Category: मध्य प्रदेश

  • प्रदेश की 32 हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता में से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश की 32 हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता में से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादन और ऊर्जा भंडारण समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मध्यप्रदेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के साथ ही देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश की 32 हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता में से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद पर विचार-मंथन के लिए भोपाल में एकत्र हुईं विद्युत कम्पनियां
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का किया शुभारंभ

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, पावर कट से पावर सरप्लस स्टेट अर्थात बिजली गुल से बिजली फुल राज्य बना है। हमारा प्रदेश आज देश के उन चुनिंदा राज्यों में से एक है जो अपनी ऊर्जा जरूरत से आगे बढ़कर देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। वर्तमान में नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण केवल देश ही नहीं, अपितु समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज मध्यप्रदेश में 32 हजार मेगावाट की ऊर्जा क्षमता है, जिसमें से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। मध्यप्रदेश, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद विषय पर आयोजित ऑल इंडिया डिस्काम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का होटल मैरिएट में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर पुस्तक 'सैलियंट पॉवर स्टैटिस्टिक्स वर्ष 2024-25 से 2025-26' विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्युत वितरण कम्पनियों के इस साझा मंच से ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के ठोस समाधान निकलेंगे। इस अवसर पर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल आलोक कुमार, प्रमुख सचिव ऊर्जा मनीष सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न विद्युत कम्पनियों के प्रतिनिधि तथा ऊर्जा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

    मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में बिजली अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। राज्य सरकार बिजली की खपत बढ़ाने के साथ-साथ इसके उत्पादन और संधारण पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक के साथ नई इकाईयां प्रारंभ की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में 360 डिग्री बदलाव आया है। जब जी-20 सम्मेलन में ग्रीन-क्लीन एनर्जी का उत्पादन बढ़ाने और उपयोग का मुद्दा उठा, तो भारत ऐसा देश रहा, जिसने 50 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करके दिखाया है। यह प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से ही संभव हो पाया है। अब हम नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ते जा रहे हैं।

    राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्पर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्रों की अपनी एक अलग विशेषता है। ग्रीन- गो ने नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावॉट क्षमता का प्लांट स्थापित किया है। यह देश का सबसे अनूठा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। आमतौर पर इतनी बड़ी परियोजना का काम पूरा होने में 4 से 6 वर्ष लग जाते हैं, लेकिन सौभाग्य का विषय है कि मध्यप्रदेश में यह काम केवल दो से ढाई साल में पूर्ण हो रहा है। राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी प्रकार की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को सौर ऊर्जा की शक्ति से परिचित कराया है। देश में सौर ऊर्जा के उपयोग के कारण कार्बन उत्सर्जन में 20 करोड़ टन से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। थर्मल पॉवर और अन्य पारंपरिक तरीकों के स्थान पर अब हम विंड, सोलर और पंप स्टोरेज से बिजली बना रहे हैं। मध्यप्रदेश में अब पानी से और पानी पर भी बिजली बन रही है।

    सस्ती भरोसेमंद बिजली के लिए उपयोगी रहेगी कार्यशाला

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र अभूतपूर्व बदलाव से गुजर रहा है। हमारी जिम्मेदारी केवल बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करना नहीं, बल्कि उसे विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाना है। भविष्य के लिए हमें सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का ऐसा संतुलित मिश्रण विकसित करना होगा, जिससे ऊर्जा संक्रमण की लागत न बढ़े और उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार न पड़े।

    मंत्री तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में नई संगठनात्मक संरचना और नई भर्तियों को मिली स्वीकृति, निश्चित ही हमारी विद्युत कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस कार्यशाला से ऐसे व्यावहारिक सुझाव निकलेंगे जो हमारी वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम, वित्तीय रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार कर सकेंगे। कार्यशाला सस्ती और भरोसेमंद बिजली के लिए उपयोगी रहेगी। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल आलोक कुमार ने कांफ्रेस के उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रमुख सचिव ऊर्जा मनीष सिंह ने कॉन्फ्रेंस में पधारने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

     

  • राज्यमंत्री गौर ने कहा अतिक्रमण हटाकर मार्ग चौड़ीकरण एवं संधारण का कार्य रात्रि में कराएँ

    राज्यमंत्री गौर ने कहा अतिक्रमण हटाकर मार्ग चौड़ीकरण एवं संधारण का कार्य रात्रि में कराएँ

    राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौर ने अवधपुरी में किया सड़कों का निरीक्षण

    राज्यमंत्री गौर मार्गों के गड्ढे तत्काल भरने और बंद स्ट्रीट लाइटें चालू करने के दिए निर्देश

    राज्यमंत्री गौर ने कहा अतिक्रमण हटाकर मार्ग चौड़ीकरण एवं संधारण का कार्य रात्रि में कराएँ

