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  • हत्या के आरोपी फैजल पर पुलिस का कहर, क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान लाठियों से पीटा

    हत्या के आरोपी फैजल पर पुलिस का कहर, क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान लाठियों से पीटा

    भावनगर

    पुलिस की जीप से बंधा एक शख्स, पीछे से उस पर ताबड़तोड़ बरसाता एक जवान… सोशल मीडिया पर तैर रही इस वीडियो को देखते ही हर किसी के जेहन में एक ही सवाल उठता है, अरे ऐसी पिटाई क्यों? इसी वीडियो का एक दूसरा हिस्सा भी है. जिसमें वहीं शख्स एक बेंच पर लेटा है, और उस पर पुलिस की लाठियां बरस रही है. यहां भी उसके हाथ बंधे हैं. इन दोनों वीडियो को देखकर किसी का भी हैरान हो जाना स्वभाविक है. क्योंकि वीडियो में पुलिस की पिटाई बेहद बर्बर है और भी खुलेआम सभी के सामने. लेकिन पुलिस के इस खतरनाक एक्शन के पीछे की कहानी भी उतनी ही भयावह है. आइए इस पूरे मामले को समझते हैं। 

    मामला गुजरात के भावनगर का
    मामला गुजरात के भावनगर का है. वीडियो में पुलिस से पीटता दिख रहा शख्स फैजल लखानी है. फैजल लखानी अभी पुलिस की गिरफ्त में है. जहां कानूनी प्रक्रिया के तहत उस पर एक्शन लिया जा रहा है. लेकिन उसकी पिटाई का वीडियो कानूनी प्रक्रिया से ऊपर का है. ऐसा क्यों है, जानिए। 

    महिला की हत्या का आरोपी है पीट रहा शख्स
    दरअसल फैजल लखानी ने एक महिला की हत्या का आरोपी है. उसने बीते दिनों काजल बरैया नामक एक महिला की बेरहमी से हत्या की थी. इसका वीडियो भी सामने आया था. महिला की पिटाई के सीसीटीवी वीडियो में फैजल काजल को लात-घूसों से पीटता दिख रहा है। 

    पुलिस ने क्यों दी ऐसी सजा, खुद बताया
    वो महिला की जिस बेरहमी के साथ पिटाई कर रहा है, उसे देखकर किसी का भी खून खौल जाए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या बेहद बेरहमी से की गई थी और इस घटना से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा था, इसलिए उन्हें 'एक कदम आगे बढ़कर' कार्रवाई करनी पड़ी। 

    लिव इन पार्टनर काजल की फैजल ने की हत्या
    दरअसल फैजल ने भावनगर शहर के बस स्टैंड पर काजल की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. यह पूरी घटना क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है. सीसीटीवी फुटेज में आरोपी महिला को बेरहमी से पीटता हुआ दिख रहा है, जबकि आसपास मौजूद लोग मूकदर्शक बने हुए हैं। 

    आरोपी का आपराधिक इतिहास, जेल में था
    पुलिस उपाधीक्षक आर आर सिंघल ने बताया कि यह घटना नीलम बाग थाना क्षेत्र में हुई थी. उन्होंने बताया, 'काजल बरैया और फैजल लखानी पिछले करीब सात सालों से फुटपाथ पर एक साथ रह रहे थे. आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ डकैती तथा अन्य गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। 

    काजल की हत्या के बाद पुलिस ने फैजल को गिरफ्तार किया. फिर शनिवार को उसे उसी स्थान पर ले गए, जहां उसने काजल की पिटाई की दी. क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान पुलिस ने फैजल की लाठियों से पिटाई की। 

    फैजल ने काजल की क्यों की हत्या?

    फैजल ने काजल की हत्या क्यों की, इसके पीछे की कहानी भी फिल्मी है. फैजल का आपराधिक इतिहास है. वह जेल में था. इसी दौरान उसकी लिव इन पार्टनर काजल की उसके ही एक परिचित रवि से संबंध बन गए. अधिकारी ने बताया कि जेल से छूटने के बाद जब फैजल को इस संबंध के बारे में पता चला तो वो बुरी तरह से भड़क गया। 

     

  • तीर्थयात्रा से पर्यटन तक नई कनेक्टिविटी, उत्तराखंड में 51 रोपवे परियोजनाओं पर सरकार का फोकस

    तीर्थयात्रा से पर्यटन तक नई कनेक्टिविटी, उत्तराखंड में 51 रोपवे परियोजनाओं पर सरकार का फोकस

     रोपवे नेटवर्क से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर

     तीर्थयात्रा, पर्यटन और पहाड़ी परिवहन को मिलेगी नई रफ्तार, 51 परियोजनाओं पर सरकार का फोकस

    देहरादून 
    दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और पहाड़ी क्षेत्रों में सीमित सड़क कनेक्टिविटी वाले उत्तराखंड में *रोपवे परिवहन व्यवस्था भविष्य की बड़ी जरूरत* बनकर उभर रही है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के राज्य में पहुंचने से प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में रोपवे न केवल यात्रा को सुगम बनाने का माध्यम बन सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण आधार भी साबित हो सकता है।

    इसी सोच के साथ उत्तराखंड सरकार ने राज्य में व्यापक रोपवे नेटवर्क विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। पर्यटन सीजन में लगने वाले जाम, कठिन पहाड़ी रास्तों, तीर्थ यात्रियों की बढ़ती संख्या और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने धार्मिक स्थलों के साथ-साथ पर्यटन एवं शहरी परिवहन से जुड़ी कई रोपवे परियोजनाओं का खाका तैयार किया है।

