Category: बिज़नेस

  • Kia Sorento बनी नई फ्लैगशिप SUV, ₹27.99 लाख से कीमत; 7-सीटर और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन

    Kia Sorento बनी नई फ्लैगशिप SUV, ₹27.99 लाख से कीमत; 7-सीटर और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन

    मुंबई 

     Kia नाम की कोरियन कार कंपनी ने भारत में एक नई SUV लॉन्च की है, जिसका नाम Kia Sorento है. यह 3-row SUV है, जिसकी कीमत 27.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. यह गाड़ी अंध्रा प्रदेश के अनंतपुर प्लांट में बन रही है. यह फेसलिफ्ट वाली चौथी जनरेशन (MQ4) Sorento है, जो दुनिया में 2023 में आ चुकी थी। 

    कंपनी इसे छह मेजर ट्रिम्स में बेच रही है, जिनके नाम HTE, HTE(O), HTK, HTK(A), HTX और HTX(A हैं. इसमें दो इंजन ऑप्शन हैं. पहला – 1.6-लीटर स्ट्रॉग-हायब्रिड टर्बो-पेट्रोल वाला है और दूसरा – 2.2 लीटर डिज़ल वाला इंजन है. HTX और HTX(A) ट्रिम्स में दोनों इंजन के साथ all-wheel-drive (AWD) भी मिल रहा है। 

    कीमत और वेरिएंट्स
    2026 Kia Sorento की इंट्रोडक्टरी एक्स-शोरूम कीमत 27.99 लाख रुपये से शुरू होकर 40.19 लाख रुपये तक जाती है. HTK(A), HTX और HTX(A) ट्रिम्स में 'Black Line' स्टाइलिंग पैक का ऑप्शन है। 

    इसमें ब्लैक डिज़ाइन एलिमेंट्स आते हैं और इसकी अतिरिक्त कीमत 20,000 रुपये हैं. (A) वाले ट्रिम्स में ADAS फीचर्स मिलते हैं और O) ट्रिम में Convenience Pack मिलता है। 

    इंजन और पावर
    Kia Sorento में दो पावरट्रेन मिल रहे हैं. 1.6-लीटर strong-hybrid turbo-petrol में इंजन 180hp और 265Nm पावर देता है. इसके साथ इलेक्ट्रिक मोटर 65hp और 264Nm जोड़ती है तो कुल मिलाकर 230hp और 380 Nm पावर मिलता है. यह 6-स्पीज ऑटोमैटिर ट्रांसमिशन के साथ आता है और FWD या AWD दोनों में उपलब्ध है. कंपनी का कहना है कि यह भारत में अकेले स्ट्रॉग-हायब्रिड है, जो टर्बो-पेट्रोल इंजन यूज़ करता है। 
    दूसरा ऑप्शन 2.2-लीटर diesel है. यह 193hp और 442Nm पावर देता है. इसके साथ 8-स्पीड डुअल क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन जुड़ा है. डिज़ल भी FWD और AWD दोनों में मिल रहा है. गाड़ी में चार ड्राइव मोड हैं – Normal, Eco, Sport और Smart. इसके अलावा तीन टेर्रेन मोड भी हैं – Snow, Sand और Mud .

    फीचर डिटेल
    साउंड सिस्टम 12-स्पीकर Bose
    सनरूफ पैनोरेमिक
    डिस्प्ले ड्यूल 12.3-इंच + HUD
    सीट 6 या 7, वेंटिलेटेड फ्रंट, पावर एडजस्ट
    सेफ्टी 10 एयरबैग, डिजिटल IRVM, ऑटो पार्किंग, फ्रंट-रियर डैशकैम, Level 2+ ADAS
    खास बातें रियल-टाइम जेनेरेटिव AI (ग्लोबल में पहली बार)

    डिजाइन और बाहर की खूबसूरती

    बाहर से इस नई गाड़ी में Kia का मशहूर Tiger-nose grille लगा है. इसमें honeycomb mesh पैटर्न और क्रोम बॉर्डर है. हेडलाइट्स वर्टिकली स्टैक्ड LED हैं और Y-शेप वाले LED DRLs अलग से दिखते हैं. बंपर में चौड़े एयर इनलेट, दोनों तरफ ड्यूल LED फॉग लैंप और सिल्वर स्किड प्लेट जैसी फेक प्लेट लगी है.

    इसके साइड में गाड़ी का स्टैंड सीधा और मजबूत लगता है. 19 इंच ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स लगे हैं. नीचे ब्लैक क्लैडिंग चलती है. रूफ रेल, फ्रंट फेंडर पर क्रोम ट्रिम और विंडो के चारों तरफ क्रोम बॉर्डर भी हैं. इसके पीछे L-शेप वाली रैपअराउंड LED टेललाइट्स हैं. टेलगेट साफ-सुथरा है और बीच में Kia का नाम लिखा है. इसके पीछे वाइपर, वॉशर, रूफ स्पॉइलर, ड्यूल एग्जॉस्ट टिप्स और सिल्वर स्किड प्लेट भी है.

    अंदर का माहौल और फीचर्स

    इस नई गाड़ी के कैबिन में दो ड्यूल-टोन थीम मिलती हैं – ग्रे-ब्लैक और बेज-ब्लैक. डैशबोर्ड पर दो 12.3-इंच स्क्रीन हैं, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए और दूसरी इंफोटेनमेंट के लिए. ये स्क्रीन Seltos और Syros जैसी ही हैं. इसके बीच में 5-इंच क्लाइमेट कंट्रोल टचस्क्रीन नहीं है. इंफोटेनमेंट और क्लस्टर पर Marvel, Disney और Pixar के नौ थीम लगाए जा सकते हैं, जो भारत में किसी भी Kia कार में पहली बार हो रहा है.

