Category: मध्य प्रदेश

  • MP भाजपा संगठन में बदलाव, शिवराज डाबी और अजय शर्मा को नई जिम्मेदारियां

    MP भाजपा संगठन में बदलाव, शिवराज डाबी और अजय शर्मा को नई जिम्मेदारियां

    भोपाल 
     मध्यप्रदेश भाजपा ने सोमवार को संगठन में दो महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं. प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर भोपाल के शिवराज डाबी को प्रदेश सोशल मीडिया विभाग का प्रभारी और अजय शर्मा को प्रकोष्ठ संकुल का प्रदेश सह संयोजक नियुक्त किया गया है. दोनों नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। 

    सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी डाबी को
    भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार शिवराज डाबी को प्रदेश सोशल मीडिया विभाग का प्रभारी बनाया गया है. नई जिम्मेदारी के तहत वे पार्टी के डिजिटल संचार, सोशल मीडिया गतिविधियों और संगठन से जुड़े आनलाइन अभियानों के संचालन में भूमिका निभाएंगे. ऐसे में पार्टी के बढ़ते डिजिटल विस्तार को देखते हुए यह जिम्मेदारी संगठन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

    अजय शर्मा को प्रकोष्ठों के समन्वय की जिम्मेदारी
    वहीं, एक नए आदेश के तहत अजय शर्मा को प्रकोष्ठ संकुल का प्रदेश सह संयोजक नियुक्त किया गया है. इस जिम्मेदारी में पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के बीच समन्वय और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने से जुड़े काम शामिल होंगे। 

    मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने दी बधाई
    दोनों नवनियुक्त पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि दोनों नेता अपनी नई जिम्मेदारियों के जरिए संगठन को मजबूत करने के साथ सरकार की योजनाओं और नीतियों को जनता तक पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएंगे। 

    बता दें कि मध्यप्रदेश भाजपा में ये नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं, जब पार्टी प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और विभिन्न विभागों व प्रकोष्ठों के कामकाज में समन्वय मजबूत करने पर जोर दे रही है। 

  • MP Weather: भोपाल-नर्मदापुरम समेत कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट

    MP Weather: भोपाल-नर्मदापुरम समेत कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश में 23 सितंबर से भारी बारिश का दौर शुरू होगा। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिलेगी। 2 दिन में 17 जिलों में अति भारी या भारी बारिश हो सकती है। 

    प्रदेश में अब तक औसत 33.7 इंच पानी गिर चुका है। आगामी दिनों में तेज बारिश होने से इस आंकड़े सुधार की उम्मीद है। बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सितंबर के आखिरी सप्ताह से विदा होना शुरू हो जाएगा, लेकिन इससे पहले तेज बरसात का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार, लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की वजह से प्रदेश में भारी बारिश के आसार दिखाई दे रहे हैं। 23 सितंबर से कुछ जिलों में पानी गिरेगा।

    पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में असर ज्यादा रहेगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी अलर्ट है।

    इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया।

    बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा।

    सोमवार को भी भोपाल समेत कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। शाम को बादल छाए रहे। रात में कोलार इलाके में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्रदेश में अब तक 6 प्रतिशत बारिश कम IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 856.8 मिमी यानी, 33.7 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.3 इंच (922.6 मिमी) की तुलना में 2.6 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 10% बारिश कम हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 2% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। सोमवार को आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा।

    वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 49% कम पानी गिरा है।

    इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

  • मीनाक्षी हत्याकांड में नया खुलासा, आरोपी पवन 7 साल से भोपाल में रह रहा था

    मीनाक्षी हत्याकांड में नया खुलासा, आरोपी पवन 7 साल से भोपाल में रह रहा था

    भोपाल 
    भोपाल शहर में आरटीओ इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले मर्डर मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी का ब्वॉयफ्रेंड पवन मूलतः सीधी जिले के भनवारी गांव का रहने वाला था। पवन 4 बहनों 6 भाइयों में सबसे छोटा था। पिता दीनबंधुराम द्विवेदी का निधन पिछले साल फरवरी में हो गया था जबकि मां का देहांत नवंबर में हो गया था। घरवालों ने बताया कि उसकी शादी नहीं हुई थी। लंबे समय से भोपाल में ही शादी की बात चल रही थी। बड़े भाई विनय ने बताया कि उसने 15 साल दक्षिण अफ्रीका में नौकरी की थी। बाद में वापस लौट आया। पवन बीते 7 साल से भोपाल में रह रहा था।

