Category: देश

  • ED की ताबड़तोड़ रेड से मचा हड़कंप, कांग्रेस मंत्री और सांसद बेटी जांच के घेरे में

    ED की ताबड़तोड़ रेड से मचा हड़कंप, कांग्रेस मंत्री और सांसद बेटी जांच के घेरे में

    बेंगलुरु 

    कर्नाटक में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार तड़के लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली और उनके करीबियों के कई ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक ED ने जारकीहोली के साथ-साथ उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली और उनके साले मंजूनाथ के ठिकानों पर भी कार्रवाई की है। मामला बेलगावी में कई बार को अवैध रूप से लाइसेंस देने का है।

    जानकारी के मुताबिक ईडी की टीमों ने बुधवार सुबह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की कड़ी सुरक्षा के बीच छापेमारी शुरू की। बेंगलुरु शहर के 5 मुख्य ठिकानों के अलावा बेलगावी और महाराष्ट्र में स्थित मंत्री और उनके साले मंजूनाथ के घर और दफ्तरों की भी तलाशी ली जा रही है। अधिकारी परिसरों में मौजूद वित्तीय दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्ति के कागजातों की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
    क्या हैं आरोप?
    मामला आबकारी विभाग में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि सतीश जारकीहोली ने अपने मंत्री पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए लगभग 18 बार को नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से लाइसेंस दिलाए। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन बार से हासिल हुई काली कमाई को अवैध रूप से विदेशों में निवेश किया गया। शुरुआती जांच में 3 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध के हेरफेर की बात भी सामने आई है। अब ईडी इस फंड ट्रांसफर के स्रोत और नेटवर्क का पता लगाने के लिए कागजातों को खंगाल रही है।

    साले पर हुआ था एक्शन
    इससे पहले बीते जनवरी महीने में ED ने कर्नाटक के आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त वाई मंजूनाथ के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की थी। मंजूनाथ जारकीहोली के साले हैं। ED ने तब मंजूनाथ से जुड़े कम से कम छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान ED ने कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। अधिकारियों को मंजूनाथ के घर से नकदी मिलने की भी जानकारी सामने आई थी।

    ED की शुरुआती जांच में आरोप था कि सरकारी पद पर रहते वाई मंजूनाथ ने अपनी आय से कहीं अधिक संपत्ति बनाई। जांच एजेंसी को संदेह था कि उन्होंने करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई है। उन पर यह आरोप भी लगा कि उन्होंने बेलगावी, बेंगलुरु, मैसूर, दावणगेरे और बल्लारी समेत कई शहरों में बेनामी नामों से बार और शराब कारोबार में निवेश किया। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज मिलने के बाद ED अधिकारियों ने वाई मंजूनाथ को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया था।

  • दिवाली और छठ के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, घर जाने वालों के लिए खुशखबरी; देखें रूट और शेड्यूल

    दिवाली और छठ के लिए स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, घर जाने वालों के लिए खुशखबरी; देखें रूट और शेड्यूल

       नई दिल्‍ली
    दिवाली और छठ पर घर जाने वाले लोगों के लिए पश्चिमी रेलवे की ओर से स्‍पेशल ट्रेनों के चलाने का फैसला लिया गया है. मुंबई सेंट्रल से अहमदाबाद और इंदौर के बीच चलने वाली तीन जोड़ी यानी कुल छह स्‍पेशल ट्रेनों के संचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। 

    भारतीय रेलवे के अनुसार, इन ट्रेनों का संचालन 25 से 30 नवंबर 2026 तक अलग-अलग तय तारीखों पर जारी रहेगा. इससे मुंबई से गुजरात और मध्य प्रदेश की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को त्योहारों के बाद भी अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं का लाभ मिलेगा। 

    कौन-कौन सी स्‍पेशल ट्रेनों का ऐलान 

        ट्रेन नंबर 09087 (मुंबई सेंट्रल-अहमदाबाद): यह स्पेशल ट्रेन हर बुधवार को चलाई जाएगी और इसका संचालन 25 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है. 
        ट्रेन नंबर 09088 (अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल): वापसी दिशा में यह ट्रेन हर गुरुवार को चलाई जाएगी और इसका संचालन 26 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा.
        ट्रेन नंबर 09079 (मुंबई सेंट्रल-इंदौर): यह ट्रेन रविवार और मंगलवार को जारी रहेगी. इसका संचालन 29 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है. 
        ट्रेन नंबर 09080 (इंदौर-मुंबई सेंट्रल): यह ट्रेन सोमवार और बुधवार चलाई जाएगी और यह सेवा 30 नवंबर 2026 तक यात्रियों के लिए उपलब्‍ध रहेगी. 
        ट्रेन नंबर 09085 (मुंबई सेंट्रल-इंदौर): यह ट्रेन सोमवार और शुक्रवार को चलाई जाएगी और 27 नवंबर 2026 तक संचालित रहेगी.
        ट्रेन नंबर 09086 (इंदौर-मुंबई सेंट्रल): यह ट्रेन मंगलवार और शनिवार को चलाई जाएगी और इसका संचालन 28 नवंबर 2026 तक बढ़ाया गया है. 

