Category: मध्य प्रदेश

  • 791 किमी सड़कों के लिए कटेंगे 2.89 लाख पेड़? भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

    791 किमी सड़कों के लिए कटेंगे 2.89 लाख पेड़? भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

     भोपाल
    भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।

    सड़क का नेटवर्क, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
     भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किमी सड़क नेटवर्क से लगभग 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने ओवरलैपिंग मार्किंग व हरियाली के नुकसान को लेकर चिंता जताई है।में भोपाल के ड्राफ्ट मास्टर प्लान 2047 में प्रस्तावित 791 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क को लेकर पर्यावरणविदों और शहर के विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। योजना के तहत 18 से 75 मीटर तक चौड़ी सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण से 2.89 लाख पेड़ों पर खतरा मंडराने लगा है। हाल ही में एनएचएआइ की 16.44 किमी लंबी सड़क के लिए लगभग 6,000 पेड़ काटे गए थे। इस आधार पर देखें तो पूरे 791.42 किमी नेटवर्क के निर्माण से सांकेतिक रूप से करीब 2.89 लाख पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल सकती है। 1,450 रुपए प्रति पेड़ की मुआवजा दर के अनुसार इसका सांकेतिक मूल्य लगभग 42 करोड़ रुपए बनता है। इससे पहले भी बायपास और विभिन्न सड़क परियोजनाओं के नाम पर राजधानी में हजारों पेड़ों की बलि दी जा चुकी है।

    डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। इस प्रकार की ओवरलैपिंग से व्यावसायिक गतिविधियों को वैधता मिल सकती है। 

    गौरव वैद्य के अनुसार वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव सड़कों का अंतिम रेखांकन, संबंधित मार्गों पर मौजूद वर्तमान वनस्पति की स्थिति, भू-अधिग्रहण की वास्तविक आवश्यकताएं और सड़कों के वास्तविक चौड़ीकरण का विस्तार जैसी बातों पर निर्भर करेगा।30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा।

    धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़भोपाल में काटे जाएंगे 2.89 लाख पेड़। 

    ओवरलैपिंग मार्किंग पर उठे सवाल
    मैनिट भोपाल के डिपार्टमेंट ऑफ आकिटेक्चर एंड प्लानिंग के एचओडी प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार धोटे ने प्रस्तावित सड़कों की मार्किंग में विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि कई मार्ग, जो पहले से 10 मीटर या 15 मीटर की चौड़ाई में प्रस्तावित थे, वहां अतिरिक्त मार्किंग दिखाई दे रही है। इन्हें मिलाकर देखने पर गलियारा 24 मीटर से भी अधिक चौड़ा हो जाता है। 

    प्रस्तावित सड़क नेटवर्क का ढांचा
    18 मीटर चौड़ी सड़कें- 111
    24 मीटर चौड़ी सड़कें- 103
    30 मीटर चौड़ी सड़कें- 48
    45 मीटर चौड़ी सड़कें- 17
    60 मीटर चौड़ी सड़कें- 15
    ये नई सड़कें देंगी नया आकार

    09 मीटर- 2 सड़कें
    12 मीटर- 4 सड़कें
    15 मीटर- 2 सड़कें
    70 मीटर- 4 सड़कें
    75 मीटर-6 सडकें

    प्रोजेक्ट भोपाल की हरियाली के लिए खतरा
    पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई से शहर का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। वहीं मैनिट के प्रो. डॉ. धोटे और शहरी नियोजन विशेषज्ञ ने सड़कों की ओवरलैपिंग मार्किंग पर नीतिगत सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव अंतिम रेखांकन और मौके पर मौजूद हरियाली की स्थिति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल यह प्रस्ताव भोपाल की हरियाली के लिए बड़ा खतरा नजर आ रहा है।

    वित्तीय एवं पर्यावरणीय मानक
    एनएचएआइ संदर्भ दरः 365 पेड़ प्रति किलोमीटर
    संभावित सांकेतिक वृक्ष कटाई: लगभग 2.89 लाख पेड़
    निर्धारित मुआवजा दरः 1,450 रुपए प्रति पेड़
    अनुमानित कुल मुआवजा राशिः लगभग 42 करोड़ रुपए

     

  • गुना में बाल विवाह पर बड़ा खुलासा, हर चौथी लड़की की शादी 18 साल से पहले; आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

    गुना में बाल विवाह पर बड़ा खुलासा, हर चौथी लड़की की शादी 18 साल से पहले; आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

