Category: बिज़नेस

  • शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स 76,300 के नीचे तो निफ्टी 23,900 से फिसला

    शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स 76,300 के नीचे तो निफ्टी 23,900 से फिसला

    मुंबई 
    शेयर बाजार में सोमवार को खराब शुरुआत हुई. ट्रेडिंग ओपन होने के साथ ही मार्केट के दोनों इंडेक्स गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार करते हुए नजर आए. जहां एक ओर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स खुलने के साथ ही 250 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने भी हफ्ते के पहले कारोबारी दिन गिरावट के साथ शुरुआत की. इस बीच टेक कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरे हुए नजर आए. आइए जानते हैं बाजार में इस गिरावट के पीछे के बड़े कारण क्या हैं। 

    Sensex-Nifty खुलते ही धड़ाम 
    शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत पर नजर डालें, तो बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,515 की तुलना में गिरावट के साथ 76,446 पर खुला और अगले ही पल फिसलते हुए 264 अंक टूटकर 76,251 पर आ गया. कुछ ऐसा ही हाल एनएसई के निफ्टी इंडेक्स का देखने को मिला. पिछले शुक्रवार के अपने बंद 23,897 की तुलना में ये मामूली गिरावट के साथ 23,883 पर खुला और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए 23,818 तक टूट गया। 

    IT शेयर खुलते ही बिखरे
    स्टॉक मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही लगभग 1519 शेयरों ने बढ़त के साथ शुरुआत की, तो वहीं 1224 शेयर ऐसे थे, जो गिरावट के साथ रेड जोन में खुले, इसके अलावा 261 शेयरों की फ्लैट ओपनिंग हुई. सप्ताह के पहले दिन आई इस गिरावट के बीच आईटी कंपनियों के शेयर क्रैश नजर आए और इनमें बड़ी गिरावट देखने को मिली। 

    बीएसई की लार्जकैप कंपनियों में शामिल Infosys Share (2.60%), Tech Mahindra Share (1.75%), HCL Tech Share (1.60%), TCS (1%) की गिरावट में कारोबार करते हुए नजर आए. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Bharat Forge Share (1.90%), Mphasis Share (1.75%), Persistent Share (1.70%), Godrej Properties Share (1.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे। 

    बाजार टूटने के चार बड़े कारण
    पहला कारण: शेयर बाजार में आई इस गिरावट के पीछे के बड़े कारणों की बात करें, तो इनमें सबसे पहला अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में मची उथल-पुथल को माना जा सकता है. Brent Crude का दाम तेज उछाल के साथ 97 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा था, जिससे दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ा है और शेयर बाजार निवेशकों का सेंटीमेंट खराब हुआ है। 

    दूसरा कारण: अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन जारी है, जो कम होने का नाम नहीं ले रही है. ताजा अपडेट की बात करें, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अब ईरान को लेकर सोशल मीडिया पर एक साथ कई पोस्ट शेयर की गई हैं, जिनमें उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था, तेल और करेंसी को निशाना बनाया है. एक पोस्ट में तेहरान के नक्शे पर ट्रंप की तस्वीर भी लगाई गई, तो वहीं एक पोस्ट में दावा किया गया कि ईरान का तेल निर्यात तेजी से गिर रहा है. इससे मिडिल ईस्ट टेंशन बढ़ती नजर आ रही है। 

    तीसरा कारण: बाजार बिखरने का तीसरा कारण विदेशी बाजारों का मिलाजुला रुख रहा. दरअसल, एक ओर जहां जापान और साउथ कोरिया के शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ कारोबार करते हुए नजर आए. तो वहीं अन्य एशियाई स्टॉक मार्केट में हांगकांग का हैंगसेंग, ब्रिटेन के एफटीएसई-100, CAC, DAX गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे. यही नहीं भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला Gift Nifty ओपनिंग के साथ ही फिसलकर कारोबार कर रहा था और खबर लिखे जाने तक करीब 90 अंक टूट गया था। 

    चौथा कारण: Share Market में गिरावट में सोमवार को सबसे बड़ा रोल आईटी स्टॉक्स निभाते हुए नजर आए. दरअसल, इंफोसिस, एचसीएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा समेत तमाम IT Stock खुलने के साथ ही तेजी से फिसलते चले गए. निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1 फीसदी टूटा हुआ नजर आया और इसका असर शेयर बाजार पर देखने को मिला। 

  • शेयर बाजार में फिर विदेशी निवेशकों का बिकवाली वाला रुख, सितंबर के पहले हफ्ते में ₹7,443 करोड़ की निकासी

    शेयर बाजार में फिर विदेशी निवेशकों का बिकवाली वाला रुख, सितंबर के पहले हफ्ते में ₹7,443 करोड़ की निकासी

