Category: देश

  • ₹400 का LPG सिलेंडर और बढ़ी सब्सिडी! क्या सरकार करने वाली है बड़ा ऐलान?

    ₹400 का LPG सिलेंडर और बढ़ी सब्सिडी! क्या सरकार करने वाली है बड़ा ऐलान?

    नई दिल्ली

    ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद यानी CEW की एक रिपोर्ट आई है। इसमें कहा गया है कि LPG की कीमत एक ऐसा बड़ा मुद्दा है, जो सभी वर्गों के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा दरें आम आदमी की पहुंच से काफी ऊपर हैं। इसी वजह से लोग जलाऊ लकड़ी या महंगे अनौपचारिक सिलेंडरों का सहारा ले रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक अगर 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो जाए तो 80 प्रतिशत से अधिक लोग पूरी तरह से गैस पर आ जाएंगे। अभी सिलेंडर रिफिल करवाने की औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये प्रति सिलेंडर है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला सिलेंडर 642 रुपये का है।

    प्रवासी मजदूरों को भारी दिक्कतें
    स्टडी के अनुसार, प्रवासी मजदूरों
    में से 79 प्रतिशत के पास औपचारिक गैस कनेक्शन नहीं है और 4 प्रतिशत से भी कम लोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ पा रहे हैं। यह स्थिति इसलिए और हैरान करने वाली है, क्योंकि 2021 की नीति में प्रवासी मजदूरों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन के माध्यम से कनेक्शन लेने की सुविधा पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद जागरूकता की कमी और कागजी प्रक्रियाओं में उलझन के कारण प्रवासी मजदूर इस योजना से दूर हैं।

    सीईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बराह का कहना है कि सरकार का यह सोचना कि केवल एलपीजी कनेक्शन दे देने भर से काम हो जाएगा, सही नहीं है। असली चुनौती यह है कि लोग नियमित रूप से गैस रिफिल करवा पाएं, प्रवासी मजदूरों को उज्ज्वला योजना की पूरी जानकारी हो और ग्रामीण घरों तक सिलेंडर भरोसेमंद ढंग से पहुंचते रहें।

    उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की स्वच्छ हवा की नीति को केवल 'कनेक्शन देने' से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि साफ ईंधन सस्ता, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ हो।

    शहरी झुग्गियों और प्रवासियों की स्थिति
    शहरी अनौपचारिक बस्तियों में 70 प्रतिशत लोग पूरी तरह से गैस का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिना औपचारिक कनेक्शन वाले 31 प्रतिशत लोगों को एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कनेक्शन देने से मना कर दिया जाता है। इस वजह से 11 प्रतिशत लोग वास्तविक रिटेल प्राइस के बजाय 1,040 रुपये तक अनौपचारिक रूप से सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।

    वहीं, प्रवासी मजदूरों में से 70 प्रतिशत, जो खुले स्थानों में रहते हैं, पूरी तरह से ठोस ईंधनों जैसे लकड़ी और कोयले पर निर्भर हैं। जो प्रवासी अनौपचारिक रूप से गैस खरीदते हैं, उन्हें 71 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो आधिकारिक दर से 20 प्रतिशत से अधिक महंगा है।

    200 रुपये और बढ़े सब्सिडी
    सीईडब्ल्यू की पहली सिफारिश यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को उज्ज्वला सब्सिडी को प्रति सिलेंडर लगभग 200 रुपये बढ़ाना चाहिए। दूसरा सुझाव प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाने का है, ताकि वे आसानी से उज्ज्वला योजना से जुड़ सकें।

    तीसरा, स्मार्ट मीटर कियोस्क की पायलट परियोजनाएं शुरू करने की सिफारिश की गई है, ताकि लोग छोटी-छोटी किस्तों में गैस के पैसे जमा कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर डिलीवरी बढ़ाने के लिए विक्रेताओं को अलग-अलग कमीशन देने का सुझाव दिया गया है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में भी सिलेंडर पहुंच सकें।

  • सुप्रीम कोर्ट में संपत्ति विवाद का अनोखा समाधान, बेटे से कहा- मां से माफी मांगो और रिश्ते सुधारो

    सुप्रीम कोर्ट में संपत्ति विवाद का अनोखा समाधान, बेटे से कहा- मां से माफी मांगो और रिश्ते सुधारो

    नई दिल्ली
    सुप्रीम कोर्ट में मां-बेटे के संपत्ति विवाद में एक अलग ही नजारा देखने को मिला. कोर्ट ने बेटे से कहा कि मां के पैर छूकर माफी मांगो और अपने पापों के लिए माफी मांगो. दरअसल, कोर्ट ने इस विवाद की सुनवाई के दौरान बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और आशीर्वाद लेने की सलाह थी. कोर्ट ने कहा कि मां का स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है.जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी.  सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से मौखिक रूप से कहा कि आपको अपनी मां के पैर छूकर माफी मांगनी चाहिए, अपने सभी पापों के लिए माफी मांगिए। 

