Category: छत्तीसगढ़

  • CG में कीटनाशक दुकानों पर प्रशासन का शिकंजा, एक केंद्र का लाइसेंस रद्द, दो पर कार्रवाई

    CG में कीटनाशक दुकानों पर प्रशासन का शिकंजा, एक केंद्र का लाइसेंस रद्द, दो पर कार्रवाई

    धमतरी.

    खरीफ सीजन के बीच कृषि विभाग ने कीटनाशक विक्रय केन्द्रों पर सख्ती बढ़ा दी है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए विभाग की टीम लगातार विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण कर रही है।

    इसी जांच के दौरान भटगांव में तीन कीटनाशक विक्रय केन्द्रों पर कार्रवाई की गई है। मेसर्स गौरव कृषि केन्द्र और मेसर्स साहू कृषि केन्द्र के कीटनाशक विक्रय लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान दोनों प्रतिष्ठानों में आवश्यक दस्तावेजों का समुचित संधारण नहीं होना, निर्धारित मापदंडों के अनुरूप मूल्य सूची उपलब्ध नहीं होना और स्टॉक का उचित प्रदर्शन नहीं किया जाना पाया गया। वहीं मेसर्स गायत्री कृषि केन्द्र, भटगांव का कीटनाशक विक्रय लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। लाइसेंस निरस्त होने के बाद प्रतिष्ठान में कीटनाशकों का व्यवसाय नहीं किया जा सकेगा।

    10 अन्य केन्द्रों की भी जांच
    कृषि विभाग ने जिले के 10 अन्य कीटनाशक विक्रय केन्द्रों का भी निरीक्षण किया। इनमें धमतरी के अंकित ट्रेडर्स, राधा ट्रेडर्स और शिवधारा कृषि केन्द्र के साथ ही देमार, बागतराई, खम्हरिया, दानीटोला, कलारतराई और सेमरा बी के विभिन्न कृषि केन्द्र शामिल हैं। जांच के दौरान मेसर्स अंकित ट्रेडर्स, धमतरी में अनियमितता पाए जाने पर कीटनाशक विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है और प्रतिष्ठान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग के मुताबिक, नोटिस का जवाब मिलने के बाद तथ्यों और नियमों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • CG में अंडर ट्रायल बंदियों के लिए राहत की पहल, कमेटी ने जल्द समीक्षा के दिए निर्देश

    CG में अंडर ट्रायल बंदियों के लिए राहत की पहल, कमेटी ने जल्द समीक्षा के दिए निर्देश

    कोंडागांव.

    जिला स्तर पर लंबे समय से विचाराधीन मामलों में बंद कैदियों को राहत दिलाने की दिशा में समीक्षा की गई. अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी और मॉनिटरिंग सेल की बैठक में पात्र बंदियों के मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई.

    ऐसे बंदियों के मामलों की समीक्षा की गई, जिन्हें लंबे समय से जमानत का लाभ मिलने के बावजूद शर्तें पूरी करने में परेशानी है. इसके अलावा उन बंदियों के मामलों पर भी ध्यान दिया गया, जो अपनी संभावित अधिकतम सजा की तुलना में पर्याप्त समय जेल में बिता चुके हैं. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने अधिकारियों को पात्र मामलों में तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए. बैठक में बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. मॉनिटरिंग सेल की बैठक में नए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने पर भी चर्चा हुई.

    ग्राम तोतर में मेगा ड्राइव के तहत प्रत्येक सप्ताह कैंप लगाने को लेकर भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय पर जोर दिया गया. कैंप के जरिए ग्रामीणों तक विभिन्न विभागों की सेवाएं पहुंचाने की योजना पर चर्चा हुई. बैठक में न्यायिक, पुलिस, प्रशासन और अभियोजन से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पात्र बंदियों और ग्रामीणों से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए.

  • ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के लिए 1.22 करोड़ का बजट, कलेक्टोरेट में बनी आयोजन की रूपरेखा

    ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के लिए 1.22 करोड़ का बजट, कलेक्टोरेट में बनी आयोजन की रूपरेखा

    जगदलपुर.

    बस्तर की ऐतिहासिक दशहरा परंपरा इस साल भी भव्यता और पारंपरिक रस्मों के साथ मनाई जाएगी, लेकिन आयोजन का बजट पिछले साल की तुलना में बढ़ गया है। पाट जात्रा विधान पूरा होने के बाद अब आगे होने वाले विभिन्न विधानों की तैयारियां तेज हो गई हैं।

    कलेक्टोरेट में बस्तर दशहरा समिति की दो घंटे से अधिक चली बैठक में आयोजन की व्यवस्थाओं के साथ खर्च का खाका भी रखा गया। वर्ष 2026 के लिए 1 करोड़ 22 लाख 53 हजार 629 रुपए खर्च का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पिछले साल वास्तविक खर्च 1 करोड़ 11 लाख 39 हजार 663 रुपए रहा था। यानी इस बार करीब 11.14 लाख रुपए ज्यादा खर्च प्रस्तावित है। बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पारंपरिक रस्मों में उपयोग होने वाले बकरा-सूअर और शराब पर होने वाले खर्च को लेकर रही।

    प्रस्ताव के अनुसार बकरा-सूअर पर 15.40 लाख रुपए और दशमी सामग्री व शराब पर 4.13 लाख यानी कुल 19.52 लाख का प्रावधान किया है। पिछले साल इन मदों पर करीब 17.75 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस लिहाज से इन मदों का खर्च भी बढ़ा है। टेंपल कमेटी के सचिव एवं तहसीलदार राहुल गुप्ता ने बताया कि बस्तर दशहरा धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत स्वरूप है। बस्तर दशहरा की अलग-अलग रस्मों को पूरा करने के लिए बजट में चावल से लेकर किराना, फल-फूल, भोग सामग्री, कपड़ा और रथ की लकड़ी तक का इंतजाम किया गया है।

    चावल पर 2.31 लाख, किराना पर 10.98 लाख, विदाई रस्म पर 5.40 लाख और विद्युत सजावट पर 10.61 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। कुश्ती प्रतियोगिता के लिए 9.26 लाख और डीजल के लिए 10.71 लाख रुपए रखे गए हैं। रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, पटाखे और प्रचार- प्रसार पर भी अलग-अलग राशि प्रस्तावित है। इस बार इन मदों पर बड़ा खर्च किए जाने की तैयारी बकरा-सूअर 15.40 लाख, कपड़ा 15.40 लाख, रंगाई-पुताई 11.72 लाख, डीजल 10.71 लाख, विद्युत सजावट 10.61 लाख, किराना 10.98 लाख और कुश्ती 9.26 लाख रुपए प्रस्तावित हैं। यानी दशहरा की रस्मों के साथ व्यवस्थाओं पर भी बड़ा खर्च होगा।

    75 लाख मिले, लेकिन पुराना भुगतान बाकी 2026 के आयोजन के लिए संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग से 25 लाख और कलेक्टर कार्यालय से 50 लाख रुपए मिले हैं। यानी अभी कुल 75 लाख रुपए उपलब्ध हैं। वहीं वर्ष 2025 के वास्तविक खर्च में 36 लाख 39 हजार 663 का अतिरिक्त भुगतान लंबित बताया गया है। 1.22 करोड़ के बजट में ये रस्में होंगी पूरी प्रस्ताव में चावल, किराना, बकरा-सूअर, दशमी सामग्री व शराब, विदाई रस्म, विद्युत सजावट, कुश्ती, वाहन, डीजल, लोहा, फल-फूल व भोग, रथ-कपड़ा, रंगाई-पुताई, कपड़ा, पटाखे, प्रचार-प्रसार, लकड़ी चिरान और अन्य सामग्री शामिल हैं।

  • हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में बढ़ी हलचल, कुलपति के खिलाफ जांच को पहुंची उच्चस्तरीय समिति

    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में बढ़ी हलचल, कुलपति के खिलाफ जांच को पहुंची उच्चस्तरीय समिति

    दुर्ग.

    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग में कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त वित्तीय, प्रशासनिक एवं मूल्यांकन संबंधी शिकायतों की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को शिकायतों से संबंधित नस्तियां, नोटशीट एवं अभिलेख प्रस्तुत करने दिए गए अंतिम अवसर की समय-सीमा समाप्त होने के बाद जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय पहुंचे हैं।

    बताया जा रहा है कि समिति द्वारा संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की मौके पर जांच- पड़ताल की जा रही है। इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्यपाल सचिवालय द्वारा कुलपति को स्पष्ट समय-सीमा में दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, और वह अवधि भी समाप्त हो चुकी है, तो अब जांच समिति स्वयं विश्वविद्यालय पहुंचकर अभिलेखों की जांच कर रही है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था। राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना द्वारा 30 जुलाई को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया था।

    बताया जाता है कि दुर्ग ग्रामीण के विधायक एवं छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ललित चंद्राकर ने कुलपति के विरुद्ध विभिन्न बिंदुओं को लेकर कलाधिपति के समक्ष शिकायत प्रस्तत की थी। इसके बाद शिकायतों की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय ने 19 अगस्त 2026 के पत्र के माध्यम से कुलपति के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज एवं नस्तियां जांच समिति को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 24 अगस्त 2026 तक की समय- सीमा निर्धारित की गई थी। बताया जाता है कि कुलपति की ओर से विभिन्न विभागों से अभिलेख एकत्र करने तथा उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन किए जाने का हवाला देते हुए समय-सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 किए जाने का अनुरोध किया गया। हालांकि, निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी अपेक्षित दस्तावेज जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई।

    विधायक ललित चंद्राकर ने की है शिकायत
    हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति डॉ. संजय तिवारी के विरुद्ध गंभीर वित्तीय, प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अनियमितताओं सबंधी शिकायती पत्र राज्यपाल को प्रेषित किया है। पत्र में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय द्वारा माह मार्च 2026 में लगभग 12 लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की खरीदी हेतु निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा प्रक्रिया में शासकीय फर्म “संवाद” द्वारा न्यूनतम दर प्रस्तुत किए जाने के बावजूद कुलपति द्वारा एक निजी फर्म के पक्ष में अर्धशासकीय पत्र जारी कर कार्य आबंटित किए जाने की अनुशंसा की गई। तत्पश्चात उक्त फर्म को ही कार्य प्रदान किया गया तथा लगभग 40 लाख रुपए से अधिक का भुगतान भी किया गया। यह कृत्य शासकीय निविदा प्रक्रिया एवं वित्तीय नियमों के प्रतिकूल प्रतीत होता है।

    इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा एमबीए, एमसीए, पीजीडी बीएम सहित 8 नये पाठ्यक्रम प्रारंभ करने हेतु एआईसीटीसी एवं आरसीआई से निरीक्षण कराया गया, जबकि इसके पूर्व राज्य शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त नही की गई। यह तथ्य भी सामने आया है कि एक ही विभागीय सरंचना को परिवर्तित स्वरुप में प्रस्तुत कर विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु मान्यता प्राप्त करने का प्रयास किया गया।
    नए पाठ्यक्रमों के लिए आवश्यक पुस्तकों की खरीदी में भी गंभीर अनियमितता बरती गई है। कुलपति द्वारा बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के सिर्फ मौखिक निर्देश पर लगभग 40 लाख रुपए मूल्य की 380 पुस्तकें तत्काल खरीद ली गईं। पुस्तकों के मूल्य एवं खरीदी प्रक्रिया दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहे हैं।

    शासकीय नियमों के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पश्चात की जाती है, परंतु कुलपति द्वारा मई माह में ही 5 विषयों हेतु 15 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि संबंधित विभाग अभी विधिवत अस्तित्व में नहीं हैं तथा उनमें विद्यार्थियों का प्रवेश भी नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में उनके वेतन भुगतान के स्रोत एवं औचित्य की जांच आवश्यक है। कुलपति डॉ. तिवारी विश्वविद्यालय के अनेक महत्वपूर्ण एवं वित्तीय विषयों को कार्यपरिषद के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत नहीं करते, जबकि निर्धारित सीमा से अधिक राशि की खरीदी एवं वित्तीय निर्णयों में कार्यपरिषद की स्वीकृति आवश्यक होती है। यह आचरण विश्वविद्यालय अधिनियम एवं प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत प्रतीत होता है।

  • सेवा और मानवता की प्रेरणास्रोत हैं डॉ. राजेश्वरी अम्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने की सराहना

    सेवा और मानवता की प्रेरणास्रोत हैं डॉ. राजेश्वरी अम्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने की सराहना

    रायपुर : निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल है डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

    सत्य साई संजीवनी अस्पताल में डॉक्यूमेंट्री फिल्म “डॉ. अम्मा” की हुई स्क्रीनिंग

    रायपुर

    नवा रायपुर स्थित सत्य साई संजीवनी अस्पताल में माता डॉ. सी. राजेश्वरी जी के प्रेरणादायी जीवन और मानवता की निःस्वार्थ सेवा पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म “DR. AMMA – 50 Years of Healing, Humanity & Hope” की स्क्रीनिंग आयोजित हुई। कार्यक्रम में मंत्री रामविचार नेताम एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शामिल हुए।

    रायपुर : निःस्वार्थ सेवा और मानवता की मिसाल है डॉ. राजेश्वरी अम्मा का जीवन : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

    वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि माता डॉ. सी. राजेश्वरी जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया है। उनका जीवन सेवा, समर्पण और करुणा की प्रेरणादायी गाथा है। डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से उनके जीवन, कार्यों और समाज के प्रति योगदान को लाखों लोग जान सकेंगे तथा उनसे प्रेरणा प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा करने वाले व्यक्तित्व समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत होते हैं। डॉ. राजेश्वरी अम्मा जी का जीवन यह संदेश देता है कि सेवा का संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।

    वित्त मंत्री चौधरी ने इस पुनीत अवसर पर सत्य साई परिवार सहित डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्माण और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में राजनांदगांव के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं सत्य साई परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

  • नारायणपुर के 6 गांवों में रबी फसलों की लहराएगी बहार

    नारायणपुर के 6 गांवों में रबी फसलों की लहराएगी बहार

    रायपुर

     जल संसाधन विभाग के समयबद्ध प्रयासों और बिंजली जलाशय की नहरों के जीर्णाेद्धार अभियान ने बस्तर अंचल के कृषि परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। विभाग द्वारा जल संसाधन संभाग, नारायणपुर के माध्यम से नहरों की मरम्मत और गाद सफाई का वृहद कार्य कराया गया है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर अब खेतों में दिखाई देने लगा है। इस व्यवस्था के सुचारू होने से नारायणपुर विकासखंड के खैराभाट, पालकी, तेलसी, करलखा, गुरिया और सुलेंगा गांवों की लगभग 250 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा प्राप्त हुई है।

             ​समय के साथ बिंजली जलाशय की नहरों में जमा हुई गाद और अवरोधों के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया था, जिससे खेतों तक पानी पहुँचाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सफाई और आवश्यक मरम्मत कार्य के बाद अब नहरों में पानी का प्रवाह निर्बाध रूप से हो रहा है, जिससे किसानों की मानसून पर निर्भरता काफी कम हुई है। इस जल सुरक्षा से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता में भी भारी सुधार की संभावना बढ़ गई है। जिन खेतों में पहले पानी की कमी के कारण खेती सीमित रहती थी, वहाँ अब किसान दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग की इस पहल से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थतंत्र को नई गति मिली है और किसानों के जीवन में एक सुखद व सकारात्मक बदलाव आया है।

  • लोकगीत, नृत्य और सरहुल-करमा की थाप ने बांधा समां, रंगारंग अंदाज में हुआ लोकरंग पर्व का समापन

    लोकगीत, नृत्य और सरहुल-करमा की थाप ने बांधा समां, रंगारंग अंदाज में हुआ लोकरंग पर्व का समापन

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करने वाले तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का तीसरा एवं अंतिम दिन सरगुजा-जशपुर अंचल की आदिवासी लोकसंस्कृति के नाम रहा। पहली बार लोकरंग पर्व के मंच पर जशपुर अंचल के सरहुल एवं करमा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों की मधुरता और कलाकारों के ऊर्जावान नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया।

    कार्यक्रम में विजय कुमार भगत, जशपुर के दल द्वारा सरहुल एवं करमा नृत्य की प्रस्तुति दी गई। आदिवासी लोकजीवन, प्रकृति और सामुदायिक परंपराओं से जुड़े इन लोकनृत्यों ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति, पारंपरिक लय और आकर्षक वेशभूषा ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया।

    इसके साथ ही रायपुर के डॉ. रामनारायण नेताम ने आदिवासी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी। नवलदास मानिकपुरी, दुर्ग ने लोकगीत-संगीत से समां बांधा। वहीं सुआरती बारले, भिलाई ने पंथी नृत्य की ऊर्जापूर्ण प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। सुरमादत्त जोशी, रायपुर की नाचा-गम्मत की प्रस्तुति ने हास्य, मनोरंजन और लोकनाट्य के रंगों से कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया।

    लोककलाओं को मंच देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी : डॉ. कन्नौजे

    लोकरंग पर्व के समापन अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए स्थानीय कलाकारों ने अपनी-अपनी लोककलाओं की शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजन कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ प्रोत्साहन और सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    उन्होंने कहा कि लोकरंग पर्व जैसे सांस्कृतिक आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध और सुघर लोकसंस्कृति को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, लोकनाट्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ती है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने के साथ ही विलुप्त होती लोकविधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को भी प्रोत्साहन मिलता है।

    लोकविरासत के विविध रंगों का संगम बना लोकरंग

    तीन दिनों तक चले लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों की लोकसंस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को मंच मिला। अंतिम दिन सरहुल, करमा, आदिवासी लोकगीत, पंथी और नाचा-गम्मत जैसी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसकी विविध लोकपरंपराओं में निहित है।

    कार्यक्रम में संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    लोकरंग पर्व का अंतिम दिन दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की विविधता और जीवंतता को करीब से अनुभव करने का अवसर बना। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया। आयोजन ने एक ओर जहां लोककलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं को सहेजने, संवारने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सार्थक संदेश दिया।

  • मंत्री कश्यप ने सहकारी सप्ताह 2026 पर आधारित काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचन

    मंत्री कश्यप ने सहकारी सप्ताह 2026 पर आधारित काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचन

    रायपुर

    सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक संपन्न हुई।     मंत्री केदार कश्यप ने बैठक में सहकारिता के सुदृढ़ीकरण पर जोर देते हुए कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और किसान-हितैषी बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। हमारा मुख्य ध्येय प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के माध्यम से अंतिम व्यक्ति और प्रदेश के प्रत्येक किसान तक शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाना है। 

    को-ऑपरेटिव सेक्टर पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का किया विमोचन

     बैठक में मंत्री कश्यप ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से किसानों का भरोसा सहकारिता प्रणाली पर और मजबूत होगा। उन्होंने को-आपरेटिव बैंको में रिक्त पदों की समीक्षा की। उन्होंने रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्री ने सहकारी सप्ताह 29 जून से 06 जूलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ में को-ऑपरेटिव सेक्टर में आयोजित विविध कार्यक्रम पर केन्द्रीत काफी-टेबल बुकलेट का विमोचन किया गया।

    पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने दिए निर्देश

      बैठक में मंत्री कश्यप ने अधिकारियों, प्रबंध संचालकों, संभागीय संयुक्त आयुक्तों, उप/सहायक आयुक्तों तथा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे।

    16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित

     मंत्री कश्यप ने अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, समय पर उर्वरक (खाद), बीज एवं ऋण वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों को कोआपरेटिव्ह बैंको के माध्यम से चालू खरीफ सीजन 2026 हेतु 8800 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 90 प्रतिशत है। बैठक में मंत्री कश्यप द्वारा अधिकारियों को शत-प्रतिशत कृषि ऋण वितरण के निर्देश दिया गया। ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. की उपलब्धता बढ़ाकर डिजिटल बैंकिंग को सुलभ बनाने पर बल दिया गया।

    718 गोदामों का निर्माण पूर्ण

    मंत्री कश्यप ने 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण व त्प्क्थ् योजना के तहत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई, साथ ही नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए। बैठक में आराईडीएफ अंतर्गत  आबंटित 725 गोदामों में 718 गोदामों के निर्माण पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। शेष 7 गोदाम के जल्द ही निर्माण पूर्ण किये जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया।

    अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों को दिलाने निर्देश

     सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, न्यायालयीन मामलों में समय पर जवाबदावा प्रस्तुत करने तथा कार्यालयों में ई-ऑफिस और आधार-बेस्ड उपस्थिति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए। धान उपार्जन केंद्रों में शेष बचे धान का शीघ्र एवं पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने के आदेश दिए गए। बैठक के अंत में मंत्री कश्यप ने सभी विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही और पूरी पारदर्शिता के साथ शासकीय योजनाओं का त्वरित लाभ किसानों एवं सहकारिता क्षेत्र से जुड़े आम नागरिकों तक पहुंचाने का निर्देश दिये।

