कियों के पास आत्मविश्वास, हुनर ​​और आगे बढ़कर नेतृत्व करने के लिए सुरक्षित माहौल होता है, तो वे मजबूत परिवार, समुदाय और समाज के निर्माण में मदद करती हैं।' यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 20-24 साल के आयु वर्ग में शामिल 22.4 करोड़ से ज्यादा युवतियों की शादी 17 साल की उम्र से पहले हो गई थी। इनमें से 9 करोड़ से ज्यादा युवतियों का विवाह 15 साल से कम उम्र में ही करा दिया गया था। यूनिसेफ का अनुमान है कि दुनिया में हर तीन सेकंड में एक लड़की की शादी होती है और ऐसी शादियों की संख्या हर दिन 1,500 तक पहुंच सकती है

    कितने परेशान करने वाले हैं आंकड़े
    क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू की CEO पूजा मारवाह ने कहा कि भारत ने इस समस्या से निपटने में काफी प्रगति की है, लेकिन बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने में अब भी काफी समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'भारत में बाल विवाह के मामलों में कमी आना अच्छी बात है, लेकिन देश में हर पांच में से एक लड़की की शादी अब भी बालिग होने से पहले कर दी जाती है। इससे भी अहम बात यह है कि राष्ट्रीय औसत के कारण अलग-अलग राज्यों और ग्रामीण व शहरी इलाकों के बीच के बड़े अंतर का पता नहीं चल पाता है।' जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने कहा कि सरकार की कोशिशों से बाल विवाह के मामलों में कमी लाने में मदद मिली है, लेकिन कम आय वाले परिवारों में यह प्रथा अब भी काफी आम है। बेहद गरीब लोग ही अपनी बेटियों की कम उम्र में शादी करने का फैसला करते हैं, क्योंकि वे उन्हें खाना नहीं खिला सकते और उनकी रोजमर्रा जिंदगी की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते। इसलिए इसमें सरकार की अलग-अलग योजनाओं की सफलता भी अहम भूमिका निभाती है।

  • असम में NCB की बड़ी कार्रवाई, ₹43 करोड़ की नशीली दवाएं बरामद; अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच तेज़

    असम में NCB की बड़ी कार्रवाई, ₹43 करोड़ की नशीली दवाएं बरामद; अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच तेज़

     दिसपुर
    नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने असम के गुवाहाटी में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 43 करोड़ की नशीली दवाओं की खेप जब्त की है। यह खेप म्यांमार से भारत के अन्य हिस्सों में भेजी जा रही थी। इस मामले में मणिपुर के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    एनसीबी की गुवाहाटी टीम ने 6 अक्टूबर को एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई की। अधिकारियों ने रास्ते में दो ट्रकों को रोककर उनकी सघन तलाशी ली। जांच के दौरान कुल 53.94 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट्स बरामद की गईं। इस मामले में पकड़े गए दोनों आरोपी मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के रहने वाले हैं।

    तेल टैंक में बने गुप्त केबिन में छिपाई गई थी नशीली दवा
    एनसीबी के अनुसार, तस्करों ने ड्रग्स छिपाने के लिए ट्रकों के फ्यूल टैंकों में खास तरह के गुप्त केबिन बना रखे थे। तलाशी के दौरान अधिकारियों को इन टैंकों के अंदर से ड्रग्स के पैकेट मिले, जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया।

    शुरुआती जांच से पता चला है कि ड्रग्स की यह खेप म्यांमार से भारत लाई गई थी। एनसीबी का कहना है कि इस जब्ती से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को झटका लगा है।

    एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स, भारत में माल मंगाने वालों, फाइनेंसरों और ट्रांसपोर्टरों का पता लगाने में जुटी है, ताकि इस गिरोह को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

    6 अन्य फरार आरोपी भी गिरफ्तार
    एनसीबी की गुवाहाटी टीम ने एब्सकॉन्डर ड्राइव फोर्टनाइट यानी फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष पखवाड़ा के तहत एनडीपीएस मामलों में वांटेड 6 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।