    क्लाइमेट कंट्रोल अलग टच पैनल में है. वहां स्क्रॉलर्स और बटन भी हैं. 4-स्पोक स्टीयरिंग व्हील पर फिजिकल कंट्रोल और स्क्रॉलर हैं. सेंटर कंसोल में रोटरी ड्राइव सिलेक्टर डायल, वायरलेस फोन चार्जर, कप होल्डर और पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप है.

    यह अपनी सेगमेंट की पहली ऐसी एसयूवी है, जिसमें 6 या 7 सीट का ऑप्शन मिलता है. 6-सीटर में मिडिल रो में कैप्टन चेयर हैं. 7-सीटर में बेंच सीट है. सभी सीटों पर टैन लेदरेट अपहोल्स्टरी है. फ्रंट सीट्स वेंटिलेटेड हैं, 10-वे पावर एडजस्टेबल हैं और लंबर सपोर्ट भी है. को-ड्राइवर सीट में बॉस मोड है. मिडिल रो इलेक्ट्रॉनिकली फोल्ड होती है. 6-सीटर में मिडिल रो वेंटिलेशन भी है.

  • त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार

    त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार

    इंदौर 

    चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है।

    अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये।

    कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर
    सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

    यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है।

    अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी
    दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।

    सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

    हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।

    फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।

  • भारतीय एविएशन में FLY91 की बड़ी छलांग, 40 विमानों पर लगाएगी करीब ₹9,500 करोड़; 2032 तक 60+ विमान होंगे

    भारतीय एविएशन में FLY91 की बड़ी छलांग, 40 विमानों पर लगाएगी करीब ₹9,500 करोड़; 2032 तक 60+ विमान होंगे

     नई दिल्ली
    भारत की नई नवेली रीजनल एयरलाइन FLY91 ने करीब $1 बिलियन (₹9,500 करोड़) में 40 नए ATR 72-600 टर्बोप्रॉप विमानों का ऑर्डर दिया है. कंपनी के मुताबिक, यह किसी रीजनल कैरियर की ओर से ATR विमानों का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है. एयरलाइन के लिए इसे विस्तार की दिशा में बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है. ATR फ्रेंच-इटैलियन एयरोस्पेस कंपनियों Airbus और Leonardo का जॉइंट वेंचर है, जो रीजनल टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट बनाता है। 

    FLY91 को उड़ान शुरू किए दो साल से ज्यादा समय हो चुका है. फिलहाल कंपनी के बेड़े में 6 ATR 72-600 विमान हैं और वह हर हफ्ते 280 से ज्यादा उड़ानें संचालित करती है. नए विमानों के साथ एयरलाइन अपने नेटवर्क और फ्लीट को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है. कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में 60 से ज्यादा विमानों का बेड़ा तैयार करना है। 

    2027 के आखिर से शुरू होगी डिलीवरी

    FLY91 के फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मनोज चाको ने बताया कि नए विमानों की डिलीवरी 2027 के आखिर से शुरू होने की उम्मीद है. सभी 40 विमानों की डिलीवरी 2032 तक पूरी करने का लक्ष्य है. कंपनी का कहना है कि नए विमानों के जरिए उसे देश में अपना रीजनल नेटवर्क बढ़ाने का स्केल मिलेगा. इससे उन शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने में मदद मिलेगी, जहां अभी हवाई सेवाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या सीमित हैं. FLY91 के चेयरमैन हर्ष राघवन के मुताबिक, 40 विमानों का यह एयरलाइन के लिए एक अहम माइलस्टोन है। 

    ₹250 करोड़ जुटाने की तैयारी में FLY91
    विमानों के बेड़े को बढ़ाने के साथ FLY91 पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में भी है. एयरलाइन के सीईओ मनोज चाको के मुताबिक, कंपनी करीब ₹250 करोड़ जुटाने की तैयारी कर रही है. इसमें से 25% फंडिंग पहले ही पूरी हो चुकी है. कंपनी के विस्तार प्लान में नए विमान, ज्यादा रूट और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है. ऐसे में आने वाले समय में एयरलाइन की फंडिंग और फ्लीट विस्तार दोनों पर नजर रहेगी। 

    साइनिंग सेरेमनी में मंत्री नायडू थे मौजूद
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित ऑर्डर साइनिंग सेरेमनी में यूनियन सिविल एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में ATR की CEO नताली टार्नौड लॉडे और चीफ कमर्शियल ऑफिसर एलेक्सिस विडाल, FLY91 के चेयरमैन हर्ष राघवन और सीईओ मनोज चाको शामिल हुए। 

    समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारत अपने एविएशन नेटवर्क को तेजी से विस्तार दे रहा है और देश में विमानों के निर्माण की दिशा में भी प्रयास जारी हैं. उन्होंने ATR से भारत में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा और सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया. नायडू ने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते सिविल एविएशन मार्केट में से एक बताया. उन्होंने कहा कि सरकार अगले 10 वर्षों में देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। 

  • चीनी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, रिटेल भाव 4% घटा; पिछले महीने के मुकाबले महंगी

    चीनी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, रिटेल भाव 4% घटा; पिछले महीने के मुकाबले महंगी

    नई दिल्ली
    देशभर में चीनी की कीमतों में अब नरमी दिखने लगी है. एक हफ्ते में चीनी का औसत रिटेल भाव 3.85% घटकर ₹62.57 प्रति किलो पर आ गया है. एक हफ्ते पहले यह कीमत ₹65.08 प्रति किलो थी. हालांकि, गिरावट के बावजूद चीनी अब भी महंगी है और इसका रिटेल भाव पिछले महीने के ₹49.33 प्रति किलो के स्तर से करीब 27% ऊपर बना हुआ है। 

    कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल के दिनों में कई कदम उठाए हैं. इनमें 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट की अनुमति देना भी शामिल है. इसके अलावा बल्क यूजर्स और डीलरों के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है. माना जा रहा है कि इन उपायों का असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है। 

    थोक बाजार में भी घटी कीमत

    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव ₹57.62 प्रति किलो रहा. एक हफ्ते पहले यह ₹60.39 प्रति किलो था. यानी इस दौरान थोक कीमत में भी करीब ₹2.77 प्रति किलो की कमी आई है. हालांकि, थोक बाजार में कीमत घटने के बावजूद इसका पूरा फायदा रिटेल ग्राहकों को तुरंत नहीं मिल रहा है. इसकी वजह दुकानदारों के पास मौजूद पुराना स्टॉक है. कई रिटेलर्स ने चीनी पहले ही ऊंची कीमत पर खरीदी हुई है. ऐसे में वे उसे तुरंत कम भाव पर बेचकर नुकसान उठाना नहीं चाहते। 

    दुकानों तक सस्ता स्टॉक पहुंचने में लगेगा समय
    उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, रिटेल कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं. आम तौर पर एक दुकानदार के पास चीनी की 10-15 बोरियां स्टॉक में रहती हैं और हर बोरी का वजन करीब 50 किलो होता है. ऐसे में पुराने महंगे स्टॉक के खत्म होने और नए सस्ते स्टॉक की सप्लाई आने के बाद ही रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट दिख सकती है। 

    उत्पादन घटा फिर भी पर्याप्त स्टॉक की उम्मीद
    चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और चीनी मिलों के बीच भी खींचतान देखने को मिली है. केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. वहीं, 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. इसके बावजूद सरकार के सालाना घरेलू खपत के अनुमान के मुकाबले उपलब्धता को लेकर फिलहाल बड़ा संकट नहीं माना जा रहा है. देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। 

    अगले 10 दिन अहम
    सरकार की कोशिश एक साथ सप्लाई बढ़ाने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर नजर रखने की है. हालिया आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इन कदमों के बाद थोक और रिटेल, दोनों बाजारों में कीमतों में कुछ नरमी आई है. हालांकि, रिटेल ग्राहकों को इसका पूरा फायदा मिलने में थोड़ा समय लग सकता है. अगर आप घर के लिए चीनी खरीदते हैं, तो आने वाले दिनों में राहत और बढ़ सकती है. नया और सस्ता स्टॉक दुकानों तक पहुंचने के बाद रिटेल कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल चीनी के दाम एक हफ्ते में जरूर घटे हैं, लेकिन वे अभी भी पिछले महीने के मुकाबले काफी ऊंचे हैं. आने वाले दिनों में नए स्टॉक की सप्लाई और बाजार में मांग के आधार पर कीमतों की अगली दिशा तय होगी। 

  • बाजार खुलते ही निवेशकों की बल्ले-बल्ले, सेंसेक्स में 600 अंकों की छलांग; Reliance शेयर चमके

    बाजार खुलते ही निवेशकों की बल्ले-बल्ले, सेंसेक्स में 600 अंकों की छलांग; Reliance शेयर चमके

    मुंबई 
    भारतीय शेयर बाजार में शानदार तेजी आई है. शुकवार को सेंसेक्‍स खुलते ही तेज उछाल के साथ  594 अंक चढ़ गया और आज का हाई लेवल 76,746.80 को टच किया. इसी तरह, निफ्टी में भी अच्‍छी तेजी देखने को मिली. निफ्टी हरे निशान में खुला और फिर 76.4 अंकों की तेजी के साथ 23,949.85 के हाई पर पहुंच गया। 

    बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 3 शेयर ही गिरावट पर कारोबार कर रहे थे, जबकि बाकी 27 शेयर तेजी पर रहे. सबसे ज्‍यादा तेजी टाटा ट्रेंट के शेयरों में देखी गई, जो 2.41 फीसदी चढ़ गया. इसके बाद रिलायंस के शेयरों में 2 फीसदी की उछाल आई. इसके अलावा, इंडिगो, बीईएल और बजाज के शेयर तेजी पर रहे। 

    इस बीच, बीएसई मार्केट कैप करीब 2 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 489.06 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. 2,205 शेयर तेजी पर कारोबार कर रहे थे, जबकि 1,246 शेयर गिरावट पर थे. 130 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई लेवल पर थे और 59 शेयर 52 सप्‍ताह के नीचले स्‍तर पर कारोबार कर रहे थे. 103 शेयरों में लोअर सर्किट लगा रहा. 112 शेयरों में अपर सर्किट लगा। 

    सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
    सेंसेक्स और निफ्टी के ताजा हाल की बात करें तो दोनों में उछाल दिखा है। 9 बजकर 45 मिनट पर 30 शेयरों वाले इंडेक्स सेंसेक्स में 0.62 फीसदी की तेजी दिखी। यह 473.29 अंक मजबूत होकर 76,626.15 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, निफ्टी में 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। यह 54.05 अंक चढ़कर 23,927.50 पर ट्रेड कर रहा था।

    टीसीएस समेत इन शेयरों में तेजी
    सेंसेक्स के 30 शेयरों में से एक में गिरावट और बाकी में उछाल दिखा है। 9 बजकर 15 मिनट पर सबसे अधिक तेजी टीसीएस में दिखी। यह 1.85 फीसदी उछलकर हरे निशान में 2354.80 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, इन्फोसिस में 1.44 फीसदी की तेजी दिखी और यह 1144.20 के लेवल पर कारोबार कर रहा था।

    इनके अलावा बजाज फिनसर्व में 1.26 फीसदी, ट्रेंट में 1.24 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1.07 फीसदी, इंडिगो में 0.95 फीसदी, कोटक महिंद्रा में 0.85 फीसदी, टाइटन में 0.83 फीसदी, मारुति में 0.76 फीसदी, एसबीआई में 0.64 फीसदी, आईटीसी में 0.55 फीसदी, अडानी पोट्स में 0.50 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 0.43 फीसदी, इटरनल (जोमैटो) में 0.06 फीसदी और एक्सिस बैंक में 0.06 फीसदी की तेजी दिखी। वहीं, भारती एयरटेल 0.07 गिरकर 1863.90 पर ट्रेड कर रहा था।

    घरेलू और विदेशी निवेशकों का निवेश
    बीते कारोबारी सत्र यानी कि गुरुवार को घरेलू निवेशकों (Domestic Institutional Investor) ने 4977 करोड़ रुपये का निवेश किया। इन्होंने बुधवार को भी कुल 2813 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

    वहीं, विदेशी निवेशकों (Foreign Institutional Investor) ने भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बिकवाली की है। इन्होंने कुल 2346 करोड़ रुपये के शेयरों को बेचा है। हालांकि, बुधवार इन्होंने कुल 6688 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। इस खरीदारी और बिक्री का बाजार पर आज प्रभाव भी पड़ा है।

    गुरुवार को कैसी थी मार्केट की चाल?
    शेयर बाजार गुरुवार को अपना शुरुआती कारोबार शानदार किया था। घरेलू के अलावा विदेशी निवेशकों की बंपर खरीदारी ने मार्केट को बल दिया था। सेंसेक्स जहां 278 अंकों (0.36 फीसदी) की तेजी के साथ हरे निशान में 76.848.98 के लेवल पर खुला था। वहीं, निफ्टी उछलकर 23,978.85 पर ट्रेड कर रहा था। लेकिन, मार्केट बंद के दौरान इन दोनों में बड़ी गिरावट दिखी थी। सेंसेक्स 0.55 फीसदी लुढ़कर यानी कि 417.49 अंक गिरकर 76,152.86 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी की बात करें तो यह 0.17 फीसदी यानी करीब 41 अंक गिरकर लाल निशान में 23,873.45 पर बंद हुआ था।

    10% उछले ये स्‍टॉक 
    Puravankara के शेयर 10 फीसदी चढ़कर 232 रुपये प्रति शेयर पर थे. एचबीएल इंजीनियरिंग के शेयर में 8 फीसदी की चढ़कर 714 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं. तेजस नेटवर्क के शेयर 8 फीसदी चढ़कर 613 रुपये पर कारोबार कर रहा थे. आईएफसीआई के शेयर में 5 फीसदी की तेजी आई है. एंजल वन के शेयर में भी 5 फीसदी की उछाल देखने को मिली है. फिजिक्‍सवाला के शेयर में 4 फीसदी की तेजी आई है। 

    क्‍यों आई ये तेजी? 
    विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में हिस्‍सेदारी बढ़ रही है. दूसरी ओर, आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिली है. साथ ही लार्जकैप कंपनियों जैसे रिलायंस, टाइटन और बजाज जैसे शेयर चढ़े हैं और मार्केट को ऊपर की ओर ले जा रहे हैं। 

  • Tata Curvv Series X ने मारी एंट्री, ₹9.99 लाख की शुरुआती कीमत में SUV का नया अवतार

    Tata Curvv Series X ने मारी एंट्री, ₹9.99 लाख की शुरुआती कीमत में SUV का नया अवतार

     नई दिल्ली

    टाटा ने अपनी दमदार एसयूवी कर्व की नई रेंज को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने कर्व सीरीज एक्स रेंज को इंट्रोड्यूस किया है. कर्व एक्स रेंज मौजूदा स्टैंडर्ड वर्जन को रिप्लेस करेगा. ब्रांड की मानें, तो नई रेंज में कंज्यूमर्स को बेहतर वैल्यू मिलेगी. आसान भाषा में कहें, तो इस कार में कंज्यूमर्स को एक्स्ट्रा वैल्यू मिलेगी। 

    कर्व सीरीज एक्स 6 वेरिएंट में उपलब्ध होगी. टाटा ने नई रेंज में वेरिएंट लाइनअप को रिशफल किया है. इसके लिए कम कीमत में कंपनी ने हायर वेरिएंट्स के फीचर्स को जोड़ा है, जिससे लोगों को ज्यादा बेहतर वैल्यू मिलेगी. आइए जानते हैं नई रेंज की डिटेल्स। 
     
    कितनी है कीमत? 
    कर्व सीरीज एक्स 6 वेरिएंट में आती है, जिसमें स्मार्ट एक्स, प्योर एक्स, प्योर एक्स प्लस, क्रिएटिव एक्स प्लस, एकॉम्प्लिश एक्स और एकॉम्प्लिश एक्स प्लस का विकल्प मिलता है. कंज्यूमर्स 5 कलर ऑप्शन- प्रिस्टीन वॉइट, प्योर ग्रे, नाइट्रो क्रिमसन, ओपेरा ब्लू और ऑब्सीडियन ब्लैक में कार को खरीद पाएंगे। 

    टाटा कर्व सीरीज एक्स की कीमत 9.99 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. ये कीमत स्मार्ट एक्स वेरिएंट की है. वहीं प्योर एक्स वेरिएंट की कीमत 11 लाख रुपये से शुरू होती है. सीरीज का टॉप वेरिएंट एकॉम्प्लिश एक्स प्लस 18.50 लाख रुपये और इसका डार्क एडिशन 18.75 लाख रुपये एक्स शोरूम पर आता है। 

    क्या होगा कार में खास? 
    कर्व सीरीज एक्स के लोअर वेरिएंट्स में ज्यादा फीचर्स मिलते हैं. कार में 10.25 इंच की इंफोटेनमेंट स्क्रीन प्योर एक्स वेरिएंट से मिलना शुरू हो जाएगी. इसके अलावा सीरीज में वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कार प्ले, ऑटोमेटिक क्लाइमेट कंट्रोल, क्रूज कंट्रोल, पुश बटन स्टार्ट और ऑटो फोल्डिंग ओआरवीएम्स मिलेंगे। 

    हायर वेरिएंट्स में 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, मल्टीपल ड्राइव मोड्स, फ्रंट और रियर यूएसबी पोर्ट और एक कूल्ड ग्लफबॉक्स मिलता है. कैबिन में लाइटर इंटीरियर दिया गया है, जिससे इंटीरियर ज्यादा एयरी फील होता है. रियर पैसेंजर्स के लिए कार में अलग से एसी वेंट्स, रियर आर्मरेस्ट और रिक्लाइनिंग रियर सीट्स मिलती हैं। 

    अन्य फीचर्स की बात करें, तो कार में 360 डिग्री कैमरा दिया गया है. कार में पैनोरोमिक सनरूफ, ब्लाइंड व्यू मॉनिटर, रेन सेंसिंग वाइपर और ऑटोमेटिक हेडलैम्प्स मिलेंगे. सेफ्टी की बात करें, तो कार में 6 एयरबैग, ईपीएस, हिल-होल्ड कंट्रोल, एबीएस, ईबीडी और रियर पार्किंग सेंसर मिलते हैं. कार के इंजन ऑप्शन में कोई बदलाव नहीं है. ये कार तीन इंजन ऑप्शन में आएगी। 

     

  • VinFast ने अचानक बंद किया कारों का प्रोडक्शन? विवाद बढ़ने पर कंपनी ने दिया बड़ा स्पष्टीकरण

    VinFast ने अचानक बंद किया कारों का प्रोडक्शन? विवाद बढ़ने पर कंपनी ने दिया बड़ा स्पष्टीकरण

    नई दिल्ली

    भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक कार बाजार में पैर जमाने की कोशिश कर रही वियतनामी कंपनी VinFast को लेकर एक बड़ी ख़बर सामने आई है. बताया जा रहा है कि, कंपनी ने अचानक भारत में तीन इलेक्ट्रिक SUV की लोकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े काम को फिलहाल रोक दिया था. इनमें VF 3, VF 6 और VF 7 शामिल हैं. एक साल से भी कम समय में यूं अचानक कारों के प्रोडक्शन बंद होने की खबर ने कार बाजार में हलचल मचा दी है. अब इस मामले में कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरा मामला साफ किया है। 

    क्या है मामला
    दरअसल, Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने अपने सप्लायर्स को इन तीनों प्रोजेक्ट पर सभी एक्टिविटीज को अस्थायी तौर पर रोकने का निर्देश दिया है. बताया जा रहा है कि VinFast इस समय इन प्रोजेक्ट्स की लागत और अपने स्ट्रेटजी को फिर से रिव्यू कर रही है. VinFast ने जिन तीन मॉडलों से जुड़े काम को रोका है, उनमें VF 3 सबसे ज्यादा चर्चा में है. यह दो दरवाजों वाली छोटी इलेक्ट्रिक SUV है और इसे भारत में कंपनी का सबसे किफायती और प्रतिस्पर्धी मॉडल माना जा रहा था. हालांकि अभी इसे लॉन्च नहीं किया गया है।

    इसके अलावा VF 6 और VF 7 एसयूवी के प्रोडक्शन को भी हाल्ट करने की चर्चा थी. फिलहाल इन दोनों मॉडलों को कंपनी वियतनाम से किट के रूप में भारत लाकर यहां असेंबल करती है. मीडिया रिपोर्ट में जुलाई में सप्लायर्स को भेजे गए एक मेमो का हवाला दिया गया था. जिसमें कंपनी ने VF 3, VF 6 और VF 7 से जुड़े सभी डेवलपमेंट काम को "temporarily" रोकने की बात कही थी। 

    VinFast ने पिछले साल भारत में अपनी पहली फैक्ट्री शुरू की थी. कंपनी ने देश में करीब 2 अरब डॉलर निवेश करने की बात भी कही थी. दरअसल, विनफास्ट का टार्गेट भारत को दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस के तौर पर डेवलप करना था. ऐसे में अचानक से तीन इलेक्ट्रिक कारों की लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर रोक लगने ने इस मामले को और भी तूल दे दिया। 