    क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है- सुप्रीम कोर्ट
    जस्टिस शर्मा ने अदालत में मौजूद वकील को संबोधित करते हुए भी कहा कि क्या बेटे का ऐसा करना गलत नहीं है? हम बेटे से कह रहे हैं कि वापस मां के पास जाए, उनके पैर छूए, उन्हें महसूस करे, माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले. मामला उस संपत्ति से जुड़ा है, जिसकी मां और उनके पति एकमात्र मालिक हैं.  माता-पिता ने प्रेम और स्नेह के चलते बेटे और उसकी पत्नी को संपत्ति की पहली मंजिल पर बिना किराए के लाइसेंसी के तौर पर रहने की अनुमति दी थी। 

    बेटे और उसकी पत्नी पर परेशान करने के आरोप
    माता-पिता का आरोप था कि बाद में बेटे और उसकी पत्नी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया और संपत्ति उनके नाम ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया. इसके बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर बेटे से संबंध समाप्त करने की घोषणा की. उन्होंने बेटे के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई और संपत्ति खाली करने को कहा. माता-पिता ने संपत्ति का कब्जा वापस लेने, स्थायी निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग को लेकर मुकदमा दायर किया। 

    माता-पिता ही संपत्ति के एकमात्र मालिक थे- ट्रायल कोर्ट ने माना
    ट्रायल कोर्ट ने माना कि माता-पिता संपत्ति के एकमात्र मालिक हैं और बेटे तथा उसकी पत्नी केवल लाइसेंसी हैं. लाइसेंस वैध रूप से समाप्त किए जाने के बाद दोनों को पहली मंजिल का कब्जा खाली करना होगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की तो सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने बेटे को मां के पास जाकर माफी मांगने और उनका आशीर्वाद लेने की मौखिक सलाह भी दी। 

  • 8वें वेतन आयोग से बदलेगी कर्मचारियों की व्यवस्था? 40 साल पुराने नियम में बदलाव की तैयारी, जानें क्या होगा फायदा

    8वें वेतन आयोग से बदलेगी कर्मचारियों की व्यवस्था? 40 साल पुराने नियम में बदलाव की तैयारी, जानें क्या होगा फायदा

    नई दिल्ली

    आठवें वेतन आयोग की सिफारिशो का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। वेतन आयोग से कर्मचारी संगठनों की डिमांड भी तरह-तरह की है। ऐसी ही एक डिमांड पेंशनभोगियों की भी है। यह डिमांड अगर लागू हो जाता है रिटायर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 40 साल पुराने नियम में बदलाव हो जाएगा।

    क्या है डिमांड?
    केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों की मांग है कि कम्युटेड पेंशन (समय से पहले ली गई पेंशन) को बहाल करने की 15 साल की अवधि को कम किया जाए। कई संगठनों ने 8वें वेतन आयोग से सिफारिश की है कि इसे 10 से 12 साल बाद बहाल किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा नियम उन वित्तीय और एक्चुअरियल मान्यताओं पर आधारित है जो कई दशक पुरानी हैं। बता दें कि साल 1986 में कम्युटेड पेंशन के 15 साल वाले नियम को लागू किया गया था। कहने का मतलब है कि यह 40 साल पुराना नियम है।

    पेंशन कम्युटेशन क्या है?
    केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट के समय अपनी बेसिक पेंशन का 40% तक कम्युट (समय से पहले एकमुश्त लेना) करवा सकते हैं और उस रकम को एकमुश्त पा सकते हैं। इसके बदले, कम्युट किए गए हिस्से को उनकी मासिक पेंशन से काट लिया जाता है। मौजूदा नियमों के तहत, काटी गई पेंशन 15 साल बाद बहाल कर दी जाती है।

    क्यों उठ रहे सवाल?
    कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों का तर्क है कि जब यह सिस्टम लागू किया गया था तब की वित्तीय और जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) स्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं। बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने बहाली की अवधि 11 साल करने की मांग की है।

    इसके अलावा, इंडियन रेलवेज टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन ने 12 साल का प्रस्ताव दिया है, जबकि ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन ने 10 साल की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज और ऑल पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी 11 साल की सिफारिश की है।

    ₹100 की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण
    नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने 100 रुपये की कम्युटेड पेंशन का उदाहरण दिया है। 61 साल की उम्र के पेंशनर के लिए 8.194 के कम्युटेशन फैक्टर पर हर ₹100 मासिक पेंशन कम्युट करने पर करीब ₹9,833 की एकमुश्त राशि मिलती है।

    इसके बाद पेंशनर की मासिक पेंशन से ₹100 की कटौती होती है। 10 साल में कुल कटौती ₹12,000 और 15 साल में ₹18,000 हो जाती है। संगठन का तर्क है कि करीब 10 साल में कम्युट की गई राशि की भरपाई हो जाती है और उसके बाद की कटौती की समीक्षा की जानी चाहिए।

  • जलवायु संकट का खौफनाक अनुमान, 2100 तक 40% धरती हो सकती है बंजर; जीवन पर मंडराएगा बड़ा संकट

    जलवायु संकट का खौफनाक अनुमान, 2100 तक 40% धरती हो सकती है बंजर; जीवन पर मंडराएगा बड़ा संकट