    पकड़े गए इन आरोपियों में 2 असम के, जबकि 1-1 आरोपी बिहार, मध्य प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा के रहने वाले हैं।

  • H-1B वीजा विवाद के बीच भारतीय मूल की न्यायविद नवी पिल्लई का जिक्र, गिरमिटिया विरासत से जुड़ी कहानी चर्चा में

    H-1B वीजा विवाद के बीच भारतीय मूल की न्यायविद नवी पिल्लई का जिक्र, गिरमिटिया विरासत से जुड़ी कहानी चर्चा में

    नई दिल्ली
    इतिहास अक्सर अपने पन्नों में क्रूरता और न्याय, दोनों का हिसाब बहुत सलीके से रखता है। एक तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा धारक उच्च-शिक्षित भारतीय पेशेवरों को अपने घरेलू राजनीतिक स्वार्थ के लिए 'इंडेंचर्ड लेबर' अर्थात विदेशी बंधुआ नौकर करार दिया है। वहीं ठीक उसी समय दुनिया के मंच पर एक ऐतिहासिक घटना घटी। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। नवी पिल्लई की रगों में उसी 'इंडेंचर्ड लेबर' का खून दौड़ रहा है, जिसके दादा-दादी को 1890 के दशक में भारत से गन्ने के खेतों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया था। यह महज एक संयोग नहीं है; यह इतिहास का सबसे बड़ा काव्यात्मक न्याय है और पश्चिमी अहंकार पर समय का एक करारा तमाचा भी।

    जेडी वेंस का 'ऐतिहासिक अज्ञान' और भारत की कड़ी आपत्ति
    किसी देश की ताकत का अंदाजा उसके हथियारों, उसकी अर्थव्यवस्था या उसके राष्ट्र प्रमुखों के बयानों से लगाया जा सकता है। लेकिन किसी सभ्यता की असली पहचान इस बात से होती है कि वह दूसरे इंसान को किस नजर से देखती है। उसके लिए इंसान एक नागरिक है, एक सहकर्मी है, एक प्रतिभा है या सिर्फ सस्ता श्रम?

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारतीय और अमेरिकी टेक कंपनियों पर आरोप लगाते हुए एच-1बी वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए ‘फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स’ जैसी ओछी शब्दावली का इस्तेमाल किया। शब्दों का अपना इतिहास होता है। कुछ शब्द केवल किसी नीति की आलोचना नहीं करते, वे अपने भीतर सदियों का अपमान और पीड़ा भी लेकर चलते हैं।

    यह केवल एक भद्दी राजनीतिक बयानबाजी नहीं है; यह उस पश्चिमी अज्ञानता का नग्न प्रदर्शन है जो औपनिवेशिक शोषण की ऐतिहासिक पीड़ा को सिरे से खारिज करता है। यही कारण है कि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे 'बेहद आक्रामक' करार दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि यह शब्दावली उन दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासतों से जुड़ी है, जिन्हें इस तरह के सस्ते राजनीतिक बयानों में इस्तेमाल करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

    'असली' गिरमिटिया संघर्ष और नवी पिल्लई की ऐतिहासिक विजय
    19वीं सदी में दास प्रथा के उन्मूलन के बाद ब्रिटिश और यूरोपीय साम्राज्यों ने अपनी अर्थव्यवस्था को जिंदा रखने के लिए भारत से लाखों लोगों को धोखे और मजबूरी में मॉरीशस, फिजी, गुयाना और दक्षिण अफ्रीका भेजा था। इन्हें गिरमिटिया कहा जाता है। वे असली बंधुआ मजदूर थे, जिन्हें अमानवीय परिस्थितियों में जहाजों में ठूंसकर ले जाया गया और जीवन भर कोड़ों की मार के साए में रखा गया। नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की विजेता नवी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका में भारतीय तमिल माता-पिता के यहां हुआ था। वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में जज तथा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के रूप में अपनी ऐतिहासिक सेवाएं दीं।