     गुना 

    गुना में कम उम्र में शादी की परंपरा कानून और जागरूकता के बावजूद खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 के आंकड़े बताते हैं कि 20 से 24 वर्ष की उम्र की हर चार में करीब एक युवती का विवाह 18 साल की कानूनी उम्र से पहले हो चुका था। जिले में इसका अनुपात 25.9% है। पांच साल पहले हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 में यह 28.1% था, यानी कमी तो आई, लेकिन राज्य के 20% औसत से गुना अभी भी काफी ऊपर है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली तस्वीर पुरुषों के आंकड़े में सामने आई है।

    25 से 29 वर्ष की उम्र के 39% पुरुषों की शादी 21 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले हुई। इसके पहले के सर्वे में यह अनुपात 21.8% था। यानी पांच साल में कम उम्र में शादी करने वाले पुरुषों का अनुपात 17.2% अंक बढ़ गया। राज्य का औसत 25% है।

    पुरुषों का आंकड़ा सबसे बड़ा अलार्म; 5 साल में 21.8% से 39% : बाल विवाह की चर्चा में आमतौर पर लड़कियों के आंकड़ों पर फोकस रहता है, लेकिन गुना में पुरुषों का आंकड़ा ज्यादा बड़ा सवाल खड़ा करता है। 25-29 वर्ष के 39% पुरुषों की शादी 21 साल से पहले हुई।

    पांच साल पहले यह अनुपात 21.8% था। यानी इसमें करीब 80% की सापेक्ष बढ़ोतरी हुई है। राज्य में 21 साल से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का औसत 25% है। गुना का आंकड़ा इससे 14 प्रतिशत अंक अधिक है।

    शादी जल्दी तो मातृत्व भी जल्दी, किशोरियों में आंकड़ा 8.5%
    कम उम्र में विवाह का एक और संकेत किशोरियों के मातृत्व के आंकड़े में दिखता है। जिले में 15-19 वर्ष की 8.5% किशोरियां सर्वे के समय या तो मां बन चुकी थीं या गर्भवती थीं। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 5.5% था। यानी पांच साल में इसमें 3% अंक की बढ़ोतरी हुई। मप्र का औसत 5.6% है, जबकि गुना इससे भी ऊपर है।

    इसके पीछे कारण शिक्षा भी है। जिले में 15-49 वर्ष की केवल 18.9% महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा पूरी की है। जबकि प्रदेश में इसका औसत 33.7% है। यह आंकड़ा दिखाता है कि प्रदेश के मुकाबले बालिका शिक्षा में गुना की स्थिति बेहद खराब है। यही स्थिति लड़कों की शिक्षा में भी है।

     

  • किसानों के लिए जरूरी खबर! समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार-बाजरा उपार्जन का पंजीयन जारी, अब तक 3 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

    किसानों के लिए जरूरी खबर! समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार-बाजरा उपार्जन का पंजीयन जारी, अब तक 3 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

    समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन : मंत्री राजपूत

    10 अक्टूबर तक होगा पंजीयन

    भोपाल

    खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिये पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 3 लाख 5 हजार 82 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय में पंजीयन करा लें, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। प्रदेश में 1100 से अधिक पंजीयन केन्द्र बनाये गये हैं।

    जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824, नर्मदापुरम में 16 हजार 398, भोपाल में 8 हजार 599, रीवा में 94 हजार 384, शहडोल में 21 हजार 456 और सागर संभाग में 16 हजार 155 किसानों ने पंजीयन कराया है।

    पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था

    पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। प्रति पंजीयन के लिये 50 रूपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। किसान पंजीयन के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज़ एवं किसान के आधार कार्ड एवं अन्य फोटो पहचान पत्रों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाना अनिवार्य होगा।

    सिकमी/बटाईदार/कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन सहकारी संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्रों पर उपलब्ध होगी। इस श्रेणी के शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन राजस्व विभाग द्वारा किया जाएगा।

    सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देशित किया गया है कि जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केन्द्रों को क्रियाशील रखा जाए जिससे किसान वहां जाकर आसानी से अपना मोबाईल नंबर एवं बायोमेट्रिक अपडेट करा सके। इस कार्य के लिए पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केन्द्र का भी उपयोग किया जा सकता है। आधार नंबर से बैंक खाता लिंक कराने के लिए बैंकों के साथ भी समन्वय आवश्यक होगा। किसान के आधार लिंक बैंक खाते के सत्यापन के लिये पंजीयन के दौरान ही एक रूपये का ट्रांजेक्शन मध्यप्रदेश राज्य आपूर्ति निगम द्वारा ई-उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से कराया जाएगा।

