Category: धर्म अध्यात्म

  • मंगल का नीच राशि में गोचर, 18 सितंबर से इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

    मंगल का नीच राशि में गोचर, 18 सितंबर से इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

     वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के सेनापति मंगल देव को साहस, पराक्रम, भूमि, रक्त और ऊर्जा का कारक माना गया है. जब भी मंगल अपनी राशि परिवर्तित करते हैं, तो मानव जीवन और प्रकृति पर इसका गहरा और सीधा असर पड़ता है. 18 सितंबर 2026 को मंगल देव अपनी मित्र राशि सिंह से निकलकर अपनी नीच राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करने जा रहे हैं.

    कर्क राशि जल तत्व की राशि है और मंगल अग्नि तत्व का ग्रह हैं. अग्नि और जल के इस मेल के साथ-साथ मंगल के अपनी नीच राशि में होने के कारण उनकी शुभता में भारी कमी आ जाती है. मंगल देव 18 सितंबर से 12 नवंबर 2026 तक (लगभग 55 दिनों तक) इसी नीच अवस्था में विराजमान रहेंगे.

    नीच के मंगल का यह गोचर व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, अनावश्यक गुस्सा, दुर्घटना, आर्थिक नुकसान और रिश्तों में खटास ला सकता है. मुख्य रूप से 4 राशियों को इन 55 दिनों के दौरान विशेष सतर्कता और सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी:

    मेष राशि (Aries)
    प्रभाव: मंगल आपकी ही राशि के स्वामी हैं और आपके चौथे (सुख, माता व संपत्ति) भाव में नीच होकर गोचर करेंगे.

    बढ़ेगी चुनौती: पारिवारिक जीवन में अशांति और माता जी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है. प्रॉपर्टी या मकान से जुड़े लेन-देन में जल्दबाजी न करें, धोखा हो सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तीखी बहस हो सकती है. अपने गुस्से पर काबू रखें, वरना बने बनाए काम बिगड़ सकते हैं.

    मिथुन राशि (Gemini)
    प्रभाव: आपकी राशि से मंगल का गोचर दूसरे (धन व वाणी) भाव में होने जा रहा है.

    बढ़ेगी चुनौती: आपकी कड़वी वाणी बने बनाए रिश्तों और काम को बिगाड़ सकती है. अचानक बड़े और अनावश्यक खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे आपका बजट गड़बड़ा सकता है. पैसों के लेन-देन या किसी को उधार देने से बचें. सेहत के मोर्चे पर मुख या दांतों से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है.

    तुला राशि (Libra)
    प्रभाव: मंगल देव आपकी राशि से दसवें (कर्म, करियर व पिता) भाव में नीच के होकर विराजमान रहेंगे.

    बढ़ेगी चुनौती: कार्यक्षेत्र और नौकरी में परिस्थितियां आपके प्रतिकूल हो सकती हैं. उच्च अधिकारियों (Boss) के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं. नौकरी बदलने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें. व्यापार से जुड़े लोगों को प्रतिद्वंदियों से कड़ी चुनौती मिलेगी और घाटा होने की आशंका रहेगी. पिता जी की सेहत का विशेष ध्यान रखें.

    धनु राशि (Sagittarius)
    प्रभाव: आपकी राशि से मंगल का यह गोचर आठवें (अष्टम – संकट, दुर्घटना व गुप्त शत्रु) भाव में होगा.

    बढ़ेगी चुनौती: अष्टम भाव में नीच के मंगल का गोचर स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है. वाहन बहुत सावधानी से चलाएं, चोट-चपेट या दुर्घटना का खतरा बना रहेगा. कोर्ट-कचहरी या विवादों से दूर रहें. गुप्त शत्रु आपको नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं. वित्तीय जोखिम वाले किसी भी काम में हाथ न डालें.

    मंगल के अशुभ प्रभाव दूर करने के अचूक उपाय
    – 18 सितंबर से 12 नवंबर तक प्रतिदिन या हर मंगलवार को कम से कम 3 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें.

    – मंगलवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और लाल चंदन या लाल कनेर के फूल अर्पित करें.

    – मंगलवार के दिन किसी गरीब या जरूरतमंद को गुड़, लाल वस्त्र या लाल मसूर की दाल का दान करें.

    – इस दौरान अपने व्यवहार में नम्रता लाएं, बहसबाजी से बचें और सात्विक आहार ग्रहण करें.

  • गुरुवार को इन राशियों की बदलेगी किस्मत! 17 सितंबर राशिफल में धन लाभ के प्रबल योग

    गुरुवार को इन राशियों की बदलेगी किस्मत! 17 सितंबर राशिफल में धन लाभ के प्रबल योग

    मेष
    करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। वहीं, खुद और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए।

    वृषभ
    आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। व्यवसायों में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है और कुछ नुकसान होने की भी आशंका है।

    मिथुन
    आज फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। आपके काम की सराहना होगी और तारीफ भी मिलेगी। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा।

    कर्क
    आज ऑयली फूड से दूरी बनाएं और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। आज का दिन संतोषजनक रहेगा। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है और नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है।

    सिंह
    आज आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। आज आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए।

    कन्या
    आज परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है। दिन के दूसरे पहर के बाद नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए।

    तुला
    आज करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे आसमान नापेंगे और आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

    वृश्चिक
    आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा। कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं और आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे।

    धनु
    आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है, हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। अहंकारी न होने का प्रयास करें। सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों।

    मकर
    आज पार्टनरशिप में व्यवसाय करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। दिन के दूसरे भाग में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है। कारोबार फलेगा-फूलेगा।

    कुंभ
    आज अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं। आज का दिन धन और वित्त के मामले में अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा।

    मीन
    आज के दिन आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी लेकिन कुछ अप्रत्याशित खर्चे चीजें बिगाड़ सकते हैं और तनाव का कारण बन सकते हैं। इसलिए तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें।

  • Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

    Ramayana के ‘जय जय राम’ में दिखा राम-भरत का भावुक रिश्ता, जानें भरत के त्याग की पूरी कहानी

     नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी फिल्म रामायण का पहला गाना 'जय जय राम' हाल ही में रिलीज हुआ है. ए.आर. रहमान के संगीत, डॉ. कुमार विश्वास के बोल और अरिजीत सिंह व श्रेया घोषाल की सुरीली आवाज से सजा यह गाना दर्शकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है. इस गाने में श्रीराम (रणबीर कपूर) और माता सीता (साई पल्लवी) के भव्य विवाह, अयोध्या में नगरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा से स्वागत और राजा दशरथ (अरुण गोविल) के साथ भावनात्मक दृश्यों को दिखाया गया है. लेकिन इस पूरे गाने का सबसे दिल को छू लेने वाला दृश्य वह है, जहां श्रीराम अपने छोटे भाई भरत से गले मिलते हैं.

    इस गाने के माध्यम से फिल्म मेकर्स ने भरत के किरदार में नजर आने वाले एक्टर आदिनाथ कोठारे की पहली झलक भी दिखाई है. तो आइए जानते हैं कि रामायण में भरत का किरदार कितना महत्वपूर्ण था और आदिनाथ कोठारे पर्दे पर जिसका किरदार निभाएंगे उनका वास्तविक सच क्या है.

    कौन थे भरत?
    रामायण व रामचरितमानस के मुताबिक, भरत केवल श्रीराम के भाई (अनुज) नहीं थे, बल्कि वे निस्वार्थ प्रेम, धर्म और त्याग के सर्वोच्च प्रतीक भी माने जाते हैं. भरत सूर्यवंशी राजा दशरथ और उनकी प्रिय रानी कैकेयी के पुत्र थे. बचपन से ही भरत का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति स्नेह और आदर रखते थे. भरत का विवाह राजा जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री मांडवी से हुआ था.

    मातृ-मोह पर धर्म की विजय
    रामायण के अनुसार, जब भरत अपने ननिहाल (कैकेय देश) से अयोध्या लौटे और उन्हें ज्ञात हुआ कि उनकी माता कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर श्री राम को 14 वर्ष का वनवास पर भेजा है और उनके लिए राजसिंहासन मांगा है, तो वे अत्यंत दुखी और लज्जित हुए. भरत ने बिना किसी झिझक के अपनी माता के इस अनुचित कार्य का विरोध किया. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अयोध्या के सिंहासन पर केवल बड़े भाई श्रीराम का अधिकार है और किसी भी अनैतिक सुख को वे स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने अपनी माता कैकेयी के इस अपराध की कठोर शब्दों में निंदा भी की थी.

    चित्रकूट में राम-भरत मिलाप
    इसके बाद भरत केवल दुखी होकर शांत नहीं बैठे, बल्कि वे पूरी अयोध्या नगरी, माताओं और गुरु वशिष्ठ के साथ श्री राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट के जंगलों की ओर चल पड़े थे. चित्रकूट में जब श्रीराम और भरत का मिलाप हुआ, तो वह प्रसंग इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई थी. भरत ने श्रीराम के चरणों में गिरकर अयोध्या वापस लौटने की विनती भी की थी. हालांकि, श्रीराम ने अपने पिता के वचनों का मान रखते हुए अयोध्या लौटने से इनकार कर दिया था.

    जब श्री राम ने लौटने से मना कर दिया था, तो भरत ने श्री राम की 'चरण पादुकाएं' (खड़ाऊ) मांगी थी. उन्होंने संकल्प लिया कि वे कभी भी अयोध्या के राजसिंहासन पर नहीं बैठेंगे. भरत ने श्री राम की पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान किया और स्वयं को केवल उनका 'प्रतिनिधि' (सेवक) मानकर राज्य का संचालन किया था.

    नंदीग्राम में 14 वर्षों का कठिन तपस्वी जीवन
    भरत केवल नाम के त्यागी नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने आचरण से उसे सिद्ध किया था. उन्होंने राजमहल के सारे सुख-वैभव का त्याग कर दिया था. महल के वैभव और सुख-सुविधाओं को छोड़कर, भरत ने अयोध्या के बाहर नंदीग्राम में एक साधारण कुटिया बनाई थी. जहां 14 वर्षों तक उन्होंने भी अपने भाई श्रीराम की तरह सिर पर जटाएं रखीं, वल्कल वस्त्र पहने, कंद-मूल खाया और भूमि पर सोकर एक तपस्वी का जीवन बिताया था. उनका मानना था कि यदि उनके भाई श्रीराम वनों में कष्ट सह रहे हैं, तो वे महल की सुख-सुविधाओं का आनंद लेने के हकदार नहीं हैं.

