Category: बिज़नेस

  • हिंदुस्तान मोटर्स की बड़ी तैयारी, क्या फिर सड़कों पर दौड़ेगी Ambassador?

    हिंदुस्तान मोटर्स की बड़ी तैयारी, क्या फिर सड़कों पर दौड़ेगी Ambassador?

    कलकत्ता

    हिंदुस्तान मोटर्स व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग में वापसी करने की तैयारी में है. एक वक्त था जब हिंदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर का भारतीय बाजार में दबदबा था. ये कार 'पावर' की पहचान हुआ करती थी. कोई बड़ा नेता हो या फिर किसी महकमे का बड़ा अधिकारी एंबेसडर ही उनकी सवारी हुआ करती थी. लेकिन वक्त के साथ इस कार की रफ्तार थम गई।  

    अब ऐसी चर्चाएं हैं कि कंपनी इस कार को वापस मार्केट में उतारने की तैयारी में जुटी हुई है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी पश्चिम बंगाल के उत्तरपारा में व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत करना चाहती है. इस बार कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक व्हीकल पर होगा। 

    सीकेए बिरला ग्रुप ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क भी किया है. इस संबंध में राज्य सरकार ने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है. हिंदुस्तान मोटर्स ने 2014 में अपने ऑपरेशन को बंद कर दिया था. वहीं पश्चिम बंगाल के पास लगभग दो दशक बाद ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम में वापसी करने का एक और मौका होगा। 

    जॉइंट वेंचर में होगा प्लांट
    2008 में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के सिंगूर से बाहर होने के बाद राज्य को ऑटोमोबाइल सेक्टर से कोई बड़ा निवेश मिला नहीं है. वहीं सीकेए बिरला ग्रुप अभी भी ऑटोमोटिव कंपोनेंट इंडस्ट्री में बना हुआ है. रिपोर्ट्स की मानें तो हिंदुस्तान मोटर्स का ये ईवी प्लांट किसी अमेरिकी या यूरोपियन कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर हो सकता है। 

    इस खबर के आने के बाद एंबेसडर की वापसी की चर्चा होने लगी है. हालांकि, ये चर्चा ही है फिलहाल. इस संबंध में कोई भी ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. एंबेसडर की वापसी मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि हिंदुस्तान मोटर्स के पास इस नाम को इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। 

    क्यों मुश्किल है एंबेसडर की वापसीय़
    2017 में हिंदुस्तान मोटर्स ने 80 करोड़ रुपये में इस नाम का ट्रेडमार्क प्यूजो (Peugeot SA) ग्रुप को बेच दिया था. इसका मतलब है कि हिंदुस्तान मोटर्स सीधे इस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. सोशल मीडिया पर आपको एंबेसडर ईवी के कई रेंडर दिख जाएंगे. लेकिन इनमें से कोई भी असली नहीं है. अगर हिंदुस्तान मोटर्स ऑटोमोबाइल सेक्टर में वापसी करता भी है, तो इसका नाम एंबेसडर नहीं होगा। 

    वैसे ये पहला मौका नहीं है जब हिंदुस्तान मोटर्स ने इसकी शुरुआत की है. इससे पहले भी कंपनी ने एक यूरोपियन कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था. लेकिन कंपनी को उत्तरपारा में प्रोडक्शन शुरू करने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद वो मामला ठंडा पड़ गया था। 

     

  • ऑटो सेक्टर के लिए बड़ी खबर, चीनी निवेश वाली कंपनियों को PLI लाभ देने की तैयारी

    ऑटो सेक्टर के लिए बड़ी खबर, चीनी निवेश वाली कंपनियों को PLI लाभ देने की तैयारी

     नई दिल्‍ली
    सरकार चीन निवेश वाली कंपनियों को सपोर्ट दे सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार चीनी निवेश वाली ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों से प्रोडक्‍ट-लिंक इनसेंटिव (PLI) योजना के तहत आवेदन पर विचार कर सकती है. इससे JSW एमजी मोटर इंडिया और टाटा ऑटोकोम्प सिस्टम्स की दो साझेदारियों समेत कई कारोबारों को लाभ मिल सकता है। 

    द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी प्राप्त मौजूदा पीएलआई आवेदनों पर विचार किया जाएगा. हालांकि, PLI योजना के तहत नए आवेदनों के लिए कोई नई विंडो नहीं खोली जा रही है। 