    मुंबई 

    मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी हुई है. इसका सीधा असर विदेशी निवेशकों के इन्वेस्टमेंट पर भी लगातार देखने को मिला है, जिससे बाजारों का सेंटीमेंट खराब हुआ है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब दो महीने तक लगातार निवेश करने के बाद एक बार फिर FPI का मूड खराब हो गया है और उन्होंने सितंबर के पहले हफ्ते में ही ताबड़तोड़ 7,443 करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाले हैं। 

    US-Iran Tension के चलते कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती समेत तमाम कारणों ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली को सपोर्ट किया है। 

    दो महीने दनादन निवेश, अब भागे
    अमेरिका-ईरान में युद्ध कुछ समय के लिए थमने के दौरान इसका असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs पर भी देखने को मिला था और चार महीने की तगड़ी बिकवाली के बाद आखिरकार भारतीय शेयर बाजार में उनकी वापसी हुई है. लेकिन, दो महीने तक दनादन निवेश करने के बाद अब एफपीआई का मूड फिर से बिगड़ा नजर आया और उनकी बिकवाली तेज हो गई है। 

    पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार से सितंबर महीने में पहले सप्ताह में ही इन विदेशी निवेशकों ने 7,443 करोड़ रुपये की मोटी रकम निकाली है. इससे पहले दो महीनों के निवेश पर नजर डालें, तो डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार FPI ने जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये, जबकि बीते अगस्त महीने में 30,919 करोड़ रुपये लगाए थे। 

    इस साल अब तक 2.32 लाख करोड निकाले
    दो महीने के तगड़े निवेश के बावजूद विदेशी निवेशकों द्वारा सितंबर के शुरुआती हफ्ते में की गई इस बिकवाली के बाद अब साल 2026 में इनके भारतीय बाजार से भागते हुए पैसे निकालने का आंकड़ा और भी बढ़ गया है. आंकड़े देखें, तो 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 2.32 लाख करोड़ रुपये के आस-पहुंच गई है, जो बीते वित्त वर्ष के मुकाबले काफी ज्यादा है. बता दें कि 2025 में एफपीआई ने सालभर में 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। 

    ये बनीं बिकलावी की बड़ी वजह 
    भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों के फिर से भागने के पीछे के कारणों को देखें, तो इसके पीछे एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों से जुड़ा हुआ है। 

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि Crude Oil Price Hike ने एफपीआई की चिंता एक बार फिर से बढ़ाने का काम किया है, क्योंकि इससे देश में महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है. रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि एफपीआई का आने वाले दिनों में रुख बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव पर केंद्रित रह सकता है।  

  • Gold-Silver Price: सर्राफा बाजार में राहत, चांदी ₹8,000 टूटी; रिकॉर्ड हाई से ₹1.82 लाख नीचे

    Gold-Silver Price: सर्राफा बाजार में राहत, चांदी ₹8,000 टूटी; रिकॉर्ड हाई से ₹1.82 लाख नीचे

    इंदौर 
     शादी-ब्याह के सीजन से पहले गहने खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सर्राफा बाजार से एक सुकून देने वाली खबर आई है. पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से नई ऊंचाइयों को छू रहे सोने और चांदी की तेजी पर इस हफ्ते ब्रेक लग गया. दोनों ही कीमती धातुओं के दाम भरभराकर नीचे आ गए हैं. इस तेज गिरावट से आम खरीदारों के चेहरे खिल गए हैं। इस कारोबारी हफ्ते के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सोना-चांदी में गिरावट का दायरा सामान्य से काफी बड़ा और चौंकाने है. महज पांच दिनों के भीतर सोने का रेट 4,000 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो गया है. चांदी तो औंधे मुंह गिरी है. हफ्तेभर में सिल्‍वर 8,000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्‍ती हो गई है। 

    इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सबसे शुद्ध यानी 24 कैरेट गोल्‍ड की चमक सबसे ज्यादा फीकी पड़ी है. इस हफ्ते 24 कैरेट सोने का भाव में प्रति 10 ग्राम 4,694 रुपये टूट गया. इस बड़ी कटौती के बाद अब इसका भाव घटकर 1,54,884 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है. कुछ ही दिन पहले यह 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रे कर रहा था। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सबसे शुद्ध यानी 24 कैरेट गोल्‍ड की चमक सबसे ज्यादा फीकी पड़ी है. इस हफ्ते 24 कैरेट सोने का भाव में प्रति 10 ग्राम 4,694 रुपये टूट गया. इस बड़ी कटौती के बाद अब इसका भाव घटकर 1,54,884 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया है. कुछ ही दिन पहले यह 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर ट्रे कर रहा था। जेवराती सोना यानी 22 कैरेट गोल्‍ड भी इस हफ्ते खूब सस्‍ता हुआ है. गहने बनवाने वाले आम ग्राहकों की पहली पसंद माना जाने वाला 22 कैरेट सोना 1,41,874 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ पहुंचा है. इससे पहले यह 1,46,173 रुपये प्रति 10 ग्राम मिल रहा था. यानी प्रति 10 ग्राम पर अब आपको 4,300 रुपये का फायदा होगा। बजट फ्रेंडली 18 कैरेट सोने के दाम भी औंधे मुंह नीचे गिरे हैं. 18 कैरेट गोल्ड का भाव इस हफ्ते 3500 रुपये प्रति दस ग्राम घटा है. इस कटौती के बाद अब यह 1,16,163 रुपये प्रति 10 ग्राम मिल रहा है. इससे पहले 18 कैरेट सोने का भाव 1,19,684 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 

