Category: धर्म अध्यात्म

  • Vastu Tips: रोटी की लोई बनाते समय न करें ये गलतियां, घर में बढ़ सकती है अशांति

    Vastu Tips: हिंदू परंपराओं में रसोई घर को केवल खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि देवी अन्नपूर्णा का पावन स्थान भी माना गया है. रसोई में किया जाने वाला हर छोटा-बड़ा काम, चाहे वह बर्तन रखने का तरीका हो या आटे की लोई बनाना, हमारे घर के वास्तु पर गहरा असर डालता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम रोटी बनाने के लिए आटे की लोई बनाते हैं, तो उसका सही आकार, तरीका और शुद्धता घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. वहीं, बेढंग या गलत तरीके से बनाई गई लोई न केवल स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है, बल्कि घर में अकारण कलह और वास्तु दोष का कारण भी बन सकती है. आइए जानते हैं कि रोटी की लोई बनाने से जुड़ा वास्तु विज्ञान क्या कहता है और कैसे एक गोल लोई आपके घर में सुख, शांति और मां लक्ष्मी की कृपा ला सकती है.

    टेढ़ी-मेढ़ी लोई और रोटी का वास्तु पर असर
    वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में टेढ़ी-मेढ़ी, कटी-फटी या अनियमित आकार की लोई बनाकर रोटी सेकना वास्तु में शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि बेढंग आकार की रोटियां घर के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य और विचारों में असंतुलन पैदा करती हैं, जिससे परिजनों के बीच अकारण मतभेद बढ़ते हैं.

    गोल लोई और सुंदर रोटी का महत्व
    गोल लोई बनाकर पूर्ण रूप से गोल रोटी बेलना सकारात्मकता, संतुलन और पूर्णता का प्रतीक है. गोल रोटी बनाने से घर में शांति और अन्नपूर्णा देवी की कृपा बनी रहती है.

    बासी या फ्रिज में रखे आटे की लोई बनाने की मनाही
    वास्तु शास्त्र और ज्योतिष दोनों में बचे हुए आटे की लोई बनाकर रोटी बनाने को सख्त मना किया गया है. ऐसा माना जाता है कि फ्रिज में रखा बासी आटा 'पिंड' के समान हो जाता है. ऐसे आटे पर राहु और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है.

    स्वास्थ्य और समृद्धि पर प्रभाव
    बासी आटे की लोई बनाकर पकाई गई रोटी खाने से घर में बीमारियां पनपती हैं और आर्थिक प्रगति रुक जाती है. हमेशा ताजा आटा गूंधकर ही लोई बनाएं.

    लोई में अंगुलियों के निशान न छोड़ें
    जब भी आप आटे की लोई बनाएं, तो उस पर उंगलियों के गहरे निशान दबाकर न छोड़ें (जैसा कि श्राद्ध या पिंड दान की लोई में किया जाता है). लोई को हमेशा दोनों हथेलियों के बीच घुमाकर चिकना और गोल रूप दें.

    रसोई और रोटी से जुड़े 4 अचूक वास्तु नियम
    – आटा गूंधने के बाद पहली लोई से बनने वाली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालें. इसमें थोड़ा सा गुड़ या घी रखकर देना घर में रिद्धि-सिद्धि और धन-धान्य बढ़ाता है.

    – भोजन बनाते समय आखिरी लोई की रोटी कुत्ते या अन्य मूक पशु-पक्षियों के लिए निकालें. इससे राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.

    – रोटी बनाते समय आपका मुख हमेशा पूर्व दिशा (East) की ओर होना चाहिए. इससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है और पाचन क्रिया अच्छी रहती है.

    – तवे पर रोटी बनाने से पहले उस पर चुटकी भर नमक छिड़कना या थोड़ा सा दूध छिड़कना बेहद शुभ माना जाता है. कभी भी गर्म तवे पर सीधे पानी न छिड़कें, इससे उत्पन्न छन-छन की आवाज वास्तु दोष पैदा करती है.

  • पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, जानें सभी तिथियां और जरूरी नियम

    पितृ पक्ष 2026: 26 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध, जानें सभी तिथियां और जरूरी नियम

    हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में पूर्वजों (पितरों) के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है. मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं और परिजनों द्वारा किए गए तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध कर्म से तृप्त होकर सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.

    वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 (शनिवार) को भाद्रपद पूर्णिमा से हो रही है, जिसका समापन 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा.

    पितृ पक्ष 2026 के श्राद्ध की संपूर्ण तिथि सूची
    जिस तिथि को पूर्वज का गोलोकवास (निधन) हुआ होता है, पितृ पक्ष में उसी तिथि को उनका श्राद्ध किया जाता है. यदि किसी की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो उनका श्राद्ध 'सर्वपितृ अमावस्या' के दिन करने का विधान है.