    भारत में MG ब्रांड के यात्री वाहन बेचने वाली JSW MG मोटर इंडिया, JSW ग्रुप और चीन की SAIC मोटर का संयुक्त कारोबार है. टाटा ऑटोकोम्प सिस्टम्स के चीनी कंपनियों के साथ दो कारोबार हैं. प्रेस्टोलाइट इलेक्ट्रिक बीजिंग के साथ साझेदारी में बनी टैको प्रेस्टोलाइट, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन और ट्रैक्शन मोटर्स का डिजाइन और निर्माण करती है. एयर इंटरनेशनल शंघाई कंपनी के साथ साझेदारी में बनी टैको एयर इंटरनेशनल, ऑटोमोटिव एयर कंडीशनिंग सिस्टम का निर्माण करती है। 

    भारत-चीन संबंधों में सुधार
    यह फैसला ऐसे समय आया है जब जून 2020 में गलवान घाटी की झड़पों के बाद सालों के तनाव के बाद भारत-चीन संबंधों में सुधार हुआ है. इस महीने की शुरुआत में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। 

    दोनों देशों ने मंत्रिस्तरीय और आधिकारिक स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाया है और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है. भारत ने चीनी निवेश से जुड़े डायरेक्‍ट विदेशी निवेश प्रस्तावों की मंजूरी में तेजी लाने के लिए नए गाइडलाइन जारी किए हैं। 

    इस चीनी निवेश पर मिली थी मंजूरी
    चीनी डायरेक्‍ट निवेश प्रस्तावों की लंबित मंजूरी के कारण कुछ पीएलआई आवेदनों की प्रक्रिया में देरी हुई थी. अधिकारी ने बताया कि डिक्सन टेक्नोलॉजीज के एक चीनी साझेदार के साथ इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए किए गए उद्यम सहित कुछ आवेदनों को पीएलआई लाभों के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. ऑटो पीएलआई योजना को सितंबर 2021 में ₹25,938 करोड़ के बजट आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी. प्रोत्साहन राशि अन्य मानदंडों के साथ-साथ उत्पादन में बढ़ोतरी, निवेश और घरेलू से जुड़ी हुई है। 

  • महाराष्ट्र-कर्नाटक से प्याज की सप्लाई कम, ₹54 किलो पहुंचा भाव; जल्द राहत के आसार

    महाराष्ट्र-कर्नाटक से प्याज की सप्लाई कम, ₹54 किलो पहुंचा भाव; जल्द राहत के आसार

    नई दिल्ली
    देशभर में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। बीते तीन महीनों में प्याज के खुदरा भाव में करीब 82 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून की शुरुआत में जो प्याज करीब ₹30 प्रति किलो बिक रहा था, सितंबर के मध्य तक उसका औसत भाव ₹54 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून को प्याज का औसत खुदरा मूल्य ₹29.50 प्रति किलो था। वहीं 17 सितंबर तक यह बढ़कर ₹53.78 प्रति किलो हो गया। इस दौरान उपभोक्ताओं को प्याज के लिए काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी।

    थोक बाजार में भी बढ़ी कीमतें
    खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक मंडियों में भी प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं। जून की शुरुआत में थोक बाजार में प्याज का औसत भाव करीब ₹22.60 प्रति किलो था, जो सितंबर में बढ़कर ₹45 प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया। थोक कीमतों में यह बढ़ोतरी बाजार में उपलब्ध स्टॉक और नई फसल की आवक से जुड़ी परिस्थितियों को दर्शाती है। कम सप्लाई के कारण मंडियों में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

    महाराष्ट्र और कर्नाटक से कम हुई आवक
    प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण उत्पादन वाले राज्यों से कम सप्लाई को माना जा रहा है। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज फसल को नुकसान पहुंचने और आवक घटने से बाजार में दबाव बढ़ा। इसके अलावा कर्नाटक से भी प्याज की सप्लाई में कमी आई है। इन दोनों राज्यों से आने वाली खेप में गिरावट का असर देश के कई बाजारों में दिखाई दिया।

    नई फसल में देरी का असर
    बाजार में प्याज की उपलब्धता पर खरीफ फसल की आवक का भी प्रभाव पड़ता है। नई फसल की आवक में देरी होने से पुराने स्टॉक पर निर्भरता बढ़ी, जिससे कीमतों में तेजी बनी रही। व्यापारी और बाजार से जुड़े लोग नई आवक बढ़ने के साथ कीमतों में बदलाव की उम्मीद जता रहे हैं।

    सरकार और बाजार की नजर सप्लाई पर
    प्याज जैसी जरूरी खाद्य वस्तु की कीमतों पर सरकार और बाजार दोनों की नजर रहती है। कीमतों में तेज बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू खर्च पर पड़ता है। आने वाले समय में प्याज की आवक, उत्पादन वाले राज्यों की स्थिति और मंडियों में उपलब्ध स्टॉक कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।.