    बुकिंग कब से होगी शुरू? 
    दिवाली और छठ के लिए सभी स्‍पेशल ट्रेनों की बुकिंग शुरू की जा चुकी है. अगर आप भी स्‍पेशल ट्रेनों का यूज करते हुए दिवाली और छठ पर घर जाना चाहते हैं तो तुरंत बुक‍िंग कर लेनी चाहिए. यह बुकिंग आप अपने मोबाइल ऐप या IRCTC की वेबसाइट के जरिए कर सकते हैं। 
    .

    गौरतलब है कि हर साल त्‍योहारों के सीजन में भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे स्‍पेशल ट्रेनों का ऐलान करती है. खासकर बिहार और यूपी के लिए ज्‍यादातर स्‍पेशल ट्रेनें चलाई जाती है, क्‍योंकि दिल्‍ली या अन्‍य जगहों से इसी रूट पर ज्‍यादा भीड़ रहती है. इस बार भी रेलवे बहुत सी स्‍पेशल ट्रेनों को चला रहा है।  

  • BRICS में बढ़ा लोकल करेंसी का इस्तेमाल, 90% ट्रेड अपनी मुद्रा में; डॉलर के लिए बढ़ी मुश्किलें

    BRICS में बढ़ा लोकल करेंसी का इस्तेमाल, 90% ट्रेड अपनी मुद्रा में; डॉलर के लिए बढ़ी मुश्किलें

     नई दिल्ली

    रूस ने BRICS में भारत की अध्यक्षता और उसके दौरान हुए नतीजों की तारीफ की है. रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस के 90 फीसदी भुगतान नेशनल करेंसी यानी संबंधित देशों की अपनी मुद्रा में हो रहे हैं। 

    पेस्कोव ने कहा कि इसका मकसद डीडॉलराइजेशन नहीं है, बल्कि भुगतान के तरीकों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश अपनी नेशनल करेंसी का इस्तेमाल विदेश नीति के एक टूल के तौर पर कर रहे हैं। 

    BRICS में बढ़ रहा सहयोग
    पेस्कोव ने कहा कि BRICS में सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम हो रहा है, जिनमें मानवीय सहयोग और आर्थिक सहयोग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि रूस BRICS की सदस्यता का विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। 

    इसके साथ ही BRICS सुरक्षा के मोर्चे पर भी सहयोग का मैकेनिज्म विकसित कर रहा है. इसमें ड्रग्स और नशीले पदार्थों से निपटने के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग शामिल है. BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है। 

    भारत को बताया रणनीतिक साझेदार
    भारत को लेकर पेस्कोव ने कहा कि भारत रूस का रणनीतिक साझेदार है और दोनों देश अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत के साथ भी ज्यादातर भुगतान नेशनल करेंसी में किए जा रहे हैं। 

    यूक्रेन जंग को लेकर पेस्कोव ने कहा कि रूस इसे रोकने की कोशिश कर रहा है और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है. उन्होंने 2014 की घटनाओं का जिक्र करते हुए अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों पर रूस को हटाने के लिए तख्तापलट की साजिश का आरोप लगाया। 

    पेस्कोव ने कहा कि रूस शांति के लिए भारत की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत करता है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जंग खत्म कराने की कोशिशों का भी स्वागत किया. हालांकि, पेस्कोव ने आरोप लगाया कि कुछ यूरोपीय देश यूक्रेन को रूस की रणनीतिक हार के लिए उकसा रहे हैं. उन्होंने कहा कि रूस ऐसा होने नहीं देगा। 

  • 8th Pay Commission News: पेंशनर्स के फिटमेंट फैक्टर पर संशय, PM मोदी को लिखे पत्र से समझें पूरा मामला

    8th Pay Commission News: पेंशनर्स के फिटमेंट फैक्टर पर संशय, PM मोदी को लिखे पत्र से समझें पूरा मामला

    नई दिल्ली

    आठवें वेतन आयोग के लागू होने का केंद्रीय सरकारी कर्मचारी जितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उतना ही इंतजार देशभर के पेंशनर्स को भी है. 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन हुए 10 महीने से ज्‍यादा समय हो गया है और आयोग इस बीच काफी सारी एक्‍सरसाइज कर चुका है. फिलहाल देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकों का दौर जारी है। 