    पुलिस के मुताबिक- इसी समय मीनाक्षी की दोस्त कृतिका ने मीनाक्षी और पवन को मकान के आंगन में तेज आवाज में बात करते देखा था। कुछ घंटे बाद मीनाक्षी का शव घर के हॉल में खून से लथपथ मिला। वहीं, मकान से करीब 20 मीटर दूर पवन का शव पेड़ पर फंदे से लटका मिला।

    कृतिका ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसने मीनाक्षी की हत्या होते हुए नहीं देखा। उसका कहना है कि घर में दो कूलर चल रहे थे, इसलिए बाद में अंदर से हो रही बहस की आवाज उसे सुनाई नहीं दी। ऐसे में रात 1:30 बजे के बाद दोनों के बीच क्या हुआ, यह अभी पुलिस जांच का विषय है।

    कृतिका ने पुलिस को बताया कि सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे इंदौर के लिए निकलना पहले से तय था। सुबह अलार्म की आवाज से उसकी नींद खुली। उसे लगा कि मीनाक्षी सो रही होगी। उसने बिस्तर से ही मीनाक्षी के मोबाइल नंबर पर कॉल किया, लेकिन कॉल नहीं उठा। इसके बाद वह कमरे से बाहर आई तो हॉल में मीनाक्षी का खून से लथपथ शव देखा।

    कृतिका ने तुरंत 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के घर पहुंचने से पहले ही कॉलोनी के वॉचमैन ने पवन का शव फंदे पर लटका देखा और पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

    पवन से मिलने के बाद खुश थीं मीनाक्षी, खुद खाना बनाया; रात में साथ टहले
    कृतिका ने पुलिस को बताया कि मीनाक्षी पवन से मिलने के बाद खुश थीं। मीनाक्षी ने अपने हाथों से खाना बनाया और सभी को खिलाया। खाना खाने के बाद मीनाक्षी, पवन, कृतिका और तीन साल की बच्ची कॉलोनी में वॉक करने निकले।

    रात करीब 10:30 बजे तक टहलने के बाद कृतिका सोने चली गई। वह मीनाक्षी की बेटी को भी अपने साथ सुलाने ले गई थी। कृतिका के मुताबिक, मीनाक्षी ने ही उसे बच्ची को अपने साथ सुलाने की बात कही थी।

    कृतिका ने पुलिस को बताया कि वह सफर के कारण काफी थकी हुई थी और कुछ ही देर में उसे नींद आ गई। हालांकि, देर रात उसकी नींद खुली तो उसने मीनाक्षी और पवन को आंगन में तेज आवाज में बातचीत करते आखिरी बार देखा।

    कृतिका का कहना है कि उसने दोनों के बीच पहले भी विवाद होते देखे थे। इसलिए उसने उस समय उनकी बातचीत में हस्तक्षेप नहीं किया और बच्ची के साथ वापस सो गई।

    रिश्ता खत्म हुआ तो बढ़ा झगड़ा
    पुलिस के अनुसार, मीनाक्षी और पवन की पहचान इंदौर में पढ़ाई के दौरान हुई थी। तब पवन कोचिंग क्लास चलाता था और मीनाक्षी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन अलग जाति के कारण मीनाक्षी के परिवार की सहमति नहीं थी। बाद में मीनाक्षी ने दूसरे युवक से शादी की, लेकिन डेढ़ साल पहले उनका तलाक हो गया। इसके बाद भी पवन उससे शादी करना चाहता था। बताते हैं किराए का मकान छोड़कर इंदौर शिफ्ट होने की बात से वह नाराज था।

    सहेली और बेटी अंदर कमरे में सोई थी
    डीसीपी आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि मीनाक्षी रविवार शाम 7 बजे दतिया से सहेली कृतिका और तीन साल की बेटी के साथ भोपाल पहुंची थीं। रात में कृतिका और बच्ची घर के अंदर वाले कमरे में सो गए। मीनाक्षी बाहर वाले कमरे में थीं। सुबह 7 बजे कृतिका की नींद खुली तो मीनाक्षी को मृत हालत में देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी।