    नई दिल्ली

    हमारी धरती लगातार गर्म हो रही है और इसका नतीजा बेहद भयानक होने वाला है. बढ़ते तापमान के कारण दुनिया के कई इलाके तेजी से सूख रहे हैं. जब ऐसा होता है तो सूखे इलाकों की सीमाएं आगे बढ़ने लगती हैं. इससे पूरी दुनिया का लैंडस्केप बदल जाता है और पेड़-पौधे खत्म होने लगते हैं. अब साइंटिस्ट्स ने इसे लेकर एक खतरनाक अलर्ट जारी किया है. एक नई रिसर्च के मुताबिक 21वीं सदी के अंत तक धरती का 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा ड्राईलैंड्स बन सकता है। 

    ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में पब्लिश एक रिपोर्ट में यह डरावना दावा किया गया है. हालांकि इस रिसर्च में एक हैरान करने वाली बात भी सामने आई है. क्लाइमेट चेंज के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) इस खतरे को थोड़ा धीमा कर रही है. आइए इस डरावनी रिसर्च को डिटेल में समझते हैं। 

    धरती पर ड्राईलैंड्स बढ़ने का कारण क्या है?
    ड्राईलैंड्स उन इलाकों को कहते हैं जहां पानी की भारी कमी होती है. यहां बारिश बहुत कम होती है और वाष्पीकरण के जरिए पानी ज्यादा उड़ जाता है. साइंटिस्ट्स का मानना है कि दुनिया भर में ड्राईलैंड्स लगातार बढ़ रहे हैं। 

    चाइनीज एकेडमी ऑफ फॉरेस्ट्री के साइंटिस्ट्स ने इसे लेकर गहराई से एनालिसिस किया है. उन्होंने दुनिया भर के क्लाइमेट डेटा और भविष्य के अनुमानों का इस्तेमाल किया. इसके लिए 1960 से 2023 तक का मौसम डेटा देखा गया. टीम ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करके यह पूरा डेटा तैयार किया है। 

        रिसर्च टीम के एक साइंटिस्ट ने कहा, ‘सूखे इलाकों का बढ़ना ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए बड़ा खतरा है। 

    अगर सूखे इलाके उन जगहों पर फैलेंगे जहां अभी अच्छी नमी है, तो पानी की कमी और गंभीर हो जाएगी. इससे पूरे इकोसिस्टम को भारी नुकसान पहुंचेगा और रेगिस्तान तेजी से बढ़ने लगेंगे. इंसान और जानवरों के लिए पानी जुटाना भी काफी मुश्किल हो जाएगा। 

    1994–2023 के दौरान दुनिया भर के शुष्क क्षेत्रों और उनसे जुड़े जलवायु क्षेत्रों का भौगोलिक वितरण (a); हर जलवायु क्षेत्र का प्रतिशत (b). (Visuals Credit : Cai et al., Environmental Research Letters, 2026)

    कार्बन डाइऑक्साइड गैस इस खतरे को धीमा कैसे कर रही है?
        इस रिसर्च में सबसे हैरान करने वाली बात कार्बन डाइऑक्साइड गैस को लेकर है. हम सभी जानते हैं कि यह गैस ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे बड़ा कारण है. लेकिन यही गैस धरती को पूरी तरह सूखने से थोड़ा बचा भी रही है। 

        दरअसल वातावरण में जब CO2 का लेवल बढ़ता है तो इसका असर पौधों पर पड़ता है. पौधों की पत्तियों में छोटे छेद होते हैं जिन्हें स्टोमेटा कहा जाता है. ज्यादा CO2 होने पर यह स्टोमेटा पूरी तरह नहीं खुलते हैं. इससे पौधों के अंदर का पानी भाप बनकर कम उड़ता है. इस वजह से पेड़-पौधे लंबे समय तक अपने अंदर पानी बचाकर रख पाते हैं। 

        स्टोमेटा के आंशिक रूप से बंद होने के कारण पानी का नुकसान काफी कम हो जाता है. साइंटिस्ट्स का कहना है कि पुरानी रिसर्च में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया था. पुराने क्लाइमेट मॉडल में इस खास फैक्टर को इग्नोर कर दिया गया था. इसीलिए पहले की कुछ रिपोर्ट्स में 2100 तक 56 प्रतिशत धरती के सूखने का दावा किया गया था. लेकिन नई कैलकुलेशन के बाद इसे करीब 40 प्रतिशत माना गया है। 

    फिलहाल धरती के कितने हिस्से पर मौजूद है सूखा और बंजर इलाका?
    रिसर्च टीम ने 1994 से 2023 के बेसलाइन डेटा के आधार पर नई जानकारी दी है. अंटार्कटिका को छोड़कर फिलहाल धरती का करीब 38.58 प्रतिशत हिस्सा ड्राईलैंड्स है. इन सूखे इलाकों को चार अलग-अलग कैटिगरी में बांटा गया है। 

  • वडनगर से काशी तक गूंजेगा ‘सेवा संकल्प’, PM मोदी के 25 साल पूरे होने पर BJP का मेगा सेलिब्रेशन

