Category: देश

  • हाई-सिक्योरिटी वेन्यू में फर्जी PMO कार्ड से एंट्री, युवक हिरासत में; साथ चल रहे बॉडीगार्ड के पास बंदूक

    हाई-सिक्योरिटी वेन्यू में फर्जी PMO कार्ड से एंट्री, युवक हिरासत में; साथ चल रहे बॉडीगार्ड के पास बंदूक

    मुंबई
    पीएम नरेंद्र मोदी के मुंबई में कार्यक्रम स्थल से दो लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया गया. हिरासत में लिए गए लोगों में से एक के पास से फर्जी आईडी कार्ड बरामद किया गया है. पकड़ा गया शख्स खुद को पीएमओ का अधिकारी होने का दावा कर रहे थे. एक अन्य पकड़े गए शख्स के पास से बंदूक भी बरामद हुई है.

    शख्स के पास से मिला फर्जी ID कार्ड
    पकड़े गए एक व्यक्ति के पास से बंदूक बरामद हुई है. मुंबई पुलिस ने BKC स्थित नीता अंबानी सांस्कृतिक केंद्र से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है.पकड़ा गया शख्स खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी होने का दावा कर रहा था. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम रोहन पारेख है और उसकी उम्र 24 वर्ष है. सूत्रों के मुताबिक, रोहन के पास प्रधानमंत्री कार्यालय का फर्जी पहचान पत्र भी था. सुरक्षा जांच के दौरान उसका पहचान पत्र फर्जी पाया गया. रोहन एक अंगरक्षक के साथ घूमता था, जिसके पास बंदूक थी. मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस पूरे मामले की आगे जांच कर रही है.

    पीएम मोदी का मुंबई दौरा
    प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार शाम को मुंबई में करीब 5.45 बजे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 का उद्घाटन करेंगे. ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का सातवां संस्करण 8 से 11 सितंबर तक मुंबई में आयोजित किया जा रहा है. 2020 से, जीएफएफ एक अंतरराष्ट्रीय विचार नेतृत्व मंच के रूप में उभरा है जो नीति निर्माताओं, नियामकों, केंद्रीय बैंकों, वित्तीय संस्थानों, फिनटेक कंपनियों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, निवेशकों, शिक्षाविदों और अन्य वैश्विक हितधारकों को वित्त के भविष्य को आकार देने पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाता है.

    जानिए आखिर हुआ क्या था
    पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख नामक व्यक्ति एक बॉडीगार्ड के साथ इस हाई-सिक्यॉरिटी वेन्यू के आसपास घूम रहा था. सुरक्षा जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि रोहन पारेख एक फर्जी पीएमओ यानी प्रधानमंत्री कार्यालय का पहचान पत्र लेकर घूम रहा था. कार्ड की जांच करने पर वह फर्जी पाया गया, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया. पुलिस का कहना है कि रोहन पारेख और उसका बॉडीगार्ड दोनों पुलिस हिरासत में हैं, और इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है. अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि वे कार्यक्रम परिसर के अंदर कैसे दाखिल हुए और वहां मौजूद रहने के पीछे उनका कोई खास मकसद या साजिश तो नहीं थी. दोनों आरोपियों को जल्द ही अदालत में पेश किए जाने की संभावना है, जहां पुलिस उनके इस उच्च सुरक्षा वाले इलाके में मौजूदगी के पीछे के बड़े कारणों का पता लगाने के लिए पूछताछ कर रही है.

  • मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट में फिर मंथन, 12 साल पहले पत्नी ने उठाया था सवाल; अब कानून में बदलाव की उम्मीद?

    मैरिटल रेप पर सुप्रीम कोर्ट में फिर मंथन, 12 साल पहले पत्नी ने उठाया था सवाल; अब कानून में बदलाव की उम्मीद?

    नई दिल्ली

    करीब 12 साल पहले एक शादीशुदा महिला अदालत पहुंची. उसका आरोप था कि उसका पति उसकी इच्छा के खिलाफ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता है. लेकिन जब उसने न्याय की मांग की तो उसके सामने एक कानूनी दीवार खड़ी हो गई. कानून कह रहा था कि अगर ऐसा काम पति ने अपनी पत्नी के साथ किया है, तो उसे बलात्कार (Rape) नहीं माना जाएगा. यहीं से शुरू हुई बहस दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की नई तारीख तय करने से फिलहाल इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार का पक्ष रिकॉर्ड पर आने दें. लेकिन कोर्ट की अगली तारीख आने से पहले बड़ा सवाल यह है कि आखिर Marital Rape पर बहस खत्म क्यों नहीं हो रही? क्यों यह मुद्दा हर कुछ साल बाद फिर देश के सामने खड़ा हो जाता है? 

    दिल्ली हाईकोर्ट के जजों का फैसला भी बंटा था
    इन सवालों का जवाब जानने से पहले एक चौंकाने वाला तथ्य समझिए भारत में अगर कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह बलात्कार हो सकता है. लेकिन यदि वही महिला उसकी पत्नी है, तो भारतीय कानून में लंबे समय से एक अपवाद (Exception) मौजूद रहा है. यही "Marital Rape Exception" है, जिस पर पूरी लड़ाई टिकी हुई है. याचिकाकर्ताओं का सवाल है कि "अगर सहमति ही रेप और सेक्स के बीच का फर्क है, तो शादी के बाद सहमति की अहमियत कैसे खत्म हो सकती है?"

    इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जज भी एक राय नहीं बना पाए.  मार्च 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर विभाजित फैसला दिया. एक जज ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद संविधान के खिलाफ है. लेकिन दूसरे जज इससे सहमत नहीं थे। 

    जाहिर है कि अदालत के भीतर भी मतभेद था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. यहीं से साफ हो गया कि यह केवल कानून का मसला नहीं, बल्कि समाज और संविधान के बीच टकरा रहे दो विचारों का सवाल है. जो Marital Rape को अपराध बनाने की मांग कर रहे हैं, वे क्या कहते हैं?

    पक्ष में लोग ये तर्क देते हैं

        शादी किसी महिला की शारीरिक स्वायत्तता खत्म नहीं करती.
        संविधान सभी महिलाओं को समान सुरक्षा देता है.
        सहमति (Consent) हर रिश्ते में जरूरी है.
        पत्नी को कानून में कम सुरक्षा देना समानता के अधिकार के खिलाफ है.

    और विरोध करने वाले क्या कहते हैं?

        दूसरा पक्ष कई चिंताएं उठाता है:
        विवाह संस्था पर असर पड़ सकता है.
        झूठे मामलों की आशंका बढ़ सकती है.
        पति-पत्नी के निजी विवाद आपराधिक मुकदमों में बदल सकते हैं.

    29 फीसदी महिलाएं हुई हैं शिकार
    भारत में Marital Rape के अलग अपराध का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, इसलिए NCRB के पास इसका सीधा डेटा मौजूद नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शादीशुदा महिलाओं के खिलाफ यौन या शारीरिक हिंसा का कोई अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट बताती है कि 18 से 49 वर्ष की आयु की करीब 29 फीसदी विवाहित महिलाओं ने अपने जीवन में कभी न कभी पति द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा झेलने की बात कही. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं ने यौन हिंसा की शिकायत की, उनमें अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं बल्कि उनका अपना पति था. यही आंकड़े बताते हैं कि Marital Rape पर बहस अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे वर्षों से मौजूद एक सामाजिक वास्तविकता है, जिस पर अब कानूनी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। 

    दूसरी तरफ कानून की किताब में ऐसे मामलों को अलग अपराध की श्रेणी नहीं मिली हुई है. यही विरोधाभास इस पूरी बहस का केंद्र है. सुप्रीम कोर्ट के सामने भी मूल प्रश्न यही है कि अगर किसी महिला की सहमति के बिना सेक्स अपराध हो सकता है, तो क्या विवाह उस सहमति को स्थायी रूप से मान लेने का आधार बन सकता है?

    घर की चारदीवारी के भीतर भी होती है हिंसा
    अगर NCRB के व्यापक आंकड़ों को देखें तो भी एक तस्वीर सामने आती है. महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में हर साल सबसे बड़ी हिस्सेदारी 'पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता' (IPC 498A) से जुड़े मामलों की रहती है। 

    दूसरे शब्दों में कहें तो महिलाओं के लिए खतरा हमेशा सुनसान सड़क या किसी अजनबी से नहीं जुड़ा होता, कई बार वह उसी व्यक्ति से जुड़ा होता है जिसके साथ वह अपना जीवन साझा कर रही होती है। 

    यही वजह है कि Marital Rape की बहस केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं रह जाती. यह बहस उस बुनियादी प्रश्न में बदल जाती है कि भारतीय समाज विवाह को कैसे देखता है. यह भारतीय समाज की उस सोच से जुड़ा है जहां शादी को कभी अधिकार, कभी जिम्मेदारी और कभी पवित्र संस्था के रूप में देखा जाता है. लेकिन नई पीढ़ी एक अलग सवाल पूछ रही है कि "क्या किसी भी रिश्ते में, चाहे वह शादी ही क्यों न हो, सहमति से बड़ा कुछ हो सकता है?" शायद इसी सवाल का जवाब आने वाले वर्षों में भारत के कानून और समाज दोनों को तलाशना होगा। 

  • 15 सितंबर के बाद नहीं ले पाएंगे UPI पेमेंट? QR Code वाले दुकानदारों पर Re-KYC की मार, जानें पूरा मामला

    15 सितंबर के बाद नहीं ले पाएंगे UPI पेमेंट? QR Code वाले दुकानदारों पर Re-KYC की मार, जानें पूरा मामला

    नई दिल्ली
    भारत में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान हो, सब्जी मंडी हो या गली-मोहल्ले की किराना दुकान, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान आम बात है. लेकिन अब एक ऐसी डेडलाइन सामने आई है, जिसने लाखों छोटे कारोबारियों और उनके ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। 

    RBI के नियमों के तहत मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उद्योग जगत का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का सत्यापन तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, तो उनके QR कोड आधारित भुगतान प्रभावित हो सकते हैं। 

    क्या है पूरा मामला?
    रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार मर्चेंट्स को समय-समय पर अपनी KYC जानकारी अपडेट करनी होती है. मौजूदा समयसीमा के तहत 15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी करना जरूरी है. पेमेंट एग्रीगेटर और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि लाखों छोटे कारोबारियों का सत्यापन अभी बाकी है. इसी वजह से इंडस्ट्री ने RBI से समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की है। 

    आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
    अगर किसी दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी नहीं होती और उसका QR कोड प्रभावित होता है, तो ग्राहकों को भुगतान में परेशानी हो सकती है. मान लीजिए आप सब्जी खरीदने पहुंचे और दुकानदार का QR कोड काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में UPI से भुगतान संभव नहीं होगा. तब आपको नकद भुगतान करना पड़ सकता है या फिर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं. हालांकि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है। 