    केंद्र और राज्य की साझेदारी से URDL का गठन

    रोपवे परियोजनाओं को योजनाबद्ध और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने *2 सितंबर 2025 को उत्तराखंड रोपवेज डेवलपमेंट लिमिटेड (URDL)* का गठन विशेष प्रयोजन वाहन यानी SPV के रूप में किया। इसमें केंद्र सरकार की *49 प्रतिशत* और राज्य सरकार की *51 प्रतिशत हिस्सेदारी* है।

    URDL का उद्देश्य राज्य में रोपवे परियोजनाओं को विकसित करना, निवेश एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना और पर्यटन तथा परिवहन के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी तैयार करना है। इससे अलग-अलग परियोजनाओं को एक समन्वित नेटवर्क के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

     केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे से नई शुरुआत

    उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण रोपवे प्रोजेक्ट्स में *सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ* और *गोविंदघाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब* रोपवे प्रमुख हैं।

    करीब *12.9 किलोमीटर लंबा सोनप्रयाग-गौरीकुंड-केदारनाथ रोपवे* लगभग 1,276.45 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से PPP मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। परियोजना में 30 केबिन प्रस्तावित हैं और प्रत्येक केबिन में 10 यात्री यात्रा कर सकेंगे। इसका निर्माण मई 2026 से शुरू होकर मई 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना से चारधाम यात्रा, विशेषकर केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

    इसी तरह करीब *12.4 किलोमीटर लंबा गोविंदघाट-घांघरिया-हेमकुंड साहिब रोपवे* लगभग 1,162.26 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को कठिन पहाड़ी मार्ग की जगह तेज और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।

    इन दोनों परियोजनाओं को उत्तराखंड में आधुनिक रोपवे परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    51 रोपवे परियोजनाओं का विशाल नेटवर्क

    राज्य सरकार ने उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में कुल *51 रोपवे परियोजनाओं* की पहचान की है। इनकी प्रस्तावित कुल लंबाई लगभग *160.75 किलोमीटर* है।

    इन परियोजनाओं में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म, इको-टूरिज्म, पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी और शहरी परिवहन को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य रोपवे को केवल तीर्थ स्थलों तक पहुंचने का साधन न बनाकर राज्य के व्यापक परिवहन एवं पर्यटन ढांचे का हिस्सा बनाना है।

    इनमें *कद्दूखाल-सुरकंडा देवी, देहरादून-मसूरी, जानकी चट्टी-यमुनोत्री, ठुलीगाड़-पूर्णागिरि और तपोवन-कुंजापुरी* जैसी परियोजनाएं विशेष महत्व रखती हैं।

     सुरकंडा देवी रोपवे से कठिन चढ़ाई होगी आसान

    टिहरी गढ़वाल स्थित सुरकंडा देवी मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर तक पहुंचने वाली कठिन चढ़ाई बुजुर्गों, बच्चों और अन्य यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहती है।

    *कद्दूखाल-सुरकंडा देवी रोपवे* इस समस्या का समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे मंदिर तक पहुंचना आसान और कम समय वाला होगा। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    यह परियोजना इस बात का उदाहरण बन सकती है कि किस तरह रोपवे धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकता है।

    देहरादून-मसूरी रोपवे बनेगा जाम का विकल्प

    पर्यटन सीजन में देहरादून-मसूरी मार्ग पर यातायात का भारी दबाव देखने को मिलता है। सड़क पर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण जाम पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए चुनौती बनता है।

    *देहरादून के पुरुकुल से मसूरी लाइब्रेरी चौक तक प्रस्तावित रोपवे* इस समस्या का आधुनिक समाधान बन सकता है। सड़क परिवहन के समानांतर एक वैकल्पिक और तेज परिवहन व्यवस्था विकसित होने से मसूरी की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

    इससे पर्यटकों का यात्रा समय घटने के साथ वाहनों की संख्या और उनसे होने वाले प्रदूषण के दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है। यह परियोजना उत्तराखंड में रोपवे आधारित शहरी परिवहन की संभावनाओं को भी विस्तार देगी।

     यमुनोत्री और पूर्णागिरि यात्रा होगी सुगम

    चारधाम यात्रा में यमुनोत्री धाम तक पहुंचना यात्रियों के लिए अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। *जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे* बनने से श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    इसी तरह *ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे* से चंपावत क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल सकती है। पूर्णागिरि धाम में विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रोपवे के माध्यम से सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध होने से स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय और स्वरोजगार को भी लाभ मिल सकता है।

     कुंजापुरी से जुड़ेगा आध्यात्मिक और एडवेंचर पर्यटन

    ऋषिकेश के निकट स्थित कुंजापुरी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालयी दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। *तपोवन-कुंजापुरी रोपवे* को इसी व्यापक पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    रोपवे के माध्यम से पर्यटकों को यात्रा के दौरान गंगा घाटी और हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक दृश्यों का अलग अनुभव मिलेगा। इससे ऋषिकेश के धार्मिक पर्यटन के साथ एडवेंचर और इको-टूरिज्म को भी विस्तार मिल सकता है।

     त्रिवेणी घाट-नीलकंठ से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा

    ऋषिकेश में प्रस्तावित *त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे* भी महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 6 किलोमीटर के प्रस्तावित नेटवर्क में पहले चरण में करीब 4.1 किलोमीटर लंबा रोपवे त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक विकसित करने की योजना है। आगे इसे त्रिवेणी घाट से आईएसबीटी तक जोड़ने की योजना भी प्रस्तावित है।

    नीलकंठ महादेव मंदिर में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर यात्रियों की संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में रोपवे से यात्रा को सुविधाजनक बनाने के साथ ऋषिकेश के सड़क यातायात पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।

     हरिद्वार में भी बढ़ेगी रोपवे क्षमता

    हरिद्वार के चंडीदेवी और मंसादेवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भविष्य में बढ़ने वाली यात्रियों की संख्या को देखते हुए रोपवे व्यवस्था के विस्तार की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

