Category: बिज़नेस

  • Air India पर बढ़ा वित्तीय दबाव, रिकॉर्ड घाटे के बाद टर्नअराउंड के लिए चाहिए भारी फंडिंग

    Air India पर बढ़ा वित्तीय दबाव, रिकॉर्ड घाटे के बाद टर्नअराउंड के लिए चाहिए भारी फंडिंग

     नई दिल्ली
    एअर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब $1.5 बिलियन (₹14,355) की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत करने वाले दो सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइन को इस पूंजी की तत्काल जरूरत है. हालांकि, प्रस्तावित फंडिंग एकमुश्त देने के बजाय किस्तों में भी दी जा सकती है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर बातचीत जारी है और टाटा संस या सिंगापुर एयरलाइंस की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। 

    एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से $2.33 बिलियन (₹22,180) का घाटा दर्ज किया है. यह दोनों एयरलाइंस का रिकॉर्ड वार्षिक नुकसान बताया जा रहा है. पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यह घाटा दोगुने से भी ज्यादा रहा. एअर इंडिया के भारी नुकसान का असर उसकी शेयरहोल्डर सिंगापुर एयरलाइंस के मुनाफे पर भी पड़ा है. ऐसे में नई इक्विटी की मांग एयरलाइन के बड़े ट्रांसफॉर्मेशन और टर्नअराउंड प्लान के सामने मौजूद वित्तीय दबाव को दिखाती है। 

    टाटा द्वारा अधिग्रहण के बाद सबसे बड़ी फंडिंग

    टाटा ग्रुप द्वारा 2022 में अधिग्रहण करने के बाद से यह एअर इंडिया की सबसे बड़ी पब्लिक फंडिंग की डिमांड है. एयरलाइन पहले सरकार के स्वामित्व में थी. टाटा ग्रुप ने इसे फिर से मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव की योजना बनाई थी, जिसमें पुराने विमानों का रिफर्बिशमेंट, नए विमान शामिल करना, नेटवर्क विस्तार और संचालन में सुधार जैसे कदम शामिल हैं. हालांकि, भारी नुकसान और बढ़ती पूंजी जरूरतों के बीच अब इस टर्नअराउंड प्लान पर वित्तीय दबाव बढ़ता दिख रहा है। 

    एअर इंडिया को तुरंत चाहिए पैसा
    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दो सूत्रों ने बताया कि एअर इंडिया यह रकम नई इक्विटी के तौर पर चाहती है. एक सूत्र के अनुसार, एयरलाइन को पूंजी की तत्काल जरूरत है, हालांकि निवेश को चरणबद्ध तरीके से भी किया जा सकता है. इस निवेश में सिंगापुर एयरलाइंस को भी अपनी हिस्सेदारी के अनुपात में योगदान करना होगा. सिंगापुर एयरलाइंस की एअर इंडिया में करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी है। 

    फंडिंग पर अभी कोई फैसला नहीं
    सूत्रों के मुताबिक, फंडिंग को लेकर बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. दोनों सूत्रों ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी, क्योंकि वे इस मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने के लिए अधिकृत नहीं थे। 

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सवालों पर एअर इंडिया और टाटा संस ने कोई टिप्पणी नहीं की. सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा कि वह टाटा संस के साथ मिलकर एअर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम को सपोर्ट कर रही है. हालांकि, कंपनी ने एअर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार किया

    एयरलाइन को कई मोर्चों पर झटके
    एअर इंडिया के टर्नअराउंड के बीच एयरलाइन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. भारतीय एयरलाइंस के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगी पाबंदी से उसके परिचालन पर असर पड़ा. इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने एयरलाइन के इंटरनेशनल नेटवर्क को प्रभावित किया. पिछले साल हुए घातक विमान हादसे का असर भी एअर इंडिया को झेलना पड़ा, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी. इन घटनाओं ने एयरलाइन के संचालन और वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डाला है। 

    टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल
    टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एअर इंडिया के टर्नअराउंड में 10 साल तक का समय लग सकता है. उनके मुताबिक, एयरलाइन को सप्लाई चेन की बाधाओं के साथ-साथ पुराने सिस्टम, कार्य संस्कृति और फ्लीट में बड़े बदलाव की जरूरत है. इस बीच लागत घटाने की कोशिशें भी जारी हैं. रॉयटर्स ने इस साल रिपोर्ट किया था कि टाटा ग्रुप एयरबस और बोइंग से ऑर्डर किए गए सैकड़ों विमानों की डिलीवरी को टालने पर विचार कर रहा है, ताकि खर्च को नियंत्रित किया जा सके। 

  • 7-सीटर इलेक्ट्रिक SUV से धमाका, MG Hector Tomahawk EV भारतीय बाजार में लॉन्च

    7-सीटर इलेक्ट्रिक SUV से धमाका, MG Hector Tomahawk EV भारतीय बाजार में लॉन्च

    मुंबई 

    जेएसडब्लू-एमजी ने अपनी नई कार को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने भारतीय बाजार में एमजी हेक्टर टॉमाहॉक (MG Hector Tomahawk) ईवी को लॉन्च कर दिया है. ये कार दमदार फीचर्स के साथ आती है. इस SUV के साथ कंपनी ने टॉमाहॉक प्लग-इन हाइब्रिड को भी अनवील किया है। 