    रहवासी क्षेत्र में संचालित अवैध गोदाम को सील करें

    भोपाल

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के अवधपुरी स्थित आदर्श विहार, रीगल टाउन, सरला स्टेट, न्यू फोर्ट कॉलोनी एवं कंचन नगर में सड़कों की स्थिति तथा मूलभूत नागरिक सुविधाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मार्गों की जर्जर स्थिति, स्थान-स्थान पर उभरे गड्ढों एवं खुले सीवेज नेटवर्क को देखकर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कार्यपालक एजेंसियों एवं ठेकेदारों की शिथिलता पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में सुधारात्मक कार्यवाही पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि निर्माण एजेंसियों एवं ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को नहीं भुगतने दिया जाएगा। आगामी पर्वों एवं त्योहारों के दृष्टिगत नागरिकों को सुगम, सुरक्षित एवं बाधारहित आवागमन उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए उन्होंने वर्षा से क्षतिग्रस्त सड़कों के गड्ढों का भराव कार्य तत्काल एवं पूर्ण मजबूती के साथ कराने के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व एवं नगर निगम दल को सीमांकन कर सड़कों पर व्याप्त अतिक्रमण अविलंब हटाने तथा आवश्यकतानुसार मार्ग चौड़ीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि दिन के समय आमजन की आवाजाही एवं यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए सड़कों के निर्माण एवं संधारण कार्य मुख्य रूप से रात्रिकालीन समय में निष्पादित किए जाएं।

    क्षेत्र की प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने के संबंध में राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बंद पड़ी समस्त स्ट्रीट लाइटों को आगामी 10 दिवस की निर्धारित समय-सीमा में अनिवार्य रूप से चालू करने के निर्देश दिए। उन्होंने रहवासी क्षेत्र में नियमों के विपरीत संचालित गोदाम को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर सीलिंग की कठोर कार्यवाही करने के भी आदेश दिए। रहवासियों से संवाद करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि मानसून पश्चात क्षतिग्रस्त मार्गों के स्थाई एवं गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जाएगा। स्थलीय निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, नगर पालिक निगम भोपाल तथा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।

     

  • MP के स्टेट हाईवे पर लगेगी ‘यूजर फीस’? जानें नए कानून में क्या है प्रावधान

    MP के स्टेट हाईवे पर लगेगी ‘यूजर फीस’? जानें नए कानून में क्या है प्रावधान

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में स्टेट हाईवे के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए नया कानूनी ढांचा लागू हो गया है। राज्य सरकार अब स्टेट हाईवे या उसके किसी हिस्से के उपयोग से मिलने वाली सेवाओं और सुविधाओं के बदले यूजर फीस लगा सकेगी। शुल्क की दर और वसूली की प्रक्रिया नियमों के जरिए तय होगी। इसके साथ ही सरकार हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति या संस्था के साथ समझौता भी कर सकेगी। इसके तहत संबंधित निजी संस्था को तय शर्तों के अनुसार शुल्क वसूलने और उसे अपने पास रखने का अधिकार भी दिया जा सकेगा। यह प्रावधान मप्र राजमार्ग (संशोधन) अधिनियम 2026 में किया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह तत्काल प्रभावी हो चुका है।

    संशोधन में मूल मप्र राजमार्ग अधिनियम, 2004 की प्रस्तावना में भी बदलाव किया है। इसमें राजमार्गों से अतिक्रमण रोकने और हटाने के साथ यूजर फीस लगाने का प्रावधान जोड़ा गया है। वहीं सड़क सुरक्षा तथा सड़क परिवहन के सभी साधनों की अधिकतम दक्षता सुनिश्चित करने वाली सुविधाओं को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है।

    नए नियम के फायदे
    रखरखाव के लिए अतिरिक्त आयः यूजर फीस से हाईवे के विकास और रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन आसानी से जुटाए जा सकेंगे।

    निजी निवेश का रास्ताः विकास और रखरखाव के लिए निजी संस्थाओं के साथ करार होने से पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल भी संभव होगा।

    सुविधाओं में सुधारः अतिरिक्त शुल्क से मिलने वाले संसाधनों का उपयोग सड़क की गुणवत्ता. संचालन, सुरक्षा और संबंधित सुविधाओं में किया जा सकता है।

    जिम्मेदारी तय करने में मददः करार में निर्माण, रखरखाव, प्रबंधन और संचालन की शर्तें स्पष्ट की जा सकेंगी।

    नए नियम को लेकर ये चुनौतियां
    वाहन चालकों पर अतिरिक्त बोझः
    यूजर फीस से नियमित यात्रियों और मालवाहक वाहनों की यात्रा लागत बढ़ सकती है।

    दोहरी फीस की आशंकाःकिसी मार्ग पर पहले से अन्य शुल्क लागू होने की स्थिति में नया शुल्क अतिरिक्त आर्थिक बोझ डॉल सकता है। यह अनिवार्य प्रावधान नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक चुनौती है।

    निजी एजेंसी की निगरानीःशुल्क वसूली का अधिकार निजी संस्था को मिलने पर दर, सेवा की गुणवत्ता और करार की निगरानी जरूरी होगी।

    कम ट्रैफिक वाले मार्गः कम यातायात वाले हाईवे निजी निवेश के लिए कम आकर्षक होंगे। ऐसे मार्गों के रखरखाव के लिए सरकार को अलग संसाधन जुटाने पड़ सकते हैं।

    सरकार तय करेगी फीस की नई दरें
    अधिनियम में नई धारा 8-ए जोड़ी गई है। इसके तहत राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर स्टेट हाईवे के पूरे या किसी हिस्से के उपयोग से संबंधित सेवाओं या लाभों के लिए नियमों में तय दरों पर शुल्क लगा सकेगी। शुल्क की वसूली भी निर्धारित नियमों के अनुसार ही होगी। हालांकि, किस हाईवे पर कितनी फीस लगेगी और किन वाहनों या उपयोगकर्ताओं पर लागू होगी, यह संबंधित नियमों और अधिसूचनाओं से स्पष्ट होगा।