    कंपनी ने कहा- भारत में जारी रहेगा कारोबार
    कारों के प्रोडक्शन हाल्ट की खबर सामने आने के बाद VinFast ने सफाई देते हुए कहा कि, भारत में फिलहाल बिक रहे मॉडल्स की प्रोडक्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. VF 6 और VF 7 की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली जारी है. कंपनी तमिलनाडु के थूथुकुडी प्लांट में इन मॉडल्स की CKD असेंबलिंग करती रहेगी. भारत में एंट्री के बाद कंपनी ने कई मार्केट रिसर्च और कार क्लीनिक कैपेंन आयोजित किए हैं, जिनके जरिए VF 6 और VF 7 जैसे मॉडल्स को लेकर भारतीय ग्राहकों की जरूरत, पसंद और उम्मीदों को समझा गया. इन फीडबैक के आधार पर कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स में जरूरी बदलाव किए हैं। 

    कंपनी का दावा है कि ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट तैयार करने की इस स्ट्रेटजी का फायदा उसे भारत में मिल रहा है. VinFast के मुताबिक, वह भारतीय बाजार में ग्लोबल मार्केट से लाए गए गाड़ियों को असेंबल कर बेचने के बजाय, यहीं भारत में यहां के ग्राहकों के जरूरतों के अनुसार कार डेवलप करना चाहती है। 

    कंपनी का कहना है कि, विनफास्ट भारतीय बाजार में लगातार टॉप-5 सबसे ज्यादा बिकने वाले EV ब्रांड्स में शामिल रही है. प्रोडक्शन स्ट्रेटजी में किया गया बदलाव भविष्य के मॉडलों से जुड़ा है. कंपनी ने स्पष्ट किया कि भारत में पहले से बेची जा रही VF 6 और VF 7 को वह वियतनाम से किट के रूप में लाकर देश में असेंबल करती रहेगी. कंपनी ने यह भी कहा कि वह भारत के लिए खास तौर पर तैयार किए गए नए मॉडल डेवलप करने पर फोकस कर रही है। 

     

  • जन्माष्टमी पर जमकर होगी खरीदारी! देशभर में 40 हजार करोड़ से ज्यादा कारोबार की उम्मीद, जानें किन सेक्टरों को फायदा

    जन्माष्टमी पर जमकर होगी खरीदारी! देशभर में 40 हजार करोड़ से ज्यादा कारोबार की उम्मीद, जानें किन सेक्टरों को फायदा

    नई दिल्ली
     देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है। 

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है। जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) के आह्वान का असर देश भर के त्योहारों वाले बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है।

    प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं।

    सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए था और 2025 में यह बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए हो गया। इस वर्ष, ग्राहकों की ज्यादा मांग, सामान और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, बढ़ते सामाजिक उत्सव, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, और मॉडर्न रिटेल व डिजिटल कॉमर्स के विकास के कारण, व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और इसके 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है।

    प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस साल जिन उत्पादों की मांग खास तौर पर ज्यादा है, उनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा का सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार के खास कपड़े शामिल हैं।

    खंडेलवाल की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय त्योहारों को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना ​​उनके असली महत्व को कम करके आंकना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, छठ पूजा और कई अन्य त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाते हैं।

    जन्‍माष्‍टमी पर कहां कितना खर्च करेंगे लोग? 

    कैट के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी से जुड़े व्यापार में कई चीजों की हिस्‍सेदारी रहने वाली है. खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष बाजारों में माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों, मिठाइयों, फलों, सूखे मेवों, पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, बंदनवार, झूलों, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषणों और विशेष परिधानों की मांग विशेष रूप से बढ़ी हुई है। 

    मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पाद पर 20% तो पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट पर 10% खर्च कर सकते हैं. वहीं फूल, मालाएं और सजावट सामग्री पर 12%, पारंपरिक परिधान और वस्त्र पर 10%, फल, सूखे मेवे और प्रसाद सामग्री पर 10% खर्च किया जा सकता है. लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार सामग्री पर 8%, उपहार, खिलौने और घरेलू सजावटी सामग्री पर 5%, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं पर 15% और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर 10% खर्च कर सकते हैं। 

    राष्‍ट्रीय महामंत्री बोले- वोकल फॉर लोकल की ताकत 
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों का अद्भुत संगम भी है. जन्माष्टमी ऐसा पर्व है, जिसमें आस्था सीधे आर्थिक गतिविधियों में परिवर्तित होती दिखाई देती है। 

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान का प्रभाव त्योहारों के बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. अब उपभोक्ता बड़ी संख्या में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को व्यापक लाभ मिल रहा है। 

    किसान, फल-फूल विक्रेता से होटल-रेस्‍तरां व्‍यवसाई तक को लाभ  
    जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा सामग्री से लेकर सजावटी वस्तुओं और धार्मिक उत्पादों तक अधिकांश मांग स्वदेशी वस्तुओं की है. खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ा प्रत्येक अनुष्ठान और आयोजन किसी न किसी रूप में लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है. किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, वस्त्र विक्रेता, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, रेस्तरां संचालक और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग इस पर्व से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं। 

    2024 में 25,000 करोड़, 2025 में 30,000 करोड़ का कारोबार 
    कैट के अनुसार वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में लगभग ₹25,000 करोड़ का व्यापार हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच गया. इस वर्ष उपभोक्ता मांग में वृद्धि, वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन, त्योहारों के बढ़ते सामाजिक विस्तार, धार्मिक पर्यटन में वृद्धि और आधुनिक रिटेल एवं डिजिटल खरीदारी के विस्तार को देखते हुए लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि के साथ व्यापार ₹40,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है। 