    उनकी यह वैश्विक उपलब्धि उन अनाम भारतीय पूर्वजों के खून-पसीने और संघर्ष की जीत है, जिन्होंने उस घोर औपनिवेशिक अंधकार में भी अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा और न्याय के बीज बोए। आज एक सदी से भी ज्यादा लंबे वक्त बाद, उसी शोषित परिवार की पोती शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए नोबेल जीतती है।

    H-1B पेशेवर: 'बंधुआ मजदूर' नहीं, अमेरिकी इकॉनमी की धुरी
    वेंस को यह तथ्य स्वीकार करने में शायद राजनीतिक असुविधा होती है कि सिलिकॉन वैली से लेकर वॉल स्ट्रीट तक, अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जो पहिया आज दुनिया भर में घूम रहा है, उसकी धुरी यही भारतीय पेशेवर हैं। वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट और अन्य टेक दिग्गजों पर H-1B प्रोग्राम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिकी कॉरपोरेट जगत इन पेशेवरों पर इसलिए निर्भर नहीं है कि वे "सस्ते मजदूर" हैं, बल्कि इसलिए निर्भर है क्योंकि उनके बिना अमेरिका अपना तकनीकी और नवोन्मेषी वर्चस्व खो देगा।

    भारत ने यह साफ कर दिया है कि कुशल कामगारों की इस आवाजाही से दोनों देशों को फायदा होता है, और इससे उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा तथा रोजगार सृजन को बल मिलता है। दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट्स और डेटा साइंटिस्ट्स की तुलना उन ऐतिहासिक बंधुआ मजदूरों से करना, केवल पश्चिमी राजनेताओं की बौद्धिक दरिद्रता को दर्शाता है।

    नए भारत का युग: अपनी कहानी, अपनी जुबानी
    महान साहित्यकार वी.एस. नायपॉल खुद एक गिरमिटिया परिवार से थे। उन्होंने अपनी जड़ों और पहचान के संघर्ष को उकेरते हुए लिखा था कि इतिहास हमेशा विजेताओं द्वारा लिखा जाता है, लेकिन सभ्यताएं संघर्ष करने वालों द्वारा बनाई जाती हैं। आज नवी पिल्लई का नोबेल पुरस्कार यह साबित करता है कि भारतीय डायस्पोरा ने न केवल उस औपनिवेशिक त्रासदी की राख से खुद को खड़ा किया है, बल्कि आज वे दुनिया को मानवाधिकार, न्याय और शांति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

    जेडी वेंस और उनके जैसे राजनेताओं को इस मुगालते से बाहर आ जाना चाहिए कि आज का भारत उनके द्वारा थोपी गई शब्दावलियों को चुपचाप निगल लेगा। आप अमेरिकी चुनाव रैलियों में तालियां बटोरने के लिए हमारी प्रतिभा का अपमान कर सकते हैं, लेकिन इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते। जिस 'इंडेंचर्ड लेबर' के इतिहास को आप अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी इतिहास को रौंदकर नवी पिल्लई जैसी शख्सियतें आज नोबेल जीत रही हैं, और आपके तथाकथित 'विदेशी नौकर' आपके देश के भविष्य का कोड लिख रहे हैं। यह नए भारत की बौद्धिक और कूटनीतिक धमक है, जिसे किसी भी संकीर्ण राजनीतिक बयानबाजी के दायरे में नहीं बांधा जा सकता।

    गिरमिटिया उन भारतीय मजदूर
    जाता है जिन्हें 19वीं और 20वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान एक अनुबंध (एग्रीमेंट) के तहत विदेशों में गन्ने और चाय के बागानों में काम करने के लिए ले जाया गया था। 'गिरमिटिया' (Indentured Labourers) शब्द अंग्रेजी के 'एग्रीमेंट' का अपभ्रंश है। 19वीं और 20वीं शताब्दी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों द्वारा भारत (मुख्यतः उत्तर प्रदेश और बिहार) से लाखों मजदूरों को गन्ने और रबर के खेतों में काम करने के लिए फिजी, मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे सुदूर देशों में ले जाया गया था। काव्यात्मक न्याय के संदर्भ में गिरमिटिया इतिहास को इस तरह भी देखा जा सकता है:

    भाषा और संस्कृति की विजय
    भोजपुरी और अवधी का अमर होना: जो मजदूर अपनी मातृभूमि से दूर गए, उनके पास केवल अपनी भाषा और स्मृतियां थीं। आज फिजी और मॉरीशस जैसे देशों में भोजपुरी एक जीवित और सम्मानित भाषा है। गिरमिटिया मजदूरों ने अपनी बोली को एक वैश्विक पहचान दे दी।

    तुलसीदास की रामचरितमानस: गिरमिटिया मजदूर अपने साथ 'रामचरितमानस' की प्रतियां लेकर गए थे। जहाजों के अंधेरे कमरों से लेकर गन्ने के खेतों तक, राम का वनवास उनका अपना वनवास बन गया था। आज उन देशों में रामचरितमानस का गान उनकी सांस्कृतिक उत्तरजीविता का सबसे बड़ा प्रतीक है।

    सत्ता और शक्ति का हस्तांतरण
    शोषक से शासक तक की यात्रा: काव्यात्मक न्याय का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जिन गिरमिटिया मजदूरों को गुलामों की तरह बंधुआ बनाकर ले जाया गया था, आज उन्हीं की संतानें उन देशों की नियति तय कर रही हैं।

    मॉरीशस के सर सीवूसागर रामगुलाम और प्रविंद जुगनाथ, फिजी के महेंद्र चौधरी, और गुयाना व सूरीनाम के राष्ट्रप्रमुखों के रूप में गिरमिटिया वंशजों का सत्ता में आना उस ऐतिहासिक अन्याय का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक न्याय है।

    साहित्य में पीड़ा को आवाज
    साहित्यकारों (जैसे अभिमन्यु अनत, जिन्हें मॉरीशस का प्रेमचंद कहा जाता है) ने अपने उपन्यासों जैसे 'लाल पसीना' के माध्यम से गिरमिटिया समाज के संघर्ष को अमर कर दिया

    इतिहास ने जिन्हें सिर्फ 'मजदूरों की संख्या' माना था, साहित्य ने उन्हें नायक और महानायक का दर्जा दिया। यह साहित्य का काव्यात्मक न्याय है, जिसने इतिहास के पन्नों में दबी उनकी चीखों को सुर और महत्ता दी।

    धरती को स्वर्ग बनाना
    गिरमिटिया मजदूरों को जिन बंजर द्वीपों और घने जंगलों को साफ करने के लिए भेजा गया था, उन्होंने अपने खून-पसीने से उन देशों को दुनिया के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों और समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में बदल दिया। उनका शोषण करने वाले साम्राज्य का पतन हो गया, लेकिन मजदूरों द्वारा सींची गई धरती आज भी लहलहा रही है।

  • PM मोदी ने तमिलनाडु में खोले विकास के नए रास्ते, मेट्रो-रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन

    PM मोदी ने तमिलनाडु में खोले विकास के नए रास्ते, मेट्रो-रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन

    चेन्नई
    चेन्नई में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा मंदिर, मेट्रो और विज्ञान के इर्द-गिर्द रहा. उन्होंने तमिलनाडु में करीब 13 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इस दौरान चेन्नई मेट्रो की फेज-2 येलो लाइन का उद्घाटन किया गया. पीएम मोदी ने IIT मद्रास परिसर में भगवान शिव के मंदिर में पूजा की, फिर इंसानी दिमाग पर रिसर्च करने वाले ब्रेन सेंटर पहुंचे. यहां विशेषज्ञों ने उन्हें चल रहे शोध के बारे में जानकारी दी.

    इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि भारत अपनी संस्कृति से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है. विज्ञान में तरक्की और नई सुविधाओं से लोगों को नए मौके मिल रहे हैं. विकास के इन कामों से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे. इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी मौजूद रहे. पीएम मोदी ने अपने दौरे को भारत की विरासत, विज्ञान की तरक्की और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक ताकत से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है.