    इस कारोबारी हफ्ते के दौरान सोने के बाजार में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल. 24 कैरेट सोने ने 31 अगस्त को शाम के कारोबारी सत्र में 1,55,835 रुपये प्रति 10 ग्राम का अपना उच्चतम स्तर छुआ. इसके ठीक विपरीत, 2 सितंबर के शाम के सत्र में भारी बिकवाली के चलते यह लुढ़ककर हफ्ते के सबसे निचले स्तर यानी 1,51,184 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। चांदी के खरीदारों की तो इस हफ्ते लॉटरी ही लग गई है. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्‍योंकि क्योंकि चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट आई है. चांदी का भाव सीधे 8,436 रुपये प्रति किलोग्राम लुढ़ककर 2,35,456 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. इससे पहले सिल्‍वर का रेट 2,43,892 रुपये प्रति किलो था

  • काइनेटिक EV की विदेशों में धूम मचाने की तैयारी, सात देशों में स्कूटर लॉन्च करने का प्लान

    काइनेटिक EV की विदेशों में धूम मचाने की तैयारी, सात देशों में स्कूटर लॉन्च करने का प्लान

    पुणे 
    पुणे की EV दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी काइनेटिक वाट्स एंड वोल्ट्स (KWV) अब भारतीय बाजार से बाहर अपना कारोबार बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सात अंतरराष्ट्रीय बाजारों की पहचान की है, जहां वह अपने EV स्कूटर पेश करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। इनमें तुर्किये, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या, नाइजीरिया और मिस्र शामिल हैं। कंपनी इन देशों में स्थानीय नियमों, ग्राहकों की जरूरतों, EV दोपहिया वाहनों की मांग और संभावित वितरण साझेदारों का आकलन कर रही है।

    यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बाजारों पर नजर
    काइनेटिक वाट्स एंड वोल्ट्स की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना में यूरोप, दक्षिण एशिया और अफ्रीका के बाजार शामिल हैं। कंपनी फिलहाल यह तय करने की प्रक्रिया में है कि इन सात देशों में से किन बाजारों में प्रवेश किया जाए और वहां किस तरह का वितरण नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।

    कंपनी भारत में फिलहाल काइनेटिक डीएक्स और डीएक्स प्लस EV स्कूटर बेचती है। इन स्कूटरों को शहरी आवागमन को ध्यान में रखते हुए किफायती विकल्प के तौर पर पेश किया गया है। घरेलू बाजार में कारोबार बढ़ने के बाद अब कंपनी विदेशी बाजारों में भी अपने उत्पादों की संभावनाएं तलाश रही है।

    मकरंद जोशी संभालेंगे अंतरराष्ट्रीय कारोबार
    विदेशी बाजारों में विस्तार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कंपनी ने मकरंद जोशी को अंतरराष्ट्रीय कारोबार विकास का प्रमुख नियुक्त किया है। उन्हें भारतीय वाहन उद्योग के उत्पादों के लिए विदेशी बाजार विकसित करने का दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों में काम किया है। उनके अनुभव में दोपहिया वाहनों के साथ-साथ वाणिज्यिक वाहन और ट्रैक्टर क्षेत्र भी शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क और नए बाजारों में प्रवेश की रणनीति तैयार करने का भी अनुभव है।

    काइनेटिक वाट्स एंड वोल्ट्स के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजिंक्य फिरोदिया ने कहा कि कंपनी के उत्पादों को व्यापक स्तर के बाजारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि घरेलू कारोबार में मिल रही गति के बाद कंपनी ने अब अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में आधार तैयार करना शुरू कर दिया है।
    हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इन सात देशों में से किन देशों में सबसे पहले प्रवेश करेगी। विदेशी बाजार में लॉन्च की समयसीमा की जानकारी भी फिलहाल साझा नहीं की गई है।

    भारत में भी बढ़ाया जा रहा डीलर नेटवर्क
    विदेशी विस्तार की योजना के साथ कंपनी भारत में भी अपने नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रही है। KWV के पास इस समय देश में 45 एक्सक्लूसिव शोरूम हैं और कंपनी अगले दो महीनों में 40 और शोरूम शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा कंपनी ने संभावित डीलरशिप साझेदारों को 150 लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) भी जारी किए हैं।
    इस तरह कंपनी एक ओर भारतीय बाजार में अपने बिक्री और डीलर नेटवर्क को मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी ओर तुर्किये, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या, नाइजीरिया और मिस्र जैसे बाजारों में EV दोपहिया वाहनों की संभावनाओं का आकलन कर रही है।

