Category: छत्तीसगढ़

  • लोकसुरों में गूंजा छत्तीसगढ़ का लोकमन, ‘लोरिक चंदा’ से ददरिया-चंदैनी तक बिखरी संस्कृति की रंगत

    लोकसुरों में गूंजा छत्तीसगढ़ का लोकमन, ‘लोरिक चंदा’ से ददरिया-चंदैनी तक बिखरी संस्कृति की रंगत

    लोकसुरों में गूंजा छत्तीसगढ़ का लोकमन, ‘लोरिक चंदा’ से ददरिया-चंदैनी तक बिखरी संस्कृति की रंगत

    लोकरंग पर्व के दूसरे दिन मुक्ताकाशी मंच पर जीवंत हुईं लोकगाथाएं और लोकपरंपराएं

     कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा

    रायपुर, 
    छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू, लोकजीवन की सहज संवेदनाएं और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं के रंगों से ‘लोकरंग पर्व’ का दूसरा दिन सराबोर रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित कार्यक्रम में ‘लोरिक चंदा’, ददरिया और चंदैनी जैसी पारंपरिक लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

    कार्यक्रम की शुरुआत प्रदेश की लोकप्रिय लोकगाथा ‘लोरिक चंदा’ के भावपूर्ण प्रसंग से हुई। व्यासनाथ योगी एवं साथियों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा की कथात्मकता, भाव और गायन परंपरा को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान लोकसंगीत और पारंपरिक गायन शैली ने वातावरण को पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।

    इसके बाद विजय साहू एवं साथियों ने ददरिया की प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के लोकजीवन से गहरे जुड़ी ददरिया की मधुर धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं बरसन देशलहरे ने चंदैनी के माध्यम से प्रेम, लोकजीवन और मानवीय संवेदनाओं को सुरों में पिरोया। प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली, लोकभावनाओं और सामाजिक सरोकारों की सहज झलक दिखाई दी।

    लोककलाओं के संरक्षण और कलाकारों को प्रोत्साहन पर जोर

    कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंच छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और प्रोत्साहन पाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी हैं।

    उन्होंने कहा कि लोरिक चंदा, चंदैनी गीत और ददरिया जैसी लोकविधाएं छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की पहचान हैं। इनकी प्रस्तुति और संरक्षण से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ‘लोकरंग पर्व’ इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।

    सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों की रही मौजूदगी

    कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पूर्व संचालक अनिल कुमार साहू, उपसंचालक उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा तथा समाजसेवी उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    लोकविधाओं को एक मंच पर ला रहा लोकरंग पर्व

    ‘लोकरंग पर्व’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं, लोकगीतों, लोकसंगीत और पारंपरिक लोकनृत्यों को एक साझा मंच प्रदान किया जा रहा है। आयोजन के दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के दौर में अपनी लोकपरंपराओं को सहेजना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना उतना ही जरूरी है।

    मुक्ताकाशी मंच पर गूंजे लोकसुरों और कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया। लोरिक चंदा की कथा, ददरिया की मिठास और चंदैनी के भावपूर्ण सुरों ने लोकरंग पर्व के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।

  • दंतेवाड़ा के शिक्षक कैलाश देवांगन का बिजली बिल हुआ शून्य, पा रहे स्वच्छ ऊर्जा का लाभ

    दंतेवाड़ा के शिक्षक कैलाश देवांगन का बिजली बिल हुआ शून्य, पा रहे स्वच्छ ऊर्जा का लाभ

    पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

    दंतेवाड़ा के शिक्षक कैलाश देवांगन का बिजली बिल हुआ शून्य, पा रहे स्वच्छ ऊर्जा का लाभ

    रायपुर, 
    केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। इस योजना के माध्यम से लोग न केवल स्वच्छ ऊर्जा अपना रहे हैं, बल्कि अपने बिजली खर्च में भी उल्लेखनीय बचत कर रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के बड़े तुमनार निवासी और मोफलनार माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक श्री कैलाश कुमार देवांगन इसके प्रेरक उदाहरण बने हैं।

    गाँव के पहले हितग्राही बने कैलाश, मासिक खर्च में भारी बचत

            कैलाश कुमार देवांगन अपने गाँव के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने मार्च 2026 में इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कराया। उन्होंने बताया कि पहले उनके 4 सदस्यीय परिवार का मासिक बिजली बिल करीब 1,000 से 1,200 (लगभग 200 यूनिट खपत) आता था। लेकिन सोलर प्लांट लगने के बाद से उनका बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है।

    सरकारी सब्सिडी से आसान हुई राह

           श्री देवांगन को मार्च माह में आयोजित शिक्षकों की एक बैठक के दौरान इस योजना की विस्तृत जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है, जिससे आम परिवारों के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना बेहद आसान हो गया है। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने बिजली बिल को कम करने की अपील की है।

    आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण भी

           शिक्षक कैलाश देवांगन का मानना है कि यह योजना केवल आर्थिक बचत का ज़रिया नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान देती है। भविष्य में बिजली की बढ़ती माँग और दरों को देखते हुए सौर ऊर्जा एक टिकाऊ विकल्प है। जिला प्रशासन एवं विद्युत विभाग ने भी जिले के नागरिकों से ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ से जुड़कर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया है।

  • गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से बदलेगी राजनांदगांव की तस्वीर, औद्योगिक विकास के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: CM साय

    गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से बदलेगी राजनांदगांव की तस्वीर, औद्योगिक विकास के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: CM साय

    राजनांदगांव में प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट से औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री साय

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से की आत्मीय भेंट

    इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 सहित प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा

    रायपुर
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह से उनके रायपुर स्थित निवास पर आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड के प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 तथा प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में गेल (इंडिया) लिमिटेड का प्रस्तावित गैस आधारित फर्टिलाइजर प्लांट क्षेत्र के औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ सहायक उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे राजनांदगांव सहित आसपास के क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश में नई संभावनाओं वाले उद्योगों के विस्तार के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य आधारित विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0 इसी दिशा में छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आधुनिक विनिर्माण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं और निवेश के लिए नई संभावनाएं बनी हैं। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में आने वाला निवेश स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि का माध्यम बने। राजनांदगांव की प्रस्तावित फर्टिलाइजर परियोजना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।

  • जांजगीर में रोजगार मेले का आयोजन, 12वीं से BE पास युवाओं को मिलेगा नौकरी का अवसर

    जांजगीर में रोजगार मेले का आयोजन, 12वीं से BE पास युवाओं को मिलेगा नौकरी का अवसर

    जांजगीर-चांपा.

    जिला रोजगार कार्यालय जांजगीर द्वारा शासकीय आईटीआई जांजगीर में गुरूवार 10 सितम्बर को प्रातः 11 से 3 बजे तक एक दिवसीय रोजगार मेला का आयोजन किया गया है. जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि जिसमें निजी क्षेत्र के 3 नियोजक उपस्थित रहेगें.

    कैरियर ट्री चेन्नई द्वारा ट्रेनी 150 पद, चैतन्य फाईनेंस इंडिया लिमिटेड रायगढ़ द्वारा कस्टमर रिलेशनशिप एक्जीक्टिव के 20 पद एवं भारतीय जीवन बीमा निगम नैला द्वरा बीमा सखी के 20 पदों पर भर्ती की कार्यवाही की जाएगी. उक्त पद हेतु शैक्षणिक योग्यता 10वीं, 12वीं, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, बीई निर्धारित किया गया है. चयनित उम्मीदवारों का कार्यक्षेत्र जांजगीर, सक्ती, डभरा, व अन्य राज्य चेन्नई होगा. इच्छुक युवा जो उक्त रोजगार मेला में शामिल होना चाहते है वे अपना समस्त शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्रों तथा जिला रोजगार कार्यालय के रोजगार पंजीयन कार्ड के साथ निर्धारित तिथि को उपस्थित होकर रोजगार मेला में शामिल हो सकते है.

    उपमुख्यमंत्री साव ने लोरमी को बड़ी सौगात
    लोरमी. डिप्टी सीएम के प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए लोरमी में जल और मृदा संरक्षण के लिए कुल 3 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से 27 विकास कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है. पर्यावरण उपकार निधि के तहत स्वीकृत किए गए इन सभी विकास कार्यों का मुख्य उद्देश्य लोरमी क्षेत्र में गिरते जल स्तर को सुधारना और मिट्टी के कटाव को रोकना है. स्वीकृत कार्यों में नदियों और नालों के पानी को रोकने के लिए 16 नए चेक डैम का निर्माण किया जाएगा.