    *चंडीदेवी-मंसादेवी रोपवे नेटवर्क* को मजबूत करने के साथ समानांतर अलाइनमेंट विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि यात्रियों के बढ़ते दबाव को बेहतर तरीके से संभाला जा सके और संचालन को अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी बनाया जा सके।

     पर्यटन के साथ रोजगार को भी मिलेगा बल

    उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं का प्रभाव केवल यात्रा सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा। किसी भी नए पर्यटन कनेक्टिविटी नेटवर्क के विकसित होने के साथ आसपास के क्षेत्रों में *होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार* के अवसर बढ़ते हैं।

    इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्यटन के लाभ को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने में रोपवे अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

    उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण हमेशा आसान नहीं होता। पहाड़ों की कटिंग, भूमि की उपलब्धता और पर्यावरणीय चुनौतियां सड़क परियोजनाओं के सामने बड़ी बाधाएं होती हैं।

    ऐसे में रोपवे को सड़क परिवहन के पूरक विकल्प के रूप में विकसित किया जा सकता है। कम भूमि पर अधिक लोगों को परिवहन की सुविधा देने की क्षमता के कारण यह पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयोगी परिवहन माध्यम साबित हो सकता है।

    हालांकि रोपवे परियोजनाओं की सफलता के लिए निर्माण के साथ पर्यावरणीय मानकों, स्थानीय समुदायों और पर्वतीय पारिस्थितिकी का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

    पहाड़ों की कनेक्टिविटी को मिलेगी नई पहचान

    उत्तराखंड सरकार की 51 रोपवे परियोजनाओं की योजना केवल परिवहन का विस्तार नहीं, बल्कि *पर्यटन, तीर्थयात्रा, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की कोशिश* है।

    केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसी बड़ी परियोजनाओं से लेकर यमुनोत्री, पूर्णागिरि, सुरकंडा देवी, कुंजापुरी और मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों तक रोपवे नेटवर्क विकसित होने से राज्य के पर्यटन मानचित्र में बड़ा बदलाव आ सकता है।

    यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरती हैं, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में *देश के प्रमुख रोपवे नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल होने के साथ पर्वतीय परिवहन और पर्यटन का एक नया मॉडल* प्रस्तुत कर सकता है। इससे यात्रा आसान होगी, पर्यटन का विस्तार होगा, स्थानीय युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे और पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।

  • पर्यटन के जरिए उत्तराखंड में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, निजी निवेश और नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा

    पर्यटन के जरिए उत्तराखंड में खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, निजी निवेश और नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा

     नई पर्यटन नीति से उत्तराखंड में विकास और रोजगार की नई राह

     निजी निवेश, स्वरोजगार और नए पर्यटन स्थलों के विकास पर सरकार का विशेष फोकस
    देहरादून 

    देवभूमि उत्तराखंड अपनी हिमालयी चोटियों, आध्यात्मिक आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और रोमांचकारी पर्यटन स्थलों के कारण देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। चारधाम यात्रा से लेकर योग और वेलनेस, ट्रैकिंग से लेकर एडवेंचर स्पोर्ट्स और वन्यजीव पर्यटन से लेकर स्थानीय संस्कृति तक, उत्तराखंड के पास पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    राज्य में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार एवं निवेश की संभावनाओं को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने *नई राज्य पर्यटन नीति* जारी की है। यह नीति केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था, स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक रणनीतिक पहल है।

    नई नीति में सरकार की भूमिका को एक व्यवसायी के बजाय *'फैसिलिटेटर' यानी सुविधा प्रदाता* के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को निवेश के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना, पर्यटन परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाना और राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक पर्यटन के लाभ पहुंचाना है।

    ## पर्यटन में तेजी, बढ़ते अवसर

    उत्तराखंड में पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा पर्यटकों की संख्या में हुई वृद्धि से लगाया जा सकता है। वर्ष 2014 में राज्य में करीब *2.2 करोड़ पर्यटक* पहुंचे थे, जो वर्ष 2019 में बढ़कर लगभग *3.9 करोड़* हो गए। इस अवधि में पर्यटकों की संख्या में करीब *11.97 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR)* दर्ज की गई।

    यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड में पर्यटन केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं रह गया है। अब पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य, एडवेंचर, वेलनेस, संस्कृति, स्थानीय खान-पान और अनुभव आधारित पर्यटन के लिए भी पहुंच रहे हैं।

    पर्यटन क्षेत्र की वैश्विक संभावनाओं को देखते हुए भारत में भी इस क्षेत्र को अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण इंजन के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    ## निजी निवेश को मिलेगा नया आधार

    नई पर्यटन नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है *निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना*। सरकार का मानना है कि पर्यटन के बुनियादी ढांचे, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, टूर संचालन और विभिन्न निजी सेवाओं के विस्तार में निजी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नीति के तहत निवेशकों के लिए कारोबार करना आसान बनाने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए *सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम* को मजबूत किया जाएगा, ताकि विभिन्न अनुमतियों और स्वीकृतियों की प्रक्रिया सरल और तेज हो सके।

    नई परियोजनाओं के साथ-साथ मौजूदा पर्यटन इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले से संचालित होटल, रिसॉर्ट, पर्यटन इकाइयों और अन्य उद्यमों को अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।

    ## पूंजीगत सब्सिडी से लेकर करों में राहत तक

    नई नीति में पात्र पर्यटन इकाइयों और उद्यमियों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में *पूंजीगत सब्सिडी* के माध्यम से होटल और ठहरने से जुड़ी परियोजनाओं को आर्थिक सहयोग देने की व्यवस्था की गई है।

    इसके साथ ही पर्यटन परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग के लिए सहायता, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहन तथा बिजली शुल्क एवं स्टांप ड्यूटी से संबंधित राहत जैसे प्रावधान भी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।