    वडनगर से काशी तक गूंजेगा ‘सेवा संकल्प’, PM मोदी के 25 साल पूरे होने पर BJP का मेगा सेलिब्रेशन

    बनारस 
     पीएम मोदी के 25 साल के शासन को भव्य तरीके से मनाए जाने की तैयारी है. इस मौके पर बनारस से वडनगर तक कलश यात्रा का ऐलान क‍िया गया है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा क‍ि 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन सेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होने वाले हैं. ऐसे में अगले महीने 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित क‍िया जाएगा. 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक एक महीने तक चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' आयोजित होगा. 17 सितंबर को हम हर वर्ष सेवा दिवस के रूप में मनाते हैं और पूरा कार्यक्रम सेवा पखवाड़ा के रूप में मनाते हैं।  

    भाजपा अध्‍यक्ष ने कहा, पीएम मोदी ने पिछले 25 वर्षों में जन सेवा से राष्ट्रसेवा के मंत्र को पकड़ते हुए पूरी तरह से सेवा यात्रा को जारी रखा है. 25 करोड़ गरीब परिवारों को गरीबी रेखा से बाहर लाना, 80 करोड़ लोगों को राशन उपलब्ध कराना, 100 करोड़ लोगों से अधिक को सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ना, 12 करोड़ शौचालय, कोविड की फ्री वैक्सीन और 4 करोड़ से अधिक गरीबों के लिए आवास बनाना सामान्य घटना नहीं है. उनका सफर एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में प्रारंभ हुआ और आज देश के प्रधान सेवक के रूप में उन्होंने काम को आगे बढ़ाया, यह केवल उनके स्पष्ट विजन, दृढ़संकल्प और सामाजिक जीवन में लगातार गुणात्मक परिवर्तन कैसे आए, कैसे लोगों के जीवन में बदलाव आए इसका प्रयास उन्होंने किया। 

    'आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है' 
    नितिन नवीन ने आगे कहा, ''पीएम मोदी ने जब देश का नेतृत्व संभाला तो पूरे देश में एक निराशा, एक अंधकार का माहौल था, पॉलिसी पैरालिसिस कह सकते हैं हमारे इकोनॉमी को फ्रेजाइल फाइव के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आ रहा है। 

    7 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी स्कूलों में होंगे कार्यक्रम
    उन्‍होंने कहा, "प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर को हर वर्ष हम सेवा दिवस के रूप में मनाते हैं. 17 सितंबर को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा. 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी स्कूलों में चित्रकारी, ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता कराई जाएगी. इसमें उत्कृष्ट चित्रों को और भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्यमंत्री के स्तर पर और अन्य केंद्रीय मंत्री के स्तर पर प्रमाण पत्र देने की योजना है। 

    सभी जिलों में सेवा ज्योतिकलश यात्रा के माध्यम से होंगे कार्यक्रम
    उन्‍होंने कहा क‍ि 7 अक्टूबर, जिस दिन 'हेडऑफ द गवर्नमेंट' के रूप में प्रधानमंत्री के जनसेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होंगे, उस दिन देशभर के सभी जिलों में सेवा ज्योतिकलश यात्रा के माध्यम से कार्यक्रम करेंगे. इस कार्यक्रम में उनके 25 वर्षों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी, इस कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 का भी संकल्प लिया जाएगा। 

  • बिहार-झारखंड के रेल यात्रियों को बड़ी राहत, 7 रूट होंगे फोरलेन; घटेगी भीड़ और ट्रेनों की लेटलतीफी

    बिहार-झारखंड के रेल यात्रियों को बड़ी राहत, 7 रूट होंगे फोरलेन; घटेगी भीड़ और ट्रेनों की लेटलतीफी

    नई दिल्ली
    केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में रेलवे के 7 सबसे व्यस्त (हाई डेंसिटी) रूट्स को फोर लेन ट्रैक करने की मंजूरी दे दी गई. अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की सूचना देते हुए इसका ऐलान किया. हालांकि, इससे करीब 2 हफ्ते पहले 26 अगस्त को वह इन रूट्स को फोर लेने किए जाने की जानकारी दे चुके थे.इन परियोजनाओं के तहत करीब 656 किमी नई रेल लाइनें जोड़ी या अपग्रेड की जाएंगी. इसके लिए कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इससे रेलवे के मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में सुधार होगा। 

    इन परियोजनाओं का फायदा पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को मिलेगा. करीब 4,790 गांव इन परियोजनाओं से बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जुड़ेंगे. इन गांवों में लगभग 56 लाख लोगों की आबादी रहती है. नई लाइनें बनने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही भी आसान होगी। 

    11,000 किलोमीटर लंबा ट्रैक होगा 4-लेन
    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगर हम सबसे अहम रेलवे कॉरिडोर पर नजर डालें तो यह 11,000 किलोमीटर लंबे, 7 हाई-डेंसिटी कॉरिडोर हैं. इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को 4-लेन का बनाया जा रहा है और कई दूसरे कॉरिडोर पर भी काम चल रहा है. ये आने वाले समय में बहुत ज्‍यादा ट्रैफिक संभालेंगे। 