    इस बीच पेंशनर्स के एक संघ रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने 8th Pay Commission के ToR यानी टर्म ऑफ रेफरेंस के एक बिंदु पर आशंका जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र (Letter to PM Modi) लिखा है। 

    क्‍या पुराने पेंशनर्स को नहीं मिलेगा फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ?
    रिटायर्ड एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन (Retired Employees Welfare Association) ने मंगलवार, 7 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है. संघ को आशंका है कि OPS यानी ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम के तहत आने वाले पुराने पेंशनर्स को फिटमेंट फैक्‍टर का लाभ नहीं मिलेगा. एसोसिएशन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन की मांग की है. संगठन के अनुसार , करीब 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उन्हें पेंशन संशोधन का लाभ मिलेगा या नहीं। 

    8th CPC के ToR में किस बात को लेकर है आपत्ति? 
    संघ की आपत्ति 8वें वेतन आयोग के ToR के प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर है. उनका कहना है कि मौजूदा ToR में पेंशन, NPS और UPS का उल्लेख है, लेकिन पुराने पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन को स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है। 

    एसोसिएशन का कहना है कि 7वें वेतन आयोग के ToR में 'revision of pre-retirement pension' का स्पष्ट उल्लेख था. संगठन ने छठे और 5वें वेतन आयोग के ToR में भी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का स्पष्ट उल्लेख होने का दावा किया है। 

    वित्त मंत्री और वित्त सचिव को भी भेजा पत्र 
    एसोसिएशन ने वित्त मंत्री और वित्त सचिव को पहले पत्र भेजे जाने की बात कही है. संगठन के मुताबिक, अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है। 

    एसोसिएशन ने मांग की है कि ToR में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए सभी पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन/फैमिली पेंशन के संशोधन पर भी सिफारिश का लाभ देगा। 

    जब तक औपचारिक संशोधन नहीं होता, तब तक सरकार से प्रेस रिलीज या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है. संगठन ने ये पत्र प्रधानमंत्री के अलावा वित्त मंत्री, वित्त सचिव और DoPPW के सचिव को भी भेजा है। 

    पेंशन को लेकर डरने की जरूरत नहीं, यहां दूर करें कन्‍फ्यूजन  

     इस मसले पर कुछ जानकारों से बात की और मसले को समझने का प्रयास किया कि क्‍या वाकई ये डर वाजिब है. अगर हां तो सरकार या आयोग आगे क्‍या कर सकता है. 8वें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन में ToR में प्वाइंट 2(e) की भाषा को लेकर संघ शंका में है. रिटायर्ड एम्‍प्‍लॉयीज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव साधु सिंह से बात करने की कोशिश की, जो खबर लिखे जाने तक नहीं हो पाई है. फिर हमने दूसरे एक्‍सपर्ट्स से समझने की कोशिश की। 

    ऐसे मामलों के एक एक्‍सपर्ट ने समझाया कि आपत्ति क्‍यों है… उन्‍होंने कहा, ' 2(e) में लिखा है- Review the structure of Death-cum-Retirement Gratuity and Pension including NPS/UPS and outside NPS for the employees…

    यानी प्रावधान में पेंशन, ग्रेच्युटी, NPS/UPS और NPS के बाहर के कर्मचारियों का उल्लेख है, लेकिन एसोसिएशन का तर्क है कि इसमें 'existing pensioners' यानी मौजूदा पेंशनर्स, pre-2026 retirees यानी 2026 से पहले रिटायर होने वाले कर्मी, 'family pensioners' या 'revision of pre-retirement pension' जैसी स्पष्ट भाषा नहीं है. इसी को लेकर को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री से ToR संशोधन की मांग की है। 

    8वें वेतन आयोग के ToR को लेकर NDTV ने AINPSF के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल से समझना चाहा. उन्‍होंने इसी ToR में 2(f) के तीसरे प्‍वाइंट का जिक्र किया, जिसमें लिखा है- The Unfunded cost of non-Contributory Pension Schemes…'. 