    आज के समाज के लिए भरत का संदेश
    भरत का चरित्र हमें सिखाता है कि रिश्ते, मूल्य और भ्रातृ-प्रेम किसी भी भौतिक संपत्ति या पद से कहीं ऊपर होते हैं. उन्होंने सिद्ध किया था कि सच्चा अधिकार वही है जो धर्म और न्याय पर आधारित हो, न कि जबरन छीना गया हो.

  • घर में पुराने कपड़ों से पोछा लगाना कितना शुभ? वास्तु के अनुसार जानें सही नियम

    घर में पुराने कपड़ों से पोछा लगाना कितना शुभ? वास्तु के अनुसार जानें सही नियम

    घर की साफ-सफाई न केवल स्वच्छता के लिहाज से जरूरी है, बल्कि इसका सीधा संबंध घर की सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि से भी होता है. वास्तु शास्त्र में पोछा लगाने के तरीकों, समय और इस्तेमाल की जाने वाली चीजों को लेकर कई नियम बताए गए हैं. अक्सर घरों में देखा जाता है कि लोग पुराने, फटे या बेकार हो चुके कपड़ों (जैसे पुरानी टी-शर्ट, बनियान या तौलिया) को पोछा बनाकर फर्श साफ करने लगते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना वास्तु के अनुसार सही है? आइए जानते हैं कि पुराने कपड़ों से पोछा लगाना शुभ माना जाता है या अशुभ.

    पुराने कपड़ों से पोछा लगाना: शुभ या अशुभ?
    वास्तु शास्त्र के अनुसार, पुराने या फटे-पुराने कपड़ों से घर में पोछा लगाना अत्यंत अशुभ माना जाता है. इसके पीछे कई मुख्य ज्योतिषीय और वास्तु कारण हैं.

    दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का वास
    पुराने और कटे-फटे कपड़े 'नकारात्मक ऊर्जा' और 'राहु-केतु' के प्रभाव को दर्शाते हैं. जब आप इनसे पूरे घर के फर्श को पोंछते हैं, तो पूरे घर में नकारात्मकता फैलती है, जिससे आर्थिक तंगी (दरिद्रता) आने लगती है.

    मां लक्ष्मी की नाराजगी
    घर की साफ-सफाई में फटे-पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करने से घर का वास्तु दोष बढ़ता है. माना जाता है कि ऐसे घर में मां लक्ष्मी का वास नहीं होता और धन की आवक रुक जाती है.

    गृह क्लेश और बीमारियां
    पुराने पहने हुए कपड़ों में व्यक्ति की पुरानी ऊर्जा जुड़ी होती है. जब उन कपड़ों को घिस-घिसकर पोछा बनाया जाता है, तो घर के सदस्यों में मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और बीमारियां बढ़ने की आशंका रहती है.

    विशेषकर फटे अंडरगारमेंट्स या फटे तौलिए
    कई लोग पुराने अंडरगारमेंट्स या तौलिए का इस्तेमाल पोछा लगाने में करते हैं. वास्तु के अनुसार ऐसा करना सबसे बड़ा दोष माना जाता है. इससे घर की तरक्की में रुकावट आती है.

    वास्तु के अनुसार पोछा लगाने के सही नियम
    – हमेशा साफ-सुथरे और इसी काम के लिए बने सूती पोछे (Mop) का ही उपयोग करें.

    – हफ्ते में कम से कम एक या दो बार (विशेषकर गुरुवार को छोड़कर) पोछे के पानी में थोड़ा सा खड़ा सेंधा नमक या समुद्री नमक मिलाएं. नमक घर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है और सकारात्मकता लाता है.

    – सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले पोछा लगाना सबसे उत्तम माना जाता है. सूर्यास्त के बाद कभी भी घर में झाड़ू-पोछा नहीं करना चाहिए, इससे धन हानि होती है.

    – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन पोछा लगाने से ईशान कोण कमजोर होता है और देवगुरु बृहस्पति नाराज होते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा और घर की समृद्धि पर बुरा असर पड़ता है.

  • शिव पुराण में घोर कलयुग के लक्षण, जानिए कैसा होगा मनुष्य और समाज का भविष्य

    शिव पुराण में घोर कलयुग के लक्षण, जानिए कैसा होगा मनुष्य और समाज का भविष्य

    जैसे जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है, वैसे ही युगों का परिवर्तन भी निश्चित माना गया है. हिंदू धर्म ग्रंथों में समय के चक्र को चार युगों में बांटा गया है – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग. वर्तमान समय को कलयुग माना जाता है. हमारे धर्म ग्रंथों में कलयुग की विशेषताओं और उस दौरान होने वाले बदलावों का भी वर्णन मिलता है. तो आइए जानते हैं कि शिव पुराण के अनुसार घोर कलयुग आने पर मनुष्य का जीवन और समाज कैसा होगा.