     इस अवसर पर सचिव सहकारिता डॉ सी.आर प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाएं रमेश शर्मा, अपेक्स बैंक महाप्रबंधक एवं प्रभारी प्रबंध संचालक युगल किशोर, अपर पंजीयक यू बीएस राठिया, अपर पंजीयक श्रीमती सावित्री भगत व सहकारिता विभाग व अपेक्स बैंक के अधिकारीगण तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के सीईओ उपस्थित थे।

  • हाई कोर्ट में बढ़ी न्यायिक ताकत: छत्तीसगढ़ को मिले तीन नए जज, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

    हाई कोर्ट में बढ़ी न्यायिक ताकत: छत्तीसगढ़ को मिले तीन नए जज, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

     बिलासपुर

    छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को तीन नए न्यायाधीश मिल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद केंद्र सरकार ने संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार की छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने मंगलवार को नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी कर दी।

    तीनों की नियुक्ति उनके संबंधित पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त 2026 को हुई बैठक में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की अनुशंसा की थी। कॉलेजियम के आधिकारिक रिकॉर्ड में संतोष शर्मा, सुषमा सावंत और सुधीर कुमार के नाम दर्ज हैं।

    हाई कोर्ट में पदोन्नयन महत्वपूर्ण

    संतोष शर्मा वर्तमान में कोरबा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में पदस्थ हैं। सुषमा सावंत छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर की निदेशक हैं, जबकि सुधीर कुमार रायपुर के परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के पद पर हैं। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की आधिकारिक न्यायिक अधिकारियों की सूची में तीनों के वर्तमान पद दर्ज हैं। तीनों अधिकारियों के उच्च न्यायिक सेवा में लंबे अनुभव को देखते हुए उनका हाई कोर्ट में पदोन्नयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 अगस्त की बैठक में देश के विभिन्न हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्तावों पर विचार किया था। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम मंजूर किए गए थे। इसके बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के स्तर पर प्रक्रिया में था। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से तीनों के हाई कोर्ट न्यायाधीश बनने का रास्ता साफ हो गया है।

     

  • विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध जैसे मुद्दों पर सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने दिए सुझाव

    विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध जैसे मुद्दों पर सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने दिए सुझाव

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मंगलवार, 08 सितंबर को दुर्ग में यूसीसी प्रारूप समिति द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

     बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी  एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता  मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या मती (डॉ.) ज्योति रानी सिंह की उपस्थिति में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

    पारंपरिक मान्यताओं और कानूनी सुधारों पर चर्चा

    बैठक के दौरान विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संघों के पदाधिकारियों ने यूसीसी के पक्ष और विपक्ष में खुलकर अपने विचार रखे। इस दौरान पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने आश्वस्त किया कि प्राप्त सभी सुझावों का अध्ययन कर संहिता का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

    विविध संगठनों की रही सक्रिय सहभागिता

     इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्र के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से साहू समाज, मनवा कुर्मी समाज, कंवर समाज, चंद्रनाहू कुर्मी समाज, गोंडवाना सेवा समिति, आंध्र समाज, हलवा समाज, ताम्रकार समाज, यादव समाज, कंडरा आदिवासी समाज एवं मुस्लिम समाज युवा प्रभाग के पदाधिकारी, सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना गोंड महासभा, बीएसपी एसटी कर्मचारी संघ, भारतीय बौद्ध महासभा और राम मंदिर ट्रस्ट बेमेतरा के प्रतिनिधि शामिल थे। इसी प्रकार नागरिक एवं व्यावसायिक मंच से वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंच, प्रज्ञा वरिष्ठ नागरिक संघ, पेंशनर्स संघ, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के सदस्य सुझाव देने वालों में शामिल थे।

    डिजिटल माध्यम से भी आमंत्रित किए गए सुझाव

    बैठक में एडवोकेट प्रांजल शर्मा ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (च्च्ज्) के माध्यम से समान नागरिक संहिता के स्वरूप और प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। समिति ने आम जनता और संगठनों से सुझाव प्राप्त करने के लिए आधिकारिक वेबसाईट http://ucc.cgstate.gov.in एवं ई-मेल  ucc-chhattisgarh@cg.gov.in भी साझा की है।

     बैठक में यूसीसी समिति के सदस्य सचिव एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्याम धावड़े, दुर्ग संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह, एडीएम वीरेंद्र सिंह और एसडीएम प्रफुल्ल गुप्ता सहित दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।