    डॉ पटेल ने समझाया कि Unfunded Non Contributed के अंदर बिना कंट्रीब्‍यूशन वाले पेंशनर्स यानी NPS/UPS के अलावा वाले पुराने पेंशनर्स भी आ जाते हैं. दूसरी बात कि अगर 2(e) में पुराने पेंशनर्स का जिक्र नहीं है तो पुराने वर्किंग एम्‍प्‍लॉईज का भी अलग से जिक्र नहीं है. तो इसका मतलब ये न समझा जाए कि वे भी फिटमेंट फैक्‍टर के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। 

  • GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची, लेकिन 2047 का लक्ष्य आसान नहीं, अर्थशास्त्रियों ने बताया किन मोर्चों पर बढ़ानी होगी रफ्तार

    GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची, लेकिन 2047 का लक्ष्य आसान नहीं, अर्थशास्त्रियों ने बताया किन मोर्चों पर बढ़ानी होगी रफ्तार

     नई दिल्ली
    भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की शानदार GDP ग्रोथ दर्ज की है. पश्चिम एशिया संकट और अन्य वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहा और भारत की मजबूत आर्थिक रफ्तार को दिखाता है. हालांकि, इस GDP आंकड़े को लेकर विवाद भी सामने आया। 

    पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और पिछली अवधि के संशोधन पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने भी सरकार पर आंकड़ों के साथ हेरफेर करने का आरोप लगाया. सुभाष गर्ग ने तो यहां तक दावा कर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर 7.8% की जगह सिर्फ 2.6% है. हालांकि, उन्होंने खुद ही एक इंटरव्यू में अपने 2.6% जीडीपी ग्रोथ के दावे से पलटते हुए इसे 5% तक संसोधित कर दिया। 

    दूसरी ओर, दो प्रमुख अर्थशास्त्रियों- सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने GDP ग्रोथ के आंकड़ों में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है. साथ ही दोनों ने बताया कि 7.8% की ग्रोथ के बावजूद 2047 तक विकसित देश बनने के लिए भारत को और तेज आर्थिक विकास की जरूरत होगी। 

    खास बात यह है कि मोंटेक सिंह अहलूवालिया कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान योजना आयोग के डिप्टी चेयरमैन रह चुके हैं. वह 2004 से 2014 के बीच देश की आर्थिक नीति और सुधारों से जुड़े अहम फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका में थे. इसलिए मौजूदा जीडीपी ग्रोथ पर उनकी राय इस बहस को एक अलग वजन देती है। 

    सुभाष गर्ग ने क्या सवाल उठाया?
    GDP के नए आंकड़े जारी होने के बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने पिछले साल की पहली तिमाही के आंकड़ों में हुए बड़े संशोधन को लेकर सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि पिछले साल की पहली तिमाही का मौजूदा कीमतों पर GDP आंकड़ा पहले करीब ₹86 लाख करोड़ बताया गया था, जिसे नई GDP सीरीज में घटाकर करीब ₹80 लाख करोड़ कर दिया गया. उन्होंने करीब ₹6 लाख करोड़ के अंतर को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और इसी आधार पर मौजूदा 7.8% ग्रोथ की गणना पर सवाल उठाया। 

    सुभाष गर्ग का तर्क था कि अगर पुराने और नए आंकड़ों को अलग-अलग आधार पर देखा जाए तो मौजूदा कीमतों पर GDP ग्रोथ 2.5% से भी कम नजर आती है. हालांकि, सरकार और अर्थशास्त्रियों ने उनकी इस गणना को सिरे से खारिज करते हुए अतार्किक बताया. सरकार और अर्थशास्त्रियों ने कहा कि दो अलग-अलग स्टैटिस्टिकल सीरीज के आंकड़ों की तुलना करने जीडीपी की गणना नहीं की जा सकती। 

    कांग्रेस ने भी उठाए थे सवाल
    सुभाष गर्ग की आपत्ति के बाद GDP के आंकड़े राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गए. कांग्रेस ने नई GDP सीरीज, GDP डिफ्लेटर और पिछले आंकड़ों में हुए संशोधन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. पार्टी ने दावा किया कि नई सीरीज में चार वर्षों के दौरान भारत की GDP में करीब ₹43 लाख करोड़ की कमी दिखाई गई है. सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नई GDP सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है और आंकड़ों की गणना के लिए बेहतर डेटा सोर्स, नई मेथोडोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) ने भी कहा है कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों की तुलना करके ग्रोथ रेट निकालना सही तरीका नहीं है। 

    दो बड़े अर्थशास्त्रियों ने क्या कहा?
    GDP के आंकड़ों को लेकर चल रही इस बहस के बीच सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी अपनी राय रखी. दोनों ने इस बात से सहमति जताई कि 7.8% के आंकड़े को राजनीतिक तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का कोई ठोस सबूत नहीं है. विश्व बैंक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा ने भी अलग-अलग GDP सीरीज को मिलाकर 2.6% या 2.8% की ग्रोथ निकालने को सही नहीं माना। 

    सुरजीत भल्ला ने कहा कि अगर सरकार GDP को बढ़ाकर दिखाना चाहती, तो खपत के आंकड़ों को भी बढ़ा हुआ दिखाया जा सकता था. लेकिन नई सीरीज में खपत को उलटे नीचे संशोधित किया गया है. उनके मुताबिक, अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि GDP के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ हुई है। 