    ये रूट संभालते हैं 40% भीड़ का हिस्‍सा
    दिल्ली से मुंबई, मुंबई से चेन्नई, चेन्नई से कोलकाता और कोलकाता से मुंबई – यह 'गोल्डन क्वाड्रिलैटरल' है. ये 7 कॉरिडोर रेलवे के कुल ट्रैफिक का लगभग 40% हिस्सा संभालते हैं. इन कॉरिडोर में से लगभग 2,000 किलोमीटर पहले ही 4-लेन का हो चुका है. लगभग 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है और बाकी 4,000 किलोमीटर के लिए अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। 

    3-मल्‍टी ट्रैकिंग प्रोजेक्‍ट को भी मंजूरी 
    4 लेन प्रोजेकट के अलावा, कैबिनेट ने 5 राज्यों के 14 ज़िलों में फैले 3 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है. इस प्रोजेकट से भारतीय रेलवे में लगभग 656 km नेटवर्क फैलेगा. इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत ₹10,783 करोड़ है और इन्हें 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

    5 नए प्रोजेक्‍ट की भी मंजूरी
    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा‍ कि केंद्रीय कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 जिलों में 5 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी है. इन प्रोजेक्ट्स से भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 540 किलोमीटर बढ़ जाएगा. इन प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। 

    कौन-कौन सी रेल लाइनें होंगी अपग्रेड
    सरकार ने खड़गपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में बागडेही तक 4th लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड 4th लाइन और बिलासपुर यानी उसलापुर-पेंड्रा रोड 3rd लाइन को मंजूरी दी है. इन लाइनों के मल्टीट्रैकिंग से मौजूदा रेल रूट पर ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी। 

    रेलवे का ट्रैफिक जाम होगा कम
    नई रेल लाइनों के जुड़ने से मौजूदा रूट पर ट्रेनों का कंजेशन कम करने में मदद मिलेगी. ट्रेनों का संचालन ज्यादा सुचारू होगा और यात्री तथा मालगाड़ियों को अलग-अलग समय और रूट पर चलाने की सुविधा बढ़ेगी. इससे माल ढुलाई की क्षमता भी मजबूत होगी। 

    पर्यटन और धार्मिक स्थलों को फायदा
    इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इनमें पुरी का जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, अचानकमार टाइगर रिजर्व, तारातारिणी मंदिर और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 

  • IDBI Bank को लेकर जल्द आ सकती है बड़ी खबर! Fairfax की डील पर सरकार तय कर रही ऐलान का सही समय

    IDBI Bank को लेकर जल्द आ सकती है बड़ी खबर! Fairfax की डील पर सरकार तय कर रही ऐलान का सही समय

        नई दिल्ली
    करीब 5 साल से इस सरकारी बैंक को प्राइवेट के हाथों में सौंपने के लिए कोशिशें चल रही थीं. लेकिन हर बार मामला अटक जाता था. लेकिन अब खबर है कि आईडीबीआई (IDBI) बैंक के निजीकरण और रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। 

    दरअसल, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं. खरीदारों की रेस में कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स सबसे आगे चल रही है, जिसने लगभग 53,000 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन का संशोधित प्रस्ताव पेश किया है। 

    साल 2021 से जारी इस प्रक्रिया में नियामक देरी और बोलियों के उतार-चढ़ाव के बाद, अब सरकार सही समय पर डील के आधिकारिक ऐलान पर विचार कर रही है. IDBI बैंक में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 60.72% रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।

    सही समय पर ऐलान की तैयारी 
    सूत्रों के मुताबिक सरकार अब इस सौदे की औपचारिक घोषणा के सही समय पर विचार कर रही है. IDBI खरीदने के लिए कनाडा की प्रेम वात्सा के स्वामित्व वाली फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) ने सबसे बड़ी बोली लगाई है। 

    शुरुआत में इस सौदे में कुछ अड़चनें आई थीं, क्योंकि शुरुआती बोलियां सरकार के रिजर्व प्राइस से कम थीं. इसके बाद बोलीदाताओं को अपने ऑफर संशोधित करने का मौका दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक फेयरफैक्स ने अपने प्रस्ताव में सुधार किया है, जो अब करीब 81 रुपये प्रति शेयर के आसपास समझा जा रहा है. इस दर पर 60.72% हिस्सेदारी का कुल वैल्यूएशन लगभग 53,000 करोड़ रुपये बैठता है। 

     IDBI बैंक में सरकार और LIC की कितनी हिस्सेदारी
    इस रणनीतिक विनिवेश प्रक्रिया के तहत सरकार अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेच रही है. जबकि LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेच रही है। 

    बता दें, IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया 2021 में शुरू की गई थी. नियामक मंजूरी और प्रक्रियात्मक कारणों के चलते इसमें कई बार देरी हुई. हालांकि, फेयरफैक्स की ओर से मिली नई बोली और निरंतर रुचि से साफ है कि यह विनिवेश प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। 