    ये कार एमजी के ADAPT प्लेटफॉर्म पर बेस्ड पहला प्रोडक्ट है, जो भारत में लॉन्च हुआ है. कार के ईवी अवतार को कंपनी ने मल्टीपल वेरिएंट में लॉन्च किया है. कार BaaS (बैटरी एज ए सर्विस) के साथ भी आती है. आइए जानते हैं इस कार की कीमत और दूसरी खास बातें। 

    कितनी है कीमत? 
    जेएसडब्लू-एमजी ने हेक्टर टॉमाहॉक को 13.99 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया है. ये कीमत BaaS वेरिएंट की है, जिसके साथ आपको बैटरी के लिए 4.9 रुपये प्रति किलोमीटर का चार्ज भी देना होगा. इस एसयूवी को अगर आप बैटरी के साथ खरीदते हैं, तो इसकी कीमत 19.49 लाख रुपये एक्स शोरूम से शुरू होती है. इस कार डिलीवरी सितंबर से शुरू होगी. फिलहाल आप इस कार को आधिकारिक डीलरशिप से बुक कर सकते हैं। 

    रेंज और फीचर्स 
    एमजी हेक्टर टॉमाहॉक में 69.2kWH का बैटरी पैक मिलता है. कंपनी की मानें, तो इस बैटरी पैके साथ ये कार 517 किलोमीटर का सफर तय (क्लेम्ड रेंज) कर सकती है. इसमें एसी और डीसी दोनों तरह की चार्जिंग का विकल्प मिलता है. ये कार 150kW की पावर और 310 एनएम का टॉर्क ऑफर करती है। 

    कार सिर्फ 8.2 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है. कार में व्हीकल टू होम फीचर भी मिलता है. यानी एसयूवी में स्टोर एनर्जी को जरूरत पड़ने पर घर के काम में इस्तेमाल किया जा सकता है। 

    टॉमाहॉक SUV में 360 डिग्री कैमरा दिया गया है, जो ट्रासंपैरेंट चेसिस व्यू के साथ आता है. इसके अलावा कार में ईएसपी, ट्रैक्शन कंट्रोल, हिल होल्ड असिस्ट, इलेक्ट्रिक पार्किंग ब्रेक और दूसरे फीचर्स मिलते हैं. इसमें लेवल 2 ADAS दिया गया है, जो 11 फीचर्स के साथ आता है। 

    कार मल्टीपल कैबिन मोड के साथ आती है. इसमें नैप मोड, कैंप मोड, प्रो-पेट मोड, एनर्जाइज मोड, वैलेट मोड और क्वाइट मोड दिया गया है. इन मोड्स को अलग-अलग काम के लिए डिजाइन किया गया है. इन मोड्स में कार अलग तरीके से बर्ताव करेगी। 

    कार में 10 स्पीकर वाला साउंड सिस्टम दिया गया है. इसमें वेंटिलेटेड, पावर्ड और मेमोरी फंक्शन वाली सीट्स मिलती हैं. एसयूवी में पैनोरोमिक सनरूफ दिया गया है, जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि ये सेगमेंट सबसे बड़ा है. इसमें एक बड़ी इंफोटेनमेंट स्क्रीन दी गई है। 

  • पहली बार ऐसी बाइक लॉन्च करने की तैयारी में Bajaj! लॉन्च से पहले लीक हुईं अहम जानकारियां

    पहली बार ऐसी बाइक लॉन्च करने की तैयारी में Bajaj! लॉन्च से पहले लीक हुईं अहम जानकारियां

    नई दिल्ली

    बजाज ऑटो भारतीय बाजार में एक नए तरीके की बाइक लॉन्च करने वाली है. अब तक कंपनी कम्यूटर और परफॉर्मेंस फोकस्ड बाइक लॉन्च कर चुकी है. ये कंपनी की पहली एडवेंचर बाइक होगी. भारत में इस मोटरसाइकिल को कई बार टेस्ट करते हुए देखा गया है. कयास हैं कि कंपनी इस बाइक को 2026 में ही लॉन्च करेगी। 

    बजाज अपनी एडवेंचर बाइक को भारत से पहले ब्राजील में लॉन्च कर सकता है. भारत में ये बाइक फेस्टिव सीजन में लॉन्च हो सकती है. हालांकि, बजाज ने आधिकारिक रूप से इस बाइक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. ब्राजील में इस बाइक का डेवलपमेंट शुरू हो गया है। 

    क्या होगा बाइक में खास?
    बजाज ब्राजील के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर वाल्डिर फरेरा (Waldyr Ferreira) ने इसका संकेत दिया है कि क्रिसमस गिफ्ट के रूप में ये बाइक लॉन्च हो सकती है. इस बाइक का नाम बजाज ट्रैकर (Trekker) हो सकता है. कंपनी ने इस नाम को ट्रेड मार्क कर लिया है। 

    हालांकि, आधिकारिक रूप से बजाज ने इसका नाम कन्फर्म नहीं किया है. इसका डिजाइन आजकल आने वाली किसी भी दूसरी एडवेंचर बाइक जैसा ही होगा. इसमें लंबा फ्रंट एंड, बीक-स्टाइल मडगार्ड, फ्रोक गेटर्स, लंबी सिंगल-पीस सीट और ऊपर की तरफ उठाया गया एग्जॉस्ट मिलेगा। 