    सोशल मीडिया पर एक्टिव थी मीनाक्षी
     सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव थी। वो अपनी 3 साल की बेटी के साथ लगातार रील और फोटो डालती रहती थी। सोशल मीडिया पर उसने वर्दी के साथ कई रील डाल रखी है। कुछ रीलों से समझ आता है कि मीनाक्षी कई चीजों के लेकर परेशान रहती थी। पति से तलाक के बाद बेटी को पूरी तरह से वहीं देखती थी।

    इंदौर में हुई थी दोस्ती
    मीनाक्षी से आरोपी पवन की दोस्ती इंदौर में हुई थी। वह पर कोचिंग क्लास चलाता था। साथ ही उससे शादी करना चाहता था। लेकिन मीनाक्षी इसके लिए तैयार नहीं थी। आशंका व्यक्त की जा रही है। इसी विवाद में उसकी हत्या हुई होगी।

    पति से हो चुका है तलाक
    वहीं, मृतक मीनाक्षी का दो साल पहले पति से तलाक हो चुका है। उसकी तीन साल की बेटी है। घटना के बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगा।

  • सड़क निर्माण में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, जांच में फेल हुए NHAI-PWD के नमूने

    सड़क निर्माण में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, जांच में फेल हुए NHAI-PWD के नमूने

     ग्वालियर
    खराब सड़कों के लिए कुख्यात नगर निगम की सड़कों की गुणवत्ता फेल सामने आई लेकिन अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जैसी एजेंसियों की सड़कें भी मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं।

    नगर निगम के बाद अब एनएचएआई की मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा तक और पीडब्ल्यूडी की एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री की सड़क के अधिकांश नमूने फेल सामने आए।

    शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका में सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

    सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट में एनएचएआई के अधीन मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा मार्ग के अधिकांश नमूने फेल पाए गए हैं।

    आयोग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार भी सड़क निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं मिली।

    इसी तरह पीडब्ल्यूडी के अधीन एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री मार्ग से लिए गए अधिकांश नमूनों का भी यही हाल मिला।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने दोनों रिपोर्ट संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और जवाब के लिए समय दिया है।

    कोर्ट ने आयोग के पूरे कार्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब संबंधित अधिकारियों और विभागों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्वालियर शहर के हित में काम करना चाहिए।

    कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अलग-अलग विभागों में पदस्थ अधिकारी भी शहर के हित में काम करने के लिए आगे आएंगे।

    छह माह में होना था सर्वे, दस्तावेज ही नहीं मिला
    एनएचएआई के अधीन सड़क की रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि एनएचएआई को प्रत्येक छह माह में सड़क का असंयोजित सर्वे कराना आवश्यक है। हालांकि, जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित सड़क का एनएसवी सर्वे कभी कराया गया था।

    रिपोर्ट में वार्षिकी भुगतान से संबंधित विभिन्न खामियां भी सामने आने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट की प्रति एनएचएआई के अधिवक्ता आशीष सरस्वत को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरस्वत ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।

    सीलबंद लिफाफे में आई मूल जांच रिपोर्ट
    18 सितंबर के आदेश के पालन में सोमवार को राजनंदिनी एंटरप्राइज एंड कंसल्टेंसी की मूल जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई।

    अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने सीलबंद लिफाफे में बिटुमिन टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/07/13, दिनांक 11 जुलाई 2024 तथा डिजाइन मिक्स (डीबीएम) टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/16/45, दिनांक 16 सितंबर 2024 पेश की।

    कोर्ट में सीलबंद लिफाफा खोला गया। इसके बाद कार्यालय को निर्देश दिया गया कि दोनों दस्तावेजों की छायाप्रति सड़क जांच आयोग को उपलब्ध कराई जाए और मूल दस्तावेजों को दोबारा सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाए। आयोग को इन रिपोर्टों पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