    महत्वपूर्ण तिथियां
    पूर्णिमा श्राद्धा- 26 सितंबर 2026, शनिवार
    प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- 27 सितंबर 2026, रविवार
    द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर 2026, सोमवार
    तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर 2026, मंगलवार
    चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध- 30 सितंबर 2026, बुधवार
    षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
    सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
    अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
    नवमी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर 2026, रविवार
    दशमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर 2026, सोमवार
    एकादशी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
    द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
    मघा तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
    त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
    चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
    सर्वपितृ अमावस्या-10 अक्टूबर 2026, शनिवार

    श्राद्ध कर्म के मुख्य और आवश्यक नियम
    -श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय में ही करना चाहिए. प्रातः काल या संध्या के समय श्राद्ध करना वर्जित माना गया है.

    – श्राद्ध का भोजन तैयार करने के बाद सबसे पहले पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौआ, देव और चींटी) के लिए भोजन का अंश निकालें. कौए को पितरों का संदेशवाहक माना जाता है, इसलिए उन्हें ग्रास देना अनिवार्य है.

    – श्राद्ध पूजा में काले तिल, जौ, कुशा (घास) और जल का उपयोग अनिवार्य रूप से करें. काले तिल से तर्पण करने पर पितर प्रसन्न होते हैं.

    – श्राद्ध के दिन किसी सात्विक ब्राह्मण को घर बुलाकर श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, तिल या दक्षिणा देकर विदा करें.

    कैसे करें श्राद्ध?
    पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए सही विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. दोपहर के कुतूप मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, गंगाजल और काले तिल से तर्पण करने के बाद सात्विक भोजन से पंचबलि (गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटी) का अंश निकालना अनिवार्य होता है. इसके पश्चात किसी योग्य और सात्विक ब्राह्मण को आदरपूर्वक भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा दी जाती है, जिससे प्रसन्न होकर पितर अपने वंशज को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

  • पितृ पक्ष में बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन 4 राशियों पर होगी धन की बारिश

    पितृ पक्ष में बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन 4 राशियों पर होगी धन की बारिश

    पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से होने जा रही है, जो कि 10 अक्टूबर को समाप्त होंगे. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो, इस बार पितृ पक्ष बहुत ही शुभ माना जा रहा है. पितृ पक्ष की शुरुआत से ठीक पहले शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि तुला राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां बुद्धि के कारक बुध ग्रह पहले से ही विराजमान रहेंगे. तुला राशि में शुक्र और बुध का यह महासंगम लक्ष्मी नारायण राजयोग बनाएगा.

    वैदिक ज्योतिष में शुक्र को सुख-सुविधा, वैभव, सौंदर्य व आकर्षण का कारक माना जाता है, जबकि बुध को बुद्धि, व्यापार, तर्क और संवाद का कारक माना गया है. जब भी इन दोनों शुभ ग्रहों की किसी राशि में युति (संयोग) होती है, तो अत्यंत शुभ और फलदायी 'लक्ष्मी नारायण राजयोग' का निर्माण होता है. यह राजयोग पितृ पक्ष के दौरान कई राशियों के जीवन से आर्थिक तंगी दूर कर सुख-समृद्धि लाएगा. मुख्य रूप से 4 ऐसी राशियां हैं, जिनके लिए यह शुभ योग अपार धन-लाभ और सफलता के नए अवसर लेकर आ रहा है.

    मिथुन राशि (Mithun Rashi)
    शुभ प्रभाव: आपकी राशि से पांचवें (ज्ञान, संतान व आकस्मिक धन-लाभ) भाव में यह महासंयोग बनने जा रहा है.

    मिलेगा यह फायदा: शेयर बाजार, ट्रेडिंग या किसी पुराने निवेश से उम्मीद से ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति (प्रमोशन) और मनचाहे इंक्रीमेंट का शुभ समाचार मिल सकता है. कला, मीडिया, लेखन और डिजाइनिंग के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के बड़े अवसर मिलेंगे.

    तुला राशि (Tula Rashi)
    शुभ प्रभाव: यह राजयोग आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में बनने जा रहा है, जिससे शुक्र और बुध दोनों आपको पूरा बल प्रदान करेंगे.

    मिलेगा यह फायदा: आपके आकर्षण, व्यक्तित्व और निर्णय लेने की क्षमता में जबर्दस्त सुधार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. यदि आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, तो अचानक धन लाभ के मजबूत योग बनेंगे. नया व्यापार शुरू करने या बिजनेस डील फाइनल करने के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा.

    मकर राशि (Makar Rashi)
    शुभ प्रभाव: आपके दसवें (कर्म, करियर व बिजनेस) भाव में शुक्र और बुध की युति होगी.

    मिलेगा यह फायदा: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की तारीफ होगी और बड़े अधिकारियों का पूरा समर्थन मिलेगा. यदि आप नई नौकरी की तलाश में हैं, तो कोई बड़ा पैकेज ऑफर हो सकता है. पैतृक संपत्ति या कारोबार से जुड़े किसी पुराने विवाद का हल निकलेगा, जिससे आपकी वित्तीय स्थिति काफी मजबूत होगी.

    कुंभ राशि (Kumbh Rashi)
    शुभ प्रभाव: आपकी राशि से नौवें (भाग्य व धार्मिक यात्रा) भाव में लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है.

    मिलेगा यह फायदा: आपके सोए हुए भाग्य का सितारा चमक उठेगा. रुके हुए काम बिना किसी अड़चन के पूरे होने लगेंगे. धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे. पितरों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा. विदेश से जुड़े व्यापार या विदेशी कंपनियों में काम करने वाले जातकों को भारी आर्थिक लाभ मिलेगा.

    लक्ष्मी नारायण राजयोग की शुभता बढ़ाने के उपाय
    – शुक्रवार के दिन घर के मंदिर में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करें तथा कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें.

    – किसी मंदिर में या जरूरतमंद को चावल, मिश्री, दूध या सफेद वस्त्र दान करें.

    – रोजाना ताजी रोटी पर थोड़ा सा गुड़ या घी लगाकर गाय को खिलाएं.

  • राहु-केतु की चाल बदलेगी किस्मत! 76 दिनों तक इन 6 राशियों पर बरसेगा धन

    राहु-केतु की चाल बदलेगी किस्मत! 76 दिनों तक इन 6 राशियों पर बरसेगा धन

    वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह और 'मायावी ग्रह' माना जाता है. नवग्रहों में ये दोनों ही ऐसे ग्रह हैं जो हमेशा उल्टी चाल यानी वक्री चलते हैं. राहु और केतु का गोचर काफी धीमी गति से होता है, इसलिए जब भी ये अपना नक्षत्र बदलते हैं, तो इसका असर सभी 12 राशियों के जीवन में दीर्घकालिक और गहरा दिखाई देता है.

    वर्तमान में राहु देव मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में विराजमान हैं, जबकि केतु देव स्वयं के नक्षत्र मघा में गोचर कर रहे हैं. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, राहु और केतु की यह चाल आने वाले 76 दिनों तक कई राशियों के लिए भाग्यशाली साबित होने वाली है. ज्योतिषविद् नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इन दोनों छाया ग्रहों की चाल से मुख्य रूप से 6 राशियों का बैंक बैलेंस बढ़ेगा और उन्हें जबरदस्त आर्थिक मुनाफा मिलेगा. आइए जानते हैं कि राहु और केतु के नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों की किस्मत चमकने वाली है:

    मघा नक्षत्र में केतु का गोचर: इन 4 राशियों को मिलेगा भारी लाभ
    केतु ग्रह 5 दिसंबर 2026 तक अपने ही स्वामित्व वाले मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे. केतु के इस नक्षत्र गोचर से निम्नलिखित 4 राशियों के जीवन में तरक्की और धन-समृद्धि के योग बन रहे हैं.

    मेष राशि (Aries): आपके साहस और निर्णय लेने की क्षमता में निखार आएगा. निवेश से उम्मीद से ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना है.

    सिंह राशि (Leo): आपके मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में भारी वृद्धि होगी. लंबे समय से अटकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी और करियर में नए अवसर मिलेंगे.

    वृश्चिक राशि (Scorpio): आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत होगी. बिजनेस में बड़े सौदे फाइनल हो सकते हैं और अचानक गुप्त धन-लाभ के योग बनेंगे.

    कुंभ राशि (Aquarius): साझेदारी में किए गए कार्यों से बेहतरीन मुनाफा मिलेगा. पारिवारिक जीवन में चल रही परेशानियां कम होंगी और आय के नए स्रोत बनेंगे.

    धनिष्ठा नक्षत्र में राहु का गोचर: इन 3 राशियों की होगी बल्ले-बल्ले

    राहु देव मंगल के धनिष्ठा नक्षत्र में 2 अगस्त 2026 से प्रवेश कर चुके हैं और वे वर्ष 2027 तक इसी नक्षत्र में संचार करेंगे. राहु के इस नक्षत्र परिवर्तन से 3 राशियों को विशेष फायदा होगा.

    मेष राशि (Aries): (राहु और केतु दोनों के प्रभाव से) मेष जातकों को दोहरे लाभ के योग हैं. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है.

    कन्या राशि (Virgo): कोर्ट-कचहरी या किसी पुराने विवाद से राहत मिलेगी. व्यापार में प्रतिस्पर्धियों पर आपकी बढ़त बनी रहेगी और मुनाफा बढ़ेगा.

    धनु राशि (Sagittarius): विदेश यात्रा या विदेशी स्रोतों से धन लाभ के योग बनेंगे. आपकी आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी और समाज में प्रभाव मजबूत होगा.

    राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से बचाव के अचूक उपाय
    राहु की शांति के लिए देवी दुर्गा की आराधना करें और केतु के शुभ फल पाने के लिए भगवान श्री गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें.

    – जरूरतमंद और असहाय लोगों को भोजन, जल, वस्त्र या अपनी क्षमतानुसार धन का दान करें.

    – तामसिक भोजन और शराब-सिगरेट जैसी आदतों से दूरी बनाएं.

    – किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान न करें. अपने अंदर अहंकार (Ego) और अत्यधिक क्रोध पर नियंत्रण रखें.

  • 22 सितंबर राशिफल: इन राशियों के लिए शुभ रहेगा मंगलवार, जानें किन्हें रहना होगा सतर्क

    22 सितंबर राशिफल: इन राशियों के लिए शुभ रहेगा मंगलवार, जानें किन्हें रहना होगा सतर्क

    मेष
    आज का दिन धन और वित्त के मामले में अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। दिन के बाद नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है।

    वृषभ
    आज का दिन संतोषजनक रहेगा। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है और नया कार्यभार मिलने की भी बड़ी संभावना है। आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है।

    मिथुन
    आज व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। जीवनसाथी के साथ बहस करने से बचें क्योंकि मनमुटाव की स्थिति पैदा हो सकती है। घूमने-फिरने का प्लान भी बन सकता है।

    कर्क
    हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। अहंकारी न होने का प्रयास करें और सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। कारोबार फलेगा-फूलेगा, इसलिए अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं।

    सिंह
    आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। आपके काम की सराहना होगी और तारीफ भी मिलेगी। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी।

    कन्या
    आज आज करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे और आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

    तुला
    करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। व्यवसाय में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है।

    वृश्चिक
    आज आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे। आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी लेकिन कुछ अप्रत्याशित खर्चे चीजें बिगाड़ सकते हैं और तनाव का कारण बन सकते हैं।

    धनु
    व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। आज आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। जंक फूड्स से दूरी बनाएं और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें।

    मकर
    आज कुछ नुकसान होने की आशंका है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। वहीं, खुद और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए।

    कुंभ
    आज फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा। कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं।

    मीन
    आज तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें। परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है। पार्टनरशिप करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। शाम में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है।

     

  • नीम करोली बाबा से मिले अमेरिकी डॉक्टर, एक मुलाकात ने बदल दी लैरी ब्रिलियंट की जिंदगी

    नीम करोली बाबा से मिले अमेरिकी डॉक्टर, एक मुलाकात ने बदल दी लैरी ब्रिलियंट की जिंदगी

    इन दिनों नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही है. इस फिल्म के जरिए बाबा के चमत्कारों ने एक बार लोगों के दिलों में जगह बना ली है. नीम करोली बाबा के प्रति ऐसी ही गहरी आस्था सिर्फ आज के लोगों में ही नहीं है, बल्कि दशकों पहले सात समंदर पार से आए एक अमेरिकी डॉक्टर की जिंदगी भी उनके एक इशारे पर हमेशा के लिए बदल गई थी. आइए जानते हैं उस अद्भुत यात्रा के बारे में, जहां उत्तराखंड के कैंची धाम में एक विदेशी डॉक्टर की भेंट नीम करोली बाबा से हुई थी.

    जब भटके हुए डॉक्टर की हुई थी बाबा से मुलाकात
    70 वह दौर था जब पश्चिमी दुनिया से ढेरों युवा आध्यात्मिक शांति की तलाश में भारत आ रहे थे. उसी समय अमेरिका के रहने वाले डॉ. लैरी ब्रिलियंट (Dr. Larry Brilliant) अपनी जिंदगी के एक ऐसे दौर से गुजर रहे थे जब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं. इसी तलाश में वे भारत आए और उत्तराखंड में नीम करोली बाबा के आश्रम (कैंची धाम) पहुंचे. मुलाकात के बाद बाबा उन्हें प्यार से 'डॉक्टर अमेरिका' कहकर बुलाने लग गए थे.

    वहीं, ट्राइसाइकिल द बुद्धिस्ट रिव्यू को दिए एक इंटरव्यू में लैरी ने बताया था कि आगे चलकर नीम करोली बाबा ने उन्हें दिल्ली जाने और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर देश से चेचक (Smallpox) जैसी खतरनाक बीमारी को खत्म करने के काम में जुटने के लिए भी कहा था.

    जिसके बाद आगे चलकर लैरी ब्रिलियंट भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चेचक (Smallpox) मिटाने वाले प्रोग्राम से जुड़ गए थे. वे जब भी अपनी पुरानी बातें याद करते हैं, तो कैंची धाम जाना और इस बीमारी के लिए काम करना, उन्हें हमेशा याद आता है. लैरी के मुताबिक, उनकी जिंदगी को एक नई दिशा देने के पीछे सिर्फ नीम करोली बाबा का हाथ था.

    नीम करोली बाबा से हुई थी लैरी की खास बातचीत
    डॉ. लैरी ब्रिलियंट ने इंटरव्यू में बताया था कि, 'जुलाई 1973 में नीम करोली बाबा ने मुझसे कहा था कि तुरंत दिल्ली जाओ और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ मिलकर काम करो. देश से चेचक की बीमारी को जड़ से मिटाओ.'

    उसी इंटरव्यू में लैरी ने बाबा के साथ पैसों को लेकर हुई एक मजेदार बातचीत भी शेयर की थी. उन्होंने बताया कि नीम करोली बाबा ने उनसे पूछा था कि, "डॉ. अमेरिका, तुम्हारे पास कितने पैसे हैं?"

    लैरी ने जवाब दिया था कि, "मेरे पास केवल 500 डॉलर हैं." इस पर बाबा ने जवाब दिया कि, "500 डॉलर? तुम झूठ बोल रहे हो, अमेरिका में तुम्हारे पास कुल कितने पैसे हैं?"

    लैरी ने तब इमरजेंसी रूम में डॉक्टर के तौर पर काम करने के दिन याद किए और कहा कि, "अमेरिका में भी मेरे पास बस 500 डॉलर ही हैं." लैरी बताते हैं कि इसके बाद वह बातचीत एक कॉमेडी शो में बदल गई. बाबा ने उस बात को हंसी-मजाक में बदल दिया था. वो हंसते बार बार एक ही बोल रहे थे कि, ''500 डॉलर यहां, 500 डॉलर वहां… तुम कोई डॉक्टर नहीं हो!"

    लैरी को यह सुनकर अपनी मां की बात याद आ गई, जो अक्सर उन्हें ताना मारती थीं कि तुम पैसे नहीं कमा सकते क्योंकि तुम कोई असली डॉक्टर नहीं हो. लेकिन, बाबा बार-बार यही दोहरा रहे थे कि, "500 डॉलर यहां और 500 डॉलर वहां… तुम डॉक्टर नहीं हो, बल्कि यू-एन-ओ (U.N.O.) डॉक्टर हो."

    इसके बाद उनकी बातचीत ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसे लैरी पूरी जिंदगी नहीं भूले. बाबा ने उनसे कहा था कि वह यूनाइटेड नेशन के डॉक्टर बनने जा रहे हैं, जिससे वह दुनिया से चेचक (Smallpox) जैसे खतरनाक बीमारी को मिटाने में मदद करेंगे.

    आगे लैरी ने उस समय को याद करते हुए बताया था कि बाबा ने इस खतरनाक बीमारी और उसके भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा था, "यह भयानक बीमारी जड़ से खत्म हो जाएगी. क्योंकि भगवान इंसानों को एक ऐसा तोहफा देने जा रहे है, जिससे मानवता इस बड़े दुख और दर्द पर हमेशा के लिए जीत हासिल कर लेगी."

    कैंची धाम से लेकर चेचक के खिलाफ जंग तक
    कैंची धाम जाने और नीम करोली बाबा से मिलने के बाद लैरी ब्रिलियंट की पूरी जिंदगी ही बदल गई थी. आगे चलकर लैरी भारत में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के चेचक कार्यक्रम (Smallpox Eradication Programme) में शामिल हुए. जिसके बाद WHO का यह अभियान ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बना था.

    साल 1980 में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने आधिकारिक तौर पर दुनिया को चेचक से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया था. इंसानों की इतिहास में यह पहली ऐसी बीमारी थी जिसे जड़ से खत्म किया गया था. लैरी ब्रिलियंट के लिए कैंची धाम की यादें हमेशा उनके सफर से जुड़ी रहीं. वे हमेशा यही मानते थे कि नीम करोली बाबा के एक-एक शब्द ने उन्हें एक नई राह दिखाई और अपनी मेडिकल की पढ़ाई का इस्तेमाल चेचक के खिलाफ जंग लड़ने में करने की प्रेरणा दी थी.

     

  • बुध का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों को 1 अक्टूबर तक रहना होगा सावधान

    बुध का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों को 1 अक्टूबर तक रहना होगा सावधान

    वैदिक ज्योतिष में बुध देव को बुद्धि, तर्क, वाणी, व्यापार और संचार का कारक माना जाता है. वहीं, मंगल के स्वामित्व वाला चित्रा नक्षत्र ऊर्जा, कला, तीक्ष्णता और त्वरित फैसलों का प्रतीक है. आज ग्रहों के राजकुमार बुध मंगल के नक्षत्र चित्रा में प्रवेश करने जा रहे हैं और वे 1 अक्टूबर की सुबह तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे.

    बुध और मंगल के बीच सम संबंध होने के बावजूद, बुध (शांत बुद्धि) का मंगल (आक्रामक ऊर्जा) के नक्षत्र में जाना कई बार विचारों में उथल-पुथल, जल्दबाज़ी में गलत फैसले और वाणी में कटुता पैदा कर सकता है. आज से 1 अक्टूबर के दौरान बुध का यह नक्षत्र परिवर्तन जहां कुछ राशियों के लिए शुभ रहेगा, वहीं 3 राशियों के जातकों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी. आइए जानते हैं कि किन राशियों को इस दौरान संभलकर चलने की सलाह दी जाती है.

    मेष राशि (Aries)
    अशुभ प्रभाव: बुध का यह गोचर आपके छठे (रोग, ऋण व शत्रु) और सातवें (साझेदारी व दांपत्य) भाव को प्रभावित करेगा.

    रखें ये सावधानियां: व्यापारिक साझेदार (Business Partner) या जीवनसाथी के साथ संवादहीनता के कारण मतभेद हो सकते हैं. जल्दबाजी में कोई भी नया अनुबंध (Contract) साइन न करें. अपनी सेहत का ध्यान रखें और काम के तनाव को खुद पर हावी न होने दें.

    वृश्चिक राशि (Scorpio)
    अशुभ प्रभाव: आपकी राशि के स्वामी मंगल के ही नक्षत्र में बुध का जाना आपके खर्चों और मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है.

    रखें ये सावधानियां: आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतें; बिना सोचे-समझे किया गया बड़ा निवेश नुकसान पहुंचा सकता है. गुप्त शत्रु आपके खिलाफ साजिश रच सकते हैं, इसलिए अपनी गुप्त बातें किसी से साझा न करें. वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं.

    मीन राशि (Pisces)
    अशुभ प्रभाव: बुध आपके सातवें और आठवें (अष्टम – रुकावटें व अचानक उतार-चढ़ाव) भाव के स्वामी होकर चित्रा नक्षत्र से गुजरेंगे.

    रखें ये सावधानियां: कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों या सहकर्मियों के साथ बातचीत करते समय संयम बनाए रखें. इस दौरान पैसों के लेन-देन में लापरवाही न बरतें. अचानक कुछ अप्रत्याशित खर्चे सामने आ सकते हैं, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है. वाहन चलाते समय सावधानी रखें.

    बुध के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
    – प्रतिदिन या विशेषकर बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश को दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें और गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें.

    – इस अवधि के दौरान बहसबाजी से दूर रहें और कोई भी बड़ा निर्णय सोच-समझकर लें.

    – बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र या पालक का दान करें.

  • कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

    कल्कि अवतार कब और कहां होगा? जानें भगवान विष्णु के अंतिम अवतार से जुड़ी मान्यताएं

    हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं. भगवान विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण और बुद्ध जैसे अवतारों का वर्णन पुराणों और धार्मिक परंपराओं में मिलता है. इनके बाद दशम और अंतिम अवतार के रूप में कल्कि अवतार का उल्लेख किया गया है.

    मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म अपने चरम पर पहुंच जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. लेकिन भगवान कल्कि का जन्म कब होगा? उनका जन्म कहां होगा? उनके माता-पिता कौन होंगे और उनका स्वरूप कैसा होगा? इन सवालों का जवाब जानने की उत्सुकता आज भी लोगों के मन में रहती है. तो आइए जानते है कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं और पुराणों में वर्णित उनके स्वरूप के बारे में.

    धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं भगवान
    भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब धर्म की स्थापना के लिए वे अवतार लेते हैं. इसी भाव को भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की परंपरा से जोड़ा जाता है. कल्कि अवतार को इसी क्रम का भविष्य में होने वाला अवतार माना गया है. श्रीमद्भागवत महापुराण के 12वें स्कंध में कल्कि अवतार का वर्णन मिलता है. इसके अनुसार, कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा.

    कहां होगा भगवान कल्कि का जन्म?
    श्रीमद्भागवत महापुराण में बताया गया है कि भगवान कल्कि का जन्म शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर होगा. श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है कि भगवान कल्कि शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के घर प्रकट होंगे.

    यानी धार्मिक ग्रंथों में भगवान कल्कि के जन्मस्थान के रूप में शंभल ग्राम का उल्लेख मिलता है. हालांकि शंभल की भौगोलिक पहचान को लेकर अलग-अलग धार्मिक और विद्वत परंपराओं में मत मिलते हैं.

    कैसा होगा भगवान कल्कि का स्वरूप?
    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि एक दिव्य योद्धा के रूप में प्रकट होंगे. उन्हें घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार धारण किए हुए बताया गया है. पुराणिक वर्णनों में उनका वाहन देवदत्त नाम का दिव्य घोड़ा बताया गया है. मान्यता है कि कलयुग के अंतिम चरण में भगवान कल्कि इसी घोड़े पर सवार होकर अधर्म और अत्याचार का अंत करेंगे. इसके बाद धर्म की पुनर्स्थापना होगी और युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी.

    भगवान कल्कि की माता का नाम क्या होगा?
    पौराणिक परंपराओं में भगवान कल्कि के पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमती बताया गया है. इसी परिवार में भगवान कल्कि के प्राकट्य की धार्मिक मान्यता है. कल्कि अवतार से जुड़ी विस्तृत कथाएं केवल श्रीमद्भागवत पुराण में ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रंथों और पुराणिक परंपराओं में भी मिलती हैं. इसलिए उनके परिवार, विवाह और अन्य विवरणों में ग्रंथ के अनुसार अंतर दिखाई दे सकता है.

    कौन होंगे भगवान कल्कि के गुरु?
    कल्कि अवतार से जुड़ी पुराणिक कथाओं में भगवान परशुराम का भी विशेष उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि भगवान परशुराम ही कल्कि को युद्ध और शस्त्र विद्या की शिक्षा देंगे. इसी वजह से कल्कि और परशुराम का संबंध हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष माना जाता है.

    कब होगा कल्कि अवतार?
    अब सबसे बड़ा सवाल है कि भगवान कल्कि का अवतार आखिर कब होगा?
    धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार को कलयुग के अंतिम चरण से जोड़ा गया है. हिंदू कालगणना के अनुसार कलयुग की अवधि बहुत लंबी मानी गई है और धार्मिक मान्यता के अनुसार अभी इसका काफी समय बाकी है. इसलिए वर्तमान समय में भगवान कल्कि के अवतार की कोई निश्चित तारीख या वर्ष शास्त्रों द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है.

    कल्कि अवतार को भविष्य में होने वाली उस घटना के रूप में देखा जाता है, जब कलयुग अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होंगे.

    कल्कि अवतार के बाद क्या होगा?
    पौराणिक मान्यता के अनुसार कलयुग के अंतिम चरण में जब अधर्म, अन्याय और अराजकता चरम पर पहुंच जाएगी, तब भगवान कल्कि का प्राकट्य होगा. वे अधर्म का अंत करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. इसके बाद युग परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी और सत्ययुग के पुनः प्रारंभ होने की धार्मिक मान्यता है.

    इस तरह कल्कि अवतार केवल भगवान विष्णु के अंतिम अवतार की कथा नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना और युग परिवर्तन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुराणिक मान्यता है. हालांकि, भगवान कल्कि के प्राकट्य का समय भविष्य से जुड़ा धार्मिक विषय है. इसलिए वर्तमान समय में उनके अवतार की कोई निश्चित तारीख बताना शास्त्रसम्मत नहीं है.

  • गणपति विसर्जन की तारीख तय, 25 सितंबर को इस विधि से दें बप्पा को विदाई

    गणपति विसर्जन की तारीख तय, 25 सितंबर को इस विधि से दें बप्पा को विदाई

    गणपति भगवान का अपने घर में स्वागत करना यानी उन्हें विधि-विधान से विराजमान करना भक्तों के लिए बेहद शुभ और भावनात्मक अवसर होता है. कोई एक दिन के लिए गणपति जी को विराजमान करता है, तो कोई डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार अधिक दिनों तक उनकी सेवा करता है. लेकिन जितने सम्मान और श्रद्धा के साथ हम गणपति जी को अपने घर बुलाते हैं, उतने ही सम्मान के साथ उनकी विदाई भी करनी चाहिए. गणपति विसर्जन केवल मूर्ति को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके साथ पूजा की एक पूरी विधि जुड़ी होती है.

    तो आखिर गणपति विसर्जन कब किया जाएगा और गणपति जी को विदाई किस तरह दी जाती है? क्या गणपति जी का वास्तव में विसर्जन होता है और विसर्जन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं.

    गणेश विसर्जन तिथि (Ganesh Visarjan 2026 Date)
    द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी.

    इसी कारण गणेश विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा.

    गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
    प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक

    अपराह्न मुहूर्त (चर)- शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक

    अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक

    रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक.

    रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26

    गणपति विसर्जन से पहले करें उत्तर पूजन
    गणपति जी की स्थापना के दिन से लेकर जितने दिनों तक आपने उनकी सेवा और पूजा की है, विसर्जन के दिन सबसे पहले उत्तर पूजन किया जाता है. उत्तर पूजन का अर्थ है गणपति जी की अंतिम पूजा, जिसके बाद उनकी विधिवत विदाई की जाती है. उत्तर पूजन की प्रक्रिया काफी हद तक उसी तरह होती है, जैसे आपने स्थापना के समय गणपति जी का पूजन किया था.

    सबसे पहले गणपति जी को स्नान कराया जाता है. परंपरा के अनुसार पहले सामान्य जल से स्नान कराया जाता है. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से पंचामृत स्नान कराया जा सकता है. इसके बाद दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है. कुछ लोग गणपति अथर्वशीर्ष के मंत्रों के साथ अभिषेक भी करते हैं. हालांकि, यदि आप अभिषेक नहीं करना चाहते हैं तो सामान्य स्नान और पूजा भी अपनी परंपरा के अनुसार कर सकते हैं.

    स्नान के बाद गणपति जी को पहनाएं वस्त्र
    स्नान के बाद गणपति जी को नए वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. पहले उपवस्त्र अर्पित किया जाता है. इसके बाद यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है और फिर ऊपर का वस्त्र अर्पित किया जाता है. इसके बाद गणपति जी को चंदन, अक्षत, दूर्वा, सिंदूर और सुगंधित द्रव्य अर्पित करें. फिर धूप और दीप दिखाएं.

    इसके बाद गणपति जी को नैवेद्य अर्पित करें. इसमें मोदक या आपकी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद रखा जा सकता है. नैवेद्य के बाद आचमन और ऋतु फल अर्पित करें. इसके बाद दक्षिणा और तांबूल यानी पान, सुपारी आदि अर्पित करने की परंपरा भी है. चाहें तो अंत में नारियल भी अर्पित कर सकते हैं. इसके बाद गणपति जी की आरती करें.

    पहले गौरी, फिर कलश और अंत में गणपति जी का पूजन
    यदि आपने गणपति स्थापना के समय मां गौरी और कलश की भी स्थापना की है, तो उत्तर पूजन में इनका भी पूजन किया जाता है. इस क्रम में पहले मां गौरी को अर्पण करें. इसके बाद कलश का पूजन करें और अंत में गणपति जी का पूजन करें. गणपति जी यहां प्रधान देवता माने जाते हैं, इसलिए उनका पूजन अंत में मुख्य रूप से किया जाता है.