    टेस्टिंग के दौरान बाइक में स्पोक व्हील्स को भी स्पॉट किया गया है. कयास हैं कि ये बाइक 19 इंच के फ्रंट और 17 इंच के रियर व्हील्स के साथ आ सकती है. ये सेटअप बाइक को सड़क पर बेहतर स्टेबिलिटी देने के साथ हल्के ऑफ-रोड पर भी मदद करेगा.
    दमदार इंजन के साथ आएगी। 

    वैसे बजाज इस बाइक में पल्सर एन250 का इंजन इस्तेमाल कर सकती है, जो एक दमदार विकल्प है. कंपनी इसमें 249 सीसी का एयर/ऑयल कूल्ड सिंगल सिलेंडर इंजन दे सकती है. पल्सर में ये इंजन 24.5 पीएस की पावर और 21.5 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. ये 5-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता है। 

    बजाज इस इंजन में एडवेंचर बाइक के मुताबिक कुछ बदलाव सकता है, जिससे इसका पावर आउटपुट अलग हो. इस बाइक का सीधा मुकाबला हीरो एक्सपल्स 210, येज्दी एडवेंचर और सुजुकी वी-स्टॉर्म एसएक्स से होगा. ये इंजन बजाज को बाइक की कीमत कम रखने में मदद करेगा। 

  • महंगाई से राहत! 15% सस्ती हुई चीनी, आने वाले दिनों में दाम और घटने के संकेत

    महंगाई से राहत! 15% सस्ती हुई चीनी, आने वाले दिनों में दाम और घटने के संकेत

    इंदौर 

     चीनी की बढ़ी हुई कीमतों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। थोक मार्केट में चीनी का दाम पिछले कुछ दिनों के दौरान 15 प्रतिशत नीचे गिर गया है। होलसेल में मार्केट में यह गिरावट के सरकार के फैसले के बाद देखने को मिली है। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों 10 लाख टन ड्यूटी फ्री चीनी आयात करने की अनुमति दी थी। इसके अलावा कालाबाजारी रोकने के लिए भी केंद्र सरकार की तरफ लगातार कड़ाई की जा रही है। हालांकि, खुदरा बाजार में अब भी चीनी का दाम 75 रुपये प्रति किलोग्राम के आस-पास बना हुआ है।

    800 रुपये गिरा दाम
    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार महज तीन दिन में चीनी का रेट होलसेल मार्केट में 800 रुपये प्रति क्विंटल तक कम हो गया है। मौजूदा समय में थोक बाजार में चीनी का रेट 62 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस इंडस्ट्रीज से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में चीनी का रेट 3 रुपये प्रति किलोग्राम तक अभी और कम होगा।

    सरकारी आंकड़ों में चीनी का क्या है रेट
    डिपार्टेमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स की रिपोर्ट के अनुसार 24 अगस्त को 1 किलोग्राम चीनी का रेट 63.05 रुपये था। एक सप्ताह पहले चीनी का रेट खुदरा बाजार में 51.68 रुपये प्रति किलोग्राम था। वहीं, पिछले महीने की 24 तारीख को चीनी 48 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही थी। यानी 15 रुपये का इजाफा बीते एक महीने में देखने को मिला है। बता दें, पिछले वर्ष इसी समय चीनी का रेट 45.87 रुपये प्रति किलोग्राम था।

    अब 2 महीने में बेचनी होगी इंपोर्टेड चीनी

    चीनी के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इसके इंपोर्ट से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है. अब टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत विदेश से आने वाली कच्ची चीनी को पहले रिफाइन्ड चीनी बनाना होगा. फिर इसे देश के बाजार में बेचना जरूरी होगा. सरकार ने इसके लिए दो महीने की डेडलाइन तय की है. यानी इंपोर्ट की गई कच्ची चीनी को देश में आने के 60 दिनों के अंदर प्रोसेस कर बाजारों में बेचना होगा. इस फैसले से चीनी की जमाखोरी पर रोक लगेगी और बाजार में सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

    पहले आयात की गई कच्ची चीनी को प्रोसेस करके 31 अक्टूबर 2026 तक बाजारों में बेचने की शर्त थी. अब सरकार ने डेडलाइन और कम कर दी है. यानी नए नियम के तहत बिल ऑफ एंट्री की तारीख से दो महीने के अंदर कच्ची चीनी को रिफाइंड चीनी में बदलकर बाजार में लाना होगा। 

    चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार ने क्या एक्शन लिया?
    चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने आयातित कच्ची और रिफाइंड चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं. सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति भी दी है. इससे विदेश से आने वाली चीनी लंबे समय तक गोदामों में नहीं स्टोर की जा सकेगी और जल्द बाजार में लोगों तक पहुंचेगी। 

    देश में कितनी बची है चीनी
    केंद्र सरकार की तरफ से दी जानकारी के अनुसार इस समय कुल 36 लाख टन चीनी देश में है। सरकार को उम्मीद है कि मौजूदा भंडारण और 10 लाख इम्पोर्ट की जा रही चीनी के आने से देश को नए सीजन से पहले किसी भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    सरकार ने बढ़ाई निगरानी
    चीनी की सप्लाई को लेकर सरकार काफी सतर्क हो गई है। केंद्र और राज्यों की सरकारों की नजर चीनी के भंडारण पर बनी हुई है। इसके अलावा चीनी की जमाखोरी या कीमतों में हेरा-फेरी करने पर भी सरकार की तरफ से चेतावनी दी गई है। बता दें, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश में चीनी की कोई भी किल्लत नहीं है।