    7.8% ग्रोथ ठीक, पर 2047 का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण
    GDP विवाद से अलग दोनों अर्थशास्त्रियों की सबसे अहम बात 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को लेकर है. भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ जरूर दर्ज की है, लेकिन सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया के मुताबिक सिर्फ एक-दो तिमाहियों की तेज ग्रोथ से यह तय नहीं किया जा सकता कि भारत 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बन जाएगा। 

    सुरजीत भल्ला का कहना है कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबे समय तक दोहरे अंकों में ग्रोथ बनाए रखनी होगी. उन्होंने इन्वेस्टमेंट-GDP रेशियो में करीब 34% तक की मजबूती को सकारात्मक बदलाव माना, लेकिन कहा कि डॉलर के लिहाज से प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए अभी काफी तेज ग्रोथ की जरूरत है। 

    मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले के निराशावादी अनुमानों के मुकाबले ज्यादा मजबूत दिखाई दे रही है. लेकिन 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए मौजूदा रफ्तार पर्याप्त नहीं है. उनका मानना है कि भारत को ज्यादा ऊंची और लगातार बनी रहने वाली ग्रोथ चाहिए। 

    सिर्फ GDP बढ़ना काफी नहीं
    अर्थशास्त्रियों के मुताबिक किसी देश के विकसित होने का मतलब सिर्फ कुल GDP का बढ़ना नहीं है. प्रति व्यक्ति आय, रोजगार, प्रोडक्शन और डेवलपमेंट का फायदा समाज के व्यापक हिस्से तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है. अर्थशास्त्री रोहित लांबा ने भारत के डेवलपमेंट मॉडल को चीन और दक्षिण कोरिया से अलग बताया है। 

    उनके मुताबिक भारत कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से सीधे हाई-स्किल सर्विस सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ा, जबकि बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को जितना चाहिए, उतना मजबूत नहीं बना सका. विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में भारत की प्रति व्यक्ति GDP करीब 2,695 डॉलर थी. इसके मुकाबले चीन की प्रति व्यक्ति GDP करीब 13,303 डॉलर, ब्रिटेन की करीब 53,246 डॉलर और अमेरिका की करीब 84,534 डॉलर थी। 

    रोजगार और K-Shaped ग्रोथ की चुनौती
    भारत के लिए अगली बड़ी चुनौती ऐसी ग्रोथ सुनिश्चित करना है, जिससे ज्यादा उत्पादक और बेहतर गुणवत्ता वाले रोजगार पैदा हों. तेज GDP ग्रोथ के बावजूद अगर इसका फायदा आय के अलग-अलग वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंचता, तो विकास का मॉडल K-shaped हो सकता है. K-शेप्ड इकोनॉमी एक ऐसी आर्थिक स्थिति है जिसमें समाज के अलग-अलग हिस्से या उद्योग एक ही समय में विपरीत दिशाओं में आगे बढ़ते हैं मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक विकास के साथ रोजगार और व्यापक स्तर पर समृद्धि सुनिश्चित करना जरूरी है. सिर्फ GDP ग्रोथ को देखकर यह नहीं माना जा सकता कि अर्थव्यवस्था की सभी समस्याएं खत्म हो गई हैं। 

    ज्यादा ठोस आर्थिक सुधारों की जरूरत

    विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने ज्यादा ठोस आर्थिक सुधारों की जरूरत बताई है. खास तौर पर भारत को वैश्विक व्यापार के साथ ज्यादा मजबूती से जुड़ने, टैरिफ कम करने और उद्योगों के लिए इम्पोर्टेड इनपुट सस्ते करने पर जोर देना होगा. अहलूवालिया ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौतों का फायदा उठाने और वैश्विक बाजारों के लिए भारतीय कंपनियों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत बताई. उनका कहना है कि भारत को अपनी क्षमता पर भरोसा रखते हुए दुनिया के लिए और ज्यादा खुला होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अब सिर्फ 'रिफॉर्म की जरूरत है' कहने से काम नहीं चलेगा. सरकार को यह तय करना होगा कि वास्तव में कौन-कौन से सुधार किए जाने हैं और उन्हें किस तरह लागू किया जाएगा। 

  • भारत की मेजबानी में 12 सितंबर से BRICS समिट, दिल्ली के भारत मंडपम में होगा महामंथन

    भारत की मेजबानी में 12 सितंबर से BRICS समिट, दिल्ली के भारत मंडपम में होगा महामंथन

     नई दिल्ली
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है. ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है और अध्यक्ष के नाते इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भी भारत की है. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होना है। 

    इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई अन्य कद्दावर भी नई दिल्ली में होंगे. इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आ सकते हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत आ सकते हैं। 

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल होने भारत आ सकते हैं. विदेश मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे. साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्षों और कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों को भी आउटरीच के तहत इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। 

    नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब संगठन के 20 साल पूरे हो रहे हैं. ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अनौपचारिक तौर पर ब्रिक समूह की नींव रखी थी. हालांकि, इसकी औपचारिक स्थापना साल 2009 में हुई थी। 

    तब 16 जून को रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में ब्रिक समूह का औपचारिक गठन किया गया था. ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन भी तभी हुआ था. ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में ही हुआ था. साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी इस समूह में शामिल हो गया और इसके बाद ब्रिक संगठन ब्रिक्स हो गया था। 

    ब्रिक्स में इस समय भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ ही मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया सदस्य देश हैं. साझेदार देशों की भी एक अलग कैटेगरी है. इस कैटेगरी में 10 देश शामिल हैं। 

  • मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का इंतजार जल्द होगा खत्म! रेल मंत्री ने बताया सेवा शुरू होने का समय

    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का इंतजार जल्द होगा खत्म! रेल मंत्री ने बताया सेवा शुरू होने का समय

    अहमदाबाद 

    भारत की पहली बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगले साल मई और जून में शुरू होने की उम्मीद है. बुलेट ट्रेन के ट्रायल शुरू होने के दो से चार महीनों के बाद इसे आम यात्रियों के लिए खोला जाएगा. पहली बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद रूट के एक सेक्शन पर शुरू होगी. यहां निर्माण कार्य अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। 

    अगले साल मई-जून में शुरू होगी पहली बुलेट ट्रेन
    वडोदरा में 'नमो फॉर विकसित भारत' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाई-स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम हाल ही में बनकर तैयार हुआ है और उसे स्क्वीज टेस्टिंग के लिए भेजा गया है. उन्होंने कहा, 'अगले साल मई या जून तक, भारत की अपनी बुलेट ट्रेन टेस्टिंग के लिए पटरियों पर होगी. 2-4 महीने की टेस्टिंग के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। 

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह प्रोजेक्ट 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के तहत तैयार किया जा रहा है और इससे वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा. उन्होंने कहा, 'जब आप वडोदरा से बुलेट ट्रेन में सफर करेंगे, तो आप सिर्फ डेढ़ घंटे में मुंबई पहुंच जाएंगे। 

    तेजी से चल रहा निर्माण कार्य
    वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और सूरत-वापी सेक्शन के इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है. रेलवे सेक्टर में बड़े सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के ऑपरेटिंग सिस्टम, रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म और निर्माण से जुड़े नियमों को आधुनिक बना रही है. उन्होंने कहा, 'हम ऑपरेटिंग सिस्टम और रिजर्वेशन सिस्टम से लेकर पुराने कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल तक, हर चीज में सुधार और आधुनिकीकरण कर रहे हैं। 

    सेक्शन में शुरू होगी बुलेट ट्रेन

        सूरत-बिलिमोरा सेक्शन: सबसे पहले शुरू होगा
        वापी-सूरत सेक्शन: दूसरे चरण में शुरू होगा
        वापी-अहमदाबाद सेक्शन: तीसरे चरण में शुरू होगा 
        अहमदाबाद-ठाणे सेक्शन: चौथे चरण में शुरू होगा 
        अहमदाबाद-मुंबई: ठाणे के बाद मुंबई वाला सेक्शन शुरू होगा और बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुबंई तक शुरू हो जाएगी। 

    वैष्णव ने बताया कि हाल के वर्षों में रेलवे के कई लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं. उन्होंने चिनाब ब्रिज और मिजोरम को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाले रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का जिक्र किया. केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 280 रेलवे स्टेशनों को फिर से विकसित किया गया है और 36,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वंदे भारत टेक्नोलॉजी वाली कार्गो ट्रेनें भी विकसित की जा रही हैं। 

    उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की रफ्तार तेज हुई है. उन्होंने बताया कि 2020 में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पहला सेक्शन पूरा होने के बाद, अगले सेक्शन पर काम में तेजी आई. वैष्णव ने कहा, 'भारतीय रेलवे का जो आधुनिक स्वरूप उभर रहा है, उससे आने वाली कई पीढ़ियों को फायदा होगा। 

    ये 7 बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी हैं प्रस्तावित

        दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन
        वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी 
        मुंबई-पुणे बुलेट ट्रेन
        पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर 
        बेंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर 
        बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर 
        चेन्नई-हैदराबाद कॉरिडोर 

  • राहुल गांधी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर मानहानि केस रहेगा जारी

