Category: मध्य प्रदेश

  • MP हाईकोर्ट में 35 हजार+ अवमानना प्रकरण, आदेश के बाद फिर कोर्ट पहुंच रहे पक्षकार

    MP हाईकोर्ट में 35 हजार+ अवमानना प्रकरण, आदेश के बाद फिर कोर्ट पहुंच रहे पक्षकार

    जबलपुर
     हाई कोर्ट में एक मुकदमे का आदेश होने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हो रहा है। आदेश का पालन नहीं होने पर वही पक्षकार दोबारा हाई कोर्ट पहुंच रहा है और अवमानना याचिका के रूप में उसी विवाद की दूसरी न्यायिक पारी शुरू हो रही है।अवमानना प्रकरणों की 35 हजार से अधिक संख्या ने न्यायालय के सामने लंबित मामलों के निराकरण की चुनौती को और जटिल बना दिया है।

    मूल याचिका में न्यायालय जहां अधिकार और विवाद का फैसला करता है, वहीं आदेश के बाद अवमानना याचिका में यह देखना पड़ता है कि संबंधित विभाग, अधिकारी या संस्था ने न्यायालय के निर्देश का पालन किया या नहीं। इस प्रक्रिया में नोटिस, जवाब, अनुपालन रिपोर्ट, व्यक्तिगत उपस्थिति और कई बार समय-सीमा तय करने जैसी न्यायिक कवायद करनी पड़ती है।

    हाई कोर्ट में पहले से ही लंबित मामलों का बड़ा बोझ
    हाई कोर्ट में पहले से ही लंबित मामलों का बड़ा बोझ है। मार्च 2025 के अंत में न्यायालय में लंबित प्रकरणों की संख्या 4.71 लाख से अधिक थी। ऐसे में आदेशों के समय पर पालन नहीं होने से उत्पन्न अवमानना प्रकरण न्यायालय के अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग करते हैं।

    इसका असर सीधे तौर पर मूल मामलों के निराकरण की गति पर पड़ने की स्थिति बनती है। हाल के मामलों में भी न्यायालय को अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ा है।

    न्यायालय ने नोटिस से आगे बढ़कर वारंट तक जारी किए
    कई मामलों में आदेश के बावजूद अनुपालन रिपोर्ट पेश नहीं होने अथवा संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति नहीं होने पर न्यायालय ने नोटिस से आगे बढ़कर वारंट तक जारी किए हैं। सितंबर में जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने एक अवमानना प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व और सागर के तत्कालीन कलेक्टर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।

    आदेश के बाद भी खत्म नहीं होता मुकदमा
    अवमानना कानून का उद्देश्य न्यायालय के आदेश की गरिमा और प्रभावशीलता बनाए रखना है। इसलिए अवमानना याचिकाओं की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता। असल समस्या उस स्थिति में पैदा होती है जब किसी आदेश के पालन के लिए बार-बार न्यायालय की निगरानी आवश्यक हो जाती है।

    यदि विभागीय स्तर पर आदेश मिलते ही उसकी अनुपालन प्रक्रिया शुरू हो और समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हो जाए तो बड़ी संख्या में अवमानना याचिकाओं की नौबत टाली जा सकती है।

     

  • MP में टेलीकॉम सेक्टर को बढ़ावा, ग्वालियर जोन में निवेश जुटाने की तैयारी

    MP में टेलीकॉम सेक्टर को बढ़ावा, ग्वालियर जोन में निवेश जुटाने की तैयारी

    बेंगलुरु में टेलीकॉम उद्योग के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन को निवेश का नया केंद्र बनाने की तैयारी
    22 सितंबर को इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टीएमजेड की संभावनाओं और नीतिगत सहयोग पर होगी चर्चा

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के लिए राज्य सरकार अब देश के प्रमुख तकनीकी केंद्र बेंगलुरु के उद्योग जगत से सीधे संवाद करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 सितंबर को बेंगलुरु में टेलीकॉम क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

    ताज बेंगलुरु में होने वाले इस संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में उपलब्ध निवेश अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे सहयोग की जानकारी देंगे। टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और इससे जुड़े उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।

    ग्वालियर में टेलीकॉम उद्योग के लिए तैयार हो रहा नया आधार

    इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की प्रमुख विशेषताओं और निवेशकों के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई तथा दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के सामने टीएमजेड से जुड़े अवसरों और नीति समर्थन की जानकारी रखेंगे।

    कार्यक्रम में टेलीकॉम उद्योग की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश के इच्छुक उद्योगों के साथ उनके प्रस्तावों और अपेक्षाओं पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के प्रश्नों और सुझावों पर संवाद करते हुए मध्यप्रदेश में निवेश के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और उपलब्ध सहयोग की जानकारी देंगे।

    केंद्र और राज्य के समन्वय से टेलीकॉम विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

    इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में भारत सरकार के संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया भी शामिल होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा उद्योग जगत की सहभागिता से होने वाला यह संवाद ग्वालियर टीएमजेड के विकास और टेलीकॉम विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

    बेंगलुरु के तकनीकी केंद्रों को भी देखेंगे मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु प्रवास के दौरान टेलीकॉम और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थानों का अवलोकन भी करेंगे। वे क्वालकॉम के आरएंडडी सेंटर तथा सिग्नलचिप इनोवेशन और सिग्नलट्रॉन सिस्टम का दौरा करेंगे। इन केंद्रों पर अनुसंधान, नवाचार और टेलीकॉम तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी ली जाएगी। इसके माध्यम से बेंगलुरु के तकनीकी इकोसिस्टम और मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के बीच संभावित सहयोग के अवसरों को समझने का प्रयास होगा।

     

  • भागीरथपुरा कांड के बाद सरकार का एक्शन, रोबोट से होगी पाइपलाइन की जांच।40 रुपए प्रति मीटर खर्च

    भागीरथपुरा कांड के बाद सरकार का एक्शन, रोबोट से होगी पाइपलाइन की जांच।40 रुपए प्रति मीटर खर्च

    इंदौर
     भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवर नेटवर्क की स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

    इसके लिए चेन्नई की विशेषज्ञ एजेंसी पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर एम्पैनल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पाइपलाइन निरीक्षण की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय हुई है और इसके लिए एक साल का एग्रीमेंट किया गया है।