    निगम को पैचवर्क पूरा करने के लिए 24 घंटे
    नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि सड़कों पर किए गए पैचवर्क को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे का समय मांगा कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए सड़क खोदे जाने के कारण जहां पैचवर्क किया गया है, वह निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो।

    कोर्ट ने निगम को 24 घंटे का समय देते हुए निर्देश दिया कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए खोदी गई सड़क के सभी हिस्सों का पैचवर्क निर्धारित विनिर्देशों के अनुसार किया जाए।

    इसमें 150 मिलीमीटर तक की गहराई में पैचवर्क करने संबंधी तकनीकी विनिर्देश का पालन करने को कहा गया। इस निर्देश के साथ संबंधित आवेदन का निराकरण कर दिया गया।

    स्मार्ट सिटी की सड़कों पर भी उठे सवाल
    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने स्मार्ट सिटी की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए स्मार्ट सिटी ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की। इस संबंध में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि स्मार्ट सिटी के अधीन सड़कों की स्थिति भी खराब होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन अभी तक स्मार्ट सिटी के स्वामित्व और नियंत्रण वाली सड़कों से नमूने नहीं लिए गए हैं।

    इस बिंदु का उल्लेख आवेदन में नहीं होने पर कोर्ट ने तोमर को आवेदन में संशोधन के लिए एक सप्ताह का समय दिया।

    हर सड़क की जांच के लिए जनहित याचिका का दायरा नहीं बढ़ाएंगे
    सचिन तेंदुलकर मार्ग से भगवान सिंह माथुर सिटी एन्क्लेव को जोड़ने वाली संपर्क सड़क की खराब स्थिति को लेकर हस्तक्षेप आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था।

    इसमें सड़क की स्थिति पूरी तरह खराब होने का आरोप लगाया गया, कोर्ट ने कहा कि नगर निगम को ग्वालियर शहर की सभी सड़कों के निर्माण और मरम्मत की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है।

    कोर्ट प्रत्येक सड़क को लेकर अलग-अलग जांच कराकर उसका निर्माण कराने की स्थिति में नहीं है। कोर्ट ने हस्तक्षेप आवेदन को खारिज कर दिया।

    आयोग के काम की कोर्ट ने की सराहना
    सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सड़क जांच आयोग के काम की विशेष रूप से सराहना की। बता दें कि इस आयोग में अध्यक्ष गौरव समाधिया, सदस्य पवन रघुवंशी और हिमांशु शर्मा हैं।

    कोर्ट ने कहा कि पहले एक सड़क से नमूने लेने में आयोग को 12 से 13 घंटे तक सड़क पर काम करना पड़ा था।
    बाद में आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ कि सदस्यों ने केवल मौके पर जाकर निर्धारित मानकों के अनुसार नमूने ही नहीं लिए, बल्कि तकनीकी पहलुओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए भी काफी मेहनत की। कोर्ट ने कहा कि शहर के हित में आयोग ने जिस स्तर पर मेहनत की है, वह सराहनीय है।

    सिकरौदा में हाईवे से सटी शराब दुकान पर भी सवाल
    सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सिकरौदा चौराहा स्थित शराब दुकान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार शराब दुकान हाईवे से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए, लेकिन सिकरौदा चौराहे पर शराब दुकान हाईवे के बिल्कुल पास संचालित हो रही है।

    दुकान पर ‘हर सेलिब्रेशन हमारा है’ टैगलाइन भी प्रदर्शित होने की बात कोर्ट को बताई गई। इस पर शासकीय अधिवक्ता जीके अग्रवाल ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।

    कोर्ट ने उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए समय दिया कि हाईवे से 500 मीटर से कम दूरी पर शराब दुकान का लाइसेंस किन परिस्थितियों में जारी किया गया। वहीं स्थानांतरित करने का समय भी पूछा गया।

    एनएसवी की अंतिम रिपोर्ट पर आज सुनवाई
    आयोग के अध्यक्ष ने कोर्ट को बताया कि एनएसवी की अंतिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत किया जाना बाकी है। इस पर कोर्ट ने एनएसवी की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए मामले को 22 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। विभिन्न रिपोर्टों पर विचार के लिए मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है।

     

     

  • अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट की सख्ती, छिंदवाड़ा SP के खिलाफ वारंट

    अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट की सख्ती, छिंदवाड़ा SP के खिलाफ वारंट

    जबलपुर

    जबलपुर हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने जबलपुर रेंज के आईजी को वारंट तामील कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही एसपी को 1 अक्टूबर 2026 को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया। 
    मामला एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी के निधन के बाद विभाग द्वारा की गई रिकवरी से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के रिकवरी पर रोक लगाने और राशि लौटाने के आदेश के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया।

    पति की मौत के बाद 2.24 लाख रुपए की रिकवरी
    जबलपुर निवासी सीता तिवारी ने अधिवक्ता सचिन पांडे के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की है। याचिका के अनुसार उनके पति संतोष तिवारी छिंदवाड़ा में पुलिस विभाग में पदस्थ थे। सेवाकाल के दौरान 14 अगस्त 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद विभाग ने उनके खिलाफ 2.24 लाख रुपए की रिकवरी निकाल दी।

    मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक जैन की कोर्ट में हुई थी। कोर्ट ने रिकवरी का आदेश निरस्त करते हुए राशि 8 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया था।

    2025 में जारी हुआ था अवमानना नोटिस
    सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2025 में अवमानना नोटिस जारी होने के बाद भी आदेश के पालन की रिपोर्ट पेश नहीं की गई। कोर्ट को बताया गया कि छिंदवाड़ा एसपी ने 11 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अपर सचिव को पत्र लिखकर नोटिस मिलने और आवश्यक मंजूरी के संबंध में जानकारी दी थी, लेकिन इसके बाद भी आदेश के पालन की कार्रवाई नहीं हुई।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें 1 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

     

  • अचलेश्वर महादेव न्यास चुनाव पर कोर्ट की मुहर, 11 अक्टूबर को वोटिंग

    अचलेश्वर महादेव न्यास चुनाव पर कोर्ट की मुहर, 11 अक्टूबर को वोटिंग

    ग्वालियर
     श्री अचलेश्वर महादेव सार्वजनिक न्यास, ग्वालियर की कार्यकारिणी के चुनाव की तारीख तय हो गई है। न्यायालय के आदेश के पालन में मतदान 11 अक्टूबर 2026 को ही होगा। जिला न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

    शासकीय अधिवक्ता गजेन्द्र साहू द्वारा प्रस्तुत चुनाव समिति, निर्वाचन कार्यक्रम और नियमावली को कोर्ट ने अनुमोदित कर दिया है। मतदान एमएलबी कॉलेज में होगा। मतदाता सूची पर आपत्ति 23 सितंबर को दोपहर तीन बजे तक की जा सकेगी। आपत्ति निराकरण पश्चात उसी दिन अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

    30 सितंबर को जारी होगी अंतिम प्रत्याशी सूची
    24-25 सितंबर को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक फार्म वितरण और जमा करने का कार्य होगा। नाम वापसी की अंतिम तारीख 28 सितंबर और अंतिम प्रत्याशी सूची 30 सितंबर को जारी होगी।

    चुनाव कराने के लिए नौ सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसमें पांच अधिवक्ता-संजय द्विवेदी, राजू शर्मा, अनिल शर्मा, रामाधार चौबे और विशाल त्रिपाठी के साथ-साथ शासकीय अधिवक्ता गजेन्द्र साहू, तहसीलदार मनीष जैन, अपर तहसीलदार दिनेश चौरसिया और वंदना यादव शामिल हैं।

    निर्वाचन कार्यालय श्रीअचलेश्वर महादेव मंदिर के बगल में संत निवास का प्रथम तल का चयन किया गया है तो वहीं एमएलबी कॉलेज को मतदान स्थल बनाया गया है।

    चुनाव के मुख्य नियम एवं शर्तें…
    मतदाता सूची 1100 रुपये में मिलेगी। अध्यक्ष-पदाधिकारी का नामांकन फार्म 5100 रुपये और कार्यकारिणी सदस्य का फॉर्म 2500 रुपये का होगा। फीस वापस नहीं होगी।

    बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और अखबार/टीवी पर प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन पर उम्मीदवारी रद हो सकती है। सिर्फ 10×8 सेमी तक का विजिटिंग कार्ड बांट सकते हैं, उस पर भी देवी-देवताओं के फोटो पर रोक है।

    वोट डालने के लिए न्यास का परिचय पत्र या आधार कार्ड, वोटर आइडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस लाना अनिवार्य है। बिना आईडी के वोट नहीं डालने दिया जाएगा।

    मतदान कक्ष में मोबाइल फोन, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह रोक रहेगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी चुनाव अधिकारी कराएंगे और सीसीटीवी से निगरानी होगी।

    महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मतदान कक्ष होंगे। मतदान स्थल से 100 मीटर तक बेरीकेडिंग रहेगी, इस दायरे में प्रचार और प्रत्याशियों का घूमना प्रतिबंधित रहेगा।

    अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को होगी
    तहसीलदार मनीष जैन ने बताया कि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की सूचना मंदिर परिसर में दो बड़े फ्लैक्स लगाकर और प्रेस नोट के माध्यम से दी जाएगी, किसी भी सदस्य को व्यक्तिगत सूचना नहीं भेजी जाएगी। अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को जिला न्यायालय में होगी, जिसमें चुनाव प्रक्रिया की रिपोर्ट पेश की जाएगी।

    यह नहीं लड़ सकेंगे चुनाव…

    संतोष सिंह राठौर पुत्र रामदुलारे राठौर

    हरिप्रसाद अग्रवाल

    नरेन्द्र कुमार सिंहल पुत्र द्वारिका प्रसाद सिंघल

    उषा चौहान पत्नी यशपाल सिंह चौहान

    प्रदीप कुमार बंसल पुत्र घनश्याम दास बंसल

    नारायणदास बृजवासी पुत्र रामजीदास

    गोविन्दसिंह पाल पुत्र सरमनसिंह

    बीके शिवहरे पुत्र प्रीतमचन्द्र शिवहरे, प्रभात सिंह जादौन पुत्र महाबीर सिंह जादौन।

    हरिबाबू शिवहरे पुत्र मोतीलाल शिवहरे।

     

  • भितरवार में छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप, विरोध करने पर पीटा; आरोपी गिरफ्तार

    भितरवार में छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप, विरोध करने पर पीटा; आरोपी गिरफ्तार

    ग्वालियर
     मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के भितरवार कमला स्कूल रोड पर दिनदहाड़े कोचिंग क्लास जा रही दो छात्राओं को बाइक सवार बदमाशों ने बीच रास्ते में रोक लिया। जब लड़कियों ने विरोध किया, तो मनचलों ने उनके साथ सरेराह मारपीट शुरू कर दी। यह पूरी शर्मनाक वाकया सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

    यह घटना सोमवार दोपहर की है। दोनों छात्राएं जब घर लौट रही थीं, तभी स्प्लेंडर बाइक पर सवार दो युवकों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और उनके साथ छेड़छाड़ करने लगे। जब छात्राओं ने इस हरकत का विरोध किया, तो युवकों ने उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की।

    सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि जब छात्राएं आगे बढ़ती हैं, तो युवक बाइक से उनका पीछा करते हैं और दोबारा उनके साथ वही हरकत करते हैं। हमले के बाद दोनों आरोपी अपनी बाइक से मौके से फरार हो गए।
    सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद पुलिस की जांच शुरू

    सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई। भितरवार पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज की मदद से दोनों आरोपियों की पहचान करने और उनकी लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। वही, एक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    एसडीओपी गगन हनमत ने बताया कि पुलिस के पास हमले का सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। उन्होंने कहा कि इसी वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक किसी भी छात्रा या उनके परिवार वाले ने पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

    स्थानीय नेता ने दी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
    भितरवार नगर परिषद के उपाध्यक्ष मन्नू यादव ने छात्राओं के साथ हुई इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भितरवार में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं और छात्राओं के साथ ऐसी घटनाएं होना एक गंभीर चिंता का विषय है।

     

  • ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने दक्षिण भारत से साझेदारी

    ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने दक्षिण भारत से साझेदारी

    टेलीकॉम मेन्यूफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में निवेश के लिए दक्षिण भारत से लेंगे सहयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ग्वालियर 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी, डीपटेक और टेक्नोलॉजी सहित सभी क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए संकल्पित है। राज्य में टेलीकॉम सेक्टर में भी औद्योगिक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्वालियर में टेलीकॉम मेन्यूफैक्चरिंग जोन स्थापित करना केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है। दक्षिण भारत के निवेशकों का सहयोग प्राप्त करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक निजी प्रतिष्ठान में मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टीएमजेड में निवेश और इस जोन की खूबियों को बताने के लिए पहले नई दिल्ली और मुंबई में इन्वेस्टमेंट टू रोड शो का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तीसरा कार्यक्रम मंगलवार को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित किया जा रहा है। बेंगलुरु में निवेशकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। अन्य क्षेत्रों में निवेश में भी दक्षिण भारत के उद्यामियों का सहयोग प्राप्त हुआ है। टीएमजेड के लिए भी निश्चित ही सहयोग प्राप्त होगा।

    प्रदेश के नगरों के निकट उद्योगों का विस्तार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब तक टीएमजेड में निवेश को लेकर बेहतर रिस्पांस मिला है। ग्वालियर-चंबल अंचल औद्योगिक क्षेत्र विस्तार के लिए सबसे अनुकूल है। राज्य सरकार द्वारा इंदौर, उज्जैन, भोपाल और उसके बाद जबलपुर के आसपास भी उद्योग-व्यापार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में छोटे-बड़े सभी शहरों में भारी उद्योग, लघु उद्योग, एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों से प्रदेशवासियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गरीब, युवा, किसान और नारी सभी वर्गों के कल्याण के लिए काम कर रही है। आज मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने वाला राज्य है। मध्यप्रदेश ने तेज गति से बेरोजगारी दर को नियंत्रित किया है।

     

  • भोपाल में 190 व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद, 8084 को नोटिस; SC में आज सुनवाई

    भोपाल में 190 व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद, 8084 को नोटिस; SC में आज सुनवाई

    भोपाल
     आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दोपहर दो बजे से सुनवाई होगी। 15 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई टलने के बाद अब 22 सितंबर को सुनवाई हो रही है। इसके लिए नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में 34 पेज का नया एफिडेविट पेश किया है। इसमें शहरभर में 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने और 190 के खिलाफ कार्रवाई कर कारोबार बंद कराने की जानकारी दी गई है।

    62,500 प्रतिष्ठान चिह्नित, 8084 को नोटिस
    सुप्रीम कोर्ट के पांच अगस्त के निर्देश के बाद नगर निगम ने दावा किया था कि उसने शहर के आवासीय क्षेत्रों में संचालित 62,500 से अधिक प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया है। निगम ने 8269 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने की भी जानकारी दी थी। सूत्रों के अनुसार, अब नए शपथ पत्र में नोटिस का आंकड़ा 8084 बताया गया है। साथ ही 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।

    आंकड़ों में आए इस बदलाव को लेकर भी सुनवाई के दौरान सवाल उठ सकते हैं। नगर निगम ने कोर्ट को बताया है कि चिह्नित प्रतिष्ठानों पर लगातार कार्रवाई जारी है।

    सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में ऐसे करीब 62,500 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद तीन दिन तक कार्रवाई चली। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने अभियान रोक दिया। अब ये प्रतिष्ठान खुल चुके हैं।

    रिकॉर्ड में 62,500, नोटिस सिर्फ 8,084 प्रतिष्ठान को निगम के रिकॉर्ड में 62,500 कमर्शियल प्रतिष्ठान होने के बावजूद करीब 13% यानी 8,084 को ही नोटिस दिए गए। इनमें भी कार्रवाई 190 तक पहुंची। इसके बाद न नोटिस की कार्रवाई आगे बढ़ी न बंद प्रतिष्ठानों की दोबारा जांच हुई।

    निगम खुद बोला – दोबारा खोलना आपराधिक कृत्य
    निगम की टीमों ने सभी संस्थानों को नियमानुसार बंद क
    राया है। कहीं भी संस्थान दोबारा खुल गए हैं तो यह आपराधिक कृत्य है। कोर्ट में पूछने पर वकील के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर जवाब देंगे।' -भुवन गुप्ता, उपायुक्त (भवन अनुज्ञा)