    वहीं नई धारा 8-बी के तहत सरकार को स्टेट हाईवे के पूरे या किसी हिस्से के विकास और रखरखाव के लिए किसी व्यक्ति या संस्था से समझौता करने का अधिकार मिला है। करार की शर्तों के तहत संबंधित संस्था को सेवाओं या सुविधाओं के बदले शुल्क वसूलने और अपने पास रखने का अधिकार दिया जा सकता है। संशोधन अधिनियम के तहत मध्यप्रदेश राजमार्ग अधिनियम, 1936 और भारतीय टोल (मध्यप्रदेश संशोधन) अधिनियम, 1932 को निरस्त कर दिया गया है। हालांकि पहले जारी अधिसूचनाएं, निर्धारित यूजर फीस. रियायत समझौते, लाइसेंस, प्राधिकरण और शुल्क वसूलने से जुड़े अधिकार तत्काल खत्म नहीं होंगे।

  • GDA कार्यालय में जनसुनवाई आयोजित, वाइस चेयरमैन सुधीर गुप्ता ने सुनीं लोगों की समस्याएं

    GDA कार्यालय में जनसुनवाई आयोजित, वाइस चेयरमैन सुधीर गुप्ता ने सुनीं लोगों की समस्याएं

    ग्वालियर विकास प्राधिकरण ऑफिस जनसुनवाई में हितग्राहीयो की समस्याओं का समाधान कराया सुधीर गुप्ता वाइस चेयरमैन ग्वालियर विकास प्राधिकरण द्वारा

    ग्वालियर 
     ग्वालियर विकास प्राधिकरण ऑफिस में वाइस चेयरमैन सुधीर गुप्ता द्वारा जनसुनवाई में  समस्याओं का निराकरण किया जनसेवा ही हमारा सर्वोपरि संकल्प है 40 प्रकरणों में 28 का निराकरण किया बाकी प्रकरणों में समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके त्वरीत  प्रभावी एवं संतोषजनक निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जनसुनवाई में ग्वालियर विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी विकास सिंह भदोरिया, श्री बृजेश शर्मा भूअर्जन अधिकारी  ई.ई. देवेंद्र गुप्ता, ए. ई. इंजीनियर सुनील शुक्ला,  अकाउंट ऑफिसर , तकनीक शाखा प्रभारी,वरिष्ठ लेखा अधिकारी, ऑफिस सुपरीटेंडेंट, प्रभारी भूखंड संदीप तिवारी प्रभारी भूखंड मनोज माथुर, अशोक इंग्ले सहित सेक्सन के विभाग  प्रमुख एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे

  • मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का विस्तार, हर विधानसभा में स्टेडियम-हेलीपैड की तैयारी

    मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का विस्तार, हर विधानसभा में स्टेडियम-हेलीपैड की तैयारी

    भोपाल 
    मोहन कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई, जिसमें कई प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। कैबिनेट की बैठक की जानकारी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कश्यप ने मीडिया को दी।

    जनविश्वास अभियान के तहत हर शुक्रवार के दिन सारे प्रशासनिक अधिकारी किसी बैठक में नहीं रहते हैं, सभी क्षेत्र के अंदर या फील्ड में रहते हैं। जनता की समस्याएं उन्हीं के द्वार पर जाकर सुनते हैं। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का आयोजन है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के कारण झाकियों और आयोजन के कारण उसे 26 सितंबर को जारी रहेगा।

    25 को भोपाल से होगा सुगम बस सेवा का शुभारंभ
    चैतन्य कश्यप ने बताया कि कैबिनेट के अंदर महत्वपूर्ण विषयों को लाया गया। इसमें परिवहन विभाग में रोडवेज बंद होने के बाद मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ 25 सितंबर को किया जा रहा है। इस दिन 350 बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी। इसमें नितिन गडगरी के शामिल होंगे। रूट और आम यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए वर्तमान बसों का उपयोग करते हुए इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जाएगा। 2030-31 तक 14981 बसों को चलाएंगे। इसका उद्देश्य यह है कि दूरदराज के गांव में इस सेवा से जुड़ सके। सीसीटीवी कैमरे रहे। जीपीएस सिस्टम रहेगा, जिससे यात्रियों को पता चलता रहे कि बस कितना लेट हो रही है या कितनी दूर है। तो व्यवस्थित मॉडल हम बना रहे हैं। सरकार अपनी कोई बस नहीं लगा रही है, सारे के सारे बस ऑपरेटरों की भागीदारी के साथ ही सुविधाओं की मॉनिटरिंग भी हो। एक वैज्ञानिक तरीके से पूरे मॉडल को विकसित कर रहे हैं। सीएम मोहन यादव स्वयं इसके अध्यक्ष भी हैं और पूरे देश में इस तरह का यह पहला मॉडल है।

    230 विधानसभा सीटों पर बनेंगे स्टेडियम
    मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र में एक स्टेडियम बनेगा। यह सिर्फ मैदान वाला स्टेडियम नहीं होगा। इसे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की तरह विकसित किया जाएगा। इसमें इनडोर और आउटडोर दोनों तरह के खेल होंगे। जहां 10 एकड़ से ज्यादा जमीन मिलेगी, वहां पूरी सुविधा बनेगी।