    क्या एथेनॉल की वजह से बढ़े चीनी के दाम
    ISMA का कहना है कि अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक कुल 1200 करोड़ लीटर एथेनॉल का प्रोडक्शन हुआ है। इसमें सिर्फ 290 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन गन्ने से हुआ है।

  • सबसे सस्ती Pulsar हुई लॉन्च! Bajaj Pulsar 125 में मिले दमदार इंजन और नए फीचर्स

    सबसे सस्ती Pulsar हुई लॉन्च! Bajaj Pulsar 125 में मिले दमदार इंजन और नए फीचर्स

     नई दिल्ली
    Bajaj Pulsar 125 Price & Features: भारतीय बाजार में 125 सीसी बाइक खरीदने वालों के लिए Bajaj Auto ने बड़ा दांव खेला है. कंपनी ने नई जनरेशन की Bajaj Pulsar 125 को लॉन्च कर दिया है. इस बार बाइक को सिर्फ नया लुक देने के बजाय इंजन से लेकर सस्पेंशन, ब्रेक और डिजिटल फीचर्स तक में बड़े बदलाव किए गए हैं. खास बात यह है कि अब Pulsar 125 में TFT स्क्रीन, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और Google Maps जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. इसकी कीमत 92,900 रुपये से शुरू होकर 1.04 लाख रुपये तक जाती है। 

    नई Pulsar 125 में कंपनी ने 124.58 सीसी की क्षमता का सिंगल सिलिंडर इंजन दिया है. जो 12.1bhp की दमदार पावर और 11.4Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. पुराने मॉडल में 124.38cc इंजन मिलता था, जो 11.8bhp की पावर और 10.8Nm का टॉर्क देता था. यानी नई बाइक में पावर और टॉर्क दोनों में मामूली बढ़ोतरी हुई है. इंजन के साथ पहले की तरह 5-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया है. हालांकि, कंपनी की स्पेसिफिकेशन शीट में गियरबॉक्स में किसी बदलाव की जानकारी नहीं दी गई है। 

    अब मिलेगी डिजिटल और TFT स्क्रीन

    नई Pulsar 125 में सबसे बड़ा बदलाव इसके इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में देखने को मिलता है. बाइक के अलग-अलग वेरिएंट में 4.8-इंच का पूरी तरह डिजिटल LCD डिस्प्ले या 5-इंच का बड़ा TFT डिस्प्ले दिया गया है. TFT वाले वेरिएंट में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी मिलती है. वहीं सबसे महंगे वेरिएंट में Wi-Fi कनेक्टिविटी, Google Maps इंटीग्रेशन और स्क्रीन मिररिंग जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं. पुराने मॉडल में एनालॉग-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता था, इसलिए नई बाइक तकनीक के मामले में काफी आगे निकल गई है। 

    नई पल्सर में USB Type-C चार्जिंग पोर्ट भी दिया गया है. हालांकि, LCD डिस्प्ले वाले वेरिएंट में यह फीचर ऑप्शन के तौर पर उपलब्ध है. इससे रोजाना बाइक चलाने वाले लोगों के लिए मोबाइल चार्ज करना ज्यादा आसान हो जाएगा। 

    सस्पेंशन में बड़ा बदलाव
    कंपनी ने नई Pulsar 125 के सस्पेंशन सेटअप में भी बदलाव किया है. अब बाइक के आगे 31 मिमी टेलिस्कोपिक फोर्क दिया गया है, जिसमें 125 मिमी का ट्रैवल मिलता है. पुराने मॉडल में 30 मिमी फोर्क और 135 मिमी ट्रैवल दिया गया था. सबसे बड़ा बदलाव पीछे की तरफ हुआ है. नई बाइक में ट्विन शॉक एब्जॉर्बर की जगह मोनोशॉक सस्पेंशन दिया गया है, जिसका ट्रैवल 110 मिमी है. पुराने मॉडल में ट्विन शॉक सेटअप के साथ 102 मिमी का ट्रैवल मिलता था. यानी सस्पेंशन के मामले में बाइक और भी शानदार हो गई है। 

    ब्रेकिंग सिस्टम को भी पहले से बेहतर किया गया है. नई Pulsar 125 में फ्रंट डिस्क की साइज 240 मिमी से बढ़ाकर 260 मिमी कर दी गई है. इसके अलावा पीछे की तरफ पहले की ही तरह 130 मिमी का ड्रम ब्रेक मिलता है. बाइक में कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम यानी CBS भी दिया गया है. जो तेज रफ्तार में भी बैलेंस्ड ब्रेकिंग प्रदान करता है। 

    LED लाइटिंग के साथ कई नए फीचर्स
    नई जनरेशन Pulsar 125 में LED हेडलैंप के साथ पायलट लैंप और LED टेल लैंप दिया गया है. वेरिएंट के हिसाब से इसमें हैजर्ड लाइट और बेली पैन जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. हायर वेरिएंट में डबल हॉर्न दिया गया है, जबकि बेस वेरिएंट में सिंगल हॉर्न मिलता है. बाइक में इलेक्ट्रिक स्टार्टर के साथ किक-स्टार्ट की सुविधा भी दी गई है। 

    Bajaj Pulsar 125 के सभी वेरिएंट की कीमत

    मॉडल  वेरिएंट कीमत (एक्स-शोरूम)
    Pulsar 125 सिंगल सीट LCD  92,900
    Pulsar 125 स्प्लिट सीट LCD 94,518
    Pulsar 125 सिंगल सीट TFT 99,291
    Pulsar 125 स्प्लिट सीट TFT 1,00,288
    Pulsar 125 स्प्लिट सीट TFT + कनेक्टेड फीचर्स 1,04,318