    भागीरथपुरा के बाद क्यों पड़ी रोबोटिक जांच की जरूरत?
    दिसंबर 2025 के आखिर में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से बड़े स्तर पर बीमारी फैली थी। शुरुआती सरकारी और NHRC रिकॉर्ड में दूषित पानी से मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई थी। NHRC ने जनवरी 2026 में मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी।

    बाद में न्यायिक जांच में 36 मौतों की जांच की गई। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें 24 मौतों को सीवर से दूषित पानी पीने से सीधे जोड़ा गया, जबकि 12 मामलों में दूषित पानी और मौत के बीच निर्णायक संबंध स्थापित नहीं हो सका। न्यायिक जांच में पाइपलाइन बदलने में देरी और शहरी जल नेटवर्क से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं।

    इसी घटना के बाद सरकार का फोकस इस बात पर है कि प्रदेश में ऐसी पाइपलाइन क्रॉसिंग और लीकेज की पहले ही पहचान कर ली जाए, जहां सीवर का पानी पेयजल नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।

    पहले समझिए, सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा?
    दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पीने के पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले। सीवर लाइन लीक होने से उसका पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। अकेले भगीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था।

    हादसे के बाद सरकार ने जीआईएस (GIS) प्लेटफॉर्म 'गरुड़' से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इसमें मध्य प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर में 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा है।

    दूषित पेयजल पीने से यहां 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले थे। पता चला कि सीवर लाइन लीक होकर पेयजल लाइन में मिल रही थी। अकेले भागीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले थे। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इसी के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेने की तैयारी शुरू की।

    हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जीआईएस (Geographic Information System) प्लेटफॉर्म गरुड़ से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इस मैपिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। प्रदेश में 2.30 लाख से ज्यादा ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल लाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें से इंदौर में 30 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं। भोपाल में भी 20 हजार से ज्यादा ऐसे खतरनाक पॉइंट्स मिले हैं। इन जगहों पर सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा बना रहता है।

    अब रोबोट करेंगे जांच
    सरकार ने अब इन डेंजर पॉइंट्स की जांच के लिए रोबोट तकनीक अपनाने का फैसला किया है। यह जांच ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी से होगी। इसका मतलब है कि सड़क खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रोबोट को सीसीटीवी क्रॉलर सिस्टम से पाइपलाइन में उतारा जाएगा।

    इसे मौजूदा मैनहोल या एयर रिलीज वाल्व के जरिए भेजा जाएगा। रोबोट में हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और सेंसर लगे होंगे। यह रोबोट करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़ा रहेगा। पाइपलाइन के अंदर रोबोट लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा। साथ ही जरूरी डेटा भी दर्ज करता रहेगा।

    यह रोबोट 70 से 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों में काम करेगा। इसकी मदद से लीकेज, टूट फूट और अवैध कनेक्शन का पता चलेगा। इससे साफ हो जाएगा कि कहां कहां खतरा ज्यादा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों को इसके निर्देश दिए हैं। नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को भी यह आदेश दिया गया है। सभी जगह इस तकनीक से जांच अनिवार्य कर दी गई है।

    एजेंसी को कैसे मिला काम
    इस काम के लिए विभाग ने टेंडर जारी किया था। इसकी अनुमानित लागत 1.50 करोड़ रुपए रखी गई थी। यह काम 365 दिन में पूरा करना तय हुआ है। टेंडर में तीन कंपनियों ने बोली लगाई। इनकी दरों में जमीन आसमान का फर्क देखने को मिला।

    डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर की दर रखी थी। फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर का रेट दिया था। लेकिन चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने सिर्फ 40 रुपए प्रति मीटर की बोली लगाई।

    सबसे कम बोली होने के कारण इसी कंपनी को काम मिला है। कंपनी अप्रैल 2022 में रजिस्टर्ड हुई थी। इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब सभी नगरीय निकाय अपनी जरूरत के हिसाब से एस्टीमेट तैयार करेंगे। इसके बाद कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।

    देश के कई राज्यों में पहले से इस्तेमाल
    मध्य प्रदेश में यह तकनीक पहली बार इस्तेमाल हो रही है। लेकिन देश के कई राज्यों में यह पहले से काम कर रही है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से ज्यादा राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन जांच हो रही है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

    महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी यह तकनीक इस्तेमाल हो रही है। इन राज्यों में चेन्नई की एक कंपनी के खास रोबोट काम कर रहे हैं। ये रोबोट हाई रिजॉल्यूशन कैमरों की मदद से जीआईएस मैपिंग करते हैं। साथ ही लीकेज की सटीक जानकारी भी देते हैं।

    पुराने तरीके से होती थी दिक्कत
    अब तक सीवर लाइनों की जांच पुराने तरीकों से होती थी। इसमें बड़े पैमाने पर सड़क और जमीन की खुदाई करनी पड़ती थी। इससे लंबे समय तक ट्रैफिक भी प्रभावित रहता था। खुदाई से कचरा बढ़ता था और पर्यावरण पर भी असर पड़ता था। आपात मरम्मत में भी काफी समय लग जाता था।

    इसके अलावा बिजली और गैस जैसी अन्य भूमिगत यूटिलिटी को नुकसान का खतरा रहता था। घनी आबादी वाले इलाकों में तो जांच करना और मुश्किल हो जाता था। रोबोटिक तकनीक आने से यह सारी दिक्कतें कम होने की उम्मीद है।

    खराबी मिलने पर तय समय में रिपोर्ट
    रोबोटिक जांच में मिलने वाली खराबियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी के लिए अलग डेडलाइन तय की गई है। क्रिटिकल श्रेणी में गंभीर लीकेज, अवैध टैपिंग और पाइपलाइन बैठने जैसी समस्याएं आती हैं। इसकी रिपोर्ट 48 घंटे के भीतर देना जरूरी होगा।

    मेजर श्रेणी में सामान्य लीकेज, जॉइंट खिसकना और पाइप का आकार बिगड़ना शामिल है। इसकी रिपोर्ट तीन दिन के भीतर देनी होगी। माइनर श्रेणी में पाइप में जमी गंदगी और मामूली तलछट जैसी समस्याएं आती हैं। इन्हें मासिक रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