    कितने कारोबारी हो सकते हैं प्रभावित?
    इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं. वहीं लगभग 10 लाख छोटे कारोबारियों को जोखिम के दायरे में माना जा रहा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि तय समय तक करीब 80 फीसदी वेरिफिकेशन ही पूरा हो पाएगा. यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही हैं। 

    क्या रुक जाएगा डिजिटल पेमेंट सिस्टम?
    इस पूरे मामले को लेकर सबसे जरूरी बात है कि इससे देश का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बंद नहीं होने वाला है. भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और बड़े कारोबारियों के भुगतान सिस्टम सामान्य रूप से चलते रहेंगे. चिंता मुख्य रूप से उन छोटे व्यापारियों को लेकर है, जिनका कारोबार QR कोड आधारित भुगतान पर काफी हद तक निर्भर है. अगर ऐसे कारोबारियों के QR कोड प्रभावित होते हैं, तो उनकी बिक्री और ग्राहकों की सुविधा दोनों पर असर पड़ सकता है। 

    क्या ग्राहकों को कैश रखना चाहिए?
    फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. इंडस्ट्री लगातार समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही है और बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है. हालांकि एहतियात के तौर पर अगर आप छोटे बाजारों, मंडियों या रेहड़ी-पटरी वाले इलाकों में खरीदारी करते हैं, तो कुछ नकद राशि साथ रखना उपयोगी हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि RBI 15 सितंबर की समयसीमा को बरकरार रखता है या फिर इंडस्ट्री को कुछ और राहत देता है. लाखों छोटे कारोबारियों की नजर फिलहाल इसी फैसले पर टिकी हुई है। 

  • रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत, त्योहारों पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; 60 दिन पहले बुकिंग का फायदा उठाएं

    रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत, त्योहारों पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें; 60 दिन पहले बुकिंग का फायदा उठाएं

    नई दिल्ली
    दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों के लिए अहम खबर है. भारतीय रेलवे में दिवाली की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो गई है. देशभर में इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी. रेलवे के एडवांस रिजर्वेशन सिस्टम के तहत यात्री अपनी यात्रा की तारीख के आधार पर 60 दिन पहले तक टिकट बुक कर सकते हैं. यदि आपको कन्फर्म सीट चाहिए, तो रिजर्वेशन जल्द करना होगा। 

    रेलवे की एडवांस रिजर्वेशन विंडो सुबह 8 बजे खुलती है. हालांकि, टिकट बुकिंग यात्रा की तारीख पर निर्भर करती है. यात्रियों को यात्रा की तारीख को छोड़कर 60 दिन पहले तक रिजर्वेशन की सुविधा मिलती है. दिवाली के आसपास दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली ट्रेनों में भारी मांग रहती है. इसलिए लोकप्रिय ट्रेनों में सीटें तेजी से भर सकती हैं। 

    इन रूट्स पर होता है ट्रैफिक प्रेशर

    त्योहारी सीजन में दिल्ली-पटना, पटना-अहमदाबाद, पटना-उधना, मुंबई-पटना, हावड़ा-पटना, बेंगलुरु-पटना, फिरोजपुर-पटना, वाराणसी-दिल्ली, कानपुर-दिल्ली, लुधियाना-सुपौल, लुधियाना-पटना, चेन्नई-पटना, हैदराबाद-पटना और दिल्ली-गोरखपुर जैसे रूट पर यात्रियों का दबाव ज्यादा रहता है. इन रूट्स पर यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को रिजर्वेशन विंडो खुलने के साथ ही सीट की उपलब्धता चेक कर लेनी चाहिए। 

    रेलवे ने चलाईं फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें
    त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए नॉर्दर्न रेलवे ने कई फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है. ये ट्रेनें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र और अन्य प्रमुख शहरों के बीच अतिरिक्त कनेक्टिविटी देंगी. इनमें वाराणसी-दिल्ली, अयोध्या कैंट-आनंद विहार, चंडीगढ़-पटना, फिरोजपुर कैंट-पटना और आनंद विहार-पाटलिपुत्र जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं। 

    क्र. ट्रेन नंबर ट्रेन रूट ट्रिप/फेरे
    1 09189/09190 मुंबई सेंट्रल-कटिहार-मुंबई सेंट्रल 77 अतिरिक्त ट्रिप
    2 04127/04128 कानपुर सेंट्रल-गुवाहाटी-कानपुर सेंट्रल 14 अतिरिक्त ट्रिप
    3 05736/05735 कटिहार-अमृतसर-कटिहार 12 अतिरिक्त ट्रिप
    4 05932/05931 डिब्रूगढ़-कोलकाता-डिब्रूगढ़ 13 अतिरिक्त ट्रिप
    5 04209/04210 वाराणसी-नई दिल्ली-वाराणसी 50 ट्रिप
    6 04213/04214 अयोध्या कैंट-आनंद विहार टर्मिनल-अयोध्या कैंट 36 ट्रिप
    7 04512/04511 चंडीगढ़-पटना जंक्शन-चंडीगढ़ 18 ट्रिप
    8 04616/04615 फिरोजपुर कैंट-पटना जंक्शन-फिरोजपुर कैंट 16 ट्रिप
    9 04008/04007 आनंद विहार टर्मिनल-जोगबनी-आनंद विहार टर्मिनल 10 ट्रिप
    10 04028/04027 आनंद विहार टर्मिनल-मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनल 26 ट्रिप
    11 04010/04009 दिल्ली जंक्शन-सीतामढ़ी-दिल्ली जंक्शन 12 ट्रिप
    12 02456/02455 नई दिल्ली-कानपुर सेंट्रल-नई दिल्ली 98 ट्रिप
    13 02563/02564 बरौनी-नई दिल्ली-बरौनी स्पेशल —
    14 02569/02570 दरभंगा-नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल —
    15 04014/04013 आनंद विहार टर्मिनल-लौकाहा बाजार-आनंद विहार टर्मिनल 150 ट्रिप
    16 04002/04001 हजरत निजामुद्दीन-दादर-हजरत निजामुद्दीन 14 ट्रिप
    17 04227/04228 वाराणसी-चंडीगढ़-वाराणसी 36 ट्रिप
    18 02458/02457 आनंद विहार टर्मिनल-कानपुर सेंट्रल-आनंद विहार टर्मिनल 72 ट्रिप
    19 04314/04313 योग नगरी ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर-योग नगरी ऋषिकेश 18 ट्रिप
    20 04096/04095 आनंद विहार टर्मिनल-पाटलिपुत्र-आनंद विहार टर्मिनल 120 ट्रिप