    हर कॉम्प्लेक्स की लागत करीब सात करोड़ रुपए होगी। एक कॉम्प्लेक्स में 10 से 12 खेल शामिल किए जाएंगे। इनमें पांच से छह खेल इनडोर होंगे। चार से पांच खेल आउटडोर होंगे। इनका नाम मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स रखा गया है। अगले पांच साल में इस पर 960 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    अभी 230 में से 140 सीटों पर ऐसी सुविधा नहीं है। इन सभी 140 जगहों पर नए कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। बाकी 90 जगहों की अधूरी सुविधाओं को भी पूरा किया जाएगा। हर जगह ट्रेनिंग के लिए कोच भी रखे जाएंगे।

    स्टेडियम में बनेगा हेलीपैड
    इस योजना में एक नई और खास बात भी जोड़ी गई है। हर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एक हेलीपैड भी बनेगा। यह हेलीपैड मैदान के बीच में बनाया जाएगा। इसका मकसद एयर एंबुलेंस सेवा को मजबूत करना है। अभी कई गांवों में तुरंत हेलीपैड बनाना मुश्किल होता है।

    इसमें काफी समय लग जाता है। अब यह हेलीपैड 24 घंटे और सातों दिन तैयार रहेगा। जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को तुरंत एयरलिफ्ट किया जा सकेगा। मंत्री ने कहा कि यह ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ी राहत होगी।

    2800 मेगावाट बिजली को मंजूरी
    कैबिनेट ने बिजली से जुड़ा एक बड़ा फैसला भी लिया है। पावर मैनेजमेंट कंपनी की एक रिपोर्ट सामने आई थी। इसके मुताबिक अभी मध्य प्रदेश में बिजली सरप्लस है। लेकिन आने वाले सालों में नए उद्योग तेजी से बढ़ेंगे। सेमीकंडक्टर और टेलीकॉम उद्योगों का विस्तार हो रहा है। शहरों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।

    इस वजह से 2037 तक करीब 1900 मेगावाट बिजली की कमी हो सकती है। यह अनुमान एक राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी ने लगाया है। थर्मल पावर प्लांट बनने में पांच से सात साल लगते हैं। इसी वजह से सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।

    कैबिनेट ने 1900 मेगावाट नई बिजली खरीदने की मंजूरी दी। इसके साथ ही 900 मेगावाट का पुराना करार भी जोड़ा गया। इस तरह कुल 2800 मेगावाट थर्मल बिजली खरीदी जाएगी। इससे 2037 तक की जरूरत पूरी हो सकेगी।

    961 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी
    इसके अलावा कैबिनेट ने कई पुरानी योजनाओं को भी जारी रखा। इन पर करीब 961 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना भी शामिल है। इस पर अब तक 1000 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। अब इसमें 262 करोड़ रुपए का नया प्रावधान जोड़ा गया है। इस परियोजना का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। पूरा होने पर इससे 400 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी।

    इसी तरह नीमच-जावद की सिंचाई परियोजना पर भी टेंडर फिर से लगाए गए हैं। इस पर करीब 4197 करोड़ रुपए खर्च होंगे। विधि विभाग की कई योजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया है। ग्राम न्यायालय योजना को 2031 तक बढ़ाया गया है। परिवार न्यायालय और उच्च न्यायालय से जुड़ी योजनाओं को भी निरंतरता मिली है।

    25 सितंबर से शुरू होगी बस सेवा
    बैठक में परिवहन विभाग का भी बड़ा प्रस्ताव रखा गया। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना 25 सितंबर से शुरू होगी। इसकी शुरुआत भोपाल से की जाएगी। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आने की संभावना है। उस दिन 350 बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी।

    मार्च तक करीब 1000 बसें इस योजना से जुड़ेंगी। ये सभी बसें निजी ऑपरेटरों की होंगी। सरकार खुद कोई बस नहीं खरीदेगी। सरकार सिर्फ रूट तय करेगी और निगरानी करेगी। किराया भी परिवहन विभाग के तय रेट पर ही रहेगा।

    हर बस में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम लगेंगे। इससे बस की लोकेशन ऑनलाइन पता चलती रहेगी। साल 2030-31 तक कुल 14,981 बसें इस योजना में जुड़ेंगी। मंत्री ने बताया कि यह देश का पहला ऐसा मॉडल है। पहले सिर्फ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार की कोई भागीदारी नहीं थी। अब मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था शुरू हो रही है।

    हर विधानसभा क्षेत्र में बनेंगे स्टेडियम, हेलीपेड
    चैतन्य कश्यप ने बताया कि एक और फैसला खेल जगत के लिए हुआ है। मध्यप्रदेश की हर विधानसभा में एक-एक स्टेडियम बनाया जाएगा। यह स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की अवधारणा बनाई गई है, जिसमें इनडोर और आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स होंगे। मल्टीपर्पस काम्पलेक्स होंगे। जमीन की उपलब्धता और रोड की कनेक्टिविटी को देखते हुए इसे डेवलप किया जाएगा। बच्चे यहां अपनी खेल प्रतिभा को निखार पाएंगे। यह पहली बार हो रहा है कि विधानसभा और ब्लाक लेवल पर संसाधनों के साथ खेल परिसर बनाए जा रहे हैं। इसका नाम रखा गया है मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स। इसे अगले 5 सालों में 960 करोड़ की लागत का प्रावधान किया है। 140 विधानसभा ऐसे हैं जहां खेल की सुविधा नहीं है। 90 जगह है, जिसे अपडेट करेंगे। इसमें नई चीज जोड़ रहे हैं, इन काम्पलेक्स के बीच हेलीपेड बनेगा, जिससे एयरएंबुलेंस की सेवा गांव-गांव तक पहुंचाई जा सके। यह मैदान के बीच में बनेगा, जो हमेशा उपलब्ध रहेगा। यह अपने आप में नया प्रयोग है।
    और क्या फैसले हुए

    पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के अंतर एक रिपोर्ट आई है कि 2037 तक आज भी हम ऊर्जा में सरप्लस मानते हैं, औद्योगों का जो जाल बिछा रहे हैं। मध्यप्रदेश ने 2037 की मांग को देखते हुए 1800 + 900 मेगावाट को पर्चेस करने का फैसला लिया है।

    दूरसंचार के क्षेत्र में मिलेगी ऊचाइयां
    सीएम आज बेंगलुरू में आयोजित रोड शो में जा रहे हैं। ग्वालियर में स्थापित दूरसंचार केंद्र के कार्यक्रम के सिलसिले में बेंगलुरू में रहेंगे। टेलिकाम के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को नई ऊंचाइयां मिलेगी। मध्यप्रदेश में ग्रीन फील्ड नए हाईवे बनने जा रहे हैं। इंदौर से जबलपुर के बीच बनने वाले इस हाईवे को औद्योगिक कॉरिडेर के रूप में विकसित किया जाएगा।

    आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम बड़ी उपलब्धि
    चैतन्य कश्यप ने बताया कि तीन करोड़ 88 लाख दीपक मध्यप्रदेश में प्रज्वलित हुए। उज्जैन में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आए थे, उन्होंने 32 लाख से अधिक दीपक प्रज्वलित हुए, यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के लिए प्रधानमंत्री के प्रति भावना प्रकट करने का अवसर रहा है। आशीर्वाद के दीये के साथ ही रक्तदान का भी बडा आयोजन हुआ। पूरे प्रदेश में 1100 स्थानों पर रक्तदान किया गया। उज्जैन में ही 25 हजार रक्तदान यूनिट का आयोजन सफल हुआ। इसी कार्यक्रम की अगली कड़ियों में 24-25 सितंबर को वडनगर से वाराणसी तक मोटरसाइकिल यात्राएं निकल रही हैं और उनको प्रधानमंत्री स्वयं संबोधित करेंगे।

    शिक्षा के क्षेत्र में जीरो ड्रपआउट
    मध्यप्रदेश ने एक उपलब्धि और हासिल की है, वो स्कूल शिक्षा में। इस बार प्राथमिक स्तर पर जीरो ड्रापआउट रहा। उस लक्ष्य को मोहन यादव की सरकार ने प्राप्त कर लिया है। इसी के साथ दो दिन पहले सीएम मोहन यादव ने स्वयं माता चीता राधा को गांधी सागर के बाड़े में छोड़ा था। वहां अब 4 चीतों की संख्या हो गई है। यह वन्य जीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की अच्छी उपलब्धि है।

    जनविश्वास अभियान के तहत हर शुक्रवार के दिन सारे प्रशासनिक अधिकारी किसी बैठक में नहीं रहते हैं, सभी क्षेत्र के अंदर या फील्ड में रहते हैं। जनता की समस्याएं उन्हीं के द्वार पर जाकर सुनते हैं। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का आयोजन है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के कारण झाकियों और आयोजन के कारण उसे 26 सितंबर को जारी रहेगा।

  • सागर BMC में चार बुजुर्गों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण, मुफ्त हुआ इलाज

    सागर BMC में चार बुजुर्गों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण, मुफ्त हुआ इलाज

    सागर 
    बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के नेत्र रोग विभाग और आई बैंक ने कॉर्निया प्रत्यारोपण में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पिछले 15 दिनों में मरणोपरांत तीन नेत्रदानों की मदद से नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी कर चार बुजुर्ग मरीजों की आंखों की रोशनी वापस लौटाई है।

    इस चिकित्सीय टीम में मुख्य रूप से डॉ. नीलम, डॉ. मानसी, डॉ. शिवानी, डॉ. अजय एवं डॉ. श्रेया शामिल रहीं। रोशनी पाने वाले सभी लाभार्थी सागर शहर व आसपास के ग्रामीण अंचलों के किसान एवं मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।

    इन मरीजों को मिला नया जीवन (परिवर्तित नाम):
    इमरान खान (73 वर्ष):
    पांच महीने पहले फंगल इन्फेक्शन के कारण कॉर्निया पूरी तरह खराब हो चुका था और दिखना बंद हो गया था। प्रत्यारोपण के बाद अब उनकी रोशनी लौट आई है।

    सीता बाई (70 वर्ष): दो वर्ष पूर्व चोट लगने से पुतली खराब हो गई थी। लगातार दर्द और अंधेपन से जूझ रही महिला का सफल ऑपरेशन कर पुतली बदली गई।