    ₹400 के काम की बोली सिर्फ ₹40 प्रति मीटर, ऐसे तय हुई एजेंसी

    नगरीय प्रशासन विभाग ने इस काम के लिए 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत और 365 दिनों की अवधि का टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। उनकी दरों में बड़ा अंतर था।

        डिजिटल सर्विलॉन्स : ₹440 प्रति मीटर
        फॉर्म डील: ₹400 प्रति मीटर
        पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज( इंडिया) प्रा. लिमिटेड: ₹40 प्रति मीटर

    सबसे कम बोली (L1) के आधार पर चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। कंपनी 20 अप्रैल 2022 को रजिस्टर्ड हुई थी और इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे।

    15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल हो रही है यह तकनीक

    मध्य प्रदेश इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार करने जा रहा है। नीति आयोग के फ्रंटियर टेक नेटवर्क की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित 15 से अधिक राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण का इस्तेमाल हो रहा है।

    इन राज्यों में चेन्नई की Solinas के 'Endobots' हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सेंसर की मदद से पाइपलाइनों की GIS मैपिंग और लीकेज की जांच कर रहे हैं।

    भागीरथपुरा मामले में अब तक क्या हुआ
    इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी की शिकायतें अक्टूबर नवंबर 2025 से ही आने लगी थीं। इसके बावजूद, उस समय ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। 24 दिसंबर को उल्टी दस्त के मामले बढ़े और मरीज अस्पताल पहुंचने लगे। 27 और 28 दिसंबर को बीमारियां तेजी से बढ़ीं।

    स्वास्थ्य टीमों ने इलाके में सर्वे शुरू किया। 30 दिसंबर को 5 मौतों और 1000 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई। इसी दौरान पता चला कि चिह्नित लीकेज पाइपलाइन बदलने में पहले ही देरी हो चुकी थी।

    31 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। 3 जनवरी 2026 को निगम आयुक्त को हटा दिया गया। एडिशनल कमिश्नर और एक ईई (Executive Engineer) को सस्पेंड किया गया।

    17 जनवरी को कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी भागीरथपुरा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर हालचाल जाना। 25 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट में 36 मौतों की जांच पर सुनवाई हुई। इस दौरान 600 से ज्यादा पेज की जांच रिपोर्ट भी पेश की गई।

    प्रदेश में सामने आए हजारों डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट
    सरकार ने GIS आधारित मैपिंग के जरिए पेयजल और सीवर नेटवर्क के बीच संभावित जोखिम वाले स्थानों की पहचान की है। अब इन जगहों पर केवल कागजी या सतही जांच के बजाय पाइपलाइन के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रोबोटिक निरीक्षण कराया जाएगा।

    इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि पाइपलाइन के भीतर कहीं लीकेज, टूट-फूट, अवैध कनेक्शन या अन्य संरचनात्मक समस्या तो नहीं है।

    इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में इस तरह की जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पुराने और नए पाइपलाइन नेटवर्क कई स्थानों पर एक-दूसरे के आसपास या क्रॉसिंग पर मौजूद हैं।

    बिना सड़क खोदे होगी पाइपलाइन की जांच
    रोबोटिक निरीक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पाइपलाइन की जांच के लिए हर जगह सड़क खोदने की जरूरत नहीं होगी।

    रोबोट को मौजूदा मैनहोल, एयर रिलीज वाल्व या उपलब्ध एक्सेस पॉइंट के जरिए पाइपलाइन के अंदर भेजा जा सकता है। इसके बाद कैमरा और सेंसर पाइपलाइन की अंदरूनी स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करेंगे।

    इस तकनीक से किसी पाइपलाइन को खोलने या लंबे हिस्से में खुदाई करने से पहले यह पता लगाया जा सकेगा कि वास्तविक समस्या कहां मौजूद है।

    CCTV कैमरा और सेंसर से होगी निगरानी
    रोबोटिक सिस्टम में हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए जाते हैं। रोबोट पाइपलाइन के अंदर आगे बढ़ते हुए लगातार वीडियो रिकॉर्ड करता है।

    इस रिकॉर्डिंग से विशेषज्ञ पाइपलाइन की दीवारों में मौजूद दरार, छेद, टूट-फूट, लीकेज और अन्य दोषों की पहचान कर सकते हैं।

    NITI Aayog के Frontier Tech Network के मुताबिक, चेन्नई की Solinas जैसी कंपनियों के Endobot सिस्टम हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों, सेंसर और GIS तकनीक की मदद से भूमिगत पाइपलाइनों की जांच और डिजिटाइजेशन करते हैं। NITI Aayog के अनुसार ऐसे रोबोट पाइपलाइन के दोषों की पहचान करने के साथ उनकी स्थिति का आकलन भी कर सकते हैं।

    ₹400 और ₹440 की बोली के मुकाबले ₹40 प्रति मीटर
    रोबोटिक पाइपलाइन निरीक्षण के लिए नगरीय प्रशासन विभाग ने ₹1.50 करोड़ की अनुमानित लागत और 365 दिनों की अवधि वाला टेंडर जारी किया था।

    इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दरों में काफी अंतर था:

    डिजिटल सर्विलॉन्स: ₹440 प्रति मीटर
    फॉर्म डील: ₹400 प्रति मीटर

    पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड: ₹40 प्रति मीटर

    सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया। अब संबंधित नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार करेंगे और उसके आधार पर वर्क ऑर्डर जारी किए जाएंगे।

    70 से 900 MM तक की पाइपलाइनों की होगी जांच
    इस योजना के तहत 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों का निरीक्षण किया जाएगा।

    इससे छोटे व्यास की वितरण लाइनों से लेकर अपेक्षाकृत बड़ी पाइपलाइनों तक अंदरूनी स्थिति की जांच संभव होगी।

    खासकर उन जगहों पर प्राथमिकता दी जा सकती है जहां GIS मैपिंग में पेयजल और सीवर नेटवर्क के बीच संभावित जोखिम वाली क्रॉसिंग सामने आई हैं।

    रोबोटिक जांच से क्या होगा फायदा?
    पाइपलाइन की सामान्य जांच में कई जगह सड़क की खुदाई करनी पड़ती है। इससे ट्रैफिक, कारोबार और स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। रोबोटिक तकनीक में कम खुदाई के साथ पाइपलाइन के अंदर की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जाती है।