    आधार नंबर का वेरिफिकेशन

    पंजीयन कराने और फसल बेचने के लिए आधार नंबर का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। वेरीफिकेशन आधार नंबर से लिंक मोबाईल नंबर पर प्राप्त ओटीपी से या बायोमेट्रिक डिवाईस से किया जा सकेगा। किसान का पंजीयन केवल उसी स्थिति में हो सकेगा जबकि किसान के भू-अभिलेख के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। भू-अभिलेख और आधार कार्ड में दर्ज नाम में विसंगति होने पर पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराया जाएगा। सत्यापन होने की स्थिति में ही उक्त पंजीयन मान्य होगा।

     

  • भोपाल में जुटेंगे 20 हजार युवा, CM मोहन यादव बताएंगे रोजगार से AI-रोबोटिक्स तक भविष्य का रोडमैप

    भोपाल में जुटेंगे 20 हजार युवा, CM मोहन यादव बताएंगे रोजगार से AI-रोबोटिक्स तक भविष्य का रोडमैप

    भोपाल 

    भोपाल में 6 अक्टूबर को सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 आयोजित होगा, जहाँ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओंमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार युवाओं से सीधा संवाद करेंगे।AI, रोबोटिक्स, ड्रोन जैसी भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान।मध्य प्रदेश की युवा शक्ति को रोजगार, कौशल, स्टार्टअप और नई तकनीकों से जोड़ने के लिए सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ.

    मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। कॉन्क्लेव में युवाओं को कॅरियर और रोजगार के नए विकल्पों के साथ ही नवाचार और उभरती तकनीकों की संभावनाओं से भी रूबरू कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रविवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सभी तैयारियां तय समय-सीमा में पूरी करने और युवाओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।कॉन्क्लेव में रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और नई तकनीकों पर विशेष सत्र और गतिविधियां होंगी।

     विशेषज्ञों के साथ शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और स्टार्टअप भी इसमें शामिल होंगे। युवाओं को बदलते जॉब मार्केट, नए कौशल की जरूरत, स्वरोजगार की संभावनाओं और अपने आइडिया को बिजनेस में बदलने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।कॉन्क्लेव में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की भागीदारी रहेगी। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, उद्योग, एमएसएमई, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष, पुलिस और साइबर सुरक्षा समेत कई विभाग युवाओं के लिए संचालित योजनाओं और अवसरों की जानकारी देंगे। मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर और सेडमैप की ओर से भी स्वरोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां प्रस्तुत की जाएंगी।कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रदर्शनी कक्ष लगाए जाएंगे। 

    इनमें विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, संस्थाओं और स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार, कॅरियर, प्रशिक्षण, अनुसंधान, उद्यमिता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। विश्वविद्यालयों की ओर से ड्रोन तकनीक, नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और कॅरियर से जुड़े प्रोजेक्ट और प्रस्तुतियां भी होंगी।

    युवा कॉन्क्लेव में भविष्य की तकनीकों को खास जगह दी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और रिसर्च की संभावनाओं से युवाओं को परिचित कराया जाएगा। इसका मकसद युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई तकनीकों और इनोवेशन के क्षेत्र में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करना है।मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर के माध्यम से नवोदित उद्यम अपने उत्पाद और नए प्रयोग प्रदर्शित करेंगे। युवा इन स्टार्टअप के जरिए यह समझ सकेंगे कि किसी विचार को उत्पाद, सेवा और सफल उद्यम में कैसे बदला जा सकता है।

     कॉन्क्लेव में कॅरियर मार्गदर्शन और कौशल विकास के साथ मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य, आयुष, उद्योग, रोजगार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञ जानकारी देंगे। पुलिस विभाग की ओर से महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव, यातायात जागरूकता, सामुदायिक पुलिसिंग और जन-सुरक्षा से जुड़े विषयों पर युवाओं के साथ संवाद किया जाएगा।CM मोहन यादव ने मंडला को दिया 460 करोड़ का तोहफा, टाइगर सफारी-जू से पान की खेती तक कई बड़े ऐलानयुवा कॉन्क्लेव में ज्ञान और मार्गदर्शन के साथ मनोरंजन का भी इंतजाम रहेगा। 

    कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां युवाओं का उत्साह बढ़ाएंगी।सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को संवाद, कौशल, कॅरियर, रोजगार और नवाचार के अवसरों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री डॉ.