     
    टिकट बुक करते समय इन बातों का रखें ध्यान

    दिवाली के दौरान लोकप्रिय ट्रेनों में टिकट तेजी से भर सकते हैं. इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख पहले से तय करके रिजर्वेशन विंडो खुलते ही उपलब्धता चेक करनी चाहिए। 

    टिकट बुक करते समय ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख, बोर्डिंग स्टेशन और ​गंतव्य स्टेशन की जानकारी ध्यान से जांचना जरूरी है. यात्रा से पहले ट्रेन का शेड्यूल और सीट की उपलब्धता भी चेक कर लें। 

    रेलवे से जुड़ी सेवाओं, शिकायतों और यात्रा संबंधी जानकारी के लिए यात्री रेलमदद हेल्पलाइन 139 पर संपर्क कर सकते हैं या NTES ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

    दिवाली के दौरान नियमित ट्रेनों में सीट नहीं मिलने पर नॉर्दर्न रेलवे की ओर से घोषित ये फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प साबित हो सकती हैं। 

    कंफर्म टिकट के लिए अपनाएं ये आसान ट्रिक्स
    कंफर्म टिकट के लिए मास्टर लिस्ट बनाएं. टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC के टिकट बुकिंग App में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें. समय से पहले लॉगिन करें. सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें. तेजी से पेमेंट के लिए IRCTC Wallet का प्रयोग करें। 

  • आतंकी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, NIA केसों के लिए राज्यों में जल्द बनेंगी स्पेशल कोर्ट

    आतंकी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, NIA केसों के लिए राज्यों में जल्द बनेंगी स्पेशल कोर्ट

     नई दिल्ली
    विशेष एनआईए अ
    दालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से जल्द विशेष अदालतें शुरू करने को कहा, ताकि NIA के मामलों में सुनवाई में देरी न हो। 

    एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को बताया कि कई राज्यों ने इस संबंध में अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है. मतलब इन राज्यों ने अब तक बताया ही नहीं है कि उनके यहां विशेष NIA अदालतें स्थापित की गई हैं या नहीं।  

    सुनवाई के दौरान कर्नाटक के वकील ने बताया कि बेंगलुरु में तीन विशेष अदालतें हैं. और चिकमंगलूर में भी जल्द अदालत शुरू होने वाली है. केरल सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने विशेष अदालतों के लिए जगहों की पहचान कर ली है. राज्य में दो अदालतें स्थापित होनी है. उन्होंने अदालत से दो-तीन महीने का समय मांगा लेकिन CJI ने एक महीने में ही अदालतें शुरू करने को कहा. तमिलनाडु सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में 2 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एक तो कार्यरत भी हैं। 

    तेलंगाना सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में सिर्फ एक विशेष NIA अदालत की जरूरत है. तेलंगाना में NIA के 13 मामले हैं. CJI ने तेलंगाना सरकार को तीन हफ्ते में अदालतें शुरू करने का निर्देश दिया. असम में NIA के 26 मामले हैं. राज्य में एक विशेष अदालत काम कर रही है और दो और अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। 

    CJI ने असम से इस संबंध में चार हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. जम्मू कश्मीर में NIA के 46 मामले हैं और यहां सिर्फ एक विशेष अदालत है. सुरक्षा कारणों से अदालतें जम्मू में बनाने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीन और अदालतों की जरूरत बताई गई। 

    मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि विशेष NIA अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई नहीं होनी चाहिए. ताकि NIA के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके। 

  • नितिन गडकरी बोले- अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से मिला ज्यादा समर्थन, बताया क्यों किया लोगों ने वोट

    नितिन गडकरी बोले- अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से मिला ज्यादा समर्थन, बताया क्यों किया लोगों ने वोट

    नागपुर

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. अब उन्होंने फिर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें शिक्षित क्षेत्रों की तुलना में क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से ज्यादा वोट मिले. गडकरी का यह बयान अब वायरल हो रहा है। 

    नागपुर में बोले गडकरी- पढ़े-लिखे से ज्यादा अपराधी इलाकों से मिले वोट 
    दरअसल नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके चुनाव में पढ़े-लिखे लोगों से ज्यादा अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से उन्हें वोट मिले थे. उन्होंने बताया कि शहर के बड़े और शिक्षित इलाकों में उन्हें कुल मतदान प्रतिशत का लगभग 70-75% वोट मिला, जबकि अपराधी, अंडरवर्ल्ड और रेड इलाकों में उन्हें 92% वोट मिले। 

    मैं उनके काम का समर्थन नहीं करताः गडकरी
    गडकरी ने हंसते हुए कहा कि नागपुर में अंडरवर्ल्ड और असामाजिक कार्य से जुड़े लगभग 99% लोग उनके समर्थक हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे उनके काम या गतिविधियों का समर्थन करते हैं. नितिन गडकरी का कहना है कि उनके सभी लोगों से संबंध हैं लेकिन इसे गलत अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए। 

    गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके उन लोगों से संबंध हैं या वे उनके कामों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि उन इलाकों में सड़कें बनवाने और सामाजिक कार्य करने के कारण वहां के लोगों ने उन्हें वोट दिया. इससे पहले भी नितिन गडकरी के कई बयान चर्चित हुए हैं. वो बिना लाग-लपेट अपनी बात रखने वाले नेता माने जाते हैं.बीते दिनों उन्होंने खुद से कहा था कि बहुत काम कर लिया, अब नई पीढ़ी को मौका मिले। 

  • ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में स्वदेशी तकनीक की अहम भूमिका, एयर मार्शल ने IACCS और ब्रह्मोस का किया जिक्र

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता में स्वदेशी तकनीक की अहम भूमिका, एयर मार्शल ने IACCS और ब्रह्मोस का किया जिक्र

     नई दिल्ली  

     सुरक्षा सभा में 'आसमान के रखवाले' सेशन के दौरान एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने खुलकर बात की. वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे एयर मार्शल मिश्र ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में हुई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया। 

    उन्होंने साफ कहा कि भविष्य का युद्ध आज ही चल रहा है. जो लोग सोच रहे थे कि कुछ नहीं हो रहा, वास्तव में लंबी तैयारी, मेहनत और दूरदर्शिता का नतीजा ऑपरेशन सिंदूर में दिख रहा था. भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों के दम पर दुश्मन को करारा जवाब दिया. यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था बल्कि वर्षों की मेहनत, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना के संयुक्त प्रयास का प्रमाण था। 

    एयर मार्शल मिश्र ने सामान्य जीवन के उदाहरण से समझाया कि तकनीक कितनी गहराई तक पहुंच चुकी है. जब आप पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करते हैं तो वह सैटेलाइट के जरिए भारत के बैंक खाते से जुड़ता है, पैसे काटता है और तुरंत जानकारी वापस भेजता है. इसी तरह भविष्य के युद्ध भी रोजमर्रा की जिंदगी की तरह तकनीक पर आधारित होंगे, लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते क्योंकि वे धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं। 

    ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल को सुखोई-30 से दागने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 250- 300 किलोमीटर दूर लक्ष्य को दो मीटर की सटीकता से भेदना भारतीय तकनीक का चमत्कार है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद तकनीक की रफ्तार और तेज हो गई है. अगर हम इसके साथ कदम नहीं मिलाएंगे तो चार-पांच साल में ही हैरान रह जाएंगे। 

    वायुसेना अधिकारी की निरंतर पढ़ाई और सिस्टम का विकास
    एयर मार्शल मिश्र ने नई पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि वायुसेना अधिकारी को परिचालन ड्यूटी निभाते हुए भी सामान्य छात्रों से कहीं ज्यादा पढ़ाई करनी पड़ती है. तकनीक के साथ तालमेल बनाए रखना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन उपकरणों ने हमारे एयर स्पेस की रक्षा की और दुश्मन को नष्ट किया, वे वर्षों की मेहनत का फल थे. वायुसेना को अक्सर सबसे महंगी सेना कहा जाता है क्योंकि इसमें बजट का बड़ा हिस्सा लगता है, लेकिन यह दुनिया की उत्कृष्ट वायुसेनाओं में गिनी जाती है। 

    परिपक्व सिस्टम बनाने में पीढ़ियां लगती हैं. पंद्रह-बीस साल पहले भारतीय वायुसेना के पास ज्यादातर विदेशी रडार थे- रूस, अमेरिका, फ्रांस के. विदेशी विक्रेता से एयर डिफेंस सिस्टम बनवाने पर डेटा साझा करना पड़ता जो सार्वजनिक हो जाता. इसलिए भारतीय वैज्ञानिक, इंजीनियर और वायुसेना के अधिकारियों ने मिलकर पूरी तरह स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस बनाया. इसमें करीब पंद्रह साल लगे। 

    आज देश के हर रडार- सैन्य, नागरिक, सेना और धीरे-धीरे नौसेना के, इस सिस्टम से जुड़े हैं. सात-आठ भूमिगत संचालन केंद्रों से पूरे देश की वायु स्थिति पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर सीमा पर हथियार दागे जा सकते हैं. पहले हर रडार के पास एक व्यक्ति बैठकर स्कोप देखता था। 

    अब डेटा नेटवर्क से सब जुड़ गया है. अलग-अलग देशों के रडारों के डेटा फॉर्मेट को तोड़कर एक सामान्य प्रारूप में लाया गया. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे नागरिक टर्मिनलों के शक्तिशाली रडार भी इसमें शामिल हैं. इंटरनेट प्रोटोकॉल पर कमांड लेकर किसी भी जगह से मिसाइल दागने का आदेश दिया जा सकता है. यह सब एक दिन में नहीं हुआ. वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पायलटों की पीढ़ियों ने असफलताओं से सीखा और फिर से कोशिश की। 