    नई Pulsar 125 को सिंगल सीट और स्प्लिट सीट के आधार पर कई अलग-अलग वेरिएंट में पेश किया गया है. इसके बेस वेरिएंट यानी सिंगल सीट और LCD वाले वेरिएंट की कीमत 92,900 रुपये है. वहीं स्प्लिट सीट और LCD वेरिएंट की कीमत 94,518 रुपये रखी गई है. सिंगल सीट और TFT वेरिएंट 99,291 रुपये में आता है. स्प्लिट सीट और TFT वेरिएंट की कीमत 1,00,288 रुपये है. सबसे ऊपर स्प्लिट सीट, TFT और कनेक्टेड फीचर्स वाले वेरिएंट की कीमत 1,04,318 रुपये है.

    पुराने मॉडल से काफी महंगी हुई बाइक

    नई Pulsar 125 की शुरुआती कीमत पुराने मॉडल के मुकाबले काफी ज्यादा है. पुराने Pulsar 125 की सिंगल सीट वाले वेरिएंट की कीमत 81,556 रुपये से शुरू होती थी. यानी नई जनरेशन मॉडल के लिए ग्राहकों को ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. इसके बदले Bajaj ने बाइक में ज्यादा पावर, मोनोशॉक सस्पेंशन, बड़ा फ्रंट डिस्क ब्रेक और कनेक्टेड TFT इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर जैसे कई बड़े अपग्रेड दिए हैं.

     

     

     

  • Onion Price Today: प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट, कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आम जनता परेशान

    Onion Price Today: प्याज ने बिगाड़ा रसोई का बजट, कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आम जनता परेशान

     नई दिल्ली

    एक ओर जहां त्योहारी सीजन से पहले चीनी लगातार महंगी (Sugar Price Hike) हो रही है और इसे लेकर राजनीतिक घमासान भी देखने को मिल रहा है. तो वहीं दूसरी ओर प्याज भी चीनी की चाल चलती नजर आ रही है और लोगों के आंसू निकाल रही है. जी हां, प्याज की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी (Onion Price Hike) हुई है. रिटेल मार्केट में एक किलो प्याज की कीमत 60-65 रुपये तक पहुंच गई है, जो 30-35 रुपये प्रति किलोग्राम पर मिल रही थी। 

    दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में प्याज महंगी
    आलू, प्याज, टमाटर ऐसी सब्जी हैं, जो आमतौर पर रोजाना रसोई में इस्तेमाल होती हैं और इनकी कीमतों में बढ़ोतरी रसोई का बजट गड़बड़ाने की वजह बनती हैं. ऐसा ही कुछ इस समय देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट्स की मानें, तो दिल्ली-NCR, नासिक से लेकर चेन्नई तक Onion Price Hike का झटका लगा है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, प्याज का औसत रिटेल प्राइस करीब 42 रुपये प्रति किलो रहा, जो महीनेभर पहले की तुलना में करीब 19-20 फीसदी अधिक है। 

    दिल्ली-एनसीआर के सब्जी मार्केट्स में प्याज 60-65 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है. नासिक में एक महीने में ही प्याज की कीमत में करीब 70 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया है. प्याज की कीमतों में अचानक आए तेज उछाल को देखते हुए सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज जारी करने की तैयारी कर रही है, जिससे उस शहरों में प्याज की सप्लाई की जा सके, जिनमें इसकी कमी के चलते दाम तेजी से बढ़े हैं। 

    हालांकि, सरकार का कहना है कि प्याज का देश में उत्पादन पिछले वर्ष के लगभग बराबर है और पर्याप्त स्टॉक आने वाले महीनों में घरेलू डिमांड को पूरा करने की स्थिति में है. सरकार की ओर से साफ किया गया कि अगस्त-सितंबर महीने में आमतौर पर प्याज की कीमतों में उछाल देखने को मिलता है, इसका कारण मौसम और सप्लाई चेन से जुड़ी परिस्थितियां है। 

    चीनी ने कम कर दी त्योहारी मिठास
    प्याज की कीमतों में ये ताबड़तोड़ तेजी ऐसे समय में देखने को मिल रही है, जबकि पहले से ही चीनी की कीमतों ने त्योहारी मिठास को कम करने का काम किया है. बता दें देश में Sugar Price Hike हुआ है और कुछ ही दिनों में ये चीनी रिटेल मार्केट कीमत 65 रुपये प्रति किलो या इससे ज्यादा हो गई है. महीनेभर में भाव में 15 फीसदी के आसपास उछाल आया है। 

    चीनी पर राजनीतिक घमासान
    चीनी की कीमत को लेकर भारत में राजनीतिक गलियारों में घमासान देखने को मिल रहा है. विपक्ष को चीनी के रूप में सरकार पर निशाना साधने का बड़ा मुद्दा हाथ लगा है और उसके द्वारा आरोप लगाया गया है कि इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल करने से देश में चीनी की सप्लाई कम हो रही है, जिससे Sugar Price Hike देखने को मिला है. हालांकि, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि देश में कोई कमी नहीं है और न ही इसकी कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे इथेनॉल वजह है। 