    राहुल गांधी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, PM मोदी पर टिप्पणी को लेकर मानहानि केस रहेगा जारी

    मुंबई

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणियों से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने माना कि भारतीय जनता पार्टी एक पहचान योग्य राजनीतिक संगठन है और इस मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर भाजपा कार्यकर्ता की याचिका प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहा आपराधिक मानहानि मामला आगे बढ़ेगा. हालांकि अदालत ने उन्हें छह सप्ताह की अंतरिम राहत भी प्रदान की है। 

    मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार
    न्यायमूर्ति नितिन बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि 'मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन आदेश में कोई स्पष्ट अवैधता या गंभीर त्रुटि नहीं दिखती. इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप करने का यह उपयुक्त मामला नहीं है.' कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए समन आदेश में कोई कमी नजर नहीं आती। 

    उच्च न्यायालय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा का एक प्रमुख चेहरा हैं और इसलिए उनके खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी का भाजपा के सदस्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता। 

    अदालत ने कहा कि गांधी द्वारा की गई टिप्पणियां व्यक्तिगत प्रकृति की थीं या केवल प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर की गई थीं या नहीं, यह सबूतों और गवाहों के बयानों की जांच के बाद मुकदमे के दौरान ही निर्धारित किया जा सकता है। 

    भाजपा कार्यकर्ता की शिकायत को माना सुनवाई योग्य
    राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि उनकी कथित टिप्पणियों में भाजपा या किसी विशेष समूह का नाम नहीं लिया गया था, इसलिए भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है. हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और एक स्पष्ट रूप से पहचानी जाने वाली संस्था है. कोर्ट ने माना कि प्रारंभिक स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणियां केवल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक सीमित थीं. गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता सुदीप पसबोला और अधिवक्ता कुशल मोर ने दलील दी कि शिकायत निराधार है तथा शिकायतकर्ता को इसे दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था. उन्होंने कहा था कि शिकायतकर्ता इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं है और इसलिए वह ऐसी शिकायत दायर नहीं कर सकता। 

    क्या है पूरा मामला?
    यह मानहानि शिकायत भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमल ने गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में दर्ज कराई थी. शिकायतकर्ता श्रीश्रीमल ने उच्च न्यायालय में गांधी की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य होने के नाते वह अपने नेता के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आहत हैं. शिकायत 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान को लेकर की गई थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया था. महेश श्रीश्रीमल का कहना था कि इन टिप्पणियों से न केवल प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं को भी गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया। 

    2019 में जारी हुआ था समन
    शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मजिस्ट्रेट अदालत ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी को समन जारी किया था. इसके बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। 

    सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मिली राहत
    हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उन्हें तत्काल राहत भी दी है. अदालत ने छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से संरक्षण प्रदान किया है, ताकि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकें। 

  • India Visit पर आ रहे पुतिन, PM मोदी से मुलाकात से पहले बढ़ी हलचल; BRICS समेत इन मुद्दों पर होगी बात

    India Visit पर आ रहे पुतिन, PM मोदी से मुलाकात से पहले बढ़ी हलचल; BRICS समेत इन मुद्दों पर होगी बात

    नई दिल्ली

    दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात तय है. क्रेमलिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि करते हुए भारत को रूस का "रणनीतिक साझेदार" बताया है। 

    रूसी राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और राष्ट्रपति पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को मीडिया से वर्चुअल बातचीत की. उनके बयानों में भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट के साथ-साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी दिखाई दी। 

    पेस्कोव ने कहा, "दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक. जैसा कि आप जानते हैं, भारत और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी संबंध हैं. उनके संबंध बहुत व्यावहारिक हैं और वे एक-दूसरे के साथ इतने ईमानदार हैं कि वैश्विक एजेंडे और हमारे आपसी संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं। 

    यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है। 

    ब्रिक्स की अहमियत पर पेस्कोव ने प्रकाश डालते हुए कहा," मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है. हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है. बल्कि, यह उन देशों का एक क्लब है जो इस बात पर एक जैसी सोच रखते हैं कि दुनिया में काम कैसे होने चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कैसे किया जाना चाहिए। 

    उन्होंने ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र करते हुए कहा, "रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों – राजनीति और सुरक्षा; अर्थव्यवस्था और वित्त; और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क – के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. बेशक, हमारी अपनी कई पहल हैं जिन्हें हम इस समूह के भीतर बढ़ावा दे रहे हैं. हम ब्रिक्स के भीतर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में ज्यादा से ज्यादा देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन करते हैं। 