  • NSE IPO पर बड़ा अपडेट, इस दिन हो सकती है शेयरों की लिस्टिंग; निवेशकों की नजर

    NSE IPO पर बड़ा अपडेट, इस दिन हो सकती है शेयरों की लिस्टिंग; निवेशकों की नजर

    नई दिल्‍ली
    लंबे समय से इंतजार किए जा रहे NSE के आईपीओ की डेट अब नजदीक आ चुकी है. सेबी ने एनएसई के आईपीओ की हरी झंडी दिखा दी है. अब NSE जल्‍द ही नियामक के पास एक अपडेट मसौदा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकता है। 

    सूत्रों के अनुसार, एनएसई का टारगेट है कि वह पितृ पक्ष 2026 के शुरू होने से पहले मार्केट में लिस्‍ट कर जाए, जो 26 सितंबर से शुरू होता है. इसका मतलब है कि एनएसई शुक्रवार, 25 सितंबर को या उससे पहले मार्केट में लिस्‍ट हो सकता है. दूसरी ओर,  सीएनबीसी-टीवी18 ने बताया कि एनएसई 11 सितंबर, 2026 को अपने आईपीओ के लिए प्राइस लिमिट का ऐलान कर सकता है। 

    ये घटना तब सामने आई है, जब एक्‍सचेंज लंबे इंतजार के बाद अपने शेयरों का पब्लिक करने के करीब पहुंच रहा है.रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संभावित मंजूरी भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा NSE के सह-स्थान और डार्क-फाइबर मामलों में नियामक की अपीलों को खारिज करने के बाद मिली है. इससे देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के प्रस्तावित पब्लिक इश्‍यू के लिए एक बाधा दूर हो गई है। 

    पूरी तरह ओएफएस होगा ये आईपीओ 
    एनएसई ने जून में SEBI के पास आईपीओ के लिए अपना DRHP (डिजिटल डेवलपमेंट प्लान) दाखिल किया था, जिसमें 14.89 करोड़ शेयरों तक की बिक्री का प्रस्ताव शामिल था, जो इसकी चुकता पूंजी का लगभग 6 प्रतिशत है. चूंकि यह इश्यू पूरी तरह से OFS का प्रस्ताव है, इसलिए इससे प्राप्त राशि बेचने वाले शेयरधारकों को जाएगी, न कि कंपनी को। 

    कितना हो सकता है इश्‍यू साइज? 
    प्रस्तावित इश्यू का अनुमानित कीमत लगभग 30,000 करोड़ रुपये है और यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है. अनुमानित इश्यू साइज के अनुसार, एनएसई द्वारा इसके शेयर लगभग 2,000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर पेश किए जाने की संभावना है. प्री-आईपीओ बाजार में शेयर लगभग इसी स्तर पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्री-आईपीओ इक्विटी छह महीने के लॉक-इन पीरियड के साथ आती है और आईपीओ लॉन्च करने के लिए आरएचपी दाखिल करने के बाद शेयर का कारोबार रुक जाएगा। 

    कब हो सकती है लिस्टिंग? 
    CNBC-TV18 ने बताया कि उसने NSE के पब्लिक इश्यू के लिए मंजूरी की समयसीमा और IPO प्रक्रिया के लिए SEBI को पत्र लिखा है और जवाब का इंतजार है. फिलहाल, जिन महत्वपूर्ण डेट पर नजर रखी जा रही है, वे हैं अगले सप्ताह SEBI द्वारा संभावित मंजूरी, उसके बाद अपडेटेड प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने की संभावना, 11 सितंबर को प्राइस बैंड का ऐलान और 25 सितंबर, 2026 को लिस्टिंग हो सकती है। 

  • भारत लौटी Skoda Octavia RS, लॉन्च से पहले ही सोल्ड आउट हुई थी पॉपुलर सेडान

    भारत लौटी Skoda Octavia RS, लॉन्च से पहले ही सोल्ड आउट हुई थी पॉपुलर सेडान

     नई दिल्ली

    स्कोडा ने भारतीय बाजार में अपनी प्रीमियम सेडान के सेकंड बैच को लॉन्च कर दिया है. हम बात कर रहे हैं स्कोडा ऑक्टेविया आरएस (Skoda Octavia RS) की. कंपनी इसका सेकंड बैच लेकर आई है. पहले बैच में कंपनी सिर्फ 100 यूनिट्स लेकर आई थी, जो कार के लॉन्च होने से पहले ही बिक गई थीं। 

    अब कंपनी इस कार का सेकंड बैच लेकर आई है, जिसमें सिर्फ 50 यूनिट्स ही उपलब्ध होंगी. कंपनी ने सेकंड बैच में कार की कीमत को बढ़ा दिया है. आइए जानते हैं Skoda Octavia RS की नई कीमत और दूसरी खास बातें। 