    फिलहाल सरकार यह मूल्यांकन कर रही है कि फेयरफैक्स का नया संशोधित प्रस्ताव बैंक के सही मूल्यांकन के अनुकूल है या नहीं. सभी पहलुओं की जांच पूरी होते ही आधिकारिक घोषणा की तारीख तय कर दी जाएगी. इस खबर की वजह से IDBI बैंक के शेयर में भी हलचल देखने को मिल रही है. बुधवार को शेयर मामूली गिरावट के साथ 81 रुपये पर बंद हुआ. इससे पहले मंगलवार को शेयर में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी। 

     

  • गणेश उत्सव से पहले सरकार का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश के सभी गणेश पंडालों की बिजली होगी फ्री

    गणेश उत्सव से पहले सरकार का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश के सभी गणेश पंडालों की बिजली होगी फ्री

    अमरावती

    गणेश चतुर्थी से पहले आंध्र प्रदेश सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. राज्य में गणेश उत्सव के लिए लगाए जाने वाले सभी पंडालों को मुफ्त बिजली दी जाएगी. आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने इसकी जानकारी दी. सरकार के इस फैसले से गणेश उत्सव मनाने वाले आयोजकों को बिजली के खर्च से राहत मिलेगी। 

    नारा लोकेश ने ट्वीट कर बताया कि इस गणेश चतुर्थी पर आंध्र प्रदेश के सभी गणेश पंडालों को मुफ्त बिजली दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यह सुविधा पूरे राज्य में लागू होगी. इससे पंडाल लगाने वालों को बिजली के बिल का खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। 

    नारा लोकेश ने इस बड़ी राहत का ऐलान करते हुए कहा कि उत्सव की भव्यता को बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है. हर साल गली-मोहल्लों में पंडाल सजाने वाली समितियों का एक बड़ा बजट बिजली कनेक्शन, मीटर और बिल भरने में खर्च हो जाता था. सरकारी ऐलान के बाद अब पंडालों को रोशनी के लिए जेब खाली नहीं करनी पड़ेगी। 

    त्योहारी सीजन में लोगों को राहत देने का यह अकेला फैसला नहीं है. इससे ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र से भी गणेश भक्तों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई थी. PWD मिनिस्टर शिवेंद्रसिंहराजे भोंसले ने जानकारी दी थी कि मुंबई से कोंकण जाने वाले लोगों को नेशनल हाईवे पर कोई टोल टैक्स नहीं देना होगा। 

    महाराष्ट्र में मुंबई से कोंकण जाने वाले गोवा हाईवे और पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर 11 सितंबर से 27 सितंबर तक टोल वसूली पूरी तरह बंद रहेगी. इससे सिंधुदुर्ग या कोल्हापुर की तरफ अपने पैतृक गांव जा रहे परिवारों के 650 से 700 रुपये तक बचेंगे. साथ ही टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से भी छुटकारा मिलेगा. दक्षिण से लेकर पश्चिम तक, सरकारों के इन फैसलों से गणेशोत्सव की खुशियां दोगुनी हो गई हैं। 

  • सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! ₹68,000 न्यूनतम वेतन और पेंशन पर उठी मांग, 8वें वेतन आयोग की बैठक से पहले 7 अपडेट

    सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! ₹68,000 न्यूनतम वेतन और पेंशन पर उठी मांग, 8वें वेतन आयोग की बैठक से पहले 7 अपडेट

    पुडुचेरी
    आठवें वेतन आयोग की टीम आज 9 सितंबर, बुधवार को पुडुचेरी में है, जहां कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के साथ मीटिंग होने वाली है. इससे पहले चेन्नई मीटिंग संपन्न हुई. देश के करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख से ज्‍यादा पेंशनर्स के लिए चेन्नई मीटिंग से बड़े अपडेट्स सामने आए हैं। 

    चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को हुई आयोग की बैठकों में डाककर्मियों से जुड़े संगठन, पेंशनर ग्रुप, GPO पेंशनर्स फोरम, कुछ अन्‍य कर्मचारी संगठन शामिल हुए और सैलरी, पेंशन, भत्तों समेत अन्‍य मुद्दों पर भी अपनी मांगें रखीं और सुझाव दिए. चेन्नई के ITC Grand होटल में हुई इन मीटिंग्‍स में संगठनों का फोकस सैलरी रिवीजन, अलाउंसेज और पेंशन रिफॉर्म पर रहा. आइए जानते हैं, चेन्नई मीटिंग से आए 5 बड़े अपडेट्स क्‍या हैं। 

    1). GPO पेंशनर्स फोरम ने रखी मांगें 
    चेन्नई मीटिंग में GPO पेंशनर्स फोरम के प्रतिनिधियों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्‍यों के सामने सैलरी, पेंशन में संशोधन, भत्तों में बढ़ोतरी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में सुधार का सुझाव दिया. खास तौर पर डाक कर्मियों के करियर की दिक्कतों, जरूरतों और सुधारों पर जोर दिया। 