    कैसे करें विसर्जन?
    कुछ पूजा परंपराओं में माना जाता है कि विसर्जन से पहले की मुख्य पूजा और आरती घर पर ही पूरी कर लेनी चाहिए. इसके बाद मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है. वहां पहुंचकर स्थानीय परंपरा के अनुसार संक्षिप्त प्रार्थना करके विसर्जन किया जा सकता है. नदी या तालाब में प्लास्टिक, कपड़ा, फूल-माला या अन्य ऐसी सामग्री नहीं डालनी चाहिए, जो जल को प्रदूषित करें. आजकल कई जगह प्रशासन की ओर से कृत्रिम विसर्जन कुंड भी बनाए जाते हैं. पर्यावरण की दृष्टि से इनका उपयोग करना उचित विकल्प हो सकता है.

    कलश के जल का क्या करें?
    पूजा पूरी होने के बाद कलश के जल का घर में छिड़काव करने की परंपरा भी है. इसे पवित्रता और मंगल की भावना से किया जाता है. इसके बाद पूजा की सामग्री को सम्मानपूर्वक अलग करें. जो सामग्री विसर्जित करनी हो, उसे निर्धारित और स्वच्छ स्थान पर ही विसर्जित करें.

  • फ्रिज के ऊपर रखें ये 3 चीजें, वास्तु के अनुसार घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा

    फ्रिज के ऊपर रखें ये 3 चीजें, वास्तु के अनुसार घर में आएगी सकारात्मक ऊर्जा

    वास्तु शास्त्र और वैदिक ज्योतिष में घर की हर एक चीज और उसके स्थान का हमारे जीवन पर गहरा असर पड़ता है.  हम अक्सर अपने ड्राइंग रूम और लिविंग रूम को सजाने में लगे रहते हैं, लेकिन घर के कुछ ऐसे खास हिस्सों को नजरअंदाज कर देते हैं जो चुंबक की तरह सकारात्मक ऊर्जा को खींच सकते हैं.  ऐसा ही एक स्थान है आपका फ्रिज! यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन फ्रिज के ऊपर कुछ विशेष चीजें रखकर आप घर की ऊर्जा (Aura) को पूरी तरह बदल सकते हैं और वास्तु दोषों को दूर कर सकते हैं.

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार, फ्रिज का ऊपरी हिस्सा प्राणा रिसेप्टर की तरह काम करता है.  यहाँ सही वस्तुएं रखने से घर में शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का आगमन होता है.  आइए जानते हैं उन 3 खास चीजों के बारे में जिन्हें फ्रिज के ऊपर रखना बेहद शुभ माना जाता है:

    1. समुद्री नमक का कटोरा (Sea Salt Bowl)
    वास्तु और ज्योतिष में नमक को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला सबसे शक्तिशाली माध्यम माना गया है.

    कैसे रखें: एक कांच के कटोरे में मोटा समुद्री नमक (Coarse Sea Salt) भरकर फ्रिज के ऊपर रखना चाहिए.

    फायदा: यह नमक घर की छुपी हुई नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव को सोख लेता है.  यह आसपास के वातावरण को शुद्ध करता है. यह घर के इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड को संतुलित करता है.  वास्तु के जानकारों के अनुसार, इस नमक को रोजाना घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) थोड़ा सा चलाना चाहिए ताकि घर के कंपन और ऊर्जा हमेशा सकारात्मक बनी रहें.

    2. हल्दी से बना दीया (Turmeric Diya)
    हल्दी का इस्तेमाल धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों दृष्टियों से बहुत शुभ माना जाता है.

    कैसे रखें: कांच की एक छोटी प्लेट पर हल्दी की गांठ से बने या हल्दीयुक्त छोटे दीये में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए (इस बात का खास ध्यान रखें कि इससे किसी तरह की दुर्घटना या आग लगने का खतरा न हो).

    फायदा: हल्दी का सुनहरा रंग और इसकी एंटीसेप्टिक प्रकृति घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.  यह उपाय घर से नकारात्मक प्रभावों को दूर करता है.  गुरु ग्रह के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाकर जीवन में पोषण और आर्थिक समृद्धि लाता है.

    3. क्लियर क्वार्ट्ज क्रिस्टल (Clear Quartz Cluster)
    क्रिस्टल्स का हमारे ऑरा और ऊर्जा पर गहरा प्रभाव पड़ता है.

    कैसे रखें: फ्रिज के ऊपर एक क्लियर क्वार्ट्ज क्रिस्टल पॉइंट रखना बहुत ही चमत्कारी परिणाम दे सकता है.  इसे इस तरह रखें कि इसका मुख पूर्व दिशा की ओर हो.

    फायदा: यह क्रिस्टल सकारात्मक प्राण ऊर्जा (Prana) को कई गुना बढ़ा देता है और वास्तु संबंधी बाधाओं या अवरोधों को तोड़ता है.  पूर्व दिशा की ओर मुंह करके रखने पर यह सूर्य की स्पष्ट ऊर्जा को चैनलize करता है, जिससे घर में पारिवारिक सौहार्द, शांति और मानसिक स्पष्टता बनी रहती है.