    बालाकोट से सिंदूर तक: रणनीतिक विस्तार और सटीकता का प्रमाण
    एयर मार्शल मिश्र ने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना रणनीतिक दृष्टि से की. बालाकोट के समय भी वायुसेना के पास वही क्षमता थी जो सिंदूर में इस्तेमाल हुई. अंतर संसाधनों की कमी का नहीं बल्कि रणनीति का था. सरकार के निर्णयों पर निर्भर करते हुए प्रतिक्रिया का विस्तार होता गया। 

    उड़ी हमले के बाद बालाकोट, फिर सिंदूर- यह चेतावनी का क्रम था. अगर दुश्मन नहीं मानता तो और बड़ा जवाब दिया जाता है. सिंदूर भी अंतिम नहीं है. तीस अप्रैल 2026 को रिटायर हो चुके एयर मार्शल ने कहा कि जो लोग अभी योजना बना रहे हैं उनके पास हर स्थिति के लिए तैयार योजनाएँ हैं। 

    सटीकता का प्रमाण देते हुए उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी का जिक्र किया. बालाकोट में दो धब्बे दिखे थे. सिंदूर में बहावलपुर और मुरीद के नौ भवनों पर हमले की इमेज में भी वही दो स्पॉट दिखे. लेकिन जमीनी तस्वीरों से साफ हो गया कि कितना विनाशकारी और सटीक हमला हुआ था। 

    बालाकोट में मौसम या अन्य कारणों से जमीनी तस्वीर नहीं आ सकीं इसलिए सबूत कमजोर समझा गया. अब दोनों की तुलना से साबित होता है कि भारतीय वायुसेना का हमला कितना प्रभावी था. सैनिकों को जब 'कोई सबूत नहीं' या 'कौए मार दिए' जैसी बातें सुननी पड़ती हैं तो दर्द होता है, लेकिन वे परिणाम जानते हैं क्योंकि उन्होंने खुद देखा और किया है। 

    लंबी दूरी की क्षमता और वायु शक्ति की खूबियां
    एस-400 सिस्टम से 314 किलोमीटर दूर उड़ते विमान को मार गिराना लगभग विश्व रिकॉर्ड के करीब है. ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल दुनिया की एकमात्र परिचालन सुपरसोनिक एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल है जो पूरी तरह स्वदेशी (रूस-भारत सहयोग से) है। 

    सरगोधा, रहीम यार खान जैसे ठिकानों पर कम से कम दो सौ किलोमीटर दूर से हमला संभव हुआ. वायु शक्ति जमीनी और नौसैनिक शक्ति से अलग है. यह तेज, लंबी दूरी तक पहुंचने वाली, सटीक और गतिशील है. हवा में उड़ान भरने के बाद भी वापस बुलाया जा सकता है जबकि जमीन से दागी मिसाइल एक बार निकलने के बाद नहीं लौटती. ईरान-इजरायल संघर्ष में भी यही देखा गया कि उड़ते विमानों की लचीलापन ज्यादा होती है। 

    स्वदेशीकरण का मतलब संप्रभुता
    एयर मार्शल मिश्र ने स्वदेशीकरण को मेक इन इंडिया या सर्वश्रेष्ठ होने से अलग बताया. उनके अनुसार स्वदेशीकरण संप्रभुता के बराबर है. अगर आप किसी दूसरे देश पर निर्भर हैं तो सीमाओं की रक्षा स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते. पाकिस्तान के कई अमेरिकी मूल के रडार नष्ट होने के बाद मरम्मत के लिए अमेरिकी तकनीशियनों का इंतजार करना पड़ा. इससे सुरक्षा में बड़ा अंतराल पैदा हो गया। 

    अगर रडार स्वदेशी होते तो भारतीय कंपनियां, स्टार्टअप और पीएसयू तुरंत ठीक कर देते. संप्रभुता सिर्फ जमीन, कानून और लोगों तक सीमित नहीं. यह स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता है. युद्ध में अगर मिसाइल बाहर से मँगवानी पड़े और सप्लायर मना कर दे तो फैसला आपके हाथ में नहीं रहता। 
    एलसीए तेजस में देरी को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी देश पूरा विमान अकेले नहीं बनाता. अमेरिका भी कई हिस्से बाहर से लेता है. संप्रभुता पूरे विमान बनाने में नहीं बल्कि उस महत्वपूर्ण पिन या धातु विज्ञान, डिजाइन और गुणवत्ता में है जो पूरे विमान को संभाले। 

    अगर वह पिन विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी लागत पर बन जाए तो संप्रभुता हासिल हो जाती है. पोखरण-2 के बाद प्रतिबंधों ने क्रिटिकल तकनीकें रोक दीं. आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक ताकत बढ़ने के साथ विकास तेज हुआ. डिजाइनर, उत्पादन एजेंसी और उपयोगकर्ता तीनों की जिम्मेदारी है. गलतियां करके सीखना पड़ता है. मारुति से लेकर एलसीए मार्क-1, मार्क-2 तक का सफर तय करना होगा। 

    ड्रोन की भूमिका और भविष्य की तैयारी
    ड्रोन को लेकर एयर मार्शल मिश्र का नजरिया संतुलित था. वे खुद फाइटर पायलट रहे हैं इसलिए ड्रोन को 'बाद का पक्षी' कहते हैं. भारी काम निश्चित पंख वाले विमान ही करते हैं. ईरान-इजरायल संघर्ष के शुरुआती दिनों में अमेरिका और इजरायल रोज सौ फाइटर सॉर्टी उड़ा रहे थे। 