    मोहन यादव के साथ 20 हजार से अधिक युवाओं का संवाद और 80 से ज्यादा प्रदर्शनी कक्ष इस आयोजन को प्रदेश के युवा केंद्रित बड़े आयोजनों में शामिल करेगा। सरकार का जोर युवा प्रतिभा और ऊर्जा को सही अवसर देकर विकसित मध्य प्रदेश की दिशा में आगे बढ़ाने पर है।

  • नर्मदा उद्गम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, अमरकंटक में 11,657 हेक्टेयर में नया शहर; 4 गांवों में खुलेंगे होटल-रिसॉर्ट

    नर्मदा उद्गम की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम, अमरकंटक में 11,657 हेक्टेयर में नया शहर; 4 गांवों में खुलेंगे होटल-रिसॉर्ट

    अमरकंटक 
    मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा उद्गम स्थल को प्रदूषण से बचाने के लिए अमरकंटक सैटेलाइट सिटी बसाएगी। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने निवेश क्षेत्र का दायरा सात हजार से बढ़ाकर 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा कर दिया है। चार गांवों की जमीन पर होटल, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं बनेंगी। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा।मध्य प्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए सरकार यहां एक सुनियोजित नया शहरी क्षेत्र विकसित करेगी। इसके लिए अमरकंटक के निवेश क्षेत्र का दायरा 7 हजार से बढ़ाकर 11,657 हेक्टेयर से अधिक कर दिया गया है।

    नर्मदा उद्गम स्थल की सुरक्षा
    इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हुई थी। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) ने इसके लिए निवेश क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है।

    योजना के तहत पर्यटकों के ठहरने की जगह नर्मदा के उद्गम स्थल से दूर बनाई जाएगी। दुकानें और दूसरी कारोबारी गतिविधियां भी वहां से हटाई जाएंगी। इसका मकसद गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकना है।

    नर्मदा को प्रदूषण से बचाना मकसद
    इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद हुई। उनका उद्देश्य नर्मदा के उद्गम स्थल को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित रखना है।

    इसके लिए पर्यटकों की नई बसाहट और व्यावसायिक गतिविधियों को उद्गम स्थल से दूर ले जाने की योजना है, ताकि सीवेज नर्मदा में न पहुंचे। अगले दो महीने में नए निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार होगा। इसमें होटल, सड़क और आवासीय क्षेत्रों की जगह तय की जाएगी।

    इन 4 गांवों में बनेगी सैटेलाइट सिटी
    सैटेलाइट सिटी के लिए चुने गए चार गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत कम बाधाओं के साथ सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करने में मदद मिलेगी।

    नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है।
    नर्मदा उद्गम (Narmada river origin) का इलाका धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से अहम है। इसी वजह से सरकार वहां सुनियोजित शहरी क्षेत्र विकसित करना चाहती है। क्या इससे उद्गम पर दबाव घटेगा? योजना का मकसद पर्यटन का बोझ उद्गम से दूर रखना है।

    अमरकंटक सैटेलाइट सिटी कहां बनेगी?
    निवेश क्षेत्र (वह इलाका जिसमें विकास की योजना बनती है) का दायरा बढ़ा है। पहले यह करीब सात हजार हेक्टेयर था। अब यह 11 हजार 657 हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है।

    नई सैटेलाइट सिटी चार गांवों की दो हजार 134.14 हेक्टेयर जमीन पर बसेगी। यह इलाका अमरकंटक के मुख्य संवेदनशील क्षेत्र से दूर है। यहां होटल, रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट और आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी।

    इन 4 गांवों में बनेगा नया शहर
    अमरकंटक सैटेलाइट सिटी (Amarkantak satellite city) के लिए पोंडी, लालपुर, बरसोत और सेंदुखार गांव चुने गए हैं। इन चारों गांवों में आबादी कम है। इससे सरकार को कम बाधाओं में सुनियोजित शहरी क्षेत्र बनाने में मदद मिलेगी।

    ये आंकड़े 2011 की जनगणना के हैं। पोंडी सबसे बड़ा हिस्सा है। यहां 999.21 हेक्टेयर जमीन है और आबादी 1,554 है। लालपुर में 447.97 हेक्टेयर जमीन और 810 लोग हैं। बरसोत में 417.14 हेक्टेयर जमीन और 521 लोग हैं। सेंदुखार में 269.80 हेक्टेयर जमीन और सिर्फ 69 लोग हैं। चारों गांवों की कुल आबादी करीब तीन हजार है।

    15 गांव/क्षेत्रीय इकाइयों का मास्टर प्लान
    अमरकंटक के मुख्य क्षेत्र और नई सैटेलाइट सिटी समेत कुल 15 क्षेत्रीय इकाइयों को नए निवेश क्षेत्र में शामिल किया गया है। इन्हें चार श्रेणियों में बांटा गया है।