    अशोक (70 वर्ष): बीते पांच वर्षों से पुतली में सफेदी आने के कारण दृष्टिहीनता का शिकार थे। बीएमसी में जांच और प्रत्यारोपण के बाद अब वे देख सकते हैं।

    शिवदयाल (71 वर्ष): आठ महीने पहले मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन कॉर्निया में सूजन व फफोले पड़ने से रोशनी चली गई थी। नया कॉर्निया लगने से उनकी दृष्टि बहाल हो गई है।

    रिसर्च में काम आएंगी शेष दो कॉर्निया
    नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि हाल ही में तीन दानदाताओं से मरणोपरांत कुल छह कॉर्निया प्राप्त हुई थीं। जांचोपरांत इनमें से चार स्वस्थ कॉर्निया को मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। शेष दो कॉर्निया प्रत्यारोपण के मानकों के अनुकूल नहीं थीं, इसलिए उनका उपयोग विभाग के पीजी डॉक्टर्स शोध और चिकित्सीय अध्ययन के लिए करेंगे।

    सर्जरी और नेत्रदान पूरी तरह निःशुल्क
    बीएमसी डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने बताया कि अस्पताल में कॉर्निया प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है और यह पूरी प्रक्रिया एवं सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क की जाती है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान एक स्वैच्छिक और पुनीत कार्य है, जिसके लिए समाज को बढ़-चढ़कर आगे आना चाहिए।

    आई बैंक की प्रभारी इंचार्ज डॉ. रोशी जैन एवं डॉ. अंजलि वीरानी ने सभी पीजी छात्रों, नर्सिंग स्टाफ (चेतना शुक्ला और रामलखन मीणा) व पैरामेडिकल स्टाफ के साथ मिलकर नेत्रदान प्राप्त करने से लेकर प्रत्यारोपण तक का कार्य बेहतर समन्वय के साथ पूरा किया।

  • भोपाल में अवैध निर्माण पर सख्ती, 22 मकान मालिकों को 15 दिन का अल्टीमेटम

    भोपाल में अवैध निर्माण पर सख्ती, 22 मकान मालिकों को 15 दिन का अल्टीमेटम

     भोपाल
     बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने 22 मकानों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 17 मकान मालिकों को नोटिस देकर 15 दिन में निर्माण खुद हटाने को कहा गया है। पांच अधूरे मकानों का निर्माण रोकने के नोटिस दिए गए हैं।

    हाईकोर्ट में याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई
    इस कार्रवाई के पीछे की वजह यह है कि गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था की 5 एकड़ जमीन पर बने ये निर्माण टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हैं। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के बाद उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को निगम को पत्र लिखा था। इसके बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की।

    खास बात है कि जिन मकानों को अब अवैध निर्माण बताकर हटाने के नोटिस दिए गए हैं, उन्हें नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने ही निर्माण की अनुमति दी थी। इससे निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए
    याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के मुताबिक, संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए थे। सहकारिता विभाग इनकी रजिस्ट्रियां शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट भी पहुंच चुका है।

    38 रजिस्ट्रियों के 18.74 करोड़ रुपए गायब
    फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में सामने आया कि 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। इनमें 32 अवैध पाई गई। 38 रजिस्ट्रियों के करीब 18.74 करोड़ रुपए संस्था के खाते में नहीं आए।

    ऑडिटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों और हैंडराइटिंग में हेरफेर कर वास्तविक सदस्यों का अधिकार छीना गया। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल में हुई थीं।

  • MP पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन, रील से कमाई और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर सख्ती

    MP पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन, रील से कमाई और गोपनीय जानकारी शेयर करने पर सख्ती

    भोपाल 
     मध्य प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त गाइडलाइन जारी की है. डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश पर जारी 24 बिंदुओं की इस गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के फेसबुक, वॉट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. अब वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, सरकारी संसाधनों का निजी प्रचार के लिए इस्तेमाल करना और संवेदनशील सरकारी जानकारी को सोशल मीडिया या AI टूल्स पर साझा करना अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है। 

    वर्दी में रील और फोटो डालना पड़ेगा भारी
    नई गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे. वर्दी का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि बनाने या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए करने पर कार्रवाई हो सकती है. डीजीपी के आदेश के बाद PHQ ने पुलिसकर्मियों को सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए नहीं करने के निर्देश दिए हैं. पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पुलिसकर्मियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 

    सोशल मीडिया से कमाई पर भी नियम
    गाइडलाइन में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है. बिना शासन की अनुमति के पुलिसकर्मी सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित नहीं कर सकेंगे. पेड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप या किसी कंपनी, प्रोडक्ट, सर्विस या कारोबार का पैसे लेकर प्रचार करने पर भी रोक रहेगी. जिन पुलिसकर्मियों ने पहले सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित की है, उन्हें निर्धारित अवधि में अपनी कमाई की जानकारी विभाग को देनी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है। 

    परिवार के किसी सदस्य के सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी आय होने की स्थिति में भी इसकी जानकारी विभाग को देने का प्रावधान है। 

    AI टूल्स को लेकर भी डीजीपी की गाइडलाइन
    सोशल मीडिया के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है. किसी भी तरह के विभागीय डॉक्यूमेंट्स को एआई टूल्स पर अपलोड करने की मनाही है. इसी तरह सरकारी गोपनीय जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने पर भी रोक रहेगी. पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के लीक होने की आशंका को देखते हुए यह प्रावधान खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके अलावा पुलिसकर्मी संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अपनी लोकेशन, तैनाती स्थल और ड्यूटी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे। 