    कितनी है कीमत? 
    स्कोडा ऑक्टेविया आरएस को कंपनी ने 56.69 लाख रुपये की एक्स शोरूम कीमत पर लॉन्च किया है. पहले बैच की ऑक्टेविया आरएस की कीमत 49.99 लाख रुपये थी. यानी सेकंड बैच में कंपनी ने इस कार की कीमत को 6.69 लाख रुपये बढ़ा दिया है. कार की सिर्फ 50 यूनिट्स उपलब्ध होंगी. इसकी डिलीवरी अगले हफ्ते से शुरू होगी। 

    क्या है कार में खास? 
    ऑक्टेविया आरएस में फॉक्सवैगन ग्रुप का ईए888 (EA888) 2.0 लीटर का फोर सिलेंडर टर्बो पेट्रोल इंजन मिलता है, जो गोल्फ जीटीआई में भी आता है. ऑक्टेविया आरएस का ये इंजन 265 एचपी की पावर और 370 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. इसके साथ 7 स्पीड डीएसजी ऑटोमेटिक गियरबॉक्स मिलता है। 

    ये कार फ्रंट व्हील ड्राइव है. कंपनी का दावा है कि कार सिर्फ 6.4 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. वहीं इसकी टॉप स्पीड 250 किलोमीटर प्रति घंटे की है. कार के आरएस वेरिएंट में प्रोग्रेसिव स्टीयरिंग, स्पोर्ट्स सस्पेंशन, एडवांस चेसिस सेटअप और एक स्पोर्ट्स एग्जॉस्ट सिस्टम मिलता है। 

    कैबिन में क्या कुछ मिलेगा?
    कार ब्लैक अपहोल्स्ट्री के साथ आती है. इसमें इलेक्ट्रिक्ली एडजस्टेबल फ्रंट सीट्स मिलेंगी, जो मेमोरी फंक्शन के साथ आती है. इसमें हीटिंग और मसाज का फीचर भी मिलेगा. कार में एबिएंट लाइटिंग और 10.25 इंच का डिजिटल ड्राइवर डिस्प्ले दिया गया है। 

    कैबिन में 13 इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो और ऐपल कारप्ले के साथ आता है. अन्य फीचर्स की बात करें, तो कार में थ्री जोन क्लाइमेट कंट्रोल, 11 स्पीकर वाला सिस्टम मिलता है. कार में 10 एयरबैग, एडॉप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन असिस्ट, 360 डिग्री कैमरा और हेट्स अप डिस्प्ले मिलता है। 

  • Kia Sorento बनी नई फ्लैगशिप SUV, ₹27.99 लाख से कीमत; 7-सीटर और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन

    Kia Sorento बनी नई फ्लैगशिप SUV, ₹27.99 लाख से कीमत; 7-सीटर और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड पावरट्रेन

    मुंबई 

     Kia नाम की कोरियन कार कंपनी ने भारत में एक नई SUV लॉन्च की है, जिसका नाम Kia Sorento है. यह 3-row SUV है, जिसकी कीमत 27.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. यह गाड़ी अंध्रा प्रदेश के अनंतपुर प्लांट में बन रही है. यह फेसलिफ्ट वाली चौथी जनरेशन (MQ4) Sorento है, जो दुनिया में 2023 में आ चुकी थी। 

    कंपनी इसे छह मेजर ट्रिम्स में बेच रही है, जिनके नाम HTE, HTE(O), HTK, HTK(A), HTX और HTX(A हैं. इसमें दो इंजन ऑप्शन हैं. पहला – 1.6-लीटर स्ट्रॉग-हायब्रिड टर्बो-पेट्रोल वाला है और दूसरा – 2.2 लीटर डिज़ल वाला इंजन है. HTX और HTX(A) ट्रिम्स में दोनों इंजन के साथ all-wheel-drive (AWD) भी मिल रहा है। 

    कीमत और वेरिएंट्स
    2026 Kia Sorento की इंट्रोडक्टरी एक्स-शोरूम कीमत 27.99 लाख रुपये से शुरू होकर 40.19 लाख रुपये तक जाती है. HTK(A), HTX और HTX(A) ट्रिम्स में 'Black Line' स्टाइलिंग पैक का ऑप्शन है। 

    इसमें ब्लैक डिज़ाइन एलिमेंट्स आते हैं और इसकी अतिरिक्त कीमत 20,000 रुपये हैं. (A) वाले ट्रिम्स में ADAS फीचर्स मिलते हैं और O) ट्रिम में Convenience Pack मिलता है। 