    इसका सीधा उद्देश्य है कि उत्तराखंड में पर्यटन परियोजनाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निवेश और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो।

    ## गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

    उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति की एक बड़ी संभावना *स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और रोजगार सृजन* में दिखाई देती है। पर्यटन के विस्तार के साथ होमस्टे, स्थानीय गाइड, ट्रैवल सेवाएं, टैक्सी एवं परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, साहसिक गतिविधियों और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

    राज्य के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों, लोक संस्कृति और हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पर्यटकों को उत्तराखंड की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान का अनुभव भी प्राप्त होगा।

    इस दृष्टि से पर्यटन नीति केवल होटल और रिसॉर्ट के निर्माण की नीति नहीं, बल्कि *स्थानीय समुदाय को पर्यटन अर्थव्यवस्था का भागीदार बनाने की पहल* के रूप में भी देखी जा सकती है।

    ## धार्मिक पर्यटन से आगे बढ़ेगा उत्तराखंड

    उत्तराखंड की पहचान लंबे समय से चारधाम और प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण रही है। नई नीति में धार्मिक पर्यटन को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन के नए आयाम विकसित करने पर जोर दिया गया है।

    ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों को पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने, सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने और नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

    इससे पर्यटन का दबाव कुछ चुनिंदा प्रसिद्ध स्थलों से आगे बढ़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। यही संतुलित पर्यटन विकास का आधार बन सकता है।

    ## एडवेंचर और इको-टूरिज्म बनेगा नया आकर्षण

    हिमालयी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्तराखंड में *ट्रैकिंग, रिवर एक्टिविटी, वॉटर स्पोर्ट्स और अन्य एडवेंचर गतिविधियों* की व्यापक संभावनाएं हैं। नई नीति में एडवेंचर पर्यटन के साथ पर्यावरण-अनुकूल यानी इको-टूरिज्म को प्राथमिकता दी गई है।

    इसका उद्देश्य पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है। प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    ## वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म पर भी नजर

    योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट पहचान है। नई पर्यटन नीति में *वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म* को भी प्रमुख क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।

    योग और आयुर्वेद को पर्यटन अनुभव से जोड़कर राज्य देश-विदेश के उन पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, जो स्वास्थ्य, मानसिक शांति और प्राकृतिक जीवनशैली से जुड़े अनुभव चाहते हैं।

    इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य एवं वेलनेस सुविधाओं के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

    ## हेलीकॉप्टर पर्यटन को भी मिलेगा प्रोत्साहन

    उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में कनेक्टिविटी पर्यटन विकास का महत्वपूर्ण आधार है। नई नीति में *हेलीकॉप्टर आधारित पर्यटन* को भी प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया गया है।

    हेली सेवाओं के विस्तार से दुर्गम पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान बनाने के साथ-साथ पर्यटन के नए अनुभव विकसित किए जा सकते हैं। इससे समय की बचत होगी और राज्य के ऐसे क्षेत्रों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने में मदद मिल सकती है, जहां सड़क या अन्य माध्यमों से पहुंचना अपेक्षाकृत कठिन है।

    ## MICE टूरिज्म से बढ़ेंगे कारोबारी अवसर

    नई पर्यटन नीति में *MICE—Meetings, Incentives, Conferences and Exhibitions* पर्यटन को भी महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड को केवल अवकाश और धार्मिक पर्यटन के गंतव्य के रूप में नहीं, बल्कि कॉरपोरेट मीटिंग, सम्मेलन, प्रदर्शनियों और प्रोत्साहन यात्राओं के लिए भी आकर्षक स्थान बनाना है।

    इससे होटल, परिवहन, इवेंट मैनेजमेंट, खान-पान और अन्य सेवा क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

    ## एक नीति, अनेक संभावनाएं

    उत्तराखंड की नई पर्यटन नीति का व्यापक उद्देश्य राज्य की पर्यटन क्षमता को एक समग्र आर्थिक अवसर में बदलना है। निजी निवेश को आकर्षित करना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना, नए पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करना, स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन का विस्तार करना—ये सभी लक्ष्य इस नीति को व्यापक स्वरूप देते हैं।

    उत्तराखंड के लिए पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि पहाड़ों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने का माध्यम भी है। यदि नीति के प्रावधान प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में राज्य के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार हो सकता है।

    ### विकास के साथ संरक्षण की चुनौती

    हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में पर्यटन विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए नई नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश और पर्यटन विस्तार के साथ प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण का संरक्षण किस तरह सुनिश्चित किया जाता है।

    यही संतुलन उत्तराखंड को एक ऐसे पर्यटन मॉडल की ओर ले जा सकता है, जिसमें *पर्यटक बढ़ें, निवेश बढ़े, रोजगार बढ़े और साथ ही देवभूमि की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान भी सुरक्षित रहे।*

    नई पर्यटन नीति इसी व्यापक सोच के साथ उत्तराखंड को देश के प्रमुख और बहुआयामी पर्यटन गंतव्यों में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • राजनीतिक चंदे में दो पार्टियों का दबदबा, 682 करोड़ में करीब 99% रकम पर कब्जा

    राजनीतिक चंदे में दो पार्टियों का दबदबा, 682 करोड़ में करीब 99% रकम पर कब्जा

     नई दिल्ली

    राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने एक रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में 14 रजिस्टर्ड अनरिकग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टियों (RUPPs) ने 20 हजार रुपये से ज्यादा के कुल 682.28 करोड़ रुपये के चंदे की जानकारी दी है. खास बात यह है कि इस पूरी रकम का 99% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ दो पार्टियों को मिला है। 