    कलयुग में पुण्य कर्मों से दूर होंगे लोग
    शिव पुराण में वर्णित कलयुग के लक्षणों के अनुसार, घोर कलयुग आने पर मनुष्य पुण्य कर्मों से दूर होते चले जाएंगे और दुराचार में फंसेंगे. लोग सत्य बोलने से मुंह मोड़ लेंगे और दूसरों की निंदा करने में अधिक रुचि रखेंगे. पराए धन को हड़पने की इच्छा बढ़ेगी और दूसरे की स्त्री के प्रति आसक्ति जैसी बुराइयों का भी वर्णन मिलता है. लोग दूसरे प्राणियों की हिंसा करने से भी नहीं हिचकेंगे. मनुष्य अपने शरीर को ही आत्मा समझने लगेगा. उसमें सद्गुणों का अभाव होगा और उसकी बुद्धि पशुवत होती चली जाएगी. माता-पिता के प्रति भी द्वेष की भावना बढ़ने की बात कही गई है.

    धर्म और ज्ञान का स्वरूप बदल जाएगा
    ग्रंथ में ब्राह्मणों के संदर्भ में भी कलयुग के कुछ लक्षण बताए गए हैं. कहा गया है कि वे लोभ के प्रभाव में आ सकते हैं और वेदों को बेचकर जीविका चलाने जैसी प्रवृत्तियां बढ़ सकती हैं. विद्या का उद्देश्य ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि केवल धन कमाना रह जाएगा.

    लोग अपनी परंपरागत जिम्मेदारियों और कर्मों को छोड़ देंगे. दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति बढ़ेगी. नियमित धार्मिक कर्मकांड और संध्यावंदन जैसी परंपराओं से दूरी बढ़ने की बात भी कही गई है. ब्रह्मज्ञान के प्रति भी लोगों की रुचि कम होने का वर्णन मिलता है.

    क्षत्रियों में शौर्य की कमी की बात
    कलयुग के वर्णन में क्षत्रिय वर्ग के बारे में भी कहा गया है कि वे धर्म का त्याग करने लगेंगे. उनमें शौर्य और पराक्रम की कमी होगी और वे अनुचित तरीकों से जीवनयापन करने लगेंगे. धर्म और कर्तव्य के स्थान पर गलत कार्यों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति बढ़ने का वर्णन मिलता है.

    व्यापार में छल-कपट बढ़ने की बात
    वैश्य वर्ग के संदर्भ में ग्रंथ में धर्म और संस्कारों से दूर होने की बात कही गई है. धन कमाना ही उनका प्रमुख उद्देश्य बन जाएगा. व्यापार में नाप-तौल की बेईमानी और दूसरे तरीकों से लोगों को ठगने जैसी प्रवृत्तियों का भी वर्णन मिलता है. इसी तरह, शूद्रों के बारे में भी कहा गया है कि वे अपने निर्धारित कर्मों को छोड़कर दूसरे वर्गों के आचार-विचार अपनाने लगेंगे. बाहरी वेशभूषा और दिखावे पर अधिक जोर होगा, जबकि अपने कर्तव्यों से दूरी बढ़ती जाएगी.

    विद्वान होकर भी विवाद में उलझेंगे लोग
    कलयुग के लोगों के स्वभाव को लेकर भी कई बातें कही गई हैं. मनुष्य अपने धर्म और कर्तव्य से दूर हो सकता है और उसके विचार धर्म के विपरीत होने लगेंगे. कुटिलता और दूसरों की निंदा जैसी प्रवृत्तियां बढ़ने की बात कही गई है.

    कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति धनवान होगा तो वह उसका इस्तेमाल गलत कामों में कर सकता है. वहीं, विद्वान व्यक्ति भी ज्ञान का उपयोग सत्य की खोज के बजाय वाद-विवाद में अपनी श्रेष्ठता साबित करने के लिए कर सकता है.

    लोग स्वयं को ऊंचा और कुलीन समझकर सामाजिक मर्यादाओं की सीमाएं भी तोड़ेंगे. अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच ऐसे वैवाहिक और सामाजिक संबंधों का वर्णन मिलता है, जिन्हें उस समय की व्यवस्था के विरुद्ध माना गया था.

    कलयुग की स्त्रियों के बारे में क्या कहा गया है?
    शिव पुराण के इस वर्णन में कलयुग की स्त्रियों के संदर्भ में भी कुछ नकारात्मक लक्षण बताए गए हैं. इसमें सदाचार से दूर होने, पति का अपमान करने और सास-ससुर के प्रति द्वेष रखने जैसी प्रवृत्तियों का उल्लेख मिलता है. उनके आचरण, खान-पान और व्यवहार में बदलाव आने की बात कही गई है. पति की सेवा और पारिवारिक जिम्मेदारियों से विमुख होने जैसे लक्षणों का भी वर्णन मिलता है.

    हालांकि, इन वर्णनों को उस समय के धार्मिक-सामाजिक संदर्भ में समझना जरूरी है. इन्हें आज के समाज के हर व्यक्ति या हर महिला पर लागू करना उचित नहीं होगा.