    इंजन और पावर
    Kia Sorento में दो पावरट्रेन मिल रहे हैं. 1.6-लीटर strong-hybrid turbo-petrol में इंजन 180hp और 265Nm पावर देता है. इसके साथ इलेक्ट्रिक मोटर 65hp और 264Nm जोड़ती है तो कुल मिलाकर 230hp और 380 Nm पावर मिलता है. यह 6-स्पीज ऑटोमैटिर ट्रांसमिशन के साथ आता है और FWD या AWD दोनों में उपलब्ध है. कंपनी का कहना है कि यह भारत में अकेले स्ट्रॉग-हायब्रिड है, जो टर्बो-पेट्रोल इंजन यूज़ करता है। 
    दूसरा ऑप्शन 2.2-लीटर diesel है. यह 193hp और 442Nm पावर देता है. इसके साथ 8-स्पीड डुअल क्लच ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन जुड़ा है. डिज़ल भी FWD और AWD दोनों में मिल रहा है. गाड़ी में चार ड्राइव मोड हैं – Normal, Eco, Sport और Smart. इसके अलावा तीन टेर्रेन मोड भी हैं – Snow, Sand और Mud .

    फीचर डिटेल
    साउंड सिस्टम 12-स्पीकर Bose
    सनरूफ पैनोरेमिक
    डिस्प्ले ड्यूल 12.3-इंच + HUD
    सीट 6 या 7, वेंटिलेटेड फ्रंट, पावर एडजस्ट
    सेफ्टी 10 एयरबैग, डिजिटल IRVM, ऑटो पार्किंग, फ्रंट-रियर डैशकैम, Level 2+ ADAS
    खास बातें रियल-टाइम जेनेरेटिव AI (ग्लोबल में पहली बार)

    डिजाइन और बाहर की खूबसूरती

    बाहर से इस नई गाड़ी में Kia का मशहूर Tiger-nose grille लगा है. इसमें honeycomb mesh पैटर्न और क्रोम बॉर्डर है. हेडलाइट्स वर्टिकली स्टैक्ड LED हैं और Y-शेप वाले LED DRLs अलग से दिखते हैं. बंपर में चौड़े एयर इनलेट, दोनों तरफ ड्यूल LED फॉग लैंप और सिल्वर स्किड प्लेट जैसी फेक प्लेट लगी है.

    इसके साइड में गाड़ी का स्टैंड सीधा और मजबूत लगता है. 19 इंच ड्यूल-टोन अलॉय व्हील्स लगे हैं. नीचे ब्लैक क्लैडिंग चलती है. रूफ रेल, फ्रंट फेंडर पर क्रोम ट्रिम और विंडो के चारों तरफ क्रोम बॉर्डर भी हैं. इसके पीछे L-शेप वाली रैपअराउंड LED टेललाइट्स हैं. टेलगेट साफ-सुथरा है और बीच में Kia का नाम लिखा है. इसके पीछे वाइपर, वॉशर, रूफ स्पॉइलर, ड्यूल एग्जॉस्ट टिप्स और सिल्वर स्किड प्लेट भी है.

    अंदर का माहौल और फीचर्स

    इस नई गाड़ी के कैबिन में दो ड्यूल-टोन थीम मिलती हैं – ग्रे-ब्लैक और बेज-ब्लैक. डैशबोर्ड पर दो 12.3-इंच स्क्रीन हैं, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर के लिए और दूसरी इंफोटेनमेंट के लिए. ये स्क्रीन Seltos और Syros जैसी ही हैं. इसके बीच में 5-इंच क्लाइमेट कंट्रोल टचस्क्रीन नहीं है. इंफोटेनमेंट और क्लस्टर पर Marvel, Disney और Pixar के नौ थीम लगाए जा सकते हैं, जो भारत में किसी भी Kia कार में पहली बार हो रहा है.

    क्लाइमेट कंट्रोल अलग टच पैनल में है. वहां स्क्रॉलर्स और बटन भी हैं. 4-स्पोक स्टीयरिंग व्हील पर फिजिकल कंट्रोल और स्क्रॉलर हैं. सेंटर कंसोल में रोटरी ड्राइव सिलेक्टर डायल, वायरलेस फोन चार्जर, कप होल्डर और पुश-बटन स्टार्ट/स्टॉप है.

    यह अपनी सेगमेंट की पहली ऐसी एसयूवी है, जिसमें 6 या 7 सीट का ऑप्शन मिलता है. 6-सीटर में मिडिल रो में कैप्टन चेयर हैं. 7-सीटर में बेंच सीट है. सभी सीटों पर टैन लेदरेट अपहोल्स्टरी है. फ्रंट सीट्स वेंटिलेटेड हैं, 10-वे पावर एडजस्टेबल हैं और लंबर सपोर्ट भी है. को-ड्राइवर सीट में बॉस मोड है. मिडिल रो इलेक्ट्रॉनिकली फोल्ड होती है. 6-सीटर में मिडिल रो वेंटिलेशन भी है.