    कब तक गिरेंगे प्याज के दाम, क्या कर रही है सरकार    

    प्याज की कीमतों में अभी तेजी जारी है,जिसे कुछ हफ्ते ऐसे हालात बने रह सकते हैं. नई फसल के बाजार में आने के बाद प्याज की कीमत गिर सकती है. प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस चलाने का फैसला किया. बफर स्टॉक से राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही है. घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए निर्यात पर रोक-टोक जैसे कदम उठाए हैं. घरेलू खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है. अब उम्मीद है कि नई फसल के आवक के साथ प्याज की कीमत कंट्रोल हो सकेगी। 

  • Silver Price: तेजी के बाद फिसली चांदी, एक किलो पर ₹2200 से ज्यादा की गिरावट

    Silver Price: तेजी के बाद फिसली चांदी, एक किलो पर ₹2200 से ज्यादा की गिरावट

     नई दिल्ली

    सोना-चांदी की कीमतों में अचानक फिर से बड़ी गिरावट (Gold-Silver Rate Fall) आई है. मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर गोल्ड-सिल्वर रेट तेजी के साथ ओपन हुए, लेकिन फिर अगले ही पल दोनों कीमती धातुओं के दाम गिरने लगे और ये काफी सस्ती हो गईं. एक ओर जहां चांदी का वायदा भाव झटके में 2200 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा कम हो गया, तो वहीं सोने का दाम भी तेजी से फिसलने लगे। 

    चांदी अचानक हुई इतनी सस्ता 
    एमसीएक्स पर चांदी की वायदा कीमत बीते कारोबारी दिन सोमवार को कारोबार क्लोज होने पर 4 दिसंबर की एक्सपायरी वाली चांदी 2,39,317 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और मंगलवार को खुलने के साथ ही ये उछलकर 2.40 लाख रुपये के लेवल पर पहुंच गई. लेकिन कुछ देर के कारोबार में ही बाजी लट गई और 1 Kg Silver Price तेजी से लुढ़कता हुआ 2,37,100 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से चांदी 2217 रुपये सस्ती हो गई। 

    हाई से अब इतना टूट गया दाम 
    चांदी की कीमत में मंगलवार को आई इस गिरावट के बाद अब चांदी की वायदा कीमत अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से और भी ज्यादा फिसल (Silver Price More Crash From High) गई है. दरअसल, जनवरी महीने में आखिरी हफ्ते में सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 4,20,048 रुपये के हाई पर पहुंची थी और वर्तमान भाव से तुलना करें, तो ये कीमती धातु यहां से अब 1,82,948 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।

    सोना भी झटके में हुआ इतना सस्ता 
    न सिर्फ चांदी की कीमत में गिरावट आई है, बल्कि सोने का भाव भी Silver Price के जैसा ही ग्रीन से रेड जोन में आया है. 5 अक्टूबर की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold सोमवार को कमोडिटी मार्केट की क्लोजिंग के समय 1,53,094 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को खुलने के साथ ही ये 1,53,497 पर पहुंच गया. हालांकि, इसके बाद चांदी की तरह इसमें गिरावट शुरू हुई और खबर लिखे जाने तक Gold Rate 721 रुपये सस्ता होकर 1,52,373 रुपये प्रति किलो पर आ गया था। 

    बता दें MCX Gold-Silver Rate में गिरावट देखने को मिली है. तो वहीं घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमतों पर नजर डालें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,53,337 रुपये था, जबकि 1 किलो चांदी घरेलू बाजार में 2,34,992 रुपये पर मिल रही थी। 

     

  • रेशम किसानों की बढ़ेगी कमाई, ₹12 लाख आय का लक्ष्य; MSME के लिए सब्सिडी

    रेशम किसानों की बढ़ेगी कमाई, ₹12 लाख आय का लक्ष्य; MSME के लिए सब्सिडी

    नई दिल्ली
    भारत की गारमेंट इंडस्ट्री दुनियाभर में मशहूर है। यहां के कई फैबरिक अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में काफी डिमांड में रहते हैं, जिसमें से सिल्क भी प्रमुख है। केंद्र सरकार ने देश में रेशम (Silk) का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए खास तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य 2030-31 तक देश का रेशम उत्पादन बढ़ाकर 60,000 टन करना है। साथ ही 2028-29 तक भारत को दुनिया का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक देश बनाने का संकल्प लिया गया है। साथ ही ग्लोबल मार्केट में डिमांड के अनुसार गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