    सनातन अर्थव्‍यवस्‍था की ताकत 
    उन्‍होंने कहा कि भारत के त्योहारों को केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजनों के रूप में देखना उनके वास्तविक महत्व को कम करके आंकना होगा. दीपावली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी, दुर्गापूजा, करवा चौथ, छठ पूजा सहित देश के सभी प्रमुख पर्व करोड़ों छोटे व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिलाओं, स्वरोजगारियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक अवसरों का विशाल तंत्र तैयार करते हैं। 

    खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय त्योहारों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें होने वाला खर्च केवल उपभोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों तक आय और रोजगार के रूप में पहुंचता है. यही प्रक्रिया भारत की जमीनी, समावेशी और विकेंद्रीकृत ‘सनातन अर्थव्यवस्था' को मजबूती प्रदान करती है। 

    मथुरा-वृंदावन से गुजरात-महाराष्‍ट्र तक जन्‍माष्‍टमी की धूम 
    खंडेलवाल ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर और देश के अन्य प्रमुख कृष्ण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। 
    वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित देश भर में यह त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है. इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और होटल, परिवहन, रेस्तरां, प्रसाद, फूल, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में भी उल्लेखनीय आर्थिक गतिविधियां देखने को मिलेंगी। 

    उन्होंने कहा कि भारत की धार्मिक अर्थव्यवस्था को अब केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि रोजगार, पर्यटन, स्थानीय उत्पादन और छोटे कारोबार के एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में भी समझने की आवश्यकता है। 
    खंडेलवाल ने कहा, 'जन्माष्टमी का उत्सव ‘भक्ति से बाजार, परंपरा से रोजगार और स्थानीय उत्पादन से राष्ट्रीय विकास' की भावना को सशक्त बनाने का अवसर है. जन्माष्टमी सहित सभी त्यौहार भारत की उस अद्भुत आर्थिक परंपरा का प्रतीक है, जहां मंदिर से बाजार तक, किसान से व्यापारी तक और कारीगर से उपभोक्ता तक पूरा समाज एक आर्थिक श्रृंखला में जुड़ जाता है। 

    उन्होंने कहा कि भारतीय त्योहारों की सबसे खास बात यह है कि इन मौकों पर होने वाला खर्च सिर्फ उपभोग तक सीमित नहीं रहता; बल्कि यह आय और रोजगार के रूप में समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचता है। यह प्रक्रिया भारत की जमीनी स्तर की, समावेशी और विकेंद्रीकृत "सनातन अर्थव्यवस्था" को मजबूत करती है।

    खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी के दौरान लाखों श्रद्धालु देश भर में अलग-अलग तरीकों से यह त्योहार मनाएंगे, खासकर मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ और कृष्ण के अन्य प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर। इससे धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा और होटल, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट, प्रसाद की बिक्री, फूलों, स्थानीय हस्तशिल्प और संबंधित सेवाओं में अच्छी-खासी आर्थिक गतिविधि होगी।

    उन्होंने कहा कि भारत की 'धार्मिक अर्थव्यवस्था' को अब सिर्फ आध्यात्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसे एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम के तौर पर भी पहचाना जाना चाहिए जो रोजगार, पर्यटन, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और छोटे व्यवसायों को सहारा देता है।

  • Dollar-Rupee: रुपये ने मारी शानदार छलांग, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत; विदेशी फंड से मिला सपोर्ट

    Dollar-Rupee: रुपये ने मारी शानदार छलांग, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत; विदेशी फंड से मिला सपोर्ट

    नई दिल्ली

    आज यानी 3 सितंबर को फॉरेन करेंसी मार्केट में भारतीय रुपये का जोश हाई नजर आ रहा है.गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये ने शानदार रिकवरी दिखाई  और 47 पैसे की मजबूती के साथ 94.26 के स्तर पर पहुंच गया. ये लगातार दूसरा दिन है जब भारतीय रुपया अपनी ताकत दिखा रहा है. इससे पहले बुधवार को भी रुपया 22 पैसे चढ़कर 94.73 पर बंद हुआ था. डॉलर के मुकाबले रुपये में आई इस जबरदस्त तेजी की आखिर वजह क्या है ये भी जान लीजिए…

    बता दें कि भारतीय करेंसी यू ही अपनी दमखम नहीं दिखी रही बल्कि इसके पीछे रिजर्व बैंक (RBI), FCNR(B) डिपॉजिट्स से लेकर क्रूड ऑयल तक का बड़ा हाथ है। 
    रुपये में आई मजबूती की वजह क्या है?

    1. FCNR(B) स्कीम से आया रिकॉर्ड पैसा
    रुपये में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट एफडी स्कीम (FCNR-B) है. भारत ने NRI के जरिए रिकॉर्ड 127.23 अरब डॉलर का विदेशी फंड जुटाया है. यह रिस्पॉन्स इतना जबरदस्त था कि रिजर्व बैंक (RBI) ने इस स्कीम को तय समय से एक महीने पहले ही 31 अगस्त को बंद कर दिया. इस स्कीम के जरिए देश में भारी मात्रा में विदेशी करेंसी आई है, जिसने रुपये को बड़ा सपोर्ट दिया है। 

    2. RBI की मजबूत तैयारी,फॉरेक्स रिजर्व ऑल-टाइम हाई पर
    रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. बैंकों के पास भारी मात्रा में डॉलर आने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) बढ़कर 729.32 अरब डॉलर के ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया है. इसके अलावा, देश की GDP ग्रोथ भी पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर 7.8% रही है. इस मजबूत आर्थिक आंकड़ों के चलते रुपये में गिरावट पर ब्रेक लगा है। 