  • त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार

    त्योहारी सीजन में सस्ती होगी चीनी? एक्स-मिल भाव में 20% की गिरावट, खुदरा दाम घटने के आसार

    इंदौर 

    चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर है। आने वाले त्योहारों गणेश चतुर्दशी, नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ तक चीनी के दाम और गिरने की उम्मीद बढ़ गई है। डिपॉर्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन ने एक्स पर पोस्ट करके चीनी के सस्ता होने की जानकारी दी है। X पर की गई पोस्ट के मुताबिक देश के खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 5% तक कम हो गए हैं। इससे पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20% की बड़ी गिरावट आई है।

    अगर चीनीमंडी के आंकड़ों की बात करें तो गुरुवार शाम को अपडेट किए गए रेट के मुताबिक चीनी के दाम 61 रुपये किलो तक आ गए हैं। दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, रांची में 3 सितंबर को चीनी 61 रुपये में बिकी। गुवाहटी, कानपुर और रायपुर में 62 रुपये किलो थी और चेन्नई में 63 रुपये।

    कब तक एक्स-चीनी मिल रेट का दिखेगा असर
    सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है और आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नरम पड़ सकते हैं। सरकार के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में इसका प्रभाव और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

    यानी चीनी की कीमतों में अभी जो राहत मिली है, उसे शुरुआत माना जा सकता है। अगर मिल स्तर पर कीमतों में गिरावट जारी रहती है तो थोक बाजार के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी और सस्ती होने की संभावना है।

    अगस्त में तेजी के बाद सरकार ने बढ़ाई निगरानी
    दरअसल, अगस्त में चीनी की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसके बाद सरकार ने चीनी बाजार की निगरानी बढ़ा दी। चीनी के स्टॉक, बिक्री और बाजार भाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।

    सरकार का जोर इस बात पर है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न हो। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने कहा है कि सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता, व्यवस्थित आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रही है।

    हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक व्यापार और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यानी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सामान्य कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी और अनावश्यक कीमत बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।

    फिलहाल सरकार के ताजा आंकड़े उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत दे रहे हैं। अगस्त में तेजी के बाद अब चीनी की कीमतों का रुख नीचे की ओर है, जिसका फायदा धीरे-धीरे आम लोगों को मिलना शुरू हो गया है।

  • भारतीय एविएशन में FLY91 की बड़ी छलांग, 40 विमानों पर लगाएगी करीब ₹9,500 करोड़; 2032 तक 60+ विमान होंगे

    भारतीय एविएशन में FLY91 की बड़ी छलांग, 40 विमानों पर लगाएगी करीब ₹9,500 करोड़; 2032 तक 60+ विमान होंगे

     नई दिल्ली
    भारत की नई नवेली रीजनल एयरलाइन FLY91 ने करीब $1 बिलियन (₹9,500 करोड़) में 40 नए ATR 72-600 टर्बोप्रॉप विमानों का ऑर्डर दिया है. कंपनी के मुताबिक, यह किसी रीजनल कैरियर की ओर से ATR विमानों का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर है. एयरलाइन के लिए इसे विस्तार की दिशा में बड़ा माइलस्टोन माना जा रहा है. ATR फ्रेंच-इटैलियन एयरोस्पेस कंपनियों Airbus और Leonardo का जॉइंट वेंचर है, जो रीजनल टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट बनाता है। 

    FLY91 को उड़ान शुरू किए दो साल से ज्यादा समय हो चुका है. फिलहाल कंपनी के बेड़े में 6 ATR 72-600 विमान हैं और वह हर हफ्ते 280 से ज्यादा उड़ानें संचालित करती है. नए विमानों के साथ एयरलाइन अपने नेटवर्क और फ्लीट को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है. कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में 60 से ज्यादा विमानों का बेड़ा तैयार करना है। 

    2027 के आखिर से शुरू होगी डिलीवरी

    FLY91 के फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO मनोज चाको ने बताया कि नए विमानों की डिलीवरी 2027 के आखिर से शुरू होने की उम्मीद है. सभी 40 विमानों की डिलीवरी 2032 तक पूरी करने का लक्ष्य है. कंपनी का कहना है कि नए विमानों के जरिए उसे देश में अपना रीजनल नेटवर्क बढ़ाने का स्केल मिलेगा. इससे उन शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने में मदद मिलेगी, जहां अभी हवाई सेवाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या सीमित हैं. FLY91 के चेयरमैन हर्ष राघवन के मुताबिक, 40 विमानों का यह एयरलाइन के लिए एक अहम माइलस्टोन है। 

    ₹250 करोड़ जुटाने की तैयारी में FLY91
    विमानों के बेड़े को बढ़ाने के साथ FLY91 पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में भी है. एयरलाइन के सीईओ मनोज चाको के मुताबिक, कंपनी करीब ₹250 करोड़ जुटाने की तैयारी कर रही है. इसमें से 25% फंडिंग पहले ही पूरी हो चुकी है. कंपनी के विस्तार प्लान में नए विमान, ज्यादा रूट और मौजूदा नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है. ऐसे में आने वाले समय में एयरलाइन की फंडिंग और फ्लीट विस्तार दोनों पर नजर रहेगी। 