    किसानों की आय ₹12 लाख करने की तैयारी
    बेंगलुरु में केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) फाउंडर्स डे के दौरान केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में रेशम उत्पादन 2014 के 26,000 टन से बढ़कर वर्तमान में 42,000 टन तक पहुंच गया है। सरकार रेशम किसानों की आय बढ़ाने और सेरीकल्चर (रेशम पालन) क्षेत्र के विस्तार के लिए लगातार काम कर रही है।

    उन्होंने कहा  शहतूत की पत्तियों का प्रोडक्शन बढ़ाने और कोकून पालन के सायकल में बढ़ोतरी के जरिए उत्पादन बढ़ाया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि रेशम किसानों की सालाना आय ₹10 लाख से ₹12 लाख तक पहुंचाई जाए।

    चीन का घटता प्रोडक्शन भारत के लिए मौका
    गिरिराज सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है, जबकि चीन में प्रोडक्शन घटने की खबरें हैं। ऐसे में भारत के पास ग्लोबल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर है। उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई तकनीकों, उन्नत संकर (हाइब्रिड) किस्मों और आधुनिक मशीनरी को सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

    AI और मशीन लर्निंग का होगा इस्तेमाल
    टेक्सटाइ मिनिस्ट्री में ज्वाइंट सेकेट्री (सिल्क) और केंद्रीय रेशम बोर्ड की उपाध्यक्ष पद्मिनी सिंगला ने कहा कि 2030-31 तक 60,000 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च उत्पादकता वाले रेशम कीटों की किस्में और आधुनिक मशीनरी लाई जा रही हैं। इसके साथ ही क्वालिटी जांच और प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), GIS और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

    MSMEs को सब्सिडी और सरकारी मदद
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में नंबर वन राज्य है। सरकार इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और इंडस्ट्री के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
    उन्होंने कहा कि माडर्न टेक्नोलॉजी और हाई डेंसिटी प्रोडक्शन मेथड को अपनाकर ग्लोबल एक्सपोर्ट मानकों के अनुरूप रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार MSME के तहत रजिस्ट्रेशन कराने वाले उद्यमियों को सब्सिडी और गुणवत्ता सुधार योजनाओं के माध्यम से भी सहायता प्रदान कर रही है।

     

  • चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर नोएल टाटा को आपत्ति, टाटा ट्रस्ट में बढ़ा विवाद

    चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर नोएल टाटा को आपत्ति, टाटा ट्रस्ट में बढ़ा विवाद

    मुंबई 

    फिर से एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति और नोएल टाटा के विरोध के बाद टाटा ट्रस्‍ट और टाटा संस के बीच विवाद साफ तौर पर दिखने लगा है. टाटा ग्रुप के बाकी सदस्‍यों ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा से नियुक्‍त किया है, जबकि नोएल टाटा ने उनके विपक्ष में वोटिंग की है यानी कि 4:1 की वोटिंग से एन चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाने की मंजूरी मिली है। 

    इस बीच, ब्‍लूमबर्ग ने बताया है कि टाटा ट्रस्‍ट और  टाटा संस के बीच कानूनी लड़ाई हो सकती है. नोएल टाटा कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं. दोनों खेमा वकीलों को जुटाने में जुटा हुआ है। 

    टाटा ट्रस्‍ट का कहना है कि एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य है. टाटा ट्रस्‍ट का तर्क है कि इसे ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का अनिवार्य समर्थन नहीं मिला है। 

    टाटा ट्रस्‍ट का क्‍या है तर्क?
    टाटा ट्रस्‍ट ने आगे कहा कि 4:1 का कुल मतदान गलत था, क्योंकि इसके दो नामांकित व्यक्तियों में से एक ने प्रस्ताव का विरोध किया था, जिससे कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत एक अलग शर्त पूरी नहीं हुई थी. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस का लगभग 66 फीसदी मालिकाना हक है और इसके बोर्ड में दो चुने हुए डायरेक्‍टर हैं. ट्रस्ट्स के अनुसार, दोनों के बीच बहुमत का मतलब है कि दोनों को प्रस्ताव का समर्थन करना होगा। 