    रहवासी इलाकों में चल रहे 190 कमर्शियल प्रतिष्ठान बंद कराए थे, सभी फिर खुले; 15 दिन से देखने तक नहीं पहुंचा नगर निगम

    भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने तीन दिन कार्रवाई कर 190 प्रतिष्ठान बंद कराए थे। अब सभी दोबारा खुल चुके हैं, लेकिन करीब 15 दिन से निगम की टीमें इनकी स्थिति देखने तक नहीं पहुंचीं। न दोबारा खुले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई, न कोई नया प्रतिष्ठान बंद कराया गया।

    10 नंबर मार्केट में सीलिंग के दौरान व्यापारियों ने निगम के पंचनामे के आधार पर प्रतिष्ठान खुद बंद किए थे। अब यहां कई प्रतिष्ठान दिन में बंद रहते हैं और शाम होते ही खुल जाते हैं।

    सीलिंग और पंचनामे के बाद फिर शुरू हुआ कारोबार
    बता दें कि निगम ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक करने वाले सात प्रतिष्ठानों को सील किया, जबकि 183 ने स्वेच्छा से कारोबार बंद करने के पंचनामे बनाए गए। निगम की कार्रवाई के दौरान पंचनामा बनाकर बंद कराए गए कई प्रतिष्ठानों में दोबारा कारोबार शुरू होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में मंगलवार की सुनवाई में निगम की कार्रवाई के साथ उसके जमीनी अनुपालन की स्थिति भी अहम रहेगी। कोर्ट जमीनी स्तर पर कार्रवाई की मॉनिटरिंग पर जोर दे सकता है।

  • दुष्कर्म मामले में DNA सबूत अहम, हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा से किया बरी

    दुष्कर्म मामले में DNA सबूत अहम, हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा से किया बरी

    जबलपुर 
     मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यहां सुनवाई के दौरान दुष्कर्म पीड़िता के बच्चे से आरोपी का डीएनए मिलान नहीं हुआ, जिसके बाद आरोपी को हाईकोर्ट से राहत मिली है. हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की। 

    मानसिक अक्षम युवती से दुष्कर्म के आरोप
    लखनादौन जिला सिवनी निवासी छोटू टेकाम पर पड़ोस में रहने वाली मानसिक रूप से असक्षम युवती के साथ दुष्कर्म के आरोप लगे थे. जिसके बाद उसे जिला न्यायालय द्वारा दस साल की सजा से दंडित किया गया था. इस सजा के खिलाफ आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी. अपील में कहा गया था कि अभियोजन के अनुसार युवती के माता-पिता कार्य के लिए नागपुर गए थे और जब नागपुर से लौटे तो उन्होंने पाया कि उनकी मानसिक रूप से अक्षम बेटी गर्भवती हो गई है। 

    आरोपी को हुई थी 10 साल की हुई थी सजा
    याचिका में बताया गया कि बेटी के गर्भवती होने पर उसके मां-बाप ने पड़ोसी होने के कारण आरोपी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी. युवती ने भी अपने बयान में उसके खिलाफ गवाही दी, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया और जिला न्यायालय ने विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम दस साल की सजा से दंडित कर दिया. इस दौरान अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि पीड़ित द्वारा जन्म दिए गए बच्चे और आरोपी का डीएनए ही आपस में नही मिलता, जिससे स्पष्ट है कि वह उस बच्चे का जैविक पिता नही है। 

    पीड़िता के बच्चे से डीएनए मिलान नहीं हुआ, दोषमुक्त करार
    एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि डीएनए रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित व नवजात बच्चे का डीएनए आपस में मिलते है, लेकिन दुष्कर्म के आरोपी का डीएनए नवजात बच्चे के डीएनए से नहीं मिलता. ऐसे हाईकोर्ट जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने तकनीकी साक्ष्य नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को संदेह के आधार पर दोषमुक्त करार दिया है. एकलपीठ ने वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं होने के कारण अपीलकर्ता को संदेह का लाभ देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया।