Category: बिज़नेस

  • बच्चे के साथ IndiGo में सफर हुआ महंगा, अब ₹1,000 तक अतिरिक्त किराया देना होगा

    बच्चे के साथ IndiGo में सफर हुआ महंगा, अब ₹1,000 तक अतिरिक्त किराया देना होगा

    मुंबई 

    इंडिगो से हवाई सफर करने वालों के लिए काम की खबर है. एयरलाइन ने कई सेवाओं के चार्ज बढ़ा दिए हैं. घरेलू उड़ानों में 2 साल से कम उम्र के बच्चों का किराया अब 2,000 से बढ़कर 3,000 हो गया है. यानी बच्चे के साथ सफर करने वाले माता-पिता को हर ट्रिप पर 1,000 ज्यादा देने होंगे। 

    छोटे बच्चे के लिए विमान में अलग सीट नहीं मिलती है, लेकिन टिकट बुक करते समय उसकी जानकारी देना जरूरी होता है. देश में हर साल करीब 10 लाख नवजात बच्चे माता-पिता के साथ हवाई सफर करते हैं. ऐसे में किराया बढ़ने से इंडिगो की कमाई में करीब 90 करोड़ का इजाफा होने का अनुमान है। 

    सिर्फ नवजात बच्चों का किराया ही नहीं बढ़ा है. एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सामान ले जाने का चार्ज भी ₹700 से बढ़ाकर ₹800 प्रति किलो कर दिया गया है। वहीं, अकेले सफर करने वाले बच्चों की फीस ₹5,000 से बढ़कर ₹5,999 हो गई है. इंडिगो ने प्रायोरिटी चेक-इन और बोर्डिंग का चार्ज भी बढ़ाया है। अब इसके लिए यात्रियों को ₹450 की जगह ₹650 देने होंगे. ट्रैवल सर्टिफिकेट के लिए भी अब ₹200 की जगह ₹300 चुकाने होंगे। 

    यानी इंडिगो से सफर करने वालों के लिए टिकट के अलावा कुछ दूसरी सेवाएं भी अब महंगी हो गई हैं. खासकर नवजात बच्चे के साथ सफर करने वाले परिवारों, ज्यादा सामान ले जाने वालों और अकेले यात्रा करने वाले बच्चों के लिए खर्च पहले से बढ़ गया है। 

     

  • PhonePe, Paytm समेत किन UPI ऐप्स पर कटेगा MDR? ₹2,000 वाली पेमेंट का समझें पूरा नियम

    PhonePe, Paytm समेत किन UPI ऐप्स पर कटेगा MDR? ₹2,000 वाली पेमेंट का समझें पूरा नियम

      नई दिल्ली
    भारत सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पेमेंट्स् पर चार्ज लागू करने का ऐलान कर दिया है, जो आने वाले 15 अक्टूबर से लागू होगा. UPI का भारत में बड़ा यूजरबेस है. बहुत से लोग मोबाइल में UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनके नाम PhonePe, PayTM, GPay और कई मोबाइल ऐप्स भी UPI की सर्विस देते हैं। 

    अब UPI ऐप्स चलाने वाले यूजर्स के बीच में कंफ्यूजन है कि किन-किन UPI मोबाइल ऐप्स पर MDR चार्ज कटेगा?

    सबसे पहले बता देते हैं कि 2,000 रुपये से ऊपर की कीमत के ट्रांजैक्शन पर करने पर 0.40 परसेंट मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) देना होगा. सरकार साफ कर चुकी है कि यह चार्ज कस्टमर को नहीं देना होगा बल्कि यह चुनिंदा मर्चेंट पर चार्ज लगेगा। 

    चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M)
    सरकार की तरफ से जारी जानकारी में साफ बताया है कि चार्ज सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट (P2M) है. अगर कस्टमर 2 हजार रुपये से ज्यादा की पेमेंट करता है तो उसे कोई चार्ज नहीं देना होगा. यह चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट पर ही लागू होगा। 

    MDR कैलकुलेशन कैसे होगा? 
    MDR की कैलकुलेशन को लेकर साफ जानकारी दी गई है. सरकार की तरफ से जारी सवालों के जवाब में बताया है कि ₹3,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR लागू होने पर शुल्क ₹12 होगा. यह रकम व्यापारी अपने Acquiring Bank को देगा. वहीं, ₹50,000 की खरीदारी पर 0.4% MDR के हिसाब से शुल्क ₹200 होगा। 

    1 लाख रुपये की शॉपिंग पर 0.4 परसेंट के हिसाब से MDR 400 रुपये बनता है, लेकिन यहां 300 रुपये की सीमा तय की है। 

    दरअसल, NPCI ने चुनिंदा UPI ट्रांजैक्शन के लिए Merchant Discount Rate यानी MDR का नया सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है. नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI पेमेंट पर अधिकतम 0.4% तक MDR लगाया जा सकेगा. हालांकि, सभी ट्रांजैक्शन पर एक जैसी दर लागू नहीं होगी. कुछ कैटेगरी के लिए कम दर रखी जाएगी और छोटे कारोबारियों को छूट भी मिलेगी. आम UPI यूजर्स के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य ही रहेगा। 

    शेयर्स में जोरदार तेजी
    पेटीएम के शेयर्स में आज 4 फीसदी की तेजी आई है. कंपनी के शेयर्स ने पिछले 3 महीनों में 56 फीसदी का रिटर्न और 1 साल में 40 फीसदी का मुनाफा दिया है. One MobiKwik Systems का शेयर भी 4 फीसदी से ज्यादा उछला है.  हालांकि, कंपनी ने शेयर्स ने 1 साल में 36 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है. इसके अलावा यस बैंक के शेयर्स में भी 2 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. बैंक ने 1 साल में 9 फीसदी का नेगेटिव रिटर्न दिया है। 

    UPI इंडस्ट्री का बढ़ेगा रेवेन्यू
    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, नए MDR सिस्टम से UPI इंडस्ट्री के लिए करीब ₹20,600 करोड़ का सालाना रेवेन्यू पूल बन सकता है. यह अनुमान इस आधार पर है कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब आधा हिस्सा 0.4% की पूरी MDR दर के दायरे में आ सकता है. वहीं, JPMorgan ने अधिकतम संभावित रेवेन्यू करीब ₹17,000 करोड़ आंका है. इसमें से लगभग ₹11,700 करोड़ बैंकों को मिल सकते हैं। 

    Citi का अनुमान है कि UPI इकोसिस्टम में हर साल करीब ₹16,000-17,000 करोड़ की कमाई हो सकती है. उसके मुताबिक, इस रकम का लगभग 60% हिस्सा बैंकों, 25% UPI ऐप प्रोवाइडर्स और 15% गैर-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिल सकता है. Citi ने YES Bank को प्रॉफिट पाने वाली कंपनियों में बताया है, क्योंकि बैंक का UPI से जुड़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम काफी बड़ा है। 

    कंपनियों को मिलेगा फायदा
    PhonePe के फाउंडर और CEO Sameer Nigam ने इस फैसले को UPI सिस्टम की लंबे समय की स्थिरता के लिए अहम बताया है. उनके मुताबिक देश में रोज करीब 70-80 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और इनमें लगभग 96% पेमेंट ₹2,000 से कम के हैं. उनका कहना है कि बड़े ट्रांजैक्शन पर मिलने वाला MDR भुगतान कंपनियों को अपने ऑपरेशनल खर्च की भरपाई करने में मदद कर सकता है. पिछले कई सालों से UPI पर MDR नहीं होने के कारण पेमेंट इंडस्ट्री को लगातार लागत उठानी पड़ रही थी। 

    मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि Paytm ने जानकारी दी है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI Person-to-Merchant (P2M) पेमेंट पर 0.4% तक MDR लागू होने से कंपनी को मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त कमाई हो सकती है. कंपनी के मुताबिक, जिन बड़े पेमेंट पर पहले कोई चार्ज नहीं लगता था, अब उनमें MDR से पेमेंट कंपनियों के लिए नए रेवेन्यू का रास्ता खुलेगा।

                                     MDR चार्ज कैलकुलेटर

    व्यापारी को भुगतान की राशि    लागू MDR  व्यापारी द्वारा दिया जाने वाला MDR
    ₹2,000    0%    ₹0
    ₹3,000    0.40% ₹12
    ₹50,000    0.40%  ₹200
    ₹ 75,000 रुपये या उससे ज्यादा फिक्स ₹ 300 ₹ 300

    कस्टमर पर नहीं लगेगा कोई भी चार्ज 

    मोबाइल में मौजूद UPI ऐप्स जैसे PhonePe, PayTM, Gpay आदि की मदद से अगर कोई पेमेंट करते हैं, तो कस्टमर के अकाउंट से कोई चार्ज पेमेंट नहीं होगी.  MDR चार्ज सिर्फ चुनिंदा मर्चेंट से ली जाएगी. यह रकम मर्चेंट के बैंक अकाउंट से काटी जाएगी. 

     

     

  • Gold Jewellery पर बढ़ा हॉलमार्किंग चार्ज, ₹45 से ₹75 हुआ शुल्क; ग्राहकों पर कितना असर?

    Gold Jewellery पर बढ़ा हॉलमार्किंग चार्ज, ₹45 से ₹75 हुआ शुल्क; ग्राहकों पर कितना असर?

    मुंबई 
    त्योहारों और शादी के सीजन से ठीक पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका लगने वाला है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। सरकार ने हॉलमार्किंग कराने की कॉस्ट तीन गुना बढ़ा दी है। यानी एक झटके में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी। नए सिस्टम के तहत अब गोल्ड ज्वेलरी के हर आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये चुकाने होंगे। सोने के भाव पहले ही ऊंचे स्तर पर हैं और अब हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के लिए ज्वेलर्स अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं।

    कब से लागू हुई नई हॉलमार्किंग फीस?
    BIS ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) रेगुलेशन, 2026 में रिवीजन किया है। इससे जुड़ा नोटिफिकेशन 14 सितंबर 2026 को जारी किया गया और नई फीस आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी हो गई है। नए नियमों के मुताबिक ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग सेंटर्स (AHCs) पर गोल्ड के हर एक आर्टिकल के लिए 75 रुपये की हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम चार्ज 200 रुपये होगा। वहीं, चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये तय की गई है। सिल्वर आर्टिकल के एक कंसाइनमेंट पर कम से कम 150 रुपये का शुल्क देना होगा।

    इसके अलावा भी लगेगा चार्ज
    नोटिफिकेशन के मुताबिक हॉलमार्किंग सेंट की ओर से बीआईएस के लिए भी एक शुल्क लिया जाएगा। गोल्ड आर्टिकल पर यह 7.50 रुपये प्रति आर्टिकल होगा और एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम 20 रुपये देने होंगे। सिल्वर के मामले में यह शुल्क 3.50 रुपये प्रति आर्टिकल और न्यूनतम 15 रुपये प्रति कंसाइनमेंट होगा। लागू टैक्स इसके एक्स्ट्रा होंगे।

    ज्वेलरी पर कितना लगता है GST?
    कीमती मेटल की ज्वेलरी पर 3 फीसदी जीएसटी लगता है। राज्य के अंदर सेल होने पर इसमें 1.5 फीसदी CGST और 1.5 फीसदी SGST शामिल है, जबकि इंटर-स्टेट खरीद पर 3 फीसदी IGST लगता है। गोल्ड की प्योरिटी अलग होने पर भी जीएसटी की यह दर नहीं बदलती। सितंबर से ज्वेलरी मार्केट में फेस्टिव डिमांड की तैयारियां तेज होने लगती हैं। इसके बाद नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और फिर वेडिंग सीजन आता है। ऐसे में हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ज्वेलर्स की लागत में एक और फैक्टर जोड़ सकता है। ये ऐसे समय में किया गया है जब देश में पहले ही 10 ग्राम सोने का भाव 1,51,894 रुपये है।

    हल्की ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ेगा असर
    फीस बढ़ने का असर खासतौर पर हल्की और कम कीमत वाली ज्वेलरी पर ज्यादा पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि हॉलमार्किंग शुल्क वजन के हिसाब से नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लगाया जाता है। यानी 1 ग्राम की ज्वेलरी और ज्यादा वजन वाले आर्टिकल पर भी 75 रुपये का समान शुल्क लगेगा। राजेश रोकड़े ने कहा कि जीजेसी का कहना है कि सोने की कीमतें पहले से ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में प्रति आर्टिकल तय शुल्क बढ़ने से छोटे और मास-मार्केट ग्राहकों के लिए लागत का असर ज्यादा हो सकता है।

    ज्वैलर्स एसोसिएशन कर रही हैं विरोध
    ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए या समीक्षा करनी चाहिए। GJC का कहना है कि जब हॉलमार्किंग अनिवार्य है, तो इसकी लागत बढ़ाने के बजाय सिस्टम में मौजूद फर्जी हॉलमार्किंग और दूसरी गड़बड़ियों पर पहले सख्ती होनी चाहिए। जीजेसी ने कहा कि वह हॉलमार्किंग के खिलाफ नहीं है। संगठन इसे सोने की शुद्धता, पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे के लिए जरूरी मानता है। लेकिन करीब 67 फीसदी की सीधे बढ़ोतरी को लेकर संगठन ने सवाल उठाए हैं।

    60 करोड़ से ज्यादा ज्वेलरी हो चुकी हॉलमार्क
    जीजेसी के मुताबिक सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से ज्यादा सोने के आर्टिकल HUID के साथ हॉलमार्क किए जा चुके हैं। वहीं, मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा बढ़कर 380 जिलों तक पहुंच गया था।

    हॉलमार्किंग फीस में कितना बदलाव हुआ?

    आभूषण    पुरानी फीस    नई फीस
    सोना    ₹45 प्रति आर्टिकल    ₹75 प्रति आर्टिकल
    चांदी    ₹35 प्रति आर्टिकल    ₹35 प्रति आर्टिकल

    BIS के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग शुल्क प्रति आर्टिकल होता है, न कि आभूषण के वजन के हिसाब से। 

    ग्राहक के लिए हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?
    हॉलमार्किंग का उद्देश्य सोने की शुद्धता को लेकर ग्राहक को भरोसा देना है. BIS के अनुसार हॉलमार्क यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ग्राहक को बताई गई शुद्धता के अनुरूप सोना मिले. सोने का गहना खरीदते समय ग्राहक BIS मार्क, शुद्धता और HUID जरूर जांच सकता है. BIS Care App के जरिए HUID की जानकारी भी सत्यापित की जा सकती है। 

    हाल में BIS ने चेन्नई में बिना हॉलमार्क के बिक्री के लिए रखे गए करीब 804 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए थे. इससे त्योहारों के सीजन में गहने खरीदते समय हॉलमार्क और बिल की जांच करने की अहमियत भी बढ़ जाती है। 

    सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
    ग्राहक गहना खरीदने से पहले उसका वजन, शुद्धता, HUID और BIS हॉलमार्क जरूर जांचें. साथ ही ज्वेलर से पूरा और वैध बिल लें। 

    ज्वैलर्स एसोसिएशन ने सरकार से क्या मांग की?
    GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े के मुताबिक जब हॉलमार्किंग का कारोबार और वॉल्यूम लगातार बढ़ा है, तो इससे AHCs को बड़े स्तर पर काम करने का फायदा और लागत में कमी लानी चाहिए थी। ऐसे में फीस बढ़ाने से पहले इसकी वास्तविक लागत को ट्रांसपेरेंट बनाने की जरूरी है। राजेश रोकड़े ने कहा कि इंडस्ट्री हॉलमार्किंग का समर्थन करता है, लेकिन लागत में करीब 67 फीसदी बढ़ोतरी करने से पहले समीक्षा होनी चाहिए।

    जीजेसी ने हॉलमार्किंग सिस्टम में मौजूद कथित गड़बड़ियों को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक बीआईएस की कार्रवाई में फर्जी हॉलमार्किंग, बिना अनुमति चल रहे सेंटर और वैध HUID के बिना ज्वेलरी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। GJC का कहना है कि ऐसे मामलों पर निगरानी और कार्रवाई मजबूत करना ज्यादा जरूरी है।

  • कल धड़ाम, आज बमबम! खुलते ही इन स्टॉक्स में दिखी जोरदार तेजी

    कल धड़ाम, आज बमबम! खुलते ही इन स्टॉक्स में दिखी जोरदार तेजी

    मुंबई 
    शेयर बाजार में मंगलवार को बड़ा क्रैश देखने को मिला था, लेकिन बुधवार को कारोबार ओपन होते ही सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स गदर मचाए हुए नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ ही अपने पिछले बंद के मुकाबले 500 अंक से ज्यादा चढ़ गया, तो वहीं इसके कदम से कदम मिलाकर चलते हुए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी छलांग लगाकर 23,200 के पार निकल गया. इस तेजी के बीच ITC, HCL, BEL समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला। 

    सेंसेक्स-निफ्टी की दमदार शुरुआत
    बुधवार को शेयर मार्केट में कारोबार ओपन होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,003 की तुलना में उछलकर 74,249 पर खुला और फिर इसके अपनी रफ्तार तेज करते हुए 500 अंकों से ज्यादा की छलांग लगाकर 75,505 का लेवल छू लिया. बात निफ्टी की करें, तो एनएसई का ये इंडेक्स भी अपने पिछले बंद 23,118 की तुलना में बढ़त के साथ 23,201 पर ओपन हुआ और फिर एक झटके में 23,281 पर जा पहुंचा। 

    कल क्रैश हो गया था शेयर बाजार
    पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों को तगड़ा नुकसान कराया था और बीते कारोबारी दिन मंगलवार को तो शेयर मार्केट में भूचाल आ गया था. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स ने शुरुआत तो जोरदार की थी, लेकिन फिर कुछ देर के कारोबार के बाद देखते ही देखते ये बिखर गए थे. शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने पर बीएसई का Sensex 777 अंकों की गिरावट लेकर 74,003 के लेवल पर क्लोज हुआ था, जो दिन के हाई लेवल से 1433 अंक की गिरावट थी. वहीं NSE Nifty 279 अंक की गिरावट लेकर 23,118 पर बंद हुआ था और ये इंडेक्स अपने दिन के हाई से 474 अंक फिसला था। 

    सबसे तेज ये 10 शेयर 
    सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में आई इस तूफानी तेजी के बीच सबसे ज्यादा रफ्तार से भागते हुए शेयरों की बात करें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल M&M Share, ITC Share, Reliance Share, HUL Share करीब 2 फीसदी के आसपास बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए. वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों की लिस्ट में Yes Bank Share (3.20%), Colpal Share (1.50%) चढ़कर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कैटेगरी में Appolo Tyre Share, MSUMI, HSCL Share ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आए। 

  • मार्केट क्रैश को लेकर रॉबर्ट कियोसाकी का बड़ा दावा, बोले- ‘सावधान हो जाएं’, पोस्ट हुआ वायरल

    मार्केट क्रैश को लेकर रॉबर्ट कियोसाकी का बड़ा दावा, बोले- ‘सावधान हो जाएं’, पोस्ट हुआ वायरल

      नई दिल्ली

    मिडिल ईस्ट में तनाव और हमलों का सिलसिला जारी है. कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है. ग्लोबल टेंशन का असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है. इस बीच मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' (Rich Dad Poor Dad) के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर इतिहास के सबसे बड़े क्रैश को लेकर चेतावनी (Biggest Crash In History Warning) दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर अपने नए पोस्ट के जरिए ये वॉर्निंग दी है, जो तेजी से वायरल (Social Media Viral Post) हो रहा है। 

    'सबसे बड़े क्रैश की शुरुआत…'
    रॉबर्ट कियोसाकी ने अपनी वायरल एक्स पोस्ट में कहा कि इतिहास की सबसे बड़ा क्रैश शुरू हो चुका है. लेखक के मुताबिक, उन्होंने पहले ही इसकी भविष्यवाणी कर दी है. उन्होंने लिखा,'2002 में मैंने 'रिच डैड्स प्रोफेसी' (Rich Dad's Prophecy) किताब जारी की थी, जो लोगों को इतिहास की सबसे बड़ी स्टॉक और बॉन्ड मार्केट गिरावट से फायदा उठाने और उसका शिकार न बनने के लिए तैयार करने के मकसद से लिखी गई थी, एक ऐसी गिरावट जो आने वाली थी.' कियोसाकी ने आगे लिखा कि 2026 में वह गिरावट यूरोप और जापान में शुरू हुई, लेकिन अब ये क्रैश पूरी दुनिया में फैल रहा है। 

    क्रैश के पीछे आखिर वजह क्या? 
    इतिहास के सबसे बड़े क्रैश की अपनी वॉर्निंग को दोहराते हुए रॉबर्ट कियोसाकी ने इसे पीछे के बड़े कारणों के बारे में भी बताया है. उनके मुताबिक, AI का क्रेज़, ईरान में युद्ध, बहुत ज्यादा कर्ज, और रिटायर हो रही 'बेबी बूम' पीढ़ी इसकी वजह है. उन्होंने अलर्ट करते हुए कहा कि अगर आपके पास 401k, IRA, सुपरएनुएशन या RRSP (एक तरह की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम) है, तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं, खासकर अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा हो चुकी है। 

    अभी भी समय है संभल जाएं
    रिच डैड पुअर डैड के लेखक के मुताबिक, पिछली मंदी 1929 से 1954 तक यानी 25 साल तक चली थी. लेकिन इस क्रैश के दौरान भी जो लोग तैयार थे (उदाहरण के लिए कैनेडी परिवार), उनके लिए 'ग्रेट डिप्रेशन' (महामंदी) जीवन का सबसे खुशहाल समय साबित हुआ था. Robert Kiyosaki ने कहा कि आप इतिहास के इस सबसे बड़े क्रैश का शिकार न बनें, अभी भी थोड़ा समय है, इससे पहले कि आम लोग जागें और घबराहट में बैंकों से पैसे निकालने की होड़ शुरू कर दें। 

    मैं तो ये कर रहा… आप क्या? 
    सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहने वाले रॉबर्ट कियोसाकी का कहना है कि, 'सालों से मैं लोगों को ये बताता आ रहा हूं कि मैं तैयारी के लिए क्या कर रहा हूं. अपना बिजनेस, कमाई देने वाली रियल एस्टेट, तेल के कुओं में निवेश और कैश के बजाय सोना-चांदी (Gold-Silver) और बिटकॉइन जमा करना, क्योंकि मुझे पता था कि नकली पैसे छापने का काम शुरू होगा। 

    कियोसाकी ने बताया कि मैंने पहले भी मिकी मैनी की लिखी 'द एंट्रोपी ट्रैप' (The Entropy Trap) किताब की सलाह दी है, जो इसी साल 2026 में छपी है और हो सकता है कि यह इस साल आपके पढ़ने के लिए सबसे जरूरी किताब हो. कृपया इसे पढ़ें, यह आज आपका सबसे अच्छा निवेश साबित हो सकता है. अपना ख्याल रखें। 

  • Tata Nexon में होगा बड़ा अपडेट, नए डिजाइन और एडवांस फीचर्स के साथ टेस्टिंग में नजर आई SUV

    Tata Nexon में होगा बड़ा अपडेट, नए डिजाइन और एडवांस फीचर्स के साथ टेस्टिंग में नजर आई SUV

    नई दिल्ली

    टाटा मोटर्स की नेक्सॉन (Tata Nexon) को लोग काफी पसंद करते हैं. इस कार के नए वर्जन पर कंपनी काम कर रही है. पिछले कुछ दिनों में कार के अपडेटेड अवतार को कई बार टेस्ट करते हुए देखा गया है. टेस्टिंग के वक्त कार कैमोफ्लॉज से ढकी हुई थी. पहले भी कार की कुछ तस्वीरे सामने आई थीं, जिसमें इसके लुक की काफी जानकारी मिली थी। 

    लेटेस्ट स्पाई शॉट्स में कार के एक्सटीरियर प्रोफाइल का क्लियर व्यू नजर आता है. खासकर रियर सेक्शन जिसे रिडिजाइन किया गया है. टाटा ने नेक्सॉन को 2017 में लॉन्च किया था. तब से अब तक कार को मल्टीपल अपडेट्स मिले है, जिसमें बहुत कुछ बदला है। 

    भले ही कार की स्टाइलिंग और फीचर्स में बीते 9 सालों में कई अपडेट्स हुए हों, लेकिन कार का बेसिक स्ट्रक्चर लगभग वैसा ही रहा है. नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में हमें बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. टाटा कार के बॉडी स्ट्रक्चर और प्रोपोर्शन में कई बदलाव कर सकती है।

    क्या होगा कार में नया? 
    भले ही ये कार कैमोफ्लॉग से ढकी हो, लेकिन इसके डिजाइन का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. नेक्सॉन में ज्यादा अपराइट और स्कॉयर ऑफ लुक मिलेगा. मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले इसकी रूफलाइन ज्यादा फ्लैट होगी. वहीं रियर सेक्शन एक कूपे जैसे डिजाइन में आ सकता है। 

    नेक्स्ट जेन नेक्सॉन में टाटा रियर सीट्स पर हेडरूम को बेहतर कर सकती है. साइड प्रोफाइल से भी ये एसयूवी कूपे जैसी शेप में नजर आती है. इसके अलावा डोर और ग्लासहाउस को भी रिडिजाइन किया जा सकता है. टेलगेट भी मौजूदा नेक्सॉन के मुकाबले ज्यादा ऊंचा लग रहा है. रियर विंड स्क्रीन बड़ी दिख रही है और इसके साथ वाइपर भी है। 

    टेस्टिंग के दौरान कार पर रूफ स्पॉयलर भी देखा जा सकता है. स्पाई शॉट्स में एक और महत्वपूर्ण चीज नजर आई है और वो है कार में फ्यूल फिलर कैप की लोकेशन. नेक्सॉन में फ्यूर कैप डोर हैंडल के बराबर में आ गया है, जबकि मौजूदा में ये डोर हैंडल से नीचे मिलता है. नई रूफ लाइन, अपराइट रियर प्रोफाइल और ऑल्टर बॉडी प्रोपोर्शन दिखाता है कि टाटा सिर्फ फेसलिफ्ट वाले बदलाव नहीं कर रही है। 

    इंटीरियर और इंजन 
    स्पाई शॉट्स में कार के इंटीरियर की झलक भी दिखती है. कार में स्टीयरिंग व्हील, इंफोटेनमेंट सिस्टम और क्लाइमेट कंट्रोल जैसे बहुत से कंपोनेंट मौजूदा नेक्सॉन वाले ही मिल सकते हैं. प्रोडक्शन के नजदीक आने पर इससे जुड़ी दूसरी डिटेल्स भी देखने को मिल सकती हैं। 

    पावरट्रेन की बात करें, तो इसमें 1.2 लीटर का टर्बो पेट्रोल और 1.5 लीटर का डीजल इंजन ही मिलेगा, जो मौजूदा नेक्सॉन में आता है. सीएनजी भी कार का हिस्सा बन रहेगा. वहीं नेक्सॉन ईवी में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ये कार अगले साल यानी 2027 में लॉन्च होगी। 

     

  • Tata Sons की लिस्टिंग का मामला हाई कोर्ट पहुंचा, RBI की याचिका से Tata Group की कंपनियों में हलचल

    Tata Sons की लिस्टिंग का मामला हाई कोर्ट पहुंचा, RBI की याचिका से Tata Group की कंपनियों में हलचल

     मुंबई
    टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी कानूनी तैयारी तेज कर दी है. इसका असर मंगलवार को टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स 20% तक चढ़ गए। 

    आबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है. आसान भाषा में समझें तो कैविएट का मतलब है कि अगर इस मामले में कोई याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो RBI की बात सुने बिना उसके खिलाफ या उसके पक्ष में कोई आदेश जारी न किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने इस कैविएट की जानकारी टाटा संस को भी दे दी है. इससे संकेत मिलता है कि RBI इस मामले में संभावित कानूनी चुनौती को लेकर पहले से अपनी स्थिति तैयार रखना चाहता है। 

    11 सितंबर के फैसले से बढ़ी हलचल
    RBI का यह कदम 11 सितंबर के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी. टाटा संस ने अनरजिस्टर्ड कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर क्लासिफाइड होने के लिए यह आवेदन दिया था. लेकिन अर्जी खारिज होने का मतलब है कि कंपनी पर अपर-लेयर एनबीएफसी से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू रहने का रास्ता साफ है. यही वजह है कि टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। 

    टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरूरी
    इसकी जड़ RBI के अपर-लेयर एनबीएफसी नियमों में है. टाटा संस को RBI की अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की लिस्ट में रखा गया है. इस लिस्ट में शामिल कंपनियों पर अपेक्षाकृत कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जिनमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी अहम है. यही वजह है कि टाटा संस के लिए निजी कंपनी बने रहना और RBI के नियमों के तहत उसकी लिस्टिंग की अनिवार्यता, दोनों के बीच टकराव का सवाल बना हुआ है। 

    यह मामला 2022 से चला आ रहा है
    RBI ने 2022 में अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की थी. इसमें टाटा संस को कोर इनवेस्टमेंट कंपनी के तौर पर शामिल किया गया था. इसके बाद जून 2026 में नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के क्लासिफिकेशन के लिए नया प्रिंसिपल-बेस्ड फ्रेमवर्क लाया गया. इसने पहले लागू पैरामेट्रिक मेथडोलॉजी की जगह ली. फिर 6 अगस्त को संशोधित अपर-लेयर NBFC सूची जारी हुई. इसमें भी टाटा संस को बरकरार रखा गया. उस समय RBI ने साफ किया था कि टाटा संस को लिस्ट में बनाए रखना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के नतीजे पर कोई असर नहीं डालता. उस समय कंपनी की अर्जी RBI के पास जांच के तहत थी। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और ज्यादातर ट्रस्टी टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखने के पक्ष में रहे हैं. उनका फोकस शापूरजी पालनजी ग्रुप के साथ हिस्सेदारी के मोनेटाइजेशन को लेकर ऐसा रास्ता निकालने पर रहा है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों. यानी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के बजाय हिस्सेदारी से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाता रहा है। 

    टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया उछाल
    इस पूरे घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया. टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे कुछ टाटा ग्रुप शेयरों में मंगलवार को 20% तक की तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के कुछ हिस्से में इन शेयरों की तेजी को टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से मिलने वाले संभावित फायदे की उम्मीद से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इसे टाटा संस की लिस्टिंग तय होने का संकेत नहीं माना जा सकता. अभी कानूनी और नियामकीय स्तर पर मामला आगे बढ़ना बाकी है। 

  • शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के उड़े होश, सेंसेक्स-निफ्टी की तेजी पलटी; जानें 3 बड़े कारण

    शेयर बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के उड़े होश, सेंसेक्स-निफ्टी की तेजी पलटी; जानें 3 बड़े कारण

    मुंबई 
    मंगलवार का दिन शेयर बाजार में पैसे लगाने वालों के लिए अमंगलकारी साबित हो रहा है. सबसे बड़ी बात ये है कि सेंसेक्स-निफ्टी ने तूफानी शुरुआत की थी, लेकिन देखते ही देखते बाजार में ऐसा भूचाल आया कि दोनों इंडेक्स क्रैश हो गए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स दिन के हाई लेवल से एक झटके में 1400 अंक से ज्यादा टूटकर बंद हुआ. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स ने भी डे-हाई से 474 अंकों का गोता लगा गया. शेयर मार्केट में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं।   

    तूफानी तेजी, फिर तगड़ी गिरावट
    शेयर मार्केट में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत धुआंधार तेजी के साथ हुई और निवेशकों को लगा कि बीते सप्ताह की गिरावट पर ब्रेक लग गया, लेकिन उनकी खुशी महज घंटेभर बाद ही टेंशन में तब्दील हो गई. सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ वो कारोबार आगे बढ़ने के साथ तेज होता चला गया. शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने पर BSE Sensex 777 अंक की गिरावट लेकर 74,003 के लेवल पर क्लोज हुआ, जो दिन के हाई लेवल से 1433 अंक की गिरावट है। 

    सिर्फ सेंसेक्स ही नहीं, बल्कि NSE Nifty ने भी निवेशकों को बुरी तरह चौंकाया है. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,398 की तुलना में तेज रफ्तार के साथ 23,576 पर कारोबार की शुरुआत की थी और 23,592 तक उछला था, लेकिन फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए ये भी टूटता चला गया और खबर लिखे जाने तक अपने दिन के हाई लेवल से 474 अंक फिसलकर 23,118 पर आकर बंद हुआ। 

    शेयर मार्केट क्रैश के कारण
    Share Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो एक नहीं बल्कि कई हैं. इनमें कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से लेकर US बॉन्ड यील्ड तक का रोल है। 

    पहला कारण: वेस्ट एशिया में अमेरिका-ईरान टेंशन और मध्य पूर्व में फैलते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है. इसके असर तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत तेज उछाल के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रही है. इसने महंगाई के जोखिम को बढ़ाते हुए शेयर बाजारों का सेंटीमेंट खराब किया है। 

    दूसरा कारण: शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट के पीछे दूसरा कारण अमेरिका से जुड़ा हुआ है. दरअसल, सोमवार को बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी पर जा पहुंची, जो अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार है. गौरतलब है कि 10 साल की बॉन्ड यील्ड को ग्लोबल बेंचमार्क माना जाता है और ये सीधे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाता है. वहीं बीते कारोबारी दिन अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी, जिसका असर मंगलवार को भारतीय बाजार पर भी नजर आया है। 

    तीसरा कारण: शेयर बाजार में मंगलवार को IT इंडेक्स के अलावा ज्यादातर कैटेगरी में तेज गिरावट दर्ज की गई. मार्केट टूटने का तीसरा बड़ा कारण तमाम ग्लोबल टेंशन और तेल की कीमतों में इजाफे के बीच शेयर बाजार के लिए डर का पैमाना माने जाने वाले India VIX में अचानक उछाल भी है. ये 6 फीसदी के आसपास बढ़कर 13 के पार निकल गया, जो आने वाले दिनों में शेयर मार्केट में बिकवाली का इंडिकेशन देता है। 

    ये शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे
    Stock Market Crash के बीच सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों की लिस्ट देखें, तो बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल BEL Share (5%), IndiGo Share (3.56%), Bajaj Finserv Share (2.96%), Adani Ports Share (2.50%), SBI Share (2.42%), Titan Share (2.35%), Bajaj Finance Share (2.34%), Asian Paints Share (2.31%), M&M Share (2.19%), Trent Share (2%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. 

  • शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच IT शेयरों का जलवा, HDFC Bank समेत इन 4 स्टॉक्स ने पकड़ी रफ्तार

    शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच IT शेयरों का जलवा, HDFC Bank समेत इन 4 स्टॉक्स ने पकड़ी रफ्तार

    मुंबई 
    कच्चे तेल पर महंगाई छाई है, वेस्ट एशिया में तनाव जारी है, अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इन सब निगेटिव खबरों के बीच भी भारतीय शेयर बाजार ओपनिंग के साथ गदर मचाए हुए नजर आया. एक दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला BSE Sensex खुलते ही 655 अंक की छलांग लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला NSE Nifty भी जोरदार तेजी के साथ ओपन हुआ। 

    हालांकि, आधे घंटे तक तेजी के साथ कारोबार करने के बाद शेयर बाजार में बाजी पलटी हुई नजर आई और दोनों इंडेक्स अचानक रेड जोन में आ गए. लेकिन इन बीच भी भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर धमाल मचाते हुए नजर आए, तो वहीं HDFC Bank Share भी निवेशकों को तगड़ी कमाई कराता हुआ नजर आया है। 

    सेंसेक्स-निफ्टी की धुआंधार ओपनिंग 
    सोमवार को गणेश चतुर्थी पर शेयर बाजार बंद था, लेकिन एक दिन की छुट्टी के बाद जब सेंसेक्स-निफ्टी ने ओपनिंग की तो ये जोरदार रही. तेल लगातार महंगा होने, देश में रिटेल से लेकर थोक महंगाई तक बढ़ने के बावजूद बीएसई की सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,781 की तुलना में तेजी लेकर 75,369 पर खुला और फिर अचानक छलांग लगाकर 655 अंक चढ़कर 75,436 पर जा पहुंचा. हालांकि, कुछ देर के कारोबार के बाद इसकी रफ्तार धीमी नजर आई। 

    सेंसेक्स की तरह ही एनएसई निफ्टी की भी चाल देखने को मिली है. मंगलवार को ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,398 की तुलना में बढ़त लेकर खुला और फिर एक झटके में उछलकर 23,592 के लेवल पर जा पहुंचा. बीते सप्ताह दोनों इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी। 

    HDFC बैंक से IT शेयरों तक का गदर
    शेयर बाजार में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा रोल आईटी कंपनियों के शेयरों का रहा, जिनमें तूफानी तेजी देखने को मिली है. सबसे ज्यादा तेज रफ्तार से HCL Tech Share भागा, जो खबर लिखे जाने तक करीब 7 फीसदी की उछाल में कारोबार कर रहा था. इसके अलावा Tech Mahindra Share (5%), TCS Share (4.96%), Infosys Share (4.60%), MPhasis Share (4.56%), Persistent Share (2.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे। 

    बात प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक यानी HDFC Bank Share की करें, तो ये भी शेयर मार्केट ओपन होने के साथ ही गदर मचाए हुए नजर आया. इस बैंकिंग स्टॉक में 2.50% की जोरदार तेजी देखने को मिली है और इसका भाव 725 रुपये के करीब पहुंच गया. अन्य तेजी वाले शेयरों में एचयूएल, आईटीसी, टाटा स्टील शामिल रहे। 

    तेल से लेकर रिटेल महंगाई तक फेल
    शेयर मार्केट में ये जोरदार शुरुआती तेजी ऐसे स
    मय में देखने को मिली है, जबकि अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते होर्मुज, बाब अल मंदेब, सउदी अरब तेल पाइपलाइन को लेकर ग्लोबल टेंशन चरम पर है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जारी है. अमेरिकी शेयर बाजार बीते कारोबारी दिन निगेटिव जोन में बंद हुए हैं और सबसे खास भारत में रिटेल से लेकर थोक महंगाई तक में उछाल आया है. लेकिन इन सबके बावजूद बाजार ने तेज रफ्तार पकड़ी है। 

  • कमाई बढ़ाने की तैयारी में Indian Bank, नए कारोबार के साथ 3 देशों में मजबूत करेगा मौजूदगी

    कमाई बढ़ाने की तैयारी में Indian Bank, नए कारोबार के साथ 3 देशों में मजबूत करेगा मौजूदगी

     नई दिल्ली
    बैंकिंग की दुनिया में अब मुकाबला सिर्फ कस्टमर्स को लोन देने और डिपॉजिट जुटाने तक सीमित नहीं है. बड़े बैंक अपनी कमाई बढ़ाने के लिए नए-नए कारोबार में उतर रहे हैं और विदेशों में भी अपना दायरा बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में सरकारी क्षेत्र के इंडियन बैंक (Indian Bank) ने भी अपनी आगे की रणनीति तैयार कर ली है. बैंक कुछ नए क्षेत्रों में कदम रखने की तैयारी में है, वहीं विदेशी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इस पूरी योजना में आने वाला करीब एक साल अहम हो सकता है। 

    दो नए कारोबार में उतरने की तैयारी
    इंडियन बैंक अब लाइफ इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड बिजनेस में एंट्री की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बैंक इन दोनों सेक्टर्स के लिए बोर्ड की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है. बैंक के एमडी और सीईओ बिनोद कुमार ने बताया कि यह योजना ट्रैक पर है. प्रस्तावित सब्सिडियरी या जॉइंट वेंचर के जरिए इन कारोबारों में उतरने की तैयारी है. बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद जरूरी रेगुलेटरी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी. कुमार के मुताबिक, इस तरह के कारोबार किसी संगठन के लिए कमाई बढ़ाने के साथ-साथ ब्रांड को मजबूत करने में भी मदद करते हैं। 

    अच्छे पार्टनर की तलाश सबसे अहम
    बिनोद कुमार ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक साल का समय लग सकता है. उनके मुताबिक, सही और अच्छा पार्टनर चुनना इस योजना का सबसे अहम हिस्सा होगा. उन्होंने कहा कि अगर पार्टनर अच्छा हो तो वेल्थ क्रिएशन यानी कमाई बढ़ाने की क्षमता भी तेज होती है. यही वजह है कि बैंक इस मामले में जल्दबाजी के बजाय सही साझेदार की तलाश पर जोर दे रहा है। 

    इंश्योरेंस कारोबार में पहले से मौजूदगी
    इंडियन बैंक के लिए इंश्योरेंस कारोबार पूरी तरह नया नहीं है. बैंक पहले से जनरल इंश्योरेंस के क्षेत्र में मौजूद है. इंडियन बैंक की यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी में 28.52 फीसदी हिस्सेदारी है. यह हिस्सेदारी साल 2020 में पुराने इलाहाबाद बैंक के इंडियन बैंक में विलय के बाद बैंक को मिली थी. यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस की स्थापना 2007 में हुई थी. यह एक जॉइंट वेंचर है. इसमें इंडियन बैंक की 28.52 फीसदी, इंडियन ओवरसीज बैंक की 18.06 फीसदी और कर्नाटक बैंक की 6 फीसदी हिस्सेदारी है. डाबर इन्वेस्टमेंट कॉर्प की हिस्सेदारी 12.81 फीसदी है, जबकि जापान की सोम्पो जापान इंश्योरेंस की 34.61 फीसदी बहुलांश हिस्सेदारी है। 

    विदेशों में भी मौजूदगी बढ़ाने पर काम
    इंडियन बैंक की रणनीति सिर्फ नए कारोबार तक सीमित नहीं है. बैंक विदेशों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर काम कर रहा है. फिलहाल बैंक के पास सिंगापुर में फुल-सर्विस इंटरनेशनल ब्रांच है. श्रीलंका में कोलंबो और जाफना में उसकी शाखाएं हैं. इसके अलावा गुजरात के गांधीनगर स्थित GIFT City में बैंक की IFSC Banking Unit भी काम कर रही है। 

    बैंक का दुबई में खुलेगा नया ऑफिस
    विदेशी विस्तार में बैंक का अगला बड़ा फोकस दुबई है. बैंक वहां रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलना चाहता है. इसका मकसद वेस्ट एशिया में मौजूद बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े कारोबारी अवसरों का फायदा उठाना है. बिनोद कुमार ने बताया कि GIFT City की शाखा से बैंक को अच्छा कारोबार मिल रहा है. इसमें कई सिंडिकेटेड लोन में बैंक की भागीदारी भी शामिल है. उन्होंने कहा कि दुबई में बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीय (NRI) रहते हैं और वहां कामकाजी आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 33 फीसदी है. दुबई में रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस खोलने के लिए बैंक के बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है. अब इसके लिए जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों का इंतजार है। 

    मलेशिया और इंडोनेशिया पर भी नजर
    दुबई के अलावा इंडियन बैंक मलेशिया और इंडोनेशिया में भी संभावनाएं तलाश रहा है. बैंक इन दोनों बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहा है. इससे साफ है कि बैंक की विदेश विस्तार रणनीति अब मौजूदा शाखाओं और इकाइयों तक सीमित नहीं रहने वाली है. बैंक नए बाजारों में कारोबार के अवसर तलाश रहा है।