    इंडियन शुगर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन नीरज शिरगांवकर ने भी कहा है कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है, मौजूदा स्टॉक पर्याप्त है. बाजार की शॉर्ट टर्म सेंटीमेंट से जुड़ी चिंताओं को दूर किया जाएगा. Sugar Price Hike के पीछे मौसम के कारण गन्ने की कम पैदावार, महाराष्ट्र में अधिक क्रशिंग दर और यूपी में किस्मों से जुड़ी समस्याएं हैं. इसके साथ ही त्योहारी सीजन के कारण डिमांड भी तेज हो रही है।  

  • Silver Price Today: रिकॉर्ड स्तर से फिसली चांदी, कीमत में बड़ी गिरावट; सोने के ताजा भाव भी जानें

    Silver Price Today: रिकॉर्ड स्तर से फिसली चांदी, कीमत में बड़ी गिरावट; सोने के ताजा भाव भी जानें

    मुंबई 

    सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को खुलने के साथ ही बड़ा बदलाव देखने को मिला है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी की वायदा कीमत में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली है और ये कीमती धातु ओपनिंग के साथ गिरकर 2.44 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. सिर्फ Silver Price ही नहीं, बल्कि सोने की कीमत में भी चेंज देखने को मिला है। 

    चांदी झटके में हुई इतनी सस्ती 
    एमसीएक्स पर चांदी की कीमत में हफ्ते के पहले कारोबारी दिन आए बदलाव पर नजर डालें, तो 4 सितंबर की एक्सपायरी वाली Silver वायदा कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही फिसलकर 2,44,815 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जबकि बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को ये 2,46,597 रुपये पर क्लोज हुई थी. इस हिसाब से कैलकुलशन करें, तो 1 Kg Silver Price 1782 रुपये कम हो गया है।  
     
    अपने हाई से अब इतना सस्ती Silver 
    MCX Silver Price में देखने को मिली इस ताजा गिरावट के साथ अब चांदी अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से और भी ज्यादा सस्ती हो गई है. इस साल जनवरी महीने में सिल्वर प्राइस पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर के पार निकला था और वायदा कारोबार में 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का हाई लेवल छुआ था. यहां से वर्तमान भाव की तुलना करें, तो चांदी  1,75,233 रुपये प्रति किलो सस्ती (Silver Cheaper) मिल रही है। 

    Gold Rate में आया ये चेंज 
    चांदी की कीमत में गिरावट के बीच अगर बात करें, सोने के भाव में आए बदलाव के बारे में तो, MCX Gold Rate चढ़ा है. बीते शुक्रवार को वायदा कारोबार में 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,62,438 रुपये पर क्लोज हुआ था, लेकिन सोमवार को जैसे ही एमसीएक्स पर कारोबार की शुरुआत हुई, ये कीमती पीली धातु उछलकर 1,63,116 रुपये पर पहुंच गया. इस हिसाब से सोना एक झटके में 678 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हुआ है। 

    अगस्त में अब तक सोना 
    सोने की कीमत में इस अगस्त म
    हीने में जबर्दस्त बदलाव आया है और इसकी कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया है. दरअसल, बीते महीने के आखिरी कारोबारी दिन यानी 31 जुलाई को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 1,43,376 रुपये पर बंद हुआ था और सोमवार को ओपनिंग रेट 1,63,116 से तुलना करें, तो Yellow Metal Price 19,740 रुपये बढ़ गया है। 

  • चीनी संकट से जूझ रही दुनिया! ब्राजील की परेशानी और मौसम ने बिगाड़ा ग्लोबल सप्लाई का गणित

    चीनी संकट से जूझ रही दुनिया! ब्राजील की परेशानी और मौसम ने बिगाड़ा ग्लोबल सप्लाई का गणित

     नई दिल्‍ली

    भारत में त्योहारों के मौसम शुरू होने के पहले ही चीनी की बढ़ती कीमतों से जायका कड़वा हो रहा है. सरकार कह रही है की इथेनॉल की वजह से चीनी के दाम में कोई इजाफा नहीं हो रहा है, लेकिन फिर भी चीनी की दिक्‍कत आई है. जिस कारण दुनिया को चीनी का एक्‍सपोर्ट करने वाला देश, अब चीनी आयात करने जा रहा है। 

    सरकार के मुताबिक, वर्तमान में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन के कारण हुई है. इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी कारणों से गन्ने की फसल को नुकसान, ग्‍लोबल स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं। 

    वर्तमान सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की उम्मीद है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों द्वारा शुरुआती अनुमान लगभग 343 LMT लगाया गया था. गन्ने की फसल रेड रॉट (लाल सड़न) और टॉप बोरर रोग से प्रभावित हुई है. इसके अलावा, समय से पहले ज्‍यादा बारिश के कारण हुए जलभराव ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि सरकार का दावा है कि उत्पादन अनुमान से कम होने के बावजूद, देश में पर्याप्त चीनी का भंडार उपलब्ध है, जो अक्टूबर में नए पेराई सीजन के शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। 

    पूरी दुनिया में चीनी की कीमत बढ़ रही
    लेकिन चीनी की कीमतों में उछाल सिर्फ़ भारत में नहीं है. चीनी की संकट अब पूरी दुनिया पर दिखाई दे रही है. दुनिया में गन्ने की सबसे ज्‍यादा खेती करने वाले ब्राज़ील में भी चीनी की संकट गहरा रही है. US डिपॉर्टमेंट ऑफ फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस के डेटा के मुताबिक, ब्राज़ील दुनिया के 24% गन्ना उत्पादन करता है, जिसके बाद भारत 16%  गन्ना उत्पादन करता है। 

    ब्राजील इथेनॉल में बढ़ा रहा उत्‍पादन
    ब्राज़ील अपनी गन्ने को इथेनॉल उत्पादन
    की तरह मोड़ रहा है, जिसके चलते ब्राजील में भी चीनी की संकट खड़ी हो चुकी है. ब्राज़ील की नेशनल सप्लाई कंपनी कोनाब के मुताबिक, चीनी के उत्पादन में लगभग 3% कटौती हो सकती है यानी इस साल ब्राज़ील में चीनी का उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन कम रहने का अनुमान है. वहीं दूसरी वजह एलनीनो को लेकर है, जिसकी वजह से ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्से में बरसात में देरी और तापमान में बढ़ोतरी की वजह से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है. यानी पूरी दुनिया को चीनी निर्यात करने वाले ब्राज़ील में किसानों का इथेनॉल की ओर रुख करना वर्ल्ड शुगर सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है। 

    मौसम बिगाड़ रहा खेल
    वहीं बाकी देशों में मौसम की वजह से चीनी की कीमतों में उछाल आने की संभावना है. वेलोर इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सक्रिय एल नीनो के चलते चीनी उत्पादन वाले क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है. मौसम का बदलाव भारत और थाइलैंड जैसे गन्ना उत्पादन रीजन में प्रभाव डाल रहा है. दुनिया में कुल गन्ना उत्पादन के 6% गन्ना पैदा करने वाले थाईलैंड में अगले सप्ताह से मौसम का निगेटिव असर होगा. एलनीनो की वजह से बरसात में कमी की अशंका जताई गई है। 

    अमेरिकी कमोडिटी बाज़ार के मुताबिक़, अमेरिकी चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर कारोबार कर रही हैं और मई 2025 के बाद के अपने उच्चतम स्तर के करीब बनी हुई हैं.वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति और अधिक सीमित होने की संभावनाओं के कारण बाजार को सपोर्ट मिल रहा है. इसके अलावा, दशकों के सबसे मजबूत अल नीनो ने उत्पादन संबंधी जोखिमों को बढ़ा दिया है. विश्लेषकों ने 2026/27 में वैश्विक चीनी की कमी के अपने अनुमानों को बढ़ाया है. गन्ने और चुकंदर की कम बुवाई के कारण 2027/28 में यह कमी और भी बढ़ने की संभावना है। 

    क्‍यों इथेनॉल की ओर बढ़ रहा ब्राजील? 
    भारत, यूरोपीय संघ (EU) और थाईलैंड को प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में माना जा रहा है. इसी बीच, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ब्राजील जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में गन्ने को चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने को प्रोत्साहित कर रही हैं. ब्राजील ने जुलाई के अंत में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर को बढ़ाकर 32% कर दिया, जो एक महीने पहले 30% और एक साल पहले 27% थी. इससे चीनी की उपलब्धता में और कमी आ सकती है. इससे वैश्विक बाजार में चीनी की मांग पर दबाव और बढ़ सकता है। 

  • Gold Price Today: सोना ₹19 हजार और चांदी ₹10,673 चढ़ी, क्या जल्द ₹1.80 लाख पार करेगा गोल्ड?

    Gold Price Today: सोना ₹19 हजार और चांदी ₹10,673 चढ़ी, क्या जल्द ₹1.80 लाख पार करेगा गोल्ड?

    इंदौर 
    एमसीएक्स गोल्ड की कीमतों में इस महीने अबतक 19000 रुपये की तेजी देखने को मिली है। सोने का दाम मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में लगातार पांचवें हफ्ते बढ़ा है। कीमतों में उछाल के पीछे की वजह यूएस डॉलर के दाम का कम होना है। जिसकी वजह से निवेशकों का ध्यान सोने की तरफ बढ़ा है। यही वजह है सोने के दाम बढ़े हैं। बता दें, इस हफ्ते भले ही क्रूड ऑयल का दाम बढ़ा हो। लेकिन इसके बाद भी अमेरिकी फेड रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम है। इस माहौल ने भी सोने के दाम में बढ़ोतरी में सहयोग किया है।

    सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रही है। शुक्रवार को चांदी का रेट 10673 रुपये की उछाल के बाद 248124 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया था।

    एक्सपर्ट्स का क्या कहना है (Gold Outlook)
    एनरिच मनी के सीईओ पॉनमुडी आर का कहना है कि मौजूदा समय में गोल्ड के लिए 162500 रुपये से 163000 रुपये का जोन रुकावट भरा है। अगर गोल्ड का रेट 163000 रुपये के करीब जाने में सफल रहा तो यह निश्चित तौर पर 165000 रुपये तक जाएगा।

    1 हफ्ते में 8000 रुपये बढ़ा दाम (Gold Rates today)
    एमसीएक्स गोल्ड का रेट पिछले एक हफ्ते में 8000 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ा है। जिसके बाद मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का दाम 162438 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। अगस्त में गोल्ड की कीमतों में 13.30 प्रतिशत या फिर 19000 रुपय प्रति दस ग्राम बढ़ गया है। बता दें, 2026 में सोने की कीमतों में अबतक 20 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली है।

    हालिया तेजी की वजह से गोल्ड ने गिरावट के दौरान हुए नुकसान को रिकवर कर लिया है। एक बार फिर से दाम रिकॉर्ड हाई 180779 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के करीब पहुंच गया है। मौजूदा समय में रिकॉर्ड हाई की तुलना में सोने का दाम अपने उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत कम है। इस महीने की शुरुआत में रिकॉर्ड की तुलना में गोल्ड 21 प्रतिशत सस्ता था।