    आवागमन व सुरक्षा के दृष्टिकोण से ग्रामीण संपर्क को सुचारू बनाने के लिए 5 नई पुलियों और तटबंध सुरक्षा के लिए रिटेनिंग वॉल का निर्माण होगा. इस प्रकार क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कुल 27 विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं. इन विकास कार्यों के शुरू होने से न केवल स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा, बल्कि भू-जल स्तर में भी सुधार होगा. इसके अलावा बारिश के दिनों में जलभराव और मिट्टी के कटाव जैसी समस्याओं से भी ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी. स्थानीय निवासियों और किसानों ने इस निर्णय के लिए खुशी जताते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव का आभार व्यक्त किया है.

  • बिहान योजना ने दिया आजीविका का सहारा

    बिहान योजना ने दिया आजीविका का सहारा

    मुर्गी पालन से दंतेवाड़ा की रामबती ने कमाए 25 हजार रुपये

    रायपुर
    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (‘बिहान’) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक प्रभावी जरिया बन रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में बीते डेढ़ वर्षों से लागू इस योजना के जरिए लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है।

    हिम्मत और मेहनत की मिसाल बनीं रामबती

            दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने इस योजना का लाभ उठाकर मुर्गी पालन की शुरुआत की। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में ₹80 प्रति चूजा की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था। शुरुआती दौर में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मृत्यु हो जाने से रामबती को झटका ज़रूर लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव और देखभाल करके उन्होंने अब तक करीब ₹25,000 की शुद्ध आय अर्जित कर ली है। रामबती अपने तैयार मुर्गों को ₹500 प्रति किलो की दर से बेचती हैं, जिनका औसतन वजन 1 से 3 किलोग्राम तक होता है।

    ब्रुडिंग केंद्रों से महिला उद्यमियों को दोहरा लाभ

            योजना के अंतर्गत एक विशेष पहल भी शुरू की गई है, जिसमें क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के ज़ीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद इन स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंपा जाता है, जिससे तैयार करने वाली उद्यमी और पालन करने वाली महिला, दोनों को आय का अवसर मिल रहा है।

    450 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार

            जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक लगभग 450 महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे मुहैया कराए जाते हैं। बिहान योजना की इस पहल ने न केवल स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध कराया है, बल्कि रामबती जैसी सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास भरकर उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर खड़ा किया है।

  • सपनों का आशियाना बना प्रधानमंत्री आवास

    सपनों का आशियाना बना प्रधानमंत्री आवास

    सपनों का आशियाना बना प्रधानमंत्री आवास

    प्रधानमंत्री आवास योजना से राजकुमारी यादव को मिली सुरक्षित छत, अब परिवार के साथ सुकून से बीत रही जिंदगी

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा सम्मानजनक जीवन का आधार

    रायपुर, 
    अपना घर हर परिवार के लिए केवल चार दीवारों का नाम नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद होता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के इसी सपने को हकीकत में बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के आवास का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और खुशियां आ रही हैं।

    जशपुर जिले के तपकरा निवासी राजकुमारी यादव के लिए भी अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित और सुविधाजनक पक्के मकान में रहने का सपना लंबे समय से था। पहले उनका घर छोटा था और सीमित जगह में परिवार के सभी सदस्यों के साथ रहना चुनौतीपूर्ण होता था। बारिश और खराब मौसम के दौरान घर की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ जाती थी। परिवार के लिए एक बेहतर और सुरक्षित आशियाने की उम्मीद उनके मन में हमेशा बनी रही।

    प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब राजकुमारी यादव को आवास का लाभ मिला, तो उनके जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई। योजना से मिली सहायता से पक्के मकान का निर्माण पूरा हुआ और परिवार को अपना सुरक्षित आशियाना मिल गया। अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुकून और खुशी से जीवन बिता रही हैं।

    पक्के घर ने बढ़ाया आत्मविश्वास

    राजकुमारी यादव बताती हैं कि पहले छोटे घर में परिवार के साथ रहना काफी मुश्किल था। जगह की कमी के कारण रोजमर्रा के जीवन में कई परेशानियां आती थीं। अब अपना पक्का मकान मिलने से परिवार की यह चिंता दूर हो गई है। नए घर ने उन्हें न केवल सुरक्षित रहने की सुविधा दी है, बल्कि बेहतर और सम्मानजनक जीवन जीने का भरोसा भी दिया है।