    कृषि भूमि पर कॉटेज और स्विमिंग पूल
    अमरकंटक के विकास के लिए 2020 में मास्टर प्लान में बदलाव कर कृषि भूमि पर ‘कृषि पर्यटन’ को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया था।

    मध्य प्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत कृषि भूमि पर कॉटेज, कैंपिंग साइट, रेस्टोरेंट, योग-नेचुरोपैथी केंद्र, वेलनेस/आध्यात्मिक केंद्र और स्विमिंग पूल की अनुमति दी गई।

    इसके अलावा गैर-प्रदूषणकारी उद्योग, मधुमक्खी पालन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

  • बागदेव के घने जंगलों में अनोखा X आकार, एक ओर नेशनल हाईवे-46 तो दूसरी तरफ दिल्ली-चेन्नई रेलमार्ग

    बागदेव के घने जंगलों में अनोखा X आकार, एक ओर नेशनल हाईवे-46 तो दूसरी तरफ दिल्ली-चेन्नई रेलमार्ग

    इटारसी 

    इटारसी के पास बागदेव के घने जंगलों में एक ऐसा नजारा है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. यहां ग्वालियर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग एक-दूसरे को X आकार में पार करते हैं. ऊंचाई से देखने पर रोड और रेलवे ट्रैक का यह संगम बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. चारों ओर हरियाली और पहाड़ियों के बीच बना यह स्थान पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। 

    पहाड़ी कटेगी,बनेगा नया कलवर्ट ब्रिजइटारसी के बागदेव की तस्वीर बदलने की तैयारी
    लेकिन इस खूबसूरत जगह पर सफर करना फिलहाल आसान नहीं है. रेलवे पुल के नीचे सड़क का रास्ता संकरा होने के कारण यहां अक्सर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. खासकर छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

    अब इस समस्या को दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और रेलवे मिलकर बड़ा विकास कार्य करने की तैयारी में हैं. इसके तहत सड़क और रेलवे दोनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। 

    वर्तमान में इस रेल पुल के नीचे एकल मार्ग होने के कारण यहां वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी असुविधा होती है। अब एनएचएआई और रेलवे मिलकर यहां एक मेगा डबल एक्शन प्लान पर काम कर रहे हैं। इस विस्तृत योजना के तहत, हाईवे को टू-लेन करने के लिए पास की पहाड़ी को काटकर रास्ता निकाला जाएगा।

    नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनेगा : मुख्य रेल ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुल के नीचे एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा। इसके अलावा, इस महत्वपूर्ण गलियारे की क्षमता बढ़ाने के लिए यहां तीसरी और चौथी रेल पटरी के लिए भी नए पुल तैयार किए जाएंगे।

    इस बड़े विकास कार्य के पूरा होने पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारह मुखी हनुमान मंदिर जाने वाले यात्रियों व श्रद्धालुओं का सफर पूरी तरह से सुगम और बाधा रहित हो जाएगा।

    पहाड़ी काटकर चौड़ा होगा हाईवे
    योजना के अनुसार नेशनल हाईवे को टू-लेन किया जाएगा. इसके लिए पास की पहाड़ी के एक हिस्से को काटकर सड़क के लिए एक्सट्रा जगह बनाई जाएगी. इससे इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और जाम की समस्या काफी कम होने की उम्मीद है। 

    रेलवे पुल के नीचे बनेगा नया कलवर्ट
    मुख्य रेलवे ढांचे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल के नीचे एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा. इससे सड़क को पर्याप्त चौड़ाई मिलेगी और वाहनों के निकलने के लिए बेहतर रास्ता तैयार होगा. इसके साथ ही भविष्य में रेल यातायात बढ़ाने के लिए तीसरी और चौथी रेल पटरी के लिए भी नए पुल बनाए जाने की योजना है. इससे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों के संचालन में भी सुविधा होगी। 

    यह परियोजना पूरी होने के बाद सड़क और रेलवे दोनों का आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है. तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले यात्रियों और श्रद्धालुओं को जाम से राहत मिलेगी. इसके साथ ही बागदेव का यह अनोखा X आकार का संगम आने वाले समय में और सुगम और  आकर्षक पर्यटन की जगह बन सकता है। 

    मध्य प्रदेश के इटारसी के पास बागदेव के जंगलों में ग्वालियर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेलवे लाइन एक 'एक्स' (X) आकार में एक दूसरे को पार करती हैं, जो ऊपर से देखने पर बहुत सुंदर दिखाई देता है।