    ट्रस्ट ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि मतदान से बोर्ड में गतिरोध पैदा हो गया था और कहा कि चेयरमैन की वोटिंग इस आवश्यकता को रद्द नहीं कर सकता है. ट्रस्‍ट ने कहा कि चंद्रशेखर के दोबारा चेयमैन बनने के प्रस्‍ताव को शुरू से ही रद्द किया गया है। 

    टाटा ट्रस्‍ट का यह बयान टाटा संस बोर्ड की ओर से 17 सितंबर को 4:1 की वोटिंग से चंद्रशेखरन को ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के चेयरमन के तौर पर चुने जाने के बाद आया है. टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष और टाटा संस के डायरेक्‍टर नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और इसकी वैधता को चुनौती दी। 

    टाटा ट्रस्‍ट ने बताया क्‍यों गलत है ये वोटिंग? 
    इस विवाद के केंद्र में टाटा संस के नियमों से संबंधित कंपनी के कॉन्‍ट्रैक्‍ट हैं, जिनमें कंपनी को संचालित करने वाले नियम शामिल हैं. टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, बोर्ड के फैसले केवल कुल वोटों की गिनती के आधार पर तय नहीं किए जा सकते. इसके लिए ट्रस्ट्स द्वारा चुने हुए डायरेक्‍टर के बहुमत का पॉजिटिव रिस्‍पॉन्‍स भी जरूरी है। 

    बयान में कहा गया है कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बोर्ड के किसी भी फैसले को केवल डायरेक्‍टर की संख्या पर छोड़ने की अनुमति नहीं है. इसमें तर्क दिया गया कि चूंकि ट्रस्ट द्वारा नामित दो व्यक्तियों में से एक ने चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति का विरोध किया, इसलिए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। 

    ट्रस्ट ने तर्क दिया कि यह शर्त बोर्ड के पूरी वोटिंग से अलग थी. इसलिए 4:1 के रिजल्‍ट से प्रस्ताव वैध नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि कोई शर्त या तो पूरी होती है, या नहीं. इस मामले में शर्त पूरी नहीं हुई। 

    'कोई गतिरोध नहीं था'
    टाटा ट्रस्ट्स ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि प्रस्ताव के प्रति उसके विरोध ने एक गतिरोध पैदा कर दिया है जो कंपनी को कमजोर कर सकता है. बयान में आगे कहा गया कि फाइनल वोटिंग चेयरमैन को तब दी जाती है, जब बोर्ड में सदस्‍यों की संख्‍या बराबर हो. ट्रस्टों ने तर्क दिया कि इस मामले में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता क्योंकि समग्र बोर्ड स्तर पर कोई बराबरी नहीं थी. इन सभी तर्कों के साथ टाटा ट्रस्‍ट का कहना है कि चंद्रशेखरन की नियुक्‍ति को सही नहीं ठहराया जा सकता है। 

  • सेंसेक्स 560 अंक उछला, बाजार में क्यों आई तेजी? समझें बड़े ट्रिगर

    सेंसेक्स 560 अंक उछला, बाजार में क्यों आई तेजी? समझें बड़े ट्रिगर

    मुंबई 

    हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के चेहरे खिल उठे। सोमवार 21 सितंबर 2026 को शेयर बाजार की क्लोजिंग काफी शानदार रही। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी की वजह से बाजार में दिनभर खरीदारी का दौर देखने को मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 564.03 पॉइंट यानी 0.76% की जोरदार बढ़त बनाकर 74,858.99 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 67.93 पॉइंट यानी 0.29% की मजबूती के साथ 23,414.30 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा।

    किन सेक्टर्स ने बाजार में भरी जान
    आज के कारोबार में सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो फार्मा और रियलिटी सेक्टर्स में सबसे ज्यादा खरीदारी दर्ज की गई। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1.16% बढ़कर 27,021.15 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी रियलिटी इंडेक्स में भी 1.14% की बड़ी बढ़त देखी गई और यह 853.85 पर बंद हुआ। एफएमसीजी सेक्टर ने भी बाजार को अच्छा सपोर्ट दिया और निफ्टी एफएमसीजी 0.95% चढ़कर 45,900.90 के लेवल पर पहुंच गया। इसके अलावा प्राइवेट बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स में भी हरियाली देखने को मिली, जहां निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.29% और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.20% बढ़कर बंद हुए।