    क्या आज दिखाई दे रहे हैं कलयुग के ये लक्षण?
    शिव पुराण में कलयुग को लेकर बताए गए इन वर्णनों को पढ़ने के बाद कई लोगों को लगता है कि आज के समाज में भी इनमें से कुछ प्रवृत्तियां दिखाई देती हैं. झूठ, लालच, छल, हिंसा, स्वार्थ और रिश्तों में बढ़ती दूरी जैसी समस्याएं आज भी समाज में मौजूद हैं. लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी प्राचीन ग्रंथ में वर्णित भविष्यवाणी और आधुनिक घटनाओं के बीच सीधा वैज्ञानिक संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता. ये बातें धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों में वर्णित युग-चक्र के संदर्भ में देखी जाती हैं.

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलयुग की अवधि बहुत लंबी मानी गई है. इसलिए वर्तमान समय को कलयुग का शुरुआती चरण माना जाता है और इसके समाप्त होने में अभी बहुत लंबा समय बाकी बताया जाता है.

  • 18 सितंबर को उदित होंगे बुध, बनेगा भद्र राजयोग; इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    18 सितंबर को उदित होंगे बुध, बनेगा भद्र राजयोग; इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    : वैदिक ज्योतिष में बुद्धि, व्यापार, तर्क, संवाद और अर्थव्यवस्था के कारक ग्रह बुध को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. 18 सितंबर 2026 का दिन खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बेहद खास रहने वाला है. इस दिन बुध देव अपनी सबसे प्रिय और उच्च राशि कन्या (Virgo) में उदित (Astro Rise) होने जा रहे हैं.

    जब कोई ग्रह उदित होता है, तो उसकी शक्ति और फल देने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है. उच्च राशि में बुध के उदित होने से 'भद्र राजयोग' को पूर्ण बल प्राप्त होगा. बुध का यह महा-उदय कई जातकों के लिए बुद्धि के बल पर सफलता हासिल करने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के नए द्वार खोलेगा. विशेष रूप से 3 ऐसी राशियां हैं, जिनके लिए 18 सितंबर से 'मालामाल' होने के योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं किन खुशकिस्मत राशियों की किस्मत का ताला खुलने वाला है.

    वृषभ राशि (Vrishabha Rashi)
    शुभ स्थिति: आपकी राशि से पांचवें (ज्ञान, बुद्धि, निवेश व अचानक धन-लाभ) भाव में बुध देव उदित होने जा रहे हैं.

    मिलेगा यह फायदा: बुध का उदय आपके लिए आकस्मिक धन-लाभ के रास्ते खोलेगा. यदि आपने पहले कहीं निवेश किया था, तो उससे अब बड़ा रिटर्न मिल सकता है. शेयर बाजार, ट्रेडिंग या लॉटरी से जुड़े काम करने वाले जातकों को उम्मीद से ज्यादा फायदा होगा. विद्यार्थियों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है; प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी सफलता मिल सकती है.

    मिथुन राशि (Mithun Rashi)
    शुभ स्थिति: बुध आपकी राशि के स्वामी होकर आपके चौथे (सुख, संपत्ति व वाहन) भाव में उदित होंगे.

    मिलेगा यह फायदा: आपके लिए प्रॉपर्टी, नया मकान या वाहन खरीदने के मजबूत योग बन रहे हैं. पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई पुराना विवाद चल रहा था, तो फैसला आपके पक्ष में आ सकता है. नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन या सैलरी वृद्धि का शुभ समाचार मिल सकता है. जो लोग मीडिया, मार्केटिंग, आईटी या बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े हैं, वे बड़ा आर्थिक लाभ कमाएंगे.

    कन्या राशि (Kanya Rashi)
    शुभ स्थिति: बुध आपकी ही राशि (प्रथम भाव) के स्वामी हैं और वे आपकी राशि में ही उदित हो रहे हैं.

    मिलेगा यह फायदा: बुध के उदित होते ही आपकी सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता में जबर्दस्त सुधार आएगा. आपके रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. व्यापार से जुड़े लोगों को कोई बड़ी डील हाथ लग सकती है, जिससे भारी मुनाफा होगा. आपके व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ेगा और समाज व कार्यस्थल पर मान-सम्मान में भारी बढ़ोतरी होगी.

    बुध के उदय पर शुभ फल पाने के आसान उपाय
    – बुधवार के दिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा (दूब घास) चढ़ाएं और मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं.

    – किसी गरीब या जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र या स्टेशनरी की चीजें दान करें.

    – रोजाना तुलसी की माला से कम से कम 108 बार बुध देव के बीज मंत्र का जाप करें.

    – नियमित रूप से या बुधवार को गाय को हरा चारा या पालक खिलाएं.

  • 11 दिसंबर को शनि होंगे मार्गी, बनेगा धन लक्ष्मी राजयोग; इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

    11 दिसंबर को शनि होंगे मार्गी, बनेगा धन लक्ष्मी राजयोग; इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

    11 दिसंबर को शनि देव अपनी वक्री चाल समाप्त करके मार्गी होने जा रहे हैं. शनि की सीधी चाल से 'धन लक्ष्मी राजयोग' का अत्यंत दुर्लभ और शुभ निर्माण हो रहा है. ज्योतिष के अनुसार, इस राजयोग के प्रभाव से कई राशियों के जीवन से आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और काम में आ रही बाधाएं हमेशा के लिए समाप्त होंगी.

    क्या होता है शनि का मार्गी होना?
    जब कोई ग्रह पीछे की ओर चलता हुआ प्रतीत होता है, तो उसे 'वक्री' कहा जाता है. इसके विपरीत, जब वह वक्री अवस्था समाप्त करके वापस अपनी सामान्य और सीधी दिशा में चलने लगता है, तो ज्योतिष की भाषा में उसे 'मार्गी' होना कहते हैं. आइए जानते हैं वे कौन सी भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें शनि के मार्गी होने से भरपूर धन-दौलत और सफलता मिलने वाली है.

    वृषभ राशि (Taurus)
    वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का मार्गी होना भाग्य के दरवाजे खोलने जैसा रहेगा.

    धन लाभ: लंबे समय से अटका हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है. आय के नए स्रोत बनेंगे.

    करियर: नौकरीपेशा लोगों को मनचाही जगह ट्रांसफर या पदोन्नति (प्रमोशन) मिल सकती है.

    व्यापार: बिजनेस में किया गया पुराना निवेश अब भारी मुनाफा देना शुरू करेगा.

    मिथुन राशि (Gemini)
    मिथुन राशि के लोगों के लिए शनि देव की सीधी चाल जीवन में स्थिरता और तरक्की लेकर आएगी.

    आर्थिक मजबूती: धन लक्ष्मी राजयोग के प्रभाव से आपकी आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत होगी. बैंक बैलेंस में जबरदस्त इजाफा देखने को मिलेगा.

    नौकरी में बदलाव: यदि आप नौकरी बदलने का विचार कर रहे थे, तो बड़ी कंपनियों से अच्छे ऑफर आ सकते हैं.

    मान-सम्मान: समाज और परिवार में आपका कद और प्रतिष्ठा बढ़ेगी.

    तुला राशि (Libra)
    तुला राशि शनि देव की उच्च राशि मानी जाती है. ऐसे में शनि का मार्गी होना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

    प्रॉपर्टी और वाहन का सुख: नया घर, जमीन या वाहन खरीदने का सपना पूरा हो सकता है.

    कर्जों से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से कर्ज या उधारी से परेशान थे, तो उससे छुटकारा पाने के रास्ते खुलेंगे.

    पारिवारिक सुख: घर में चल रहे आपसी मतभेद खत्म होंगे और खुशहाली का माहौल रहेगा.

    कुंभ राशि (Aquarius)
    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं. अपनी ही राशि में शनि का मार्गी होना आपके लिए 'धन लक्ष्मी राजयोग' का सबसे बड़ा लाभ लेकर आएगा.

    करियर में बड़ी सफलता: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का पूरा फल मिलेगा. बॉस और उच्च अधिकारियों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा.

    व्यापारिक विस्तार: जो लोग नया काम शुरू करना चाहते हैं या बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे उत्तम रहेगा.

    मानसिक तनाव से राहत: पुरानी बीमारियों और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी.

    शनि देव की कृपा बनाए रखने के लिए उपाय
    – शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
    – जरूरतमंदों और गरीबों को काले तिल, उड़द की दाल या काले वस्त्रों का दान करें.
    – नियमित रूप से हनुमान चालीसा या ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें.

  • 16 सितंबर Horoscope: इन राशियों के लिए खास रहेगा बुधवार, नौकरी-धन के मामले में मिलेगा लाभ

    16 सितंबर Horoscope: इन राशियों के लिए खास रहेगा बुधवार, नौकरी-धन के मामले में मिलेगा लाभ

    मेष
    आपका दिमाग नए विचारों और क्रिएटिव एनर्जी से भरा हुआ है। आप खुद को नई चीजें सीखने और अपने आस-पास के लोगों के साथ अपने अनूठे विचारों को साझा करने के लिए अधिक खुला पाएंगे। अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन पर फोकस करें।

    वृषभ
    आज आपका दिन खास रहने वाला है। करियर लाइफ थोड़ी बिजी हो सकती है। शाम में अपने लवर के साथ अच्छा टाइम स्पेंड करेंगे। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें। खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है।

    मिथुन
    आज का आपका दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और धन लाभ भी होगा। वहीं, खर्च की अधिकता भी रहेगी। ज्यादा तनाव न लें और काम का प्रेशर घर पर न लाएं।

    कर्क
    आज जंक फूड्स का ज्यादा सेवन न करें। आज का दिन आपके लिए लाभकारी साबित होगा। कोई नया प्रोजेक्ट हाथ लग सकता है, जिससे धन लाभ भी होगा। कॉन्फिडेंट रहेंगे आज।

    सिंह
    आज लव के मामले में पार्टनर को टाइम देना जरूरी है। आज जंक फूड्स को नो कहें। कोई गुड न्यूज भी मिल सकती है। आज का आपका दिन फायदेमंद माना जा रहा है। करियर में आपको अपने बॉस का साथ मिलेगा।