    VIP ड्यूटी के दौरान फोटो पोस्ट, सेल्फी पर पाबंदी
    नई गाइडलाइन के मुताबिक VIP-VVIP सुरक्षा, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों या संवेदनशील स्थानों पर तैनाती के दौरान फोटो या सेल्फी पोस्ट करने पर भी रोक रहेगी. हथियारों की ट्रेनिंग, ड्रिल, छापेमारी, दबिश और पुलिस की अन्य संवेदनशील कार्रवाई से जुड़े फोटो-वीडियो या किसी अन्य तरह से प्रसारण भी सोशल मीडिया पर नहीं किया जा सकता। 

    पीड़ित, आरोपी और गवाह की पहचान उजागर करने पर रोक

    पीड़ित, गवाह और आरोपियों के नाम जाहिर नहीं होंगे
    डीजीपी के आदेश में यह भी कहा गया है कि पुलिस जांच और जनसुनवाई से जुड़े मामलों में पीड़ित, गवाह, शिकायतकर्ता और आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश हैं. ऐसे मामलों पीड़ितों से संबंधित फोटो या वीडियो भी सोशल मीडिया पर जारी करने से पहले आवश्यक अनुमति लेनी होगी और पहचान छिपानी होगी. खासतौर पर महिला और बाल पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली कोई भी जानकारी मीडिया से साझा नहीं की जा सकेगी। 

    निजी अकाउंट के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं
    पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के लिए सरकारी CUG सिम, इंटरनेट, वाई-फाई, IP एड्रेस या सरकारी ई-मेल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा निजी मोबाइल फोन में विभाग के सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट को लॉगिन करने को लेकर भी प्रतिबंध तय किए गए हैं. मकसद सरकारी डिजिटल संसाधनों और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों को अलग रखना है। 

    उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
    PHQ के आदेश के मुताबिक, '' सोशल मीडिया से जुड़े निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा. मामले की गंभीरता के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है और निलंबन तक की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। 

  • फर्जी पासपोर्ट मामले में STF DIG का एक्शन, ग्वालियर SP को लिखा पत्र

    फर्जी पासपोर्ट मामले में STF DIG का एक्शन, ग्वालियर SP को लिखा पत्र

     ग्वालियर
     जाली दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनने के लिए मामले में अब जांच पुलिसकर्मियों तक पहुंच गई है। ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर एक ही मोबाइल नंबर और एक ही पते पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के हिंदू नाम से पासपोर्ट बन गए।

    इसके बाद यह लोग चाइना, थाइलैंड, म्यामांर व अन्य देशों की यात्रा भी कर आए। कुछ विदेश भी भाग गए। इस मामले में एसटीएफ ने तत्कालीन डबरा थाना प्रभारी विनायक शुक्ला और पासपोर्ट के लिए पुलिस सत्यापन का काम देख रहे आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर की लापरवाही मानी है।

    एसटीएफ डीआईजी ने लिखा पत्र
    इसके चलते एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा द्वारा ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को इन दोनों पुलिसकर्मियों की प्राथमिक-विभागीय जांच के लिए पत्र लिखा गया है। पत्र ग्वालियर आने के बाद इस मामले में जांच शुरू हो जाएगी।

    एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, अगर पुलिस सत्यापन में ही एक ही मोबाइल नंबर व अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच हो जाती तो उस समय ही यह फर्जीवाड़ा खुल सकता था। पासपोर्ट नहीं बनते और यह लोग भी पकड़े जा सकते थे, जो बांग्लादेशी हैं, बल्कि बौद्ध भिक्षु बनकर भारत में रह रहे थे।

    पुलिस विभाग की लापरवाही आई सामने
    पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण पासपोर्ट बने। इसमें से कुछ बांग्लादेशी विदेश भी भाग चुके हैं। भोपाल पुलिस आयुक्त और बैतूल पुलिस अधीक्षक को भी लिखा पत्र भोपाल के गोविंदपुरा स्थित अन्नानगर बौद्ध मठ से 40 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बने।

    वहीं, बैतूल से 11 पासपोर्ट बने, इसमें भी पुलिस सत्यापन में लापरवाही बरती गई। डीआईजी राहुल लोढ़ा ने बताया कि भोपाल में तत्कालीन गोविंदपुरा थाना प्रभारी, बैतूल में पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में शामिल थाना प्रभारी, पासपोर्ट सेल प्रभारी की जांच के लिए पत्र लिखा है।

    विभागीय जांच रिपोर्ट का इंतजार, नोटिस जारी होंगे
    इन सभी पुलिसकर्मियों की विभागीय जांच रिपोर्ट एसटीएफ द्वारा संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक से ली जाएगी। इस दौरान इन्हें नोटिस जारी होंगे और पासपोर्ट बनाने वाले केस में एसटीएफ भी बयान दर्ज करेगी।

    सेवा केंद्र के कर्मचारी की तलाश में लगी टीमें
    भोपाल में रहने वाले एजेंट नसीम अख्तर ने पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी का नाम बताया था। पासपोर्ट सेवा केंद्र का कर्मचारी पंजाब-हरियाणा बार्डर के जिले में पदस्थ है। अब उसकी तलाश में टीमें लगी हैं। इसके बाद आगे की चेन पता लगेगी।