    वे प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि अपने घर का सपना पूरा होना उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी है। अब उनका परिवार मौसम की चिंता से मुक्त होकर अपने नए घर में सुरक्षित और सुकून से रह रहा है।

    प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल एक आवास योजना नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन की नई शुरुआत का माध्यम बन रही है। राजकुमारी यादव की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है—सीमित जगह और असुविधाओं से निकलकर अपने सपनों के पक्के आशियाने तक पहुंचने की कहानी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को आवास का लाभ देकर उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाया जाए। जशपुर की राजकुमारी यादव जैसी हितग्राहियों के जीवन में आया बदलाव इस बात का प्रमाण है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल घर नहीं बनातीं, बल्कि परिवारों के सपनों और भविष्य की मजबूत नींव भी तैयार करती हैं।

  • संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव

    संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव

    संगठन की सदस्यता में भी भ्रष्टाचार, यही है कांग्रेस के डीएनए की सच्चाई – संजय श्रीवास्तव
    पैसे लेकर कांग्रेस की सदस्यता देने को लेकर श्रीवास्तव का तीखा हमला’’

    रायपुर
    यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में पैसे लेकर सदस्यता देने का मामला सामने आने पर छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ’’श्री संजय श्रीवास्तव’’ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

    श्रीवास्तव ने कहा कि यूथ कांग्रेस के चुनाव में सदस्य बनाने के नाम पर पैसे लिए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि संगठन के चुनाव के लिए सदस्यता अभियान में ही आर्थिक लेन-देन के आरोप सामने आ रहे हैं, तो यह कांग्रेस की कार्यप्रणाली और संगठनात्मक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
    उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता बड़े-बड़े घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहे हैं और अब यदि उसी पार्टी के संगठनात्मक विस्तार एवं सदस्यता प्रक्रिया में भी पैसे लेने के आरोप सामने आते हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।

    वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि ’’कांग्रेस देश में 58 वर्षो तक सत्ता में रही है। उनके इतने लंबे शासनकाल में उनके बड़े-बड़े नेताओं की भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामलों में संलिप्तता के सबूत मिले है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश में शराब घोटाले, कोयला घोटाले और डीएमएफ घोटाले से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भ्रष्टाचार की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यूथ कांग्रेस जैसे संगठन में सदस्यता ही चुनावी प्रक्रिया का आधार होती है। जब सदस्यता के आधार पर संगठन के भीतर चुनाव होते हैं, तब सदस्य बनाने के लिए ही पैसे लिए जाने के आरोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं।

    श्रीवास्तव ने कहा कि ’’“यदि किसी राजनीतिक दल में सदस्यता से लेकर चुनाव तक पैसे का प्रभाव दिखाई देने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि यूथ कांग्रेस की सदस्यता प्रक्रिया में पैसे लिए जाने के आरोपों की सच्चाई क्या है और इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज देश के लिए नासूर बन चुकी है और जहां-जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहते हैं।
    श्रीवास्तव ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ’’कांग्रेस को अपने संगठन के भीतर झांककर देखना चाहिए और यह विचार करना चाहिए कि आखिर उसकी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर बार-बार भ्रष्टाचार के सवाल क्यों उठते हैं।’

    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए राजनीतिक दलों की सदस्यता और चुनाव जैसी आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार से मुक्त होनी चाहिए। कांग्रेस को यूथ कांग्रेस सदस्यता में पैसे लेने के आरोपों पर तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए।

  • गणेश प्रतिमाओं में आस्था के साथ पर्यावरण का संदेश, बंदियों की अनोखी पहल बनी मिसाल

    गणेश प्रतिमाओं में आस्था के साथ पर्यावरण का संदेश, बंदियों की अनोखी पहल बनी मिसाल

    आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही बंदियों की गणेश प्रतिमाएं

    केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने मिट्टी से तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं

    प्रतिमाओं में तुलसी एवं विभिन्न पौधों के बीज, विसर्जन के बाद अंकुरित होकर बनेंगे पौधे

    रायपुर
    गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।

              गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।

    बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा

              केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है।

    आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं

            जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • CG में वायरल फीवर का कहर! रोजाना हजारों मरीज पहुंच रहे अस्पताल, बुखार-बदन दर्द की शिकायत

    CG में वायरल फीवर का कहर! रोजाना हजारों मरीज पहुंच रहे अस्पताल, बुखार-बदन दर्द की शिकायत

    रायगढ़.

    जिले में वायरल बुखार ने अपना रूप बदल लिया है और इसके साथ ही शहर से लेकर गांव तक हर घर में लोग इसकी चपेट में हैं. जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज करीब 100 से अधिक मरीज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं.

    मरीजों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है. जिस कारण वार्डों में बिस्तर कम पड़ रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक इस बार वायरस का व्यवहार पहले जैसा नहीं रहा. सामान्य वायरल बुखार जो पहले चार से पांच दिन में अपने आप उतर जाता था, अब दस दिन बीतने के बाद भी मरीजों का पीछा नहीं छोड़ रहा. बुखार बार-बार लौट आता है, शरीर में दर्द लंबे समय तक बना रहता है और मरीज हफ्तों तक कमजोरी से जूझते रहते हैं. यही वजह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. इस वायरल के साथ सबसे डरवाना पहलू यह सामने आ रहा है कि कई मरीजों का प्लेटलेट काउंट तेजी से गिर रहा है. सामान्य बुखार में प्लेटलेट पर इतना असर नहीं देखा जाता, लेकिन इस बार मरीजों की रिपोर्ट में यह गिरावट डेंगू जैसे लक्षणों की याद दिला रही है. इससे परिजनों के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि प्लेटलेट कम होने पर मरीज की जान को खतरा बना रहता है.

    रोजाना बढ़ती मरीजों की संख्या ने जिला अस्पताल के संसाधनों पर सीधा दबाव डाला है. वार्डों में जगह की कमी, जांच के लिए लंबा इंतजार और स्टाफ पर बढ़ते बोझ के कारण कई परिवार निजी क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि सरकारी अस्पताल में भीड़ के चलते इलाज में देरी हो रही है. शहर के कई मोहल्लों की स्थिति यह है कि एक ही परिवार में दो-तीन सदस्य एक साथ बुखार की चपेट में हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा गंभीर देखा जा रहा है, जिससे अभिभावकों में डर का माहौल बना हुआ है. बाजारों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर भी बीमारी की चर्चा आम हो गई है.

    चिकित्सकों के अनुसार वायरस के म्यूटेट होने के कारण इसकी प्रकृति बदल गई है, जिसके चलते पुराने इलाज के तरीके और दवाइयां उतनी असरदार साबित नहीं हो पा रहीं. यही कारण है कि मरीजों को ठीक होने में सामान्य से कहीं ज्यादा वक्त लग रहा है और कई मामलों में जटिलताएं भी सामने आ रही हैं. जिला अस्पताल रायगढ़ के सिविल सर्जन दिनेश पटेल ने बताया कि वायरल फीवर अपना सायकल पूरा करता है. बुखार के कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है, जिससे तबीयत में सुधार होने में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है. वायरस की प्रकृति में बदलाव के कारण भी मरीजों को ठीक होने में लंबा वक्त लग रहा है. लोगों को सलाह है कि बुखार लगातार बना रहे या कमजोरी ज्यादा महसूस हो तो जांच कराने में देर न करें.

  • छत्तीसगढ़ी भाषा को मिलेगा संवैधानिक दर्जा? आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में पहल

    छत्तीसगढ़ी भाषा को मिलेगा संवैधानिक दर्जा? आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में पहल

    छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सकारात्मक पहल

    राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने की भेंट

    रायपुर
    राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने भेंट कर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा इसके संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में  चर्चा की।

    छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा

              भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश एवं मानकीकरण की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा एवं प्रमुख संपर्क भाषा है और लगभग डेढ़ करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।

    छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल

              राज्यपाल डेका ने स्वयं पहल करते हुए इस विषय  पर सार्थक चर्चा की। छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए कहा कि इसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश एवं अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन किया जाएगा। इसके लिए विषय के विद्वानों एवं विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे। राज्यपाल ने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।

    छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा

            भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में 15 वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना एवं पत्रकारिता सहित विभिन्न विधाओं में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तथा पहला शब्दकोश वर्ष 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ। पंडित सुंदरलाल शर्मा द्वारा जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन भी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के  विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी का अध्ययन कराया जा रहा है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में भी छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

             इस अवसर पर भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक एवं श्रीमती अर्चना पाठक उपस्थित थीं।