    मेटल शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली रही, जिससे निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.61% गिरकर 12,972.70 के स्तर पर आ गया। आईटी और सरकारी बैंकों के शेयरों में भी सुस्ती छाई रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.08% टूटकर 28,830.90 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी पीएसयू बैंक भी 0.06% की मामूली गिरावट के साथ 8,312.40 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 0.08% की मामूली बढ़त के साथ 27,151.10 पर और निफ्टी मीडिया 0.14% चढ़कर 1,555.95 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा।

    कच्चे तेल में नरमी से मिला बड़ा सपोर्ट
    भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल के दाम हमेशा से ही एक बड़ा फैक्टर रहे हैं। हाल के दिनों में क्रूड ऑयल के दामों में आई नरमी ने भारतीय बाजार के लिए बूस्टर का काम किया है। मिडिल ईस्ट में सप्लाई की चिंताओं के बीच सऊदी अरब द्वारा क्रूड ऑयल के रास्ते को रिरूट करने से कीमतों पर दबाव कम हुआ है। ब्रेंट क्रूड में आई इस गिरावट से भारत का इंपोर्ट बिल कम होगा, जिससे देश के मैक्रो इकोनॉमिक इंडिकेटर्स को मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि निवेशकों ने एनर्जी और डोमेस्टिक कैपेक्स से जुड़े शेयरों में जमकर खरीदारी की।

    कारोबार के दौरान पीएसयू एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट्स से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने खास दिलचस्पी दिखाई। इसके अलावा बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स ने भी बाजार की इस तेजी को संभालने में अहम रोल निभाया। हालांकि अडाणी ग्रुप के कुछ शेयरों में आज प्रॉफिट बुकिंग की वजह से गिरावट का रुख देखने को मिला, लेकिन ब्रॉडर मार्केट का मूड पूरी तरह से पॉजिटिव बना रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी मिला-जुला कारोबार दर्ज किया गया।

  • चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट पर टकराव, टाटा ट्रस्ट्स ने कानूनी लड़ाई के लिए सिंघवी को चुना

    चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट पर टकराव, टाटा ट्रस्ट्स ने कानूनी लड़ाई के लिए सिंघवी को चुना

    नई दिल्ली
    टाटा ग्रुप के अंदर चल रही वर्चस्व की लड़ाई अब कोर्ट तक पहुंच सकती है। टाटा ट्रस्ट्स ने सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघिवी को कानूनी सलाह और प्रतिनिधित्व के लिए नियुक्त किया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन नियुक्त करने पर सहमति दे दी। जिसके बाद टाटा ट्रस्ट्स के मुखिया नोएल टाटा ने बयान जारी कर इस नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताया था।

    सिंघवी ने क्या कुछ कहा?
    इस नियुक्ति के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्हें बहुत दुख और अफसोस के साथ इस पूरे मामले का हिस्सा बनना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वे रतन टाटा के साथ काम कर चुके हैं। साथ इस मामले के दोनों पक्षों को भी अच्छे से जानते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिंघवी लिखते हैं, 'शेयरहोल्डर के मालिकाना हक को बेकार कर देने से सैकड़ों भारतीय कंपनियों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। इससे उनके कॉरपोरेट गवर्नेंस का बुरा नतीजा निकलेगा।'

    उन्होंने टाटा-मिस्त्री विवाद को भी जिक्र अपने पोस्ट में किया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद पर टाटा ट्रस्ट्स को स्पष्ट तौर पर प्राथमिकता दी गई थी। सिंघवी लिखते हैं कि उस फैसले को भुला दिया गया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आपसी सहयोग और सौहार्द की कमी की वजह से इस पूरे मामले में अब समाधान का सिर्फ कानूनी तरीका ही बचा है।

    एन चंद्रेशखरन की नियुक्ति के बाद खड़ा हुआ विवाद
    टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले साल फरवरी में समाप्त हो रहा है। उन्होंने फिर से खुद को ना चुनने की अपील की थी। लेकिन 17 सितंबर को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में फिर से उन्हें चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया। इस नियुक्ति का टाटा ट्र्स्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने विरोध किया। बता दें, टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की कुल हिस्सेदारी 66 प्रतिशत की है।

    इन सबके बीच रिजर्व बैंक ने टाटा संस के एनबीएफसी ना मानने की अपील ठुकरा दी थी। जिसके बाद अब टाटा संस की लिस्टिंग मौजूदा नियमों के अनुसार अनिवार्य हो गई है। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स ऐसा नहीं चाहता है। वह लिस्टिंग को लेकर सहमत नहीं है।