    ADR के मुताबिक, इन 14 RUPPs में से सिर्फ उनके योगदान से जुड़ी रिपोर्ट उपलब्ध है, जबकि ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है. इन रिपोर्टों में 20 हजार रुपये से ज्यादा मिले चंदे की जानकारी दी गई है. इनमें 7 पार्टियां बिहार की हैं, जबकि बाकी पार्टियां दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड और हरियाणा से हैं। 

    इन सभी 14 पार्टियों ने मिलकर 20 हजार रुपये से ज्यादा के 682.28 करोड़ रुपये के चंदे की जानकारी दी. इनमें बिहार में रजिस्टर्ड आम जनमत पार्टी और प्रबल भारत पार्टी सबसे ऊपर हैं. दोनों पार्टियों ने मिलकर 680.655 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया, जो सभी 14 RUPPs के कुल चंदे का 99% से ज्यादा है. ADR के डेटा के मुताबिक, 9 पार्टियों ने 20 हजार रुपये से ज्यादा का कोई चंदा नहीं बताया है। 

    आम जनमत पार्टी को मिले 640 करोड़ रुपये
    आम जनमत पार्टी ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 640 करोड़ रुपये घोषित किए हैं. इस साल की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध योगदान रिपोर्ट खराब तरीके से स्कैन की गई है. वित्त वर्ष 2022-23 में आम जनमत पार्टी ने 12 हजार से ज्यादा चंदों से 216 करोड़ रुपये मिलने की जानकारी दी थी. 20 हजार रुपये से ज्यादा के चंदे के मामले में दूसरी सबसे ज्यादा राशि पाने वाली पार्टी भी बिहार में रजिस्टर्ड प्रबल भारत पार्टी है. इसका रजिस्टर्ड कार्यालय सीतामढ़ी, बिहार में है। 

    ADR के डेटा में स्वराज इंडिया पार्टी, राष्ट्रीय जनरल पार्टी, भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) और प्राउटिस्ट ब्लॉक, इंडिया का भी जिक्र है. इन पार्टियों के रजिस्टर्ड पते क्रमशः नई दिल्ली, बक्सर, जबलपुर और नई दिल्ली में हैं. वहीं, चुनावी फंड से जुड़े मामले में ECI ने बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को राष्ट्रीय जनरल पार्टी को लेकर नोटिस भेजा है। 

  • रात का सफर होगा और आरामदायक, 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें होंगी तैयार; मिलेंगी वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं

    रात का सफर होगा और आरामदायक, 260 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें होंगी तैयार; मिलेंगी वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं

    नई दिल्ली

    वंदे भारत सीरीज की ट्रेनों ने 2019 में अपनी शुरुआत के बाद से लंबा सफर तय किया है. दिन के समय चलने वाली प्रीमियम चेयर-कार सर्विस के तौर पर शुरू हुई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन अब ओवरनाइट जर्नी की दिशा में भी विस्तार कर रही है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के जरिए लंबी दूरी के और ज्यादा रूट्स पर सेमी-हाई-स्पीड रेल जर्नी का विकल्प मिलने की उम्मीद है। 

    वंदे भारत स्लीपर की पहली ट्रेनें इस साल की शुरुआत में गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर सेवा में शामिल हुई थीं. वंदे भारत स्लीपर की दूसरी ट्रेनसेट फिलहाल ट्रायल प्रक्रिया में है. इसके संभावित रूट को लेकर बेंगलुरु-मुंबई का नाम सामने आया है, लेकिन रेलवे की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. इसलिए अगली यात्री सेवा का रूट फिलहाल तय नहीं माना जा सकता। 

    भारतीय रेलवे वंदे भारत सीरीज की स्लीपर ट्रेनों को अब बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है. रेलवे की मौजूदा योजना के तहत कुल 260 वंदे भारत स्लीपर रेक तैयार किए जाने हैं. इससे लंबी दूरी के रात वाले सफर के लिए तेज और आधुनिक ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ सकता है. इसका मकसद उन रूट्स पर तेज सेवा उपलब्ध कराना है, जहां यात्रियों को रातभर का सफर करना पड़ता है। 

    कौन बनाएगा कितने रेक?
    मौजूदा योजना के मुताबिक, 260 वंदे भारत स्लीपर रेक अलग-अलग कंपनियों और उत्पादन इकाइयों में तैयार किए जाएंगे. इनमें भारत अर्थ मूवर्स ​लिमिटेड (BEML) 10, चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50, किनेट रेलवे सॉल्यूशंस (KRS) 120 और टीटागढ़-भेल (Titagarh-BHEL 80) रेक बनाएंगे। 

    BEML को शुरुआती 10 ट्रेनसेट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली है. ये ट्रेनें 16-कोच वाली होंगी. वहीं, ICF चेन्नई 50 ट्रेनसेट तैयार करेगा. ICF के 24-कोच वाले सेट में पैंट्री कार भी शामिल होगी. अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग तैयार की जा चुकी हैं। 

    लातूर में बनेंगे 120 ट्रेनसेट

    रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (TMH) की जॉइंट वेंचर Kinet Railway Solutions को 120 ट्रेनसेट तैयार करने हैं. ये सभी ट्रेनसेट लातूर में बनाए जाएंगे और हर ट्रेन में 16 कोच होंगे. RVNL के मुताबिक, इनकी मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो चुकी है. कंपनी के 23वें एनुअल जनरल मीटिंग में चेयरमैन सलीम अहमद ने बताया था कि प्रोटोटाइप की डेडलाइन में बदलाव किया गया है. पहले इसे जून 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। 