    3. शेयर बाजार में तेजी और FIIs की खरीदारी
    भारतीय शेयर बाजार में तीन दिनों की गिरावट के बाद आज तेजी देखने को मिली है. सेंसेक्स करीब 221 अंक चढ़कर 76,791 पर और निफ्टी 59 अंक बढ़कर 23,974 पर कारोबार कर रहा है. इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 6,688 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध खरीदारी की है. शेयर बाजार में विदेशी पैसे के आने से भी रुपये को सीधी मजबूती मिली है। 

    4. क्रूड ऑयल और डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी
    ग्लोबल मार्केट से भी रुपये को थोड़ी राहत मिली है. इंडेक्स' हल्का गिरकर 99.43 पर आ गया है. वहीं दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें भी थोड़ी घटकर 95.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रही हैं. कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी सी भी कमी भारत के इंपोर्ट बिल को कम करती है, जिससे रुपये को फायदा मिलता है। 

    शेयर बाजार में लौटी रौनक, विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और कच्चे तेल में नरमी के चलते रुपये में यह दमदार उछाल आया है. जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह काबू में रहती हैं और भारतीय शेयर बाजार में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले और मजबूत हो सकता है। 

  • शेयर बाजार ने बदला रुख: तीन दिनों की गिरावट पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल

    शेयर बाजार ने बदला रुख: तीन दिनों की गिरावट पर लगा ब्रेक, सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल

    मुंबई 

    भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट पर आज यानी 3 सितंबर को ब्रेक लग गया. ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों और एशियाई बाजारों में तेजी के दम पर आज गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बाजार में रिकवरी देखने को मिली है. सेंसेक्स 235 से ज्यादा अंकों की बढ़त के साथ 76,806 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी भी 63 अंक चढ़कर 23,977 के करीब कारोबार करता नजर आया। 

    बता दें कि बीते तीन कारोबारी दिनों में दोनों इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1-1 फीसदी तक टूट चुके हैं। 

    बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में उछाल
    आज के कारोबार में बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर्स में तेजी देखनो को मिली. निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 1 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. हालांकि, दूसरी तरफ आईटी और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर्स के शेयरों में मामूली गिरावट रही। 

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा है. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,165 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 168 अंक या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,981 पर था। 

    सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 300 अंकों की मजबूती के साथ 76,869 के करीब पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 105.50 अंक चढ़कर 24,037 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार का ओवरऑल सेंटीमेंट काफी सकारात्मक बना हुआ है, जहां करीब 2,067 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 789 शेयर गिरावट में रहे और 155 शेयर बिना बदलाव के कारोबार कर रहे हैं।

    अडानी पोर्ट्स और बैंकिंग शेयरों में जोरदार उछाल
    आज की इस तेजी की अगुवाई अडानी पोर्ट्स ने की, जिसका शेयर +1.51% की बढ़त के साथ टॉप गेनर बना हुआ है। इसके अलावा बैंकिंग और पावर सेक्टर के दिग्गजों ने भी बाजार को सहारा दिया।

        टॉप गेनर्स (तेजी वाले शेयर): अडानी पोर्ट्स के अलावा ICICI बैंक (+1.37%), एक्सिस बैंक (+1.08%), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBIN +1.08%), पावर ग्रिड (+1.05%), HDFC लाइफ (+0.91%), अडानी एंटरप्राइजेज (+0.84%) और HDFC बैंक (+0.70%) में अच्छी लिवाली देखी जा रही है।

        टॉप लूजर्स (गिरावट वाले शेयर): दूसरी तरफ आईटी और ऑटो शेयरों में कुछ दबाव नजर आया। इंडिगो (-1.02%), टेक महिंद्रा (-0.94%), HCL टेक (-0.86%), आइशर मोटर्स (-0.83%), नेस्ले इंडिया (-0.64%), टीसीएस (-0.63%), इन्फोसिस (-0.59%), बजाज ऑटो और सिप्ला के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

    सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
    सेक्टर के हिसाब से देखें तो आज बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। निफ्टी पीएसयू बैंक में +0.93%, निफ्टी रियाल्टी में +0.91% और निफ्टी बैंक में +0.72% की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा एनर्जी और इंफ्रा सेक्टर भी हरे निशान में हैं। हालांकि, आईटी सेक्टर में बिकवाली का दौर बना हुआ है। निफ्टी IT इंडेक्स -0.90% टूटकर कारोबार कर रहा है। इसके अलावा FMCG (-0.46%) और फार्मा (-0.07%) में मामूली नरमी देखने को मिल रही है।

    इन शेयरों ने कराई तगड़ी कमाई
    टॉप गेनर्स और लूजर्स की बात करें तो सेंसेक्स पर लिस्टेड शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और ट्रेंट गेनर्स में शामिल रहे. जबकि  टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंडिगो, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, टाइटन, आईटीसी, एचयूएल और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। 

    शेयर बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें
        अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई हल्की कमी से निवेशकों का मूड सुधरा है. अमेरिका और एशिया के बाजारों में तेजी रही, जिससे भारतीय निवेशकों का भरोसा बढ़ा। 
        ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें भी नीचे आई हैं, जिससे बाजार को बड़ी राहत मिली है। 
        FCNR(B) स्कीम के जरिए बैंकों के पास भारी विदेशी फंड आया है,जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिली है और विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा बढ़ा है. इसका सीधा फायदा बैंकिंग शेयरों को मिल रहा है।