     

  • ईरान युद्ध का अमेरिका पर बड़ा असर, डीजल 75% महंगा; महंगाई बढ़ने का खतरा

    ईरान युद्ध का अमेरिका पर बड़ा असर, डीजल 75% महंगा; महंगाई बढ़ने का खतरा

    नई दिल्ली
    डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बीते दिनों एक बयान देते हुए कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला की तरह ईरान में बने रहने और तेल का खजाना अपने पास रखने का फैसला कर सकता है. लेकिन ट्रंप का ये तेल का खेल उनके लिए बड़ी टेंशन का सबब बनता जा रहा है. दरअसल, ईरान युद्ध से बिगड़े हालातों के बीच अमेरिका में डीजल की कीमतें अब नए रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई हैं. बीते हफ्तेभर में ही US Diesel Price में बड़ा उछाल आया है, जो देश में महंगाई का जोखिम बढ़ा रहा है.

    ईरान-होर्मुज ने बिगाड़ा ट्रंप का खेल
    ईरान से जंग और होर्मुज संकट ने मिलकर अमेरिका की ही तेल निकाल दिया है. अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, 19 सितंबर को डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.4866 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर गई. एक सप्ताह पहले यह कीमत 6.16 डॉलर थी. इसका मतलब है कि सिर्फ एक सप्ताह में डीजल की कीमत में लगभग 33 सेंट या 5.3% की बढ़ोतरी (US Diesel Price Hike) हुई है.

    सालभर में 75% महंगा हुआ डीजल
    AAA के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि डीजल के दाम में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब Diesel Price एक साल पहले की तुलना में लगभग 75% अधिक महंगा हो चुका है, जब राष्ट्रीय औसत कीमत 3.71 डॉलर थी. अमेरिका और इजरायल ने पहली बार ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया था और इसके बाद जैसे-जैसे युद्ध बढ़ा डीजल का दाम ट्रंप की टेंशन भी बढ़ाता चला गया.

    AAA का डेटा देखें, तो US-Iran War शुरू होने से ऐन पहले से पहले यानी 27 फरवरी को डीजल 3.75 डॉलर प्रति गैलन था, जबकि 19 सितंबर के रिकॉर्ड 6.49 डॉलर पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि अमेरिका में डीजल का एक आम ग्राहक अब होर्मुज संकट से ठीक पहले की तुलना में प्रति गैलन लगभग 73% अधिक पेमेंट करने को मजबूर है.

    कैलिफोर्निया अमेरिका का सबसे महंगा फ्यूल मार्केट बन गया है. एएए के मुताबिक, राज्य में डीजल की औसत कीमत 8.4161 डॉलर प्रति गैलन है, डीजल की कीमत राष्ट्रीय औसत से लगभग 2 डॉलर प्रति गैलन ज्यादा है.

    Hormuz बना ट्रंप की टेंशन
    अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने से अमेरिकी उपभोक्ताओं, ट्रक चालकों, किसानों और व्यवसायों पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लंबे समय से जारी संकट ने ग्लोबल फ्यूल सप्लाई को प्रभावित किया है और अमेरिका पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिला है.

    Hormuz ही ट्रंप के टेंशन की सबसे बड़ी वजह बना हुई, जो 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष के शुरू होने के बाद से बुरी तरह से बाधित है. दुनिया की कुल तेल जरूरत के 20 फीसदी को पूरा करने के लिए जिम्मेदार इस समुद्री तेल रूट को ईरान ने बंद किया हुआ है. इससे Global Oil-Gas Supply का पांचवां हिस्सा ठप है. रॉयटर्स ने मार्च की रिपोर्ट पर गौर करें, तो में युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट के खाड़ी क्षेत्र के 8 प्रमुख उत्पादक देशों से तेल निर्यात फरवरी के स्तर से कम से कम 60% गिर गया था. तो दूसरी ओर रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और मध्य पूर्वी देशों के रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में आई रुकावटों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

    दूसरों को सप्लाई कर खुद परेशान
    ग्लोबल ऑयल क्राइसिस के बीच अमेरिका उन बाजारों के लिए रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जो कमी का सामना कर रहे हैं, लेकिन द वॉल स्ट्रीट जर्नल की मानें, तो इससे खुद अमेरिका के घरेलू डीजल भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

    अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन का कहना है कि डीजल की कीमतें अब सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्रूड की लागत, रिफाइनिंग मार्जिन, डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट, टैक्स और डीजल के 'क्रैक स्प्रेड' यानी कच्चे तेल की इनपुट लागत और थोक डीजल कीमतों के बीच के अंतर को दर्शाती हैं. ग्लोबली डिस्टिलेट की सीमित आपूर्ति और Crude Price Hike ने तेल की लागत और रिफाइनिंग मार्जिन दोनों को बढ़ाया है.