    रेलवे ब्रिज के नीचे सड़क संकरी होने के कारण यहाँ अक्सर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। विशेष रूप से छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर तवानगर, शरद देव बाबा और ग्यारहमुखी हनुमान मंदिर जाने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    यातायात की समस्या को हल करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग को दो-लेन बनाया जाएगा जिसके लिए पहाड़ी को काटा जाएगा, और रेलवे ब्रिज के नीचे पर्याप्त चौड़ाई के साथ एक नया विशेष कलवर्ट ब्रिज बनाया जाएगा।

  • सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों की रचनात्मकता से रूबरू होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों की रचनात्मकता से रूबरू होंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल 

    सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत कल 6 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल, भोपाल में विद्यार्थियों की चित्रकला प्रदर्शनी एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रस्तुतियों का अवलोकन करेंगे। साथ ही विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी प्रतिभा एवं रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थिति रहेंगे।

    17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश सरकार द्वारा सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा भी प्रदेश भर के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व, रचनात्मकता और जनभागीदारी से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    मेरे सपनों का भारत थीम पर आयोजित प्रदर्शनी में विद्यार्थी अपने चित्रों के माध्यम से विकसित और सशक्त भारत की अपनी कल्पना प्रस्तुत करेंगे। वहीं भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थी अपने विचारों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और सेवा भावना में युवाओं की भूमिका पर अपनी बात रखेंगे।

     

  • बाल विवाह पर अब और कसेगा शिकंजा, सीएमपीओ को मिलेगा कानून और कार्रवाई का गहन प्रशिक्षण

    बाल विवाह पर अब और कसेगा शिकंजा, सीएमपीओ को मिलेगा कानून और कार्रवाई का गहन प्रशिक्षण

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में बाल विवाह की रोकथाम को और प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों का राज्य स्तरीय क्षमतावर्धन किया जा रहा है। विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से 6 अक्टूबर को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के स्वर्ण जयंती सभागार में एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, बाल विवाह के प्रकरणों में प्रभावी कार्रवाई तथा अन्य संबंधित कानूनों के साथ इसके जुड़ाव पर अधिकारियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    कार्यशाला की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया करेंगी। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ सामान्य प्रशासन, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी और अधिसूचित बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी शामिल होंगे। बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिले से लेकर ग्राम स्तर तक तथा नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद स्तर पर सीएमपीओ अधिसूचित किए गए हैं। इनमें बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    कानून की जानकारी से लेकर जमीनी कार्रवाई तक होगा प्रशिक्षण

    प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सीएमपीओ को केवल कानून की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि बाल विवाह की सूचना मिलने से लेकर उसके प्रभावी प्रतिषेध, संबंधित विभागों के साथ समन्वय, प्रकरणों की रिपोर्टिंग और प्रभावित बालिकाओं के संरक्षण तक उनकी भूमिका को स्पष्ट और प्रभावी बनाना है। अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के साथ किशोर न्याय अधिनियम, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के आपसी जुड़ाव की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में बाल विवाह के प्रकरणों में कानून के अनुरूप कार्रवाई, संबंधित विभागों और एजेंसियों की भूमिका तथा स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। साथ ही बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल की सतत निगरानी और उस पर प्रकरणों की प्रभावी रिपोर्टिंग के संबंध में भी सीएमपीओ की क्षमतावृद्धि की जाएगी।

    सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय की भी दी जाएगी जानकारी

    कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों को विस्तार से समझाने के साथ माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सोसायटी फॉर इन्लाइंटमेंट एण्‍ड वॉलेन्टरी एक्शन एण्ड अनदर वर्सस यूनियन ऑफ इंडिया एण्ड अदर मामले में दिए गए निर्णय की जानकारी भी दी जाएगी। यह सत्र बाल विवाह की रोकथाम के लिए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और अधिकारियों की जिम्मेदारियों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा। बाल विवाह के प्रकरणों में पुलिस, विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचायती राज संस्थाओं और महिला एवं बाल विकास विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। इसी विषय पर विभिन्न विभागों और एजेंसियों के प्रतिनिधियों की पैनल चर्चा होगी, जिसमें बाल विवाह रोकथाम के लिए आपसी सहयोग और मैदानी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    किशोरियों के अनुभव बताएंगे कि बाल विवाह रोकना क्यों जरूरी

    कार्यशाला में बाल विवाह रोकने के लिए स्वयं आगे आई किशोरी बालिकाओं को भी अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। इससे अधिकारियों को बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को जमीनी अनुभवों के माध्यम से समझने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण और उन्हें बाल विवाह के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए सक्षम बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा होगी। बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार की गई व्यावहारिक मार्गदर्शिका और प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन भी किया जाएगा। इन सामग्रियों का उद्देश्य सीएमपीओ को कानून के साथ मैदानी परिस्थितियों में कार्रवाई के लिए व्यावहारिक दिशा प्रदान करना है।