    NITI Aayog के अनुसार Solinas के Endobot सिस्टम का इस्तेमाल पाइपलाइन की खराबियों जैसे लीकेज और क्रैक की पहचान के लिए किया जाता है। संस्था के मुताबिक ऐसी तकनीक से अनावश्यक खुदाई कम करने और पाइपलाइन की स्थिति के आधार पर मरम्मत या बदलाव की प्राथमिकता तय करने में मदद मिल सकती है।

    इसका एक फायदा यह भी है कि पाइपलाइन के अंदर निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को जोखिम वाले हिस्सों में सीधे भेजने की जरूरत कम हो सकती है।

    15 से ज्यादा राज्यों में इस्तेमाल हो रही रोबोटिक तकनीक
    NITI Aayog के Frontier Tech Network के अनुसार पाइपलाइन निरीक्षण में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल देश के 15 से अधिक राज्यों में किया जा रहा है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR प्रमुख क्षेत्र हैं।

    NITI Aayog के मुताबिक Solinas के रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल 15 से अधिक राज्यों और 35 से ज्यादा शहरों में किया जा चुका है। इन सिस्टम का इस्तेमाल भूमिगत पानी, सीवर और ड्रेनेज नेटवर्क की जांच एवं डिजिटाइजेशन के लिए किया जाता है।

    MP में पहली बार बड़े स्तर पर इस्तेमाल
    मध्यप्रदेश में अब इस तकनीक को शहरी जल और सीवर नेटवर्क की व्यवस्थित जांच के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी है। भागीरथपुरा जैसी घटना के बाद सरकार का जोर केवल खराब पाइपलाइन बदलने पर नहीं, बल्कि जोखिम वाले स्थानों की पहले पहचान करने पर भी है।

    हालांकि रोबोटिक निरीक्षण अपने आप में समाधान नहीं है। जांच के बाद सामने आने वाली लीकेज, टूट-फूट या खतरनाक क्रॉसिंग को समय पर ठीक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यही प्रक्रिया तय करेगी कि तकनीक से मिले डेटा का इस्तेमाल शहरों की पेयजल सुरक्षा को कितना बेहतर बनाया जा सकता है।

     

  • मंत्री  विश्वास सारंग ने किया 8.5 करोड़ से अधिक की लागत से पीएम ई-बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन

    मंत्री विश्वास सारंग ने किया 8.5 करोड़ से अधिक की लागत से पीएम ई-बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन

    भोपाल 

    सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को नरेला विधानसभा क्षेत्र के कस्तूरबा नगर में प्रधानमंत्री ई-बस योजना के अंतर्गत प्रस्तावित नवीन इलेक्ट्रिक बस डिपो एवं चार्जिंग प्वाइंट का भूमिपूजन किया एवं इलेक्ट्रिक बस का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ई-बस योजना के माध्यम से शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुविधाजनक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। कस्तूरबा नगर में निर्मित होने वाले इस नवीन ई-बस डिपो की क्षमता 50 इलेक्ट्रिक बसों की होगी। डिपो के निर्माण में 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सिविल कार्य तथा 1.60 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इलेक्ट्रिकल कार्य किए जाएंगे। डिपो के तैयार होने के बाद क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, रख-रखाव एवं प्रबंधन को बेहतर आधारभूत संरचना प्राप्त होगी। भूमिजन के दौरान भोपाल महापौर मती मालती राय, जिला महामंत्री  प्रदीप शेखावत, एमआईसी सदस्य  अशोक वाणी, मंडल अध्यक्ष  भूपेंद्र सिंह चौहान, पार्षद  सूर्यकांत गुप्ता, स्थानीय पार्षद  राकेश यादव, पार्षद  विमलेश ठाकुर, नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी, भाजपा कार्यकर्ता सहित क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

    सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था होगी सुगम

    मंत्री  सारंग ने कहा कि नवीन इलेक्ट्रिक बस डिपो एवं इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने तथा स्वच्छ एवं हरित परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। आगे उन्होंने कहा कि कस्तूरबा नगर में प्रस्तावित ई-बस डिपो नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में विकसित किया जाएगा। मंत्री  सारंग ने कहा कि डिपो में 50 इलेक्ट्रिक बसों की क्षमता के साथ आवश्यक सिविल एवं इलेक्ट्रिकल सुविधाओं का विकास किया जाएगा, जिससे भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और प्रबंधन को बेहतर एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया जा सकेगा।

    आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी इलेक्ट्रिक बसें

    पीएम ई-बस योजना के अंतर्गत संचालित होने वाली इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम परिवहन को ध्यान में रखते हुए अनेक आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यात्रियों को डिजिटल टिकटिंग के लिए क्यूआर कोड की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल टिकट एवं बस पास बनवाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। इससे यात्रियों को टिकट एवं पास प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं लगाना पड़ेगा और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। वहीं यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बस में 5 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में यात्रियों की त्वरित सहायता के लिए बसों में इमरजेंसी पैनिक बटन एवं स्टॉप बटन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

    दिव्यांग एवं वरिष्ठ यात्रियों की सुविधा का भी रखा गया ध्यान

    इलेक्ट्रिक बसों में दिव्यांग यात्रियों के लिए ऑटोमेटिक हाइड्रोलिक व्हीलचेयर लिफ्टिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए बस में चढ़ना और उतरना अधिक सुगम एवं सुरक्षित होगा। इसके अतिरिक्त यात्रियों को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए बसों में पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम तथा पब्लिक इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से यात्रियों को बस से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण घोषणाएं आसानी से प्राप्त हो सकेंगी।

     

  • दो कार्यों में लापरवाही पर ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश

    दो कार्यों में लापरवाही पर ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश

    भोपाल 

    लोक निर्माण विभाग के कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार कार्य योजना के अंतर्गत 20 सितम्बर को सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने नर्मदापुरम, जबलपुर, दतिया, आलीराजपुर, मऊगंज, आगर-मालवा और टीकमगढ़ जिलों में रैंडम आधार पर चयनित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का स्थल निरीक्षण किया।

    निरीक्षण किए गए कार्यों में लोक निर्माण विभाग सड़क एवं पुल के 21, परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू-भवन) के चार, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के पांच, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तीन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग के दो कार्य शामिल हैं।