    180 Kmph डिजाइन स्पीड
    वंदे भारत स्लीपर को सेमी-हाई-स्पीड ओवरनाइट ट्रेन के तौर पर डिजाइन किया गया है. इसकी डिजाइन स्पीड 180 Kmph है, जबकि वास्तविक ऑपरेशनल स्पीड रूट और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर 160 Kmph तक रह सकती है. लोकोमोटिव से चलने वाली ट्रेडिशनल ट्रेनों के विपरीत, वंदे भारत स्लीपर में डिस्ट्रिब्यूटेड पावर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. इस तकनीक में ट्रेन के डिब्बो को एक अलग इंजन नहीं खींचता बल्कि ट्रेन के हर कोच में एक्सिलरेशन सिस्टम लगा होता है. यानी हर कोच अपने आप में इंजन का काम करता है. इससे वंदे भारत ट्रेन तेजी से रफ्तार पकड़ सकती है और जल्दी ब्रेक लगा सकती है. इस तकनीक से ट्रेन को अपनी एवरेज स्पीड बढ़ाने और ट्रैवल टाइम करने में मदद मिलती है। 

    16 कोच वाले प्रोटोटाइप में क्या खास?
    वंदे भारत स्लीपर को सेमी-हाई-स्पीड ओवरनाइट ट्रेन के तौर पर विकसित किया गया है और इसके डिजाइन में आधुनिक यूरोपीय रेल सिस्टम से प्रेरित तकनीकी खूबियां शामिल हैं. अगर कहें कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों को राजधानी ट्रेनों से बेहतर खूबियां और हवाई जहाज जैसी लग्जरी मिलेगी तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। 

    मौजूदा 16-कोच प्रोटोटाइप में 11 एसी 3-टियर, 4 एसी 2-टियर और 1 एसी फर्स्ट क्लास कोच शामिल हैं. यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुशन वाली बर्थ और ऊपरी बर्थ तक पहुंचने के लिए नया डिजाइन दिया गया है. रात की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए ट्रेन में नाइट लाइटिंग, इंटीग्रेटेड अनाउंसमेंट सिस्टम, डिस्प्ले पैनल, CCTV, मॉड्यूलर पैंट्री, रीडिंग लाइट, चार्जिंग पॉइंट और रिफ्रेशमेंट टेबल जैसी सुविधाएं दी गई हैं। 

    वंदे भारत स्लीपर की सेफ्टी पर भी जोर
    वंदे भारत स्लीपर में सील्ड गैंगवे और ऑटोमैटिक इंटरकनेक्टिंग डोर दिए गए हैं. तय स्टेशनों पर खुलने वाले ऑटोमैटिक डोर भी इसमें शामिल हैं. यात्रियों की सुविधा के लिए बायो-वैक्यूम (Bio-Vacuum) टॉयलेट और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग वॉशरूम की व्यवस्था है. एसी फर्स्ट क्लास कोच में शॉवर और हॉट वॉटर की सुविधा भी दी गई है. सुरक्षा के लिहाज से ट्रेन में कवच, रिजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम, सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम और इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे फीचर शामिल हैं. लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर का विस्तार अहम बदलाव ला सकता है. हालांकि, नई सेवाएं शुरू होने से पहले प्रोटोटाइप की टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और संबंधित रूट की तैयारियां पूरी करनी होंगी। 

  • Vande Bharat का खास फीचर बचाता है बिजली, ब्रेक लगाते ही मोटर बन जाती है जनरेटर

    Vande Bharat का खास फीचर बचाता है बिजली, ब्रेक लगाते ही मोटर बन जाती है जनरेटर

     नई दिल्‍ली
    वंदे भारत ट्रेन तेजी भारतीय रेलवे नेटवर्क में फैल रहा है. देश के ज्‍यादातर रूटों पर वंदे भारत ट्रेन चलाई जा रही है. आपने भी कभी ना कभी वंदे भारत एक्‍सप्रेस से सफर किया ही होगा या फिर उसकी बनावट या लग्‍जरी सुविधाओं के बारे में सुना या देखा ही होगा, लेकिन क्‍या आपको पता है कि इस ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्‍टम भी काफी कमाल का है। 

    वंदे भारत ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्‍टम बिल्‍कुल कार की तरह ही काम करता है, जो ट्रेन में ही इस्‍तेमाल किए जाने वो ब्रेकिंग सिस्‍टम से पूरी तरह अलग है. इस सिस्‍टम में इलेक्ट्रो न्यूमेटिक (Electro Pneumatic) डिस्क ब्रेक लगाए जाते हैं. इसके ब्रेक पहियों के बगल में नहीं बल्कि साथ लगाए जाते हैं। 

    बिजली के जरिए ही इसका ब्रेकिंग सिस्‍टम ट्रांसमिट होता है, जो काफी तेजी से काम करता है और ब्रेक लगाते ही इसका असर दिखने लगता है. यह ब्रेक सिस्‍टम ठीक वैसा ही है जैसे एक काम में होता है, जिसमें डिस्‍क और ड्रम ब्रेक लगे होते हैं. यही कारण है कि वंदे भारत ट्रेन बाकी ट्रेनों की तुलना में ज्‍यादा सुरक्षित है। 

    इंमरजेंसी में कैसे ट्रेन को रोकता है ये सिस्‍टम? 
    वंदे भारत ट्रेन में ऐसा सिस्‍टम होता है, जो इमरजेंसी में ट्रेन को आसानी से रो देता है. इसमें इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) लगाया गया है जैसा की कार में भी होता है. यह सिस्‍टम हाईस्पीड ट्रेन को इमरजेंसी में बिना किसी परेशानी के रोका सकता है. इस सिस्‍टम का ट्रॉयल अगस्‍त में पूरा कर लिया गया है, जो बिना किसी नुकसान के ट्रेन को आसानी से रोक देगा. अभी इसे यात्री ट्रेनों में लागू नहीं किया गया है। 

    बिजली बनाता है ये सिस्‍टम
    जब ट्रेन तेज गति से चल रही होती है और ब्रेक लगाया जाता है, तो सामान्‍य ब्रेक में ट्रेन की गतिज ऊर्जा बर्बाद हो जाती है, लेकिन वंदे भारत में इलेक्ट्रिक मोटर को ब्रेकिंग के दौरान जनरेटर की तरह चलाया जा सकता है. ट्रेन के पहिए मोटर को घुमाते हैं और मोटर बिजली पैदा होती है. यह बिजली रेलवे के विद्युत सिस्टम में वापस भेजी जा सकती है या सिस्टम की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल होती है। 