    2). सैलरी में सुधार की स्‍थाई व्‍यवस्‍था हो 
    संगठन के प्रतिनिधियों ने मीटिंग के दौरान सैलरी स्‍ट्रक्‍चर में बदलाव की मांग की. उन्‍होंने सैलरी में संशोधन के लिए एक स्थाई व्यवस्था पर जोर दिया. साथ ही मौजूदा पे-मैट्रिक्स सिस्टम की जगह रनिंग स्केल लागू करने की मांग की. संगठन का मानना है कि इस व्‍यवस्‍था से कर्मचारियों की बेहतरी होगी। 

    3). 68,000 रुपये मिले न्‍यूनतम वेतन 
    चेन्नई मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों का न्‍यूनतम वेतन यानी मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 68,000 रुपये किए जाने का सुझाव दिया गया है. GPO पेंशनर्स फोरम के सदस्‍यों ने  NC-JCM और शुरुआती कुछ संगठनों के सुझाव के अनुसार, न्‍यूनतम वेतन 69,000 रुपये किए जाने की बात उठी थी। 

    4). सालाना इंक्रीमेंट 6 से 7 फीसदी हो 
    चेन्‍नई में एम्प्लॉई संघ ने एनुअल इंक्रीमेंट हाइक यानी सालाना वेतन बढ़ोतरी की मांग उठाई. संगठन ने मौजूदा 3% इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6 से 7 फीसदी करने का सुझाव दिया. NC-JCM स्‍टाफ साइड यानी नेशनल काउंसिल ऑफ द जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने भी इस विषय को ऑलरेडी पुश किया हुआ है. NC-JCM ने सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6 से 7% करने का प्रपोजल दिया है। 

    5). ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम बहाल हो 
     GPO पेंशनर्स फोरम ने पेंशन व्‍यवस्‍था में बड़े बदलाव की मांग रखी है. इनमें रीस्टोरिंग ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम यानी पुरानी पेंशन स्‍कीम को फिर से बहाल करने की मांग की है. इसके अलावा फैमिली पेंशन को बढ़ाने की भी मांग की है. पेंशन के अन्‍य स्ट्रक्चर्स पर भी बात हुई है। 

    6). भत्तों और सुविधाओं पर भी सुझाव 
    अपकमिंग फिटमेंट फैक्टर, डियरनेस अलाउंस, हाउस रेंट अलाउंस पर भी बात हुई. चेन्नई GPO पेंशनर्स फोरम के प्रतिनिधियों ने अन्‍य मांगों के साथ-साथ कम्यूटेशन की रकम की वसूली में राहत, MACP फायदों में बदलाव, बेहतर भत्ते और छुट्टी के फायदे पर बात रखी. साथ ही सोशल सिक्‍योरिटी को और मजबूत करने वाल उपायों की मांग की। 

    7). महिला कर्मि‍यों और दिव्यांगों के लिए मांग
    पेंशनर फोरम के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ-साथ करियर की अन्‍य जरूरतों के बारे में भी बातें की और प्रोमोशन जैसे मसलों पर भी जोर दिया. डाक विभाग में महिला कर्मचारियों और दिव्यांगों से जुड़ी जरूरतों और मुद्दों पर भी संगठन ने आयोग के सामने पक्ष रखा। 

    आज पुडुचेरी में अहम मीटिंग 
    चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को मीटिंग खत्‍म होने के बाद केंद्रीय वेतन आयोग की टीम आज पुडुचेरी में मीटिंग करने वाली है. इस मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े अलग-अलग संगठनों के शामिल होने की संभावना है. मीटिंग में सैलरी, पेंशन, भत्तों, फिटमेंट फैक्‍टर, हेल्‍थ स्‍कीम समेत अन्‍य मुद्दों पर बात हो सकती है। 

  • रेलवे ने किया 16 दिन के मेगा ब्लॉक का ऐलान, 42 ट्रेनें रद्द-25 डायवर्ट; जानें पूरा अपडेट

    रेलवे ने किया 16 दिन के मेगा ब्लॉक का ऐलान, 42 ट्रेनें रद्द-25 डायवर्ट; जानें पूरा अपडेट

    पुणे
    पुणे से ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर है. सेंट्रल रेलवे 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक पुणे इलाके में बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर ब्लॉक लेने जा रहा है. इस दौरान 42 ट्रेनें रद्द रहेंगी, 25 ट्रेनों का रूट बदला जाएगा, जबकि कई ट्रेनों को बीच के स्टेशनों से शुरू या खत्म किया जाएगा. इसका असर लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ पुणे की लोकल और डीईएमयू सेवाओं पर भी पड़ेगा। 

    रेलवे के मुताबिक, हडपसर और घोरपड़ी के बीच तीसरी रेल लाइन को चालू करने के लिए यह मेगा ब्लॉक लिया जा रहा है. इस दौरान पुणे और हडपसर यार्ड में इंजीनियरिंग, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन और ओवरहेड इक्विपमेंट से जुड़े काम किए जाएंगे। काम के चलते कुछ रेल लाइनें उपलब्ध नहीं रहेंगी, इसलिए कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या रीशेड्यूल किया जाएगा।