    निरीक्षण दलों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की। बैठक में प्रमुख अभियंता सड़क एवं पुल  आर.एल. वर्मा, प्रमुख अभियंता एमपीआरडीसी  के.पी.एस. राणा सहित समस्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी उपस्थित रहे।

    जबलपुर में ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश

    जबलपुर जिले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अंतर्गत परफॉर्मेंस गारंटी अवधि वाले जबलपुर–हिरण नदी मार्ग खंड की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। प्रबंध संचालक  यादव ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार मेसर्स बागड़ इन्फ्रॉ प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश मुख्य अभियंता एमपीआरडीसी को दिए।

    आलीराजपुर जिले में लोक निर्माण विभाग सड़क एवं पुल के अंतर्गत निर्माणाधीन रिंगोले-मालमसुरी से खंडीवाव-भंडारी फलिया मार्ग की प्रगति और गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। संबंधित कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी, उप यंत्री तथा ठेकेदार मेसर्स डेडा राम को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

    बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों की सराहना

    दतिया जिले में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अंतर्गत पोरसा–मेहगांव–मौ–सेवढ़ा मार्ग पर सिंध नदी में निर्मित उच्चस्तरीय पुल (एसएच-01) का कार्य गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक पाया गया। प्रबंध संचालक  यादव ने संभागीय प्रबंधक  राजेश दायमा, सहायक संभागीय प्रबंधक  पारस रत्नाकर, प्रबंधक सु दिव्यांशी जैन तथा निर्माण एजेंसी मेसर्स मंगलम बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के कार्य की सराहना की।

    टीकमगढ़ जिले में लोक निर्माण विभाग भवन के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लारखुर्द के भवन निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। इसके लिए कार्यपालन यंत्री  के.एस. परस्ते, अनुविभागीय अधिकारी  आर.के. पाठक, उपयंत्री  आर.के. अरजरिया तथा ठेकेदार मेसर्स यादव ट्रेडर्स की प्रशंसा की गई।

    निरीक्षण के दौरान 13 निर्माण कार्यों में आंशिक सुधार की आवश्यकता पाई गई। संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को चिन्हित कमियों को दूर कर आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

    30 अक्टूबर तक पूर्ण हों सड़क मरम्मत के सभी कार्य

    प्रबंध संचालक  यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि औचक निरीक्षण प्रतिवेदनों में की गई अनुशंसाओं का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्य अभियंता कॉन्फ्रेंस में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह द्वारा दिए गए निर्देशों को भी प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाए। मुख्य अभियंता निरीक्षण के लिए निर्धारित कार्यों के साथ मार्ग में आने वाली अन्य सड़कों की स्थिति की भी नियमित जानकारी लें।

    प्रबंध संचालक  यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सड़क मरम्मत के सभी कार्य 30 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण किए जाएं। संधारण कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मरम्मत कार्यों के साथ सड़क सुरक्षा, जंगल सफाई, रोड मार्किंग, संकेतक बोर्डों की मरम्मत एवं पेंटिंग तथा सड़क और पुल-पुलियों के आवश्यक संधारण कार्य भी निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने संधारण कार्यों में लोक निर्माण विभाग द्वारा पूर्व में जारी परिपत्रों का पालन करने तथा सड़कों से अवैध पार्किंग और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखने के निर्देश भी दिए।

    सीएम हेल्पलाइन और लोकपथ ऐप पर हुई शिकायतों का समय पर हो समाधान

    समीक्षा में सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का संतोषजनक निराकरण करते हुए शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए। मुख्य अभियंताओं एवं अधीक्षण यंत्रियों को इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा गया, जिससे आगामी माह की विभागीय ग्रेडिंग में सुधार हो।

    लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों का निर्धारित चार दिवस की समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के साथ ही नागरिकों के बीच ऐप के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए गए।

     

  • ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी सिम नेटवर्क पर मध्यप्रदेश पुलिस की प्रभावी कार्रवाई

    ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी सिम नेटवर्क पर मध्यप्रदेश पुलिस की प्रभावी कार्रवाई

    भोपाल

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त होने वाले फर्जी सिम कार्ड की सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई के लिए ऑपरेशन FAST 2.0 (Forged–Activated–SIM–Termination) चलाया जा रहा है। ऑपरेशन के तहत तकनीकी विश्लेषण एवं साइबर अपराधों से जुड़े डेटा के आधार पर संदिग्ध सिम और उनके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंच बनाई जा रही है। माह में अब तक ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी दस्तावेजों, आधार कार्ड, फोटो एवं बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर सिम कार्ड जारी/एक्टिवेट कराने वाले व्यक्तियों, POS एजेंटों एवं ऐसे सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है।

    ग्वालियर

    ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत ग्वालियर पुलिस ने फर्जी सिम जारी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए 09 प्रकरण दर्ज किए हैं। जांच में सामने आया कि आधार, फोटो एवं फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर फर्जी सिम जारी किए गए, जिनका उपयोग विभिन्न राज्यों में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में किया गया। संबंधित मामलों में करीब ₹12.20 करोड़ के साइबर फ्रॉड से संबंध सामने आया है।

    इंदौर

    इंदौर पुलिस ने फर्जी सिम के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए 151 संदिग्ध सिम की पहचान की, जिनका उपयोग 212 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में पाया गया। जांच में जींस-पैंट की थोक बिक्री/फ्रेंचाइजी का झांसा देकर ठगी तथा पैसों के लालच में सिम आगे उपलब्ध कराने की कड़ी सामने आई। मामले में 01 आरोपी गिरफ्तार किया गया।

    राज्य साइबर सेल इंदौर

    राज्य साइबर सेल, जोन इंदौर ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड पर स्वयं के फोटो का उपयोग कर 101 सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिवेट किए थे। जांच में सामने आया कि आरोपी POS एजेंट के रूप में सिम एक्टिवेशन का कार्य करता था और ग्राहकों के KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लाइव फोटो के स्थान पर स्वयं तथा अन्य व्यक्तियों के फोटो अपलोड कर सिम जारी करता था। आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी एवं आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।