    पीएम मोदी ने तमिलनाडु को दी इन योजनाओं की सौगात
    तमिलनाडु को 13 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की विकास परियोजनाओं की सौगात मिली. पीएम मोदी ने चेन्नई मेट्रो के फेज-2 में पूनमल्ली से वडापलानी तक के रूट का उद्घाटन किया. इस परियोजना पर करीब 4,900 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. वहीं, करीब 3,700 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं के तहत NH-744 के वडुगपट्टी-थेरकुवेंगनल्लूर हिस्से और मदुरै रिंग रोड के एक हिस्से का उद्घाटन किया गया. तिरुवरूर बाईपास की आधारशिला भी रखी गई. रेलवे से जुड़े 750 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट के तहत कराईकल-पेरलम रेल लाइन, कोयंबटूर के आसपास तीन रेल फ्लाईओवर और पांच अमृत भारत रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन किया गया.

    इसके अलावा, चेन्नई पोर्ट पर सामान रखने की जगह, चार गोदाम, क्रूज टर्मिनल और नाविकों के लिए क्लब का उद्घाटन किया. वीओ चिदंबरनार पोर्ट पर आठ परियोजनाओं की शुरुआत की गई, जबकि कामराजर पोर्ट पर कोयला बर्थ-3 का उद्घाटन हुआ. चेन्नई के मणाली स्थित रिफाइनरी में करीब 1,620 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली लुब्रिकेंट बेस स्टॉक परियोजना की आधारशिला रखी गई. इसके अलावा, पीएम मोदी ने IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर को देश को समर्पित किया. यहां 100 से ज्यादा मानव दिमागों का 3D नक्शा बनाने का वैज्ञानिक मिशन शुरू किया गया. साथ ही, स्ट्रोक से प्रभावित दिमाग का विशेष एटलस भी जारी किया गया, जिससे वैज्ञानिकों को इलाज के नए तरीके खोजने में मदद मिल सकती है.

    मंदिर में पूजा के बाद ब्रेन सेंटर पहुंचे पीएम मोदी
    पीएम मोदी ने IIT मद्रास परिसर में स्थित श्री जलकंटेश्वर स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की. यह भगवान शिव का सदियों पुराना मंदिर है. यहां पारंपरिक संगीत के साथ उनका स्वागत किया गया. मंदिर के पुजारियों ने उन्हें भगवान कृष्ण और श्रीराम को समर्पित एक उप-मंदिर में रखे श्रीचक्र का महत्व बताया. इसके बाद पीएम मोदी ने श्रीचक्र पर फूल चढ़ाए. मंदिर में दर्शन के बाद वह सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर पहुंचे. IIT मद्रास ने साल 2022 में इस सेंटर की शुरुआत की थी. यहां इंसानी दिमाग की बनावट और उसके अलग-अलग हिस्सों के बीच संबंधों को समझने पर काम किया जाता है. इसके लिए दिमाग की हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होता है.

    संस्थान का लक्ष्य दिमाग से जुड़ा विस्तृत डेटा जुटाना, वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाना और नई तकनीक विकसित करना है. पीएम मोदी को सेंटर के कामकाज और रिसर्च के बारे में विस्तार से बताया गया.

    'विरासत और भविष्य की आकांक्षाएं साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं'
    पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेता है. विज्ञान में तरक्की के साथ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर नए अवसर पैदा कर रहा है. उन्होंने कहा कि देश की विरासत और भविष्य की आकांक्षाएं साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को शहरों के विकास के लिए जरूरी बताया. उनके मुताबिक, बेहतर यातायात के लिए सिर्फ सड़कों को चौड़ा करना काफी नहीं है. शहरों को ऐसी सुविधाओं की जरूरत है, जिनसे लोगों का सफर आसान हो सके.