    पुलिस से पंचायत तक सभी विभागों की भूमिका होगी स्पष्ट

    कार्यशाला में बाल विवाह रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों और उनसे अपेक्षाओं को भी रेखांकित किया जाएगा। पुलिस की भूमिका, विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया, पंचायत एवं ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र तथा नगरीय निकायों की जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाएगा। इस दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के मिशन वात्सल्य, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ टीम, स्टेट सपोर्ट टीम तथा संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी भी सहभागिता करेंगे। यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में शामिल होंगे।

    विशेषज्ञ देंगे कानून और मैदानी कार्रवाई का प्रशिक्षण

    कार्यशाला में बाल अधिकार एवं बाल विवाह से जुड़े विषयों के विशेषज्ञ अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे। सु भारती अली, बाल अधिकार विशेषज्ञ, नई दिल्ली बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय सहित बाल विवाह रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण देंगी।  गुरमुख सिंह लांबा, अधिवक्ता एवं वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार, किशोर न्याय समिति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर पीसीएमए के जेजे एक्ट, पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता से जुड़ाव की जानकारी देंगे।  गोविंद बेनीवाल, बाल संरक्षण अधिकारी, यूनिसेफ, मध्यप्रदेश सीएमपीओ की भूमिका, जिम्मेदारियों और बाल विवाह के प्रकरणों की रिपोर्टिंग से संबंधित प्रशिक्षण देंगे।

    वरिष्ठ अधिकारी करेंगे मार्गदर्शन

    कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त  संदीप जी. आर., सचिव मती जी.व्ही. रश्मि, पंचायत राज संचालनालय के संचालक सह आयुक्त  छोटे सिंह, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त  संकेत भोंडवे, मध्यप्रदेश पुलिस में महिला सुरक्षा के विशेष पुलिस महानिदेशक  अनिल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मार्गदर्शन करेंगे। पुलिस उप महानिरीक्षक (सामुदायिक पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजगढ़ के  देवदत्त तथा पंचायत राज संचालनालय के उप निदेशक  सुधीर जैन भी बाल विवाह रोकथाम में अपने विभागों की भूमिका और आपसी समन्वय के विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों से संवाद करेंगे।

     

  • कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कस्बों और नगरों से राजधानी तक पहुंचना हुआ है सुगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गाडरवारा और नरसिंहपुर ही नहीं प्रदेश के अनेक कस्बों और नगरों से सड़क मार्ग द्वारा राजधानी तक पहुंचना सुगम हो गया है। सड़कों के शानदार नेटवर्क से यह संभव हुआ है। फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों ने नागरिकों की आवाजाही को आसान बनाया है। इसके साथ ही सिंचाई, कृषि, शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। विकास की यह यात्रा तेज गति के साथ जारी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के लिए आए गाडरवारा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए राज्य शासन द्वारा किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वृहद आकार की गजमाला और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुविधायुक्त शिक्षा प्रदान की जा रही है। विद्यालय का नामकरण सांदीपनि महर्षि के नाम से किया गया है जिससे महर्षि के शिष्यों भगवान कृष्ण और सुदामा के मैत्री भाव का महत्व विद्यार्थी समझ सकें। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में विकास की गति को बढ़ाने का कार्य किया है। विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री  मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।

    स्कूल शिक्षा और परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गत ढाई वर्ष में क्षेत्र को अनेक सौगातें मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में जो स्वीकृतियां प्रदान की हैं, उनमें 20 किलोमीटर लंबाई की नगर चीचली- सालीचौका रोड शामिल है जिसकी लागत 60 करोड़ होगी। वर्तमान सिंगल रोड के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा समाप्त हो जाएगी। इस निर्माण कार्य के अंतर्गत दूधी नदी पर पुल भी बनाया जाएगा। इसके अलावा अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग का निर्माण भी 27 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा। यह 17.50 किलोमीटर लंबाई का मार्ग होगा। इससे मारेगांव, बसुरिया, अमाड़ा, पचामा और घुटंगा ग्रामों के निवासी भी लाभान्वित होंगे। साईं खेड़ा में 132 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण होने से भविष्य में विद्युत प्रदाय अधिक सुचारू हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गाडवारा नगर में 5 करोड़ रुपए लागत से गौशाला के निर्माण और 35 सामुदायिक भवनों की स्वीकृति दी गई है। यही नहीं इंडोर स्टेडियम के निर्माण की मंजूरी भी प्रदान की गई है।