    साइनिंग सेरेमनी में मंत्री नायडू थे मौजूद
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित ऑर्डर साइनिंग सेरेमनी में यूनियन सिविल एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में ATR की CEO नताली टार्नौड लॉडे और चीफ कमर्शियल ऑफिसर एलेक्सिस विडाल, FLY91 के चेयरमैन हर्ष राघवन और सीईओ मनोज चाको शामिल हुए। 

    समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारत अपने एविएशन नेटवर्क को तेजी से विस्तार दे रहा है और देश में विमानों के निर्माण की दिशा में भी प्रयास जारी हैं. उन्होंने ATR से भारत में एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा और सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया. नायडू ने भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते सिविल एविएशन मार्केट में से एक बताया. उन्होंने कहा कि सरकार अगले 10 वर्षों में देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। 

  • चीनी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, रिटेल भाव 4% घटा; पिछले महीने के मुकाबले महंगी

    चीनी खरीदने वालों के लिए राहत की खबर, रिटेल भाव 4% घटा; पिछले महीने के मुकाबले महंगी

    नई दिल्ली
    देशभर में चीनी की कीमतों में अब नरमी दिखने लगी है. एक हफ्ते में चीनी का औसत रिटेल भाव 3.85% घटकर ₹62.57 प्रति किलो पर आ गया है. एक हफ्ते पहले यह कीमत ₹65.08 प्रति किलो थी. हालांकि, गिरावट के बावजूद चीनी अब भी महंगी है और इसका रिटेल भाव पिछले महीने के ₹49.33 प्रति किलो के स्तर से करीब 27% ऊपर बना हुआ है। 

    कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल के दिनों में कई कदम उठाए हैं. इनमें 10 लाख टन चीनी के इंपोर्ट की अनुमति देना भी शामिल है. इसके अलावा बल्क यूजर्स और डीलरों के लिए स्टॉक रखने से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है. माना जा रहा है कि इन उपायों का असर अब थोक बाजार में दिखाई देने लगा है। 

    थोक बाजार में भी घटी कीमत

    उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2 सितंबर को चीनी का औसत थोक भाव ₹57.62 प्रति किलो रहा. एक हफ्ते पहले यह ₹60.39 प्रति किलो था. यानी इस दौरान थोक कीमत में भी करीब ₹2.77 प्रति किलो की कमी आई है. हालांकि, थोक बाजार में कीमत घटने के बावजूद इसका पूरा फायदा रिटेल ग्राहकों को तुरंत नहीं मिल रहा है. इसकी वजह दुकानदारों के पास मौजूद पुराना स्टॉक है. कई रिटेलर्स ने चीनी पहले ही ऊंची कीमत पर खरीदी हुई है. ऐसे में वे उसे तुरंत कम भाव पर बेचकर नुकसान उठाना नहीं चाहते। 

    दुकानों तक सस्ता स्टॉक पहुंचने में लगेगा समय
    उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, रिटेल कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं. आम तौर पर एक दुकानदार के पास चीनी की 10-15 बोरियां स्टॉक में रहती हैं और हर बोरी का वजन करीब 50 किलो होता है. ऐसे में पुराने महंगे स्टॉक के खत्म होने और नए सस्ते स्टॉक की सप्लाई आने के बाद ही रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट दिख सकती है। 

    उत्पादन घटा फिर भी पर्याप्त स्टॉक की उम्मीद
    चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और चीनी मिलों के बीच भी खींचतान देखने को मिली है. केंद्र ने मिलों पर कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाया है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. वहीं, 2025-26 मार्केटिंग ईयर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. इसके बावजूद सरकार के सालाना घरेलू खपत के अनुमान के मुकाबले उपलब्धता को लेकर फिलहाल बड़ा संकट नहीं माना जा रहा है. देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। 

    अगले 10 दिन अहम
    सरकार की कोशिश एक साथ सप्लाई बढ़ाने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर नजर रखने की है. हालिया आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इन कदमों के बाद थोक और रिटेल, दोनों बाजारों में कीमतों में कुछ नरमी आई है. हालांकि, रिटेल ग्राहकों को इसका पूरा फायदा मिलने में थोड़ा समय लग सकता है. अगर आप घर के लिए चीनी खरीदते हैं, तो आने वाले दिनों में राहत और बढ़ सकती है. नया और सस्ता स्टॉक दुकानों तक पहुंचने के बाद रिटेल कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल चीनी के दाम एक हफ्ते में जरूर घटे हैं, लेकिन वे अभी भी पिछले महीने के मुकाबले काफी ऊंचे हैं. आने वाले दिनों में नए स्टॉक की सप्लाई और बाजार में मांग के आधार पर कीमतों की अगली दिशा तय होगी।