    तीन परमाणु स्थलों पर एक मिशन में 137 विमान शामिल थे. ड्रोन कहां थे? ड्रोन महत्वपूर्ण अंतराल भरते हैं जहां पंख वाला विमान भेजना जोखिम भरा या महंगा हो. उन्हें बड़ी संख्या में बनाया जा सकता है. पायलट का मतलब कॉकपिट में बैठने वाला नहीं बल्कि नियंत्रण करने वाला है. एमक्यू-9 जैसे सिस्टम में बाहरी पायलट हजारों किलोमीटर दूर से उड़ाते हैं. सरकार, अकादमी और कॉर्पोरेट सब मिलकर स्वदेशी ड्रोन बना रहे हैं जो अच्छी बात है। 

    ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि स्वदेशी हथियार न सिर्फ कामयाब हैं बल्कि संप्रभुता का आधार हैं. आईएसीसीएस जैसी प्रणालियां, ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें और लंबी दूरी की क्षमताएं भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाती हैं. भविष्य के युद्ध तकनीक, एकीकरण और स्वतंत्र निर्णय क्षमता पर निर्भर करेंगे। 

    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के शब्दों में, यह सब एक दिन में नहीं हुआ बल्कि पीढ़ियों की मेहनत का फल है. देशवासियों को यह समझना चाहिए कि आसमान की रक्षा चौबीस घंटे, हर सेकंड चल रही है. वह पूरी तरह भारतीय प्रयासों से संभव हो रही है। 

  • Air India Express फ्लाइट में मिड-एयर इमरजेंसी, 36 हजार फीट पर इंजन बंद कर कोच्चि लौटे पायलट

    Air India Express फ्लाइट में मिड-एयर इमरजेंसी, 36 हजार फीट पर इंजन बंद कर कोच्चि लौटे पायलट

    कोच्चि
    कोच्चि से अबू धाबी जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 415 (बोइंग 737) को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा। क्रू को पता चला कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है और जब ऑयल प्रेशर डेंजर ज़ोन में पहुंच गया, तो उन्होंने इंजन बंद कर दिया। प्लेन कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। प्लेन में सवार यात्रियों को पता नहीं था कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी। 

    सूत्रों के मुताबिक, टेक-ऑफ के करीब 50 मिनट बाद और 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय पायलट और को-पायलट ने देखा कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है। क्रू ने FORDEC असेसमेंट किया। ऑयल का लेवल लगातार गिरते देख, उन्होंने अबू धाबी जाने का प्लान छोड़कर कोच्चि वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद कमांडर ने हाई फ्रीक्वेंसी पर मुंबई रेडियो से संपर्क किया और ATC को बताया कि फ्लाइट कोच्चि वापस लौट रही है। प्लेन का रास्ता बदलने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोसीजर का पालन किया गया। रास्ता बदलने के पूरे समय, दोनों पायलट इंजन के पैरामीटर्स पर नज़र रखे हुए थे और किसी भी स्थिति के लिए तैयार थे। 

    वापस मुड़ने के करीब 45 मिनट बाद, इंजन 1 का ऑयल प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगा और कॉकपिट गेज पर रेड ज़ोन में पहुंच गया, जो डेंजर रेंज में गिरावट का संकेत था। इसके बाद क्रू ने नॉन-नॉर्मल चेकलिस्ट (NNC) का पालन किया और इंजन 1 बंद कर दिया। ज़्यादा वज़न वाले बोइंग 737 को एक इंजन पर लैंड कराना बहुत ज़्यादा काम और जोखिम वाला काम होता है। क्रू ने इसे आसानी से पूरा किया। यात्रियों को कॉकपिट में हुई घटना की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं हुआ। 

    भारतीय एयरलाइंस में टेक्निकल डायवर्जन लगभग हर हफ़्ते होने वाली घटना बन गई है। यह ताज़ा घटना एयर इंडिया पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद हुई है। फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरबस के टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने जांच टीम की मौजूदगी में उस विमान की तीन दिनों तक जांच की। इसके बाद आगे की जांच के लिए हाइड्रोलिक पार्ट्स और हाइड्रोलिक सैंपल इकट्ठा किए गए। फुकेत-दिल्ली घटना के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि DGCA फ़्लाइट क्रू के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों (नशीले पदार्थों) के टेस्ट का सालाना प्रतिशत बढ़ाएगा। 

    एयर इंडिया एक्सप्रेस के इंजन-ऑयल वाली घटना से अब एक और सवाल उठता है: क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय DGCA के सेफ्टी ऑडिट के नियमों को भी और सख्त करेगा? US फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) आमतौर पर हर पांच साल में एक बार इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट (IASA) प्रोग्राम के तहत किसी देश की सेफ्टी निगरानी की समीक्षा करता है। भारत का पिछला बड़ा IASA ऑडिट अक्टूबर 2021 में हुआ था; अगला ऑडिट इस साल नवंबर में होने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई दिल्ली DGCA सेफ्टी ऑडिट से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए इस मौके का इस्तेमाल करती है या नहीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक टिप्पणी का इंतज़ार है। 

     

  • Wrong Number Recharge: गलत मोबाइल नंबर पर चला गया पैसा? रिफंड पाने का आसान तरीका जानें

    Wrong Number Recharge: गलत मोबाइल नंबर पर चला गया पैसा? रिफंड पाने का आसान तरीका जानें

    नई दिल्ली

    कई बार मोबाइल रिचार्ज करते समय जल्दबाजी में गलत नंबर डाल देते हैं. रिचार्ज होने के बाद जब पता चलता है कि नंबर ही गलत था, तो सबसे पहले यही चिंता होती है कि अब पैसे वापस कैसे मिलेंगे? अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ मामलों में गलत नंबर पर किए गए रिचार्ज के पैसे वापस मिल सकते हैं. हालांकि, इसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। 