    उन्होंने बताया कि साल 2014 में देश के सिर्फ पांच शहरों में मेट्रो सेवा थी, जबकि अब 25 शहरों में मेट्रो चल रही है. पीएम मोदी ने यह भी कहा कि तमिलनाडु ने देश में मैन्युफैक्चरिंग के विकास में अहम भूमिका निभाई है. उनके मुताबिक, साल 2014 के बाद भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना बढ़ोतरी हुई है, जबकि रक्षा निर्यात 50 गुना बढ़ा है. इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात भी नए स्तर पर पहुंचा है.

    मुख्यमंत्री विजय ने रखीं कई मांगें
    मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पीएम मोदी के सामने राज्य से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सामाजिक न्याय पर आधारित, भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी शासन बनाने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के मिलकर काम करने को भी जरूरी बताया. विजय ने चेन्नई मेट्रो के तीसरे चरण को जल्द मंजूरी देने की मांग की. उन्होंने कोयंबटूर और मदुरै में मेट्रो रेल बनाने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की अपील की. इसके अलावा अंतरराज्यीय रेल लाइन को मंजूरी देने और राज्यों के बीच पानी का उचित बंटवारा सुनिश्चित करने की मांग भी रखी.

    मुख्यमंत्री ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत लंबित 100 करोड़ रुपये जारी करने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने बताया कि तमिलनाडु विधानसभा ने मद्रास हाईकोर्ट की कार्यवाही में तमिल भाषा के इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव पारित किया है.

  • सिंधु जल संधि से AQ खान नेटवर्क तक, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा

    सिंधु जल संधि से AQ खान नेटवर्क तक, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा

    नई दिल्ली
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की प्रथम समिति की बैठक के दौरान पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए भारत ने करारा जवाब दिया है। पड़ोसी देश के द्वारा फैलाए जाने वाले प्रोपेगैंडा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारत के युवा राजनयिक और प्रथम सचिव अनमोल शेर सिंह बेदी ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आतंकवाद, परमाणु और क्षेत्रीय अस्थिरता के मुद्दों पर पाकिस्तान को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा करने का हमारा अधिकार पूरी तरह अक्षुण्ण है।

    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बेदी ने मई में भारत द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। भारत ने कहा कि पहलगाम में हुए गंभीर उकसावे के बाद भारत ने केवल अपनी आत्मरक्षा में कदम उठाया था। भारत की यह कार्रवाई नपी-तुली, टारगेटेड और स्थिति को आगे न बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। भारत ने साफ कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करते समय परमाणु खतरे का डर दिखाकर भारत को रोका नहीं जा सकता।

    सिंधु जल संधि और एक्यू खान नेटवर्क का भी जिक्र
    बेदी ने अपने संबोधन में दो अन्य बड़े और संवेदनशील मुद्दों का भी जिक्र किया। 1960 में हुई सिंधु जल संधि पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता सद्भाव और आपसी विश्वास पर आधारित था। कोई भी देश एक तरफ तो इस विश्वास को तोड़े और दूसरी तरफ इस संधि से मिलने वाले विशेषाधिकारों का लाभ उठाना चाहे तो यह अब संभव नहीं है।

    पाकिस्तान के चर्चित एक्यू खान नेटवर्क (AQ Khan Network) के इतिहास का हवाला देते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 का जिक्र किया। भारत ने दुनिया को आगाह किया कि वे उन्नत सैन्य तकनीक और परमाणु हस्तांतरण को लेकर उच्चतम स्तर की सतर्कता बरतें। बेदी ने कहा, "अगर कोई देश आतंकवाद की मदद से हिंसा फैलाता है तो इससे उस देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। परमाणु हथियारों को कूटनीति के रोजमर्रा के औजार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार पहले उकसावे की कार्रवाई करता है, फिर अपनी संलिप्तता से इनकार करता है और भारत के जवाब देने के बाद 'संयम' की अपील करने लगता है।
    इस दौरान उन्होंने भारत के तीन मुख्य सिद्धांतों का जिक्र किया।

