Category: छत्तीसगढ़

  • डिजिटल न्याय व्यवस्था को गति देने पर फोकस, एफआईआर-चार्जशीट के ऑनलाइन प्रेषण समेत ई-साक्ष्य पर जोर

    डिजिटल न्याय व्यवस्था को गति देने पर फोकस, एफआईआर-चार्जशीट के ऑनलाइन प्रेषण समेत ई-साक्ष्य पर जोर

    रायपुर

    उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री  विजय शर्मा ने नवीन आपराधिक कानूनों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों तथा अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक त्वरित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है तथा इसके लिए कानून में उल्लिखित प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण की जानी चाहिए।

    नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में गृह मंत्री  शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की बेहतर स्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की। डैशबोर्ड के प्रत्येक मापदंड की बिंदुवार समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की रैंकिंग में और सुधार के लिए हर स्तर पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप जुलाई माह से राज्य की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी मापदंडों में सुधार की गति बनाए रखने के निर्देश दिए।

    एफआईआर से न्यायालय तक की प्रक्रिया हो त्वरित

    कार्यात्मक दक्षता के मापदंड पर सुधार के संबंध में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि एफआईआर और चार्जशीट सीधे न्यायालय तक पहुंचाने की व्यवस्था शीघ्र पूर्ण की जाए, ताकि विवेचना से लेकर विचारण तक की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो। इसी मापदंड के अंतर्गत उन्होंने नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (नाफिस) तथा ई-साक्ष्य के उपयोग को बढ़ाने के लिए सभी थानों को तकनीकी एवं कार्यात्मक दृष्टि से शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।  शर्मा ने यह भी कहा कि ई-समन जारी होने के बाद उसकी तामील शीघ्र सुनिश्चित की जाए और निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट ऑनलाइन माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए।

    प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत लंबित अधिसूचनाएं शीघ्र जारी हों

     गृह मंत्री  शर्मा ने प्रशासकीय सुधार के अंतर्गत आवश्यक अधिसूचनाएं और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ-साथ मैदानी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है, तभी नए कानूनों का वास्तविक लाभ नागरिकों तक पहुंच सकेगा।

    राज्य स्तरीय कठिनाइयों के समाधान पर विचार-विमर्श

    बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों, सीसीटीएनएस तथा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के क्रियान्वयन में राज्य स्तर पर आ रही कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) तथा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के अधिकारियों के साथ इनके तकनीकी और प्रक्रियात्मक समाधान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन बिंदुओं पर केंद्रीय स्तर से सहयोग अथवा तकनीकी समाधान अपेक्षित है, उन पर समन्वय स्थापित कर शीघ्र निराकरण कराया जाए, जिससे छत्तीसगढ़ नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में और बेहतर प्रदर्शन कर सके।

      बैठक में महानिदेशक एनसीआरबी  अमित गर्ग, महानिदेशक बीपीआरडी  आलोक मित्तल, गृह विभाग की प्रमुख सचिव गृह सु निहारिका बारिक, गृह सचिव सु नेहा चंपावत एवं  हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम, महानिदेशक जेल  हिमांशु गुप्ता, संचालक अभियोजन  प्रदीप गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक  विवेकानंद सिन्हा, सीएपीटी भोपाल  अनिल किशोर यादव उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय पुलिस महानिरीक्षक, जिले के पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मेडिको-लीगल नोडल अधिकारी और अभियोजन अधिकारी, तथा दिल्ली से एनसीआरबी एवं एनआईसी के अन्य अधिकारी बैठक में सम्मिलित हुए।

    क्या है एनसीएलआई डैशबोर्ड 

    नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (एनसीएलआई) डैशबोर्ड भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से तीनों नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के देशव्यापी क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी की जाती है।

  • सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय, ‘लखपति दीदी’ बनने की ओर बढ़े कदम

    सालाना 2 से 3 लाख रुपये की आय, ‘लखपति दीदी’ बनने की ओर बढ़े कदम

    रायपुर

     छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर महिलाएं अपने हुनर और मेहनत को स्थायी आजीविका का माध्यम बना रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी की मती रानू कैवर्त ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने मेहनत, हुनर और बिहान से मिले सहयोग के बूते आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है।

    कभी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने वाली रानू कैवर्त आज अपने गांव में महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव के रूप में उन्होंने समूह से मिले मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग का बेहतर उपयोग करते हुए आजीविका की अनेक गतिविधियों को अपनाया। उनके प्रयासों का परिणाम है कि अब विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

    एक नहीं, कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आमदनी

    रानू कैवर्त ने आत्मनिर्भर बनने के लिए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय अपनी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कई गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाया। उनके समूह द्वारा सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान, किराना स्टोर, बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन गतिविधियों ने परिवार के लिए आय के नए स्रोत विकसित किए हैं।

    सिलाई कार्य और कपड़ों की दुकान से जहां उन्हें अपने हुनर को आय में बदलने का अवसर मिला, वहीं किराना दुकान तथा पशु-पक्षी पालन से आमदनी के अतिरिक्त साधन तैयार हुए। हैचरी और देशी मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों ने उनके व्यवसाय को और विस्तार दिया। अलग-अलग गतिविधियों को आपस में जोड़कर रानू ने ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय बाजार की संभावनाओं का प्रभावी उपयोग किया है।

    बिहान से मिला अवसर, मेहनत ने बदली तस्वीर

    रानू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। बिहान से प्राप्त आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और समूह की सामूहिक शक्ति ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने इस सहयोग को अपनी मेहनत और लगन से जोड़ा और धीरे-धीरे आजीविका के कई साधन विकसित किए।

    उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि अवसर, संसाधन, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं। रानू का प्रयास अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर अपने हुनर को आजीविका में बदलने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    महतारी वंदन योजना से मिला अतिरिक्त संबल

    रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना के तहत प्रत्येक माह मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ भी प्राप्त हो रहा है। नियमित आर्थिक सहयोग से उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे उनके आर्थिक आत्मविश्वास को भी मजबूती मिली है और वे अपनी आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार

    रानू कैवर्त ने अपनी सफलता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और बिहान से मिले सहयोग ने उनके जैसे ग्रामीण परिवारों को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। आज वे अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।

    रानू कैवर्त की सफलता ग्रामीण छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां सरकारी योजनाओं का सहयोग, स्व-सहायता समूह की सामूहिक शक्ति और महिलाओं की मेहनत एवं उद्यमशीलता मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं। ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में बढ़ते रानू के कदम यह संदेश देते हैं कि सही अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक बदलाव की मजबूत वाहक बन सकती हैं।

  • बेटियों की पढ़ाई को सशक्तिकरण का आधार बनाने पर जोर, लखन लाल देवांगन ने कही बड़ी बात

    बेटियों की पढ़ाई को सशक्तिकरण का आधार बनाने पर जोर, लखन लाल देवांगन ने कही बड़ी बात

    रायपुर

    शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, कोरबा में आयोजित दीक्षारम्भ समारोह में कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत नवप्रवेशित छात्राओं का स्वागत किया और अतिथियों द्वारा महाविद्यालय की लगभग 1,500 छात्राओं को सीएसआर (CSR) मद के माध्यम से एजुकेशन किट प्रदान की गई। कार्यक्रम में महापौर  संजू देवी राजपूत अति विशिष्ट अतिथि तथा कलेक्टर  कुणाल दुदावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। 

    अन्य शासकीय कॉलेजों में भी बनेंगे विशाल डोम

     शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास पर जोर देते हुए मंत्री  देवांगन ने कहा कि मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में डीएमएफ (DMF) मद से विशाल डोम का निर्माण कराया जाएगा।

    विकास मॉडल के केंद्र में GYAN

    मंत्री  देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रदेश का विकास मॉडल GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) पर केंद्रित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) वर्ष 2021-22 के 19.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो गया है।

    मेहनत से सफलता के शिखर तक पहुँचें बेटियाँ- महापौर

    महापौर  संजू देवी राजपूत ने छात्राओं को देश का भविष्य और विकसित भारत की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए निरंतर मेहनत और संघर्ष के साथ सफलता के शिखर तक पहुँचने का आह्वान किया।

    शिक्षा डीएमएफ की सर्वाेच्च प्राथमिकता- कलेक्टर

    कलेक्टर कोरबा  कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया कि जिले में डीएमएफ मद के कार्यों में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले के छात्र-छात्राओं को देश के किसी भी शासकीय महाविद्यालय में उच्च अध्ययन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद, महाविद्यालय की प्राचार्य  पपिया चतुर्वेदी, प्राध्यापकगण एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  • CG किसानों के लिए खुशखबरी! सात सिंचाई योजनाओं पर खर्च होंगे ₹30.74 करोड़, खेतों तक पहुंचेगा पानी

    CG किसानों के लिए खुशखबरी! सात सिंचाई योजनाओं पर खर्च होंगे ₹30.74 करोड़, खेतों तक पहुंचेगा पानी

    छत्तीसगढ़- सात सिंचाई योजनाओं के लिए 30.74 करोड़ रूपए स्वीकृत

    किसानों को मिलेगी बेहतर सिंचाई सुविधा

    बलौदाबाजार-भाटापारा और रायपुर जिले के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को मिलेगा फायदा

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ सरकार के जल संसाधन विभाग ने राज्य में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सात प्रमुख सिंचाई योजनाओं के लिए कुल 30 करोड़ 74 लाख 39 हजार रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि का उपयोग नहरों के जीर्णाेद्धार, रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग और भूमिगत पाइपलाइन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा।

                  जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिलेवार स्वीकृत कार्यों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के बलौदा शाखा नहर (वितरक 11 एवं 12)में रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग एवं पक्के निर्माण कार्यों के लिए 4.99 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं, इससे 339.05 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। इसी प्रकार सोंढूर परियोजना (बेन्द्री वितरक नहर) के भाटापारा शाखा नहर के बेन्द्री वितरक नहर की रिमॉडलिंग व सीसी लाइनिंग के लिए 4.82 करोड़ मंजूर। इससे 355 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी मिलेगा। 

                रायपुर जिला (धरसींवा विकासखंड) के भाटापारा शाखा नहर कार्य में महानदी परियोजना अंतर्गत विभिन्न सुधार कार्यों हेतु 4.20 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 14) के आर.डी. 2700 मीटर से 3500 मीटर तक नहर को ह्यूम पाइप के माध्यम से भूमिगत करने के लिए 4.90 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। मांढ़र ब्रांच केनाल सर्विस रोडरू आर.डी. 31600 मीटर से 32900 मीटर तक डामर रोड निर्माण के लिए 1.90 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 8 व माइनर 1) में भूमिगत पाइपलाइन तथा कंक्रीट व मुरमीकरण रोड निर्माण के लिए 4.92 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 11।, 13, 14 व माइनर्स) महानदी परियोजना समूह के अंतर्गत जीर्णाेद्धार कार्यों के लिए 4.97 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है।

               जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत इन विकास कार्यों से क्षेत्र में जल प्रबंधन बेहतर होगा और अंतिम छोर (टेल एरिया) तक किसानों के खेतों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

  • CG में जमीन सीमांकन की बदली व्यवस्था, अब ऑनलाइन मिलेगी सुविधा; किसानों और जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    CG में जमीन सीमांकन की बदली व्यवस्था, अब ऑनलाइन मिलेगी सुविधा; किसानों और जमीन मालिकों को बड़ी राहत

    डिजिटल छत्तीसगढ़- अब ज़मीन के सीमांकन के लिए नहीं काटने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

    नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश,पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

    रायपुर, 
     राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ज़मीन के सीमांकन (Demarcation)  की प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। अब ज़मीन मालिकों को नाप-जोख या सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

           नए डिजिटल सिस्टम में सीमांकन आवेदन के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि सिर्फ  लोक सेवा केंद्र (CSC/चॉइस सेंटर) और राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिज़न  पोर्टल या सेवासेतु के माध्यम से ही आवेदन जमा किए जा सकेंगेद्य जिससे सीमांकन के ऑफलाइन या मैन्युअल आवेदन को म-बवनतज अंतर्गत  तहसील स्तर से दर्ज करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर हो जाएंगे। एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी अपने रिपोर्ट ऑनलाइन  जमा करने का प्रावधान भी इसमें शामिल किया जा रहा है, जिससे आवेदक को आवेदन के संबंध मे सभी स्तर के जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।

         राजस्व विभाग के भू-अभिलेख शाखा से जारी पत्र अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट  (E-Court)  सॉफ्टवेयर में ज़रूरी तकनीकी सुधार कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गये हैं।
          
    सिर्फ आपत्ति होने पर ही जाना होगा तहसील

           नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग से पूरी होगी। आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना पड़ेगा, जब सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी या अन्य पक्ष द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए। अगर मामला निर्विवाद है, तो आवेदक को एक बार भी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होगी।

           मैन्युअल व्यवस्था खत्म होने से दफ्तरों की अनचाही भाग-दौड़ और बिचौलियों का दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। तय समय-सीमा के कारण मामलों के पेंडिंग रहने की समस्या दूर होगी और आवेदकों को निश्चित समय में सीमांकन रिपोर्ट मिल जाएगी। 

    ई-गवर्नेंस की ओर एक और बड़ा कदम

         राजस्व विभाग नागरिकों की सुविधा के लिए पहले ही कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर चुका है। जिसमें डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 एवं P-II नागरिक घर बैठे खसरा और खतौनी की QR कोड वाली प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं। ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (Diversion) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है।

             राजस्व विभाग की यह नई पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और आम लोगों की समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

  • ₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance का लोकार्पण, BPL परिवारों की 50 महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित

    ₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance का लोकार्पण, BPL परिवारों की 50 महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित

    रायपुर
    सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से रेखांकित करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भोपाल सर्कल ने रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में दो महत्वपूर्ण CSR पहल कीं। एक ओर पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, रायपुर को ₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance प्रदान की गई, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद एवं BPL परिवारों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 50 सिलाई मशीनों का वितरण किया गया।

    इन महत्वपूर्ण अवसरों पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अध्यक्ष सी.एस. सेट्टी की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशेष बात यह रही कि बैंक के सभी प्रबंध निदेशक  अश्विनी तिवारी, राणा आशुतोष कुमार सिंह, राम मोहन राव अमरा एवं रवि रंजन भी एक मंच पर उपस्थित रहे। SBI के शीर्ष नेतृत्व की इस सामूहिक उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की और भोपाल सर्कल के लिए यह एक गौरवपूर्ण अवसर बना।

    जीवन बचाने वाली चिकित्सा सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
    SBI द्वारा CSR के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई Advanced Life Care Ambulance अत्याधुनिक जीवन रक्षक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित है। आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुंचाने में यह एम्बुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    एम्बुलेंस को पंडित JNM मेडिकल कॉलेज, रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने प्राप्त किया। इस अवसर पर SBI भोपाल सर्कल के मुख्य महाप्रबंधक प्रभाष कुमार सुबुद्धि सहित CMC के सभी सदस्य एवं बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    SBI की इस पहल को रायपुर और आसपास के क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। यह केवल एक एम्बुलेंस का योगदान नहीं, बल्कि जरूरत के समय जीवन बचाने की व्यवस्था को मजबूत करने की पहल है।

    50 सिलाई मशीनों से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
    CSR कार्यक्रम की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में BPL लाभार्थियों के लिए 50 सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। लाभार्थियों का चयन परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना अभनपुर द्वारा किया गया था।

    इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार का साधन देकर आत्मनिर्भर बनाना है। सिलाई मशीन मिलने से महिलाएं अपने घर से ही आय अर्जित करने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगी।

    SBI Ladies Club(कॉर्पोरेट सेंटर) की ओर से श्रीमती सूर्या श्रीदेवी, विजया अमरा एवं अमृता सिन्हा एवं अन्य वरिष्ठ सदस्याओं द्वारा लाभार्थियों को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में भोपाल मंडल की ओर से लेडीज क्लब अध्यक्षा श्रद्धांजलि सुबुद्धि सहित बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    CSR को सेवा और सशक्तिकरण का माध्यम बना रहा SBI
    SBI की इन दोनों पहलों ने बैंक के CSR दृष्टिकोण की व्यापकता को सामने रखा। *एक पहल जीवन बचाने वाली स्वास्थ्य सुविधा को मजबूती देती है, तो दूसरी जरूरतमंद महिलाओं के हाथों में आत्मनिर्भरता का साधन सौंपती है।

    SBI भोपाल सर्कल की यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों तक अवसर, सुविधा और सम्मान पहुंचाना भी है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में जीवनरक्षक सुविधा और महिलाओं के हाथों में रोजगार का साधन—SBI की CSR पहल ने रायपुर में सेवा, संवेदना और सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली संदेश दिया।

  • बिलासपुर में सामान्य से अधिक बारिश, छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम; 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट

    बिलासपुर में सामान्य से अधिक बारिश, छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम; 11 सितंबर से बारिश का अलर्ट

     बिलासपुर
     जिले में इस साल मानसून ने अच्छी दस्तक दी है। पांच सितंबर तक बिलासपुर में औसत वर्षा 943.5 मिमी दर्ज की गई है। यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के 900.7 मिमी औसत से 42.8 मिमी अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक सामान्य औसत की 104.8 प्रतिशत वर्षा हो चुकी है।

    943.5 मिमी पहुंची औसत वर्षा
    भू-अभिलेख शाखा के आंकड़ों के अनुसार एक जून से पांच सितंबर तक जिले में कुल 11322.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसका औसत 943.5 मिमी रहा, जबकि पिछले दस वर्षों की इसी अवधि का औसत 900.7 मिमी है। यानी इस बार मानसून ने सामान्य आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है।

    तहसीलवार आंकड़ों में भी बारिश का अलग-अलग असर देखने को मिला है। बिलासपुर तहसील में 1178.0 मिमी वर्षा दर्ज हुई, जो दस वर्षीय औसत 943.6 मिमी से करीब 24.8 प्रतिशत अधिक है। बोदरी में 1027.8 मिमी, सकरी में 1075.8 मिमी और रतनपुर में 1008.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इसके विपरीत कोटा तहसील में 763.8 मिमी वर्षा हुई, जो यहां के दस वर्षीय औसत 881.8 मिमी से कम है।

    सितंबर में कमजोर पड़ सकता है मानसून 
    मौसम विशेषज्ञ अब्दुल सिराज खान के अनुसार मानसूनी तंत्र अभी सक्रिय बना हुआ है, लेकिन इसकी गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। माहांत तक मानसून कमजोर होने का अनुमान है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े के बाद राजस्थान से मानसून की वापसी की गतिविधियां सक्रिय होने के साथ बिलासपुर में भी मानसून के कमजोर पड़ने का दौर तेज हो सकता है।

    फिलहाल बारिश से पूरी तरह राहत मिलने के संकेत नहीं हैं। 11 सितंबर से बिलासपुर में हल्की से मध्यम वर्षा होने का अनुमान है।

    दस साल में सितंबर की बारिश ने बदला रंग
    बिलासपुर में सितंबर की वर्षा का रिकॉर्ड बताता है कि इस महीने मौसम का मिजाज लगातार बदलता रहा है। वर्ष 2016 में सितंबर में कुल 176.7 मिमी बारिश हुई थी। 2017 में यह 115.7 मिमी और 2018 में केवल 86.7 मिमी रही। वर्ष 2019 में सितंबर की बारिश बढ़कर 341.9 मिमी पहुंच गई।

    वर्ष 2020 में 139.5 मिमी, 2021 में 268.6 मिमी और 2022 में 178.8 मिमी बारिश दर्ज हुई। वर्ष 2023 में सितंबर में 493 मिमी बारिश के साथ उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला।

    24 घंटे की बारिश में भी रहा उतार-चढ़ाव
    सितंबर में 24 घंटे के दौरान हुई बारिश के आंकड़े भी मौसम की अस्थिरता बताते हैं। वर्ष 2016 में सर्वाधिक 24 घंटे की बारिश 48 मिमी रही। 2018 में यह केवल 29.6 मिमी थी। वर्ष 2019 में 52 मिमी और 2020 में 54 मिमी बारिश दर्ज हुई। 2022 में 24 घंटे में 50.4 मिमी बारिश हुई। वर्ष 2023 में सितंबर के दौरान 24 घंटे में 135.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस दशक की असाधारण घटनाओं में शामिल रही।

    मानसून कमजोर होगा, बारिश तत्काल बंद नहीं
    मानसून की गतिविधियों में कमी आने का मतलब यह नहीं है कि बारिश अचानक पूरी तरह बंद हो जाएगी। मौसम तंत्र कमजोर होने के दौरान स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कुछ स्थानों पर वर्षा की संभावना बनी रह सकती है। इस वर्ष जिले के लिए राहत की बात यह है कि औसत वर्षा सामान्य से ऊपर पहुंच चुकी है। आगे होने वाली बारिश से मिट्टी में नमी, जलस्रोतों और खरीफ फसलों को अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है।

  • NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय पर ठगी के गंभीर आरोप, शिकायत में भाई-चाचा के नाम भी शामिल

    NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय पर ठगी के गंभीर आरोप, शिकायत में भाई-चाचा के नाम भी शामिल

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे के खिलाफ 29 लाख रुपए से अधिक की कथित ठगी की शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता युवक का आरोप है कि उसे विभिन्न काम दिलाने का भरोसा देकर अलग-अलग माध्यमों से बड़ी रकम ली गई, लेकिन बाद में कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया।मामले में नीरज पांडे के अलावा उनके भाई दीपक पांडे और चाचा इंद्रासन पांडे के नाम भी शिकायत में शामिल किए गए हैं। फिलहाल आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

    एजेंसी, नौकरी और ठेका दिलाने का दिया भरोसा
    शिकायतकर्ता के अनुसार उसे सिप्ला कंपनी की एजेंसी या डीलरशिप दिलाने का आश्वासन दिया गया था। इसके अलावा DKS अस्पताल में नौकरी और कैंटीन का ठेका दिलाने की बात भी कही गई।युवक का आरोप है कि इन कामों के नाम पर उससे अलग-अलग समय पर रकम ली गई। शिकायत में उसकी पत्नी को मंत्रालय में नौकरी और रेत खदान से जुड़ा काम दिलाने का भरोसा दिए जाने का भी उल्लेख है।

    भाई और चाचा के नाम भी शिकायत में शामिल
    इस मामले में नीरज पांडे के साथ उनके भाई दीपक पांडे और चाचा इंद्रासन पांडे का नाम भी सामने आया है। शिकायतकर्ता ने तीनों पर अलग-अलग माध्यमों से रकम लेने से जुड़े आरोप लगाए हैं।हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

    झूठा और बेबुनियार आरोप
    नीरज के भाई दीपक से संपर्क करने पर बताया कि,  राजू के साथ उनके चाचा का प्लाटिंग का ज्वाइंट काम था। इस संबंध में उनके बीच पैसों की आपस में लेन-देन होती थी। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष के भाई के अनुसार, उनका राजू के परिवार के साथ घरेलू संबंध रहा है। आरोपों को लेकर उनका कहना है, उन्हें भी समझ नहीं आ रहा है कि राजू ने किनके कहने पर उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

    बैंक ट्रांजेक्शन और भुगतान का दिया हवाला
    युवक ने पुलिस को दिए आवेदन में बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य भुगतानों का जिक्र किया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने जिन कामों के लिए रकम दी, वे पूरे नहीं किए गए।उसने अपने आवेदन में कथित भुगतान से जुड़े विवरण भी पुलिस के सामने रखे हैं, जिसके आधार पर मामले की जांच की मांग की गई है।

    पुलिस कमिश्नर से शिकायत, CM से भी लगाई गुहार
    मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने रायपुर पुलिस कमिश्नर के समक्ष आवेदन दिया है। इसके बाद उसने मुख्यमंत्री से भी न्याय की गुहार लगाई है।अब इस मामले में पुलिस जांच के बाद आगे क्या कार्रवाई करती है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है, इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

     

  • ‘पत्रकारिता में सत्य और जनहित सर्वोपरि’, राज्यपाल डेका ने कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में AI-मीडिया शोध केंद्र का किया उद्घाटन

    ‘पत्रकारिता में सत्य और जनहित सर्वोपरि’, राज्यपाल डेका ने कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में AI-मीडिया शोध केंद्र का किया उद्घाटन

    पत्रकारिता में सत्य, तथ्य और जनहित सर्वाेच्च प्राथमिकता हो – राज्यपाल डेका

    राज्यपाल ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में कन्या छात्रावास, मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का किया शुभारंभ

    रायपुर

    राज्यपाल रमेन डेका ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र का उद्घाटन भी किया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन विश्वविद्यालय के लिए विशेष महत्व रखता है। सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनके नाम पर कन्या छात्रावास का नामकरण छात्राओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह छात्रावास दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी उच्च शिक्षा और प्रतिभा विकास में सहायक होगा।

            राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगमन से मीडिया और पत्रकारिता के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। ऐसे समय में विश्वविद्यालय में स्थापित मेधा एआई एवं मीडिया शोध केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों को समझने तथा उनके जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यपाल डेका ने विश्वविद्यालय के प्रेरणा स्त्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे जी की प्रतिमा में श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। उन्होंने स्व. ठाकरे जी के सानिध्य में बिताए गए अवसरों और प्रेरणादायी उद्धरणों को साझा किया।

            डेका ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार है और इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार का दायित्व है। समाचारों में तथ्य, सत्य और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के संबंध में समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूर्ण पुष्टि आवश्यक है, क्योंकि एक समाचार का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है।

           डेका ने कहा कि सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में सूचनाओं का तेजी से प्रसार हो रहा है, लेकिन सोशल मीडिया पर उपलब्ध प्रत्येक सामग्री सत्य हो, यह आवश्यक नहीं है। ऐसे में पत्रकारों को तथ्यों की जांच-पड़ताल के बाद ही समाचारों को प्रसारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। एक श्रेष्ठ पत्रकार वह नहीं जो सबसे पहले खबर दे, बल्कि वह है जो सही, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ खबर दे।

            राज्यपाल ने प्रिंट मीडिया के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एआई और सोशल मीडिया के आधुनिक दौर में भी प्रिंट मीडिया आज भी विश्वसनीय माध्यम समाज में बना हुआ है। पत्रकारिता को समाज के अंतिम व्यक्ति की आवश्यकताओं और समस्याओं को सामने लाने तथा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए  अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, लेकिन वे व्यापक रूप से पहचाने नहीं जा सके। ऐसे अनसुने नायक-नायिकाओं के कार्यों को समाचारों और लेखों के माध्यम से समाज के सामने लाने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी।

           राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास करने तथा कम से कम एक हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की आवश्यक मान्यता सुनिश्चित करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

          कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी विभागाध्यक्ष प्रबंधन और आभार प्रदर्शन सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्राध्यापकगण, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।दुबई में इथियोपिया के राष्ट्रपति से मिले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  • छत्तीसगढ़ में बाल विवाह के खिलाफ जंग को मिली नई धार, वैश्विक संकल्प से बढ़ा अभियान का संकल्प

    छत्तीसगढ़ में बाल विवाह के खिलाफ जंग को मिली नई धार, वैश्विक संकल्प से बढ़ा अभियान का संकल्प

    रायपुर

     बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे जागरूकता और रोकथाम के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने से नई ताकत मिली है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा जिला एवं मैदानी स्तर पर जागरूकता, निगरानी और रोकथाम की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है।

    यह निर्णय भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 27 नवंबर 2024 को ही देश में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की गई थी। भारत से शुरू हुई इस मुहिम को अब वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की दर में आई उल्लेखनीय कमी

    राज्य में बाल विवाह रोकथाम के लिए शासन, प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों के समन्वित प्रयासों का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों का प्रतिशत 12.1 प्रतिशत था, जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (2023-24) में घटकर 10.1 प्रतिशत रह गया है।

    बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ ही राज्य में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। समुदायों, पंचायतों, स्कूलों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और पुलिस की भागीदारी से बाल विवाह की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 8,414 बाल विवाह रुकवाए गए

    जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) और उसके सहयोगी संगठनों द्वारा भी राज्य में बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 8 सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर 8,414 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। यह आंकड़ा राज्य में शासन और सामाजिक संगठनों के साझा प्रयासों तथा बढ़ती जनजागरूकता को दर्शाता है।

    27 नवंबर को वैश्विक स्तर पर मजबूत होगा संकल्प

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में सिएरा लियोन द्वारा भारत सहित 67 देशों के समर्थन से प्रस्तुत प्रस्ताव को 4 सितंबर को पारित किया गया। इसके तहत 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है।

    27 नवंबर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के दौरान 25 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बाल विवाह के खिलाफ शपथ ली गई थी। अब संयुक्त राष्ट्र की घोषणा से इस अभियान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और व्यापक जनभागीदारी मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सुरक्षा और विकास के समान अवसर मिलें तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथा का पूरी तरह उन्मूलन हो। राज्य के सतत प्रयास 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने के वैश्विक संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।