        पुलिस सत्यापन में लापरवाही हुई, इसलिए पासपोर्ट जारी हुए। पहले ही यह चूक पकड़ ली जाती तो बड़ा नेटवर्क का राजफाश हो सकता था। लापरवाही की जांच के लिए संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा गया है। नोटिस भी जारी किए जाएंगे, एसटीएफ सभी के बयान लेगी। डी. वर्मा, एडीजी, एसटीएफ

  • नालंदा में 3 अक्टूबर से सजेगा विश्व रंग भोपाल का आठवां संस्करण

    नालंदा में 3 अक्टूबर से सजेगा विश्व रंग भोपाल का आठवां संस्करण

    विश्वरंग, भोपाल का आठवां संस्करण नालंदा, बिहार में 3 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक

    नालंदा में होगा भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान-परम्परा पर राष्ट्रीय संवाद

    देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार होंगे सहभागी
    भोपाल

    भारत की भाषाई, साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए नालंदा में एक राष्ट्रीय स्तर के बहुआयामी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। विश्वरंग, भोपाल द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों, अनुवादकों, शोधकर्ताओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता होगी।

    इस आयोजन में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल तथा नालंदा विश्वविद्यालय के साथ-साथ सी. वी. रमन यूनिवर्सिटी, वैशाली, आइसेक्ट यूनिवर्सिटी हजारीबाग, स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल, सी वी रमन यूनिवर्सिटी, बिलासपुर, सी वी रमन यूनिवर्सिटी, खण्डवा, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, आईआईटी खड़गपुर, त्रिपुरा विश्वविद्यालय, मिजोरम विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), कलकत्ता विश्वविद्यालय, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा एमिटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रहेगी। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र से नन्द किशोर आचार्य, अरुण कमल, अलका सरावगी, ए. अरविन्दाक्षन, देवेन्द्र राज अंकुर, जितेंद्र श्रीवास्तव, जयंत परमार, प्रफुल्ल शिलेदार, यतीन्द्र मिश्र, सोमा बंद्योपाध्याय और अनंत विजय सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार एवं विचारक कार्यक्रम में सहभागी होंगे।

    कार्यक्रम के लिए नालंदा का चयन केवल उसके ऐतिहासिक महत्व के कारण नहीं किया गया है। नालंदा भारतीय उपमहाद्वीप और एशिया के बीच ज्ञान, विचार और संस्कृति के ऐतिहासिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर कार्यक्रम में यह विचार किया जाएगा कि भारत की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक विरासत आज के समय में किस प्रकार नए सांस्कृतिक संवाद और बौद्धिक सहयोग का आधार बन सकती है।

    कार्यक्रम का एक प्रमुख आयाम भारतीय ज्ञान-परम्परा और शिक्षा होगा। नालंदा की शिक्षा-दृष्टि, अनुसंधान, बहुविषयक अध्ययन तथा भारत की बौद्धिक परम्परा पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्राचीन भारतीय शिक्षा-अनुभव और समकालीन उच्च शिक्षा के बीच संभावित संवाद पर विचार किया जाएगा।

    भारतीय भाषाओं को कार्यक्रम में विशेष महत्व दिया गया है। दक्षिण एशियाई भाषाओं की साझा सांस्कृतिक जमीन, भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंध और भाषाई विविधता में निहित सांस्कृतिक एकात्मता पर विमर्श होगा। पूर्वोत्तर भारत की भाषाओं और साहित्य को भी कार्यक्रम में विशेष स्थान दिया गया है।

    कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं में साहित्यिक अनुवाद, भाषा और परम्परा के संबंध तथा अनुवाद के माध्यम से विभिन्न भारतीय समाजों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संवाद पर चर्चा होगी। भारतीय भाषाओं के साहित्य के अनुवाद-पाठ का आयोजन भी किया जाएगा।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष भारत के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ ऐतिहासिक एवं समकालीन संबंधों से जुड़ा होगा। नालंदा से लेकर व्यापार, यात्राओं, सांस्कृतिक संपर्कों और विचारों के आदान-प्रदान तक भारत और एशिया के बीच बने संबंधों को वर्तमान संदर्भ में देखने का प्रयास किया जाएगा। इसी क्रम में व्यापार, संस्कृति और सतत विकास के अंतर्संबंधों पर भी चर्चा होगी, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय संतुलन, उत्तरदायी उद्यम और विकास की नई अवधारणाओं को सांस्कृतिक दृष्टि से देखने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के अंतर्गत पटना में रवीन्द्रनाथ टैगोर की सांस्कृतिक चेतना और उनके सांस्कृतिक अवदान पर विशेष विमर्श, चित्रकला प्रदर्शनी, चित्रकला कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।

    विश्वरंग के महानिदेशक संतोष चौबे के अनुसार, कार्यक्रम का मूल उद्देश्य अतीत के गौरव का केवल स्मरण करना नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से जोड़कर देखना है। नालंदा इस संवाद के लिए एक ऐसी ऐतिहासिक भूमि उपलब्ध कराता है जहाँ भारत और एशिया के बीच ज्ञान, भाषा और संस्कृति के दीर्घकालिक संबंधों को एक साथ देखा जा सकता है।