    छतरपुर

    छतरपुर के थाना गढ़ीमलहरा पुलिस ने ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी सिम एक्टिवेट कर साइबर अपराधों में उपयोग हेतु उपलब्ध कराने वाले आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा फर्जी तरीके से सिम एक्टिवेट कर अन्य व्यक्तियों को उपलब्ध कराने का खुलासा हुआ।

    सतना

    सतना पुलिस ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत अवैध SIM पोर्टिंग एवं साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 02 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में 20 से अधिक अवैध सिम की सप्लाई का खुलासा हुआ। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेजा गया।

    टीकमगढ़

    टीकमगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड एवं साइबर अपराधों के लिए सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 05 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत की गई।

    कटनी

    कटनी पुलिस ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी तरीके से सिम जारी कर साइबर अपराधों में उपयोग कराने वाले POS एजेंट के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 01 आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी द्वारा दो व्यक्तियों के नाम पर फर्जी तरीके से सिम जारी कर उन्हें अन्य व्यक्तियों को बेचने का खुलासा हुआ। आरोपी के कब्जे से 98 मोबाइल सिम, बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन एवं 03 मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री जब्त की गई। मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। वहीं थाना कुठला पुलिस ने भी आधार कार्ड एवं फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर फर्जी सिम जारी कर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    झाबुआ

    झाबुआ पुलिस ने फर्जी दस्तावेज एवं बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर सिम एक्टिवेट करने वाले 03 POS संचालकों/एजेंटों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए हैं। कार्रवाई में 01 आरोपी गिरफ्तार किया गया तथा मोबाइल, Airtel LAPU SIM एवं फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए।

    KYC एवं बायोमेट्रिक के दुरुपयोग पर पुलिस की सख्त नजर

    ऑपरेशन FAST 2.0 के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है, जो आम नागरिकों के पहचान दस्तावेजों एवं बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी सिम तैयार कराते हैं और उन्हें साइबर अपराधों के लिए उपलब्ध कराते हैं। तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से फर्जी सिम के उपयोग एवं उनसे जुड़े साइबर अपराधों की कड़ियों की जांच की जा रही है।

    मध्यप्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि सिम जारी कराते समय e-KYC एवं बायोमेट्रिक प्रक्रिया में सावधानी बरतें, OTP/वेरिफिकेशन की पुष्टि स्वयं करें, अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की समय-समय पर जांच करें तथा अपनी पहचान संबंधी जानकारी अथवा दस्तावेज अनधिकृत व्यक्ति को न दें। अपनी पहचान पर किसी अन्य व्यक्ति को सिम जारी न कराएं।

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा ऑपरेशन FAST 2.0 के अंतर्गत फर्जी सिम की पहचान, उनके स्रोत तक पहुंच और साइबर अपराधों में इनके उपयोग से जुड़े नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है।

     

  • महिला नव आरक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु दो दिवसीय शिविर आयोजित

    महिला नव आरक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु दो दिवसीय शिविर आयोजित

    भोपाल 

    विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) के निर्देशों के अनुपालन में तथा उपनिदेशक, मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भोपाल  रामजी वास्तव के मार्गदर्शन में पुलिस प्रशिक्षण शाला भोपाल में प्रशिक्षणरत महिला नव आरक्षकों के स्वास्थ्य परीक्षण हेतु 19 एवं 20 सितंबर 2026 को दो दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन LBS Hospital, भोपाल के सहयोग से प्रशिक्षण शाला परिसर में किया गया।

    पुलिस अधीक्षक मती यास्मीन जहरा की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में LBS Hospital भोपाल के नोडल अधिकारी  हरविंदर सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वैशाली पाठक तथा जनरल फिजिशियन डॉ. हारून सिद्दीकी द्वारा प्रशिक्षुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर एवं ब्लड प्रोफाइल सहित आवश्यक स्वास्थ्य जांच की गई।

    शिविर के प्रथम दिवस ऐसे प्रशिक्षणार्थियों को प्राथमिकता से स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिन्हित किया गया, जो लगातार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण प्रशिक्षण सुचारू रूप से प्राप्त नहीं कर पा रहे थे। प्रथम दिवस उपलब्ध 104 प्रशिक्षणार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा डॉ. वैशाली पाठक द्वारा आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्रदान किया गया।

    शिविर के द्वितीय दिवस 170 प्रशिक्षुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस प्रकार दो दिवस में कुल 274 महिला नव आरक्षकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के साथ-साथ आवश्यक उपचार, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों तथा स्वयं के उत्तम स्वास्थ्य को बनाए रखने के संबंध में आवश्यक परामर्श भी दिया गया।

    मध्यप्रदेश पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षणरत पुलिसकर्मियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को प्रशिक्षण की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि प्रशिक्षु स्वस्थ एवं बेहतर शारीरिक क्षमता के साथ अपने प्रशिक्षण को प्रभावी ढंग से पूर्ण कर सकें।

     

  • बांधवगढ़ में बढ़ रहा गौर का कुनबा, कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना से मजबूत होगा पारिस्थितिकी तंत्र

    बांधवगढ़ में बढ़ रहा गौर का कुनबा, कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना से मजबूत होगा पारिस्थितिकी तंत्र

    भोपाल 

    कहानी बदलाव की

    मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ एवं कान्हा टाइगर रिजर्व में बड़े शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। बांधवगढ़ में गौर (इंडियन बायसन) की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं कान्हा टाइगर रिजर्व में वन भैंसा (वाइल्ड बफेलो) को पुनः बसाने की प्रक्रिया जारी है। गौर और वन भैंसा देखने में कुछ समान प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग प्रजातियों से संबंधित हैं और इनके आवास तथा खान-पान में भी अंतर है।

    बांधवगढ़ में पुनः स्थापित किया गया गौर

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय के अनुसार गौर, जिसे भारतीय बायसन भी कहा जाता है, एशिया का सबसे बड़ा जंगली गौवंश है। बांधवगढ़ में गौर वर्ष 1998 में विलुप्त हो गया था। इसके बाद वर्ष 2011-12 में कान्हा से 50 गौर लाकर बांधवगढ़ में पुनः स्थापित किए गए। इनकी संख्या बढ़कर लगभग 170 तक पहुंची। आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से सतपुड़ा से भी गौर लाने की योजना बनाई गई।

    फरवरी 2025 में 23 गौर, जिनमें 18 मादा और 5 नर शामिल थे, बांधवगढ़ लाए गए। इसके बाद जनवरी 2026 में दूसरे चरण में 27 गौर, जिनमें 22 मादा और 5 नर शामिल थे, लाए गए। इस प्रकार 50 नए गौर लाने का लक्ष्य पूरा किया गया। इन वन्यजीवों की निगरानी के लिए वीएचएफ कॉलर, हॉर्न स्लीव और ईयर टैग लगाए गए हैं। वर्तमान में बांधवगढ़ लैंडस्केप में गौर की संख्या लगभग 220 से 240 के बीच बताई गई है।

    कान्हा में वन भैंसा पुनर्स्थापना की दिशा में प्रयास

    कान्हा टाइगर रिजर्व में वन भैंसा यानी वाइल्ड बफेलो को पुनः बसाने का कार्य किया जा रहा है। कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालक  पी.के. वर्मा के अनुसार तीन वर्ष में 50 वन भैंसे लाने की योजना है। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को वन भैंसों की पहली खेप लाई गई। अब तक दो खेप में चार-चार की संख्या में कुल 8 वन भैंसे कान्हा पहुंच चुके हैं।

    वन भैंसों को प्रारंभिक अवधि में बाड़े में रखा जाएगा। इनकी संख्या बढ़ने के बाद आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे इन्हें प्राकृतिक रहवास क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। कुछ वन भैंसों को बाहर और कुछ को निर्धारित क्षेत्र में रखा जाएगा, ताकि इनकी संख्या और आबादी को व्यवस्थित रूप से बढ़ाया जा सके।

    गौर और वन भैंसा में अंतर

    गौर गौवंश से संबंधित है, जबकि वन भैंसा भैंस वंश से संबंधित है। गौर की पहचान उसके विशाल शरीर, कंधे पर उभरे कूबड़, पीले-सफेद निचले पैरों और घुमावदार सींगों से की जा सकती है। वहीं वन भैंसा अपेक्षाकृत छोटा होता है और उसके कंधे पर गौर की तरह स्पष्ट कूबड़ नहीं होता। वन भैंसा सामान्यतः गीले घास के मैदानों, दलदली क्षेत्रों और जल स्रोतों के आसपास पाया जाता है।

    गौर घास के साथ-साथ जंगल में उपलब्ध अन्य वनस्पतियों को भी खाता है, जबकि वन भैंसा कठोर और ऊंची घास को भी खा सकता है। जल एवं नमी वाले क्षेत्रों में उगने वाली ऊंची घास को नियंत्रित करने में वन भैंसे की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

    जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक इंजीनियर

    गौर और वन भैंसा जैसे बड़े शाकाहारी वन्यजीव जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके द्वारा घास और वनस्पतियों के सेवन से अत्यधिक ऊंची घास नियंत्रित होती है तथा नए कोमल पत्ते और घास विकसित होने का अवसर मिलता है। इससे चीतल, सांभर सहित अन्य शाकाहारी वन्यजीवों को भोजन उपलब्ध होता है।

    इस प्रकार बड़े शाकाहारी वन्यजीव वन क्षेत्र में वनस्पति संरचना को संतुलित रखने और अन्य वन्यजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में योगदान देते हैं। यही कारण है कि गौर और वन भैंसे जैसे वन्यजीवों को जंगल के प्राकृतिक इंजीनियर भी कहा जाता है। इनके संरक्षण और पुनर्स्थापना से मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

     

  • तकनीक, नवाचार और सतत प्रशिक्षण से सशक्त होंगे प्रदेश के इंजीनियर : मंत्री  सिंह

    तकनीक, नवाचार और सतत प्रशिक्षण से सशक्त होंगे प्रदेश के इंजीनियर : मंत्री सिंह

    भोपाल 

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने रविवार को भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आईआईटी मुम्बई में लोक निर्माण विभाग के 50 इंजीनियरों के लिए आयोजित ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ वेबिनार का शुभारंभ किया। मंत्री  सिंह ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ कदमताल करने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक और सतत प्रशिक्षण को विभागीय कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।

    मंत्री  सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहयोग के लिए आईआईटी बॉम्बे के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रो. टॉम मैथ्यूज,  वेदागिरि और प्रो. धर्मवीर सिंह सहित संस्थान के विशेषज्ञों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस साझेदारी से मध्यप्रदेश के इंजीनियरों को नवीन तकनीकों, आधुनिक निर्माण पद्धतियों और उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों को समझने एवं अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।

    विकसित भारत के निर्माण में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका

    मंत्री  सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके बिना देश के विकास और नवनिर्माण की कल्पना नहीं की जा सकती। केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। प्रशिक्षण ही ज्ञान को व्यावहारिक दक्षता, कार्य की गुणवत्ता और बेहतर परिणामों में परिवर्तित करता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इंजीनियर प्रतिभा और क्षमता से समृद्ध हैं। उन्हें विश्व में तेजी से बदलती तकनीकों के अनुरूप समय-समय पर प्रशिक्षण देकर प्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। निरंतर सीखने, जिज्ञासा बनाए रखने और शोधपरक सोच अपनाने से प्रत्येक कार्य को अधिक दक्षता एवं उत्कृष्टता के साथ पूरा किया जा सकता है।

     वर्ष 2026 के लिए विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार

    मंत्री  सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा वर्ष 2026 का विशेष प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार किया गया है। इसके साथ ही कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क और ट्रेनिंग नीड असेसमेंट भी बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार मध्यप्रदेश का यह कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क देश में अपनी तरह का पहला प्रयास है।

    मंत्री  सिंह ने बताया कि विभाग ने आईआईटी बॉम्बे के साथ ही सीआरआरआई नई दिल्ली, आईएएचई और ईएससीआई हैदराबाद सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। अलग-अलग प्रशिक्षण बैचों के माध्यम से लगभग 1,508 इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे में 100 इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने का निर्धारित लक्ष्य भी वर्तमान बैच के प्रशिक्षण के साथ पूरा होने जा रहा है।

    आधुनिक निर्माण तकनीकों में भी लिया जाएगा आईआईटी बॉम्बे का सहयोग

    मंत्री  सिंह ने कहा कि आईआईटी बॉम्बे के साथ विभाग की साझेदारी केवल वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क एवं पुलों के रखरखाव, कंक्रीट रोड एवं व्हाइट टॉपिंग, ब्रिज डिजाइन तथा भवन निर्माण में प्रीफैब्रिकेटेड और प्रीकास्ट तकनीक जैसे विषयों पर भी संस्थान का तकनीकी सहयोग लिया जाएगा।

    मंत्री  सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईटी बॉम्बे से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले इंजीनियर अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग प्रदेश की परियोजनाओं में करेंगे। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, टिकाऊपन और समयबद्धता में सुधार होगा तथा मध्यप्रदेश के अधोसंरचना विकास को नई गति मिलेगी।

    अच्छा अभियंता संरचना, श्रेष्ठ अभियंता भविष्य का निर्माण करता है :  पोल

    सलाहकार  प्रशांत पोल ने कहा कि प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका प्रभाव निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और स्थायित्व में दिखाई दे। उन्होंने अभियंताओं को ‘लर्न, अप्लाई, शेयर एंड स्टैंडर्डाइज’ का सूत्र देते हुए प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को कार्यक्षेत्र में लागू करने और सहकर्मियों के साथ साझा करने का आह्वान किया।

     पोल ने कहा कि सड़क केवल दो स्थानों को नहीं जोड़ती, बल्कि किसान को बाजार, विद्यार्थी को विद्यालय, रोगी को अस्पताल और उद्योग को उपभोक्ता से जोड़ती है। आज अभियंता टेक्नोलॉजी एवं प्रोजेक्ट मैनेजर, पर्यावरण नियोजक तथा सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षक की भूमिका भी निभा रहे हैं।

    उन्होंने बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग, डिजिटल ट्विन और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के उपयोग पर बल देते हुए कहा कि अभियंता गुणवत्ता, समय, लागत, सुरक्षा और स्थायित्व को ध्यान में रखकर कार्य करें। अच्छा अभियंता संरचना बनाता है, जबकि श्रेष्ठ अभियंता भविष्य का निर्माण करता है।

    प्रशिक्षण का अंतिम लक्ष्य जनकल्याण पर प्रभाव होना चाहिए : डॉ. तोमर

    सलाहकार डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री  सिंह के मार्गदर्शन में तैयार कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क ने कम समय में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। तेजी से बदलती तकनीक के दौर में प्रासंगिक बने रहने के लिए निरंतर प्रशिक्षण आवश्यक है। प्रशिक्षण केवल सीखने तक सीमित न रहे, बल्कि ‘फील, लर्न, एक्ट और इम्पैक्ट’ के क्रम में धरातल पर जनकल्याणकारी परिणाम प्रस्तुत करे।

    डॉ. तोमर ने कहा कि कार्य की गुणवत्ता, दक्षता, सतत अध्ययन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नवाचार से ही लोक निर्माण विभाग को वास्तविक अर्थों में ‘लोक कल्याण विभाग’ बनाया जा सकता है। अभियंताओं के निर्माण कार्य ही भविष्य में उनकी पहचान और योगदान की कहानी कहेंगे। उन्होंने सभी इंजीनियरों से प्रशिक्षण के ज्ञान को व्यवहार में उतारते हुए मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग को देश का सर्वश्रेष्ठ विभाग बनाने का आह्वान किया।

    दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी होगी मजबूत

    प्रो. टॉम मैथ्यूज ने कहा कि मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग की प्रशिक्षण के प्रति गंभीरता सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यक्रम आईआईटी मुम्बई और विभाग के बीच दीर्घकालीन तकनीकी एवं शोध साझेदारी को और मजबूत करेगा।

     वेदागिरि ने बताया कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण में निर्माण गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव की आधुनिक पद्धतियों पर व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और टिकाऊ अधोसंरचना के लिए डिजाइन से लेकर निर्माण एवं रखरखाव तक आधुनिक तकनीक और सतत निगरानी आवश्यक है।

     धर्मवीर सिंह ने कहा कि अधोसंरचना में निवेश के साथ अभियंताओं का कौशल विकास भी आवश्यक है। आईआईटी बॉम्बे और मध्यप्रदेश शासन की साझेदारी में आयोजित तीसरे प्रशिक्षण बैच का उद्देश्य कक्षा में प्राप्त ज्ञान को कार्यस्थल पर लागू कर ‘ट्रेनिंग से ट्रांसफॉर्मेशन’ की अवधारणा को साकार करना है।

     

  • काउंसलिंग से लेकर कानूनी सहायता तक की ली जानकारी

    काउंसलिंग से लेकर कानूनी सहायता तक की ली जानकारी

    भोपाल 

    महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा को लेकर मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने वन स्टॉप सेंटर की व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। आयोग की अध्यक्ष  रेखा यादव एवं सदस्य  साधना स्थापक ने भोपाल स्थित वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण कर संकटग्रस्त महिलाओं को उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग, चिकित्सा, कानूनी सहायता, अस्थायी आश्रय एवं पुलिस सहायता सहित विभिन्न सेवाओं का जायजा लिया।

    संकटग्रस्त महिलाओं के साथ संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता : रेखा यादव

    राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष  रेखा यादव ने कहा कि संकट की स्थिति में वन स्टॉप सेंटर पहुंचने वाली प्रत्येक महिला को सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और भरोसे का वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनते हुए उनके प्रकरणों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावी काउंसलिंग, आवश्यक कानूनी एवं चिकित्सा सहायता तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से महिलाओं को समय पर राहत और न्याय उपलब्ध कराया जा सकता है।आयोग की सदस्य  साधना स्थापक ने कहा कि वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। इसके लिए काउंसलिंग, चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखना आवश्यक है।

    आयोग के पदाधिकारियों ने केंद्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए शिकायतों के त्वरित निराकरण, प्रभावी काउंसलिंग तथा जरूरत के अनुसार चिकित्सा, कानूनी और पुलिस सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए विभागीय एवं संस्थागत समन्वय मजबूत होना जरूरी है।

    मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, न्याय एवं अधिकारों से जुड़े मामलों में जनसुनवाई, निरीक्षण, जागरूकता कार्यक्रमों तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय के माध्यम से निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आयोग का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके अधिकारों और न्याय तक पहुंच को और मजबूत करना है।