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार ब्रेक लगाने पर उतनी ही बिजली वापस मिलती है. ऊर्जा की कुछ मात्रा मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सिस्‍टम में नुकसान के कारण प्रभावित होती है. एक अनुमान के हिसाब से इस तकनीक का प्रयोग करके कम से 30 फीसदी बिजली पैदा की जा सकती है। 

  • Tejas Mk1A को मिली नई ताकत, GE Aerospace ने सौंपे 3 F404 इंजन; दुश्मनों पर और पैनी होगी नजर

    Tejas Mk1A को मिली नई ताकत, GE Aerospace ने सौंपे 3 F404 इंजन; दुश्मनों पर और पैनी होगी नजर

    बेंगलुरु 

    भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस की ताकत बढ़ने वाली है. LCA तेजस Mk1A प्रोग्राम को बड़ा बढ़ावा मिला है. अमेरिकी कंपनी  GE Aerospace ने बताया कि उसने भारत को तीन पावरफुल फाइटर जेट इंजन सौंपे हैं. इन इंजन को तेजस में लगाया जाएगा. कंपनी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इसी साल अगस्त में ये इंजन दिए. यह डिलीवरी ऐसे समय में हुई है जब F404 इंजनों की सप्लाई में देरी के कारण तेजस Mk1A के उत्पादन और डिलीवरी कार्यक्रम पर असर पड़ा था. HAL पहले ही कह चुका है कि उसकी उत्पादन लाइन तैयार है, लेकिन विमानों की अंतिम डिलीवरी इंजन उपलब्धता पर निर्भर है। 

    क्या है F404-IN20 इंजन?
    F404-IN20, GE की F404 सीरीज का वह वैरिएंट है जिसे खास तौर पर भारतीय तेजस के लिए डेवलेप किया गया है. यह इंजन आफ्टरबर्नर के साथ करीब 84 kN (19,000 lbf) का मैक्सिमम थ्रस्ट पैदा करता है, जो तेजस को सुपरसोनिक गति और जबरदस्त मैन्युवरिंग क्षमता देता है. कहा जा सकता है कि यह इंजन केवल एक नॉर्मल अपग्रेड नहीं, बल्कि फाइटर जेट को हर मोर्चे पर घातक बनाने वाला पावरहाउस है। 

    लद्दाख से लेकर रेगिस्तान तक अचूक प्रहार
    इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका हर तरह के मौसम और इलाके में असरदार रहना है. यह इंजन लद्दाख के माइनस तापमान और लेह जैसे हाई-एल्टीट्यूड एयरबेसों से लेकर थार के 50 डिग्री तापमान वाले रेगिस्तान तक बिना पावर लॉस के काम करता है. इसके लिए इसमें खास सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड्स और एडवांस कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं। 

    यह इंजन पूरी तरह फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) टेकनोलॉजी से लैस है. यह सिस्टम ईंधन की खपत को बेहतर बनाती है और डॉगफाइट के दौरान पायलट को तुरंत थ्रॉटल रिस्पॉन्स देती है। 

    तेजस Mk1A के लिए क्यों अहम है यह डिलीवरी?
    भारत का तेजस प्रोग्राम इंजन की कमी के चलते लगातार डिले हो रहा था.  अब तीन नए इंजन मिलने से HAL को तैयार एयरफ्रेम को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी. भारतीय वायुसेना ने फिलहाल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है. ऐसे में अब इन इंजनों की जल्द डिलीवरी होने की संभावना बढ़ गई। 

    MiG-21 की जगह लेगा तेजस
    भारतीय वायुसेना पुराने MiG-21 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है. ऐसे में तेजस Mk1A ही भविष्य के फ्रंटलाइन फाइटर स्क्वाड्रनों की रीढ़ बनने जा रहा है. F404-IN20 इंजन के साथ तेजस  लद्दाख जैसे हाई-एल्टीट्यूड बेस, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और  पश्चिमी सीमा के फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात किए जा सकेंगे। 

    क्या हैं तेजस Mk1A की खासियतें?
    तेजस Mk1A, मौजूदा तेजस Mk1 का एडवांस वैरिएंट है. यह फाइटर जेट AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, BVR मिसाइल क्षमता, बेहतर मेंटेनेंस प्रोफाइल, कम ऑपरेटिंग लागत और आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता जैसी खासियतों के साथ भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा। 

  • UN में बदलेगा दुनिया का नक्शा? अफ्रीका होगा ज्यादा बड़ा, भारत समेत 164 देशों ने दिया समर्थन

    UN में बदलेगा दुनिया का नक्शा? अफ्रीका होगा ज्यादा बड़ा, भारत समेत 164 देशों ने दिया समर्थन

    न्यूयॉर्क

    दुनिया को देखने और समझने के तरीके में बड़ा बदलाव आने वाला है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक नए वर्ल्ड मैप को अपनाने के पक्ष में मतदान किया है। इस नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले के मुकाबले बड़ा दिखाई देगा, जबकि उत्तरी अमेरिका और यूरोप छोटे नजर आएंगे।

    नए नक्शे को ‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इसका मकसद दुनिया के महाद्वीपों के भू-भाग को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है। प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने वोट किया, जबकि अकेले अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

    क्यों बदला जा रहा है दुनिया का पुराना नक्शा?
    अब तक दुनिया में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला मर्केटर प्रोजेक्शन 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। इसे मुख्य रूप से समुद्री नौवहन के लिए डिजाइन किया गया था।