    कन्या
    आज सिंगल लोगों की लाइफ में किसी नए शख्स की एंट्री होने की संभावना है। करियर में बैलेंस मेंटेन करके चलें। आपका कैरेक्टर ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धी है। आज का आपका दिन मिले-जुले परिणाम लेकर आया है।

    तुला
    कुछ जरूरी जिम्मेदारियां भी मिलेंगी। आज पॉजिटिव रहने की सलाह दी जाती है। धन लाभ के योग बन रहे हैं। सेहत अच्छी रहेगी लेकिन बाहर का खाना खाने से बचें। आज का आपका दिन शानदार रहेगा।

    वृश्चिक
    आज लाइफ पार्टनर के साथ थोड़ी बहुत अनबन हो सकती है। गुस्से को काबू में रखना ही बेहतर रहेगा। परिवार के किसी सदस्य की आर्थिक सहायता करनी पड़ सकती है, जिससे फाइनेंशियल सिचुएशन पर असर पड़ेगा।

    धनु
    आज पुराने इन्वेस्टमेंट से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। करियर तौर पर मोटिवेटेड और प्रोडक्टिव फील करेंगे। आज आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। बाहर का खाना खाने से बचें।

    मकर
    आज लाइफ में रोमांस बना रहेगा। आज आपका दिन नॉर्मल रहने वाला है। काम के प्रेशर से बचें और बेवजह की टेंशन न लें। 30 मिनट की एक्सरसाइज आपके लिए अच्छी रहेगी।

    कुम्भ
    अपनी फीलिंग्स को पार्टनर के साथ शेयर करना अच्छा रहता है। आर्थिक जीवन स्टेबल रहेगा। आपने खाने-पीने पर आज ध्यान दें। आज का दिन आपका रोमांचक रहेगा। खुद को हाइड्रेटेड जरूर रखें।

    मीन
    आज के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। स्ट्रेस फ्री रहने के लिए मेडिटेशन ट्राई करें। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है।

  • वास्तु शास्त्र में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, सही दिशा में रखने से आती है सुख-समृद्धि

    वास्तु शास्त्र में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है, सही दिशा में रखने से आती है सुख-समृद्धि

     वास्तु शास्त्र में झाड़ू को केवल सफाई का साधन ही नहीं, बल्कि धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में झाड़ू का आदर किया जाता है और उसे सही स्थान पर रखा जाता है, वहां सदैव सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. इसके विपरीत, यदि झाड़ू को घर में गलत दिशा या अनुचित स्थान पर रखा जाए, तो यह भयंकर वास्तु दोष का कारण बनता है, जिससे घर की बरकत रुक जाती है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है. जानें घर में झाड़ू रखने के मुख्य वास्तु नियम और किन-किन स्थानों पर झाड़ू बिल्कुल नहीं रखनी चाहिए.

    घर में इन स्थानों पर भूलकर भी न रखें झाड़ू
    ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा): यह कोण देवी-देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है. यहां झाड़ू रखने से घर की सुख-शांति भंग होती है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.

    रसोई घर (Kitchen): रसोई घर में अन्नपूर्णा का वास होता है. यहां झाड़ू रखने से अन्न और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं और घर के सदस्यों में बीमारी का कारण बन सकता है.

    बेडरूम (शयनकक्ष): बेडरूम में या पलंग के नीचे झाड़ू रखने से पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव, अनबन और नकारात्मकता बढ़ती है.

    पूजा घर: मंदिर या पूजा स्थल के पास झाड़ू रखना बेहद अशुभ माना गया है. इससे घर की बरकत रुक जाती है.

    मुख्य द्वार के सामने: घर के मेन गेट के ठीक सामने झाड़ू कभी न रखें, जिससे आने-जाने वालों की नजर उस पर सीधे पड़े. इससे घर में आने वाली लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है.

    तिजोरी या अलमारी के पास: जहां धन, गहने या पैसे रखे जाते हों, उस स्थान के पास झाड़ू रखने से धन का अपव्यय (फालतू खर्च) बढ़ता है.

    झाड़ू रखने की सही दिशा और नियम
    सही दिशा (दक्षिण-पश्चिम): वास्तु के अनुसार झाड़ू रखने के लिए सबसे शुभ दिशा दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम मानी जाती है.

    झाड़ू को छुपाकर रखें: झाड़ू को हमेशा ऐसे स्थान पर रखें जहां बाहर से आने वाले किसी मेहमान या घर के सदस्यों की नजर उस पर सीधे न पड़े.

    झाड़ू को लिटाकर रखें: झाड़ू को कभी भी खड़ा करके न रखें. खड़ी झाड़ू रखने से घर में धन की हानि और दरिद्रता आती है. झाड़ू को हमेशा जमीन पर लिटाकर रखना चाहिए.

    झाड़ू से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम
    – झाड़ू पर कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए और न ही इसे लांघना चाहिए. इसे लक्ष्मी जी का अनादर माना जाता है.

    – घर में टूटी हुई या बहुत पुरानी झाड़ू का उपयोग करने से वास्तु दोष बनता है.

    – सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाने या कचरा बाहर फेंकने से घर की लक्ष्मी बाहर चली जाती है.

    – पुरानी झाड़ू को बदलने के लिए शनिवार या अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना गया है.

  • गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक की होती है कठिन यात्रा

    गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा की यमलोक तक की होती है कठिन यात्रा

     मृत्यु हमारे जीवन का अटल सत्य है. इस पृथ्वी लोक पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को एक न एक दिन इस संसार को छोड़कर जाना पड़ता है. भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि आत्मा एक शरीर को त्यागकर दूसरा शरीर धारण करती है. यानी शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा को अमर माना गया है.

    अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि अगर आत्मा अमर है, तो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका क्या होता है? गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन मिलता है. इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा को यमलोक तक पहुंचने के लिए किस तरह की यात्रा से गुजरना पड़ता है.

    मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है?
    गरुड़ पुराण के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ ने उनसे पूछा कि मृत्यु के बाद जीवात्मा के साथ क्या होता है और वह कितने समय बाद यमलोक पहुंचती है. तब भगवान विष्णु ने उन्हें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में बताया. मान्यता के अनुसार, जब किसी जीव की मृत्यु का समय करीब आता है, तो उसकी आवाज कमजोर होने लगती है. अंतिम समय में उसे कुछ समय के लिए दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है. इस अवस्था में उसे संसार को अलग तरह से देखने का अनुभव होता है और उसकी इंद्रियां धीरे-धीरे शिथिल पड़ने लगती हैं.

    इसके बाद मृत्यु के समय यमराज के दूत वहां आते हैं. मान्यता है कि उन्हें देखकर जीवात्मा भयभीत हो जाती है और शरीर का त्याग कर देती है. शरीर से निकलने के बाद यमदूत जीवात्मा को अपने साथ ले जाते हैं.

    पवित्र आत्मा और पापी आत्मा की यात्रा
    गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार, जो जीवात्मा पुण्य कर्म करती है, उसकी यात्रा अलग होती है. वहीं पाप कर्म करने वाली आत्मा को कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता है. ऐसी आत्मा को यमलोक पहुंचने से पहले कई तरह की यातनाओं का सामना करना पड़ता है. मान्यता है कि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा को वापस उसी घर में लाया जाता है, जहां उसने अपना शरीर छोड़ा था. आत्मा अपने शरीर में दोबारा प्रवेश करने की कोशिश करती है, लेकिन ऐसा नहीं कर पाती. इसके बाद वह अपने परिवार को अंतिम संस्कार करते हुए देखती है.

    इसी वजह से हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद होने वाले कर्मकांडों और पिंडदान को महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इन कर्मों से मृत व्यक्ति की आत्मा की आगे की यात्रा में सहायता मिलती है.

    मृत्यु के बाद 13 दिनों तक क्यों किए जाते हैं कर्मकांड?
    हिंदू परंपरा में मृत्यु के बाद 13 दिनों तक अलग-अलग कर्मकांड किए जाते हैं. गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मों और पिंडदान से मृतक के सूक्ष्म शरीर को आगे की यात्रा के लिए शक्ति मिलती है. इसके बाद आत्मा की यमलोक की यात्रा शुरू होती है. इस यात्रा में उसे कई तरह के मार्गों और कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है.

    वैतरणी नदी को पार करना पड़ता है
    गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी का भी वर्णन मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह नदी यमलोक की यात्रा में आने वाली सबसे कठिन बाधाओं में से एक है. कहा जाता है कि वैतरणी नदी बेहद भयानक होती है और इसे पार करना आसान नहीं होता. मान्यता है कि जिसने अपने जीवन में गौसेवा या गाय से जुड़े पुण्य कर्म किए होते हैं, उसे इस नदी को पार करने में सहायता मिलती है. वहीं पाप कर्म करने वाली आत्मा को इसे पार करते समय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. धार्मिक ग्रंथों में वैतरणी नदी को बेहद भयावह रूप में बताया गया है. मान्यता के अनुसार, इसे पार करने के बाद आत्मा आगे की यात्रा करती हुई यमलोक पहुंचती है.

    यमलोक पहुंचने के बाद क्या होता है?
    गरुड़ पुराण की मान्यताओं के अनुसार, यमलोक पहुंचने के बाद जीवात्मा के कर्मों का लेखा-जोखा देखा जाता है. व्यक्ति ने जीवन में किस तरह के कर्म किए हैं, उसी के आधार पर उसे आगे का फल मिलता है. इसलिए हिंदू धर्म में अच्छे कर्म करने पर जोर दिया गया है. मान्यता है कि मृत्यु के बाद मनुष्य के साथ उसके धन-दौलत, रिश्ते या सांसारिक चीजें नहीं जातीं. उसके कर्म ही उसके साथ जाते हैं.

    इसलिए जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न हों, हमें हमेशा अच्छे कर्म करने का प्रयास करना चाहिए. गरुड़ पुराण में जीवन और मृत्यु से जुड़ी ऐसी कई गूढ़ बातें बताई गई हैं, जो मनुष्य को अपने कर्मों और जीवन के उद्देश्य के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करती हैं.