    मुंहतोड़ जवाब: भारत पर होने वाले किसी भी आतंकी हमले का करारा और माकूल जवाब दिया जाएगा।

    जीरो टॉलरेंस: भारत किसी भी तरह की परमाणु धमकी या ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेगा।

    समान जवाबदेही: आतंकवाद को पनाह देने वालों और इसके मुख्य साजिशकर्ताओं के बीच भारत कोई अंतर नहीं करेगा।

    जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में भारत ने एक बार फिर दोहराया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्रों को पाकिस्तान को खाली करना ही होगा। अंत में बेदी ने कहा, "भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है और रहेगा। लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों पर जवाबदेही तय नहीं होगी तो शांति केवल दो संकटों के बीच का एक छोटा सा ठहराव बनकर रह जाएगी।"

  • F-35 खरीदने की चर्चा के बीच एपी सिंह का बयान, भारत को अब तक नहीं मिला आधिकारिक प्रस्ताव

    F-35 खरीदने की चर्चा के बीच एपी सिंह का बयान, भारत को अब तक नहीं मिला आधिकारिक प्रस्ताव

     नई दिल्ली
    भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने  अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान F-35 को लेकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारी भारतीय अधिकारियों को इस लड़ाकू विमान के पास तक नहीं जाने देते, जबकि इसे भारत को बेचने की बात हो रही है. वायुसेना प्रमुख ने यह टिप्पणी अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर की मौजूदगी में की.

    दरअसल, जोधपुर में बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' के समापन समारोह के मौके पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी. इसमें भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर एक साथ मंच पर मौजूद थे. इस दौरान वायुसेना प्रमुख से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 को भारत को बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव दिया है?

    इस सवाल पर एपी सिंह ने कहा, 'आपके लोग हमें विमान के पास भी नहीं जाने देते और आप इसे हमें बेचने की बात कर रहे हैं.' उनकी इस टिप्पणी ने अमेरिकी लड़ाकू विमान को भारत को बेचे जाने की चर्चाओं की ओर ध्यान खींचा.

    F-35 को लेकर अमेरिका ने नहीं दिया कोई आधिकारिक प्रस्ताव
    वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से F-35 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर भारत को अब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है. उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही, जब अमेरिका की ओर से भारत को इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं. खास बात यह रही कि एपी सिंह ने यह टिप्पणी वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य कमांडर की मौजूदगी में की.

    रूस के Su-57 लड़ाकू विमान पर क्या बोले वायुसेना प्रमुख?
    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख से रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर उन्होंने बताया कि रूस की ओर से इस विमान को लेकर दिया गया प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के संज्ञान में आया है. हालांकि, अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि इस लड़ाकू विमान का मूल्यांकन किया जाना चाहिए या नहीं.

    एपी सिंह ने कहा, 'एक बार सरकार की ओर से हमें फैसला बता दिया जाएगा, तो हम मूल्यांकन करेंगे कि Su-57 हमारी जरूरतों को किस हद तक पूरा करता है.' उनके बयान से स्पष्ट है कि रूसी लड़ाकू विमान को लेकर अभी मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय नहीं हुआ है.

    भारत खुद भी बना रहा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान
    भारतीय वायुसेना प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब भारत अपनी भविष्य की लड़ाकू विमान संबंधी जरूरतों का आकलन कर रहा है. इसके साथ ही भारत स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रहा है.
    भारत की दीर्घकालिक रक्षा योजनाओं में स्वदेशी लड़ाकू विमानों का विकास और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.

    तरंग शक्ति-2026 युद्धाभ्यास का समापन
    जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति-2026' में भारतीय वायुसेना समेत कुल आठ देशों की वायुसेनाओं ने भाग लिया. इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच परिचालन सहयोग बढ़ाना और पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था. इसी युद्धाभ्यास के समापन समारोह के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना प्रमुख ने अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 लड़ाकू विमानों को लेकर भारत की स्थिति स्पष्ट की.