    इस नक्शे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें धरती के ध्रुवों के पास मौजूद इलाके अपने वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं। नए इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन का उद्देश्य इस विकृति को कम करना और महाद्वीपों के आकार को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाना है।

    164 देशों ने किया समर्थन, अमेरिका ने किया विरोध
    UN महासभा में नए नक्शे से जुड़े प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया, जबकि छह देश मतदान से अलग रहे। हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है। इसका मकसद सदस्य देशों को शिक्षा, संस्थानों और दूसरी जगहों पर ज्यादा सटीक वर्ल्ड मैप इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत ने UN के "नक्शे को सही करने" वाले प्रस्ताव का स्वागत किया है। भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने यूएन में कहा, "समान क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे महाद्वीपीय या क्षेत्रीय भू-भागों के सापेक्ष आकार और क्षेत्रफल को बनाए रखते हैं।"

    क्या अब मर्केटर मैप पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
    नहीं। UN के प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि मर्केटर प्रोजेक्शन पर तत्काल रोक लग गई है। नया प्रस्ताव सदस्य देशों से पारंपरिक मर्केटर नक्शे की जगह इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को अपनाने का आग्रह करता है, ताकि दुनिया के भू-भाग का ज्यादा सटीक प्रतिनिधित्व हो सके। यानी आने वाले समय में स्कूलों, संस्थानों और दूसरी जगहों पर दुनिया का नक्शा पहले से अलग नजर आ सकता है।

    अफ्रीका को लेकर क्यों है इतनी चर्चा?
    नए नक्शे में अफ्रीका का आकार पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटर प्रोजेक्शन की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। इसी वजह से यह बदलाव खास तौर पर चर्चा में है। नए नक्शे का उद्देश्य केवल अफ्रीका को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों के वास्तविक भू-भाग को अधिक सटीक तरीके से प्रस्तुत करना है।

  • BRICS समिट के लिए भारत आएंगे शी जिनपिंग, बांग्लादेशी PM नहीं आएंगे; बढ़ी सियासी हलचल

    BRICS समिट के लिए भारत आएंगे शी जिनपिंग, बांग्लादेशी PM नहीं आएंगे; बढ़ी सियासी हलचल

    नई दिल्ली

     भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं।

    जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है।

    बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं
    बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है।

    तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं।

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू
    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

  • सिंधु के पानी पर भारत का नया प्लान, लद्दाख में 36 चेक डैम की तैयारी; पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

    सिंधु के पानी पर भारत का नया प्लान, लद्दाख में 36 चेक डैम की तैयारी; पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली

    भारत का पहला 'रॉक चेक डैम' सिंधु नदी पर लद्दाख में बना रहा है. जिससे किसानों को आसानी से पानी मिलेगा. यह डैम बिना सीमेंट के सिर्फ प्राकृतिक पत्थरों से बनाया गया है. ऐसे में यह कदम न सिर्फ स्थानीय किसानों के लिए संजीवनी है, बल्कि पाकिस्तान की तरफ पानी बहने से पहले अपने जल संसाधनों का भरपूर उपयोग करने की भारत की नई रणनीति को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है. भारत ने एक तरह से पाकिस्तान को भी क्लीयर संदेश दिया है कि सिंधु नदी को लेकर अब पूरी तरह से रणनीति स्पष्ट है कि पानी का उपयोग भारत पूरी तरह से करने के लिए तैयार है। 

    बिना सीमेंट का है पूरा डैम
    लद्दाख में बना भारत का पहला रॉक डैम बिना सीमेंट और चूने का बनाया गया है. बल्कि नदी के तल के भारी पत्थरों  को आपस में इंटरलॉक करके इसे खड़ा किया गया है. जिसका सबसे ज्यादा फायदा लद्दाख के किसानों को होगा. सालों से लद्दाख के किसान वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान भारी जल संकट से जूझ रहे थे, सिंधु नदी का जलस्तर गहरी घाटियों में काफी नीचे चला जाता था, जिससे पंप से पानी खींचना बेहद मुश्किल था. पानी की इसी किल्लत ने खेती और किसानों की आर्थिक कमर तोड़ दी थी. लेकिन अब इस डैम के बनने से पानी का जलस्तर ऊंच रहेगा. सिंधु नदी का जलस्तर करीब 10 फीट तक चला गया है. डैम में 40 मिलियन यानि 4 करोड़ लीटर पानी जमा होगा. 'इगू फे' सिंचाई नहर के जरिए सूखे गांवों और खेतों की प्यास बुझा रहा है। 

    पाकिस्तान को कड़ा संदेश 
    एक तरफ लद्दाख में बना यह डैम किसानों को पानी उपलब्ध करा रहा है. तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए एक सख्त रणनीतिक संदेश है. यह दिखाता है कि भारत अब सिंधु के पानी का इस्तेमाल अपने सीमावर्ती इलाकों के विकास के लिए पूरी तेजी से कर रहा है. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया था. भारत ने साफ किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह नहीं रोकता, तब तक यह समझौता बहाल नहीं होगा. अब इस पर भारत का सख्त मिजाज दिख रहा है। 

    लद्दाख में होगा पानी का इस्तेमाल 
    भारत ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में अपने जल अधिकारों का उपयोग तेज कर दिया. उपशी में पहले रॉक चेक डैम का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक आगे बढ़ा और सिंधु नदी पर कई अन्य पनबिजली परियोजनाओं को भी गति दी गई . लद्दाख प्रशासन अब जल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रहा है. केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है जिसके तहत। 

    लद्दाख में ये 4 प्वाइंट अहम 

        लद्दाख में कुल 36 नए चेक डैम प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे.
        लेह इलाके में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम बनेंगे.
        कारगिल इलाके में 29 चेक डैम या वियर छोटी बांधनुमा संरचना का निर्माण होगा.
        इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है.