    ये 42 ट्रेनें रहेंगी रद्द

    इस मेगा ब्लॉक के दौरान 42 ट्रेनें अलग-अलग तारीखों पर नहीं चलेंगी. इनमें 12169 पुणे-सोलापुर और 12170 सोलापुर-पुणे ट्रेनें 19 से 23 सितंबर और 3-4 अक्टूबर को रद्द रहेंगी। 

    इसके अलावा 12116, 12115, 12114, 12113, 11041 और 11042 भी तय तारीखों पर रद्द रहेंगी. 4 अक्टूबर को 22105, 22106, 11007, 11008, 11029, 11030, 12127, 12128, 12157, 12158, 11423 और 11424 समेत कई ट्रेनें नहीं चलेंगी। 

    लोकल और DEMU पर भी असर
    मेगा ब्लॉक का असर पुणे-दौंड और पुणे-लोनावला के यात्रियों पर भी पड़ेगा. 71407 और 71408 पुणे-दौंड डीईएमयू 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक रद्द रहेंगी. इसके अलावा 71411, 71412, 71404, 71405, 71401, 71402, 71413, 71419 और 71420 अलग-अलग तारीखों पर रद्द रहेंगी. पुणे-लोनावला की 99812, 99818, 99813, 99820 और 99821 सबअर्बन सेवाएं 4 अक्टूबर को रद्द रहेंगी. वहीं 71441 और 71442 अहमदनगर-बीड़ डीईएमयू 5 अक्टूबर को नहीं चलेंगी। 

    25 ट्रेनों का बदला जाएगा रूट
    मेगा ब्लॉक के दौरान 25 ट्रेनों को उनके सामान्य रास्ते के बजाय दूसरे रूट से चलाया जाएगा. 12221 पुणे-हावड़ा 19 सितंबर और 3 अक्टूबर को डायवर्ट रूट से चलेगी. वहीं 12222 हावड़ा-पुणे 3 अक्टूबर को मनमाड-इगतपुरी-कल्याण-पनवेल-कर्जत-लोनावला होते हुए पुणे पहुंचेगी. 22159 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-एमजीआर चेन्नई सेंट्रल 19 से 23 सितंबर और 4 अक्टूबर को कल्याण-इगतपुरी-मनमाड-दौंड रूट से चलेगी. 11028 सतारा-दादर 3 अक्टूबर को सतारा-जेजुरी-पुणे-लोणावला रूट से जाएगी. यह ट्रेन सतारा से रात 10.30 बजे रवाना होगी। 

    कई ट्रेनें रास्ते में होंगी टर्मिनेट
    कुछ ट्रेनों को उनके तय गंतव्य तक नहीं ले जाकर रास्ते के स्टेशनों पर ही टर्मिनेट किया जाएगा. इसी तरह कुछ ट्रेनें अपने सामान्य शुरुआती स्टेशन की जगह दूसरे स्टेशन से चलेंगी. 22944 इंदौर-दौंड 18 सितंबर से 3 अक्टूबर तक खड़की में टर्मिनेट होगी, जबकि 22943 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक खड़की से दोपहर 3.40 बजे चलेगी. 20495 जोधपुर-हडपसर तय तारीखों पर खड़की में खत्म होगी और 20496 खड़की से शाम 7.40 बजे रवाना होगी। 

    17014 काजीपेट-हडपसर कुछ तारीखों पर दौंड तक जाएगी, जबकि 3 अक्टूबर को इसका सफर कुर्डुवाडी तक सीमित रहेगा. इसकी वापसी ट्रेन 17013 4 अक्टूबर को कुर्डुवाडी से चलेगी। 

    इसके अलावा 12158, 11026, 22846, 22172 और 20162 जैसी कुछ ट्रेनें अलग-अलग तारीखों पर दौंड में ही खत्म होंगी. वहीं 12157, 11025, 22845 और 22171 दौंड से शुरू होंगी. इनमें 22845 के दौंड से चलने का समय सुबह 11.52 बजे और 22171 का शाम 4.15 बजे है। 

    कुछ अन्य सेवाएं भी अपने सामान्य स्टेशन की जगह बदले हुए स्टेशन से शुरू होंगी. इनमें 12939 खड़की से शाम 5.35 बजे, 12493 खड़की से सुबह 11.10 बजे, 11425 जेजुरी से, 20674 सतारा से और 99814 व 99824 शिवाजीनगर से शुरू होने वाली सेवाएं शामिल हैं। 

    यात्रा से पहले ट्रेन का स्टेटस करें चेक
    अगर आप पुणे, हडपसर, दौंड, लोणावला या आसपास के इलाकों से ट्रेन पकड़ने वाले हैं, तो इस दौरान स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक करें. सिर्फ ट्रेन नंबर देखकर स्टेशन के लिए न निकलें, क्योंकि आपकी ट्रेन रद्द हो सकती है, उसका रूट बदला हो सकता है या वह किसी दूसरे स्टेशन से चल सकती है. रेलवे ने यात्रियों से Indian Railway Enquiry Portal या NTES ऐप पर अपनी ट्रेन का लेटेस्ट रनिंग स्टेटस और बदली हुई टाइमिंग चेक करने की सलाह दी है।