    जानिए कैसे मिलेगा पैसे का रिफंड
    अगर रिचार्ज करते समय मोबाइल नंबर गलत डाल दिया है, तो सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि आपने रिचार्ज किस ऐप से किया है. अगर आपने अपने सिम कार्ड की ऑफिशियल ऐप से रिचार्ज किया है, तो रिफंड मिलने का ऑप्शन मिल सकता है। 

    वहीं, अगर आपने किसी थर्ड पार्टी ऐप जैसे किसी दूसरे रिचार्ज ऐप से पेमेंट किया है, तो रिफंड मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. इसलिए रिचार्ज करने से पहले नंबर को एक बार जरूर चेक कर लें। 

    टाइम लिमिट के अंदर करनी होगी शिकायत
    अगर आप Jio यूजर हैं और गलत नंबर पर रिचार्ज हो गया है, तो आपको ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए. रिचार्ज को तय समय के अंदर कैंसिल किया जा सकता है। 

    रिफंड लेते समय आपको अवेलेबल रिफंड मेथड में से एक विकल्प चुनना पड़ सकता है. इसमें इंस्टेंट क्रेडिट या Jio Store Credit Wallet जैसे ऑप्शन मिल सकते हैं. रिफंड की रकम आपके चुने गए तरीके के हिसाब से वापस आ सकती है। 

    इसलिए अगली बार अगर गलती से गलत नंबर पर रिचार्ज हो जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत ऐप में जाकर रिफंड या कैंसिल रिचार्ज का ऑप्शन जरूर चेक करें. जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बेहतर रहेगी। 

  • त्योहारी सीजन में घर जाना होगा आसान, रेलवे ने शुरू की 15 स्पेशल ट्रेनें; सीटों की बुकिंग शुरू

    त्योहारी सीजन में घर जाना होगा आसान, रेलवे ने शुरू की 15 स्पेशल ट्रेनें; सीटों की बुकिंग शुरू

    नई दिल्ली

    दिवाली और छठ पर्व पर घर जाने की योजना बना रहे रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है. भारतीय रेलवे ने त्योहारों के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए 15 स्पेशल ट्रेन चलाने का ऐलान किया है. इन ट्रेनों के लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। 

    रेलवे के 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) नियमों के तहत IRCTC ऐप, वेबसाइट और काउंटर पर सुबह 8 बजे से टिकटों की बुकिंग शुरू हो गई है. इस साल 8 नवंबर 2026 को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा, जिसके चलते उत्तर और पूर्व भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में सीटें तेजी से भरने की संभावना है. ऐसे में रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे आखिरी समय की आपाधापी और लंबी वेटिंग लिस्ट से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने टिकट बुक कर लें। 

    यहां देखें रेलवे की ओर से शुरू की गई 15 स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट

        मुंबई सेंट्रल – कटिहार – मुंबई सेंट्रल (09189/09190): 5 सितंबर से 17 नवंबर के बीच 77 अतिरिक्त फेरे.
        कानपुर सेंट्रल – गुवाहाटी – कानपुर सेंट्रल (04127/04128): 10 सितंबर से 11 दिसंबर के बीच 14 अतिरिक्त फेरे.
        कटिहार – अमृतसर – कटिहार (05736/05735): 9 सितंबर से 27 नवंबर के बीच 12 अतिरिक्त फेरे.
         डिब्रूगढ़ – कोलकाता – डिब्रूगढ़ (05932/05931): 5 सितंबर से 30 नवंबर के बीच 13 अतिरिक्त फेरे.
        वाराणसी – दिल्ली – वाराणसी (04209/04210)
        अयोध्या कैंट – आनंद विहार टर्मिनल (04213/04214  द्विसाप्ताहिक)
         चंडीगढ़ – पटना जंक्शन (04512/04511  साप्ताहिक)
        फिरोजपुर कैंट – पटना जंक्शन (04616/04615  साप्ताहिक)
         आनंद विहार टर्मिनल – जोगबनी (04008/04007  साप्ताहिक)
         आनंद विहार टर्मिनल – मुजफ्फरपुर (04028/04027  द्विसाप्ताहिक)
         दिल्ली – सीतामढ़ी – दिल्ली (04010/04009  साप्ताहिक)
        नई दिल्ली – कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट (02456/02455)
         बरौनी – नई दिल्ली – बरौनी स्पेशल (02563/02564)
        दरभंगा – नई दिल्ली – दरभंगा स्पेशल (02569/02570)

     इन रूटों पर रहेगी सबसे ज्यादा मारामारी

    बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े प्रमुख रूटों जैसे दिल्ली-पटना, मुंबई–पटना, बेंगलुरु-पटना, अहमदाबाद-पटना, दिल्ली-गोरखपुर, वाराणसी-दिल्ली और कानपुर-दिल्ली पर यात्रियों की सबसे ज्यादा टिकटों के लिए मामारी रहने की आशंका है। 
     
     ऐसे पाएं कंफर्म टिकट

         मास्टर लिस्ट बनाएं: टिकट बुकिंग शुरू होने से पहले ही IRCTC प्रोफाइल में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ की जानकारी (Master List) सेव कर लें.
         समय से पहले लॉगिन करें: सुबह 8 बजे बुकिंग शुरू होने से 5 मिनट पहले लॉगिन कर लें.
         तेज पेमेंट मोड चुनें: भुगतान में लगने वाले समय को बचाने के लिए UPI या IRCTC Wallet का प्रयोग करें.