    महंगाई का बढ़ा खतरा
    डीजल का महत्व सिर्फ ईंधन टैंक तक ही सीमित नहीं है. यह भारी ट्रकों, ट्रेनों, कृषि मशीनों और मछली पकड़ने वाली नावों समेत अमेरिकी माल ढुलाई नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करता है. यही कारण है कि डीजल संकट अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है, इसकी कीमतों में बढ़ोतरी माल ढुलाई दरों, कृषि लागत, खाद्य पदार्थों की कीमतें, औद्योगिक लागत और आखिर में उपभोक्ता पर महंगाई का बोझ बढ़ाती हैं.

  • Maharashtra Scooters के शेयरधारकों को ₹160 डिविडेंड का तोहफा, 21 सितंबर को एक्स-डिविडेंड डेट

    Maharashtra Scooters के शेयरधारकों को ₹160 डिविडेंड का तोहफा, 21 सितंबर को एक्स-डिविडेंड डेट

     नई  दिल्ली
    मोटा डिविडेंड की चाहत रखने वाले निवेशकों के लिए गुड न्यूज है। महाराष्ट्र स्कूटर लिमिटेड की तरफ से एक शेयर पर निवेशकों को 160 रुपये का डिविडेंड दिया जा रहा है। इस डिविडेंड के लिए तय रिकॉर्ड डेट भी इसी हफ्ते है। बता दें, शेयर बाजार में कंपनी इस साल दूसरी बार एक्स-डिविडेंड ट्रेड कर रही है।

    किस दिन है रिकॉर्ड डेट
    महाराष्ट्र स्कूटर्स लिमिटेड की तरफ से दी जानकारी के अनुसार शेयर बाजार में कंपनी की तरफ से हर एक शेयर पर 160 रुपये का डिविडेंड दिया जाएगा। इस डिविडेंड के लिए कंपनी ने कल यानी 21 सितंबर को रिकॉर्ड डेट घोषित किया है। यानी कल शेयर बाजार में कंपनी के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे।

    कंपनी के शेयर इसी साल जून के महीने में एक्स-डिविडेंड ट्रेड किए थे। तब कंपनी ने एक शेयर पर 60 रुपये का डिविडेंड दिया था।

    क्या कल शेयर खरीदने पर होगा डिविडेंड का फायदा?
    नहीं, डिविडेंड हो या फिर बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट इस तरह के सभी मामलों में रिकॉर्ड डेट से एक कारोबारी दिन पहले ही शेयरों को खरीदना होता है। रिकॉर्ड डेट पर खरीदने पर इसका फायदा नहीं मिलता है।

    शेयरों का प्रदर्शन कैसा है?
    शुक्रवार को इस डिविडेंड देने जा रही कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली थी। कंपनी के शेयर 4 प्रतिशत की उछाल के साथ बंद हुए थे। मार्केट क्लोजिंग के वक्त महाराष्ट्र स्कूटर्स लिमिटेड के शेयरों का दाम बीएसई में 13788.75 रुपये के स्तर पर था। पिछले एक महीने में स्टॉक का दाम 3.86 प्रतिशत बढ़ा है। एक साल में स्टॉक की कीमतों में 22 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान सेंसेक्स इंडेक्स में 10.50 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। यानी स्टॉक का दाम इंडेक्स से भी नीचे गिरा है। बता दें, कंपनी के शेयरों का 52 वीक हाई 18400 रुपये और 52 वीक लो लेवल 10921 रुपये है। कंपनी का मार्केट कैप 15701 करोड़ रुपये का है।

    भले ही निवेशकों के लिए यह साल कठिन रहा हो लेकिन इसके बाद भी दो साल में पोजीशनल निवेशकों को 15 प्रतिशत का फायदा हुआ है। 3 साल में स्टॉक की कीमतों में 81 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली है। बता दें, 5 साल में इस कंपनी ने शेयर बाजार में 209 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।