    अच्छी सड़कों ने बचाया समय, ईंधन और ऊर्जा

    कार्यक्रम में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने बताया कि गाडरवारा क्षेत्र विकास के ऐसे आयाम प्राप्त कर रहा है जिसकी कल्पना नहीं की गई थी। गाडरवारा से भोपाल आने में कभी 6 से 8 घंटे का समय लगता था। अब सड़क मार्ग द्वारा लगभग 3 घंटे में यह दूरी तय करना संभव हो गया है। अच्छी सड़कों से समय, ईंधन और ऊर्जा की बचत हो रही है। नगर चीचली- सालीचौका, अर्जुन गांव- गाडरवारा मार्ग की स्वीकृति के साथ ही 13 अन्य मार्गों के निर्माण की पहल भी हुई है, जो क्षेत्र के नागरिकों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

     

  • महात्मा गांधी सान्दीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया संसद भवन का भ्रमण

    महात्मा गांधी सान्दीपनि विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया संसद भवन का भ्रमण

    भोपाल 

    महात्मा गांधी सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा भोपाल के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन का भ्रमण किया। विद्यालय को लगातार तीसरी बार युवा संसद प्रतियोगिता में विजेता बनने से विद्यार्थियों को यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।

    पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ, भोपाल द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष 'युवा संसद' प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, इसमें विद्यार्थियों के दल द्वारा संसद की कार्यवाही से संबंधित लगभग एक घंटे की प्रस्तुति दी जाती है। इस प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले विद्यालय के विद्यार्थियों को संसद भवन भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाता है। युवा संसद प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष विजेता बनने पर महात्मा गांधी सांदीपनी विद्यालय के 2 होनहार छात्रों संस्कार साहू एवं लखन धानक को संसदीय विद्यापीठ की ओर से दिल्ली भेजा गया।

    विद्यार्थियों ने देखी लोकसभा की कार्यवाही

    विद्यार्थियों ने लोकसभा की कार्यवाही को नजदीक से देखा तथा संसद परिसर में स्थित संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को दिल्ली के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर करने का भी अवसर मिला, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। भ्रमण के दौरान युवा संसद प्रभारी शिक्षिका  रेखा पाटीदार भी छात्रों के साथ उपस्थित रहीं और उन्होंने पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्राचार्य  सुधाकर पाराशर, उप प्राचार्य  पी. विजय कुमार, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार ने विजेता छात्रों एवं प्रभारी शिक्षकों  रेखा पाटीदार,  पूनम वास्तव, डॉ दीप्ति सोलंकी एवं  रक्षा गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सफलता की कामना की है।

     

     

    भोपाल 

    महात्मा गांधी सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा भोपाल के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन का भ्रमण किया। विद्यालय को लगातार तीसरी बार युवा संसद प्रतियोगिता में विजेता बनने से विद्यार्थियों को यह सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।

    पंडित कुंजीलाल दुबे संसदीय विद्यापीठ, भोपाल द्वारा स्कूली विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष 'युवा संसद' प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, इसमें विद्यार्थियों के दल द्वारा संसद की कार्यवाही से संबंधित लगभग एक घंटे की प्रस्तुति दी जाती है। इस प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले विद्यालय के विद्यार्थियों को संसद भवन भ्रमण का अवसर प्रदान किया जाता है। युवा संसद प्रतियोगिता में लगातार तीसरे वर्ष विजेता बनने पर महात्मा गांधी सांदीपनी विद्यालय के 2 होनहार छात्रों संस्कार साहू एवं लखन धानक को संसदीय विद्यापीठ की ओर से दिल्ली भेजा गया।

    विद्यार्थियों ने देखी लोकसभा की कार्यवाही

    विद्यार्थियों ने लोकसभा की कार्यवाही को नजदीक से देखा तथा संसद परिसर में स्थित संग्रहालय एवं प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विद्यार्थियों को दिल्ली के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर करने का भी अवसर मिला, जो उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। भ्रमण के दौरान युवा संसद प्रभारी शिक्षिका  रेखा पाटीदार भी छात्रों के साथ उपस्थित रहीं और उन्होंने पूरे कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि पर प्राचार्य  सुधाकर पाराशर, उप प्राचार्य  पी. विजय कुमार, शिक्षकगण एवं समस्त विद्यालय परिवार ने विजेता छात्रों एवं प्रभारी शिक्षकों  रेखा पाटीदार,  पूनम वास्तव, डॉ दीप्ति सोलंकी एवं  रक्षा गुप्ता को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के साथ सफलता की कामना की है।