    तीन महीने के न्यूनतम स्तर पर डॉलर
    गोल्ड के लिए अच्छी बात यह है डॉलर का दाम लगातार कम हुआ है। यूएस डॉलर का मौजूदा रेट इस समय तीन महीने के न्यूनतम स्तर के करीब है। पिछले हफ्ते बुधवार को कीमतें काफी नीचे चली गई थी। इसके अलावा गवर्नमेंट बायबैक की काफी पुरानी योजना पर यूएस ट्रेजरी का आगे बढ़ने का प्लान है। अगर ऐसा हुआ तो डॉलर पर दबाव बढ़ेगा। जोकि गोल्ड की तेजी के लिए मुफीद रहेगा।

     

  • EPF क्यों माना जाता है रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित विकल्प? शेयर बाजार से तुलना में जानें 6 फायदे

    EPF क्यों माना जाता है रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित विकल्प? शेयर बाजार से तुलना में जानें 6 फायदे

    नई दिल्ली
    नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा सबसे बड़ी चिंताओं में से एक होती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि भविष्य के लिए पैसा EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि में जमा करना बेहतर है या शेयर बाजार में निवेश करना। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और जोखिम हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है। EPF को मुख्य रूप से लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए बनाया गया है, जबकि शेयर बाजार में निवेश का लक्ष्य बाजार की तेजी का फायदा उठाकर ज्यादा रिटर्न कमाना हो सकता है। हालांकि, शेयर बाजार में रिटर्न अधिक मिलने की संभावना रहती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी होता है। EPFO ने अपने आधिकारिक वीडियो में EPF और इक्विटी निवेश की तुलना करते हुए बताया है कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए EPF किस तरह अधिक स्थिर और सुरक्षित विकल्प बनता है।

    पहला कारण—EPF में नियमित योगदान:- EPFO के मुताबिक, जिन संस्थानों पर EPF कानून लागू होता है और पात्र कर्मचारियों की बेसिक सैलरी निर्धारित सीमा के भीतर है, वहां EPF में योगदान नियमों के तहत किया जाता है। हर महीने कर्मचारी के वेतन से एक हिस्सा EPF में जाता है और नियोक्ता भी निर्धारित योगदान करता है। इसके विपरीत शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह स्वैच्छिक है। निवेशक अपनी इच्छा और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार पैसा लगाता है और जरूरत के मुताबिक निवेश को बेच सकता है।

    दूसरा कारण—नियोक्ता का योगदान:- EPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ कर्मचारी का पैसा नहीं लगता, बल्कि नियोक्ता भी निर्धारित नियमों के अनुसार योगदान करता है, यानी कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड को बनाने में कंपनी की तरफ से भी पैसा जुड़ता है। शेयर बाजार में ऐसा कोई अतिरिक्त नियोक्ता योगदान नहीं मिलता। वहां निवेश की पूरी रकम निवेशक की अपनी होती है।

    तीसरा कारण—स्थिरता:- EPF में हर महीने नियमित बचत होती है और इस पर सरकार द्वारा घोषित ब्याज दर लागू होती है। इससे लंबी अवधि में एक व्यवस्थित रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करने में मदद मिलती है। दूसरी तरफ शेयर बाजार का रिटर्न कंपनियों के प्रदर्शन, अर्थव्यवस्था और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। बाजार बढ़ने पर अच्छा मुनाफा हो सकता है, लेकिन गिरावट आने पर निवेश का मूल्य भी कम हो सकता है।

    चौथा कारण—टैक्स, पेंशन और बीमा:- EPFO के अनुसार EPF से जुड़े नियमों के तहत पात्र मामलों में योगदान, ब्याज और निकासी पर टैक्स लाभ मिल सकते हैं। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों को EPS (Employees’ Pension Scheme) के जरिए पेंशन का लाभ भी मिल सकता है। EDLI योजना के तहत बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होती है। शेयर बाजार में निवेश करने पर इस तरह की सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिलतीं और शेयर बेचकर हुए मुनाफे पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है।

    5वां कारण—रिटायरमेंट के लिए भरोसेमंद विकल्प:- EPF केंद्र सरकार द्वारा संचालित और विनियमित व्यवस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के लिए लंबे समय में सुरक्षित फंड तैयार करना है। शेयर बाजार नियामकीय ढांचे के तहत काम करता है, लेकिन इसमें कीमतों का जोखिम बना रहता है। इसलिए रिटायरमेंट जैसे लंबे लक्ष्य के लिए EPF एक स्थिर आधार प्रदान कर सकता है।

    छठा कारण—दोनों का उद्देश्य अलग:- EPFO के मुताबिक EPF का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता उपलब्ध कराना है, जबकि शेयर बाजार में निवेश अधिक जोखिम लेने की क्षमता और संभावित रिटर्न पर आधारित होता है। इसलिए दोनों को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय अलग-अलग उद्देश्यों के लिए समझना जरूरी है। EPF सुरक्षित रिटायरमेंट कॉर्पस की नींव बन सकता है, जबकि जोखिम सहने की क्षमता रखने वाले निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार शेयर बाजार को अतिरिक्त निवेश विकल्प के तौर पर देख सकते हैं।