    पार्टनर कंट्री के कॉन्सेप्ट की प्रशंसा करते हुए पेस्कोव बोले, " 2024 में, पार्टनर देशों की एक नई श्रेणी – 'ब्रिक्स पार्टनर कंट्री' श्रेणी – बनाई गई थी, और अब यह बहुत अच्छी तरह से विकसित हो रही है. बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है. इन देशों के प्रतिनिधियों को धीरे-धीरे अलग-अलग वर्किंग ग्रुप और फॉर्मेट में शामिल किया जा रहा है, और हम इसे एक बहुत ही सकारात्मक विकास मानते हैं। 

    उन्होंने बताया कि रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की. बोले, "हम इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, और ब्रिक्स के भीतर कई देशों ने इसका समर्थन किया। 

    पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच अब करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है. यह बयान ऐसे समय आया है जब डॉलर के प्रभुत्व और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा तेज है। 

    भारत के रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को “अवैध” करार दिया। 

    पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें भी अहम मुद्दा हो सकती हैं. भारत ने शुरुआत से ही युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है. भारत की इसी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा, "हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं। 

    पेस्कोव ने ब्रिक्स को सिर्फ आर्थिक समूह के रूप में देखने से आगे बढ़ते हुए इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता में काफी निवेश किया है और संगठन की विचारधारा बहुध्रुवीय दुनिया की विचारधारा है. उनके अनुसार एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है। 

    उनके मुताबिक, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक नहीं है. इसके पीछे दुनिया की उस नई व्यवस्था की बहस भी है जिसमें रूस, भारत, चीन और दूसरे उभरते देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव की मांग कर रहे हैं। 

    इसके साथ ही पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, "कहानी केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है." पेस्कोव ने भारत में नए परमाणु संयंत्र के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई. उन्होंने रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया। 

     

  • Western DFC उद्घाटन में PM मोदी का बड़ा बयान, कांग्रेस पर कसा तंज; गुजरात को दी हजारों करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

    Western DFC उद्घाटन में PM मोदी का बड़ा बयान, कांग्रेस पर कसा तंज; गुजरात को दी हजारों करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

    वड़ोदरा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन सेक्शनों का उद्घाटन किया. इससे नोएडा के दादरी से नवी मुंबई तक ये कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो गया. पीएम मोदी ने कहा कि 2004 में योजना बनने के 10 साल तक पिछले सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही. वर्ष 2014 से 12 साल के भीतर हमने 2800 किमी के इस कॉरिडोर को पूरा कर दिया. इसमें मालगाड़ियों की रफ्तार दोगुना हो गई है. ट्रेवल से ट्रांसपोर्ट तक अलग-अलग रूट से कनेक्टिविटी की स्पीड बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स की लागत घटी है। 

    2004 से 10 साल कॉरिडोर पर कोई काम नहीं
    यह 21वीं सदी के भारत के लिए ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है. ये कॉरिडोर इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है. इस कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था, 2006 में एक स्पेशल कंपनी बनाई गई. फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं. फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थीं. इन फाइलों को भी डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ. वर्ष 2014 में वड़ोदरा, गुजरात औऱ देश के लोगों ने मुझे दिल्ली भेजा. आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुआ. 7-8 वर्षों में एक किलोमीटर का काम भी इन लोगों ने नहीं किया. उनके हिसाब से देश चलाते तो आपके बाद तीन-चार पीढ़ियांआती तो भी काम पूरा नहीं होता। 

    ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में बड़ा बदलाव
    भारत के लॉजिस्टिक्स सिस्टम कमें बदलाव हम करके लाए हैं. आपकी शिक्षा-दीक्षा और गुजरात से जो पाठ सीखकर मैं वहां पहुंचा था, उसी के आधार पर हमने कॉरिडोर को आगे बढ़ाया और 12साल में पूरा करके दिखाया. आज ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर देश के मुख्य कारोबार का मुख्य आधार बन गया है. ये कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है. इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है. पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी, उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी. ट्रेवल और ट्रांसपोर्ट दोनों धीमा था. लेकिन डेडिकेटेड कॉरिडोर ने स्थिति बदल दी। 

    रोजाना 430 किमी गुड्स ट्रेनें चलती हैं कॉरिडोर पर
    पीएम मोदी ने कहा, पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर पर रोज 430 से मालगाड़ियां चलती हैं. पहले जो मालगाड़ी साढ़े छह घंटे में 100 किमी चलती थी, वहीं मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किमी का सफर तय कर लेगी. जिस जगह ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं, कॉरिडोर से यही दूरी 10-12 घंटे में पूरी हो जाती है. मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन का फ्यूल बचता है, किराया भाड़ा का खर्च कम हुआ है. समय बचा है, पर्यावरण को फायदा हुआ है।